आगरा में एक प्राइवेट अस्पताल ही नहीं समूचे देश में आग लगने की साजिश बेनकाब हो गई। मामला आगरा के एक प्राइवेट अस्पताल का है। जहां एक दलित अपने रोगी का इलाज कराने आता है। जैसे ही गेट के भीतर पहुंचता है, उस व्यक्ति ने राष्ट्र के दो महान पुरुषों की फोटो फर्श पर चिपकी देखी। एक फोटो गौतम बुद्ध की तो दूसरी बाबा साहेब आंबेडकर की थी। दलित जब इन तस्वीरों को फर्श पर चिपकी देखता है तो उसके मन में ख्याल आता है कि अस्पताल में आने वाले लोगों के पैरों तले इन महापुरुषों की तस्वीर कुचले जाएंगे। इससे उनका अपमान होगा उक्त संबंध में वह व्यक्ति जब गार्ड से कहता है तो गार्ड अत्यंत बेरुखी से जवाब देता है, तुम जिस काम से आए हो, अपना काम करो, फालतू चक्कर में मत पड़ो। लेकिन व्यक्ति रुक जाता है और वह अपने नेता रावण उर्फ चंद्रशेखर को इसकी सूचना देता है। फिर क्या था? चंद्रशेखर सदल बल आ धमकते हैं। अपने अनुयायियों को बाहर रोककर वे अंदर जाते और वास्तविकता देखकर मैनेजर को बुलवाते हैं। मैनेजर इस घटना की जानकारी नहीं होने की बात कहता है तब अस्पताल मालिक को बुलाया जाता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल मालिक चंद्रशेखर के साथ cctv देखने लगते हैं। सुबह के फुटेज में कुछ नहीं मिलता तो गत रात का वीडियो देखने लगते हैं जिसमें काला कपड़ा पहने और मुंह ढके दो लोग दिखते हैं। फोटो फर्श पर चिपकाकर जब लौटकर गेट पर पहुंचते हैं तो एक अपना चेहरा खोल देता है। यह वॉचमैन का चेहरा है। पुलिस आ जाती है वॉचमैन से कड़ी पूछ ताछ करने पर दूसरा व्यक्ति आजाद की पार्टी का पदाधिकारी निकलता है। रावण उसे पार्टी से निकलकर पुलिस को सौप देते हैं। बता दे कि दलित आंबेडकर और महात्मा बुद्ध को भगवान मानते हैं। शुक्र है कि सीसीटीवी में खुलासा हो गया। अगर सीसीटीवी बंद रहता तो निश्चित ही अस्पताल में तोड़ फोड़ के साथ एक बार फिर आगरा में अराजकता का नग्न तांडव शुरू हो जाता। तोड़ फोड़ आगजनी और शक्ति प्रदर्शन का दौर शुरू हो जाता।
मंत्रालय प्रतिनिधि मुंबई: प्रदेश के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने सरकारी ई-सेवा केंद्रों में विभिन्न शैक्षणिक प्रमाणपत्र और न्यायालय में प्रतिज्ञापत्र दाखिल करने के लिए सौ रुपए और पांच सौ रुपए के स्टाम्प पेपर मांगने को लेकर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा, जबकि स्टाम्प पेपर की मांग को रद्द कर दिया गया है तो अनावश्यक लोगों से अधिकारी स्टाम्प पेपर कैसे मांग सकते हैं? Mumbai: Asking for stamp papers in government departments is illegal – Minister Bawankule
गैरकानूनी है स्टाम्प पेपर की मांग
उन्होंने स्टाम्प पेपर की मांग करने वाले अधिकारियों को फटकार लगाते हुए इसको गैर कानूनी करार दिया है। बावनकुले ने इस संबंध में राज्य के सभी विभागीय आयुक्तों, जिलाधिकारियों, उपविभागीय अधिकारियों और तहसीलदारों को पत्र भी जारी किया है। जिसमें उन्होंने कहा है कि नागरिकों को अनावश्यक परेशान करने वाले अधिकारियों को माफ नहीं किया जाएगा। Mumbai: Asking for stamp papers in government departments is illegal – Minister Bawankule
स्टाम्प पेपर की आवश्यकता नहीं
बावनकुले ने कहा कि दो महीने पहले ही विद्यार्थियों, अभिभावकों, पक्षकारों और किसानों को जाति पड़ताल प्रमाणपत्र, आय प्रमाणपत्र, रहिवासी प्रमाणपत्र, नॉन क्रिमी लेयर सर्टिफिकेट, राष्ट्रीयता प्रमाणपत्र और न्यायालय में प्रतिज्ञापत्र के लिए स्टाम्प पेपर देने के नियम को रद्द कर दिया गया है। इससे सरकारी कार्यालयों में प्रमाणपत्र और न्यायालय में शपथपत्र जमा करने के लिए स्टाम्प पेपर की आवश्यकता नहीं होती है। Mumbai: Asking for stamp papers in government departments is illegal – Minister Bawankule
नॉन-क्रीमी लेयर (NCL) सर्टिफिकेट एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है जो ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) श्रेणी के अंतर्गत आने वाले व्यक्तियों को सरकारी नौकरियों, शिक्षा और छात्रवृत्तियों में आरक्षण के लाभ लेने में मदद करता है। यह प्रमाणपत्र उन्हें प्रमाणित करता है कि वे ‘क्रीमी लेयर’ (जो अपेक्षाकृत समृद्ध हैं) में नहीं आते हैं, बल्कि वे ‘नॉन-क्रीमी लेयर’ से संबंधित हैं। Mumbai: Asking for stamp papers in government departments is illegal – Minister Bawankule
किसे मिला फायदा?
