Category: Jobs & Education

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  • Faridabad Teacher Murder: स्कूल गेट पर शिक्षिका की हत्या, आरोपी गिरफ्तार; जांच में बड़े खुलासे

    Faridabad Teacher Murder: स्कूल गेट पर शिक्षिका की हत्या, आरोपी गिरफ्तार; जांच में बड़े खुलासे

    फरीदाबाद के निजी स्कूल में शिक्षिका की हत्या के मामले में आरोपी गिरफ्तार। पुलिस जांच में सामने आई कथित साजिश, पहले की शिकायतें, CCTV और पूरे मामले की टाइमलाइन पढ़ें।

    फरीदाबाद: हरियाणा के फरीदाबाद में एक निजी स्कूल के बाहर शिक्षिका की दिनदहाड़े हत्या ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। स्कूल परिसर के बाहर हुई इस वारदात का CCTV वीडियो सामने आने के बाद मामला और भी गंभीर हो गया। पुलिस ने घटना के कुछ ही घंटों के भीतर 21 वर्षीय आरोपी अमित को गिरफ्तार कर लिया। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी पिछले करीब दो वर्षों से शिक्षिका का पीछा कर रहा था और उसने पहले से हत्या की योजना बनाई थी।

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    हमले की सीसीटीवी फुटेज की तस्वीर

    पति का नाम लेकर स्कूल गेट तक बुलाया

    पुलिस जांच के अनुसार आरोपी सोमवार सुबह चेहरे पर कपड़ा बांधकर स्कूल पहुंचा। उसने स्कूल स्टाफ से खुद को शिक्षिका के पति का परिचित बताते हुए उन्हें बाहर बुलाने के लिए कहा। जैसे ही शिक्षिका स्कूल गेट पर पहुंचीं, आरोपी ने उन पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। पूरी घटना कुछ ही सेकंड में घटित हुई और स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई।

    CCTV में कैद हुई पूरी वारदात

    घटना स्कूल परिसर में लगे CCTV कैमरों में रिकॉर्ड हो गई। वीडियो में आरोपी लगातार चाकू से हमला करता दिखाई देता है। शोर सुनकर स्कूल के कर्मचारी और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक शिक्षिका गंभीर रूप से घायल हो चुकी थीं। बीच-बचाव करने की कोशिश करने वाले एक अधिकारी पर भी आरोपी ने हमला किया।

    अस्पताल पहुंचने से पहले तोड़ दिया दम

    हमले के तुरंत बाद शिक्षिका को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी।

    दो साल से कर रहा था पीछा

    पुलिस और परिजनों के मुताबिक आरोपी पिछले करीब दो वर्षों से शिक्षिका को परेशान कर रहा था। शिक्षिका ने पहले भी उसके खिलाफ छेड़छाड़ और उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी। परिवार का आरोप है कि शिकायत के बावजूद आरोपी का उत्पीड़न पूरी तरह नहीं रुका और आखिरकार उसने इस वारदात को अंजाम दिया।

    पहले से रची थी हत्या की साजिश

    जांच में पुलिस को पता चला कि आरोपी ने घटना से करीब दो महीने पहले ही हत्या की योजना बना ली थी। उसने इसी उद्देश्य से चाकू खरीदा था और मौके की तलाश कर रहा था। पूछताछ में आरोपी ने अपना जुर्म कबूल करने की बात भी पुलिस ने कही है।

    परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

    मृतक शिक्षिका विवाहित थीं और उनके दो छोटे बच्चे हैं। परिवार का कहना है कि उन्होंने कई बार आरोपी की हरकतों की शिकायत की थी। पति ने आरोप लगाया कि यदि शुरुआती शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई होती तो शायद यह घटना टाली जा सकती थी।

    सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

    दिनदहाड़े स्कूल परिसर तक आरोपी का पहुंच जाना और शिक्षिका को बाहर बुलाकर हमला कर देना स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। घटना के बाद स्थानीय लोगों और अभिभावकों में नाराजगी है। कई लोगों ने स्कूलों में विजिटर वेरिफिकेशन और सुरक्षा प्रोटोकॉल को और सख्त बनाने की मांग की है।

    पुलिस क्या कह रही है?

    पुलिस का कहना है कि आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और उससे पूछताछ जारी है। मामले में उपलब्ध CCTV फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में सभी पहलुओं की जांच की जाएगी और आरोपपत्र मजबूत साक्ष्यों के आधार पर अदालत में पेश किया जाएगा।

  • सुप्रीम कोर्ट ने छात्र प्रदर्शनकारियों को क्यों दी बड़ी राहत? पुलिस कार्रवाई पर क्या कहा कोर्ट ने

    सुप्रीम कोर्ट ने छात्र प्रदर्शनकारियों को क्यों दी बड़ी राहत? पुलिस कार्रवाई पर क्या कहा कोर्ट ने

    छात्र प्रदर्शन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले प्रदर्शनकारियों पर फिलहाल कठोर कार्रवाई नहीं करने और नाबालिगों को रिहा करने के निर्देश दिए। जानिए कोर्ट के आदेश का क्या असर होगा।

    देशभर में परीक्षा से जुड़े छात्र प्रदर्शनों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा अंतरिम आदेश जारी किया है। अदालत ने कहा है कि जिन प्रदर्शनकारियों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उनके खिलाफ फिलहाल कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जाए। साथ ही हिरासत में लिए गए पात्र नाबालिग छात्रों को रिहा करने और प्रदर्शन से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं। कोर्ट के इस आदेश को छात्र प्रदर्शन से जुड़े मामलों में अब तक की सबसे महत्वपूर्ण न्यायिक राहत माना जा रहा है।

    सुप्रीम कोर्ट ने किन छात्रों को राहत दी?

    अदालत ने स्पष्ट किया कि अंतरिम राहत उन प्रदर्शनकारियों के लिए है जिनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। ऐसे छात्रों के खिलाफ फिलहाल कोई कठोर पुलिस कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसके अलावा हिरासत में लिए गए पात्र नाबालिगों को रिहा करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

    कोर्ट ने पुलिस और राज्यों को क्या निर्देश दिए?

    सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रदर्शन से जुड़े सभी महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखे जाएं। इसमें CCTV फुटेज, बॉडी कैमरा रिकॉर्डिंग, ड्रोन वीडियो और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड शामिल हैं। अदालत ने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों का व्यक्तिगत डिजिटल डेटा सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए।

    पूरा मामला क्या है?

    हाल के दिनों में परीक्षा अनियमितताओं के विरोध में देश के कई हिस्सों में छात्रों ने प्रदर्शन किए थे। इन प्रदर्शनों के दौरान कई जगह पुलिस कार्रवाई, हिरासत और बल प्रयोग के आरोप लगे। इन घटनाओं को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल की गईं, जिन पर फिलहाल सुनवाई जारी है।

    सरकार ने कोर्ट में क्या कहा?

    केंद्र सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना आवश्यक था। सरकार ने यह भी बताया कि इन घटनाओं में कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है।

    कोर्ट ने जांच को लेकर क्या कहा?

    सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि छात्रों और पुलिस दोनों के घायल होने के मामलों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। अदालत ने केंद्र और संबंधित राज्यों से जवाब मांगा है तथा स्वतंत्र जांच की आवश्यकता पर भी विचार करने की बात कही है।

    किन राज्यों पर असर पड़ेगा?

    सुनवाई के दौरान अदालत ने दिल्ली के अलावा महाराष्ट्र, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, असम, पश्चिम बंगाल और केरल समेत कई राज्यों से जवाब मांगा है, जहां छात्र प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामले सामने आए थे।

    अब आगे क्या होगा?

