Category: Crime News

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  • विरार में तंत्र-मंत्र का जाल: बीमार बेटे को ठीक करने का वादा, मां को रिसॉर्ट बुलाकर शोषण का आरोप

    विरार में तंत्र-मंत्र का जाल: बीमार बेटे को ठीक करने का वादा, मां को रिसॉर्ट बुलाकर शोषण का आरोप

    विरार में मानसिक रूप से बीमार बच्चे को तंत्र-मंत्र से ठीक करने का दावा कर एक महिला को कथित तौर पर अर्नाला के रिसॉर्ट में बुलाकर उसका शोषण किया गया। मामले में तांत्रिक और उसके सहयोगी की भूमिका की जांच जारी है।

    मुंबई: पालघर जिले के विरार में अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र के नाम पर कथित शोषण का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, मानसिक रूप से बीमार बेटे को ठीक करने का भरोसा दिलाकर एक महिला का विश्वास जीता गया और बाद में उसे अर्नाला के एक रिसॉर्ट में बुलाकर उसके साथ अनुचित व्यवहार किया गया। मामले में गिरफ्तार आरोपी अजय कमलाकर राउत फिलहाल न्यायिक हिरासत में है, जबकि जांच के दौरान वसई किले के इलाके में सक्रिय एक तांत्रिक का नाम भी सामने आया है।

    बीमार बेटे को ठीक करने का दावा, फिर शुरू हुआ भरोसे का खेल

    पीड़ित महिला का बेटा मानसिक रूप से बीमार बताया जा रहा है। परिवार लंबे समय से उसके इलाज के लिए अलग-अलग रास्ते तलाश रहा था। इसी दौरान महिला की मुलाकात अजय कमलाकर राउत से हुई।

    आरोप है कि आरोपी ने महिला को भरोसा दिलाया कि विशेष पूजा, तंत्र-मंत्र और धार्मिक अनुष्ठानों के जरिए उसके बेटे को ठीक किया जा सकता है। धीरे-धीरे उसने महिला और उसके परिवार का विश्वास जीत लिया।

    पुलिस के मुताबिक, इसी भरोसे का फायदा उठाकर महिला को अर्नाला स्थित एक रिसॉर्ट में बुलाया गया, जहां उसके साथ कथित तौर पर जबरन यौन संबंध बनाए गए।

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    अर्नाला पुलिस स्टेशन और गिरफ्तार आरोपी अजय कमलाकर राणा की तस्वीर

    वसई किले के तांत्रिक का नाम जांच में क्यों आया?

    जांच के दौरान वसई किले के इलाके में सक्रिय तांत्रिक अजय राणा का नाम सामने आया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी और तांत्रिक के बीच क्या संबंध थे और क्या पीड़िता को किसी धार्मिक अनुष्ठान या इलाज के बहाने उसके पास ले जाया जाना था।

    स्थानीय लोगों के मुताबिक, वसई किले के आसपास कई वर्षों से तंत्र-मंत्र और चमत्कारी इलाज के दावे करने वाले लोगों की गतिविधियों की चर्चा होती रही है। हालांकि, पुलिस ने अभी तक इस मामले में तांत्रिक की भूमिका पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला है।

    आरोपी पर कौन-कौन सी धाराएं लगाई गई हैं?

    पीड़िता की शिकायत पर अर्नाला सागरी पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धारा 64(1), 69, 75 और 78 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

    इन धाराओं में मुख्य रूप से महिला के साथ यौन अपराध, धोखे से संबंध बनाने, उत्पीड़न और महिला की गरिमा से जुड़े अपराध शामिल हैं।

    अदालत ने क्या फैसला सुनाया?

    अजय कमलाकर राउत को पहले दो दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया था। बाद में वसई कोर्ट में पेश किए जाने पर अदालत ने उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

    फिलहाल मामले की जांच अर्नाला सागरी पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक सतीश निकम के मार्गदर्शन में चल रही है।

    क्या इस मामले में आर्थिक धोखाधड़ी का भी एंगल है?

    जांच अधिकारी इस बात की भी पड़ताल कर रहे हैं कि क्या पीड़िता से तंत्र-मंत्र, पूजा-पाठ या विशेष अनुष्ठानों के नाम पर पैसे लिए गए थे।

    इसके अलावा, पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इसी तरीके से किसी और महिला या परिवार को निशाना बनाया गया था।

    हालांकि, आर्थिक धोखाधड़ी की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    महाराष्ट्र में पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले

    महाराष्ट्र में अंधविश्वास और चमत्कारी इलाज के नाम पर महिलाओं के शोषण के कई मामले पहले भी सामने आ चुके हैं।

    नासिक के चर्चित अशोक खरात मामले में भी महिलाओं को चमत्कार और धार्मिक अनुष्ठानों का झांसा देकर कथित तौर पर प्रताड़ित करने के आरोप लगे थे।

    विशेषज्ञों का कहना है कि गंभीर बीमारी, मानसिक तनाव और पारिवारिक परेशानियों से जूझ रहे लोग अक्सर ऐसे लोगों के जाल में फंस जाते हैं।

    लोगों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

    • किसी भी बीमारी के इलाज के लिए केवल पंजीकृत डॉक्टरों से संपर्क करें।
    • चमत्कारी इलाज और तंत्र-मंत्र के दावों पर आंख बंद करके भरोसा न करें।
    • किसी अनजान व्यक्ति के साथ अकेले होटल या रिसॉर्ट में न जाएं।
    • किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत पुलिस को सूचना दें।
    • इलाज के नाम पर पैसे मांगने वालों की पूरी जांच करें।

    Official Sources

    FAQ

    सवाल: मुख्य आरोपी कौन है?

    पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी अजय कमलाकर राउत है।

    सवाल: घटना कहां हुई?

    आरोप है कि महिला को अर्नाला के एक रिसॉर्ट में बुलाया गया था।

    सवाल: मामले में किस तांत्रिक का नाम सामने आया है?

    जांच के दौरान वसई किले के इलाके में सक्रिय तांत्रिक अजय राणा का नाम सामने आया है।

    सवाल: आरोपी अभी कहां है?

    अदालत ने आरोपी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

  • लोकभवन के फर्जी दस्तावेज, 200 एजेंट और कन्फर्म टिकट का खेल, मुंबई पुलिस के खुलासे से हड़कंप

    लोकभवन के फर्जी दस्तावेज, 200 एजेंट और कन्फर्म टिकट का खेल, मुंबई पुलिस के खुलासे से हड़कंप

    मुंबई पुलिस ने लोकभवन के फर्जी लेटरहेड और नकली हस्ताक्षरों के जरिए रेलवे के इमरजेंसी कोटे से टिकट दिलाने वाले रैकेट का भंडाफोड़ किया है। जांच में देशभर में फैले 200 एजेंटों के नेटवर्क का खुलासा हुआ है।

    मुंबई: मुंबई पुलिस ने रेलवे के वीआईपी और इमरजेंसी कोटे के कथित दुरुपयोग से जुड़े एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है। जांच में सामने आया है कि महाराष्ट्र के लोकभवन के नाम पर फर्जी लेटरहेड, नकली मुहर और राज्यपाल कार्यालय के जाली हस्ताक्षरों का इस्तेमाल कर यात्रियों के वेटिंग टिकट कन्फर्म कराए जा रहे थे। इस मामले में पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

    प्रारंभिक जांच के अनुसार, यह नेटवर्क केवल मुंबई तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में फैले करीब 200 एजेंटों के जरिए संचालित किया जा रहा था। ये एजेंट यात्रियों को तत्काल और कन्फर्म टिकट दिलाने का झांसा देकर उनसे मोटी रकम वसूलते थे।

    कैसे चलता था पूरा खेल?

