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  • दिशा सालियान केस में CBI ने दर्ज की FIR, आदित्य ठाकरे समेत 24 नाम जांच के घेरे में; हत्या, गैंगरेप और कथित कवर-अप की धाराओं में जांच

    दिशा सालियान केस में CBI ने दर्ज की FIR, आदित्य ठाकरे समेत 24 नाम जांच के घेरे में; हत्या, गैंगरेप और कथित कवर-अप की धाराओं में जांच

    दिशा सालियान केस में CBI ने FIR दर्ज कर जांच शुरू की। आदित्य ठाकरे, उद्धव ठाकरे, रिया चक्रवर्ती समेत 24 नामों और पुलिस-FSL अधिकारियों की भूमिका की जांच होगी।

    मुंबई: दिशा सालियान की मौत के मामले में करीब छह साल बाद बड़ा कानूनी मोड़ आया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI ने 14 सितंबर 2026 को FIR दर्ज कर मामले की जांच अपने हाथ में ले ली है। बॉम्बे हाईकोर्ट के 2 सितंबर 2026 के आदेश के बाद शुरू हुई इस कार्रवाई में हत्या, गैंगरेप, आपराधिक साजिश और कथित तौर पर सबूत दबाने, नष्ट करने या मामले को आत्महत्या का रूप देने जैसे आरोपों की जांच की जा रही है।

    इस FIR की सबसे बड़ी बात यह है कि जांच का दायरा सिर्फ बॉलीवुड से जुड़े कुछ नामों तक सीमित नहीं है। इसमें आदित्य ठाकरे, उद्धव ठाकरे, रिया चक्रवर्ती, शोविक चक्रवर्ती, डिनो मोरिया, सूरज पंचोली और रोहन रॉय के साथ पुलिस अधिकारियों, पोस्टमार्टम से जुड़े डॉक्टरों, फोरेंसिक अधिकारियों और मालवणी पुलिस से जुड़े अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई गई है।

    CBI FIR में किन-किन लोगों के नाम?

    दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान की शिकायत और बाद में CBI के सामने दर्ज बयान के आधार पर सामने आई जानकारी में निम्न नाम और पदों का उल्लेख किया गया है:

    1. आदित्य ठाकरे
    2. रोहन रॉय
    3. डिनो मोरिया
    4. सूरज पंचोली
    5. आदित्य ठाकरे के बॉडीगार्ड
    6. रिया चक्रवर्ती
    7. शोविक चक्रवर्ती
    8. सचिन वाजे
    9. परमबीर सिंह
    10. DCP विशाल ठाकुर
    11. उद्धव ठाकरे
    12. अनिल देशमुख
    13. API अशोक देवाड़े
    14. PI जगदेव कलापड़
    15. PI शैलेंद्र नगरकर
    16. PI चिमाजी आढाव
    17. PI अर्जुन राजाने
    18. मालवणी पुलिस स्टेशन के संबंधित अधिकारी
    19. देरी से पोस्टमार्टम से जुड़े डॉक्टर और स्टाफ
    20. डॉ. संजय जाधव
    21. कालिना स्थित फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी के संबंधित अधिकारी
    22. N.P. भाले, Assistant Chemical Analyser
    23. तत्कालीन संबंधित PI
    24. अन्य पुलिस अधिकारी

    इस तरह CBI की जांच का दायरा कथित घटना में मौजूद लोगों से लेकर उस समय की पुलिस जांच और फोरेंसिक प्रक्रिया तक पहुंचता है।

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    FIR में हत्या, गैंगरेप और कथित साजिश की जांच

    CBI FIR में मुख्य आपराधिक आरोपों के साथ criminal conspiracy, कथित तौर पर आत्महत्या की झूठी कहानी तैयार करने और उसे आगे बढ़ाने तथा सबूतों को दबाने, नष्ट करने या उनमें हेरफेर किए जाने के पहलुओं की जांच का उल्लेख है। FIR में सरकारी अधिकारियों और पुलिस मशीनरी की भूमिका से जुड़े आरोपों की भी जांच की जा रही है।

    दिशा के पिता सतीश सालियान ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि उनकी बेटी की मौत को जिस तरह पेश किया गया, उसमें गंभीर सवाल हैं। परिवार की ओर से हत्या और गैंगरेप के आरोप भी लगाए गए हैं। CBI अब इन आरोपों के पीछे उपलब्ध साक्ष्यों और घटनाक्रम की स्वतंत्र जांच करेगी।

    आदित्य ठाकरे से लेकर रिया चक्रवर्ती तक नाम क्यों महत्वपूर्ण?

    इस मामले में आदित्य ठाकरे का नाम सबसे ज्यादा राजनीतिक चर्चा का विषय रहा है। FIR में उनके साथ उनके बॉडीगार्ड्स का भी उल्लेख है।

    इसके अलावा रोहन रॉय की भूमिका जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण है क्योंकि दिशा जिस फ्लैट में मौजूद थीं, वह रोहन रॉय से जुड़ा था।

    डिनो मोरिया और सूरज पंचोली के नाम भी शिकायत और जांच के संदर्भ में सामने आए हैं। इसी तरह रिया चक्रवर्ती और शोविक चक्रवर्ती के नाम भी FIR में जांच के दायरे में बताए गए हैं।

    दिशा के पिता की ओर से CBI को दिए गए बयान में इन नामों के अलावा अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की मांग की गई थी।

    सचिन वाजे, परमबीर सिंह और DCP विशाल ठाकुर की भूमिका की भी जांच

    FIR का दूसरा बड़ा हिस्सा पुलिस और प्रशासनिक भूमिका से जुड़ा है।

    सचिन वाजे, पूर्व मुंबई पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह और DCP विशाल ठाकुर के साथ तत्कालीन पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच का उल्लेख है।

    इसके साथ ही API अशोक देवाड़े, PI जगदेव कलापड़, PI शैलेंद्र नगरकर, PI चिमाजी आधव और PI अर्जुन राजाने के नाम भी सामने आए हैं।

    मालवणी पुलिस स्टेशन के संबंधित अधिकारियों और तत्कालीन संबंधित PI की भूमिका भी जांच का हिस्सा है।

    यह पहलू इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दिशा की मौत के बाद शुरुआती जांच मालवणी पुलिस ने की थी और बाद में मामले में पुलिस की जांच प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठाए गए।

    पोस्टमार्टम और FSL अधिकारियों की भूमिका भी जांच में

    CBI ने केवल पुलिस कार्रवाई तक जांच सीमित नहीं रखी है। देरी से पोस्टमार्टम से जुड़े डॉक्टर और स्टाफ तथा डॉ. संजय जाधव की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

    इसी तरह कालिना स्थित फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी के संबंधित अधिकारियों और N.P. भाले, Assistant Chemical Analyser का नाम भी जांच से जुड़ा बताया गया है।

    इसका मतलब है कि CBI अब मेडिकल और फोरेंसिक रिकॉर्ड की भी दोबारा जांच करेगी और यह देखेगी कि घटनास्थल से लेकर पोस्टमार्टम और फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार होने तक पूरी प्रक्रिया में क्या हुआ था।

    हाईकोर्ट ने पहले की जांच में उठाए थे गंभीर सवाल

    CBI जांच की पृष्ठभूमि में बॉम्बे हाईकोर्ट का 2 सितंबर 2026 का आदेश बेहद महत्वपूर्ण है। अदालत ने पुरानी जांच में कई ऐसी विसंगतियों का उल्लेख किया था जिनके कारण मामले की स्वतंत्र जांच की जरूरत महसूस हुई।

    इनमें स्पॉट पंचनामा तैयार करने में देरी, पुलिस की घटनास्थल पर मौजूदगी की टाइमलाइन, ADR दर्ज करने के समय से जुड़े सवाल, CCTV रिकॉर्ड, घटनास्थल से खून के नमूने का मुद्दा, पोस्टमार्टम में दर्ज चोटें, कमरे के दरवाजे को लेकर विरोधाभास, FSL और मेडिकल रिकॉर्ड में अंतर तथा मोबाइल और लैपटॉप की जांच में हुई देरी शामिल थीं।

    हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि करीब छह साल तक चली जांच ने कई सवालों का समाधान करने के बजाय और सवाल खड़े किए। इसी कारण CBI को मामले की स्वतंत्र जांच सौंपने का आदेश दिया गया।

    पहले पुलिस और SIT का क्या निष्कर्ष था?

    दिशा सालियान की मौत के बाद मुंबई पुलिस ने मामले को ADR के तौर पर दर्ज किया था। बाद की पुलिस जांच और SIT की जांच में मौत को आत्महत्या की दिशा में देखा गया और पुलिस ने foul play के पर्याप्त सबूत नहीं मिलने की बात कही थी।

    SIT ने भी पुराने रिकॉर्ड, CCTV, कॉल डिटेल और गवाहों से जुड़ी जानकारी की दोबारा समीक्षा की थी। उसकी रिपोर्ट भी आत्महत्या के पहले के निष्कर्ष से अलग नहीं गई थी।

    अब CBI उसी जांच रिकॉर्ड, मेडिकल दस्तावेज, CCTV फुटेज, डिजिटल सामग्री, फोरेंसिक रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों की स्वतंत्र तरीके से जांच करेगी।

    दिशा सालियान और सुशांत सिंह राजपूत की मौत का कनेक्शन

    दिशा सालियान की मौत 8 जून 2020 को हुई थी और सुशांत सिंह राजपूत की मौत 14 जून 2020 को। दोनों घटनाओं के बीच छह दिन का अंतर होने के कारण दोनों मामलों को लेकर लगातार सवाल उठते रहे।

    दिशा के मामले में आदित्य ठाकरे, रिया चक्रवर्ती, शोविक चक्रवर्ती, डिनो मोरिया, सूरज पंचोली, रोहन रॉय और अन्य नामों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं।

    अब CBI की जांच में यदि दोनों घटनाओं के बीच कोई प्रमाणित आपराधिक कड़ी सामने आती है तो एजेंसी उस दिशा में भी जांच आगे बढ़ा सकती है। फिलहाल दोनों मामलों की जांच अलग-अलग रही है।

    अब CBI की जांच में क्या होगा?