    यह आदेश फिलहाल अंतरिम राहत है। अंतिम फैसला अभी आना बाकी है। अब केंद्र और संबंधित राज्य सरकारों को अदालत के सामने अपना पक्ष रखना होगा। अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट आगे की जांच, राज्यों के जवाब और आवश्यक निर्देशों पर विचार करेगा। तब तक बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले पात्र छात्र प्रदर्शनकारियों को अदालत की अंतरिम सुरक्षा मिलेगी।

    Official Sources

    FAQ

    क्या सुप्रीम कोर्ट ने सभी प्रदर्शनकारियों को राहत दी है?

    नहीं। अंतरिम राहत केवल उन प्रदर्शनकारियों के लिए है जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।

    क्या नाबालिग छात्रों को रिहा करने का निर्देश दिया गया है?

    हाँ। पात्र नाबालिग प्रदर्शनकारियों को रिहा करने के निर्देश दिए गए हैं।

    क्या पुलिस जांच पूरी तरह रुक गई है?

    नहीं। अदालत ने केवल अंतरिम सुरक्षा दी है। मामले की सुनवाई और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।

  • MHT-CET पर वायरल वीडियो के बाद क्या हो रहा है? CET Cell ने पुलिस जांच क्यों मांगी

    MHT-CET पर वायरल वीडियो के बाद क्या हो रहा है? CET Cell ने पुलिस जांच क्यों मांगी

    MHT-CET परीक्षा को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद महाराष्ट्र CET Cell ने मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र साइबर पुलिस से जांच की मांग की है। जानिए पूरा मामला और छात्रों पर इसका क्या असर पड़ सकता है।

    मुंबई: क्या MHT-CET परीक्षा में गड़बड़ी हुई थी? सोशल मीडिया पर वायरल कुछ वीडियो के बाद यह सवाल कई छात्रों और अभिभावकों के मन में उठने लगा है। हालांकि इन दावों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसी बीच महाराष्ट्र स्टेट कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (CET) Cell ने पूरे मामले की जांच के लिए मुंबई के आजाद मैदान पुलिस स्टेशन और महाराष्ट्र साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।

    परीक्षा प्राधिकरण का कहना है कि सोशल मीडिया पर बिना पुष्टि के प्रसारित सामग्री छात्रों और अभिभावकों के बीच भ्रम फैला सकती है तथा सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती है। इसलिए तथ्यों की जांच आवश्यक है।

    क्या है पूरा मामला?

    CET Cell के अनुसार सोशल मीडिया पर MHT-CET परीक्षा से जुड़े दो वीडियो वायरल हुए हैं। इन वीडियो में परीक्षा की पारदर्शिता और संचालन को लेकर कई दावे किए गए हैं।

    हालांकि प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि इन दावों की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए पुलिस और साइबर पुलिस से अनुरोध किया गया है कि वीडियो की सत्यता की जांच की जाए और यदि किसी प्रकार का कानूनी उल्लंघन पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

    CET Cell ने पुलिस से क्या मांग की है?

    शिकायत में CET Cell ने कहा है कि वायरल वीडियो तैयार करने, अपलोड करने और प्रसारित करने वाले लोगों की पहचान की जाए। साथ ही यह भी जांच की जाए कि साझा की गई जानकारी तथ्यात्मक है या नहीं।

    यदि जांच में किसी प्रकार की गलत या भ्रामक जानकारी फैलाने का मामला सामने आता है, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।

    छात्रों और अभिभावकों के लिए इसका क्या मतलब है?

    फिलहाल छात्रों को घबराने की जरूरत नहीं है।

    अब तक CET Cell ने परीक्षा रद्द करने, परिणाम रोकने या परीक्षा प्रक्रिया में किसी बदलाव की घोषणा नहीं की है।

    यह कार्रवाई केवल सोशल मीडिया पर वायरल दावों की सत्यता की जांच के लिए की गई है। इसलिए छात्रों और अभिभावकों को केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करने की सलाह दी जाती है।

    आगे क्या होगा?

    अब मामले की जांच मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र साइबर पुलिस करेगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

    यदि वायरल दावे सही पाए जाते हैं तो संबंधित तथ्यों के आधार पर कार्रवाई होगी, और यदि दावे भ्रामक पाए जाते हैं तो कानून के अनुसार जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कदम उठाए जा सकते हैं।

    MHT-CET से जुड़े वायरल वीडियो की सच्चाई अभी जांच के दायरे में है। ऐसे में किसी भी अपुष्ट जानकारी पर भरोसा करने के बजाय छात्रों और अभिभावकों को केवल महाराष्ट्र CET Cell और संबंधित सरकारी एजेंसियों की आधिकारिक सूचना का इंतजार करना चाहिए।

    Official Sources

    FAQ

    MHT-CET मामले में शिकायत किसने दर्ज कराई है?

    महाराष्ट्र स्टेट CET Cell ने मुंबई के आजाद मैदान पुलिस स्टेशन और महाराष्ट्र साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।

    क्या MHT-CET परीक्षा रद्द हो गई है?

    नहीं। अभी तक परीक्षा रद्द करने या परिणाम रोकने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

    क्या वायरल वीडियो सही साबित हो चुके हैं?

    नहीं। वीडियो में किए गए दावों की जांच की जा रही है। उनकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    छात्रों को क्या करना चाहिए?

    केवल महाराष्ट्र CET Cell की आधिकारिक वेबसाइट और सरकारी सूचना पर भरोसा करें। सोशल मीडिया पर चल रहे अपुष्ट दावों से बचें।

  • धर्मेंद्र प्रधान ने क्यों दिया इस्तीफा? NEET के अलावा ये मुद्दे भी बने बड़ी चुनौती

    धर्मेंद्र प्रधान ने क्यों दिया इस्तीफा? NEET के अलावा ये मुद्दे भी बने बड़ी चुनौती

    धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद NEET विवाद के साथ NTA, NCERT, UGC नियम, भाषा नीति और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े पुराने विवाद भी चर्चा में हैं।

    नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री की सलाह पर उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है। इसके बाद शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को दिया गया है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सबसे ज्यादा चर्चा NEET-UG विवाद की हो रही है, लेकिन उनके कार्यकाल के दौरान परीक्षा व्यवस्था, NTA, पाठ्यक्रम, UGC के नियम और भाषा नीति से जुड़े कई मुद्दे भी लगातार राजनीतिक और सार्वजनिक बहस का हिस्सा रहे।

    NEET विवाद बना सबसे बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक संकट

    धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल की सबसे बड़ी चुनौती राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता को लेकर रही। NEET-UG से जुड़े विवादों ने लाखों छात्रों और उनके परिवारों की चिंता बढ़ाई। परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक से जुड़े आरोपों के बाद जांच, परीक्षा प्रक्रिया और राष्ट्रीय परीक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे।

    2024 में NEET-UG के परिणाम और ग्रेस मार्क्स को लेकर विवाद हुआ था। कुछ प्रभावित उम्मीदवारों के लिए दोबारा परीक्षा आयोजित करनी पड़ी। NTA के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी NEET-UG 2024 के प्रभावित उम्मीदवारों के लिए पुनः परीक्षा का उल्लेख है।

    इसके बाद 2026 में NEET को लेकर विवाद और गंभीर हो गया। परीक्षा में अनियमितताओं की जानकारी सामने आने के बाद परीक्षा रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया गया। मामले की जांच CBI को सौंपे जाने और भविष्य में परीक्षा व्यवस्था में बदलाव की चर्चा के बीच छात्रों के बीच परीक्षा प्रणाली को लेकर भरोसे का सवाल बड़ा मुद्दा बन गया।

    यही विवाद धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के तत्काल राजनीतिक संदर्भ का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बना। हालांकि उनके इस्तीफे को केवल उनके पूरे कार्यकाल के विवादों का सीधा परिणाम बताना उचित नहीं होगा। उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर उनका इस्तीफा स्वीकार किया और शिक्षा मंत्रालय का प्रभार प्रह्लाद जोशी को सौंपा।

