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करीना कपूर और सैफ अली खान से जुड़े मुंबई के Royal China रेस्टोरेंट पर खाद्य सुरक्षा कार्रवाई हुई। निरीक्षण में फफूंद, कीट और गलत स्टोरेज की खामियों का दावा है।
मुंबई: मुंबई के फोर्ट इलाके में स्थित लोकप्रिय चाइनीज रेस्टोरेंट Royal China पर खाद्य सुरक्षा को लेकर बड़ी कार्रवाई हुई है। 9 अक्टूबर को सामने आई जानकारी के अनुसार, रेस्टोरेंट के निरीक्षण में फफूंद, फंगल ग्रोथ, कीटों की मौजूदगी और खाने-पीने की चीजों को सुरक्षित तरीके से स्टोर नहीं करने जैसी गंभीर खामियां पाई गईं। इसके बाद रेस्टोरेंट का FSSAI लाइसेंस सस्पेंड किए जाने और तत्काल प्रभाव से खाद्य पदार्थों की बिक्री, खरीद और वितरण रोकने का निर्देश दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
यह रेस्टोरेंट अपने Cantonese cuisine के लिए जाना जाता है। बॉलीवुड अभिनेत्री करीना कपूर खान और सैफ अली खान भी इससे जुड़े चर्चित ग्राहकों में शामिल हैं। ऐसे में खाद्य सुरक्षा से जुड़ी कार्रवाई ने इस प्रतिष्ठित रेस्टोरेंट को चर्चा में ला दिया है।
निरीक्षण में क्या-क्या खामियां मिलीं?
Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) ने महाराष्ट्र के Food and Drug Administration (FDA) द्वारा किए गए औचक निरीक्षण का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, निरीक्षण के दौरान रेस्टोरेंट परिसर में फफूंद और फंगल ग्रोथ, गंभीर कीट संक्रमण और खाद्य पदार्थों के असुरक्षित भंडारण से जुड़ी समस्याएं सामने आईं।
निरीक्षण से संबंधित वीडियो में खाने और आसपास की सतहों पर कीटों की गतिविधि के संकेत भी दिखाए गए। खाद्य पदार्थों के आसपास इस तरह की स्थिति स्वच्छता और भोजन की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।
हालांकि, इन खामियों के सामने आने का मतलब यह नहीं है कि रेस्टोरेंट में परोसे गए हर व्यंजन के दूषित होने या किसी ग्राहक के बीमार पड़ने की पुष्टि हो गई है। इसके लिए अलग से प्रमाण और जांच के नतीजे जरूरी हैं।
लाइसेंस सस्पेंड, खाद्य कारोबार रोकने का निर्देश
खाद्य सुरक्षा से जुड़ी खामियों के बाद Royal China का FSSAI लाइसेंस सस्पेंड किए जाने की जानकारी दी गई है। साथ ही रेस्टोरेंट को तत्काल प्रभाव से खाद्य पदार्थों की बिक्री, खरीद और वितरण बंद करने का निर्देश दिए जाने की बात कही गई है।
लाइसेंस सस्पेंड होने और स्थायी रूप से रद्द होने में अंतर है। रेस्टोरेंट दोबारा कारोबार कब शुरू कर सकता है, यह संबंधित आदेश, सुधारात्मक कार्रवाई और खाद्य सुरक्षा विभाग की आगे की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। फिलहाल लाइसेंस बहाल होने या दोबारा निरीक्षण के बाद कारोबार शुरू करने की स्थिति की पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।
करीना कपूर, सैफ अली खान और अनन्या पांडे से जुड़ा है नाम
Royal China दक्षिण मुंबई का जाना-पहचाना रेस्टोरेंट है, जहां Cantonese और अन्य चाइनीज व्यंजन परोसे जाते हैं। करीना कपूर खान और सैफ अली खान के अलावा अभिनेत्री अनन्या पांडे भी इस रेस्टोरेंट से जुड़ी अपनी पसंद का जिक्र कर चुकी हैं।
पिछले साल दिए गए एक इंटरव्यू में अनन्या पांडे ने बताया था कि वह कभी-कभी अपनी चीट नाइट्स पर Royal China से चिली चिकन मंगाती हैं। हालांकि, किसी सेलिब्रिटी का इस रेस्टोरेंट से जुड़ाव खाद्य सुरक्षा उल्लंघनों या उनसे होने वाले किसी स्वास्थ्य नुकसान का प्रमाण नहीं है।
मुंबई में रेस्टोरेंट की स्वच्छता पर बढ़ी निगरानी
मुंबई और महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई का दायरा Royal China तक सीमित नहीं रहा है। सितंबर 2026 के आखिरी सप्ताह में भी कई खाद्य प्रतिष्ठानों के खिलाफ निरीक्षण और कार्रवाई की जानकारी सामने आई थी। इन मामलों में स्वच्छता, कीट नियंत्रण, रेफ्रिजरेशन और खाद्य पदार्थों के सुरक्षित भंडारण जैसी व्यवस्थाओं पर सवाल उठे थे।
Royal China के मामले में अब महत्वपूर्ण यह होगा कि रेस्टोरेंट प्रबंधन खामियों को दूर करने के लिए क्या कदम उठाता है और खाद्य सुरक्षा विभाग आगे क्या निर्णय लेता है। ग्राहकों के लिए भी यह मामला याद दिलाता है कि किसी रेस्टोरेंट की लोकप्रियता या ऊंची कीमतें अपने आप में सुरक्षित भोजन की गारंटी नहीं होतीं।
कांदिवली पश्चिम की शुभाष लेन में OSK Heritage के फ्लैट 1304 में आग लगी। 14वीं मंजिल भी प्रभावित हुई, कोई घायल नहीं हुआ।
मुंबई: कांदिवली पश्चिम की शुभाष लेन में बुधवार रात एक हाईराइज बिल्डिंग में आग लगने से हड़कंप मच गया। शीतल फीनिक्स क्लास के सामने स्थित OSK Heritage में लगी आग फ्लैट नंबर 1304 तक सीमित रही, जबकि ऊपर की 14वीं मंजिल के फ्लैट पर भी इसका असर हुआ। राहत की बात है कि घटना में किसी के घायल होने की जानकारी नहीं है।
मुंबई फायर ब्रिगेड को रात करीब 9:14 बजे आग की सूचना मिली। इसके बाद आग को Level-I घोषित कर दमकल की टीम को मौके पर भेजा गया। पुलिस, बीएमसी वार्ड स्टाफ, पीडब्ल्यूडी, बिजली विभाग और 108 एंबुलेंस की टीम भी मौके पर पहुंची।
फ्लैट 1304 में लगी आग, करीब 600 वर्ग फुट हिस्सा प्रभावित
जानकारी के अनुसार आग 13वीं मंजिल स्थित फ्लैट नंबर 1304 में लगी थी। करीब 600 वर्ग फुट के हिस्से में इलेक्ट्रिकल वायरिंग और इंस्टॉलेशन, POP, लकड़ी का फर्नीचर, घरेलू सामान, बर्तन, दरवाजे और खिड़कियां आग की चपेट में आए।
दमकलकर्मियों के फ्लैट में पहुंचने के समय वहां कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था। आग के दौरान बिल्डिंग के कुछ residents बाहर निकल गए, जबकि कुछ लोग टेरेस की तरफ चले गए। बाद में दमकल कर्मियों ने उन्हें सुरक्षित नीचे पहुंचाया।
14वीं मंजिल के फ्लैट तक पहुंचा असर
आग का असर ऊपर स्थित फ्लैट नंबर 1404 तक भी पहुंचा। यहां करीब 50 वर्ग फुट हिस्से में खिड़की और कपड़ों सहित कुछ सामान प्रभावित हुआ। दमकल की टीम ने आग पर काबू पाने के बाद cooling operation भी चलाया।
सुरक्षा के लिए बिल्डिंग की बिजली काटी गई
आग की स्थिति को देखते हुए बिल्डिंग की बिजली एहतियात के तौर पर बंद की गई। मौके पर मौजूद अलग-अलग विभागों की टीमों ने आग बुझाने और आसपास के हिस्से को सुरक्षित रखने का काम किया।
आग लगने की वजह अभी साफ नहीं
आग किस वजह से लगी, इसकी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। शुरुआती स्तर पर शॉर्ट सर्किट की आशंका की बात सामने आई है, लेकिन इसे आग का अंतिम कारण नहीं माना जा सकता। फायर अधिकारियों की जांच के बाद ही आग लगने की सही वजह स्पष्ट होगी।
10वीं या 13वीं मंजिल? शुरुआती जानकारी में अंतर
घटना के शुरुआती अपडेट में आग को 10वीं मंजिल से जोड़ा गया था, लेकिन बाद में सामने आई विस्तृत जानकारी में प्रभावित फ्लैट नंबर 1304 यानी 13वीं मंजिल बताया गया।
फिलहाल सबसे बड़ी राहत यही है कि आग की इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। फ्लैट में हुए नुकसान और आग लगने की वजह को लेकर आगे की जांच के बाद स्थिति और साफ होगी।
