Category: Jobs & Education

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  • CBSE 2027 Date Sheet: पहले ही दिन 12th Physics, 10th में सख्त नियम

    CBSE 2027 Date Sheet: पहले ही दिन 12th Physics, 10th में सख्त नियम

    CBSE Board Exam 2027: कक्षा 10वीं और 12वीं की थ्योरी परीक्षाओं की तारीखें घोषित। 16 फरवरी से परीक्षाएं शुरू, विंटर-बाउंड स्कूलों के प्रैक्टिकल 9 नवंबर से।

    नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 10वीं और 12वीं की वार्षिक बोर्ड परीक्षाओं की आधिकारिक डेटशीट जारी कर दी है। देश और विदेश के 45 लाख से अधिक छात्रों के लिए बोर्ड परीक्षाएं 16 फरवरी 2027 से शुरू होंगी। सीबीएसई ने परीक्षाओं की शुरुआत से ठीक 101 दिन पहले टाइमटेबल जारी कर एक नया रिकॉर्ड बनाया है, ताकि छात्रों को तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिल सके। सभी परीक्षाएं निर्धारित दिनों पर सुबह 10:30 बजे से आयोजित की जाएंगी।
    कक्षा 10वीं की परीक्षाएं 16 फरवरी से शुरू होकर 9 मार्च 2027 तक चलेंगी, जिसमें कुल 83 विषयों की परीक्षा होगी। वहीं, कक्षा 12वीं की परीक्षाएं 16 फरवरी से 9 अप्रैल 2027 तक आयोजित की जाएंगी, जिसमें 121 विषयों को कवर किया जाएगा।

    12वीं के छात्रों को ‘जीरो गैप’ का झटका, पहले ही दिन मुख्य पेपर

    सीबीएसई द्वारा जारी टाइमटेबल के अनुसार, कक्षा 12वीं के साइंस स्ट्रीम के छात्रों के लिए परीक्षा की शुरुआत काफी चुनौतीपूर्ण होने वाली है। बोर्ड ने 16 फरवरी 2027 को पहले ही दिन मुख्य विषय भौतिक विज्ञान (Physics – विषय कोड 042) का पेपर रखा है। इसके तुरंत बाद, 18 फरवरी को शारीरिक शिक्षा (Physical Education) की परीक्षा निर्धारित की गई है। जिन छात्रों के पास इन दोनों विषयों का संयोजन है, उन्हें भौतिक विज्ञान जैसे कठिन पेपर के ठीक बाद रिवीजन के लिए एक भी दिन का गैप नहीं मिलेगा।

    10वीं के ‘टू-एग्जाम सिस्टम’ का सच और कड़े नियम

    राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत इस बार कक्षा 10वीं के लिए दो चरणों वाली परीक्षा प्रणाली (Two-Exam System) लागू की जा रही है, लेकिन इसके नियम काफी सख्त हैं।

    • चरण 1 (फरवरी-मार्च 2027): यह मुख्य परीक्षा है, जिसमें शामिल होना सभी पंजीकृत छात्रों के लिए अनिवार्य है।
    • चरण 2 (मई 2027): यह एक वैकल्पिक (Optional) परीक्षा होगी। इसमें केवल वही छात्र बैठ सकेंगे जो अपने अंकों में सुधार (Improvement) करना चाहते हैं या जो किसी विषय में फेल (Compartment) हो गए हैं। छात्र अधिकतम 3 विषयों के लिए इस परीक्षा में बैठ सकते हैं।
    • पात्रता की शर्त: बोर्ड की गाइडलाइंस के अनुसार, यदि कोई छात्र फरवरी-मार्च की मुख्य परीक्षा में 3 या उससे अधिक विषयों में अनुपस्थित (Absent) रहता है, तो उसे मई की दूसरी परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ऐसे छात्रों को सीधे ‘एसेंशियल रिपीट’ (फेल) की श्रेणी में डाल दिया जाएगा। हालांकि, छात्रों के लिए राहत की बात यह है कि दोनों चरणों में से जिस परीक्षा में अधिक अंक आएंगे, वही अंतिम मार्कशीट में जोड़े जाएंगे।

    प्रैक्टिकल परीक्षाओं का शेड्यूल और फीस तय

    थ्योरी परीक्षाओं के साथ ही बोर्ड ने प्रैक्टिकल परीक्षाओं, प्रोजेक्ट और इंटरनल असेसमेंट की तारीखें भी साफ कर दी हैं। सर्दियों वाले क्षेत्रों में स्थित विंटर-बाउंड स्कूलों के लिए प्रैक्टिकल परीक्षाएं 9 नवंबर से 19 दिसंबर 2026 के बीच आयोजित की जा रही हैं। वहीं, शेष भारत और विदेशों के नियमित स्कूलों में प्रैक्टिकल परीक्षाएं 1 जनवरी 2027 से शुरू होंगी।
    बोर्ड ने इस बार निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं। यदि किसी स्कूल में एक विषय में 30 से अधिक छात्र हैं, तो प्रयोगशाला सुविधाओं के आधार पर परीक्षा 2 से 3 शिफ्टों में कराई जाएगी। हर बैच की परीक्षा के दौरान एक ग्रुप फोटोग्राफ खींचकर बोर्ड के ऐप पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही प्रति विषय प्रैक्टिकल फीस भी तय कर दी गई है, जिसमें भारतीय छात्रों के लिए ₹160, नेपाल के छात्रों के लिए ₹175 और अन्य विदेशी स्कूलों के छात्रों के लिए ₹375 प्रति विषय निर्धारित है।

    अंक विभाजन और पासिंग क्राइटेरिया

    कक्षा 10वीं के मुख्य विषयों में 80:20 का अंक फॉर्मूला लागू रहेगा, जिसमें 80 अंक थ्योरी परीक्षा के और 20 अंक आंतरिक मूल्यांकन या प्रैक्टिकल के होंगे। परीक्षा पास करने के लिए छात्रों को प्रत्येक विषय में कम से कम 33 प्रतिशत अंक प्राप्त करने होंगे। बोर्ड ने छात्रों को सलाह दी है कि वे सोशल मीडिया पर चल रही किसी भी अफवाह से बचने के लिए सीधे सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट cbse.gov.in से ही डेटशीट का पीडीएफ डाउनलोड करें और अपनी तैयारी को अंतिम रूप दें।

  • मालवणी के 14 गैरमान्यता प्राप्त स्कूलों को 31 मार्च 2027 तक हाई कोर्ट की राहत

    मालवणी के 14 गैरमान्यता प्राप्त स्कूलों को 31 मार्च 2027 तक हाई कोर्ट की राहत

    बॉम्बे हाई कोर्ट ने मालवणी के 14 गैरमान्यता प्राप्त स्कूलों को 31 मार्च 2027 तक पढ़ाई जारी रखने की अनुमति दी। जानिए सभी स्कूलों के नाम और बीएमसी की कार्रवाई।

    मुंबई: मलाड पश्चिम के मालवणी इलाके में संचालित 14 गैरमान्यता प्राप्त स्कूलों को बॉम्बे हाई कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। अदालत ने इन संस्थानों को शैक्षणिक सत्र 2026-27 के अंत यानी 31 मार्च 2027 तक पढ़ाई जारी रखने की अनुमति दी है। इससे पहली से चौथी कक्षा में पढ़ने वाले एक हजार से अधिक बच्चों को फिलहाल स्कूल बदलने की मजबूरी का सामना नहीं करना पड़ेगा। हालांकि, अदालत ने साफ किया है कि स्कूलों को इस दौरान जरूरी सरकारी मान्यता और निर्धारित नियमों का पालन करना होगा।

    मुख्य न्यायाधीश एमसी त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत एम सेठना की पीठ ने 4 नवंबर को सुनवाई के दौरान कहा कि कमजोर आर्थिक स्थिति वाले परिवारों के बच्चों को रातोंरात उनके स्कूलों से नहीं हटाया जा सकता। अदालत की प्राथमिक चिंता बच्चों की शिक्षा और उनके भविष्य को सुरक्षित रखना है। स्कूलों को राहत देने का अर्थ यह नहीं है कि उन्हें बिना मान्यता के स्थायी रूप से संचालन की अनुमति मिल गई है।

    मालवणी के 14 स्कूलों के मामले में हाई कोर्ट ने दी राहत

    इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अदालत में जिन 14 स्कूलों को लेकर सुनवाई हुई, उनमें अलग-अलग संस्थान शामिल हैं। ये सभी स्कूल मालाड पश्चिम के मालवणी इलाके में संचालित बताए गए हैं। अदालत में पेश बीएमसी के हलफनामे के अनुसार इन संस्थानों के पास आवश्यक सरकारी मान्यता नहीं थी।

    स्कूलों को बंद करने के बजाय बच्चों की पढ़ाई को प्राथमिकता

    सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे पहली से चौथी कक्षा तक के हैं। इतनी कम उम्र में उन्हें अचानक दूसरे स्कूलों में भेजना उचित नहीं होगा। खासकर उन परिवारों के लिए यह स्थिति मुश्किल पैदा कर सकती है, जिनके पास सीमित आर्थिक संसाधन हैं और जो अपने बच्चों की शिक्षा के लिए आसपास के स्कूलों पर निर्भर हैं।

    मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि गरीब और वंचित परिवारों के अभिभावक कई बार यह जांच नहीं कर पाते कि स्कूल को सरकारी मान्यता प्राप्त है या नहीं। वे यह देखते हैं कि स्कूल में शिक्षक हैं और उनके बच्चों को बुनियादी शिक्षा मिल रही है। अदालत ने कहा कि इन बच्चों के भविष्य को अंधकार में नहीं डाला जा सकता।

    पीठ ने बीएमसी को यह भी निर्देश दिया कि वह कानूनी रूप से संभव होने पर संबंधित संस्थानों को आवश्यक मान्यता दिलाने का प्रयास करे। यदि स्कूल निर्धारित मानकों को पूरा नहीं कर पाते, तो बच्चों के लिए आसपास के दूसरे मान्यता प्राप्त स्कूलों में दाखिले की व्यवस्था पर विचार करना होगा।

    2017 से जारी थे नोटिस, फिर भी नहीं हुई प्रभावी कार्रवाई

    बीएमसी के हलफनामे की जांच के दौरान अदालत के सामने यह बात आई कि मालवणी पश्चिम के इन 14 स्कूलों को वर्ष 2017 से नोटिस जारी किए जा रहे थे। इसके बावजूद उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

    अदालत ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब प्रशासन को इतने वर्षों से स्कूलों की स्थिति की जानकारी थी, तो समय रहते उचित कदम क्यों नहीं उठाए गए। इन संस्थानों का संचालन वर्ष 2009 से होने की जानकारी भी सुनवाई के दौरान सामने आई।

    पीठ ने कहा कि वर्षों तक स्कूलों को संचालित होने देने के बाद अचानक उन्हें बंद करना बच्चों के हित में नहीं होगा। बदलाव धीरे-धीरे होना चाहिए और किसी को रातोंरात हटाने जैसा कदम नहीं उठाया जाना चाहिए।

    स्कूलों के खिलाफ प्राथमिकी और जनहित याचिका

    यह मामला मालवणी निवासी नाजिर बशीर खान की जनहित याचिका से जुड़ा है। याचिका में बीएमसी की ओर से 14 स्कूलों को बंद करने की कार्रवाई को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि बच्चों के लिए वैकल्पिक शिक्षा की व्यवस्था किए बिना स्कूल बंद करने से हजारों गरीब परिवार प्रभावित हो सकते हैं।

    इन स्कूलों के प्रधानाचार्यों और प्रबंधन के खिलाफ जून 2026 में मालवणी पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज होने की जानकारी भी सामने आई थी। याचिका में प्रशासन की कार्रवाई और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ उठाए गए कदमों को चुनौती दी गई थी।

