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आगरा में एक प्राइवेट अस्पताल ही नहीं समूचे देश में आग लगने की साजिश बेनकाब हो गई। मामला आगरा के एक प्राइवेट अस्पताल का है। जहां एक दलित अपने रोगी का इलाज कराने आता है। जैसे ही गेट के भीतर पहुंचता है, उस व्यक्ति ने राष्ट्र के दो महान पुरुषों की फोटो फर्श पर चिपकी देखी। एक फोटो गौतम बुद्ध की तो दूसरी बाबा साहेब आंबेडकर की थी। दलित जब इन तस्वीरों को फर्श पर चिपकी देखता है तो उसके मन में ख्याल आता है कि अस्पताल में आने वाले लोगों के पैरों तले इन महापुरुषों की तस्वीर कुचले जाएंगे। इससे उनका अपमान होगा उक्त संबंध में वह व्यक्ति जब गार्ड से कहता है तो गार्ड अत्यंत बेरुखी से जवाब देता है, तुम जिस काम से आए हो, अपना काम करो, फालतू चक्कर में मत पड़ो। लेकिन व्यक्ति रुक जाता है और वह अपने नेता रावण उर्फ चंद्रशेखर को इसकी सूचना देता है। फिर क्या था? चंद्रशेखर सदल बल आ धमकते हैं। अपने अनुयायियों को बाहर रोककर वे अंदर जाते और वास्तविकता देखकर मैनेजर को बुलवाते हैं। मैनेजर इस घटना की जानकारी नहीं होने की बात कहता है तब अस्पताल मालिक को बुलाया जाता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल मालिक चंद्रशेखर के साथ cctv देखने लगते हैं। सुबह के फुटेज में कुछ नहीं मिलता तो गत रात का वीडियो देखने लगते हैं जिसमें काला कपड़ा पहने और मुंह ढके दो लोग दिखते हैं। फोटो फर्श पर चिपकाकर जब लौटकर गेट पर पहुंचते हैं तो एक अपना चेहरा खोल देता है। यह वॉचमैन का चेहरा है। पुलिस आ जाती है वॉचमैन से कड़ी पूछ ताछ करने पर दूसरा व्यक्ति आजाद की पार्टी का पदाधिकारी निकलता है। रावण उसे पार्टी से निकलकर पुलिस को सौप देते हैं। बता दे कि दलित आंबेडकर और महात्मा बुद्ध को भगवान मानते हैं। शुक्र है कि सीसीटीवी में खुलासा हो गया। अगर सीसीटीवी बंद रहता तो निश्चित ही अस्पताल में तोड़ फोड़ के साथ एक बार फिर आगरा में अराजकता का नग्न तांडव शुरू हो जाता। तोड़ फोड़ आगजनी और शक्ति प्रदर्शन का दौर शुरू हो जाता।
महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए इसे गैर कानूनी करार दिया है। जबकि स्टाम्प पेपर देने के नियम को रद्द कर दिया गया है।
मंत्रालय प्रतिनिधि मुंबई: प्रदेश के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने सरकारी ई-सेवा केंद्रों में विभिन्न शैक्षणिक प्रमाणपत्र और न्यायालय में प्रतिज्ञापत्र दाखिल करने के लिए सौ रुपए और पांच सौ रुपए के स्टाम्प पेपर मांगने को लेकर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा, जबकि स्टाम्प पेपर की मांग को रद्द कर दिया गया है तो अनावश्यक लोगों से अधिकारी स्टाम्प पेपर कैसे मांग सकते हैं? Mumbai: Asking for stamp papers in government departments is illegal – Minister Bawankule
गैरकानूनी है स्टाम्प पेपर की मांग
उन्होंने स्टाम्प पेपर की मांग करने वाले अधिकारियों को फटकार लगाते हुए इसको गैर कानूनी करार दिया है। बावनकुले ने इस संबंध में राज्य के सभी विभागीय आयुक्तों, जिलाधिकारियों, उपविभागीय अधिकारियों और तहसीलदारों को पत्र भी जारी किया है। जिसमें उन्होंने कहा है कि नागरिकों को अनावश्यक परेशान करने वाले अधिकारियों को माफ नहीं किया जाएगा।
बावनकुले ने कहा कि दो महीने पहले ही विद्यार्थियों, अभिभावकों, पक्षकारों और किसानों को जाति पड़ताल प्रमाणपत्र, आय प्रमाणपत्र, रहिवासी प्रमाणपत्र, नॉन क्रिमी लेयर सर्टिफिकेट, राष्ट्रीयता प्रमाणपत्र और न्यायालय में प्रतिज्ञापत्र के लिए स्टाम्प पेपर देने के नियम को रद्द कर दिया गया है। इससे सरकारी कार्यालयों में प्रमाणपत्र और न्यायालय में शपथपत्र जमा करने के लिए स्टाम्प पेपर की आवश्यकता नहीं होती है। Mumbai: Asking for stamp papers in government departments is illegal – Minister Bawankule
नॉन क्रीमी लेयर सर्टिफिकेट क्या है?
