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  • Mumbai BMC: मनपा बजट में खतरे की घंटी!

    Mumbai BMC: मनपा बजट में खतरे की घंटी!

    एक लंबे समय के बाद अब वह न केवल अधिक संसाधन जुटाने की राह ख़ोज रही है, बल्कि वह राज्य सरकार से अपने हिस्से की अतिरिक्त राशि मांगते हुए बकाया राशि को जारी करने की मांग भी कर रही है। Mumbai BMC Alarm bells in the municipal budget

    मुंबई– बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) प्रशासक ने 3 फरवरी 2025 को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए मनपा का वार्षिक बजट जारी किया। 744.27 बिलियन रुपए का यह बजट 2024-25 के बजट की तुलना में 20 प्रतिशत ज़्यादा रहा। इस बजट में बुनियादी ढांचे के कोई नए या मुख़्य काम को शुरू करने का उल्लेख नहीं है। हालांकि पहले से ही मंजूर बड़ी परियोजनाएं या फिर चल रही परियोजनाओं को जारी रखने के लिए भारी मात्रा में पैसा ख़र्च करना पड़ेगा। जिसपर मनपा प्रशासन ने संसाधनों का और अधिक बंटवारा करने के बजाय उनका विवेकपूर्ण उपयोग करते हुए पुराने कार्य को ही पूरा करने पर जोर देते हुए समझदारी का परिचय दिया है। Mumbai BMC Alarm bells in the municipal budget

    Bmc चुनाव की संभावना

    इस बजट में किसी नए कर की घोषणा नहीं की गई है। ऐसी उम्मीद की जा रही थी कि BMC के चुनाव इसी वर्ष होंगे। परंपरागत रूप से यह देखा गया है कि सरकारें कर वृद्धि की पृष्ठभूमि में चुनाव नहीं लड़ा करती हैं या चुनाव लड़ना पसंद नहीं करती हैं। Mumbai BMC Alarm bells in the municipal budget

    Bmc बजट पर काबू

    बीएमसी के बजट में पूंजीगत निवेश के लिए 431.62 बिलियन रुपए या कुल बजट के 58 प्रतिशत राशि का प्रावधान दिखाई देता है। इसका उपयोग मुख़्यतः शहर में नई संपत्तियों के निर्माण पर किया जाना है। दूसरी ओर राजस्व ख़र्च में वेतन, पेंशन समेत अन्य संस्थागत ख़र्च भी शामिल हैं। इसके लिए 312.04 बिलियन रुपए या कुल बजट की 41.52 प्रतिशत राशि का प्रावधान किया गया है। BMC का राजस्व बजट हमेशा से ही काफ़ी बढ़ा हुआ था और अब इसे काबू में लाने की कोशिश होती देखकर अच्छा लग रहा है। Mumbai BMC Alarm bells in the municipal budget

    खर्च पर ध्यान देना जरूरी

    लेकिन साल जैसे-जैसे आगे बढ़ेगा वैसे-वैसे राजस्व ख़र्च के बर्ताव पर पहनी नज़र रखनी ज़रूरी होगी। यहां बुनियादी ढांचे के रखरखाव का उल्लेख किया जाना भी आवश्यक है। परंपरागत रूप से म्युनिसिपल इंफ्रास्ट्रक्चर मैनुएल्स में मेंटेनेंस शेड्यूल दिया जाता है, जिस पर पूर्व निर्धारित समयावधि के हिसाब से अमल करना होता है। लेकिन नगरपालिका कर्मियों की ओर से होने वाली चूक की वजह से पूर्व में बुनियादी ढांचे की विफ़लता के अनेक मामले देखे गए हैं, जिसमें जनहानि भी हुई है। Mumbai BMC Alarm bells in the municipal budget

    ऐसे में यह उम्मीद की जा रही है, कि राजस्व बजट में बुनियादी ढांचे के रखरखाव के लिए पर्याप्त राशि का प्रावधान किया गया होगा। कुछ बुनियादी सुविधाओं को नियमित रखरखाव की ज़रूरत होती है जबकि कुछ को उनकी उम्र बढ़ने के बाद भारी या बड़े रखरखाव की आवश्यकता होती है। बुनियादी ढांचे के वार्षिक निरीक्षण और उन्हें बेहतर स्थिति में रखने के लिए राशि का प्रावधान उतना ही आवश्यक है जितना आवश्यक नई बुनियादी सुविधाओं संबंधी संपत्तियों के निर्माण पर पैसा ख़र्च करना होता है।

    दुर्भाग्यवश देश की अर्बन लोकल बॉडीज (ULB ) यानी शहरी स्थानीय निकाय, संसाधनों को लेकर काफ़ी संघर्ष करती हैं। यह बात GST की ओर से इन संस्थाओं के राजस्व संबंधी सभी रास्तों पर कब्ज़ा करने के बाद और भी सटीकता से लागू होती है। BMC की स्थिति और भी गंभीर है। इसका कारण यह है कि BMC पर अनेक विशाल परियोजनाओं का काम डाल दिया गया है, जो BMC की पूर्व में मजबूत रही वित्तीय स्थिति पर दबाव में डालने का काम कर रही है।

    BMC का कमिटेड फंड

    बजट में पहले से चल रही परियोजनाओं पर होने वाले कुल बिल यानी ख़र्च के रूप में 2.32 ट्रिलियन रुपए दर्शाए गए हैं। इस राशि को कमिटेड लायबिलिटी अर्थात प्रतिबद्ध देय राशि के रूप में दिखाया गया है। इस राशि में से 882.51 बिलियन रुपए केवल सड़क और पुलों के लिए ही रखे गए हैं। चूंकि वार्षिक बजटीय प्रावधान से यह बोझ नहीं उठाया जा सकता। इसलिए BMC को अपने भारी भरकम रिजर्व यानी जमा राशि को हाथ लगाना होगा। 817.74 बिलियन रुपए की इस जमा राशि के एक बड़े हिस्से को कमिटेड लायबिलिटी और वर्तमान में जारी निर्माण कार्य पर ही ख़र्च करने की नौबत आ गई है।

    BMC के खजाने पर बोझ

    ऐसे में यह साफ़ है कि महानगरपालिका के पास मौजूद जमा निधि का खजाना तेजी से खाली होता जा रहा है और यह भविष्य में बहुत ज़्यादा सहायता करने की स्थिति में नहीं होगा। चूंकि हम अनिश्चितता के दौर में रह रहे हैं, जहां अचानक आने वाला संकट शहर के सुचारू संचालन में व्यवधान डालता है। ऐसी स्थिति में स्थानीय निकाय के पास जमा निधि ही ऐसे संकट को पार करने में उसकी सहायता करती है। लेकिन भविष्य में उसे जमा निधि से सहायता मिलने की संभावना कम ही दिखाई देती है।

    राजस्व वृद्धि हासिल करना और सोच-समझकर ख़र्च करना।

    बड़ी परियोजनाओं के इस अत्यधिक बोझ को लेकर पड़ने वाला दबाव नगर पालिका के बजट में स्पष्ट दिखाई दे रहा है। इसी वजह से बजट का पहला स्टेटेड ऑब्जेक्टिव यानी लिखित उद्देश्य फिस्कल डिसिप्लिन अर्थात वित्तीय अनुशासन और सस्टेनेबिलिटी यानी वहनीयता है। इसके तहत दो लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। पहला है रेवेन्यू ऑग्मेंटेशन यानी राजस्व वृद्धि हासिल करना और एक्सपेंडिचर रेशनलाइजेशन यानी व्यय युक्तिकरण अर्थात सोच-समझकर ख़र्च करना। Mumbai BMC Alarm bells in the municipal budget