    इससे पहले भाजपा नेता किरीट सोमैया ने भी जून 2026 में मालवणी का दौरा कर कुछ स्कूलों पर सरकारी और बीएमसी की जमीन पर अवैध कब्जे के आरोप लगाए थे।

    हमारी पिछली रिपोर्ट में मालवणी के 14 स्कूलों के खिलाफ बीएमसी की कार्रवाई, स्कूलों की सूची, प्राथमिकी और बच्चों की वैकल्पिक शिक्षा के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था।

    उस रिपोर्ट में स्कूलों के नाम और उनके पते भी प्रकाशित किए गए थे। साथ ही मुंबई और आसपास के इलाकों में गैरमान्यता प्राप्त निजी स्कूलों की बढ़ती संख्या और प्रशासन की कार्रवाई पर भी जानकारी दी गई थी।

    पिछली रिपोर्ट में शामिल 14 संस्थानों के नाम इस प्रकार थे:

    1. Little World English School
    2. Zeel English School
    3. Al-Farooquia Islamic English School
    4. Father Abraham English School
    5. A.M. English School
    6. Kala Vidyalaya
    7. God Angel Primary School
    8. Rose Mary English School
    9. M.H. English School
    10. Little Angel English Primary School
    11. Padmashree Annasaheb Jadhav Bharatiya Samaj Unnati Mandal School
    12. Sahayog Welfare Society School
    13. Crescent English School
    14. Kavi Bharati English School

    पूरी पिछली रिपोर्ट यहां पढ़ें: मालवणी के 14 स्कूलों पर बॉम्बे हाई कोर्ट और बीएमसी की कार्रवाई

    मुंबई में 164 गैरमान्यता प्राप्त स्कूलों पर बीएमसी की कार्रवाई

    मालवणी का यह मामला मुंबई में गैरमान्यता प्राप्त स्कूलों के खिलाफ चल रही व्यापक कार्रवाई का भी हिस्सा है। अप्रैल 2026 में बीएमसी ने मुंबई में 164 ऐसे स्कूलों को बंद करने के नोटिस जारी किए थे।

    इनमें मालाड-मालवणी इलाके के 18 स्कूलों का उल्लेख किया गया था। वहीं गोवंडी और मानखुर्द क्षेत्र में 57 स्कूलों की जानकारी सामने आई थी। बीएमसी की इस कार्रवाई के तहत कई संस्थानों के खिलाफ कानूनी कदम भी उठाए गए।

    नवंबर 2026 की शुरुआत में सामने आई प्रशासनिक जानकारी के अनुसार, इन 164 स्कूलों में पढ़ने वाले 1,200 से अधिक बच्चों को मान्यता प्राप्त स्कूलों में स्थानांतरित किया जा चुका था। इनमें लगभग 690 बच्चों को बीएमसी स्कूलों और करीब 550 बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिला दिलाया गया था। पहले इन संस्थानों में लगभग 5,000 विद्यार्थी पढ़ रहे थे।

    इससे स्पष्ट है कि गैरमान्यता प्राप्त स्कूलों का मुद्दा केवल मालवणी तक सीमित नहीं है। मुंबई के कई इलाकों में ऐसे संस्थानों की स्थिति और उनमें पढ़ने वाले बच्चों की शिक्षा प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है।

    स्कूलों को मान्यता के लिए किन शर्तों को पूरा करना होगा?

    बॉम्बे हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पढ़ाई जारी रखने की अस्थायी अनुमति मिलने से स्कूल कानूनी जरूरतों से मुक्त नहीं हो गए हैं। सभी संस्थानों को निर्धारित न्यूनतम मानकों और शैक्षणिक पात्रता को पूरा करना होगा।

    स्कूल प्रबंधन को आवश्यक मान्यता और अनुमति के लिए आवेदन करना होगा तथा निर्धारित शुल्क जमा करना होगा। अदालत ने शिक्षकों की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता पर भी जोर दिया है। प्रत्येक शिक्षक के पास निर्धारित योग्यता होनी चाहिए और उसे बच्चों की शिक्षा तथा उनकी जरूरतों की समझ होनी चाहिए।

    शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 18 के अनुसार बिना मान्यता प्रमाणपत्र के स्कूल संचालित करना प्रतिबंधित है। इसके उल्लंघन पर एक लाख रुपये तक जुर्माना और उल्लंघन जारी रहने पर प्रतिदिन 10,000 रुपये तक अतिरिक्त जुर्माने का प्रावधान है।

    स्कूल बंद हुए तो बच्चों की पढ़ाई का क्या होगा?

    अदालत के सामने बच्चों को दूसरे स्कूलों में स्थानांतरित करने का विकल्प भी रखा गया। बीएमसी ने आसपास के महानगरपालिका स्कूलों में विद्यार्थियों को समायोजित करने की व्यवस्था होने की बात कही। हालांकि, याचिकाकर्ता पक्ष ने इस पर सवाल उठाए और कहा कि मालवणी जैसे घनी आबादी वाले इलाके में सभी बच्चों के लिए पर्याप्त वैकल्पिक सीटें उपलब्ध कराना आसान नहीं होगा।

    इस मामले में बच्चों के पिछले शैक्षणिक रिकॉर्ड, स्कूल छोड़ने के प्रमाणपत्र और अगली कक्षा में प्रवेश की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होगी। यदि किसी स्कूल को मान्यता नहीं मिलती और उसे बंद करना पड़ता है, तो विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए प्रशासन को समय रहते व्यवस्था करनी होगी।

    अदालत ने फिलहाल बच्चों को मौजूदा शैक्षणिक सत्र पूरा करने का अवसर दिया है। लेकिन स्कूलों का भविष्य उनकी मान्यता और कानूनी पात्रता पर निर्भर करेगा।

    15 जनवरी 2027 को फिर होगी सुनवाई

    बॉम्बे हाई कोर्ट ने 14 स्कूलों को 31 मार्च 2027 तक पढ़ाई जारी रखने की अनुमति देते हुए स्पष्ट किया है कि कानून के अनुसार आवश्यक मान्यता हासिल करना अनिवार्य होगा। यदि संबंधित संस्थान निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करते और उन्हें मान्यता नहीं मिलती, तो उनके संचालन पर रोक लग सकती है।

    इस मामले की अगली सुनवाई 15 जनवरी 2027 को होगी। अब सबकी नजर बीएमसी की ओर से की जाने वाली कार्रवाई, स्कूलों की मान्यता प्रक्रिया और उन बच्चों के भविष्य पर है, जिनकी पढ़ाई इस पूरे विवाद के केंद्र में है।

  • Indian Embassy Recruitment 2026: कजाकिस्तान में नौकरी, $1,200 सैलरी; 14 नवंबर तक आवेदन

    Indian Embassy Recruitment 2026: कजाकिस्तान में नौकरी, $1,200 सैलरी; 14 नवंबर तक आवेदन

    Indian Embassy Astana Recruitment 2026 में Marketing Assistant की भर्ती। $1,200 शुरुआती सैलरी, 21-35 साल आयु सीमा, योग्यता और आवेदन की पूरी जानकारी जानें।

    नई दिल्ली: कजाकिस्तान की राजधानी अस्ताना स्थित भारतीय दूतावास में Marketing Assistant के पद पर भर्ती निकली है। इस नौकरी के लिए शुरुआती सैलरी 1,200 अमेरिकी डॉलर प्रतिमाह रखी गई है। आवेदन करने की अंतिम तारीख 14 नवंबर 2026 है। हालांकि, इस भर्ती में अंग्रेजी के साथ रूसी और कजाख भाषा की जानकारी तथा कजाकिस्तान में काम करने के लिए वैध स्थानीय अनुमति होना जरूरी है।

    भारतीय दूतावास ने 26 अक्टूबर 2026 को जारी भर्ती विज्ञापन में इस पद के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। यह Full-time नौकरी है, जिसमें प्रोबेशन पूरा होने के बाद स्थायी नियुक्ति का प्रावधान है। इच्छुक उम्मीदवारों को अंग्रेजी में अपना CV और Covering Letter तैयार करके ईमेल या डाक के माध्यम से भेजना होगा।

    Indian Embassy Recruitment 2026: कितनी मिलेगी सैलरी?

    Marketing Assistant के पद पर शुरुआती वेतन 1,200 अमेरिकी डॉलर प्रतिमाह निर्धारित किया गया है। इसके अलावा एक साल की सेवा पूरी होने पर एक महीने की सैलरी के बराबर Annual Bonus भी मिलेगा।

    नौकरी से जुड़े अन्य लाभों में एक साल की सेवा पूरी होने के बाद 21 दिनों की Annual Leave शामिल है। नियुक्ति Full-time आधार पर होगी और प्रोबेशन पूरा होने के बाद इसे स्थायी किया जाएगा।

    विज्ञापन में प्रोबेशन की अवधि, आवास की सुविधा, मेडिकल इंश्योरेंस और अन्य भत्तों के बारे में अलग से जानकारी नहीं दी गई है।

    कौन कर सकता है आवेदन? जानें उम्र और शैक्षणिक योग्यता

    इस पद के लिए उम्मीदवार की उम्र 21 से 35 साल के बीच होनी चाहिए। शैक्षणिक योग्यता के तौर पर किसी मान्यता प्राप्त University की Degree या उसके बराबर Diploma मांगा गया है।

    Marketing या Business Administration में विशेषज्ञता रखने वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी।

    इसके अलावा उम्मीदवार के पास निम्न क्षमताएं होनी चाहिए:

    • प्रशासनिक और Organizational काम संभालने की क्षमता।
    • अच्छा Time Management और Communication Skills।
    • Word Processing, Excel, PowerPoint, Canva और Email का ज्ञान।
    • नई चीजें सीखने और काम के अनुसार Skills विकसित करने की इच्छा।
    • संबंधित क्षेत्र में 3 से 5 साल का अनुभव वांछनीय है।

    यहां 3 से 5 साल के अनुभव को अनिवार्य शर्त नहीं, बल्कि प्राथमिकता के रूप में समझना चाहिए।

    अंग्रेजी, रूसी और कजाख भाषा का ज्ञान जरूरी

    इस भर्ती की सबसे महत्वपूर्ण शर्त तीन भाषाओं में दक्षता है। उम्मीदवार को English, Russian और Kazakh तीनों भाषाओं में बोलने और लिखने की अच्छी जानकारी होनी चाहिए।

    इसकी वजह इस पद की जिम्मेदारियां हैं। Marketing Assistant को भारतीय और कजाख व्यापारियों के साथ बातचीत करनी होगी, व्यापारिक पूछताछ का जवाब देना होगा और आधिकारिक दस्तावेजों के Translation और Interpretation का काम भी संभालना होगा।

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    इसके अलावा स्थानीय Trade Organisations, सरकारी मंत्रालयों और व्यापारिक संस्थाओं के साथ नियमित संपर्क रखना भी इस नौकरी का हिस्सा होगा।

    क्या भारत में रहने वाले उम्मीदवार भी आवेदन कर सकते हैं?

    इस भर्ती में भारतीय उम्मीदवारों के लिए एक महत्वपूर्ण शर्त रखी गई है। आवेदन करने वाले उम्मीदवार के पास कजाकिस्तान में काम करने के लिए Local Work Permit, Resident Visa या उसके समान वैध दस्तावेज होने चाहिए।

    साथ ही उम्मीदवार को स्थानीय कानूनों और नियमों के अनुसार विदेशी Diplomatic Mission में काम करने की अनुमति होनी चाहिए।

    इसका मतलब है कि केवल भारतीय नागरिक होना या भारत में रहकर आवेदन भेज देना नौकरी के लिए पात्रता की गारंटी नहीं है। भारत में रहने वाले ऐसे उम्मीदवार जिनके पास कजाकिस्तान में काम करने की जरूरी अनुमति नहीं है, उन्हें इस शर्त पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

    भर्ती विज्ञापन में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि भारतीय दूतावास नए उम्मीदवारों को Work Permit बनवाने या Visa Sponsorship की सुविधा देगा। इसलिए आवेदन करने से पहले अपनी स्थानीय कानूनी पात्रता सुनिश्चित करना जरूरी है।

    Marketing Assistant को क्या-क्या काम करना होगा?

