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महाराष्ट्र में खिलाड़ियों के 5% नौकरी आरक्षण की नई नीति मंजूर, पुराने प्रमाणपत्रों का 3 महीने में सत्यापन जरूरी; जानिए किसे मिलेगा लाभ।
मुंबई: महाराष्ट्र में सरकारी नौकरी का इंतजार कर रहे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के लिए बड़ा फैसला हुआ है। राज्य मंत्रिमंडल ने सरकारी, अर्ध-सरकारी और अन्य पात्र संस्थाओं में खिलाड़ियों के लिए लागू 5% नौकरी आरक्षण की संशोधित नीति को मंजूरी दे दी है। नई व्यवस्था में सबसे अहम बदलाव यह है कि आरक्षण का लाभ लेने वाले खिलाड़ियों को अपने Sports Certificate की वैधता का सत्यापन तीन महीने के भीतर कराना होगा।
यह तीन महीने की समयसीमा नए संशोधित शासन निर्णय (GR) के जारी होने की तारीख से लागू होगी। सरकार ने Sports Quota से जुड़े पहले के सभी शासन निर्णयों को रद्द कर एक एकीकृत नीति लागू करने का फैसला किया है। नया GR जल्द जारी किया जाएगा।
5% Sports Quota किन नौकरियों में लागू होगा?
संशोधित नीति के तहत यह आरक्षण मंत्रालयीन विभागों और उनके अधीन सरकारी कार्यालयों के साथ जिला परिषद, पंचायत समिति, ग्राम पंचायत, महानगरपालिका, सरकारी उपक्रम, मंडल, महामंडल, विश्वविद्यालय, सरकारी अनुदान प्राप्त शैक्षणिक संस्थान, आश्रमशाला, सहकारी संस्थाओं और सरकारी निधि अथवा अनुदान प्राप्त अन्य पात्र संस्थाओं में सीधी भर्ती के पदों पर लागू रहेगा।
इसमें समूह-अ, समूह-ब, समूह-क और समूह-ड के पद शामिल होंगे।
महाराष्ट्र में 5% Sports Quota की व्यवस्था 30 अप्रैल 2005 से लागू है। क्रीड़ा विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार अब तक 4,949 खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी में इसका लाभ मिल चुका है।
किस खिलाड़ी को किस पद के लिए पात्रता मिलेगी?
नई नीति में खेल उपलब्धि और प्रतियोगिता के स्तर के आधार पर अलग-अलग समूहों के लिए पात्रता तय की गई है।
समूह-अ: ओलंपिक, एशियन गेम्स, वरिष्ठ विश्व एवं एशियन चैंपियनशिप/कप, कॉमनवेल्थ गेम्स, टेनिस ग्रैंड स्लैम, ग्रैंडमास्टर स्तर की शतरंज प्रतियोगिताओं और पैरालंपिक सहित अधिकृत अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त खिलाड़ी।
समूह-ब राजपत्रित: युवा/कनिष्ठ विश्व एवं एशियन चैंपियनशिप, कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप, यूथ ओलंपिक तथा संबंधित अंतरराष्ट्रीय स्कूल, विश्वविद्यालय और पैरा प्रतियोगिताओं के पदक विजेता।
समूह-ब अराजपत्रित: नेशनल गेम्स, राष्ट्रीय चैंपियनशिप, राष्ट्रीय फेडरेशन कप, पैरा नेशनल गेम्स और राष्ट्रीय स्कूल खेल प्रतियोगिताओं के पदक विजेता।
समूह-क: खेलो इंडिया, अखिल भारतीय अंतर-विश्वविद्यालय, राज्य स्तरीय वरिष्ठ/युवा/कनिष्ठ, स्कूल, अंतर-विश्वविद्यालय और पैरा खेल प्रतियोगिताओं के पदक विजेता।
समूह-ड: निर्धारित खेल योग्यता रखने वाले खिलाड़ी अथवा वरिष्ठ वर्ग की राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता, राष्ट्रीय चैंपियनशिप और वरिष्ठ पैरा राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेने वाले खिलाड़ी।
क्रिकेट, कबड्डी, खो-खो और शतरंज भी पात्र खेलों में
नई नीति में खेलों की पात्रता का दायरा बढ़ाया गया है। 2005 के बाद लगातार तीन ओलंपिक में शामिल खेलों के साथ क्रिकेट, कबड्डी, खो-खो, शतरंज और मल्लखंब को भी शामिल किया गया है।
ओलंपिक, पैरालंपिक, एशियन गेम्स, पैरा एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स में तीन ओलंपिक वाली शर्त लागू नहीं होगी।
पात्र खेलों में एथलेटिक्स, बैडमिंटन, बॉक्सिंग, फुटबॉल, हॉकी, जूडो, रोइंग, शूटिंग, तैराकी, टेबल टेनिस, वेटलिफ्टिंग, कुश्ती, टेनिस, गोल्फ, घुड़सवारी, सेलिंग, स्पोर्ट्स क्लाइम्बिंग और अन्य निर्धारित खेल भी शामिल हैं।
पुराने Sports Certificate वालों के लिए क्या बदलेगा?
नई नीति का यह हिस्सा हजारों खिलाड़ियों के लिए महत्वपूर्ण है। पुराने शासन निर्णयों के तहत Sports Quota के पात्र खिलाड़ियों को भी नए GR की तारीख से तीन महीने के भीतर अपने Sports Certificate का verification कराना होगा।
यानी केवल पहले से जारी प्रमाणपत्र होना पर्याप्त नहीं होगा। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उसकी वैधता की पुष्टि कराना जरूरी होगा।
‘क्रीड़ा ई-प्रमाण’ से होगी डिजिटल जांच
सरकार Sports Certificate verification के लिए ‘क्रीड़ा ई-प्रमाण’ की डिजिटल व्यवस्था लागू कर रही है। प्रतियोगिता समाप्त होने के सात दिनों के भीतर परिणामों को डिजिटल हस्ताक्षर के साथ upload करना अनिवार्य होगा।
Blockchain technology के जरिए रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने और automated cryptographic hash के माध्यम से उसकी authenticity जांचने की व्यवस्था की जाएगी। इसका उद्देश्य फर्जी और छेड़छाड़ किए गए खेल प्रमाणपत्रों पर रोक लगाना है।
5% आरक्षण का उद्देश्य क्या है?
सरकार के मुताबिक इस नीति का उद्देश्य राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सरकारी रोजगार में अवसर देना और उनकी सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा मजबूत करना है।
Sports Quota को Mission Lakshyavedh जैसी खेल प्रोत्साहन पहलों के साथ देखने पर इसका व्यापक उद्देश्य खिलाड़ियों को बेहतर training और competition के साथ भविष्य की employment security उपलब्ध कराना भी है।
महाराष्ट्र कैबिनेट के अन्य फैसले
PRAGATI Health Project
सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत करने के लिए 2026 से 2031 तक PRAGATI Project लागू करने को मंजूरी दी गई है। परियोजना की अनुमानित लागत ₹4,250 करोड़ है, जिसमें ₹2,975 करोड़ Asian Development Bank loan और ₹1,275 करोड़ राज्य का हिस्सा होगा।
इसके तहत कोल्हापुर और नांदेड में 500-500 बेड, नागपुर और लातूर में 300-300 बेड तथा पुणे में 200 बेड का विशेष रेफरल अस्पताल प्रस्तावित है। कुल 2,430 पद भी बनाए जाएंगे।
छत्रपति संभाजीनगर के Auric City, Shendra में Hyosung India के Spandex/Elastomeric Yarn manufacturing project को Integrated and Sustainable Textile Policy 2023-28 के तहत विशेष मामले में capital grant देने को मंजूरी मिली है। सरकार ने इसे मराठवाड़ा और विदर्भ में निवेश तथा रोजगार की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया है।
Madha में District and Additional Sessions Court
सोलापुर के Madha में नया District and Additional Sessions Court स्थापित होगा। अभी यहां के मामले Barshi court में चलते हैं। नए न्यायालय के लिए 20 नियमित और 6 outsourced पद मंजूर किए गए हैं।
मुंबई के Bhuleshwar स्थित Kaivalyadham Yogic Centre के भूमि पट्टे का अगले 30 वर्षों के लिए ₹12 सालाना की रियायती दर पर नवीनीकरण मंजूर किया गया है।
वहीं Chembur की Bhikkhu Sangh United Buddhist Mission संस्था को उसके कब्जे में रही 1,735 वर्ग मीटर सरकारी जमीन नाममात्र दर पर lease पर देने को मंजूरी दी गई है।
Koradi में Mahalakshmi Jagdamba Sansthan को जमीन
नागपुर के Koradi में तीर्थक्षेत्र विकास योजना के तहत विकसित सरकारी जमीन को Shri Mahalakshmi Jagdamba Sansthan को 30 वर्ष के लिए lease पर देने की मंजूरी दी गई है। इसका उद्देश्य तीर्थक्षेत्र में सुविधाओं और रखरखाव का बेहतर प्रबंधन करना है।
Sports Quota के मामले में अब संशोधित एकीकृत Government Resolution जारी होना सबसे महत्वपूर्ण अगला कदम है। इसी के बाद verification की औपचारिक प्रक्रिया और तीन महीने की समयसीमा प्रभावी होगी।
खिलाड़ियों के लिए नई नीति का सबसे बड़ा बदलाव केवल 5% आरक्षण जारी रखना नहीं, बल्कि eligibility, certificate verification और digital authentication को एकीकृत व्यवस्था में लाना है।
BMC ने 30,714 छात्रों की Keshav Srushti ट्रिप के लिए ₹2.46 करोड़ मंजूर किए। ₹802 rate, tender और RSS connection पर विपक्ष ने सवाल उठाए।
मुंबई:BMC के 30,714 कक्षा 7 के छात्रों को Keshav Srushti, Uttan ले जाने की ₹2.46 करोड़ की योजना अब सिर्फ एक educational trip का मामला नहीं रह गई है। Standing Committee ने 28 अगस्त को विपक्ष के विरोध के बावजूद proposal को majority से मंजूरी दे दी। लेकिन इस फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है—30 हजार से ज्यादा बच्चों के लिए Keshav Srushti को ही क्यों चुना गया और ₹802 प्रति छात्र का rate किस आधार पर तय हुआ?