बावनकुले ने कहा, केवल कागज पर स्वयं-प्रमाणित शपथपत्र जमा करना होता है। उन्होंने कहा, कि स्टाम्प पेपर जमा नहीं करने के फैसले का आर्थिक रूप से कमजोर तबके के नागरिकों को फायदा हो रहा है। लेकिन कई जगहों पर नागरिकों से स्टाम्प पेपर मांगने की शिकायतें मिल रही हैं। इसलिए अधिकारियों को स्टाम्प पेपर मांगना बंद कर देना चाहिए। Mumbai: Asking for stamp papers in government departments is illegal – Minister Bawankule
राष्ट्रपति शासन की सिफारिश, मध्यावधि चुनाव के आसार प्रबल
वक्फ संशोधन कानून को प्रचारित कर हिंदू मतों को लुभाने की कोशिश
मुंबई: अभी दो साल भी नहीं बैठे कि एन डी ए सरकार में बीजेपी को समर्थन देने वाली पार्टी जे डी यू के नेता सुशासन बाबू उर्फ पलटू के नाम से जाने जाने वाले नीतीश कुमार के वोटरों ने जबरदस्त नाराजगी जताकर नीतीश कुमार को केंद्र सरकार से समर्थन वापस लेने का दबाव बनाने लगे हैं। government moving towards mid term elections
बीजेपी के समर्थन से बिखरने लगे लोग
वैसे बीजेपी सरकार ने जे डी यू में से कुछ लोगों को केंद्र में मंत्री बनाकर तोड़ फोड़ पहले ही चालू कर दी थी। नीतीश पशोपेश में चाहे जितना भी रहें उनकी पार्टी का टूटना सुनिश्चित है। बचे हुए लोग पार्टी को कितने दिनों तक बचा पाएंगे कहना मुश्किल है। दूसरी तरफ आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री नायडू के वोटर्स जिनमें ज्यादातर मुस्लिम समुदाय से आते हैं बीजेपी को समर्थन देने से खासे नाराज बताए जा रहे हैं। government moving towards mid term elections
वक्फ संशोधन कानून का असर
केंद्र द्वारा नायडू के समर्थन से वक्फ कानून संशोधन ने आग में घी डालने का काम किया है। जहां नीतीश कुमार अपना अस्तित्व बचाने में लगे हैं वहीं नायडू भी काफी परेशान नजर आते हैं। दोनों के फॉलोवर और मतदाता नाराज़ चल रहे हैं। यह नाराजगी दोनों के अस्तित्व पर भारी पड़ने वाली है। government moving towards mid term elections
ऐसे में जबकि दिसंबर में बिहार राज्य में विधानसभा चुनाव होने वाले है उससे पहले ही नीतीश कुमार और नायडू को फिर से विचार करने की जरूरत महसूस होने लगी है। एक तरफ कुआं तो दूसरी ओर खाई नजर आने लगी है। नीतीश कुमार और नायडू के लिए अपनी अपनी पार्टी बचाने का अंतिम मौका है। अतः संभव है कि दोनों केंद्र सरकार से समर्थन वापस लेकर शहीद हो जाएं। government moving towards mid term elections
राष्ट्रपति शासन की सिफारिश
उसके पूर्व मानसून सेशन के बाद केंद्र की बीजेपी सरकार राष्ट्रपति को इस्तीफा देकर मध्यावधि चुनाव करने के लिए राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर दें। दोनों ही स्थितियों में मध्यावधि चुनाव के आसार प्रबल हैं। जिसमें बीजेपी वक्फ संशोधन कानून को प्रचारित कर हिन्दू मतों को लुभाने की कोशिश कर सकती है। अतः देश को जनता के द्वारा दिए गए अरबों टैक्स की बर्बादी देखने को मिल सकती है। government moving towards mid term elections
डिजिटल डेस्क बीजेपी सरकार ढोल बजाकर खुशी का इजहार करने और गर्व में भरती जा रही। कहा जा रहा की जापान को छोड़कर भारत को विश्वगुरू ने विश्व की चौथी अर्थव्यवस्था बनाते हुए जापान को पीछे छोड़ दिया है। यह दावा सरासर गलत और भ्रामक है। भारत अभी चौथी अर्थव्यवस्था बना नहीं हैं बनने की ओर अग्रसर है। दरअसल एमएफए की तरफ से भारत और जापानी अर्थ व्यवस्था पर अंदाजा लगाया था, कि भारत जापान को 0.01 अंक आगे बढ़कर विश्व की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। इसी बात को नीति आयोग के अधिकारी के सीईओ ले उड़े और भारत द्वारा जापानी अर्थव्यवस्था को पीछे छोड़ते हुए चौथी अर्थव्यवस्था बन गया है। अब नीति आयोग जब कह रहा हो तो बीजेपी और मोदी सरकार ने भी लपक लिया और घोषणा कर डाली लेकिन नीति आयोग के ही बड़े अर्थशास्त्री ने खुलासा करते हुए कहा है, कि “भारत अभी विश्व की चौथी अर्थव्यवस्था नहीं बना है। हां बनने की राह पर अग्रसर जरूर है।” उन्होंने कहा, “चौथी अर्थव्यवस्था बनने के लिए चौथी तिमाही तक भारत को अपनी जीडीपी मेंटेन रखनी होगी। चौथी तिमाही का परिणाम निश्चित करेगा कि भारत विश्व की चौथी अर्थव्यवस्था बन गया है या नहीं? चौथी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है न कि बन गया है।” नीति आयोग के सदस्य अर्थशास्त्री का कथन बीजेपी सरकार को झकझोर कर रख दिया होगा। नीति आयोग का सीईओ चौथी अर्थब्यव्यवस्था बन चुका है भारत का सच नीति आयोग के ही सदस्य ने खोलकर बता दिया है। जिससे साफ है कि चौथी अर्थव्यवस्था बना नहीं है। हां चौथी तिमाही के अंत में भी हमें अपनी जीडीपी उसी स्तर या उससे ऊंचे स्तर पर बनाए रखना होगा। उन्होंने निष्कर्ष में कहा बने नहीं हैं बनने की राह पर अग्रसर हैं। अगर चौथी तिमाही के अंत तक