Category: Crime News

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  • टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: सूरत से 2 हथियार और 10 कारतूस बरामद, जांच में नया मोड़

    टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: सूरत से 2 हथियार और 10 कारतूस बरामद, जांच में नया मोड़

    Tiger Shroff firing case: मुंबई क्राइम ब्रांच ने सूरत से दो हथियार और 10 जिंदा कारतूस बरामद किए। जानें जांच, गिरफ्तारियों और बैलिस्टिक टेस्ट की अहमियत।

    मुंबई: बॉलीवुड के एक्शन हीरो टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई फायरिंग के मामले में जांच को अहम सुराग मिला है। मुंबई क्राइम ब्रांच ने गुजरात के सूरत से दो पिस्तौल और 10 जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। यह कार्रवाई 23 अक्टूबर को की गई। अब जांच में हथियारों के स्रोत, उनकी सप्लाई चेन और फायरिंग में उनके इस्तेमाल की पुष्टि अहम है।

    पुलिस के मुताबिक, क्राइम ब्रांच की टीम हथियारों को हमलावरों तक पहुंचाने से जुड़े लॉजिस्टिकल नेटवर्क की पड़ताल कर रही थी। इसी कड़ी में टीम सूरत के एक ठिकाने तक पहुंची, जहां से दोनों हथियार बरामद किए गए। मामले में हथियारों की बरामदगी के बाद जांच का फोकस यह पता लगाने पर है कि इनका फायरिंग की घटना से सीधा संबंध है या नहीं।

    सूरत से मिले हथियारों की होगी जांच

    बरामद दो हथियार और 10 जिंदा कारतूस इस केस की जांच में महत्वपूर्ण सबूत हो सकते हैं। हालांकि, सिर्फ हथियार बरामद होने से यह साबित नहीं होता कि उनका इस्तेमाल टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के दौरान किया गया था।

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    इसके लिए बैलिस्टिक जांच अहम होगी। इसमें बरामद हथियारों की तकनीकी जांच कर घटनास्थल से मिले खाली कारतूसों या अन्य फॉरेंसिक सबूतों से उनका मिलान किया जा सकता है। जांच से यह स्पष्ट करने में मदद मिलेगी कि हथियारों का घटना से संबंध है या नहीं।

    हथियार कहां से आए, उन्हें किसने उपलब्ध कराया और आरोपियों तक पहुंचाने में किन लोगों की भूमिका रही, इन सवालों के जवाब भी जांच का हिस्सा हैं। फिलहाल इस बरामदगी को अंतिम फॉरेंसिक निष्कर्ष के तौर पर नहीं देखा जा रहा है।

    18 अक्टूबर को जुहू में हुई थी फायरिंग

    यह मामला 18 अक्टूबर 2026 को मुंबई के जुहू इलाके में हुई गोलीबारी से जुड़ा है। जहां टाइगर श्रॉफ की कार को निशाना बनाकर फायरिंग की गई थी। घटना के बाद पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू की और मामले की जांच मुंबई क्राइम ब्रांच को सौंपी गई।

    घटना के बाद जांचकर्ताओं ने हमले में शामिल लोगों की पहचान, हथियारों की व्यवस्था और आरोपियों के बीच संपर्कों की पड़ताल शुरू की। शुरुआती जांच में कथित रेकी और हमले से पहले की गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठे।

    तीन आरोपियों की पुलिस हिरासत, गिरफ्तारियों की भी जांच

    इस मामले में गिरफ्तारियों और कथित मददगारों की भूमिका की भी जांच हो रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, हरियाणा के सोनीपत से पकड़े गए तीन आरोपियों को 28 अक्टूबर 2026 तक पुलिस हिरासत में भेजा गया था। जांच में उनकी कथित भूमिका, हथियारों की व्यवस्था और अन्य संदिग्धों के साथ संपर्कों की पड़ताल शामिल है।

    21 अक्टूबर के आसपास सामने आई जानकारी में मामले में गिरफ्तार लोगों की संख्या 10 तक पहुंच गया।

    हथियारों की सप्लाई चेन से क्या खुल सकता है?

    सूरत में हुई बरामदगी जांचकर्ताओं को हथियारों की सप्लाई चेन समझने में मदद कर सकती है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हथियार कहां से आए, उन्हें किसने रखा और कथित तौर पर हमलावरों तक पहुंचाने में कौन-कौन शामिल था।

    जांच में कथित रेकी, आरोपियों के आपसी संपर्क और घटना से पहले की गतिविधियां भी महत्वपूर्ण हैं। लेकिन किसी बड़े नेटवर्क, गिरोह या हमले के मकसद को लेकर अंतिम निष्कर्ष तभी निकाला जा सकता है, जब उसके समर्थन में पर्याप्त सबूत सामने आएं।

    इस मामले में आगे की जांच के लिए हथियारों की फॉरेंसिक रिपोर्ट, आरोपियों से पूछताछ और पुलिस की ओर से सामने आने वाली अतिरिक्त जानकारी महत्वपूर्ण होगी।

    फिलहाल दो हथियारों और 10 जिंदा कारतूसों की बरामदगी जांच का नया घटनाक्रम है। अब यह स्पष्ट होना बाकी है कि बरामद हथियारों का फायरिंग से क्या संबंध है और हथियारों की सप्लाई चेन में किन लोगों की भूमिका सामने आती है।

  • धारावी SIR: एक दिन में 24 आपत्तियां दाखिल करने वाले के खिलाफ FIR दर्ज

    धारावी SIR: एक दिन में 24 आपत्तियां दाखिल करने वाले के खिलाफ FIR दर्ज

    मुंबई के धारावी विधानसभा क्षेत्र में एक दिन में नमूना सात के 24 आवेदन जमा करने पर गिरिधारी स्वामीनाथ जयसवाल के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।

    मुंबई: धारावी विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान एक ही दिन में 24 आपत्ति आवेदन जमा करने का मामला सामने आया है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने गिरिधारी स्वामीनाथ जयसवाल के खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत धारावी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराने की जानकारी दी है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब प्रारूप मतदाता सूची पर दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तारीख 26 अक्टूबर 2026 निर्धारित है।

    एक दिन में जमा किए 24 आवेदन

    महानगरपालिका की 24 अक्टूबर को जारी जानकारी के अनुसार, धारावी विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 178 में गिरिधारी स्वामीनाथ जयसवाल ने एक ही दिन में नमूना सात के 24 आवेदन जमा किए। वह धारावी पूर्व स्थित गंगाधरलाल चॉल, 90 फुट रोड के निवासी हैं।

    निर्वाचन आयोग और महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के निर्देशों के अनुसार, नमूना सात के अधिकतम 10 आवेदन प्रतिदिन जमा करने की सीमा निर्धारित होने की जानकारी दी गई है। इसी आधार पर निर्धारित नियमों का उल्लंघन कर आवेदन जमा करने का मामला सामने आने के बाद संबंधित व्यक्ति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई।

    हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि सभी 24 आवेदनों में किस तरह की आपत्तियां उठाई गई थीं और उनमें कथित गलत जानकारी का सटीक विवरण क्या था।

    क्या है नमूना सात और क्यों है महत्वपूर्ण?