विपक्ष का आरोप है कि Keshav Srushti का RSS के संस्थापक डॉ. K.B. Hedgewar से institutional connection है और BMC के proposal में इस संस्था के लिए “Monopoly” तथा सामान्य tender process में relaxation का सवाल भी सामने आता है। हालांकि, इन आरोपों को अभी भ्रष्टाचार या किसी राजनीतिक साजिश का साबित तथ्य नहीं माना जा सकता। असली जवाब BMC के selection और costing documents से ही मिलेगा।
30,714 बच्चों पर ₹2.46 करोड़ का पूरा मामला
BMC के reported proposal के मुताबिक 2026-27 में municipal schools की कक्षा 7 के छात्रों के लिए “Environment Study and Training Educational Trip” आयोजित की जाएगी।
कुल 30,714 छात्रों का अनुमान लगाया गया है। इनमें 30,302 primary section और 412 secondary section के छात्र बताए गए हैं।
कुल खर्च ₹2,46,32,628 यानी करीब ₹2.46 करोड़ है। प्रति छात्र रकम ₹802 है।
जानकारी
विवरण
कुल छात्र
30,714
कक्षा
7वीं
कुल प्रस्तावित खर्च
₹2,46,32,628
प्रति छात्र
₹802
जगह
Keshav Srushti, Uttan, Bhayandar
Academic Year
2026-27
Programme
Environment Study & Training Educational Trip
Reported proposal के मुताबिक package में transport, breakfast, lunch, evening snack और insurance जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
Keshav Srushti को ही क्यों चुना गया?
यही इस पूरे विवाद का सबसे अहम सवाल है।
Keshav Srushti कोई सामान्य picnic spot नहीं है। Uttan में स्थित इस बड़े campus में organic farming, dairy, beekeeping, medicinal plants, waste management, recycling, water management, solar energy और biodiversity जैसी activities होती हैं। BMC के पक्ष में सबसे मजबूत argument भी यही है कि बच्चों को environment का practical exposure दिया जा सकता है।
लेकिन Mumbai में environmental education और conservation पर काम करने वाली दूसरी institutions भी हैं।
Congress group leader Ashraf Azmi ने BNHS Conservation Education Centre, Maharashtra Nature Park, CERE, Conservation Action Trust, WWF-India, CEED और Nature Forever Society जैसी institutions का विकल्प गिनाते हुए सवाल किया कि इन organisations को opportunity क्यों नहीं दी गई।
इसलिए असली सवाल यह नहीं है कि Keshav Srushti में environmental activities हैं या नहीं। सवाल है:
“BMC ने दूसरी institutions के मुकाबले इसी campus को कैसे evaluate किया?”
क्या दूसरी organisations से proposals या quotations लिए गए? क्या comparative assessment हुआ? क्या Keshav Srushti की facilities को दूसरे options के मुकाबले बेहतर पाया गया? इसका अब तक बीएमसी प्रशासन की और से कोई भी जवाब प्राप्त नहीं हुआ है।
Keshav Srushti का RSS connection विपक्ष की तरफ से लगाया गया कोई नया label भर नहीं है। Keshav Srushti की अपनी description में campus को RSS के संस्थापक डॉ. K.B. Hedgewar की स्मृति को समर्पित बताया गया है।
इसके campus ecosystem में Rambhau Mhalgi Prabodhini यानी RMP से जुड़ी activities भी मौजूद हैं। इसी broader institutional background को लेकर Congress और दूसरे opposition members ने सवाल उठाया कि अलग-अलग medium और communities से आने वाले municipal school students को ऐसे campus में environmental education के नाम पर क्यों ले जाया जा रहा है।
लेकिन यहां एक जरूरी distinction है।
अभी ऐसा कोई verified evidence सामने नहीं आया है कि BMC के बच्चों को इस trip के दौरान RSS की political ideology सिखाने का programme बनाया गया है। BMC का official justification environmental education है। इसलिए “RSS से जुड़ी संस्था” और “बच्चों को RSS ideology सिखाई जाएगी”—इन दोनों बातों को एक नहीं माना जा सकता।
Opposition का दूसरा और ज्यादा administrative सवाल tender process को लेकर है।
Mumbai Congress ने दावा किया है कि BMC के proposal में Keshav Srushti की “Monopoly” का reference है और normal tender process में relaxation की मांग की गई है।
Standing Committee में भी विपक्ष ने tender न बुलाए जाने को लेकर सवाल उठाए। खबर के मुताबिक proposal का विरोध करते हुए Congress, Shiv Sena (UBT) और Samajwadi Party के सदस्यों ने selection process पर आपत्ति जताई।
लेकिन यहां भी एक सावधानी जरूरी है।
सिर्फ यह कहना कि “tender नहीं हुआ, इसलिए नियम टूटा” अभी सही नहीं होगा। अगर BMC ने किसी specific procurement rule या exemption के तहत direct selection किया है, तो उसकी legality proposal और supporting documents देखकर ही तय होगी।
इसलिए असली सवाल है:
“किस rule के तहत Keshav Srushti को चुना गया और tender से relaxation क्यों दी गई?”
₹802 का rate भी जांच के दायरे में क्यों?
30,714 छात्रों के लिए ₹802 प्रति छात्र का मतलब कुल ₹2.46 करोड़ है।
यही वजह है कि rate calculation भी इस कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाता है।
Keshav Srushti से जुड़े पुराने published outing rates में 2024-25 के “A Date with Nature” programme की कीमत ₹550 प्रति व्यक्ति बताई गई थी। उस listing में transport शामिल नहीं था।
2020 के एक अलग organised outing में ₹500-₹550 प्रति व्यक्ति का package था, जिसमें breakfast, lunch, evening refreshments और Keshav Srushti tour शामिल था।
लेकिन इन पुराने rates को 2026 के BMC package से सीधे compare करके overcharging का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। 2026 के package में transport और insurance भी शामिल बताए गए हैं और services की costing अलग हो सकती है।
फिर भी एक सवाल जरूर बनता है:
₹802 में Keshav Srushti के environmental programme/venue का actual component कितना है?
Transport पर कितना?
Food पर कितना?
Insurance पर कितना?
और क्या BMC को school students के लिए कोई special institutional rate मिला?
इन सवालों का जवाब detailed costing sheet से ही मिलेगा।
पहली layer है educational justification। Keshav Srushti में वास्तव में environment, agriculture, biodiversity और waste-management से जुड़ी activities मौजूद हैं। इसलिए environmental study के लिए वहां students को ले जाना अपने आप में असंभव या असंगत फैसला नहीं है।
दूसरी layer है selection और procurement।
यहीं ज्यादा गंभीर सवाल हैं—एक ही institution क्यों, ₹802 का rate कैसे तय हुआ, दूसरी organisations को मौका मिला या नहीं और tender relaxation किस आधार पर हुई।
अगर BMC इन सवालों का documents के साथ जवाब देता है, तो controversy का बड़ा हिस्सा साफ हो सकता है।
Congress के Ashraf Azmi ने proposal को वापस लेने और दूसरी environmental organisations को मौका देने की मांग की। MNS के Yashwant Killadar ने भी विरोध का समर्थन किया।
दूसरी तरफ ruling side ने environmental education के practical benefit का argument दिया। BJP के Ganesh Khankar ने कहा कि बच्चों को यहां practical experience मिलेगा। Standing Committee chairman Prabhakar Shinde ने opposition की आपत्ति को खारिज करते हुए proposal को majority से मंजूरी दे दी।
यानी political opposition के बावजूद administrative approval आगे बढ़ चुका है।
फिलहाल BMC Standing Committee ने 30,714 छात्रों की Keshav Srushti environmental trip के लिए करीब ₹2.46 करोड़ के proposal को मंजूरी दे दी है। RSS connection और selection process पर विपक्ष ने गंभीर सवाल उठाए हैं, जबकि BMC की तरफ से इसे environmental education programme के तौर पर justify किया गया है।
अब इस मामले की असली तस्वीर इस बात से साफ होगी कि BMC Keshav Srushti के selection, ₹802 rate और tender relaxation का documentary justification कितना स्पष्ट करती है।
मुंबई में ऑस्ट्रेलिया की बड़ी यूनिवर्सिटी UWA का कैंपस खुलेगा। UGC से मंजूरी मिल गई है। जानें सितंबर 2026 admission, courses, fees और scholarship की जानकारी।
मुंबई: मुंबई में अब ऑस्ट्रेलिया की एक बड़ी यूनिवर्सिटी का campus शुरू होने जा रहा है। University of Western Australia (UWA) को मुंबई में अपना international campus शुरू करने के लिए University Grants Commission (UGC) से Letter of Approval मिल गया है। इसके साथ ही सितंबर 2026 में Mumbai campus में students के पहले batch की पढ़ाई शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है।
UWA के मुताबिक, students के campus आने से पहले orientation programme आयोजित किया जाएगा। इसमें उन्हें campus, पढ़ाई के तरीके और academic environment की जानकारी दी जाएगी।
लेकिन इस खबर के साथ Mumbai के students के लिए कई बड़े सवाल भी सामने आए हैं—कौन से courses होंगे, fees कितनी होगी, admission कैसे मिलेगा, scholarship मिलेगी या नहीं और Mumbai से पढ़ने के बाद Australia में आगे पढ़ाई का रास्ता क्या होगा?
