Category: Public Safety

Read the latest public safety news, alerts and special reports from India and around the world. Stay informed with updates on law and order, emergency services, road safety, disasters, fire incidents, health advisories, public security and community welfare, only on Indian FastTrack.

  • मुंबई में दूध को गर्म करने पर रबर जैसी चीज बनने का दावा; FDA से जांच की मांग

    मुंबई में दूध को गर्म करने पर रबर जैसी चीज बनने का दावा; FDA से जांच की मांग

    गोरेगांव वेस्ट में Shree Modern Dairy के दूध को गर्म करने पर रबर जैसी सख्त चीज बनने की शिकायत हुई है। FDA से सैंपल टेस्ट की मांग की गई है। पूरी खबर जानें।

    मुंबई: गोरेगांव वेस्ट के S.V. Road स्थित Shree Modern Dairy से खरीदे गए दूध को लेकर एक consumer ने गंभीर शिकायत की है। शिकायतकर्ता के मुताबिक, यह दूध Shop No. 2, 7/2, Geet Govind Building, Jawahar Nagar, Opposite Cinemax Theatre, Swami Vivekanand Road, Goregaon West, Mumbai-400104 स्थित डेयरी से खरीदा गया था। घर लाकर दूध गर्म करने के बाद उसमें कुछ हिस्सा रबर जैसी सख्त स्थिति में बदलने का दावा किया गया है। मामले की शिकायत Food and Drug Administration (FDA) और मुंबई महानगरपालिका के P/South विभाग के Medical Officer of Health (MOH) के पास करने की बात कही गई है।

    शिकायतकर्ता के मुताबिक, दूध खरीदने के बाद उसे घर लाकर सामान्य तरीके से गर्म किया गया था। गर्म करने के दौरान दूध में असामान्य बदलाव दिखाई दिया और उसके कुछ घटक रबर जैसी कठोर स्थिति में आ गए। इसके बाद इस मामले की जानकारी Shree Modern Dairy को दी गई।

    इसके बाद डेयरी का एक कर्मचारी शिकायतकर्ता के घर पहुंचा और वहां खराब हुए दूध को प्रत्यक्ष देखा। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस पूरी मुलाकात का video उसके पास सुरक्षित है। इसके अलावा दूध की photographs, packet और बचा हुआ milk sample भी सुरक्षित रखा गया है।

    यही वजह है कि अब मामला सिर्फ consumer complaint तक सीमित नहीं है। शिकायतकर्ता चाहता है कि मौजूद sample को official तरीके से जांच के लिए लिया जाए और laboratory report के जरिए पता लगाया जाए कि आखिर दूध में ऐसा बदलाव क्यों आया।

    असली सवाल: दूध में ऐसा बदलाव आखिर क्यों हुआ?

    दूध गर्म करने के बाद रबर जैसी सख्त चीज दिखाई देने का मतलब अपने-आप यह साबित नहीं करता कि उसमें रबर या plastic मिलाया गया था। बिना laboratory testing के किसी मिलावट या chemical की मौजूदगी का दावा करना जल्दबाजी होगी।

    दूध की quality पर असर storage, temperature control, contamination, microbial activity, processing या दूसरे कारणों से भी पड़ सकता है। इस मामले में सही कारण तभी सामने आएगा जब sample की scientific जांच होगी।

    इसीलिए complaint में FDA से दूध का sample लेकर उसकी quality और safety की जांच करने की मांग की गई है।

    अब FDA की जांच में किन बातों पर नजर होनी चाहिए?

    इस मामले में सबसे अहम चीज milk sample है। अगर sample official जांच के लिए लिया जाता है तो उसकी laboratory examination से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि दूध applicable food-safety standards के मुताबिक था या नहीं।

    जांच के दौरान दूध की composition, microbiological safety, possible adulteration और दूसरे applicable safety parameters जैसे पहलुओं को देखा जा सकता है। इसके साथ storage और handling conditions की भी जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।

    यानी सवाल सिर्फ यह नहीं है कि दूध गर्म करने के बाद कैसा दिखा, बल्कि यह भी पता करना जरूरी है कि वह consumer तक पहुंचने से पहले किस तरह store और handle हुआ था।

    दूध दुकान से घर तक कैसे पहुंचा, यह भी अहम सवाल

    Milk quality की जांच में उसकी पूरी journey महत्वपूर्ण हो सकती है। दूध खरीदते समय वह chilled था या नहीं, घर पहुंचने में कितना समय लगा, खरीदने के बाद उसे किस temperature पर रखा गया और कितनी देर बाद boil किया गया—ये details investigation में मदद कर सकती हैं।

    प्राप्त वीडियो से मिली जानकारी के मुताबिक दूध dairy की तरफ से अलग प्लास्टिक की pouch में भरकर दिया गया था तो source, filling और packaging process की भी जांच की जरूरत हो सकती है।

    Plastic pouch को लेकर भी उठ रहा सवाल

    शिकायतकर्ता ने एक और point उठाया है। उसका कहना है कि dairy की मशीन पर “प्लास्टिक पिशवी मागू नका” लिखा हुआ है, जबकि दूध plastic bags में दिया जा रहा है।

    हालांकि सिर्फ plastic pouch में दूध मिलना अपने-आप में illegal होने का सबूत नहीं है। Milk packaging के लिए food-grade plastic pouches का इस्तेमाल कई परिस्थितियों में किया जाता है।

    इसलिए यहां असली सवाल यह है कि इस्तेमाल की जा रही pouch food-grade है या नहीं और क्या वह लागू packaging तथा plastic-waste rules के मुताबिक है।

    मशीन पर लिखे message और इस्तेमाल हो रही milk pouch के बीच क्या संबंध है, यह भी मौके की जांच के बाद ही साफ हो सकता है।

    Goregaon में पहले भी सामने आ चुका है milk safety का बड़ा मामला

    इस complaint के बीच Goregaon West में सामने आया हालिया milk-tampering case भी लोगों का ध्यान खींच रहा है। 15 जुलाई 2026 को Mumbai Crime Branch Unit 11 और FDA की joint कार्रवाई में branded milk pouches के साथ कथित छेड़छाड़ का मामला सामने आया था।

    उस कार्रवाई में 558 litres दूध और 822 milk pouches जब्त कर नष्ट किए गए थे। पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने original milk pouches को खोलकर उसमें contaminated water मिलाया और उन्हें दोबारा seal करके बेचने का कथित तरीका अपनाया था।

    इस मामले में Krishna Venkayya Lingampally और Ravi Kanahya Patipaka को गिरफ्तार किया गया था। कार्रवाई Mumbai Police Commissioner Deven Bharti और Joint Commissioner of Police (Crime) Anil Kumbhare की supervision में हुई थी, जबकि Assistant Police Inspector Bansode ने आगे की जांच संभाली थी।

    यह पुराना मामला और Shree Modern Dairy से जुड़ी मौजूदा consumer complaint अलग-अलग घटनाएं हैं। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर दोनों के बीच कोई connection सामने नहीं आया है।

    इस शिकायत में consumer के पास क्या evidence है?

    शिकायतकर्ता के मुताबिक उसके पास:

    • खराब हुए दूध का sample
    • दूध का packet
    • दूध की photographs
    • डेयरी कर्मचारी के घर आने का video
    • डेयरी कर्मचारी द्वारा खराब दूध को प्रत्यक्ष देखने की जानकारी

    मौजूद है।

    ऐसे evidence की वजह से laboratory testing और official inspection से मामले की स्थिति ज्यादा साफ हो सकती है।

    FDA और BMC से क्या कार्रवाई की मांग?

    शिकायतकर्ता ने FDA और BMC P/South विभाग से मांग की है कि मामले की तत्काल जांच की जाए।

    उसकी प्रमुख मांगों में दूध का sample official custody में लेकर laboratory testing कराना, दूध की quality और safety verify करना, संबंधित dairy premises का inspection करना और अगर कोई food-safety violation सामने आता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई करना शामिल है।

    इसके साथ यह भी देखा जाना जरूरी है कि संबंधित dairy का food business registration/licence, milk handling process, storage व्यवस्था और packaging व्यवस्था applicable rules के मुताबिक है या नहीं।

    अगर आपके घर में भी दूध गर्म करने पर ऐसा बदलाव दिखे तो क्या करें?

    ऐसी स्थिति में सबसे पहले उस दूध को consume करने से बचना चाहिए। दूध या packet को तुरंत फेंकने के बजाय उसे सुरक्षित रखना ज्यादा useful हो सकता है।

    Packet की clear photographs लें और उस पर लिखे batch number, packing date, use-by date, MRP और manufacturer की details record करें। अगर purchase bill या digital payment proof है तो उसे भी संभालकर रखें।

    दूध गर्म करने से पहले और बाद में जो बदलाव दिखाई दिया हो, उसका photo या video भी evidence के तौर पर रखा जा सकता है। इसके बाद seller या dairy को complaint करने के साथ food-safety authority के पास शिकायत की जा सकती है।

    अब सबसे बड़ा इंतजार laboratory report का

    फिलहाल इस complaint के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि दूध में रबर, plastic या कोई खास chemical मिला हुआ था। शिकायत में दिखाई गई असामान्य स्थिति की पुष्टि laboratory testing से ही हो सकती है।

    अगर official sample की जांच होती है तो report यह समझने में अहम होगी कि दूध वास्तव में substandard, unsafe या adulterated था या फिर बदलाव के पीछे कोई दूसरा कारण था।

    इसलिए अब पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है—Shree Modern Dairy से खरीदे गए इस दूध के sample की जांच में आखिर क्या सामने आता है?