    CBI अब पूरे मामले की घटनाक्रम के स्तर पर जांच करेगी। इसमें मुख्य रूप से यह देखा जाएगा कि 8 जून 2020 की रात क्या हुआ, दिशा किन लोगों के संपर्क में थीं, घटनास्थल पर कौन मौजूद था, CCTV और डिजिटल रिकॉर्ड क्या बताते हैं और पहले की पुलिस जांच में सामने आए विरोधाभासों की वास्तविक वजह क्या थी।

    इसके साथ ही एजेंसी:

    • हत्या के आरोपों की जांच करेगी
    • गैंगरेप के आरोपों की जांच करेगी
    • कथित आपराधिक साजिश की जांच करेगी
    • कथित कवर-अप और सबूत दबाने के आरोपों की जांच करेगी
    • पुलिस अधिकारियों की कार्रवाई की जांच करेगी
    • पोस्टमार्टम और मेडिकल रिकॉर्ड की जांच करेगी
    • FSL और Chemical Analysis से जुड़े रिकॉर्ड की जांच करेगी
    • CCTV, मोबाइल, लैपटॉप और अन्य डिजिटल सामग्री की दोबारा जांच करेगी
    • FIR में नामित सभी व्यक्तियों की भूमिका को उपलब्ध सबूतों के आधार पर परखेगी

    अब छह साल पुराने केस में सामने आएगा असली घटनाक्रम?

    दिशा सालियान केस में CBI की FIR ने छह साल पुराने मामले को फिर से जांच के केंद्र में ला दिया है। इस बार जांच का दायरा केवल दिशा की मौत के कारण तक सीमित नहीं है, बल्कि घटना, कथित हत्या और गैंगरेप, आपराधिक साजिश, पुलिस जांच, पोस्टमार्टम, फोरेंसिक प्रक्रिया और कथित कवर-अप तक फैला हुआ है।

    सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि FIR में आदित्य ठाकरे, रोहन रॉय, डिनो मोरिया, सूरज पंचोली, आदित्य ठाकरे के बॉडीगार्ड, रिया चक्रवर्ती, शोविक चक्रवर्ती, सचिन वाजे, परमबीर सिंह, DCP विशाल ठाकुर, उद्धव ठाकरे, अनिल देशमुख, API अशोक देवाड़े, PI जगदेव कलापड़, PI शैलेंद्र नगरकर, PI चिमाजी आढाव, PI अर्जुन राजाने, डॉ. संजय जाधव, N.P. भाले और संबंधित पुलिस, मेडिकल, FSL व सुरक्षा अधिकारियों समेत पूरी जांच प्रक्रिया से जुड़े लोगों की भूमिका सामने आई है।

    अब CBI की जांच यह तय करेगी कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में से किन आरोपों को उपलब्ध साक्ष्य समर्थन देते हैं और 8 जून 2020 की रात दिशा सालियान के साथ वास्तव में क्या हुआ था।

  • पूजा से पहले 100 से ज्यादा महिलाओं की जमा पूंजी पर संकट, ज्यादा ब्याज के नाम पर लाखों की ठगी का आरोप

    पूजा से पहले 100 से ज्यादा महिलाओं की जमा पूंजी पर संकट, ज्यादा ब्याज के नाम पर लाखों की ठगी का आरोप

    पूजा से पहले 100 से ज्यादा महिलाओं की जमा पूंजी फंसने का आरोप है। ज्यादा ब्याज का भरोसा देकर पैसे जमा कराने वाली महिला के लापता होने की शिकायत पुलिस से की गई।

    पश्चिम बंगाल: पूजा का त्योहार करीब है, लेकिन 100 से ज्यादा महिलाओं के सामने अपनी वर्षों की जमा पूंजी को लेकर चिंता खड़ी हो गई है। आरोप है कि अधिक ब्याज देने का भरोसा देकर मासिक फंड के नाम पर महिलाओं से लाखों रुपये जमा कराए गए, लेकिन रकम वापस मांगने पर भुगतान नहीं किया गया। जिस महिला पर पैसे जमा कराने का आरोप है, उसके कथित तौर पर लापता होने के बाद पीड़ित महिलाएं पुलिस के पास पहुंचीं।

    ज्यादा ब्याज का भरोसा देकर जमा कराए पैसे

    मामला पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्धमान जिले का बताया जा रहा है। महिलाओं का आरोप है कि चंपा बाउरी नाम की महिला पिछले कई वर्षों से मासिक फंड के जरिए उनसे पैसे जमा करवा रही थी। उन्हें जमा रकम पर अधिक ब्याज के साथ पैसा वापस करने का भरोसा दिया गया था।

    स्थानीय जानकारी के मुताबिक, 100 से अधिक महिलाएं इस फंड में नियमित रूप से पैसे जमा करती थीं। महिलाओं का कहना है कि उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई और वर्षों की बचत इस व्यवस्था में लगाई थी।

    रकम वापस मांगने पर बढ़ी परेशानी

    कुछ समय पहले जब महिलाओं ने अपनी जमा रकम वापस मांगनी शुरू की तो कथित तौर पर परेशानी बढ़ गई। महिलाओं ने चंपा बाउरी से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन आरोप है कि इसके बाद वह उपलब्ध नहीं हुई।

    महिलाओं ने उसके परिवार से भी संपर्क कर उसके बारे में जानकारी लेने की कोशिश की। बताया जा रहा है कि वे उसके पति और मां के घर भी पहुंचीं, लेकिन वहां से भी चंपा के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी।

    100 से ज्यादा महिलाएं थाने पहुंचीं

    इसके बाद शनिवार रात बड़ी संख्या में महिलाएं एकजुट होकर कोकओवन थाने पहुंचीं। महिलाओं ने चंपा बाउरी के खिलाफ लिखित शिकायत देकर मामले की जांच और उनकी जमा रकम वापस दिलाने की मांग की।

    पीड़ित महिलाओं का आरोप है कि उन्होंने कई वर्षों तक नियमित रूप से पैसे जमा किए थे और अब रकम वापस नहीं मिलने से उनके सामने आर्थिक परेशानी खड़ी हो गई है।

    पूजा से पहले पैसों की चिंता

    त्योहार नजदीक होने के कारण महिलाओं की चिंता और बढ़ गई है। उनका कहना है कि पूजा के समय घरेलू जरूरतों और अन्य खर्चों के लिए उन्हें अपनी बचत की जरूरत है, लेकिन जमा रकम वापस नहीं मिलने से परिवारों के सामने मुश्किल पैदा हो गई है।

    फिलहाल शिकायत के आधार पर पुलिस से पूरे मामले की जांच और जमा रकम से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल की मांग की गई है। मामले में आरोपों की वास्तविकता, कुल जमा राशि और कितनी महिलाओं की रकम प्रभावित हुई है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

  • जोगेश्वरी में 417 ग्राम MD जब्त, तीन MDMA गोलियां भी मिलीं; 1.26 करोड़ की बरामदगी

    जोगेश्वरी में 417 ग्राम MD जब्त, तीन MDMA गोलियां भी मिलीं; 1.26 करोड़ की बरामदगी

    जोगेश्वरी में मुंबई क्राइम ब्रांच ने 417 ग्राम MD और तीन MDMA गोलियां जब्त कर एक आरोपी को गिरफ्तार किया। कुल बरामदगी की कीमत 1.26 करोड़ रुपये है।

    मुंबई: जोगेश्वरी पश्चिम में मुंबई क्राइम ब्रांच की मादक पदार्थ निरोधक इकाई ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 417 ग्राम मेफेड्रोन (MD) जब्त किया है। कार्रवाई में तीन MDMA गोलियां, 25 हजार रुपये नकद और एक मोबाइल फोन भी बरामद हुआ। पुलिस के अनुसार पूरी बरामदगी की अनुमानित कीमत करीब 1.26 करोड़ रुपये है। मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है।

    गश्त के दौरान मिली सूचना, घर पर हुई कार्रवाई

    यह कार्रवाई 11 सितंबर को आजाद मैदान इकाई की टीम ने की। गश्त के दौरान पुलिस को कथित तौर पर सूचना मिली कि जोगेश्वरी पश्चिम के आक्सा मस्जिद रोड इलाके में एक व्यक्ति अपने घर से नशीले पदार्थों की बिक्री कर रहा है। इसके बाद पुलिस टीम ने संदिग्ध व्यक्ति और उसके घर की तलाशी ली।

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    तलाशी के दौरान मेफेड्रोन और MDMA गोलियों के अलावा नकदी तथा एक आईफोन 15 भी जब्त किया गया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ मादक पदार्थों से संबंधित कानून के तहत मामला दर्ज किया है।

    1.26 करोड़ की कीमत में क्या-क्या शामिल है?

    पुलिस के अनुसार 417 ग्राम मेफेड्रोन की अनुमानित कीमत करीब 1.25 करोड़ रुपये है। इसके अलावा तीन MDMA गोलियों की कीमत करीब 88 हजार रुपये बताई गई है। 25 हजार रुपये नकद और मोबाइल फोन समेत पूरी बरामदगी का मूल्य लगभग 1 करोड़ 26 लाख 43 हजार रुपये बताया गया है।

    अब ड्रग्स के स्रोत की तलाश

    गिरफ्तारी के बाद पुलिस की जांच का अगला अहम हिस्सा जब्त मेफेड्रोन के स्रोत और उसके संभावित खरीदारों तक पहुंचना है। पुलिस जब्त मोबाइल फोन और अन्य साक्ष्यों की भी जांच कर रही है। हालांकि, अब तक पुलिस की ओर से फोन से मिले किसी खास संपर्क, संदेश या कथित खरीदार की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

    मुंबई में MD के मामले पहले से चिंता का विषय

    जोगेश्वरी की यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब मुंबई में मेफेड्रोन समेत अन्य मादक पदार्थों के खिलाफ लगातार कार्रवाई हो रही है। 2026 की पहली तिमाही में मुंबई में 1,332 मादक पदार्थों से जुड़े मामले दर्ज किए गए थे और 1,287 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इस दौरान जब्त नशीले पदार्थों का कुल मूल्य 37 करोड़ रुपये से अधिक बताया गया था।

    इसी अवधि में मेफेड्रोन से जुड़े 82 मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई थी। वर्ष 2025 में मुंबई में MD से जुड़े 275 मामले दर्ज किए गए थे।

    हाल के दिनों में मुंबई और आसपास के इलाकों में अलग-अलग मामलों में MD की बड़ी खेप भी पकड़ी गई है। हालांकि, इन मामलों को जोगेश्वरी की वर्तमान कार्रवाई से जोड़ने की पुलिस की ओर से कोई पुष्टि नहीं हुई है।

    क्या किसी बड़े आपूर्ति नेटवर्क तक पहुंचेगी जांच?