UWA का Mumbai campus Andheri East में है। यह Marol Naka Metro Station के पास है और Mumbai Airport तथा Western Express Highway से भी अच्छी तरह connected है।
UWA के अनुसार campus Marol Naka Metro से करीब 1 मिनट, airport से करीब 5 मिनट और Western Express Highway से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर है।
इस location की वजह से Mumbai और आसपास के students के लिए daily travel comparatively आसान हो सकता है।
UWA Mumbai में कौन से Courses होंगे?
UWA ने India campuses के लिए Technology, Business और Management से जुड़े कई programmes रखे हैं।
इनमें Computer Science, Cyber Security, Data Science, Artificial Intelligence, Business Management, Global Business, Enterprise and Innovation और Economics जैसे courses शामिल हैं।
Postgraduate level पर MBA और Master of Information Technology भी portfolio में शामिल हैं।
हालांकि हर course हर intake में उपलब्ध हो, यह जरूरी नहीं है। इसलिए September 2026 admission के लिए चुने गए programme की current availability UWA से confirm करना जरूरी है।
UWA Mumbai की Fees कितनी होगी?
Students के लिए सबसे बड़ा सवाल fees का है।
UWA की 2026 indicative fee information के मुताबिक Computer Science और Business Management जैसे कुछ undergraduate programmes की first-year tuition fee करीब ₹14.52 लाख है।
Master of Information Technology की indicative first-year tuition fee करीब ₹19.25 लाख बताई गई है।
ये tuition fees indicative हैं। दूसरे charges अलग हो सकते हैं और future में fee revise भी हो सकती है।
Course
2026 Indicative First-Year Fee
Computer Science
करीब ₹14.52 लाख
Business Management
करीब ₹14.52 लाख
Master of Information Technology
करीब ₹19.25 लाख
September 2026 Admission की Last Date क्या है?
UWA India की मौजूदा जानकारी के अनुसार September 2026 Mumbai intake के लिए applications 31 August 2026 तक open हैं।
यानी admission लेने की तैयारी कर रहे students के पास आवेदन पूरा करने के लिए बहुत कम समय बचा है।
Application से पहले course eligibility, academic requirements, English language requirement और जरूरी documents की जानकारी जरूर check करनी चाहिए।
क्या UWA Mumbai में Scholarship मिलेगी?
UWA ने Indian students के लिए scholarship options भी रखे हैं।
Academic Merit Award के तहत eligible students को 25% tuition fee waiver मिल सकता है। इसके लिए academic criteria में कम से कम 80% aggregate जैसी शर्तें शामिल हैं।
इसके अलावा Premier Academic Award के तहत Maharashtra और Tamil Nadu के selected students के लिए 100% tuition fee waiver का provision रखा गया था। Maharashtra से 3 और Tamil Nadu से 3 students तक इसका फायदा पा सकते थे।
हालांकि September 2026 intake की scholarship application window अब बंद हो चुकी है।
क्या Mumbai से मिलने वाली Degree Australia वाली UWA की होगी?
यह सवाल भी students और parents के लिए काफी important है।
UGC के Foreign Higher Educational Institutions framework के तहत India में approved foreign university campus को academic quality और qualification से जुड़े निर्धारित नियमों का पालन करना होता है।
UWA Mumbai University of Western Australia का international campus model है, इसलिए इसे सामान्य private coaching या franchise centre की तरह नहीं देखा जाना चाहिए।
हालांकि किसी specific course की degree, recognition और आगे higher studies या employment के लिए equivalence जैसी जरूरतों को admission से पहले course level पर verify करना बेहतर रहेगा।
क्या Mumbai से पढ़कर Australia जाने का मौका मिलेगा?
UWA India campus को global learning और international opportunities से जोड़ने की योजना है। Students के लिए international exposure और आगे के pathways का scope रखा गया है।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर student को automatic Australia transfer मिलेगा। यह चुने गए course, eligibility और programme rules पर depend करेगा।
अगर किसी student का लक्ष्य आगे Australia में पढ़ाई करना है, तो admission से पहले अपने course के available pathway और transfer options की जानकारी लेना जरूरी होगा।
Internship और Job के मामले में क्या फायदा होगा?
UWA Mumbai का focus सिर्फ classroom education तक सीमित नहीं है। University industry exposure, applied learning और employability पर भी जोर दे रही है।
Andheri East की location Mumbai के corporate और startup ecosystem के करीब है। इससे students को industry exposure और professional networking के opportunities मिल सकते हैं।
हालांकि अभी UWA Mumbai के लिए ऐसा verified placement data उपलब्ध नहीं है जिसके आधार पर average salary, placement percentage या guaranteed job का दावा किया जा सके।
Mumbai में Foreign Universities की Competition बढ़ेगी
UWA की entry ऐसे समय हो रही है जब Mumbai में foreign universities का presence तेजी से बढ़ रहा है।
University of York, University of Bristol, University of Aberdeen और Illinois Institute of Technology जैसे institutions को भी Mumbai region में academic operations शुरू करने की मंजूरी मिल चुकी है।
इससे Mumbai के students के सामने आने वाले समय में UK, US और Australia की universities के नए options खुल सकते हैं।
Mumbai के Education Sector पर क्या असर पड़ेगा?
UWA Mumbai का campus शुरू होना सिर्फ एक नई university की entry नहीं है। यह Mumbai में international higher education के बढ़ते trend का हिस्सा है।
NEP 2020 में higher education के internationalisation पर जोर दिया गया है। Foreign universities के India campuses इसी दिशा में एक बड़ा कदम माने जा रहे हैं।
इसका फायदा उन students को हो सकता है जो international university से पढ़ना चाहते हैं लेकिन पूरी degree के लिए विदेश नहीं जाना चाहते।
भारत से हर साल बड़ी संख्या में students higher education के लिए विदेश जाते हैं। ऐसे में India में foreign university campuses बढ़ने से students को देश में रहकर international education लेने का नया option मिल रहा है।
हालांकि इससे विदेश जाने वाले students की संख्या कितनी बदलेगी, यह अभी कहना जल्दबाजी होगी। इसका असली असर fees, course quality, scholarship, degree recognition और career outcomes सामने आने के बाद ही पता चलेगा।
UWA Mumbai Campus: जरूरी जानकारी एक नजर में
जानकारी
Details
University
University of Western Australia (UWA)
Campus
Mumbai
Location
Andheri East
Nearby Metro
Marol Naka
पहला Batch
September 2026
UGC Status
Letter of Approval
प्रमुख Courses
Computer Science, AI, Data Science, Cyber Security, Business आदि
Indicative UG Fee
करीब ₹14.52 लाख प्रति वर्ष
MIT Fee
करीब ₹19.25 लाख first year
September Application Deadline
31 August 2026
Scholarship
25% merit award; selected Maharashtra students के लिए 100% award framework
अब Mumbai के Students के लिए क्या बदला?
UWA Mumbai campus शुरू होने के बाद students के पास Mumbai में रहते हुए Australia की एक established university के academic system से जुड़े programmes पढ़ने का नया option होगा।
लेकिन फैसला सिर्फ university के नाम पर नहीं होना चाहिए। Course, total fees, scholarship, degree recognition, career opportunities और future Australia pathway को देखकर ही students और parents को decision लेना चाहिए।
सितंबर 2026 में पहला batch शुरू होने के साथ अब यह देखना दिलचस्प होगा कि UWA Mumbai students के लिए international education को Mumbai में कितना practical और valuable बना पाता है।
ISRO Recruitment 2026 में Scientist Engineer के 175 पदों पर आवेदन शुरू हो गया है। ₹56,100 बेसिक सैलरी, eligibility, exam और fee की पूरी जानकारी।
नई दिल्ली/मुंबई: Engineering करने वाले युवाओं के लिए बड़ी खबर है। ISRO ने Scientist/Engineer ‘SC’ के 175 पदों पर भर्ती के लिए online application शुरू कर दिया है। आवेदन की प्रक्रिया 27 अगस्त 2026 से शुरू हो चुकी है और eligible candidates 16 सितंबर 2026 रात 11:55 बजे तक form भर सकते हैं।
इस recruitment में Electronics, Mechanical और Computer Science Engineering से जुड़े candidates को मौका मिलेगा। Selected candidates को Level-10 Pay Matrix में नौकरी मिलेगी, जहां minimum basic salary ₹56,100 प्रति माह से शुरू होगी।
लेकिन यहां सबसे जरूरी बात vacancy या salary नहीं, बल्कि eligibility के rules हैं। 65% marks होने के बावजूद कुछ candidates eligible नहीं होंगे। Degree का नाम, CGPA, backlog, course duration, MCA/M.Tech और AMIE से जुड़े rules application से पहले समझना जरूरी है।
इस recruitment के लिए relevant BE/B.Tech या equivalent qualification जरूरी है।
Post
Qualification
Electronics
BE/B.Tech या accepted allied discipline
Mechanical
BE/B.Tech या accepted allied discipline
Computer Science
BE/B.Tech या accepted allied discipline
तीनों disciplines में graduation में minimum 65% marks या 6.84 CGPA जरूरी है।
Age की बात करें तो 16 सितंबर 2026 को maximum age 28 साल होनी चाहिए।
लेकिन यहीं से कुछ important rules शुरू होते हैं।
आपकी Degree का नाम अलग है तो भी मौका हो सकता है
अगर आपकी degree का नाम exactly Electronics, Mechanical या Computer Science नहीं है तो तुरंत खुद को ineligible न मानें।
Electronics category में Applied Electronics, Electrical & Electronics, Electronics & Communication, Electronics & Instrumentation, Electronics & Telecommunication, Industrial Electronics, Power Electronics, Telecommunication, Instrumentation & Control, Avionics जैसी कई allied disciplines स्वीकार की गई हैं।
Mechanical में Aeronautical, Aerospace, Industrial & Production, Manufacturing, Mechanical & Automation, Mechatronics, Production Engineering, Metallurgical & Materials और Mechanical Engineering Design जैसी disciplines शामिल हैं।
Computer Science category में Computer Engineering, Computer Science & Technology, CS & IT, Information Technology, Information Science, AI & ML, AI & Data Science, Cyber Security, Software Engineering, Big Data Analytics, Cloud Computing और Computer Networking जैसी disciplines भी शामिल हैं।
इसलिए degree का नाम अलग होने पर official discipline list से match करना जरूरी है।
65% है फिर भी Form Reject हो सकता है!
