Category: Jobs & Education

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  • हार्वर्ड के 800 भारतीय छात्रों को हद्दपार का सामना करना पड़ेगा; यूनिवर्सिटी को 72 घंटे का अल्टीमेटम

    हार्वर्ड के 800 भारतीय छात्रों को हद्दपार का सामना करना पड़ेगा; यूनिवर्सिटी को 72 घंटे का अल्टीमेटम

    हार्वर्ड को अंतर्राष्ट्रीय छात्रों को मेजबानी देने से रोक दिया गया है। उसे छह शर्तों का पालन करने के लिए 72 घंटे का समय दिया गया है। इसमें भारत के लगभग 800 छात्रों को हद्द पार किया जा सकता है।

    डिजिटल डेस्क
    देश विदेश-
    अमेरिकी ट्रम्प प्रशासन ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय में विदेशी छात्रों के लिए दरवाज़े बंद कर दिए हैं। यूएस डिपार्टमेंट ऑफ़ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने विदेशी छात्रों को होस्ट करने के लिए हार्वर्ड विश्वविद्यालय के प्रमाणन को रद्द कर दिया है, जो प्रमुख आइवी लीग विश्वविद्यालयों में से एक के लिए एक बड़ा झटका है। यह कार्रवाई पिछले महीने DHS द्वारा हार्वर्ड के लिए DHS अनुदान में 2.7 मिलियन डॉलर समाप्त करने के बाद की गई है।

    अमेरिकी विरोध प्रदर्शन

    होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी क्रिस्टी नोएम ने डीएचएस को हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट एंड एक्सचेंज विजिटर प्रोग्राम (एसईवीपी) सर्टिफिकेशन को समाप्त करने का आदेश दिया है। होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने यूनिवर्सिटी पर अमेरिकी विरोधी प्रदर्शनों और कथित यहूदी हिंसा के बीच सुरक्षित परिसर बनाए रखने में विफल रहने का आरोप लगाया है।

    विदेशी छात्रों को दाखिला

    इसका मतलब यह है कि हार्वर्ड अब विदेशी छात्रों को दाखिला नहीं दे सकता और मौजूदा विदेशी छात्रों को अपना कानूनी दर्जा खोना होगा या उन्हें स्थानांतरित होना होगा। इसका यह भी मतलब है कि मौजूदा विदेशी छात्रों को जल्द ही किसी अन्य SEVP प्रमाणित विश्वविद्यालय में दाखिला लेने की ज़रूरत नहीं होगी।

    छात्रों को क्या करना होगा?

    हार्वर्ड अब विदेशी छात्रों को दाखिला नहीं दे सकता है, तथा मौजूदा विदेशी छात्रों को स्थानांतरित होना होगा, अन्यथा उन्हें अपनी कानूनी स्थिति खोनी होगी।

    SEVP प्रमाणन समाप्त होने के साथ, F-1 वीज़ा या J वीज़ा पर छात्रों को अमेरिका में रहने के लिए किसी अन्य SEVP प्रमाणित विश्वविद्यालय की तलाश करनी होगी, जबकि कोई भी नया अंतर्राष्ट्रीय छात्र हार्वर्ड में 2025-26 के लिए F/J वीज़ा नहीं प्राप्त कर सकता। यदि वे छात्र किसी अन्य विश्वविद्यालय में दाखिला लेने में विफल रहते हैं, तो उनका वीज़ा रद्द किया जा सकता है और उन्हें अमेरिका से हद्द पार का सामना करना पड़ सकता है।

    छात्र और विनिमय आगंतुक कार्यक्रम (SEVP) जानकारी एकत्र करता है, बनाए रखता है, विश्लेषण करता है और जानकारी प्रदान करता है ताकि केवल वैध विदेशी छात्र या विनिमय आगंतुक ही संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रवेश पा सकें। हार्वर्ड की SEVIS तक पहुँच, जो अंतर्राष्ट्रीय छात्रों पर नज़र रखने और वीज़ा स्थिति बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है इसे अब रद्द कर दिया गया है।

    भारत के 800 छात्र प्रभावित

    अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग द्वारा SEVP प्रमाणीकरण रद्द करने के निर्णय से हार्वर्ड के लगभग 6,800 अंतर्राष्ट्रीय छात्रों का भविष्य सीधे तौर पर खतरे में पड़ गया है, जिनमें लगभग 800 छात्र भारत से हैं।

    अधिकांश भारतीय छात्र ग्रेजुएट या डॉक्टरेट कार्यक्रमों में हैं और ट्रम्प प्रशासन की हालिया कार्रवाई के कारण उन्हें शैक्षणिक व्यवधान का सामना करना पड़ेगा, जिससे वैकल्पिक विकल्पों के लिए बहुत कम समय दिया गया है।

    72 घंटे के भीतर छह कठोर शर्तो का पालन

    नोएम ने हार्वर्ड को छात्र रिकॉर्ड की मांग को पूरा करने के लिए 72 घंटे का समय दिया है, जिसमें अनुशासनात्मक डेटा और विरोध प्रदर्शन फुटेज शामिल है, ताकि वह अपनी SEVIS पहुँच को बहाल कर सके। हार्वर्ड को होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) द्वारा विदेशी छात्रों का नामांकन फिर से शुरू करने के लिए 72 घंटे के भीतर छह कठोर शर्तों को पूरा करने का काम सौंपा गया है।

    कैसे मिलेगा फिर से मौका?