    BMC ने की सरकार से गुजारिश

    निश्चित रूप से महापालिका प्रशासन चिंतित है और वह सिविक मशीनरी यानी नगरीय व्यवस्था को अपनी कमर कसने के लिए तैयार होने को कह रहा है। राजस्व वृद्धि करने के लिए नगरपालिका प्रशासन आय अर्जित करने या संसाधन जुटाने के नए स्रोत ख़ोज रहा है। इसकी शुरुआत करते हुए BMC ने राज्य सरकार को गुजारिश की है, कि वह महापालिका की ओर से एकत्रित किए गए प्रीमियम में राज्य सरकार की हिस्सेदारी के प्रतिशत को कम करें, ताकि स्थानीय निकाय को प्रीमियम में ज़्यादा हिस्सेदारी मिल सके। यदि राज्य सरकार ने उसकी यह गुजारिश मान ली तो 2025- 26 के दौरान ही उसे 3 बिलियन रुपए की अतिरिक्त आय होगी। Mumbai BMC Alarm bells in the municipal budget

    अधिनियम में संशोधन पर विचार

    BMC ने वेकेंट लैंड टेनेंसी (VLT) यानी खाली जमीन किरायेदारी नीति भी जारी की है। इसके तहत वह उसके पास उपलब्ध खाली जमीन को दीर्घावधि की लीज पर दे सकेगा। इसके चलते BMC को 20 बिलियन रुपए मिलने की उम्मीद है। BMC इस बात पर भी विचार कर रही है कि क्या वह सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट (SWM) यूजर चार्ज लगा सकता है? ऐसा करने के लिए वह 2006 के सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सैनिटेशन बायलॉज यानी अधिनियम में संशोधन करना चाहता है। उसका मानना है कि ऐसा हुआ तो वेस्ट मैनेजमेंट को इंडिपेंडेंट सस्टेनेबल यानी स्वतंत्रता के साथ वहनीय किया जा सकेगा। Mumbai BMC Alarm bells in the municipal budget

    BMC का प्लान

    BMC ने कहा, कि वह स्लम्स यानी झोपड़पट्टी में आने वाले 50,000 के आसपास कमर्शियल यूनिट्स पर संपत्ति कर लगाना चाहता है। यह एक साहसिक नवाचार है और इसके चलते ULB को 3.5 बिलियन रुपए मिल सकेंगे। इसके अलावा वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे से जुड़े दहिसर ‘चेक नाके’ पर एक ट्रांसपोर्टेशन और कमर्शियल हब बनाने का प्रस्ताव है। इससे भी अतिरिक्त आय हासिल हो सकेगी। इसके अलावा BMC की वरली और क्रॉफोर्ड मार्केट जैसे इलाकों में अंडर यूटिलाइज्ड प्लॉट्स यानी कम उपयोग में आने वाले प्लॉट्स की नीलामी करने की भी योजना है। BMC की मनोरंजन कर वसूलने में तेजी लाने, अपनी विज्ञापन नीति को अंतिम रूप देने तथा ट्रेड लाइसेंस फ़ीस में वृद्धि करने की भी योजना है। Mumbai BMC Alarm bells in the municipal budget

    संसाधनों को बढ़ाना भी आय अर्जित करने का एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके अलावा बेहतर दिनों में शुरू किए गए गैर ज़रूरी ख़र्च में कटौती करके भी पैसा अर्जित किया जा सकता है। BMC अब इस दिशा में आगे बढ़ना चाहता है। ऐसा करने के लिए वह ख़र्च में युक्तिकरण की नीति लागू करने की इच्छुक है। इस नीति के तहत वह आस्थापना ख़र्च को न्यूनतम करने, कार्यबल की कुशलता बढ़ाने, 10 प्रतिशत ऊर्जा संरक्षण और प्वाइंट ऑफ यूटिलिटी यानी उपयोगिता के हिसाब से कार्य का चयन करना चाहती है। Mumbai BMC Alarm bells in the municipal budget

    BMC की सेवाएं

    BMC देश में सबसे ज़्यादा संख्या में सेवाएं मुहैया करवाती है। इसमें शिक्षा एवं स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण सामाजिक बुनियादी ढांचा भी शामिल है। यह BMC की सेवाओं में सबसे अहम क्षेत्र है। इनके लिए आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था की गई है। BMC को कुछ अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों का प्रभावी ढंग से प्रबंधन करने की आवश्यकता है। इसमें शहर की हवा, सॉलिड वेस्ट एंड सैनिटेशन मैनेजमेंट, ओपन स्पेसेस्‌ और बगीचे, बाढ़ शमन एवं आपदा मुस्तैदी विशेषत: बाढ़ प्रबंधन का समावेश है। इन सभी के लिए संसाधन उपलब्ध करवाए गए हैं। Mumbai BMC Alarm bells in the municipal budget

    यह बात विशेष रूप से संशोधित BRIMSTOWAD (बृहन्मुंबई स्टॉर्म वॉटर डिस्पोजल सिस्टम) मास्टर प्लान के तहत स्टॉर्म वॉटर ड्रेंस यानी बरसाती पानी निकास नाली में की गई वृद्धि से साबित होती है। BRIMSTOWAD मास्टर प्लान में नई नालियों का निर्माण, पुरानी नालियों का विस्तार, होल्डिंग पॉन्ड्स यानी पानी को जमा करने के तालाब और नालों की संख्या में विस्तार के साथ मीठी नदी का समावेश है। Mumbai BMC Alarm bells in the municipal budget

    BMC का Water Sistema

    BMC सबसे पुरानी बस सेवा BEST का भी संचालन करती है। इस अंडरटेकिंग यानी उपक्रम के लिए 10 बिलियन रुपए दिए गए हैं। इस राशि से वह बसों के अपने काफिले में नई बसों को जोड़ने के साथ ही 2,000 इलेक्ट्रिक बस भी शामिल कर रहा है। मुंबई के पास दशकों से एक मजबूत जलापूर्ति व्यवस्था है। वह इसे इसी तरह मजबूत बनाए रखना चाहता है। इसी वजह से शहर के जलापूर्ति एवं सीवरेज विभाग को उन्नतिकरण के लिए 134.23 बिलियन रुपए की एक भारी-भरकम राशि दी गई है। Mumbai BMC Alarm bells in the municipal budget

    आश्चर्यजनक

    आश्चर्यजनक रूप से शहर के डेवलपमेंट प्लान यानी विकास योजना (DP 2034) को लागू करने के लिए अलग से राशि का प्रावधान नहीं किया गया है। शहर में क्वॉलिटी ऑफ लाइफ यानी जिंदगी की गुणवत्ता मुख़्यत: विकास योजना के अमल पर ही निर्भर है। इस बात की संभावना है, कि व्यक्तिगत तौर पर विभागों के लिए किए गए प्रावधान के तहत विकास योजना पर होने वाला ख़र्च शामिल किया गया होगा। लेकिन बजट में DP के लिए अलग से हेड अर्थात मद बनाने को लेकर की गई सिफ़ारिश की उपेक्षा की गई है। DP में यह सिफ़ारिश की गई थी कि DP के लिए अलग से मद बनाकर उसके लिए किए गए प्रावधान को इसमें दर्शाया जाए। Mumbai BMC Alarm bells in the municipal budget