    पुलिस के मुताबिक, आरोपी सबसे पहले यात्रियों के नाम पर वेटिंग टिकट बुक करते थे। इसके बाद महाराष्ट्र लोकभवन के नाम से तैयार किए गए फर्जी पत्र रेलवे अधिकारियों तक पहुंचाए जाते थे। इन पत्रों में राज्यपाल के निजी सहायक के कथित नकली हस्ताक्षर और फर्जी सरकारी मुहर का इस्तेमाल किया जाता था।

    इमरजेंसी कोटे के जरिए सीट कन्फर्म होने के बाद यात्रियों से अतिरिक्त पैसे वसूले जाते थे।

    रेलवे सत्यापन में खुला फर्जीवाड़ा

    फरवरी 2026 में मध्य रेलवे के चीफ कमर्शियल मैनेजर कार्यालय ने लोकभवन से कुछ संदिग्ध पत्रों का सत्यापन मांगा था। जांच के दौरान पता चला कि पत्रों पर किए गए हस्ताक्षर और मुहर फर्जी थे।

    लोकभवन प्रशासन ने दस्तावेजों की जांच के बाद मलबार हिल पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ।

    पांच आरोपी गिरफ्तार, मास्टरमाइंड की तलाश

    पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में शत्रुंजय राजकुमार यादव उर्फ अनूप (34) समेत चार दलाल शामिल हैं। वहीं, अमरीश ठक्कर को इस पूरे नेटवर्क का कथित मास्टरमाइंड बताया जा रहा है।

    जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस रैकेट के जरिए अब तक कितने फर्जी पत्र तैयार किए गए और कितने यात्रियों को टिकट उपलब्ध कराए गए।

    किन ट्रेनों में कन्फर्म कराए गए टिकट?

    प्रारंभिक जांच में एलटीटी-राजगीर एक्सप्रेस और छपरा एक्सप्रेस समेत कई ट्रेनों के नाम सामने आए हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि रेलवे को इस घोटाले से कितना आर्थिक नुकसान हुआ।

    यात्रियों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

    रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यात्री केवल अधिकृत रेलवे प्लेटफॉर्म और लाइसेंस प्राप्त एजेंटों के माध्यम से ही टिकट बुक करें। सोशल मीडिया या निजी एजेंटों के जरिए “गारंटीड कन्फर्म टिकट” के दावों से बचें।

    फिलहाल पुलिस कॉल डिटेल, बैंक लेनदेन और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही है। मामले में आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

    Official Sources

    1. मलबार हिल पुलिस स्टेशन (मुंबई पुलिस)
      मलबार हिल पुलिस स्टेशन की आधिकारिक वेबसाइट
    2. मध्य रेलवे – चीफ कमर्शियल मैनेजर कार्यालय
      मध्य रेलवे (कॉमर्शियल विभाग) संपर्क पेज
    3. महाराष्ट्र लोकभवन (राजभवन)
      महाराष्ट्र लोकभवन की आधिकारिक वेबसाइट

    FAQ

    सवाल: इस मामले में कितने लोग गिरफ्तार हुए हैं?

    अब तक पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

    सवाल: घोटाला कैसे किया जाता था?

    फर्जी सरकारी पत्रों और नकली हस्ताक्षरों के जरिए इमरजेंसी कोटे से टिकट कन्फर्म कराए जाते थे।

    सवाल: कितने एजेंट इस नेटवर्क से जुड़े थे?

    प्रारंभिक जांच के मुताबिक, देशभर में करीब 200 एजेंट सक्रिय थे।

    सवाल: किन ट्रेनों में टिकट कन्फर्म कराए गए?

    एलटीटी-राजगीर एक्सप्रेस और छपरा एक्सप्रेस समेत कई ट्रेनों के नाम सामने आए हैं।

  • देश की बड़ी खबर: साइबर क्राइम के मास्टरमाइंड को मुंबई पुलिस ने किया गिरफ्तार

    देश की बड़ी खबर: साइबर क्राइम के मास्टरमाइंड को मुंबई पुलिस ने किया गिरफ्तार

    मुंबई पुलिस ने फर्जी APK फाइलें बनाकर साइबर ठगों को सप्लाई करने वाले कथित मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार 92 APK फाइलों से ₹63 करोड़ की ठगी हुई, जबकि 967 नई फाइलों से ₹1000 करोड़ तक की संभावित साइबर ठगी की आशंका थी।

    मुंबई: मुंबई पुलिस ने देशभर में फैले एक बड़े साइबर अपराध नेटवर्क का खुलासा करते हुए फर्जी APK फाइलें तैयार कर साइबर ठगों तक पहुंचाने वाले कथित मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी की बनाई गई APK फाइलों का इस्तेमाल कर अब तक करीब ₹63 करोड़ की साइबर ठगी की जा चुकी है। जांच के दौरान आरोपी के पास से 967 नई APK फाइलें भी बरामद हुई हैं। पुलिस का कहना है कि यदि इनका इस्तेमाल हो जाता, तो संभावित ठगी का आंकड़ा ₹1000 करोड़ तक पहुंच सकता था।

    मुंबई पुलिस की यह कार्रवाई डीबी मार्ग पुलिस स्टेशन में दर्ज एक साइबर फ्रॉड मामले की जांच के दौरान सामने आई है। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी है।

    कैसे खुला पूरे नेटवर्क का राज?

    इस मामले की शुरुआत दक्षिण मुंबई के एक व्यक्ति के साथ हुई साइबर ठगी से हुई। पीड़ित को महानगर गैस (MGL) का बिल भरने के नाम पर एक लिंक भेजा गया। लिंक पर क्लिक कर APK फाइल डाउनलोड करते ही उसके बैंक खाते से करीब ₹70 हजार निकाल लिए गए।

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    मामले की जांच करते-करते मुंबई पुलिस सीधे उस व्यक्ति तक पहुंची, जो साइबर अपराधियों के लिए फर्जी APK फाइलें तैयार करता था। इसी गिरफ्तारी के बाद पूरे नेटवर्क की परतें खुलनी शुरू हुईं।

    DCP राजसुधा आर. ने क्या बताया?