    Indian FastTrack इस मामले में FDA, BMC P/South और Shree Modern Dairy की आधिकारिक प्रतिक्रिया मिलने पर खबर को update करेगा।

  • Drunk Driving पर अब सिर्फ Challan नहीं? गिरफ्तारी और गाड़ी पर Action, जानें पूरा Rule

    Drunk Driving पर अब सिर्फ Challan नहीं? गिरफ्तारी और गाड़ी पर Action, जानें पूरा Rule

    राज्य में Drunk Driving पर सख्ती बढ़ा दी गई है। जानिए arrest, challan, vehicle seizure, Breath Analyser, Section 185 और पहली-दूसरी बार की सजा का पूरा मामला।

    उत्तर प्रदेश: drunk driving करने वालों के खिलाफ अब enforcement और सख्त होने जा रही है। सड़क पर शराब पीकर वाहन चलाते पकड़े गए तो मामला सिर्फ challan तक सीमित नहीं रहेगा। पुलिस की कार्रवाई में गिरफ्तारी, medical जांच और vehicle को लेकर भी आगे की कार्रवाई हो सकती है।

    लेकिन यहां एक बात सबसे पहले समझना जरूरी है। इसका मतलब यह नहीं है कि पूरे देश में drunk driving का challan बंद कर दिया गया है या हर मामले में पकड़े गए व्यक्ति को सीधे जेल भेज दिया जाएगा। यह सख्ती फिलहाल उत्तर प्रदेश में चल रहे enforcement अभियान और वहां दिए गए निर्देशों से जुड़ी है।

    UP में आखिर नया क्या हुआ?

    उत्तर प्रदेश पुलिस ने drunk driving के खिलाफ मई 2026 में statewide special drive शुरू की। 9 और 10 मई को राज्य के 135 toll plazas पर 69,683 वाहनों की checking की गई और 2,654 motorists के खिलाफ drunk driving की कार्रवाई हुई। इस दौरान करीब ₹2.65 करोड़ के traffic fines लगाए गए। अभियान DGP Rajeev Krishna के direction में चलाया गया था।

    इसके बाद 16 और 17 मई को enforcement को और बड़ा किया गया। इन दो दिनों में 2,52,122 vehicles check किए गए और 5,143 drunk-driving cases में कार्रवाई हुई। पूरे मई अभियान में 9, 10, 16 और 17 मई को कार्रवाई की गई और करीब ₹7.7 करोड़ के fines लगाए गए। इस drive की supervision ADG Traffic A Satish Ganesh कर रहे थे।

    यानी अभी भी challan हो रहा है। फर्क यह है कि police drunk driving को सिर्फ पैसे के fine से निपटाने के बजाय कानून में मौजूद arrest और आगे की कार्रवाई वाली powers को ज्यादा सख्ती से लागू करने पर जोर दे रही है।

    शराब पीकर गाड़ी चलाते पकड़े गए तो सबसे पहले क्या होगा?

    Checking के दौरान police को driver पर शराब के नशे में वाहन चलाने का शक होता है तो breath analyser से जांच की जा सकती है। Motor Vehicles Act में drunken driving के लिए Section 185 लागू होता है।

    कानून के मुताबिक 30 mg alcohol per 100 ml blood से ज्यादा alcohol पाए जाने पर Section 185 के तहत मामला बन सकता है।

    यहीं से मामला सामान्य traffic challan से आगे जा सकता है।

    Police circumstances के अनुसार driver को arrest कर सकती है और उसके बाद medical examination की प्रक्रिया भी हो सकती है। Motor Vehicles Act की Section 202 police को Section 185 जैसे offences में बिना warrant arrest की power देती है।

    Breath Analyser test से मना किया तो?

    यह भी बहुत लोगों के लिए important सवाल है।

    Motor Vehicles Act की Section 203 police को breath test लेने की power देती है। अगर किसी driver पर शराब पीकर वाहन चलाने का reasonable suspicion है तो उससे breath specimen मांगा जा सकता है।

    Test के दौरान alcohol की presence सामने आने पर मामला आगे बढ़ सकता है। Breath test से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया का पालन करना भी जरूरी है, इसलिए checking के समय test देने से सिर्फ इस उम्मीद में मना करना कि मामला खत्म हो जाएगा, सही तरीका नहीं है।

    क्या पकड़े जाते ही सीधे जेल भेज दिया जाएगा?

    नहीं, arrest और jail की punishment को एक ही चीज समझना सही नहीं होगा।

    Police किसी व्यक्ति को कानून के तहत arrest कर सकती है, लेकिन final punishment judicial process के बाद तय होती है। Section 185 के तहत पहली बार offence साबित होने पर ₹10,000 तक fine या छह महीने तक imprisonment या दोनों हो सकते हैं।

    अगर वही व्यक्ति दोबारा drunken driving offence में पकड़ा जाता है तो punishment बढ़ सकती है। Repeat offence में ₹15,000 तक fine या दो साल तक imprisonment या दोनों का provision है।

    इसलिए “drunk driving में पकड़े गए तो सीधे छह महीने जेल” कहना सही नहीं होगा। आगे की कार्रवाई मामले और court process पर depend करेगी।

    क्या गाड़ी भी जब्त होगी?

    यहीं पर सबसे ज्यादा confusion है।

    Drunk driving के मामले में police vehicle को अपने कब्जे में लेने या उसके temporary disposal के लिए जरूरी कदम उठा सकती है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर car या bike हमेशा के लिए confiscate हो जाएगी।

    Vehicle को लेकर actual action case की circumstances और applicable legal procedure पर depend करेगा। इसलिए “गाड़ी पकड़ी तो हमेशा के लिए जब्त” जैसी बात को automatic rule समझना सही नहीं है।

    यह distinction इसलिए भी जरूरी है क्योंकि vehicle seizure और permanent confiscation अलग legal actions हैं।

    क्या यह नया कानून पूरे India में लागू हो गया?

    नहीं।

    Motor Vehicles Act में drunken driving के खिलाफ पहले से ही strict provisions मौजूद हैं। Section 185 offence और punishment बताता है, जबकि Section 202 और Section 203 police की arrest और breath-test powers से जुड़े हैं।

    अभी सामने आया मामला उत्तर प्रदेश में enforcement को ज्यादा सख्त करने से जुड़ा है। इसलिए इसे “पूरे India में अब challan बंद और direct arrest” वाला नया national law समझना सही नहीं होगा।

    UP Police इतनी सख्ती क्यों कर रही है?

    उत्तर प्रदेश Police के road-safety programme में drunken driving को accident prevention के बड़े focus areas में रखा गया है।

    DGP Rajeev Krishna के Zero Fatality District approach के तहत accident-prone locations पर Critical Corridor teams deploy की गई हैं। इन teams को breath analysers, speed laser guns और दूसरे enforcement equipment दिए गए हैं। Police के मुताबिक 2026 की पहली तिमाही में राज्य में पिछले साल की तुलना में road accidents में 7.43% और fatalities में 11.55% की कमी दर्ज हुई।

    यानी drunk driving पर action किसी एक रात की checking तक सीमित नहीं है। इसे wider road-safety enforcement का हिस्सा बनाया गया है।

    Drunk Driving से जुड़े आंकड़े क्या कहते हैं?

    उत्तर प्रदेश Police के आंकड़ों के अनुसार राज्य में total road accidents में drunken driving का हिस्सा 2023 में 8.61%, 2024 में 6.05% और 2025 में 3.51% रहा।

    इसके बावजूद police ने enforcement बढ़ाया है, क्योंकि सड़क पर नशे में driving एक ऐसा risk factor है जिसे driver की behaviour change और strict checking से सीधे target किया जा सकता है।

    देशभर के 2023 road-accident data में 4,80,583 road accidents और 1,72,890 deaths दर्ज हुई थीं। इनमें drunken driving या alcohol/drugs से जुड़े 9,143 accidents और 3,674 deaths दर्ज की गईं। हालांकि road accidents का सबसे बड़ा कारण overspeeding था, इसलिए drunk driving को देश में सबसे बड़ा accident factor बताना सही नहीं होगा।

    क्या सिर्फ UP में ही ऐसी सख्ती हो रही है?

    ऐसा नहीं है।

    Pune में 2026 के Holi enforcement के दौरान 676 motorists drunk driving में पकड़े गए और 250 से ज्यादा vehicles seize किए गए। Pune Police ने repeat drunk-driving offenders के vehicles पर भी सख्त action की बात कही थी।

    Gurugram में भी drunk driving के मामलों में सिर्फ traffic challan तक सीमित न रहने और जरूरत पड़ने पर FIR की कार्रवाई की बात सामने आई।

    दूसरे शहरों में भी weekend और festival periods में breath-analyser checking बढ़ाई जा रही है। Coimbatore में एक सप्ताह के दौरान 855 drunk-driving cases दर्ज हुए, जबकि Nagpur में पांच दिन की drive में 122 cases सामने आए।

    इससे साफ है कि अलग-अलग राज्यों और शहरों में enforcement का तरीका अलग हो सकता है, लेकिन drunk driving के खिलाफ checking और punishment को ज्यादा serious बनाया जा रहा है।

    अगर शराब पी है तो driver क्या करे?

