Category: Maharashtra

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  • नितेश राणे के करीबी दाऊद शेख ने छोड़ी भाजपा, सैकड़ों कार्यकर्ताओं संग मनसे में शामिल

    नितेश राणे के करीबी दाऊद शेख ने छोड़ी भाजपा, सैकड़ों कार्यकर्ताओं संग मनसे में शामिल

    मुंबई में भाजपा को झटका, नितेश राणे के करीबी दाऊद शेख सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ मनसे में शामिल हुए। जानिए उनकी राजनीतिक यात्रा और असर।

    मुंबई: मुंबई की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत भाजपा युवा मोर्चा के उत्तर-पश्चिम मुंबई उपनगर के पूर्व उपाध्यक्ष दाऊद शेख ने भाजपा छोड़कर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का दामन थाम लिया है। दाऊद शेख के साथ सैकड़ों पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं के मनसे में शामिल होने की जानकारी सामने आई है। यह प्रवेश अमित ठाकरे की मौजूदगी में हुआ।

    इस घटनाक्रम को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि दाऊद शेख की राजनीतिक यात्रा लंबे समय तक राणे परिवार की राजनीतिक धारा से जुड़ी रही है। उनकी राजनीति की शुरुआत स्वाभिमान संगठन से हुई थी और वे शुरू से इस संगठन से जुड़े रहे।

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    कार्यक्रम के दौरान बाहर जमा कार्यकर्ताओं की तस्वीर

    स्वाभिमान संगठन से शुरू हुई दाऊद शेख की राजनीतिक यात्रा

    दाऊद शेख का राजनीतिक सफर सीधे भाजपा से शुरू नहीं हुआ था। वे पहले स्वाभिमान संगठन से जुड़े थे, जिसका नेतृत्व राणे परिवार की राजनीतिक धारा से जुड़ा रहा। बाद में जब स्वाभिमान संगठन का भाजपा में विलय हुआ, तब दाऊद शेख भी भाजपा में शामिल हुए।

    इसी राजनीतिक यात्रा के दौरान वे नारायण राणे और नितेश राणे के सान्निध्य में सक्रिय रहे। बाद में भाजपा संगठन में उनकी सक्रियता बढ़ी और उन्होंने भाजपा युवा मोर्चा में उत्तर-पश्चिम मुंबई उपनगर के स्तर पर जिम्मेदारी संभाली।

    यही कारण है कि दाऊद शेख का भाजपा छोड़कर मनसे में जाना केवल एक सामान्य दल-बदल की घटना नहीं माना जा रहा है। उनके लंबे राजनीतिक सफर और राणे परिवार से पुराने जुड़ाव के कारण इस फैसले ने मुंबई के राजनीतिक हलकों का ध्यान खींचा है।

    भाजपा-मनसे के बढ़ते टकराव के बीच लिया फैसला

    दाऊद शेख का मनसे में प्रवेश ऐसे समय हुआ है जब भाजपा और मनसे के बीच राजनीतिक टकराव पहले से तेज है। पुणे के एक सरकारी कॉलेज में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर हटाने के विवाद के बाद दोनों दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच बयानबाजी तथा विरोध प्रदर्शन बढ़े थे।

    अमित ठाकरे के खिलाफ भाजपा युवा मोर्चा के आंदोलन को लेकर भी विवाद हुआ था। इस दौरान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने युवा मोर्चा की आंदोलन शैली पर नाराजगी जताते हुए कार्यकर्ताओं को संयमित और सकारात्मक तरीके से काम करने की सलाह दी थी।

    इसके बाद मुंबई में भाजपा और मनसे के कार्यकर्ताओं के बीच तनावपूर्ण स्थिति भी सामने आई। ऐसे राजनीतिक माहौल के बीच दाऊद शेख का भाजपा से निकलकर अमित ठाकरे की मौजूदगी में मनसे में शामिल होना इस घटनाक्रम को और महत्वपूर्ण बनाता है।