नॉन-क्रीमी लेयर (NCL) सर्टिफिकेट एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है जो ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) श्रेणी के अंतर्गत आने वाले व्यक्तियों को सरकारी नौकरियों, शिक्षा और छात्रवृत्तियों में आरक्षण के लाभ लेने में मदद करता है। यह प्रमाणपत्र उन्हें प्रमाणित करता है कि वे ‘क्रीमी लेयर’ (जो अपेक्षाकृत समृद्ध हैं) में नहीं आते हैं, बल्कि वे ‘नॉन-क्रीमी लेयर’ से संबंधित हैं।
बावनकुले ने कहा, केवल कागज पर स्वयं-प्रमाणित शपथपत्र जमा करना होता है। उन्होंने कहा, कि स्टाम्प पेपर जमा नहीं करने के फैसले का आर्थिक रूप से कमजोर तबके के नागरिकों को फायदा हो रहा है। लेकिन कई जगहों पर नागरिकों से स्टाम्प पेपर मांगने की शिकायतें मिल रही हैं। इसलिए अधिकारियों को स्टाम्प पेपर मांगना बंद कर देना चाहिए। Mumbai: Asking for stamp papers in government departments is illegal – Minister Bawankule
RBI की नई गाइडलाइन में लोनधारकों को कई महत्वपूर्ण अधिकार दिया गया है। यदि कोई बैंक या रिकवरी एजेंट अनुचित व्यवहार करता है तो ग्राहक पुलिस में शिकायत कर सकता है और बैंक से पेनल्टी की मांग भी कर सकता है। ग्राहकों को मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना से बचाने के लिए RBI ने नई गाइडलाइन जारी किया है। Now the bank or its agency cannot harass you for not paying EMI, new RBI guideline
डिजिटल डेस्क नई दिल्ली: वर्तमान के आर्थिक दौर में कई लोग अपने जरूरी खर्चों के लिए लोन लेते हैं। चाहे घर खरीदना हो या नया व्यवसाय शुरू करना हो, लोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया है। लेकिन कई बार नौकरी छूटना, व्यापार में घाटा या स्वास्थ्य समस्याओं के कारण लोन की ईएमआई भरना लोगों को मुश्किल हो जाता है। ऐसी स्थिति में लोग न केवल आर्थिक दबाव में आते हैं, बल्कि बैंकों और रिकवरी एजेंटों के दबाव से भी परेशान हो जाते हैं। Now the bank or its agency cannot harass you for not paying EMI, new RBI guideline
इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने लोनधारकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए नई गाइडलाइन्स जारी की हैं। इन नियमों का मकसद लोन न चुका पाने वाले लोगों को अनुचित परेशानियों से बचाना और वित्तीय संस्थानों को ग्राहकों के साथ उचित व्यवहार करने लिए सिखाना है। Now the bank or its agency cannot harass you for not paying EMI, new RBI guideline
RBI की नई गाइडलाइन्स
RBI के नए नियमों के तहत अब बैंक और रिकवरी एजेंट मनमाने तरीके से लोनधारकों को परेशान नहीं कर सकेंगे। पहले रिकवरी एजेंट कभी भी अनुचित समय पर फोन करते थे, धमकी देते थे या अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करते थे। अब ऐसी हरकतें पूरी तरह प्रतिबंधित हैं। RBI के नए नियम न केवल लोनधारकों की गरिमा की रक्षा करते हैं, बल्कि बैंकिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता भी बढ़ाते हैं। यह पहल बैंक और ग्राहक के बीच विश्वास बढ़ाने में मददगार साबित होगी। ऐसा माना जा रहा है। Now the bank or its agency cannot harass you for not paying EMI, new RBI guideline
RBI की नई गाइडलाइन्स लोनधारकों को कई महत्वपूर्ण अधिकार देती हैं। यदि कोई बैंक या रिकवरी एजेंट अनुचित व्यवहार करता है तो ग्राहक पुलिस में शिकायत कर सकता है और बैंक से पेनल्टी की मांग भी कर सकता है। यह नियम मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना से बचाने के लिए बनाए गए हैं। लोन प्रकृया से जूझ रहे लोगों को यह समझना जरूरी है कि वित्तीय मुश्किलें सामान्य हैं और वे सम्मान के साथ व्यवहार पाने के हकदार हैं। अगर कोई धमकी या अपमान करता है तो वे तुरंत कार्रवाई कर सकते हैं। Now the bank or its agency cannot harass you for not paying EMI, new RBI guideline
कैसे कर सकते हैं शिकायत ?
RBI की नई गाइडलाइन के मुताबिक, ग्राहक अपनी शिकायत बैंक की शिकायत निवारण सेल में या RBI के ग्राहक सेवा विभाग में दर्ज करा सकते हैं। गंभीर मामलों में पुलिस में भी FIR दर्ज कराई जा सकती है। शिकायत करते समय फोन कॉल रिकॉर्डिंग, मैसेज के स्क्रीनशॉट और गवाहों के बयान जैसे सबूत जुटाना जरूरी है। बैंक भी अपने रिकवरी एजेंटों के व्यवहार की जिम्मेदारी उठाने के लिए बाध्य है। Now the bank or its agency cannot harass you for not paying EMI, new RBI guideline
रिकवरी एजेंटों के लिए नियम कानून
RBI ने रिकवरी एजेंटों के लिए सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक कॉल या मिलने का समय तय किया है। इस समय के बाहर वसूली करना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। रात में या छुट्टियों के दिन परेशान करना सख्त मना है। अगर कोई एजेंट इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो तुरंत शिकायत करें। यह नियम ग्राहकों की निजता और पारिवारिक शांति की रक्षा करते हैं। Now the bank or its agency cannot harass you for not paying EMI, new RBI guideline
जब कोई लोनधारक लगातार तीन EMI बाउंस करता है, तो बैंक पहला नोटिस भेजती है। इसके साथ ही अपनी स्थिति सुधारने के लिए 90 दिन का समय देती है। चौथी-पांचवी EMI न भरने पर बैंक दूसरा नोटिस भेजती है, जिसमें नीलामी की चेतावनी होती है। नए नियम के अनुसार इस दौरान भी बैंक या रिकवरी एजेंट अनुचित व्यवहार नहीं कर सकते। लोनधारक इस अवधि में बैंक से बात करके समाधान खोज सकते हैं। Now the bank or its agency cannot harass you for not paying EMI, new RBI guideline
रिकवरी एजेंटों के की सीमाएं क्या है?