    मुंबई पुलिस की डीसीपी राजसुधा आर. के अनुसार गिरफ्तार आरोपी केवल फर्जी APK फाइलें ही नहीं बनाता था, बल्कि साइबर ठगों को संभावित शिकारों का डेटा भी उपलब्ध कराता था।

    पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 37,200 लोगों का बैंकिंग और व्यक्तिगत डेटा भी बरामद किया है। इस डेटा की फॉरेंसिक जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि किन-किन लोगों को निशाना बनाया गया।

    जांच में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े

    मुंबई पुलिस के अनुसार जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं।

    • 92 फर्जी APK फाइलें देशभर के साइबर अपराधियों को बेची गईं।
    • इनसे जुड़े मामलों में करीब ₹63 करोड़ की साइबर ठगी सामने आई।
    • देशभर से 2,993 शिकायतें दर्ज हुईं।
    • इनमें 512 शिकायतें महाराष्ट्र और मुंबई की हैं।
    • आरोपी के पास से 967 नई APK फाइलें बरामद हुईं, जिनके इस्तेमाल से बड़े पैमाने पर साइबर ठगी की आशंका जताई गई है।

    पुलिस का कहना है कि यह जांच अभी जारी है और आगे और भी खुलासे हो सकते हैं।

    साइबर ठगों को ऐसे बेचता था APK फाइलें

    जांच के अनुसार आरोपी प्रत्येक APK फाइल ₹15,000 से ₹20,000 में बेचता था। इन फाइलों की वैधता लगभग 40 से 45 दिन होती थी। समय पूरा होने पर साइबर अपराधियों को नई APK फाइल खरीदनी पड़ती थी।

    पुलिस के मुताबिक यह एक संगठित नेटवर्क था, जिसमें तकनीकी सहायता उपलब्ध कराकर विभिन्न राज्यों में साइबर ठगी को अंजाम दिया जाता था।

    कैसे काम करती हैं ये फर्जी APK फाइलें?

    साइबर अपराधी लोगों को गैस बिल, RTO चालान, KYC अपडेट, बिजली बिल, बैंक वेरिफिकेशन या अन्य सरकारी सेवाओं के नाम पर लिंक भेजते थे।

    जैसे ही कोई व्यक्ति उस लिंक से APK फाइल डाउनलोड और इंस्टॉल करता, उसके मोबाइल की कई महत्वपूर्ण अनुमतियां ठगों के हाथ में चली जाती थीं। इसके बाद बैंकिंग जानकारी, OTP और अन्य संवेदनशील डेटा का दुरुपयोग कर खाते से पैसे निकाल लिए जाते थे।

    कौन है गिरफ्तार आरोपी?

    मुंबई पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी की पहचान एस.के. मंडल के रूप में हुई है। उसे पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया गया है। वह मूल रूप से झारखंड के गिरिडीह का रहने वाला है।

    पुलिस के मुताबिक आरोपी ने साइंस से पढ़ाई की थी और सोशल मीडिया तथा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए कोडिंग सीखी। इसके बाद उसने फर्जी APK फाइलें तैयार कर साइबर अपराधियों को बेचना शुरू कर दिया।

    अब आगे क्या होगा?

    मुंबई पुलिस अब उन साइबर अपराधियों की पहचान कर रही है जिन्होंने इस आरोपी से APK फाइलें खरीदी थीं। जब्त किए गए लैपटॉप, मोबाइल, हार्ड डिस्क और डिजिटल रिकॉर्ड की फॉरेंसिक जांच की जा रही है। यदि जांच में अन्य राज्यों या अंतरराज्यीय गिरोहों के लिंक सामने आते हैं, तो संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    आम लोगों के लिए जरूरी सलाह

    साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी अनजान लिंक से APK फाइल डाउनलोड न करें। Android फोन में केवल Google Play Store जैसे अधिकृत प्लेटफॉर्म से ही ऐप इंस्टॉल करें। गैस, बैंक, बिजली, KYC या सरकारी विभाग के नाम पर आए किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी आधिकारिक वेबसाइट या हेल्पलाइन से पुष्टि जरूर करें।

    Official Sources

    1. Mumbai Policehttps://mumbaipolice.gov.in/
    2. National Cyber Crime Reporting Portal (I4C)https://cybercrime.gov.in/
    3. Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C), Ministry of Home Affairshttps://i4c.mha.gov.in/

    FAQ

    Q1. मुंबई पुलिस ने किसे गिरफ्तार किया है?

    मुंबई पुलिस ने फर्जी APK फाइलें बनाकर साइबर अपराधियों को बेचने वाले कथित मास्टरमाइंड एस.के. मंडल को गिरफ्तार किया है।

    Q2. APK फ्रॉड क्या होता है?

    यह ऐसा साइबर फ्रॉड है जिसमें फर्जी Android ऐप डाउनलोड करवाकर मोबाइल और बैंकिंग डेटा तक अनधिकृत पहुंच बनाई जाती है।

    Q3. अब तक कितनी साइबर ठगी सामने आई है?

    मुंबई पुलिस के अनुसार आरोपी की APK फाइलों से जुड़े मामलों में करीब ₹63 करोड़ की ठगी सामने आई है। पुलिस ने यह भी कहा है कि बरामद 967 नई फाइलों का इस्तेमाल होता तो संभावित ठगी का आंकड़ा ₹1000 करोड़ तक पहुंच सकता था।

    Q4. इस तरह की ठगी से कैसे बचें?

    केवल आधिकारिक ऐप स्टोर से ऐप डाउनलोड करें, किसी अनजान लिंक से APK फाइल इंस्टॉल न करें और बैंकिंग या KYC संबंधी संदेशों की आधिकारिक स्रोत से पुष्टि करें।

  • टाइगर मेमन की जब्त दुकान अब हुई नीलाम, आखिर सरकार ने क्यों उठाया यह कदम?

    टाइगर मेमन की जब्त दुकान अब हुई नीलाम, आखिर सरकार ने क्यों उठाया यह कदम?

    मुंबई के माहिम में टाइगर मेमन की जब्त दुकान अब SAFEMA कानून के तहत नीलाम कर दी गई है। जानिए सरकार ने यह कार्रवाई क्यों की, नीलामी में क्या हुआ और आगे क्या होगा।

    मुंबई: 1993 मुंबई बम धमाकों के मामले से जुड़ी एक महत्वपूर्ण कार्रवाई में माहिम स्थित टाइगर मेमन की जब्त दुकान की नीलामी कर दी गई है। यह कार्रवाई Smugglers and Foreign Exchange Manipulators (Forfeiture of Property) Act, 1976 (SAFEMA) के तहत की गई। अधिकारियों के अनुसार, यह उन जब्त संपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया का हिस्सा है जिन्हें कानूनी कार्रवाई के बाद सरकार ने अपने कब्जे में लिया था।

    आखिर कौन-सी दुकान हुई नीलाम?

    नीलाम की गई संपत्ति मुंबई के माहिम स्थित शीतला देवी मंदिर के पास करीब 52 वर्गमीटर की एक व्यावसायिक दुकान है। जांच एजेंसियों के रिकॉर्ड के अनुसार, यहां से टाइगर मेमन कथित तौर पर अपनी कंपनी तिजारत इंटरनेशनल का संचालन करता था।

    रिकॉर्ड के मुताबिक, 1993 के दंगों के दौरान इस दुकान को नुकसान पहुंचा था। बाद में मुंबई बम धमाकों की जांच के दौरान इसे जब्त कर लिया गया।

    सरकार ने यह कार्रवाई अब क्यों की?

    अधिकारियों के अनुसार, यह नीलामी SAFEMA Act के तहत जब्त संपत्तियों के कानूनी निस्तारण की प्रक्रिया का हिस्सा है। सक्षम प्राधिकरण समय-समय पर ऐसी संपत्तियों की कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद नीलामी करता है।

    इस कार्रवाई का उद्देश्य जब्त संपत्तियों का कानून के अनुसार निस्तारण करना है।

    नीलामी में क्या हुआ?

