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Schedule-I में शामिल संरक्षित काला हिरण खेत के घर में बंधा मिला; वरिष्ठ वन अधिकारियों की टीम ने की कार्रवाई
महाराष्ट्र/चालीसगांव: गौताला अभयारण्य क्षेत्र में वन्यजीव से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। Crime & Corruption Control Association (CCCA) को मिली गुप्त जानकारी के बाद वरिष्ठ वन अधिकारियों को सूचना दी गई। इसके बाद बनाई गई विशेष टीम ने कार्रवाई कर एक खेत स्थित घर से जिंदा नर काला हिरण बरामद किया। वन विभाग के मुताबिक, काला हिरण करीब दो साल का है।
CCCA के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिनेश गुप्ता ने बताया कि संगठन के पदाधिकारियों को जानकारी मिली थी कि शिवापुर निवासी और वन विभाग में वनमजदूर के तौर पर काम करने वाले सुभाष शिवाजी कुऱ्हाडे के खेत स्थित घर में काला हिरण बांधकर रखा गया था। जानकारी मिलते ही इसे वरिष्ठ वन अधिकारियों तक पहुंचाया गया।
इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में विशेष टीम ने संबंधित घर पर कार्रवाई हुई। टीम को वहां काला हिरण जिंदा और बंधा हुआ मिला। वन विभाग ने उसे अपने कब्जे में लेकर सुरक्षित कर लिया। वन अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि ये काला हिरण प्रजाति का 2 साल का नर है।
Crime & Corruption Control Association ने दी थी गुप्त जानकारी
इस मामले में CCCA की अहम भूमिका रही। संगठन के पदाधिकारियों को काला हिरण बांधकर रखे जाने की जानकारी मिली थी, जिसे उन्होंने सीधे वरिष्ठ वन अधिकारियों तक पहुंचाया। इसके बाद वन विभाग ने विशेष टीम बनाकर कार्रवाई की।
CCCA का कहना है कि वन अपराधों से जुड़ी जानकारी मिलने पर संगठन उसे संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाता है और कार्रवाई में सहयोग करता है।
वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत मामला
वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, इस मामले में Wild Life (Protection) Act, 1972 की धारा 9, 39(अ), 39(ब), 40(2) और 51 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
काला हिरण यानी Blackbuck (Antilope cervicapra) Schedule-I में शामिल संरक्षित वन्यजीव है। ऐसे वन्यजीव को अवैध तरीके से पकड़कर रखना या उसका कारोबार करना कानून के तहत अपराध है।
CCCA की ओर से मिली जानकारी में एक अन्य वन कर्मचारी की भूमिका पर भी संदेह जताया गया है। संगठन का दावा है कि संबंधित कर्मचारी ने काला हिरण खेत के घर में रखने के लिए कहा था और उसकी संभावित बिक्री की तैयारी की जा रही थी।
हालांकि, इस दावे की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इसकी जांच होना बाकी है। जांच में यह पता लगाना जरूरी होगा कि काला हिरण कहां से आया, उसे किसने पकड़ा, यहां तक कैसे पहुंचा और क्या उसे बेचने की कोशिश की जा रही थी।
15 दिनों में अंजन, चंदन और अब काला हिरण
CCCA के मुताबिक, पिछले करीब 15 दिनों में गौताला अभयारण्य क्षेत्र से जुड़े तीन गंभीर मामले सामने आए हैं। इनमें अंजन पेड़ों की कथित अवैध कटाई और तस्करी, चंदन तस्करी और अब जिंदा काला हिरण बरामदगी शामिल है।
CCCA का कहना है कि इन मामलों को देखते हुए वन अपराधों की पूरी कड़ी की जांच की जरूरत है। अगर किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका को लेकर संदेह है, तो उसे जांच और सबूतों के आधार पर साफ किया जाना चाहिए।
संभावित तस्करी रास्तों की भी जांच की मांग
CCCA के अनुसार, जानकारी जुटाने के दौरान कुछ ऐसे रास्तों की जानकारी सामने आई है, जिनका इस्तेमाल वन्यजीव या वन्यजीवों से जुड़ी सामग्री की अवैध आवाजाही के लिए किए जाने का शक है। इनमें चालीसगांव–धुले–नवापुर–गुजरात, चालीसगांव–मालेगांव–मुंबई और चालीसगांव–छत्रपति संभाजीनगर–अहिल्यानगर–मुंबई मार्ग शामिल हैं।
इन रास्तों से वास्तव में तस्करी हो रही है या नहीं, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
CCCA ने मांग की है कि जांच सिर्फ काला हिरण मिलने तक सीमित न रहे। काला हिरण कहां से आया, किसने उसे यहां पहुंचाया, संभावित खरीदार कौन था और इस मामले में और कौन लोग शामिल हैं, इसकी भी जांच की जाए।
CCCA ने कहा है कि भविष्य में भी वन्यजीव अपराधों से जुड़ी गोपनीय जानकारी मिलने पर उसे वरिष्ठ वन अधिकारियों तक पहुंचाकर कार्रवाई में सहयोग किया जाएगा।
बोईसर में महिला से ₹70 हजार की सोने की चेन झपटने के मामले में आरोपी गिरफ्तार। चेन और वारदात में इस्तेमाल स्कूटर बरामद, जांच जारी।
महाराष्ट्र/पालघर: बोईसर में महिला के गले से ₹70 हजार की सोने की चेन झपटकर फरार हुए आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। 18 जुलाई को हुई इस वारदात के करीब डेढ़ महीने बाद पुलिस ने नवी मुंबई से आरोपी राहुल सुरेश जखवाडीया को पकड़ा। पुलिस के अनुसार उसके पास से कथित तौर पर चोरी की गई सोने की चेन और वारदात में इस्तेमाल स्कूटर बरामद की गई है।
18 जुलाई की सुबह करीब 10:20 बजे डहाणू तालुका के पेठ इलाके में रहने वाली रोहिणी रोहिदास ठाकूर अपनी बहन आशा पंडित पाटील के साथ बोईसर के खैरापाड़ा स्थित इको ईडन सिटी परिसर के रास्ते पर ऑटो का इंतजार कर रही थीं। इसी दौरान लाल और काले रंग की स्कूटर पर आए एक अज्ञात व्यक्ति ने रोहिणी ठाकूर के गले से करीब ₹70 हजार कीमत की सोने की चेन कथित तौर पर जबरदस्ती खींच ली और फरार हो गया।
घटना के बाद रोहिणी ठाकूर की शिकायत पर बोईसर पुलिस थाने में अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। वारदात को गंभीरता से लेते हुए पुलिस टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आरोपी की पहचान के लिए तकनीकी विश्लेषण तथा गोपनीय जानकारी के आधार पर जांच आगे बढ़ाई।
जांच के दौरान पुलिस टीम नवी मुंबई तक पहुंची, जहां से राहुल सुरेश जखवाडीया को हिरासत में लिया गया। पुलिस के अनुसार पूछताछ के दौरान आरोपी ने इस वारदात में अपनी संलिप्तता स्वीकार की। इसके बाद पुलिस ने कथित तौर पर चोरी की गई सोने की चेन और वारदात में इस्तेमाल की गई स्कूटर बरामद कर ली।
इस मामले की जांच पुलिस अधीक्षक यतीश देशमुख के मार्गदर्शन में की गई। कार्रवाई में अपर पुलिस अधीक्षक विनायक नरळे, उपविभागीय पुलिस अधिकारी दिनेश बैसाने और बोईसर पुलिस निरीक्षक सुनील जाधव के नेतृत्व में सहायक पुलिस निरीक्षक सुनील साळुंखे, पुलिस उपनिरीक्षक ऋषिकेश मुठे और कमलाकर मुंडे शामिल रहे।
पुलिस टीम में पुलिस हवलदार विजय दुबळा, नीरज शुक्ला, सुनील मलावकर, योगेश गावित, गणेश वस्कोटी, मयूर पाटील, धीरज साळुंखे, देवेंद्र पाटील, मच्छिंद्र पाटील, शुभम सपकाळे, सचिन सोनवणे, रोहित पाटील और किरण वाघ के साथ साइबर शाखा के रामदास दुर्गेश्ट और मनोहर सांगवे ने भी कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
