Category: Maharashtra Crime

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  • Pune Bus Accident: चलती इलेक्ट्रिक बस के पहियों के नीचे आईं 79 वर्षीय महिला, मौत; चालक पर केस

    Pune Bus Accident: चलती इलेक्ट्रिक बस के पहियों के नीचे आईं 79 वर्षीय महिला, मौत; चालक पर केस

    Pune Hadapsar Bus Accident: कमलाबाई लोंढे की इलेक्ट्रिक बस के पिछले पहियों के नीचे आने से मौत। पुलिस ने चालक पर लापरवाही का मामला दर्ज किया।

    पुणे: हडपसर में 29 अक्टूबर को हुए इलेक्ट्रिक बस हादसे में 79 वर्षीय कमलाबाई दादू लोंढे की मौत हो गई। वह सासवड स्थित मंदिर में दर्शन के लिए जा रही थीं। पुलिस ने बस चालक के खिलाफ लापरवाही से मौत और खतरनाक तरीके से वाहन चलाने के आरोप में मामला दर्ज किया है। हादसे के बाद पुणे की सार्वजनिक बसों में यात्रियों, खासकर बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर फिर सवाल उठ रहे हैं।

    हडपसर में कैसे हुआ हादसा?

    यह घटना दोपहर करीब 12 बजे हडपसर इलाके में हुई। कमलाबाई दादू लोंढे भेकराई नगर डिपो से संचालित इलेक्ट्रिक बस में सवार होने की कोशिश कर रही थीं। यह बस हडपसर गाडीतल से सासवड की ओर जा रही थी।

    हडपसर पुलिस स्टेशन के उपनिरीक्षक राघवेंद्र सालगर के अनुसार, महिला ने चलती बस के पिछले दरवाजे से चढ़ने का प्रयास किया। इसी दौरान उनका संतुलन बिगड़ गया और उनके पैर बस के पिछले पहियों के नीचे आ गए।

    हादसे के बाद उन्हें नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    कमलाबाई सासवड में मंदिर दर्शन के लिए जा रही थीं। एक सामान्य धार्मिक यात्रा उनके परिवार के लिए दर्दनाक हादसे में बदल गई।

    चालक तुषार देविदास कामठे पर दर्ज हुआ मामला

    हडपसर पुलिस ने बस चालक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106(1) और 281 के साथ मोटर वाहन अधिनियम के संबंधित प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया है।

    धारा 106(1) लापरवाही के कारण किसी व्यक्ति की मौत होने से संबंधित है, जबकि धारा 281 सार्वजनिक रास्ते पर खतरनाक या लापरवाही से वाहन चलाने से जुड़ी है।

    प्रारंभिक स्थानीय जानकारी में बस चालक की पहचान तुषार देविदास कामठे के रूप में बताई गई थी। शुरुआती घटनाक्रम में उसे हिरासत में लिए जाने की जानकारी भी सामने आई थी। हालांकि, पुलिस उपनिरीक्षक राघवेंद्र सालगर के बाद के बयान के अनुसार, चालक की मेडिकल जांच कराई गई, जिसमें शराब सेवन की पुष्टि नहीं हुई। उसे जांच में उपस्थित होने के लिए नोटिस दिया गया है।

    महिला के बेटे सुरेंद्र लोंढे की शिकायत के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की है। मामले में चालक की जिम्मेदारी और दुर्घटना की परिस्थितियों की जांच जारी है।

    पुणे में पहले भी सामने आ चुका है चलती बस से जुड़ा जानलेवा हादसा

    हडपसर की घटना से पहले 24 अगस्त 2026 को पुणे के सिंहगढ़ रोड पर 25 वर्षीय छात्रा कंचन बलवंत खड्डा की बस दुर्घटना में मौत हुई थी।

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    कंचन डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड टेक्नोलॉजी (DIAT) की छात्रा थीं। वह चलती PMPML बस के सामने वाले दरवाजे से नीचे गिर गई थीं। इसके बाद वह एक स्कूल बस के पहियों के नीचे आ गईं और उनकी मौत हो गई।

    इस घटना के बाद पुणे महानगर परिवहन महामंडल लिमिटेड (PMPML) ने बसों के खुले दरवाजों के साथ चलने के खिलाफ विशेष अभियान शुरू किया था।

    PMPML ने बसों के दरवाजे बंद रखने के दिए थे निर्देश

    सितंबर 2026 में PMPML ने शहर में चलने वाली बसों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कार्रवाई शुरू की थी। परिवहन प्रशासन ने बस चलते समय सभी दरवाजे बंद रखने और डिपो से निकलने से पहले उनकी स्थिति जांचने के निर्देश दिए थे।

    ड्राइवर, कंडक्टर और डिपो मैनेजर को भी सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई थी।

    इसके बावजूद पुणे में बसों के खुले दरवाजों के साथ चलने की शिकायतें सामने आई थीं। ऐसे में हडपसर की नई घटना ने बस संचालन और यात्री सुरक्षा के इंतजामों पर दोबारा ध्यान खींचा है।

    हालांकि, फिलहाल ऐसा कोई प्रमाण सामने नहीं आया है जिससे यह कहा जा सके कि 29 अक्टूबर के हादसे में सितंबर के सुरक्षा निर्देशों का उल्लंघन हुआ था।

    बुजुर्ग यात्रियों के लिए बस में चढ़ने की व्यवस्था कितनी सुरक्षित?

    PMPML ने दिसंबर 2024 में वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों और गर्भवती महिलाओं को बस के सामने वाले दरवाजे से प्रवेश देने की व्यवस्था से संबंधित निर्देश जारी किए थे। इसका उद्देश्य पीछे के दरवाजे पर भीड़ के कारण होने वाली परेशानी कम करना था।

    इस व्यवस्था के संदर्भ में अब यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए निर्धारित बोर्डिंग सुविधा वर्तमान में कितनी प्रभावी है और क्या इसका पालन सभी संबंधित बस रूटों पर किया जा रहा है।

    बस के पूरी तरह रुकने के बाद ही यात्रियों को चढ़ने और उतरने देना तथा सभी यात्रियों के सुरक्षित होने के बाद वाहन आगे बढ़ाना सार्वजनिक परिवहन की बुनियादी सुरक्षा प्रक्रिया है।

    1 नवंबर से बुजुर्गों को PMPML टिकट पर 50% छूट

    इसी बीच PMPML ने 60 वर्ष और उससे अधिक उम्र के यात्रियों के लिए 1 नवंबर 2026 से नियमित बस टिकटों पर 50 प्रतिशत किराया छूट लागू की है।

    यह सुविधा पुणे, पिंपरी-चिंचवड़ और PMRDA क्षेत्र के सभी PMPML बस रूटों पर लागू है।

    छूट का लाभ लेने के लिए यात्री आधार कार्ड, PAN कार्ड या PMPML का वरिष्ठ नागरिक पहचान पत्र दिखा सकते हैं। आधार कार्ड पर पूरी जन्मतिथि दर्ज होना जरूरी है।

    पहले वरिष्ठ नागरिकों को 70 रुपये के दैनिक पास पर 35 रुपये में यात्रा की सुविधा मिलती थी। अब 50 प्रतिशत छूट सामान्य टिकटों पर भी लागू कर दी गई है।

    यह फैसला बुजुर्ग यात्रियों के लिए सार्वजनिक परिवहन को किफायती बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। लेकिन किराये में राहत के साथ उनकी सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है।

    अब जांच में इन सवालों के जवाब महत्वपूर्ण

    हडपसर हादसे में पुलिस की जांच के साथ PMPML की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी। संबंधित इलेक्ट्रिक बस का CCTV फुटेज, GPS रिकॉर्ड, ड्यूटी विवरण और दुर्घटना के समय बस की वास्तविक स्थिति जांच में मददगार हो सकती है।

    इसके अलावा यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि बस निर्धारित स्टॉप पर रुकी थी या नहीं और यात्रियों के चढ़ने से पहले वाहन आगे बढ़ा था या नहीं।

    फिलहाल पुलिस ने चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की है। दुर्घटना की पूरी परिस्थितियां और चालक की कानूनी जिम्मेदारी जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