RBI ने रिकवरी एजेंटों को साफ निर्देश दिए हैं कि वे धमकी, अपमानजनक भाषा या शारीरिक प्रताड़ना नहीं कर सकते। वे परिवारजनों या दोस्तों को परेशान नहीं कर सकते और जबरन घर में प्रवेश भी नहीं कर सकते। अगर कोई एजेंट नियम तोड़ता है तो उसकी रिपोर्ट तुरंत करें। बैंक को अपने एजेंटों के व्यवहार की जिम्मेदारी लेनी होती है और उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई करनी होती है। Now the bank or its agency cannot harass you for not paying EMI, new RBI guideline
नीलामी प्रक्रिया पर कानूनी सुरक्षा
जब लोनधारक पूरी तरह EMI नहीं चुका पाता तो बैंक कानूनी प्रक्रिया के तहत संपत्ति की नीलामी कर सकती है। यह प्रक्रिया न्यायालय के अधीन होती है और इसमें पारदर्शी होनी चाहिए। बैंक अपनी मर्जी से संपत्ति जब्त नहीं कर सकती। नीलामी से पहले लोनधारक के पास अपनी बात कहने और न्यायालय से सुरक्षा मांगने का अधिकार होता है। अगर नीलामी राशि लोन से अधिक होती है तो बची हुई राशि वापस की जाती है। Now the bank or its agency cannot harass you for not paying EMI, new RBI guideline
RBI की नई गाइडलाइन्स लोनधारकों को कानूनी सुरक्षा और मानसिक शांति प्रदान करती हैं। ये नियम वित्तीय संस्थानों और ग्राहकों के बीच बेहतर तालमेल और पारदर्शिता लाने में मदद करेगी। इसलिए लोनधारकों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहना और जरूरत पड़ने पर सही कदम उठाना चाहिए।
Disclaimer यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी वित्तीय या कानूनी निर्णय से पहले संबंधित विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें। RBI के नियम समय-समय पर बदल सकते हैं, इसलिए आधिकारिक स्रोतों से जानकारी लेते रहें।
नई दिल्ली: जब सरकारें निशुल्क शिक्षा देने के अपने दायित्व से भागेगी और शिक्षा माफियाओं को आजाद कर देगी तो लूटने के लिए, तो क्या होगा? शिक्षा माफियाओं को न तो सरकार से डर लगता है और न ही शिक्षा विभाग से और न किसी कोर्ट से। बेलगाम घोड़े बन गए हैं। खासकर दिल्ली में सरकारी जमीन पर खुले हुए प्राइवेट स्कूल जो किसी की परवाह किए बिना ही हर वर्ष मनमाने तरीके से फीस बढ़ाते जा रहे हैं। यहां तक कि डायरेक्टरेट ऑफ एज्युकेशन से अनुमति लेने की भी जहमत नहीं उठाते। Delhi government should take over all the private schools in Delhi
माता-पिता नौकरी करने पर मजबूर
आज कल दिल्ली का D.P.S द्वारका स्कूल सुर्खियों में है जो गेट पर बाउंसर तैनात करके बढ़ाई गई मनमानी फीस जमा नहीं करने वाले अभिभावकों के बच्चों को गेट पर ही रोककर जबरन बस में उनके घर पहुंचा रहे हैं। चाहे घर में ताला ही क्यों न लगा हो। कारण माता पिता दोनों ही मंहगाई बढ़ाए जाने के कारण नौकरी करने के लिए मजबूर हैं। स्कूल गेट पर तैनात बाउंसर कितने बदतमीज और बेहूदे होंगे इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे लड़कियों की बांह तक पकड़कर स्कूल के भीतर जाने से रोकते है। Delhi government should take over all the private schools in Delhi
कब-कितना फीस बढ़ाया गया?
D.P.S द्वारका स्कूल की मनमानी देखिए। पिछले पांच वर्षों में बच्चों की फीस को 139630 रुपए से बढ़ाकर 190000 रुपए कर दिया गया है। इसी कड़ी में हाईकोर्ट ने प्राइवेट स्कूलों को पैसे कमाने की मशीन और बच्चों के साथ बाउंसरों और स्कूल संचालकों द्वारा पर यातना तक बताया जा रहा है। D.P.S स्कूल द्वारका के द्वारा पिछले पांच वर्षों में फीस मनमाने तरीके से कैसे बढ़ाया गया? इसका नमूना वर्ष 2020/21 में फीस थी 139630 रुपए , 2021/22 में उतनी ही रही, लेकिन 2022/23 में 152510 रुपए कर दी गई। फिर वर्ष 2023/24 में 164844 रूपये, 2024/25 में 176340 रुपए और 2025/26 में पूरे 190000 रुपए कर दी गई है। इसमें विवरण देखा जाए तो ट्यूशन फीस 142800 रुपए, इन्यूअल चार्ज 32016 रुपए और डेवलपमेंट फीस 14280 रुपए जो पैरेंट टीचर मीटिंग की फीस केवल एक बार होने की है। Delhi government should take over all the private schools in Delhi