    इस पद पर नियुक्त व्यक्ति को भारतीय दूतावास के Commercial और Trade Promotion से जुड़े कामों में सहायता करनी होगी।

    इसमें स्थानीय व्यापारिक संगठनों, Associations और सरकारी Ministries के साथ संपर्क स्थापित करना शामिल है। इसके अलावा Tourism Promotion, Business Conferences और व्यापारिक कार्यक्रमों के आयोजन में भी सहयोग करना होगा।

    उम्मीदवार की प्रमुख जिम्मेदारियां होंगी:

    • दूतावास के Commercial Events की Reports तैयार करना।
    • भारत और कजाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय व्यापार से जुड़े Statistical Data इकट्ठा करना और उसका Analysis करना।
    • भारतीय और कजाख व्यापारियों की Trade और Commercial Queries का जवाब देना।
    • आधिकारिक दस्तावेजों का Translation और Interpretation करना।
    • अस्ताना आने वाले भारतीय आधिकारिक प्रतिनिधिमंडलों की सहायता करना।
    • दूतावास की ओर से सौंपे गए अन्य संबंधित कार्य करना।

    इस तरह यह नौकरी केवल Marketing या Social Media Promotion तक सीमित नहीं है। इसमें व्यापार, प्रशासन, रिपोर्टिंग, भाषा और अंतरराष्ट्रीय संपर्क से जुड़े कई काम शामिल हैं।

    भारत-कजाकिस्तान व्यापारिक संबंधों के बीच क्यों महत्वपूर्ण है यह भर्ती?

    भारत और कजाकिस्तान के बीच व्यापार और निवेश सहयोग को मजबूत करने के प्रयास लगातार जारी हैं। सितंबर 2026 में चेन्नई में आयोजित Kazakhstan-India Business, Trade and Investment Forum में दोनों देशों के 300 से अधिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था।

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    इस मंच पर तेल और गैस, फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल, Critical Minerals, Digital Technology और Renewable Energy जैसे क्षेत्रों में व्यापारिक अवसरों पर चर्चा हुई।

    2025 में भारत और कजाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 923 मिलियन अमेरिकी डॉलर दर्ज किया गया था। कजाकिस्तान की ओर से भारत को अतिरिक्त 40 वस्तुओं के निर्यात की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई थी।

    इसके अलावा 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट टोकायेव की मुलाकात हुई थी। दोनों नेताओं ने व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज और तकनीकी सहयोग सहित कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंध मजबूत करने पर चर्चा की।

    24 सितंबर को अस्ताना में आयोजित India-Kazakhstan Strategic Dialogue 2026 में भी व्यापार, निवेश, पर्यटन, लॉजिस्टिक्स और आर्थिक सहयोग जैसे विषय प्रमुख रहे।

    ऐसे में भारतीय दूतावास में Marketing Assistant की नियुक्ति उसके व्यापारिक कार्यक्रमों, स्थानीय संगठनों से संपर्क और दोनों देशों के बीच Commercial Coordination से जुड़े कामों में सहयोग करेगी।

    Indian Embassy Astana Recruitment 2026: आवेदन कैसे करें?

    इस पद के लिए उम्मीदवारों को अंग्रेजी में अपना CV और Covering Letter तैयार करना होगा। आवेदन ईमेल या डाक के माध्यम से भारतीय दूतावास की Administration Division को भेजा जा सकता है।

    ईमेल से आवेदन करने के लिए पता है:

    admn.astana@mea.gov.in

    डाक से आवेदन भेजने का पता:

    Administration Division,
    Embassy of India,
    10th Floor, 62 A, Kosmonavtov,
    Astana, Kazakhstan.

    आवेदन की अंतिम तारीख 14 नवंबर 2026 निर्धारित की गई है। उम्मीदवारों को अपना CV और Covering Letter इस तारीख तक दूतावास पहुंचाना होगा।

    Indian Embassy Recruitment 2026: जरूरी सवालों के जवाब

    प्रश्न: भारतीय दूतावास अस्ताना में किस पद पर भर्ती कर रहा है?

    उत्तर: Marketing Assistant के पद पर भर्ती की जा रही है।

    प्रश्न: इस नौकरी में शुरुआती सैलरी कितनी है?

    उत्तर: शुरुआती वेतन 1,200 अमेरिकी डॉलर प्रतिमाह है। एक साल की सेवा पूरी होने पर एक महीने की सैलरी के बराबर वार्षिक बोनस भी मिलेगा।

    प्रश्न: उम्मीदवार की उम्र कितनी होनी चाहिए?

    उत्तर: आवेदन करने वाले उम्मीदवार की उम्र 21 से 35 साल के बीच होनी चाहिए।

    प्रश्न: कौन-सी भाषाएं आनी जरूरी हैं?

    उत्तर: अंग्रेजी, रूसी और कजाख भाषा में बोलने और लिखने की दक्षता जरूरी है।

    प्रश्न: क्या भारतीय नागरिक आवेदन कर सकते हैं?

    उत्तर: भारतीय नागरिक आवेदन कर सकते हैं, लेकिन उन्हें कजाकिस्तान में काम करने के लिए जरूरी Local Work Permit, Resident Visa या समान वैध अनुमति की शर्त पूरी करनी होगी।

    प्रश्न: आवेदन की अंतिम तारीख क्या है?

    उत्तर: उम्मीदवार 14 नवंबर 2026 तक अपना CV और Covering Letter दूतावास को भेज सकते हैं।

    प्रश्न: आवेदन कहां भेजना होगा?

    उत्तर: उम्मीदवार admn.astana@mea.gov.in पर ईमेल कर सकते हैं या Embassy of India, 10th Floor, 62 A, Kosmonavtov, Astana, Kazakhstan के पते पर डाक से आवेदन भेज सकते हैं।

    आधिकारिक भर्ती विज्ञापन: Embassy of India, Astana – Marketing Assistant Vacancy

  • मुंबई में शिक्षकों को बड़ा तोहफा, अगले साल मिलेंगे 11 हजार से बढ़कर 25 हजार रुपये

    मुंबई में शिक्षकों को बड़ा तोहफा, अगले साल मिलेंगे 11 हजार से बढ़कर 25 हजार रुपये

    मुंबई में बीएमसी ने 50 आदर्श शिक्षकों को सम्मानित किया। महापौर रितू तावडे ने अगले साल से पुरस्कार राशि 11 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने की घोषणा की।

    मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 50 शिक्षकों को आदर्श शिक्षक महापौर पुरस्कार से सम्मानित किया। 24 अक्टूबर 2026 को आयोजित समारोह में मुंबई की महापौर रितू तावडे ने घोषणा की कि अगले साल से पुरस्कार की राशि 11 हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये की जाएगी। इस फैसले से प्रत्येक पुरस्कार विजेता शिक्षक को 14 हजार रुपये अतिरिक्त मिलेंगे।

    भायखला स्थित वीरमाता जीजाबाई भोसले वनस्पति उद्यान और चिड़ियाघर के पेंगुइन सभागार में वर्ष 2025-26 के पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया। इसमें महानगरपालिका और संबंधित निजी स्कूलों में विद्यार्थियों के विकास के लिए नए शैक्षणिक प्रयोग करने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया गया।

    पुरस्कार राशि में 14 हजार रुपये की बढ़ोतरी

    फिलहाल आदर्श शिक्षक महापौर पुरस्कार के तहत प्रत्येक शिक्षक को 11 हजार रुपये दिए जाते हैं। महापौर की घोषणा के बाद अगले वर्ष से यह राशि 25 हजार रुपये हो जाएगी। इस तरह पुरस्कार राशि में लगभग 127 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी।

    समारोह के दौरान शिक्षा समिति की अध्यक्ष राजेश्री शिरवडकर ने पुरस्कार की राशि बढ़ाने की मांग की थी। इस पर महापौर रितू तावडे ने अगले साल से नई राशि देने की घोषणा की।

    शिक्षकों को केवल पढ़ाई नहीं, बच्चों के व्यक्तित्व पर भी ध्यान देना चाहिए

    महापौर रितू तावडे ने कहा कि शिक्षक देश की भावी पीढ़ी का निर्माण करते हैं। वे विद्यार्थियों को शिक्षा देने के साथ उनमें नैतिक मूल्यों, आत्मविश्वास और इंसानियत की भावना विकसित करने का महत्वपूर्ण काम करते हैं।

    उन्होंने कहा कि 50 शिक्षकों का सम्मान करना उन लोगों का सम्मान है, जो देश को मजबूत, स्वाभिमानी और जिम्मेदार नागरिक देने में योगदान कर रहे हैं।

    कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिक्षक की जगह नहीं ले सकती

    महापौर ने कहा कि आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता, कंप्यूटर और सामाजिक माध्यमों के जरिए बच्चों को एक क्लिक पर बहुत सारी जानकारी मिल सकती है। लेकिन किसी निराश बच्चे की परेशानी समझना, उसे हिम्मत देना और आगे बढ़ने का भरोसा दिलाना शिक्षक ही कर सकते हैं।

    तकनीक जानकारी दे सकती है, लेकिन विवेक और मानवीय मूल्यों का विकास करने में शिक्षक की भूमिका अहम है।

    विकसित भारत 2047 के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका अहम

    महापौर ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने में आज के शिक्षकों का योगदान महत्वपूर्ण होगा। शिक्षकों को विद्यार्थियों की कल्पनाशक्ति, रचनात्मकता और नई चीजें सीखने की क्षमता बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए।

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    उन्होंने कहा कि आज के शिक्षक केवल परीक्षा की तैयारी कराने तक सीमित न रहें, बल्कि बच्चों को नए विचारों और रचनात्मक कामों के लिए भी प्रोत्साहित करें।

    विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान देने की अपील

    महापौर ने कहा कि शिक्षा को केवल परीक्षा में अच्छे अंक लाने तक सीमित नहीं रखना चाहिए। बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और खुशी का ध्यान रखना भी जरूरी है।

    उन्होंने शिक्षकों से अपील की है, कि महानगरपालिका स्कूलों से निकलने वाला प्रत्येक विद्यार्थी पढ़ाई में अच्छा होने के साथ तनावमुक्त, संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बने। इसके लिए शिक्षकों को बच्चों की प्रतिभा पहचानकर उन्हें आगे बढ़ने के अवसर देने चाहिए।

    121 आवेदकों में से 50 शिक्षकों का चयन

    वर्ष 2025-26 के आदर्श शिक्षक महापौर पुरस्कार के लिए 121 शिक्षकों के आवेदन आए थे। इनमें से 50 शिक्षकों को चुना गया। चयन प्रक्रिया में महानगरपालिका के प्राथमिक और विशेष शिक्षक, माध्यमिक स्कूलों के शिक्षक तथा निजी अनुदानित और गैर-अनुदानित स्कूलों के शिक्षक शामिल थे।

    शिक्षकों के शैक्षणिक योगदान, विद्यार्थियों के विकास के लिए किए गए प्रयासों और अध्यापन में अपनाए गए नए तरीकों को चयन में महत्व दिया गया।

    तीन दिनों तक आयोजित किए गए साक्षात्कार

    चयन प्रक्रिया के तहत अगस्त में तीन दिनों तक शिक्षकों के साक्षात्कार आयोजित किए गए थे। विद्यार्थियों की उपलब्धियों, स्कूल के विकास और पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारने के लिए किए गए प्रयासों को भी महत्व दिया गया।