    यदि विश्वविद्यालय अमेरिकी प्राधिकारियों को कुछ अभिलेख प्रस्तुत कर दे दें तो उसे विदेशी छात्रों को दाखिला देने का मौका मिल जाएगा।

    • 1- हार्वर्ड विश्वविद्यालय के पास उपलब्ध सभी रिकॉर्ड, चाहे वे आधिकारिक हों या अनौपचारिक, जिनमें इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और ऑडियो या वीडियो फुटेज शामिल हैं, जो पिछले पांच वर्षों में किसी गैर-आप्रवासी छात्र द्वारा परिसर के अंदर या बाहर की गई अवैध गतिविधि से संबंधित हैं।
    • 2- हार्वर्ड विश्वविद्यालय के पास उपलब्ध सभी रिकॉर्ड, जिनमें इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और ऑडियो या वीडियो फुटेज शामिल हैं, पिछले पांच वर्षों में किसी गैर-आप्रवासी छात्र द्वारा परिसर के अंदर या बाहर की गई खतरनाक या हिंसक गतिविधि के संबंध में।
    • 3- हार्वर्ड विश्वविद्यालय के पास उपलब्ध सभी रिकॉर्ड, जिनमें इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और ऑडियो या वीडियो फुटेज शामिल हैं, पिछले पांच वर्षों में किसी गैर-आप्रवासी छात्र द्वारा परिसर में या बाहर अन्य छात्रों या विश्वविद्यालय कर्मियों को दी गई धमकियों के संबंध में।
    • 4- हार्वर्ड विश्वविद्यालय के पास उपलब्ध सभी रिकॉर्ड, जिनमें इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और ऑडियो या वीडियो फुटेज शामिल हैं, पिछले पांच वर्षों में नामांकित किसी गैर-आप्रवासी छात्र द्वारा, चाहे वह परिसर में हो या बाहर, अन्य सहपाठियों या विश्वविद्यालय कर्मियों के अधिकारों के हनन के संबंध में।
    • 5- पिछले पांच वर्षों में नामांकित सभी गैर-आप्रवासी छात्रों के सभी अनुशासनात्मक रिकॉर्ड।
    • 6- पिछले पांच वर्षों में हार्वर्ड विश्वविद्यालय परिसर में किसी गैर-आप्रवासी छात्र से संबंधित किसी भी विरोध गतिविधि का हार्वर्ड विश्वविद्यालय के पास उपलब्ध कोई भी ऑडियो या वीडियो फुटेज
  • मुम्बई यूनिवर्सिटी की गलती, लाखों छात्रों के लिए बनी मुसीबत

    मुम्बई यूनिवर्सिटी की गलती, लाखों छात्रों के लिए बनी मुसीबत

    Mumbai University Certificate Mistake : मुम्बई यूनिवर्सिटी ने इतनी बड़ी गलती कर दी है कि अब लाखों छात्रों के लिए मुसीबत खड़ी हो गई है। मुम्बई यूनिवर्सिटी ने 2023-24 बैच के ग्रेजुएशन सर्टिफिकेट पर अपने नाम की स्पेलिंग ही गलत छाप दी है। छात्रों को सही सर्टिफिकेट मिलने में देरी होगी। यूनिवर्सिटी अब इस गलती को सुधारने में लगी है।

    मुम्बई : अक्सर जरूरी दस्तावेजों पर नाम में गडबडी या स्पेलिंग मिस्टेक के कारण लोगों को कई मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। उनमें ख़ासकर पढाई के सर्टिफिकेट में अगर मिस्टेक हो जाए तो लोग उसे जाली समझ लेते हैं। मुम्बई यूनिवर्सिटी ने भी कई बार ऐसी गलती की है। लेकिन इस बार तो यूनिवर्सिटी ने खुद अपने नाम की स्पेलिंग ही गलत छाप दी है। 2023-24 बैच के ग्रेजुएशन सर्टिफिकेट पर ‘University of Mumabai‘ लिखा हुआ है। इसमें “Mumbai” की जगह “Mumabai” लिखे होने से पूरा सर्टीफिकेट ही जाली नजर आ रहा है। ये सारे सर्टिफिकेट कई कॉलेजों को भेज दिए गए हैं। अब कई कॉलेज इन सर्टिफिकेटों को वापस कर रहे हैं।

    एक कॉलेज के प्रिंसिपल ने कहा, ‘अपने ही नाम की स्पेलिंग गलत करना मुम्बई युनिवर्सिटी के लिए शर्मनाक बात है।’ एक दूसरे प्रिंसिपल ने कहा, ‘ऊपर गलत नाम की वजह से लोगो को सर्टिफिकेट नकली लग रहे हैं। सोचिए, अगर छात्र नौकरी या आगे की पढ़ाई के लिए इन सर्टिफिकेट का इस्तेमाल करेंगे तो क्या होगा?’

    सर्टिफिकेट की वापस से होगी मांग

    प्रिंसिपल ने आगे कहा, ‘नए सर्टिफिकेट छपवाने से छात्रों को उन्हें मिलने में देरी होगी। कई छात्रों को आगे की पढ़ाई या नौकरी मिल चुकी होगी, और शायद उन्होंने इस गलती पर ध्यान भी नहीं दिया होगा।’ प्रिंसिपल ने बताया कि अब सभी गलत सर्टिफिकेट उन बच्चों से वापस मंगवाने पड़ेंगे।