    सबसे आसान जवाब है—drive न करें।

    अगर शराब पी है तो cab, taxi या किसी sober driver का इस्तेमाल करना सबसे सुरक्षित option है। “थोड़ी ही पी है”, “मैं आराम से चला लूंगा” या “घर पास में है” जैसी सोच accident का risk खत्म नहीं करती।

    Alcohol reaction time, judgement और vehicle control को प्रभावित कर सकता है। इसी वजह से road-safety authorities drunk driving को रोकने के लिए checking, breath testing और strict enforcement पर जोर देती हैं।

    इस सख्ती का आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?

    अगर enforcement लगातार और transparent तरीके से होता है तो इसका सबसे बड़ा असर driver behaviour पर पड़ सकता है। लोगों में यह डर बढ़ेगा कि शराब पीकर vehicle चलाना केवल fine देकर खत्म होने वाला traffic violation नहीं है।

    Weekend nights, festivals और late-night gatherings के बाद drunk driving पर checking बढ़ने से cab या designated-driver culture को भी बढ़ावा मिल सकता है।

    लेकिन enforcement के साथ proper procedure भी उतना ही जरूरी है। Breath test, medical examination, arrest और vehicle custody जैसी हर कार्रवाई कानून के मुताबिक होनी चाहिए, ताकि सड़क सुरक्षा के साथ लोगों के legal rights भी सुरक्षित रहें।

    उत्तर प्रदेश में drunk driving के खिलाफ मामला अब ज्यादा serious तरीके से लिया जा रहा है। लेकिन “अब कोई challan नहीं होगा और हर drunk driver सीधे जेल जाएगा” कहना सही तस्वीर नहीं है।

    असल बात यह है कि Motor Vehicles Act में पहले से मौजूद strict provisions के तहत police arrest और आगे की legal कार्रवाई कर सकती है, जबकि UP में enforcement को बड़े स्तर पर तेज किया गया है।

    इसलिए अगर शराब पी है तो steering संभालने का risk न लें। कुछ घंटे की convenience के मुकाबले सुरक्षित घर पहुंचना ज्यादा जरूरी है।

  • मुंबई में 22 फीट की गणेश प्रतिमा गिरी, 2 की मौत; 5 घायल — क्या सड़क का गड्ढा बना हादसे का कारण?

    मुंबई में 22 फीट की गणेश प्रतिमा गिरी, 2 की मौत; 5 घायल — क्या सड़क का गड्ढा बना हादसे का कारण?

    मुंबई के भुलेश्वर में 22 फीट की ‘भुलेश्वरचा राजा’ गणेश प्रतिमा गिरने से 2 लोगों की मौत और 5 घायल हुए। पुलिस ने ADR दर्ज कर जांच शुरू की।

    मुंबई: भायखला के भुलेश्वर में गणेशोत्सव की तैयारियों के बीच शनिवार रात एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को हिला दिया। ‘भुलेश्वरचा राजा’ की 22 फीट से ज्यादा ऊंची गणेश प्रतिमा आगमन जुलूस के दौरान अचानक गिर गई। प्रतिमा के नीचे दबने से भुलेश्वर गणपति मंडल के अध्यक्ष संकेत नेवशे और बृजेश हेमंत जोशी की मौत हो गई, जबकि पांच लोग घायल हुए हैं। घायलों में 5 और 7 साल की दो बच्चियां भी शामिल हैं। हादसा रात करीब 9:50 से 10 बजे के बीच भुलेश्वर के बलराम मर्चेंट रोड पर कबूतरखाना के पास जय अंबे चौक पर हुआ।

    मंडप से करीब 50 मीटर पहले हुआ हादसा

    जानकारी के मुताबिक विशाल प्रतिमा को भुलेश्वर की तरफ लाया जा रहा था और वह मंडप तक पहुंचने से करीब 50 मीटर पहले थी। इसी दौरान प्रतिमा अचानक असंतुलित होकर आगे की तरफ गिर गई। हादसे के वक्त आगमन जुलूस में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे और कुछ लोग प्रतिमा को ले जा रही trolley के आसपास या उस पर भी थे।

    प्रतिमा गिरते ही मौके पर अफरा-तफरी मच गई। उसके नीचे कई लोग फंस गए। सूचना मिलते ही BMC, Mumbai Fire Brigade, Mumbai Police, Traffic Police, 108 Emergency Ambulance Service और ward staff की टीमें मौके पर पहुंचीं और rescue operation शुरू किया।

    आखिर 22 फीट की प्रतिमा गिरी कैसे?

    हादसे की वजह को लेकर शुरुआती जानकारी सामने आ चुकी है। पुलिस की preliminary जांच में प्रतिमा को संभालने वाले frame के support में तकनीकी समस्या का angle सामने आया है। एक fire brigade official के मुताबिक frame की welding ठीक से नहीं हुई होने की आशंका है, जिससे प्रतिमा centre से support से बाहर निकलकर गिर सकती है। दूसरी ओर, मौके की कुछ eyewitness जानकारी में trolley के wheel के सड़क के गड्ढे में फंसने और झटका लगने की बात भी सामने आई है। हादसे की final वजह जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी।

    कुछ प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक गिरने से ठीक पहले प्रतिमा में हलचल दिखाई दी थी। एक स्थानीय रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि प्रतिमा का हार पहले नीचे गिरा और उसके बाद structure में movement नजर आया। इन eyewitness observations को पुलिस की technical जांच से अलग देखा जा रहा है।

    हादसे में किन लोगों की मौत हुई?

    इस हादसे में संकेत नेवशे और बृजेश हेमंत जोशी की जान चली गई। संकेत नेवशे की उम्र 33 साल बताई गई है और वह भुलेश्वर गणपति मंडल के अध्यक्ष थे। बृजेश हेमंत जोशी की उम्र latest civic और police-based reports में 30 साल बताई गई है। दोनों को अस्पताल ले जाने के बाद brought dead घोषित किया गया।

    पांच लोग घायल, दो छोटी बच्चियां भी शामिल

    हादसे में घायल पांच लोगों की पहचान वैभव घेनंद, पवन चौरसिया, कुणाल काशीद, 5 साल की लावण्या गनेर और 7 साल की दिव्या गनेर के तौर पर हुई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक सभी घायलों की हालत स्थिर बताई गई है।

    घायलों को हादसे के बाद अलग-अलग अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंचाया गया। शुरुआती hospital information के मुताबिक GT Hospital, JJ Hospital, HN Reliance Hospital और Saifee Hospital में घायलों को ले जाया गया था।

    DB Marg Police ने ADR दर्ज की

    हादसे की जांच DB Marg Police कर रही है। पुलिस ने Accidental Death Report यानी ADR दर्ज की है और यह पता लगाया जा रहा है कि प्रतिमा को transport करने वाले frame और support system में क्या तकनीकी खामी थी। इसके साथ ही हादसे के दौरान इस्तेमाल की गई trolley और पूरी transportation व्यवस्था की भी जांच की जा रही है।

    हादसे के बाद मूर्ति का क्या हुआ?

    गिरने के बाद 22 फीट से ज्यादा ऊंची गणेश प्रतिमा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और मिली जानकारी के मुताबिक तीन हिस्सों में टूट गई। बाद में मंडल के सदस्यों ने क्षतिग्रस्त प्रतिमा को dumper पर रखा। बाद की जानकारी के मुताबिक प्रतिमा का Girgaon Chowpatty में विसर्जन किया गया।

    ‘भुलेश्वरचा राजा’ मंडल का इस साल 63वां उत्सव

    जिस प्रतिमा के आगमन के दौरान यह हादसा हुआ, वह ‘भुलेश्वरचा राजा’ के नाम से जानी जाती है। मंडल इस साल अपना 63वां वार्षिक उत्सव मना रहा है। इस विशाल प्रतिमा को sculptor Aniket Desai ने तैयार किया था।

    मुंबई में Ganeshotsav के दौरान बड़े-बड़े गणपति मंडलों की आगमन मिरवणूक शहर की खास पहचान है। इसी सिलसिले में ‘भुलेश्वरचा राजा’ की प्रतिमा को भी शनिवार रात मंडप तक लाया जा रहा था, लेकिन मंडप पहुंचने से कुछ ही दूरी पहले हुए हादसे ने उत्सव की खुशी को मातम में बदल दिया।

    अब जांच में किन सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं?

