IIT Bombay छात्र साहिल वाकोडे केस में Crime Branch ने 20 लोगों के बयान दर्ज किए हैं। प्रो. दुल्ला का बयान बाकी है और परीक्षा नियमों में बदलाव की तैयारी है।
मुंबई: IIT Bombay के छात्र साहिल वाकोडे की मौत के मामले में जांच और विरोध दोनों तेज हो गए हैं। मुंबई Crime Branch अब तक परीक्षा में मौजूद छात्रों, शिक्षकों, संस्थान के कर्मचारियों और हॉस्टल स्टाफ समेत 20 लोगों के बयान दर्ज कर चुकी है, लेकिन मामले में नामजद प्रो. सूर्यनारायण दुल्ला का बयान अभी दर्ज नहीं हुआ है। इसी बीच IIT Bombay ने परीक्षा में कथित अकादमिक अनियमितता से जुड़े नियमों और प्रक्रिया की समीक्षा शुरू कर दी है और छात्रों को कार्रवाई से पहले अपने मेंटर से बात करने का अवसर देने जैसे बदलावों पर विचार किया जा रहा है।

साहिल वाकोडे की मौत 18 सितंबर को हुई थी। वह IIT Bombay के Energy Science and Engineering विभाग में BTech के दूसरे वर्ष के छात्र थे। परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन के इस्तेमाल को लेकर हुई घटना के कुछ घंटे बाद उन्हें हॉस्टल के कमरे में मृत पाया गया था। इस घटना के बाद परिवार ने जातिगत भेदभाव और मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए, जबकि संस्थान की ओर से इन आरोपों का खंडन किया गया है। मामले की जांच अब मुंबई Crime Branch कर रही है।
Crime Branch की जांच में अब तक क्या सामने आया?
जांच एजेंसी ने परीक्षा हॉल में मौजूद छात्रों और परीक्षा की निगरानी कर रहे शिक्षकों के बयान दर्ज किए हैं। हॉस्टल स्टाफ से भी पूछताछ की गई है। जांच का एक अहम हिस्सा 18 सितंबर को परीक्षा के दौरान हुई घटना से लेकर साहिल के हॉस्टल पहुंचने और बाद की परिस्थितियों को जोड़ना है।
साहिल के मोबाइल फोन से जांचकर्ताओं को अभी महत्वपूर्ण डिजिटल जानकारी नहीं मिल पाई है। फोन पैटर्न लॉक से सुरक्षित है और स्क्रीन पर कुछ मिस्ड कॉल की सूचनाएं दिखाई दी थीं, लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि उन कॉल्स में कौन शामिल था। Crime Branch फोन से कॉल, संदेश और अन्य डिजिटल जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रही है।
पुलिस ने फोन और संस्थान की CCTV फुटेज को फोरेंसिक जांच के लिए भी भेजा है। CCTV फुटेज से परीक्षा के दौरान हुई घटनाओं की पुष्टि और उनका क्रम समझने की कोशिश की जा रही है।
प्रो. सूर्यनारायण दुल्ला का बयान अभी बाकी
मामले में साहिल के पिता की शिकायत पर प्रो. सूर्यनारायण दुल्ला के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। शिकायत में जातिगत उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप लगाए गए हैं तथा SC/ST अत्याचार निवारण कानून के तहत भी कार्रवाई की गई है। इन आरोपों की जांच जारी है और इन्हें अभी न्यायिक रूप से साबित नहीं माना जा सकता।
Crime Branch ने मामले से जुड़े कई लोगों से पूछताछ पूरी कर ली है, लेकिन 25 सितंबर तक प्रो. दुल्ला का बयान दर्ज नहीं हुआ था। इसलिए जांच में उनका पक्ष एक महत्वपूर्ण लंबित कड़ी बना हुआ है।
IIT Bombay ने प्रो. दुल्ला को प्रशासनिक जिम्मेदारी से हटाने के बाद जांच के दौरान छुट्टी पर भेजा है। छात्रों की ओर से उन्हें पूरी तरह निलंबित करने की मांग भी उठी थी।
साहिल के परिवार के आरोप और IIT Bombay का पक्ष
साहिल के माता-पिता रविंद्र वाकोडे और सोनाली वाकोडे का आरोप है कि उनके बेटे ने संस्थान में जातिगत टिप्पणियों और मानसिक प्रताड़ना की शिकायत उनसे की थी। परिवार ने संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई और गिरफ्तारी की मांग की है।