    आधिकारिक जानकारी के अनुसार, दुकान की रिजर्व कीमत ₹2.05 करोड़ तय की गई थी।

    नीलामी प्रक्रिया में केवल एक बोलीदाता शामिल हुआ। फिलहाल सफल बोली लगाने वाले की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद आगे की जानकारी जारी की जा सकती है।

    क्या सरकार के पास ऐसी और भी संपत्तियां हैं?

    अधिकारियों के अनुसार, 1993 मुंबई बम धमाकों से जुड़े मामलों में जब्त की गई कई अन्य संपत्तियां भी सरकारी नियंत्रण में हैं। इनमें मुंबई के विभिन्न इलाकों की व्यावसायिक और अचल संपत्तियां शामिल हैं।

    कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन संपत्तियों के संबंध में भी आगे कार्रवाई की जा सकती है।

    1993 मुंबई बम धमाकों से क्या है संबंध?

    12 मार्च 1993 को मुंबई में सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे, जिनमें 257 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। जांच एजेंसियों ने टाइगर मेमन को इस मामले में वांछित आरोपी बताया था। वह लंबे समय से फरार थे।

    यह नीलामी उसी मामले में जब्त की गई संपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया का हिस्सा है।

    अब आगे क्या होगा?

    अधिकारियों के अनुसार, नीलामी की शेष कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। अन्य जब्त संपत्तियों के मामलों में भी सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद चरणबद्ध तरीके से नीलामी की जा सकती है।

    Official Sources

    FAQ

    Q1. टाइगर मेमन की कौन-सी संपत्ति नीलाम हुई?

    मुंबई के माहिम स्थित करीब 52 वर्गमीटर की एक व्यावसायिक दुकान।

    Q2. नीलामी किस कानून के तहत हुई?

    Smugglers and Foreign Exchange Manipulators (Forfeiture of Property) Act, 1976 (SAFEMA) के तहत।

    Q3. दुकान की रिजर्व कीमत कितनी थी?

    ₹2.05 करोड़।

    Q4. क्या अन्य जब्त संपत्तियों की भी नीलामी होगी?

    अधिकारियों के अनुसार, कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अन्य संपत्तियों पर भी आगे कार्रवाई की जाएगी।

  • मां ने 20 साल की बेटी की जान क्यों ले ली? उल्हासनगर में पुलिस जांच में सामने आई वजह

    मां ने 20 साल की बेटी की जान क्यों ले ली? उल्हासनगर में पुलिस जांच में सामने आई वजह

    मुंबई से सटे उल्हासनगर में 20 वर्षीय युवती की कथित तौर पर उसकी मां ने हत्या कर दी। पुलिस के अनुसार, प्रेम संबंध को लेकर हुए विवाद के बाद यह घटना हुई। जानिए जांच में अब तक क्या सामने आया।

    महाराष्ट्र/ठाणे: मुंबई से सटे उल्हासनगर से एक बेहद दुखद घटना सामने आई है। पुलिस के अनुसार, 20 वर्षीय युवती की कथित तौर पर उसकी मां ने स्कार्फ से गला घोंटकर हत्या कर दी। शुरुआती जांच में सामने आया है कि युवती के प्रेम संबंध को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ था। घटना के बाद पुलिस ने आरोपी मां को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की विस्तृत जांच जारी है।

    आखिर क्या हुआ था?

    पुलिस के मुताबिक, यह घटना भय्यासाहेब आंबेडकर नगर, उल्हासनगर की है। मृतका अमृता गरड (20) का अपने इलाके के एक युवक से प्रेम संबंध था। उसकी मां आशा गरड इस रिश्ते का विरोध करती थीं और इसी बात को लेकर घर में अक्सर विवाद होता था।

    शनिवार देर रात दोनों के बीच फिर बहस हुई। पुलिस का आरोप है कि विवाद बढ़ने पर मां ने कथित तौर पर बेटी के स्कार्फ से उसका गला घोंट दिया, जिससे उसकी मौत हो गई।

    पुलिस जांच में अब तक क्या सामने आया?

    उल्हासनगर पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में ऐसा प्रतीत होता है कि घटना पूर्व नियोजित नहीं थी। जांच अधिकारियों का मानना है कि विवाद के दौरान आवेश में यह कदम उठाया गया। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अंतिम निष्कर्ष पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फोरेंसिक साक्ष्यों और अन्य सबूतों के आधार पर ही निकाला जाएगा।

    घटना के समय परिवार के बाकी सदस्य कहां थे?

    पुलिस के अनुसार, घटना के समय अमृता और उसकी मां एक कमरे में थीं, जबकि पिता और दोनों भाई दूसरे कमरे में सो रहे थे। इसी कारण किसी को तत्काल घटना की जानकारी नहीं मिल सकी।

    रविवार सुबह जब परिवार को इसकी जानकारी मिली तो मृतका के पिता ने उल्हासनगर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई।

    पुलिस ने क्या कार्रवाई की?

    सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची, घटनास्थल का निरीक्षण किया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। आरोपी मां आशा गरड को हिरासत में लेकर बाद में गिरफ्तार कर लिया गया।

    पुलिस परिवार के सदस्यों, पड़ोसियों और अन्य संभावित गवाहों के बयान दर्ज कर रही है। मामले की जांच जारी है।

    क्या यह सुनियोजित हत्या थी?

    फिलहाल पुलिस ने ऐसी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। जांच एजेंसियों का कहना है कि अभी सभी परिस्थितियों की जांच की जा रही है। इसलिए घटना के पीछे की मंशा और परिस्थितियों पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

    अब आगे क्या होगा?

    आरोपी मां को अदालत में पेश किया जाएगा। पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फोरेंसिक जांच और गवाहों के बयानों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी। फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस ने लोगों से अफवाहों से बचने की अपील की है।

    Official Sources

    FAQ

    उल्हासनगर में युवती की मौत कैसे हुई?

    पुलिस के अनुसार, 20 वर्षीय युवती की कथित तौर पर उसकी मां ने स्कार्फ से गला घोंटकर हत्या कर दी।

    हत्या की वजह क्या बताई जा रही है?

    प्रारंभिक पुलिस जांच के अनुसार, प्रेम संबंध को लेकर हुए विवाद के बाद यह घटना हुई।

    क्या आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है?

    हाँ। पुलिस ने आरोपी मां को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जांच जारी है।

  • केस वापसी के वादे के बाद भी CJP प्रदर्शनकारियों को नोटिस क्यों? मुंबई पुलिस ने जांच पर दिया बड़ा जवाब

    केस वापसी के वादे के बाद भी CJP प्रदर्शनकारियों को नोटिस क्यों? मुंबई पुलिस ने जांच पर दिया बड़ा जवाब

    केंद्र के केस वापसी के आश्वासन के बावजूद CJP प्रदर्शनकारियों को मुंबई पुलिस की ओर से नोटिस मिलने पर विवाद बढ़ गया है। पुलिस ने जांच जारी रखने की वजह स्पष्ट की है।

    मुंबई: दिल्ली में केंद्र सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बीच प्रदर्शन समाप्त कराने के लिए हुए समझौते के बाद उम्मीद थी कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों में राहत मिलेगी। लेकिन मुंबई में कई प्रदर्शनकारियों को अब भी पुलिस नोटिस मिलने और बयान दर्ज कराने के लिए बुलाए जाने से नया विवाद खड़ा हो गया है। इस बीच मुंबई पुलिस ने स्पष्ट किया है कि उसे जांच रोकने का कोई आधिकारिक आदेश नहीं मिला है, इसलिए कानूनी प्रक्रिया जारी है। साथ ही पुलिस ने यह भी कहा कि 26 जुलाई के बाद कोई नया नोटिस जारी नहीं किया गया है।

    आखिर नोटिस क्यों मिल रहे हैं?