बोईसर में सोने के आभूषण से जुड़ा एक अलग मामला अगस्त में भी सामने आया था। आठवडा बाजार में एक 70 वर्षीय महिला के गले से करीब 28 ग्राम वजन की और लगभग ₹3 लाख कीमत की सोन्याची बोरमाळ चोरी होने के मामले में पुलिस ने रजाबाई मोहन हतागळे और रेणुका संजय हतागळे को गिरफ्तार किया था। इस मामले में पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी विश्लेषण और गोपनीय जानकारी के आधार पर जांच आगे बढ़ाई थी।
हालांकि, जुलाई की चेन स्नैचिंग और अगस्त के इस अलग चोरी के मामले के बीच किसी आपराधिक संबंध की पुष्टि नहीं है। दोनों घटनाओं को अलग-अलग है।
जुलाई की चेन स्नैचिंग के मामले में आरोपी की गिरफ्तारी और कथित चोरी के माल की बरामदगी के बाद पुलिस अब मामले से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच कर रही है। पुलिस की कार्रवाई में तकनीकी विश्लेषण और साइबर शाखा की भूमिका भी सामने आई है। मामले की आगे की जांच पुलिस उपनिरीक्षक कमलाकर मुंडे कर रहे हैं।
चाकण MIDC में चार SUVs से सड़क रोककर Reel शूट करने के मामले में 4 आरोपी गिरफ्तार हुए। Drone, Traffic Block और Police Action के बीच पूरा मामला जानें।
पुणे: चाकण MIDC इलाके में सोशल मीडिया Reel बनाने के लिए चार वाहनों से सड़क पर कथित खतरनाक स्टंट और Traffic Block करने के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। 3 सितंबर की शाम चार वाहनों को एक साथ सड़क पर चलाने, अचानक स्पीड कम करने और बीच सड़क पर रोककर वीडियो शूट करने के आरोप में चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इस दौरान Camera के साथ Drone का भी इस्तेमाल किया गया, जबकि सभी चार वाहनों को जब्त किए जाने की बात कही गई है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब चाकण के औद्योगिक क्षेत्र में पहले से ही Traffic Congestion कम करने के लिए प्रशासन अलग-अलग स्तर पर कदम उठा रहा है। 17 सितंबर को पुणे के जिलाधिकारी जितेंद्र डुडी ने चाकण में Traffic, सड़क, बढ़ते औद्योगिक वाहन आवागमन और अनधिकृत पार्किंग की समस्या के लिए विभिन्न विभागों को समन्वित Action Plan तैयार करने के निर्देश दिए। ऐसे में सार्वजनिक सड़क को Reel शूट के लिए रोकना इस पूरे Traffic Management challenge को और गंभीर बनाता है।
पुलिस के अनुसार, 3 सितंबर की शाम चाकण के Mahalunge MIDC क्षेत्र में Sant Tukaram Chowk से Mindewadi Road की दिशा में चार वाहन एक साथ चलाए गए। आरोप है कि वाहनों को एक-दूसरे के बेहद करीब और समानांतर चलाने के साथ कई बार तेज किया गया, धीमा किया गया और सड़क पर रोका गया।
इसके बाद Vasuli गांव में Pack Time Company के सामने वाहनों को सड़क के बीच में रोककर वीडियो शूट किया गया। पीछे से आने वाले वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई और Traffic Congestion की स्थिति बनी। वीडियो बनाने के लिए Camera और Drone का इस्तेमाल किया गया था।
पुलिस द्वारा जप्त गाड़ियों की तस्वीर
पुलिस ने जिन चार लोगों को आरोपी बनाया है, उनके नाम Ram Hiraman Raut, Sahil Barku Jambhale, Aditya Kailas Nikhade और Pranav Malak Pachpute हैं। ये सभी Khed तहसील के Bhamboli और Vasuli क्षेत्र से जुड़े बताए गए हैं।
मामले में चार वाहनों की पहचान की गई है। इनमें Toyota Fortuner क्रमांक MH 14 NN 0005, सफेद Mahindra Scorpio क्रमांक MH 14 EC 1658, सफेद Maruti Suzuki Swift क्रमांक MH 14 HW 4708 और सफेद Hyundai Creta क्रमांक MH 14 LL 2520 शामिल हैं।
पुलिस के अनुसार, इन वाहनों को इस तरह चलाया और रोका गया जिससे दूसरे वाहन सामान्य तरीके से आगे नहीं बढ़ सके। बाद में इन्हें सड़क के बीच में पार्क किए जाने का भी आरोप है।
किस धाराओं में मामला दर्ज हुआ?
मामले में Bharatiya Nyaya Sanhita की धारा 285, 281, 223 और 3(5) तथा Motor Vehicles Act की धारा 184 और 122 के तहत कार्रवाई की गई है।
इनमें सार्वजनिक रास्ते में खतरा या अवरोध पैदा करना, लापरवाही या खतरनाक तरीके से वाहन चलाना, सार्वजनिक अधिकारी के आदेश की अवहेलना और खतरनाक स्थिति में वाहन छोड़ने जैसे प्रावधान शामिल हैं। मामले का अंतिम कानूनी परिणाम जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
जांच में Police Inspector Anil Devre की भूमिका अहम रही है। वहीं मामले की शुरुआती FIR में Police Constable Sampat Maruti Mule की शिकायत के आधार पर कार्रवाई दर्ज की गई है। इस मामले में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी Shweta Khedkar ने सार्वजनिक सड़क पर Traffic रोककर Reel बनाने को लेकर कार्रवाई की पुष्टि की।
इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू Drone से वीडियो शूट करना भी है। पुलिस के अनुसार, 20 अगस्त को Pimpri-Chinchwad के Joint Commissioner of Police की ओर से Drone operations को लेकर जारी प्रतिबंधात्मक आदेश के बावजूद Drone का इस्तेमाल किया गया। इसलिए मामला केवल Traffic obstruction और dangerous driving तक सीमित नहीं है; जांच में Drone से जुड़े आदेश के उल्लंघन का पहलू भी शामिल है।
फिलहाल इस घटना में किसी व्यक्ति के घायल होने या संपत्ति के नुकसान की सूचना सामने नहीं आई है। हालांकि, सड़क पर कई वाहनों को एक साथ रोकने और दूसरे motorists की आवाजाही प्रभावित करने से road safety का जोखिम जरूर पैदा हुआ।
चाकण MIDC कोई सामान्य सड़क क्षेत्र नहीं है। यह बड़ा औद्योगिक इलाका है, जहां रोजाना बड़ी संख्या में कर्मचारी, निजी वाहन, दोपहिया और commercial vehicles आते-जाते हैं। इसी कारण यहां Traffic Congestion कम करना प्रशासन के लिए अलग से चुनौती बना हुआ है।
सितंबर की शुरुआत में जिलाधिकारी जितेंद्र डुडी ने औद्योगिक इकाइयों के shift timings में अंतर रखने की व्यवस्था शुरू कराई। कुछ कंपनियों में staggered shifts के बाद peak hours में Traffic में कुछ राहत की जानकारी सामने आई। लेकिन 16 सितंबर तक औद्योगिक क्षेत्र के बाहर स्थित कई कंपनियों में इन बदलावों के सीमित implementation के कारण समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई थी।
17 सितंबर को भी चाकण के लिए सड़क सुधार, प्रमुख junctions पर Traffic management, heavy vehicles के लिए alternative routes, organised parking और आधुनिक technology के इस्तेमाल को लेकर नया coordinated Action Plan तैयार करने के निर्देश दिए गए।
यानी जिस क्षेत्र में Traffic flow सुधारने के लिए प्रशासन को अलग से manpower, road management, parking और technology-based उपायों पर काम करना पड़ रहा है, उसी क्षेत्र में सार्वजनिक सड़क को Reel शूट के लिए रोकने की घटना सामने आई है।