    भाजपा छोड़ने की वजह पर अभी स्पष्ट बयान नहीं

    दाऊद शेख के मनसे में शामिल होने की खबर सामने आ चुकी है, लेकिन उन्होंने भाजपा छोड़ने का विस्तृत कारण क्या बताया है, इस बारे में उपलब्ध जानकारी में कोई स्पष्ट सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है।

    इसी तरह उनके साथ मनसे में शामिल हुए पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की सटीक संख्या भी स्पष्ट नहीं की गई है। फिलहाल जानकारी सैकड़ों कार्यकर्ताओं के प्रवेश की है।

    भाजपा की ओर से दाऊद शेख के जाने और उनके साथ कार्यकर्ताओं के मनसे में शामिल होने पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। नितेश राणे की ओर से इस घटनाक्रम पर कोई स्पष्ट सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने आती है तो यह इस राजनीतिक घटनाक्रम को और महत्वपूर्ण बना सकती है।

    उत्तर-पश्चिम मुंबई में क्या पड़ सकता है असर?

    दाऊद शेख लंबे समय से उत्तर-पश्चिम मुंबई के राजनीतिक और संगठनात्मक क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। ऐसे में उनके साथ स्थानीय स्तर के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का मनसे में जाना संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    हालांकि, केवल इस प्रवेश के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि भाजपा के चुनावी आधार पर कोई बड़ा असर पड़ गया है। इसका वास्तविक राजनीतिक प्रभाव इस बात से तय होगा कि दाऊद शेख के साथ गए कार्यकर्ता मनसे के संगठन में कितनी सक्रिय भूमिका निभाते हैं और उन्हें पार्टी में आगे क्या जिम्मेदारी दी जाती है।

    फिलहाल सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल यही है कि स्वाभिमान संगठन से शुरू होकर राणे परिवार की राजनीतिक धारा और फिर भाजपा तक पहुंचे दाऊद शेख ने अब मनसे का रास्ता क्यों चुना। आने वाले दिनों में दाऊद शेख, भाजपा और मनसे की ओर से आने वाले बयानों से इस फैसले के पीछे की राजनीतिक तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

  • कुरार के वाघेश्वरी मंदिर को संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के पर्यटन मानचित्र में शामिल करने की मांग, वन मंत्री की बैठक

    कुरार के वाघेश्वरी मंदिर को संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के पर्यटन मानचित्र में शामिल करने की मांग, वन मंत्री की बैठक

    कुरार के प्राचीन वाघेश्वरी मंदिर को संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के पर्यटन स्थलों में शामिल करने की मांग पर वन मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए।

    मुंबई: मलाड (पूर्व) कुरार गांव स्थित प्राचीन वाघेश्वरी मंदिर को संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के आधिकारिक पर्यटन स्थलों में शामिल करने की मांग को लेकर बुधवार को मंत्रालय में महत्वपूर्ण बैठक हुई। शिवसेना विधायक सुनील प्रभु की मांग पर हुई इस बैठक में वन मंत्री गणेश नाईक ने अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए। मंदिर तक पहुंचने वाले रास्ते में सुधार और श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी चर्चा हुई।

    विधायक सुनील प्रभु ने इस संबंध में 26 जून 2026 को वन मंत्री को लिखित पत्र दिया था। उनका कहना है कि कुरार गांव की ग्रामदेवता के रूप में प्रसिद्ध वाघेश्वरी मंदिर को संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के अन्य पर्यटन स्थलों की तरह आधिकारिक पर्यटन मानचित्र में स्थान मिलना चाहिए। मंदिर ट्रस्ट की ओर से सामाजिक कार्यकर्ता बाबूभाई भवानजी ने भी वन मंत्री को निवेदन दिया था।

    मंदिर तक पहुंच और श्रद्धालुओं की सुविधा पर जोर

    बैठक में मंदिर तक जाने वाले रास्ते को बेहतर और सुगम बनाने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। नवरात्रि सहित वर्षभर यहां श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। स्थानीय महिलाओं के बीच मंदिर में ओटी भरने की परंपरा भी लंबे समय से चली आ रही है।