    नमूना सात का इस्तेमाल मतदाता सूची में किसी नाम को शामिल किए जाने पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए किया जाता है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची में गलत या अपात्र प्रविष्टियों को लेकर निर्वाचन अधिकारी के सामने आपत्ति पेश करना है।

    आवेदन जमा होने का मतलब यह नहीं है कि संबंधित मतदाता का नाम अपने आप सूची से हटा दिया जाएगा। आपत्ति की जांच और नियमानुसार कार्रवाई के बाद ही निर्वाचन अधिकारी इस संबंध में फैसला लेते हैं।

    लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत मतदाता सूची से संबंधित आवेदन में जानबूझकर गलत जानकारी या झूठी घोषणा करने पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। धारावी के मामले में इसी धारा के तहत शिकायत दर्ज कराने की जानकारी दी गई है।

    26 अक्टूबर तक दावे और आपत्तियां दर्ज करने का मौका

    मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम के तहत 31 अगस्त 2026 को सभी विधानसभा क्षेत्रों की प्रारूप मतदाता सूचियां जारी की गई थीं। इन सूचियों पर दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि 31 अगस्त से 26 अक्टूबर 2026 तक निर्धारित की गई है।

    महाराष्ट्र में मतदाताओं को इस दौरान प्रारूप सूची में अपना नाम और संबंधित विवरण जांचने की जरूरत है। नाम में गलती होने या सूची से संबंधित किसी अन्य समस्या की स्थिति में संबंधित निर्वाचन कार्यालय से संपर्क कर उचित प्रक्रिया की जानकारी ली जा सकती है।

    धारावी विधानसभा क्षेत्र के मतदाता राजीव गांधी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, धारावी बस डिपो के पास, एल.बी.एस. मार्ग स्थित निर्वाचन कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। कार्यालय का संपर्क नंबर 022-50029573 है।

  • मुंबई के अंधेरी में कुत्ते से कथित यौन दुर्व्यवहार, 42 वर्षीय व्यक्ति हिरासत में

    मुंबई के अंधेरी में कुत्ते से कथित यौन दुर्व्यवहार, 42 वर्षीय व्यक्ति हिरासत में

    मुंबई के अंधेरी ईस्ट में हनुमान मंदिर के पास आवारा कुत्ते से कथित यौन दुर्व्यवहार का मामला सामने आया। महिला के वीडियो के बाद MIDC पुलिस ने कार्रवाई की।

    मुंबई: अंधेरी ईस्ट में हनुमान मंदिर के पास एक मादा आवारा कुत्ते के साथ कथित यौन दुर्व्यवहार का मामला सामने आया है। इस मामले में MIDC पुलिस ने 42 वर्षीय एक व्यक्ति को हिरासत में लिया है। घटना का पता उस समय चला, जब इलाके में आवारा पशुओं को खाना खिलाने निकली 32 वर्षीय महिला ने कथित घटना को देखा और अपने मोबाइल फोन से वीडियो रिकॉर्ड कर लिया।

    पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 325 और Prevention of Cruelty to Animals Act की धारा 11(1) के तहत कार्रवाई की जानकारी दी है।

    आधी रात को हनुमान मंदिर के पास हुई घटना

    यह घटना गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 की रात करीब 12:05 बजे अंधेरी ईस्ट के पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर में एक पाइपलाइन के पास हुई। संबंधित जगह हनुमान मंदिर के नजदीक बताई गई है।

    शिकायतकर्ता 32 वर्षीय महिला विले पार्ले ईस्ट के एक क्लिनिक में सर्जिकल हेड असिस्टेंट के तौर पर काम करती हैं। वह रात में खाना खाने के बाद नियमित रूप से इलाके के आवारा पशुओं को खाना खिलाने जाती थीं।

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    इसी दौरान उन्होंने कथित तौर पर 42 वर्षीय व्यक्ति को मादा आवारा कुत्ते के साथ यौन दुर्व्यवहार करते देखा। महिला ने अपने मोबाइल फोन से वीडियो रिकॉर्ड किया और घर लौटकर परिवार को इसकी जानकारी दी।

    इसके बाद वह MIDC पुलिस स्टेशन पहुंचीं और वीडियो सौंपकर शिकायत दर्ज कराई। इसी शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले में कार्रवाई की।

    आरोपी पर BNS और पशु क्रूरता कानून के तहत कार्रवाई

    इस मामले में दो प्रमुख कानूनी प्रावधानों का उल्लेख किया गया है।

    भारतीय न्याय संहिता की धारा 325 पशु को मारने, जहर देने, अपंग बनाने या बेकार कर देने जैसे कृत्यों से संबंधित है। दोषसिद्धि होने पर इस धारा में पांच साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। हालांकि, इस धारा के मूल पाठ में पशुओं के साथ यौन दुर्व्यवहार को अलग अपराध के रूप में स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया गया है।

    वहीं, Prevention of Cruelty to Animals Act, 1960 की धारा 11(1) पशुओं के साथ क्रूरता और उन्हें अनावश्यक पीड़ा पहुंचाने वाले विभिन्न कृत्यों से संबंधित है। इस कानून के तहत सटीक आरोप और संभावित दंड का निर्धारण लागू प्रावधानों और मामले के तथ्यों के आधार पर होता है।

    MIDC पुलिस के एक अधिकारी ने इन धाराओं के तहत मामला दर्ज किए जाने और आरोपी को हिरासत में लिए जाने की जानकारी दी है।

    पशुओं के खिलाफ यौन अपराधों पर कानून क्या कहता है?

    इस घटना के बाद पशुओं के खिलाफ यौन दुर्व्यवहार के मामलों में मौजूदा कानूनी व्यवस्था को समझना भी महत्वपूर्ण है।

    पुरानी भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 377 में पशुओं के साथ कुछ यौन कृत्य भी शामिल थे। लेकिन भारतीय न्याय संहिता लागू होने के बाद पुरानी धारा 377 का समान प्रावधान नई संहिता में शामिल नहीं किया गया। इस बदलाव को लेकर पशु संरक्षण संगठनों और कानूनी क्षेत्र में चिंता जताई गई है।

    मई 2025 में दिल्ली हाई कोर्ट के सामने भी इस विषय से जुड़ा कानूनी सवाल उठा था। याचिका में पशुओं के खिलाफ यौन अपराधों के लिए स्पष्ट कानूनी संरक्षण और कार्रवाई से संबंधित दिशा-निर्देशों की मांग की गई थी।

    मौजूदा मामले में आरोपी के खिलाफ किन आरोपों पर कार्रवाई आगे बढ़ेगी, यह जांच, उपलब्ध साक्ष्यों और लागू कानूनों की कानूनी व्याख्या पर निर्भर करेगा।

    मुंबई में पहले भी सामने आ चुका है ऐसा मामला

    अप्रैल 2026 में अंधेरी वेस्ट में दो पालतू मादा कुत्तों के साथ कथित यौन दुर्व्यवहार का एक अलग मामला सामने आया था। उस मामले में अंबोली पुलिस ने 31 वर्षीय एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था। जांच से जुड़े विवरण में घर में लगे CCTV कैमरों का उल्लेख भी किया गया था।

    ये घटनाएं पशुओं के खिलाफ कथित यौन दुर्व्यवहार की शिकायतों में प्रभावी जांच, साक्ष्य जुटाने और कानूनी कार्रवाई की अहमियत को सामने लाती हैं।

  • टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: 8 गिरफ्तारी, हथियार सप्लाई की जांच तेज

    टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: 8 गिरफ्तारी, हथियार सप्लाई की जांच तेज

    टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में तीन मुख्य आरोपी 31 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में हैं। वहीं कुल 8 गिरफ्तारी, हथियारों की बरामदगी, अतिरिक्त गिरफ्तारियों और कथित गैंग कनेक्शन की जांच जारी है।

    मुंबई: अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के मामले में जांच का दायरा बढ़ गया है। तीन मुख्य आरोपियों को 31 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेजा गया है, जबकि कथित हथियार सप्लाई नेटवर्क से जुड़े चार अन्य लोगों और एक अतिरिक्त संदिग्ध की गिरफ्तारी की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस अब हथियारों की बरामदगी, हमले के मकसद और लॉरेंस बिश्नोई गैंग से कथित कनेक्शन की जांच कर रही है।