मुंबई के शिवाजी पार्क में CJP प्रदर्शन के दौरान नाबालिगों की भागीदारी पर NHRC ने जांच के निर्देश दिए हैं। पुलिस समेत चार संस्थाओं से रिपोर्ट मांगी है।
मुंबई: शिवाजी पार्क में 2 अक्टूबर को हुए कॉक्रोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन में नाबालिगों की कथित भागीदारी को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने जांच शुरू की है। आयोग ने मुंबई पुलिस आयुक्त, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), X Corp और महाराष्ट्र के महिला एवं बाल विकास विभाग से एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है।
NHRC के समक्ष दाखिल शिकायत में आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शन में नाबालिगों को इस तरह शामिल किया गया, जिससे उनकी मौजूदगी पुलिस कार्रवाई को प्रभावित कर सकती थी। आयोग ने पुलिस को बच्चों को प्रदर्शन में लाए जाने की परिस्थितियों और आयोजकों की भूमिका की जांच करने को कहा है।
कथित चैट और सोशल मीडिया सामग्री भी जांच में
शिकायत में प्रदर्शन से पहले कुछ ग्रुप या चैट में नाबालिगों की भागीदारी को लेकर चर्चा होने का दावा किया गया है। शिकायतकर्ता सतीश वैद Sewa Nyaya Utthan Foundation में Head of Intervention हैं।
शिकायत में सोशल मीडिया पर प्रसारित तस्वीरों और वीडियो का भी उल्लेख है। इनमें एक बच्चे को भीड़ के ऊपर उठाए जाने का दृश्य होने का दावा किया गया है। NHRC ने संबंधित डिजिटल सामग्री को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं।
आयोग ने पुलिस से यह जांच करने को कहा है कि बच्चों को प्रदर्शन में किस परिस्थिति में लाया गया और इसमें आयोजकों या अन्य लोगों की क्या भूमिका थी। यदि जांच में संज्ञेय अपराध सामने आता है तो कानून के अनुसार कार्रवाई करने को कहा गया है।
चार संस्थाओं से मांगी गई रिपोर्ट
मुंबई पुलिस को प्रदर्शन में नाबालिगों की भागीदारी और आयोजकों की भूमिका की जांच करनी है।
MeitY को डिजिटल सामग्री से जुड़े पहलुओं पर कार्रवाई की जानकारी देनी है। X Corp से संबंधित फोटो, वीडियो, पोस्ट और उपलब्ध डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने को कहा गया है।
महाराष्ट्र के महिला एवं बाल विकास विभाग को बच्चों की देखभाल, सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है।
NHRC ने बाल संरक्षण कानूनों, जिसमें Juvenile Justice Act के प्रावधान भी शामिल हैं, के संभावित उल्लंघन की जांच करने को कहा है।
CJP आयोजकों के खिलाफ पहले से FIR
शिवाजी पार्क प्रदर्शन को लेकर मुंबई पुलिस ने CJP के आयोजकों और 400 से 500 अज्ञात समर्थकों के खिलाफ FIR दर्ज की है। पुलिस के अनुसार प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं दी गई थी।
FIR में गैरकानूनी जमावड़ा, सार्वजनिक सेवक के आदेश की अवहेलना, यातायात में बाधा और बिना अनुमति लाउडस्पीकर के इस्तेमाल जैसे आरोप शामिल हैं।
FIR में अभिजीत दीपके, सौरव दास, प्रनय आहिर, आशुतोष रांका, अजिंक्य शिंदे, आफरीन नवाज, सौम्या कोर्डे, अंकित भारद्वाज, विजय मलांगी और योगेश इंगले समेत अन्य CJP सदस्यों के नाम दर्ज किए गए हैं। शिकायत के स्तर पर रत्ना सिंह का नाम भी सामने आया था।
प्रदर्शन के दौरान 75 वर्षीय व्यक्ति की मौत
प्रदर्शन के दौरान ठाणे निवासी 75 वर्षीय गोपालकृष्ण सुब्बैया पिल्लई की तबीयत बिगड़ गई थी। उन्हें सुश्रुषा अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
पुलिस के अनुसार डॉक्टरों ने मौत का कारण हार्ट अटैक बताया है। इस मामले में आकस्मिक मृत्यु रिपोर्ट (ADR) दर्ज की गई है।
शिवाजी पार्क सिटिजंस फोरम ने इस घटना को लेकर पुलिस में शिकायत देकर CJP के आयोजकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। यह शिकायत अलग से जांच के अधीन है।
CJP नेता अभिजीत दीपके ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की घोषणा की है। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रस्तावित है।
मुंबई प्रदर्शन से जुड़े मामलों में फिलहाल पुलिस जांच और NHRC की कार्रवाई जारी है। नाबालिगों की भागीदारी को लेकर लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
फ्लाईदुबई की उड़ान में हमले के बाद घायल कैप्टन स्मित मच्छर की ताबुक में सर्जरी हुई और अब उन्हें आगे के इलाज के लिए दुबई लाया गया है।
मुंबई: घाटकोपर से ताल्लुक रखने वाले फ्लाईदुबई के कैप्टन स्मित मच्छर को उड़ान के दौरान सह-पायलट के हमले में गंभीर चोट लगने के बाद ताबुक में आपात शल्य-चिकित्सा कराई गई। अब उन्हें आगे के इलाज के लिए दुबई ले जाया गया है। भारतीय अधिकारियों के अनुसार उनकी हालत स्थिर बताई गई थी। परिवार भी दुबई पहुंच चुका है और भारतीय राजनयिक अधिकारी लगातार उनके संपर्क में हैं।
यह घटना 30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान एफजेड1073 में हुई। विमान में 174 यात्री सवार थे। उड़ान के दौरान सह-पायलट ने कैप्टन स्मित पर चाकू से हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद स्मित ने विमान को बचाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कैसे बची सैकड़ों यात्रियों की जान
हमले के बाद विमान में अचानक गंभीर आपात स्थिति पैदा हो गई। विमान तेजी से लगभग 14 हजार फुट नीचे आया। इसी दौरान आपातकालीन संकेत जारी किए गए और विमान का मार्ग बदलकर सऊदी अरब के ताबुक हवाई अड्डे की ओर किया गया।
हमले में घायल कैप्टन स्मित ने किसी तरह कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की। इसके बाद विमान में मौजूद यात्रियों और चालक दल के सदस्यों ने कॉकपिट में प्रवेश कर हमलावर सह-पायलट को काबू किया।
विमान में मौजूद कुछ अन्य पायलटों ने भी स्थिति संभालने में मदद की। इसके बाद विमान को सुरक्षित रूप से ताबुक हवाई अड्डे पर उतारा गया। इस घटनाक्रम में कैप्टन स्मित की भूमिका को यात्रियों की जान बचाने में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कैप्टन स्मित को पहले ताबुक में इलाज मिला
विमान की सुरक्षित लैंडिंग के बाद गंभीर रूप से घायल कैप्टन स्मित को ताबुक के अस्पताल ले जाया गया। वहां उनकी आपात शल्य-चिकित्सा की गई। इसके बाद उनकी बेहतर चिकित्सा के लिए उन्हें दुबई ले जाया गया है।
भारतीय दूतावास और सऊदी अरब में भारतीय अधिकारियों ने उनके परिवार के साथ संपर्क बनाए रखा। भारतीय राजदूत दीपक मित्तल और महावाणिज्यदूत विष्णु वर्धन रेड्डी ने भी परिवार से मुलाकात की।
कैप्टन स्मित का परिवार मुंबई के घाटकोपर में रहता है। उनके परिवार के लोग और पुराने परिचित इस घटना के बाद लगातार उनकी सेहत की जानकारी ले रहे हैं।
उनके पड़ोसियों डॉ. जिनित शाह, अशोक मकवाना और लक्ष्मीकांत जोशी ने स्मित को शांत और जिम्मेदार व्यक्ति के रूप में याद किया। उनके बचपन के मित्र प्रतीक गांधी भी परिवार के संपर्क में रहे। अक्षय दोशी समेत परिचितों ने परिवार को हवाई अड्डे तक पहुंचाने में मदद की।