इतना ही नहीं, फीस बढ़ाने की सूचना नहीं देने के कारण फीस जमा नहीं कर पाने वाले 32 बच्चों के नाम काट दिए गए। नाम काट देना किस एज्युकेशन मैनुएल में लिखा है? नियमानुसार सरकारी जमीन पर बने स्कूल हॉस्पिटल में 15% लोगों को निःशुल्क सुविधा देनी चाहिए। विवाद डेवलपमेंट फीस को लेकर है। डायरेक्टरेट ऑफ एज्युकेशन के अनुसार दस प्रतिशत फीस बढ़ाई जा सकती है वह भी अनुमति लेकर, लेकिन शिक्षा माफिया कब मानते हैं? जिन बच्चों के नाम काटे गए, उनके मित्र फोन कर पूछते हैं, कि क्यों नाम काटा गया? बच्चों को अकेले घर जबरन छोड़ने के कारण बच्चों के मन में भय उत्पन्न होता है। मानसिक उत्पीड़न होती है और बच्चों को भारी सदमा पहुंचता हैं। इंफ्रियोरिटी कॉम्प्लेक्स पैदा होता है। मनोवैज्ञानिक दबाव से बच्चों के मानसिक संतुलन बिगड़ने का डर रहता है। लेकिन दौलत कमाने की हवस प्राइवेट स्कूल संचालकों में इस कदर हावी है कि उनके बच्चों पर पढ़ने वाले कॉम्प्लेक्स से कोई मतलब नहीं। Delhi government should take over all the private schools in Delhi
जनता को ही दंडित किया जा रहा है।
जब सैकड़ों अभिभावक कोर्ट गए तो स्कूल में छुट्टी घोषित कर संचालक फरार हो गए। अभिभावकों ने पुलिस बुलाई तो बिना नेम प्लेट वाली पुलिस पहुंची लेकिन वह खुद बच्चों और उनके अभिभावकों को टॉर्चर करने लगी। पुलिस और स्कूल संस्थापकों द्वारा लगाए गए गुंडों के द्वारा दुर्व्यवहार को अलग अलग नहीं किया जा सकता। दोनों ने ही अमानवीयता का परिचय दिया है। पुलिस जो जनता की रक्षा के लिए होती है उसे जनता के विरुद्ध कर दिया गया। सरकार की तरह उसका प्रशासन भी जनता को ही दंडित करने में लगा है। Delhi government should take over all the private schools in Delhi
आम आदमी पार्टी की सरकार
आम आदमी पार्टी का शासन था तब, केंद्र सरकार ने सुप्रीमकोर्ट के फैसले के खिलाफ दिल्ली आप सरकार से संसद में कानून बनाकर सारे प्रशासनिक अधिकार छीन लिए और मुख्यमंत्री, शिक्षा, स्वास्थ्य मंत्री सहित झूठे शराब मामले में ई डी द्वारा जेल भेजवाया गया था। इसलिए मनमानी फीस बढ़ाने के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का दोष नहीं दिया जा सकता। सारा प्रशासन एल जी के हाथ में दे दिया गया। इसलिए एल जी को संज्ञान लेना चाहिए था, लेकिन नहीं लिया। दुनिया ने देखा किस प्रकार आम आदमी सरकार को बदनाम करने के लिए यमुना नदी की सफाई के लिए एल जी ने कुछ भी नहीं किया और सारा दोष अरविंद केजरीवाल पर मढ़ते रहे। Delhi government should take over all the private schools in Delhi
सरकार का दायित्व
जब दिल्ली में बीजेपी सरकार बनी तब कितनी जल्दी मशीनें लगाकर यमुना को साफ करने का ढिंढोरा पीटा गया, जबकि आज भी दिल्ली के गंदे नाले लगातार कई घाटों के पास नाले का गंदा पानी यमुना में छोड़ रहे हैं। शुक्र है बीजेपी की दिल्ली सरकार कम से कम प्राइवेट स्कूलों की ऑडिट करने लगी है। लेकिन यह भी अपर्याप्त है। शिक्षा, रोजगार और चिकित्सा निःशुल्क देना सरकार का दायित्व है। Delhi government should take over all the private schools in Delhi
स्कूल कॉलेज बने लूट के धंधे
लेकिन केंद्र सरकार ने अपने दायित्व निभाने के स्थान पर शिक्षा को प्राइवेट हाथों में सौप कर लूटने के लिए खुला छोड़ दिया। जिसके कारण समूचे देश में शिक्षा माफिया स्कूल कॉलेज को लूट का धंधा बना लिए हैं। इन माफियाओं पर लगाम लगाने का दायित्व सरकार का है। दिल्ली के मुख्यमंत्री ही नहीं समूचे देश के मुख्यमंत्रियों का दायित्व बनता है कि वह समान शिक्षा नीति अपनाए और सभी प्राइवेट स्कूलों को अधिग्रहीत कर लें ताकि जनता का शोषण नहीं हो। Delhi government should take over all the private schools in Delhi
मंत्रालय प्रतिनिधि मुंबई: महाराष्ट्र के कई शहरों में कक्षा 11वीं में दाखिले की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बढ़ी खबर है। 11वीं के एडमिशन को लेकर एक बड़ा बदलाव सामने आया है। एडमीशन प्रकृया में अब इन-हाउस कोटे को हटाकर ऑनलाइन एडमीशन के जरिए सरकार ने ज्यादा से ज्यादा छात्रों को फायदा पहुंचाने का काम किया है। इसमें मैरिट के आधार पर एडमीशन प्रकृया होगी। साथ ही पोर्टल की समस्या को भी दूर कर दिया गया है। Big change in college admission process – Maharashtra Education Minister Dada Bhuse
क्या है बदलाव?