    मुंबई पुलिस के अनुसार, पिछले सप्ताह CJP समर्थित प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में दर्ज FIR की जांच कानून के मुताबिक जारी है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक सक्षम प्राधिकारी की ओर से लिखित निर्देश नहीं मिलते, जांच बीच में नहीं रोकी जा सकती। इसलिए जिन लोगों के बयान दर्ज होने बाकी हैं, उन्हें प्रक्रिया के तहत बुलाया जा रहा है।

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    पुलिस ने क्या सफाई दी?

    मुंबई पुलिस ने सोमवार को जारी अपने स्पष्टीकरण में कहा कि सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में यह दावा किया जा रहा है कि केस वापसी के आश्वासन के बाद भी नए नोटिस भेजे जा रहे हैं। पुलिस के अनुसार, 26 जुलाई के बाद कोई नया नोटिस जारी नहीं हुआ और जिन नोटिसों की चर्चा हो रही है, वे पहले ही जारी किए जा चुके थे।

    सरकार ने क्या आश्वासन दिया था?

    25 जुलाई को केंद्र सरकार और CJP प्रतिनिधियों के बीच हुई बातचीत के बाद केंद्रीय मंत्रियों ने घोषणा की थी कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसी घोषणा के बाद CJP ने अपना आंदोलन वापस लेने का फैसला किया था।

    फिर विवाद क्यों बढ़ा?

    CJP का आरोप है कि समझौते के बाद भी कई राज्यों में प्रदर्शनकारियों को नोटिस मिल रहे हैं और पुलिस कार्रवाई पूरी तरह नहीं रुकी है। संगठन का कहना है कि यदि सरकार अपने आश्वासन के अनुरूप जल्द लिखित कार्रवाई नहीं करती, तो वह दोबारा आंदोलन शुरू करने पर विचार करेगा।

    कानूनी प्रक्रिया में कहां है अड़चन?

    कानूनी जानकारों के अनुसार, किसी FIR को वापस लेने की प्रक्रिया केवल राजनीतिक घोषणा से पूरी नहीं होती। इसके लिए प्रशासनिक और कानूनी औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती हैं। कई मामलों में जांच पूरी होने, संबंधित प्राधिकरण की सिफारिश और अदालत की प्रक्रिया भी आवश्यक हो सकती है। इसी कारण घोषणा और वास्तविक केस वापसी के बीच समय लग सकता है।

    प्रदर्शनकारियों की चिंता क्या है?

    जिन छात्रों और युवाओं को नोटिस मिले हैं, उनका कहना है कि सरकार के आश्वासन के बाद उन्हें लगा था कि पुलिस कार्रवाई रुक जाएगी। लेकिन बयान दर्ज कराने के लिए बुलाए जाने से उनके बीच असमंजस बना हुआ है। दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि यह नियमित कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है और इसका अंतिम निर्णय सरकार एवं न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार होगा।

    फिलहाल क्या है स्थिति?

    फिलहाल दो बातें साफ हैं। पहली, केंद्र सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामलों को वापस लेने का सार्वजनिक आश्वासन दिया था। दूसरी, मुंबई पुलिस का कहना है कि उसे जांच रोकने का कोई औपचारिक आदेश नहीं मिला है और 26 जुलाई के बाद नए नोटिस भी जारी नहीं किए गए हैं। ऐसे में आगे की स्थिति सरकार की औपचारिक कार्रवाई और संबंधित कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।

    Official Sources

    FAQ

    Q1. क्या CJP प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सभी केस वापस हो गए हैं?
    उत्तर: नहीं। अभी तक सभी मामलों की वापसी की औपचारिक प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है।

    Q2. मुंबई पुलिस नोटिस क्यों भेज रही है?
    उत्तर: पुलिस का कहना है कि उसे जांच रोकने का कोई लिखित आदेश नहीं मिला है, इसलिए कानूनी प्रक्रिया जारी है।

    Q3. क्या पुलिस अब भी नए नोटिस जारी कर रही है?
    उत्तर: मुंबई पुलिस के अनुसार 26 जुलाई के बाद कोई नया नोटिस जारी नहीं किया गया है।

  • MHT-CET पर वायरल वीडियो के बाद क्या हो रहा है? CET Cell ने पुलिस जांच क्यों मांगी

    MHT-CET पर वायरल वीडियो के बाद क्या हो रहा है? CET Cell ने पुलिस जांच क्यों मांगी

    MHT-CET परीक्षा को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद महाराष्ट्र CET Cell ने मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र साइबर पुलिस से जांच की मांग की है। जानिए पूरा मामला और छात्रों पर इसका क्या असर पड़ सकता है।

    मुंबई: क्या MHT-CET परीक्षा में गड़बड़ी हुई थी? सोशल मीडिया पर वायरल कुछ वीडियो के बाद यह सवाल कई छात्रों और अभिभावकों के मन में उठने लगा है। हालांकि इन दावों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसी बीच महाराष्ट्र स्टेट कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (CET) Cell ने पूरे मामले की जांच के लिए मुंबई के आजाद मैदान पुलिस स्टेशन और महाराष्ट्र साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।

    परीक्षा प्राधिकरण का कहना है कि सोशल मीडिया पर बिना पुष्टि के प्रसारित सामग्री छात्रों और अभिभावकों के बीच भ्रम फैला सकती है तथा सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती है। इसलिए तथ्यों की जांच आवश्यक है।

    क्या है पूरा मामला?

    CET Cell के अनुसार सोशल मीडिया पर MHT-CET परीक्षा से जुड़े दो वीडियो वायरल हुए हैं। इन वीडियो में परीक्षा की पारदर्शिता और संचालन को लेकर कई दावे किए गए हैं।

    हालांकि प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि इन दावों की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए पुलिस और साइबर पुलिस से अनुरोध किया गया है कि वीडियो की सत्यता की जांच की जाए और यदि किसी प्रकार का कानूनी उल्लंघन पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

    CET Cell ने पुलिस से क्या मांग की है?

    शिकायत में CET Cell ने कहा है कि वायरल वीडियो तैयार करने, अपलोड करने और प्रसारित करने वाले लोगों की पहचान की जाए। साथ ही यह भी जांच की जाए कि साझा की गई जानकारी तथ्यात्मक है या नहीं।

    यदि जांच में किसी प्रकार की गलत या भ्रामक जानकारी फैलाने का मामला सामने आता है, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।

    छात्रों और अभिभावकों के लिए इसका क्या मतलब है?

    फिलहाल छात्रों को घबराने की जरूरत नहीं है।

    अब तक CET Cell ने परीक्षा रद्द करने, परिणाम रोकने या परीक्षा प्रक्रिया में किसी बदलाव की घोषणा नहीं की है।

    यह कार्रवाई केवल सोशल मीडिया पर वायरल दावों की सत्यता की जांच के लिए की गई है। इसलिए छात्रों और अभिभावकों को केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करने की सलाह दी जाती है।

    आगे क्या होगा?