    वन मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि श्रद्धालुओं की संख्या और भीड़ को ध्यान में रखते हुए उचित व्यवस्था की जाए। इसमें मंदिर तक पहुंच की सुविधा और भीड़ के समय आने वाली संभावित परेशानियों को दूर करने पर ध्यान देने की बात कही गई।

    हालांकि, बैठक के बाद वाघेश्वरी मंदिर को संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान का आधिकारिक पर्यटन स्थल घोषित किए जाने की जानकारी सामने नहीं आई है। फिलहाल मामला मांग, बैठक और अधिकारियों को दिए गए निर्देशों के स्तर पर है।

    एसजीएनपी में पहले से बढ़ रहा है पर्यटन ढांचा

    वाघेश्वरी मंदिर को पर्यटन मानचित्र में शामिल करने की मांग ऐसे समय में सामने आई है, जब संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान में पर्यटन सुविधाओं को बढ़ाने की व्यापक योजना पर काम चल रहा है। मार्च 2026 में वन मंत्री गणेश नाईक ने उद्यान के लिए करीब 775 करोड़ रुपये के प्रस्तावित विकास खाके की जानकारी दी थी। इसमें तेंदुआ सफारी, नौकायन सुविधाओं में सुधार, पदयात्रा मार्ग और पर्यटकों के लिए नई व्यवस्थाएं शामिल हैं।

    महाराष्ट्र सरकार ने इसी वर्ष संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र के लिए क्षेत्रीय मास्टर प्लान को भी मंजूरी दी है। इसमें नियंत्रित और टिकाऊ पर्यटन के साथ पर्यटक सुविधाओं, प्रकृति मार्गों, जानकारी केंद्रों तथा सांस्कृतिक विरासत स्थलों के संरक्षण पर जोर दिया गया है।

    वर्तमान में महाराष्ट्र पर्यटन विभाग की संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान संबंधी जानकारी में कान्हेरी गुफाएं, वन्यजीव और प्रकृति आधारित पर्यटन प्रमुख आकर्षणों में शामिल हैं। मुंबई उपनगर जिला प्रशासन की पर्यटन सूची में भी संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान और कान्हेरी गुफाओं सहित कई प्रमुख स्थल दर्ज हैं, जबकि वाघेश्वरी मंदिर अलग आधिकारिक पर्यटन स्थल के रूप में सूचीबद्ध नहीं है।

    विकास के साथ पर्यावरणीय नियम भी महत्वपूर्ण

    संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान संरक्षित वन क्षेत्र होने के कारण यहां किसी भी नए निर्माण या विकास कार्य को सामान्य शहरी परियोजना की तरह नहीं देखा जा सकता। उद्यान के आसपास का क्षेत्र पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र के अंतर्गत आता है और विकास गतिविधियों पर पर्यावरणीय नियंत्रण लागू हैं।

    इसके अलावा उद्यान से जुड़े अतिक्रमण और संरक्षण के मामलों में न्यायालय के निर्देश भी महत्वपूर्ण हैं। सितंबर 2026 में वन विभाग ने उद्यान के अतिक्रमण, पात्र परिवारों के पुनर्वास और सीमा सुरक्षा को लेकर समीक्षा की है।

    ऐसे में वाघेश्वरी मंदिर तक रास्ता सुधारने या पर्यटन सुविधाएं बढ़ाने की कोई भी योजना पर्यावरणीय नियमों और न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप ही आगे बढ़ानी होगी। यही वजह है कि वन मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट रूप से न्यायालय के आदेशों के अधीन आवश्यक कार्यवाही करने को कहा है।