अब तक जिन छात्रों को एक ही संस्था के स्कूल से 10वीं पास करने के बाद उसी संस्था के कॉलेज में आसानी से दाखिला मिल जाता था, अब उनके सामने एक नई चुनौती आ सकती है। सरकार ने साफ कर दिया है कि अब इन-हाउस कोटे का लाभ केवल उन्हीं छात्रों को मिलेगा, जिनका स्कूल और जूनियर कॉलेज एक ही कैंपस में स्थित होगा। यानी अगर कोई संस्था अलग-अलग जगहों पर स्कूल और कॉलेज चला रही है, चाहे वह कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर क्यों न हो, तो भी उन्हें अब इन-हाउस कोटा नहीं मिलेगा। Big change in college admission process – Maharashtra Education Minister Dada Bhuse
एक साथ होने चाहिए स्कूल और कॉलेज
महाराष्ट्र सरकार ने कक्षा 11वीं की ऑनलाइन एडमिशन प्रक्रिया शुरू होने से पहले एक नया नियम लागू किया है, जिससे राज्य के कई जूनियर कॉलेजों में इन-हाउस कोटे से दाखिले पर असर पड़ सकता है। नए नियम के मुताबिक, अब केवल उन्हीं संस्थानों में इन-हाउस कोटा लागू होगा, जहां स्कूल और जूनियर कॉलेज एक ही परिसर (कैंपस) में स्थित हैं। Big change in college admission process – Maharashtra Education Minister Dada Bhuse
अब तक की यह व्यवस्था थी कि अगर स्कूल और कॉलेज एक ही संस्था द्वारा संचालित हैं, तो अलग-अलग कैंपस में होने पर भी इन-हाउस कोटे का लाभ उन स्कूल और कॉलेज के बच्चों को मिलता था। लेकिन अब यह सुविधा केवल उन्हीं को मिलेगी जिनका स्कूल और कॉलेज एक ही जगह है। इससे राज्य भर के कई प्रमुख कॉलेज प्रभावित हो सकते हैं, जो अलग-अलग स्थानों पर स्कूल और कॉलेज चलाते हैं। Big change in college admission process – Maharashtra Education Minister Dada Bhuse
मंत्री दादा भूसे ने बताया कि ऑनलाइन एडमिशन सिस्टम को इस तरह से बदला गया है जिससे अब सभी छात्रों को मेरिट के आधार पर एडमीशन मिलेगा। उन्होंने कहा, कि “पहले कई बार देखा गया कि अच्छे नंबर लाने वाले छात्र प्रतिष्ठित कॉलेजों में दाखिला नहीं ले पाते थे। अब ऐसा नहीं होगा।” Big change in college admission process – Maharashtra Education Minister Dada Bhuse
पहले यह ऑनलाइन एडमिशन प्रणाली मुंबई, पुणे, नागपुर और अमरावती जैसे शहरों में ही लागू थी। इस साल इसे पूरे महाराष्ट्र में लागू किया जा रहा है। मंत्री ने माना कि ग्रामीण इलाकों में छात्रों को नेटवर्क और स्मार्टफोन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, लेकिन सरकार छात्रों के हित में लंबे समय के सुधारों के लिए प्रतिबद्ध है। Big change in college admission process – Maharashtra Education Minister Dada Bhuse
मराठी भाषा को लेकर भेजा प्रस्ताव
भूसे ने यह भी बताया कि महाराष्ट्र सरकार ने केंद्र को तीन प्रमुख सुझाव भेजे हैं। पहला, छत्रपति शिवाजी महाराज का इतिहास राष्ट्रीय पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए, दूसरा मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिले और तीसरा गैर-मराठी स्कूलों में मराठी पढ़ाना अनिवार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि “CBSE द्वारा मराठी को अनिवार्य करना इसी दिशा में हमारी कोशिशों का नतीजा है।” Big change in college admission process – Maharashtra Education Minister Dada Bhuse
हार्वर्ड को अंतर्राष्ट्रीय छात्रों को मेजबानी देने से रोक दिया गया है। उसे छह शर्तों का पालन करने के लिए 72 घंटे का समय दिया गया है। इसमें भारत के लगभग 800 छात्रों को हद्द पार किया जा सकता है।
डिजिटल डेस्क देश विदेश- अमेरिकी ट्रम्प प्रशासन ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय में विदेशी छात्रों के लिए दरवाज़े बंद कर दिए हैं। यूएस डिपार्टमेंट ऑफ़ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने विदेशी छात्रों को होस्ट करने के लिए हार्वर्ड विश्वविद्यालय के प्रमाणन को रद्द कर दिया है, जो प्रमुख आइवी लीग विश्वविद्यालयों में से एक के लिए एक बड़ा झटका है। यह कार्रवाई पिछले महीने DHS द्वारा हार्वर्ड के लिए DHS अनुदान में 2.7 मिलियन डॉलर समाप्त करने के बाद की गई है। 800 Indian students of Harvard will face trouble; 72 hours ultimatum to the university
अमेरिकी विरोध प्रदर्शन
होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी क्रिस्टी नोएम ने डीएचएस को हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट एंड एक्सचेंज विजिटर प्रोग्राम (एसईवीपी) सर्टिफिकेशन को समाप्त करने का आदेश दिया है। होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने यूनिवर्सिटी पर अमेरिकी विरोधी प्रदर्शनों और कथित यहूदी हिंसा के बीच सुरक्षित परिसर बनाए रखने में विफल रहने का आरोप लगाया है।
विदेशी छात्रों को दाखिला
इसका मतलब यह है कि हार्वर्ड अब विदेशी छात्रों को दाखिला नहीं दे सकता और मौजूदा विदेशी छात्रों को अपना कानूनी दर्जा खोना होगा या उन्हें स्थानांतरित होना होगा। इसका यह भी मतलब है कि मौजूदा विदेशी छात्रों को जल्द ही किसी अन्य SEVP प्रमाणित विश्वविद्यालय में दाखिला लेने की ज़रूरत नहीं होगी। 800 Indian students of Harvard will face trouble; 72 hours ultimatum to the university
छात्रों को क्या करना होगा?