    NTA की कार्यप्रणाली पर लगातार उठते रहे सवाल

    NEET के अलावा राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी यानी NTA की कार्यप्रणाली भी धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में लगातार चर्चा में रही। NEET, JEE, CUET और UGC-NET जैसी बड़ी परीक्षाओं का आयोजन करने वाली एजेंसी को परीक्षा प्रबंधन, तकनीकी समस्याओं और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े विवादों के कारण आलोचना का सामना करना पड़ा।

    UGC-NET जून 2024 की परीक्षा भी विवादों में आई। परीक्षा के बाद इसे रद्द कर दिया गया और बाद में दोबारा परीक्षा आयोजित की गई। NTA के आधिकारिक रिकॉर्ड में UGC-NET जून 2024 की पुनर्निर्धारित परीक्षा और बाद की प्रक्रिया दर्ज है।

    लगातार एक के बाद एक परीक्षाओं से जुड़े विवादों ने यह सवाल खड़ा किया कि देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं को संचालित करने वाली व्यवस्था में क्या बड़े स्तर पर सुधार की जरूरत है।

    NCERT की किताबों में बदलाव पर भी हुआ विवाद

    धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में स्कूल शिक्षा के पाठ्यक्रम और NCERT की किताबों में बदलाव को लेकर भी राजनीतिक विवाद हुआ।

    NCERT ने पाठ्यक्रम के कुछ हिस्सों को कम करने के लिए ‘rationalisation’ की प्रक्रिया अपनाई। सरकार की ओर से इसे छात्रों पर पढ़ाई का बोझ कम करने और पाठ्यक्रम को व्यवस्थित करने की प्रक्रिया के रूप में देखा गया। NCERT की वेबसाइट पर भी पाठ्यपुस्तकों में rationalised content की सूची उपलब्ध है।

    हालांकि विपक्ष और कुछ शिक्षाविदों ने आरोप लगाया कि पाठ्यक्रम में बदलाव के दौरान इतिहास और राजनीति से जुड़े कुछ संवेदनशील विषयों को हटाने या कम करने का प्रभाव पड़ा। मुगल इतिहास, गुजरात दंगों और लोकतांत्रिक आंदोलनों से जुड़े हिस्सों को लेकर भी राजनीतिक बहस हुई।

    यह विवाद केवल किताबों में बदलाव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शिक्षा में पाठ्यक्रम और इतिहास की प्रस्तुति को लेकर व्यापक वैचारिक बहस में बदल गया।

    NEP और तीन भाषा फॉर्मूले को लेकर राज्यों से टकराव

    नई शिक्षा नीति यानी NEP 2020 भी धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल के प्रमुख मुद्दों में रही। शिक्षा नीति को लागू करने के दौरान तीन भाषा फॉर्मूले को लेकर केंद्र और कुछ राज्यों के बीच मतभेद सामने आए।

    विशेष रूप से तमिलनाडु जैसे राज्यों ने हिंदी को बढ़ावा दिए जाने की आशंका जताई। राज्य सरकारों का तर्क रहा कि भाषा नीति में राज्यों की भाषाई और सांस्कृतिक परिस्थितियों का पर्याप्त ध्यान रखा जाना चाहिए।

    केंद्र की ओर से लगातार यह कहा गया कि नई शिक्षा नीति का उद्देश्य किसी एक भाषा को थोपना नहीं, बल्कि भारतीय भाषाओं और बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देना है। इसके बावजूद भाषा नीति का मुद्दा केंद्र-राज्य संबंधों में एक संवेदनशील राजनीतिक विषय बना रहा।

    UGC के नियमों को लेकर विश्वविद्यालयों में बढ़ी बहस

    उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी UGC से जुड़े नियमों को लेकर विवाद सामने आए। विश्वविद्यालयों में कुलपति नियुक्ति, उच्च शिक्षा के नियमन और केंद्र तथा राज्यों की भूमिका को लेकर कई बहस हुईं।

    कुलपति नियुक्ति और विश्वविद्यालय प्रशासन से जुड़े नियमों में केंद्र, राज्यपाल और विश्वविद्यालयों की भूमिका को लेकर अलग-अलग राज्यों और शिक्षाविदों ने सवाल उठाए। UGC के मौजूदा नियामक ढांचे में कुलपति चयन और नियुक्ति से जुड़ी प्रक्रियाओं के लिए Search-cum-Selection Committee जैसी व्यवस्थाएं मौजूद हैं।

    इन मुद्दों ने उच्च शिक्षा में स्वायत्तता, राज्य सरकारों की भूमिका और केंद्र के नियामक अधिकारों को लेकर बहस को तेज किया।

    PM SHRI स्कूल योजना पर भी केंद्र-राज्य मतभेद

    प्रधान के कार्यकाल में PM SHRI स्कूल योजना भी राजनीतिक बहस का विषय बनी। योजना के तहत सरकारी स्कूलों को आधुनिक और मॉडल स्कूलों के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई थी।

    हालांकि कुछ राज्यों ने योजना से जुड़ी शर्तों और नई शिक्षा नीति के साथ इसके संबंध को लेकर आपत्ति जताई। इससे शिक्षा क्षेत्र में केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग और अधिकारों को लेकर बहस सामने आई।

    CBSE और परीक्षा मूल्यांकन व्यवस्था पर भी सवाल

    शिक्षा व्यवस्था में परीक्षा और मूल्यांकन प्रक्रिया से जुड़े बदलाव भी पूरी तरह विवादों से मुक्त नहीं रहे। CBSE की डिजिटल और ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन व्यवस्था को लेकर छात्रों और अभिभावकों की शिकायतें सामने आईं।

    तकनीक आधारित मूल्यांकन का उद्देश्य प्रक्रिया को तेज और अधिक व्यवस्थित बनाना था, लेकिन जब छात्रों को परिणाम या मूल्यांकन से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ा, तो व्यवस्था की पारदर्शिता और तकनीकी विश्वसनीयता पर सवाल उठे।

    क्या सिर्फ NEET विवाद बना इस्तीफे की वजह?

    धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद यह सवाल स्वाभाविक है कि क्या केवल NEET विवाद इसके पीछे था।

    उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के आधार पर यह कहना अधिक सही होगा कि NEET-UG विवाद इस्तीफे का तत्काल और सबसे प्रमुख राजनीतिक संदर्भ बना, जबकि उनके कार्यकाल के दौरान NTA की कार्यप्रणाली, UGC-NET, पाठ्यक्रम में बदलाव, भाषा नीति और उच्च शिक्षा के नियमों से जुड़े विवादों ने शिक्षा मंत्रालय के सामने लगातार चुनौतियां पैदा कीं।

    इसलिए धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल का मूल्यांकन केवल एक परीक्षा विवाद के आधार पर नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े इन व्यापक मुद्दों के संदर्भ में भी किया जाएगा।

    Bottom Line: धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ऐसे समय हुआ है जब देश में परीक्षा व्यवस्था और छात्रों के भरोसे को लेकर गंभीर बहस चल रही है। NEET विवाद तत्काल कारणों के केंद्र में रहा, लेकिन उनके कार्यकाल की राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौतियां इससे कहीं व्यापक थीं।

    Official Sources

    FAQ

    क्या धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है?

    हां। राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर धर्मेंद्र प्रधान का केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है।

    धर्मेंद्र प्रधान के बाद शिक्षा मंत्रालय किसे मिला है?

    केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

    क्या NEET विवाद धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का मुख्य कारण था?

    NEET-UG विवाद इस्तीफे के तत्काल राजनीतिक संदर्भ का सबसे प्रमुख मुद्दा रहा। हालांकि उनके कार्यकाल में NTA, UGC-NET, NCERT पाठ्यक्रम, भाषा नीति और उच्च शिक्षा से जुड़े अन्य विवाद भी चर्चा में रहे।

    धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में कौन-कौन से शिक्षा विवाद चर्चा में रहे?

