मुंबई रेलवे में प्रतिबंधित गुटखा तस्करी के आरोप में दो GRP कांस्टेबल निलंबित। गुजरात से ट्रेनों के जरिए खेप पहुंचाने के आरोपों की जांच जारी।
मुंबई: मुंबई रेलवे पुलिस ने प्रतिबंधित गुटखे की कथित तस्करी में मदद करने के आरोप में दो कांस्टेबलों को निलंबित किया है। 7 सितंबर को की गई इस कार्रवाई के बाद अब जांच का दायरा केवल दो पुलिसकर्मियों तक सीमित नहीं रहने के संकेत हैं। आरोप है कि गुजरात से मुंबई तक गुटखे की खेप पहुंचाने के लिए रेलवे की लंबी दूरी की ट्रेनों और उनके भंडारण क्षेत्रों का इस्तेमाल किया जाता था।
निलंबित पुलिसकर्मियों की पहचान अनिल गुजर, बोरीवली रेलवे पुलिस थाने में तैनात कांस्टेबल और तुषार ठाकुर, वसई रेलवे पुलिस थाने में तैनात कांस्टेबल के रूप में हुई है। वरिष्ठ रेलवे पुलिस अधिकारी के अनुसार, दोनों के खिलाफ एक नागरिक की शिकायत मिलने के बाद विभागीय जांच की गई थी। जांच में उनकी कथित भूमिका सामने आने के बाद मुंबई रेलवे पुलिस आयुक्त एम. राकेश कलासागर ने निलंबन की कार्रवाई की।
शिकायत से सामने आया कथित तस्करी नेटवर्क
उपलब्ध जानकारी के अनुसार शिकायत में आरोप लगाया गया था कि दोनों पुलिसकर्मी गुटखा आपूर्तिकर्ताओं के संपर्क में थे और प्रतिबंधित माल की खेप को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में मदद करते थे। जांच के दौरान उनकी कथित भूमिका सामने आने के बाद विभागीय कार्रवाई की गई।

मामले को गंभीर इसलिए माना जा रहा है क्योंकि सूत्रों ने आरोप लगाया है कि केवल पुलिसकर्मियों की भूमिका नहीं थी। कथित तौर पर कुछ भंडारण ठेकेदारों को भुगतान कर खेपों की आवाजाही आसान बनाई जाती थी। कुछ रेलवे सुरक्षा बल और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के कर्मियों को भी नियमित रूप से खेप गुजरने देने के लिए भुगतान किए जाने का आरोप है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच में संबंधित लोगों की भूमिका स्पष्ट होना बाकी है।
AC कोच के भंडारण हिस्से में छिपाने का आरोप
जांच से जुड़े सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक गुटखे के पैकेट काले बैगों में रखकर ट्रेनों में छिपाए जाते थे। एक वीडियो में वातानुकूलित कोच के भंडारण हिस्से में गुटखे से भरे बैग दिखाई देने का दावा किया गया है।
आरोप है कि कुछ खेपें वसई या बोरीवली से ट्रेनों में चढ़ाई जाती थीं और बाद में बांद्रा टर्मिनस पहुंचने के बाद टैक्सी या दूसरे वाहनों के जरिए आगे भेजी जाती थीं। मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों के इस्तेमाल की भी बात सामने आई है।
जिन ट्रेनों के नाम इस मामले से जुड़े आरोपों में सामने आए हैं, उनमें सूर्यनगरी एक्सप्रेस, गोल्डन टेंपल मेल, गरीब रथ एक्सप्रेस, अवध एक्सप्रेस, भावनगर एक्सप्रेस और हरिद्वार एक्सप्रेस शामिल हैं। हालांकि, इन सभी ट्रेनों के जरिए नियमित रूप से गुटखा तस्करी होने की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
जुलाई में 320 किलो गुटखा पकड़ा गया था
इस कार्रवाई से पहले 30 जुलाई 2026 को बोरीवली रेलवे स्टेशन पर प्रतिबंधित तंबाकू उत्पादों की बड़ी खेप पकड़ी गई थी। रेलवे विजिलेंस ने बांद्रा टर्मिनस-अजमेर सुपरफास्ट एक्सप्रेस के कोच एस-2 से करीब 320 किलोग्राम तंबाकू, पान मसाला और गुटखा उत्पाद जब्त किए थे। इनकी अनुमानित कीमत करीब 1.70 लाख रुपये बताई गई थी। एक व्यक्ति को पकड़े जाने के बाद आरोपी और जब्त माल को रेलवे पुलिस के हवाले किया गया था।
हालांकि, जुलाई में पकड़ी गई इस खेप और सितंबर में निलंबित किए गए दोनों कांस्टेबलों के बीच सीधे संबंध की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए दोनों घटनाओं को एक ही गिरोह या नेटवर्क की कार्रवाई के रूप में देखना फिलहाल जल्दबाजी होगी।
GRP के साथ RPF की भूमिका पर भी सवाल