    जोगेश्वरी मामले में अभी यह स्पष्ट नहीं है कि 417 ग्राम MD आरोपी तक कैसे पहुंचा और इसकी आपूर्ति किसे की जानी थी। हाल में मुंबई महानगर क्षेत्र में सामने आए कुछ अलग मामलों में जांच स्थानीय स्तर के आरोपियों से आगे बढ़कर कथित निर्माण और आपूर्ति नेटवर्क तक पहुंची है।

    ऐसे में जोगेश्वरी मामले में भी जांच का महत्वपूर्ण पहलू यह रहेगा कि पुलिस जब्त मादक पदार्थ के स्रोत और उससे जुड़े संभावित संपर्कों की पहचान कर पाती है या नहीं। फिलहाल इस मामले को किसी बड़े नेटवर्क से जोड़ने की पुष्टि नहीं हुई है।

    मामले की आगे की जांच जारी है। पुलिस की जांच से अब यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि जब्त MD का स्रोत क्या था, इसकी आपूर्ति कहां की जानी थी और क्या इस मामले में आगे किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है।

  • Cheque Bounce Case: सजा के बाद समझौते से खत्म हुई Conviction, Bombay HC के फैसले का असर

    Cheque Bounce Case: सजा के बाद समझौते से खत्म हुई Conviction, Bombay HC के फैसले का असर

    Cheque Bounce Case में समझौते के बाद दोषसिद्धि खत्म करने का रास्ता कैसे खुलता है? Bombay HC के 2019 फैसले और 2026 के Supreme Court आदेश से समझिए।

    मुंबई: चेक बाउंस मामले में दोषसिद्धि के बाद भी समझौते से राहत मिल सकती है। बॉम्बे हाई कोर्ट के 4 अक्टूबर 2019 के एक फैसले में ललिता कमल व्यास की दोषसिद्धि और उसके खिलाफ पारित निचली अदालतों के आदेश रद्द कर दिए गए थे। इस पुराने फैसले की कानूनी अहमियत अब इसलिए फिर सामने आती है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने 2025 और 2026 में भी चेक अनादरण के मामलों में दोषसिद्धि के बाद समझौते को स्वीकार करते हुए राहत दी है।

    ललिता कमल व्यास मामले में क्या हुआ था?

    ललिता कमल व्यास को मुंबई के अंधेरी स्थित 48वें महानगरीय मजिस्ट्रेट न्यायालय ने परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत दोषी ठहराया था। यह मामला C.C. No. 4281/SS/2017 से संबंधित था। 8 मार्च 2018 के इस आदेश को चुनौती दी गई, लेकिन 19 जनवरी 2019 को सत्र न्यायालय ने भी दोषसिद्धि को बरकरार रखा। इसके बाद मामला बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंचा।

    हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता और ललिता कमल व्यास के बीच विवाद आपसी समझौते से समाप्त हो गया। दोनों पक्षों ने 1 अक्टूबर 2019 को समझौता शर्तें और सहमति पत्र तैयार किया। शिकायतकर्ता की ओर से शपथपत्र भी दिया गया, जिसमें उसने आरोपी के खिलाफ आगे कोई शिकायत या दावा नहीं होने की बात कही।

    शिकायतकर्ता अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुआ और समझौते की पुष्टि की। इसके बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने निचली अदालत और सत्र न्यायालय के आदेशों को रद्द करते हुए ललिता कमल व्यास को धारा 138 के अपराध से बरी कर दिया। यह फैसला न्यायमूर्ति एस.एस. शिंदे ने 4 अक्टूबर 2019 को सुनाया था।

    क्या दोषसिद्धि के बाद भी चेक बाउंस मामले में समझौता हो सकता है?

    यही इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण कानूनी पहलू है।

    परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 147 के तहत धारा 138 का अपराध समझौते के जरिए समाप्त किया जा सकता है। इसका मतलब यह है कि मामला केवल इसलिए खत्म होने की संभावना से बाहर नहीं हो जाता कि आरोपी को पहले ही दोषी ठहराया जा चुका है।

    हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच निजी समझौता होते ही दोषसिद्धि अपने आप समाप्त हो जाती है। समझौते को न्यायिक प्रक्रिया के तहत स्वीकार किया जाना जरूरी है और अदालत के सामने पक्षों की सहमति तथा समझौते की शर्तों को रिकॉर्ड पर लाना महत्वपूर्ण होता है।

    2025 में सुप्रीम कोर्ट ने भी यही सिद्धांत दोहराया

    इस कानूनी स्थिति को अगस्त 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने और स्पष्ट किया।

    Gian Chand Garg बनाम Harpal Singh मामले में आरोपी को धारा 138 के तहत दोषी ठहराया गया था। निचली अदालत की दोषसिद्धि को अपीलीय अदालत ने बरकरार रखा और पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में पुनरीक्षण याचिका भी खारिज हो गई। इसके बाद 6 अप्रैल 2025 को शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच समझौता हुआ।

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि धारा 147 के कारण धारा 138 का अपराध समझौते योग्य है और पक्षों के स्वैच्छिक समझौते की स्थिति में कार्यवाही को उचित चरण पर समाप्त किया जा सकता है। अदालत ने शिकायतकर्ता द्वारा पूर्ण और अंतिम समझौते के रूप में राशि स्वीकार किए जाने के बाद दोषसिद्धि और सजा को रद्द कर दिया।

    2026 का सुप्रीम कोर्ट फैसला: जेल जाने के बाद भी मिली राहत

    इस कानूनी स्थिति का सबसे ताजा और महत्वपूर्ण उदाहरण Parsharvanath Weld Wires Pvt. Ltd. बनाम State of Chhattisgarh है।

    इस मामले में धारा 138 के तहत दोषसिद्धि के बाद आरोपी को एक वर्ष के साधारण कारावास और शिकायतकर्ता को 28 लाख रुपये मुआवजा देने की सजा मिली थी। सत्र न्यायालय और बाद में हाई कोर्ट ने भी दोषसिद्धि को बरकरार रखा।

    मामला यहां तक पहुंच गया कि कंपनी के निदेशक को 23 अप्रैल 2026 को सजा भुगतने के लिए जेल भेज दिया गया। इसके केवल दो दिन बाद, 25 अप्रैल को दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया। समझौते के तहत शिकायतकर्ता को 30 लाख रुपये देकर पूरे विवाद का अंतिम निपटारा किया गया।

    निचली अदालत और हाई कोर्ट ने अंतिम दोषसिद्धि के बाद मामले को दोबारा खोलने पर राहत देने से इनकार किया। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 को समझौता स्वीकार करते हुए धारा 138 के अपराध को समझौते के जरिए समाप्त किया और दोषसिद्धि तथा सजा को रद्द कर दिया। अदालत ने केंद्रीय जेल, रायपुर के अधीक्षक को आरोपी को तत्काल रिहा करने का निर्देश भी दिया।

    इसका सीधा मतलब क्या है?

    इन फैसलों से यह स्पष्ट होता है कि चेक बाउंस मामले में दोषसिद्धि हो जाने के बाद भी समझौते का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं होता।

    लेकिन इसे स्वतः मिलने वाली राहत नहीं माना जा सकता। शिकायतकर्ता की स्वैच्छिक सहमति, समझौते की वास्तविक शर्तें, भुगतान और मामले की न्यायिक स्थिति जैसे पहलू महत्वपूर्ण होते हैं। अदालत ही यह तय करती है कि समझौते को स्वीकार कर दोषसिद्धि और सजा समाप्त की जा सकती है या नहीं।

    2025 के Gian Chand Garg फैसले और 2026 के Parsharvanath Weld Wires फैसले ने इस बात को और मजबूत किया है कि केवल इस आधार पर समझौते को अस्वीकार नहीं किया जा सकता कि धारा 138 के मामले में दोषसिद्धि पहले ही अंतिम स्तर तक पहुंच चुकी है।

    ललिता कमल व्यास के फैसले की आज क्यों चर्चा हो रही है?

    ललिता कमल व्यास का मामला स्वयं 2026 का नया फैसला नहीं है। बॉम्बे हाई कोर्ट का मूल निर्णय 4 अक्टूबर 2019 का है। हाल में कानूनी वेबसाइटों पर इस पुराने फैसले को दोबारा प्रकाशित या सूचीबद्ध किए जाने के कारण यह मामला फिर सामने आया है।

    इसकी मौजूदा प्रासंगिकता इसलिए है क्योंकि 2025 और 2026 में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों ने उसी व्यापक कानूनी सिद्धांत को आगे स्पष्ट किया है—यानी धारा 138 के मामले में स्वैच्छिक समझौते के बाद, उचित न्यायिक प्रक्रिया के जरिए दोषसिद्धि और सजा समाप्त की जा सकती है।

    क्या हर चेक बाउंस मामले में समझौते के बाद सजा खत्म हो जाएगी?

    नहीं। ऐसा कोई स्वतः लागू होने वाला नियम नहीं है।

    समझौता होने के बाद भी उसे अदालत के समक्ष उचित तरीके से प्रस्तुत करना और न्यायिक आदेश प्राप्त करना जरूरी है। इसके अलावा, समझौते की शर्तें पूरी हुई हैं या नहीं और शिकायतकर्ता की सहमति वास्तविक और स्वैच्छिक है या नहीं, यह भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

    इसलिए धारा 138 के किसी मामले में केवल निजी समझौता हो जाने को अपने आप दोषसिद्धि समाप्त होने के बराबर नहीं माना जाना चाहिए।

    आम लोगों के लिए क्या मायने रखता है?