हार्वर्ड अब विदेशी छात्रों को दाखिला नहीं दे सकता है, तथा मौजूदा विदेशी छात्रों को स्थानांतरित होना होगा, अन्यथा उन्हें अपनी कानूनी स्थिति खोनी होगी।
SEVP प्रमाणन समाप्त होने के साथ, F-1 वीज़ा या J वीज़ा पर छात्रों को अमेरिका में रहने के लिए किसी अन्य SEVP प्रमाणित विश्वविद्यालय की तलाश करनी होगी, जबकि कोई भी नया अंतर्राष्ट्रीय छात्र हार्वर्ड में 2025-26 के लिए F/J वीज़ा नहीं प्राप्त कर सकता। यदि वे छात्र किसी अन्य विश्वविद्यालय में दाखिला लेने में विफल रहते हैं, तो उनका वीज़ा रद्द किया जा सकता है और उन्हें अमेरिका से हद्द पार का सामना करना पड़ सकता है। 800 Indian students of Harvard will face trouble; 72 hours ultimatum to the university
छात्र और विनिमय आगंतुक कार्यक्रम (SEVP) जानकारी एकत्र करता है, बनाए रखता है, विश्लेषण करता है और जानकारी प्रदान करता है ताकि केवल वैध विदेशी छात्र या विनिमय आगंतुक ही संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रवेश पा सकें। हार्वर्ड की SEVIS तक पहुँच, जो अंतर्राष्ट्रीय छात्रों पर नज़र रखने और वीज़ा स्थिति बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है इसे अब रद्द कर दिया गया है।
अधिकांश भारतीय छात्र ग्रेजुएट या डॉक्टरेट कार्यक्रमों में हैं और ट्रम्प प्रशासन की हालिया कार्रवाई के कारण उन्हें शैक्षणिक व्यवधान का सामना करना पड़ेगा, जिससे वैकल्पिक विकल्पों के लिए बहुत कम समय दिया गया है।
नोएम ने हार्वर्ड को छात्र रिकॉर्ड की मांग को पूरा करने के लिए 72 घंटे का समय दिया है, जिसमें अनुशासनात्मक डेटा और विरोध प्रदर्शन फुटेज शामिल है, ताकि वह अपनी SEVIS पहुँच को बहाल कर सके। हार्वर्ड को होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) द्वारा विदेशी छात्रों का नामांकन फिर से शुरू करने के लिए 72 घंटे के भीतर छह कठोर शर्तों को पूरा करने का काम सौंपा गया है। 800 Indian students of Harvard will face trouble; 72 hours ultimatum to the university
कैसे मिलेगा फिर से मौका?
यदि विश्वविद्यालय अमेरिकी प्राधिकारियों को कुछ अभिलेख प्रस्तुत कर दे दें तो उसे विदेशी छात्रों को दाखिला देने का मौका मिल जाएगा।
1- हार्वर्ड विश्वविद्यालय के पास उपलब्ध सभी रिकॉर्ड, चाहे वे आधिकारिक हों या अनौपचारिक, जिनमें इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और ऑडियो या वीडियो फुटेज शामिल हैं, जो पिछले पांच वर्षों में किसी गैर-आप्रवासी छात्र द्वारा परिसर के अंदर या बाहर की गई अवैध गतिविधि से संबंधित हैं।
2- हार्वर्ड विश्वविद्यालय के पास उपलब्ध सभी रिकॉर्ड, जिनमें इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और ऑडियो या वीडियो फुटेज शामिल हैं, पिछले पांच वर्षों में किसी गैर-आप्रवासी छात्र द्वारा परिसर के अंदर या बाहर की गई खतरनाक या हिंसक गतिविधि के संबंध में।
3- हार्वर्ड विश्वविद्यालय के पास उपलब्ध सभी रिकॉर्ड, जिनमें इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और ऑडियो या वीडियो फुटेज शामिल हैं, पिछले पांच वर्षों में किसी गैर-आप्रवासी छात्र द्वारा परिसर में या बाहर अन्य छात्रों या विश्वविद्यालय कर्मियों को दी गई धमकियों के संबंध में।
4- हार्वर्ड विश्वविद्यालय के पास उपलब्ध सभी रिकॉर्ड, जिनमें इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और ऑडियो या वीडियो फुटेज शामिल हैं, पिछले पांच वर्षों में नामांकित किसी गैर-आप्रवासी छात्र द्वारा, चाहे वह परिसर में हो या बाहर, अन्य सहपाठियों या विश्वविद्यालय कर्मियों के अधिकारों के हनन के संबंध में।
5- पिछले पांच वर्षों में नामांकित सभी गैर-आप्रवासी छात्रों के सभी अनुशासनात्मक रिकॉर्ड।
6- पिछले पांच वर्षों में हार्वर्ड विश्वविद्यालय परिसर में किसी गैर-आप्रवासी छात्र से संबंधित किसी भी विरोध गतिविधि का हार्वर्ड विश्वविद्यालय के पास उपलब्ध कोई भी ऑडियो या वीडियो फुटेज
मुंबई: अगर आप इंस्टाग्राम या किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अश्लील कंटेंट के लालच में आकर किसी लिंक पर क्लिक करते हैं, तो यह आपके लिए बहुत भारी पड़ सकता है। इसमें न सिर्फ मानसिक, बल्कि आर्थिक रूप से भी आप को तोड़ कर रख सकता है। हालांकि सरकारी सभी सुरक्षा एजेंसियां ऐसे खतरे से दूर रहने की अपील करती रहती है। लेकिन सोशल मीडिया पर आजकल जिस तरीके से अश्लीलता फैल रही है उसकी जाल से बच पाना लोगों के लिए मुश्किल हो गया है। इसका कारण भी हमारी ही मानसिकता है। जो अश्लीलता के पीछे अपना होश खो बैठते हैं। Mumbai: Clicking on obscene content on social media proved costly for the student: See what happened?
लड़के को कैसे फंसाया?
मुंबई के भांडुप इलाके से ऐसी ही एक घटना प्रकाशमें आ रही है। यहां एक कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र ने इंस्टाग्राम (Instagram) के एक अश्लील कंटेंट पर क्लिक किया, जिसमें अश्लील फोटो और वीडियो कॉल का वादा किया गया था। इसमें एक व्हाट्सएप (WhatsApp) लिंक दिया गया था और दूसरी तरफ से लालच देने के लिए कुछ न्यूड फोटो भेज कर सब्सक्राईब करने को कहा गया जिसमें शुरुआती 2000 रुपये फीस बताया गया। इसमें बताया गया कि ग्राहक को लड़कियों की न्यूड फोटो और विडियो कॉल की सुविधा दी जाएगी। लेकिन जल्द ही यह लालच का खेल एक बड़े जाल में तब्दील हो गया। Mumbai: Clicking on obscene content on social media proved costly for the student: See what happened?