Pune में इससे पहले भी सामने आया था ऐसा मामला
चाकण की घटना से कुछ दिन पहले 27 अगस्त को Pune-Bengaluru Highway के Bavdhan-Wakad stretch पर भी नए वाहन की Reel शूट करने के लिए Traffic प्रभावित करने का मामला सामने आया था। Sahyadri Mahindra showroom और Bhujbal Chowk के बीच वाहनों को रोककर शूट किए गए Video के बाद Bavdhan Police ने कार्रवाई की थी।
इस मामले में Somnath Ashok Kedari, दो Fortuner के drivers और SC Photography के Soham Chavan सहित चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था। Somnath Ashok Kedari और Ajay Sambhaji Yadav को हिरासत में लिया गया था तथा दो Toyota Fortuner जब्त की गई थीं।
इसके बाद 7 सितंबर को चाकण MIDC में एक अलग Fortuner को सड़क के बीच आड़े खड़ा कर Reel शूट करने का Video भी सामने आया। इस Video में दूसरे वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती दिखाई दी थी। यह घटना चार वाहनों वाले 3 सितंबर के मामले से अलग थी।
पुणे और Pimpri-Chinchwad में कुछ ही दिनों के भीतर सार्वजनिक सड़कों पर Social Media Video बनाने के लिए वाहनों को रोकने या Traffic प्रभावित करने के कई मामले सामने आए हैं। 3 सितंबर के चाकण मामले में पुलिस कार्रवाई आगे बढ़ चुकी है, जबकि 7 सितंबर को सामने आए अलग Fortuner Video ने भी public road पर Reel shooting को लेकर सवाल खड़े किए थे।
ऐसी घटनाओं में मुख्य सवाल यह है कि Social Media content तैयार करने के लिए public road का इस्तेमाल करते समय दूसरे motorists की सुरक्षा और Traffic movement को कितना प्रभावित किया गया। चाकण जैसे industrial corridor में थोड़े समय का road obstruction भी peak-hour traffic पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।
फिलहाल 3 सितंबर के मामले में तीन आरोपियों की गिरफ्तारी, चौथे आरोपी की तलाश और चारों वाहनों की जब्ती के बाद जांच जारी है। पुलिस की जांच में Video footage, वाहनों की भूमिका, road obstruction और Drone के इस्तेमाल से जुड़े पहलुओं को आगे देखा जा रहा है।
Crime & Corruption Control Association और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई में 61 लकड़ी की बल्लियां जब्त हुईं। तीन आरोपियों को तीन दिन की वन हिरासत मिली।
महाराष्ट्र/चालीसगांव: अवैध पेड़ कटाई और जंगल से लकड़ी निकालने के मामले में Crime & Corruption Control Association और वन विभाग ने संयुक्त कार्रवाई की है। कार्रवाई में सागौन और अंजन की कुल 61 लकड़ी की बल्लियां, एक ट्रैक्टर और ट्रॉली जब्त की गई। तीन आरोपियों को अदालत में पेश करने के बाद तीन दिन की वन हिरासत मिली है।
जानकारी के अनुसार, Crime & Corruption Control Association को संरक्षित वन क्षेत्र में जीवित पेड़ों की कथित अवैध कटाई की सूचना मिली थी। संगठन ने करीब पांच दिन तक जानकारी का सत्यापन और निगरानी करने के बाद वरिष्ठ वन अधिकारियों के साथ कार्रवाई की।
पकड़े गए आरोपियों की पहचान गोकुल आनंदा गोपाल, उम्र 40 वर्ष, अरविंद विजय जाधव, उम्र 20 वर्ष और निलेश एकनाथ राठोड, उम्र 25 वर्ष, सभी निवासी बोद्रा के रूप में हुई है।
कार्रवाई में 4 सागौन और 57 अंजन की बल्लियां जब्त की गईं। इसके अलावा ट्रैक्टर MH 19 CV 4603 और ट्रॉली MH 19 E 2685 भी जब्त की गई है।
हालांकि 61 बल्लियों का मतलब 61 कटे हुए पेड़ नहीं है। वास्तविक रूप से कितने जीवित पेड़ काटे गए, यह कटाई स्थल की जांच, पेड़ों के ठूंठ और जब्त लकड़ी के माप से स्पष्ट होगा।
मामले में भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 26(1)(f)(d), 41 और 42 तथा भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 303(2) के तहत कार्रवाई का उल्लेख किया गया है। लागू धाराओं की अंतिम स्थिति एफआईआर और आधिकारिक वन अपराध रिकॉर्ड से स्पष्ट होगी।
जांच का अगला फोकस लकड़ी की पूरी कड़ी पर
Crime & Corruption Control Association के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिनेश गुप्ता ने जांच को केवल तीन आरोपियों तक सीमित नहीं रखने की मांग की है। संगठन के अनुसार, अभयारण्य से काटी गई लकड़ी को गन्ना कटाई मजदूरों के मुकादमों को बेचने की जानकारी मिली है। इसलिए कथित खरीदारों, लकड़ी की बिक्री, भुगतान और परिवहन की कड़ी की जांच की मांग की गई है।
संगठन ने छह महीने के CDR और संबंधित मोबाइल संचार तथा WhatsApp बातचीत की कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच की मांग भी की है। साथ ही क्षेत्रीय स्तर के अधिकारियों या कर्मचारियों की संभावित भूमिका की जांच की बात कही गई है। फिलहाल किसी अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता स्वतंत्र रूप से सिद्ध तथ्य नहीं है।
अदालत में पेश किए जाने वाले दस्तावेजों की जांच पर भी जोर दिया गया है। संगठन का कहना है कि पिछले कुछ मामलों में अधूरे दस्तावेजों के कारण आरोपियों को कम अवधि की वन हिरासत के बाद जमानत मिल गई थी। इस मामले में जब्ती पंचनामा, लकड़ी का माप, कटाई स्थल, वाहन रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेज जांच के महत्वपूर्ण हिस्से होंगे।
गौताला-औट्रामघाट वन्यजीव अभयारण्य 260.61 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला संरक्षित वन क्षेत्र है। 2026 के अध्ययनों में यहां तेंदुए के आवास, वन क्षेत्र की कनेक्टिविटी और बाघों की संभावित वापसी से जुड़े पहलुओं को महत्वपूर्ण बताया गया है।
गौताला क्षेत्र में पहले भी बड़े पैमाने पर पेड़ कटाई का मामला सामने आ चुका है। 2021 में पटनेदेवी क्षेत्र में जांच के दौरान 479 चंदन के पेड़ों की कटाई और 593 अन्य पेड़ों को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई थी। उस मामले में तीन वन कर्मचारियों के निलंबन और विभागीय जांच का उल्लेख किया गया था।
हालांकि पुराने मामले को मौजूदा कार्रवाई से जोड़ने का कोई स्वतंत्र आधार सामने नहीं आया है।
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जब्त लकड़ी वास्तव में कितने जीवित पेड़ों से आई, कटाई का सटीक स्थान क्या था और लकड़ी कहां ले जाई जा रही थी। यदि जांच खरीदारों, भुगतान, वाहन और मोबाइल संपर्कों तक पहुंचती है, तो इससे अवैध पेड़ कटाई की पूरी श्रृंखला सामने आ सकती है। Crime & Corruption Control Association ने आगे की जांच पर नजर रखने की बात कही है।
कल्याण के आगरा रोड पर व्यापारी से 40 लाख रुपये की दिनदहाड़े लूट हुई। चार आरोपी बाइक से आए, हमला कर कैश बैग ले गए। CCTV से जांच जारी।
ठाणे: कल्याण के आगरा रोड पर मंगलवार को दिनदहाड़े करीब 40 लाख रुपये की नकदी लूटने की सनसनीखेज वारदात सामने आई है। बैंक में रकम जमा करने जा रहे 62 वर्षीय व्यापारी फारूख अख्तर को दो बाइकों पर आए चार आरोपियों ने निशाना बनाया। आरोपियों ने उनकी दोपहिया गाड़ी को लात मारकर गिराया, मारपीट की और नकदी से भरा बैग लेकर फरार हो गए।