    चेक अनादरण के मामलों में मुकदमा लंबा चलने के बावजूद विवाद को समझौते से समाप्त करने का रास्ता उपलब्ध रह सकता है। यहां तक कि दोषसिद्धि के बाद भी अदालत के समक्ष समझौते के आधार पर राहत मांगी जा सकती है।

    ललिता कमल व्यास का 2019 का बॉम्बे हाई कोर्ट फैसला और 2025-26 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले मिलकर यह दिखाते हैं कि धारा 138 के मामलों में समझौता केवल मुकदमे की शुरुआती अवस्था तक सीमित विकल्प नहीं है।

    हालांकि, अंतिम राहत अदालत के आदेश पर निर्भर करती है और प्रत्येक मामले के तथ्य तथा समझौते की शर्तें अलग हो सकती हैं।

  • गोरेगांव में कपड़ों को लेकर दोस्त की हत्या, पत्थर से चेहरे पर वार

    गोरेगांव में कपड़ों को लेकर दोस्त की हत्या, पत्थर से चेहरे पर वार

    मुंबई के गोरेगांव में कपड़े और निजी सामान के विवाद में 26 वर्षीय युवक की मौत हो गई। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू की है।

    मुंबई: गोरेगांव पश्चिम में कपड़े और निजी सामान इस्तेमाल करने को लेकर दो दोस्तों के बीच हुआ विवाद जानलेवा हो गया। पुलिस के मुताबिक, 26 वर्षीय सूरज शंकर डोले पर उसके दोस्त बाबासाहेब उर्फ सुबोध भीमराव वाघमारे ने कथित तौर पर पहले हाथों से हमला किया और फिर फुटपाथ पर पड़ा पत्थर उसके चेहरे पर मार दिया। गंभीर चोटों के बाद सूरज की मौत हो गई। आरोपी घटना के बाद मौके से फरार हो गया और पुलिस उसकी तलाश कर रही है।

    गोरेगांव पश्चिम में कहां हुई घटना?

    पुलिस के अनुसार, घटना 9 सितंबर की रात करीब 11:30 बजे गोरेगांव पश्चिम में एसवी रोड पर किंग स्टूडियो के पास, उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक के सामने हुई। मृतक सूरज डोले मीरा रोड का रहने वाला था और गोरेगांव में पशु देखभाल के क्षेत्र में काम करता था। आरोपी सुबोध वाघमारे भी इसी क्षेत्र में काम करता था।

    कपड़े ही नहीं, बैग और निजी सामान को लेकर था विवाद

    पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, सूरज कथित तौर पर सुबोध के कपड़े और दूसरी निजी चीजें उसकी अनुमति के बिना इस्तेमाल करता था। सुबोध ने यह भी आरोप लगाया कि सूरज उसके कपड़ों से भरा बैग लेकर गया था और मांगने के बावजूद वापस नहीं किया था। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद चल रहा था।

    घटना के समय दोनों के बीच बहस हो रही थी। उनके दोस्त सुधांशु पांडे ने बीच-बचाव करते हुए झगड़े की वजह पूछी। शिकायत के अनुसार, इसी दौरान सुबोध ने सूरज के कपड़े और सामान इस्तेमाल करने की बात कही।

    बहस के बाद पत्थर से चेहरे पर हमला

    एफआईआर में दर्ज विवरण के मुताबिक, बहस के दौरान सूरज ने कथित तौर पर सुबोध को गाली दी। इसके बाद सुबोध ने उस पर हाथों से हमला किया। विवाद बढ़ने पर उसने फुटपाथ पर पड़ा पत्थर उठाकर सूरज के चेहरे पर वार कर दिया।

    हमले में सूरज को गंभीर चोट लगी और काफी खून बहा। इसके बाद सुबोध मौके से फरार हो गया। बाद में सूरज मृत पाया गया।

    पिता की शिकायत पर हत्या का मामला दर्ज

    मामले में सूरज के पिता शंकर डोले की शिकायत के आधार पर गोरेगांव पुलिस ने मामला दर्ज किया है। आरोपी की पहचान बाबासाहेब उर्फ सुबोध भीमराव वाघमारे के रूप में हुई है। उसकी उम्र 37 वर्ष बताई गई है। पुलिस के मुताबिक, वह पशु देखभाल का काम करता है और गोरेगांव पश्चिम में फुटपाथ पर रहता है।

    पुलिस ने हत्या समेत अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। उपलब्ध एफआईआर की रिपोर्ट में भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1), 115(2) और 352 का उल्लेख है।

    आरोपी की तलाश जारी

    घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। मामले की जांच पुलिस निरीक्षक मनोज गाडले के नेतृत्व में की जा रही है। पुलिस अब घटना के पूरे घटनाक्रम और आरोपी की तलाश से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है।

    घटना को लेकर उपलब्ध जानकारी में अभी सीसीटीवी फुटेज, हमले में इस्तेमाल पत्थर की बरामदगी या पोस्टमार्टम की विस्तृत रिपोर्ट जैसी जानकारियां सामने नहीं आई हैं। इन पहलुओं पर पुलिस की आगे की कार्रवाई से मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

  • 36 की उम्र में 35 अपराध, एक तमंचा और 3 जिंदा कारतूस के साथ गोरेगांव में गिरफ्तार

    36 की उम्र में 35 अपराध, एक तमंचा और 3 जिंदा कारतूस के साथ गोरेगांव में गिरफ्तार

    गोरेगांव में वनराई पुलिस ने 36 वर्षीय रोहित सावंत को तमंचा और 3 जिंदा कारतूस के साथ गिरफ्तार किया। आरोपी पर 35 मामले दर्ज हैं।

    मुंबई: गोरेगांव पूर्व में आगामी उत्सव से पहले वनराई पुलिस ने अवैध हथियार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 36 वर्षीय रोहित अविनाश सावंत को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार उसके पास से एक तमंचा और तीन जिंदा कारतूस बरामद हुए हैं। खास बात यह है कि आरोपी के खिलाफ पहले से 35 मामले दर्ज होने की जानकारी पुलिस ने दी है।

    यह कार्रवाई 9 सितंबर को पुलिस उपनिरीक्षक प्रदीप शिंदे और एटीसी पथक को मिली गुप्त सूचना के आधार पर की गई। सूचना मिली थी कि रोहित सावंत शिवधाम हिंदू श्मशानभूमि के बाहर, पश्चिम द्रुतगति महामार्ग की दक्षिण दिशा में गोरेगांव पूर्व में मौजूद है। सूचना की पुष्टि के बाद वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में दो पुलिस टीमें तैयार की गईं और मौके पर जाल बिछाया गया।

    कमर के पास मिला तमंचा

    पुलिस के मुताबिक आरोपी मौके पर दिखाई देने के बाद टीम ने उसे हिरासत में लिया। पूछताछ में उसकी पहचान रोहित अविनाश सावंत, उम्र 36 वर्ष, निवासी मलपा डोंगरी नंबर-1, चकाला, अंधेरी पूर्व के रूप में हुई।

    तलाशी के दौरान उसकी कमर के पास लोहे की नली और काली मुठ वाला एक तमंचा मिला। पुलिस ने इसकी अनुमानित कीमत 55 हजार रुपये बताई है। वहीं दाहिनी जेब से तीन जिंदा कारतूस बरामद हुए। पुलिस के अनुसार हथियार और कारतूस की कुल अनुमानित कीमत 58 हजार रुपये है।

    पुलिस के अनुसार आरोपी के पास हथियार रखने का कोई वैध लाइसेंस नहीं था। इसके बाद वनराई पुलिस थाने में अपराध क्रमांक 675/2026 के तहत मामला दर्ज किया गया।

    आरोपी पर पहले से 35 मामले

    पुलिस के अनुसार रोहित सावंत के खिलाफ पहले से 35 मामले दर्ज हैं। हालांकि पुलिस की ओर से जारी जानकारी में इन मामलों की धाराओं और उनकी वर्तमान स्थिति का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।

    मौजूदा मामले में पुलिस उसके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड के साथ हथियार बरामदगी के संबंध की भी जांच कर रही है। हथियार उसे कहां से मिला और इसके पीछे किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका है या नहीं, यह भी जांच का अहम हिस्सा हो सकता है।

    आगामी उत्सव के दौरान किस काम के लिए लाया था हथियार?

    इस मामले का सबसे अहम पहलू आगामी उत्सव को लेकर पुलिस की जांच है। गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को है और यह कार्रवाई उत्सव शुरू होने से कुछ दिन पहले हुई है। पुलिस के मुताबिक अब यह पता लगाया जा रहा है कि रोहित सावंत यह अवैध हथियार आगामी उत्सव की अवधि में किस उद्देश्य से लेकर आया था।

    फिलहाल पुलिस ने आरोपी द्वारा किसी विशेष वारदात की तैयारी या किसी व्यक्ति को निशाना बनाने की पुष्टि नहीं की है। इसलिए जांच पूरी होने से पहले हथियार बरामदगी को किसी संभावित हमले या साजिश से जोड़ना उचित नहीं होगा।

    वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में कार्रवाई

    इस कार्रवाई में पुलिस आयुक्त, संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था), अतिरिक्त पुलिस आयुक्त उत्तर प्रादेशिक विभाग, पुलिस उपायुक्त उत्तर प्रादेशिक विभाग-3 और सहायक पुलिस आयुक्त दिंडोशी के मार्गदर्शन में कार्रवाई की गई।

    वनराई पुलिस के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक अब्दुल रऊफ शेख, पुलिस निरीक्षक सुभाषचंद्र पोस्टुरे, पुलिस निरीक्षक संदीप वाघमारे तथा पुलिस उपनिरीक्षक प्रदीप शिंदे की टीम ने कार्रवाई में भूमिका निभाई। पुलिसकर्मी 01920/सालुंखे, 041277/तेली और पुलिस सिपाही 140073/शिंदे भी कार्रवाई में शामिल रहे।

    मामले में वनराई पुलिस ने अपराध क्रमांक 675/26 दर्ज किया है। आरोपी के खिलाफ आर्म्स एक्ट की धारा 3 और 25 तथा महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम की धारा 37(1)(अ) और 135 के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस अब हथियार की आपूर्ति, आरोपी के पुराने मामलों और हथियार रखने के वास्तविक उद्देश्य से जुड़ी जानकारी जुटा रही है।