    निष्कर्ष

    कुल मिलाकर मौजूदा स्थितियों को देखते हुए बजट में बेहतर करने का एक ईमानदार प्रयास किया गया है। लेकिन यह भी साफ़ है कि जिस ULB को देश की सबसे धनाढ्य यानी संपन्न महापालिका के रूप में पहचाना जाता था। वह अब अपने सामर्थ्य से अधिक काम लेने की वजह से मुश्किल में दिखाई दे रही है। एक लंबे समय के बाद अब वह न केवल अधिक संसाधन जुटाने की राह ख़ोज रही है, बल्कि वह राज्य सरकार से अपने हिस्से की अतिरिक्त राशि मांगते हुए बकाया राशि को जारी करने की भी मांग कर रही है। यह ऐसे वक़्त में हुआ है जब निर्वाचित स्थानीय निकाय अस्तित्व में नहीं है और महापालिका पर इस वक़्त सीधे राज्य सरकार का ही नियंत्रण है। वर्तमान स्थिति में सावधानी बरतना आवश्यक है। इस स्थिति में बेकार के ख़र्च से बचने की कोशिश होनी चाहिए। Mumbai BMC Alarm bells in the municipal budget

    निश्चित रूप से देश की अग्रणी ULB पर 2024 में हुए राष्ट्रीय और उसके बाद नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव का असर पड़ा है। इसी तरह वह अपने आसन्न चुनावों का दबाव भी झेल रही है। इन सारे दबावों के बावजूद मौजूदा स्थानीय प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि लोगों को आकर्षित करने वाले बुनियादी कार्यों की घोषणा करने की होड़ के कारण शहर के वित्तीय स्वास्थ्य पर विपरीत परिणाम न पड़े। ऐसा हुआ तो एक वक़्त आएगा जब BMC के वित्तीय संसाधनों पर इतना बोझ बढ़ेगा कि वह टूटने की कगार पर पहुंच जाएगी। ऐसा हुआ तो यह घोर त्रासदी होगी। Mumbai BMC Alarm bells in the municipal budget

  • मुम्बई यूनिवर्सिटी की गलती, लाखों छात्रों के लिए बनी मुसीबत

    मुम्बई यूनिवर्सिटी की गलती, लाखों छात्रों के लिए बनी मुसीबत

    Mumbai University Certificate Mistake : मुम्बई यूनिवर्सिटी ने इतनी बड़ी गलती कर दी है कि अब लाखों छात्रों के लिए मुसीबत खड़ी हो गई है। मुम्बई यूनिवर्सिटी ने 2023-24 बैच के ग्रेजुएशन सर्टिफिकेट पर अपने नाम की स्पेलिंग ही गलत छाप दी है। छात्रों को सही सर्टिफिकेट मिलने में देरी होगी। यूनिवर्सिटी अब इस गलती को सुधारने में लगी है। (Mumbai University’s mistake, creating trouble for lakhs of students)

    मुम्बई : अक्सर जरूरी दस्तावेजों पर नाम में गडबडी या स्पेलिंग मिस्टेक के कारण लोगों को कई मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। उनमें ख़ासकर पढाई के सर्टिफिकेट में अगर मिस्टेक हो जाए तो लोग उसे जाली समझ लेते हैं। मुम्बई यूनिवर्सिटी ने भी कई बार ऐसी गलती की है। लेकिन इस बार तो यूनिवर्सिटी ने खुद अपने नाम की स्पेलिंग ही गलत छाप दी है। 2023-24 बैच के ग्रेजुएशन सर्टिफिकेट पर ‘University of Mumabai‘ लिखा हुआ है। इसमें “Mumbai” की जगह “Mumabai” लिखे होने से पूरा सर्टीफिकेट ही जाली नजर आ रहा है। ये सारे सर्टिफिकेट कई कॉलेजों को भेज दिए गए हैं। अब कई कॉलेज इन सर्टिफिकेटों को वापस कर रहे हैं। (Mumbai University’s mistake, creating trouble for lakhs of students)

    एक कॉलेज के प्रिंसिपल ने कहा, ‘अपने ही नाम की स्पेलिंग गलत करना मुम्बई युनिवर्सिटी के लिए शर्मनाक बात है।’ एक दूसरे प्रिंसिपल ने कहा, ‘ऊपर गलत नाम की वजह से लोगो को सर्टिफिकेट नकली लग रहे हैं। सोचिए, अगर छात्र नौकरी या आगे की पढ़ाई के लिए इन सर्टिफिकेट का इस्तेमाल करेंगे तो क्या होगा?’ (Mumbai University’s mistake, creating trouble for lakhs of students)

    सर्टिफिकेट की वापस से होगी मांग

    प्रिंसिपल ने आगे कहा, ‘नए सर्टिफिकेट छपवाने से छात्रों को उन्हें मिलने में देरी होगी। कई छात्रों को आगे की पढ़ाई या नौकरी मिल चुकी होगी, और शायद उन्होंने इस गलती पर ध्यान भी नहीं दिया होगा।’ प्रिंसिपल ने बताया कि अब सभी गलत सर्टिफिकेट उन बच्चों से वापस मंगवाने पड़ेंगे। (Mumbai University’s mistake, creating trouble for lakhs of students)

    हैदराबाद की कंपनी ने की गड़बड़ी

    मुम्बई विश्वविद्यालय ने सर्टिफिकेट छापने का काम हैदराबाद की एक कंपनी को दिया था। अब यूनिवर्सिटी इस गलती को सुधारने में लगी है। Mumbai University के प्रवक्ता ने बताया कि ‘छपाई की समस्या के कारण कुछ सर्टिफिकेट में गलतियां हो गई हैं।’ लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि कितने सर्टिफिकेट में गलती हुई है? प्रवक्ता ने कहा, ‘हम इसे सुधार रहे हैं। छात्रों को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के नए सर्टिफिकेट मिलेंगे।’ उन्होंने यह भी बताया कि गलती का पता चलते ही यूनिवर्सिटी ने इसे सुधारना शुरू कर दिया है। सभी कॉलेजों को अभी तक सर्टिफिकेट नहीं भेजे गए हैं। बाकी कॉलेजों को सही सर्टिफिकेट भेजे जाएंगे। (Mumbai University’s mistake, creating trouble for lakhs of students)

    लापरवाही पर नाराज

    एक प्रिंसिपल ने बताया कि पिछले कुछ सालों में सर्टिफिकेट में गलतियां कम हुई हैं। क्योंकि मुम्बई युनिवर्सिटी छात्रों को अपनी जानकारी जांचने और उसमें सुधार करने का मौका देता है। यह सब छपाई से पहले होता है। इससे गलतियां कम हो जाती हैं। इस बार हुई गलती वाकई में बड़ी है और उम्मीद है कि भविष्य में ऐसी गलती दोबारा नहीं होगी। छात्रों के भविष्य से जुड़े इन दस्तावेजों को तैयार करने में पूरी सावधानी बरतनी चाहिए। यूनिवर्सिटी को अपनी प्रक्रियाओं की समीक्षा करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसी लापरवाही दोबारा न हो। यह घटना छात्रों और उनके माता-पिता के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने उम्मीद जताते हुए कहा कि यूनिवर्सिटी जल्द से जल्द सही सर्टिफिकेट उपलब्ध करा देगी। (Mumbai University’s mistake, creating trouble for lakhs of students)