    इस तरह पुरस्कार के लिए शिक्षकों के अनुभव के साथ उनके काम और शैक्षणिक प्रयोगों को भी ध्यान में रखा गया।

    मराठी माध्यम के 20 शिक्षकों को मिला सम्मान

    पुरस्कार के लिए चुने गए 50 शिक्षकों में मराठी माध्यम के 20 शिक्षक शामिल थे। हिंदी और अंग्रेजी माध्यम के 10-10 शिक्षकों को भी पुरस्कार के लिए चुना गया।

    इसके अलावा उर्दू माध्यम के आठ और गुजराती तथा कन्नड़ माध्यम के एक-एक शिक्षक को सम्मानित किया गया। इस तरह अलग-अलग भाषा माध्यमों में शिक्षा देने वाले शिक्षकों को पुरस्कार सूची में जगह मिली।

    वर्ष 1971 से दिया जा रहा है आदर्श शिक्षक पुरस्कार

    आदर्श शिक्षक महापौर पुरस्कार की परंपरा वर्ष 1971 से चली आ रही है। इसके जरिए शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया जाता है।

    पुरस्कार में नकद राशि के अलावा पदक, प्रमाणपत्र और अन्य सम्मान सामग्री भी शामिल रही है। इस बार इन दूसरी सुविधाओं में बदलाव की कोई घोषणा नहीं की गई है।

    उप महापौर संजय घाड़ी ने शिक्षकों को दी बधाई

    उप महापौर संजय घाड़ी ने कहा कि शिक्षा और शिक्षकों के योगदान से गांव, शहर और देश का विकास होता है। मुंबई महानगर के विकास में भी महानगरपालिका स्कूलों के शिक्षकों और विद्यार्थियों की अहम भूमिका रही है।

    उन्होंने पुरस्कार पाने वाले शिक्षकों और उनके परिवारों को बधाई दी।

    शिक्षा समिति अध्यक्ष राजेश्री शिरवडकर ने की सराहना

    शिक्षा समिति की अध्यक्ष राजेश्री शिरवडकर ने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों के गुरु होने के साथ-साथ अभिभावक की भूमिका भी निभाते हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता कितनी भी विकसित हो जाए, वह शिक्षक की जगह नहीं ले सकती।

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    उन्होंने पुरस्कार के लिए साक्षात्कार के दौरान शिक्षकों की ओर से प्रस्तुत शैक्षणिक प्रयोगों और विद्यार्थियों के विकास के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की।

    यामिनी जाधव ने महानगरपालिका स्कूलों के योगदान को बताया अहम

    स्थापत्य समिति (शहर) की अध्यक्ष यामिनी जाधव ने कहा कि महानगरपालिका स्कूलों के शिक्षक विद्यार्थियों को आगे बढ़ाने के लिए मेहनत करते हैं। इसी का परिणाम है कि इन स्कूलों के विद्यार्थी विभिन्न क्षेत्रों में ऊंचे पदों तक पहुंच रहे हैं।

    डॉ. प्राची जांभेकर ने दूसरे शिक्षकों से प्रेरणा लेने की अपील की

    शिक्षा विभाग की उप आयुक्त डॉ. प्राची जांभेकर ने शिक्षकों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि स्कूलों और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए किए जा रहे शैक्षणिक प्रयोग दूसरे शिक्षकों के लिए भी प्रेरणा बन सकते हैं।

    उन्होंने महानगरपालिका स्कूलों में विद्यार्थियों की शिक्षा और विकास के लिए शिक्षकों की ओर से किए जा रहे प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया।

    समारोह में ये जनप्रतिनिधि और अधिकारी भी रहे मौजूद

    कार्यक्रम में सी और डी विभाग समिति के अध्यक्ष आकाश पुरोहित, नगरसेविका उर्मिला पांचाल, नगरसेविका राजेश्री भाटणकर, नगरसेविका मेहजाबीन अतीक अहमद खान और राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक दत्तात्रेय वारे उपस्थित थे।

    इसके अलावा शिक्षा अधिकारी सुजाता खरे, शिक्षा अधिकारी कीर्तिवर्धन किरीतकुडवे सहित अन्य गणमान्य लोग भी समारोह में शामिल हुए।

    महानगरपालिका की घोषणा के अनुसार, अगले साल से आदर्श शिक्षक महापौर पुरस्कार की राशि 25 हजार रुपये होगी। नई राशि लागू होने की निश्चित तारीख और भुगतान की समयसीमा स्पष्ट होने के बाद शिक्षकों को बढ़ी हुई पुरस्कार राशि मिलने की जानकारी सामने आएगी।

  • मुंबई में 50 शिक्षकों को मिलेगा आदर्श शिक्षक महापौर पुरस्कार, 11 हजार रुपये भी मिलेंगे

    मुंबई में 50 शिक्षकों को मिलेगा आदर्श शिक्षक महापौर पुरस्कार, 11 हजार रुपये भी मिलेंगे

    मुंबई में 24 अक्टूबर को 50 आदर्श शिक्षकों को महापौर पुरस्कार दिया जाएगा। प्रत्येक शिक्षक को 11 हजार रुपये, पदक, सम्मान पत्र और स्मृति चिह्न मिलेगा।

    मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की ओर से शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 50 शिक्षकों को 24 अक्टूबर 2026 को आदर्श शिक्षक महापौर पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। मुंबई की महापौर रितू तावड़े की उपस्थिति में होने वाले इस समारोह में प्रत्येक शिक्षक को 11 हजार रुपये की पुरस्कार राशि के साथ पदक, सम्मान पत्र और स्मृति चिह्न दिया जाएगा।

    पुरस्कार वितरण समारोह शनिवार सुबह 10:30 बजे भायखला स्थित वीरमाता जीजाबाई भोसले वनस्पति उद्यान और प्राणिसंग्रहालय के पेंगुइन कक्ष में आयोजित होगा। इस दौरान उपमहापौर संजय घाड़ी, शिक्षा समिति की अध्यक्ष राजेश्री शिरवडकर और महानगरपालिका के अन्य पदाधिकारी व अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे।

    किन स्कूलों के शिक्षकों को मिलेगा पुरस्कार?

    इस साल 2025-26 के आदर्श शिक्षक महापौर पुरस्कार के लिए बीएमसी के प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों के साथ विशेष स्कूलों, निजी अनुदान प्राप्त स्कूलों और बिना अनुदान वाले प्राथमिक स्कूलों के शिक्षकों को शामिल किया गया है। कुल 50 शिक्षकों को उनके शैक्षणिक योगदान और काम के लिए सम्मानित किया जाएगा।

    11 हजार रुपये के साथ मिलेगा सम्मान

    पुरस्कार पाने वाले प्रत्येक शिक्षक के बैंक खाते में 11,000 रुपये की राशि सीधे जमा की जाएगी। इसके अलावा उन्हें महानगरपालिका के प्रतीक चिह्न वाला सोने की परत चढ़ा पदक, स्मृति चिह्न, सम्मान पत्र या प्रमाणपत्र, शॉल, श्रीफल और पारंपरिक पगड़ी देकर सम्मानित किया जाएगा।

    इस पुरस्कार का उद्देश्य शिक्षा के क्षेत्र में अच्छा काम करने वाले शिक्षकों के योगदान को पहचान देना और उन्हें प्रोत्साहित करना है।

    समारोह में शामिल होंगे प्रमुख पदाधिकारी

    कार्यक्रम में महापौर रितू तावड़े, उपमहापौर संजय घाड़ी और शिक्षा समिति अध्यक्ष राजेश्री शिरवडकर की मौजूदगी रहेगी। महानगरपालिका के जनसंपर्क विभाग ने समाचार माध्यमों से समारोह की कवरेज के लिए अपने प्रतिनिधि, छायाकार और वीडियो पत्रकार भेजने का अनुरोध किया है।

  • मुंबई में 1,700 से ज्यादा स्वास्थ्यकर्मियों को राहत, महिलाओं को मिलेगी 180 दिन की सवेतन प्रसूति छुट्टी

    मुंबई में 1,700 से ज्यादा स्वास्थ्यकर्मियों को राहत, महिलाओं को मिलेगी 180 दिन की सवेतन प्रसूति छुट्टी

    मुंबई महानगरपालिका ने 1,700 से अधिक स्वास्थ्यकर्मियों की मांगों पर कदम उठाए। महिला कर्मचारियों की 180 दिन की प्रसूति छुट्टी मंजूर, वेतन में देरी पर ठेकेदार पर कार्रवाई।

    मुंबई: मुंबई में राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य अभियान के तहत काम करने वाले 1,700 से अधिक बाहरी एजेंसी के स्वास्थ्यकर्मियों की मांगों पर महानगरपालिका ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। महिला कर्मचारियों को 180 दिन की सवेतन प्रसूति छुट्टी देने के प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। वहीं, वेतन में देरी के मामले में संबंधित ठेकेदार डी. एस. एंटरप्राइजेज पर दंडात्मक कार्रवाई की गई है। कर्मचारियों की शिकायतों के निवारण के लिए समिति गठित करने और संशोधित न्यूनतम वेतन लागू करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।

    मुंबई की महापौर रितू तावड़े ने अपने निवास पर आंदोलनकारी कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर प्रशासन की ओर से उठाए गए कदमों की जानकारी दी। कर्मचारियों की इन मांगों को लेकर पिछले कई दिनों से आजाद मैदान में आंदोलन जारी है।

    महिला कर्मचारियों को 180 दिन की सवेतन प्रसूति छुट्टी

    बाहरी एजेंसी के माध्यम से नियुक्त महिला स्वास्थ्यकर्मियों को प्रसूति के दौरान आर्थिक राहत देने के लिए 180 दिन की सवेतन छुट्टी के प्रस्ताव को महानगरपालिका आयुक्त की मंजूरी मिल गई है। इसे लागू करने के लिए संबंधित एजेंसी को आधिकारिक परिपत्र जारी करने की प्रशासनिक प्रक्रिया चल रही है।

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    इस फैसले से महिला कर्मचारियों को मातृत्व के दौरान छुट्टी के साथ वेतन मिलने का लाभ मिल सकेगा। हालांकि, इसे लागू करने के लिए परिपत्र जारी होना अभी बाकी है।

    न्यूनतम वेतन पर भी चल रही प्रक्रिया

    स्वास्थ्यकर्मियों की दूसरी प्रमुख मांग संशोधित न्यूनतम वेतन लागू करने की है। इस संबंध में प्रस्ताव प्रमुख श्रम अधिकारी की राय के साथ वित्त विभाग को भेजा जा रहा है। वित्त विभाग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इस पर आगे का निर्णय लिया जाएगा।

    फिलहाल संशोधित न्यूनतम वेतन लागू करने की अंतिम तारीख घोषित नहीं की गई है। ऐसे में कर्मचारियों की नजर इस मांग पर होने वाली अगली कार्रवाई पर रहेगी।

    वेतन में देरी पर डी. एस. एंटरप्राइजेज के खिलाफ कार्रवाई

    कर्मचारियों के वेतन में देरी के मामले में संबंधित ठेकेदार संस्था डी. एस. एंटरप्राइजेज के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की गई है। महानगरपालिका प्रशासन ने एजेंसी को वेतन भुगतान में अनियमितता नहीं होने देने के लिए कड़े निर्देश भी दिए हैं।

    आगे कर्मचारियों की वेतन संबंधी समस्याओं और अन्य शिकायतों के समाधान के लिए उप आयुक्त (सार्वजनिक स्वास्थ्य) की अध्यक्षता में समिति गठित की जाएगी। इसके माध्यम से शिकायतों पर नजर रखी जाएगी और जरूरत पड़ने पर संबंधित ठेकेदार के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।