    NEET-UG और NTA की कार्यप्रणाली, UGC-NET परीक्षा, NCERT पाठ्यक्रम में बदलाव, NEP के तीन भाषा फॉर्मूले, UGC नियम और केंद्र-राज्य शिक्षा विवाद प्रमुख मुद्दों में शामिल रहे।

  • धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कांग्रेस का जश्न, मुंबई में बांटी मिठाई

    धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कांग्रेस का जश्न, मुंबई में बांटी मिठाई

    धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद मुंबई में कांग्रेस नेताओं ने मिठाई बांटकर जश्न मनाया। सचिन सावंत ने इसे छात्रों और युवाओं की जीत बताया।

    (मंत्रालय प्रतिनिधि)
    मुंबई: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कांग्रेस ने इसे छात्रों और युवाओं के आंदोलन की बड़ी जीत बताया। मुंबई में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मिठाई बांटकर जश्न मनाया। कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा कि यह युवाओं और लोकतंत्र की जीत है, जबकि पार्टी नेताओं ने केंद्र सरकार पर शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था को लेकर जवाबदेही से बचने का आरोप लगाया।

    धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार, 25 जुलाई 2026 को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया। यह फैसला NEET-UG परीक्षा से जुड़े विवाद, कथित अनियमितताओं और छात्रों के लगातार विरोध प्रदर्शनों के बीच आया। उनके इस्तीफे के बाद विपक्षी दलों ने इसे सरकार पर बढ़ते राजनीतिक दबाव और छात्र आंदोलन की सफलता के रूप में पेश किया।

    मुंबई में कांग्रेस नेताओं ने बांटी मिठाई

    इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद मुंबई में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मिठाई बांटकर खुशी जताई। कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत भी इस मौके पर मौजूद रहे और उन्होंने कार्यकर्ताओं को मिठाई खिलाई।

    सचिन सावंत ने कहा कि देश के युवाओं ने लोकतंत्र और जवाबदेही की ताकत दिखाई है। उन्होंने दावा किया कि छात्रों के संघर्ष और विपक्ष के दबाव के बाद सरकार को आखिरकार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के रूप में जवाब देना पड़ा।

    उन्होंने केंद्र सरकार पर NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विवादों को लेकर गंभीर सवाल उठाए। सावंत ने कहा कि युवाओं ने यह संदेश दिया है कि देश में लोकतंत्र है और सरकार को जनता तथा छात्रों के सवालों का जवाब देना होगा।

    सचिन सावंत ने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री पर भी साधा निशाना

    सचिन सावंत ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर भी राजनीतिक निशाना साधा। उन्होंने कहा कि केवल शिक्षा मंत्री का इस्तीफा पर्याप्त नहीं है और सरकार को परीक्षा व्यवस्था में सामने आए विवादों की व्यापक जिम्मेदारी तय करनी चाहिए।

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    मुंबई कांग्रेस पार्टी प्रवक्ता सचिन सावंत की फाइल तस्वीर

    कांग्रेस नेता ने दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में पेपर लीक और परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं के मामलों ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है। उन्होंने युवाओं के बेरोजगारी और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को भी सरकार के सामने बड़ी चुनौती बताया।

    हालांकि, कांग्रेस नेताओं के इन राजनीतिक आरोपों को उनके बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए। इन दावों के अलग-अलग हिस्सों की पुष्टि संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड और जांच के आधार पर की जानी होगी।

    कांग्रेस ने इसे छात्रों के संघर्ष की जीत बताया

    धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर कांग्रेस लंबे समय से शिक्षा मंत्री की जवाबदेही का मुद्दा उठा रही थी। पार्टी ने NEET विवाद और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर छात्रों के समर्थन में अभियान चलाया था। कांग्रेस ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के साथ-साथ परीक्षा प्रणाली में व्यापक बदलाव की भी मांग की थी।

    अब इस्तीफे के बाद पार्टी इसे छात्रों, युवाओं और विपक्ष के दबाव का परिणाम बता रही है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि परीक्षा से जुड़े विवादों में छात्रों और अभिभावकों का भरोसा बहाल करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।

    NEET विवाद के बीच आया इस्तीफा

    धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा NEET-UG 2026 से जुड़ी कथित अनियमितताओं और उसके बाद हुए छात्र आंदोलनों के बीच आया है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, परीक्षा विवाद के बाद जांच, परीक्षा रद्द करने और दोबारा परीक्षा कराने जैसे कदम उठाए गए। इसके बाद भी छात्रों और विपक्ष की ओर से जवाबदेही की मांग जारी रही।

    अपने इस्तीफे के पत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि छात्रों का भविष्य और राष्ट्रीय हित उनके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता हैं। उन्होंने परीक्षा विवाद से निपटने के दौरान सरकार की कार्रवाई का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने मामले की जिम्मेदारी से पीछे हटने की कोशिश नहीं की।

    FAQ

    धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा क्यों दिया?

    धर्मेंद्र प्रधान ने NEET-UG 2026 से जुड़े विवाद, परीक्षा में कथित अनियमितताओं और छात्रों के विरोध प्रदर्शनों के बीच शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया।

    कांग्रेस ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर क्या किया?

    मुंबई में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मिठाई बांटकर जश्न मनाया। पार्टी ने इस्तीफे को छात्रों और युवाओं के संघर्ष की जीत बताया।

    सचिन सावंत ने क्या कहा?

    सचिन सावंत ने इस्तीफे को युवाओं और लोकतंत्र की जीत बताया और केंद्र सरकार से परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने की मांग की।

  • धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सरकार ने मांगा समय, CJP का दावा

    धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सरकार ने मांगा समय, CJP का दावा

    CJP ने दावा किया है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर सरकार ने फैसला लेने के लिए समय मांगा है। शिक्षा सुधारों पर भी चर्चा जारी है।

    नई दिल्ली: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर केंद्र सरकार और Cockroach Janata Party (CJP) के प्रतिनिधियों के बीच शनिवार को हुई बैठक खत्म हो गई। बैठक के बाद CJP ने दावा किया कि सरकार ने इस्तीफे की मांग पर फैसला लेने के लिए कुछ समय मांगा है। वहीं सरकार शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधारों पर भी विचार कर रही है।

    सरकार और CJP प्रतिनिधियों के बीच क्या हुआ?

    संविधान क्लब में केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और जितेंद्र सिंह ने CJP के प्रतिनिधि सौरव दास और आशुतोष रांका से करीब एक घंटे तक बातचीत की। बैठक का मुख्य मुद्दा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग और परीक्षा प्रणाली में सुधार रहा।

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    बैठक के बाद CJP नेताओं ने मीडिया से कहा कि सरकार ने इस्तीफे की मांग पर निर्णय लेने के लिए शनिवार दोपहर तक का समय मांगा है। हालांकि इस दावे की सरकार की ओर से तत्काल आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई।

    शिक्षा सुधारों पर भी सरकार का फोकस

    सूत्रों के मुताबिक, इसी दौरान केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक भी हुई जिसमें शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधारों पर चर्चा की गई। बताया जा रहा है कि सरकार युवाओं की चिंताओं को दूर करने के लिए जल्द सुधारों का खाका सार्वजनिक करने पर विचार कर रही है। हालांकि कैबिनेट बैठक के फैसलों का आधिकारिक विवरण अभी जारी नहीं हुआ है।

    विपक्ष भी बढ़ाएगा राजनीतिक दबाव

    मामले के बीच कांग्रेस अगले कुछ समय में सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ाने के लिए अपनी रणनीति सामने ला सकती है। संसद और विरोध प्रदर्शनों के बीच इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां तेज बनी हुई हैं।