घाटकोपर स्थित उनके घर के बाहर भी स्थानीय लोगों ने उनके लिए प्रार्थना की। कई लोगों ने भारतीय तिरंगे और उनकी तस्वीरों के साथ उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की।
कौन हैं कैप्टन स्मित मच्छर
स्मित मच्छर का संबंध मुंबई के घाटकोपर से है। उन्होंने न्यूजीलैंड में विमान उड़ाने का प्रशिक्षण लिया था। इसके बाद उन्होंने स्पाइसजेट में करीब एक दशक तक काम किया। वर्ष 2022 में वह फ्लाईदुबई से जुड़े।
वह बोइंग 737 विमान उड़ाते हैं और उनके पास हजारों घंटे का उड़ान अनुभव है। अलग-अलग उपलब्ध जानकारियों में उनके उड़ान अनुभव को करीब 9,750 घंटे से लेकर लगभग 10 हजार घंटे तक बताया गया है।
परिवार के मुताबिक, कम उम्र में एक विमानन संबंधी कार्यक्रम में शामिल होने के बाद स्मित ने विमान चालक बनने का फैसला किया था। शुरुआत में उनके परिवार को इस पेशे को लेकर चिंता थी, लेकिन उन्होंने विमानन क्षेत्र में अपना करियर बनाया।
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया ‘हीरो’
कैप्टन स्मित की बहादुरी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्मित को ‘हीरो’ बताते हुए कहा कि गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उनके साहस और दृढ़ संकल्प ने सैकड़ों लोगों की जान बचाने और बड़ी त्रासदी को टालने में मदद की।
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने भी स्मित के लिए ‘विशिष्ट गुजरात गरिमा पुरस्कार’ देने और 25 लाख रुपये की सम्मान राशि की घोषणा की है।
सिर्फ कैप्टन स्मित ही नहीं, यात्रियों ने भी संभाला मोर्चा
इस घटना में कैप्टन स्मित के साथ विमान में मौजूद कई यात्रियों ने भी अहम भूमिका निभाई। कॉकपिट में पहुंचकर हमलावर को काबू करने वाले कुछ यात्रियों को इजरायल में नागरिक वीरता सम्मान के लिए नामित किए जाने की बात सामने आई है।
यानी विमान को सुरक्षित उतारने की पूरी प्रक्रिया में केवल चालक दल ही नहीं, बल्कि यात्रियों और अन्य प्रशिक्षित पायलटों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही।
संयुक्त अरब अमीरात के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने इस घटना को सुरक्षा संबंधी घटना बताया है। उसके अनुसार कुछ चालक दल के सदस्य घायल हुए और उन्हें सऊदी अरब के अस्पताल ले जाया गया।
संयुक्त अरब अमीरात के लोक अभियोजन ने घटना की जांच के लिए विशेष टीम गठित की है। जांच में हमले के कारण, उद्देश्य, संभावित पूर्व योजना और किसी आतंकी गतिविधि से संबंध जैसे पहलुओं को देखा जा रहा है। इन बिंदुओं पर अभी अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
अधिकारियों ने बिना पुष्टि वाली जानकारी फैलाने और जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से बचने की अपील की है।
घटना के बाद इजरायल से जुड़ी फ्लाईदुबई की उड़ानों पर भी असर पड़ा है। अमीरात ने फ्लाईदुबई के साथ तेल अवीव आने-जाने वाली कोडशेयर सेवाओं को अगले आदेश तक रोक दिया है। इससे इस मार्ग पर यात्रा करने वाले यात्रियों को भी प्रभावित होना पड़ा है।
सोशल मीडिया पर भी सावधानी जरूरी
घटना के बाद कैप्टन स्मित के नाम से सोशल मीडिया पर कुछ खाते और संदेश सामने आए हैं। इनमें से किसी खाते को कैप्टन स्मित द्वारा संचालित किए जाने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए ऐसे संदेशों को उनके आधिकारिक बयान के रूप में मानना उचित नहीं होगा।
फिलहाल सबसे अहम जानकारी यही है कि कैप्टन स्मित ताबुक में आपात इलाज के बाद दुबई पहुंच चुके हैं और आगे का उपचार जारी है। उनके परिवार और भारतीय अधिकारी उनके स्वास्थ्य पर नजर बनाए हुए हैं। वहीं विमान में हुए हमले के कारण और सह-पायलट के उद्देश्य को लेकर जांच जारी है।
Flydubai FZ1073 में कॉकपिट में हिंसक घटना के बाद भारतीय कप्तान Smit Machchhar घायल हुए। 7500 कोड के बाद विमान Tabuk में उतारा गया।
Dubai से Tel Aviv जा रही Flydubai की FZ1073 फ्लाइट में कॉकपिट के अंदर हुई हिंसक घटना के बाद विमान को Saudi Arabia के Tabuk में emergency landing करानी पड़ी। घटना के दौरान भारतीय कप्तान Smit Machchhar घायल हुए। विमान से 7700 और उसके बाद 7500 emergency codes transmit होने तथा altitude में अचानक तेज गिरावट के बाद पूरे मामले ने गंभीर सुरक्षा चिंता पैदा कर दी।
विमान में मौजूद सभी यात्रियों और crew members को सुरक्षित बताया गया है। दोनों pilots को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया, जबकि यात्रियों को बाद में replacement aircraft के जरिए उनके गंतव्य की ओर रवाना किया गया।
कॉकपिट में क्या हुआ?
उड़ान के दौरान aircraft के flight deck में अचानक हिंसक घटना हुई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस दौरान captain और co-pilot दोनों घायल हुए। घटना के बाद विमान की स्थिति असामान्य हो गई और aircraft ने तेजी से altitude खोया।
Flight-tracking data में विमान से पहले 7700 और फिर 7500 code transmit हुआ। Aviation में 7700 सामान्य emergency की सूचना देता है, जबकि 7500 का इस्तेमाल unlawful interference या संभावित hijacking जैसी स्थिति के संकेत के लिए किया जाता है। इसके बाद फिर 7700 code transmit किया गया।
विमान की altitude में भी कुछ ही समय में करीब 14,000 से 16,000 फीट तक की तेज गिरावट दर्ज हुई। इसी दौरान aircraft को Tel Aviv की बजाय Saudi Arabia के Tabuk की ओर divert किया गया।
भारतीय कप्तान Smit Machchhar कौन हैं?
घटना में घायल captain की पहचान Smit Machchhar के रूप में हुई है। वे भारतीय नागरिक हैं और जून 2022 से Flydubai के साथ जुड़े हैं।
Smit Machchhar इससे पहले करीब 11 वर्षों तक SpiceJet के साथ काम कर चुके हैं। वहां उन्होंने Senior Commander और Line Training Captain के तौर पर भी जिम्मेदारी संभाली थी। Boeing 737 aircraft पर उनका लंबा operational experience है और उपलब्ध professional profile के अनुसार उनके पास करीब 9,750 flight hours का अनुभव है।
घटना के दौरान उन्हें चोट लगी और बाद में Tabuk में medical treatment के लिए ले जाया गया। उनकी मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति को लेकर अभी विस्तृत आधिकारिक मेडिकल जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है।
विमान को सुरक्षित किसने संभाला?
कप्तान के घायल होने के बाद स्थिति को नियंत्रित करने में flight में मौजूद crew और अन्य pilots की भूमिका सामने आई है। यात्रियों और crew ने cockpit में मौजूद हमलावर को काबू करने में मदद की, जबकि aircraft को सुरक्षित रूप से divert कर Tabuk पहुंचाया गया।
इस पूरी घटना को सिर्फ एक व्यक्ति की कार्रवाई के तौर पर देखना सही नहीं होगा। संकट के दौरान cockpit crew, cabin crew, passengers और विमान में मौजूद अन्य qualified pilots की संयुक्त भूमिका महत्वपूर्ण रही।
Tabuk में कैसे हुई emergency landing?