    हैदराबाद की कंपनी ने की गड़बड़ी

    मुम्बई विश्वविद्यालय ने सर्टिफिकेट छापने का काम हैदराबाद की एक कंपनी को दिया था। अब यूनिवर्सिटी इस गलती को सुधारने में लगी है। Mumbai University के प्रवक्ता ने बताया कि ‘छपाई की समस्या के कारण कुछ सर्टिफिकेट में गलतियां हो गई हैं।’ लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि कितने सर्टिफिकेट में गलती हुई है? प्रवक्ता ने कहा, ‘हम इसे सुधार रहे हैं। छात्रों को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के नए सर्टिफिकेट मिलेंगे।’ उन्होंने यह भी बताया कि गलती का पता चलते ही यूनिवर्सिटी ने इसे सुधारना शुरू कर दिया है। सभी कॉलेजों को अभी तक सर्टिफिकेट नहीं भेजे गए हैं। बाकी कॉलेजों को सही सर्टिफिकेट भेजे जाएंगे।

    लापरवाही पर नाराज

    एक प्रिंसिपल ने बताया कि पिछले कुछ सालों में सर्टिफिकेट में गलतियां कम हुई हैं। क्योंकि मुम्बई युनिवर्सिटी छात्रों को अपनी जानकारी जांचने और उसमें सुधार करने का मौका देता है। यह सब छपाई से पहले होता है। इससे गलतियां कम हो जाती हैं। इस बार हुई गलती वाकई में बड़ी है और उम्मीद है कि भविष्य में ऐसी गलती दोबारा नहीं होगी। छात्रों के भविष्य से जुड़े इन दस्तावेजों को तैयार करने में पूरी सावधानी बरतनी चाहिए। यूनिवर्सिटी को अपनी प्रक्रियाओं की समीक्षा करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसी लापरवाही दोबारा न हो। यह घटना छात्रों और उनके माता-पिता के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने उम्मीद जताते हुए कहा कि यूनिवर्सिटी जल्द से जल्द सही सर्टिफिकेट उपलब्ध करा देगी।

  • हिजाब हटाने को लेकर परीक्षा केन्द्र की सख्ती, छात्राओं ने परीक्षा ही छोड़ दिया

    हिजाब हटाने को लेकर परीक्षा केन्द्र की सख्ती, छात्राओं ने परीक्षा ही छोड़ दिया

    उत्तर प्रदेश के जौनपुर में और एक बार हिजाब को लेकर विवाद गरमा गया है। यहां परीक्षा केन्द्र ने हिजाब हटाने को लेकर सख्ती दिखाते हुए छात्राओं को परीक्षा देने से रोक दिया। जबकि छात्राएँ महिला टीचर के सामने हिजाब उतारने को तैयार थी। लेकिन परीक्षा केन्द्र के ज़िद के आगे छात्राओं को परीक्षा देने से रोक दिया।

    उत्तर प्रदेश: जौनपुर के खुदौली में यूपी बोर्ड परीक्षा के दौरान हिजाब (नकाब) को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। सर्वोदय इंटर कॉलेज में दसवीं की चार छात्राओं को परीक्षा केंद्र में प्रवेश करने से रोक दिया गया क्योंकि उन्होंने हिजाब उतारने से इनकार किया था। नतीजतन, छात्राओं को घर वापस लौटना पड़ा। इसके बाद से मामला सोशल मीडिया पर खूब गरमाया हुआ है।

    क्या है पूरा मामला?

    सोमवार को यूपी बोर्ड की दसवीं कक्षा की हिंदी परीक्षा थी। छात्राएं खेतासराय स्थित मॉडर्न कॉन्वेंट स्कूल की थीं। जब वे परीक्षा केंद्र पर पहुंचीं, तो वहां की प्रशासनिक टीम ने हिजाब हटाने के लिए कहा। छात्राओं ने इसे मानने से इनकार कर दिया, जिसके कारण उन्हें परीक्षा हॉल में प्रवेश नहीं दिया गया। हालांकि छात्राओं ने महिला टीचर के सामने हिजाब उतारने को प्रशासन से अनुरोध किया। लेकिन परीक्षा केन्द्र के ज़िद के आगे छात्राओं को परीक्षा देने से रोक दिया और उन्हें घर वापस लौटना पड़ा।

    मामले पर विरोध और समर्थन

    इस घटना की खबर सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गई और हिजाब को लेकर नियमों की सख्ती पर सवाल उठने लगे। छात्राओं में से एक के पिता अहमदुल्लाह ने अपनी बेटी के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि,
    “अगर हिजाब में परीक्षा देने की अनुमति नहीं मिली, तो हमारी बेटी परीक्षा नहीं देगी।”

    उन्होंने दावा किया कि चार नहीं बल्कि दस छात्राओं को परीक्षा देने से रोका गया। उन्होंने स्कूल प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा, कि “उन्होंने अनुरोध किया था कि लेडी टीचर से चेकिंग कराकर हिजाब में परीक्षा देने की अनुमति जाए, लेकिन बच्चियों की मांग को नहीं मानी गई।” उन्होंने कहा, कि “ये परीक्षा केन्द्र की हटगर्जी है जो धर्म के आधार पर बच्चों के साथ पक्षपात किया जा रहा है। जो सरारस गलत है।”

    नियमों का गलत इस्तेमाल

    परीक्षा केंद्र के व्यवस्थापक दिनेश चंद्र गुप्ता ने कहा किया कि, “परीक्षा के दौरान बोर्ड के नियमों का पालन कराना अनिवार्य है। छात्राओं ने नियमों का पालन करने से इनकार किया, इसलिए उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया।” यहां स्कूल प्रशासन को हिजाब को लेकर नियमों का आकलन करना चाहिए था। जबकि नियम के मुताबिक सिर्फ पहचान पत्र की पृष्ठी करने के बाद उन्हें परीक्षा केंद्र में प्रवेश दे देना चाहिए था। लेकिन स्कूल प्रशासन ने ऐसा नही करके उन बच्चों का साल ही बरबाद कर दिया। यहां नियमों का गलत इस्तेमाल किए जाने के आरोप लग रहे हैं।