हम जीडीपी बढ़ाए रख सके तो दिसंबर 2025 तक बन सकते हैं। अर्थव्यवस्था तब बढ़ती है जब वैज्ञानिक टेक्नोलॉजी बढ़ती जाए। विदेशी निवेश अधिक बढ़ाना पड़ेगा। एप्पल मोबाइल भले ही चीन से भारत में बनने लगे, लेकिन हमें यह नहीं भूलना होगा कि एप्पल मोबाइल मेड इन इंडिया के नाम पर केवल असेंबलिंग की जाती है। उसके पार्ट्स चिप आदि चीन से ही आते हैं। चीन हार्डवेयर में अमेरिका से कम नहीं है। अमेरिकी उद्योगों के लिए चीन में बनी चिप्स जैसे पार्ट्स चीन से ही आते हैं। भले बीजेपी लग रही हो कि दुनिया में भारत का डंका बज रहा जबकि सच तो यह है कि भारत का दुनिया में डंका नहीं घंटा बज रहा है। भारत जब पाकिस्तान पर बढ़त हासिल किए हुए था तब एकाएक क्या हुआ कि भारत को सीजफायर का ऐलान करना पड़ गया। भारत को जीती हुई बाज़ी हारने को मजबूर क्यों होना पड़ा। भले आर्मी के जनरल कहा कि कितने विमान गिरे यह महत्वपूर्ण नहीं है। क्यों गिरे यह मुद्दा है और इससे हमने क्या सीखा? तीन बाते ऐसी हुई हैं जिससे भारत के डंका बजने की बात बेनकाब हो जाती है। अमेरिकी वाणिज्य मंत्री का कहना है कि भारत ने हमारे साथ गलत किया, उसे भुगतना होगा। दूसरा है जिस पाकिस्तान को आतंकवादियों का संरक्षक बताने के लिए दुनिया भर से गुहार लगाने के लिए सांसदों की टीमें भेजी गई ताकि पाकिस्तान को ब्लैक लिस्टेड कराया जा सके। वह तो हुआ ही नहीं क्योंकि हमारे डेलिगेशनो का दुनिया पर कोई भी असर नहीं हुआ है। संयुक्त राष्ट्र संघ के दो मंचों का पाकिस्तान को एक में अध्यक्ष और दूसरे में उपाध्यक्ष बना दिया गया। आप पाकिस्तान उन मंचों से बताएगा कि कौन आतंकवादी देश है। कौन आतंकवादी गीत है जिसे कौन सा देश समर्थन कर रहा है। दो अत्यंत महत्वपूर्ण पद पाकर अब पाकिस्तान के लिए भारत के खिलाफ यह कहने का अधिकार मिल गया है कि उसके देश में बलूच आतंकी गुट है जिसे भारत का समर्थन हासिल है। भारत ही बलूचिस्तान को पाकिस्तान से अलग करने के लिए हथियार और पैसा दे रहा है। दूसरी बात पाकिस्तान को अफगानिस्तानी फूटी आंखों नहीं सुहाते, जिसने पाकिस्तान के भारत युद्ध के समय भारत का समर्थन किया था। जिन तालिबानी लड़ाकों के कारण अमेरिका जैसा शक्तिशाली राष्ट्र अपने युद्धक विमान टैक्स जैसे सारे विपाश छोड़कर भागना पड़ा है, उन तालिबानियों को पाकिस्तान के लिए खतरा बताकर उन्हें आतंकवादी घोषित कर सकेगा। यही नहीं अब पाकिस्तान भारत को ही आतंकवाद फैलाने का आरोपी बताने की हैसियत में आ चुका है। ट्रंप का यह पसितारा उसके माय बेस्ट फ्रेंड मोदी और आई मिस यू मोदी के खिलाफ गुस्से का इजहार कर भारत को निचा दिखाने वाला कदम है। कल को पाकिस्तान खाड़ी देशों को भी विश्वास दिला सकता है, कि भारत में रहने वाले मुसलमानों को भारत हिंदुत्व वाली सरकार प्रताड़ित कर रही है। मस्जिदों मुसलमानों की बस्तियों पर बुलडोजर चलाकर अन्याय किया जा रहा है। इन बातों पर छपी खबरें प्रमाण बन जाएंगी और इस्लामिक राष्ट्र भारत के खिलाफ जिहाद के तौर पर खड़े हो सकते हैं। अमेरिका ने पहले ही एक अरब डॉलर का कर्ज पाकिस्तान को दिलाया था, जिससे पाकिस्तान अमेरिका और अब एशियाई बैंक से भी पाकिस्तान को कर्ज दिलवा चुका है। जिससे पाकिस्तान हथियार खरीदकर भारत के साथ युद्ध कर सके। भारत अब दुनिया में अकेला पड़ गया है। चीन तो भारत के विरोध में है ही। रूस जो भारत का सदाबहार मित्र रहा है वह भी पाकिस्तान स्थित अपने साझेदार पाकिस्तान के साथ बंद स्टील फैक्ट्री फिर से चालू कर पाकिस्तानी आय में वृद्धि करने में लगा हुआ है। भारत सरकार ने भारतीय वायु सेना को स्वदेशी जहाज देने का वादा किया था, जिसे समय से पूरा किया ही नहीं जा रहा। अमेरिका भारत को ब्लैकमेल लगातार करने और भारत की बेइज्जती करने में लगा है। यह वही ट्रंप है जिसके लिए वैश्विक कानून तोड़कर पीएम मोदी ने अब की बार ट्रंप सरकार का नारा लगाया था। दोबारा चुनाव में ट्रंप हार गए तो जब मोदी अमेरिकी यात्रा पर जाने वाले थे तब ट्रंप ने कहा था मेरा बेस्ट फ्रेंड मोदी मुझसे मिलने आ रहा है। लेकिन मोदी अमेरिका जाने के बाद राष्ट्रपति वाईडन से तो भेंट किया लेकिन ट्रंप से मिलने की फॉर्मेलिटी भी नहीं दिखाई। जिसे ट्रंप ने अपना अपमान समझा जो सही भी है। एक कहे मेरा बेस्ट फ्रेंड मुझसे मिलने आ रहा है दूसरा अनदेखा कर दे। औपचारिकता भी नहीं निभाए तो फ्रेंड कैसा? इसीलिए जब राष्ट्रपति पद की शपथ लेनी थी तब ट्रंप ने मोदी को बुलाया तक नहीं और जब पीएम गए उससे मिले तब ट्रंप ने कहा था आई मिस यू फ्रेंड। ये चार शब्द बड़े अर्थपूर्ण थे। व्यंग्य और दुखी हो कर कहा था ट्रंप ने। इशारा था लेकिन तब तक बहुत अधिक दरार पड़ चुकी थी। जिस कारण ट्रंप भारत को बेइज्जत करने का एक भी मौका छोड़ नहीं रहा। शायद जब तक मोदी और ट्रंप जीवित रहेंगे ट्रंप अपमान नहीं भूलेगा और गिन गिन कर बदला लेता रहेगा। पाकिस्तान को भारत पर तरजीह देकर ट्रंप ने भारत को अकेला कर दिया है।