    बैठक स्थल पर सुरक्षा कड़ी

    बैठक खत्म होने के बाद संविधान क्लब परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। ग्राउंड फ्लोर और लिफ्ट क्षेत्र में काफी हलचल देखी गई क्योंकि दोनों पक्षों के आधिकारिक बयान का इंतजार किया जा रहा था। फिलहाल सरकार की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

    फिलहाल शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है। CJP का कहना है कि सरकार ने निर्णय के लिए समय मांगा है, जबकि केंद्र का जोर शिक्षा व्यवस्था में सुधारों पर दिखाई दे रहा है। आगे की आधिकारिक घोषणा और राजनीतिक घटनाक्रम पर सभी की नजर बनी हुई है।

    Official Sources

    FAQ

    प्रश्न: CJP की मुख्य मांग क्या है?
    उत्तर: CJP शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और शिक्षा प्रणाली में सुधार की मांग कर रही है।

    प्रश्न: क्या सरकार ने इस्तीफे पर फैसला ले लिया है?
    उत्तर: अभी तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक फैसला घोषित नहीं किया गया है। CJP का दावा है कि सरकार ने निर्णय के लिए समय मांगा है।

  • मुंबई पुलिसकर्मी सस्पेंड, छात्रों को ड्रग्स केस की धमकी

    मुंबई पुलिसकर्मी सस्पेंड, छात्रों को ड्रग्स केस की धमकी

    मुंबई में छात्र प्रदर्शनकारियों को कथित फर्जी ड्रग्स केस में फंसाने की धमकी देने वाला पुलिस ड्राइवर सस्पेंड, वायरल वीडियो पर जांच शुरू।

    मुंबई: NEET धोखाधड़ी के खिलाफ मुंबई में प्रदर्शन कर रहे छात्र प्रदर्शनकारियों को कथित तौर पर फर्जी ड्रग्स केस में फंसाने की धमकी देने वाले पुलिस ड्राइवर के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हुई है। वायरल वीडियो के बाद मुंबई पुलिस ने विभागीय जांच के आदेश दिए और संबंधित पुलिसकर्मी को सस्पेंड कर दिया है। वीडियो में छात्रों को दोबारा प्रदर्शन करने पर उनके बैग में ड्रग्स रखने की धमकी दिए जाने का आरोप है।

    मुंबई में NEET और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर जारी छात्र प्रदर्शनों के बीच एक वायरल वीडियो ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में एक पुलिसकर्मी कथित तौर पर हिरासत में लिए गए छात्रों को दोबारा प्रदर्शन में शामिल होने पर उनकी जिंदगी बर्बाद करने और उन्हें ड्रग्स केस में फंसाने की धमकी देता सुनाई दे रहा है।

    मामला सामने आने के बाद मुंबई पुलिस ने जांच शुरू की और संबंधित पुलिस ड्राइवर के खिलाफ कार्रवाई की। खबर के मुताबिक, पुलिसकर्मी की पहचान पवन सांगले के रूप में हुई है, जो मुंबई पुलिस के Motor Transport विभाग से जुड़े ड्राइवर हैं और सायन पुलिस स्टेशन से अटैच बताए गए हैं।

    वायरल वीडियो में छात्रों को क्या कहते सुनाई दे रहा है?

    सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में पुलिस वाहन के अंदर मौजूद एक पुलिसकर्मी छात्रों को कथित तौर पर प्रदर्शन में दोबारा नहीं आने की चेतावनी देता सुनाई दे रहा है।

    वीडियो में वह कथित रूप से कहता है कि अगर छात्र दोबारा प्रदर्शन में दिखाई दिए तो उनके बैग या जेब में “50 ग्राम पाउडर” रखकर उन्हें ड्रग्स केस में फंसाया जा सकता है। वह यह भी कहता सुनाई देता है कि ऐसी कार्रवाई से छात्रों की जिंदगी बर्बाद हो जाएगी और उन्हें जमानत मिलने में परेशानी होगी।

    हालांकि, वायरल वीडियो की परिस्थितियों और उसके पूरे संदर्भ की जांच आधिकारिक जांच का विषय है। इसलिए वीडियो में कही गई बातों को पुलिसकर्मी के खिलाफ अंतिम रूप से साबित तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि वायरल वीडियो में दिखाई और सुनाई दे रहे कथित बयान के रूप में देखा जाना चाहिए।

    मुंबई पुलिस ने जांच के आदेश दिए, पुलिस ड्राइवर सस्पेंड

    वीडियो सामने आने के बाद मुंबई पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया। खबर के मुताबिक, अधिकारियों ने बताया कि घटना की जांच के आदेश दिए गए हैं और जांच पूरी होने तक संबंधित ड्राइवर को उसकी मौजूदा पोस्टिंग से हटाया गया है। बाद में उसके सस्पेंड किए जाने की जानकारी दी गई।

    मिली जानकारी के अनुसार, पुलिसकर्मी का नाम पवन सांगले बताया गया है। वह मुंबई पुलिस के Motor Transport विभाग से जुड़े ड्राइवर हैं। वह प्रदर्शन के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ड्यूटी पर तैनात थे।

    फिलहाल, विभागीय जांच में यह स्पष्ट किया जाना बाकी है कि वीडियो में कही गई धमकी किन परिस्थितियों में दी गई, वीडियो की पूरी पृष्ठभूमि क्या थी और क्या पुलिसकर्मी के खिलाफ आगे कोई अतिरिक्त कार्रवाई की जाएगी।

    वीडियो वायरल होने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया

    वीडियो सामने आने के बाद कांग्रेस और अन्य राजनीतिक संगठनों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। कांग्रेस की मुंबई इकाई ने आरोप लगाया कि अगर वीडियो में दिखाई दे रही घटना सही है, तो यह छात्रों को डराने और उनके लोकतांत्रिक अधिकारों को प्रभावित करने का गंभीर मामला है।

    आम आदमी पार्टी और Cockroach Janta Party (CJP) से जुड़े लोगों ने भी वीडियो को लेकर पुलिस और सरकार पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, इन राजनीतिक प्रतिक्रियाओं को संबंधित दलों के आरोप और बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

    मुंबई में छात्र प्रदर्शनों के बीच बढ़ा विवाद

    मुंबई में हाल के दिनों में छात्रों और समर्थकों ने NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किए हैं। इन प्रदर्शनों के बीच पुलिस की कार्रवाई, हिरासत और प्रदर्शनकारियों के साथ व्यवहार को लेकर विवाद बढ़ा है।

    मुंबई पुलिस ने 23 जुलाई से 6 अगस्त तक शहर में पांच या उससे अधिक लोगों के सार्वजनिक जमावड़े पर रोक लगाने वाला आदेश भी जारी किया था। आदेश में जुलूस और कुछ अन्य सार्वजनिक गतिविधियों पर भी प्रतिबंध लगाया गया था। यह आदेश DCP (Operations) अकबर पठान द्वारा जारी किया गया था।

    इसी पृष्ठभूमि में वायरल वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के साथ व्यवहार पर सार्वजनिक बहस और तेज हो गई है।

    अब जांच के नतीजे पर नजर

    मुंबई पुलिस की विभागीय जांच इस पूरे मामले में अहम होगी। जांच के दौरान वीडियो की प्रामाणिकता, घटना का पूरा संदर्भ और संबंधित पुलिसकर्मी के आचरण की जांच की जाएगी।

    फिलहाल इतना स्पष्ट है कि वायरल वीडियो के बाद संबंधित पुलिस ड्राइवर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू हो चुकी है और उसे सस्पेंड किया गया है। आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।