    सोशल मीडिया पर गरमाया मुद्दा

    यह मामला अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। कुछ लोग छात्राओं के फैसले को सराहनीय बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे शिक्षा से समझौता मान रहे हैं। जबकि यूपी बोर्ड के नियमों के अनुसार, परीक्षा केंद्र में पहचान सुनिश्चित करने के लिए चेहरा स्पष्ट दिखना चाहिए। हालांकि, हिजाब को लेकर कोई स्पष्ट गाइडलाइन नहीं है, जिससे यह विवाद और गहरा गया है। इसमें यह नहीं कहा गया है कि परीक्षा देते समय भी विद्यार्थी का चेहरा स्पष्ट दिखाई देना चाहिए। तो सवाल है कि परीक्षा केन्द्र ने ऐसा क्यों किया?

    प्रशासन से मांग

    अब देखना यह है कि क्या शिक्षा विभाग इस मुद्दे को लेकर कोई संज्ञान भी लेता है या नही? या इस तरह के मामलों से निपटने के लिए कोई कदम उठाता भी है या नही? क्या इन छात्राओं को परीक्षा देने का कोई दूसरा मौका मिलेगा? या यह मामला सिर्फ एक विवाद बनकर रह जाएगा? ऐसा हुआ तो प्रदेश के अल्पसंख्यकों के साथ पक्षपात का आरोप लगता रहेगा और हो सकता है, मुस्लिम समाज की लाखों बच्चियां उच्च शिक्षा से महरूम रह जाएँ। ऐसे में प्रदेश का ही नुकसान होगा। प्रशासन को इस पर विचार करने की जरूरत है।

  • अमेरिकी वीज़ा इंटरव्यू छूट अब सिर्फ 12 महिने के लिए कर दिया गया है।

    अमेरिकी वीज़ा इंटरव्यू छूट अब सिर्फ 12 महिने के लिए कर दिया गया है।

    48 महिनों की वीज़ा इंटरव्यू छूट अमेरिकी सरकार ने अब घटाकर मात्र 12 महिने के लिए कर दिया गया है। इससे बाहर नौकरी व्यापार के लिए जानेवाले भारतीयों के लिए बड़ी दिक्कत होने वाली है।

    नई दिल्ली: संयुक्त राज्य अमेरिका ने वीज़ा इंटरव्यू छूट के लिए पात्रता विंडो, जिसे आमतौर पर ड्रॉपबॉक्स प्रक्रिया के रूप में जाना जाता है। इसे अब 48 महीने से घटाकर 12 महीने के लिए कर दिया है। इस बदलाव से हजारों नोन इमीग्रेंट वीजा धारकों पर असर पड़ने की उम्मीद है, जिनमें एच-1बी, एफ-1 और बी1/बी2 वीजा धारक भी शामिल हैं।

    जबकि भारत में अमेरिकी दूतावास ने बदलाव की पुष्टि नहीं की है, ऑनलाइन वीज़ा प्रोसेसिंग प्लेटफॉर्म एटलिस से पता चलता है, कि उसने पिछले सप्ताह अपने पात्रता मानदंड को अपडेट किया है।

    एटलिस के एक प्रवक्ता ने जानकारी देते हुए बताया, कि “हालांकि कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन बदलाव अब लागू किया जा रहा है और 12 महीने से अधिक समय से समाप्त हो चुके आवेदन अब स्वीकार नहीं किए जाएंगे।”

    वीज़ा प्रोसेसिंग पर दबाव

    पहले, यदि व्यक्ति का पिछला वीज़ा 48 महीनों के भीतर समाप्त हो जाता था, तो वह ड्रॉपबॉक्स प्रणाली का उपयोग करके अपने वीज़ा को नवीनीकृत कर सकता था। यह विस्तारित नीति कांसुलर बैकलॉग को कम करने के लिए महामारी के दौरान पेश की गई थी। नवीनतम बदलाव का मतलब है कि कई आवेदकों को अब व्यक्तिगत इंटरव्यू के लिए उपस्थित होना होगा, जिससे वीज़ा प्रणाली पर और दबाव पड़ सकता है।

    द नेशनल लॉ रिव्यू के अनुसार, इस बदलाव से नोन इमीग्रेंट वीज़ा धारकों के लिए देरी और यात्रा में बाधा उत्पन्न होने की संभावना है, जिनमें निम्नलिखित परेशानियां शामिल हैं:

    • एच-1बी – विशिष्ट क्षेत्रों में कुशल पेशेवरों के लिए एक कार्य वीजा, जिसके लिए अमेरिकी नियोक्ता से नौकरी की पेशकश की आवश्यकता होती है।
    • एफ-1 – अमेरिका में शैक्षणिक कार्यक्रमों के लिए एक छात्र वीजा, जो परिसर में सीमित रोजगार की अनुमति देता है।
    • बी1/बी2 – व्यापार (बी1) या पर्यटन (बी2) के लिए एक अल्पकालिक वीजा, जो रोजगार की अनुमति नहीं देता है।
    • एल-1 – एक बहुराष्ट्रीय कंपनी के भीतर अमेरिकी कार्यालय में स्थानांतरित होने वाले कर्मचारियों के लिए एक वीजा, जो अधिकारियों, प्रबंधकों या विशेष ज्ञान वाले श्रमिकों पर लागू होता है।
    • O-1 – विज्ञान, कला, शिक्षा, व्यवसाय या एथलेटिक्स में असाधारण क्षमता वाले व्यक्तियों के लिए वीज़ा।

    क्या बदल गया है?