  • ‘मुझे जल्दी लखपति बनना था’, शराब तस्करी में पकड़ी गई महिला ने पुलिस के सामने उगले राज

    ‘मुझे जल्दी लखपति बनना था’, शराब तस्करी में पकड़ी गई महिला ने पुलिस के सामने उगले राज

    शराब तस्करी में पकड़ी गई सीतामढ़ी की महिला से पूछताछ में कई अहम बातें सामने आईं। 68 लीटर शराब गुप्त तहखाने से बरामद हुई थी।

    बिहार: बगहा में शराब तस्करी के मामले में गिरफ्तार सीतामढ़ी की एक महिला से पूछताछ के दौरान तस्करी के तरीके को लेकर कई अहम जानकारी सामने आई है। महिला समेत तीन लोगों को उस समय गिरफ्तार किया गया था, जब चारपहिया वाहन से करीब 68 लीटर अंग्रेजी शराब बरामद हुई। शराब वाहन के अंदर बनाए गए गुप्त तहखाने में छिपाकर रखी गई थी।

    पूछताछ में महिला ने कथित तौर पर बताया कि वह शराब लदी गाड़ियों में साथ चलने के बदले पैसे लेती थी। उसे उम्मीद थी कि परिवार की महिला के साथ होने पर वाहन पुलिस की जांच से बच सकता है। महिला के अनुसार, इसी लालच में वह इस काम से जुड़ी थी।

    रोजाना 10 हजार रुपये मिलने का दावा

    उत्पाद विभाग से जुड़ी जानकारी के अनुसार, महिला ने पूछताछ में बताया कि शराब लदी गाड़ी में सफर करने के लिए उसे प्रतिदिन 10 हजार रुपये दिए जाते थे। वह उत्तर प्रदेश की ओर से आने वाली शराब की गाड़ियों में घरेलू महिला की तरह बैठती थी।

    तस्करों की कथित रणनीति यह थी कि वाहन में महिला या परिवार का सदस्य दिखाई देने पर पुलिस का शक कम हो सकता है। हालांकि इस बयान से जुड़े सभी विवरणों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं है, इसलिए इन्हें पूछताछ में सामने आई जानकारी के तौर पर ही देखा जा रहा है।

    गाड़ी में बना था शराब छिपाने का गुप्त तहखाना

    उत्पाद विभाग की टीम धनहा पुल चेकपोस्ट पर वाहनों की जांच कर रही थी। इसी दौरान एक चारपहिया वाहन को रोककर उसकी जांच की गई। चालक ने महिला को अपनी रिश्तेदार बताते हुए वाहन से बेतिया जाने की बात बताई।

    जांच के दौरान वाहन की स्क्रीनिंग की गई तो सीट और गेट के अंदर बनाए गए गुप्त हिस्से का पता चला। सघन तलाशी लेने पर वहां से करीब 68 लीटर अंग्रेजी शराब बरामद हुई। इसके बाद वाहन चालक समेत तीन आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया।

    गिरफ्तार आरोपितों में उत्तर प्रदेश के तरबगंज क्षेत्र का अवध किशोर पांडेय, सीतामढ़ी के बथनाहा क्षेत्र का संजीव कुमार और सीतामढ़ी जिले की महिला शामिल है। शराब और वाहन को भी जब्त किया गया है।

    तस्करी के नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश

    उत्पाद विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि शराब की खेप कहां से लाई गई थी और इसे किस स्थान पर पहुंचाया जाना था। गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ के आधार पर तस्करी में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। मामले में मद्यनिषेध कानून के तहत कार्रवाई शुरू की गई है।

    इस घटना के बाद भी इलाके में शराब तस्करी के खिलाफ कार्रवाई जारी है। 8 सितंबर को धनहा थाना पुलिस ने एक कार से 624 बोतल अंग्रेजी शराब बरामद की। पुलिस के अनुसार वाहन जांच के दौरान चालक कार छोड़कर फरार हो गया। कार के अंदर 13 कार्टन में शराब मिली, जिसके बाद वाहन नंबर के आधार पर उसके मालिक और शराब कारोबारी की पहचान की जा रही है।

    लगातार सामने आ रही ऐसी कार्रवाइयों के बीच अब जांच एजेंसियों की नजर केवल शराब की बरामदगी तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बात पर भी है कि सीमा क्षेत्र में शराब पहुंचाने और आगे सप्लाई करने वाले नेटवर्क के पीछे कौन लोग हैं। महिला से हुई पूछताछ इसी कड़ी में अहम मानी जा रही है। मामले में आगे की जांच जारी है।

  • मुंबई में फर्जी PMO ID और हथियार का मामला: दो गिरफ्तार, आरोपी ने कहा- “मेरे साथ फ्रॉड हुआ है”

    मुंबई में फर्जी PMO ID और हथियार का मामला: दो गिरफ्तार, आरोपी ने कहा- “मेरे साथ फ्रॉड हुआ है”

    मुंबई के BKC में फर्जी PMO ID और हथियार के मामले में दो गिरफ्तार हुए। कोर्ट में आरोपी ने दावा किया कि उसके साथ फ्रॉड हुआ है।

    मुंबई: बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे से पहले फर्जी PMO पहचान पत्र और हथियार के साथ प्रवेश के मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य आरोपी की ओर से कोर्ट में दावा किया गया कि “मेरे साथ फ्रॉड हुआ है।”**

    पुलिस के मुताबिक, घटना BKC के Jio World परिसर से जुड़े इलाके में सामने आई। एक व्यक्ति ने कथित तौर पर खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से जुड़ा अधिकारी बताया था। उसके साथ मौजूद व्यक्ति के पास हथियार मिला। हालांकि, मुंबई पुलिस ने फिलहाल कहा है कि इस घटना का प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रम से कोई सीधा संबंध सामने नहीं आया है।

    BKC में कैसे सामने आया मामला?

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुंबई दौरे को देखते हुए 7 सितंबर को BKC इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी थी। इसी दौरान सुरक्षा जांच के बीच एक व्यक्ति की पहचान और गतिविधियों पर संदेह हुआ।

    पुलिस जांच के अनुसार, उस व्यक्ति ने कथित तौर पर PMO का पहचान पत्र दिखाया। जांच में पहचान पत्र की authenticity पर सवाल उठे और बाद में इसे फर्जी बताया गया।

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    गिरफ्तार आरोपी को कोर्ट से बाहर लाते मुंबई पुलिस की तस्वीर

    खबर के मुताबिक, कथित ID में पदनाम और validity से जुड़ी विसंगतियां थीं। इसी दौरान साथ मौजूद व्यक्ति की तलाशी में हथियार बरामद हुआ।

    दो लोगों की गिरफ्तारी

    मामले में पुलिस ने रोहन प्रेमल पारेख और दिलीप राजाराम कुंडे को गिरफ्तार किया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कुंडे के पास मिला firearm लाइसेंसी बताया गया है।

    पुलिस अब यह पता लगा रही है कि हथियार किसके नाम पर है और उसे हाई-सिक्योरिटी वाले इलाके में किन परिस्थितियों में लाया गया था।

    मामले में एक तीसरे व्यक्ति की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस ने इस मामले में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है।

    कोर्ट में आरोपी ने कहा- “मेरे साथ फ्रॉड हुआ है”

    मामले में सबसे अहम नया मोड़ कोर्ट की सुनवाई के दौरान सामने आया। मुख्य आरोपी की ओर से बचाव पक्ष ने दावा किया कि उसे कथित तौर पर एक offer letter, पहचान पत्र और कुछ सरकारी communications मिले थे।

    बचाव पक्ष के मुताबिक, आरोपी को विश्वास दिलाया गया था कि वह किसी सरकारी या PMO से जुड़ी भूमिका में है। इसी आधार पर यह दावा किया गया कि आरोपी खुद किसी धोखाधड़ी का शिकार हो सकता है।

    हालांकि, यह आरोपी और उसके बचाव पक्ष का दावा है, जिसकी पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।

    अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कथित PMO ID और offer letter किसने तैयार किए तथा ये दस्तावेज आरोपी तक कैसे पहुंचे।

    फर्जी PMO ID की जांच क्यों महत्वपूर्ण?

    किसी सरकारी संस्था की पहचान का कथित तौर पर इस्तेमाल इस मामले को सामान्य पहचान संबंधी विवाद से आगे ले जाता है।

    पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ID वास्तव में कहां तैयार हुई, उसे किसने आरोपी को दिया और क्या इसके पीछे किसी अन्य व्यक्ति या नेटवर्क की भूमिका है।

    आरोपियों के मोबाइल फोन और communications से भी इस कड़ी को जोड़ने की कोशिश की जा रही है।

    हथियार लाइसेंसी था, फिर भी सवाल क्यों उठे?

    बरामद firearm के लाइसेंसी होने की बात सामने आई है। लेकिन पुलिस की जांच केवल हथियार के लाइसेंस तक सीमित नहीं है।

    जांच में यह भी देखा जा रहा है कि हथियार किसके नाम पर था, उसे लेकर आरोपी वहां क्यों पहुंचा और उस स्थान पर हथियार ले जाने की परिस्थितियां क्या थीं।

    क्या PM मोदी के कार्यक्रम से था कोई संबंध?

    मुंबई पुलिस के अनुसार, अब तक आरोपियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम के बीच कोई सीधा संबंध सामने नहीं आया है।

    घटना ऐसे समय हुई जब PM मोदी के दौरे को लेकर BKC में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई थी। इसी वजह से फर्जी PMO ID और हथियार से जुड़ी जानकारी सामने आते ही पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया।

    जांच में अब क्या पता लगाना बाकी है?

    पुलिस की जांच मुख्य रूप से इन सवालों पर केंद्रित है कि कथित फर्जी PMO ID किसने बनाई, आरोपी को यह दस्तावेज कैसे मिला और उसके पास मौजूद कथित offer letter व communications का स्रोत क्या था।

    इसके अलावा, आरोपी के BKC पहुंचने का वास्तविक उद्देश्य, हथियार की परिस्थितियां और मामले में तीसरे व्यक्ति की भूमिका भी जांच का हिस्सा है।

    सबसे अहम सवाल यह है कि क्या आरोपी वास्तव में किसी सरकारी पहचान के नाम पर ठगा गया था या उसने जानबूझकर फर्जी पहचान का इस्तेमाल किया?