  • दिंडोशी पुलिस की मालेगांव में बड़ी कार्रवाई, 1,150 मोबाइल मदरबोर्ड जब्त

    दिंडोशी पुलिस की मालेगांव में बड़ी कार्रवाई, 1,150 मोबाइल मदरबोर्ड जब्त

    मलाड पूर्व की दिंडोशी पुलिस ने मालेगांव के कबाड़ गोदाम से 1,150 मोबाइल मदरबोर्ड जब्त किए। इनकी कीमत ₹1.15 करोड़ बताई गई, एक आरोपी गिरफ्तार।

    मुंबई: मुंबई में मोबाइल चोरी के बाद उनके पार्ट्स निकालकर बेचने के कथित कारोबार का बड़ा खुलासा हुआ है। दिंडोशी पुलिस ने नासिक जिले के मालेगांव में एक कबाड़ गोदाम पर कार्रवाई कर 1,150 मोबाइल के मदरबोर्ड जब्त किए हैं। इनकी अनुमानित कीमत करीब 1.15 करोड़ रुपये बताई गई है। इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है।

    पुलिस की जांच मालाड पूर्व के पुष्पा पार्क में हुई दो मोबाइल की चोरी से शुरू हुई थी, लेकिन इसकी कड़ी मालेगांव तक पहुंच गई। अब पुलिस जब्त मदरबोर्ड की पहचान कर यह पता लगाने में जुटी है कि वे मुंबई और दूसरे इलाकों से चोरी हुए किन मोबाइल फोन के हैं और इस कथित कारोबार में और कौन-कौन शामिल है।

    मालाड के पुष्पा पार्क से शुरू हुई थी जांच

    इस मामले की शुरुआत 22 सितंबर 2026 को मालाड पूर्व के पुष्पा पार्क इलाके में हुई मोबाइल चोरी की शिकायत से हुई थी। यहां एक महिला के बैग से दो मोबाइल फोन चोरी हो गए थे। इसके बाद दिंडोशी पुलिस स्टेशन में अपराध क्रमांक 1073/2026 के तहत मामला दर्ज किया गया।

    चोरी की इस घटना की जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि मुंबई से चोरी किए गए मोबाइल फोन मालेगांव ले जाए जा रहे हैं। वहां मोबाइल खोलकर उनके अलग-अलग पार्ट्स निकाले जाते हैं और मदरबोर्ड को कबाड़ के रूप में बेचने का कारोबार किया जा रहा है।

    मालेगांव के कबाड़ गोदाम से मिले 1,150 मदरबोर्ड

    जांच के दौरान मिली जानकारी के आधार पर दिंडोशी पुलिस ने मालेगांव में एक कबाड़ गोदाम पर कार्रवाई की। तलाशी के दौरान वहां से 1,150 मोबाइल के मदरबोर्ड बरामद किए गए। इनकी कुल अनुमानित कीमत करीब 1.15 करोड़ रुपये बताई गई है।

    इस मामले में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस की कार्रवाई के बाद अब जब्त किए गए मदरबोर्ड के स्रोत और उनकी पहचान की जांच की जा रही है।

    चोरी के मोबाइल के पार्ट्स अलग करके बेचने का शक

    इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू चोरी के मोबाइल फोन को खोलकर उनके पार्ट्स अलग-अलग बेचने का कथित तरीका है। मोबाइल का पूरा हैंडसेट बेचने के बजाय उसके मदरबोर्ड और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स को अलग करके बेचने से चोरी के फोन की पहचान और बरामदगी की जांच जटिल हो सकती है।

    1,150 मदरबोर्ड किन मोबाइल फोन के हैं?

    पुलिस के सामने अब सबसे बड़ा सवाल जब्त मदरबोर्ड की पहचान करना है। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि ये मदरबोर्ड मुंबई में चोरी या गुम हुए मोबाइल फोन से जुड़े हैं या दूसरे इलाकों के मामलों से भी इनका संबंध है।

    जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि गोदाम तक ये मदरबोर्ड किस माध्यम से पहुंचे, उन्हें किसने खरीदा और आगे किन लोगों को बेचने की तैयारी थी। फिलहाल अबतक पूरे सप्लाई नेटवर्क या अन्य आरोपियों की संख्या की जांच नहीं हुई है।

    मोबाइल चोरी होने पर क्या करें?

    मोबाइल चोरी होने पर सबसे पहले नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करानी चाहिए। इसके बाद फोन का IMEI नंबर और जरूरी दस्तावेज तैयार रखकर केंद्र सरकार के CEIR पोर्टल पर मोबाइल ब्लॉक करने का अनुरोध किया जा सकता है।

    CEIR के जरिए चोरी या गुम हुए मोबाइल को भारतीय मोबाइल नेटवर्क पर ब्लॉक कराया जा सकता है। यदि ब्लॉक किया गया फोन किसी नेटवर्क पर दोबारा इस्तेमाल होता है, तो उसकी ट्रेसिंग में पुलिस को मदद मिल सकती है।

    आधिकारिक पोर्टल: https://www.ceir.gov.in/

    दिंडोशी पुलिस की इस कार्रवाई के बाद अब जांच का मुख्य फोकस जब्त किए गए 1,150 मदरबोर्ड की पहचान और उनके वास्तविक स्रोत का पता लगाना है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि बरामद पुर्जे किन मोबाइल चोरी के मामलों से जुड़े हैं और मालेगांव तक पहुंचने वाले इस कथित कारोबार में कितने लोग शामिल हैं।

  • गैस एजेंसी OTP घोटाला: अब शहर में नया मामला, ग्राहक सावधान!

    गैस एजेंसी OTP घोटाला: अब शहर में नया मामला, ग्राहक सावधान!

    वसई की अन्नपूर्णा गैस एजेंसी में OTP के कथित दुरुपयोग और फर्जी डिलीवरी की जांच। छह लोगों पर केस, स्टॉक और बुकिंग रिकॉर्ड की पड़ताल जारी।

    मुंबई: मुंबई से सटे पालघर जिले के वसई में गैस सिलेंडर की कथित हेराफेरी के मामले में अन्नपूर्णा गैस एजेंसी के मालिक, प्रबंधक और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) के बिक्री प्रबंधक समेत छह लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। ग्राहकों के OTP का कथित दुरुपयोग कर फर्जी डिलीवरी दिखाने और गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी किए जाने के आरोपों की जांच जारी है। मामले में एजेंसी के पिछले छह महीने के स्टॉक, बुकिंग और डिलीवरी रिकॉर्ड की पड़ताल की जा रही है।

    इस मामले का खुलासा तब हुआ, जब वसई न्यायालय के तीसरे संयुक्त दीवानी न्यायाधीश (कनिष्ठ स्तर) यश काने को बिना गैस सिलेंडर बुक किए ही बुकिंग का मैसेज मिला। इसके बाद उन्होंने आपूर्ति विभाग में शिकायत दर्ज कराई।

    बिना बुकिंग के आया गैस सिलेंडर का मैसेज

    28 सितंबर 2026 को न्यायाधीश यश काने के मोबाइल पर LPG सिलेंडर बुक होने का संदेश आया था, जबकि उन्होंने कोई बुकिंग नहीं की थी। इस संदिग्ध मैसेज के बाद उन्होंने वसई के आपूर्ति विभाग को इसकी जानकारी दी।

    शिकायत मिलने के बाद आपूर्ति निरीक्षक भागवत सोनार और जिला स्तरीय जांच दल ने वसई स्थित अन्नपूर्णा गैस एजेंसी पर छापा मारकर रिकॉर्ड की जांच शुरू की। जांच में ग्राहकों की बुकिंग और वास्तविक डिलीवरी के बीच संभावित गड़बड़ी की पड़ताल की जा रही है।

    एजेंसी के रिकॉर्ड में मिलीं अनियमितताएं

    जांच के दौरान एजेंसी में डिलीवरी कर्मचारियों की उपस्थिति पंजिका में उनके नामों का रिकॉर्ड नहीं मिला। वहीं, स्टॉक रजिस्टर में पेंसिल से प्रविष्टियां की गई थीं, जिन्हें बाद में बदले जाने की आशंका हो सकती है। दस्तावेजों के संबंध में पूछे जाने पर एजेंसी प्रबंधन की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं दिए जाने की जानकारी सामने आई है।