    अब मामले की जांच मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र साइबर पुलिस करेगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

    यदि वायरल दावे सही पाए जाते हैं तो संबंधित तथ्यों के आधार पर कार्रवाई होगी, और यदि दावे भ्रामक पाए जाते हैं तो कानून के अनुसार जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कदम उठाए जा सकते हैं।

    MHT-CET से जुड़े वायरल वीडियो की सच्चाई अभी जांच के दायरे में है। ऐसे में किसी भी अपुष्ट जानकारी पर भरोसा करने के बजाय छात्रों और अभिभावकों को केवल महाराष्ट्र CET Cell और संबंधित सरकारी एजेंसियों की आधिकारिक सूचना का इंतजार करना चाहिए।

    Official Sources

    FAQ

    MHT-CET मामले में शिकायत किसने दर्ज कराई है?

    महाराष्ट्र स्टेट CET Cell ने मुंबई के आजाद मैदान पुलिस स्टेशन और महाराष्ट्र साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।

    क्या MHT-CET परीक्षा रद्द हो गई है?

    नहीं। अभी तक परीक्षा रद्द करने या परिणाम रोकने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

    क्या वायरल वीडियो सही साबित हो चुके हैं?

    नहीं। वीडियो में किए गए दावों की जांच की जा रही है। उनकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    छात्रों को क्या करना चाहिए?

    केवल महाराष्ट्र CET Cell की आधिकारिक वेबसाइट और सरकारी सूचना पर भरोसा करें। सोशल मीडिया पर चल रहे अपुष्ट दावों से बचें।

  • Cyber Fraud की Fake SIM Trail मुंबई के Retailers तक पहुंची, KYC पर बड़ा सवाल

    Cyber Fraud की Fake SIM Trail मुंबई के Retailers तक पहुंची, KYC पर बड़ा सवाल

    Cyber fraud में इस्तेमाल मोबाइल नंबरों की जांच मुंबई के SIM retailers तक पहुंची। पुलिस KYC नियमों के कथित उल्लंघन और financial trail की जांच कर रही है।

    मुंबई: साइबर फ्रॉड के मामलों की तकनीकी जांच करते हुए पुलिस एक ऐसे नेटवर्क तक पहुंची है, जिसमें मुंबई के कुछ SIM retailers की भूमिका जांच के दायरे में आई है। पुलिस के मुताबिक, इन retailers पर आरोप है कि उन्होंने कथित तौर पर अनिवार्य KYC प्रक्रिया का पालन किए बिना या फर्जी दस्तावेजों के आधार पर SIM cards activate किए। जांच एजेंसियों को शक है कि इनमें से कुछ connections का इस्तेमाल अलग-अलग तरह के cyber fraud में किया गया।

    मामले में South Cyber Police ने Police Constable Santosh Amrutrao Galande की शिकायत पर FIR दर्ज की है। पुलिस ने cheating, forgery, forged documents के इस्तेमाल और criminal conspiracy से संबंधित धाराओं के तहत जांच शुरू की है।

    Cyber fraud की जांच करते-करते SIM retailers तक पहुंची पुलिस

    पुलिस के मुताबिक, 18 अप्रैल से 27 जून के बीच National Cyber Crime Reporting Portal और Samanvay Portal पर दर्ज शिकायतों की technical analysis के दौरान कई mobile numbers सामने आए।

    जांच में इन numbers को track करने पर उनका connection मुंबई के अलग-अलग SIM retailers तक पहुंचा। पुलिस को शक है कि कुछ SIM cards में mandatory KYC verification का पालन नहीं किया गया या activation के लिए कथित तौर पर forged identity documents का इस्तेमाल हुआ।

    जांच एजेंसियों को यह भी आशंका है कि ऐसे connections बाद में cyber criminals तक पहुंचे, जिन्होंने उनका इस्तेमाल अलग-अलग राज्यों में लोगों को ठगने के लिए किया।

    Bhandup, Kandivali और Andheri के retailers जांच के घेरे में

    जांच के दौरान Bhandup, Kandivali और Andheri के कुछ retailers का नाम सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, इन retailers से activate किए गए कुछ SIM cards अलग-अलग cybercrime मामलों की जांच में सामने आए।

    इन numbers का संबंध महाराष्ट्र के Wakad, Mundhwa, Chikalthana, Satpur, Ambazari, Wagholi, RCF, Mhasrul और Versova में दर्ज cybercrime cases से भी जोड़ा जा रहा है।

    हालांकि, जांच एजेंसियां अभी यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि संबंधित retailers ने जानबूझकर KYC नियमों को दरकिनार किया था या किसी अन्य व्यक्ति ने उनके credentials का गलत इस्तेमाल किया।

    Police अब financial trail और call records खंगाल रही है

    जांच अब केवल SIM activation तक सीमित नहीं है। पुलिस suspected retailers और intermediaries के bank accounts, financial transactions और Call Detail Records यानी CDR की जांच कर रही है।

    इस जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि:

    • क्या SIM cards को अवैध तरीके से activate करने के बदले किसी तरह का financial benefit लिया गया?
    • क्या retailers और cyber fraud network के बीच सीधा connection था?
    • क्या इस network का विस्तार महाराष्ट्र से बाहर तक है?

    जांच के दौरान Rahul Communication, Abhi Telecom, Mahakal Mobile और Aditya Telecom जैसे establishments के साथ-साथ Kandivali और Andheri के कुछ अन्य retailers भी जांच के दायरे में बताए गए हैं।

    हालांकि, केवल जांच में नाम सामने आना किसी व्यक्ति या retailer को अपराध का दोषी साबित नहीं करता। प्रत्येक आरोपी की भूमिका जांच पूरी होने और अदालत में मामले के नतीजे के बाद ही स्पष्ट होगी।

    Fake SIM cards से cybercrime investigation को क्यों होती है परेशानी?

    पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, गलत या फर्जी पहचान के आधार पर जारी किए गए SIM cards cybercrime investigations के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं।

    Cyber fraud में इस्तेमाल होने वाला mobile number अगर किसी वास्तविक उपयोगकर्ता की सही पहचान से जुड़ा न हो, तो जांच एजेंसियों के लिए असली operator तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। ऐसे connections का इस्तेमाल कथित तौर पर fake job offers, online trading scams और lottery fraud जैसे मामलों में किया जा सकता है।

    पुलिस का मानना है कि SIM activation process में KYC नियमों का सख्ती से पालन cybercrime network को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    Police ने नागरिकों से क्या अपील की?

    पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे SIM card activation के लिए अपने identity documents किसी अनजान व्यक्ति या संदिग्ध माध्यम से साझा न करें।

    इसके अलावा fake investment schemes, fraudulent job offers या suspicious calls के शिकार होने पर नागरिक National Cyber Crime Helpline 1930 पर शिकायत कर सकते हैं या National Cyber Crime Reporting Portal के माध्यम से online complaint दर्ज करा सकते हैं।

    फिलहाल पुलिस financial transactions, call records और suspected SIM activation chain की जांच कर रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि SIM retailers की भूमिका क्या थी और क्या यह नेटवर्क किसी बड़े cyber fraud ecosystem से जुड़ा है।

    Official Sources

    इस Research Material में FIR, Police Press Release या Court Document का direct verified link उपलब्ध नहीं है। इसलिए बिना URL verification के कोई specific official link जोड़ना उचित नहीं होगा।

    National Cyber Crime Reporting Portal: https://www.cybercrime.gov.in/
    Cyber Crime Helpline: 1930

    FAQ

    Fake SIM cards का इस्तेमाल cyber fraud में कैसे किया जाता है?