    इसका जवाब जांच में सामने आने वाले दस्तावेजों, डिजिटल सबूतों और पूछताछ के आधार पर ही स्पष्ट होगा।

    फिलहाल पुलिस जांच जारी

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुंबई में Global Fintech Fest 2026 से जुड़े कार्यक्रम के लिए आए थे। उनके दौरे से पहले BKC में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई थी।

    इसी दौरान सामने आए फर्जी PMO ID और हथियार के मामले में दो आरोपी पुलिस कार्रवाई का सामना कर रहे हैं। वहीं, “मेरे साथ फ्रॉड हुआ है” वाला आरोपी का दावा भी जांच के दायरे में है।

    अब जांच का फोकस कथित फर्जी पहचान पत्र के स्रोत, दस्तावेज तैयार करने वाले व्यक्ति और आरोपियों की वास्तविक मंशा का पता लगाने पर है।

  • ससुर की मौत पर फूट-फूटकर रोई, फिर खुला खौफनाक राज; 14 कॉल और डुप्लीकेट चाबी ने खोली करोड़पति कारोबारी की हत्या की गुत्थी

    ससुर की मौत पर फूट-फूटकर रोई, फिर खुला खौफनाक राज; 14 कॉल और डुप्लीकेट चाबी ने खोली करोड़पति कारोबारी की हत्या की गुत्थी

    विनीत मिनोचा हत्याकांड में बहू शालू पर साजिश का आरोप है। 14 कॉल, डुप्लीकेट चाबी, CCTV, गार्ड का बयान और ₹6 लाख की कथित सुपारी ने जांच की दिशा बदल दी।

    कानपुर: कहानी की शुरुआत एक ऐसी रात से होती है, जब घर का परिवार पार्टी में बाहर था और 63 वर्षीय दवा कारोबारी विनीत मिनोचा अपने फ्लैट में अकेले थे। कुछ ही देर बाद उसी फ्लैट में दो लोग दाखिल हुए। पुलिस के मुताबिक, दोनों किसी लूट के इरादे से नहीं आए थे, बल्कि उनका निशाना सिर्फ विनीत मिनोचा थे।

    सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि फ्लैट में जबरन घुसने के निशान नहीं मिले। पुलिस की जांच में डुप्लीकेट चाबी का एंगल सामने आया। इसके बाद CCTV, गार्ड के बयान और मोबाइल कॉल डिटेल ने इस केस की दिशा बदल दी।

    जिस बहू शालू को ससुर की मौत के बाद रोते हुए देखा गया, पुलिस की जांच अब उसी पर हत्या की कथित साजिश रचने का आरोप लगा रही है। पुलिस ने शालू को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। हालांकि, यह आरोप अभी पुलिस की जांच और केस की कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है; अंतिम सच अदालत में तय होगा।

    आखिर उस रात हुआ क्या था?

    वारदात कल्याणपुर के रतन ऑर्बिट अपार्टमेंट के C-104 फ्लैट में हुई। विनीत मिनोचा उस रात घर में अकेले थे, जबकि उनका बेटा सुब्रत, बहू शालू और उनका छह साल का बच्चा पार्टी के लिए बाहर गए थे।

    पुलिस की जांच के मुताबिक, दो संदिग्ध पहले ही फ्लैट के अंदर पहुंच चुके थे। CCTV फुटेज में दोनों के अंदर आने की जानकारी सामने आई। इसके बाद विनीत घर लौटे। पुलिस के मुताबिक, जब वह फ्लैट के कमरों की जांच और लॉक करने पहुंचे तो उन्हें अंदर मौजूद लोगों का पता चला और इसके बाद उन पर हमला कर दिया गया।

    विनीत की हत्या चाकू से की गई। उनके शरीर पर 26 से ज्यादा चोट/चाकू के वार बताए गए हैं।

    रात बीतने के बाद जब परिवार वापस लौटा तो घर के अंदर विनीत का शव मिला। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई और जांच शुरू हुई।

    क्या यह लूट के लिए की गई हत्या थी?

    शुरुआत में पुलिस के सामने हत्या का मामला था, लेकिन घटनास्थल से ऐसी तस्वीर नहीं मिली जिससे लूट मुख्य मकसद लगे।

    पुलिस के अनुसार, घर से कोई महत्वपूर्ण सामान लेकर जाने की बात सामने नहीं आई। यही बिंदु जांच में अहम बना। अगर मकसद चोरी या लूट था, तो घर में मौजूद सामान और संपत्ति को निशाना क्यों नहीं बनाया गया?

    यहीं से पुलिस का शक किसी खास व्यक्ति को निशाना बनाकर की गई हत्या की तरफ बढ़ा। इसके बाद CCTV और घर में आरोपियों के प्रवेश के तरीके ने जांच को नया मोड़ दिया।

    डुप्लीकेट चाबी ने क्यों बदल दी पूरी कहानी?

    इस केस का सबसे महत्वपूर्ण सुराग डुप्लीकेट चाबी को माना जा रहा है।

    पुलिस के मुताबिक, शालू ने कथित तौर पर विशाल को फ्लैट की डुप्लीकेट चाबी उपलब्ध कराई थी। आरोप है कि इसी चाबी के जरिए विशाल और उसका साथी राजकिशोर फ्लैट के अंदर पहुंचे।

    प्राप्त जानकारी के मुताबिक, CCTV में दोनों के चाबी के जरिए फ्लैट में दाखिल होने की बात सामने आई। यानी दरवाजे को तोड़ने या जबरन प्रवेश करने जैसी स्थिति नहीं बनी।

    यही वजह है कि पुलिस के सामने सवाल खड़ा हुआ कि घर की चाबी बाहर के लोगों तक कैसे पहुंची?

    जांच में पुलिस का दावा है कि शालू ने आरोपियों को अंदर जाने में मदद की और उन्हें बताया गया कि घर खाली है।

    गार्ड ने पुलिस को क्या बताया?

    रतन ऑर्बिट अपार्टमेंट के सिक्योरिटी इंचार्ज मदन का बयान भी जांच में अहम माना जा रहा है।

    पुलिस के अनुसार, घटना वाली रात विशाल अपने साथी के साथ फ्लैट पर पहुंचा था। गार्ड ने उन्हें अंदर जाने की अनुमति देने से इनकार किया।

    इसके बाद विशाल ने कथित तौर पर शालू से फोन पर बात कराई। पुलिस के मुताबिक, शालू ने गार्ड से दोनों को अंदर जाने देने को कहा और बताया कि वे दवाएं लेकर आए हैं। इसके बाद दोनों को अंदर जाने दिया गया।

    अब पुलिस इस बयान का मिलान CCTV फुटेज और एंट्री रजिस्टर से कर रही है।

    14 कॉल ने पुलिस का शक कैसे बढ़ाया?

    जांच का सबसे बड़ा डिजिटल सुराग मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड बना।

    पुलिस के अनुसार, 1 जुलाई से हत्या वाले दिन तक शालू और विशाल के बीच करीब 35 से 40 बार बातचीत हुई थी। इनमें ज्यादातर कॉल छोटी अवधि की थीं।

    लेकिन हत्या वाले दिन तस्वीर अलग थी।

    पुलिस के मुताबिक, उसी दिन दोनों के बीच 14 बार फोन पर बातचीत हुई। सुबह करीब 9 बजे शालू ने विशाल को फोन किया और इसके बाद देर रात तक दोनों के बीच संपर्क बना रहा।

    यही 14 कॉल पुलिस के लिए महत्वपूर्ण बन गईं। पुलिस अब इन कॉल्स के समय, अवधि और उस दौरान दोनों की गतिविधियों का मिलान CCTV तथा अन्य सबूतों से कर रही है।

    28 जुलाई की रात से शुरू हुआ था विवाद?

    पुलिस की पूछताछ में कथित तौर पर 28 जुलाई का एक विवाद भी सामने आया।

    पुलिस के अनुसार, शालू एक पार्टी से देर रात घर लौटी थी। इसी बात को लेकर विनीत ने उसे डांटा था और दोनों के बीच विवाद हुआ था।

    जांच एजेंसियों का दावा है कि इसी घटना के बाद शालू और उसके ससुर के बीच तनाव बढ़ा।

    पुलिस यह भी जांच रही है कि पारिवारिक तनाव, खर्च को लेकर कथित रोक-टोक और घर में लगवाए गए CCTV को लेकर नाराजगी ने हत्या की कथित साजिश में क्या भूमिका निभाई।

    घर में CCTV लगने से भी नाराज थी शालू?

    यह इस केस का एक और महत्वपूर्ण एंगल है।

    पुलिस के मुताबिक, विनीत ने अपने 3 BHK फ्लैट में CCTV कैमरे लगवाए थे। इनमें एक कैमरा मुख्य गेट की तरफ और दूसरा घर के बालकनी तथा आवाजाही वाले हिस्से को कवर करता था।

    जांच में पुलिस को शक है कि शालू को इन कैमरों के कारण अपनी गतिविधियों पर निगरानी महसूस होती थी।

    हालांकि, पुलिस इसे हत्या की कथित साजिश के संभावित कारणों में से एक मान रही है। आर्थिक और पारिवारिक विवाद से जुड़े दूसरे पहलुओं की भी जांच जारी है।

    पुराने कर्मचारी विशाल का इस हत्या से क्या कनेक्शन था?

    जांच में जिस नाम ने पुलिस को सबसे महत्वपूर्ण सुराग दिया, वह था विशाल गौतम

    पुलिस के मुताबिक, विशाल वर्ष 2010 से विनीत की बिरहाना रोड स्थित दवा फर्म से जुड़ा था। वर्ष 2022 में चोरी के आरोप के बाद उसे नौकरी से निकाल दिया गया था।

    इसके बावजूद वह बाद में विनीत के बेटे सुब्रत के कहने पर छोटे-मोटे काम के लिए परिवार के संपर्क में आता-जाता रहा।

    यानी पुलिस के मुताबिक, विशाल के पास परिवार और घर की व्यवस्था की पहले से जानकारी थी। यही वजह है कि जांच में उसका कनेक्शन बेहद महत्वपूर्ण माना गया।

    विशाल के साथ राजकिशोर को भी गिरफ्तार किया गया है। दोनों के खिलाफ हत्या में शामिल होने के आरोपों की जांच चल रही है।

    ₹6 लाख की कथित सुपारी का क्या है पूरा मामला?