    5 अक्टूबर को आंदोलन स्थल पर पहुंची थीं महापौर

    स्वास्थ्यकर्मी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर मुंबई के आजाद मैदान में कई दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। महापौर रितू तावड़े ने 5 अक्टूबर 2026 को आंदोलन स्थल पर पहुंचकर कर्मचारियों से सीधे बातचीत की थी और उनकी समस्याएं सुनी थीं।

    इसके बाद उन्होंने प्रशासन को पत्र लिखकर मांगों पर ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए। कोविड-19 महामारी के दौरान मुंबईकरों की स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान देने वाले इन कर्मचारियों की समस्याओं का जल्द समाधान करने पर जोर दिया गया। इसके बाद सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने महापौर को विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट सौंपी। कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई बैठक में महापौर ने प्रशासन के फैसलों और आगे की प्रक्रिया की जानकारी दी।

    बाकी मांगों पर भी फैसले का इंतजार

    महापौर रितू तावड़े ने कर्मचारियों से बातचीत के दौरान कहा कि कोविड काल में मुंबईकरों के स्वास्थ्य की देखभाल करने वाले बाहरी एजेंसी के स्वास्थ्यकर्मियों के साथ महानगरपालिका मजबूती से खड़ी है। उन्होंने 180 दिन की सवेतन प्रसूति छुट्टी को महिला कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत बताया और कहा कि बाकी मांगों पर भी प्रशासन तथा सरकार सकारात्मक हैं।

    अब कर्मचारियों की नजर प्रसूति छुट्टी का परिपत्र जारी होने, संशोधित न्यूनतम वेतन पर अंतिम निर्णय और शिकायत निवारण समिति के गठन पर रहेगी। इन कदमों के लागू होने से ही कर्मचारियों को मिलने वाली राहत की पूरी तस्वीर साफ होगी।

  • आदिवासी छात्रों का 180 किमी मुंबई मार्च शुरू, 584 मौतों से लेकर स्कूल सुविधाओं तक उठे सवाल

    आदिवासी छात्रों का 180 किमी मुंबई मार्च शुरू, 584 मौतों से लेकर स्कूल सुविधाओं तक उठे सवाल

    महाराष्ट्र में आदिवासी छात्रों ने नाशिक से मुंबई तक 180 किमी मार्च शुरू किया। आश्रमशालाओं में 584 मौतें, सुरक्षा, भोजन और लंबित मांगें मुद्दा बनीं।

    मुंबई: नाशिक से मुंबई तक आदिवासी छात्रों का 180 किमी ‘Tribal Gen Z Ulgulan’ मार्च सोमवार, 28 सितंबर को शुरू हो गया। करीब 40 दिनों से नाशिक में चल रहे धरने के बाद सकल आदिवासी विद्यार्थी आंदोलन कृति समिति के नेतृत्व में छात्र और आदिवासी समुदाय के लोग मुंबई के राजभवन की ओर पैदल रवाना हुए हैं। आंदोलन का केंद्र सिर्फ स्कूलों की सुविधाएं नहीं, बल्कि आश्रमशालाओं में छात्रों की सुरक्षा, मौतों की जांच, भोजन व्यवस्था, छात्रावास सुविधाएं, लंबित आर्थिक सहायता और सरकारी आश्वासनों के क्रियान्वयन का सवाल बन चुका है।

    आयोजकों के अनुसार पहले दिन करीब 1,500 छात्र शामिल हो सकते हैं। यह मार्च नाशिक, खानदेश, उत्तर महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और विदर्भ सहित अलग-अलग क्षेत्रों से छात्रों और समर्थकों को जोड़ रहा है। मार्च का अंतिम पड़ाव मुंबई का राजभवन है और उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इसके 4 से 5 अक्टूबर के बीच मुंबई पहुंचने की संभावना है।

    आखिर छात्र 180 किमी पैदल मुंबई क्यों आ रहे हैं?

    छात्रों का कहना है कि नाशिक में लंबे धरने और सरकार के साथ बातचीत के बावजूद उनकी कई प्रमुख मांगों पर ठोस और लिखित कार्रवाई नहीं हुई है। उनकी मांगों में आदिवासी विकास मंत्री अशोक उईके का इस्तीफा, आदिवासी विकास विभाग के सचिव विजय वाघमारे और आयुक्त लीना बंसोडे के तबादले, आश्रमशालाओं और छात्रावासों में बुनियादी सुविधाओं में सुधार, विद्यार्थियों की मौतों की स्वतंत्र जांच तथा पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता शामिल है।

    25 सितंबर को आदिवासी विकास विभाग और छात्र प्रतिनिधियों के बीच बैठक भी हुई थी। सरकार ने 27 मांगों पर अपनी स्थिति बताते हुए सात पन्नों का पत्र जारी किया। कुछ मांगों पर काम शुरू होने की जानकारी दी गई, जबकि कई मामलों को नीतिगत निर्णय से जोड़कर अभी लंबित रखा गया है। छात्रों की मुख्य आपत्ति यह है कि उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि स्पष्ट लिखित प्रतिबद्धता और जमीन पर कार्रवाई चाहिए।

    दो साल में 584 आदिवासी छात्रों की मौत का आंकड़ा क्यों बना बड़ा मुद्दा?

    इस आंदोलन का सबसे गंभीर पहलू महाराष्ट्र की आश्रमशालाओं से जुड़ा 584 विद्यार्थियों की मौत का सरकारी आंकड़ा है। आदिवासी विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार 2024-25 और 2025-26 के दौरान सरकारी और सहायता प्राप्त आश्रमशालाओं में कुल 584 विद्यार्थियों की मौत दर्ज हुई। इनमें 384 मौतें सरकारी आश्रमशालाओं और 200 मौतें सहायता प्राप्त आश्रमशालाओं से जुड़ी थीं।

    इन मौतों के कारणों में गंभीर बीमारी, सिकल सेल, दुर्घटना, आत्महत्या और सर्पदंश शामिल बताए गए हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 273 मौतें गंभीर बीमारी, 228 दुर्घटना, 55 फांसी और 28 सर्पदंश से जुड़ी थीं। कुल मौतों में लगभग 88 प्रतिशत मौतें विद्यार्थियों के घर पर और करीब 11 प्रतिशत आश्रमशाला परिसर में हुईं। हालांकि 584 मौतों का सवाल सीधे स्कूल की लापरवाही से जुड़ा नहीं है। असल सवाल प्रत्येक मौत के कारण, इलाज, सुरक्षा व्यवस्था और संस्थागत जिम्मेदारी की जांच का है।

    इसी वजह से आंदोलनकारी स्वतंत्र और मामले-दर-मामले जांच की मांग कर रहे हैं। नाशिक के सांसद भास्कर भगरे ने भी 584 मौतों की अलग-अलग परिस्थितियों की जांच की मांग उठाई है, जिसमें इलाज, पोषण, पेयजल, स्वच्छता, आवास, कर्मचारियों की उपलब्धता और आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधाओं की जांच शामिल है।

    गढ़चिरौली की तीन छात्राओं की मौत ने बढ़ाए सवाल

    9 अगस्त को गढ़चिरौली के जपतलाई गांव स्थित सहायता प्राप्त आदिवासी आवासीय स्कूल के छात्रावास में सांप के काटने से तीन आदिवासी छात्राओं की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद राज्य सरकार ने संबंधित स्कूल का लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द करने की कार्रवाई की और पूरे राज्य की आश्रमशालाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे।

    मामला बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ तक भी पहुंचा। अदालत के रिकॉर्ड में छात्रावास में पर्याप्त शौचालय और स्नानघर, अलमारियों, भोजन कक्ष और सीसीटीवी जैसी व्यवस्थाओं से जुड़ी कमियों का उल्लेख है। एक निरीक्षण में 9 सीसीटीवी में से केवल 5 के काम करने की जानकारी भी सामने आई। अदालत ने पहले के निरीक्षण और बाद की जांच में सामने आई स्थितियों के अंतर को देखते हुए संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी विस्तृत जांच की जरूरत बताई।

    मामले में मारोतराव कोवसे, उनके बेटे विश्वजीत कोवसे और छात्रावास अधीक्षक भाग्यश्री चिल्लमवार से जुड़ी अग्रिम जमानत याचिकाएं भी हाईकोर्ट के सामने आईं और अदालत ने उन्हें खारिज किया। इस मामले की कानूनी जांच अभी महत्वपूर्ण चरण में है।

    584 मौतों की जांच के लिए बनी समिति, लेकिन सवाल रिपोर्ट पर

    आदिवासी विकास मंत्री अशोक उईके ने 584 विद्यार्थियों की मौत के कारणों की जांच के लिए विशेषज्ञ समिति बनाए जाने की जानकारी दी है। सरकार के अनुसार आश्रमशालाओं की जांच चल रही है और रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदारी तय करने तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

    अब छात्रों की मांग यह है कि जांच केवल विभागीय प्रक्रिया तक सीमित न रहे और मौतों की स्वतंत्र तथा पारदर्शी जांच हो। दूसरी ओर सरकार की ओर से विशेषज्ञ समिति और आश्रमशालाओं के निरीक्षण की प्रक्रिया चलने की बात कही गई है। इस पूरे मामले में अगला महत्वपूर्ण कदम समिति की रिपोर्ट और उसके आधार पर होने वाली कार्रवाई होगी।

    511 सहायता प्राप्त आश्रमशालाओं के ऑडिट पर भी नजर

    गढ़चिरौली की घटना के बाद राज्य सरकार ने लगभग 511 सहायता प्राप्त आश्रमशालाओं का तीसरे पक्ष से सुरक्षा ऑडिट कराने की प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य स्कूलों में सुरक्षा, आधारभूत ढांचे और बच्चों के रहने की परिस्थितियों की जांच करना था।

    अब सवाल यह है कि 28 सितंबर तक कितनी आश्रमशालाओं का ऑडिट पूरा हुआ, कितनी जगह कमियां मिलीं और कितने संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई हुई। यह जानकारी सामने आना आंदोलन की सबसे महत्वपूर्ण मांगों में से एक पर सरकार की वास्तविक प्रगति स्पष्ट कर सकता है।

    केंद्रीय रसोई व्यवस्था पर भी बड़ा विवाद

    आंदोलनकारी आश्रमशालाओं के लिए केंद्रीय रसोई से खाना भेजने की व्यवस्था खत्म करने की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि खाना पहले तैयार होने और लंबी दूरी तक ले जाए जाने के कारण उसकी गुणवत्ता प्रभावित होती है। कच्चे माल की लेबलिंग, एक्सपायरी और गुणवत्ता जांच को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

    सरकार ने कहा है कि केंद्रीय रसोई से लगभग 50 किलोमीटर के दायरे में भोजन पहुंचाया जाता है और इस व्यवस्था की समीक्षा के लिए समिति बनाई गई है। इसी बीच स्कूलों, छात्रावासों, आश्रमशालाओं, केंद्रीय रसोई और भोजन आपूर्तिकर्ताओं की जांच के लिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन की विशेष निरीक्षण मुहिम भी शुरू की गई है। इसमें भोजन के नमूने, एफएसएसएआई पंजीकरण, प्रशिक्षित कर्मचारियों और खाद्य सुरक्षा मानकों की जांच शामिल है।

    सरकारी छात्रावास मुफ्त, फिर फीस वसूली का आरोप क्यों?

