दिशा सालियान केस में CBI ने FIR दर्ज कर जांच शुरू की। आदित्य ठाकरे, उद्धव ठाकरे, रिया चक्रवर्ती समेत 24 नामों और पुलिस-FSL अधिकारियों की भूमिका की जांच होगी।
मुंबई: दिशा सालियान की मौत के मामले में करीब छह साल बाद बड़ा कानूनी मोड़ आया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI ने 14 सितंबर 2026 को FIR दर्ज कर मामले की जांच अपने हाथ में ले ली है। बॉम्बे हाईकोर्ट के 2 सितंबर 2026 के आदेश के बाद शुरू हुई इस कार्रवाई में हत्या, गैंगरेप, आपराधिक साजिश और कथित तौर पर सबूत दबाने, नष्ट करने या मामले को आत्महत्या का रूप देने जैसे आरोपों की जांच की जा रही है।
इस FIR की सबसे बड़ी बात यह है कि जांच का दायरा सिर्फ बॉलीवुड से जुड़े कुछ नामों तक सीमित नहीं है। इसमें आदित्य ठाकरे, उद्धव ठाकरे, रिया चक्रवर्ती, शोविक चक्रवर्ती, डिनो मोरिया, सूरज पंचोली और रोहन रॉय के साथ पुलिस अधिकारियों, पोस्टमार्टम से जुड़े डॉक्टरों, फोरेंसिक अधिकारियों और मालवणी पुलिस से जुड़े अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई गई है।
CBI FIR में किन-किन लोगों के नाम?
दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान की शिकायत और बाद में CBI के सामने दर्ज बयान के आधार पर सामने आई जानकारी में निम्न नाम और पदों का उल्लेख किया गया है:
1. आदित्य ठाकरे
2. रोहन रॉय
3. डिनो मोरिया
4. सूरज पंचोली
5. आदित्य ठाकरे के बॉडीगार्ड
6. रिया चक्रवर्ती
7. शोविक चक्रवर्ती
8. सचिन वाजे
9. परमबीर सिंह
10. DCP विशाल ठाकुर
11. उद्धव ठाकरे
12. अनिल देशमुख
13. API अशोक देवाड़े
14. PI जगदेव कलापड़
15. PI शैलेंद्र नगरकर
16. PI चिमाजी आढाव
17. PI अर्जुन राजाने
18. मालवणी पुलिस स्टेशन के संबंधित अधिकारी
19. देरी से पोस्टमार्टम से जुड़े डॉक्टर और स्टाफ
20. डॉ. संजय जाधव
21. कालिना स्थित फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी के संबंधित अधिकारी
22. N.P. भाले, Assistant Chemical Analyser
23. तत्कालीन संबंधित PI
24. अन्य पुलिस अधिकारी
इस तरह CBI की जांच का दायरा कथित घटना में मौजूद लोगों से लेकर उस समय की पुलिस जांच और फोरेंसिक प्रक्रिया तक पहुंचता है।

FIR में हत्या, गैंगरेप और कथित साजिश की जांच
CBI FIR में मुख्य आपराधिक आरोपों के साथ criminal conspiracy, कथित तौर पर आत्महत्या की झूठी कहानी तैयार करने और उसे आगे बढ़ाने तथा सबूतों को दबाने, नष्ट करने या उनमें हेरफेर किए जाने के पहलुओं की जांच का उल्लेख है। FIR में सरकारी अधिकारियों और पुलिस मशीनरी की भूमिका से जुड़े आरोपों की भी जांच की जा रही है।
दिशा के पिता सतीश सालियान ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि उनकी बेटी की मौत को जिस तरह पेश किया गया, उसमें गंभीर सवाल हैं। परिवार की ओर से हत्या और गैंगरेप के आरोप भी लगाए गए हैं। CBI अब इन आरोपों के पीछे उपलब्ध साक्ष्यों और घटनाक्रम की स्वतंत्र जांच करेगी।
आदित्य ठाकरे से लेकर रिया चक्रवर्ती तक नाम क्यों महत्वपूर्ण?