    इस मामले ने प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस व्यवहार और कानून के संभावित दुरुपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, वायरल वीडियो के आधार पर अंतिम निष्कर्ष निकालने के बजाय विभागीय जांच के नतीजे का इंतजार करना जरूरी है। मुंबई पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही मामले के सभी तथ्यों की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।

    Official Sources

  • जंतर-मंतर के प्रदर्शन पर राजपुरोहित का बड़ा बयान

    जंतर-मंतर के प्रदर्शन पर राजपुरोहित का बड़ा बयान

    जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन पर समाजसेवक लालसिंह राजपुरोहित ने सरकार पर तीखा हमला बोला। भगत सिंह और लाला लाजपत राय का भी किया जिक्र।

    नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच मुंबई के समाजसेवक लालसिंह राजपुरोहित का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है। वीडियो में वह प्रदर्शन के दृश्यों पर सरकार और पुलिस कार्रवाई को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देते नजर आ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों और बच्चों के खिलाफ दमनकारी नीतियां अपनाई जा रही हैं और कहा कि ऐसे आंदोलनों से देश की युवा पीढ़ी और ज्यादा जागरूक होती है।

    लालसिंह राजपुरोहित ने अपने बयान में जंतर-मंतर के प्रदर्शन की तुलना स्वतंत्रता आंदोलन के दौर के आंदोलनों से की। उन्होंने लाला लाजपत राय, भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु का जिक्र करते हुए कहा कि दमन के खिलाफ होने वाले आंदोलनों से क्रांतिकारी विचार पैदा होते हैं।

    ‘आज 56 इंच का सीना सिमट गया’

    वीडियो में लालसिंह राजपुरोहित कहते हैं कि जंतर-मंतर पर दिखाई दिया दृश्य झकझोर देने वाला था। उन्होंने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “आज 56 इंच का सीना सिमट गया।”

    उन्होंने आगे दावा किया कि छात्रों और बच्चों से निपटने के लिए सरकार को कथित रूप से षड्यंत्र करने पड़ रहे हैं। राजपुरोहित ने कहा कि देश की तरुणाई को दबाने की कोशिशों का उल्टा असर हो सकता है।

    हालांकि, यह बयान उनकी राजनीतिक प्रतिक्रिया है। उनके द्वारा लगाए गए आरोपों पर केंद्र सरकार या संबंधित पुलिस अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया इस रिपोर्ट के लिए उपलब्ध नहीं है।

    ‘अंग्रेजों से भी ज्यादा सख्त निकले’

    लालसिंह राजपुरोहित ने प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि “ये तो अंग्रेजों से भी ज्यादा सख्त निकले” और आरोप लगाया कि बच्चों और छात्रों के खिलाफ दमनकारी नीतियां अपनाई गईं।

    जंतर-मंतर पर चल रहा छात्र आंदोलन पिछले कई दिनों से परीक्षा व्यवस्था, कथित पेपर लीक और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर चर्चा में है। खबर के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।

    भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु का किया जिक्र

    अपने बयान में मुंबई के सामाजिक नेता ने स्वतंत्रता आंदोलन का संदर्भ देते हुए कहा कि ऐसे ही आंदोलनों ने भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु जैसे क्रांतिकारियों को जन्म दिया था।

    उन्होंने साइमन कमीशन के खिलाफ हुए आंदोलन और लाला लाजपत राय का जिक्र किया। राजपुरोहित ने कहा कि उस दौर में भी अंग्रेजों की कार्रवाई के खिलाफ लोगों में आक्रोश पैदा हुआ था और उसी संघर्ष ने आगे चलकर क्रांतिकारी आंदोलन को प्रभावित किया।

    लाला लाजपत राय पर साइमन कमीशन के विरोध के दौरान लाठीचार्ज हुआ था और बाद में उनकी मृत्यु हो गई थी। भगत सिंह और उनके साथियों के क्रांतिकारी संघर्ष का यह ऐतिहासिक संदर्भ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के महत्वपूर्ण अध्यायों में शामिल है।

    ‘आज फिर देश की तरुणाई झकझोर दी’

    मुंबई के उत्तर मुंबई जिला से समाजसेवक लालसिंह राजपुरोहित ने अपने बयान में कहा कि जंतर-मंतर पर छात्रों के साथ हुई कथित कार्रवाई ने देश की युवा पीढ़ी को झकझोर दिया है।

    उन्होंने कहा कि सरकार को यह समझना चाहिए कि युवाओं की आवाज को दबाने के बजाय उनकी समस्याओं पर बातचीत करनी चाहिए। उनके मुताबिक, छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर देशभर में बढ़ती नाराजगी को नजरअंदाज करना सरकार के लिए मुश्किल हो सकता है।

    जंतर-मंतर पर क्यों चल रहा है छात्र आंदोलन?

    जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन का मुख्य फोकस परीक्षा व्यवस्था और छात्रों से जुड़े मुद्दे हैं। प्रदर्शनकारी NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और छात्रों की समस्याओं को लेकर जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। आंदोलन के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई है।

    हाल के दिनों में प्रदर्शन का दायरा बढ़ा है और कई छात्र संगठनों, कार्यकर्ताओं तथा सार्वजनिक हस्तियों ने भी आंदोलन के प्रति समर्थन जताया है। वहीं, प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई को लेकर अलग-अलग पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे सामने आए हैं। ऐसे में किसी भी वायरल वीडियो या राजनीतिक बयान को पूरे घटनाक्रम का स्वतंत्र प्रमाण नहीं माना जा सकता।

    पुलिस कार्रवाई को लेकर अलग-अलग दावे

    प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम में पुलिस कार्रवाई को लेकर प्रदर्शनकारियों और राजनीतिक नेताओं की ओर से कई आरोप लगाए गए हैं। कुछ रिपोर्ट्स में प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पुलिस द्वारा बल प्रयोग और आंसू गैस के इस्तेमाल का उल्लेख है।

    हालांकि, हर वायरल वीडियो की घटना और उसमें दिखाई देने वाले लोगों की पहचान की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। लालसिंह राजपुरोहित के बयान में लगाए गए आरोपों पर पुलिस या सरकार का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।

    जंतर-मंतर पर जारी छात्र आंदोलन के बीच लालसिंह राजपुरोहित का बयान सामने आया है। उन्होंने सरकार और पुलिस कार्रवाई पर तीखा हमला बोलते हुए छात्रों के दमन का आरोप लगाया और अपने बयान को स्वतंत्रता आंदोलन के ऐतिहासिक संदर्भों से जोड़ा। हालांकि, उनके आरोप राजनीतिक बयान के तौर पर देखे जाने चाहिए और संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।

    FAQ

    जंतर-मंतर पर चल रहा छात्र आंदोलन किस मुद्दे को लेकर है?

    आंदोलन परीक्षा व्यवस्था, NEET से जुड़ी कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही की मांग को लेकर चल रहा है।

    लालसिंह राजपुरोहित ने जंतर-मंतर प्रदर्शन पर क्या कहा?

    उन्होंने सरकार और पुलिस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि छात्रों और बच्चों के खिलाफ दमनकारी नीतियां अपनाई जा रही हैं। उन्होंने भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु और लाला लाजपत राय का भी जिक्र किया।

    क्या लालसिंह राजपुरोहित का बयान आधिकारिक सरकारी बयान है?