    इन अनियमितताओं के आधार पर जांच दल एजेंसी के कामकाज और गैस सिलेंडरों की आवक-जावक का मिलान कर रहा है। हालांकि, रिकॉर्ड में मिली गड़बड़ियों से अपने आप यह साबित नहीं होता कि सभी संबंधित लोगों ने अपराध किया है। मामले में आरोपों की पुष्टि जांच के निष्कर्षों और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगी।

    छह महीने के स्टॉक और डिलीवरी रिकॉर्ड की जांच

    आपूर्ति निरीक्षक भागवत सोनार के अनुसार, एजेंसी के पिछले छह महीने के रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। इसमें स्टॉक रजिस्टर, सिलेंडरों की आवक-जावक, ऑनलाइन और ऑफलाइन बुकिंग तथा ग्राहकों को की गई डिलीवरी का विवरण शामिल है।

    जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कितने मामलों में बुकिंग और डिलीवरी के रिकॉर्ड में अंतर था, कितने ग्राहक प्रभावित हुए और कथित कालाबाजारी किस स्तर तक हुई। फिलहाल प्रभावित ग्राहकों की कुल संख्या और कथित रूप से हेराफेरी किए गए सिलेंडरों की मात्रा स्पष्ट नहीं है।

    मामले में एजेंसी के मालिक, प्रबंधक और HPCL के बिक्री प्रबंधक समेत छह लोगों के खिलाफ वसई पुलिस थाने में केस दर्ज किया गया है। सभी आरोपियों के खिलाफ दर्ज धाराओं, गिरफ्तारी और पुलिस की आगे की कार्रवाई की जानकारी अभी प्राप्त होना बाकी है।

    ग्राहकों के OTP का दुरुपयोग कैसे हो सकता है?

    LPG डिलीवरी में डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (DAC) का इस्तेमाल ग्राहक तक सिलेंडर पहुंचने की पुष्टि के लिए किया जाता है। सामान्य प्रक्रिया में ग्राहक कोड डिलीवरी के समय साझा करता है। इस व्यवस्था का उद्देश्य डिलीवरी रिकॉर्ड को सत्यापित करना है।

    यदि किसी मामले में बिना वास्तविक डिलीवरी के रिकॉर्ड दर्ज किया गया हो या कोड का गलत इस्तेमाल हुआ हो, तो बुकिंग विवरण, कैश मेमो, DAC रिकॉर्ड और वास्तविक डिलीवरी के बीच मिलान जांच का अहम हिस्सा बन सकता है। हालांकि, वसई मामले में OTP हासिल करने या उसका कथित दुरुपयोग करने का सटीक तरीका अभी स्पष्ट नहीं है।

    ग्राहकों को क्या करना चाहिए?

    यदि आपने गैस सिलेंडर बुक नहीं किया है, लेकिन बुकिंग या डिलीवरी का मैसेज आया है, तो उसे नजरअंदाज न करें। मैसेज का स्क्रीनशॉट और समय सुरक्षित रखें तथा अपनी गैस एजेंसी और संबंधित कंपनी के आधिकारिक ग्राहक सहायता माध्यम से बुकिंग की स्थिति जांचें।

    बिना सिलेंडर मिले किसी को भी डिलीवरी OTP या DAC न बताएं। HP Gas के ग्राहक अपनी शिकायत के लिए आधिकारिक टोल-फ्री नंबर 1800-2333-555 पर संपर्क कर सकते हैं। यदि मामले में बैंक खाते से पैसे निकलने जैसी वित्तीय साइबर धोखाधड़ी भी हुई है, तो 1930 पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

    वसई के इस मामले में अब जांच के दौरान यह स्पष्ट होना बाकी है कि कितने ग्राहकों के रिकॉर्ड में गड़बड़ी मिली, कथित कालाबाजारी का वास्तविक पैमाना क्या था और संबंधित लोगों की भूमिका क्या रही। आपूर्ति विभाग की रिकॉर्ड जांच और पुलिस की कार्रवाई से इन सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है।

  • कोल्हापुर में तरन्नुम की मौत: प्रेमी गिरफ्तार, चैट हिस्ट्री से हत्या का शक गहराया

    कोल्हापुर में तरन्नुम की मौत: प्रेमी गिरफ्तार, चैट हिस्ट्री से हत्या का शक गहराया

    कोल्हापुर में 23 वर्षीय इंजीनियरिंग छात्रा तरन्नुम की मौत के मामले में प्रेमी गिरफ्तार। चैट हिस्ट्री, पोस्टमॉर्टम और पुलिस जांच में सामने आए अहम पहलू जानें।

    महाराष्ट्र: कोल्हापुर जिले में 23 वर्षीय इंजीनियरिंग छात्रा तरन्नुम की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले में उसके प्रेमी श्रीपाद वडार को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस को आरोपी के बयानों और मोबाइल चैट हिस्ट्री में ऐसे अंतर मिले, जिनके बाद मामले की जांच हत्या के एंगल से शुरू की गई। आरोपी ने कथित तौर पर दोनों के आत्महत्या करने का फैसला लेने की बात कही थी, लेकिन पुलिस को इस दावे पर संदेह हुआ।

    तरन्नुम का शव कोल्हापुर के भुदरगढ़ तालुका में नाईकवाडी जलप्रपात के नीचे गहरी खाई में मिला था। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) के तहत हत्या का आरोप जोड़ा गया है। आरोपी को 15 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।

    आरोपी के बयानों में क्या अंतर मिला?

    पुलिस के अनुसार, श्रीपाद वडार और तरन्नुम पिछले पांच साल से रिलेशनशिप में थे। तरन्नुम की शादी दूसरे युवक से तय होने के बाद दोनों के रिश्ते में तनाव आने की बात सामने आई है। उसकी शादी 12 नवंबर को होने वाली थी।

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    शुरुआत में आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि वह पानी लेने गया था और वापस लौटने पर तरन्नुम वहां नहीं मिली। बाद में उसने दावा किया कि तरन्नुम फोन पर बात करते समय खाई में गिर गई थी।

    इसके बाद आरोपी ने पुलिस को बताया कि दोनों ने साथ में आत्महत्या करने का फैसला किया था, लेकिन आखिरी समय में वह खुद ऐसा करने की हिम्मत नहीं जुटा पाया।

    हालांकि, पुलिस को उसके अलग-अलग बयानों पर संदेह हुआ। मोबाइल चैट हिस्ट्री की जांच में भी कथित आत्महत्या समझौते के दावे को समर्थन नहीं मिलने की बात सामने आई।

    सब-डिविजनल पुलिस ऑफिसर विवेक पाटील के मुताबिक, चैट में ऐसे संकेत मिले कि तरन्नुम की शादी कहीं और तय होने से श्रीपाद नाराज था। इसी आधार पर पुलिस ने मामले में हत्या की धारा जोड़ी। हालांकि, आरोपी के खिलाफ आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में होगी।

    नाईकवाडी जलप्रपात के पास मिला था शव

    यह घटना भुदरगढ़ तालुका के पाटगांव के पास नाईकवाडी जलप्रपात क्षेत्र की है। 9 अक्टूबर को हुई कथित घटना के बाद तरन्नुम का शव गहरी खाई में मिला।

    दुर्गम इलाके में शव तक पहुंचना आसान नहीं था। पुलिस ने आंबोली की सह्याद्री रेस्क्यू टीम की मदद ली। शव को खाई से निकालने के लिए करीब चार घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलने की जानकारी सामने आई। इसके बाद शव को कोल्हापुर के CPR अस्पताल भेजा गया।

    पोस्टमॉर्टम और मोबाइल की जांच अहम

    मामले में पोस्टमॉर्टम को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। परिजनों की मांग पर इन-कैमरा पोस्टमॉर्टम और वीडियो रिकॉर्डिंग किए जाने की जानकारी मिली है। हालांकि, पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया और उसकी अंतिम रिपोर्ट के निष्कर्ष अलग-अलग बातें हैं। अंतिम मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर ही मौत से संबंधित तथ्य सामने आ सकता है।