    पुलिस की जांच में हत्या के लिए ₹6 लाख की कथित सुपारी का एंगल सामने आया है।

    जानकारी के अनुसार, कथित तौर पर ₹2 लाख हत्या के बाद और बाकी ₹4 लाख करीब 15 दिन बाद देने की बात कही गई थी।

    यह रकम और भुगतान की कथित व्यवस्था पुलिस पूछताछ में सामने आई जानकारी का हिस्सा है। इसे अदालत में साबित होना अभी बाकी है।

    पुलिस के मुताबिक, इसी वजह से जांच अब सिर्फ दो हमलावरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि कथित साजिश और उसके पीछे मौजूद व्यक्ति तक पहुंची।

    क्या हत्या को हार्ट अटैक जैसा दिखाने की योजना थी?

    इस केस का सबसे चौंकाने वाला दावा पुलिस की इसी थ्योरी से जुड़ा है।

    DCP वेस्ट एसएम कासिम आब्दी के मुताबिक, पुलिस की जांच में यह बात सामने आई कि हत्या को सामान्य मौत या हार्ट अटैक जैसा दिखाने की योजना बनाई गई थी।

    पुलिस का आरोप है कि शालू ने कथित तौर पर विशाल को विनीत के सो जाने के बाद वारदात करने को कहा था। लेकिन घटनाक्रम उस योजना के मुताबिक नहीं चला।

    पुलिस के अनुसार, विनीत जब रात में अपने कमरों की जांच और लॉक करने पहुंचे, तब उन्हें घर में छिपे विशाल और राजकिशोर का पता चला और इसके बाद उन पर हमला कर दिया गया।

    यही वह मोड़ था जहां कथित तौर पर एक ‘सामान्य मौत’ दिखाने की योजना एक बेहद हिंसक हत्या में बदल गई।

    650 CCTV और 45 गार्ड के बावजूद हत्यारे अंदर कैसे पहुंचे?

    इस केस ने रतन ऑर्बिट अपार्टमेंट की सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े किए हैं।

    पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, परिसर में करीब 1,056 फ्लैट और 27 बंगले हैं। सुरक्षा व्यवस्था में करीब 45 गार्ड तैनात हैं और पूरे परिसर में करीब 650 CCTV कैमरे लगे हैं।

    इसके बावजूद आरोपी फ्लैट तक पहुंच गए।

    पुलिस के मुताबिक, घटना वाली रात मुख्य गेट पर सामान्य दिनों की तुलना में एक गार्ड कम था। एंट्री रजिस्टर में भी रात 8:28 बजे के बाद सीधे करीब 10 बजे एक दूधवाले की एंट्री दर्ज मिली।

    अब पुलिस CCTV फुटेज, गेट रजिस्टर, गार्ड के बयान और आरोपियों की गतिविधियों का मिलान कर रही है।

    यह सवाल सिर्फ इस हत्या तक सीमित नहीं है—गेट से फ्लैट तक आरोपी किस तरह पहुंचे और किस स्तर पर सुरक्षा प्रक्रिया कमजोर हुई, इसकी जांच भी महत्वपूर्ण है।

    पुलिस ने आरोपियों को कैसे पकड़ा?

    हत्या के बाद पुलिस ने अपार्टमेंट और आसपास लगे CCTV फुटेज खंगालना शुरू किया।

    फुटेज और दूसरे सुरागों के आधार पर विशाल गौतम और राजकिशोर की पहचान सामने आई। दोनों को बाद में पुलिस ने मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया। रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों के पैरों में गोली लगी और उन्हें अस्पताल ले जाया गया।

    पूछताछ में पुलिस को कथित तौर पर शालू से जुड़े सुराग मिले। इसके बाद कॉल डिटेल, गार्ड के बयान और अन्य सबूतों को जोड़ते हुए पुलिस शालू तक पहुंची।

    7 सितंबर को पुलिस ने शालू को भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

    क्या पति सुब्रत भी इस साजिश में शामिल था?

    यह सवाल भी इस केस में उठ रहा है, लेकिन यहां पुलिस की मौजूदा स्थिति स्पष्ट है।

    पुलिस की शुरुआती जांच में सुब्रत की हत्या में कोई भूमिका सामने नहीं आई है। पुलिस ने उससे पूछताछ जरूर की है और पूरे घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों का सत्यापन किया जा रहा है।

    पुलिस यह भी जांच रही है कि परिवार के किसी अन्य सदस्य को कथित साजिश की जानकारी थी या नहीं।

    विनीत मिनोचा कौन थे और उनका कारोबार कितना बड़ा था?

    विनीत मिनोचा कानपुर के प्रमुख दवा कारोबारियों में गिने जाते थे। वह बिरहाना रोड पर ‘फार्मा ट्रेडर्स’ नाम से दवा का कारोबार करते थे और बेटे सुब्रत के साथ कारोबार संभालते थे।

    उनके दवा कारोबार का आकार कई दर्जन करोड़ रुपये सालाना बताया जाता है। कुछ रिपोर्ट में इसे ₹50 करोड़ से अधिक का कारोबार बताया गया है।

    लेकिन हत्या का वास्तविक कारण सिर्फ संपत्ति या पैसा था, यह अदालत में साबित होने वाला तथ्य है। फिलहाल पुलिस आर्थिक नियंत्रण, पारिवारिक विवाद और अन्य कारणों की जांच कर रही है।

    इस पूरे केस में अब तक की सबसे बड़ी कड़ियां क्या हैं?

    अगर पुलिस की अब तक की जांच को एक साथ जोड़ें तो कहानी की प्रमुख कड़ियां इस तरह सामने आती हैं:

    पार्टी के लिए परिवार का बाहर जाना → विनीत का फ्लैट में अकेला रहना → दो लोगों का पहले फ्लैट में पहुंचना → डुप्लीकेट चाबी का इस्तेमाल → घर में छिपकर इंतजार → विनीत की वापसी → हमला और हत्या → परिवार का वापस लौटना → CCTV जांच → विशाल और राजकिशोर की गिरफ्तारी → 14 कॉल का खुलासा → गार्ड का बयान → 28 जुलाई के विवाद की जानकारी → ₹6 लाख की कथित सुपारी का एंगल → शालू की गिरफ्तारी।

    इन कड़ियों को जोड़कर पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हत्या की साजिश वास्तव में कब शुरू हुई और किस स्तर पर किस व्यक्ति की क्या भूमिका थी।

    इस कहानी में अभी कौन से सवाल बाकी हैं?

    पुलिस ने केस की कई अहम कड़ियां जोड़ ली हैं, लेकिन कुछ सवालों के जवाब जांच और अदालत की प्रक्रिया में सामने आएंगे।

    • डुप्लीकेट चाबी वास्तव में कब और किसके जरिए बनाई गई?
    • 14 कॉल में क्या बातचीत हुई थी?
    • 35–40 कॉल के पूरे पैटर्न में किस तरह का संपर्क था?
    • ₹6 लाख की कथित सुपारी का भुगतान कैसे और कब हुआ?
    • CCTV फुटेज और कॉल लोकेशन एक-दूसरे से कितना मेल खाते हैं?
    • गार्ड को फोन करने और आरोपियों को अंदर आने देने की पूरी घटना की स्वतंत्र पुष्टि कैसे होती है?
    • हत्या को सामान्य मौत दिखाने की कथित योजना कितनी आगे बढ़ी थी?
    • 28 जुलाई के विवाद और हत्या के बीच वास्तविक संबंध क्या था?
    • क्या परिवार के किसी और सदस्य को कथित साजिश की जानकारी थी?

    इन सभी सवालों के जवाब पुलिस द्वारा जुटाए जा रहे इलेक्ट्रॉनिक, CCTV, फोरेंसिक और अन्य साक्ष्यों के मिलान से तय होंगे।

    रोती हुई बहू से हत्या की कथित साजिश तक कैसे पहुंची जांच?

    इस केस की सबसे बड़ी कहानी यही है।

    शुरुआत में तस्वीर एक ऐसे परिवार की थी जो पार्टी से लौटकर घर आया और अपने ही घर में परिवार के मुखिया को खून से लथपथ पाया।

    लेकिन जांच आगे बढ़ी तो पुलिस को दो बाहरी हमलावरों से आगे बढ़ना पड़ा।

    CCTV ने संदिग्धों तक पहुंचाया।
    गार्ड के बयान ने फ्लैट में प्रवेश की कड़ी जोड़ी।
    डुप्लीकेट चाबी ने जबरन घुसने की थ्योरी को कमजोर किया।
    14 कॉल ने शालू और विशाल के संपर्क को जांच के केंद्र में ला दिया।
    28 जुलाई के विवाद ने कथित पारिवारिक तनाव का एंगल सामने रखा।
    और ₹6 लाख की कथित सुपारी ने जांच को कथित कॉन्ट्रैक्ट किलिंग की दिशा में पहुंचा दिया।

    फिलहाल पुलिस शालू, विशाल और राजकिशोर के खिलाफ मिले बयानों और डिजिटल/भौतिक सबूतों का मिलान कर रही है। आरोपों का अंतिम निर्धारण अदालत की प्रक्रिया में होगा।

    यानी इस केस में सबसे बड़ा सवाल सिर्फ यह नहीं है कि विनीत मिनोचा को किसने मारा—बल्कि यह है कि उनके अपने घर के भीतर से कथित तौर पर हत्या का रास्ता किसने खोला, और 14 फोन कॉल से लेकर डुप्लीकेट चाबी तक उस रात की पूरी साजिश कितनी पहले तैयार हो चुकी थी।

  • अंधेरी में फर्जी Income Tax Raid का खुलासा, कारोबारी से ₹1 करोड़ की मांग; 6 गिरफ्तार

    अंधेरी में फर्जी Income Tax Raid का खुलासा, कारोबारी से ₹1 करोड़ की मांग; 6 गिरफ्तार

    अंधेरी में फर्जी Income Tax और Crime Branch अधिकारियों ने कारोबारी पर रेड का नाटक कर ₹1 करोड़ मांगे। पुलिस ने 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया।

    मुंबई: अंधेरी ईस्ट में फर्जी Income Tax और Crime Branch अधिकारियों की पूरी टीम बनाकर एक कारोबारी के ऑफिस पर कथित रेड डालने और उससे ₹1 करोड़ की मांग करने का मामला सामने आया है। Andheri Police ने इस मामले में अब तक 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश और पूरे नेटवर्क की जांच जारी है।

    यह घटना 17 जुलाई 2026 को चकाला के Sahar Cargo Estate स्थित Two M Ophthotronics Pvt Ltd में हुई थी। पुलिस के मुताबिक आरोपी फर्जी पहचान पत्र, दस्तावेज और कथित search warrant के सहारे खुद को सरकारी अधिकारी बताते हुए करीब चार घंटे तक कारोबारी और कर्मचारियों पर दबाव बनाते रहे।

    कारोबारी और पत्नी को ऑफिस तक कैसे ले जाया गया?