Saudi Arabia के Tabuk स्थित Prince Sultan bin Abdulaziz International Airport के अनुसार FZ1073 से करीब 8:44 बजे emergency landing के लिए distress call मिला। इसके बाद airport authorities ने emergency response सक्रिय किया।
विमान करीब 9:45 बजे Tabuk Airport पर सुरक्षित उतर गया। Landing के बाद captain और co-pilot दोनों को अस्पताल भेजा गया, जबकि यात्रियों को airport terminal में सहायता उपलब्ध कराई गई।
इसके बाद passengers को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए replacement aircraft की व्यवस्था की गई। Flydubai ने यात्रियों की वापसी के लिए दो replacement aircraft भेजे।
घटना के दौरान 7500 code transmit होने के कारण शुरुआती तौर पर hijacking की आशंका पैदा हुई। हालांकि बाद की स्थिति इससे अधिक जटिल सामने आई।
घटना में cockpit के अंदर हुई हिंसक झड़प की पुष्टि हुई है, लेकिन इसका अंतिम कारण और motive अभी जांच के दायरे में है। इसलिए इसे पूरी तरह पारंपरिक hijacking के रूप में घोषित करना अभी जल्दबाजी होगी।
इजरायली अधिकारियों ने दावा किया है कि co-pilot ने captain पर चाकू से हमला किया और aircraft को crash कराने की कोशिश की। इस आधार पर मामले को संभावित आतंकी घटना के रूप में भी देखा जा रहा है। दूसरी तरफ Flydubai ने घटना को flight deck altercation बताया है और कहा है कि इसके पीछे के कारण तथा motive अभी स्पष्ट नहीं हैं।
उपलब्ध जानकारी में घायल co-pilot को Omani national बताया गया है। हालांकि घटना की पूरी पृष्ठभूमि, उसका motive और उसकी कार्रवाई के अंतिम उद्देश्य की जांच अभी जारी है।
इसलिए उसके इरादे को अंतिम रूप से तय तथ्य के रूप में पेश करना अभी उचित नहीं होगा।
यात्रियों ने क्या देखा?
घटना के बाद सामने आए passenger videos और प्रत्यक्षदर्शी विवरणों में विमान के अंदर अफरातफरी की स्थिति दिखाई देती है। यात्रियों ने cockpit की ओर से चीख-पुकार सुनने और बाद में खून से घायल pilot को देखने की बात कही।
कुछ passengers ने बताया कि विमान के तेजी से नीचे जाने के दौरान उन्हें स्थिति की गंभीरता का अंदाजा हुआ। इसी दौरान यात्रियों और crew ने cockpit में पहुंचकर हमलावर को काबू करने में मदद की।
घटना के ये दृश्य पूरे मामले की गंभीरता को दिखाते हैं, हालांकि सोशल मीडिया पर सामने आने वाले हर वीडियो के संदर्भ और समय की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
7700 और 7500 code ने क्यों बढ़ाई चिंता?
FZ1073 की emergency में transmit हुए codes इस घटना का अहम हिस्सा हैं।
7700 का अर्थ aircraft में सामान्य emergency स्थिति है। वहीं 7500 unlawful interference का internationally recognised संकेत है। दोनों codes का इस्तेमाल और उसके बाद aircraft की तेजी से altitude कम होना इस बात का संकेत था कि विमान किसी गंभीर संकट से गुजर रहा था।
इसी वजह से Israel में भी security response सक्रिय हुआ और fighter aircraft को scramble किया गया।
Saudi Arabia में ही क्यों उतरा विमान?
विमान Tel Aviv के लिए रवाना हुआ था, लेकिन emergency के समय उसे Saudi Arabia के Tabuk की ओर divert किया गया। गंभीर स्थिति में aircraft के लिए सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकता सुरक्षित landing और यात्रियों की सुरक्षा होती है।
Tabuk Airport ने emergency response के तहत विमान को उतरने की अनुमति दी और landing के बाद घायल pilots को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई। यात्रियों को भी airport पर सहायता दी गई।
यह घटना इसलिए भी असामान्य है क्योंकि Israel-bound commercial aircraft को emergency परिस्थितियों में Saudi territory पर उतरना पड़ा।
अलग-अलग शुरुआती आंकड़ों में अंतर रहा है। उपलब्ध विस्तृत भारतीय रिपोर्टिंग में FZ1073 में 174 passengers होने की जानकारी दी गई है। इसी कारण 180 यात्रियों का आंकड़ा एक rounded figure के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन exact passenger count के लिए 174 का आंकड़ा अधिक उपयुक्त है।
सभी passengers और crew members के सुरक्षित होने की जानकारी सामने आई है।
क्या विमान को नुकसान पहुंचा?
Landing के बाद aircraft के rear और vertical stabilizer/rudder area में damage की तस्वीरें और विवरण सामने आए हैं। हालांकि इस damage का कारण cockpit में हुई घटना, aircraft की तेज descent, landing या किसी अन्य वजह से था, यह अभी स्पष्ट रूप से स्थापित नहीं हुआ है।
जांच में अब कई अहम सवालों के जवाब तलाशे जाने हैं। इनमें cockpit में हमले की पूरी sequence, weapon aircraft के अंदर कैसे पहुंचा, cockpit access कैसे हुआ, aircraft की तेज altitude loss का exact कारण क्या था और rear section में damage किस वजह से हुआ, जैसे सवाल शामिल हैं।
इसके अलावा co-pilot के motive और घटना की अंतिम कानूनी तथा सुरक्षा classification भी जांच के बाद स्पष्ट होगी।
Flydubai की आगे की स्थिति
Flydubai ने यात्रियों और crew के सुरक्षित होने की जानकारी दी है और घटना की जांच में संबंधित authorities के साथ सहयोग की बात कही है। Airline ने घटना के कारणों और motive को लेकर speculation से बचने की बात कही है।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि FZ1073 को संकट की स्थिति में Saudi Arabia के Tabuk में सुरक्षित उतार लिया गया, दोनों घायल pilots को medical care मिली और passengers को replacement aircraft से आगे भेज दिया गया।
घटना की जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होना बाकी है कि cockpit में हिंसा की शुरुआत कैसे हुई, aircraft की तेज descent क्यों हुई और क्या यह सिर्फ flight deck altercation थी या इसके पीछे जानबूझकर aircraft को नुकसान पहुंचाने की कोशिश भी थी।
मुंबई के राम मंदिर पूर्व में सार्वजनिक शौचालय में दो युवकों की मौत से हड़कंप मच गया। पड़ोसी इलेक्ट्रोप्लेटिंग यूनिट से chemical fumes आने की आशंका की जांच जारी है।
मुंबई: गोरेगांव पूर्व में राम मंदिर रेलवे स्टेशन के पास शिवशंकर नगर इलाके में रविवार तड़के एक सार्वजनिक शौचालय के अंदर दो युवकों की मौत के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। दोनों युवक शौचालय के अंदर बेहोशी की हालत में मिले। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि पास में चल रही इलेक्ट्रोप्लेटिंग यूनिट से निकले chemical fumes शौचालय तक पहुंचे थे या नहीं। फिलहाल मौत का अंतिम कारण पोस्टमार्टम और जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
मृतकों की पहचान 18 वर्षीय भाविन देसाई और 24 वर्षीय प्रभाकर धनिवार के रूप में की गई है। दोनों स्थानीय गणपति मंडल से जुड़े थे। शनिवार रात वे मंडल के छह अन्य सदस्यों के साथ खाना खाने गए थे और इसके बाद कुछ समय तक साथ बैठे रहे।
करीब 2:30 बजे शौचालय गए थे दोनों युवक
जानकारी के अनुसार रात करीब 2:30 बजे भाविन देसाई और प्रभाकर धनिवार सार्वजनिक शौचालय गए। काफी समय बीतने के बाद जब दोनों वापस नहीं लौटे तो उनके साथ मौजूद युवकों को चिंता हुई। वे शौचालय के अंदर पहुंचे तो दोनों को बेहोशी की हालत में पाया।
साथियों ने दोनों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार दोनों को जोगेश्वरी पूर्व के ट्रॉमा केयर अस्पताल ले जाया गया था और करीब 3:45 से 3:49 बजे के बीच उनकी मौत की पुष्टि हुई।
शौचालय से तेज chemical smell आने की बात
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने शौचालय से तेज chemical smell आने की जानकारी दी। इसी के बाद आशंका जताई गई कि अंदर किसी chemical substance या fumes का प्रभाव हो सकता है।
हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि शौचालय के अंदर मौजूद chemical कौन-सा था, उसकी concentration कितनी थी या वह वहां तक किस रास्ते से पहुंचा। अधिकारियों की जांच का एक अहम हिस्सा इसी source की पहचान करना है।
पास की इलेक्ट्रोप्लेटिंग यूनिट पर क्यों पहुंची जांच?
पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि सार्वजनिक शौचालय के ठीक पास चल रही एक छोटी इलेक्ट्रोप्लेटिंग यूनिट में चल रही प्रक्रिया से chemical fumes निकले थे या नहीं।
वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक अब्दुल शेख के अनुसार, यूनिट में electroplating process चल रहा था और यह जांच की जा रही है कि वहां से निकले fumes सार्वजनिक शौचालय तक पहुंचे थे या नहीं। यूनिट का मालिक घटना के समय मौके पर मौजूद नहीं था और पुलिस उसकी तलाश कर रही थी।
पुलिस ने जांच का हवाला देते हुए दोनों मौतों के लिए यूनिट या उसके मालिक को जिम्मेदार नहीं ठहराया है। पुलिस की जांच यह निर्धारित करेगी कि fumes और मौतों के बीच वास्तव में कोई सीधा संबंध था या नहीं।
कौन-सा chemical था, अभी सबसे बड़ा सवाल
इस घटना में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि आखिर शौचालय के अंदर कौन-सा chemical या gas मौजूद था।
पुलिस ने बताया कि किसी specific chemical या gas का नाम सामने नहीं आया है। न ही यह सार्वजनिक रूप से स्पष्ट हुआ है कि शौचालय के अंदर की हवा में किस पदार्थ की मौजूदगी पाई गई या उसकी कितनी मात्रा थी।
BMC, Fire Brigade और MPCB की टीमें मौके पर पहुंचीं
घटना की जानकारी मिलने के बाद मुंबई फायर ब्रिगेड, मुंबई पुलिस, 108 एंबुलेंस सेवा, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल यानी MPCB और BMC के वार्ड कर्मचारियों की टीमें मौके पर पहुंचीं।
जांच में सार्वजनिक शौचालय के भीतर की स्थिति के साथ-साथ आसपास के क्षेत्र और संभावित chemical source की भी पड़ताल की जा रही है।
अब यह भी महत्वपूर्ण होगा कि मौके पर की गई जांच में क्या पाया गया, क्या किसी chemical या gas का sample लिया गया और उसकी laboratory testing से क्या सामने आता है।
घटना के बाद सिर्फ आसपास की industrial activity ही जांच का विषय नहीं है। यह भी देखा जाना जरूरी है कि सार्वजनिक शौचालय की ventilation व्यवस्था कैसी थी और वहां हवा के आने-जाने की पर्याप्त व्यवस्था थी या नहीं।
अगर बाहरी fumes किसी तरह अंदर पहुंचे थे, तो यह पता लगाना भी जरूरी होगा कि शौचालय की संरचना, ventilation, drainage या किसी अन्य रास्ते ने fumes के जमा होने में कोई भूमिका निभाई थी या नहीं।
यही वजह है कि घटना की पूरी जांच में केवल संभावित chemical source ही नहीं, बल्कि public toilet की physical condition और maintenance व्यवस्था को भी देखा जाना महत्वपूर्ण होगा।
Vanrai Police ने मामले में accidental death report दर्ज की है। पुलिस के सामने फिलहाल सबसे बड़ा काम दोनों मौतों के वास्तविक कारण और chemical exposure की संभावित भूमिका को स्थापित करना है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और आगे की जांच से स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इलेक्ट्रोप्लेटिंग यूनिट से निकलने वाले fumes वास्तव में शौचालय तक पहुंचे थे या नहीं और अगर पहुंचे थे तो उनका दोनों युवकों पर क्या प्रभाव पड़ा।
अब जांच के नतीजों पर टिकी नजर
राम मंदिर पूर्व की इस घटना में फिलहाल दो मौतें हो चुकी हैं, लेकिन chemical source और मौत के बीच संबंध अभी जांच का विषय है। किस substance के कारण खतरा पैदा हुआ, वह कहां से आया, शौचालय तक कैसे पहुंचा और क्या किसी नियम या सुरक्षा व्यवस्था का उल्लंघन हुआ था—इन सवालों के जवाब जांच के अगले चरण में सामने आने की उम्मीद है।
फिलहाल पुलिस, BMC, Fire Brigade और MPCB की जांच के साथ पोस्टमार्टम निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे। इन्हीं से यह स्पष्ट होगा कि शिवशंकर नगर के सार्वजनिक शौचालय में दोनों युवकों की मौत के पीछे वास्तविक कारण क्या था।
मुंबई Coastal Road पर बार-बार केबल चोरी से स्ट्रीट लाइट और 60-65 CCTV प्रभावित हैं। BMC ने 110 किमी केबल बदली, पुलिस के साथ नई योजना शुरू।
मुंबई: धर्मवीर स्वराज्यरक्षक छत्रपती संभाजी महाराज मुंबई किनारी रस्ता (दक्षिण) पर बार-बार हो रही पावर और CCTV केबल चोरी ने स्ट्रीट लाइटिंग और निगरानी व्यवस्था को प्रभावित कर दिया है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका के अनुसार, अलग-अलग हिस्सों में केबल चोरी और काटे जाने के कारण कई पथदिवे बंद हैं, जबकि करीब 60-65 CCTV कैमरे भी प्रभावित हुए हैं। स्थिति सुधारने के लिए नई केबल डालने का काम शुरू कर दिया गया है और मुंबई पुलिस के साथ मिलकर चोरी रोकने की नई प्रतिबंधात्मक योजना पर काम किया जा रहा है।
समस्या कितनी बड़ी है?
BMC के अनुसार, Coastal Road शुरू होने के बाद पहले स्ट्रीट लाइट के लिए तांबे यानी कॉपर के केबल से बिजली दी गई थी। कोस्टल रोड के शुरू होते ही अलग-अलग जगहों से कॉपर केबल चोरी होने लगी। इन घटनाओं के संबंध में संबंधित ठेकेदारों की ओर से पुलिस थानों में करीब 20 से 25 FIR और शिकायतें दर्ज कराई गईं।
कॉपर केबल चोरी रोकने के लिए बाद में एल्युमिनियम पावर केबल का इस्तेमाल किया गया। हालांकि, इससे भी समस्या खत्म नहीं हुई। महालक्ष्मी मंदिर, मद्रासी वाडी, मार्कडेश्वर मंदिर और वरली के कुछ हिस्सों में एल्युमिनियम केबल चोरी और काटे जाने की घटनाएं सामने आती रहीं। BMC के अनुसार, चोरी और नुकसान के बाद कुछ जगहों पर केबल दो से तीन बार तक बदली जा चुकी है।
110 किलोमीटर केबल बदली जा चुकी
बार-बार होने वाली चोरी और केबल कटिंग के बाद BMC अब तक करीब 110 किलोमीटर की दूरी के बराबर पावर केबल बदल चुकी है। इसके बावजूद कई हिस्सों में समस्या दोहराई गई। लगातार मरम्मत और पुनर्स्थापना की जरूरत पड़ने से Coastal Road की प्रकाश व्यवस्था को बनाए रखना चुनौती बन गया है।
BMC के अनुसार, मुंबई Coastal Road एक हाई-स्पीड और Access Controlled मार्ग है। ऐसे मार्ग पर रात के समय पर्याप्त रोशनी सड़क सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। मौजूदा स्थिति में वरली और महालक्ष्मी मंदिर के आसपास कुछ हिस्सों में अंधेरा दिखाई दे रहा है।
समस्या केवल स्ट्रीट लाइट तक सीमित नहीं है। CCTV नेटवर्क से जुड़ी फाइबर कम्युनिकेशन केबलों के चोरी होने या काटे जाने से करीब 60-65 कैमरे बंद हुए हैं। इससे Coastal Road के कुछ हिस्सों में निगरानी व्यवस्था प्रभावित हुई है।
उपलब्ध सिविक जानकारी में Coastal Road के दो carriageways पर 165 CCTV कैमरों का अलग विवरण भी सामने आया है। इनमें उत्तर दिशा वाले carriageway के 81 में से 18 और दक्षिण दिशा वाले carriageway के 84 में से 16 कैमरे CAT-6 केबल चोरी होने के कारण काम नहीं कर रहे थे। इस तरह इस विवरण के आधार पर 34 कैमरे प्रभावित बताए गए हैं। टनल के कैमरे काम कर रहे थे।
इससे प्रभावित CCTV की संख्या को लेकर BMC के 60-65 और 165 में से 34 वाले आंकड़ों में अंतर दिखाई देता है। सभी प्रभावित और चालू कैमरों की अद्यतन संख्या स्पष्ट नहीं है।
हालिया BMW हादसे के बाद बढ़ी सुरक्षा की चिंता
Coastal Road पर CCTV और speed monitoring की चर्चा ऐसे समय तेज हुई है, जब 20 सितंबर को Lotus Jetty के पास एक तेज रफ्तार BMW दुर्घटना में तीन लोगों की मौत हुई और एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुआ था। CCTV फुटेज में कार के सड़क की रेलिंग से टकराकर नीचे गिरने की घटना रिकॉर्ड हुई थी। पुलिस ने हादसे की परिस्थितियों की जांच शुरू की थी।