यह वारदात आगरा रोड स्थित शू मॉल के सामने हुई और आसपास लगे CCTV कैमरों में कैद हो गई। घटना के बाद बाजारपेठ पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की है। पुलिस आरोपियों की पहचान और उनके भागने के रास्ते का पता लगाने के लिए CCTV फुटेज खंगाल रही है।
बैंक में जमा करने जा रहे थे नकदी
जानकारी के मुताबिक, फारूख अख्तर बिस्किट और सिगरेट का कारोबार करते हैं। वह अपने एक साथी के साथ वालधुनी इलाके से बैंक में नकदी जमा करने के लिए निकले थे। इसी दौरान आगरा रोड पर शू मॉल के सामने आरोपियों ने उनकी बाइक को निशाना बनाया।
दो बाइकों पर सवार चार लोगों ने व्यापारी की गाड़ी को लात मारी, जिससे वह सड़क पर गिर गए। इसके बाद आरोपियों ने उनके साथ मारपीट की और नकदी से भरा बैग लेकर मौके से फरार हो गए।
अपराध में इस्तेमाल की गई दोनों बाइकों को Suzuki Burgman और Splendor बताया गया है। दोनों वाहनों पर नंबर प्लेट नहीं होने की जानकारी भी सामने आई है।
CCTV में कैद हुई वारदात
लूट की पूरी घटना इलाके में लगे CCTV कैमरों में रिकॉर्ड हुई है। अब पुलिस इन फुटेज के जरिए आरोपियों के हुलिए, उनकी गतिविधियों और वारदात के बाद भागने के रास्ते की जानकारी जुटा रही है।
जांच का एक अहम हिस्सा आसपास लगे दूसरे CCTV कैमरों की फुटेज को जोड़ना भी है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि आरोपी वारदात के बाद किस दिशा में गए और क्या उन्होंने भागने के लिए पहले से कोई रास्ता तय किया था।
इस वारदात में सबसे अहम सवाल यह है कि आरोपियों को व्यापारी के पास बड़ी मात्रा में नकदी होने की जानकारी कैसे मिली।
फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि व्यापारी की पहले से रेकी की गई थी। हालांकि, बैंक में रकम जमा करने के लिए जाते समय व्यापारी को सीधे निशाना बनाए जाने के कारण पुलिस की जांच में यह पहलू महत्वपूर्ण हो सकता है। इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
चार पुलिस टीमें जांच में जुटीं
वारदात की सूचना मिलते ही बाजारपेठ पुलिस मौके पर पहुंची और पंचनामा किया। आरोपियों की तलाश के लिए चार पुलिस टीमें लगाई गई हैं। CCTV फुटेज और अन्य तकनीकी सुरागों के आधार पर आरोपियों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।
पुलिस की जांच में अब यह पता लगाना भी महत्वपूर्ण होगा कि बिना नंबर प्लेट वाली बाइकों का इस्तेमाल कहां से हुआ और आरोपी वारदात के बाद किस रास्ते से निकले।
कल्याण के व्यस्त आगरा रोड जैसे इलाके में दिनदहाड़े करीब 40 लाख रुपये की लूट ने व्यापारियों और स्थानीय नागरिकों की चिंता बढ़ा दी है। खासतौर पर बड़ी रकम लेकर बैंक जाने वाले कारोबारियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब गणेशोत्सव को देखते हुए कल्याण में पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने के लिए रूट मार्च भी किया था। ऐसे में व्यस्त कारोबारी इलाके में हुई इस वारदात के बाद पुलिस की जांच और सुरक्षा व्यवस्था पर भी लोगों की नजर रहेगी।
आरोपियों की गिरफ्तारी और रकम की बरामदगी का इंतजार
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार आरोपियों की गिरफ्तारी या करीब 40 लाख रुपये की नकदी बरामद होने की पुष्टि सामने नहीं आई है। पुलिस CCTV और अन्य सुरागों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
अब जांच में सबसे अहम सवाल यही हैं कि चारों आरोपी कौन हैं, उन्हें नकदी की जानकारी कैसे मिली, वारदात के बाद वे किस रास्ते से फरार हुए और क्या पूरी रकम बरामद हो पाती है। पुलिस की अगली कार्रवाई से इस मामले में और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
नलदुर्ग किले में राष्ट्रीय पहलवान अश्विनी पौळ ने तीन बच्चों के साथ छलांग लगाई। अश्विनी समेत दो बच्चों की मौत, FIR में ससुराल पर गंभीर आरोप।
मुंबई: महाराष्ट्र के धाराशिव जिले के नलदुर्ग किले में राष्ट्रीय स्तर की महिला पहलवान अश्विनी मनोहर पौळ ने अपने तीन छोटे बच्चों के साथ उपली बुर्ज से छलांग लगा दी। घटना में अश्विनी, उनके साढ़े पांच साल के बेटे अजिंक्य और ढाई साल की बेटी क्रांति की मौत हो गई। दूसरी बेटी वीरा गंभीर रूप से घायल है और उसका धाराशिव के सरकारी अस्पताल में इलाज चल रहा है। ताजा जानकारी के मुताबिक वह वेंटिलेटर पर है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
अश्विनी की मौत के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। उनके पिता ने पति और ससुराल पक्ष पर मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों के आधार पर चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
पुलिस जांच से जुड़े ताजा विवरण के मुताबिक अश्विनी 3 सितंबर को दोपहर करीब 1 बजकर 13 मिनट पर अपने तीनों बच्चों के साथ नलदुर्ग किले में दाखिल हुई थीं। प्रवेश रजिस्टर में उनकी एंट्री दर्ज होने की बात सामने आई है।
किले की फाइल तस्वीर
खबर के अनुसार, प्रवेश के समय उन्होंने पुरातत्व विभाग के कर्मचारी से कहा था कि उनके पति पीछे से आ रहे हैं। हालांकि, पति वास्तव में उनके पीछे किले में पहुंचे थे या नहीं, इसकी पुष्टि अभी जांच का हिस्सा है।
घटना के बाद पुलिस के सामने यह सवाल भी है कि किले में दाखिल होने के बाद अश्विनी और बच्चों के साथ क्या हुआ और बुर्ज तक पहुंचने के दौरान उनके साथ कौन मौजूद था।
जांच से जुड़े एक और विवरण ने मामले को और रहस्यमय बना दिया है। अश्विनी किले में केक और चॉकलेट लेकर पहुंची थीं। किले में खाने की चीजें ले जाने को लेकर कर्मचारियों ने आपत्ति की तो उन्होंने कथित तौर पर बच्चे का जन्मदिन होने की बात कही।
बाद की जांच में यह जानकारी सामने आने का दावा किया गया कि उनके तीनों बच्चों में से किसी का जन्मदिन उस दिन नहीं था। हालांकि इस जानकारी का घटना से क्या संबंध है, यह अभी स्पष्ट नहीं है और पुलिस इसकी जांच कर रही है।
अश्विनी के पिता की शिकायत के बाद सामने आई जानकारी में पति मनोहर पौळ, सास कालिंदा पौळ, ससुर अंकुश पौळ और पति की आत्या विमलाबाई के खिलाफ मामला दर्ज होने की बात कही गई है।
परिवार की ओर से आरोप लगाया गया है कि शादी के बाद अश्विनी को लगातार मानसिक और शारीरिक परेशानी दी जा रही थी। शिकायत में सोने की पाटली और ऑटो रिक्शा खरीदने के लिए पैसे लाने के दबाव जैसे आरोप भी बताए गए हैं। परिवार का दावा है कि इसी तरह के घरेलू तनाव के बीच अश्विनी पिछले कुछ समय से अपने मायके में रह रही थीं।
इन आरोपों पर पुलिस की जांच जारी है। लेकिन घटना के पीछे के कारणों का पुलिस पता लगाने की कोशिश कर रही है।