दूसरी ओर IIT Bombay की ओर से कहा गया है कि साहिल ने संस्थान के SC/ST Cell या प्रशासन के सामने ऐसी कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई थी। मामले में कुछ छात्रों और फैकल्टी सदस्यों की ओर से भी जातिगत भेदभाव के आरोपों पर अलग-अलग राय सामने आई है। इसलिए इस पहलू की स्वतंत्र जांच अभी महत्वपूर्ण है।
IIT Bombay ने साहिल की मौत से जुड़े अपने शुरुआती communication को लेकर माफी भी दोहराई है। इसके बाद संस्थान की ओर से परीक्षा और अकादमिक misconduct की प्रक्रिया की समीक्षा का कदम सामने आया है।
अब IIT Bombay में परीक्षा के नियम बदल सकते हैं
साहिल की मौत के बाद IIT Bombay ने academic misconduct से जुड़े नियमों की समीक्षा के लिए एक नई समिति बनाई है। इसमें faculty और students को बराबर प्रतिनिधित्व दिया गया है। समिति परीक्षा के दौरान suspected malpractice से निपटने के लिए स्पष्ट और step-by-step SOP तैयार करेगी।
प्रस्तावित बदलावों में यह भी शामिल है कि किसी छात्र पर परीक्षा में अनियमितता का आरोप लगने के बाद disciplinary action से पहले उसे अपने student mentor से बात करने का अवसर दिया जाए। इसके अलावा answer sheet के पहले पेज पर examination malpractice के नियम और संभावित परिणाम स्पष्ट रूप से लिखने का प्रस्ताव भी विचाराधीन है।
इन बदलावों का उद्देश्य suspected academic misconduct के मामलों में प्रक्रिया को ज्यादा स्पष्ट और समान बनाना है। हालांकि revised SOP और नियम लागू होने से पहले उन्हें Senate की मंजूरी लेनी होगी।
Mid-Semester Exam अब 10 और 11 अक्टूबर को
Sahil Wakode मामले के बाद IIT Bombay के बचे हुए Mid-Semester examinations एक बार फिर टाल दिए गए हैं। 26 और 27 सितंबर को होने वाली परीक्षाएं अब 10 और 11 अक्टूबर को होंगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार timetable में बदलाव नहीं किया गया है।
संस्थान ने परीक्षा टालने का संबंध नई academic misconduct committee को student-friendly SOP और संशोधित नियम तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय देने से जोड़ा है।
छात्रों की 18 मांगों का क्या असर हुआ?
साहिल की मौत के बाद IIT Bombay के छात्रों ने 18 सूत्रीय मांगें रखी थीं। इनमें स्वतंत्र जांच, student welfare और grievance redressal व्यवस्था में सुधार, healthcare सुविधाओं को मजबूत करना तथा 24 घंटे psychiatrist की उपलब्धता जैसी मांगें शामिल थीं।
इन मांगों के बीच अब academic misconduct की प्रक्रिया में student representation, mentor intervention और स्पष्ट examination SOP तैयार करने की दिशा में संस्थागत कदम उठाया गया है। इससे साफ है कि विवाद का असर सिर्फ मौजूदा जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि IIT Bombay की परीक्षा और student-support व्यवस्था में बदलाव तक पहुंच गया है।
NCSC ने भी शुरू की जांच
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष किशोर मकवाना ने 24 सितंबर को IIT Bombay पहुंचकर मामले की मौके पर जांच की। उन्होंने संस्थान के निदेशक, अधिकारियों, संबंधित फैकल्टी और अन्य लोगों से जानकारी ली तथा उस परीक्षा कक्ष का भी निरीक्षण किया जहां 18 सितंबर की घटना हुई थी। आयोग ने साहिल की मौत से पहले की परिस्थितियों, संबंधित फैकल्टी की भूमिका और SC छात्रों के लिए grievance mechanisms की जानकारी मांगी है।
साहिल के माता-पिता ने आयोग के सामने भी अपनी शिकायत और मांगें रखी हैं। परिवार इसके साथ ही मुंबई के आजाद मैदान में विरोध प्रदर्शन कर चुका है और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है।
मुंबई कांग्रेस का IIT Bombay के बाहर आंदोलन

24 सितंबर को मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष और सांसद वर्षा गायकवाड के नेतृत्व में कांग्रेस और NSUI कार्यकर्ताओं ने IIT Bombay के पवई परिसर के बाहर प्रदर्शन किया। पुलिस ने वर्षा गायकवाड समेत कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। प्रदर्शन के दौरान गायकवाड ने साहिल की मौत को “institutional murder” बताते हुए निष्पक्ष और विस्तृत जांच तथा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
वर्षा गायकवाड ने शिक्षा संस्थानों में जाति और धर्म के आधार पर भेदभाव तथा RSS के कथित प्रभाव को लेकर भी सवाल उठाए। ये राजनीतिक आरोप हैं; साहिल वाकोडे मामले में RSS की भूमिका स्थापित करने वाला स्वतंत्र प्रमाण अभी सामने नहीं आया है।
इस दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर कांग्रेस ने दमन का आरोप लगाया, जबकि पुलिस की कार्रवाई का तत्काल संदर्भ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया से जुड़ा बताया गया है।
अब जांच में किन सवालों के जवाब बाकी हैं?
साहिल वाकोडे मामले में अब जांच का फोकस केवल परीक्षा हॉल की घटना तक सीमित नहीं है। Crime Branch को यह स्पष्ट करना है कि 18 सितंबर की परीक्षा में वास्तव में क्या हुआ, उसके बाद साहिल किन लोगों के संपर्क में था, उसके मोबाइल और अन्य डिजिटल उपकरणों में क्या जानकारी है तथा परिवार की ओर से लगाए गए जातिगत उत्पीड़न के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होती है या नहीं।
इसके साथ ही प्रो. सूर्यनारायण दुल्ला का बयान, CCTV और डिजिटल फोरेंसिक जांच तथा संस्थान की आंतरिक जांच रिपोर्ट मामले की अगली दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगी। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर साहिल की मौत के कारणों और उससे जुड़ी जिम्मेदारी को लेकर जांच जारी है।
IIT Bombay में अब परीक्षा व्यवस्था में प्रस्तावित बदलाव, 10 और 11 अक्टूबर की परीक्षाएं, Crime Branch की जांच, NCSC की पड़ताल और परिवार व छात्रों की मांगें इस मामले के अगले महत्वपूर्ण चरण होंगे।