    पुलिस ने आरोपी और तरन्नुम के मोबाइल फोन जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए रखे हैं। चैट हिस्ट्री की जांच पहले ही पुलिस के संदेह का अहम आधार बनी है। अब डिजिटल साक्ष्यों, पूछताछ और अन्य उपलब्ध सबूतों को मिलाकर घटना की परिस्थितियों की जांच की जा रही है।

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    स्थानीय लोगों की मोर्चे की तस्वीर

    आरोपी पुलिस हिरासत में, स्थानीय लोगों ने की फास्ट-ट्रैक सुनवाई की मांग

    आरोपी श्रीपाद वडार को गिरफ्तार करने के बाद अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे 15 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। कोर्ट के अनुसर पुलिस हिरासत का उद्देश्य मामले से जुड़े तथ्यों की जांच करना है।

    इस घटना के बाद गारगोटी में स्थानीय लोगों ने पुलिस थाने तक मार्च निकालकर मामले की फास्ट-ट्रैक सुनवाई की मांग की।

    भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) हत्या के अपराध में सजा से संबंधित है। दोष सिद्ध होने पर कानून में मृत्युदंड या आजीवन कारावास और जुर्माने का प्रावधान है। फिलहाल मामला जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है।

    पुलिस के सामने अब आरोपी के बयानों, मोबाइल चैट, पोस्टमॉर्टम के निष्कर्षों और घटनास्थल से जुड़े सबूतों के आधार पर घटना की पूरी परिस्थितियां स्पष्ट करने की चुनौती है। मामले में आगे की कार्रवाई इन जांच निष्कर्षों और अदालत की प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।

  • नकली टँगो पंच और ढोकी संत्रा के भारी स्टॉक के साथ एक गिरफ्तार

    नकली टँगो पंच और ढोकी संत्रा के भारी स्टॉक के साथ एक गिरफ्तार

    नवी मुंबई के जुईनगर में राज्य उत्पादन शुल्क विभाग ने ट्रक से 600 बॉक्स नकली देशी मद्य जब्त किया। एक आरोपी गिरफ्तार, ₹44.10 लाख का मुद्देमाल जब्त।

    नवी मुंबई: जुईनगर में नकली देशी शराब की बड़ी खेप पकड़ी गई है। राज्य उत्पादन शुल्क विभाग की टीम ने सायन-पनवेल महामार्ग पर जुईनगर रेलवे स्टेशन के सामने कार्रवाई करते हुए 600 बॉक्स नकली देशी शराब से भरा दस पहिया ट्रक जब्त किया। कार्रवाई में एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। वाहन और जब्त मद्यसाठे की कुल अनुमानित कीमत 44 लाख 10 हजार रुपये बताई गई है।

    जुईनगर में गुप्त सूचना के बाद ट्रक पर नजर

    राज्य उत्पादन शुल्क विभाग के अनुसार, 3 अक्टूबर 2026 को अवैध नकली देशी शराब की ट्रांसपोर्ट होने की गुप्त सूचना मिली थी। इसके बाद जुईनगर रेलवे स्टेशन के सामने सायन-पनवेल महामार्ग पर करीब सुबह 11:30 बजे निगरानी रखी गई।

    इस दौरान लाल-सफेद रंग के अशोक लेलैंड के दस पहिया ट्रक क्रमांक MH-50-N-6625 को संदेह के आधार पर रोका गया। वाहन की तलाशी लेने पर उसके अंदर पुठ्ठे के बॉक्स मिले। बॉक्स खोलने पर सीलबंद बोतलों में नकली देशी शराब पाए जाने की जानकारी विभाग ने दी।

    600 बॉक्स में 90 मिलीलीटर की बोतलें

    जब्त किए गए 600 बॉक्स में 90 मिलीलीटर क्षमता वाली टँगो पंच और ढोकी संत्रा नाम की नकली देशी शराब की सीलबंद बोतलें थीं। हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक जानकारी में इन 600 बॉक्स में कुल कितनी बोतलें थीं या प्रत्येक बॉक्स में कितनी बोतलें थीं, इसका अलग से उल्लेख नहीं किया गया है।

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    अपराध क्रमांक 101/2026 में मामला दर्ज

    इस कार्रवाई के बाद अपराध क्रमांक 101/2026, दिनांक 3 अक्टूबर 2026 दर्ज किया गया। 600 बॉक्स नकली देशी शराब के साथ उसके ट्रांसपोर्ट में इस्तेमाल अशोक लेलैंड ट्रक भी जब्त किया गया।

    विभाग के अनुसार, वाहन और जब्त सामान समेत कुल संपत्ति की अनुमानित कीमत 44 लाख 10 हजार रुपये है। इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है।

    कार्रवाई में इन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका

    यह कार्रवाई आयुक्त डॉ. राजेश देशमुख, सहआयुक्त प्रसाद सुर्वे, कोकण विभाग के विभागीय उपआयुक्त प्रदिप पवार, ठाणे-1 के अधीक्षक प्रविण तांबे, उपअधीक्षक रत्नमाला गायकवाड, प्रभारी उपअधीक्षक आनंद पवार और निरीक्षक दिपक शेवाळे के मार्गदर्शन में की गई।

    गुप्त सूचना के आधार पर निगरानी और कार्रवाई का नेतृत्व जी-3 विभाग, नवी मुंबई के दुय्यम निरीक्षक पुंडलिक घुले ने की। उनके साथ जी-1 विभाग के दुय्यम निरीक्षक एस. एन. धोंडगे, जी-2 विभाग की दुय्यम निरीक्षक प्रज्ञा पवार, जी विभाग के सहायक दुय्यम निरीक्षक अमोल हिप्परकर तथा जवान संदिप पाटील, संभाजी चव्हाण, भगवान शेलार और महिला जवान-सह-वाहनचालक संध्या वारे कार्रवाई में शामिल थे।

    खेप कहां से आई और कहां जानी थी, जांच में सामने आएगा

    इस मामले में फिलहाल सबसे अहम सवाल यह है कि 600 बॉक्स नकली देशी शराब की यह खेप कहां से लाई गई थी और इसे कहां पहुंचाया जाना था। उपलब्ध जानकारी में इसके स्रोत और अंतिम गंतव्य का खुलासा नहीं किया गया है।

    जांच में यह भी पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि जब्त शराब का निर्माण कहां हुआ, इसे तैयार करने और पैक करने में कौन लोग शामिल थे तथा गिरफ्तार आरोपी की इस पूरी गतिविधि में क्या भूमिका थी।

    नकली शराब को लेकर स्वास्थ्य जोखिम भी गंभीर

    नकली या अज्ञात स्रोत के शराब में इस्तेमाल सामग्री और उसकी वास्तविक संरचना की पुष्टि किए बिना उसके सेवन को सुरक्षित नहीं माना जा सकता। महाराष्ट्र में हाल के महीनों में अवैध शराब से जुड़े गंभीर मामलों ने भी इसके सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम को सामने रखा है। हालांकि, जुईनगर में जब्त इस विशेष खेप में किसी जहरीले रसायन या मेथनॉल की मौजूदगी की जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए इस खेप को लेकर ऐसा कोई दावा करना उचित नहीं होगा।

    जांच पुंडलिक घुले के जिम्मे

    अपराध की आगे की जांच ठाणे-1 के अधीक्षक प्रविण तांबे के मार्गदर्शन में दुय्यम निरीक्षक पुंडलिक घुले कर रहे हैं। जांच के दौरान जब्त शराब की आपूर्ति, उसके स्रोत, संभावित गंतव्य और इस ट्रांसपोर्ट से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी सामने आने की संभावना है।

    फिलहाल इस कार्रवाई में 600 बॉक्स नकली देशी शराब, ट्रांसपोर्ट में इस्तेमाल दस पहिया ट्रक और एक गिरफ्तार आरोपी मुख्य कार्रवाई का हिस्सा हैं। मामले की आगे की जांच के बाद ही इस खेप के पीछे मौजूद पूरे नेटवर्क की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

  • किराए के मकान में चल रहा था देह व्यापार, नाबालिग सहित 4 महिलाएं मुक्त, 2 गिरफ्तार

    किराए के मकान में चल रहा था देह व्यापार, नाबालिग सहित 4 महिलाएं मुक्त, 2 गिरफ्तार

