मुंबई BMC Mayor को लेकर BJP और शिंदे सेना आमने-सामने हैं। शिंदे ने सवा साल के power-sharing फॉर्मूले का दावा किया, BJP ने अनभिज्ञता जताई। जानें पूरा नंबर गेम।
मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका यानी BMC में सत्ता संभाल रही BJP और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के बीच Mayor पद को लेकर नया सियासी ट्विस्ट सामने आया है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने दावा किया है कि BJP और शिवसेना के बीच Mayor पद को लेकर power-sharing का फॉर्मूला पहले ही तय हो चुका है। इसके मुताबिक मौजूदा BJP Mayor ऋतु तावड़े अपने ढाई साल का कार्यकाल पूरा करेंगी। इसके बाद अगले ढाई साल में पहले सवा साल शिवसेना का Mayor और आखिरी सवा साल फिर BJP का Mayor रहेगा।
लेकिन शिंदे के इस दावे के बाद कहानी और दिलचस्प हो गई। BJP के वरिष्ठ नेता और मंत्री आशीष शेलार ने कहा कि उन्हें ऐसी किसी सहमति की जानकारी नहीं है। Mayor ऋतु तावड़े और BMC में BJP के गुटनेता गणेश खणकर ने भी कहा कि ऐसे बड़े फैसले senior leadership के स्तर पर ही लिए जाएंगे। यानी एक तरफ शिंदे इस फॉर्मूले को तय हुआ बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ BJP के कई बड़े चेहरे इससे अनजान नजर आ रहे हैं।
आखिर सवा साल का ये Mayor Formula है क्या?
BMC में अभी BJP की रितु तावड़े Mayor हैं। मौजूदा व्यवस्था के मुताबिक उनका शुरुआती ढाई साल का कार्यकाल BJP के हिस्से में है। शिंदे के दावे के अनुसार इसके बाद अगले ढाई साल को दो हिस्सों में बांटा जाएगा।
| अवधि | Mayor का दावा किया गया फॉर्मूला |
|---|---|
| पहला ढाई साल | BJP |
| अगला सवा साल | शिंदे सेना |
| आखिरी सवा साल | BJP |
यानी पांच साल के पूरे कार्यकाल में BJP को कुल साढ़े तीन साल और शिंदे सेना को सवा साल Mayor पद मिलने की बात सामने आई है। यह वही फॉर्मूला है जिसकी चर्चा BMC चुनाव के बाद से राजनीतिक गलियारों में चलती रही है और फरवरी में भी शिंदे सेना ने कम से कम सवा साल के Mayor पद की मांग रखी थी।
लेकिन क्या सवा साल का Mayor कानून में लिखा है?
यहां सबसे जरूरी बात समझना जरूरी है। सवा साल का power-sharing फॉर्मूला BMC Act में लिखा हुआ कोई अलग कानूनी प्रावधान नहीं है। यह BJP और शिंदे सेना के बीच कथित political understanding है।
Mayor का चुनाव BMC के councillors में से होता है और Mayor का सामान्य कार्यकाल ढाई साल का होता है। इसलिए अगर राजनीतिक तौर पर सवा साल के rotation पर सहमति है, तो उस समय की कानूनी प्रक्रिया और लागू reservation व्यवस्था के मुताबिक नया Mayor चुनना होगा।
यानी आज शिंदे सेना का दावा सामने आने का मतलब यह नहीं है कि 2028 में उसका Mayor अपने आप बन जाएगा। उस समय चुनाव की प्रक्रिया, House का समीकरण और लागू reservation rules भी अहम होंगे।
BJP ने फॉर्मूले से किनारा किया तो मामला क्यों गंभीर है?
क्योंकि BMC में BJP सबसे बड़ी पार्टी है। जनवरी 2026 के चुनाव में BJP को 89 और शिंदे सेना को 29 सीटें मिली थीं। दोनों मिलकर 118 पर पहुंचते हैं, जबकि 227 सदस्यीय सदन में सामान्य बहुमत का आंकड़ा 114 है।
यानी चुनावी नतीजों के हिसाब से Mahayuti के पास बहुमत से चार सीट ज्यादा थीं। हालांकि पांच पार्षदों के OBC certificate से जुड़े मामलों में अयोग्यता के बाद House की effective strength बदलने की प्रक्रिया भी चल रही है। नए पार्षद आने के बाद Mahayuti की संख्या बढ़ने की संभावना बताई गई है।
इस नंबर गेम का सीधा मतलब है कि BJP सबसे बड़ी पार्टी जरूर है, लेकिन BMC में Mahayuti की सत्ता के लिए शिंदे सेना का 29 पार्षदों वाला bloc राजनीतिक तौर पर काफी अहम है।
शिंदे सेना को Mayor पद की जरूरत क्यों?