    नहीं। यह एक राजनीतिक नेता की सार्वजनिक प्रतिक्रिया है। उनके आरोपों पर संबंधित सरकार या पुलिस विभाग का आधिकारिक पक्ष अलग से जरूरी है।

  • आयशा खान हिरासत में, मुंबई पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

    आयशा खान हिरासत में, मुंबई पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

    आयशा खान ने दावा किया कि मुंबई पुलिस ने उन्हें बिना वजह हिरासत में लिया और जबरदस्ती पुलिस वैन में खींचा। जानिए पूरा मामला।

    मुंबई: एक्ट्रेस और धुरंधर फेम आयशा खान ने मुंबई पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आयशा ने सोशल मीडिया पर कई वीडियो शेयर कर दावा किया कि उन्हें, उनके भाई और कुछ दोस्तों को बिना किसी स्पष्ट वजह के हिरासत में लिया गया। एक्ट्रेस के मुताबिक, वे सड़क किनारे शांतिपूर्वक खड़ी थीं और किसी तरह का प्रदर्शन या हंगामा नहीं कर रही थीं।

    आयशा खान ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें दादर से वर्ली पुलिस स्टेशन ले जाया गया और पुलिसकर्मियों ने उन्हें जबरदस्ती पुलिस वैन में बैठाया। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में पुलिस की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    आयशा खान ने सोशल मीडिया पर शेयर किए कई वीडियो

    आयशा खान ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरी पर कई वीडियो पोस्ट किए, जिनमें उन्होंने हिरासत में लिए जाने की पूरी घटना के बारे में बताया। एक वीडियो में एक्ट्रेस काफी परेशान और घबराई हुई नजर आ रही हैं।

    आयशा का दावा है कि उनके हाथ डर और गुस्से की वजह से कांप रहे थे। उन्होंने कहा कि उन्होंने न तो कोई विरोध प्रदर्शन शुरू किया था और न ही कोई हंगामा किया था। उनके मुताबिक, वे केवल सड़क किनारे खड़ी थीं।

    एक्ट्रेस ने दावा किया कि उनके भाई और कुछ पुरुष दोस्तों को हिरासत में लिए जाने के बाद वह वहां मौजूद थीं। इसके बाद उन्हें भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया।

    वर्ली पुलिस स्टेशन से आयशा ने शेयर किया वीडियो

    आयशा खान ने वर्ली पुलिस स्टेशन से भी एक वीडियो शेयर किया। उनके मुताबिक, यह कार्रवाई CJP के विरोध प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम के दौरान हुई।

    एक्ट्रेस ने दावा किया कि वह, उनका भाई और उनके दोस्त शांतिपूर्वक खड़े थे। उन्होंने कहा कि उन्होंने न तो नारे लगाए और न ही कोई गैर-कानूनी गतिविधि की।

    हालांकि, पुलिस की ओर से इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इसलिए आयशा द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि फिलहाल उपलब्ध नहीं है।

    पुलिस वैन में मौजूद छात्र ने भी बताई परेशानी

    आयशा द्वारा शेयर किए गए एक अन्य वीडियो में पुलिस वैन में मौजूद एक छात्र अपनी परेशानी बताते हुए नजर आया।

    छात्र ने कहा कि उसका मैथ्स का प्रैक्टिकल एग्जाम था और उसे बिना किसी गलती के हिरासत में लिए जाने की चिंता थी। उसने आशंका जताई कि अगर वह परीक्षा में शामिल नहीं हो पाया, तो इसका असर उसकी पढ़ाई और भविष्य पर पड़ सकता है।

    वीडियो में छात्र की चिंता साफ नजर आ रही थी। हालांकि, छात्र की पहचान और हिरासत में लिए जाने की आधिकारिक वजह की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।

    आयशा ने पुलिस से पूछा- हमें कहां ले जाया जा रहा है?

    एक अन्य क्लिप में आयशा खान पुलिस वैन में मौजूद पुलिसकर्मियों से बार-बार पूछती दिखाई दीं कि उन्हें कहां ले जाया जा रहा है।

    आयशा का दावा है कि उनके सवालों का उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। इस वजह से उनकी चिंता और बढ़ गई। उन्होंने सोशल मीडिया पर इस पूरी कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए।

    चार महिला पुलिसकर्मियों द्वारा वैन में ले जाने का वीडियो शेयर

    आयशा खान ने एक वीडियो भी शेयर किया, जिसमें कुछ महिला पुलिसकर्मी उन्हें पुलिस वैन के अंदर ले जाती दिखाई दे रही हैं।

    इस वीडियो के साथ एक्ट्रेस ने सवाल उठाया कि अगर उन्होंने कोई हंगामा या बहस नहीं की थी, तो उन्हें इस तरह अंदर ले जाने की जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने यह भी सवाल किया कि केवल सड़क पर खड़े होने के लिए उन्हें हिरासत में क्यों लिया गया।

    आयशा ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में पुलिस कार्रवाई पर नाराजगी जताई और दावा किया कि उन्होंने किसी तरह का विरोध या गैर-कानूनी काम नहीं किया था।

    पुलिस के आधिकारिक बयान का इंतजार

    फिलहाल इस मामले में आयशा खान की ओर से लगाए गए आरोप और उनके द्वारा शेयर किए गए वीडियो ही सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी का मुख्य आधार हैं। मुंबई पुलिस की ओर से हिरासत की वजह, कार्रवाई और पूरे घटनाक्रम पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

    आयशा खान ने मुंबई पुलिस पर बिना स्पष्ट वजह हिरासत में लेने और जबरदस्ती पुलिस वैन में ले जाने का आरोप लगाया है। एक्ट्रेस ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर सवाल उठाए हैं। फिलहाल पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

    FAQ

    क्या आयशा खान को मुंबई पुलिस ने हिरासत में लिया था?

    आयशा खान ने सोशल मीडिया वीडियो के जरिए दावा किया है कि उन्हें, उनके भाई और दोस्तों को हिरासत में लिया गया था। पुलिस की ओर से इस दावे पर आधिकारिक पुष्टि या विस्तृत बयान उपलब्ध नहीं है।

    आयशा खान ने मुंबई पुलिस पर क्या आरोप लगाए?

    आयशा खान ने आरोप लगाया कि वह शांतिपूर्वक सड़क किनारे खड़ी थीं, फिर भी उन्हें हिरासत में लिया गया और पुलिसकर्मियों ने उन्हें जबरदस्ती पुलिस वैन में ले जाया।

    आयशा खान को किस पुलिस स्टेशन ले जाया गया?

    आयशा खान द्वारा शेयर किए गए वीडियो के अनुसार, उन्हें दादर से वर्ली पुलिस स्टेशन ले जाया गया।

  • SBI PO Admit Card 2026 जारी, 1500 पदों की Prelims Call Letter डाउनलोड करें

    SBI PO Admit Card 2026 जारी, 1500 पदों की Prelims Call Letter डाउनलोड करें

    SBI PO Admit Card 2026 जारी हो गया है। 1500 पदों की भर्ती के लिए Prelims Call Letter डाउनलोड करने का तरीका, परीक्षा तारीख और जरूरी निर्देश जानें।

    SBI PO Admit Card 2026: State Bank of India ने Probationary Officer भर्ती 2026 की Preliminary Examination के लिए Admit Card जारी कर दिया है। 1,500 PO पदों के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवार अपना Call Letter Registration Number और Password या Date of Birth की मदद से डाउनलोड कर सकते हैं। Prelims परीक्षा अगस्त 2026 में आयोजित की जाएगी।

    State Bank of India यानी SBI PO Recruitment 2026 के लिए आवेदन करने वाले लाखों उम्मीदवारों का इंतजार खत्म हो गया है। बैंक ने 22 जुलाई 2026 को SBI PO Prelims Admit Card 2026 जारी किया है। जिन उम्मीदवारों ने Probationary Officer के 1,500 पदों के लिए आवेदन किया था, वे अब अपना Hall Ticket डाउनलोड कर सकते हैं।

    Admit Card में उम्मीदवार का नाम, Roll Number, परीक्षा की तारीख, Reporting Time, Exam Centre का पता और जरूरी Exam Day Instructions दिए गए हैं। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे Call Letter को समय रहते डाउनलोड करें और उसमें दी गई सभी जानकारी को ध्यान से जांच लें।

    SBI PO Admit Card 2026 कैसे डाउनलोड करें?