अश्विनी पौळ की पहचान सिर्फ इस दर्दनाक घटना से नहीं थी। वह राष्ट्रीय स्तर की महिला पहलवान थीं और कुश्ती जगत में उन्हें ‘महाराष्ट्राची वाघीण’ यानी महाराष्ट्र की वाघिन के नाम से जाना जाता था।
उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में 5 स्वर्ण और 6 रजत पदक जीते थे। उनके परिवार का भी कुश्ती से जुड़ाव रहा है।
खेल के साथ अश्विनी महाराष्ट्र सुरक्षा बल में भी काम कर चुकी थीं। उन्होंने करीब चार से पांच महीने पहले नौकरी छोड़ दी थी। परिवार की ओर से दावा किया गया है कि उन्होंने पति के कहने पर नौकरी छोड़ी थी। इस दावे की भी जांच होनी बाकी है।
इस घटना के बाद सिर्फ पारिवारिक परिस्थितियों पर ही नहीं, बल्कि नलदुर्ग किले में पर्यटकों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।
नलदुर्ग महाराष्ट्र के प्रमुख ऐतिहासिक किलों में शामिल है। जिला प्रशासन के मुताबिक यह विशाल भुईकोट किला करीब ढाई किलोमीटर के घेरे में फैला है और इसमें उपली बुर्ज समेत कई बड़े बुर्ज हैं। उपली बुर्ज किले का सबसे ऊंचा हिस्सा बताया गया है।
इससे पहले मई 2024 में भी नलदुर्ग किले के उपली बुर्ज से एक 22 वर्षीय नवविवाहिता निलोफर की गिरने से मौत हुई थी। रिपोर्ट के मुताबिक वह तस्वीर लेते समय तेज हवा के कारण संतुलन खो बैठी थीं।
लगातार ऐसी घटनाओं के बाद अब यह सवाल अहम हो गया है कि किले के ऊंचे और जोखिम वाले हिस्सों में पर्यटकों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त निगरानी, चेतावनी और रोकथाम के इंतजाम हैं या नहीं।
नलदुर्ग किले पर पहले से चल रहा है संरक्षण का काम
नलदुर्ग सिर्फ पर्यटन स्थल ही नहीं, बल्कि महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर भी है। महाराष्ट्र पर्यटन विभाग के अनुसार किले में उपली, परांडा और संग्राम जैसे प्रमुख बुर्ज, ऐतिहासिक दरवाजे और प्रसिद्ध पानी महल मौजूद हैं।
फरवरी 2026 में महाराष्ट्र सरकार ने नलदुर्ग किले के संरक्षण और पुनरुद्धार के लिए 10.38 करोड़ रुपये मंजूर किए थे। पर्यटन सुविधाओं के विकास के लिए कुल 14.38 करोड़ रुपये की योजना का भी उल्लेख किया गया था।
अब ताजा घटना के बाद संरक्षण के साथ-साथ पर्यटक सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत का सवाल भी सामने आया है।
अश्विनी और उनके दो बच्चों की मौत के बाद पुलिस की जांच अब घटना के पूरे घटनाक्रम और उसके पीछे की परिस्थितियों पर केंद्रित है। प्रवेश रजिस्टर में दर्ज समय, पति के किले में आने की बात, परिवार की शिकायत और FIR में लगाए गए आरोपों को जांच में जोड़ा जा रहा है।
फिलहाल एक बच्ची वीरा की हालत गंभीर है। वहीं अश्विनी और उनके दो बच्चों का अंतिम संस्कार किया जा चुका है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि घटना से पहले क्या परिस्थितियां थीं और परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों का घटना से कोई संबंध है या नहीं।
Navi Mumbai के Kharghar में 3,404 original SIR voter forms private photocopy shop से मिले। 5 BLO सस्पेंड और BJP youth leader पर FIR दर्ज हुई।
मुंबई: Navi Mumbai के Kharghar में SIR यानी Special Intensive Revision को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। Sector 19 की एक private photocopy shop से 3,404 original भरे हुए SIR forms मिलने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया। जांच के बाद पांच Booth Level Officers (BLOs) को suspend कर दिया गया है, जबकि Suraj Patil के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।
मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि बरामद forms blank नहीं थे। अधिकारियों के मुताबिक इनमें voters की photographs, personal details और BLOs के official signatures जैसी जानकारी थी। ये forms 188-Panvel Assembly Constituency के 11 polling stations से जुड़े थे। इनमें पांच polling stations से 100 से ज्यादा forms मिले, जबकि बाकी छह से एक-एक form मिलने की जानकारी है।
27 अगस्त को SIR forms की photocopy किए जाने की शिकायत के बाद Election Department के अधिकारी Kharghar Sector 19 पहुंचे। वहां Suraj Patil के पास बड़ी संख्या में completed SIR forms मिले। अधिकारियों ने documents verify किए तो वे genuine और original पाए गए।
बरामद forms को Election Commission के logo वाले bags में रखा गया था। इन्हें पांच bags में pack कर seal किया गया और police के हवाले किया गया। बड़ी संख्या में forms होने के कारण उनकी गिनती electoral-roll part numbers के हिसाब से record की गई।
यहीं से इस मामले की जांच का सबसे अहम हिस्सा शुरू होता है—official custody में रहने वाले हजारों original voter forms private photocopy centre तक पहुंचे कैसे?
पांच BLO सस्पेंड, जांच शुरू
Raigad Collector Kishan Jawale के मुताबिक forms की verification के बाद पाया गया कि ये संबंधित BLOs की जिम्मेदारी में थे। इसी आधार पर पांच BLOs को suspend किया गया है और departmental inquiry शुरू की गई है।
मिली जानकारी के मुताबिक suspended BLOs में Sulochana Mane, Prashant Mhatre और Rahul Bhagat नाम के तीन private-company data-entry operators भी शामिल हैं। इनके अलावा दो अन्य BLOs पर भी action हुआ है।
खबर से संबंधित फाइल फोटो
इस मामले की जांच के लिए Panvel Deputy Municipal Commissioner Nanasaheb Kamathe और Assistant Electoral Registration Officer वाली two-member committee भी बनाई गई है।
Suraj Patil पर FIR, BJP ने किया किनारा
Suraj Patil को Shiv Sena (UBT) नेताओं ने BJP youth wing/BJYM से जुड़ा office-bearer बताया है। उनके पास forms मिलने के बाद उनके खिलाफ FIR दर्ज की गई। BJP ने इस मामले में अपने workers के involvement से इनकार किया है।
Police ने Patil को पूछताछ के लिए detain किया, notice दिया और legal procedure के तहत release किया। उनके खिलाफ BNS Section 314 और Representation of the People Act Section 128 के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले की जांच API Pradip Dwarka Navnath Avhad कर रहे हैं।
घटना के बाद Shiv Sena (UBT) ने SIR forms के private लोगों तक पहुंचने पर सवाल उठाए। UBT नेताओं ने आरोप लगाया कि BJP से जुड़े व्यक्ति के पास इतने forms मिलना गंभीर मामला है।
वहीं BJP नेता Nitin Patil ने party workers का इस मामले से कोई संबंध नहीं होने की बात कही। NCP (SP) MLA Rohit Pawar ने भी सिर्फ BLO suspension को पर्याप्त नहीं बताते हुए पूरे मामले की जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर action की मांग की है।
असली चिंता: voter के data का क्या होगा?