    पुलिस की जांच अब इस बात पर केंद्रित है कि प्रतिमा को support देने वाला frame किस तरह तैयार किया गया था, उसकी welding और fixing कितनी मजबूत थी और transport से पहले उसकी safety checking हुई थी या नहीं। इसके साथ trolley की स्थिति, रास्ते की हालत और पूरी transportation व्यवस्था की भी जांच अहम होगी।

    फिलहाल police investigation जारी है। हादसे की final वजह और इसके लिए किसी की जिम्मेदारी तय होने की तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी।

  • Mount Fuji पर 7 साल का बच्चा अकेला रह गया, पिता चोटी की ओर बढ़ा; 5 घंटे बाद लौटने पर खुली पूरी कहानी

    Mount Fuji पर 7 साल का बच्चा अकेला रह गया, पिता चोटी की ओर बढ़ा; 5 घंटे बाद लौटने पर खुली पूरी कहानी

    Mount Fuji पर थका 7 साल का बच्चा 6th Station पर अकेला रह गया। पिता बड़े बेटे के साथ चोटी की ओर बढ़ गया। Police ने बच्चे को सुरक्षित बचाकर पिता को वापस बुलाया।

    Mount Fuji की चढ़ाई पर तीनों साथ थे, फिर छोटा बेटा पीछे रह गया

    20 अगस्त की सुबह जापान के Mount Fuji पर एक पिता अपने दो बेटों के साथ Fujinomiya Route से चढ़ाई कर रहा था। परिवार का छोटा बेटा सिर्फ 7 साल का था। शुरुआत में तीनों साथ ऊपर बढ़ रहे थे, लेकिन करीब 2,500 मीटर की ऊंचाई पर पहुंचते-पहुंचते बच्चे ने आगे चलने में परेशानी जताई।

    बच्चा थक चुका था। इसके बाद 6th Station के पास पिता और उसके बीच बहस जैसी स्थिति बनी। होएईज़ानसो के स्टाफ मेंबर ताकाई अकिरा ने बताया कि सुबह करीब 7 बजे उन्हें दोनों के बीच बातचीत सुनाई दी। उनके मुताबिक पिता की तरफ से बच्चे को वहीं छोड़ने और करीब 8 घंटे इंतजार करने की बात कही जा रही थी।

    कुछ देर बाद बाहर देखने पर 7 साल का बच्चा अकेला bench पर बैठा दिखाई दिया।

    पिता अपने बड़े बेटे के साथ आगे बढ़ चुका था।

    7 साल के बच्चे को करीब 8 घंटे इंतजार करने को कहा गया था

    बच्चे के मिलने के बाद उसने Police और mountain-hut staff को बताया कि उसके पिता ने उसे वहीं रुककर करीब 8 घंटे इंतजार करने को कहा था।

    बच्चे के अकेले रहने का exact समय निश्चित नहीं हुआ है, लेकिन उपलब्ध घटनाक्रम से साफ है कि वह कई घंटे अपने पिता से अलग रहा। उस वक्त वह Mount Fuji के 6th Station के पास करीब 2,500 मीटर की ऊंचाई पर था।

    उसके पास खाने के लिए कुछ snacks और soft drink थे। पैसे उसके पास नहीं थे। हालांकि उसका climbing equipment ठीक हालत में बताया गया।

    एक छोटे बच्चे के लिए यह स्थिति इसलिए भी गंभीर थी क्योंकि वह जिस जगह बैठा था, वह सामान्य शहर या tourist walkway जैसा इलाका नहीं था। Mount Fuji पर ऊंचाई बढ़ने के साथ रास्ता मुश्किल होता जाता है और मौसम भी तेजी से बदलता रहता है।

    लेकिन उस समय बच्चे को सबसे पहले किसी safety plan की जरूरत थी।

    और यह जिम्मेदारी एक mountain-hut staff member ने संभाली।

    सुबह 7 बजे एक स्टाफ की नजर बच्चे पर पड़ी

    होएईज़ानसो के स्टाफ ने बच्चे को अकेले देखा तो उसे वहीं नहीं छोड़ा। स्टाफ ने उसे अपने झोपड़ी में सुरक्षित रखा और स्थिति की जानकारी लेने की कोशिश की।

    स्टाफ मेंबर ताकाई अकिरा ने बाद में बताया कि उन्होंने पिता और बच्चे के बीच हुई बातचीत सुनी थी। बच्चे के अकेले दिखाई देने के बाद उन्हें चिंता हुई और उन्होंने उसे सुरक्षित जगह पर रखा।

    इसके बाद सुबह करीब 7:40 बजे Police को सूचना दी गई।

    Shizuoka Prefectural Police की Fujinomiya Police Station की टीम मौके पर पहुंची और बच्चे को अपने संरक्षण में लिया। बच्चे को कोई चोट नहीं लगी थी।

    अब Police के सामने सबसे जरूरी सवाल था—उसका पिता कहां है?

    पिता बच्चे को छोड़कर कितनी दूर पहुंच चुका था?

    Police और mountain-hut staff ने पिता की तलाश शुरू की। उनके बारे में मिली जानकारी के आधार पर ऊपर के stations पर मौजूद लोगों से संपर्क किया गया।

    तभी 7th Station के आसपास मौजूद staff से जानकारी मिली कि पिता वहां से आगे जा चुका है।

    वह अपने बड़े बेटे के साथ Mount Fuji की चोटी की तरफ बढ़ रहा था।

    यानी एक तरफ 7 साल का बच्चा 6th Station पर Police और mountain-hut staff के पास था, वहीं दूसरी तरफ उसका पिता बड़े बेटे के साथ उससे काफी ऊपर पहुंच चुका था।

    Police ने पिता को वापस आने के लिए कहा।

    अब जिस चढ़ाई को पूरा करने के लिए वह आगे बढ़ा था, उसे रोककर वापस उसी जगह लौटना पड़ा जहां उसका छोटा बेटा इंतजार कर रहा था।

    करीब 5 घंटे बाद पिता वापस आया

    मिली जानकारी के मुताबिक बच्चे के सुरक्षित मिलने के करीब 5 घंटे बाद पिता 6th Station वापस पहुंचा।

    तब तक बच्चा सुरक्षित था और Police तथा mountain-hut staff उसकी देखभाल कर रहे थे।

    Police ने पिता को कड़ी चेतावनी दी। उसे बताया गया कि बच्चे को इस तरह पहाड़ पर अकेला छोड़कर आगे बढ़ना स्वीकार्य नहीं है।

    पिता ने अपनी गलती मानी और बाद में गहरा regret जताया।

    इसके बाद बच्चा अपने पिता से फिर मिल गया।

    इस पूरे मामले में सबसे बड़ी राहत यही रही कि 7 साल के बच्चे को कोई चोट नहीं आई।

    जिस जगह बच्चा अकेला था, वहां हालात आसान नहीं थे

    Mount Fuji का 6th Station करीब 2,500 मीटर की ऊंचाई पर है। 5th Station से ऊपर जाने वाला रास्ता लगातार चढ़ाई वाला है और कई जगह rocky terrain से होकर गुजरता है।

    घटना की जानकारी देते हुए कुछ मीडिया footage में 5th Station से 6th Station तक का route भी दिखाया गया है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि वहां कई घंटे अकेले बैठना किसी छोटे बच्चे के लिए सामान्य स्थिति नहीं थी।

    trekking expert युया कुरियामा ने भी family climbing को लेकर यही बात कही कि group को सबसे कम stamina वाले व्यक्ति की क्षमता के हिसाब से चलना चाहिए।

    अगर कोई बच्चा आगे नहीं चल पा रहा है, तो बाकी लोगों को अपनी speed और plan उसी के मुताबिक बदलना चाहिए।

    “चोटी तक पहुंचना” इस सफर का सबसे जरूरी हिस्सा नहीं था

    इस घटना के बाद Mount Fuji पर बच्चों के साथ climbing करने वाले parents और trekking experts ने भी इसी बात पर जोर दिया कि बच्चे की physical condition को नजरअंदाज करके चढ़ाई जारी रखना सही नहीं है।

    इस घटना के बाद कुछ parents ने कहा कि अगर बच्चे के लिए आगे बढ़ना मुश्किल हो जाए तो उसके साथ रुकना या जरूरत पड़ने पर वापस लौटना ज्यादा सही फैसला होगा।

    Mount Fuji की चोटी अपनी जगह थी।

    लेकिन उस वक्त 7 साल के बच्चे की safety उससे ज्यादा जरूरी थी।

    Police ने भी hikers को सलाह दी कि group में सबसे कम stamina वाले व्यक्ति की pace के हिसाब से चलें और किसी member को अकेला छोड़कर आगे न बढ़ें।

    इस कहानी में सबसे बड़ी राहत एक अजनबी ने दी

    जब बच्चा अकेला bench पर बैठा था, उसके साथ परिवार का कोई सदस्य नहीं था।

    लेकिन एक mountain-hut staff member ने उसे देखा।

    उसे अपने पास सुरक्षित रखा।

    Police को फोन किया।

    Police ने पिता की तलाश की।

    और कुछ घंटे बाद बच्चा फिर अपने परिवार के साथ था।

    यही इस घटना का सबसे राहत देने वाला हिस्सा है।

    7 साल का बच्चा सुरक्षित मिल गया, लेकिन Mount Fuji की उस सुबह ने family trekking को लेकर एक सीधा सवाल जरूर छोड़ दिया है।

    जब परिवार के सबसे छोटे सदस्य ने कह दिया कि अब उससे आगे नहीं चला जा रहा, तो उस समय मंजिल बदलना ज्यादा जरूरी था या मंजिल तक पहुंचना?