    उम्मीदवार नीचे दिए गए आसान Steps को Follow करके अपना SBI PO Prelims Call Letter डाउनलोड कर सकते हैं:

    1. SBI की Official Website पर जाएं।
    2. Careers या Recruitment Section खोलें।
    3. SBI PO Recruitment 2026 से संबंधित Admit Card Link पर Click करें।
    4. अपना Registration Number या Roll Number दर्ज करें।
    5. Password या Date of Birth दर्ज करें।
    6. Captcha Code भरकर Login करें।
    7. आपका SBI PO Prelims Admit Card स्क्रीन पर दिखाई देगा।
    8. Call Letter डाउनलोड करें और भविष्य के लिए इसका Printout निकाल लें।

    उम्मीदवारों को सलाह है कि Admit Card की कई Copies रखने के बजाय एक साफ और स्पष्ट Printout जरूर साथ रखें।

    SBI-PO-Prelims-Admit-Card-2026

    SBI PO Prelims Exam 2026 कब होगा?

    SBI PO Preliminary Examination 2026 अगस्त 2026 में आयोजित की जाएगी। उपलब्ध परीक्षा कार्यक्रम के अनुसार परीक्षा 1 और 2 अगस्त 2026 को आयोजित होने की जानकारी सामने आई है। उम्मीदवारों को अपनी सटीक परीक्षा तारीख, Shift और Reporting Time के लिए अपने Admit Card पर दी गई जानकारी को ही अंतिम मानना चाहिए।

    SBI PO Prelims Exam Pattern 2026

    Preliminary Examination Online Mode में आयोजित होगी और इसमें कुल 100 प्रश्न होंगे। परीक्षा की अवधि 1 घंटे की होगी।

    SubjectQuestionsMarksTime
    English Language404020 मिनट
    Quantitative Aptitude303020 मिनट
    Reasoning Ability303020 मिनट
    Total10010060 मिनट

    Prelims परीक्षा में प्रत्येक Section के लिए अलग-अलग समय निर्धारित रहेगा। Preliminary Examination के Marks Final Merit List में शामिल नहीं किए जाएंगे। हालांकि, उम्मीदवारों को Mains Examination में पहुंचने के लिए Prelims में निर्धारित Selection Criteria को पूरा करना होगा।

    Exam Centre पर कौन-कौन से Documents ले जाना जरूरी है?

    उम्मीदवारों को परीक्षा केन्द्र पर बिना जरूरी Documents के प्रवेश में परेशानी हो सकती है। इसलिए निम्न Documents साथ लेकर जाएं:

    • SBI PO Prelims Admit Card का Printed Copy
    • Valid Photo Identity Proof
    • Admit Card में दिए गए अन्य जरूरी Documents
    • यदि निर्देश दिया गया हो तो Passport Size Photograph

    उम्मीदवारों को अपने Admit Card पर दिए गए Exam Day Instructions को परीक्षा से पहले जरूर पढ़ लेना चाहिए।

    SBI PO Recruitment 2026 में कितने पद हैं?

    SBI ने Probationary Officer Recruitment 2026 के तहत कुल 1,500 पदों पर भर्ती की घोषणा की है। इनमें 1,446 Regular Vacancies और 54 Backlog Vacancies शामिल हैं। Category-wise कुल Vacancy इस प्रकार है:

    CategoryVacancies
    UR588
    OBC390
    SC234
    ST144
    EWS144
    Total1,500

    PwBD उम्मीदवारों के लिए Horizontal Reservation भी लागू है, जिसकी जानकारी SBI के आधिकारिक भर्ती विज्ञापन में दी गई है।

    SBI PO 2026 Selection Process

    SBI PO Recruitment में Selection तीन मुख्य चरणों में होगा:

    Phase 1: Preliminary Examination

    यह 100 Marks की Online Objective Examination होगी। Prelims में English Language, Quantitative Aptitude और Reasoning Ability से प्रश्न पूछे जाएंगे।

    Phase 2: Main Examination

    Prelims में सफल उम्मीदवारों को Main Examination के लिए बुलाया जाएगा। Mains में Objective Test के साथ Descriptive Test भी शामिल होगा।

    Phase 3: Psychometric Test, Group Exercise और Interview

    Main Examination के बाद चयनित उम्मीदवारों को Psychometric Test, Group Exercise और Personal Interview के लिए बुलाया जाएगा।

    Final Selection में Mains और Phase-III के प्रदर्शन को महत्व दिया जाएगा। Prelims के Marks Final Merit में शामिल नहीं किए जाते।

    SBI PO 2026 Salary कितनी है?

    SBI PO पद पर नियुक्त उम्मीदवारों को Junior Management Grade Scale-I यानी JMGS-I के तहत Salary और अन्य Allowances मिलते हैं। भर्ती विज्ञापन के अनुसार Basic Pay ₹48,480 से शुरू होती है और Pay Scale ₹48,480–₹85,920 है। SBI PO का Approximate Annual CTC मुंबई Posting के आधार पर करीब ₹21.97 लाख बताया गया है।

    इसके अलावा Officers को Dearness Allowance, House Rent Allowance, City Compensatory Allowance, Medical Benefits, NPS और अन्य सुविधाएं भी मिलती हैं।

    SBI PO 2026 Recruitment की महत्वपूर्ण तारीखें

    EventDate
    Notification जारी18 June 2026
    Online Application शुरू18 June 2026
    आवेदन की अंतिम तारीख8 July 2026
    Prelims Call Letter22 July 2026 से
    Prelims ExaminationAugust 2026
    Mains ExaminationSeptember 2026
    Phase-IIIOctober–November 2026
    Final ResultNovember–December 2026

    आवेदन और परीक्षा की विस्तृत तारीखों में किसी भी बदलाव के लिए उम्मीदवारों को SBI की Official Recruitment Information को ही प्राथमिकता देनी चाहिए।

    SBI PO Admit Card 2026: उम्मीदवार इन बातों का रखें ध्यान

    Admit Card डाउनलोड करने के बाद उम्मीदवार अपना नाम, Roll Number, Photograph, Exam Date, Reporting Time और Exam Centre का Address ध्यान से जांच लें।

    अगर किसी जानकारी में गलती दिखाई देती है, तो उम्मीदवारों को परीक्षा से पहले संबंधित Recruitment Authority के Official Contact Channel से संपर्क करना चाहिए। परीक्षा के दिन देर से पहुंचने से बचने के लिए उम्मीदवार Exam Centre की Location पहले से जांच लें।

    SBI PO 2026 Prelims Admit Card जारी होने के साथ ही 1,500 Probationary Officer पदों की भर्ती प्रक्रिया अब अगले महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है। उम्मीदवार अपना Call Letter जल्द डाउनलोड करें, उसमें दिए गए Exam Centre और Reporting Time को ध्यान से पढ़ें और परीक्षा के लिए अपनी तैयारी को अंतिम रूप दें। परीक्षा केन्द्र पर Admit Card और जरूरी Photo ID साथ ले जाना न भूलें।

    Official Sources

    FAQ

    SBI PO Admit Card 2026 कब जारी हुआ?

    SBI PO Prelims Admit Card 2026 को 22 जुलाई 2026 को जारी किया गया।

    SBI PO Prelims Admit Card कैसे डाउनलोड करें?

    उम्मीदवार Registration Number या Roll Number और Password या Date of Birth की मदद से अपना Call Letter डाउनलोड कर सकते हैं।

    SBI PO 2026 में कितने पद हैं?

    SBI PO Recruitment 2026 के तहत कुल 1,500 Probationary Officer पदों पर भर्ती की जा रही है।

    SBI PO Prelims Exam 2026 कब होगा?

    Prelims Examination अगस्त 2026 में आयोजित की जाएगी। उम्मीदवार अपने Admit Card पर दी गई सटीक Exam Date और Reporting Time को अंतिम मानें।