हादसे के बाद वरली के नागरिकों ने Coastal Road पर तेज रफ्तार वाहनों, रात के समय निगरानी और speed enforcement को लेकर BMC तथा ट्रैफिक पुलिस के सामने चिंता जताई। सितंबर 2024 से Coastal Road पर करीब 40,000 e-challans जारी किए जा चुके हैं और इनमें लगभग 70 प्रतिशत मामले speeding से जुड़े हैं।
Speed monitoring में भी कुछ कमियां सामने आई हैं। Coastal Road पर ANPR कैमरों की व्यवस्था में भी अंतर है और दक्षिण दिशा में लगाया गया एक ANPR कैमरा काम नहीं कर रहा था। ट्रैफिक पुलिस ने यह भी बताया है कि बहुत अधिक गति से चलने वाले वाहनों की स्पष्ट नंबर प्लेट कैप्चर करने में तकनीकी सीमाएं हैं।
अगस्त में भी हुई थी Coastal Road से केबल चोरी
Coastal Road पर केबल चोरी की समस्या नई नहीं है। अगस्त 2026 में NSCI Dome के पास स्ट्रीट लाइटों को बिजली देने वाली कॉपर केबल चोरी हुई थी। चोरी 12 अगस्त की सुबह करीब 3 से 3.15 बजे के बीच हुई थी। इस मामले में Tardeo Police ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था और एक नाबालिग को हिरासत में लिया गया था। चोरी की गई केबल की कीमत करीब 2.62 लाख रुपये बताई गई थी।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में Hussain Kadir Shaikh उर्फ Choko, Nur Mohammad Amir Khan, Aman Bilal Shaikh और Jakir Shaikh शामिल थे। नाबालिग को Juvenile Justice Board के समक्ष पेश किया गया था। पुलिस के अनुसार चोरी की गई केबल एक scrap dealer को बेची गई थी और उसे तलाशने तथा केबल बरामद करने की कोशिश की जा रही थी।
इस मामले में महत्वपूर्ण बात यह थी कि Coastal Road के maintenance से जुड़े Top Turbo Engineers Pvt Ltd के कर्मचारियों की patrol के दौरान कई स्ट्रीट लाइट बंद मिली थीं। जांच में पोलों से बिजली की केबल गायब होने की जानकारी सामने आई थी।
L&T, HCC और maintenance contractors की शिकायतें
वर्तमान स्थिति को लेकर BMC ने बताया है कि केबल चोरी की घटनाओं के संबंध में संबंधित contractors की ओर से पुलिस में करीब 20-25 FIR और शिकायतें दर्ज कराई गई हैं। इनमें Coastal Road के निर्माण और संबंधित कार्यों से जुड़े L&T और HCC तथा संचालन एवं रखरखाव से जुड़े contractors शामिल हैं।
लगातार चोरी के बाद अब BMC और मुंबई पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच बैठक हुई है। इसका उद्देश्य केवल चोरी के बाद केबल बदलना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना है।
BMC के अनुसार, चोरी हुई या क्षतिग्रस्त हुई पावर केबलों की जगह नई केबल डालने का काम शुरू है। साथ ही CCTV नेटवर्क से जुड़ी क्षतिग्रस्त और चोरी हुई केबलों को भी जल्द से जल्द बहाल करने की प्रक्रिया चल रही है।
अब सबसे बड़ी चुनौती केवल केबल बदलने की नहीं, बल्कि उसे दोबारा चोरी होने से रोकने की है। कॉपर केबल के बाद एल्युमिनियम केबल इस्तेमाल किए जाने के बावजूद चोरी और कटिंग की घटनाएं जारी रहने से यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि नई व्यवस्था में केबलों की सुरक्षा, निगरानी और पुलिस गश्त को किस तरह मजबूत किया जाएगा।
Coastal Road पर फिलहाल मुख्य लक्ष्य प्रभावित स्ट्रीट लाइट और CCTV व्यवस्था को जल्द से जल्द सामान्य करना है। इसके साथ ही BMC और पुलिस की प्रस्तावित प्रतिबंधात्मक व्यवस्था यह तय करेगी कि बार-बार केबल बदलने के बजाय इस समस्या का स्थायी समाधान कैसे किया जाए।
मुंबई FDA की बड़ी कार्रवाई में Gallops समेत 5 food establishments के लाइसेंस सस्पेंड किए गए। Malad में संदिग्ध मिलावटी घी, जबकि Kandivali के Jain Sweet & Bhelpuri House पर hygiene violations को लेकर कार्रवाई।
मुंबई: त्योहारी सीजन के बीच महाराष्ट्र Food and Drug Administration (FDA) ने मुंबई में food safety को लेकर कार्रवाई तेज कर दी है। Mahalaxmi Racecourse स्थित मशहूर Gallops Restaurant समेत पांच food establishments के लाइसेंस या registrations सस्पेंड किए गए हैं। वहीं अलग कार्रवाई में Kandivali West के Jain Sweet & Bhelpuri House पर भी food licence suspension की कार्रवाई हुई है।
इस पूरे enforcement drive में सबसे बड़ी कार्रवाई Malad East स्थित Gurukrupa Dairy Products में सामने आई, जहां FDA अधिकारियों ने refined sunflower oil, vanaspati और branded ghee को मिलाकर कथित तौर पर ‘Pooja Ghee’ तैयार किए जाने का मामला पकड़ा। कार्रवाई के दौरान करीब 2,464.05 किलो संबंधित food stock जब्त किया गया। FDA के अनुसार जब्त stock की कीमत करीब 13.55 लाख रुपये थी, जबकि machinery सहित कुल जब्ती का मूल्य करीब 15.15 लाख रुपये बताया गया है।
Gallops के kitchen में blood और ketchup-stained ice, cockroaches भी मिले
Mahalaxmi Racecourse स्थित Gallops Restaurant में FDA inspection के दौरान refrigerator में रखी ice पर non-vegetarian food से जुड़े blood और ketchup के stains पाए गए। इसके अलावा raw material को torn और damaged packaging में रखने की बात सामने आई।
Inspection में kitchen में grease accumulation, खराब हालत वाली दीवारें, drainage points की inadequate covering, cockroach traps की खराब स्थिति, पानी जमा होना तथा live cockroaches और ants की मौजूदगी दर्ज की गई।
FDA के अनुसार food handlers के annual medical examination और vaccination से संबंधित जरूरी records भी उपलब्ध नहीं थे। इन food-safety और hygiene violations के आधार पर Gallops का food licence suspend किया गया। Restaurant की ओर से कहा गया कि food-safety requirements पूरी करने के लिए operations को अस्थायी रूप से रोका गया है।
Malad East स्थित Gurukrupa Dairy Products में FDA अधिकारियों ने refined sunflower oil, vanaspati यानी hydrogenated fat और branded ghee को दो boilers में मिलाए जाने का मामला पकड़ा।
FDA के अनुसार इस मिश्रण से white और yellow ghee तैयार किया जा रहा था और इसे ‘Pooja Ghee’ के नाम से बेचने की व्यवस्था थी। अधिकारियों ने labelling को भी misleading बताया है।
Inspection के दौरान परिसर में rats और cockroaches की मौजूदगी की जानकारी भी सामने आई।
कार्रवाई में करीब 2,464.05 किलो adulterated और misleadingly labelled ghee, refined sunflower oil और vanaspati जब्त किए गए। इनकी कीमत करीब ₹13.55 लाख बताई गई है। इसके अलावा दो boilers और एक khoya-making machine भी जब्त की गई, जिनकी कीमत करीब ₹1.60 लाख बताई गई। इस तरह stock और equipment की कुल कीमत करीब ₹15.15 लाख तक पहुंचती है।
Kandivali West के Jain Sweet & Bhelpuri House पर भी FDA कार्रवाई
FDA की इसी enforcement कार्रवाई में Kandivali West रेलवे स्टेशन के पास Madhu Kunj, V.L. Road स्थित Jain Sweet & Bhelpuri House का food licence भी suspend किया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई hygiene violations को लेकर हुई थी। Jain Sweet & Bhelpuri House को उन food establishments में शामिल किया गया है जिनके licences FDA ने हालिया inspection drive के दौरान suspend किए।
Gufran Seekh Corner बिना valid food licence के मिला
Andheri West के Versova-Yari Road स्थित Gufran Seekh Corner में FDA अधिकारियों को valid food licence या registration नहीं मिला।