यूपी पुलिस का आया कॉल
पहले उसे छोटी-छोटी फीसों के नाम पर कुल 4999 रुपये तक का भुगतान करवाया गया। जब उसने और पैसे देने से इनकार किया, तो एक नए नंबर से कॉल आया। कॉलर ने खुद को “रविंद्र सिंह, यूपी पुलिस” का अफसर बताया और छात्र को धमकाया कि उस पर एक लड़की के यौन उत्पीड़न का केस दर्ज है। डर के मारे छात्र ने अलग-अलग किश्तों में कुल 2.74 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। जब पैसे खतम होने लगे तो लड़के को कोई रास्ता समझ नहीं आया। Mumbai: Clicking on obscene content on social media proved costly for the student: See what happened?
जैसे ही छात्र को ठगी का एहसास हुआ, उसने भांडुप पुलिस स्टेशन में अज्ञात आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। लेकिन पुलिस भी उस लड़के के पैसों को वापस लाने में विफल हो रही है। कारण बैंक खाता धारक ने खुद ही अपनी मरजी से पैसे ट्रांसफर किए थे। शुरुआत में लड़के ने जो पैसे ट्रांसफर किए वो इसलिए कि वह अपनी इज्जत को शर्मसार होने से बचा सके। लेकिन क्या ऐसा हुआ, नहीं। उलटे पैसे भी गए और पुलिस का सहारा लेना पड़ा। गलती तो उस लड़के की है जो अश्लीलता के लालच में जालसाजों के झांसे में फंस गया। लोगों से अपील की जाती है कि ऐसे किसी भी आपत्तिजनक सामग्री से दूर रहे, वरना पैसा ही नही और भी चीजों का नुकसान हो सकता है। Mumbai: Clicking on obscene content on social media proved costly for the student: See what happened?
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य ने राज्य के 8 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों का ताबड़तोड़ तबादला किया है। इसमें महत्वपूर्ण प्रशासनिक अधिकारियों के फेरबदल किए गए हैं। जाने किसे कहां नियुक्त किया गया है।
सबसे उल्लेखनीय नियुक्तियों में से एक 2005 बैच की आईपीएस अधिकारी शारदा राउत की है, जिन्हें नवगठित एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) के लिए विशेष पुलिस महानिरीक्षक (IGP) नामित किया गया है। शारदा राउत पहले राज्य खुफिया विभाग (SID) में संयुक्त आयुक्त के रूप में कार्यरत थीं और हाल ही में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से लौटी हैं। उनकी नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा मादक पदार्थों की तस्करी और मादक द्रव्यों के सेवन पर अंकुश लगाने पर गहन ध्यान केंद्रित करने का संकेत देती है। Maharashtra government transfers 8 senior IPS officers, Sharda Raut appointed Special IGP of Anti-Narcotics Task Force
सुप्रिया पाटिल यादव (2004 बैच), जो हाल ही में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से वापस आई हैं, उन्हें महाराष्ट्र पुलिस मुख्यालय में विशेष आईजीपी (स्थापना) नियुक्त किया गया है।
अमरावती शहर में पुलिस आयुक्त नवीनचंद्र रेड्डी को नागपुर में संयुक्त पुलिस आयुक्त के रूप में नियुक्त किया गया है। उनके प्रतिस्थापन की प्रतीक्षा हो रही है।
नागपुर के संयुक्त पुलिस आयुक्त निसार तांबोली को राजीव जैन की जगह नागपुर में राज्य रिजर्व पुलिस बल (SRPF) का विशेष आईजीपी नियुक्त किया गया है। राजीव जैन अब तटीय सुरक्षा (समुद्री) में विशेष आईजीपी के रूप में काम करेंगे।
अभिषेक त्रिमुखे, अतिरिक्त सीपी (उत्तर क्षेत्र), मुंबई को राज्य पुलिस मुख्यालय में विशेष आईजीपी (प्रशासन) के रूप में स्थानांतरित किया गया है।
डॉ. आरती सिंह, 2006 बैच की आईपीएस अधिकारी और वर्तमान विशेष आईजीपी (प्रशासन), को उनके पद से मुक्त कर दिया गया है और वे अपने अगले कार्यभार की प्रतीक्षा कर रही हैं।
मुंबई: देश का पहला अंतर्राष्ट्रीय स्तर का वॉटर टनल एक्वेरियम मुंबई के भायखला स्थित वीरमाता जीजाबाई भोसले प्राणी उद्यान (रानी बाग) में बनाने जा रही है। बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) इसको लेकर 60 करोड़ रुपये खर्च करेगी। इसके लिए मार्च 2024 में बीएमसी ने टेंडर जारी किया था, जिसे अब फाइनल कर दिया गया है। (The country’s first international water aquarium will be built in Mumbai’s Rani Bagh)
इन दोनों टनल को जोड़ने में एक और घुमावदार प्रवेश मार्ग बनेगा। विशेष रूप से बच्चों को 360 डिग्री घूमने और मछली को करीब से देखने के लिए एक पॉपअप विंडो उपलब्ध कराई जाएगी। इसकी क्षमता करीब 10 लाख लीटर पानी की होगी। अधिकारी ने बताया कि अंडरग्राउंड एक्वेरियम की ऊंचाई 4 मीटर से ऊपर होगी। इसमें फायर फाइटिंग सिस्टम, इमरजेंसी गेट, वेंटिलेशन, एयर कंडीशनर, कूलिंग, लिफ्ट और एस्केलेटर जैसी सुविधाएं उपलब्ध होगी। (The country’s first international water aquarium will be built in Mumbai’s Rani Bagh)