  • हिजाब हटाने को लेकर परीक्षा केन्द्र की सख्ती, छात्राओं ने परीक्षा ही छोड़ दिया

    हिजाब हटाने को लेकर परीक्षा केन्द्र की सख्ती, छात्राओं ने परीक्षा ही छोड़ दिया

    उत्तर प्रदेश के जौनपुर में और एक बार हिजाब को लेकर विवाद गरमा गया है। यहां परीक्षा केन्द्र ने हिजाब हटाने को लेकर सख्ती दिखाते हुए छात्राओं को परीक्षा देने से रोक दिया। जबकि छात्राएँ महिला टीचर के सामने हिजाब उतारने को तैयार थी। लेकिन परीक्षा केन्द्र के ज़िद के आगे छात्राओं को परीक्षा देने से रोक दिया।

    उत्तर प्रदेश: जौनपुर के खुदौली में यूपी बोर्ड परीक्षा के दौरान हिजाब (नकाब) को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। सर्वोदय इंटर कॉलेज में दसवीं की चार छात्राओं को परीक्षा केंद्र में प्रवेश करने से रोक दिया गया क्योंकि उन्होंने हिजाब उतारने से इनकार किया था। नतीजतन, छात्राओं को घर वापस लौटना पड़ा। इसके बाद से मामला सोशल मीडिया पर खूब गरमाया हुआ है। (Strictness of the examination center regarding removal of hijab, girl students left the examination)

    क्या है पूरा मामला?

    सोमवार को यूपी बोर्ड की दसवीं कक्षा की हिंदी परीक्षा थी। छात्राएं खेतासराय स्थित मॉडर्न कॉन्वेंट स्कूल की थीं। जब वे परीक्षा केंद्र पर पहुंचीं, तो वहां की प्रशासनिक टीम ने हिजाब हटाने के लिए कहा। छात्राओं ने इसे मानने से इनकार कर दिया, जिसके कारण उन्हें परीक्षा हॉल में प्रवेश नहीं दिया गया। हालांकि छात्राओं ने महिला टीचर के सामने हिजाब उतारने को प्रशासन से अनुरोध किया। लेकिन परीक्षा केन्द्र के ज़िद के आगे छात्राओं को परीक्षा देने से रोक दिया और उन्हें घर वापस लौटना पड़ा। (Strictness of the examination center regarding removal of hijab, girl students left the examination)

    मामले पर विरोध और समर्थन

    इस घटना की खबर सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गई और हिजाब को लेकर नियमों की सख्ती पर सवाल उठने लगे। छात्राओं में से एक के पिता अहमदुल्लाह ने अपनी बेटी के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि,
    “अगर हिजाब में परीक्षा देने की अनुमति नहीं मिली, तो हमारी बेटी परीक्षा नहीं देगी।” (Strictness of the examination center regarding removal of hijab, girl students left the examination)

    उन्होंने दावा किया कि चार नहीं बल्कि दस छात्राओं को परीक्षा देने से रोका गया। उन्होंने स्कूल प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा, कि “उन्होंने अनुरोध किया था कि लेडी टीचर से चेकिंग कराकर हिजाब में परीक्षा देने की अनुमति जाए, लेकिन बच्चियों की मांग को नहीं मानी गई।” उन्होंने कहा, कि “ये परीक्षा केन्द्र की हटगर्जी है जो धर्म के आधार पर बच्चों के साथ पक्षपात किया जा रहा है। जो सरारस गलत है।” (Strictness of the examination center regarding removal of hijab, girl students left the examination)

    नियमों का गलत इस्तेमाल

    परीक्षा केंद्र के व्यवस्थापक दिनेश चंद्र गुप्ता ने कहा किया कि, “परीक्षा के दौरान बोर्ड के नियमों का पालन कराना अनिवार्य है। छात्राओं ने नियमों का पालन करने से इनकार किया, इसलिए उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया।” यहां स्कूल प्रशासन को हिजाब को लेकर नियमों का आकलन करना चाहिए था। जबकि नियम के मुताबिक सिर्फ पहचान पत्र की पृष्ठी करने के बाद उन्हें परीक्षा केंद्र में प्रवेश दे देना चाहिए था। लेकिन स्कूल प्रशासन ने ऐसा नही करके उन बच्चों का साल ही बरबाद कर दिया। यहां नियमों का गलत इस्तेमाल किए जाने के आरोप लग रहे हैं। (Strictness of the examination center regarding removal of hijab, girl students left the examination)

    सोशल मीडिया पर गरमाया मुद्दा

    यह मामला अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। कुछ लोग छात्राओं के फैसले को सराहनीय बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे शिक्षा से समझौता मान रहे हैं। जबकि यूपी बोर्ड के नियमों के अनुसार, परीक्षा केंद्र में पहचान सुनिश्चित करने के लिए चेहरा स्पष्ट दिखना चाहिए। हालांकि, हिजाब को लेकर कोई स्पष्ट गाइडलाइन नहीं है, जिससे यह विवाद और गहरा गया है। इसमें यह नहीं कहा गया है कि परीक्षा देते समय भी विद्यार्थी का चेहरा स्पष्ट दिखाई देना चाहिए। तो सवाल है कि परीक्षा केन्द्र ने ऐसा क्यों किया? (Strictness of the examination center regarding removal of hijab, girl students left the examination)

    प्रशासन से मांग

    अब देखना यह है कि क्या शिक्षा विभाग इस मुद्दे को लेकर कोई संज्ञान भी लेता है या नही? या इस तरह के मामलों से निपटने के लिए कोई कदम उठाता भी है या नही? क्या इन छात्राओं को परीक्षा देने का कोई दूसरा मौका मिलेगा? या यह मामला सिर्फ एक विवाद बनकर रह जाएगा? ऐसा हुआ तो प्रदेश के अल्पसंख्यकों के साथ पक्षपात का आरोप लगता रहेगा और हो सकता है, मुस्लिम समाज की लाखों बच्चियां उच्च शिक्षा से महरूम रह जाएँ। ऐसे में प्रदेश का ही नुकसान होगा। प्रशासन को इस पर विचार करने की जरूरत है। (Strictness of the examination center regarding removal of hijab, girl students left the examination)

  • अमेरिकी वीज़ा इंटरव्यू छूट अब सिर्फ 12 महिने के लिए कर दिया गया है।

    अमेरिकी वीज़ा इंटरव्यू छूट अब सिर्फ 12 महिने के लिए कर दिया गया है।

    48 महिनों की वीज़ा इंटरव्यू छूट अमेरिकी सरकार ने अब घटाकर मात्र 12 महिने के लिए कर दिया गया है। इससे बाहर नौकरी व्यापार के लिए जानेवाले भारतीयों के लिए बड़ी दिक्कत होने वाली है। (The US visa interview waiver is now extended to just 12 months)

    नई दिल्ली: संयुक्त राज्य अमेरिका ने वीज़ा इंटरव्यू छूट के लिए पात्रता विंडो, जिसे आमतौर पर ड्रॉपबॉक्स प्रक्रिया के रूप में जाना जाता है। इसे अब 48 महीने से घटाकर 12 महीने के लिए कर दिया है। इस बदलाव से हजारों नोन इमीग्रेंट वीजा धारकों पर असर पड़ने की उम्मीद है, जिनमें एच-1बी, एफ-1 और बी1/बी2 वीजा धारक भी शामिल हैं। (The US visa interview waiver is now extended to just 12 months)

    जबकि भारत में अमेरिकी दूतावास ने बदलाव की पुष्टि नहीं की है, ऑनलाइन वीज़ा प्रोसेसिंग प्लेटफॉर्म एटलिस से पता चलता है, कि उसने पिछले सप्ताह अपने पात्रता मानदंड को अपडेट किया है। (The US visa interview waiver is now extended to just 12 months)