यही इस पूरे विवाद का असली राजनीतिक angle है।
BMC लंबे समय तक मुंबई की Shiv Sena politics का सबसे बड़ा गढ़ रहा है। अब BJP सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई है और शिंदे सेना भी सत्ता में साझेदार है। ऐसे में अगर शिंदे सेना को पांच साल के कार्यकाल में सवा साल Mayor मिलता है, तो उसे Mumbai politics में अपनी स्वतंत्र political identity मजबूत करने का बड़ा मौका मिलेगा।
यह सिर्फ Mayor की कुर्सी का सवाल नहीं है। यह संदेश भी होगा कि BMC में BJP सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद Shinde Sena alliance में एक महत्वपूर्ण stakeholder है।
असली ताकत सिर्फ Mayor की कुर्सी में नहीं है
BMC की सत्ता को समझने के लिए Mayor के साथ committees का खेल भी समझना जरूरी है।
BMC में Standing, Improvement, Education और BEST जैसी चार बड़ी statutory committees हैं। इनमें Standing Committee को सबसे अहम माना जाता है क्योंकि बड़े financial और civic infrastructure decisions में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। फरवरी में BJP के पास Standing और Education committees की chairmanship गई, जबकि शिंदे सेना को Improvement और BEST committees मिलीं।
यानी BJP और शिंदे सेना के बीच power-sharing की तस्वीर पहले से सिर्फ Mayor तक सीमित नहीं रही है।
इसीलिए अमेय घोले का यह दावा भी महत्वपूर्ण है कि committees का बंटवारा पहले से तय योजना के मुताबिक हुआ था। हालांकि BJP की तरफ से इस कथित overall formula पर सहमति की पुष्टि नहीं हुई है।
BMC में एक और दिलचस्प power equation
फरवरी में शिंदे सेना के 29 पार्षदों और NCP के दोनों गुटों के कुल चार पार्षदों ने BMC में एक bloc के तौर पर registration किया था। इससे committee-level arithmetic में भी उनकी bargaining position मजबूत हुई।
इससे साफ है कि BMC में political parties सिर्फ Mayor पद पर निर्भर नहीं हैं। Committee positions, financial decisions और local civic work में influence भी सत्ता का बड़ा हिस्सा हैं।
BJP और शिंदे सेना के बीच तनाव के संकेत पहले भी मिले
Mayor Formula पर विवाद अचानक सामने नहीं आया है। BMC में Deputy Mayor संजय घाड़ी को लेकर BJP और शिंदे सेना के बीच पहले भी मतभेद सामने आ चुके हैं।
Mumbai Clean League के एक कार्यक्रम में घाड़ी ने protocol को लेकर आपत्ति जताई थी। Mayor की गैरमौजूदगी में उन्हें मंच पर चौथे स्थान पर रखे जाने पर सवाल उठे और अमेय घोले ने BMC से apology की मांग की थी।
इसके बाद नालों की सफाई के inspection को लेकर भी घाड़ी ने कहा था कि उन्हें साथ नहीं लिया गया। यानी मामला सिर्फ एक पद या एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा है।
घाड़ी ने BMC के ‘Nisarg’ bungalow की मांग भी की थी। BJP और Mayor ने इस मांग का समर्थन किया था, लेकिन बाद में bungalow Additional Municipal Commissioner अविनाश धाकने को allot हो गया।
अब कहानी में आया Operation Tiger
BMC की राजनीति में एक और factor शिंदे सेना के लिए अहम हो सकता है—Operation Tiger।
इस अभियान के जरिए शिवसेना UBT के करीब 45 पार्षदों को अपने साथ लाने की चर्चा पहले से चल रही है। 45 का आंकड़ा political target या reported claim के तौर पर सामने आया है, इसे अभी 45 पार्षदों के पाला बदलने की confirmed खबर नहीं माना जा सकता।