    Mount Fuji की चोटी कहीं जाने वाली नहीं थी।

    लेकिन एक छोटे बच्चे के लिए उस वक्त सबसे जरूरी चीज चोटी तक पहुंचना नहीं, उसके साथ किसी अपने का रहना था।

  • मालाड के Hotel Radha की किचन में मिले जिंदा चूहे- कॉकरोच, FDA ने फूड लाइसेंस किया सस्पेंड

    मालाड के Hotel Radha की किचन में मिले जिंदा चूहे- कॉकरोच, FDA ने फूड लाइसेंस किया सस्पेंड

    मुंबई के मालाड वेस्ट स्थित Hotel Radha की किचन में जिंदा चूहे और कॉकरोच मिले। FDA ने फूड लाइसेंस तत्काल सस्पेंड कर खाने की बिक्री, स्टोरेज और सप्लाई भी रोक दी

    मुंबई: मालाड वेस्ट स्थित Hotel Radha की किचन में जिंदा चूहे और कॉकरोच मिलने के बाद महाराष्ट्र FDA ने होटल का फूड बिजनेस लाइसेंस तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। 18 अगस्त को हुई जांच में किचन की सफाई, ड्रेनेज, स्टोरेज और फूड हैंडलिंग को लेकर कई गंभीर खामियां सामने आईं।

    मालाड के Hotel Radha में FDA की अचानक जांच

    FDA ने 18 अगस्त को मालाड वेस्ट स्थित Hotel Radha की किचन की जांच की। जांच के दौरान अधिकारियों को किचन में जिंदा चूहे और कॉकरोच मिले। रिपोर्ट के मुताबिक कुछ चूहे छत के पास दिखाई दिए, जबकि कुछ खुले ड्रेनेज के रास्ते किचन में आते मिले।

    Hotel Radha का पता:

    38, 39 & 40, 1st Floor, Sarvodaya Bhuvan, Ramchandra Lane, Malad (West), Mumbai – 400064

    किचन में सिर्फ चूहे- कॉकरोच नहीं, ये गड़बड़ियां भी मिलीं

    FDA की जांच में किचन के कई हिस्सों में तेल और ग्रीस की मोटी परत मिली। जगह-जगह गंदगी थी और पानी जमा होने से बदबू की शिकायत भी सामने आई।

    किचन के ड्रेनेज खुले और खराब हालत में पाए गए। इससे चूहों और दूसरे कीड़ों के अंदर आने का रास्ता बना हुआ था।

    फूड तैयार करने वाले उपकरणों पर कॉकरोच मिले। रिपोर्ट के मुताबिक dough-mixing machine पर भी कॉकरोच दिखाई दिए। काउंटर और बर्तन गंदे थे, जबकि कई बर्तनों पर जंग के निशान मिले।

    टोस्टर के ऊपर रखा था खुला Dustbin

    जांच के दौरान एक और चौंकाने वाली बात सामने आई। किचन में खुला dustbin रखा हुआ था और उसके ठीक ऊपर toaster रखा था, जहां खाना तैयार किया जा रहा था।

    इसके अलावा कुछ food items धूल और गंदगी के बीच रखे मिले। स्टोरेज बॉक्स और कंटेनर भी साफ नहीं थे। इससे food storage और handling को लेकर भी सवाल उठे।

    FDA ने Hotel Radha का फूड लाइसेंस क्यों सस्पेंड किया?

    इन गंभीर food safety और hygiene violations के बाद FDA ने Food Safety and Standards Act, 2006 के Section 32(3) के तहत Hotel Radha का food business licence तत्काल प्रभाव से suspend कर दिया।

    आदेश के तहत 18 अगस्त से होटल में food की manufacturing, storage, sale और distribution से जुड़ी गतिविधियां रोक दी गई हैं। यानी कार्रवाई सिर्फ warning या सफाई के निर्देश तक सीमित नहीं रही, बल्कि होटल के food business पर तत्काल रोक लगाई गई है।

    क्या Hotel Radha में अभी खाना मिल सकता है?

    FDA के suspension order के मुताबिक food की manufacturing, storage, sale और distribution वाली गतिविधियां रोकने का आदेश दिया गया है।

    इसलिए फिलहाल Hotel Radha के food business को लेकर FDA का suspension लागू है। होटल की बाकी सेवाओं पर क्या असर है, यह food licence suspension से अलग विषय है और उपलब्ध FDA कार्रवाई में मुख्य रोक food-related activities पर है।

    क्या Hotel Radha का लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द हुआ है?

    नहीं। यहां suspension और cancellation को अलग समझना जरूरी है।

    FDA ने Hotel Radha का food business licence suspend किया है। उपलब्ध कार्रवाई में licence को हमेशा के लिए cancel करने की बात नहीं कही गई है। आगे compliance और FDA की कार्रवाई के बाद स्थिति में बदलाव हो सकता है।

    क्या Hotel Radha का खाना खाने से किसी के बीमार होने की पुष्टि हुई?

    अभी सामने आई FDA कार्रवाई में किसी ग्राहक के बीमार होने की पुष्टि नहीं की गई है।

    जांच में किचन की hygiene, pest control, drainage, storage और food handling से जुड़ी गंभीर कमियां सामने आई हैं। इसलिए इसे food safety risk के तौर पर देखा गया है, लेकिन बिना मेडिकल या laboratory confirmation के यह कहना सही नहीं होगा कि होटल का खाना खाने से किसी व्यक्ति को बीमारी हुई।

    मुंबई में FDA का बड़ा food safety crackdown

    Hotel Radha पर हुई कार्रवाई अकेली कार्रवाई नहीं है। महाराष्ट्र FDA ने हाल की statewide inspection drive में 31 hotels, restaurants, roadside eateries और दूसरे food establishments की जांच की।

    इस कार्रवाई में 22 establishments को improvement notices दिए गए, जबकि पांच food business licences suspend किए गए। करीब 25 लाख रुपये के banned और दूसरे food products जब्त किए गए। 10 लोगों की गिरफ्तारी, आठ FIR और छह establishments को seal किए जाने की जानकारी भी FDA कार्रवाई के बाद सामने आई है।

    इसी अभियान के दौरान Hotel Radha, Malad West का नाम भी उन establishments में शामिल रहा जिनका food business licence suspend किया गया। FDA ने इस अभियान को “Safe Food, Safe Maharashtra” के तहत चलाया है।

    FDA की कार्रवाई में किन चीजों पर नजर है?

    FDA की हालिया inspections में सिर्फ kitchen की सफाई ही नहीं, बल्कि food storage, temperature control, waste disposal, pest control और food handling जैसी चीजों को भी देखा जा रहा है।

    Hotel Radha के मामले में खुले drains, rodents, cockroaches, गंदे utensils, जमा पानी, grease, खराब storage और खुले dustbin जैसी कई कमियां एक साथ सामने आईं।

    मालाड में इससे पहले भी food safety पर कार्रवाई

    मालाड वेस्ट में इससे पहले FDA ने Blinkit के एक dark store पर भी food safety violations को लेकर कार्रवाई की थी। 7 अगस्त की inspection के बाद वहां cockroaches, expired food, floor पर रखे food items और storage तथा pest-control से जुड़ी कमियां सामने आने की रिपोर्ट आई थी। उस facility का food licence भी suspend किया गया था।

    ऐसे में मालाड में लगातार सामने आ रही food safety कार्रवाई ने restaurants और food-storage facilities की hygiene व्यवस्था पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    Restaurant में खाना खाने से पहले ग्राहक क्या देखें?

    बाहर से restaurant कितना भी साफ और अच्छा दिखे, असली food safety kitchen के अंदर की व्यवस्था पर depend करती है।

    ग्राहक restaurant में food licence/FSSAI details देख सकते हैं। अगर किसी जगह पर खुले में रखा खाना, गंदे utensils, cockroaches, rats, खराब storage या दूसरी गंभीर hygiene problem दिखाई देती है तो उसकी शिकायत food safety authorities तक की जा सकती है।

    Hotel Radha पर हुई कार्रवाई ने एक बार फिर यही सवाल सामने ला दिया है कि restaurant की table और kitchen के बीच food safety की असली तस्वीर क्या है।

    फिलहाल FDA की कार्रवाई के बाद Hotel Radha का food business licence suspend है और food की manufacturing, storage, sale और distribution पर रोक लागू है। आगे होटल की compliance और FDA की अगली कार्रवाई से ही पता चलेगा कि licence कब बहाल होता है।

  • FDA का ताबड़तोड़ एक्शन: Zepto समेत 5 फूड आउटलेट्स पर शिकंजा, लाइसेंस सस्पेंड

    FDA का ताबड़तोड़ एक्शन: Zepto समेत 5 फूड आउटलेट्स पर शिकंजा, लाइसेंस सस्पेंड

    मुंबई में FDA का बड़ा एक्शन, Zepto समेत 5 फूड आउटलेट्स के लाइसेंस सस्पेंड। Prince of Wales, Cafe Sifarish और Otters Club में मिलीं खामियां।

    मुंबई: मुंबई में Food and Drug Administration (FDA) ने फूड सेफ्टी और हाइजीन नियमों को लेकर बड़ा एक्शन लिया है। जांच के दौरान साफ-सफाई, फूड स्टोरेज, तापमान कंट्रोल, कीट नियंत्रण और फूड हैंडलिंग से जुड़ी गंभीर कमियां मिलने के बाद मुंबई के कई फूड एस्टेब्लिशमेंट के लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन सस्पेंड कर दिए गए हैं।

    FDA की कार्रवाई की लिस्ट में Otters Club, Daily Fresh Bakers, Prince of Wales Restaurant, Cafe Sifarish और Zepto Limited के चेंबूर आउटलेट शामिल हैं। FDA के मुताबिक, इस कार्रवाई में किसी भी प्रतिष्ठान का लाइसेंस रद्द नहीं किया गया है। वहीं, अभियान के दौरान छह अन्य प्रतिष्ठानों को सुधार नोटिस भी जारी किए गए हैं।

    कहां-कहां मिली गड़बड़ी?