    एटलिस के एक प्रवक्ता ने जानकारी देते हुए बताया, कि “हालांकि कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन बदलाव अब लागू किया जा रहा है और 12 महीने से अधिक समय से समाप्त हो चुके आवेदन अब स्वीकार नहीं किए जाएंगे।” (The US visa interview waiver is now extended to just 12 months)

    वीज़ा प्रोसेसिंग पर दबाव

    पहले, यदि व्यक्ति का पिछला वीज़ा 48 महीनों के भीतर समाप्त हो जाता था, तो वह ड्रॉपबॉक्स प्रणाली का उपयोग करके अपने वीज़ा को नवीनीकृत कर सकता था। यह विस्तारित नीति कांसुलर बैकलॉग को कम करने के लिए महामारी के दौरान पेश की गई थी। नवीनतम बदलाव का मतलब है कि कई आवेदकों को अब व्यक्तिगत इंटरव्यू के लिए उपस्थित होना होगा, जिससे वीज़ा प्रणाली पर और दबाव पड़ सकता है। (The US visa interview waiver is now extended to just 12 months)

    द नेशनल लॉ रिव्यू के अनुसार, इस बदलाव से नोन इमीग्रेंट वीज़ा धारकों के लिए देरी और यात्रा में बाधा उत्पन्न होने की संभावना है, जिनमें निम्नलिखित परेशानियां शामिल हैं:

    • एच-1बी – विशिष्ट क्षेत्रों में कुशल पेशेवरों के लिए एक कार्य वीजा, जिसके लिए अमेरिकी नियोक्ता से नौकरी की पेशकश की आवश्यकता होती है।
    • एफ-1 – अमेरिका में शैक्षणिक कार्यक्रमों के लिए एक छात्र वीजा, जो परिसर में सीमित रोजगार की अनुमति देता है।
    • बी1/बी2 – व्यापार (बी1) या पर्यटन (बी2) के लिए एक अल्पकालिक वीजा, जो रोजगार की अनुमति नहीं देता है।
    • एल-1 – एक बहुराष्ट्रीय कंपनी के भीतर अमेरिकी कार्यालय में स्थानांतरित होने वाले कर्मचारियों के लिए एक वीजा, जो अधिकारियों, प्रबंधकों या विशेष ज्ञान वाले श्रमिकों पर लागू होता है।
    • O-1 – विज्ञान, कला, शिक्षा, व्यवसाय या एथलेटिक्स में असाधारण क्षमता वाले व्यक्तियों के लिए वीज़ा।

    क्या बदल गया है?

    आवेदक अब ड्रॉपबॉक्स प्रक्रिया के लिए तभी अर्हता प्राप्त करते हैं, जब उनका वीज़ा पिछले 12 महीनों के भीतर समाप्त हो गया हो और उसी श्रेणी में हो। जो लोग इस आवश्यकता को पूरा नहीं करते हैं उन्हें एक व्यक्तिगत इंटरव्यू निर्धारित करना होगा, जिसके कारण ये हो सकते हैं:

    • अमेरिकी वाणिज्य दूतावासों में व्यक्तिगत नियुक्तियों की मांग में वृद्धि।
    • विशेष रूप से उच्च मात्रा वाले शहरों में वीज़ा इंटरव्यू के लिए लंबे समय तक प्रतीक्षा करना।
    • व्यावसायिक यात्रियों और तेजी से नवीनीकरण की आवश्यकता वाले पेशेवरों के लिए संभावित व्यवधान।
    • इस बदलाव का असर अमेरिका में भारतीय छात्रों पर भी पड़ने की उम्मीद है।

    वनस्टेप ग्लोबल के मुख्य परिचालन अधिकारी सिद्धार्थ अय्यर ने जानकारी देते हुए बताया, “छात्रों (एफ-1) के लिए अमेरिकी वीजा नवीनीकरण प्रक्रिया में हालिया नीति बदलाव खासकर भारत में आवेदकों के लिए एक महत्वपूर्ण समायोजन का प्रतिनिधित्व करता है। इंटरव्यू छूट की पात्रता अब पिछले 48 महीनों से घटकर 12 महीने हो गई है, कुछ छात्रों को अपने वीजा को नवीनीकृत करते समय लंबे समय तक इंतजार और अतिरिक्त कदमों का अनुभव हो सकता है। हालांकि यह समायोजन पूर्व-महामारी नियमों की वापसी को दर्शाता है, यह ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय शिक्षा की मांग अधिक है।” (The US visa interview waiver is now extended to just 12 months)

    उन्होंने कहा, “इस बदलाव का उद्देश्य प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना है, लेकिन यह उन छात्रों के लिए चुनौतियां पैदा कर सकता है जो अद्यतन पात्रता विंडो से बाहर हैं। हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि कई छात्रों के पास अभी भी नियमित प्रक्रिया के माध्यम से अपने वीजा को नवीनीकृत करने के पर्याप्त अवसर होंगे।” “जो लोग इस परिवर्तन से प्रभावित हैं, उन्हें सूचित रहना चाहिए, अपने नवीनीकरण की योजना पहले से बना लेनी चाहिए, और मार्गदर्शन के लिए अपने विश्वविद्यालय के अंतर्राष्ट्रीय कार्यालयों या वीज़ा सलाहकारों तक पहुँचना जारी रखना चाहिए।” (The US visa interview waiver is now extended to just 12 months)

    भारत में वीज़ा अपाइंटमेंट में देरी

    भारत में वीज़ा अपॉइंटमेंट प्राप्त करना पहले से ही एक लंबी प्रक्रिया है। 2022 में B1/B2 (व्यवसाय और पर्यटन) वीज़ा इंटरव्यू के लिए प्रतीक्षा समय 999 दिनों से अधिक हो गया। हालाँकि अब इसमें सुधार हुआ है, लेकिन प्रतीक्षा समय अभी भी लंबा है:

    • दिल्ली और मुंबई: 440 दिन से अधिक
    • चेन्नई: 436 दिन
    • हैदराबाद: 429 दिन
    • कोलकाता: 415 दिन

    वीज़ा नीति में बदलाव क्यों?

    दिल्ली में एक सवाल के जवाब में, अमेरिकी दूतावास ने कहा, “अमेरिकी विदेश विभाग कार्यकारी आदेश 14161 के तहत निर्देशित सभी वीजा कार्यक्रमों की पूर्ण समीक्षा कर रहा है। इस समय हमारे पास यही सारी जानकारी है।” (The US visa interview waiver is now extended to just 12 months)

    20 जनवरी, 2025 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा हस्ताक्षरित कार्यकारी आदेश 14161 का शीर्षक है “संयुक्त राज्य अमेरिका को विदेशी आतंकवादियों और अन्य राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक सुरक्षा खतरों से बचाना।” आदेश संघीय एजेंसियों को इमीग्रेशन स्क्रीनिंग और जांच प्रक्रियाओं को मजबूत करने का निर्देश देता है। यह पिछले ट्रम्प प्रशासन की कुछ नीतियों को बहाल करता है और सुरक्षा जोखिमों के लिए वीज़ा और इमीग्रेशन नीतियों की समीक्षा की आवश्यकता है। (The US visa interview waiver is now extended to just 12 months)

    इसमें शामिल है:

    • संभावित प्रवेश प्रतिबंधों के लिए उच्च जोखिम वाले देशों की पहचान करना।
    • शरणार्थी स्क्रीनिंग प्रक्रियाओं को मजबूत करना।
    • सुरक्षा कमजोरियों के लिए वीज़ा कार्यक्रमों का मूल्यांकन करना।
    • अमेरिका में पहले से मौजूद विदेशी नागरिकों पर निगरानी बढ़ाना।
    • अमेरिकी समाज में आप्रवासी समावेशन को प्रोत्साहित करने के उपायों को लागू करना।

  • बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, अब मां की जाति के आधार पर भी मिलेगा जाति प्रमाण पत्र.?

    बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, अब मां की जाति के आधार पर भी मिलेगा जाति प्रमाण पत्र.?

    बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को ‘आपले सरकार’ पोर्टल में संशोधन पर विचार करने को कहा है, जिससे असाधारण परिस्थितियों में मां की जाति के आधार पर ओबीसी जाति प्रमाणपत्र जारी किया जा सकेगा।

    मुम्बई: बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को निर्देश दिया है कि असाधारण परिस्थितियों में मां की जाति के आधार पर जाति प्रमाण पत्र और ओबीसी सर्टिफिकेट जारी करने के लिए ‘आपले सरकार’ पोर्टल में जरूरी बदलाव पर विचार करे। अदालत ने सरकार से एक समिति गठित करने को भी कहा है, जो इस संशोधन की संभावनाओं पर विचार करेगी। (Big decision of Bombay High Court, now caste certificate will be given on the basis of mother’s caste also)

    किसने की थी याचिका?

    दरअसल, 30 वर्षीय स्वानुभूति जैन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर थी, उन्होंने अपनी याचिका में मां की जाति के आधार पर ओबीसी प्रमाण पत्र की मांग की थी। लेकिन कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि जैन यह साबित नहीं कर सकीं कि उनका पालन-पोषण केवल मां ने किया था। अदालत ने पाया कि जैन के पिता, जो एक बैंक अधिकारी हैं, उनकी परवरिश में पूरी तरह शामिल रहे और उनकी मां ने 2022 में ही अपना ओबीसी प्रमाण पत्र बनवाया था।

    नियमों का दुरुपयोग नही होना चाहिए

    कोर्ट ने सरकार से मां की सामाजिक स्थिति के दस्तावेज अपलोड करने की अनुमति देने के लिए पोर्टल में संशोधन की संभावना पर विचार करने को कहा है। हालांकि, हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जाति प्रमाण पत्र के नियमों का दुरुपयोग रोकने के लिए कड़ी जांच जरूरी होगी।

    नाम से पता चलेगा उसकी जाति

    कोई भी व्यक्ति अपने नाम से जाति प्रमाण पत्र की जांच या तो संबंधित प्राधिकरण में जाकर या संबंधित राज्य की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से कर सकते हैं, हालांकि यह प्रक्रिया राज्य के आधार पर अलग-अलग होती है। (Big decision of Bombay High Court, now caste certificate will be given on the basis of mother’s caste also)

  • महाराष्ट्र HSC परीक्षा: नालासोपारा में फिजिक्स के पेपर के दौरान डमी कैंडिडेट पकड़ा गया

    महाराष्ट्र HSC परीक्षा: नालासोपारा में फिजिक्स के पेपर के दौरान डमी कैंडिडेट पकड़ा गया

    नालासोपारा के ‘ओम साईं जूनियर कॉलेज’ में बोर्ड परीक्षा के दौरान नकल विरोधी फ्लाइंग-स्क्वाड (flying squads) ने सरप्राइज दौरा किया। इस दौरान एक डमी कैंडिडेट पेपर देते हुए पकड़ा गया। सूचना के बाद परीक्षा केंद्र को पुलिस में शिकायत दर्ज करने का निर्देश दिया गया। (Maharashtra HSC exam, Dummy candidate caught during Physics paper in Nalasopara)

    मुम्बई: महाराष्ट्र राज्य माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (MSBSHAE) की उच्चतर माध्यमिक प्रमाणपत्र (HSC) परीक्षा के लगभग एक सप्ताह बाद, सोमवार को मुम्बई डिवीजन के परीक्षा हॉल में नकल का पहला मामला सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक, परीक्षा के दिन मुम्बई से सटे पालघर जिले के नालासोपारा में परीक्षा के दौरान एक डमी अभ्यर्थी को फिजिक्स (Physics) का पेपर देते हुए पकड़ा गया। राज्य बोर्ड के निर्देश पर परीक्षा केंद्र ने पेल्हार पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी है। (Maharashtra HSC exam, Dummy candidate caught during Physics paper in Nalasopara)

    फ्लाइंग स्क्वाड का सरप्राइज दौरा

    यह मामला नालासोपारा के ओम साईं जूनियर कॉलेज (Om Sai Junior College) में बोर्ड एक्जाम्स (Bord exams) के दौरान नकल विरोधी फ्लाइंग-स्क्वाड के सरप्राइज दौरे के दौरान सामने आया। बोर्ड के मुम्बई डिवीजन के अध्यक्ष, राजेंद्र अहिरे ने कहा, “फ्लाइंग-स्क्वाड दौरे के लिए बीना पूर्व सूचना के ऐसे ही किसी भी परीक्षा केंद्रों (Exam Center) का चयन करते हैं। सोमवार को ऐसी ही एक सरप्राइज विज़िट के दौरान, फ्लाइंग-स्क्वाड के सदस्यों ने सुबह के सत्र में आयोजित फिजिक्स के पेपर लिखते हुए एक डमी उम्मीदवार को देखा। इसका पता तब चला जब फ्लाइंग-स्क्वाड के सदस्यों ने अचानक हॉल-टिकट और परीक्षार्थियों की जांच की।” (Maharashtra HSC exam, Dummy candidate caught during Physics paper in Nalasopara)

    जांच क्यों हुई ?

    यह पूछे जाने पर कि क्या पहले से अधिकारियों को गडबडी की सूचना मिली थी? जिसके कारण हॉल टिकट और परीक्षा देने आए उम्मीदवारों की जांच की गई? अहिरे ने कहा, “यह विशेष जूनियर कॉलेज संवेदनशील परीक्षा केंद्रों के रूप में पहचाने गए केंद्रों में से भी नहीं था। यह इस केंद्र में फ्लाइंग-स्क्वाड का एक अचानक सरप्राइज दौरा था और ऐसे दौरों में हॉल-टिकट की जांच भी शामिल होता है।” (Maharashtra HSC exam, Dummy candidate caught during Physics paper in Nalasopara)

    FIR दर्ज कराने का निर्देश

    घटना की सूचना महाराष्ट्र राज्य बोर्ड को दिए जाने के बाद, परीक्षा केंद्र को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पुलिस शिकायत (FIR) दर्ज करने का निर्देश दिया गया। अहिरे ने कहा, ”राज्य बोर्ड द्वारा भी इसको लेकर स्वतंत्र जांच की जाएगी।” (Maharashtra HSC exam, Dummy candidate caught during Physics paper in Nalasopara)

  • Mumbai: साढ़े तीन साल की बच्ची के साथ शैतान ने की हैवानियत! पुलिस भी हैरान..

    Mumbai: साढ़े तीन साल की बच्ची के साथ शैतान ने की हैवानियत! पुलिस भी हैरान..