    आठ गिरफ्तारियां, हथियार सप्लाई नेटवर्क की जांच

    18 अक्टूबर को मुंबई के जुहू इलाके में टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग हुई थी। इस घटना में अभिनेता सुरक्षित बच गए, जबकि उनके ड्राइवर फिरदौस और राहगीर उमेश चव्हाण घायल हुए थे। हमलावर कथित तौर पर बाइक से फरार हो गए थे।

    इस मामले में तीन मुख्य आरोपियों की पहचान फुलसिंह नरेश, रेहान रशीदुद्दीन अंसारी और हृतिक कुमार उर्फ रोशन महतो के रूप में की गई है। बाद की जानकारी में इनके नाम फुल सिंह, रेहान उर्फ सुक्का और रितिक कुर्मी उर्फ रोशन भी बताए गए हैं।

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    मुंबई पुलिस ने तीनों को राजस्थान के कोटा रेलवे स्टेशन पर पकड़ा था। 21 अक्टूबर को मुंबई लाए जाने के बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया। पुलिस ने साजिश, हमले के मकसद और हथियारों की बरामदगी के लिए 14 दिन की हिरासत मांगी थी। अदालत ने तीनों को 31 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया।

    पुलिस के मुताबिक, आरोपियों पर हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। बचाव पक्ष ने लंबी पुलिस हिरासत का विरोध करते हुए दलील दी कि आरोपियों से पहले ही पूछताछ की जा चुकी है।

    दिल्ली और हरियाणा से चार गिरफ्तारियां, एक अन्य संदिग्ध भी पकड़ा गया

    जांच के दौरान दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने कथित हथियार सप्लाई नेटवर्क से जुड़े चार लोगों को गिरफ्तार किया। इनकी पहचान कुणाल (21), सुमित (19), राधा (23) और बबीता (23) के रूप में हुई है। कुणाल और सुमित हरियाणा के सोनीपत क्षेत्र के रहने वाले बताए गए हैं, जबकि राधा और बबीता उत्तर प्रदेश की निवासी हैं।

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    जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, कुणाल ने कथित तौर पर अमृतसर से एक पिस्तौल और 20 कारतूस जुटाए थे। सुमित पर उसके साथ जाने का आरोप है, जबकि राधा और बबीता पर हथियार मुंबई पहुंचाने का संदेह है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि हथियार किस माध्यम से शूटर्स तक पहुंचे और इस पूरी व्यवस्था को किसने निर्देशित किया।

    21 अक्टूबर को हरियाणा के सोनीपत जिले के बरोदा गांव से अंकित नाम के एक अन्य संदिग्ध की गिरफ्तारी की जानकारी भी सामने आई। उसे मामले की साजिश में शामिल होने के संदेह में पकड़े जाने की बात कही गई है।

    इन गिरफ्तारियों के बाद मामले में कुल आठ गिरफ्तारियों की जानकारी सामने आई है। हालांकि, सभी आरोपियों की औपचारिक गिरफ्तारी, संबंधित FIR और प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका की पुष्टि आधिकारिक रिकॉर्ड से ही हो पाएगा।

    कैब ड्राइवर के फोन कॉल से कोटा तक पहुंची पुलिस

    मुंबई क्राइम ब्रांच ने 18 अक्टूबर की फायरिंग के बाद करीब 20 टीमें बनाकर जांच शुरू की थी। घटनास्थल और संभावित भागने के रास्तों के आसपास लगे 500 से अधिक CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली गई।

    जांच के दौरान पुलिस को एक पीली पल्सर बाइक का सुराग मिला, जिसका इस्तेमाल हमलावरों के फरार होने में किए जाने का आरोप है। बाइक के मालिक से मिले मोबाइल नंबर के आधार पर पुलिस ने आरोपियों की गतिविधियों की पड़ताल की।

    पुलिस के मुताबिक, आरोपी अंधेरी से लोकल ट्रेन के जरिए बोरीवली पहुंचे और वहां से कैब लेकर सूरत गए। कैब ड्राइवर ने बुकिंग में इस्तेमाल किए गए नंबर पर फोन किया, जिससे जांचकर्ताओं को आरोपियों तक पहुंचने का अहम सुराग मिला। ड्राइवर ने पुलिस को बताया कि उसने तीन यात्रियों को सूरत रेलवे स्टेशन पर छोड़ा था।

    इसके बाद ट्रेन के शेड्यूल, आरक्षण और दूसरी यात्रा संबंधी जानकारियों की मदद से पुलिस ने पता लगाया कि आरोपी पुणे-जयपुर एक्सप्रेस में सवार हुए थे। मुंबई पुलिस ने राजस्थान पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद कोटा रेलवे स्टेशन पर तीनों को पकड़ लिया गया।

    जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने पुलिस से बचने के लिए यात्रा के साधन और रास्ते बदलने की कोशिश की थी। पुलिस अब उनके कथित फरार होने के पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।

    हथियारों की बरामदगी अब भी बड़ी चुनौती

    21 अक्टूबर को अदालत में पुलिस ने बताया कि फायरिंग में इस्तेमाल किए गए हथियार अभी बरामद नहीं हुए हैं। पुलिस ने यह भी दावा किया कि आरोपियों ने वारदात में इस्तेमाल किए गए दो मोबाइल फोन नष्ट कर दिए थे।

    हथियारों की सप्लाई से जुड़े संदिग्धों की गिरफ्तारी के बावजूद पुलिस को कथित तौर पर इस्तेमाल की गई पिस्तौल और कारतूसों की बरामदगी करनी है। इसके साथ ही जांच एजेंसियां मोबाइल फोन, डिजिटल बातचीत, वित्तीय लेनदेन और आरोपियों के बीच संपर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं।

    फायरिंग में इस्तेमाल की गई पल्सर बाइक कथित तौर पर हृतिक कुमार उर्फ रोशन महतो ने खरीदी थी। पुलिस के अनुसार, बाइक पहले कई लोगों के हाथों से गुजर चुकी थी और उसका रजिस्ट्रेशन महतो के नाम पर ट्रांसफर नहीं हुआ था। वह रैपिडो राइडर के तौर पर काम करता था।

    पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि बाइक किसने उपलब्ध कराई, हथियार कहां रखे गए थे और फायरिंग के बाद आरोपियों को भागने में किसने मदद की।

    अनिल पंडित और बिश्नोई गैंग कनेक्शन की जांच

    क्राइम ब्रांच अनिल पंडित की कथित भूमिका की जांच कर रही है, जिसे जांचकर्ताओं ने लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़ा ऑपरेटिव बताया है।

    फायरिंग के बाद सोशल मीडिया पर एक ऑडियो संदेश और फेसबुक पोस्ट के जरिए घटना की जिम्मेदारी लेने का दावा किया गया था। पुलिस इन संदेशों की प्रामाणिकता और उन्हें प्रकाशित करने वाले लोगों की पहचान की जांच कर रही है।

    जांचकर्ताओं को संदेह है कि रेहान का अनिल पंडित से Signal और Telegram के जरिए संपर्क था। हृतिक कुमार उर्फ रोशन महतो पर पंडित के संपर्क में रहने और कथित शूटर्स के लिए ठहरने, खाने तथा बाइक की व्यवस्था करने का आरोप है।

    पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हमले से पहले टाइगर श्रॉफ की लोकेशन किसने साझा की, आरोपियों को निर्देश किसने दिए और हथियारों की व्यवस्था के लिए पैसे कहां से आए। लॉरेंस बिश्नोई और उसके भाई अनमोल बिश्नोई को इस मामले में मुंबई पुलिस की हिरासत में नहीं बताया गया है।