ISRO का 65% rule जितना simple दिखता है, उतना है नहीं।
अगर आपकी marksheet में सिर्फ CGPA है तो वही CGPA 6.84 या उससे ज्यादा होना चाहिए। University की conversion formula लगाकर कम CGPA को percentage में बदलकर eligibility हासिल नहीं की जा सकती।
अगर marksheet में percentage और CGPA दोनों दिए हैं तो दोनों में से कम से कम एक ISRO के required benchmark को पूरा करना चाहिए।
सबसे बड़ा trap course duration का है।
अगर आपकी B.Tech चार साल की थी लेकिन backlog के कारण आपने पांच साल में graduation पूरी की, तो आप eligible नहीं होंगे।
इसलिए apply करने से पहले यह check करें:
Eligibility Check
Rule
Percentage
65% या ज्यादा
CGPA
6.84 या ज्यादा
Course duration
निर्धारित अवधि में graduation complete
Qualification
Relevant BE/B.Tech/equivalent
MCA या M.Tech किया है तो क्या Apply कर सकते हैं?
सिर्फ MCA के आधार पर Scientist/Engineer ‘SC’ के लिए eligibility नहीं बनती।
सिर्फ M.Tech होने से भी BE/B.Tech की essential qualification replace नहीं होती। अगर आपकी BE/B.Tech required marks पूरा नहीं करती तो M.Tech के अच्छे marks से यह कमी पूरी नहीं होगी।
Interview में online application में दी गई details को prove करने वाले original documents भी दिखाने होंगे।
Exam Centre कहां मिलेगा?
ISRO ने Written Test के लिए 37 cities दी हैं।
इनमें Mumbai, Pune, Bengaluru, Ahmedabad, Chennai, Hyderabad, Delhi, Kolkata, Jaipur, Nagpur, Lucknow, Patna, Varanasi, Thiruvananthapuram, Vijayawada और Visakhapatnam समेत कई शहर शामिल हैं।
लेकिन exam city और job posting को एक न समझें।
Mumbai चुनने का मतलब यह नहीं कि selection के बाद posting Mumbai में ही होगी।
Application submit होने के बाद exam centre बदलने का provision भी नहीं है।
ISRO की तैयारी के लिए Previous Papers भी उपलब्ध
इस recruitment की तैयारी करने वाले candidates के लिए ISRO ने official recruitment page पर Electronics, Mechanical और Computer Science के 2023 और 2025 के previous papers उपलब्ध कराए हैं।
पहले इन papers से question level समझना और फिर technical तथा aptitude preparation करना ज्यादा useful रहेगा।
PwBD Candidates के लिए जरूरी Rule
PwBD reservation के लिए minimum 40% relevant benchmark disability जरूरी है।
Disability categories में blindness/low vision, deaf/hard of hearing, locomotor disability, autism/intellectual disability/specific learning disability/mental illness और multiple disabilities शामिल हैं।
Backlog PwBD vacancies को applicable rules के अनुसार categories के बीच interchange किया जा सकता है। इसलिए किसी category में zero दिखने पर भी eligible PwBD candidate को apply करने से पहले पूरी notification check करनी चाहिए।
कौन-सी गलती candidature खत्म कर सकती है?
Incomplete application, गलत information, missing documents, unclear uploads, false NOC claim या recruitment procedure से deviation candidature cancel करा सकता है।
अगर इन सवालों का जवाब हां है, तो ISRO Scientist/Engineer ‘SC’ Recruitment 2026 में आपके लिए आवेदन का रास्ता खुला है।
आवेदन की आखिरी तारीख 16 सितंबर 2026 रात 11:55 बजे है। Last day का इंतजार करने के बजाय form पहले complete करना बेहतर रहेगा, क्योंकि गलत marks, degree details, bank information या uploaded document की वजह से बाद में correction का मौका नहीं मिलेगा।
Official Notification, Apply Online, FAQ और Previous Year Papers ISRO की official recruitment website पर उपलब्ध हैं।
🔗 Official FAQ Allied branches, CGPA, MCA/M.Tech, AMIE, backlog, payment, application और eligibility से जुड़े सवालों के जवाब के लिए Official ISRO Recruitment FAQ 2026
MRPL Assistant Engineer Recruitment 2026 में 26 पदों पर भर्ती है। GATE 2026 से Chemical, Mechanical और Electrical AE पदों के लिए आवेदन 19 सितंबर तक करें अब!
नई दिल्ली: Mangalore Refinery and Petrochemicals Limited (MRPL) ने Assistant Engineer के 26 पदों के लिए भर्ती शुरू कर दी है। यह भर्ती E2 Grade Management Cadre में Chemical, Mechanical और Electrical Engineering के लिए है। आवेदन प्रक्रिया 21 अगस्त 2026 से शुरू हो चुकी है और इच्छुक उम्मीदवार 19 सितंबर 2026 शाम 6 बजे तक ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं।
इस भर्ती में सबसे जरूरी बात यह है कि MRPL सिर्फ GATE 2026 के marks स्वीकार करेगा। GATE 2025 या उससे पुराने score के आधार पर इस भर्ती में आवेदन नहीं किया जा सकता। Selection में कोई written exam नहीं रखा गया है। GATE 2026 marks के आधार पर shortlisting होगी, जिसके बाद Group Discussion और Personal Interview लिया जाएगा।
MRPL Assistant Engineer Recruitment 2026 में कितने पद हैं?
कुल 26 Assistant Engineer vacancies निकाली गई हैं। Chemical Engineering में 15, Mechanical में 8 और Electrical में 3 पद हैं।
Discipline
GATE Paper
Vacancies
Assistant Engineer – Chemical
CH
15
Assistant Engineer – Mechanical
ME
8
Assistant Engineer – Electrical
EE
3
Total
—
26
Chemical के 15 पद सभी categories के लिए खुले हैं। इनमें UR 8, EWS 1, OBC-NCL 3, SC 1 और ST 2 सीटें हैं।
Mechanical के 8 पद Special Recruitment Drive के तहत OBC-NCL 4, SC 3 और ST 1 के लिए हैं। इस discipline में UR और EWS के लिए कोई seat नहीं है।
Electrical के 3 पदों में OBC-NCL 1, SC 1 और ST 1 vacancy है। यहां भी UR और EWS candidates के लिए post उपलब्ध नहीं है।
कुल category-wise vacancies में UR 8, EWS 1, OBC-NCL 8, SC 5 और ST 4 पद शामिल हैं।
PwBD candidates के लिए कितनी seats हैं?
PwBD reservation horizontal basis पर लागू है। इसका मतलब ये posts ऊपर दी गई category vacancies के अंदर ही शामिल हैं और अलग से अतिरिक्त seats नहीं हैं। इसके लिए minimum 40% benchmark disability जरूरी है।
Chemical में 2 PwBD posts, Mechanical में 1 और Electrical में 1 post earmarked है।
Chemical में SLD और HH categories को identified किया गया है। Mechanical में HH, LV, OA, BA, OL, CP, Dw, AAV, ASD (M), SLD और MI categories suitable हैं। Electrical में HH, OL, Dw, AAV, ASD (M), SLD और MI categories शामिल हैं।
अगर earmarked category का suitable candidate उपलब्ध नहीं होता है, तो post दूसरी identified category में जा सकती है।
यहां HH का मतलब hard of hearing, LV low vision, OA one arm, BA both arms, OL one leg, CP cerebral palsy, Dw dwarfism, AAV acid attack victim, ASD (M) autism spectrum disorder mild, SLD specific learning disability और MI mental illness है।
MRPL Assistant Engineer के लिए कौन apply कर सकता है?
उम्मीदवार के पास चार साल की BE, B.Tech या B.Sc. Engineering degree संबंधित discipline में होनी चाहिए। Degree और GATE paper का combination MRPL की eligibility के मुताबिक होना जरूरी है।
Discipline
Eligible Degree
Chemical
Chemical Engineering, Chemical Technology, Petrochemical Engineering, Petrochemical Technology
Mechanical
Mechanical Engineering
Electrical
Electrical Engineering, Electrical and Electronics Engineering
Production, Automobile, Mechatronics और Construction Engineering जैसी degrees eligible नहीं मानी जाएंगी। MRPL ने साफ किया है कि ये examples indicative हैं और exclusions सिर्फ इन्हीं courses तक सीमित नहीं हैं।
Degree किसी UGC-recognised Indian university या deemed university, AICTE-approved autonomous institution, संबंधित statutory council या Board of Technical Education से recognised होनी चाहिए।
कितने प्रतिशत marks जरूरी हैं?
UR, EWS और OBC-NCL candidates के लिए minimum aggregate 60% है। SC, ST और PwBD candidates के लिए minimum 50% aggregate marks चाहिए।
यह percentage सभी semesters के average से निकलेगा और इसे round off नहीं किया जाएगा। यानी 59.99% को 60% नहीं माना जाएगा।
अगर university CGPA conversion formula देती है, तो उसी formula का इस्तेमाल करना होगा। जहां university ने कोई conversion formula नहीं दिया है, वहां CGPA × 10 लागू किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए university से documentary proof देना होगा कि कोई निर्धारित formula मौजूद नहीं है।
Five-year integrated dual degree में BE या B.Tech plus ME या M.Tech को four-year engineering degree के बराबर माना जाएगा।
अगर किसी candidate ने qualifying BE, B.Tech या B.Sc. Engineering discipline में की है और GATE 2026 का valid score उसी eligible paper में है, तो अलग discipline में M.Tech होने के बावजूद eligibility बनी रह सकती है।
Integrated course में दो degrees मिलने पर BE या B.Tech का percentage देखा जाएगा। अगर integrated course के बाद सिर्फ एक ME या M.Tech degree जारी हुई है, तो consolidated integrated-course marks consider किए जाएंगे।
MRPL AE Recruitment के लिए age limit क्या है?