    किराए के मकान में कथित देह व्यापार का खुलासा, नाबालिग समेत चार महिलाएं मुक्त। प्रियंका केंद्रे और गोविंद केंद्रे गिरफ्तार, जांच जारी।

    महाराष्ट्र: मराठवाड़ा के लातूर से किराए के मकान में कथित देह व्यापार का मामला सामने आने के बाद मानव तस्करी विरोधी इकाई ने कार्रवाई करते हुए नाबालिग समेत चार महिलाओं को देहव्यापार के दलदल से मुक्त कराया है। मामले में प्रियंका बालासाहेब केंद्रे और गोविंद हनुमान केंद्रे को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, किराए के मकान का इस्तेमाल महिलाओं को बुलाकर ग्राहकों के लिए कथित देह व्यापार कराने में किया जा रहा था।

    मामले में एफआईआर क्रमांक 678/2026 दर्ज की गई है। पुलिस कार्रवाई 30 सितंबर 2026 को की गई थी। जांच में सामने आया है कि मुक्त कराई गई चार महिलाओं में एक 17 साल 9 महीने की नाबालिग लड़की भी शामिल है।

    किराए के मकान में चल रहा था कथित धंधा

    पुलिस के अनुसार, प्रियंका बालासाहेब केंद्रे ने मकान किराए पर लिया था। आरोप है कि वहां महिलाओं और लड़कियों को बुलाया जाता था और ग्राहकों को लाकर देह व्यापार कराया जाता था। गोविंद हनुमान केंद्रे पर इस गतिविधि में सहयोग करने का आरोप है। दोनों को मामले में गिरफ्तार किया गया है।

    मानव तस्करी विरोधी इकाई को मिली सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने परिसर में छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान चार महिलाएं मिलीं, जिन्हें वहां से मुक्त कराया गया। इनमें नाबालिग लड़की भी शामिल थी।

    नकद, मोबाइल और कंडोम के पैकेट जब्त

    छापेमारी के दौरान पुलिस ने 2,000 रुपये नकद, एक मोबाइल फोन और कंडोम के पैकेट समेत करीब 7,000 रुपये का सामान जब्त किया है।

    एफआईआर में मानव तस्करी और पॉक्सो की धाराएं

    मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 143, 144 और 3(5), पॉक्सो अधिनियम की धारा 16, 17 और 18 तथा अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम की धारा 3, 4, 5 और 6 के तहत कार्रवाई दर्ज की गई है।

    भारतीय न्याय संहिता की धारा 143 मानव तस्करी से संबंधित है, जबकि धारा 144 तस्करी किए गए व्यक्ति के शोषण से संबंधित प्रावधान है। पॉक्सो की धारा 16 उकसावे या सहायता, धारा 17 उसकी सजा और धारा 18 अपराध के प्रयास से संबंधित है।

    हालांकि, एफआईआर में दर्ज धाराएं आरोपों और जांच की कानूनी दिशा बताती हैं। इससे आरोप अदालत में सिद्ध हो जाना नहीं माना जा सकता।

    नाबालिग के मामले में विशेष कार्रवाई

    नाबालिग लड़की मिलने के बाद उसके मामले में पॉक्सो और किशोर न्याय कानून के तहत कार्रवाई की गई है। उसकी पहचान उजागर करने वाली कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

    मामले में किशोर न्याय अधिनियम की धारा 78 भी दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इस धारा की कानूनी व्याख्या अलग से करने के बजाय यहां एफआईआर में दर्ज प्रावधान के रूप में ही इसे देखा जाना उचित है, क्योंकि वास्तविक आरोपों और परिस्थितियों का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया में होगा।

    पुलिस खंगाल रही महिलाओं को वहां लाने का तरीका

    कार्रवाई के बाद जांच का अगला महत्वपूर्ण हिस्सा यह पता लगाना है कि महिलाओं को इस मकान तक कैसे लाया गया था। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस गतिविधि में गिरफ्तार दोनों आरोपियों के अलावा कोई और व्यक्ति शामिल था या नहीं।

    किराए के मकान का इस्तेमाल कितने समय से किया जा रहा था, महिलाओं से संपर्क किस माध्यम से किया गया और इस गतिविधि से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका क्या थी, इन पहलुओं पर भी जांच आगे बढ़ सकती है।

    पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले

    इस साल लातूर में मानव तस्करी विरोधी इकाई इससे पहले भी ऐसे मामलों में कार्रवाई कर चुकी है। जनवरी 2026 में आदर्श कॉलोनी के एक किराए के फ्लैट में कार्रवाई के दौरान चार महिलाओं को मुक्त कराया गया था। उस मामले में पुलिस ने सूचना की पुष्टि के लिए पहले बनावटी ग्राहक भेजने के बाद छापेमारी की थी।

    इससे पहले लातूर में लॉज और स्पा से जुड़े कथित देह व्यापार के मामलों में भी पुलिस कार्रवाई सामने आ चुकी है।

    आगे क्या होगा?

    मामले की जांच एमआईडीसी पुलिस निरीक्षक समाधान चौरे के नेतृत्व में की जा रही है। कार्रवाई पुलिस उपाधीक्षक डॉ. भागीरथी पवार के मार्गदर्शन में हुई, जबकि सहायक पुलिस निरीक्षक अजिनाथ पाटील और मानव तस्करी विरोधी इकाई की टीम ने छापेमारी में हिस्सा लिया।

    अब जांच में कथित नेटवर्क, महिलाओं को वहां लाने की प्रक्रिया, किराए के मकान के इस्तेमाल की अवधि और अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका सामने आने का इंतजार है। गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ दर्ज आरोपों पर आगे की कार्रवाई जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार होगी।

  • Bigg Boss Fame Divya Shinde पर डॉक्टर से 5 लाख मांगने और मारपीट का आरोप, केस दर्ज

    Bigg Boss Fame Divya Shinde पर डॉक्टर से 5 लाख मांगने और मारपीट का आरोप, केस दर्ज

    Bigg Boss Fame दिव्या शिंदे समेत कई लोगों पर पुणे में 65 वर्षीय डॉक्टर से 5 लाख रुपये मांगने और घर में घुसकर मारपीट का आरोप, पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की।

    पुणे: Bigg Boss मराठी फेम और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर दिव्या शिंदे समेत 8 से 10 लोगों के खिलाफ 65 वर्षीय सेवानिवृत्त डॉक्टर विद्याधर गायकवाड़ के घर में घुसकर मारपीट करने और 5 लाख रुपये मांगने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। काळेपडळ पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने घटनास्थल की सीसीटीवी फुटेज भी हासिल की है।

    यह मामला सिर्फ 24 सितंबर की रात हुए कथित हमले तक सीमित नहीं है। शिकायत के अनुसार, अगस्त से शुरू हुआ 5 लाख रुपये का विवाद 17 सितंबर को डॉक्टर के घर तक पहुंचा, 23 सितंबर को कथित धमकी दी गई और इसके अगले दिन डॉक्टर के घर में घुसकर मारपीट का आरोप लगाया गया।

    5 लाख रुपये की मांग को लेकर कैसे शुरू हुआ विवाद?