    भुगतान और विदेश भागने की कथित योजना

    पुलिस के अनुसार, फुलसिंह और रेहान फायरिंग से करीब 20 दिन पहले हरियाणा के सोनीपत से मुंबई पहुंचे थे। जांचकर्ताओं को संदेह है कि रेहान को हमले की जिम्मेदारी सौंपी गई थी और उसने फुलसिंह को अपने साथ शामिल किया।

    मूल जांच संबंधी जानकारी में रेहान को शुरुआती खर्च के लिए 50,000 रुपये दिए जाने के आरोप की पड़ताल का उल्लेख है। दूसरी जानकारी में तीन आरोपियों को 37,000 रुपये दिए जाने का दावा सामने आया है। दोनों रकमों का संबंध और भुगतान करने वाले व्यक्ति की पहचान अभी स्पष्ट किया जाना अभी बाकी है।

    पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपियों को बड़ी रकम देने और भारत से बाहर निकलने में मदद करने का वादा किया गया था या नहीं। कुछ जानकारियों में कनाडा जाने की कथित योजना का उल्लेख है, जबकि दूसरी जानकारी में नेपाल के रास्ते फरार होने की आशंका जताई गई है।

    बॉलीवुड हस्तियों की सुरक्षा पर भी असर

    घटना के बाद बॉलीवुड की दूसरी हस्तियों की सुरक्षा को लेकर भी सतर्कता बढ़ाए जाने की जानकारी सामने आई। सलमान खान, आमिर खान और रोहित शेट्टी के आवासों के आसपास अतिरिक्त पुलिस व्यवस्था और गश्त की जारी की गई है । अक्षय कुमार के घर पर बुलेटप्रूफ ग्लास लगाने की जानकारी भी सामने आई है।

    टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के मामले में पुलिस की जांच अभी जारी है और किसी कथित गैंग की जिम्मेदारी या हमले के वास्तविक मकसद को अदालत में साबित नहीं किया गया है।

    फिलहाल पुलिस के सामने सबसे अहम सवाल हैं—फायरिंग में इस्तेमाल हथियार कहां हैं, कथित सप्लाई नेटवर्क में किसकी क्या भूमिका थी, हमले के पीछे वास्तविक मकसद क्या था और क्या इस साजिश में अन्य लोग भी शामिल थे।

  • मुंबई में ₹10.16 करोड़ की हेरोइन जब्त, क्राइम ब्रांच की दो कार्रवाइयों में 3 आरोपी गिरफ्तार

    मुंबई में ₹10.16 करोड़ की हेरोइन जब्त, क्राइम ब्रांच की दो कार्रवाइयों में 3 आरोपी गिरफ्तार

    मुंबई क्राइम ब्रांच यूनिट 11 ने कांदिवली सहित दो कार्रवाइयों में 2.032 किलो हेरोइन जब्त की। ₹10.16 करोड़ की ड्रग्स के मामले में तीन आरोपी गिरफ्तार।

    मुंबई: कांदिवली क्राइम ब्रांच यूनिट 11 ने 14 और 17 अक्टूबर को की गई दो अलग-अलग कार्रवाइयों में कुल 2.032 किलोग्राम हेरोइन जब्त की। पुलिस के मुताबिक, बरामद ड्रग्स की अनुमानित कीमत ₹10.16 करोड़ है। मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अब कथित अंतरराज्यीय ड्रग्स नेटवर्क, सप्लायरों और नशीले पदार्थों की सप्लाई चेन की जांच कर रही है।

    पहली कार्रवाई: कांदिवली पश्चिम में 758 ग्राम हेरोइन जब्त

    पुलिस को नशीले पदार्थों की कथित तस्करी के संबंध में खुफिया जानकारी मिली थी। इसके आधार पर 14 अक्टूबर 2026 को क्राइम ब्रांच यूनिट 11 की टीम ने कांदिवली पश्चिम में कार्रवाई की।

    इस दौरान पुलिस ने दो संदिग्धों को पकड़ा और उनके पास से 758 ग्राम हेरोइन बरामद की। पुलिस के अनुसार, जब्त हेरोइन की अनुमानित कीमत ₹3.79 करोड़ है। इस कार्रवाई के बाद दोनों आरोपियों से पूछताछ की गई।

    दूसरी कार्रवाई: एक और आरोपी गिरफ्तार, 1.274 किलोग्राम हेरोइन बरामद

    पहली कार्रवाई में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान पुलिस को कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी मिली। इसके आधार पर क्राइम ब्रांच ने 17 अक्टूबर को दूसरी कार्रवाई की।

    इस कार्रवाई में पुलिस ने तीसरे आरोपी को गिरफ्तार किया और उसके पास से 1.274 किलोग्राम अतिरिक्त हेरोइन बरामद की। इसकी अनुमानित कीमत ₹6.37 करोड़ बताई गई है।

    दोनों कार्रवाइयों में कुल 2.032 किलोग्राम हेरोइन जब्त

    दोनों कार्रवाइयों की बरामदगी को मिलाकर पुलिस ने कुल 2,032 ग्राम यानी 2.032 किलोग्राम हेरोइन जब्त की है। पुलिस के अनुसार, इसकी कुल अनुमानित कीमत ₹10.16 करोड़ है। इस मामले में कुल तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

    कथित अंतरराज्यीय ड्रग्स नेटवर्क की जांच

    पुलिस को शुरुआती जांच में आरोपियों के कथित अंतरराज्यीय ड्रग्स नेटवर्क से जुड़े होने की आशंका है। हालांकि, नेटवर्क का पूरा दायरा और प्रत्येक आरोपी की भूमिका जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

    क्राइम ब्रांच अब जब्त हेरोइन के स्रोत का पता लगाने, कथित सप्लायरों की पहचान करने और नशीले पदार्थों की खरीद-बिक्री तथा वितरण से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

    NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज

    पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। मामले की आगे की जांच जारी है।

  • टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: रेहान की मां का 2 लाख के लालच का दावा, जांच में नए नाम

    टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: रेहान की मां का 2 लाख के लालच का दावा, जांच में नए नाम

    टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में रेहान की मां ने दो लाख रुपये के लालच का दावा किया। जानें सोनीपत कनेक्शन, गिरफ्तार आरोपियों और पुलिस जांच के नए अपडेट।

    मुंबई: टाइगर श्रॉफ की कार पर मुंबई के जुहू इलाके में हुई फायरिंग के मामले में जांच का दायरा बढ़ने के बीच सोनीपत के रेहान की मां शमशीदा ने दावा किया है कि उनके बेटे को पैसों का लालच देकर घर से बाहर बुलाया गया था। मां के मुताबिक, करीब 20 दिन पहले रेहान खाना खा रहा था, तभी एक शख्स उसे बुलाने आया और वह काम पर जाने की बात कहकर घर से निकल गया। इसके बाद परिवार का उससे संपर्क नहीं हो पाया।

    इस मामले में रेहान समेत कई आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जांच में कथित तौर पर युवाओं को पैसों और विदेश में बसने का वादा करके अपराध में शामिल करने की आशंका की पड़ताल की जा रही है। हालांकि, रेहान को जबरन ले जाने या उसे अपराध की पूरी जानकारी नहीं होने की बात की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    खाने की थाली से उठकर गया रेहान, फिर घर नहीं लौटा

    हरियाणा के सोनीपत जिले के देवडू गांव में रहने वाली शमशीदा ने बताया कि रेहान घर में खाना खा रहा था, तभी एक व्यक्ति उसे बाहर बुलाने आया। रेहान ने परिवार को बताया कि वह काम से जा रहा है। इसके बाद वह घर से निकल गया, लेकिन वापस नहीं लौटा।

    परिवार ने उससे संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उसका मोबाइल फोन बंद आने लगा। मां के मुताबिक, घरवालों को यह जानकारी नहीं थी कि रेहान मुंबई पहुंच चुका है। परिवार को उसकी गतिविधियों और कथित फायरिंग की घटना के बारे में बाद में पता चला।

    शमशीदा का दावा है कि उनके बेटे को दो लाख रुपये के काम का लालच दिया गया था। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि कथित रकम किसने देने का वादा किया था, काम क्या बताया गया था और रेहान को उस काम की वास्तविक प्रकृति के बारे में कितनी जानकारी थी।

    दो लाख रुपये या 35 हजार रुपये, भुगतान को लेकर क्या जानकारी है?