19 सितंबर 2026 को UR और EWS candidates की maximum age 27 years होनी चाहिए।
OBC-NCL candidates को 3 years और SC/ST candidates को 5 years की age relaxation मिलेगी। 40% या उससे ज्यादा disability वाले PwBD candidates को category relaxation के अलावा 10 years की additional relaxation दी जाएगी।
Ex-Servicemen candidates के लिए age relaxation Government of India rules के अनुसार लागू होगी।
PwBD relaxation category relaxation के ऊपर लागू होती है, लेकिन यह उसी category के reserved post के लिए लागू होगी।
ध्यान रखें: MRPL ने साफ कहा है कि application सिर्फ उसके official online portal से ही स्वीकार होगी; किसी agency या individual के जरिए आवेदन नहीं किया जा सकता।
Selection Process में exam होगा या नहीं?
MRPL Assistant Engineer recruitment में अलग से written examination नहीं होगा।
सबसे पहले GATE 2026 marks के आधार पर candidates की shortlisting होगी। Shortlisted candidates को Group Discussion के लिए बुलाया जाएगा और इसके बाद Personal Interview होगा।
इस भर्ती के लिए GATE 2026 के केवल CH, ME और EE papers मान्य हैं। पुराने GATE scores इस selection process में स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
MRPL Assistant Engineer की salary कितनी है?
Selected Assistant Engineer को E2 Grade Management Cadre में नियुक्त किया जाएगा। Starting basic pay ₹50,000 है और pay scale ₹50,000 से ₹1,60,000 तक है।
Salary structure में IDA pattern पर Dearness Allowance, HRA या township accommodation, cafeteria approach के तहत perks और allowances तथा Performance Related Pay शामिल हैं।
Posting MRPL की requirement के हिसाब से तय की जाएगी। Selected employees को India या abroad में transfer किया जा सकता है।
Transfer MRPL, ONGC group companies या अन्य organisation के भीतर भी हो सकता है। जरूरत के मुताबिक shift और night-shift duty भी करनी पड़ सकती है।
MRPL ने working knowledge of Hindi को desirable qualification के तौर पर रखा है।
Service Bond कितना है?
Selected candidate को joining के बाद 3 years का service bond पूरा करना होगा।
MRPL suitable candidates का panel भी बना सकता है और यह panel one year तक operate किया जा सकता है।
कंपनी को minimum eligibility standards बढ़ाने, notified posts को भरने या किसी position को vacant रखने का अधिकार भी है और इसके लिए अलग reason देना जरूरी नहीं होगा।
General category सहित applicable candidates के लिए application fee ₹118 है।
SC, ST, PwBD और Ex-Servicemen candidates को application fee से exemption दी गई है।
Serving Government, PSU या autonomous-body employees को application process के दौरान proper channel से printed application forward करना होगा या interview के समय NOC प्रस्तुत करना होगा।
MRPL Recruitment 2026 में आवेदन कब तक करें?
Online application window 21 अगस्त 2026 से शुरू है। आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख 19 सितंबर 2026 है और application window शाम 6 बजे बंद होगी।
इसलिए eligible candidates को GATE 2026 paper, engineering degree, category, marks और age criteria check करने के बाद application submit करना चाहिए।
MRPL Assistant Engineer Recruitment 2026: जरूरी जानकारी एक नजर में
जानकारी
Details
Organisation
Mangalore Refinery and Petrochemicals Limited
Parent Company
ONGC
Post
Assistant Engineer – E2 Grade
Cadre
Management Cadre
Total Posts
26
Chemical Posts
15
Mechanical Posts
8
Electrical Posts
3
GATE Requirement
GATE 2026 only
GATE Papers
CH, ME, EE
Selection
GATE Shortlisting, Group Discussion, Personal Interview
Starting Basic Pay
₹50,000
Pay Scale
₹50,000 – ₹1,60,000
Application Start
21 August 2026
Last Date
19 September 2026, 6:00 PM
Application Fee
₹118
Exemption
SC, ST, PwBD, Ex-Servicemen
Service Bond
3 years
Job Location
MRPL requirements के अनुसार
MRPL Assistant Engineer Recruitment 2026
अगर आपके पास eligible engineering degree है और आपने GATE 2026 में संबंधित CH, ME या EE paper दिया है, तो यह भर्ती आपके लिए relevant opportunity है। Application submit करने से पहले अपनी degree nomenclature, aggregate percentage, category और age की conditions जरूर match करें, क्योंकि MRPL ने discipline-wise eligibility अलग रखी है।
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना में 41 FIR, 178 ट्रेनिंग सेंटर ब्लैकलिस्ट और 34 लाख भुगतान अटके। CAG की रिपोर्ट में सामने आईं गंभीर अनियमितताएं।
नई दिल्ली:प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना यानी युवाओं को skill training देकर job और self-employment के मौके देने वाली देश की बड़ी सरकारी schemes में से एक अब गंभीर सवालों के घेरे में है। CAG की audit findings से लेकर 2026 में दर्ज हुई 41 FIR, 178 Training Centres की blacklisting और NSDC के करीब 20 current और former employees को भेजे गए show-cause notices तक, इस पूरी scheme को लेकर लगातार कार्रवाई सामने आ रही है।
सबसे बड़ा सवाल उन युवाओं का है जिन्होंने इस scheme के तहत training ली, certificate हासिल किया और payment या job का इंतजार किया। क्या training सही तरीके से हुई? क्या beneficiary का record सही था? Payment क्यों अटका? और certificate मिलने के बाद नौकरी कितनों को मिली?
41 FIR और 178 Training Centres पर कार्रवाई
2026 में सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना से जुड़े मामलों में 167 cases को FIR के लिए identify किया गया और 41 FIR दर्ज की गईं।
वहीं प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 4.0 के तहत 178 Training Centres को blacklist किया गया। इन centres के खिलाफ आगे की payments रोकने और नियमों के उल्लंघन से जुड़े payments की recovery शुरू करने के निर्देश दिए गए।
हालांकि यहां यह समझना जरूरी है कि FIR दर्ज होना किसी मामले में आरोप या investigation की शुरुआत है, conviction नहीं। इसी तरह 178 blacklisted centres को सीधे 178 “fake centres” कहना भी सही नहीं होगा। Blacklisting scheme guidelines और inspection findings के आधार पर की गई कार्रवाई है।
34 लाख से ज्यादा candidates का payment क्यों अटका?
इस पूरी कहानी का सबसे सीधा असर उन candidates पर पड़ता है जिन्होंने training पूरी की लेकिन उनका payment नहीं पहुंचा।
CAG के मुताबिक प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के दूसरे और तीसरे phase में 34 लाख candidates के DBT payments outstanding थे।
पहले phase में भी करीब ₹40 करोड़ की DBT राशि incorrect या incomplete bank और Aadhaar details की वजह से beneficiaries तक नहीं पहुंच सकी थी।
यानी अगर किसी candidate ने training और certification पूरा किया है, लेकिन उसके खाते में पैसा नहीं आया, तो सिर्फ “payment pending” देखकर मामला खत्म नहीं होता। Bank details, Aadhaar linking और beneficiary record में mismatch भी इसकी वजह हो सकता है।
CAG audit में bank details की जांच के दौरान एक और बड़ी गड़बड़ी सामने आई।
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के दूसरे और तीसरे phase के data में 12,122 unique bank accounts ऐसे पाए गए जो एक से ज्यादा candidates के लिए इस्तेमाल हुए थे।
इन accounts से कुल 52,381 candidates जुड़े हुए थे।
सबसे चौंकाने वाला मामला एक ऐसे account का था जिसे 2,106 candidates के records में इस्तेमाल किया गया था।
कुछ records में 11111111111, zeros, blank और दूसरे apparently invalid entries भी मिले।
इसका मतलब यह नहीं कि इन सभी candidates को fake घोषित कर दिया गया। लेकिन beneficiary और payment data की verification system पर गंभीर सवाल जरूर खड़े हुए। CAG ने कहा कि उपलब्ध bank-account data से beneficiaries की identity को लेकर पर्याप्त assurance नहीं मिल रही थी।
CAG की जांच में कुछ Training Centres physical inspection के दौरान बंद मिले।
कुछ जगह training records और ground reality के बीच mismatch भी सामने आया। Candidate photographs के repeat होने और attendance तथा identity verification में gaps की findings भी सामने आईं।
यानी सवाल यह भी है कि जिस candidate के नाम पर training और certification का record बना, क्या वह candidate वास्तव में उस training में मौजूद था?
यहां भी हर irregular record को सीधे fake candidate मानना सही नहीं है। Audit findings मुख्य रूप से verification और monitoring system में मौजूद कमजोरियों की तरफ इशारा करती हैं।
“Ghost Candidate” का मतलब क्या है?
अगर किसी व्यक्ति का नाम scheme के record में मौजूद है, लेकिन उसकी identity, attendance, bank details या training participation properly verify नहीं हो पाती, तो मामला questionable या ghost beneficiary verification तक पहुंच सकता है।
CAG ने candidate eligibility को लेकर भी सवाल उठाए।
कुछ records में age, education और दूसरे eligibility criteria की proper checking नहीं होने की बात सामने आई।
यानी scheme में सिर्फ यह देखना काफी नहीं था कि candidate का नाम system में दर्ज है। यह भी जरूरी था कि वह candidate scheme के लिए eligible था और उसकी identity सही तरीके से verify हुई थी।
Certificate मिला, लेकिन नौकरी कितनों को मिली?