इस मामले में आदित्य ठाकरे का नाम सबसे ज्यादा राजनीतिक चर्चा का विषय रहा है। FIR में उनके साथ उनके बॉडीगार्ड्स का भी उल्लेख है।
इसके अलावा रोहन रॉय की भूमिका जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण है क्योंकि दिशा जिस फ्लैट में मौजूद थीं, वह रोहन रॉय से जुड़ा था।
डिनो मोरिया और सूरज पंचोली के नाम भी शिकायत और जांच के संदर्भ में सामने आए हैं। इसी तरह रिया चक्रवर्ती और शोविक चक्रवर्ती के नाम भी FIR में जांच के दायरे में बताए गए हैं।
दिशा के पिता की ओर से CBI को दिए गए बयान में इन नामों के अलावा अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की मांग की गई थी।
सचिन वाजे, परमबीर सिंह और DCP विशाल ठाकुर की भूमिका की भी जांच
FIR का दूसरा बड़ा हिस्सा पुलिस और प्रशासनिक भूमिका से जुड़ा है।
सचिन वाजे, पूर्व मुंबई पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह और DCP विशाल ठाकुर के साथ तत्कालीन पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच का उल्लेख है।
इसके साथ ही API अशोक देवाड़े, PI जगदेव कलापड़, PI शैलेंद्र नगरकर, PI चिमाजी आधव और PI अर्जुन राजाने के नाम भी सामने आए हैं।
मालवणी पुलिस स्टेशन के संबंधित अधिकारियों और तत्कालीन संबंधित PI की भूमिका भी जांच का हिस्सा है।
यह पहलू इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दिशा की मौत के बाद शुरुआती जांच मालवणी पुलिस ने की थी और बाद में मामले में पुलिस की जांच प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठाए गए।
पोस्टमार्टम और FSL अधिकारियों की भूमिका भी जांच में
CBI ने केवल पुलिस कार्रवाई तक जांच सीमित नहीं रखी है। देरी से पोस्टमार्टम से जुड़े डॉक्टर और स्टाफ तथा डॉ. संजय जाधव की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
इसी तरह कालिना स्थित फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी के संबंधित अधिकारियों और N.P. भाले, Assistant Chemical Analyser का नाम भी जांच से जुड़ा बताया गया है।
इसका मतलब है कि CBI अब मेडिकल और फोरेंसिक रिकॉर्ड की भी दोबारा जांच करेगी और यह देखेगी कि घटनास्थल से लेकर पोस्टमार्टम और फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार होने तक पूरी प्रक्रिया में क्या हुआ था।
हाईकोर्ट ने पहले की जांच में उठाए थे गंभीर सवाल
CBI जांच की पृष्ठभूमि में बॉम्बे हाईकोर्ट का 2 सितंबर 2026 का आदेश बेहद महत्वपूर्ण है। अदालत ने पुरानी जांच में कई ऐसी विसंगतियों का उल्लेख किया था जिनके कारण मामले की स्वतंत्र जांच की जरूरत महसूस हुई।
इनमें स्पॉट पंचनामा तैयार करने में देरी, पुलिस की घटनास्थल पर मौजूदगी की टाइमलाइन, ADR दर्ज करने के समय से जुड़े सवाल, CCTV रिकॉर्ड, घटनास्थल से खून के नमूने का मुद्दा, पोस्टमार्टम में दर्ज चोटें, कमरे के दरवाजे को लेकर विरोधाभास, FSL और मेडिकल रिकॉर्ड में अंतर तथा मोबाइल और लैपटॉप की जांच में हुई देरी शामिल थीं।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि करीब छह साल तक चली जांच ने कई सवालों का समाधान करने के बजाय और सवाल खड़े किए। इसी कारण CBI को मामले की स्वतंत्र जांच सौंपने का आदेश दिया गया।
पहले पुलिस और SIT का क्या निष्कर्ष था?