    इस मामले में कथित भुगतान को लेकर अलग-अलग जानकारियां सामने आई हैं। रेहान की मां के बयान में दो लाख रुपये के लालच का जिक्र है, जबकि पुलिस जांच से जुड़ी जानकारी में रेहान को कथित तौर पर 35 हजार रुपये और विदेश में बसने का वादा दिए जाने की बात सामने आई है।

    फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों दावे अलग-अलग परिस्थितियों से जुड़े हैं या इनमें कोई अन्य अंतर है। पुलिस जांच में कथित भर्ती, पैसों के प्रलोभन और आरोपियों के आपसी संपर्क की भूमिका महत्वपूर्ण है।

    मां का बयान परिवार का पक्ष सामने रखता है, लेकिन इससे अपने आप यह साबित नहीं होता कि रेहान का अपहरण किया गया था या उसे फायरिंग में शामिल होने के लिए मजबूर किया गया था।

    टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग में क्या हुआ था?

    18 अक्टूबर 2026 को मुंबई के जुहू इलाके में टाइगर श्रॉफ की कार को निशाना बनाकर फायरिंग की गई थी। जहां, पांच से छह राउंड गोलियां चलाई गईं। टाइगर श्रॉफ सुरक्षित रहे, जबकि उनके ड्राइवर और एक अन्य व्यक्ति घायल हो गए।

    घटना के बाद पुलिस ने आरोपियों की पहचान करने और उनके भागने के रास्ते का पता लगाने के लिए जांच शुरू की। सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी सुराग, बाइक और यात्रा से जुड़ी जानकारी की मदद से आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश की गई।

    19 अक्टूबर को हरियाणा के रेहान और फूल सिंह तथा बिहार के ऋतिक कुमार को राजस्थान के कोटा में गिरफ्तार किया गया। आरोपियों के मुंबई से निकलकर सूरत के रास्ते कोटा पहुंचने की बात भी जांच से जुड़ी जानकारी में सामने आई। आरोपियों के पास से गिरफ्तारी के समय हथियार बरामद नहीं हुए।

    अनिल पंडित और समीर का नाम जांच में क्यों आया?

    जांच में अनिल पंडित का नाम कथित नेटवर्क से जुड़कर सामने आया है। आरोप है कि उसने युवाओं को पैसों और विदेश में बसने के वादे के जरिए अपराध में शामिल करने में भूमिका निभाई।

    20 अक्टूबर को समीर नाम के व्यक्ति की गिरफ्तारी की जानकारी भी सामने आई। आरोप है कि उसने रेहान और अन्य आरोपियों का अनिल पंडित से संपर्क कराने में भूमिका निभाई। समीर के परिवार की ओर से उसके मामले में शामिल होने से इनकार किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

    जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि आरोपियों का आपस में संपर्क कैसे हुआ, किसने उन्हें कथित काम के लिए तैयार किया और फायरिंग की योजना बनाने में किसकी क्या भूमिका थी। बिश्नोई गैंग से कथित संबंधों की भी जांच की बात सामने आई है।

    क्या टाइगर श्रॉफ ही हमलावरों का निशाना थे?

    इस मामले में एक और अहम सवाल यह है कि फायरिंग का मूल निशाना कौन था। जांच से जुड़ी एक जानकारी में दावा किया गया कि टाइगर श्रॉफ कथित तौर पर हमलावरों का मूल निशाना नहीं थे और इससे पहले किसी अन्य प्रमुख बॉलीवुड हस्ती को निशाना बनाने की योजना थी।

    इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि कथित योजना क्या थी, निशाना बदलने की वजह क्या थी और इसका फायरिंग की घटना से क्या संबंध था।

    फायरिंग के बाद बॉलीवुड हस्तियों की सुरक्षा बढ़ाई गई

    घटना के बाद मुंबई में कुछ अन्य फिल्मी हस्तियों की सुरक्षा को लेकर भी कदम उठाए जाने की जानकारी सामने आई। सलमान खान और रोहित शेट्टी के घरों के बाहर अतिरिक्त पुलिस सुरक्षा बढ़ाने और आमिर खान के आवास के आसपास गश्त तेज करने की बात सामने आई। उत्तर प्रदेश के बरेली में दिशा पटानी के परिवार के घर के आसपास भी सुरक्षा बढ़ाए जाने की जानकारी सामने आई।

    इस घटनाक्रम ने फिल्मी हस्तियों की सुरक्षा और धमकियों से निपटने की पुलिस व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, इन कदमों को अपने आप किसी दूसरे हमले की पुष्टि या पूरे शहर में सुरक्षा व्यवस्था की विफलता नहीं माना जा सकता।

    मामले में Rapido से जुड़े ऋतिक कुमार को लेकर भी कंपनी का पक्ष सामने आया है। कंपनी ने कहा कि वह 14 अक्टूबर से उसके प्लेटफॉर्म पर सक्रिय राइडर नहीं था। यह स्पष्टीकरण कंपनी की ओर से दिया गया है और इससे अपने आप आरोपी की कथित भूमिका या अपराध में शामिल होने की परिस्थितियां तय नहीं होतीं।

    अब पुलिस जांच में किन सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे?

    इस मामले में अब कथित भर्ती करने वालों की भूमिका, आरोपियों के बीच संपर्क, पैसों के लेन-देन और फायरिंग की योजना से जुड़े सवाल महत्वपूर्ण हैं। रेहान की मां के बयान की जांच के साथ यह भी स्पष्ट करना होगा कि घर से निकलने के बाद रेहान कहां-कहां गया और परिवार से उसका संपर्क क्यों टूट गया।

    आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद उनकी कानूनी स्थिति, पुलिस हिरासत, अदालत में पेशी और किसी हथियार या अन्य सबूत की बरामदगी से जुड़ी नवीनतम जानकारी भी मामले की दिशा समझने के लिए जरूरी है।

    फिलहाल, रेहान की मां का बयान इस केस में परिवार का पक्ष सामने लाता है, जबकि पुलिस जांच का मुख्य सवाल यह है कि फायरिंग की योजना किसने बनाई, आरोपियों को किसने जोड़ा और प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका क्या थी। इन सवालों का जवाब जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

  • मालाड बार वसूली केस: ₹3 लाख की मांग, दो गिरफ्तार; सोशल मीडिया वीडियो बना विवाद की वजह

    मालाड बार वसूली केस: ₹3 लाख की मांग, दो गिरफ्तार; सोशल मीडिया वीडियो बना विवाद की वजह

    मुंबई के मालाड में बार मालिक से कथित वसूली के मामले में दो आरोपी गिरफ्तार, एक फरार। ₹3 लाख की मांग, सोशल मीडिया वीडियो और पुलिस ट्रैप की पूरी जानकारी।