    पुलिस के मुताबिक कंपनी के मालिक राजकुमार कंदासामी, 49, को कर्मचारियों से फोन पर जानकारी मिली कि Income Tax अधिकारियों ने उनके ऑफिस में रेड की है। इसके बाद उन्हें तुरंत ऑफिस पहुंचने के लिए कहा गया।

    कंदासामी अपनी पत्नी के साथ घर से निकले। रास्ते में कथित तौर पर दो लोगों ने खुद को Income Tax अधिकारी बताया, पहचान पत्र दिखाया और दोनों को उसी कैब में बैठकर ऑफिस ले गए। इसी दौरान आरोपियों ने कारोबारी और उनकी पत्नी के मोबाइल फोन भी अपने कब्जे में ले लिए।

    ऑफिस पहुंचने के बाद कथित फर्जी टीम ने कर्मचारियों से पूछताछ की, कंपनी के दस्तावेजों की जांच की और उनकी गतिविधियों पर नियंत्रण रखा। एक आरोपी ने कथित तौर पर search warrant दिखाकर कंदासामी के हस्ताक्षर भी लिए।

    ₹1.70 लाख से ₹1.44 करोड़ की धमकी और फिर ₹1 करोड़ की मांग

    पुलिस के अनुसार आरोपियों ने कारोबारी से उसके cash expenses के बारे में पूछताछ की। उन्होंने कथित तौर पर ₹1.70 लाख के cash transaction को आधार बनाकर भारी penalty की धमकी दी।

    आरोपियों ने कथित तौर पर ₹1.44 करोड़ की penalty का डर दिखाया और इसके बाद मामला खत्म करने के लिए ₹1 करोड़ देने की मांग की। कारोबारी ने पैसे देने के बजाय कहा कि यदि कोई tax violation है तो Income Tax Department की ओर से उसे औपचारिक notice दिया जाए और वह पैसा सीधे विभाग को देगा।

    यहीं से आरोपियों की योजना कमजोर पड़ गई। कारोबारी ने बाद में अपने Chartered Accountant से संपर्क किया और Income Tax Department से इसकी पुष्टि कराई। तब पता चला कि उसके ऑफिस में कोई अधिकृत Income Tax raid नहीं हुई थी। इसके बाद उसने Andheri Police से शिकायत की।

    पूर्व ड्राइवर पर क्यों गया पुलिस का शक?

    जांच में संतोष उदय खोपटकर का नाम सामने आया, जो कारोबारी का पूर्व ड्राइवर बताया गया है। पुलिस के अनुसार उसके पास कारोबारी की आर्थिक गतिविधियों और ऑफिस में cash होने की जानकारी थी।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार जांचकर्ताओं का कहना है कि खोपटकर अपने पूर्व मालिक से नाराज था और उसने कथित तौर पर कारोबारी की financial information दूसरे आरोपियों तक पहुंचाई। इसी जानकारी के आधार पर ऑफिस को निशाना बनाए जाने की आशंका है।

    हालांकि, यह पुलिस की जांच में सामने आया आरोप है और मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच तथा अदालत की प्रक्रिया के बाद ही तय होगा।

    पुलिस ने मोबाइल बंद होने के बाद भी मुख्य आरोपी को कैसे पकड़ा?

    Andheri Police ने आरोपियों तक पहुंचने के लिए Call Detail Records (CDR), mobile numbers, dump data, cell-ID और location inputs के साथ CCTV फुटेज का इस्तेमाल किया। अलग-अलग टीमों ने Andheri, Vile Parle, Pune और Nalasopara में जांच की।

    पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी प्रेम किसन सबनानी, 50, ने अपना मोबाइल फोन बंद कर दिया था। इससे उसकी live location नहीं मिल रही थी। लेकिन पुराने CDR और cell-ID data से उसके फोन से जुड़े लोगों की लोकेशन Pune के Sinhagad Road इलाके में मिलने लगी।

    पुलिस टीम ने वहां Mumbai-registered वाहनों की तलाश की। एक scooter मिलने के बाद उसके registration details के जरिए सबनानी के ठिकाने तक पहुंच बनाई गई। पूछताछ के बाद उसे मामले में गिरफ्तार किया गया।

    अब तक कौन-कौन गिरफ्तार हुआ?

    पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में शामिल हैं:

    • Santosh Uday Khopatkar, 37
    • Vinay Ramesh More, 37
    • Prem Kishan Sabnani, 50
    • Pragya Harish Main/Maine, 27
    • Reshma Shyamrao Warang, 41
    • Sabina Hafiz Shaikh, 48

    पुलिस ने Jitendra More और Ashok Shinde समेत अन्य संदिग्धों की पहचान की है। पुलिस उनकी भूमिका और मौजूदा कानूनी स्थिति की जांच कर रही है।

    क्या आरोपी पहले भी ऐसी वारदात कर चुके हैं?

    जांच में एक महत्वपूर्ण बात सामने आई है। पुलिस के मुताबिक आरोपी Prem Sabnani के खिलाफ तीन समान मामलों के पहले से दर्ज होने की जानकारी मिली है। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि क्या मौजूदा गिरोह ने इसी तरीके से दूसरे कारोबारियों को भी निशाना बनाया था।

    जांच टीम फर्जी पहचान पत्र, सरकारी लोगो, rubber stamps, letterheads और search-warrant documents की तलाश कर रही है। जब्त किए गए मोबाइल फोन से calls, WhatsApp chats और financial transactions की भी जांच की जा रही है।

    फर्जी Income Tax Raid को असली समझने की गलती क्यों हुई?

    इस मामले में आरोपियों ने केवल पहचान पत्र दिखाकर भरोसा हासिल करने की कोशिश नहीं की, बल्कि formal कपड़े, files और कथित search warrant का इस्तेमाल किया। इससे पूरी कार्रवाई को वास्तविक सरकारी raid जैसा दिखाने की कोशिश की गई।

    लेकिन Income Tax Department की वास्तविक search और seizure कार्रवाई कानून के तहत अधिकृत अधिकारी द्वारा की जाती है। Income-tax Act की Section 132 अधिकृत अधिकारी को search और seizure की निर्धारित शक्तियां देती है। विभाग के official Search and Seizure Manual में भी authorised officer और search authorisation की भूमिका स्पष्ट की गई है।

    इसलिए केवल ID card, uniform-जैसे कपड़े या कोई कागज देखकर किसी टीम को genuine मान लेना सुरक्षित नहीं है। किसी संदिग्ध कार्रवाई में स्वतंत्र और आधिकारिक माध्यम से सत्यापन करना महत्वपूर्ण है।

    कारोबारी ऐसी स्थिति में क्या सावधानी रखें?

    अगर कोई व्यक्ति खुद को Income Tax या किसी अन्य सरकारी जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर अचानक कार्रवाई शुरू करता है, तो घबराने के बजाय उसकी पहचान और अधिकार की पुष्टि करना जरूरी है।

    खास तौर पर किसी कथित अधिकारी को व्यक्तिगत खाते, cash handover या मौके पर “settlement” के नाम पर पैसा देना गंभीर red flag हो सकता है। यदि मामला संदिग्ध लगे तो कारोबारी अपने Chartered Accountant या कानूनी सलाहकार से संपर्क कर सकता है और जरूरत पड़ने पर पुलिस की मदद ले सकता है।

    हालांकि, genuine statutory search में अधिकृत अधिकारियों के पास कानून द्वारा निर्धारित search और seizure powers हो सकती हैं। इसलिए केवल इस आधार पर कि कोई notice पहले नहीं आया, हर search को fake मानना भी सही नहीं होगा। क्यों कि Section 132 के तहत अधिकृत अधिकारी को निर्धारित परिस्थितियों में search और seizure की शक्ति दी गई है।

    पुलिस अब किस दिशा में जांच कर रही है?

    Andheri Police अब कथित गिरोह के पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। सबसे अहम सवाल यह है कि आरोपियों को कारोबारी की financial information कहां से मिली और क्या इस जानकारी का इस्तेमाल पहले भी किसी दूसरे businessman को निशाना बनाने में हुआ था।

    पुलिस जब्त मोबाइल फोन, CCTV footage, call records और financial transactions की जांच के साथ उन लोगों की भूमिका भी verify कर रही है जिनके नाम पूछताछ के दौरान Income Tax Department से कथित तौर पर जोड़े गए हैं। पुलिस ने अभी तक ऐसे किसी departmental connection को अंतिम रूप से प्रमाणित नहीं किया है।

    फिलहाल मामला फर्जी सरकारी अधिकारी बनकर कार्रवाई करने, कारोबारी और उसकी पत्नी को कथित तौर पर जबरन ले जाने तथा ₹1 करोड़ की कथित extortion demand के आरोपों की जांच के केंद्र में है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और फरार संदिग्धों की तलाश के साथ पुलिस यह भी पता लगा रही है कि इस नेटवर्क का दायरा कितना बड़ा है।