दिशा सालियान की मौत के बाद मुंबई पुलिस ने मामले को ADR के तौर पर दर्ज किया था। बाद की पुलिस जांच और SIT की जांच में मौत को आत्महत्या की दिशा में देखा गया और पुलिस ने foul play के पर्याप्त सबूत नहीं मिलने की बात कही थी।
SIT ने भी पुराने रिकॉर्ड, CCTV, कॉल डिटेल और गवाहों से जुड़ी जानकारी की दोबारा समीक्षा की थी। उसकी रिपोर्ट भी आत्महत्या के पहले के निष्कर्ष से अलग नहीं गई थी।
अब CBI उसी जांच रिकॉर्ड, मेडिकल दस्तावेज, CCTV फुटेज, डिजिटल सामग्री, फोरेंसिक रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों की स्वतंत्र तरीके से जांच करेगी।
दिशा सालियान और सुशांत सिंह राजपूत की मौत का कनेक्शन
दिशा सालियान की मौत 8 जून 2020 को हुई थी और सुशांत सिंह राजपूत की मौत 14 जून 2020 को। दोनों घटनाओं के बीच छह दिन का अंतर होने के कारण दोनों मामलों को लेकर लगातार सवाल उठते रहे।
दिशा के मामले में आदित्य ठाकरे, रिया चक्रवर्ती, शोविक चक्रवर्ती, डिनो मोरिया, सूरज पंचोली, रोहन रॉय और अन्य नामों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं।
अब CBI की जांच में यदि दोनों घटनाओं के बीच कोई प्रमाणित आपराधिक कड़ी सामने आती है तो एजेंसी उस दिशा में भी जांच आगे बढ़ा सकती है। फिलहाल दोनों मामलों की जांच अलग-अलग रही है।
अब CBI की जांच में क्या होगा?
CBI अब पूरे मामले की घटनाक्रम के स्तर पर जांच करेगी। इसमें मुख्य रूप से यह देखा जाएगा कि 8 जून 2020 की रात क्या हुआ, दिशा किन लोगों के संपर्क में थीं, घटनास्थल पर कौन मौजूद था, CCTV और डिजिटल रिकॉर्ड क्या बताते हैं और पहले की पुलिस जांच में सामने आए विरोधाभासों की वास्तविक वजह क्या थी।
इसके साथ ही एजेंसी:
- हत्या के आरोपों की जांच करेगी
- गैंगरेप के आरोपों की जांच करेगी
- कथित आपराधिक साजिश की जांच करेगी
- कथित कवर-अप और सबूत दबाने के आरोपों की जांच करेगी
- पुलिस अधिकारियों की कार्रवाई की जांच करेगी
- पोस्टमार्टम और मेडिकल रिकॉर्ड की जांच करेगी
- FSL और Chemical Analysis से जुड़े रिकॉर्ड की जांच करेगी
- CCTV, मोबाइल, लैपटॉप और अन्य डिजिटल सामग्री की दोबारा जांच करेगी
- FIR में नामित सभी व्यक्तियों की भूमिका को उपलब्ध सबूतों के आधार पर परखेगी
अब छह साल पुराने केस में सामने आएगा असली घटनाक्रम?
दिशा सालियान केस में CBI की FIR ने छह साल पुराने मामले को फिर से जांच के केंद्र में ला दिया है। इस बार जांच का दायरा केवल दिशा की मौत के कारण तक सीमित नहीं है, बल्कि घटना, कथित हत्या और गैंगरेप, आपराधिक साजिश, पुलिस जांच, पोस्टमार्टम, फोरेंसिक प्रक्रिया और कथित कवर-अप तक फैला हुआ है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि FIR में आदित्य ठाकरे, रोहन रॉय, डिनो मोरिया, सूरज पंचोली, आदित्य ठाकरे के बॉडीगार्ड, रिया चक्रवर्ती, शोविक चक्रवर्ती, सचिन वाजे, परमबीर सिंह, DCP विशाल ठाकुर, उद्धव ठाकरे, अनिल देशमुख, API अशोक देवाड़े, PI जगदेव कलापड़, PI शैलेंद्र नगरकर, PI चिमाजी आढाव, PI अर्जुन राजाने, डॉ. संजय जाधव, N.P. भाले और संबंधित पुलिस, मेडिकल, FSL व सुरक्षा अधिकारियों समेत पूरी जांच प्रक्रिया से जुड़े लोगों की भूमिका सामने आई है।
अब CBI की जांच यह तय करेगी कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में से किन आरोपों को उपलब्ध साक्ष्य समर्थन देते हैं और 8 जून 2020 की रात दिशा सालियान के साथ वास्तव में क्या हुआ था।