    मुंबई: मालाड वेस्ट में बार मालिक से कथित तौर पर पैसे वसूलने के मामले में बांगुर नगर पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि तीसरा आरोपी फरार बताया गया है। मामले में ₹3 लाख की शुरुआती मांग, हर महीने ₹25,000 देने का दबाव और पुलिस ट्रैप के दौरान ₹10,000 की बरामदगी सामने आई है।

    आरोप है कि बार को अवैध हुक्का पार्लर बताने वाले कथित फर्जी वीडियो X और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट किए गए। इसके जरिए मालिक पर पैसे देने का दबाव बनाया गया। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

    ₹3 लाख से शुरू हुई कथित वसूली की मांग

    मालाड वेस्ट में न्यू लिंक रोड स्थित Open Your Soda Bottle नामक बार के 28 वर्षीय मालिक ने शिकायत में आरोप लगाया कि तीन लोगों ने उनके प्रतिष्ठान के खिलाफ सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट किए। इन वीडियो में कथित तौर पर बार में अवैध हुक्का पार्लर चलने का दावा किया गया था।

    आरोप है कि संबंधित लोगों ने मुंबई पुलिस को टैग करके पोस्ट किए और अवैध गतिविधियों को लेकर शिकायतें भी कीं। बार मालिक के अनुसार, इन गतिविधियों के जरिए उनके कारोबार पर दबाव बनाया गया और पैसे की मांग की गई।

    शुरुआत में कथित तौर पर ₹3 लाख एकमुश्त और हर महीने ₹25,000 देने की मांग की गई थी। बाद में बातचीत के दौरान एकमुश्त रकम घटाकर ₹1.05 लाख करने की बात सामने आई।

    28 सितंबर को ₹25,000 देने का आरोप

    शिकायत के अनुसार, बार मालिक ने 28 सितंबर को मोहम्मद फैजान सलीम मंसूरी (36) को ₹25,000 नकद दिए थे। इसके बाद 5 अक्टूबर को दोनों के बीच हुई बातचीत को मालिक ने कथित तौर पर रिकॉर्ड किया।

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    12 अक्टूबर को मंसूरी ने फिर पैसे मांगे और 13 अक्टूबर को बार के बाहर मुलाकात तय हुई। इसी मुलाकात के दौरान पुलिस ने कार्रवाई की योजना बनाई।

    दोपहिया वाहन में रखवाए ₹10,000, पुलिस ने पकड़ा

    13 अक्टूबर की रात हुई कार्रवाई में पुलिस ने मंसूरी को कथित वसूली के दौरान गिरफ्तार किया। शिकायत के अनुसार, रात करीब 12:50 बजे मंसूरी ने बार मालिक को ₹10,000 अपने दोपहिया वाहन के स्टोरेज कम्पार्टमेंट में रखने के लिए कहा।

    मालिक ने रकम रखने के बाद पुलिस को संकेत दिया। इसके बाद मौके पर मौजूद पुलिस टीम ने मंसूरी को पकड़ लिया। पुलिस ने वाहन से ₹10,000 बरामद किए। कार्रवाई के दौरान नकदी, मोबाइल फोन और अन्य सामान भी जब्त किया गया।

    मंसूरी और डी.एम. जाधव गिरफ्तार, पंकज फरार

    इस मामले में मोहम्मद फैजान सलीम मंसूरी और डी.एम. जाधव को गिरफ्तार किया गया है। तीसरे आरोपी पंकज के फरार होने की जानकारी सामने आई है।

    बांगुर नगर पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ निरीक्षक जयवंत पवार ने बताया कि जाधव और पंकज की पहचान मंसूरी के कथित सहयोगियों के रूप में हुई है। मामले में 13 अक्टूबर को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई और आगे की जांच जारी है।

    पुलिस जांच में क्या सामने आया?

    बार मालिक ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट करने से उनके प्रतिष्ठान की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा और कारोबार प्रभावित हुआ। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने मंसूरी से इस बारे में बात की, तो उन्हें धमकी दी गई।

    पुलिस अधिकारी के अनुसार, बार का कई बार निरीक्षण किया गया, लेकिन वहां कोई अवैध गतिविधि नहीं मिली। हालांकि, सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए सभी वीडियो की फॉरेंसिक जांच, संबंधित अकाउंट के संचालकों की पहचान और रिकॉर्ड की गई बातचीत की जांच के नतीजे सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं हैं।

    फिलहाल, पुलिस की जांच जारी है। तीसरे आरोपी पंकज की गिरफ्तारी, मामले में दर्ज सटीक कानूनी धाराओं और कथित वसूली से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की स्थिति पर आगे की जानकारी सामने आना बाकी है। आरोपियों के खिलाफ लगे आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

  • सीएसएमटी से अगवा एक साल की बच्ची दिवा में मिली, महिला गिरफ्तार

    सीएसएमटी से अगवा एक साल की बच्ची दिवा में मिली, महिला गिरफ्तार

    मुंबई के सीएसएमटी रेलवे स्टेशन से अगवा एक साल की बच्ची को रेलवे पुलिस ने दिवा से बरामद किया। मामले में महिला गिरफ्तार, पुराने चोरी के मामलों की भी जांच।

    मुंबई: छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) रेलवे स्टेशन से अगवा हुई एक साल की बच्ची को रेलवे पुलिस ने दिवा से बरामद कर लिया है। इस मामले में एक महिला को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी जानकारी और स्थानीय स्तर पर मिली गुप्त सूचनाओं की मदद से बच्ची का पता लगाया। पुलिस की जांच में गिरफ्तार महिला के खिलाफ पहले भी चोरी के मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।

    ट्रेन छूटने के बाद स्टेशन पर सो गया था परिवार

    पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, 15 अक्टूबर 2026 को शिकायतकर्ता महिला अपने पति और एक साल की बच्ची के साथ धाराशिव स्थित अपने गांव जाने के लिए सीएसएमटी रेलवे स्टेशन पहुंची थी। रात करीब 7 बजे स्टेशन पहुंचने के बाद उनकी ट्रेन छूट गई। इसके बाद परिवार मुख्य रेल लाइन के प्लेटफॉर्म नंबर 12 और 13 के सामने लगे स्टील के बेंच के पास सो गया।

    16 अक्टूबर की सुबह करीब 4 बजे से 5:25 बजे के बीच एक अज्ञात महिला ने परिवार के सोने का फायदा उठाया और माता-पिता की सहमति के बिना बच्ची को लेकर चली गई। बच्ची के गायब होने का पता चलने पर परिवार ने सीएसएमटी रेलवे पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई।

    इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

    सीसीटीवी से पता चला, पनवेल लोकल से दिवा पहुंची महिला

    मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएसएमटी रेलवे पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक संभाजी कटारे ने वरिष्ठ अधिकारियों को घटना की जानकारी दी। इसके बाद आरोपी की तलाश के लिए चार अलग-अलग पुलिस दल बनाए गए। जांच में अपराध शाखा और अपराध का खुलासा करने वाली टीम को भी शामिल किया गया।

    सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी जांच से पुलिस को पता चला कि संदिग्ध महिला बच्ची को लेकर सीएसएमटी स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 2 से सुबह 5:22 बजे पनवेल जाने वाली धीमी लोकल ट्रेन में सवार हुई थी। इसके बाद उसने रास्ते में ट्रेन बदली और दिवा रेलवे क्षेत्र की ओर चली गई।

    इस सुराग के आधार पर पुलिस ने महिला की तलाश शुरू की। गुप्त सूचना देने वालों और स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के जरिए पुलिस को पता चला कि संदिग्ध महिला दिवा के सद्गुरु नगर इलाके में रहती है।