    Mumbai के मालाड़ में एक आश्चर्यजनक घटनाक्रम ने पुलिस को हैरान कर दिया है। एक साढ़े तीन साल की स्कूली छात्रा ने आरोप लगाया कि उसके प्राइवेट पार्ट को शैतान ने छुआ। इस मामले की जांच में डॉक्टरों के साथ फोरेंसिक डिपार्टमेंट भी जांच कर रही है। हालांकि की पुलिस को सीसीटीवी कैमरे भी कुछ नही दिखा। (Mumbai: The devil did cruelty to a three and a half year old girl! Even the police were surprised..)

    Digital Desk: देश की आर्थिक राजधानी मुम्बई के मालाड़ इलाके में एक मासूम के साथ यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया है। इस मामले में मालाड़ पश्चिम की बांगूरनगर पुलिस एक ऐसे शैतान की तलाश कर रही है, जिसको पकड़ना मुश्किल साबित हो सकता है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता और पोक्सो कानून के तहत मामला तो दर्ज किया। लेकिन अभी तक घटना स्थल के सीसीटीवी कैमरों से सुराग नहीं मिला। शैतान पर आरोप है कि उसने एक मालाड़ के एक स्कूल में एक बच्ची का यौन उत्पीड़न किया है। बच्ची महज़ साढ़े तीन साल की है। (Mumbai: The devil did cruelty to a three and a half year old girl! Even the police were surprised..)

    बंगुर नगर पुलिस ने स्कूल के अंदर और बाहर लगे हर सीसीटीवी कैमरे की फुटेज की जांच की है, लेकिन ऐसी कोई घटना कैद नहीं हुई है। जब मां ने पीड़ित बच्ची से पूछा कि यह किसने किया, तो उसने कहा कि एक शैतान था, जिसने बच्ची के प्राइवेट पार्ट को छुआ। (Mumbai: The devil did cruelty to a three and a half year old girl! Even the police were surprised..)

    प्राइवेट पार्ट में दर्द की शिकायत

    पुलिस स्रोतों के मुताबिक, पीड़िता साढ़े तीन साल की है और वह मालाड़ पश्चिम के एक मशहूर इंटरनेशनल स्कूल में नर्सरी कक्षा की छात्रा है। बुधवार की शाम स्कूल से घर लौटने के बाद, उसने अपने प्राइवेट पार्ट में दर्द की शिकायत की, उसे जांच के लिए डॉक्टर के पास ले जाया गया। डॉक्टर ने बताया कि संक्रमण की वजह से दर्द हो रहा है, लेकिन जब घर आकर पीड़िता की मां ने उससे पूछा तो उसने कहा कि एक ‘शैतान‘ ने उसके प्राइवेट पार्ट को छुआ था। (Mumbai: The devil did cruelty to a three and a half year old girl! Even the police were surprised..)

    एक स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर ने भी इस शिकायत की जांच की और उन्होंने भी ऐसे ही संकेत दिए। इसके बाद, डॉक्टर ने इस मामले की जानकारी बंगुर नगर पुलिस को दी। (Mumbai: The devil did cruelty to a three and a half year old girl! Even the police were surprised..)

    शैतान ने छुआ

    एक अधिकारी ने कहा, “हमने पीड़िता की मां की शिकायत के आधार पर संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश के अनुसार, एक पुलिस टीम ने स्कूल का दौरा किया। सीसीटीवी फुटेज को पूरी तरह से जांचा, लेकिन कोई संदिग्ध गतिविधि नहीं मिली।” (Mumbai: The devil did cruelty to a three and a half year old girl! Even the police were surprised..)

    पुलिस ने बताया, कि सीसीटीवी कैमरे मे “बच्ची को एक महिला देखभालकर्ता के साथ बाथरूम जाते हुए देखा गया और बाद में लगभग 7 से 8 अन्य बच्चों के साथ लौटते हुए देखा गया। हमने फिर देखरेख करने वाले और कुछ अन्य कर्मचारियों को लड़की के सामने पेश किया और पूछा कि क्या उनमें से किसी ने कुछ किया है। हालांकि, लड़की ने इनकार किया और फिर थोड़ा पूछने पर कहा कि एक “राक्षस” ने उसके निजी अंगों को छुआ।” (Mumbai: The devil did cruelty to a three and a half year old girl! Even the police were surprised..)

    निजी अंगों में हुआ संक्रमण

    बच्ची को कूपर अस्पताल में चिकित्सा जांच के लिए ले जाया गया। डॉक्टर की राय के अनुसार अब तक, निजी अंगों पर दाने शायद एक संबंधित संक्रमण के कारण थे और यह दवा लेने के बाद कम हो गए। लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए, हम इसे हर संभव तरीके से जांच कर रहे हैं। बच्ची के कपड़े फोरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं। रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।” (Mumbai: The devil did cruelty to a three and a half year old girl! Even the police were surprised..)

    बांगुर नगर पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ निरीक्षक अनिल ठाकरे ने कहा, “हमने बीएनएस और पॉक्सो अधिनियम की संबंधित धारा के तहत मामला दर्ज किया है। आगे की जांच जारी है।” (Mumbai: The devil did cruelty to a three and a half year old girl! Even the police were surprised..)

  • अडानी ग्रुप कांदिवली में 1,000 बिस्तरों वाला अस्पताल बनाएगा

    अडानी ग्रुप कांदिवली में 1,000 बिस्तरों वाला अस्पताल बनाएगा

    गौतम अदाणी के नेतृत्व वाले बिज़ली सप्लायर समूह ने मुंबई और अहमदाबाद में दो एकीकृत स्वास्थ्य अस्पतालों के निर्माण के लिए ₹6,000 करोड़ का निवेश करने की योजना बनाई है, जिन्हें अदाणी हेल्थ सिटीज कहा जाएगा। (Adani Group will build a 1,000-bed hospital in Kandivali)

    मुंबई: अदाणी समूह ने सोमवार को घोषणा की कि वह अमेरिका स्थित मेडिकल सेंटर मेयो क्लिनिक के साथ साझेदारी में मुंबई और अहमदाबाद में 1,000 बिस्तरों वाले अस्पताल और मेडिकल कॉलेज का निर्माण करेगा। गौतम अडानी के नेतृत्व वाले पोर्ट-टू-एनर्जी समूह ने दो एकीकृत स्वास्थ्य परिसरों के निर्माण के लिए ₹6,000 करोड़ का निवेश करने की योजना बनाई है, जिन्हें अडानी हेल्थ सिटीज (Adani Health City) कहा जाएगा। (Adani Group will build a 1,000-bed hospital in Kandivali)

    कांदिवली स्थित मुंबई का सबसे बड़ा निजी अस्पताल होगा। वर्तमान में, अंधेरी पश्चिम में कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल और मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट 750 बिस्तरों की क्षमता के साथ मुंबई की सबसे बड़ी चिकित्सा सुविधा है। अंधेरी पूर्व में नागरिक स्वामित्व वाले सेवनहिल्स अस्पताल में 1,500 बिस्तरों तक विस्तार करने की क्षमता है, लेकिन राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण में चल रहे विवाद के कारण वर्तमान में यह केवल 400 बिस्तरों का संचालन करता है। (Adani Group will build a 1,000-bed hospital in Kandivali)

    देश भर में सस्ती चिकित्सक

    अदाणी समूह भारत भर के शहरों और कस्बों में ऐसे और अधिक परिसर बनाने की योजना बना रहा है। एक प्रेस बयान के अनुसार, वे सस्ती, विश्व स्तरीय चिकित्सा देखभाल और चिकित्सा शिक्षा प्रदान करेंगे। इस पहल को समूह की गैर-लाभकारी स्वास्थ्य सेवा शाखा के माध्यम से कार्यान्वित किया जाएगा। (Adani Group will build a 1,000-bed hospital in Kandivali)