    आवेदक अब ड्रॉपबॉक्स प्रक्रिया के लिए तभी अर्हता प्राप्त करते हैं, जब उनका वीज़ा पिछले 12 महीनों के भीतर समाप्त हो गया हो और उसी श्रेणी में हो। जो लोग इस आवश्यकता को पूरा नहीं करते हैं उन्हें एक व्यक्तिगत इंटरव्यू निर्धारित करना होगा, जिसके कारण ये हो सकते हैं:

    • अमेरिकी वाणिज्य दूतावासों में व्यक्तिगत नियुक्तियों की मांग में वृद्धि।
    • विशेष रूप से उच्च मात्रा वाले शहरों में वीज़ा इंटरव्यू के लिए लंबे समय तक प्रतीक्षा करना।
    • व्यावसायिक यात्रियों और तेजी से नवीनीकरण की आवश्यकता वाले पेशेवरों के लिए संभावित व्यवधान।
    • इस बदलाव का असर अमेरिका में भारतीय छात्रों पर भी पड़ने की उम्मीद है।

    वनस्टेप ग्लोबल के मुख्य परिचालन अधिकारी सिद्धार्थ अय्यर ने जानकारी देते हुए बताया, “छात्रों (एफ-1) के लिए अमेरिकी वीजा नवीनीकरण प्रक्रिया में हालिया नीति बदलाव खासकर भारत में आवेदकों के लिए एक महत्वपूर्ण समायोजन का प्रतिनिधित्व करता है। इंटरव्यू छूट की पात्रता अब पिछले 48 महीनों से घटकर 12 महीने हो गई है, कुछ छात्रों को अपने वीजा को नवीनीकृत करते समय लंबे समय तक इंतजार और अतिरिक्त कदमों का अनुभव हो सकता है। हालांकि यह समायोजन पूर्व-महामारी नियमों की वापसी को दर्शाता है, यह ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय शिक्षा की मांग अधिक है।”

    उन्होंने कहा, “इस बदलाव का उद्देश्य प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना है, लेकिन यह उन छात्रों के लिए चुनौतियां पैदा कर सकता है जो अद्यतन पात्रता विंडो से बाहर हैं। हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि कई छात्रों के पास अभी भी नियमित प्रक्रिया के माध्यम से अपने वीजा को नवीनीकृत करने के पर्याप्त अवसर होंगे।” “जो लोग इस परिवर्तन से प्रभावित हैं, उन्हें सूचित रहना चाहिए, अपने नवीनीकरण की योजना पहले से बना लेनी चाहिए, और मार्गदर्शन के लिए अपने विश्वविद्यालय के अंतर्राष्ट्रीय कार्यालयों या वीज़ा सलाहकारों तक पहुँचना जारी रखना चाहिए।”

    भारत में वीज़ा अपाइंटमेंट में देरी

    भारत में वीज़ा अपॉइंटमेंट प्राप्त करना पहले से ही एक लंबी प्रक्रिया है। 2022 में B1/B2 (व्यवसाय और पर्यटन) वीज़ा इंटरव्यू के लिए प्रतीक्षा समय 999 दिनों से अधिक हो गया। हालाँकि अब इसमें सुधार हुआ है, लेकिन प्रतीक्षा समय अभी भी लंबा है:

    • दिल्ली और मुंबई: 440 दिन से अधिक
    • चेन्नई: 436 दिन
    • हैदराबाद: 429 दिन
    • कोलकाता: 415 दिन

    वीज़ा नीति में बदलाव क्यों?

    दिल्ली में एक सवाल के जवाब में, अमेरिकी दूतावास ने कहा, “अमेरिकी विदेश विभाग कार्यकारी आदेश 14161 के तहत निर्देशित सभी वीजा कार्यक्रमों की पूर्ण समीक्षा कर रहा है। इस समय हमारे पास यही सारी जानकारी है।”

    20 जनवरी, 2025 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा हस्ताक्षरित कार्यकारी आदेश 14161 का शीर्षक है “संयुक्त राज्य अमेरिका को विदेशी आतंकवादियों और अन्य राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक सुरक्षा खतरों से बचाना।” आदेश संघीय एजेंसियों को इमीग्रेशन स्क्रीनिंग और जांच प्रक्रियाओं को मजबूत करने का निर्देश देता है। यह पिछले ट्रम्प प्रशासन की कुछ नीतियों को बहाल करता है और सुरक्षा जोखिमों के लिए वीज़ा और इमीग्रेशन नीतियों की समीक्षा की आवश्यकता है।

    इसमें शामिल है:

    • संभावित प्रवेश प्रतिबंधों के लिए उच्च जोखिम वाले देशों की पहचान करना।
    • शरणार्थी स्क्रीनिंग प्रक्रियाओं को मजबूत करना।
    • सुरक्षा कमजोरियों के लिए वीज़ा कार्यक्रमों का मूल्यांकन करना।
    • अमेरिका में पहले से मौजूद विदेशी नागरिकों पर निगरानी बढ़ाना।
    • अमेरिकी समाज में आप्रवासी समावेशन को प्रोत्साहित करने के उपायों को लागू करना।
  • उर्दू स्कूल में महिला टीचरों के साथ यौन उत्पीड़न, मायनोरेटी कमिशन के इंस्पेक्शन से खुली पोल, FIR दर्ज