    दिवा में बच्ची के साथ पकड़ी गई आरोपी महिला

    पुलिस ने जांच के आधार पर महिला के रहने की जगह का पता लगाया और उसे बच्ची के साथ पकड़ लिया। कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद मामले में उसकी भूमिका सामने आने पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

    इस घटना में बच्ची को लेकर जाने का कथित उद्देश्य भी जांच का अहम पहलू है। पुलिस की ओर से इसकी स्पष्ट पुष्टि होने पर ही किसी विशेष मकसद को अंतिम तथ्य के रूप में दर्ज किया जा सकता है।

    पहले भी चोरी के मामलों में नाम सामने आया

    पुलिस की जांच में गिरफ्तार महिला के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी भी सामने आई है। उसके खिलाफ दादर रेलवे पुलिस थाने और सायन पुलिस थाने की सीमा में चोरी के मामले दर्ज होने की बात सामने आई है।

    हालांकि, पुराने मामलों का उल्लेख अपने आप में इस घटना में उसकी भूमिका का प्रमाण नहीं है। मौजूदा मामले में उसकी जिम्मेदारी का निर्धारण जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा।

    वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में कार्रवाई

    यह कार्रवाई मुंबई रेलवे पुलिस आयुक्त एम. राकेश कलासागर, पुलिस उपायुक्त प्रज्ञा जेडगे और सहायक पुलिस आयुक्त सोपान काकड़ के मार्गदर्शन में की गई।

    इस कार्रवाई में सीएसएमटी रेलवे पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक संभाजी कटारे, जांच अधिकारी सहायक पुलिस निरीक्षक अश्विनी पाटील, स्थानीय अपराध शाखा के निरीक्षक कदम, पुलिस उपनिरीक्षक चंगरपल्लु और सोनार सहित संबंधित पुलिसकर्मियों ने हिस्सा लिया।

    इसके अलावा पुलिस हवलदार नांगरे, ठोंबरे, राजेश राठोड, टिंगरे और ठाकुर; महिला पुलिस हवलदार स्मिता भोईटे; पुलिसकर्मी पाटील, जाधव, गायकवाड और कोठावळे; सहायक पुलिस निरीक्षक अभिजत टेलर, सहायक पुलिस फौजदार हरिश्चंद्र और शेडगे; पुलिस हवलदार साळुंके, मोरे और केदार; पुलिसकर्मी देसाई तथा महिला पुलिसकर्मी धायगुडे ने भी कार्रवाई में योगदान दिया।

    रेलवे पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी जांच और स्थानीय स्तर पर मिली सूचनाओं के जरिए बच्ची का पता लगाकर आरोपी महिला को गिरफ्तार किया। मामले में आरोपी के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई और जांच की स्थिति महत्वपूर्ण रहेगी।

  • मालाड में 1.30 करोड़ के गहनों की चोरी का खुलासा, दुकान के कर्मचारी समेत 4 गिरफ्तार

    मालाड में 1.30 करोड़ के गहनों की चोरी का खुलासा, दुकान के कर्मचारी समेत 4 गिरफ्तार

    मुंबई के मालाड में रक्षा ज्वेलर्स से 1.30 करोड़ के सोने-चांदी के गहनों की चोरी में चार आरोपी गिरफ्तार। जानें CCTV, बदली चाबी और बरामदगी का पूरा मामला।

    मुंबई: मालाड पश्चिम स्थित रक्षा ज्वेलर्स से करीब 1.30 करोड़ रुपये के सोने-चांदी के गहने चोरी करने के मामले में मालाड पुलिस ने दुकान के कर्मचारी समेत चार आरोपियों को राजस्थान से गिरफ्तार किया है। जांच में दुकान की मूल चाबी के जैसी दूसरी चाबी बनाकर चोरी की साजिश रचने की बात सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, चोरी हुए ज्यादातर गहने बरामद कर लिए गए हैं।

    यह मामला मालाड पश्चिम के नटराज मार्केट स्थित रक्षा ज्वेलर्स का है। दुकान के मालिक विकास जैन की शिकायत के बाद पुलिस ने जांच शुरू की थी। मामले में गिरफ्तार आरोपियों में खुमानसिंग दासाना, उसका भाई सोहनसिंग तुलसीसिंग दासाना और उनके दो साथी सुमनसिंग दासाना और गणेशसिंग कडेचा शामिल हैं। सभी आरोपियों को राजस्थान से पकड़कर मुंबई लाया गया और अदालत में पेश किया गया, जहां उन्हें पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।

    चाबी बदलकर चोरी करने का आरोप

    दुकान के मालिक विकास जैन 2 अक्टूबर को परिवार के साथ राजस्थान गए थे। उस दौरान दुकान को खोलने और बंद करने की जिम्मेदारी कर्मचारी भुरेलाल राठोड को सौंपी गई थी।

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    3 अक्टूबर को भुरेलाल दुकान खोलने पहुंचा, लेकिन उसके पास मौजूद चाबी से ताला नहीं खुला। इसके बाद दुकान के कर्मचारी खुमानसिंग दासाना से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उसका फोन बंद था। इसकी जानकारी मिलने पर विकास जैन मुंबई लौटे और दुकान की जांच की।

    दुकान का ताला खोलकर अंदर जाने पर सोने-चांदी के गहने गायब मिले। शुरुआती जांच में चाबियों के साथ छेड़छाड़ किए जाने की बात सामने आई। पुलिस जांच के अनुसार, दुकान की मूल चाबी के जैसी दूसरी चाबी तैयार कर उसे चाबियों के गुच्छे में बदल दिया गया था। इसी तरीके से चोरी की साजिश रचने का आरोप है।

    CCTV से मिला आरोपियों का सुराग

    चोरी का पता चलने के बाद दुकान के मालिक और कर्मचारी ने आसपास के दुकानों के CCTV फुटेज की जांच की। इसमें खुमानसिंग दासाना अपने तीन साथियों के साथ दुकान में प्रवेश करता और बाद में बैग लेकर बाहर निकलता दिखाई दिया।

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    CCTV में संदिग्धों की गतिविधियों का समय 2 अक्टूबर की रात करीब 10:15 से 10:50 बजे के बीच बताया गया है। CCTV से मिले सुराग और तकनीकी जांच के आधार पर पुलिस को आरोपियों के राजस्थान में होने की जानकारी मिली। इसके बाद स्थानीय पुलिस की मदद से चारों को गिरफ्तार किया गया।

    सोने और चांदी के गहनों की बड़ी मात्रा चोरी

    शिकायत में चोरी हुए गहनों की कीमत करीब 1.30 करोड़ रुपये बताई गई है। चोरी हुए सामान में सोने की मूर्तियों के अलावा चांदी की मूर्तियां, कड़े, चेन और पायल जैसी वस्तुएं शामिल थीं।

    उपलब्ध विवरण के अनुसार, चोरी हुए सामान में लगभग 116.74 किलोग्राम चांदी और 900 ग्राम सोना शामिल था। इन वस्तुओं की एक रिपोर्टेड कीमत क्रमशः करीब 55.98 लाख और 72 लाख रुपये बताई गई है।

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    पुलिस के मुताबिक, चोरी हुए ज्यादातर गहने राजस्थान से बरामद कर लिए गए हैं। लेकिन कितनी मात्रा में सोना-चांदी वापस मिला, कितने रुपये का सामान बरामद हुआ और क्या कोई गहना अब भी गायब है, इसका पूरा विवरण फिलहाल स्पष्ट नहीं है।