SIR form में voter की पहचान और electoral-roll verification से जुड़ी जानकारी होती है। Kharghar में मिले forms original और completed थे, इसलिए उनकी private photocopying ने voter information की handling और security को लेकर चिंता बढ़ाई है।
हालांकि अभी तक किसी voter के data के misuse होने की पुष्टि नहीं हुई है। जांच में यह पता चलना बाकी है कि कुल कितनी photocopies बनीं, क्या forms की digital copies भी तैयार हुईं और material private shop तक किसके जरिए पहुंचा।
Kharghar की घटना ऐसे समय सामने आई है जब Maharashtra में SIR की बड़ी exercise चल रही है। राज्य में करोड़ों voters के forms की verification और electoral-roll revision किया जा रहा है। इसी दौरान forms की custody और transparency को लेकर यह मामला अब चुनावी प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
Maharashtra CEO की official website पर SIR 2026 से जुड़ी voter services, FAQs, ASDD list और BLO-related information उपलब्ध है। Voter अपना electoral record official ECI portal पर भी verify कर सकते हैं। (ceoelection.maharashtra.gov.in)
Voters के लिए जरूरी बात
अगर आपने SIR form भरा है तो अपना नाम और electoral details official voter services पर जरूर check करें। किसी अनजान व्यक्ति को SIR के नाम पर OTP, banking details या अन्य sensitive information न दें। SIR के नाम पर cyber-fraud को लेकर Mumbai में भी लोगों को target किए जाने की reports सामने आ चुकी हैं।
फिलहाल Kharghar मामले में पांच BLO suspend हैं, एक व्यक्ति के खिलाफ FIR दर्ज है और departmental तथा police investigation जारी है। जांच अब यह साफ करेगी कि 3,404 original SIR forms private photocopy shop तक कैसे पहुंचे और उनकी photocopying के पीछे असल में क्या उद्देश्य था।
नाशिक के लासलगांव में तांबे के तार चोरी का आरोपी गिरफ्तार। पूछताछ में 12 वारदातों का खुलासा, कार समेत ₹4.51 लाख का माल जब्त हुआ। पुराने मामलों की जांच जारी है।
महाराष्ट्र/नाशिक: लासलगांव में तांबे के तार चोरी के मामले में पुलिस ने एक आरोपी को कार समेत गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, विट्ठलवाड़ी स्थित एक इलेक्ट्रिकल और हार्डवेयर दुकान का शटर तोड़कर करीब ₹3.43 लाख के तांबे के तार चोरी किए गए थे। चोरी के बाद आरोपी कार से माल लेकर निकल रहा था, लेकिन नाकेबंदी के दौरान पुलिस के हत्थे चढ़ गया।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान खुर्शीद अब्दुल हमीद खान के रूप में हुई है। पुलिस पूछताछ में नाशिक जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में हुई 12 चोरी और सेंधमारी की वारदातों का कनेक्शन सामने आने का दावा किया गया है। आरोपी के पास से तांबे के तार, कार और चोरी में इस्तेमाल होने वाले औजार समेत कुल ₹4,51,716 का माल जब्त किया गया है।
पुलिस के अनुसार, लासलगांव थाना क्षेत्र के विट्ठलवाड़ी गांव में ‘लोणजाईमाता इलेक्ट्रिकल वर्क्स एंड हार्डवेयर’ दुकान को चोरों ने निशाना बनाया था। दुकान से करीब ₹3,43,216 कीमत के तांबे के तार चोरी किए गए।
चोरी के बाद आरोपी खुर्शीद अब्दुल हमीद खान इन तारों को सेंट्रो कार से लेकर निकल रहा था। आरोपी मूल रूप से उत्तर प्रदेश का रहने वाला बताया गया है और फिलहाल इगतपुरी में रह रहा था। पुलिस रिकॉर्ड में कार का नंबर MH 03 AM 3467 बताया गया है।
नाकेबंदी के दौरान पुलिस ने पकड़ा
19 अगस्त की तड़के विंचूर तीन पाटी इलाके में पुलिस की नाकेबंदी चल रही थी। इसी दौरान पुलिस कर्मचारियों को एक संदिग्ध कार दिखाई दी। पुलिस ने कार को रोकने की कोशिश की और उसका पीछा किया।
पुलिस के मुताबिक, पीछा किए जाने के दौरान कार डिवाइडर से टकरा गई। इसके बाद पुलिस ने आरोपी को पकड़ लिया। कार की तलाशी लेने पर उसमें तांबे के तार, बोल्ट कटर और लोहे की छड़ मिली।
जब्त सामान में करीब ₹3.43 लाख के तांबे के तार और लगभग ₹1 लाख कीमत की कार शामिल है। पुलिस के अनुसार, सभी सामान की कुल कीमत ₹4,51,716 है।
पूछताछ में 12 चोरी की वारदातों का कनेक्शन
आरोपी से पूछताछ के बाद पुलिस को नाशिक जिले के अलग-अलग इलाकों में हुई 12 चोरी और सेंधमारी की वारदातों के बारे में जानकारी मिलने का दावा किया गया है।
इनमें लासलगांव, सायखेड़ा, पिंपलगांव बसवंत, डिंडोरी, सिन्नर, इगतपुरी, वडनेर भैरव, सटाणा और चांदवड़ समेत कई थाना क्षेत्र शामिल बताए गए हैं।
नाशिक पुलिस के साथ गिरफ्तार आरोपी की तस्वीर
पुलिस अब इन पुराने मामलों की FIR, चोरी हुए सामान और आरोपी के बयान का मिलान कर रही है। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि इन वारदातों में आरोपी की सीधी भूमिका कितनी थी और उसके साथ कोई और लोग शामिल थे या नहीं।
₹1 करोड़ से ज्यादा के पुराने मामलों की जांच
पूछताछ में सामने आए पुराने मामलों को जोड़ने पर करीब ₹1 करोड़ से ज्यादा के माल से जुड़े मामलों की जांच की बात सामने आई है।
हालांकि, यहां एक बात साफ है कि ₹1 करोड़ से ज्यादा की रकम अभी बरामद नहीं हुई है। यह पुराने मामलों में चोरी हुए माल और उससे जुड़े संभावित नुकसान की जांच का हिस्सा है। फिलहाल इस कार्रवाई में पुलिस ने ₹4,51,716 का माल जब्त किया है।
अब पुलिस पुराने मामलों में चोरी हुआ माल कहां गया, उसे किसे बेचा गया और इस पूरी कड़ी में और कौन लोग शामिल हैं, इसकी जानकारी जुटा रही है।
पुलिस को अब इन सवालों के जवाब तलाशने हैं
आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की जांच सिर्फ इस एक चोरी तक सीमित नहीं है। अब पुराने मामलों की कड़ी जोड़ने पर फोकस है।
पुलिस यह पता लगा रही है कि चोरी का सामान कहां बेचा जाता था, पुराने मामलों में भी इसी तरह के औजार या वाहन इस्तेमाल हुए थे या नहीं, आरोपी के साथ और कौन लोग थे और अलग-अलग जगहों से चोरी किया गया कितना माल बरामद किया जा सकता है।
अगर पूछताछ में दूसरे आरोपियों या चोरी का माल खरीदने वालों के बारे में ठोस 12जानकारी मिलती है, तो इस मामले में आगे और कार्रवाई हो सकती है।
देश के दूसरे हिस्सों में भी सामने आए तांबे की चोरी के मामले
तांबे के तार चोरी की घटनाएं सिर्फ नाशिक तक सीमित नहीं हैं। हाल के दिनों में देश के अलग-अलग हिस्सों से copper wire, बिजली के केबल और दूसरे electrical infrastructure को निशाना बनाने के मामले सामने आए हैं।
दिल्ली-एनसीआर में पुलिस ने एक interstate copper-wire theft gang को पकड़ा था। पुलिस के मुताबिक, इस गिरोह से 18 चोरी के मामलों का खुलासा हुआ था। आरोपियों पर पुलिस की नजर से बचने के लिए walkie-talkie और internet dongle का इस्तेमाल करने का भी आरोप लगा था।
राजस्थान में भी एक मामले में पुलिस ने बताया था कि आरोपी online search के जरिए बड़े solar plants की जानकारी जुटाकर उन्हें निशाना बनाते थे। इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था।
गाजियाबाद के ट्रोनिका सिटी में भी पुलिस ने copper और iron चोरी के मामले में आरोपियों को गिरफ्तार कर 35 किलो तांबे का तार बरामद किया था।
तांबे की चोरी से आम लोगों को क्या नुकसान?
तांबे के तार की चोरी का नुकसान सिर्फ दुकान या गोदाम के मालिक तक सीमित नहीं रहता। जब यही तार बिजली, रेलवे, टेलीकॉम या दूसरे infrastructure में लगा हो और उसे काटकर चोरी कर लिया जाए, तो उसका असर सीधे आम लोगों पर पड़ सकता है।
भोपाल में रेलवे signal cables की चोरी के बाद चार passenger trains में 30 से 60 मिनट तक की देरी की रिपोर्ट सामने आई थी। रेलवे infrastructure में इस तरह की चोरी से operation के साथ safety का सवाल भी खड़ा होता है।
मुंबई में भी MTNL की underground copper cables की चोरी का मामला सामने आया था। इस मामले में एक MTNL कर्मचारी पर कथित तौर पर cable locations की जानकारी चोरी करने वाले गिरोह तक पहुंचाने का आरोप लगा था।
इसी तरह खेतों में लगे solar panels और नलकूपों के तार चोरी होने पर किसानों को भी सीधा नुकसान उठाना पड़ता है। तार चोरी होने के बाद मोटर या solar system बंद हो सकता है और उसे दोबारा चालू कराने में अलग से खर्च करना पड़ता है।
लासलगांव मामले में अब आगे क्या?