    डॉ. विद्याधर गायकवाड़ वर्ष 2021 में पुणे कैंटोनमेंट अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी पद से सेवानिवृत्त हुए थे। वह करुणादीप फाउंडेशन के सदस्य हैं। इसी संस्था की ओर से 1 से 3 सितंबर तक बालगंधर्व रंगमंदिर में ‘कला आविष्कार महोत्सव’ आयोजित किया गया था।

    शिकायत में आरोप है कि दिव्या शिंदे को इस कार्यक्रम के लिए संस्था या डॉ. गायकवाड़ की ओर से कोई आधिकारिक निमंत्रण नहीं दिया गया था। इसके बावजूद कार्यक्रम में शामिल होने और उसकी प्रसिद्धि में योगदान देने का दावा करते हुए अगस्त से 5 लाख रुपये की मांग किए जाने का आरोप है।

    इस विवाद में करीब 50 हजार रुपये गूगल पे के जरिए दिए जाने की बात भी सामने आई है। इसके बाद भी कथित तौर पर पूरी रकम की मांग जारी रही।

    17 सितंबर को डॉक्टर के घर पहुंचने का आरोप

    शिकायत के मुताबिक, 17 सितंबर को दिव्या शिंदे, अन्ना ढमढेरे और कुछ अन्य लोग डॉ. गायकवाड़ के मोहम्मदवाड़ी स्थित घर पहुंचे। उस समय डॉक्टर घर पर मौजूद नहीं थे। आरोप है कि उनके परिवार के सदस्यों से कथित तौर पर 5 लाख रुपये की मांग की गई और दबाव बनाया गया।

    डॉ. गायकवाड़ ने पुलिस शिकायत में कहा है कि कार्यक्रम संस्था ने आयोजित किया था और वह केवल उसके सदस्य थे। उनके अनुसार कार्यक्रम के वित्तीय लेन-देन की जिम्मेदारी उनके पास नहीं थी।

    23 सितंबर को होटल में बुलाकर धमकी का आरोप

    शिकायत के अनुसार, 23 सितंबर को अन्ना ढमढेरे ने डॉ. गायकवाड़ को फोन कर एक होटल में बुलाया। वहां कथित तौर पर फिर 5 लाख रुपये की मांग की गई।

    आरोप है कि रकम नहीं देने पर दो दिन के भीतर घर पर लोगों को भेजकर मारपीट करने की धमकी दी गई। इसके अगले ही दिन 24 सितंबर की रात डॉक्टर के घर पर हमला होने का आरोप है।

    24 सितंबर की रात घर में घुसकर मारपीट का आरोप

    शिकायत के मुताबिक, 24 सितंबर की रात करीब साढ़े आठ बजे डॉ. गायकवाड़ घर पर अकेले थे। आरोप है कि अन्ना ढमढेरे पहले वहां पहुंचे और दरवाजा खुलने के बाद दिव्या शिंदे समेत 8 से 10 लोग घर में दाखिल हुए।

    शिकायत में डॉक्टर के चेहरे, पेट और पीठ पर लात-घूंसों से मारपीट करने का आरोप लगाया गया है। इसके अलावा लकड़ी के डंडे, बेल्ट और लोहे के बर्तन से हमला करने तथा धारदार हथियार से सिर पर वार किए जाने की बात भी कही गई है। घर में सामान तोड़ने और डॉक्टर के परिवार को धमकाने का आरोप भी शिकायत में शामिल है।

    पुलिस के मुताबिक, डॉ. गायकवाड़ को गंभीर चोटों के बाद ससून जनरल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार चल रहा है।

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    बेटे और पत्नी को भी धमकी देने का आरोप

    शिकायत में आरोप है कि हमलावरों ने डॉक्टर के बेटे को भी धमकी दी। परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी दिए जाने की बात भी सामने आई है।

    आरोपियों पर घर में तोड़फोड़ करने और 5 लाख रुपये नहीं देने पर डॉक्टर की कार लेकर जाने का आरोप है। कार की बरामदगी को लेकर पुलिस जांच की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं हुई है।

    दिव्या शिंदे और अन्य पर कौन-कौन से आरोप?

    काळेपडळ पुलिस ने दिव्या शिंदे, अन्ना ढमढेरे समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इनमें हत्या के प्रयास, चोट पहुंचाने, आपराधिक धमकी, जबरन वसूली और घर में घुसकर हिंसा से जुड़े प्रावधान शामिल हैं।

    मामले की जांच सहायक पुलिस निरीक्षक अमित शेटे कर रहे हैं। पुलिस ने उस इमारत की सीसीटीवी फुटेज हासिल कर ली है, जहां कथित हमला हुआ था। अब जांच में फुटेज, डॉक्टर की मेडिकल रिपोर्ट और शिकायत में लगाए गए अन्य आरोपों की पुष्टि महत्वपूर्ण होगी।

    कौन हैं दिव्या शिंदे?

    दिव्या शिंदे ‘बिग बॉस मराठी सीजन 6’ में नजर आई थीं। सोशल मीडिया पर उन्हें ‘सरकार’ नाम से भी जाना जाता है और उनकी एक मिलियन से अधिक सोशल मीडिया फॉलोइंग होने की जानकारी सामने आई है। फरवरी 2026 में बिग बॉस मराठी से उन्हें बाहर किया गया था। उस समय भी साथी प्रतियोगियों को कथित धमकी देने से जुड़ा विवाद सामने आया था।

    अब पुलिस जांच में क्या महत्वपूर्ण होगा?

    फिलहाल मामले में सबसे अहम सवाल सीसीटीवी फुटेज, डॉक्टर की मेडिकल रिपोर्ट, कथित 50 हजार रुपये के भुगतान, फोन और संदेशों के रिकॉर्ड तथा डॉक्टर की कार से जुड़े घटनाक्रम की जांच है।

    साथ ही दिव्या शिंदे, अन्ना ढमढेरे और अन्य आरोपियों की भूमिका भी जांच का हिस्सा होगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है; आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच के बाद ही होगी।

  • Crime & Corruption Control Association की सूचना पर चालीसगांव में वन मजदूर के घर से काला हिरण जब्त

    Crime & Corruption Control Association की सूचना पर चालीसगांव में वन मजदूर के घर से काला हिरण जब्त

    Schedule-I में शामिल संरक्षित काला हिरण खेत के घर में बंधा मिला; वरिष्ठ वन अधिकारियों की टीम ने की कार्रवाई

    महाराष्ट्र/चालीसगांव: गौताला अभयारण्य क्षेत्र में वन्यजीव से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। Crime & Corruption Control Association (CCCA) को मिली गुप्त जानकारी के बाद वरिष्ठ वन अधिकारियों को सूचना दी गई। इसके बाद बनाई गई विशेष टीम ने कार्रवाई कर एक खेत स्थित घर से जिंदा नर काला हिरण बरामद किया। वन विभाग के मुताबिक, काला हिरण करीब दो साल का है।

    CCCA के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिनेश गुप्ता ने बताया कि संगठन के पदाधिकारियों को जानकारी मिली थी कि शिवापुर निवासी और वन विभाग में वनमजदूर के तौर पर काम करने वाले सुभाष शिवाजी कुऱ्हाडे के खेत स्थित घर में काला हिरण बांधकर रखा गया था। जानकारी मिलते ही इसे वरिष्ठ वन अधिकारियों तक पहुंचाया गया।

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    इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में विशेष टीम ने संबंधित घर पर कार्रवाई हुई। टीम को वहां काला हिरण जिंदा और बंधा हुआ मिला। वन विभाग ने उसे अपने कब्जे में लेकर सुरक्षित कर लिया। वन अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि ये काला हिरण प्रजाति का 2 साल का नर है।

    Crime & Corruption Control Association ने दी थी गुप्त जानकारी

    इस मामले में CCCA की अहम भूमिका रही। संगठन के पदाधिकारियों को काला हिरण बांधकर रखे जाने की जानकारी मिली थी, जिसे उन्होंने सीधे वरिष्ठ वन अधिकारियों तक पहुंचाया। इसके बाद वन विभाग ने विशेष टीम बनाकर कार्रवाई की।

    CCCA का कहना है कि वन अपराधों से जुड़ी जानकारी मिलने पर संगठन उसे संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाता है और कार्रवाई में सहयोग करता है।

    वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत मामला

    वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, इस मामले में Wild Life (Protection) Act, 1972 की धारा 9, 39(अ), 39(ब), 40(2) और 51 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

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    काला हिरण यानी Blackbuck (Antilope cervicapra) Schedule-I में शामिल संरक्षित वन्यजीव है। ऐसे वन्यजीव को अवैध तरीके से पकड़कर रखना या उसका कारोबार करना कानून के तहत अपराध है।

    काला हिरण कहां से आया, इसकी जांच जरूरी

    CCCA की ओर से मिली जानकारी में एक अन्य वन कर्मचारी की भूमिका पर भी संदेह जताया गया है। संगठन का दावा है कि संबंधित कर्मचारी ने काला हिरण खेत के घर में रखने के लिए कहा था और उसकी संभावित बिक्री की तैयारी की जा रही थी।

    हालांकि, इस दावे की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इसकी जांच होना बाकी है। जांच में यह पता लगाना जरूरी होगा कि काला हिरण कहां से आया, उसे किसने पकड़ा, यहां तक कैसे पहुंचा और क्या उसे बेचने की कोशिश की जा रही थी।