    पुलिस जांच के मुताबिक, गलत या फर्जी KYC details पर activate किए गए SIM cards का इस्तेमाल fraudsters अपनी पहचान छिपाने और victims से संपर्क करने के लिए कर सकते हैं।

    मुंबई में किन इलाकों के SIM retailers जांच के दायरे में हैं?

    जांच में Bhandup, Kandivali और Andheri के कुछ retailers के नाम सामने आए हैं। पुलिस उनकी वास्तविक भूमिका की जांच कर रही है।

    क्या जांच में नाम आने से retailers दोषी साबित हो जाते हैं?

    नहीं। जांच में नाम सामने आना या किसी connection का किसी case में इस्तेमाल होना अपने आप में अपराध साबित नहीं करता। अंतिम जिम्मेदारी अदालत के निर्णय और जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।

    Cyber fraud की शिकायत कहां करें?

    Cyber fraud की शिकायत के लिए राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क किया जा सकता है। Online complaint National Cyber Crime Reporting Portal पर भी दर्ज की जा सकती है।

  • मुंबई: पाबंदी के दौरान मछली पकड़ते 3 ट्रॉलर पकड़े गए

    मुंबई: पाबंदी के दौरान मछली पकड़ते 3 ट्रॉलर पकड़े गए

    मुंबई की वर्सोवा खाड़ी में मानसून मछली पकड़ने पर लगी पाबंदी के उल्लंघन के आरोप में तीन ट्रॉलरों पर संयुक्त कार्रवाई की गई।

    मुंबई: वर्सोवा खाड़ी में मानसून के दौरान मछली पकड़ने पर लगी पाबंदी के बावजूद मछली पकड़ने के आरोप में तीन ट्रॉलरों की जांच की गई। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर शुरू हुई कार्रवाई के दौरान सागरी पुलिस, महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड (MMB) और वर्सोवा के लाइसेंस अधिकारी ने संयुक्त रूप से तीनों नौकाओं की जांच की। जांच के बाद मामले में महाराष्ट्र समुद्री मत्स्य अधिनियम, 1981 के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

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    20 जुलाई 2026 को वरिष्ठ कार्यालय के निर्देश पर वर्सोवा खाड़ी के बाहर तीन ट्रॉलर लंगर डालकर खड़े होने की जानकारी मिली थी। सूचना के बाद अधिकारियों ने रात के समय मौके पर जाकर जांच की। इन नौकाओं के मछली पकड़कर लौटने और मछली उतारने की तैयारी में होने का संदेह जताया गया।

    वर्सोवा खाड़ी में तीन ट्रॉलरों पर कार्रवाई

    जानकारी के मुताबिक, तीन नौकाओं के वर्सोवा खाड़ी के बाहर खड़े होने की सूचना मिलने के बाद वर्सोवा जेटी पर तैनात लाइसेंस अधिकारी और सुरक्षाकर्मियों ने रातभर गश्त की। अधिकारियों का उद्देश्य यह पता लगाना था कि संबंधित नौकाएं जेटी पर आती हैं या नहीं।

    हालांकि, उस रात तेज हवा और भारी बारिश के कारण स्थिति चुनौतीपूर्ण थी। बताया गया कि संबंधित नौकाएं जेटी पर न रुककर खाड़ी के अंदर की ओर चली गईं।

    रात 3 बजे के आसपास अंधेरे में नौकाएं नजरों से ओझल

    जानकारी के अनुसार, संबंधित नौकाएं रात करीब 3 बजे खाड़ी के अंदर की दिशा में चली गईं। तेज बारिश, अंधेरे और खराब मौसम के कारण अधिकारियों को यह स्पष्ट रूप से पता नहीं चल सका कि नौकाएं आगे किस दिशा में गईं।

    इसके अलावा, वर्सोवा में उस समय गश्ती नौका उपलब्ध नहीं थी। इसलिए इतनी रात में संबंधित नौकाओं का पीछा कर पाना भी संभव नहीं था।

    अगले दिन सागरी पुलिस और MMB ने की संयुक्त जांच

    अगली सुबह संबंधित नौकाओं की तलाश और उनकी स्थिति की जानकारी जुटाई गई। इसके बाद सागरी पुलिस, महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड (MMB) और वर्सोवा के लाइसेंस अधिकारी ने संयुक्त रूप से तीनों नौकाओं की जांच की।

    जांच के दौरान अधिकारियों के मुताबिक, तीनों नौकाओं द्वारा मानसून के दौरान लागू मछली पकड़ने पर लगी पाबंदी का उल्लंघन किए जाने की बात सामने आई। इसके अलावा, कुछ नौकाओं पर आवश्यक कानूनी दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने की जानकारी भी दी गई है।

    महाराष्ट्र में समुद्री मछली पकड़ने से जुड़े नियमों और प्रतिबंधों का नियमन महाराष्ट्र समुद्री मत्स्य विनियमन अधिनियम, 1981 के तहत किया जाता है।

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    जांच के दायरे में आईं तीन नौकाएं

    1. अमरनाथ (AMARNATH)

    • पंजीकरण नंबर: IND-MH-7-MM-2615
    • पंजीकरण की तारीख: 4 जनवरी 2019
    • मूल मछली पकड़ने का बंदरगाह: न्यू फेरी व्हार्फ (New Ferrywharf)

    2. जय बाबा अमरनाथ (JAY BABA AMARNATH)

    • पंजीकरण नंबर: IND-MH-7-MM-2683
    • पंजीकरण की तारीख: 13 फरवरी 2019
    • मूल मछली पकड़ने का बंदरगाह: ससून डॉक (Sassoon Dock)

    3. जरीमरी तिसाई (JARI MARI TISAI)

    • पंजीकरण नंबर: IND-MH-7-MM-2170
    • पंजीकरण की तारीख: 19 दिसंबर 2019
    • मूल मछली पकड़ने का बंदरगाह: न्यू फेरी व्हार्फ (New Ferrywharf)

    महाराष्ट्र समुद्री मत्स्य विनियमन अधिनियम के तहत कार्रवाई

    अधिकारियों के मुताबिक, संबंधित तीनों नौकाओं के खिलाफ महाराष्ट्र समुद्री मत्स्य विनियमन अधिनियम, 1981 के तहत उचित कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

    मामले में आगे की कार्रवाई जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी। दंड या अन्य अंतिम कार्रवाई के संबंध में निर्णय संबंधित विभागीय और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्पष्ट होगा।

    वर्सोवा खाड़ी में मानसून के दौरान मछली पकड़ने पर लगी पाबंदी के उल्लंघन के आरोप में तीन ट्रॉलरों की जांच की गई। खराब मौसम और रात के अंधेरे के कारण शुरुआती निगरानी के दौरान नौकाओं का पीछा नहीं किया जा सका। हालांकि, अगले दिन सागरी पुलिस, महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड और लाइसेंस अधिकारियों ने संयुक्त कार्रवाई कर तीनों नौकाओं की जांच की। मामले में संबंधित कानून के तहत आगे की कार्रवाई की जा रही है।

    आधिकारिक स्रोत


    FAQ

    वर्सोवा में कितने ट्रॉलरों की जांच की गई?