लासलगांव पुलिस अब आरोपी से मिली जानकारी के आधार पर पुराने मामलों की जांच आगे बढ़ा रही है। 12 वारदातों में आरोपी की भूमिका, चोरी हुए सामान की बरामदगी और संभावित साथियों की पहचान इस जांच का अगला हिस्सा है।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक आरोपी को अदालत में पेश करने के बाद 21 अगस्त तक पुलिस हिरासत में भेजा गया था। अब आगे की कार्रवाई में पुलिस हिरासत की स्थिति, पुराने मामलों में बरामदगी और दूसरे आरोपियों की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी।
इस कार्रवाई में पुलिस अधीक्षक डॉ. डी. एस. स्वामी, अपर पुलिस अधीक्षक विमला एम. और उपविभागीय पुलिस अधिकारी के. के. पाटिल के मार्गदर्शन में टीम ने कार्रवाई की।
फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और पुराने 12 मामलों की कड़ी जुड़ने के बाद इस मामले में चोरी के माल की और बरामदगी या अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी सामने आ सकती है।
एक नजर में
घटना: विट्ठलवाड़ी, लासलगांव, नाशिक
चोरी: करीब ₹3,43,216 के तांबे के तार
गिरफ्तार आरोपी: खुर्शीद अब्दुल हमीद खान
बरामद सामान: तांबे के तार, सेंट्रो कार, बोल्ट कटर और लोहे की छड़
कुल जब्ती: ₹4,51,716
पुलिस पूछताछ में सामने आए मामले: 12 चोरी और सेंधमारी की वारदातें
जिन थाना क्षेत्रों का नाम सामने आया: लासलगांव, सायखेड़ा, पिंपलगांव बसवंत, डिंडोरी, सिन्नर, इगतपुरी, वडनेर भैरव, सटाणा और चांदवड़
पुराने मामलों में जांच: ₹1 करोड़ से ज्यादा के माल से जुड़े मामलों की जांच
वसई में 66 साल की महिला को CM Vijay Thalapathy के Deepfake Video से ₹12 लाख की ठगी का शिकार बनाया गया। जानिए पूरा मामला और Cyber Fraud से बचने का आसान रास्ता।
पालघर/ वसई: सोशल मीडिया पर दिखने वाला कोई Video कितना भी असली क्यों न लगे, अब उस पर आंख बंद करके भरोसा करना भारी पड़ सकता है। वसई में 66 साल की एक महिला को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय यानी Thalapathy Vijay के नाम और चेहरे से बनाए गए Fake AI Video के जरिए आर्थिक मदद का भरोसा दिलाया गया और करीब 12 लाख रुपये की ठगी कर ली गई।
पुलिस के मुताबिक, महिला ने Instagram पर एक Reel देखी थी, जिसमें विजय को कथित तौर पर गरीब और जरूरतमंद लोगों को Financial Assistance देने की बात करते दिखाया गया था। Reel में संपर्क करने के लिए एक Phone Number भी दिया गया था। महिला ने जब उस नंबर पर संपर्क किया तो उन्हें दूसरे नंबर पर बात करने के लिए कहा गया। इसके बाद शुरू हुआ पैसे ऐंठने का पूरा खेल।
मामला 27 जुलाई से शुरू हुआ। महिला की नजर Instagram पर एक ऐसी Reel पर पड़ी जिसमें विजय को लोगों को आर्थिक मदद देने की बात कहते हुए दिखाया गया था।
महिला ने Reel में दिए गए नंबर पर फोन किया। दूसरी तरफ मौजूद लोगों ने उनसे बातचीत शुरू की और उन्हें भरोसा दिलाया कि उन्हें आर्थिक मदद मिल सकती है।
महिला ने करीब 5 लाख रुपये की मदद मांगी। इसके बाद ठगों ने कहा कि मदद की रकम हासिल करने के लिए पहले 5 हजार रुपये Processing Fee जमा करनी होगी।
महिला ने यह रकम दे दी।
यहीं से ठगी का सिलसिला और आगे बढ़ गया।
₹5 हजार के बाद ₹77 लाख का नया झांसा
Processing Fee देने के बाद ठगों ने महिला को बताया कि उन्हें विदेश से करीब 77 लाख रुपये मिलने वाले हैं। इसके लिए Tax और दूसरे Charges के नाम पर लगातार पैसे जमा करने को कहा गया।
मदद की रकम मिलने की उम्मीद में महिला ठगों की बातों पर भरोसा करती रहीं और अलग-अलग समय पर पैसे भेजती रहीं।
पुलिस के मुताबिक, महिला ने एक Private Credit Society से Loan लिया, अपनी Jewellery गिरवी रखी और अपनी बेटी के Bank Account से भी पैसे निकाले। इसके बाद ठगों की ओर से बताए गए Bank Accounts में कुल करीब 12 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए गए।
पूरी रकम करीब 10 दिनों के दौरान भेजी गई।
12 लाख देने के बाद भी नहीं मिली मदद
महिला को जब वादा की गई Financial Assistance नहीं मिली और ठग लगातार पैसे मांगते रहे, तब उन्हें शक हुआ।
इसके बाद उन्हें समझ आया कि जिस Video को देखकर उन्होंने भरोसा किया था, वह असली नहीं बल्कि AI से बनाया गया Fake Video था।
मामले में वालिव Police Station में शिकायत दर्ज की गई है। पुलिस ने Bharatiya Nyaya Sanhita और Information Technology Act के तहत Cheating का मामला दर्ज किया है।
Police Inspector Gorakshnath Zaid ने मामले की पुष्टि की है। अब पुलिस उन लोगों का पता लगाने की कोशिश कर रही है जिन्होंने महिला से संपर्क किया और जिन Bank Accounts में रकम ट्रांसफर करवाई गई।
वसई का मामला अकेला नहीं है। हाल के महीनों में देश के अलग-अलग हिस्सों से Deepfake Video के जरिए Financial Fraud और Blackmail के मामले सामने आए हैं।
पुणे में 38 साल की एक महिला को Instagram पर उद्योगपति रतन टाटा का Deepfake Video दिखाया गया। इस Video में Share Trading से जुड़े निवेश और अच्छे Return का दावा किया गया था। महिला ने Advertisement पर क्लिक किया और बाद में एक App के जरिए कथित Investment Scheme में पैसे लगाए। पुलिस के अनुसार उन्हें करीब 4.09 लाख रुपये का नुकसान हुआ।
इसके अलावा वहीं, पुणे में ही 56 साल के एक Businessman को Finance Minister Nirmala Sitharaman के Deepfake Video के जरिए Investment के नाम पर फंसाया गया। इसके बाद Fake Forex Trading Platform, Fake Investment Advisor और SpaceX Shares के नाम पर करीब 1.07 करोड़ रुपये की ठगी की गई। Fake Platform पर कथित Profit बढ़ता हुआ दिखाया गया और पैसा निकालने के लिए आगे और रकम मांगी गई।
बेंगलुरु में एक Retired Professor को Facebook पर Nirmala Sitharaman का Deepfake Video दिखाया गया। इसके बाद उन्हें एक Fake Trading Platform, Telegram Chat और Overseas Calls के जरिए Investment के नाम पर फंसाया गया और 61 लाख रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ।
पटना में Deepfake का इस्तेमाल अलग तरीके से किया गया। एक Hotel Owner को उनके चेहरे से बनाए गए कथित अश्लील AI Videos के जरिए Blackmail किया गया और करीब 97 लाख रुपये की रकम वसूली गई। पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था और अंतिम 20 लाख रुपये की किस्त बरामद की गई।
इन मामलों से साफ है कि Deepfake का इस्तेमाल अब सिर्फ Fake News फैलाने के लिए नहीं बल्कि Investment Fraud, Financial Assistance Scam और Blackmail जैसे अपराधों में भी किया जा रहा है।
Video में नेता या Celebrity दिखे तो भी तुरंत भरोसा न करें
AI की मदद से किसी व्यक्ति का चेहरा और आवाज इस्तेमाल करके ऐसा Video तैयार किया जा सकता है जिसमें वह व्यक्ति ऐसी बात कहता हुआ दिखाई दे सकता है जो उसने वास्तव में कही ही नहीं।
इसलिए अगर किसी Social Media Video में कोई नेता, Celebrity, कारोबारी या सरकारी अधिकारी पैसे, Investment, नौकरी, Lottery या Financial Assistance का दावा करता दिखाई दे और साथ में कोई Mobile Number, WhatsApp Number, Website या Payment Request दी गई हो तो सीधे पैसे भेजना जोखिम भरा हो सकता है।
Indian Cyber Crime Coordination Centre यानी I4C के मुताबिक Financial Cyber Fraud की शिकायत National Helpline Number 1930 पर की जा सकती है। इसके बाद Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत की जानकारी पूरी करनी होती है।
शिकायत करते समय Transaction ID, Transaction Date, Bank या Payment App की जानकारी, UPI ID, Account Details, Phone Numbers, Chat और Screenshots जैसी जानकारी सुरक्षित रखना जरूरी है।
साथ ही अपने Bank या संबंधित Payment Service Provider को भी तुरंत Fraud Transaction की जानकारी देनी चाहिए।
I4C का Citizen Financial Cyber Fraud Reporting and Management System Financial Fraud की शिकायतों पर Banks और Payment Intermediaries के साथ कार्रवाई के लिए बनाया गया है।
साइबर फ्रॉड के खिलाफ सरकार की कार्रवाई भी तेज
सरकार के मुताबिक 30 जून 2026 तक CFCFRMS के जरिए 32.80 लाख से ज्यादा शिकायतों में 11,158 करोड़ रुपये से अधिक की रकम बचाई गई। इसी अवधि तक I4C ने 3,718 Mobile Apps को भी Block किया था। सरकार ने यह भी बताया कि Suspect Registry के जरिए संदिग्ध Identifiers और Mule Accounts की जानकारी Banks और Financial Institutions के साथ साझा की जा रही है।
अप्रैल 2026 से Money Restoration Module और Grievance Redressal Module भी काम कर रहे हैं, जिनका उद्देश्य Cyber Fraud में फंसी रकम की बहाली और Bank Accounts के Freeze या Lien से जुड़ी शिकायतों को तेजी से संभालना है।
Deepfake को लेकर नए नियम भी लागू
भारत सरकार ने 2026 में AI-generated और Deepfake Content से जुड़े नियमों को और मजबूत किया है। फरवरी 2026 में IT Rules में बदलाव करके Synthetically Generated Information यानी AI से तैयार सामग्री से होने वाले नुकसान को लेकर नया regulatory framework लाया गया। इसमें Deepfake और AI-generated content भी शामिल है।
सरकार ने Social Media Platforms के लिए AI-generated content की स्पष्ट पहचान और traceable information से जुड़ी व्यवस्था भी तय की है। Unlawful content की शिकायतों पर Platforms को तेजी से कार्रवाई करने की जिम्मेदारी दी गई है।
अब Social Media पर दिखने वाले Video को लेकर क्या सावधानी रखें?