    बांद्रा के Otters Club में फूड आइटम्स के गलत तरीके से स्टोरेज और रखरखाव से जुड़ी कमियां सामने आईं। जांच के दौरान FDA ने यह भी पाया कि Punjab Sind Dairy से सप्लाई किया गया analogue paneer ‘regular paneer’ के तौर पर serve किया जा रहा था।

    खार वेस्ट के Prince of Wales Restaurant में खाने के तापमान को सही तरीके से maintain करने, स्टोरेज, equipment cleaning और pest control से जुड़ी कमियां मिलीं।

    वहीं, Andheri West के Cafe Sifarish में food storage और temperature control की पर्याप्त व्यवस्था नहीं मिली। कर्मचारियों की personal hygiene से जुड़ी सुविधाओं में भी कमी पाई गई। FDA की तरफ से सुधार नोटिस दिए जाने के बावजूद कैफे ने तय समय के अंदर compliance report जमा नहीं की।

    Zepto के चेंबूर आउटलेट में भी तापमान का मामला

    चेंबूर के Zepto Limited outlet में जांच के दौरान chilled और frozen food के temperature को लेकर भी सवाल उठे।

    FDA के मुताबिक, जांच के समय non-veg chilled food का temperature 9°C, जबकि frozen food का temperature -11°C पाया गया। FDA ने कहा कि दोनों food categories निर्धारित temperature से ज्यादा temperature पर रखी गई थीं।

    दहिसर के Daily Fresh Bakers पर भी FDA की कार्रवाई हुई है।

    ‘Safe Food, Safe Maharashtra’ अभियान के तहत एक्शन

    यह कार्रवाई महाराष्ट्र FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे के ‘Safe Food, Safe Maharashtra’ अभियान के तहत की गई है। इस अभियान में restaurants, food establishments और दूसरे food businesses की जांच की जा रही है।

    मुंबई में कार्रवाई के साथ-साथ पुणे में भी FDA ने इसी अभियान के तहत बड़ा एक्शन लिया है।

    Burger King पर भी FDA की कार्रवाई

    11 अगस्त से 14 अगस्त 2026 के बीच ‘Safe Food, Safe Drug, Safe Maharashtra’ अभियान के तहत पुणे FDA डिवीजन ने hotels, restaurants, e-commerce establishments और dairies का special inspection किया।

    इस दौरान गंभीर अस्वच्छ परिस्थितियां और food safety standards से जुड़े उल्लंघन मिलने के बाद 16 establishments के licence या registration तत्काल प्रभाव से suspend किए गए।

    इसी कार्रवाई के दौरान पुणे के Camp इलाके में 1992 से चल रहे पुराने Burger King outlet पर भी FDA ने कार्रवाई की।

    FDA की कार्रवाई पर उठ रहे सवाल

    मुंबई और पुणे में लगातार हो रही कार्रवाई के बीच कुछ लोगों ने FDA के तरीके को लेकर ‘पहले कार्रवाई, बाद में बात’ वाले रवैये पर सवाल भी उठाए हैं। हालांकि FDA का कहना है कि कार्रवाई food safety और hygiene standards में मिली कमियों के आधार पर की जा रही है।

    फिलहाल मुंबई में Zepto समेत इन food establishments पर FDA की कार्रवाई के बाद food storage, temperature control और hygiene standards को लेकर फिर चर्चा तेज हो गई है।

  • कांदिवली में तड़के इमारत में लगी आग, 11 लोग रेस्क्यू; दमकल ने समय रहते संभाला मोर्चा

    कांदिवली में तड़के इमारत में लगी आग, 11 लोग रेस्क्यू; दमकल ने समय रहते संभाला मोर्चा

    कांदिवली वेस्ट में तड़के कमर्शियल बिल्डिंग में आग लग गई। दमकल ने धुएं से भरी इमारत से 11 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला, कोई घायल नहीं हुआ।

    मुंबई: कांदिवली वेस्ट में सोमवार तड़के एक कमर्शियल बिल्डिंग में आग लगने से हड़कंप मच गया। कांदिवली रेल्वे स्टेशन फाटक रोड पर अभिराही होटल के पास स्थित चार मंजिला व्यावसायिक इमारत में करीब सुबह 4:14 बजे आग लगने की सूचना मुंबई फायर ब्रिगेड को मिली।

    आग के बाद पूरी बिल्डिंग में धुआं फैल गया था। ऐसे में दूसरी मंजिल पर मौजूद लॉजिंग हाउस में रह रहे 11 लोगों को दमकलकर्मियों ने सीढ़ियों के रास्ते सुरक्षित बाहर निकाल लिया। राहत की बात यह है कि इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।

    कितना नुकसान हुआ ?

    शुरुआती जानकारी के मुताबिक, आग मुख्य रूप से इलेक्ट्रिकल वायरिंग और इंस्टॉलेशन, लकड़ी के फर्नीचर, तिरपाल, बांस के साथ प्लास्टिक और एल्युमिनियम की सजावटी सामग्री तक सीमित रही। चौथी मंजिल पर मौजूद तिरुपति बैंक्वेट के करीब 50 वर्ग फीट हिस्से में भी आग का असर हुआ, जहां फर्नीचर, कपड़े और फॉल्स सीलिंग को नुकसान पहुंचा।

    फायर ब्रिगेड ने बचाई जान

    घटना की जानकारी मिलते ही मुंबई फायर ब्रिगेड की टीमों ने मौके पर पहुंचकर आग बुझाने के साथ-साथ बिल्डिंग में फंसे लोगों को बाहर निकालने का काम शुरू किया। करीब 6:07 बजे तक आग पर काबू पा लिया गया। शुरुआती तौर पर इस घटना को Level-1 Fire के तौर पर बताया गया है।

    फिलहाल सबसे बड़ी राहत यही है कि आग के दौरान बिल्डिंग में मौजूद 11 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और किसी जनहानि की खबर नहीं है। हालांकि, बिल्डिंग के कुछ हिस्सों और अंदर रखे सामान को नुकसान पहुंचा है।

    आग आखिर किस वजह से लगी? इसका अभी तक कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है। संबंधित अधिकारी मामले की जांच कर रहे हैं। जांच के बाद ही आग लगने की सही वजह और नुकसान की पूरी जानकारी सामने आ सकेगी।

  • Vimal Elaichi पर FDA का बड़ा एक्शन! शाहरुख, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को नोटिस, 15 दिन में देना होगा जवाब

    Vimal Elaichi पर FDA का बड़ा एक्शन! शाहरुख, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को नोटिस, 15 दिन में देना होगा जवाब

    महाराष्ट्र FDA ने Vimal Elaichi विज्ञापन को लेकर शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को नोटिस दिया है। 15 दिन में जवाब और प्रचार सामग्री हटाने को कहा।

    मुंबई/महाराष्ट्र: विमल इलायची के विज्ञापन को लेकर बॉलीवुड के तीन बड़े सितारे महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के निशाने पर आ गए हैं। FDA ने शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई क्यों न की जाए। मामला उस विज्ञापन से जुड़ा है, जिसे FDA ने प्रथम दृष्टया प्रतिबंधित पान मसाला के अप्रत्यक्ष या छद्म प्रचार से जुड़ा माना है।

    नोटिस की तारीख 11 अगस्त 2026 बताई गई है और यह करीब नौ पन्नों का है। अब तीनों अभिनेताओं को नोटिस मिलने के बाद तय समय के भीतर अपना पक्ष रखना होगा।

    FDA को Vimal Elaichi विज्ञापन पर आपत्ति क्यों है?

    सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब विज्ञापन में इलायची दिखाई जा रही है, तो FDA को आपत्ति किस बात पर है?

    FDA का कहना है कि विज्ञापन में विमल नाम और ब्रांड पहचान का इस्तेमाल इस तरह किया गया हो सकता है कि उससे महाराष्ट्र में प्रतिबंधित विमल पान मसाला का अप्रत्यक्ष प्रचार हो। यानी विवाद इलायची को प्रतिबंधित बताने का नहीं, बल्कि उसके विज्ञापन के जरिए किसी प्रतिबंधित उत्पाद की पहचान और प्रचार को बढ़ावा देने के आरोप का है।

    यही मामला छद्म विज्ञापन यानी किसी प्रतिबंधित उत्पाद का सीधे नाम लिए बिना उससे जुड़े ब्रांड या दूसरे उत्पाद के जरिए प्रचार करने के सवाल तक पहुंचता है।

    तीनों सितारों को क्या करना होगा?