    आरोपी कर्मचारी करीब दो साल से दुकान में काम कर रहा था

    जांच से जुड़े विवरण के अनुसार, आरोपी खुमानसिंग दासाना की उम्र करीब 22 साल बताई गई है और वह लगभग दो साल से दुकान में काम कर रहा था। दुकान की गतिविधियों और चाबी तक उसकी पहुंच इस मामले की जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    हालांकि, चोरी की योजना कब बनाई गई, दूसरे आरोपियों की इसमें क्या भूमिका थी और चोरी के बाद गहनों को कहां-कहां रखा गया, इन सवालों के जवाब जांच के विस्तृत निष्कर्षों से ही स्पष्ट होंगे।

    पुलिस हिरासत में चारों आरोपी

    गिरफ्तारी के बाद चारों आरोपियों को मुंबई लाकर अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उन्हें पुलिस हिरासत में भेज दिया, ताकि चोरी के पूरे घटनाक्रम, आरोपियों की भूमिका और बरामदगी से जुड़े पहलुओं की जांच की जा सके।

    फिलहाल मामले में सबसे अहम सवाल चोरी हुए गहनों की पूरी बरामदगी और उनकी सटीक कीमत का है। पुलिस जांच के आगे बढ़ने के साथ शेष सामान, कथित साजिश और वारदात में शामिल प्रत्येक आरोपी की भूमिका से संबंधित अधिक जानकारी सामने आने की उम्मीद है। आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में होना बाकी है।

  • Mumbai Human Trafficking Case: मालाड का शख्स गिरफ्तार, जेजू द्वीप तक तस्करी की जांच

    Mumbai Human Trafficking Case: मालाड का शख्स गिरफ्तार, जेजू द्वीप तक तस्करी की जांच

    मुंबई में मानव तस्करी के कथित प्रयास में मालाड निवासी विल्सन सुनील डिसिल्वा गिरफ्तार। जेजू द्वीप, फर्जी पासपोर्ट, ₹7.5 लाख के कथित भुगतान पर मुंबई पुलिस कर रही है जांच।

    मुंबई: मालाड निवासी विल्सन सुनील डिसिल्वा (47) को एक महिला को मलेशिया के रास्ते दक्षिण कोरिया के जेजू द्वीप ले जाने की कथित योजना के मामले में गिरफ्तार किया गया है। सहार पुलिस ने 10 अक्टूबर 2026 को यह कार्रवाई की। इससे एक दिन पहले, 9 अक्टूबर को मुंबई एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन अधिकारियों ने उसे रोक लिया था। मामले में फर्जी पासपोर्ट, विदेश भेजने वाले कथित एजेंटों और ब्रिटेन तथा फ्रांस से जुड़े पुराने आरोपों की जांच की जा रही है।

    इस मामले में कथित भुगतान की रकम भी सामने आई है। पुलिस के अनुसार, आरोपी को 50,000 रुपये अग्रिम और महिला के जेजू द्वीप पहुंचने के बाद 7 लाख रुपये मिलने का वादा किया गया था। हालांकि, इस रकम के वास्तविक भुगतान और पूरे नेटवर्क की भूमिका को लेकर जांच जारी है।

    मुंबई एयरपोर्ट पर पासपोर्ट स्कैन करते ही आया अलर्ट

    इमिग्रेशन अधिकारी विजया सोनावणे (51) के अनुसार, विल्सन सुनील डिसिल्वा का पासपोर्ट सिस्टम में स्कैन किए जाने पर मानव तस्करी से संबंधित अलर्ट दिखाई दिया था। अलर्ट में संकेत था कि वह पहले भी महिलाओं को फर्जी पासपोर्ट के जरिए विदेश ले जा चुका है।

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    इसके बाद अधिकारियों ने उससे पूछताछ की और मामले की जानकारी पुलिस तक पहुंची। सहार पुलिस ने 10 अक्टूबर को उसे गिरफ्तार कर लिया।

    जांच के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि आर्थिक परेशानियों के कारण उसने पांच लोगों के लिए फर्जी पासपोर्ट हासिल किए थे। आरोप है कि वह इन लोगों को विदेश ले जाने के दौरान कभी उनका पति तो कभी पिता बनकर पेश आता था। इस कथित बयान के आधार पर पुलिस पुराने मामलों और विदेश यात्रा से जुड़े दस्तावेजों की जानकारी जुटा रही है।

    महिला को मलेशिया के रास्ते दक्षिण कोरिया ले जाने की कथित योजना

    इस मामले में प्रस्तावित यात्रा मार्ग मुंबई से मलेशिया होते हुए दक्षिण कोरिया के जेजू द्वीप तक बताया गया है। पुलिस के सामने यह जांचना महत्वपूर्ण है कि महिला को किस उद्देश्य से विदेश ले जाया जा रहा था, यात्रा की व्यवस्था किसने की थी और आरोपी को भुगतान करने का प्रस्ताव किस व्यक्ति या एजेंट ने दिया था।

    जेजू दक्षिण कोरिया का एक द्वीप है। इस मामले में उसका नाम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कथित योजना में महिला को वहीं पहुंचाने की बात सामने आई है। हालांकि, महिला की यात्रा का उद्देश्य, उसे दिए गए प्रस्ताव और उसकी वर्तमान स्थिति के बारे में अभी विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

    ब्रिटेन और फ्रांस से जुड़े पुराने मामलों की भी जांच

    पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि आरोपी ने पहले महिलाओं और बच्चों को फर्जी पासपोर्ट के जरिए ब्रिटेन और फ्रांस पहुंचाने में क्या भूमिका निभाई थी। इन पुराने मामलों में कथित रूप से विदेश ले जाए गए लोगों की पहचान, उनकी यात्रा के दस्तावेज और दूसरे संभावित आरोपियों की जानकारी जुटाई जा रही है।

    पुलिस उन एजेंटों की तलाश में भी है जिन्होंने कथित तौर पर डिसिल्वा से संपर्क किया था। जांच का एक अन्य पहलू यह पता लगाना है कि पासपोर्ट तैयार कराने, यात्रा की व्यवस्था करने और विदेश पहुंचाने की प्रक्रिया में कौन-कौन लोग शामिल थे।

    सरकारी या इमिग्रेशन अधिकारियों की संभावित भूमिका की भी जांच की जा रही है। फिलहाल, किसी अधिकारी की संलिप्तता साबित होने या इस मामले में किसी अन्य आरोपी की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है।

    मुंबई एयरपोर्ट पर फर्जी पासपोर्ट के अन्य मामले भी सामने आए

    मुंबई एयरपोर्ट पर पासपोर्ट और पहचान से जुड़े कथित फर्जीवाड़े के मामले इससे पहले भी सामने आए हैं। 5 अक्टूबर 2026 को तीन विदेशी नागरिकों को कथित फर्जी दस्तावेजों या गलत जानकारी के आधार पर भारतीय पासपोर्ट हासिल करने से जुड़े अलग-अलग मामलों में गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इन मामलों में भी एजेंटों की भूमिका जांच के दायरे में थी।

    इसके अलावा, सहार पुलिस ने मार्च 2025 से फरवरी 2026 के बीच पासपोर्ट फर्जीवाड़े के मामलों में 20 एजेंटों को गिरफ्तार किया था। पुलिस रिकॉर्ड पर आधारित प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार, 2022 से 10 अगस्त 2026 तक सहार पुलिस के कुल 4,229 अपराध संबंधी FIR में से 1,459 पासपोर्ट फर्जीवाड़े से जुड़े थे।

    मानव तस्करी के मामलों में क्या है सबसे अहम सवाल?

    इस मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि महिला को विदेश ले जाने की वास्तविक योजना क्या थी और क्या इस कथित प्रयास के पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। इसके साथ ही, पुलिस को ब्रिटेन और फ्रांस से जुड़े पुराने आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि करनी होगी और उन लोगों की पहचान करनी होगी जिन्हें कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए विदेश ले जाया गया था।