Inspection के दौरान food storage और segregation, premises और equipment की cleanliness, pest control तथा potable water testing से संबंधित कमियां भी सामने आईं। Food handlers के medical examination records से संबंधित deficiencies भी बताई गईं।
22 सितंबर को FDA ने binding order जारी कर establishment को तत्काल business बंद करने का निर्देश दिया। यह तब तक जारी रहेगा जब तक valid licence या registration प्राप्त नहीं किया जाता और बताई गई deficiencies को दूर नहीं किया जाता।
Bandra के Dreamer Hospitality और Mirari पर भी कार्रवाई
Bandra West के Bandstand इलाके में स्थित Dreamer Hospitality Pvt Ltd के inspection में hygiene और health-related provisions के उल्लंघन पाए गए। इसके बाद licence suspension और आगे की legal action की प्रक्रिया शुरू की गई।
इसी तरह St Dominic Road, Bandra West स्थित Mirari में भी hygiene और health से संबंधित violations सामने आने के बाद regulatory action लिया गया।
इस FDA की प्रमुख ताजा कार्रवाई में मुंबई के पांच establishments — Gallops, Gurukrupa Dairy Products, Gufran Seekh Corner, Dreamer Hospitality Pvt Ltd और Mirari — शामिल रहे।
सिर्फ restaurants नहीं, food supply chain भी FDA के निशाने पर
मुंबई FDA की हालिया कार्रवाई से यह भी सामने आता है कि food safety inspection केवल restaurants तक सीमित नहीं है।
एक तरफ Gallops जैसे restaurant में kitchen hygiene, food storage और pest control की जांच हुई, तो दूसरी तरफ Gurukrupa Dairy Products में food manufacturing और product composition की जांच सामने आई। Gufran Seekh Corner में licensing compliance भी कार्रवाई का आधार बना।
इसके अलावा हालिया अलग कार्रवाई में Kandivali East के एक Amazon-linked warehouse और अन्य food establishments पर भी sanitation, drainage, segregation और storage से जुड़ी कमियों को लेकर licence suspension किया गया।
घी में vegetable oil या vanaspati की मिलावट क्यों गंभीर है?
FSSAI के notified standards के अनुसार ghee milk fat आधारित regulated food product है। ऐसे में refined vegetable oil या vanaspati की मिलावट केवल ingredient बदलने का मामला नहीं है, बल्कि product की composition और labelling से भी जुड़ सकता है।
हालांकि किसी product को केवल रंग, खुशबू, जमने या घरेलू test के आधार पर असली या मिलावटी घोषित नहीं किया जा सकता। अंतिम निष्कर्ष के लिए निर्धारित laboratory testing और regulatory assessment जरूरी होता है।
महाराष्ट्र में FDA ने पिछले महीनों में food safety enforcement को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया है। खबर के अनुसार जून से अगस्त 2026 के दौरान राज्य में 12,083 food establishments की inspections की गईं। इस दौरान 5,269 improvement notices जारी किए गए और 603 food licences suspend किए गए।
इसी enforcement period में food products की करीब ₹67.20 करोड़ की जब्ती, 655 FIR और 875 गिरफ्तारियों** की जानकारी भी सामने आई है।
त्योहारी सीजन में ghee, khoya, sweets, oil, jaggery और अन्य food products की मांग बढ़ने के बीच FDA की निगरानी और enforcement का दायरा भी बढ़ाया गया है।
त्योहारी सीजन में consumers कैसे रहें सावधान?
खाद्य पदार्थ खरीदते समय consumers को packaged product का label ध्यान से पढ़ना चाहिए। खासकर manufacturer details, FSSAI licence/registration details, manufacturing date, expiry/best-before information और ingredients की जानकारी देखना जरूरी है।
Dairy products, ghee, sweets और अन्य खुले खाद्य पदार्थ खरीदते समय साफ-सफाई और storage conditions पर भी ध्यान दिया जा सकता है। हालांकि किसी दुकान की बाहरी cleanliness देखकर किसी food product की authenticity की अंतिम पुष्टि नहीं की जा सकती।
Food product की quality या safety को लेकर गंभीर शिकायत होने पर संबंधित food-safety authority के पास शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। FDA की ओर से food-quality complaints के लिए toll-free number 1800222365 और Food & Drug Grievance Portal की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
आगे क्या होगा?
Gallops समेत licence suspension की कार्रवाई झेल रहे establishments को संबंधित food-safety deficiencies को दूर करना होगा। Gufran Seekh Corner के मामले में valid food licence या registration हासिल करने और deficiencies दूर करने तक closure order लागू है।
Gurukrupa Dairy Products से जब्त stock और machinery के मामले में आगे regulatory और कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। वहीं Kandivali West के Jain Sweet & Bhelpuri House समेत अन्य establishments पर हुई कार्रवाई में संबंधित hygiene deficiencies को दूर करने के बाद regulatory process आगे बढ़ेगा।
FDA Commissioner Tukaram Mundhe ने food safety से समझौता नहीं करने और expired, tampered या unhygienically prepared food के खिलाफ कार्रवाई जारी रखने की बात कही है।
नोट: इस रिपोर्ट में “नकली घी” शब्द FDA और मीडिया रिपोर्टों में इस्तेमाल किए गए आरोप/विवरण के संदर्भ में है। Malad में जब्त stock की अंतिम प्रकृति और composition का निर्धारण संबंधित regulatory/laboratory प्रक्रिया से होगा।
कांजुरमार्ग में 13वीं मंजिल से 200 किलो की लोहे की बीम पुलिस कार्यालय के सामने गिरी। पहले भी निर्माण सामग्री गिरने की शिकायत थी, 4 पर केस दर्ज।
मुंबई: कांजुरमार्ग में निर्माणाधीन इमारत की 13वीं मंजिल से करीब 200 किलो वजनी लोहे की बीम गिरने की घटना के बाद निर्माण स्थल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बीम सीधे कांजुरमार्ग पुलिस स्टेशन के एक्सटर्नमेंट विभाग के कार्यालय के प्रवेश द्वार के सामने गिरी। घटना में किसी व्यक्ति के घायल होने की जानकारी नहीं है, लेकिन कार्यालय की टिन की छत और पास का पेड़ क्षतिग्रस्त हुआ है। पुलिस ने मामले में ठेकेदार समेत चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है।
यह घटना 18 सितंबर की दोपहर की है। एक्सटर्नमेंट विभाग में तैनात सहायक पुलिस उपनिरीक्षक (ASI) विश्वास दशरथ देसाई उस समय कार्यालय में कंप्यूटर पर काम कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें तेज आवाज सुनाई दी। बाहर निकलने पर कार्यालय के प्रवेश द्वार के सामने भारी लोहे की बीम पड़ी मिली। बीम नीचे आने से पहले एक पेड़ और कार्यालय की टिन की छत से टकराई थी।
200 किलो की बीम के गिरने से पहले भी सामने आई थी समस्या
इस घटना को गंभीर बनाने वाली सबसे अहम बात यह है कि निर्माण स्थल से निर्माण सामग्री गिरने की शिकायत पहले भी सामने आई थी। पुलिस के अनुसार, इससे पहले भी पत्थर, गिट्टी और लोहे की रॉड आसपास गिर चुकी थीं। निर्माण स्थल के ठेकेदार को इस संबंध में पहले भी चेतावनी दी जा चुकी है।
ऐसे में अब जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पहले की शिकायतों और चेतावनी के बाद साइट पर सुरक्षा व्यवस्था में क्या बदलाव किए गए थे। यह भी जांच का विषय है कि इतनी भारी बीम 13वीं मंजिल से नीचे गिरने की स्थिति तक कैसे पहुंची और उस समय उसे सुरक्षित रखने के लिए क्या इंतजाम मौजूद थे।