अगर आने वाले समय में UBT के कुछ पार्षद शिंदे सेना के साथ जाते हैं, तो BMC में शिंदे सेना की numerical और political bargaining power बढ़ सकती है।
यही वजह है कि Mayor Formula और Operation Tiger को अलग-अलग घटनाओं की तरह देखना मुश्किल है। एक तरफ शिंदे सेना Mayor पद में अपना हिस्सा मांग रही है, दूसरी तरफ उसका संगठनात्मक प्रभाव बढ़ाने की कोशिशों की चर्चा है।
BJP के सामने भी बड़ा political dilemma
यहां BJP के सामने एक दिलचस्प स्थिति बनती है।
अगर BJP UBT को कमजोर करने के लिए Operation Tiger को राजनीतिक तौर पर बढ़ावा देती है, तो उसका फायदा शिंदे सेना को भी मिल सकता है। शिंदे सेना की संख्या और influence बढ़ा तो आगे Mayor, committees और BMC के दूसरे फैसलों में उसकी bargaining power भी बढ़ सकती है।
दूसरी तरफ अगर BJP Mayor पद पूरी तरह अपने पास रखने पर जोर देती है, तो alliance के अंदर power-sharing को लेकर असहजता बढ़ सकती है।
यानी BJP के लिए सवाल सिर्फ यह नहीं है कि Mayor किस पार्टी का होगा। सवाल यह भी है कि Mumbai BMC में alliance का power balance कितना BJP-centric और कितना shared रहेगा।
UBT के लिए भी बड़ा खतरा
BMC में BJP के बाद UBT शिवसेना सबसे बड़ी opposition force है। ऐसे में अगर Operation Tiger के जरिए UBT के पार्षद टूटते हैं, तो उसका असर सिर्फ BMC की संख्या पर नहीं बल्कि ठाकरे परिवार की Mumbai political base पर भी पड़ सकता है।
BMC लंबे समय से Thackeray-led Shiv Sena की Mumbai politics का सबसे बड़ा political symbol रहा है। अब BJP के सत्ता में आने के बाद Shinde Sena अगर UBT के पार्षदों को अपने साथ जोड़ती है, तो आने वाले समय में यह सवाल और बड़ा होगा कि Mumbai में Shiv Sena की political legacy का असली वारिस कौन है।
Mayor की कुर्सी से आगे क्या बदलेगा?
अगर शिंदे सेना का सवा साल वाला दावा आगे चलकर औपचारिक political agreement के रूप में सामने आता है, तो Mumbai की politics में तीन बड़े असर दिख सकते हैं।
पहला, शिंदे सेना को BMC में अपनी अलग पहचान मजबूत करने का मौका मिलेगा।
दूसरा, BJP और शिंदे सेना के बीच alliance के भीतर power-sharing का नया balance बनेगा।
तीसरा, UBT के पार्षदों को अपने साथ लाने की कोशिशें तेज हुईं तो BMC का पूरा number game बदल सकता है।
लेकिन अभी इन तीनों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस agreement का दावा शिंदे कर रहे हैं, क्या BJP leadership भी उसे उसी रूप में स्वीकार करती है?
असली सवाल अब यही है
BMC में BJP के पास सबसे ज्यादा पार्षद हैं। शिंदे सेना के पास संख्या कम है, लेकिन alliance arithmetic में उसकी भूमिका अहम है। Mayor पद का कथित सवा साल का फॉर्मूला इसी bargaining power का संकेत माना जा रहा है।
और इसी वजह से आने वाले समय में सिर्फ यह देखना काफी नहीं होगा कि अगला Mayor कौन बनेगा।
नजर इस बात पर भी रहेगी कि BJP और शिंदे सेना के बीच BMC की बाकी committees, civic projects और political influence का बंटवारा किस तरह होता है।
फिलहाल एक बात साफ है—मुंबई की सबसे बड़ी civic body में Mahayuti की सत्ता कायम है, लेकिन Mayor की कुर्सी ने alliance के अंदर power-sharing का सवाल फिर से सामने ला दिया है। शिंदे का दावा सामने आ चुका है, BJP के कई बड़े नेता इससे अनजान हैं और अब निगाहें senior leadership के अगले फैसले पर टिक गई हैं।