    आदिवासी विकास विभाग की आधिकारिक जानकारी के अनुसार पात्र अनुसूचित जनजाति विद्यार्थियों के लिए सरकारी छात्रावास में रहने, भोजन और शैक्षणिक सामग्री जैसी सुविधाएं मुफ्त उपलब्ध कराने का प्रावधान है।

    इसके बावजूद आंदोलन से जुड़े लोगों ने कुछ संस्थानों में प्रवेश, दान और अन्य शुल्क के नाम पर बड़ी रकम वसूले जाने का आरोप लगाया है। कुछ मामलों में यह रकम एक लाख रुपये तक होने का दावा किया गया है। छात्रों ने ऐसी कथित वसूली की जांच और कार्रवाई की मांग की है।

    इस आरोप की वास्तविक स्थिति तय करने के लिए संबंधित संस्थानों के शुल्क रिकॉर्ड और विभागीय जांच का सामने आना जरूरी होगा।

    Swayam योजना का पैसा भी आंदोलन का मुद्दा

    आंदोलन में पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्वयम् योजना के लंबित प्रत्यक्ष लाभ अंतरण की राशि जारी करने और सहायता बढ़ाने की मांग भी शामिल है।

    स्वयम् योजना उन अनुसूचित जनजाति विद्यार्थियों के लिए है जिन्हें सरकारी छात्रावास में प्रवेश नहीं मिल पाता और जो उच्च शिक्षा के लिए आगे बढ़ते हैं। योजना के तहत भोजन, आवास, निर्वाह और शैक्षणिक सामग्री जैसी जरूरतों के लिए आर्थिक सहायता का प्रावधान है। छात्रों का कहना है कि लंबित भुगतान और सहायता की अपर्याप्त राशि के कारण उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।

    अगस्त में छात्रावास के नियम बदले, फिर भी आंदोलन क्यों जारी?

    अगस्त में छात्रावास प्रवेश और नियमों को लेकर छात्रों का विरोध तेज हुआ था। 30 वर्ष की आयु सीमा सहित नए प्रावधानों को लेकर विवाद के बाद सरकार ने 14 अगस्त के संबंधित शासन निर्णय और संशोधित नियम वापस लेने तथा आयु सीमा हटाने की घोषणा की थी।

    लेकिन इसके बाद आंदोलन खत्म नहीं हुआ। इसका कारण यह है कि छात्रों की मौजूदा मांगें केवल छात्रावास की आयु सीमा तक सीमित नहीं हैं। अब मुद्दा आश्रमशालाओं की सुरक्षा, 584 मौतों की जांच, भोजन, छात्रावास, स्वास्थ्य सुविधा, आर्थिक सहायता और अधिकारियों की जवाबदेही तक फैल चुका है।

    नाशिक से मुंबई तक आगे क्या?

    मार्च के दौरान छात्र दिन में पैदल चलने और रात में खुले स्थानों पर रुकने की योजना के साथ आगे बढ़ रहे हैं। प्रस्तावित मार्ग नाशिक से इगतपुरी, कसारा, शाहपुर और ठाणे क्षेत्र होते हुए मुंबई तक जाने का है। आयोजकों का लक्ष्य राजभवन पहुंचकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से सीधे मुलाकात करना है।

    आंदोलन से जुड़े राहुल पावरा सहित नेताओं का कहना है कि अलग-अलग क्षेत्रों से छात्रों और आदिवासी समुदाय के लोगों की भागीदारी बढ़ रही है। पहले हुए संवादों में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, मंत्री अशोक उईके और नाशिक के तत्कालीन जिलाधिकारी आयुष प्रसाद से बातचीत का भी उल्लेख किया गया था। छात्रों की मांग है कि सरकार उनके मुद्दों पर लिखित और स्पष्ट निर्णय दे।

    इससे पहले 3 सितंबर को कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत डिपके ने प्रदर्शनकारियों से मुलाकात कर भूख हड़ताल समाप्त कर आंदोलन मुंबई ले जाने का आग्रह किया था। अब आंदोलन नाशिक से निकलकर सीधे राज्य की राजधानी की ओर बढ़ गया है।

    सबसे बड़ा सवाल अब यह है कि 180 किलोमीटर की इस पैदल यात्रा के मुंबई पहुंचने से पहले सरकार छात्रों के साथ कोई ठोस लिखित समझौता करती है या आंदोलन राजभवन तक पहुंचता है। 25 सितंबर के सात पन्नों के सरकारी जवाब के बाद अब छात्रों की नजर केवल घोषणाओं पर नहीं, बल्कि मांगों के वास्तविक क्रियान्वयन पर है।

  • IIT Bombay Sahil Wakode Case: 20 बयान दर्ज, Doolla का बयान बाकी; अब Exam Rules में बदलाव

    IIT Bombay Sahil Wakode Case: 20 बयान दर्ज, Doolla का बयान बाकी; अब Exam Rules में बदलाव

    IIT Bombay छात्र साहिल वाकोडे केस में Crime Branch ने 20 लोगों के बयान दर्ज किए हैं। प्रो. दुल्ला का बयान बाकी है और परीक्षा नियमों में बदलाव की तैयारी है।

    मुंबई: IIT Bombay के छात्र साहिल वाकोडे की मौत के मामले में जांच और विरोध दोनों तेज हो गए हैं। मुंबई Crime Branch अब तक परीक्षा में मौजूद छात्रों, शिक्षकों, संस्थान के कर्मचारियों और हॉस्टल स्टाफ समेत 20 लोगों के बयान दर्ज कर चुकी है, लेकिन मामले में नामजद प्रो. सूर्यनारायण दुल्ला का बयान अभी दर्ज नहीं हुआ है। इसी बीच IIT Bombay ने परीक्षा में कथित अकादमिक अनियमितता से जुड़े नियमों और प्रक्रिया की समीक्षा शुरू कर दी है और छात्रों को कार्रवाई से पहले अपने मेंटर से बात करने का अवसर देने जैसे बदलावों पर विचार किया जा रहा है।

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    साहिल वाकोडे की मौत 18 सितंबर को हुई थी। वह IIT Bombay के Energy Science and Engineering विभाग में BTech के दूसरे वर्ष के छात्र थे। परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन के इस्तेमाल को लेकर हुई घटना के कुछ घंटे बाद उन्हें हॉस्टल के कमरे में मृत पाया गया था। इस घटना के बाद परिवार ने जातिगत भेदभाव और मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए, जबकि संस्थान की ओर से इन आरोपों का खंडन किया गया है। मामले की जांच अब मुंबई Crime Branch कर रही है।

    Crime Branch की जांच में अब तक क्या सामने आया?

    जांच एजेंसी ने परीक्षा हॉल में मौजूद छात्रों और परीक्षा की निगरानी कर रहे शिक्षकों के बयान दर्ज किए हैं। हॉस्टल स्टाफ से भी पूछताछ की गई है। जांच का एक अहम हिस्सा 18 सितंबर को परीक्षा के दौरान हुई घटना से लेकर साहिल के हॉस्टल पहुंचने और बाद की परिस्थितियों को जोड़ना है।

    साहिल के मोबाइल फोन से जांचकर्ताओं को अभी महत्वपूर्ण डिजिटल जानकारी नहीं मिल पाई है। फोन पैटर्न लॉक से सुरक्षित है और स्क्रीन पर कुछ मिस्ड कॉल की सूचनाएं दिखाई दी थीं, लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि उन कॉल्स में कौन शामिल था। Crime Branch फोन से कॉल, संदेश और अन्य डिजिटल जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रही है।

    पुलिस ने फोन और संस्थान की CCTV फुटेज को फोरेंसिक जांच के लिए भी भेजा है। CCTV फुटेज से परीक्षा के दौरान हुई घटनाओं की पुष्टि और उनका क्रम समझने की कोशिश की जा रही है।

    प्रो. सूर्यनारायण दुल्ला का बयान अभी बाकी

    मामले में साहिल के पिता की शिकायत पर प्रो. सूर्यनारायण दुल्ला के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। शिकायत में जातिगत उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप लगाए गए हैं तथा SC/ST अत्याचार निवारण कानून के तहत भी कार्रवाई की गई है। इन आरोपों की जांच जारी है और इन्हें अभी न्यायिक रूप से साबित नहीं माना जा सकता।

    Crime Branch ने मामले से जुड़े कई लोगों से पूछताछ पूरी कर ली है, लेकिन 25 सितंबर तक प्रो. दुल्ला का बयान दर्ज नहीं हुआ था। इसलिए जांच में उनका पक्ष एक महत्वपूर्ण लंबित कड़ी बना हुआ है।

    IIT Bombay ने प्रो. दुल्ला को प्रशासनिक जिम्मेदारी से हटाने के बाद जांच के दौरान छुट्टी पर भेजा है। छात्रों की ओर से उन्हें पूरी तरह निलंबित करने की मांग भी उठी थी।

    साहिल के परिवार के आरोप और IIT Bombay का पक्ष

    साहिल के माता-पिता रविंद्र वाकोडे और सोनाली वाकोडे का आरोप है कि उनके बेटे ने संस्थान में जातिगत टिप्पणियों और मानसिक प्रताड़ना की शिकायत उनसे की थी। परिवार ने संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई और गिरफ्तारी की मांग की है।

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    दूसरी ओर IIT Bombay की ओर से कहा गया है कि साहिल ने संस्थान के SC/ST Cell या प्रशासन के सामने ऐसी कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई थी। मामले में कुछ छात्रों और फैकल्टी सदस्यों की ओर से भी जातिगत भेदभाव के आरोपों पर अलग-अलग राय सामने आई है। इसलिए इस पहलू की स्वतंत्र जांच अभी महत्वपूर्ण है।

    IIT Bombay ने साहिल की मौत से जुड़े अपने शुरुआती communication को लेकर माफी भी दोहराई है। इसके बाद संस्थान की ओर से परीक्षा और अकादमिक misconduct की प्रक्रिया की समीक्षा का कदम सामने आया है।

    अब IIT Bombay में परीक्षा के नियम बदल सकते हैं

    साहिल की मौत के बाद IIT Bombay ने academic misconduct से जुड़े नियमों की समीक्षा के लिए एक नई समिति बनाई है। इसमें faculty और students को बराबर प्रतिनिधित्व दिया गया है। समिति परीक्षा के दौरान suspected malpractice से निपटने के लिए स्पष्ट और step-by-step SOP तैयार करेगी।

    प्रस्तावित बदलावों में यह भी शामिल है कि किसी छात्र पर परीक्षा में अनियमितता का आरोप लगने के बाद disciplinary action से पहले उसे अपने student mentor से बात करने का अवसर दिया जाए। इसके अलावा answer sheet के पहले पेज पर examination malpractice के नियम और संभावित परिणाम स्पष्ट रूप से लिखने का प्रस्ताव भी विचाराधीन है।

    इन बदलावों का उद्देश्य suspected academic misconduct के मामलों में प्रक्रिया को ज्यादा स्पष्ट और समान बनाना है। हालांकि revised SOP और नियम लागू होने से पहले उन्हें Senate की मंजूरी लेनी होगी।

    Mid-Semester Exam अब 10 और 11 अक्टूबर को

    Sahil Wakode मामले के बाद IIT Bombay के बचे हुए Mid-Semester examinations एक बार फिर टाल दिए गए हैं। 26 और 27 सितंबर को होने वाली परीक्षाएं अब 10 और 11 अक्टूबर को होंगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार timetable में बदलाव नहीं किया गया है।

    संस्थान ने परीक्षा टालने का संबंध नई academic misconduct committee को student-friendly SOP और संशोधित नियम तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय देने से जोड़ा है।

    छात्रों की 18 मांगों का क्या असर हुआ?