किसी बड़े नेता या Celebrity का Video देखकर सिर्फ इसलिए भरोसा न करें क्योंकि उसमें चेहरा और आवाज बिल्कुल असली जैसी लग रही है।
अगर Video में Financial Assistance, Investment, नौकरी, Lottery या किसी दूसरी आर्थिक मदद का दावा है तो पहले Official Source से जानकारी Verify करें।
Video में दिए गए किसी अनजान Phone Number या Link पर तुरंत संपर्क न करें।
Processing Fee, Tax, Verification Charge या Withdrawal Charge के नाम पर पैसे मांगने पर रुक जाएं।
किसी अनजान Bank Account या UPI ID में Payment न करें।
और अगर गलती से पैसा भेज दिया है तो इंतजार करने के बजाय तुरंत 1930 पर शिकायत करें और Cyber Crime Portal पर मामला दर्ज करें।
वसई की 66 साल की महिला के साथ हुई यह घटना बताती है कि Social Media पर दिखने वाला भरोसेमंद चेहरा भी ठगी का जरिया बन सकता है। यहां 5 हजार रुपये की छोटी Payment से शुरू हुआ मामला करीब 12 लाख रुपये के नुकसान तक पहुंच गया।
इसलिए अगली बार किसी Video में कोई बड़ा नेता, Celebrity या सरकारी व्यक्ति आर्थिक मदद या Investment का दावा करता दिखाई दे तो Video देखकर फैसला लेने के बजाय पहले उसकी सच्चाई Verify करें। यही सावधानी आपके पैसे को ऐसे Deepfake Cyber Fraud से बचा सकती है।
मुंबई लोकल में महिलाओं की Gold Chain और Mangalsutra चोरी करने वाली पुणे की 65 वर्षीय अनघा जोशी गिरफ्तार, CCTV से खुला राज।
मुंबई: Local Train में महिलाओं के गले से Gold Chain और Mangalsutra चोरी करने वाली एक 65 साल की महिला को Railway Police ने गिरफ्तार किया है। आरोपी महिला का नाम अनघा जोशी है और वह पुणे की रहने वाली है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि अनघा जोशी चोरी करने के लिए पुणे से मुंबई आती थी और खास बात ये है कि वह हर दिन चोरी नहीं करती थी। उसका अपना एक अलग ‘Lucky Day’ था—शनिवार।
बताया जा रहा है कि वह महीने के पहले और तीसरे शनिवार को ही मुंबई आती और Local Train में महिलाओं को अपना Target बनाती थी।
पुलिस जांच के मुताबिक अनघा जोशी का मानना था कि शनिवार उसके लिए Lucky है। इसी वजह से वह महीने के पहले और तीसरे शनिवार को पुणे से मुंबई आती थी।
मुंबई पहुंचने के बाद वह Railway Station और Local Train की भीड़ में महिलाओं पर नजर रखती थी। खासकर ऐसी महिलाएं उसके निशाने पर होती थीं, जिनके गले में Gold Chain या Mangalsutra होता था।
भीड़ में धक्का-मुक्की के दौरान वह मौका देखकर Jewellery निकाल लेती और फिर पुणे वापस चली जाती थी।
दो चोरी की घटनाओं ने खोला पूरा राज
इस मामले में पुलिस को सबसे बड़ा सुराग दो अलग-अलग चोरी की घटनाओं के बाद मिला।
2 मई को दादर Railway Station पर Borivali Local पकड़ते समय एक 44 वर्षीय महिला Banker के गले से करीब 67 हजार रुपये की Gold Chain और Pendant चोरी हो गई।
इसके करीब एक महीने बाद 6 जून को दादर में ही Borivali Local में चढ़ते समय एक महिला Finance Executive के गले से करीब 89 हजार रुपये का Mangalsutra और Gold Chain चोरी हो गई।
दोनों मामलों में शिकायत मिलने के बाद Railway Police ने जांच शुरू की।
गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में अनघा जोशी ने कथित तौर पर बताया कि वह करीब 20 साल पहले भी कुछ समय तक Chain Snatching में शामिल रही थी।
पुलिस के मुताबिक मुंबई से चोरी किए गए Gold Jewellery को वह पुणे ले जाती थी और वहां कुछ ज्वैलर्स को बेच देती थी।
Police ने पुणे के कुछ ज्वैलर्स की दुकानों से चोरी के Jewellery भी बरामद किए हैं। अब जांच इस बात की भी की जा रही है कि अनघा ने पहले कितनी चोरी की वारदातों को अंजाम दिया था और इस पूरे काम में उसके साथ कोई और भी शामिल था या नहीं।
पुलिस जांच में अनघा जोशी की Family Background को लेकर भी जानकारी सामने आई है।
बताया गया है कि उनके बेटे की एक Accident में मौत हो गई थी, जबकि उनके पति की Alcohol Addiction के चलते मौत हुई थी। इसके बाद घर चलाने और रोजमर्रा के खर्च को लेकर आर्थिक परेशानियां बढ़ गईं।
पुलिस के अनुसार, इन्हीं परिस्थितियों के बाद उन्होंने कथित तौर पर चोरी का रास्ता अपनाया।
हालांकि आर्थिक परेशानी अपनी जगह है, लेकिन महिलाओं की Jewellery चोरी करने के आरोप में Railway Police ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है।
अब पुलिस को और कितनी वारदातों का पता चलेगा?
अनघा जोशी फिलहाल Judicial Custody में हैं। पुलिस अब उनके पुराने Record और Mumbai में हुई दूसरी Jewellery Theft की घटनाओं को भी खंगाल रही है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ‘पहले और तीसरे शनिवार’ वाला उनका Lucky Day वाला Pattern सिर्फ इन घटनाओं तक सीमित था या उन्होंने लंबे समय से इसी तरीके से Mumbai की Local Trains में कई महिलाओं को Target किया था?
Police Investigation पूरी होने के बाद इस मामले में और भी खुलासे होने की उम्मीद है।