RBI की नई गाइडलाइन में लोनधारकों को कई महत्वपूर्ण अधिकार दिया गया है। यदि कोई बैंक या रिकवरी एजेंट अनुचित व्यवहार करता है तो ग्राहक पुलिस में शिकायत कर सकता है और बैंक से पेनल्टी की मांग भी कर सकता है। ग्राहकों को मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना से बचाने के लिए RBI ने नई गाइडलाइन जारी किया है। Now the bank or its agency cannot harass you for not paying EMI, new RBI guideline
डिजिटल डेस्क नई दिल्ली: वर्तमान के आर्थिक दौर में कई लोग अपने जरूरी खर्चों के लिए लोन लेते हैं। चाहे घर खरीदना हो या नया व्यवसाय शुरू करना हो, लोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया है। लेकिन कई बार नौकरी छूटना, व्यापार में घाटा या स्वास्थ्य समस्याओं के कारण लोन की ईएमआई भरना लोगों को मुश्किल हो जाता है। ऐसी स्थिति में लोग न केवल आर्थिक दबाव में आते हैं, बल्कि बैंकों और रिकवरी एजेंटों के दबाव से भी परेशान हो जाते हैं। Now the bank or its agency cannot harass you for not paying EMI, new RBI guideline
इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने लोनधारकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए नई गाइडलाइन्स जारी की हैं। इन नियमों का मकसद लोन न चुका पाने वाले लोगों को अनुचित परेशानियों से बचाना और वित्तीय संस्थानों को ग्राहकों के साथ उचित व्यवहार करने लिए सिखाना है। Now the bank or its agency cannot harass you for not paying EMI, new RBI guideline
RBI की नई गाइडलाइन्स
RBI के नए नियमों के तहत अब बैंक और रिकवरी एजेंट मनमाने तरीके से लोनधारकों को परेशान नहीं कर सकेंगे। पहले रिकवरी एजेंट कभी भी अनुचित समय पर फोन करते थे, धमकी देते थे या अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करते थे। अब ऐसी हरकतें पूरी तरह प्रतिबंधित हैं। RBI के नए नियम न केवल लोनधारकों की गरिमा की रक्षा करते हैं, बल्कि बैंकिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता भी बढ़ाते हैं। यह पहल बैंक और ग्राहक के बीच विश्वास बढ़ाने में मददगार साबित होगी। ऐसा माना जा रहा है। Now the bank or its agency cannot harass you for not paying EMI, new RBI guideline
RBI की नई गाइडलाइन्स लोनधारकों को कई महत्वपूर्ण अधिकार देती हैं। यदि कोई बैंक या रिकवरी एजेंट अनुचित व्यवहार करता है तो ग्राहक पुलिस में शिकायत कर सकता है और बैंक से पेनल्टी की मांग भी कर सकता है। यह नियम मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना से बचाने के लिए बनाए गए हैं। लोन प्रकृया से जूझ रहे लोगों को यह समझना जरूरी है कि वित्तीय मुश्किलें सामान्य हैं और वे सम्मान के साथ व्यवहार पाने के हकदार हैं। अगर कोई धमकी या अपमान करता है तो वे तुरंत कार्रवाई कर सकते हैं। Now the bank or its agency cannot harass you for not paying EMI, new RBI guideline
कैसे कर सकते हैं शिकायत ?
RBI की नई गाइडलाइन के मुताबिक, ग्राहक अपनी शिकायत बैंक की शिकायत निवारण सेल में या RBI के ग्राहक सेवा विभाग में दर्ज करा सकते हैं। गंभीर मामलों में पुलिस में भी FIR दर्ज कराई जा सकती है। शिकायत करते समय फोन कॉल रिकॉर्डिंग, मैसेज के स्क्रीनशॉट और गवाहों के बयान जैसे सबूत जुटाना जरूरी है। बैंक भी अपने रिकवरी एजेंटों के व्यवहार की जिम्मेदारी उठाने के लिए बाध्य है। Now the bank or its agency cannot harass you for not paying EMI, new RBI guideline
रिकवरी एजेंटों के लिए नियम कानून
RBI ने रिकवरी एजेंटों के लिए सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक कॉल या मिलने का समय तय किया है। इस समय के बाहर वसूली करना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। रात में या छुट्टियों के दिन परेशान करना सख्त मना है। अगर कोई एजेंट इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो तुरंत शिकायत करें। यह नियम ग्राहकों की निजता और पारिवारिक शांति की रक्षा करते हैं। Now the bank or its agency cannot harass you for not paying EMI, new RBI guideline
जब कोई लोनधारक लगातार तीन EMI बाउंस करता है, तो बैंक पहला नोटिस भेजती है। इसके साथ ही अपनी स्थिति सुधारने के लिए 90 दिन का समय देती है। चौथी-पांचवी EMI न भरने पर बैंक दूसरा नोटिस भेजती है, जिसमें नीलामी की चेतावनी होती है। नए नियम के अनुसार इस दौरान भी बैंक या रिकवरी एजेंट अनुचित व्यवहार नहीं कर सकते। लोनधारक इस अवधि में बैंक से बात करके समाधान खोज सकते हैं। Now the bank or its agency cannot harass you for not paying EMI, new RBI guideline
रिकवरी एजेंटों के की सीमाएं क्या है?