    मेडिकल कॉलेज का निर्माण

    बयान में कहा गया है कि इनमें से प्रत्येक एकीकृत स्वास्थ्य परिसर में 1,000 बिस्तरों वाले बहु-सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल, 150 स्नातक, 80 से अधिक निवासियों और 40 से अधिक अध्येताओं के वार्षिक प्रवेश वाले मेडिकल कॉलेज, स्टेप-डाउन और संक्रमणकालीन देखभाल सुविधाएं और अत्याधुनिक अनुसंधान सुविधाएं शामिल होंगी। (Adani Group will build a 1,000-bed hospital in Kandivali)

  • उर्दू स्कूल में महिला टीचरों के साथ यौन उत्पीड़न, मायनोरेटी कमिशन के इंस्पेक्शन से खुली पोल, FIR दर्ज

    उर्दू स्कूल में महिला टीचरों के साथ यौन उत्पीड़न, मायनोरेटी कमिशन के इंस्पेक्शन से खुली पोल, FIR दर्ज

    महाराष्ट्र मायनोरेटी कमिशन के अध्यक्ष प्यारे जिया खान ने मंगलवार को पातुर स्थित एक सरकारी स्कूल का दौरा किया, जहां कुछ महिला टीचरों ने यौन उत्पीड़न के साथ सेलरी में कमिशन खाने पर शिकायत की थी। दौरा पूरा होते ही पुलिस ने किया मामला दर्ज। (Sexual harassment of female teachers in Urdu school, inspection of Minority Commission exposed, FIR registered)

    महाराष्ट्र: अकोला जिले में पुलिस ने एक सरकारी उर्दू माध्यम स्कूल के पदाधिकारियों के खिलाफ यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज किया है। कार्रवाई उस वक्त अंजाम दी गई, जब राज्य अल्पसंख्यक आयोग की टीम ने अचानक उस संस्थान का दौरा किया। शिकायत में कहा गया, कि प्रिंसीपल महिला टीचरों के साथ यौन उत्पीड़न के अलावा मार पीट भी किया करता था और सेलरी के पैसों में से 20 से 30 प्रतिशत पैसे कांट लिया करता था। (Sexual harassment of female teachers in Urdu school, inspection of Minority Commission exposed, FIR registered)

    सरकारी स्कूल का दौरा

    महाराष्ट्र अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे जिया खान ने मंगलवार को अकोला जिले के पातुर स्थित सरकारी स्कूल का दौरा किया, जहां कुछ महिला टीचरों ने शिकायत की थी कि उन्हें उत्पीड़न और धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। पीड़ित महिला टीचर्स ने आरोप लगाया कि स्कूल प्रबंधन ने उनसे उनके वेतन का 20-30 प्रतिशत जबरन वसूल लिया करता है। आयोग के अध्यक्ष प्यारे जिया खान ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया। उनके दौरे के फौरन बाद पातुर पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई। (Sexual harassment of female teachers in Urdu school, inspection of Minority Commission exposed, FIR registered)

    पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज

    इस मामले में चार आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 74 (महिला के साथ मारपीट या आपराधिक बल का प्रयोग, उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से), 75 (यौन उत्पीड़न), 296 (अश्लील कृत्य) और 308 (2) (जबरन वसूली) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। हालांकि अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। (Sexual harassment of female teachers in Urdu school, inspection of Minority Commission exposed, FIR registered)

    आयोग के अध्यक्ष ने क्या कहा?

    मीडिया से बात करते हुए आयोग के अध्यक्ष प्यारे जिया खान ने दावा किया कि उन्हें अपने औचक निरीक्षण के दौरान कक्षाओं में न तो बच्चे मिले और ना ही टीचर्स मिले। एक ही परिसर में दो स्कूल अवैध रूप से चलाए जा रहे हैं और महिलाओं के साथ उत्पीड़न की घटनाएं हुई हैं। प्यारे जिया खान ने कहा कि सरकार फंड तो देती है, लेकिन योजनाओं के सही तरीके से क्रियान्वयन न होने के कारण राज्य में उर्दू स्कूलों की हालत खराब है। ऐसे में लापरवाही करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। (Sexual harassment of female teachers in Urdu school, inspection of Minority Commission exposed, FIR registered)

  • बम्बई में अब 10 रुपये में होगा MRI और CT Scan

    बम्बई में अब 10 रुपये में होगा MRI और CT Scan

    बम्बई में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से गुरु नानक खालसा कॉलेज माटुंगा में शुक्रवार को जरूरत मंद लोगो के लिए मात्र 10 रुपये में MRI, CT Scan, एक्स-रे सेंटर का उद्घाटन किया गया। (Now MRI and CT scan will be done for Rs 10 in Mumbai)

    न्यूज़ डेस्क
    बम्बई
    – माटुंगा गुरू नानक खालसा कॉलेज में शुक्रवार को चार साहिबजादे MRI और CT Scan Center का उद्घाटन किया गया। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रबंधन में कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि सिख समुदाय की प्रतिनिधि करने वाली संस्था शिरोमणि कमेटी जन कल्याण में बेहतरीन सेवाऐं प्रदान कर रही है। इसी सिलसिले में आज श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के चार पुत्रों को समर्पित एक एमआरआई और सीटी स्कैन केंद्र शुरू किया गया है। (Now MRI and CT scan will be done for Rs 10 in Mumbai)

    क्या क्या मिलेगी सुविधा ?

    उन्होंने कहा कि इस केंद्र पर आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को एमआरआई, सीटी स्कैन, एक्स-रे आदि चीजों की जांच सेवा मात्र 10 रुपये में की जायेगी। इसके अलावा गुरु नानक मिशन 1313 के नाम से संचालित फार्मेसी से बाजार दर से 25 प्रतिशत कम दर पर दवाइयां उपलब्ध कराई जायेंगी और मेडिकल रक्त परीक्षण भी 50 प्रतिशत सस्ती दरों पर किया जायेगा। (Now MRI and CT scan will be done for Rs 10 in Mumbai)

    सम्मान बढ़ेगा

    एडवोकेट धामी ने घोषणा करते हुए कहा कि ये सुविधायें मुंबई और इसके आसपास के इलाकों के गुरुद्वारा साहिबों के ग्रंथी सिंहों और अन्य कर्मचारियों को भी केवल 10 रुपये में प्रदान की जायेंगी। उन्होंने कहा कि इन कार्यों में महाराष्ट्र से शिरोमणि कमेटी के सदस्य मो. गुरिंदर सिंह बावा द्वारा विशेष एवं सराहनीय प्रयास किये गये हैं, जिससे सिख संगठन का सम्मान और बढ़ेगा। (Now MRI and CT scan will be done for Rs 10 in Mumbai)

    इस मौके पर श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह, एडवोकेट धामी, तख्त श्री केसगढ़ साहिब के जत्थेदार ज्ञानी सुल्तान सिंह, तख्त श्री हरिमंदर जी पटना साहिब के जत्थेदार ज्ञानी बलदेव सिंह, शिरोमणि कमेटी के सदस्य गुरिंदर सिंह बावा, अध्यक्ष, तख्त श्री पटना साहिब प्रबंधन समिति जगजोत सिंह, शिरोमणि कमेटी के ओएसडी सतबीर सिंह धामी, जसबीर सिंह धाम और अन्य हस्तियां मौजूद रहीं। (Now MRI and CT scan will be done for Rs 10 in Mumbai)