    15 दिनों में अंजन, चंदन और अब काला हिरण

    CCCA के मुताबिक, पिछले करीब 15 दिनों में गौताला अभयारण्य क्षेत्र से जुड़े तीन गंभीर मामले सामने आए हैं। इनमें अंजन पेड़ों की कथित अवैध कटाई और तस्करी, चंदन तस्करी और अब जिंदा काला हिरण बरामदगी शामिल है।

    CCCA का कहना है कि इन मामलों को देखते हुए वन अपराधों की पूरी कड़ी की जांच की जरूरत है। अगर किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका को लेकर संदेह है, तो उसे जांच और सबूतों के आधार पर साफ किया जाना चाहिए।

    संभावित तस्करी रास्तों की भी जांच की मांग

    CCCA के अनुसार, जानकारी जुटाने के दौरान कुछ ऐसे रास्तों की जानकारी सामने आई है, जिनका इस्तेमाल वन्यजीव या वन्यजीवों से जुड़ी सामग्री की अवैध आवाजाही के लिए किए जाने का शक है। इनमें चालीसगांव–धुले–नवापुर–गुजरात, चालीसगांव–मालेगांव–मुंबई और चालीसगांव–छत्रपति संभाजीनगर–अहिल्यानगर–मुंबई मार्ग शामिल हैं।

    इन रास्तों से वास्तव में तस्करी हो रही है या नहीं, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    CCCA ने पूरी कड़ी की जांच की मांग की

    CCCA ने मांग की है कि जांच सिर्फ काला हिरण मिलने तक सीमित न रहे। काला हिरण कहां से आया, किसने उसे यहां पहुंचाया, संभावित खरीदार कौन था और इस मामले में और कौन लोग शामिल हैं, इसकी भी जांच की जाए।

    CCCA ने कहा है कि भविष्य में भी वन्यजीव अपराधों से जुड़ी गोपनीय जानकारी मिलने पर उसे वरिष्ठ वन अधिकारियों तक पहुंचाकर कार्रवाई में सहयोग किया जाएगा।

  • बोईसर में ₹70 हजार की चेन स्नैचिंग का खुलासा, नवी मुंबई से आरोपी गिरफ्तार

    बोईसर में ₹70 हजार की चेन स्नैचिंग का खुलासा, नवी मुंबई से आरोपी गिरफ्तार

    बोईसर में महिला से ₹70 हजार की सोने की चेन झपटने के मामले में आरोपी गिरफ्तार। चेन और वारदात में इस्तेमाल स्कूटर बरामद, जांच जारी।

    महाराष्ट्र/पालघर: बोईसर में महिला के गले से ₹70 हजार की सोने की चेन झपटकर फरार हुए आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। 18 जुलाई को हुई इस वारदात के करीब डेढ़ महीने बाद पुलिस ने नवी मुंबई से आरोपी राहुल सुरेश जखवाडीया को पकड़ा। पुलिस के अनुसार उसके पास से कथित तौर पर चोरी की गई सोने की चेन और वारदात में इस्तेमाल स्कूटर बरामद की गई है।

    18 जुलाई की सुबह करीब 10:20 बजे डहाणू तालुका के पेठ इलाके में रहने वाली रोहिणी रोहिदास ठाकूर अपनी बहन आशा पंडित पाटील के साथ बोईसर के खैरापाड़ा स्थित इको ईडन सिटी परिसर के रास्ते पर ऑटो का इंतजार कर रही थीं। इसी दौरान लाल और काले रंग की स्कूटर पर आए एक अज्ञात व्यक्ति ने रोहिणी ठाकूर के गले से करीब ₹70 हजार कीमत की सोने की चेन कथित तौर पर जबरदस्ती खींच ली और फरार हो गया।

    घटना के बाद रोहिणी ठाकूर की शिकायत पर बोईसर पुलिस थाने में अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। वारदात को गंभीरता से लेते हुए पुलिस टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आरोपी की पहचान के लिए तकनीकी विश्लेषण तथा गोपनीय जानकारी के आधार पर जांच आगे बढ़ाई।

    जांच के दौरान पुलिस टीम नवी मुंबई तक पहुंची, जहां से राहुल सुरेश जखवाडीया को हिरासत में लिया गया। पुलिस के अनुसार पूछताछ के दौरान आरोपी ने इस वारदात में अपनी संलिप्तता स्वीकार की। इसके बाद पुलिस ने कथित तौर पर चोरी की गई सोने की चेन और वारदात में इस्तेमाल की गई स्कूटर बरामद कर ली।

    इस मामले की जांच पुलिस अधीक्षक यतीश देशमुख के मार्गदर्शन में की गई। कार्रवाई में अपर पुलिस अधीक्षक विनायक नरळे, उपविभागीय पुलिस अधिकारी दिनेश बैसाने और बोईसर पुलिस निरीक्षक सुनील जाधव के नेतृत्व में सहायक पुलिस निरीक्षक सुनील साळुंखे, पुलिस उपनिरीक्षक ऋषिकेश मुठे और कमलाकर मुंडे शामिल रहे।

    पुलिस टीम में पुलिस हवलदार विजय दुबळा, नीरज शुक्ला, सुनील मलावकर, योगेश गावित, गणेश वस्कोटी, मयूर पाटील, धीरज साळुंखे, देवेंद्र पाटील, मच्छिंद्र पाटील, शुभम सपकाळे, सचिन सोनवणे, रोहित पाटील और किरण वाघ के साथ साइबर शाखा के रामदास दुर्गेश्ट और मनोहर सांगवे ने भी कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    बोईसर में हाल में सामने आया एक और अलग मामला

    बोईसर में सोने के आभूषण से जुड़ा एक अलग मामला अगस्त में भी सामने आया था। आठवडा बाजार में एक 70 वर्षीय महिला के गले से करीब 28 ग्राम वजन की और लगभग ₹3 लाख कीमत की सोन्याची बोरमाळ चोरी होने के मामले में पुलिस ने रजाबाई मोहन हतागळे और रेणुका संजय हतागळे को गिरफ्तार किया था। इस मामले में पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी विश्लेषण और गोपनीय जानकारी के आधार पर जांच आगे बढ़ाई थी।

    हालांकि, जुलाई की चेन स्नैचिंग और अगस्त के इस अलग चोरी के मामले के बीच किसी आपराधिक संबंध की पुष्टि नहीं है। दोनों घटनाओं को अलग-अलग है।

    आगे की जांच जारी

    जुलाई की चेन स्नैचिंग के मामले में आरोपी की गिरफ्तारी और कथित चोरी के माल की बरामदगी के बाद पुलिस अब मामले से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच कर रही है। पुलिस की कार्रवाई में तकनीकी विश्लेषण और साइबर शाखा की भूमिका भी सामने आई है। मामले की आगे की जांच पुलिस उपनिरीक्षक कमलाकर मुंडे कर रहे हैं।

  • Chakan Reel Stunt: चार SUVs से सड़क Block, Drone से शूट; Traffic Crisis के बीच Police Action

    Chakan Reel Stunt: चार SUVs से सड़क Block, Drone से शूट; Traffic Crisis के बीच Police Action

    चाकण MIDC में चार SUVs से सड़क रोककर Reel शूट करने के मामले में 4 आरोपी गिरफ्तार हुए। Drone, Traffic Block और Police Action के बीच पूरा मामला जानें।

    पुणे: चाकण MIDC इलाके में सोशल मीडिया Reel बनाने के लिए चार वाहनों से सड़क पर कथित खतरनाक स्टंट और Traffic Block करने के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। 3 सितंबर की शाम चार वाहनों को एक साथ सड़क पर चलाने, अचानक स्पीड कम करने और बीच सड़क पर रोककर वीडियो शूट करने के आरोप में चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इस दौरान Camera के साथ Drone का भी इस्तेमाल किया गया, जबकि सभी चार वाहनों को जब्त किए जाने की बात कही गई है।

    यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब चाकण के औद्योगिक क्षेत्र में पहले से ही Traffic Congestion कम करने के लिए प्रशासन अलग-अलग स्तर पर कदम उठा रहा है। 17 सितंबर को पुणे के जिलाधिकारी जितेंद्र डुडी ने चाकण में Traffic, सड़क, बढ़ते औद्योगिक वाहन आवागमन और अनधिकृत पार्किंग की समस्या के लिए विभिन्न विभागों को समन्वित Action Plan तैयार करने के निर्देश दिए। ऐसे में सार्वजनिक सड़क को Reel शूट के लिए रोकना इस पूरे Traffic Management challenge को और गंभीर बनाता है।

    चाकण MIDC में 3 सितंबर को क्या हुआ?