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना का असली मकसद सिर्फ training और certificate देना नहीं था। इसका final outcome रोजगार और बेहतर income से जुड़ा था।
लेकिन CAG की audit में पुराने phases के Short Term Training component में certified candidates की placement करीब 41 प्रतिशत के आसपास पाई गई।
सरकार की बाद की reporting में PMKVY 3.0 तक reported placement करीब 43 प्रतिशत बताई गई।
इसका सीधा मतलब है कि training या certificate और actual job एक ही चीज नहीं हैं।
यही वजह है कि किसी भी candidate के लिए सबसे जरूरी सवाल यह होना चाहिए कि course पूरा करने के बाद उसे वास्तव में job या self-employment का फायदा मिला या नहीं।
कुछ बड़े Training Providers में placement 10% से भी कम
CAG की detailed जांच में training providers के performance में काफी बड़ा difference सामने आया।
Top training providers में भी 114 providers ऐसे पाए गए जिनका placement rate 10 प्रतिशत से कम था।
इन providers ने करीब 5.88 लाख candidates को certify किया, लेकिन लगभग 20,000 candidates ही placement तक पहुंच पाए।
इससे साफ होता है कि सिर्फ overall placement percentage देखने से पूरी तस्वीर सामने नहीं आती। अलग-अलग Training Providers का actual performance काफी अलग रहा।
Training Providers को इतने बड़े targets कैसे मिले?
CAG ने Training Providers को मिले targets और certifications को भी examine किया।
PMKVY 2.0 में top 10 प्रतिशत Training Providers ने करीब 83 प्रतिशत batches और 85.61 प्रतिशत certifications संभालीं।
PMKVY 3.0 में top 10 प्रतिशत providers ने करीब 82 प्रतिशत batches और 85.31 प्रतिशत certifications संभालीं।
इसके मुकाबले bottom 50 प्रतिशत providers का share काफी कम था।
इससे यह सवाल उठता है कि scheme के बड़े targets कुछ Training Providers के पास इतने concentrated क्यों हुए और उनके performance की monitoring कितनी प्रभावी थी।
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना का Recognition of Prior Learning यानी RPL component उन लोगों की existing skills को certify करने के लिए है जो पहले से किसी trade या काम में skilled हैं।
CAG ने RPL-BICE component में भी कई irregularities दर्ज कीं।
एक मामले में Radiate Designs ने करीब 15,218 candidates को certify किया था। CAG के मुताबिक company 2014-15 के बाद ROC returns file नहीं कर रही थी और ROC records में struck off थी। Audit team को दिए गए address पर एक shop मिली, जहां company का visible signboard नहीं था।
CAG ने इस तरह के records के आधार पर certification process की verification पर सवाल उठाए।
एक दूसरे fitness trainer से जुड़े case में 10,000 candidates की placement और 30,000 employees की capacity का दावा किया गया था, जबकि संबंधित gyms में Ministry के records के अनुसार employees की संख्या काफी कम थी।
Jharkhand में 8,922 certifications में से 7,145 East Singhbhum में और Rajasthan में सभी 5,444 certifications Churu district में concentrated थीं।
Audit ने employee-employer relationship की proper verification के बिना certifications किए जाने पर सवाल उठाए।
CAG की मुख्य audit findings प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के पहले तीन phases से जुड़ी हैं। PMKVY 4.0 बाद में शुरू हुई और इसमें technology-based verification को मजबूत किया गया है।
लेकिन CAG ने PMKVY 4.0 के उपलब्ध data की भी कुछ जांच की।
इसमें:
175 invalid mobile numbers
2,263 repeated mobile numbers
करीब 2.72 लाख null email addresses
करीब 3.08 लाख repeated email addresses
मिले।
इन आंकड़ों का मतलब यह नहीं कि इतने candidates fake थे। लेकिन इससे यह जरूर पता चलता है कि digital system में भी data validation को लगातार मजबूत रखने की जरूरत है।
अब सरकार ने क्या बदला?
PMKVY 4.0 में beneficiary verification और monitoring के लिए कई technology-based controls बढ़ाए गए हैं।
PMKVY 4.0 में AI, drones, robotics, green energy, semiconductor manufacturing और दूसरे new-age sectors से जुड़े courses पर भी ज्यादा focus किया जा रहा है।
जून 2026 तक सरकार के मुताबिक PMKVY 4.0 के तहत 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 738 जिलों में 28.17 लाख candidates train किए जा चुके थे। इसके implementation ecosystem में 16,900 से ज्यादा institutions और 6,800 से ज्यादा Skill Hubs शामिल थे।
PMKVY 4.0 को लेकर सरकार के आंकड़े क्या कहते हैं?
पुरानी phases की CAG findings के बावजूद PMKVY 4.0 के impact को लेकर सरकार ने positive results भी जारी किए हैं।
29 जुलाई 2026 को सरकार ने independent impact evaluation का हवाला देते हुए बताया कि Short Term Training candidates में employed और self-employed लोगों का combined share training से पहले 26.6 प्रतिशत था, जो training के बाद 45.4 प्रतिशत हो गया।
यानी 18.8 percentage points का increase दर्ज किया गया।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 41.4 प्रतिशत STT candidates और 48.9 प्रतिशत RPL candidates ने training और certification के बाद income बढ़ने की बात भी बताई।
इसलिए आज की स्थिति को सिर्फ पुरानी CAG findings से देखना पूरी तस्वीर नहीं देगा। पुराने phases में गंभीर implementation problems सामने आईं, जबकि PMKVY 4.0 को लेकर सरकार के पास employment और income outcomes में improvement का evaluation data भी है।
अगर आपने PMKVY की training ली है तो ये 8 चीजें check करें
1. Certificate: आपका certificate official record में मौजूद है या नहीं।
2. Training Centre: जिस centre से आपने course किया, उसकी status क्या है।
3. Attendance: आपकी training attendance सही दर्ज है या नहीं।
4. Aadhaar/e-KYC: आपकी identity details सही हैं या नहीं।
5. Bank Account: आपके नाम से सही bank details linked हैं या नहीं।
6. DBT Payment: payment मिला, pending है या transaction fail हुआ।
7. Placement: अगर placement का दावा किया गया था तो employer और job details verify करें।
8. Complaint: अगर आपके नाम पर ऐसी training या certification दिखाई दे रही है जो आपने की ही नहीं, या payment/identity में गलती है, तो official grievance mechanism पर complaint करें।
अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि कितने Training Centres blacklist हुए या कितनी FIR दर्ज हुईं।
आगे यह देखना ज्यादा जरूरी होगा कि:
41 FIR की investigation कहां तक पहुंचती है?
178 blacklisted centres में recovery कितनी होती है?
34 लाख pending payments में कितने candidates को पैसा मिलता है?
NSDC के जिन करीब 20 current और former employees को notices दिए गए हैं, उनके खिलाफ आगे क्या action होता है?
और सबसे बड़ा सवाल—
क्या PMKVY 4.0 में technology-based safeguards पुराने loopholes को वास्तव में बंद कर पाते हैं?
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना का असली test यही है कि government records में कितने candidates trained और certified दिखते हैं, इससे आगे जाकर कितने युवाओं को वास्तव में skill, payment, job और बेहतर income मिलती है।
CAG की findings ने पुराने system की कई कमजोरियां सामने रख दी हैं। 2026 की FIR और blacklisting के जरिए कार्रवाई भी चल रही है। वहीं PMKVY 4.0 के नए evaluation में employment और income outcomes में improvement का दावा किया गया है।
अब नजर इस बात पर है कि पुरानी गलतियों से सीखकर मौजूदा system कितना मजबूत हुआ है और scheme से जुड़े युवाओं को उसका वास्तविक फायदा कितना मिल रहा है।
छात्र प्रदर्शन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले प्रदर्शनकारियों पर फिलहाल कठोर कार्रवाई नहीं करने और नाबालिगों को रिहा करने के निर्देश दिए। जानिए कोर्ट के आदेश का क्या असर होगा।
देशभर में परीक्षा से जुड़े छात्र प्रदर्शनों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा अंतरिम आदेश जारी किया है। अदालत ने कहा है कि जिन प्रदर्शनकारियों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उनके खिलाफ फिलहाल कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जाए। साथ ही हिरासत में लिए गए पात्र नाबालिग छात्रों को रिहा करने और प्रदर्शन से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं। कोर्ट के इस आदेश को छात्र प्रदर्शन से जुड़े मामलों में अब तक की सबसे महत्वपूर्ण न्यायिक राहत माना जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने किन छात्रों को राहत दी?
अदालत ने स्पष्ट किया कि अंतरिम राहत उन प्रदर्शनकारियों के लिए है जिनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। ऐसे छात्रों के खिलाफ फिलहाल कोई कठोर पुलिस कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसके अलावा हिरासत में लिए गए पात्र नाबालिगों को रिहा करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रदर्शन से जुड़े सभी महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखे जाएं। इसमें CCTV फुटेज, बॉडी कैमरा रिकॉर्डिंग, ड्रोन वीडियो और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड शामिल हैं। अदालत ने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों का व्यक्तिगत डिजिटल डेटा सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए।
पूरा मामला क्या है?
हाल के दिनों में परीक्षा अनियमितताओं के विरोध में देश के कई हिस्सों में छात्रों ने प्रदर्शन किए थे। इन प्रदर्शनों के दौरान कई जगह पुलिस कार्रवाई, हिरासत और बल प्रयोग के आरोप लगे। इन घटनाओं को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल की गईं, जिन पर फिलहाल सुनवाई जारी है।
सरकार ने कोर्ट में क्या कहा?