RBI ने रिकवरी एजेंटों को साफ निर्देश दिए हैं कि वे धमकी, अपमानजनक भाषा या शारीरिक प्रताड़ना नहीं कर सकते। वे परिवारजनों या दोस्तों को परेशान नहीं कर सकते और जबरन घर में प्रवेश भी नहीं कर सकते। अगर कोई एजेंट नियम तोड़ता है तो उसकी रिपोर्ट तुरंत करें। बैंक को अपने एजेंटों के व्यवहार की जिम्मेदारी लेनी होती है और उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई करनी होती है। Now the bank or its agency cannot harass you for not paying EMI, new RBI guideline
नीलामी प्रक्रिया पर कानूनी सुरक्षा
जब लोनधारक पूरी तरह EMI नहीं चुका पाता तो बैंक कानूनी प्रक्रिया के तहत संपत्ति की नीलामी कर सकती है। यह प्रक्रिया न्यायालय के अधीन होती है और इसमें पारदर्शी होनी चाहिए। बैंक अपनी मर्जी से संपत्ति जब्त नहीं कर सकती। नीलामी से पहले लोनधारक के पास अपनी बात कहने और न्यायालय से सुरक्षा मांगने का अधिकार होता है। अगर नीलामी राशि लोन से अधिक होती है तो बची हुई राशि वापस की जाती है। Now the bank or its agency cannot harass you for not paying EMI, new RBI guideline
RBI की नई गाइडलाइन्स लोनधारकों को कानूनी सुरक्षा और मानसिक शांति प्रदान करती हैं। ये नियम वित्तीय संस्थानों और ग्राहकों के बीच बेहतर तालमेल और पारदर्शिता लाने में मदद करेगी। इसलिए लोनधारकों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहना और जरूरत पड़ने पर सही कदम उठाना चाहिए।
Disclaimer यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी वित्तीय या कानूनी निर्णय से पहले संबंधित विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें। RBI के नियम समय-समय पर बदल सकते हैं, इसलिए आधिकारिक स्रोतों से जानकारी लेते रहें।
नई दिल्ली: जब सरकारें निशुल्क शिक्षा देने के अपने दायित्व से भागेगी और शिक्षा माफियाओं को आजाद कर देगी तो लूटने के लिए, तो क्या होगा? शिक्षा माफियाओं को न तो सरकार से डर लगता है और न ही शिक्षा विभाग से और न किसी कोर्ट से। बेलगाम घोड़े बन गए हैं। खासकर दिल्ली में सरकारी जमीन पर खुले हुए प्राइवेट स्कूल जो किसी की परवाह किए बिना ही हर वर्ष मनमाने तरीके से फीस बढ़ाते जा रहे हैं। यहां तक कि डायरेक्टरेट ऑफ एज्युकेशन से अनुमति लेने की भी जहमत नहीं उठाते। Delhi government should take over all the private schools in Delhi
माता-पिता नौकरी करने पर मजबूर
आज कल दिल्ली का D.P.S द्वारका स्कूल सुर्खियों में है जो गेट पर बाउंसर तैनात करके बढ़ाई गई मनमानी फीस जमा नहीं करने वाले अभिभावकों के बच्चों को गेट पर ही रोककर जबरन बस में उनके घर पहुंचा रहे हैं। चाहे घर में ताला ही क्यों न लगा हो। कारण माता पिता दोनों ही मंहगाई बढ़ाए जाने के कारण नौकरी करने के लिए मजबूर हैं। स्कूल गेट पर तैनात बाउंसर कितने बदतमीज और बेहूदे होंगे इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे लड़कियों की बांह तक पकड़कर स्कूल के भीतर जाने से रोकते है। Delhi government should take over all the private schools in Delhi
कब-कितना फीस बढ़ाया गया?
D.P.S द्वारका स्कूल की मनमानी देखिए। पिछले पांच वर्षों में बच्चों की फीस को 139630 रुपए से बढ़ाकर 190000 रुपए कर दिया गया है। इसी कड़ी में हाईकोर्ट ने प्राइवेट स्कूलों को पैसे कमाने की मशीन और बच्चों के साथ बाउंसरों और स्कूल संचालकों द्वारा पर यातना तक बताया जा रहा है। D.P.S स्कूल द्वारका के द्वारा पिछले पांच वर्षों में फीस मनमाने तरीके से कैसे बढ़ाया गया? इसका नमूना वर्ष 2020/21 में फीस थी 139630 रुपए , 2021/22 में उतनी ही रही, लेकिन 2022/23 में 152510 रुपए कर दी गई। फिर वर्ष 2023/24 में 164844 रूपये, 2024/25 में 176340 रुपए और 2025/26 में पूरे 190000 रुपए कर दी गई है। इसमें विवरण देखा जाए तो ट्यूशन फीस 142800 रुपए, इन्यूअल चार्ज 32016 रुपए और डेवलपमेंट फीस 14280 रुपए जो पैरेंट टीचर मीटिंग की फीस केवल एक बार होने की है। Delhi government should take over all the private schools in Delhi
इतना ही नहीं, फीस बढ़ाने की सूचना नहीं देने के कारण फीस जमा नहीं कर पाने वाले 32 बच्चों के नाम काट दिए गए। नाम काट देना किस एज्युकेशन मैनुएल में लिखा है? नियमानुसार सरकारी जमीन पर बने स्कूल हॉस्पिटल में 15% लोगों को निःशुल्क सुविधा देनी चाहिए। विवाद डेवलपमेंट फीस को लेकर है। डायरेक्टरेट ऑफ एज्युकेशन के अनुसार दस प्रतिशत फीस बढ़ाई जा सकती है वह भी अनुमति लेकर, लेकिन शिक्षा माफिया कब मानते हैं? जिन बच्चों के नाम काटे गए, उनके मित्र फोन कर पूछते हैं, कि क्यों नाम काटा गया? बच्चों को अकेले घर जबरन छोड़ने के कारण बच्चों के मन में भय उत्पन्न होता है। मानसिक उत्पीड़न होती है और बच्चों को भारी सदमा पहुंचता हैं। इंफ्रियोरिटी कॉम्प्लेक्स पैदा होता है। मनोवैज्ञानिक दबाव से बच्चों के मानसिक संतुलन बिगड़ने का डर रहता है। लेकिन दौलत कमाने की हवस प्राइवेट स्कूल संचालकों में इस कदर हावी है कि उनके बच्चों पर पढ़ने वाले कॉम्प्लेक्स से कोई मतलब नहीं। Delhi government should take over all the private schools in Delhi
जनता को ही दंडित किया जा रहा है।