    उर्दू स्कूल में महिला टीचरों के साथ यौन उत्पीड़न, मायनोरेटी कमिशन के इंस्पेक्शन से खुली पोल, FIR दर्ज

    महाराष्ट्र मायनोरेटी कमिशन के अध्यक्ष प्यारे जिया खान ने मंगलवार को पातुर स्थित एक सरकारी स्कूल का दौरा किया, जहां कुछ महिला टीचरों ने यौन उत्पीड़न के साथ सेलरी में कमिशन खाने पर शिकायत की थी। दौरा पूरा होते ही पुलिस ने किया मामला दर्ज।

    महाराष्ट्र: अकोला जिले में पुलिस ने एक सरकारी उर्दू माध्यम स्कूल के पदाधिकारियों के खिलाफ यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज किया है। कार्रवाई उस वक्त अंजाम दी गई, जब राज्य अल्पसंख्यक आयोग की टीम ने अचानक उस संस्थान का दौरा किया। शिकायत में कहा गया, कि प्रिंसीपल महिला टीचरों के साथ यौन उत्पीड़न के अलावा मार पीट भी किया करता था और सेलरी के पैसों में से 20 से 30 प्रतिशत पैसे कांट लिया करता था।

    सरकारी स्कूल का दौरा

    महाराष्ट्र अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे जिया खान ने मंगलवार को अकोला जिले के पातुर स्थित सरकारी स्कूल का दौरा किया, जहां कुछ महिला टीचरों ने शिकायत की थी कि उन्हें उत्पीड़न और धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। पीड़ित महिला टीचर्स ने आरोप लगाया कि स्कूल प्रबंधन ने उनसे उनके वेतन का 20-30 प्रतिशत जबरन वसूल लिया करता है। आयोग के अध्यक्ष प्यारे जिया खान ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया। उनके दौरे के फौरन बाद पातुर पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई।

    पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज

    इस मामले में चार आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 74 (महिला के साथ मारपीट या आपराधिक बल का प्रयोग, उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से), 75 (यौन उत्पीड़न), 296 (अश्लील कृत्य) और 308 (2) (जबरन वसूली) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। हालांकि अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।

    आयोग के अध्यक्ष ने क्या कहा?

    मीडिया से बात करते हुए आयोग के अध्यक्ष प्यारे जिया खान ने दावा किया कि उन्हें अपने औचक निरीक्षण के दौरान कक्षाओं में न तो बच्चे मिले और ना ही टीचर्स मिले। एक ही परिसर में दो स्कूल अवैध रूप से चलाए जा रहे हैं और महिलाओं के साथ उत्पीड़न की घटनाएं हुई हैं। प्यारे जिया खान ने कहा कि सरकार फंड तो देती है, लेकिन योजनाओं के सही तरीके से क्रियान्वयन न होने के कारण राज्य में उर्दू स्कूलों की हालत खराब है। ऐसे में लापरवाही करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

  • OpenAI is currently investigating an outage affecting users of ChatGPT.

    OpenAI is currently investigating an outage affecting users of ChatGPT.

    OpenAI’s widely used AI chatbot, ChatGPT, is currently unavailable to users globally.

    ChatGPT, the widely used AI chatbot developed by OpenAI, is currently experiencing downtime for users globally. OpenAI has recognized the outage and is actively looking into the matter. The situation appears to present two distinct perspectives regarding the ChatGPT outage. The primary issue seems to be focused on OpenAI’s website, whereas the mobile application appears to be functioning without any problems.

    Accessing the ChatGPT website results in an error message stating “bad gateway,” indicating a potential issue on the server side. Conversely, when using the application and inquiring, “ChatGPT, are you down?” it promptly replies, “I’m here and ready! What do you need?” Additionally, it is currently able to respond to follow-up questions as well.

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    Downdetector, a platform that monitors service disruptions, is currently experiencing a surge of activity as users report errors and engage in discussions regarding the issues with ChatGPT. The chatbot is largely unavailable to the majority of users on the web, along with their previous interactions, including past prompts and queries.

    OpenAI has acknowledged the issue and has indeed recognized it, as indicated by recent updates on its status-check website. (https://status.openai.com/), The AI company, under the leadership of Sam Altman, has issued two recent updates. The first statement indicated, “The issue has been identified and a fix is being implemented,” while the second noted, “A fix has been implemented and we are monitoring the results.” The specific cause of the outage remains unclear at this time.

    The outage is notably occurring just days following OpenAI’s introduction of a new user interface on the web, which updated the backend custom instructions to enhance user customization of the chatbot’s responses. It remains unclear at this time whether these changes are related to the outage.

  • फिल्म फेस्टिवल, वीडियो और शॉर्ट फिल्म बनाने वालों को मिलेगा सम्मान

    फिल्म फेस्टिवल, वीडियो और शॉर्ट फिल्म बनाने वालों को मिलेगा सम्मान

    Short Film Festival: वीडियो और शॉर्ट फिल्म बनाने वाले प्रतिभागियों को इनाम जीतने का सुनहरा मौका दिया जा रहा है। दो दिनों तक चलने वाले इस कॉम्पिटिशन में 5 से 15 मिनट की शॉर्ट फिल्म बनाकर 15 फरवरी तक भेजने को कहा गया है। अलग-अलग विषयों पर वीडियो कंटेंट बनाने वाले क्रिएटर्स के लिए यह एक बेहतरीन मौका है…..