केंद्र सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना आवश्यक था। सरकार ने यह भी बताया कि इन घटनाओं में कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि छात्रों और पुलिस दोनों के घायल होने के मामलों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। अदालत ने केंद्र और संबंधित राज्यों से जवाब मांगा है तथा स्वतंत्र जांच की आवश्यकता पर भी विचार करने की बात कही है।
किन राज्यों पर असर पड़ेगा?
सुनवाई के दौरान अदालत ने दिल्ली के अलावा महाराष्ट्र, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, असम, पश्चिम बंगाल और केरल समेत कई राज्यों से जवाब मांगा है, जहां छात्र प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामले सामने आए थे।
अब आगे क्या होगा?
यह आदेश फिलहाल अंतरिम राहत है। अंतिम फैसला अभी आना बाकी है। अब केंद्र और संबंधित राज्य सरकारों को अदालत के सामने अपना पक्ष रखना होगा। अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट आगे की जांच, राज्यों के जवाब और आवश्यक निर्देशों पर विचार करेगा। तब तक बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले पात्र छात्र प्रदर्शनकारियों को अदालत की अंतरिम सुरक्षा मिलेगी।
MHT-CET परीक्षा को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद महाराष्ट्र CET Cell ने मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र साइबर पुलिस से जांच की मांग की है। जानिए पूरा मामला और छात्रों पर इसका क्या असर पड़ सकता है।
मुंबई: क्या MHT-CET परीक्षा में गड़बड़ी हुई थी? सोशल मीडिया पर वायरल कुछ वीडियो के बाद यह सवाल कई छात्रों और अभिभावकों के मन में उठने लगा है। हालांकि इन दावों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसी बीच महाराष्ट्र स्टेट कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (CET) Cell ने पूरे मामले की जांच के लिए मुंबई के आजाद मैदान पुलिस स्टेशन और महाराष्ट्र साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।
परीक्षा प्राधिकरण का कहना है कि सोशल मीडिया पर बिना पुष्टि के प्रसारित सामग्री छात्रों और अभिभावकों के बीच भ्रम फैला सकती है तथा सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती है। इसलिए तथ्यों की जांच आवश्यक है।
CET Cell के अनुसार सोशल मीडिया पर MHT-CET परीक्षा से जुड़े दो वीडियो वायरल हुए हैं। इन वीडियो में परीक्षा की पारदर्शिता और संचालन को लेकर कई दावे किए गए हैं।
हालांकि प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि इन दावों की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए पुलिस और साइबर पुलिस से अनुरोध किया गया है कि वीडियो की सत्यता की जांच की जाए और यदि किसी प्रकार का कानूनी उल्लंघन पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
शिकायत में CET Cell ने कहा है कि वायरल वीडियो तैयार करने, अपलोड करने और प्रसारित करने वाले लोगों की पहचान की जाए। साथ ही यह भी जांच की जाए कि साझा की गई जानकारी तथ्यात्मक है या नहीं।
यदि जांच में किसी प्रकार की गलत या भ्रामक जानकारी फैलाने का मामला सामने आता है, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।
छात्रों और अभिभावकों के लिए इसका क्या मतलब है?
फिलहाल छात्रों को घबराने की जरूरत नहीं है।
अब तक CET Cell ने परीक्षा रद्द करने, परिणाम रोकने या परीक्षा प्रक्रिया में किसी बदलाव की घोषणा नहीं की है।
यह कार्रवाई केवल सोशल मीडिया पर वायरल दावों की सत्यता की जांच के लिए की गई है। इसलिए छात्रों और अभिभावकों को केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करने की सलाह दी जाती है।
अब मामले की जांच मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र साइबर पुलिस करेगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
यदि वायरल दावे सही पाए जाते हैं तो संबंधित तथ्यों के आधार पर कार्रवाई होगी, और यदि दावे भ्रामक पाए जाते हैं तो कानून के अनुसार जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कदम उठाए जा सकते हैं।
MHT-CET से जुड़े वायरल वीडियो की सच्चाई अभी जांच के दायरे में है। ऐसे में किसी भी अपुष्ट जानकारी पर भरोसा करने के बजाय छात्रों और अभिभावकों को केवल महाराष्ट्र CET Cell और संबंधित सरकारी एजेंसियों की आधिकारिक सूचना का इंतजार करना चाहिए।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद NEET विवाद के साथ NTA, NCERT, UGC नियम, भाषा नीति और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े पुराने विवाद भी चर्चा में हैं।
नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री की सलाह पर उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है। इसके बाद शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को दिया गया है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सबसे ज्यादा चर्चा NEET-UG विवाद की हो रही है, लेकिन उनके कार्यकाल के दौरान परीक्षा व्यवस्था, NTA, पाठ्यक्रम, UGC के नियम और भाषा नीति से जुड़े कई मुद्दे भी लगातार राजनीतिक और सार्वजनिक बहस का हिस्सा रहे।
NEET विवाद बना सबसे बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक संकट
धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल की सबसे बड़ी चुनौती राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता को लेकर रही। NEET-UG से जुड़े विवादों ने लाखों छात्रों और उनके परिवारों की चिंता बढ़ाई। परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक से जुड़े आरोपों के बाद जांच, परीक्षा प्रक्रिया और राष्ट्रीय परीक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे।
2024 में NEET-UG के परिणाम और ग्रेस मार्क्स को लेकर विवाद हुआ था। कुछ प्रभावित उम्मीदवारों के लिए दोबारा परीक्षा आयोजित करनी पड़ी। NTA के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी NEET-UG 2024 के प्रभावित उम्मीदवारों के लिए पुनः परीक्षा का उल्लेख है।
इसके बाद 2026 में NEET को लेकर विवाद और गंभीर हो गया। परीक्षा में अनियमितताओं की जानकारी सामने आने के बाद परीक्षा रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया गया। मामले की जांच CBI को सौंपे जाने और भविष्य में परीक्षा व्यवस्था में बदलाव की चर्चा के बीच छात्रों के बीच परीक्षा प्रणाली को लेकर भरोसे का सवाल बड़ा मुद्दा बन गया।
#WATCH | Delhi: Visuals from Jantar Mantar, where protesters celebrate after the resignation of Union Education Minister Dharmendra Pradhan
After holding the third round of talks with the government, Cockroach Janta Party withdrew its agitation and appealed to the protestors to… pic.twitter.com/rQ1gixr02X
यही विवाद धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के तत्काल राजनीतिक संदर्भ का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बना। हालांकि उनके इस्तीफे को केवल उनके पूरे कार्यकाल के विवादों का सीधा परिणाम बताना उचित नहीं होगा। उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर उनका इस्तीफा स्वीकार किया और शिक्षा मंत्रालय का प्रभार प्रह्लाद जोशी को सौंपा।
NTA की कार्यप्रणाली पर लगातार उठते रहे सवाल
NEET के अलावा राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी यानी NTA की कार्यप्रणाली भी धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में लगातार चर्चा में रही। NEET, JEE, CUET और UGC-NET जैसी बड़ी परीक्षाओं का आयोजन करने वाली एजेंसी को परीक्षा प्रबंधन, तकनीकी समस्याओं और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े विवादों के कारण आलोचना का सामना करना पड़ा।
UGC-NET जून 2024 की परीक्षा भी विवादों में आई। परीक्षा के बाद इसे रद्द कर दिया गया और बाद में दोबारा परीक्षा आयोजित की गई। NTA के आधिकारिक रिकॉर्ड में UGC-NET जून 2024 की पुनर्निर्धारित परीक्षा और बाद की प्रक्रिया दर्ज है।
The resignation of Dharmendra Pradhan reflects the strength of India’s democracy and the government’s willingness to listen, understand public sentiment, and act with accountability. For those who called this government a “dictatorship”, democracy has answered #DharmendraPradhanpic.twitter.com/p8tflcdZxJ
लगातार एक के बाद एक परीक्षाओं से जुड़े विवादों ने यह सवाल खड़ा किया कि देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं को संचालित करने वाली व्यवस्था में क्या बड़े स्तर पर सुधार की जरूरत है।
NCERT की किताबों में बदलाव पर भी हुआ विवाद
धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में स्कूल शिक्षा के पाठ्यक्रम और NCERT की किताबों में बदलाव को लेकर भी राजनीतिक विवाद हुआ।
NCERT ने पाठ्यक्रम के कुछ हिस्सों को कम करने के लिए ‘rationalisation’ की प्रक्रिया अपनाई। सरकार की ओर से इसे छात्रों पर पढ़ाई का बोझ कम करने और पाठ्यक्रम को व्यवस्थित करने की प्रक्रिया के रूप में देखा गया। NCERT की वेबसाइट पर भी पाठ्यपुस्तकों में rationalised content की सूची उपलब्ध है।
हालांकि विपक्ष और कुछ शिक्षाविदों ने आरोप लगाया कि पाठ्यक्रम में बदलाव के दौरान इतिहास और राजनीति से जुड़े कुछ संवेदनशील विषयों को हटाने या कम करने का प्रभाव पड़ा। मुगल इतिहास, गुजरात दंगों और लोकतांत्रिक आंदोलनों से जुड़े हिस्सों को लेकर भी राजनीतिक बहस हुई।
यह विवाद केवल किताबों में बदलाव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शिक्षा में पाठ्यक्रम और इतिहास की प्रस्तुति को लेकर व्यापक वैचारिक बहस में बदल गया।
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नई शिक्षा नीति यानी NEP 2020 भी धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल के प्रमुख मुद्दों में रही। शिक्षा नीति को लागू करने के दौरान तीन भाषा फॉर्मूले को लेकर केंद्र और कुछ राज्यों के बीच मतभेद सामने आए।
विशेष रूप से तमिलनाडु जैसे राज्यों ने हिंदी को बढ़ावा दिए जाने की आशंका जताई। राज्य सरकारों का तर्क रहा कि भाषा नीति में राज्यों की भाषाई और सांस्कृतिक परिस्थितियों का पर्याप्त ध्यान रखा जाना चाहिए।
केंद्र की ओर से लगातार यह कहा गया कि नई शिक्षा नीति का उद्देश्य किसी एक भाषा को थोपना नहीं, बल्कि भारतीय भाषाओं और बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देना है। इसके बावजूद भाषा नीति का मुद्दा केंद्र-राज्य संबंधों में एक संवेदनशील राजनीतिक विषय बना रहा।
UGC के नियमों को लेकर विश्वविद्यालयों में बढ़ी बहस
उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी UGC से जुड़े नियमों को लेकर विवाद सामने आए। विश्वविद्यालयों में कुलपति नियुक्ति, उच्च शिक्षा के नियमन और केंद्र तथा राज्यों की भूमिका को लेकर कई बहस हुईं।
कुलपति नियुक्ति और विश्वविद्यालय प्रशासन से जुड़े नियमों में केंद्र, राज्यपाल और विश्वविद्यालयों की भूमिका को लेकर अलग-अलग राज्यों और शिक्षाविदों ने सवाल उठाए। UGC के मौजूदा नियामक ढांचे में कुलपति चयन और नियुक्ति से जुड़ी प्रक्रियाओं के लिए Search-cum-Selection Committee जैसी व्यवस्थाएं मौजूद हैं।
इन मुद्दों ने उच्च शिक्षा में स्वायत्तता, राज्य सरकारों की भूमिका और केंद्र के नियामक अधिकारों को लेकर बहस को तेज किया।
PM SHRI स्कूल योजना पर भी केंद्र-राज्य मतभेद
प्रधान के कार्यकाल में PM SHRI स्कूल योजना भी राजनीतिक बहस का विषय बनी। योजना के तहत सरकारी स्कूलों को आधुनिक और मॉडल स्कूलों के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई थी।
हालांकि कुछ राज्यों ने योजना से जुड़ी शर्तों और नई शिक्षा नीति के साथ इसके संबंध को लेकर आपत्ति जताई। इससे शिक्षा क्षेत्र में केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग और अधिकारों को लेकर बहस सामने आई।
CBSE और परीक्षा मूल्यांकन व्यवस्था पर भी सवाल
शिक्षा व्यवस्था में परीक्षा और मूल्यांकन प्रक्रिया से जुड़े बदलाव भी पूरी तरह विवादों से मुक्त नहीं रहे। CBSE की डिजिटल और ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन व्यवस्था को लेकर छात्रों और अभिभावकों की शिकायतें सामने आईं।
तकनीक आधारित मूल्यांकन का उद्देश्य प्रक्रिया को तेज और अधिक व्यवस्थित बनाना था, लेकिन जब छात्रों को परिणाम या मूल्यांकन से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ा, तो व्यवस्था की पारदर्शिता और तकनीकी विश्वसनीयता पर सवाल उठे।
क्या सिर्फ NEET विवाद बना इस्तीफे की वजह?