जब सैकड़ों अभिभावक कोर्ट गए तो स्कूल में छुट्टी घोषित कर संचालक फरार हो गए। अभिभावकों ने पुलिस बुलाई तो बिना नेम प्लेट वाली पुलिस पहुंची लेकिन वह खुद बच्चों और उनके अभिभावकों को टॉर्चर करने लगी। पुलिस और स्कूल संस्थापकों द्वारा लगाए गए गुंडों के द्वारा दुर्व्यवहार को अलग अलग नहीं किया जा सकता। दोनों ने ही अमानवीयता का परिचय दिया है। पुलिस जो जनता की रक्षा के लिए होती है उसे जनता के विरुद्ध कर दिया गया। सरकार की तरह उसका प्रशासन भी जनता को ही दंडित करने में लगा है। Delhi government should take over all the private schools in Delhi
आम आदमी पार्टी की सरकार
आम आदमी पार्टी का शासन था तब, केंद्र सरकार ने सुप्रीमकोर्ट के फैसले के खिलाफ दिल्ली आप सरकार से संसद में कानून बनाकर सारे प्रशासनिक अधिकार छीन लिए और मुख्यमंत्री, शिक्षा, स्वास्थ्य मंत्री सहित झूठे शराब मामले में ई डी द्वारा जेल भेजवाया गया था। इसलिए मनमानी फीस बढ़ाने के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का दोष नहीं दिया जा सकता। सारा प्रशासन एल जी के हाथ में दे दिया गया। इसलिए एल जी को संज्ञान लेना चाहिए था, लेकिन नहीं लिया। दुनिया ने देखा किस प्रकार आम आदमी सरकार को बदनाम करने के लिए यमुना नदी की सफाई के लिए एल जी ने कुछ भी नहीं किया और सारा दोष अरविंद केजरीवाल पर मढ़ते रहे। Delhi government should take over all the private schools in Delhi
सरकार का दायित्व
जब दिल्ली में बीजेपी सरकार बनी तब कितनी जल्दी मशीनें लगाकर यमुना को साफ करने का ढिंढोरा पीटा गया, जबकि आज भी दिल्ली के गंदे नाले लगातार कई घाटों के पास नाले का गंदा पानी यमुना में छोड़ रहे हैं। शुक्र है बीजेपी की दिल्ली सरकार कम से कम प्राइवेट स्कूलों की ऑडिट करने लगी है। लेकिन यह भी अपर्याप्त है। शिक्षा, रोजगार और चिकित्सा निःशुल्क देना सरकार का दायित्व है। Delhi government should take over all the private schools in Delhi
स्कूल कॉलेज बने लूट के धंधे
लेकिन केंद्र सरकार ने अपने दायित्व निभाने के स्थान पर शिक्षा को प्राइवेट हाथों में सौप कर लूटने के लिए खुला छोड़ दिया। जिसके कारण समूचे देश में शिक्षा माफिया स्कूल कॉलेज को लूट का धंधा बना लिए हैं। इन माफियाओं पर लगाम लगाने का दायित्व सरकार का है। दिल्ली के मुख्यमंत्री ही नहीं समूचे देश के मुख्यमंत्रियों का दायित्व बनता है कि वह समान शिक्षा नीति अपनाए और सभी प्राइवेट स्कूलों को अधिग्रहीत कर लें ताकि जनता का शोषण नहीं हो। Delhi government should take over all the private schools in Delhi
डिजिटल डेस्क महाराष्ट्र: यवतमाल जिले से हत्या का एक सनसनीखेज घटना सामने आया है। यहां एक महिला प्रिंसिपल ने अपने टीचर पति को जहर देकर मार डाला। इस हत्या की वजह राजोना की मारपीट और ब्लैकमेलिंग की जानकारी प्राप्त हो रही है। बताया जा रहा है कि पति अपनी ही पत्नी की अश्लील वीडियो बनाता और उसे डराता था। मारता पिटता भी था। तंग आकर प्रिंसिपल पत्नी ने उसे जहर दे दिया। कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। आरोपी पत्नी ने अपने ट्यूशन में पढ़ने वाले तीन छात्रों की मदद से पति का शव ठिकाने लगा दिया। The husband used to beat her and make sex videos, the wife poisoned him and burnt his body in the forest
पेट्रोल छिड़ककर जला दिया
इसके बाद रात में जंगल में पति के शव पर पेट्रोल छिड़ककर उसे जला दिया। दरअसल, 15 मई को यवतमाल के चौसला पहाड़ी के पास पुलिस को एक जला हुआ एक शव मिला था। शुरुआत में पुलिस को शव की पहचान करने में कठिनाई आ रही थी, लेकिन पुलिस ने मामले की जांच शुरू की, तो इस हत्याकांड की परतें खुलने लगीं। मृतक की पहचान 32 वर्षीय शांतनु देशमुख के रूप में हुई। वो सुयोगनगर, लोहरा का निवासी था। पुलिस ने उनके दोस्तों से पुछताछ की तो सारा मामला धीरे-धीरे खुलने लगा। The husband used to beat her and make sex videos, the wife poisoned him and burnt his body in the forest
जूस में मिलाया जहर
जानकारी प्राप्त करने के लिए पुलिस ने मृतक की 23 वर्षीय पत्नी निधि को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया। पूछताछ में पत्नी ने कुबूल कर लिया कि उसने ही अपने पति की हत्या की है। पुलिस के अनुसार, मृतक अपनी पत्नी को रोज शराब पीकर मारता-पिटता था। साथ ही वो उसके अश्लील वीडियो बनाकर उसे ब्लैकमेल भी करता था। पत्नी इससे तंग आ गई थी। इसलिए उसने एक दिन बनाना शेक पिलाने के बहाने उसे जहर दे दिया। The husband used to beat her and make sex videos, the wife poisoned him and burnt his body in the forest
इसके बाद आरोपी पत्नी ने अपने पति का शव ठिकाने लगाने के लिए अपने ट्यूशन के तीन नाबालिग छात्रों को विश्वास में लिया और पूरी प्लानिंग की। फिर रात में आरोपी पत्नी ने छात्रों को साथ लिया और शव को चौसाला के जंगल में ले गई। वहां उसने अपने पति के शव पर पेट्रोल छिड़का और उसमें आग लगा दी। लेकिन पुलिस ने स्थानीय सुत्रों की सहायता से इस हत्याकांड को सुलझा लिया। आरोपी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं तीनों नाबालिग छात्रों से भी पूछताछ की जा रही है। The husband used to beat her and make sex videos, the wife poisoned him and burnt his body in the forest
महाराष्ट्र/ ठाणे: डोंबिवली में एक 15 वर्षीय लड़की को दो महीने तक एक घर में बंधक बनाकर रखा गया, उसके साथ बार-बार बलात्कार किया गया, गर्भपात के लिए मजबूर किया गया। हालांकि उसके परिवार के एक परिचित व्यक्ति लड़की को अपने साथ ले गया था। जब वो अपने परिवार से झगड़ा कर के घर से निकल गई थी। आखिर में आरोपी ने नाबालिग लड़की को वेश्यावृत्ति के दलदल में धकेल दिया। लेकिन समय रहते पुलिस ने छापामारी कर लड़की को बचा लिया। Maharashtra: 15-year-old girl held hostage and raped repeatedly, girl had left home angry