    साहिल की मौत के बाद IIT Bombay के छात्रों ने 18 सूत्रीय मांगें रखी थीं। इनमें स्वतंत्र जांच, student welfare और grievance redressal व्यवस्था में सुधार, healthcare सुविधाओं को मजबूत करना तथा 24 घंटे psychiatrist की उपलब्धता जैसी मांगें शामिल थीं।

    इन मांगों के बीच अब academic misconduct की प्रक्रिया में student representation, mentor intervention और स्पष्ट examination SOP तैयार करने की दिशा में संस्थागत कदम उठाया गया है। इससे साफ है कि विवाद का असर सिर्फ मौजूदा जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि IIT Bombay की परीक्षा और student-support व्यवस्था में बदलाव तक पहुंच गया है।

    NCSC ने भी शुरू की जांच

    राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष किशोर मकवाना ने 24 सितंबर को IIT Bombay पहुंचकर मामले की मौके पर जांच की। उन्होंने संस्थान के निदेशक, अधिकारियों, संबंधित फैकल्टी और अन्य लोगों से जानकारी ली तथा उस परीक्षा कक्ष का भी निरीक्षण किया जहां 18 सितंबर की घटना हुई थी। आयोग ने साहिल की मौत से पहले की परिस्थितियों, संबंधित फैकल्टी की भूमिका और SC छात्रों के लिए grievance mechanisms की जानकारी मांगी है।

    साहिल के माता-पिता ने आयोग के सामने भी अपनी शिकायत और मांगें रखी हैं। परिवार इसके साथ ही मुंबई के आजाद मैदान में विरोध प्रदर्शन कर चुका है और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है।

    मुंबई कांग्रेस का IIT Bombay के बाहर आंदोलन

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    24 सितंबर को मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष और सांसद वर्षा गायकवाड के नेतृत्व में कांग्रेस और NSUI कार्यकर्ताओं ने IIT Bombay के पवई परिसर के बाहर प्रदर्शन किया। पुलिस ने वर्षा गायकवाड समेत कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। प्रदर्शन के दौरान गायकवाड ने साहिल की मौत को “institutional murder” बताते हुए निष्पक्ष और विस्तृत जांच तथा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

    वर्षा गायकवाड ने शिक्षा संस्थानों में जाति और धर्म के आधार पर भेदभाव तथा RSS के कथित प्रभाव को लेकर भी सवाल उठाए। ये राजनीतिक आरोप हैं; साहिल वाकोडे मामले में RSS की भूमिका स्थापित करने वाला स्वतंत्र प्रमाण अभी सामने नहीं आया है।

    इस दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर कांग्रेस ने दमन का आरोप लगाया, जबकि पुलिस की कार्रवाई का तत्काल संदर्भ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया से जुड़ा बताया गया है।

    अब जांच में किन सवालों के जवाब बाकी हैं?

    साहिल वाकोडे मामले में अब जांच का फोकस केवल परीक्षा हॉल की घटना तक सीमित नहीं है। Crime Branch को यह स्पष्ट करना है कि 18 सितंबर की परीक्षा में वास्तव में क्या हुआ, उसके बाद साहिल किन लोगों के संपर्क में था, उसके मोबाइल और अन्य डिजिटल उपकरणों में क्या जानकारी है तथा परिवार की ओर से लगाए गए जातिगत उत्पीड़न के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होती है या नहीं।

    इसके साथ ही प्रो. सूर्यनारायण दुल्ला का बयान, CCTV और डिजिटल फोरेंसिक जांच तथा संस्थान की आंतरिक जांच रिपोर्ट मामले की अगली दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगी। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर साहिल की मौत के कारणों और उससे जुड़ी जिम्मेदारी को लेकर जांच जारी है।

    IIT Bombay में अब परीक्षा व्यवस्था में प्रस्तावित बदलाव, 10 और 11 अक्टूबर की परीक्षाएं, Crime Branch की जांच, NCSC की पड़ताल और परिवार व छात्रों की मांगें इस मामले के अगले महत्वपूर्ण चरण होंगे।

  • महाराष्ट्र में खिलाड़ियों को 5% नौकरी आरक्षण, 3 महीने में Sports Certificate Verification अनिवार्य

    महाराष्ट्र में खिलाड़ियों को 5% नौकरी आरक्षण, 3 महीने में Sports Certificate Verification अनिवार्य

    महाराष्ट्र में खिलाड़ियों के 5% नौकरी आरक्षण की नई नीति मंजूर, पुराने प्रमाणपत्रों का 3 महीने में सत्यापन जरूरी; जानिए किसे मिलेगा लाभ।

    मुंबई: महाराष्ट्र में सरकारी नौकरी का इंतजार कर रहे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के लिए बड़ा फैसला हुआ है। राज्य मंत्रिमंडल ने सरकारी, अर्ध-सरकारी और अन्य पात्र संस्थाओं में खिलाड़ियों के लिए लागू 5% नौकरी आरक्षण की संशोधित नीति को मंजूरी दे दी है। नई व्यवस्था में सबसे अहम बदलाव यह है कि आरक्षण का लाभ लेने वाले खिलाड़ियों को अपने Sports Certificate की वैधता का सत्यापन तीन महीने के भीतर कराना होगा।

    यह तीन महीने की समयसीमा नए संशोधित शासन निर्णय (GR) के जारी होने की तारीख से लागू होगी। सरकार ने Sports Quota से जुड़े पहले के सभी शासन निर्णयों को रद्द कर एक एकीकृत नीति लागू करने का फैसला किया है। नया GR जल्द जारी किया जाएगा।

    5% Sports Quota किन नौकरियों में लागू होगा?

    संशोधित नीति के तहत यह आरक्षण मंत्रालयीन विभागों और उनके अधीन सरकारी कार्यालयों के साथ जिला परिषद, पंचायत समिति, ग्राम पंचायत, महानगरपालिका, सरकारी उपक्रम, मंडल, महामंडल, विश्वविद्यालय, सरकारी अनुदान प्राप्त शैक्षणिक संस्थान, आश्रमशाला, सहकारी संस्थाओं और सरकारी निधि अथवा अनुदान प्राप्त अन्य पात्र संस्थाओं में सीधी भर्ती के पदों पर लागू रहेगा।

    इसमें समूह-अ, समूह-ब, समूह-क और समूह-ड के पद शामिल होंगे।

    महाराष्ट्र में 5% Sports Quota की व्यवस्था 30 अप्रैल 2005 से लागू है। क्रीड़ा विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार अब तक 4,949 खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी में इसका लाभ मिल चुका है।

    किस खिलाड़ी को किस पद के लिए पात्रता मिलेगी?

    नई नीति में खेल उपलब्धि और प्रतियोगिता के स्तर के आधार पर अलग-अलग समूहों के लिए पात्रता तय की गई है।

    समूह-अ: ओलंपिक, एशियन गेम्स, वरिष्ठ विश्व एवं एशियन चैंपियनशिप/कप, कॉमनवेल्थ गेम्स, टेनिस ग्रैंड स्लैम, ग्रैंडमास्टर स्तर की शतरंज प्रतियोगिताओं और पैरालंपिक सहित अधिकृत अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त खिलाड़ी।

    समूह-ब राजपत्रित: युवा/कनिष्ठ विश्व एवं एशियन चैंपियनशिप, कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप, यूथ ओलंपिक तथा संबंधित अंतरराष्ट्रीय स्कूल, विश्वविद्यालय और पैरा प्रतियोगिताओं के पदक विजेता।

    समूह-ब अराजपत्रित: नेशनल गेम्स, राष्ट्रीय चैंपियनशिप, राष्ट्रीय फेडरेशन कप, पैरा नेशनल गेम्स और राष्ट्रीय स्कूल खेल प्रतियोगिताओं के पदक विजेता।

    समूह-क: खेलो इंडिया, अखिल भारतीय अंतर-विश्वविद्यालय, राज्य स्तरीय वरिष्ठ/युवा/कनिष्ठ, स्कूल, अंतर-विश्वविद्यालय और पैरा खेल प्रतियोगिताओं के पदक विजेता।

    समूह-ड: निर्धारित खेल योग्यता रखने वाले खिलाड़ी अथवा वरिष्ठ वर्ग की राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता, राष्ट्रीय चैंपियनशिप और वरिष्ठ पैरा राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेने वाले खिलाड़ी।

    क्रिकेट, कबड्डी, खो-खो और शतरंज भी पात्र खेलों में

    नई नीति में खेलों की पात्रता का दायरा बढ़ाया गया है। 2005 के बाद लगातार तीन ओलंपिक में शामिल खेलों के साथ क्रिकेट, कबड्डी, खो-खो, शतरंज और मल्लखंब को भी शामिल किया गया है।

    ओलंपिक, पैरालंपिक, एशियन गेम्स, पैरा एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स में तीन ओलंपिक वाली शर्त लागू नहीं होगी।

    पात्र खेलों में एथलेटिक्स, बैडमिंटन, बॉक्सिंग, फुटबॉल, हॉकी, जूडो, रोइंग, शूटिंग, तैराकी, टेबल टेनिस, वेटलिफ्टिंग, कुश्ती, टेनिस, गोल्फ, घुड़सवारी, सेलिंग, स्पोर्ट्स क्लाइम्बिंग और अन्य निर्धारित खेल भी शामिल हैं।

    पुराने Sports Certificate वालों के लिए क्या बदलेगा?

    नई नीति का यह हिस्सा हजारों खिलाड़ियों के लिए महत्वपूर्ण है। पुराने शासन निर्णयों के तहत Sports Quota के पात्र खिलाड़ियों को भी नए GR की तारीख से तीन महीने के भीतर अपने Sports Certificate का verification कराना होगा।

    यानी केवल पहले से जारी प्रमाणपत्र होना पर्याप्त नहीं होगा। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उसकी वैधता की पुष्टि कराना जरूरी होगा।

    ‘क्रीड़ा ई-प्रमाण’ से होगी डिजिटल जांच

    सरकार Sports Certificate verification के लिए ‘क्रीड़ा ई-प्रमाण’ की डिजिटल व्यवस्था लागू कर रही है। प्रतियोगिता समाप्त होने के सात दिनों के भीतर परिणामों को डिजिटल हस्ताक्षर के साथ upload करना अनिवार्य होगा।

    Blockchain technology के जरिए रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने और automated cryptographic hash के माध्यम से उसकी authenticity जांचने की व्यवस्था की जाएगी। इसका उद्देश्य फर्जी और छेड़छाड़ किए गए खेल प्रमाणपत्रों पर रोक लगाना है।

    5% आरक्षण का उद्देश्य क्या है?

    सरकार के मुताबिक इस नीति का उद्देश्य राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सरकारी रोजगार में अवसर देना और उनकी सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा मजबूत करना है।

    Sports Quota को Mission Lakshyavedh जैसी खेल प्रोत्साहन पहलों के साथ देखने पर इसका व्यापक उद्देश्य खिलाड़ियों को बेहतर training और competition के साथ भविष्य की employment security उपलब्ध कराना भी है।

    महाराष्ट्र कैबिनेट के अन्य फैसले

    PRAGATI Health Project

    सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत करने के लिए 2026 से 2031 तक PRAGATI Project लागू करने को मंजूरी दी गई है। परियोजना की अनुमानित लागत ₹4,250 करोड़ है, जिसमें ₹2,975 करोड़ Asian Development Bank loan और ₹1,275 करोड़ राज्य का हिस्सा होगा।

    इसके तहत कोल्हापुर और नांदेड में 500-500 बेड, नागपुर और लातूर में 300-300 बेड तथा पुणे में 200 बेड का विशेष रेफरल अस्पताल प्रस्तावित है। कुल 2,430 पद भी बनाए जाएंगे।

    Hyosung India को Capital Grant

    छत्रपति संभाजीनगर के Auric City, Shendra में Hyosung India के Spandex/Elastomeric Yarn manufacturing project को Integrated and Sustainable Textile Policy 2023-28 के तहत विशेष मामले में capital grant देने को मंजूरी मिली है। सरकार ने इसे मराठवाड़ा और विदर्भ में निवेश तथा रोजगार की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया है।

    Madha में District and Additional Sessions Court

    सोलापुर के Madha में नया District and Additional Sessions Court स्थापित होगा। अभी यहां के मामले Barshi court में चलते हैं। नए न्यायालय के लिए 20 नियमित और 6 outsourced पद मंजूर किए गए हैं।

    मुंबई में दो भूमि संबंधी फैसले

    मुंबई के Bhuleshwar स्थित Kaivalyadham Yogic Centre के भूमि पट्टे का अगले 30 वर्षों के लिए ₹12 सालाना की रियायती दर पर नवीनीकरण मंजूर किया गया है।

    वहीं Chembur की Bhikkhu Sangh United Buddhist Mission संस्था को उसके कब्जे में रही 1,735 वर्ग मीटर सरकारी जमीन नाममात्र दर पर lease पर देने को मंजूरी दी गई है।

    Koradi में Mahalakshmi Jagdamba Sansthan को जमीन

    नागपुर के Koradi में तीर्थक्षेत्र विकास योजना के तहत विकसित सरकारी जमीन को Shri Mahalakshmi Jagdamba Sansthan को 30 वर्ष के लिए lease पर देने की मंजूरी दी गई है। इसका उद्देश्य तीर्थक्षेत्र में सुविधाओं और रखरखाव का बेहतर प्रबंधन करना है।

    आगे क्या?