    Short Film Festival: वीडियो और शॉर्ट फिल्म बनाने वाले क्रिएटर्स को इनाम जीतने का सुनहरा मौका दिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश के मेरठ, सहारनपुर और मुरादाबाद मंडल से संबंधित जिलों में रह रहे युवा जो शॉर्ट फिल्म के जानकार और विभिन्न प्रकार का वीडियो कंटेंट बनाते हैं ऐसे सभी युवाओं के लिए ‘मेरठ चलचित्र सोसायटी’ और तिलक पत्रकारिता जनसंचार स्कूल ‘चौधरी विश्वविद्यालय’ की ओर से लघु फिल्म फेस्टिवल प्रतियोगिता (Short film Festival Competition) का आयोजित किया गया है। इसकी जानकारी तिलक पत्रकारिता एवं जनसंचार स्कूल चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के डायरेक्टर प्रो प्रशांत कुमार ने दी।

    युवाओं की क्रियेटिविटी बढ़ावा

    प्रोफेसर प्रशांत कुमार ने कहा कि जिस तरीके से नोएडा में फिल्म सिटी को लेकर तेजी से काम किया जा रहा है ऐसे में आने वाले दौर में फिल्मी क्षेत्र में करियर बनाने की सोच रहे युवाओं के लिए काफी अच्छा अवसर हो सकता है। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए युवाओं को प्लेटफार्म उपलब्ध कराने के लिए पांचवीं बार फिल्म फेस्टिवल का आयोजन मेरठ में किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस बार थोड़ा सा बदलाव किया गया है। एक दिन की जगह दो दिनों तक फिल्म फेस्टिवल आयोजित होगा। ऐसे में युवा 15 फरवरी तक अपनी फिल्म भेज सकते हैं।

    इनामी राशि क्या है?

    प्रोफेसर प्रशांत कुमार के अनुसार इस फिल्म महोत्सव में आने वाली फिल्मों को दो श्रेणियां में रखा गया है। प्रथम श्रेणी 5 मिनट तक की तथा दूसरी श्रेणी 5 से 15 मिनट तक की रहेगी। 5 से 15 मिनट तक वाली फिल्मों में प्रथम स्थान प्राप्तकर्ता को सम्मानित करने के साथ-साथ 21,000 रुपए और द्वितीय स्थान पाने वाले को 11,000 रुपए दिए जाएंगे। 5 मिनट तक की श्रेणी की फिल्मों में प्रथम स्थान पाने वाले को 11,000 रुपए, द्वितीय स्थान वाले को 5,100 रुपए दिए जाएंगे। इसके साथ ही दोनों श्रेणियों की फिल्मों में तीन-तीन कोम्प्लिमेंट्री पुरस्कार भी दिए जाएंगे।

    इन विषयों पर बना सकते हैं फिल्म

    बताते चलें की इस फिल्म फेस्टिवल में विभिन्न सामाजिक विषयों को शामिल किया गया है। जिसमें धर्म और आध्यात्मिक, भारतीय जीवन का मूल्य, भारतीय परिवार व्यवस्था, भारत के महापुरुष, ऐतिहासिक स्थल, नागरिक कर्तव्य, लोकल फॉर वोकल सहित विभिन्न विषय शामिल हैं। अधिक जानकारी के लिए क्रिएटर्स विश्वविद्यालय स्थित पत्रकारिता विभाग में संपर्क कर सकते हैं।

  • NEET PG Result 2024 Live Updates: NBEMS to report scorecards soon; This is the way to check at natboard.edu.in

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    NEET PG Result 2024 Live Updates: Consideration competitors! The outcomes for NEET PG 2024 tests are supposed to be pronounced by the Public Leading body of Assessments in Clinical Sciences (NBEMS) at any point in the near future. It is guessed that the outcomes will be out before the current week’s over. Be that as it may, there is no affirmation on the date and time yet. When the outcomes are out, up-and-comers can really take a look at their scores at true sites – natboard.edu.in and nbe.edu.in. The cut-off marks for NEET PG 2024 will be delivered alongside the outcomes. Up-and-comers who will score the base most reduced cut-off just will be announced as effectively qualified.

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    The NEET PG 2024 assessment was directed on August 11, 2024. Around 2,28,540 applicants showed up for the assessment which was held in two movements around the same time. For all the inclusion encompassing NEET PG Results 2024, applicants can follow our live updates here:

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  • UP Police Exam City Slip: डाउनलोड करें, ये रहा uppbpb.gov.in सीधा लिंक

    UP Police Exam City Slip: डाउनलोड करें, ये रहा uppbpb.gov.in सीधा लिंक

    UP Police Exam City: यूपी पुलिस भर्ती बोर्ड आज यूपी पुलिस कांस्टेबल एग्जाम सिटी स्लिप 2024 uppbpb.gov.in पर जारी कर दिया गया है। परीक्षा 23 से 31 अगस्त तक होगी। एग्जाम सिटी के जरिए देख सकते हैं कि उनकी परीक्षा किस शहर में है? जिसके बाद वह अपनी आगे की तैयारी कर सकते हैं।

    UP Police Constable Exam 2024: उत्तर प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा के लिए आज एग्जाम सिटी स्लिप जारी कर दी गई है। इसमें जो अभ्यर्थी परीक्षा देने जा रहे हैं, वो ऑनलाइन यह चेक कर सकेंगे कि उनकी परीक्षा किस शहर में होगी। उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एंव प्रोन्नति बोर्ड (UPPRPB) 16 अगस्त को अपनी आधिकारिक वेबसाइट uppbpb.gov.in पर UP Constable Exam city Slip जारी कर दिया है। जिसे अभ्यर्थी Indian fasttrack news Channel की खबर में दिए लिंक के डायरेक्ट डाउनलोड कर सकते हैं।