    FDA ने सिर्फ जवाब मांगकर मामला खत्म नहीं किया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक तीनों को संबंधित विज्ञापन अभियान में अपनी भूमिका के बारे में जानकारी देने के साथ-साथ प्रचार अभियान से जुड़े दस्तावेज भी उपलब्ध कराने को कहा गया है।

    नोटिस में उनसे विज्ञापन से जुड़ी प्रचार सामग्री हटाने और अपने आधिकारिक सोशल मीडिया खातों से संबंधित सामग्री हटाने को भी कहा गया है। साथ ही विज्ञापन और प्रचार अभियान से जुड़े समझौते, अभियान की जानकारी, भुगतान व्यवस्था तथा यह बताने वाले दस्तावेज मांगे गए हैं कि विज्ञापन स्वीकार करने से पहले उनकी ओर से किस तरह की जांच की गई थी।

    15 दिन में देना होगा जवाब

    तीनों अभिनेताओं को नोटिस मिलने के बाद 15 दिन के भीतर लिखित जवाब देना है।

    अगर तय समय में जवाब नहीं दिया गया या FDA को जवाब संतोषजनक नहीं लगा, तो आगे की कार्रवाई की जा सकती है। तीनों को व्यक्तिगत सुनवाई का विकल्प भी दिया गया है। वे खुद या अपने अधिकृत प्रतिनिधि के जरिए अपना पक्ष रख सकते हैं।

    इसका मतलब फिलहाल मामला नोटिस और जांच के चरण में है। अभी तीनों अभिनेताओं को दोषी ठहराने वाला कोई अंतिम आदेश सामने नहीं आया है।

    महाराष्ट्र में पान मसाला पर पहले से रोक

    इस कार्रवाई का समय भी महत्वपूर्ण है। महाराष्ट्र में प्रतिबंधित पान मसाला और उससे जुड़े तंबाकू उत्पादों को लेकर FDA पहले से अभियान चला रहा है।

    इसी पृष्ठभूमि में विमल इलायची के विज्ञापन पर कार्रवाई सामने आई है। FDA का सवाल है कि अगर राज्य में संबंधित पान मसाला प्रतिबंधित है, तो उसी से जुड़ी ब्रांड पहचान का इस्तेमाल दूसरे उत्पाद के विज्ञापन में करके क्या प्रतिबंध को अप्रत्यक्ष तरीके से दरकिनार किया जा रहा है।

    यह मामला सिर्फ इन तीन अभिनेताओं तक सीमित नहीं

    विमल ब्रांड के विज्ञापनों को लेकर विवाद नया नहीं है। इससे पहले भी इस तरह के विज्ञापनों में बॉलीवुड सितारों की भूमिका को लेकर सवाल उठ चुके हैं।

    अक्षय कुमार भी इसी ब्रांड से जुड़े विज्ञापन को लेकर विवाद में आए थे और बाद में उन्होंने सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए उस विज्ञापन से पीछे हटने की बात कही थी।

    वहीं, पहले भी शाहरुख खान और अजय देवगन के ऐसे विज्ञापनों को लेकर सार्वजनिक बहस होती रही है। मौजूदा कार्रवाई ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि किसी सेलिब्रिटी की जिम्मेदारी सिर्फ विज्ञापन में दिखने तक सीमित है या उसे उस ब्रांड से जुड़े दूसरे उत्पादों और उसकी बाजार पहचान की भी जांच करनी चाहिए।

    क्या Vimal Elaichi खुद प्रतिबंधित है?

    नहीं, इस मामले को इस तरह समझना सही नहीं होगा।

    FDA की आपत्ति यह नहीं है कि इलायची अपने आप में प्रतिबंधित उत्पाद है। विवाद इस बात पर है कि क्या Vimal Elaichi के विज्ञापन का इस्तेमाल प्रतिबंधित पान मसाला के अप्रत्यक्ष प्रचार के लिए किया जा रहा है।

    यही कारण है कि मामले में विज्ञापन की प्रस्तुति, ब्रांड पहचान और उसके पीछे के प्रचार उद्देश्य महत्वपूर्ण हो जाते हैं। इस आरोप को अभी अंतिम कानूनी निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।

    अब आगे क्या होगा?

    अब इस मामले में सबसे ज्यादा नजर तीनों अभिनेताओं के जवाब पर रहेगी। उन्हें यह बताना होगा कि उन्होंने संबंधित विज्ञापन में किस भूमिका में काम किया, विज्ञापन को लेकर उनके और कंपनी के बीच क्या समझौता था और उन्होंने अभियान से पहले किस तरह की जांच की थी।

    इसके बाद FDA उनके जवाब और उपलब्ध दस्तावेजों की समीक्षा करेगा। अगर जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो आगे कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।

    इस पूरे मामले में फिलहाल सबसे अहम बात यही है कि FDA ने विज्ञापन को प्रथम दृष्टया संदिग्ध मानते हुए तीनों सितारों से जवाब मांगा है, लेकिन अभी किसी को दोषी घोषित नहीं किया गया है।

    अब असली सवाल यह है—क्या शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ FDA को यह समझा पाएंगे कि उनका विज्ञापन सिर्फ इलायची का था, या फिर महाराष्ट्र FDA की जांच में इसे प्रतिबंधित पान मसाला के अप्रत्यक्ष प्रचार के तौर पर आगे की कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा?

  • Mumbai FDA Action: चेंबूर में Expired Frooti-Appy Fizz का Stock जब्त, 2 वाहन सील

    Mumbai FDA Action: चेंबूर में Expired Frooti-Appy Fizz का Stock जब्त, 2 वाहन सील

    मुंबई के चेंबूर में FDA ने Expired Frooti, Appy Fizz समेत beverages का stock जब्त किया। Warehouse और 2 vehicles seal, आगे की sale पर रोक।

    मुंबई: चेंबूर में FDA की रातभर चली कार्रवाई में expired Frooti, Appy Fizz और दूसरे beverages का stock पकड़ा गया है। वाशी नाका के प्रयाग नगर स्थित warehouse में हुई इस कार्रवाई के बाद गोदाम और दो vehicles को seal कर दिया गया।

    मुंबई में cold drink या packaged beverage खरीदने वालों के लिए यह खबर सीधे काम की है। वजह है कि FDA की जांच में expired beverages का stock सामने आया है और अब सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि गोदाम में expired माल क्यों रखा था, बल्कि यह भी है कि यह stock आगे कहां जाने वाला था।

    चेंबूर में रातभर चला FDA का Raid

    महाराष्ट्र Food and Drug Administration यानी FDA ने चेंबूर के वाशी नाका, प्रयाग नगर, L.U. गडकरी मार्ग स्थित एक warehouse में कार्रवाई की।

    यह कार्रवाई 13 अगस्त की शाम करीब 6 बजे से 14 अगस्त की सुबह करीब 5 बजे तक चली। यानी FDA की टीम ने रातभर warehouse की जांच की। कार्रवाई में 8 अधिकारी शामिल थे।

    जांच के दौरान अधिकारियों को expired food और beverages का stock मिला।

    Frooti और Appy Fizz समेत Expired Drinks मिले

    जांच में सामने आए stock में Frooti, Appy Fizz, Candy Juice और दूसरे beverages शामिल बताए गए हैं।

    खबर के मुताबिक Chembur warehouse से करीब 1,000 expired flavoured sparkling drink bottles मिलने की जानकारी सामने आई है। वहीं इस कार्रवाई से जुड़ी earlier report में जब्त stock की कुल कीमत करीब ₹1 लाख बताई गई थी।

    यानी मामला सिर्फ एक-दो expired bottles का नहीं था, बल्कि warehouse level पर रखे गए stock का था।

    FDA ने Warehouse के साथ 2 Vehicles भी किए Seal

    इस कार्रवाई का एक अहम हिस्सा यह है कि FDA ने सिर्फ expired stock जब्त नहीं किया।

    Warehouse को seal किया गया और दो vehicles को भी seal कर दिया गया।

    इसके अलावा आगे के आदेश तक इस परिसर से food products की sale और transportation पर रोक लगा दी गई है।

    अब सबसे बड़ा सवाल—Expired Stock कहां जाने वाला था?

    FDA की कार्रवाई के बाद सबसे ज्यादा curiosity इसी बात को लेकर है कि warehouse में रखा यह expired stock आखिर किस destination के लिए था।

    क्या इसे आगे retailers तक पहुंचाया जाना था?

    क्या vehicles इसी stock को transport करने के लिए इस्तेमाल होने वाले थे?

    या यह stock warehouse में ही पड़ा हुआ था?

    फिलहाल उपलब्ध जानकारी में यह पुष्टि नहीं हुई है कि चेंबूर में जब्त किया गया यह specific expired stock consumers को बेचा जा चुका था।

    इसलिए इस मामले में आगे की FDA जांच महत्वपूर्ण होगी।

    Mumbai में FDA का Food Safety Crackdown तेज

    चेंबूर की कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब Mumbai और Maharashtra में FDA food-safety violations पर लगातार action ले रहा है।

    ताजा statewide inspections में expired food, खराब storage और hygiene violations को लेकर कई establishments पर कार्रवाई की गई है। ताजा जानकारी के मुताबिक Mumbai FDA ने inspections के बाद 10 food business licences suspend किए हैं और Chembur warehouse से expired flavoured sparkling drinks भी जब्त किए गए।

    इससे साफ है कि FDA का focus सिर्फ restaurants तक सीमित नहीं है। Warehouse और supply chain level पर भी food products की जांच की जा रही है।

    क्या Frooti या Appy Fizz खरीदना बंद कर दें?

