ऑनलाइन गेमिंग युवा पीढ़ी के सर चढ़ कर बोल रहा है। ऑनलाइन गेम खेलते हुए कई अंजाने बच्चे दोस्ती कर बैठते है। जबकि उन्हें पता भी नही होता सामने वाला किस मंशा में आप से दोस्ती बढ़ा रहा है?
महाराष्ट्र– ऑनलाइन गेम ‘फ्री फायर‘ के जरिए हुई दोस्ती को लेकर गढ़चिरौली पहुंच गया और अकेली नाबालिग लड़की के घर में घुसकर रात भर दुष्कर्म किया। यह चौंकाने वाली घटना 12 जनवरी को सामने आई। नागरिकों ने आरोपी को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। आरोपी की पहचान नासिक के मालेगाव का रहनेवाला 22 वर्षीय मोहम्मद सऊद राजू शमसुद्दीन अंसारी के रूप में हुई है।
क्या है मामला ?
गढ़चिरौली के अहेरी की रहने वाली 14 वर्षीय लड़की की मुलाकात ऑनलाइन गेम ‘फ्री फायर’ खेलते समय आरोपी लड़के के साथ हुई थी। इसके बाद दोनों में रोजाना चैटिंग होने लगी। इसके बाद वे फोन पर बात भी करने लगे। दोस्ती प्यार में बदल गई। इसका फायदा उठाकर आरोपी युवक 11 जनवरी को नासिक से अहेरी पहुंच गया। लड़की के माता-पिता उस समय काम के सिलसिले में शहर से बाहर गए हुए थे।
इस दौरान वह लड़की के घर पर रुका और उसके साथ दुष्कर्म किया। इस बीच सुबह जैसे ही कुछ लोगों को पता चला कि एक अज्ञात युवक पीड़िता के घर पर है, नागरिकों ने उसे लड़की के घर से पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। लड़की के बयान के आधार पर कानूनी धाराओं के साथ लैंगिक अपराधों से बालकों के संरक्षण अधिनियम की धारा 4, 6 के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसके साथ ही पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार भी कर लिया।
इस घटना ने अहेरी के माता-पिता को झकझोर कर रख दिया है। आरोपी मोहम्मद सऊद अंसारी को 13 जनवरी को अहेरी सत्र न्यायालय में पेश किया गया। इस समय न्यायालय ने उसे दो दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। पुलिस निरीक्षक स्वप्निल इज्जपवार ने बताया कि आगे की जांच जारी है।
सोशल मीडिया पर परिचितों के माध्यम से दुर्व्यवहार की घटनाएं अक्सर शहरी क्षेत्रों में देखने को मिलती हैं। हालांकि, गढ़चिरौली के ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसके फैलने की तस्वीर सामने आ रही है। अहेरी में हुई घटना ने माता-पिता को झकझोर कर रख दिया है। इससे पहले ऑनलाइन गेमिंग के जरिए वित्तीय धोखाधड़ी के मामले सामने आ चुके हैं। इस बीच, बुजुर्गों से बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी के ऐसे ही मामले सामने आए थे। लेकिन अब इस माध्यम से नाबालिग लड़कियों को प्यार के जाल में फंसाया जा रहा है। इनमें से कुछ ही मामले सुलझ पाते हैं, जबकि कई मामलों में अभिभावक सामाजिक प्रतिष्ठा के कारण शिकायत करने के लिए आगे भी नहीं आते। इसलिए प्रशासन ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने नाबालिग बच्चों को मोबाइल देते समय उन पर नजर रखें।