पुलिस ने की छापामारी
तिलक नगर पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक विजय कुमार कदम ने बताया कि एक महिला समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है, हालांकि मुख्य आरोपी अभी भी फरार है। कदम ने बताया कि लड़की की आपबीती तब सामने आई जब कुछ मजबूरों को इसके बारे में पता चला, जिसके बाद पुलिस की टीम ने डोंबिवली के ग्रामीण इलाके में एक घर पर छापा मारा और उसे बचा लिया। Maharashtra: 15-year-old girl held hostage and raped repeatedly, girl had left home angry
झगड़ा कर घर से निकली लड़की
उन्होंने बताया, “पीड़िता की मां खाने-पिने की चीजें बेचती है और वह मुख्य आरोपी के संपर्क में थी, जो मसाले बेचता है और उसके परिवार को वह जानता था। जब दसवीं कक्षा की परीक्षा के बाद लड़की का अपनी मां से झगड़ा हुआ और वह घर से बाहर चली गई, तो मुख्य आरोपी ने उसे अपने साथ आने के लिए मना लिया।” Maharashtra: 15-year-old girl held hostage and raped repeatedly, girl had left home angry
सहायक पुलिस आयुक्त (डोंबिवली डिवीजन) सुहास हेमाडे ने बताया कि भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2) (अपहरण), 65(1) (कुछ मामलों में बलात्कार), 88 (गर्भपात का कारण बनना), 143 (मानव तस्करी), 144 (तस्करी किए गए व्यक्ति का शोषण) के साथ-साथ यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) अधिनियम और अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि पुलिस की टीमें अपराध की आगे की जांच कर रही हैं। Maharashtra: 15-year-old girl held hostage and raped repeatedly, girl had left home angry
मंत्रालय प्रतिनिधि मुंबई: महाराष्ट्र के कई शहरों में कक्षा 11वीं में दाखिले की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बढ़ी खबर है। 11वीं के एडमिशन को लेकर एक बड़ा बदलाव सामने आया है। एडमीशन प्रकृया में अब इन-हाउस कोटे को हटाकर ऑनलाइन एडमीशन के जरिए सरकार ने ज्यादा से ज्यादा छात्रों को फायदा पहुंचाने का काम किया है। इसमें मैरिट के आधार पर एडमीशन प्रकृया होगी। साथ ही पोर्टल की समस्या को भी दूर कर दिया गया है। Big change in college admission process – Maharashtra Education Minister Dada Bhuse
क्या है बदलाव?
अब तक जिन छात्रों को एक ही संस्था के स्कूल से 10वीं पास करने के बाद उसी संस्था के कॉलेज में आसानी से दाखिला मिल जाता था, अब उनके सामने एक नई चुनौती आ सकती है। सरकार ने साफ कर दिया है कि अब इन-हाउस कोटे का लाभ केवल उन्हीं छात्रों को मिलेगा, जिनका स्कूल और जूनियर कॉलेज एक ही कैंपस में स्थित होगा। यानी अगर कोई संस्था अलग-अलग जगहों पर स्कूल और कॉलेज चला रही है, चाहे वह कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर क्यों न हो, तो भी उन्हें अब इन-हाउस कोटा नहीं मिलेगा। Big change in college admission process – Maharashtra Education Minister Dada Bhuse
एक साथ होने चाहिए स्कूल और कॉलेज
महाराष्ट्र सरकार ने कक्षा 11वीं की ऑनलाइन एडमिशन प्रक्रिया शुरू होने से पहले एक नया नियम लागू किया है, जिससे राज्य के कई जूनियर कॉलेजों में इन-हाउस कोटे से दाखिले पर असर पड़ सकता है। नए नियम के मुताबिक, अब केवल उन्हीं संस्थानों में इन-हाउस कोटा लागू होगा, जहां स्कूल और जूनियर कॉलेज एक ही परिसर (कैंपस) में स्थित हैं। Big change in college admission process – Maharashtra Education Minister Dada Bhuse
अब तक की यह व्यवस्था थी कि अगर स्कूल और कॉलेज एक ही संस्था द्वारा संचालित हैं, तो अलग-अलग कैंपस में होने पर भी इन-हाउस कोटे का लाभ उन स्कूल और कॉलेज के बच्चों को मिलता था। लेकिन अब यह सुविधा केवल उन्हीं को मिलेगी जिनका स्कूल और कॉलेज एक ही जगह है। इससे राज्य भर के कई प्रमुख कॉलेज प्रभावित हो सकते हैं, जो अलग-अलग स्थानों पर स्कूल और कॉलेज चलाते हैं। Big change in college admission process – Maharashtra Education Minister Dada Bhuse
मंत्री दादा भूसे ने बताया कि ऑनलाइन एडमिशन सिस्टम को इस तरह से बदला गया है जिससे अब सभी छात्रों को मेरिट के आधार पर एडमीशन मिलेगा। उन्होंने कहा, कि “पहले कई बार देखा गया कि अच्छे नंबर लाने वाले छात्र प्रतिष्ठित कॉलेजों में दाखिला नहीं ले पाते थे। अब ऐसा नहीं होगा।” Big change in college admission process – Maharashtra Education Minister Dada Bhuse
पहले यह ऑनलाइन एडमिशन प्रणाली मुंबई, पुणे, नागपुर और अमरावती जैसे शहरों में ही लागू थी। इस साल इसे पूरे महाराष्ट्र में लागू किया जा रहा है। मंत्री ने माना कि ग्रामीण इलाकों में छात्रों को नेटवर्क और स्मार्टफोन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, लेकिन सरकार छात्रों के हित में लंबे समय के सुधारों के लिए प्रतिबद्ध है। Big change in college admission process – Maharashtra Education Minister Dada Bhuse
मराठी भाषा को लेकर भेजा प्रस्ताव
भूसे ने यह भी बताया कि महाराष्ट्र सरकार ने केंद्र को तीन प्रमुख सुझाव भेजे हैं। पहला, छत्रपति शिवाजी महाराज का इतिहास राष्ट्रीय पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए, दूसरा मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिले और तीसरा गैर-मराठी स्कूलों में मराठी पढ़ाना अनिवार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि “CBSE द्वारा मराठी को अनिवार्य करना इसी दिशा में हमारी कोशिशों का नतीजा है।” Big change in college admission process – Maharashtra Education Minister Dada Bhuse