ठेकेदार, इंजीनियर और दो सेफ्टी सुपरवाइजर पर केस
पुलिस ने KAMS Realtor से जुड़े साइट ठेकेदार मितेश जैन, साइट इंजीनियर धनराज रामचंद्र जगताप और सेफ्टी सुपरवाइजर विक्रम तथा सोहेल मिर्जा के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि निर्माण स्थल पर लोगों की जान और व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने से रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं किए गए। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।
पुलिस ने घटना के बाद निर्माण स्थल पर मौजूद कर्मचारियों से भी पूछताछ की। मौके पर मौजूद कर्मचारियों से मिली जानकारी के आधार पर बीम के निर्माण स्थल से गिरने की पुष्टि की गई। हालांकि बीम के गिरने की वास्तविक तकनीकी वजह क्या थी, इसकी जांच अभी जारी है।
जिस प्रोजेक्ट की 13वीं मंजिल से बीम गिरी, उसका RERA रिकॉर्ड
सार्वजनिक रियल एस्टेट रिकॉर्ड में KAMS Realtors का Kams Krystel प्रोजेक्ट कांजुरमार्ग ईस्ट के Purshotam Godbole Road पर दर्ज है और इसका MahaRERA registration number P51800051412 है। परियोजना अभी निर्माणाधीन दर्ज है और इसके लिए 31 दिसंबर 2026 की completion date दर्ज है। RERA-derived रिकॉर्ड में प्रोजेक्ट के लिए Ground + 24 Floor संरचना दर्ज है।
रिकॉर्ड यह भी दिखाते हैं कि इस प्रोजेक्ट से संबंधित MahaRERA में CC12501288 नंबर की एक शिकायत 17 अप्रैल 2025 को दर्ज हुई थी और वह disposed/order approved स्थिति में दिखाई देती है। हालांकि उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड से यह स्थापित नहीं होता कि वह शिकायत निर्माण स्थल की सुरक्षा से संबंधित थी।
हादसे में किसी की जान नहीं गई, लेकिन खतरा गंभीर था
घटना के समय कार्यालय में कर्मचारी मौजूद थे और बीम कार्यालय के प्रवेश द्वार के ठीक सामने आकर गिरी। बीम का पेड़ और कार्यालय की छत से टकराना इस बात को महत्वपूर्ण बनाता है कि निर्माण स्थल से गिरने वाली सामग्री का जोखिम केवल वहां काम कर रहे मजदूरों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आसपास मौजूद कार्यालयों और लोगों तक भी पहुंच सकता है। इस मामले में किसी के घायल नहीं होने की पुष्टि है, जबकि कार्यालय की टिन की छत को नुकसान पहुंचा है।
मुंबई में निर्माण स्थलों से गिरने वाली भारी सामग्री को लेकर हाल के दिनों में अलग-अलग घटनाएं भी सामने आई हैं। ऐसे मामलों में site barricading, material handling, ऊंचाई पर सामग्री की सुरक्षित व्यवस्था और आसपास के सार्वजनिक क्षेत्र को सुरक्षित रखने के उपाय जांच के महत्वपूर्ण हिस्से बनते हैं।
अब जांच में इन सवालों के जवाब अहम
कांजुरमार्ग की इस घटना में पुलिस जांच के सामने अब केवल यह सवाल नहीं है कि बीम कैसे गिरी। यह भी महत्वपूर्ण होगा कि पहले निर्माण सामग्री गिरने की शिकायतें कब-कब हुईं, ठेकेदार को किस तरह की चेतावनी दी गई, उसके बाद क्या सुरक्षा उपाय किए गए और घटना के समय साइट पर भारी सामग्री को संभालने की व्यवस्था क्या थी।
फिलहाल पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। बीम गिरने की तकनीकी वजह, साइट पर सुरक्षा व्यवस्था और पहले की शिकायतों के बाद उठाए गए कदमों से जुड़े तथ्य जांच आगे बढ़ने के साथ स्पष्ट होने की उम्मीद है।
बिहार के जमुई में 19 सितंबर को 10वीं के नाबालिग छात्र-छात्रा को रोककर बदसलूकी का वीडियो वायरल हुआ। POCSO में FIR, 3 गिरफ्तार।
बिहार: जमुई में 10वीं कक्षा के नाबालिग छात्र और छात्रा को रास्ते में रोककर कथित तौर पर बदसलूकी करने का मामला सामने आया है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। अब तक 7 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज होने और 3 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। मामले में POCSO Act और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है।
घटना 19 सितंबर की शाम करीब 6 से 7 बजे के बीच की बताई जा रही है। दोनों नाबालिग जमुई शहर के रहने वाले और 10वीं कक्षा के छात्र हैं। जानकारी के अनुसार, दोनों कोचिंग से लौटने के दौरान स्कूटी से मड़वा पहाड़ की तरफ गए थे। वापस लौटते समय जमुई सदर थाना क्षेत्र में युवकों के एक समूह ने उन्हें रास्ते में रोक लिया।
वायरल वीडियो में दोनों नाबालिगों को कई लोगों से घिरा हुआ देखा जा सकता है। छात्र और छात्रा लोगों से उन्हें जाने देने की गुहार लगाते दिखाई देते हैं। वीडियो में छात्र के साथ खींचतान और मारपीट तथा छात्रा के साथ कथित तौर पर अनुचित शारीरिक व्यवहार दिखाई देता है। एक अन्य दृश्य में एक व्यक्ति छात्रा को पकड़कर कुछ दूरी तक ले जाने की कोशिश करता दिखाई देता है।
वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया। जमुई के पुलिस अधीक्षक विश्वजीत दयाल के नेतृत्व में जांच आगे बढ़ी और दोनों नाबालिगों की पहचान कर उनके बयान लिए गए। पुलिस ने वीडियो में दिखाई देने वाले लोगों की पहचान की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई। जांच में 6 से 7 युवकों के शामिल होने की बात सामने आई है।
प्रशासन ने क्या कहा ?
जमुई के जिलाधिकारी नवीन ने कहा है कि घटना 19 सितंबर की शाम जमुई सदर थाना क्षेत्र की है। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने स्वतः संज्ञान लिया, दोनों नाबालिगों से जानकारी ली गई और प्राथमिकी दर्ज की गई। प्रशासन ने नाबालिगों की निजता बनाए रखते हुए दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का भरोसा दिया है।
पॉक्सो कानून के तहत मामला दर्ज
मामले में सात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है और अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी है। पुलिस बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई कर रही है। जांच में POCSO Act के साथ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराएं भी लगाई गई हैं। पुलिस ने पीड़ितों के बयान भी दर्ज किए हैं।
इस मामले की जांच में जमुई के एसपी विश्वजीत दयाल के साथ DIG राकेश कुमार भी निगरानी कर रहे हैं। पुलिस का फोकस वीडियो में दिखाई देने वाले सभी लोगों की भूमिका तय करने और बाकी आरोपियों तक पहुंचने पर है।
राहुल गांधी ने उठाए सवाल
मामले को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी बिहार सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि जमुई का वीडियो बेहद परेशान करने वाला है। राहुल गांधी ने घटना में शामिल लोगों की पहचान कर POCSO के तहत कार्रवाई और जल्द सजा की मांग की। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि घटना 19 सितंबर की है तो आरोपी अब तक सलाखों के पीछे क्यों नहीं हैं और शाम के समय बिहार की सड़कों पर लड़कियों की सुरक्षा को लेकर सरकार जवाब दे।
हालांकि अब तक सामने आए पुलिस अपडेट के अनुसार कार्रवाई शुरू हो चुकी है और तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी और उनकी भूमिका की जांच जारी है।
नाबालिग पीड़ितों की पहचान कानूनन संरक्षित है। इसलिए उनकी पहचान, चेहरा, स्कूल, पता या ऐसी कोई जानकारी प्रकाशित नहीं की जानी चाहिए जिससे उनकी पहचान सार्वजनिक हो सके। मामले में आगे की कार्रवाई पुलिस जांच और अदालत की प्रक्रिया के आधार पर तय होगी।