मौजूदा आरोपों में कुछ रेलवे सुरक्षा बल कर्मियों की कथित भूमिका का भी उल्लेख है। ऐसे में जांच का एक अहम सवाल यह है कि यदि प्रतिबंधित सामान नियमित रूप से रेलवे के जरिए पहुंच रहा था, तो सुरक्षा और जांच की अलग-अलग व्यवस्थाओं के बावजूद वह लगातार कैसे आगे बढ़ता रहा।
रेलवे पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल की जिम्मेदारियां अलग हैं। GRP राज्य पुलिस व्यवस्था का हिस्सा होकर रेलवे परिसर में अपराध और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों को संभालती है, जबकि RPF रेलवे संपत्ति और यात्रियों की सुरक्षा से संबंधित जिम्मेदारियां निभाती है। इसलिए दोनों एजेंसियों से जुड़े किसी भी कर्मचारी की कथित मिलीभगत की पुष्टि होने पर मामला सिर्फ तस्करी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रेलवे सुरक्षा व्यवस्था की जवाबदेही का सवाल भी उठेगा।
मुंबई रेलवे में पहले भी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हुई
मुंबई रेलवे पुलिस में पिछले वर्ष भी पुलिसकर्मियों की कथित मिलीभगत और भ्रष्टाचार से जुड़े कई मामले सामने आए थे। सितंबर 2025 में पांच महीनों के भीतर 13 GRP कर्मियों को यात्रियों से कथित जबरन वसूली के आरोप में निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई थी। कार्रवाई मुंबई सेंट्रल, दादर, कुर्ला, बांद्रा टर्मिनस, बोरीवली, ठाणे, कल्याण और पनवेल जैसे स्टेशनों से जुड़े मामलों में हुई थी।
इन मामलों में यात्रियों के सामान की जांच के दौरान कथित तौर पर उन्हें ऐसे कमरों में ले जाने की शिकायतें सामने आई थीं, जहां सीसीटीवी निगरानी नहीं थी। बाद में रेलवे पुलिस ने सामान की जांच सीसीटीवी की निगरानी में करने और प्रक्रिया को अधिक जवाबदेह बनाने के लिए दिशानिर्देशों पर काम किया था।
इसी दौरान वसई रेलवे स्टेशन से जुड़े एक मामले में तीन GRP कांस्टेबलों को भी कथित वसूली के आरोप में निलंबित किया गया था।
हालांकि, इन पुराने मामलों और वर्तमान गुटखा तस्करी मामले के बीच कोई सीधा संबंध आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आया है।
महाराष्ट्र में गुटखा प्रतिबंधित क्यों है?
गुटखा और तंबाकू-युक्त ऐसे खाद्य उत्पादों पर महाराष्ट्र में प्रतिबंध लंबे समय से लागू है। प्रतिबंध का आधार खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत खाद्य पदार्थों में तंबाकू और निकोटीन के इस्तेमाल पर रोक है। इसलिए मामला केवल अवैध बिक्री का नहीं, बल्कि प्रतिबंधित उत्पाद के निर्माण, भंडारण, परिवहन और वितरण से भी जुड़ सकता है।
गुटखा स्वास्थ्य के लिहाज से भी गंभीर चिंता का विषय है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और कैंसर अनुसंधान से जुड़े अंतरराष्ट्रीय स्रोतों के अनुसार धूम्ररहित तंबाकू उत्पादों का इस्तेमाल मुंह और अन्य कैंसर सहित कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ा है।
अब जांच में इन सवालों के जवाब अहम
दो कांस्टेबलों के निलंबन के बाद जांच के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल हैं। क्या कथित आपूर्तिकर्ताओं की पहचान हुई है? क्या भंडारण ठेकेदारों से पूछताछ की जा रही है? क्या किसी RPF या अन्य सुरक्षा कर्मचारी की भूमिका की औपचारिक जांच हो रही है? क्या जुलाई में पकड़ी गई 320 किलो की खेप और मौजूदा मामले के बीच कोई संबंध सामने आया है?
इसके अलावा, जिन ट्रेनों के नाम जांच से जुड़े आरोपों में सामने आए हैं, उनके सीसीटीवी फुटेज, स्टेशन स्तर के रिकॉर्ड और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की जांच भी मामले की दिशा स्पष्ट कर सकती है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर दो GRP कांस्टेबलों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई हो चुकी है, जबकि कथित व्यापक नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