    Download UP Police Exam City Slip 2024

    UP पुलिस कांस्टेबल एग्जाम सिटी 2024 की डिटेल्स उम्मीदवार इस लिंक की मदद से सीधे डाउनलोड कर सकते हैं। UP Police Constable Re Exam 2024 City Slip Download Link। यह लिंक 16 अगस्त 2024, शाम 5 बजे से एक्टिव हो चुका है। इसके साथ ही अभ्यर्थी ऑनलाइन अपने एग्जाम सिटी की जानकारी देख सकते हैं। लिंक के अलावा अभ्यर्थी नीचे बताए आसान से स्टेप्स की मदद से भी एग्जाम सिटी स्लिप डाउनलोड कर सकते हैं।

    • सबसे पहले उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एंव प्रोन्नति बोर्ड की ऑफिशियल वेबसाइट uppbpb.gov.in पर जाएं।
    • अब अपना रोल नंबर और जन्मतिथि दर्ज करें।
    • इसके बाद आपको स्क्रीन पर एग्जाम सिटी डिटेल्स दिखेगी।
    • जिसे आप डाउनलोड कर सकते हैं।

    यूपी पुलिस परीक्षा केंद्र पर उम्मीदवारों को अपने साथ UP पुलिस एडमिट कार्ड की हार्ड कॉपी, एक फोटो आईडी (जैसे आधार कार्ड, पासपोर्ट, वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस या पैन कार्ड), पासपोर्ट साइज के दो नवीनतम फोटो और एक काला या नीला बॉल पॉइंट पेन लाना होगा। इसके अलावा किसी तरह के उपकरण ले जाने पर पूरी तरह की पांबदी होगी।

    UP Police Constable Admit Card 2024: कब आएंगे ?

    बता दें कि UP पुलिस कांस्टेबल परीक्षा 23, 24, 25, 30 और 31 अगस्त को आयोजित की जाएगी। यह परीक्षा दो चरणों में होगी। सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक और दोपहर 3 बजे से शाम 5 बजे तक। वहीं परीक्षा से तीन दिन पहले UP पुलिस एग्जाम के एडमिट कार्ड जारी किए जाएंगे। यानी 20-21 अगस्त तक अभ्यर्थी अपने एडमिट कार्ड ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे। इस बार नकल और पेपर लीक को रोकने के लिए सख्त इंतजाम किए गए हैं। यह भर्ती परीक्षा UP पुलिस कांस्टेबल बल में 60,244 पदों को भरने के लिए आयोजित की जा रही है।
    गौरतलब है कि फरवरी 2024 में हुई UP पुलिस कांस्टेबल परीक्षा पेपर लीक होने के कारण रद्द कर दी गई थी। जिसमें लगभग 48 लाख उम्मीदवार शामिल हुए थे। बाद में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आश्वासन दिया था कि परीक्षा छह महीने के भीतर पुनर्निर्धारित की जाएगी। पुन: परीक्षा अब 23 अगस्त से 31 अगस्त तक आयोजित की जानी है।

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    कोर्ट ने यह भी कहा कि ‘बुर्का, हिजाब’ के संबंध में उसके अंतरिम आदेश का दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए तथा मुम्बई के कॉलेज को दुरुपयोग की स्थिति में अदालत का रुख करने की छूट दी गई है।

    मुम्बई- सुप्रीम कोर्ट ने मुम्बई कॉलेज बुर्का मामले में फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने कहा कि लड़कियों को कक्षा में बुर्का पहनने और परिसर में कोई भी धार्मिक गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाएगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि ‘बुर्का, हिजाब’ के संबंध में उसके अंतरिम आदेश का दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए।

    मामले में मुम्बई कॉलेज को दुरुपयोग की स्थिति में अदालत का रुख करने की छूट दी गई है। इसके साथ ही कोर्ट ने मुम्बई के एक कॉलेज के उस आदेश पर आंशिक रोक लगाई जिसमें परिसर में ‘हिजाब, बुर्का, टोपी और नकाब’ पहनने पर प्रतिबंध लगाया गया था। इसके साथ ही कॉलेज में ‘हिजाब’, ‘बुर्का’ पहनने पर प्रतिबंध संबंधी हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए मुम्बई की ‘एजुकेशनल सोसाइटी’ से जवाब मांगा।

    क्या है मामला?

    बता दें कि मुम्बई के एक निजी कॉलेज में छात्रों के कैंपस में हिजाब, नकाब, बुर्का, स्टोल, टोपी आदि पहनने पर लगाए गए प्रतिबंध को बरकरार रखने के बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई।

    यह मामला मुम्बई के एन. जी. आचार्य और डी. के. मराठे. कॉलेज का है, जहां के कॉलेज प्रशासन ने “हिजाब, नकाब, बुर्का, स्टोल और टोपी” पहनने पर बैन लगाया हुआ था। इसके खिलाफ 9 लड़कियों ने पहले बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया, लेकिन हाईकोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया था। जिसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी और याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने सुप्रीम कोर्ट से जल्द सुनवाई की मांग की गई थी।

    कॉलेज प्रशासन का भेदभाव ..

    सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कॉलेज प्रशासन से कहा, “छात्रों को यह चुनने की आजादी होनी चाहिए कि वे क्या पहन सकती हैं। कॉलेज उन पर दबाव नहीं डाल सकता… यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आपको अचानक पता चलता है कि देश में कई धर्म हैं।” कोर्ट ने पूछा, कि “क्या आप यह कह सकते हैं कि किसी शख्स को तिलक लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी?”