बृहन्मुंबई महानगर पालिका पेड़ों के संरक्षण के लिए ‘वृक्ष पुनरुद्धार अभियान 2.0’ चला रहा है। जिसमें मालाड़ मनपा पी उत्तर विभाग अंतर्गत बिल्लाबोंग स्कूल के बच्चों को वृक्ष पुनरुद्धार को लेकर शिक्षा दी गई। साथ ही ‘वृक्ष संजीवनी अभियान 2.0’ की सूक्ष्म योजना एवं ‘वृक्ष कायाकल्प अभियान 2.0’ नागरिकों के बीच लोकप्रियता हासिल कर रहा है। (Mumbai BMC’s Vriksha Sanjivani Abhiyan, school children of Malad took training)
मुंबई- पर्यावरण की दृष्टि से, बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) के उद्यान विभाग ने वृक्ष संजीवनी अभियान के तहत सड़कों पर पेड़ों के चारों ओर बनाए गए सीमेंट कंक्रीट के ढांचे को हटाने और फेरीवालों द्वारा व्यक्तिगत उपयोग और व्यवसाय के लिए लगाए गए छोटे पेड़ों को हटाने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही पेड़ों पर लगी बड़ी-बड़ी कीलों और विज्ञापन बोर्डों को हटाने की प्रक्रिया हर साल की जाती है। (Mumbai BMC’s Vriksha Sanjivani Abhiyan, school children of Malad took training)
बृहन्मुंबई महानगर पालिका 22 अप्रैल को विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर ‘वृक्ष पुनरोद्धार अभियान’ क्रियान्वित कर दिया है। विश्व पृथ्वी दिवस 1970 से हर साल 22 अप्रैल को मनाया जाता रहा है। इस अवसर पर दुनिया भर में विभिन्न पर्यावरण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर अतिरिक्त नगलर आयुक्त (पूर्वी उपनगर) डॉ. अमित सैनी के मार्गदर्शन में बृहन्मुंबई महानगर पालिका के 24 विभागों द्वारा बीएमसी की सीमा में वृक्षों के संरक्षण के लिए विभिन्न सामाजिक संगठनों, स्कूलों और कॉलेजों के सहयोग से मनपा का ‘वृक्ष संजीवनी अभियान 2.0’ चलाया जा रहा है। ऐसी जानकारी बृहन्मुंबई महानगर पालिका के पार्क अधीक्षक जितेन्द्र परदेशी ने दी। (Mumbai BMC’s Vriksha Sanjivani Abhiyan, school children of Malad took training)
इस बारे में जानकारी देते हुए पार्क अधीक्षक जितेन्द्र परदेशी ने बताया, कि वृक्ष पुनरोद्धार अभियान के दौरान पेड़ों के आसपास लगे कंक्रीट को हटाकर उसकी जगह लाल मिट्टी डालने तथा पेड़ों से कीलें, पोस्टर, बैनर और केबल हटाने का प्रयास किया जाता है, ताकि पेड़ खुलकर सांस ले सकें। (Mumbai BMC’s Vriksha Sanjivani Abhiyan, school children of Malad took training)
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वृक्ष कायाकल्प अभियान
कीलें, पोस्टर, बिजली की लाइटें, केबल आदि पेड़ों को नुकसान पहुंचा सकते हैं और पेड़ के तने को सड़ने का कारण बन सकते हैं, जिससे पेड़ गिर सकता है या मर सकता है। इसके अलावा, जड़ों के चारों ओर कंक्रीट डालने से जड़ों की वृद्धि रुक जाती है और मिट्टी में पानी के अवशोषण की कमी के कारण पेड़ मर सकता है। इसी कारण बृहन्मुंबई महानगर पालिका ने पेड़ों के संरक्षण के लिए 30 अप्रैल 2025 तक ‘वृक्ष कायाकल्प अभियान 2.0’ अभियान शुरू किया है। (Mumbai BMC’s Vriksha Sanjivani Abhiyan, school children of Malad took training)
कार्यक्रम का आयोजन
इस अभियान के तहत आज 29 अप्रैल को मालाड़ पश्चिम के पी उत्तर विभाग अंतर्गत बिल्लाबोंग स्कूल के विद्यार्थियों, जनकल्याण नगर, भूमि पार्क, एएलएम के शिक्षकों और स्थानीय नागरिकों की संयुक्त भागीदारी से एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सहायक उद्यान अधीक्षक योगेन्द्र सिंह कछवा ने बताया कि शिक्षा सहायक प्रमोद इंगले ने स्वयं प्रदर्शन कर लोगों को जागरूक किया। इसके अंतर्गत कीलें, पोस्टर, बिजली की लाइटें, केबल आदि से पेड़ों को नुकसान पहुंचता है तथा पेड़ के तने के सड़ने और पेड़ के गिरने या मरने की आशंका रहती है। इसके अलावा, जड़ों के चारों ओर कंक्रीट डालने से जड़ों की वृद्धि रुक जाती है और ऐसी संभावना है कि मिट्टी में पानी के अवशोषण की कमी के कारण पेड़ मर जाएगा, ऐसा पार्क ने चेतावनी दी है। (Mumbai BMC’s Vriksha Sanjivani Abhiyan, school children of Malad took training)
वृक्षारोपण
इसके अलावा, भूमिपार्क खेल मैदान में महाराष्ट्र वृक्ष के रूप में विख्यात ‘तम्हाण’ प्रजाति के 10 पेड़ लगाए गए। उन्होंने यह भी बताया कि उद्यान अधीक्षक जितेन्द्र परदेशी स्वयं ‘वृक्ष संजीवनी अभियान 2.0’ की योजना बनाते हैं और उसमें भाग लेते हैं, इसलिए यह अभियान हर साल सफल हो रहा है और आमजन की स्वस्फूर्त भागीदारी बढ़ रही है। (Mumbai BMC’s Vriksha Sanjivani Abhiyan, school children of Malad took training)