    नहीं।

    इस कार्रवाई को देखकर किसी भी पूरे brand के सभी products को unsafe मानना सही नहीं होगा।

    यह कार्रवाई एक specific warehouse में मिले expired stock को लेकर है। इसका मतलब यह नहीं है कि market में बिक रहे हर Frooti या Appy Fizz product में कोई समस्या है।

    लेकिन इस घटना के बाद एक काम जरूर करना चाहिए—

    कोई भी packaged drink खरीदने से पहले उसकी date जरूर check करें।

    Cold Drink खरीदते समय ये 3 चीजें जरूर देखें

    सबसे पहले bottle या packet पर Expiry/Use By या Best Before date देखें।

    दूसरा, seal और packaging check करें।

    और तीसरा, अगर bottle या packet में leakage, damage या असामान्य swelling दिखाई दे तो उसे खरीदने से बचें।

    FSSAI के food-labelling requirements में packaged food पर जरूरी product और date-related information देने का प्रावधान है। इसलिए label पढ़ना consumer के लिए सबसे आसान safety check है।

    Expiry Date और Best Before में फर्क समझना भी जरूरी

    कई लोग Expiry Date और Best Before को एक ही समझते हैं, जबकि दोनों का मतलब अलग हो सकता है।

    FSSAI के अनुसार Use By/Expiry date food की safety से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी है, जबकि Best Before मुख्य रूप से उस अवधि को बताता है जिसमें product की quality अपने best level पर रहने की उम्मीद होती है।

    इसलिए packaged food या drink खरीदते समय सिर्फ तारीख देखकर नहीं, बल्कि label पर तारीख किस रूप में दी गई है, यह भी देखना चाहिए।

    चेंबूर FDA Raid से क्या साफ हुआ?

    चेंबूर की इस कार्रवाई ने एक important सवाल सामने रखा है—expired food और beverages की supply chain पर निगरानी कितनी जरूरी है।

    एक warehouse में stock पकड़े जाने के बाद अब यह जानना अहम होगा कि यह माल वहां कब से था, इसकी आगे की destination क्या थी और इस मामले में FDA की अगली कार्रवाई क्या होती है।

    फिलहाल इतना साफ है कि चेंबूर के वाशी नाका में FDA ने expired beverage stock पर action लिया है, warehouse और दो vehicles को seal किया है और आगे की sale तथा transportation रोक दी गई है।

    मुंबई में packaged drinks खरीदने वाले consumers के लिए इस पूरे मामले की सबसे जरूरी सीख यही है—

    Brand देखकर नहीं, bottle की date और condition देखकर खरीदें।

  • FDA की सख्ती का असर: मुंबई में रेस्टोरेंट से सरकारी कैंटीन तक बंद हो रहे शटर, सफाई-रेनोवेशन पर जोर

    FDA की सख्ती का असर: मुंबई में रेस्टोरेंट से सरकारी कैंटीन तक बंद हो रहे शटर, सफाई-रेनोवेशन पर जोर

    मुंबई में FDA की सख्ती के बाद कई रेस्टोरेंट और सरकारी कैंटीन सफाई-रेनोवेशन के लिए बंद हो रहे हैं। Domino’s के 3 आउटलेट पर भी कार्रवाई हुई।

    मुंबई: शहर भर में बाहर खाना खाने वालों के लिए इन दिनों Food Safety और restaurant hygiene एक बड़ा मुद्दा बन गया है। महाराष्ट्र FDA की लगातार हो रही कार्रवाई का असर अब सिर्फ उन restaurants पर नहीं दिख रहा, जिनके licences suspend किए गए हैं, बल्कि दूसरे restaurant owners भी पहले से ही अपनी kitchens और premises को ठीक करने में जुट गए हैं।

    मुंबई के कई restaurants और कुछ सरकारी canteens इन दिनों repair, deep cleaning, painting और renovation के लिए अपने shutters कुछ घंटों से लेकर कई दिनों तक बंद कर रहे हैं। वजह साफ है—FDA की inspection में अगर hygiene या food safety से जुड़ी खामियां मिलीं तो licence suspension और public action का risk बढ़ गया है।

    FDA की कार्रवाई के बाद restaurant owners alert

    Indian Hotel and Restaurant Association (AHAR) के मुताबिक, FDA की तेज कार्रवाई के बाद उसके कई member restaurants ने precautionary steps शुरू कर दिए हैं। Restaurant owners kitchen की सफाई, टूटे tiles और infrastructure की मरम्मत, pest control और staff training पर ज्यादा focus कर रहे हैं।

    AHAR President Vijay Shetty के मुताबिक, association से अकेले मुंबई में करीब 8,000 restaurants जुड़े हैं। उनका कहना है कि इनमें बड़ी संख्या medium-size और budget restaurants की है, जो कम margins पर operate करते हैं। ऐसे restaurants के लिए licence suspension का सीधा असर business और reputation दोनों पर पड़ सकता है।

    इसी वजह से कई owners अपने restaurants को पूरी तरह बंद करने के बजाय कुछ घंटों के लिए जल्दी बंद करके रात में repair और cleaning का काम करा रहे हैं। कुछ जगहों पर partial closure भी किया जा रहा है।

    Cleaning से लेकर staff training तक, हर चीज पर focus

    Restaurant owners अब सिर्फ kitchen की सफाई तक सीमित नहीं रहना चाहते। कई जगह staff को FoSTaC यानी Food Safety Training and Certification के लिए भेजा जा रहा है।

    इसके अलावा कुछ restaurant owners compliance और paperwork समझने के लिए experienced professionals की मदद ले रहे हैं और private food-safety auditors से भी inspection करा रहे हैं।

    एक restaurant employee ने बताया कि पहले premises की cleaning दिन में दो बार होती थी, लेकिन अब lunch के बाद भी extra cleaning की जा रही है। Deep cleaning में पहले के मुकाबले काफी ज्यादा समय लगाया जा रहा है।

    मानसून में flies और दूसरे pests की समस्या को देखते हुए भी restaurants extra precautions ले रहे हैं।

    Washbasin से लेकर kitchen infrastructure तक बदलाव

    FDA की कार्रवाई के बाद restaurant owners छोटी-छोटी चीजों को भी seriously ले रहे हैं। कहीं washbasin की position बदली गई है, तो कहीं उसे clearly label किया गया है। Kitchen में storage, cleaning व्यवस्था और food-handling process पर भी ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है।

    मतलब साफ है—अब सिर्फ खाना अच्छा होना काफी नहीं है। Kitchen कितनी clean है और food safety rules कितने properly follow हो रहे हैं, इस पर भी restaurant owners को बराबर ध्यान देना पड़ रहा है।

    सरकारी कैंटीन भी नहीं बचीं

    FDA की सख्ती का असर सरकारी कैंटीन तक पहुंच गया है। FDA के एक अधिकारी के मुताबिक, MMRDA office की kitchen का inspection करने पहुंची टीम को पता चला कि वहां की canteen repair work के लिए voluntarily बंद थी।

    BKC स्थित Mumbai Suburban District Collector परिसर और Kalina University की canteen के भी बंद होने की जानकारी सामने आई है।

    इससे यह साफ है कि FDA की मौजूदा drive का असर सिर्फ private restaurants या बड़े food chains तक सीमित नहीं है।

    South Mumbai के पुराने restaurants ने भी shutters गिराए

    South Mumbai में भी कुछ popular eateries ने repair और makeover के नाम पर temporary closure किया है।

    Kala Ghoda का Ayub’s इस महीने की शुरुआत में कुछ दिनों के लिए बंद रहा। वहीं Kalbadevi के Shree Thaker Bhojon ने भी social media पर अपने customers को बताया कि restaurant को थोड़ा नया look देने के लिए वह कुछ समय के लिए बंद रहेगा।

    दूसरी तरफ, Rustom जैसे restaurants पर FDA action के बाद closure ने restaurant industry में चिंता और बढ़ा दी है। ऐसे मामलों के बाद कई owners inspection का इंतजार करने के बजाय पहले से ही अपने premises की कमियां दूर करने में जुट गए हैं।

    Domino’s के 3 Mumbai outlets पर भी FDA action

    इसी बीच FDA की कार्रवाई ने बड़े food brands को भी झटका दिया है।

    महाराष्ट्र FDA ने food safety और hygiene violations के चलते Domino’s Pizza के चार outlets के food-business licences suspend किए, जिनमें तीन मुंबई में हैं। ये outlets Vile Parle West, Borivali West और R-City Mall, Ghatkopar West में हैं। चौथा outlet Satara district के Malkapur, Karad में है।

    यह कार्रवाई 10 जुलाई से 11 अगस्त के बीच चलाए गए special inspection drive का हिस्सा थी। इस drive में महाराष्ट्र में major restaurant chains के 104 establishments inspect किए गए। FDA के मुताबिक इस दौरान 95 improvement notices और पांच licence suspensions किए गए।

    Domino’s outlets में FDA को food storage, pest control, temperature monitoring, cleanliness और दूसरे food-safety compliance से जुड़े issues मिले।

    FDA की सख्ती का असर अब साफ दिख रहा है

    महाराष्ट्र में FDA की कार्रवाई अब restaurant industry के लिए एक clear warning बनती दिख रही है। पहले जहां कई restaurants inspection के बाद सुधार करने की कोशिश करते थे, वहीं अब owners inspection से पहले ही अपनी kitchens और premises को compliance-ready करने में जुटे हैं।

    FDA के एक अधिकारी ने इस trend को positive बताया। उनका कहना है कि restaurant owners को आखिरकार kitchen hygiene को उतनी ही importance देनी चाहिए जितनी वे अपने restaurant के promotion और customer-facing area को देते हैं।

    मुंबई के customers के लिए भी यह पूरी कहानी एक अहम सवाल छोड़ती है—जिस restaurant में आप हजारों रुपये देकर खाना खाते हैं, उसकी kitchen आखिर कितनी clean है?

    FDA की मौजूदा कार्रवाई के बाद कम से कम इतना जरूर है कि इस सवाल को अब restaurant owners नजरअंदाज नहीं कर सकते।