    पुलिस के अनुसार, 3 सितंबर की शाम चाकण के Mahalunge MIDC क्षेत्र में Sant Tukaram Chowk से Mindewadi Road की दिशा में चार वाहन एक साथ चलाए गए। आरोप है कि वाहनों को एक-दूसरे के बेहद करीब और समानांतर चलाने के साथ कई बार तेज किया गया, धीमा किया गया और सड़क पर रोका गया।

    इसके बाद Vasuli गांव में Pack Time Company के सामने वाहनों को सड़क के बीच में रोककर वीडियो शूट किया गया। पीछे से आने वाले वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई और Traffic Congestion की स्थिति बनी। वीडियो बनाने के लिए Camera और Drone का इस्तेमाल किया गया था।

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    पुलिस द्वारा जप्त गाड़ियों की तस्वीर

    पुलिस ने जिन चार लोगों को आरोपी बनाया है, उनके नाम Ram Hiraman Raut, Sahil Barku Jambhale, Aditya Kailas Nikhade और Pranav Malak Pachpute हैं। ये सभी Khed तहसील के Bhamboli और Vasuli क्षेत्र से जुड़े बताए गए हैं।

    कौन-कौन सी गाड़ियों का इस्तेमाल हुआ?

    मामले में चार वाहनों की पहचान की गई है। इनमें Toyota Fortuner क्रमांक MH 14 NN 0005, सफेद Mahindra Scorpio क्रमांक MH 14 EC 1658, सफेद Maruti Suzuki Swift क्रमांक MH 14 HW 4708 और सफेद Hyundai Creta क्रमांक MH 14 LL 2520 शामिल हैं।

    पुलिस के अनुसार, इन वाहनों को इस तरह चलाया और रोका गया जिससे दूसरे वाहन सामान्य तरीके से आगे नहीं बढ़ सके। बाद में इन्हें सड़क के बीच में पार्क किए जाने का भी आरोप है।

    किस धाराओं में मामला दर्ज हुआ?

    मामले में Bharatiya Nyaya Sanhita की धारा 285, 281, 223 और 3(5) तथा Motor Vehicles Act की धारा 184 और 122 के तहत कार्रवाई की गई है।

    इनमें सार्वजनिक रास्ते में खतरा या अवरोध पैदा करना, लापरवाही या खतरनाक तरीके से वाहन चलाना, सार्वजनिक अधिकारी के आदेश की अवहेलना और खतरनाक स्थिति में वाहन छोड़ने जैसे प्रावधान शामिल हैं। मामले का अंतिम कानूनी परिणाम जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

    जांच में Police Inspector Anil Devre की भूमिका अहम रही है। वहीं मामले की शुरुआती FIR में Police Constable Sampat Maruti Mule की शिकायत के आधार पर कार्रवाई दर्ज की गई है। इस मामले में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी Shweta Khedkar ने सार्वजनिक सड़क पर Traffic रोककर Reel बनाने को लेकर कार्रवाई की पुष्टि की।

    Drone को लेकर भी कार्रवाई का सवाल

    इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू Drone से वीडियो शूट करना भी है। पुलिस के अनुसार, 20 अगस्त को Pimpri-Chinchwad के Joint Commissioner of Police की ओर से Drone operations को लेकर जारी प्रतिबंधात्मक आदेश के बावजूद Drone का इस्तेमाल किया गया। इसलिए मामला केवल Traffic obstruction और dangerous driving तक सीमित नहीं है; जांच में Drone से जुड़े आदेश के उल्लंघन का पहलू भी शामिल है।

    फिलहाल इस घटना में किसी व्यक्ति के घायल होने या संपत्ति के नुकसान की सूचना सामने नहीं आई है। हालांकि, सड़क पर कई वाहनों को एक साथ रोकने और दूसरे motorists की आवाजाही प्रभावित करने से road safety का जोखिम जरूर पैदा हुआ।

    चाकण में पहले से Traffic का बड़ा दबाव

    चाकण MIDC कोई सामान्य सड़क क्षेत्र नहीं है। यह बड़ा औद्योगिक इलाका है, जहां रोजाना बड़ी संख्या में कर्मचारी, निजी वाहन, दोपहिया और commercial vehicles आते-जाते हैं। इसी कारण यहां Traffic Congestion कम करना प्रशासन के लिए अलग से चुनौती बना हुआ है।

    सितंबर की शुरुआत में जिलाधिकारी जितेंद्र डुडी ने औद्योगिक इकाइयों के shift timings में अंतर रखने की व्यवस्था शुरू कराई। कुछ कंपनियों में staggered shifts के बाद peak hours में Traffic में कुछ राहत की जानकारी सामने आई। लेकिन 16 सितंबर तक औद्योगिक क्षेत्र के बाहर स्थित कई कंपनियों में इन बदलावों के सीमित implementation के कारण समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई थी।

    17 सितंबर को भी चाकण के लिए सड़क सुधार, प्रमुख junctions पर Traffic management, heavy vehicles के लिए alternative routes, organised parking और आधुनिक technology के इस्तेमाल को लेकर नया coordinated Action Plan तैयार करने के निर्देश दिए गए।

    यानी जिस क्षेत्र में Traffic flow सुधारने के लिए प्रशासन को अलग से manpower, road management, parking और technology-based उपायों पर काम करना पड़ रहा है, उसी क्षेत्र में सार्वजनिक सड़क को Reel शूट के लिए रोकने की घटना सामने आई है।

    Pune में इससे पहले भी सामने आया था ऐसा मामला

    चाकण की घटना से कुछ दिन पहले 27 अगस्त को Pune-Bengaluru Highway के Bavdhan-Wakad stretch पर भी नए वाहन की Reel शूट करने के लिए Traffic प्रभावित करने का मामला सामने आया था। Sahyadri Mahindra showroom और Bhujbal Chowk के बीच वाहनों को रोककर शूट किए गए Video के बाद Bavdhan Police ने कार्रवाई की थी।

    इस मामले में Somnath Ashok Kedari, दो Fortuner के drivers और SC Photography के Soham Chavan सहित चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था। Somnath Ashok Kedari और Ajay Sambhaji Yadav को हिरासत में लिया गया था तथा दो Toyota Fortuner जब्त की गई थीं।

    इसके बाद 7 सितंबर को चाकण MIDC में एक अलग Fortuner को सड़क के बीच आड़े खड़ा कर Reel शूट करने का Video भी सामने आया। इस Video में दूसरे वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती दिखाई दी थी। यह घटना चार वाहनों वाले 3 सितंबर के मामले से अलग थी।

    अब सवाल केवल एक Reel का नहीं

    पुणे और Pimpri-Chinchwad में कुछ ही दिनों के भीतर सार्वजनिक सड़कों पर Social Media Video बनाने के लिए वाहनों को रोकने या Traffic प्रभावित करने के कई मामले सामने आए हैं। 3 सितंबर के चाकण मामले में पुलिस कार्रवाई आगे बढ़ चुकी है, जबकि 7 सितंबर को सामने आए अलग Fortuner Video ने भी public road पर Reel shooting को लेकर सवाल खड़े किए थे।

    ऐसी घटनाओं में मुख्य सवाल यह है कि Social Media content तैयार करने के लिए public road का इस्तेमाल करते समय दूसरे motorists की सुरक्षा और Traffic movement को कितना प्रभावित किया गया। चाकण जैसे industrial corridor में थोड़े समय का road obstruction भी peak-hour traffic पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।

    फिलहाल 3 सितंबर के मामले में तीन आरोपियों की गिरफ्तारी, चौथे आरोपी की तलाश और चारों वाहनों की जब्ती के बाद जांच जारी है। पुलिस की जांच में Video footage, वाहनों की भूमिका, road obstruction और Drone के इस्तेमाल से जुड़े पहलुओं को आगे देखा जा रहा है।