डिजिटल डेस्क देश विदेश- अमेरिकी ट्रम्प प्रशासन ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय में विदेशी छात्रों के लिए दरवाज़े बंद कर दिए हैं। यूएस डिपार्टमेंट ऑफ़ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने विदेशी छात्रों को होस्ट करने के लिए हार्वर्ड विश्वविद्यालय के प्रमाणन को रद्द कर दिया है, जो प्रमुख आइवी लीग विश्वविद्यालयों में से एक के लिए एक बड़ा झटका है। यह कार्रवाई पिछले महीने DHS द्वारा हार्वर्ड के लिए DHS अनुदान में 2.7 मिलियन डॉलर समाप्त करने के बाद की गई है। 800 Indian students of Harvard will face trouble; 72 hours ultimatum to the university
अमेरिकी विरोध प्रदर्शन
होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी क्रिस्टी नोएम ने डीएचएस को हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट एंड एक्सचेंज विजिटर प्रोग्राम (एसईवीपी) सर्टिफिकेशन को समाप्त करने का आदेश दिया है। होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने यूनिवर्सिटी पर अमेरिकी विरोधी प्रदर्शनों और कथित यहूदी हिंसा के बीच सुरक्षित परिसर बनाए रखने में विफल रहने का आरोप लगाया है। 800 Indian students of Harvard will face trouble; 72 hours ultimatum to the university
विदेशी छात्रों को दाखिला
इसका मतलब यह है कि हार्वर्ड अब विदेशी छात्रों को दाखिला नहीं दे सकता और मौजूदा विदेशी छात्रों को अपना कानूनी दर्जा खोना होगा या उन्हें स्थानांतरित होना होगा। इसका यह भी मतलब है कि मौजूदा विदेशी छात्रों को जल्द ही किसी अन्य SEVP प्रमाणित विश्वविद्यालय में दाखिला लेने की ज़रूरत नहीं होगी। 800 Indian students of Harvard will face trouble; 72 hours ultimatum to the university
SEVP प्रमाणन समाप्त होने के साथ, F-1 वीज़ा या J वीज़ा पर छात्रों को अमेरिका में रहने के लिए किसी अन्य SEVP प्रमाणित विश्वविद्यालय की तलाश करनी होगी, जबकि कोई भी नया अंतर्राष्ट्रीय छात्र हार्वर्ड में 2025-26 के लिए F/J वीज़ा नहीं प्राप्त कर सकता। यदि वे छात्र किसी अन्य विश्वविद्यालय में दाखिला लेने में विफल रहते हैं, तो उनका वीज़ा रद्द किया जा सकता है और उन्हें अमेरिका से हद्द पार का सामना करना पड़ सकता है। 800 Indian students of Harvard will face trouble; 72 hours ultimatum to the university
छात्र और विनिमय आगंतुक कार्यक्रम (SEVP) जानकारी एकत्र करता है, बनाए रखता है, विश्लेषण करता है और जानकारी प्रदान करता है ताकि केवल वैध विदेशी छात्र या विनिमय आगंतुक ही संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रवेश पा सकें। हार्वर्ड की SEVIS तक पहुँच, जो अंतर्राष्ट्रीय छात्रों पर नज़र रखने और वीज़ा स्थिति बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है इसे अब रद्द कर दिया गया है। 800 Indian students of Harvard will face trouble; 72 hours ultimatum to the university
नोएम ने हार्वर्ड को छात्र रिकॉर्ड की मांग को पूरा करने के लिए 72 घंटे का समय दिया है, जिसमें अनुशासनात्मक डेटा और विरोध प्रदर्शन फुटेज शामिल है, ताकि वह अपनी SEVIS पहुँच को बहाल कर सके। हार्वर्ड को होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) द्वारा विदेशी छात्रों का नामांकन फिर से शुरू करने के लिए 72 घंटे के भीतर छह कठोर शर्तों को पूरा करने का काम सौंपा गया है। 800 Indian students of Harvard will face trouble; 72 hours ultimatum to the university
1- हार्वर्ड विश्वविद्यालय के पास उपलब्ध सभी रिकॉर्ड, चाहे वे आधिकारिक हों या अनौपचारिक, जिनमें इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और ऑडियो या वीडियो फुटेज शामिल हैं, जो पिछले पांच वर्षों में किसी गैर-आप्रवासी छात्र द्वारा परिसर के अंदर या बाहर की गई अवैध गतिविधि से संबंधित हैं।
2- हार्वर्ड विश्वविद्यालय के पास उपलब्ध सभी रिकॉर्ड, जिनमें इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और ऑडियो या वीडियो फुटेज शामिल हैं, पिछले पांच वर्षों में किसी गैर-आप्रवासी छात्र द्वारा परिसर के अंदर या बाहर की गई खतरनाक या हिंसक गतिविधि के संबंध में।
3- हार्वर्ड विश्वविद्यालय के पास उपलब्ध सभी रिकॉर्ड, जिनमें इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और ऑडियो या वीडियो फुटेज शामिल हैं, पिछले पांच वर्षों में किसी गैर-आप्रवासी छात्र द्वारा परिसर में या बाहर अन्य छात्रों या विश्वविद्यालय कर्मियों को दी गई धमकियों के संबंध में।
4- हार्वर्ड विश्वविद्यालय के पास उपलब्ध सभी रिकॉर्ड, जिनमें इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और ऑडियो या वीडियो फुटेज शामिल हैं, पिछले पांच वर्षों में नामांकित किसी गैर-आप्रवासी छात्र द्वारा, चाहे वह परिसर में हो या बाहर, अन्य सहपाठियों या विश्वविद्यालय कर्मियों के अधिकारों के हनन के संबंध में।
5- पिछले पांच वर्षों में नामांकित सभी गैर-आप्रवासी छात्रों के सभी अनुशासनात्मक रिकॉर्ड।
6- पिछले पांच वर्षों में हार्वर्ड विश्वविद्यालय परिसर में किसी गैर-आप्रवासी छात्र से संबंधित किसी भी विरोध गतिविधि का हार्वर्ड विश्वविद्यालय के पास उपलब्ध कोई भी ऑडियो या वीडियो फुटेज