    Sports Quota के मामले में अब संशोधित एकीकृत Government Resolution जारी होना सबसे महत्वपूर्ण अगला कदम है। इसी के बाद verification की औपचारिक प्रक्रिया और तीन महीने की समयसीमा प्रभावी होगी।

    खिलाड़ियों के लिए नई नीति का सबसे बड़ा बदलाव केवल 5% आरक्षण जारी रखना नहीं, बल्कि eligibility, certificate verification और digital authentication को एकीकृत व्यवस्था में लाना है।

  • BMC की ₹2.46 करोड़ वाली ट्रिप का असली सवाल: 30,714 बच्चों के लिए Keshav Srushti ही क्यों? ₹802 rate, tender और RSS connection की पूरी कहानी

    BMC की ₹2.46 करोड़ वाली ट्रिप का असली सवाल: 30,714 बच्चों के लिए Keshav Srushti ही क्यों? ₹802 rate, tender और RSS connection की पूरी कहानी

    BMC ने 30,714 छात्रों की Keshav Srushti ट्रिप के लिए ₹2.46 करोड़ मंजूर किए। ₹802 rate, tender और RSS connection पर विपक्ष ने सवाल उठाए।

    मुंबई: BMC के 30,714 कक्षा 7 के छात्रों को Keshav Srushti, Uttan ले जाने की ₹2.46 करोड़ की योजना अब सिर्फ एक educational trip का मामला नहीं रह गई है। Standing Committee ने 28 अगस्त को विपक्ष के विरोध के बावजूद proposal को majority से मंजूरी दे दी। लेकिन इस फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है—30 हजार से ज्यादा बच्चों के लिए Keshav Srushti को ही क्यों चुना गया और ₹802 प्रति छात्र का rate किस आधार पर तय हुआ?

    विपक्ष का आरोप है कि Keshav Srushti का RSS के संस्थापक डॉ. K.B. Hedgewar से institutional connection है और BMC के proposal में इस संस्था के लिए “Monopoly” तथा सामान्य tender process में relaxation का सवाल भी सामने आता है। हालांकि, इन आरोपों को अभी भ्रष्टाचार या किसी राजनीतिक साजिश का साबित तथ्य नहीं माना जा सकता। असली जवाब BMC के selection और costing documents से ही मिलेगा।

    30,714 बच्चों पर ₹2.46 करोड़ का पूरा मामला

    BMC के reported proposal के मुताबिक 2026-27 में municipal schools की कक्षा 7 के छात्रों के लिए “Environment Study and Training Educational Trip” आयोजित की जाएगी।

    कुल 30,714 छात्रों का अनुमान लगाया गया है। इनमें 30,302 primary section और 412 secondary section के छात्र बताए गए हैं।

    कुल खर्च ₹2,46,32,628 यानी करीब ₹2.46 करोड़ है। प्रति छात्र रकम ₹802 है।

    जानकारीविवरण
    कुल छात्र30,714
    कक्षा7वीं
    कुल प्रस्तावित खर्च₹2,46,32,628
    प्रति छात्र₹802
    जगहKeshav Srushti, Uttan, Bhayandar
    Academic Year2026-27
    ProgrammeEnvironment Study & Training Educational Trip

    Reported proposal के मुताबिक package में transport, breakfast, lunch, evening snack और insurance जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

    Keshav Srushti को ही क्यों चुना गया?

    यही इस पूरे विवाद का सबसे अहम सवाल है।

    Keshav Srushti कोई सामान्य picnic spot नहीं है। Uttan में स्थित इस बड़े campus में organic farming, dairy, beekeeping, medicinal plants, waste management, recycling, water management, solar energy और biodiversity जैसी activities होती हैं। BMC के पक्ष में सबसे मजबूत argument भी यही है कि बच्चों को environment का practical exposure दिया जा सकता है।

    लेकिन Mumbai में environmental education और conservation पर काम करने वाली दूसरी institutions भी हैं।

    Congress group leader Ashraf Azmi ने BNHS Conservation Education Centre, Maharashtra Nature Park, CERE, Conservation Action Trust, WWF-India, CEED और Nature Forever Society जैसी institutions का विकल्प गिनाते हुए सवाल किया कि इन organisations को opportunity क्यों नहीं दी गई।

    इसलिए असली सवाल यह नहीं है कि Keshav Srushti में environmental activities हैं या नहीं। सवाल है:

    “BMC ने दूसरी institutions के मुकाबले इसी campus को कैसे evaluate किया?”

    क्या दूसरी organisations से proposals या quotations लिए गए? क्या comparative assessment हुआ? क्या Keshav Srushti की facilities को दूसरे options के मुकाबले बेहतर पाया गया? इसका अब तक बीएमसी प्रशासन की और से कोई भी जवाब प्राप्त नहीं हुआ है।

    RSS connection कहां से आया?

    Keshav Srushti का RSS connection विपक्ष की तरफ से लगाया गया कोई नया label भर नहीं है। Keshav Srushti की अपनी description में campus को RSS के संस्थापक डॉ. K.B. Hedgewar की स्मृति को समर्पित बताया गया है।

    इसके campus ecosystem में Rambhau Mhalgi Prabodhini यानी RMP से जुड़ी activities भी मौजूद हैं। इसी broader institutional background को लेकर Congress और दूसरे opposition members ने सवाल उठाया कि अलग-अलग medium और communities से आने वाले municipal school students को ऐसे campus में environmental education के नाम पर क्यों ले जाया जा रहा है।

    लेकिन यहां एक जरूरी distinction है।

    अभी ऐसा कोई verified evidence सामने नहीं आया है कि BMC के बच्चों को इस trip के दौरान RSS की political ideology सिखाने का programme बनाया गया है। BMC का official justification environmental education है। इसलिए “RSS से जुड़ी संस्था” और “बच्चों को RSS ideology सिखाई जाएगी”—इन दोनों बातों को एक नहीं माना जा सकता।

    Tender का सवाल इतना बड़ा क्यों है?

    Opposition का दूसरा और ज्यादा administrative सवाल tender process को लेकर है।

    Mumbai Congress ने दावा किया है कि BMC के proposal में Keshav Srushti की “Monopoly” का reference है और normal tender process में relaxation की मांग की गई है।

    Standing Committee में भी विपक्ष ने tender न बुलाए जाने को लेकर सवाल उठाए। खबर के मुताबिक proposal का विरोध करते हुए Congress, Shiv Sena (UBT) और Samajwadi Party के सदस्यों ने selection process पर आपत्ति जताई।

    लेकिन यहां भी एक सावधानी जरूरी है।

    सिर्फ यह कहना कि “tender नहीं हुआ, इसलिए नियम टूटा” अभी सही नहीं होगा। अगर BMC ने किसी specific procurement rule या exemption के तहत direct selection किया है, तो उसकी legality proposal और supporting documents देखकर ही तय होगी।

    इसलिए असली सवाल है:

    “किस rule के तहत Keshav Srushti को चुना गया और tender से relaxation क्यों दी गई?”

    ₹802 का rate भी जांच के दायरे में क्यों?

    30,714 छात्रों के लिए ₹802 प्रति छात्र का मतलब कुल ₹2.46 करोड़ है।

    यही वजह है कि rate calculation भी इस कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाता है।

    Keshav Srushti से जुड़े पुराने published outing rates में 2024-25 के “A Date with Nature” programme की कीमत ₹550 प्रति व्यक्ति बताई गई थी। उस listing में transport शामिल नहीं था।

    2020 के एक अलग organised outing में ₹500-₹550 प्रति व्यक्ति का package था, जिसमें breakfast, lunch, evening refreshments और Keshav Srushti tour शामिल था।

    लेकिन इन पुराने rates को 2026 के BMC package से सीधे compare करके overcharging का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। 2026 के package में transport और insurance भी शामिल बताए गए हैं और services की costing अलग हो सकती है।

    फिर भी एक सवाल जरूर बनता है:

    ₹802 में Keshav Srushti के environmental programme/venue का actual component कितना है?

    Transport पर कितना?

    Food पर कितना?

    Insurance पर कितना?

    और क्या BMC को school students के लिए कोई special institutional rate मिला?

    इन सवालों का जवाब detailed costing sheet से ही मिलेगा।

    क्या यह सिर्फ political controversy है?

    इस समय मामले में दो अलग-अलग layers हैं।

    पहली layer है educational justification। Keshav Srushti में वास्तव में environment, agriculture, biodiversity और waste-management से जुड़ी activities मौजूद हैं। इसलिए environmental study के लिए वहां students को ले जाना अपने आप में असंभव या असंगत फैसला नहीं है।

    दूसरी layer है selection और procurement।

    यहीं ज्यादा गंभीर सवाल हैं—एक ही institution क्यों, ₹802 का rate कैसे तय हुआ, दूसरी organisations को मौका मिला या नहीं और tender relaxation किस आधार पर हुई।

    अगर BMC इन सवालों का documents के साथ जवाब देता है, तो controversy का बड़ा हिस्सा साफ हो सकता है।

    Standing Committee में क्या हुआ?

    Congress के Ashraf Azmi ने proposal को वापस लेने और दूसरी environmental organisations को मौका देने की मांग की। MNS के Yashwant Killadar ने भी विरोध का समर्थन किया।

    दूसरी तरफ ruling side ने environmental education के practical benefit का argument दिया। BJP के Ganesh Khankar ने कहा कि बच्चों को यहां practical experience मिलेगा। Standing Committee chairman Prabhakar Shinde ने opposition की आपत्ति को खारिज करते हुए proposal को majority से मंजूरी दे दी।

    यानी political opposition के बावजूद administrative approval आगे बढ़ चुका है।

    अब सबसे ज्यादा नजर किस पर रहेगी?

    इस पूरे मामले में सबसे अहम अगला document trip की तारीख नहीं, बल्कि BMC की decision-making file होगी।

    अब यह साफ होना जरूरी है कि:

    • Keshav Srushti को select करने का initial proposal किस level पर तैयार हुआ?
    • ₹802 प्रति छात्र का rate किस calculation पर तय हुआ?
    • Keshav Srushti की तरफ से क्या quotation/proposal दिया गया?
    • दूसरी environmental organisations से कोई quotation या proposal लिया गया या नहीं?
    • “Monopoly” और tender relaxation का official आधार क्या है?
    • ₹2.46 करोड़ का component-wise breakup क्या है?
    • final work order किस entity के नाम जारी होगा?

    फिलहाल BMC Standing Committee ने 30,714 छात्रों की Keshav Srushti environmental trip के लिए करीब ₹2.46 करोड़ के proposal को मंजूरी दे दी है। RSS connection और selection process पर विपक्ष ने गंभीर सवाल उठाए हैं, जबकि BMC की तरफ से इसे environmental education programme के तौर पर justify किया गया है।

    अब इस मामले की असली तस्वीर इस बात से साफ होगी कि BMC Keshav Srushti के selection, ₹802 rate और tender relaxation का documentary justification कितना स्पष्ट करती है।