    इस मामले में तीन ट्रॉलरों की जांच की गई।

    ट्रॉलरों पर कार्रवाई क्यों की गई?

    अधिकारियों के मुताबिक, मानसून के दौरान मछली पकड़ने पर लगी पाबंदी का उल्लंघन किए जाने का मामला सामने आया है। कुछ नौकाओं पर आवश्यक कानूनी दस्तावेज नहीं होने की जानकारी भी दी गई है।

    किस कानून के तहत कार्रवाई की जा रही है?

    मामले में महाराष्ट्र समुद्री मत्स्य विनियमन अधिनियम, 1981 के तहत कार्रवाई की जा रही है।

  • मुंबई पुलिस पर महिला प्रदर्शनकारी से बदसलूकी का आरोप

    मुंबई पुलिस पर महिला प्रदर्शनकारी से बदसलूकी का आरोप

    मुंबई के दादर में वायरल वीडियो को लेकर पुलिस अधिकारी पर महिला प्रदर्शनकारी से बदसलूकी का आरोप लगा। मुंबई पुलिस ने आरोपों को खारिज कर सफाई दी।

    डिजिटल डेस्क, मुंबई। मुंबई के दादर में छात्र प्रदर्शन के दौरान एक वायरल वीडियो को लेकर मुंबई पुलिस विवादों में है। वीडियो के आधार पर एक सादे कपड़ों में मौजूद पुलिस अधिकारी पर महिला प्रदर्शनकारी को कथित तौर पर गलत तरीके से पकड़ने और घसीटने का आरोप लगाया गया है। हालांकि, मुंबई पुलिस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अधिकारी एक पुरुष प्रदर्शनकारी को पकड़ने की कोशिश कर रहा था और महिला अचानक बीच में आ गई।

    वायरल वीडियो को लेकर मुंबई पुलिस पर उठे सवाल

    दादर में छात्र प्रदर्शन के दौरान सामने आए वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। वीडियो में एक सादे कपड़ों में मौजूद पुलिस अधिकारी प्रदर्शनकारियों के बीच एक महिला को पकड़ता हुआ दिखाई देता है। विपक्षी नेताओं और सोशल मीडिया यूजर्स ने इस दृश्य को लेकर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं।

    वीडियो के आधार पर आरोप लगाया गया कि पुलिस अधिकारी ने महिला प्रदर्शनकारी के साथ अनुचित तरीके से व्यवहार किया और उसे पकड़कर घसीटा। हालांकि, वीडियो के आधार पर लगाए गए आरोपों और घटना की पूरी परिस्थितियों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं।

    वर्षा गायकवाड़ और रोहित पवार ने कार्रवाई की मांग की

    मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ ने वीडियो साझा करते हुए पुलिस के व्यवहार पर सवाल उठाए। उन्होंने मुख्यमंत्री को टैग करते हुए पूछा कि एक पुरुष पुलिसकर्मी महिला प्रदर्शनकारी के साथ इस तरह क्यों पेश आया और महिला पुलिसकर्मियों को जिम्मेदारी क्यों नहीं दी गई।

    एनसीपी (एसपी) नेता रोहित पवार ने भी पुलिस के रवैये पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि पुलिसकर्मी का उद्देश्य किसी पुरुष प्रदर्शनकारी को पकड़ना था और उसे बाद में पता चला कि बीच में महिला आ गई है, तो उसे अपना हाथ तुरंत पीछे हटा लेना चाहिए था। इस मामले में उन्होंने पुलिस अधिकारी के आचरण पर सवाल उठाए।

    मुंबई पुलिस ने आरोपों को किया खारिज

    विवाद बढ़ने के बाद मुंबई पुलिस ने वायरल वीडियो को लेकर अपना पक्ष रखा। पुलिस के मुताबिक, वीडियो को गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि अधिकारी एक पुरुष प्रदर्शनकारी को पकड़ने की कोशिश कर रहा था और उसी दौरान महिला प्रदर्शनकारी अचानक बीच में आ गई।

    मुंबई पुलिस के अनुसार, वरिष्ठ अधिकारियों ने वीडियो की जांच की और उन्हें अधिकारी के व्यवहार में कोई अनुचित हरकत नहीं मिली। पुलिस ने आरोपों को गलत बताया है।

    वीडियो को लेकर जारी है विवाद

    पुलिस की सफाई के बावजूद वीडियो को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस जारी है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि वीडियो में अधिकारी को महिला की मौजूदगी का पता चलने के बाद भी उसे पकड़े हुए देखा जा सकता है। दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि वीडियो को पूरे घटनाक्रम के संदर्भ से अलग करके देखा जा रहा है।

    इसलिए फिलहाल वायरल वीडियो में दिख रहे दृश्य और पुलिस के आधिकारिक स्पष्टीकरण के बीच स्पष्ट मतभेद नजर आ रहा है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर महिला प्रदर्शनकारी के साथ कथित बदसलूकी का आरोप अभी आरोप के स्तर पर है और इस संबंध में किसी न्यायिक निष्कर्ष की जानकारी सामने नहीं आई है।

    लगातार दूसरे दिन पुलिस की कार्यशैली पर सवाल

    यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब छात्र प्रदर्शनों से जुड़े एक अन्य वायरल वीडियो को लेकर भी मुंबई पुलिस की आलोचना हुई थी। उस मामले में एक पुलिसकर्मी पर प्रदर्शनकारियों को कथित तौर पर ड्रग्स से जुड़े झूठे मामले में फंसाने की धमकी देने का आरोप लगा था। विवाद के बाद पुलिसकर्मी को निलंबित किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी और मामले में जांच शुरू की गई।

    दादर के इस नए मामले में मुंबई पुलिस ने फिलहाल वायरल वीडियो की अपनी जांच के आधार पर अधिकारी के खिलाफ अनुचित आचरण के आरोपों को खारिज किया है। मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और सोशल मीडिया पर बहस जारी है।

    दादर के छात्र प्रदर्शन से जुड़े वायरल वीडियो ने पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के साथ व्यवहार को लेकर नई बहस छेड़ दी है। जहां विपक्षी नेताओं ने अधिकारी पर महिला प्रदर्शनकारी से बदसलूकी का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है, वहीं मुंबई पुलिस ने कहा है कि अधिकारी एक पुरुष प्रदर्शनकारी को पकड़ने की कोशिश कर रहा था और महिला अचानक बीच में आ गई। फिलहाल दोनों पक्षों के दावों के बीच विवाद जारी है।

    Official Sources

    FAQ

    क्या मुंबई पुलिस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई हुई है?

    इस मामले में उपलब्ध जानकारी के अनुसार मुंबई पुलिस ने वायरल वीडियो की जांच के बाद अधिकारी के आचरण में कोई अनुचित हरकत नहीं पाए जाने की बात कही है। अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है।

    वायरल वीडियो में क्या आरोप लगाया गया है?

    वीडियो के आधार पर आरोप लगाया गया कि एक सादे कपड़ों में मौजूद पुलिस अधिकारी ने महिला प्रदर्शनकारी को गलत तरीके से पकड़ा और घसीटा। मुंबई पुलिस ने इस आरोप से इनकार किया है।

    मुंबई पुलिस ने क्या सफाई दी?

    पुलिस के मुताबिक अधिकारी एक पुरुष प्रदर्शनकारी को पकड़ने की कोशिश कर रहा था और महिला अचानक बीच में आ गई थी