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद यह सवाल स्वाभाविक है कि क्या केवल NEET विवाद इसके पीछे था।
उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के आधार पर यह कहना अधिक सही होगा कि NEET-UG विवाद इस्तीफे का तत्काल और सबसे प्रमुख राजनीतिक संदर्भ बना, जबकि उनके कार्यकाल के दौरान NTA की कार्यप्रणाली, UGC-NET, पाठ्यक्रम में बदलाव, भाषा नीति और उच्च शिक्षा के नियमों से जुड़े विवादों ने शिक्षा मंत्रालय के सामने लगातार चुनौतियां पैदा कीं।
इसलिए धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल का मूल्यांकन केवल एक परीक्षा विवाद के आधार पर नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े इन व्यापक मुद्दों के संदर्भ में भी किया जाएगा।
Bottom Line: धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ऐसे समय हुआ है जब देश में परीक्षा व्यवस्था और छात्रों के भरोसे को लेकर गंभीर बहस चल रही है। NEET विवाद तत्काल कारणों के केंद्र में रहा, लेकिन उनके कार्यकाल की राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौतियां इससे कहीं व्यापक थीं।
क्या धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है?
हां। राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर धर्मेंद्र प्रधान का केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है।
धर्मेंद्र प्रधान के बाद शिक्षा मंत्रालय किसे मिला है?
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
क्या NEET विवाद धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का मुख्य कारण था?
NEET-UG विवाद इस्तीफे के तत्काल राजनीतिक संदर्भ का सबसे प्रमुख मुद्दा रहा। हालांकि उनके कार्यकाल में NTA, UGC-NET, NCERT पाठ्यक्रम, भाषा नीति और उच्च शिक्षा से जुड़े अन्य विवाद भी चर्चा में रहे।
धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में कौन-कौन से शिक्षा विवाद चर्चा में रहे?
NEET-UG और NTA की कार्यप्रणाली, UGC-NET परीक्षा, NCERT पाठ्यक्रम में बदलाव, NEP के तीन भाषा फॉर्मूले, UGC नियम और केंद्र-राज्य शिक्षा विवाद प्रमुख मुद्दों में शामिल रहे।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद मुंबई में कांग्रेस नेताओं ने मिठाई बांटकर जश्न मनाया। सचिन सावंत ने इसे छात्रों और युवाओं की जीत बताया।
(मंत्रालय प्रतिनिधि) मुंबई:केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कांग्रेस ने इसे छात्रों और युवाओं के आंदोलन की बड़ी जीत बताया। मुंबई में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मिठाई बांटकर जश्न मनाया। कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा कि यह युवाओं और लोकतंत्र की जीत है, जबकि पार्टी नेताओं ने केंद्र सरकार पर शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था को लेकर जवाबदेही से बचने का आरोप लगाया।
धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार, 25 जुलाई 2026 को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया। यह फैसला NEET–UG परीक्षा से जुड़े विवाद, कथित अनियमितताओं और छात्रों के लगातार विरोध प्रदर्शनों के बीच आया। उनके इस्तीफे के बाद विपक्षी दलों ने इसे सरकार पर बढ़ते राजनीतिक दबाव और छात्र आंदोलन की सफलता के रूप में पेश किया।
इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद मुंबई में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मिठाई बांटकर खुशी जताई। कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत भी इस मौके पर मौजूद रहे और उन्होंने कार्यकर्ताओं को मिठाई खिलाई।
सचिन सावंत ने कहा कि देश के युवाओं ने लोकतंत्र और जवाबदेही की ताकत दिखाई है। उन्होंने दावा किया कि छात्रों के संघर्ष और विपक्ष के दबाव के बाद सरकार को आखिरकार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के रूप में जवाब देना पड़ा।
उन्होंने केंद्र सरकार पर NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विवादों को लेकर गंभीर सवाल उठाए। सावंत ने कहा कि युवाओं ने यह संदेश दिया है कि देश में लोकतंत्र है और सरकार को जनता तथा छात्रों के सवालों का जवाब देना होगा।
सचिन सावंत ने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री पर भी साधा निशाना
सचिन सावंत ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर भी राजनीतिक निशाना साधा। उन्होंने कहा कि केवल शिक्षा मंत्री का इस्तीफा पर्याप्त नहीं है और सरकार को परीक्षा व्यवस्था में सामने आए विवादों की व्यापक जिम्मेदारी तय करनी चाहिए।
मुंबई कांग्रेस पार्टी प्रवक्ता सचिन सावंत की फाइल तस्वीर
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में पेपर लीक और परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं के मामलों ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है। उन्होंने युवाओं के बेरोजगारी और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को भी सरकार के सामने बड़ी चुनौती बताया।
हालांकि, कांग्रेस नेताओं के इन राजनीतिक आरोपों को उनके बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए। इन दावों के अलग-अलग हिस्सों की पुष्टि संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड और जांच के आधार पर की जानी होगी।
कांग्रेस ने इसे छात्रों के संघर्ष की जीत बताया
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर कांग्रेस लंबे समय से शिक्षा मंत्री की जवाबदेही का मुद्दा उठा रही थी। पार्टी ने NEET विवाद और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर छात्रों के समर्थन में अभियान चलाया था। कांग्रेस ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के साथ-साथ परीक्षा प्रणाली में व्यापक बदलाव की भी मांग की थी।
अब इस्तीफे के बाद पार्टी इसे छात्रों, युवाओं और विपक्ष के दबाव का परिणाम बता रही है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि परीक्षा से जुड़े विवादों में छात्रों और अभिभावकों का भरोसा बहाल करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
NEET विवाद के बीच आया इस्तीफा
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा NEET-UG 2026 से जुड़ी कथित अनियमितताओं और उसके बाद हुए छात्र आंदोलनों के बीच आया है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, परीक्षा विवाद के बाद जांच, परीक्षा रद्द करने और दोबारा परीक्षा कराने जैसे कदम उठाए गए। इसके बाद भी छात्रों और विपक्ष की ओर से जवाबदेही की मांग जारी रही।
अपने इस्तीफे के पत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि छात्रों का भविष्य और राष्ट्रीय हित उनके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता हैं। उन्होंने परीक्षा विवाद से निपटने के दौरान सरकार की कार्रवाई का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने मामले की जिम्मेदारी से पीछे हटने की कोशिश नहीं की।
FAQ
धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा क्यों दिया?
धर्मेंद्र प्रधान ने NEET-UG 2026 से जुड़े विवाद, परीक्षा में कथित अनियमितताओं और छात्रों के विरोध प्रदर्शनों के बीच शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया।
कांग्रेस ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर क्या किया?
मुंबई में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मिठाई बांटकर जश्न मनाया। पार्टी ने इस्तीफे को छात्रों और युवाओं के संघर्ष की जीत बताया।
सचिन सावंत ने क्या कहा?
सचिन सावंत ने इस्तीफे को युवाओं और लोकतंत्र की जीत बताया और केंद्र सरकार से परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने की मांग की।