    बढ़ते पर्यटन के साथ भीड़ और पर्यावरण का सवाल

    यदि भविष्य में वाघेश्वरी मंदिर को आधिकारिक पर्यटन मानचित्र में शामिल किया जाता है, तो श्रद्धालुओं के साथ अन्य पर्यटकों की संख्या बढ़ने की संभावना होगी। इसके लिए रास्ते, पैदल आवागमन, स्वच्छता, पेयजल, सुरक्षा, आपातकालीन पहुंच और भीड़ नियंत्रण जैसी व्यवस्थाओं की जरूरत बढ़ सकती है।

    दूसरी ओर, संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान में मानवीय गतिविधियों के विस्तार का असर वन क्षेत्र और वन्यजीवों पर न पड़े, यह भी महत्वपूर्ण होगा। सितंबर 2026 में उद्यान में धार्मिक आयोजनों और पर्यावरणीय नियमों को लेकर भी सवाल उठे हैं।

    इसलिए वाघेश्वरी मंदिर के विकास का अगला चरण केवल सुशोभीकरण तक सीमित नहीं रहेगा। मंदिर को पर्यटन स्थल का दर्जा देने का निर्णय होता है तो उसके साथ श्रद्धालुओं की सुविधा और उद्यान के पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना भी बड़ी चुनौती होगी।

    फिलहाल वन विभाग की बैठक के बाद अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए गए हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वाघेश्वरी मंदिर को आधिकारिक पर्यटन मानचित्र में शामिल करने की मांग पर सरकार आगे क्या निर्णय लेती है और मंदिर तक पहुंच तथा श्रद्धालुओं की सुविधाओं में सुधार के लिए कौन से कार्य मंजूर किए जाते हैं।

  • महाराष्ट्र SIR: 38 सीटों में 37.51 लाख मतदाता ड्राफ्ट सूची से बाहर, मुंबई में भी बड़ा असर

    महाराष्ट्र SIR: 38 सीटों में 37.51 लाख मतदाता ड्राफ्ट सूची से बाहर, मुंबई में भी बड़ा असर

    महाराष्ट्र SIR में 38 मुस्लिम आबादी वाली सीटों पर 37.51 लाख मतदाता ड्राफ्ट सूची में आगे नहीं बढ़े। जानिए कारण, आंकड़े और अब क्या करें।

    मुंबई: महाराष्ट्र में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के बाद जारी प्रारूप मतदाता सूची ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर नई बहस छेड़ दी है। मुस्लिम आबादी 20 प्रतिशत से अधिक वाली 38 विधानसभा सीटों में करीब 37.51 लाख मतदाता यानी 29.77 प्रतिशत पिछले मतदाता आंकड़े से प्रारूप सूची में आगे नहीं बढ़े हैं। पूरे महाराष्ट्र में यह अनुपात 21.14 प्रतिशत है।

    हालांकि, इन आंकड़ों को सीधे मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाए जाने के तौर पर देखना सही नहीं होगा। उपलब्ध आंकड़ों में मतदाताओं को धर्म के आधार पर अलग नहीं किया गया है। नाम आगे नहीं बढ़ने के पीछे स्थानांतरण, अनुपस्थिति, मृत्यु, दोहरी प्रविष्टि और अन्य कारण शामिल हैं।

    महाराष्ट्र और 38 विधानसभा सीटों में कितना अंतर?

    क्षेत्रपिछली मतदाता संख्या के मुकाबले आगे नहीं बढ़े मतदाता
    महाराष्ट्र21.14%
    मुस्लिम आबादी 20% से अधिक वाली 38 सीटें29.77%
    इन 38 सीटों में मतदाताकरीब 37.51 लाख
    पूरे महाराष्ट्र में ऐसे मतदाता2.06 करोड़ से अधिक

    इन 38 सीटों का अनुपात राज्य के औसत से करीब 8.63 प्रतिशत अंक ज्यादा है।

    भिवंडी पूर्व में करीब आधे मतदाता आगे नहीं बढ़े

    विधानसभा क्षेत्रवार आंकड़ों में भिवंडी पूर्व में सबसे ज्यादा 49.10 प्रतिशत मतदाता प्रारूप सूची में आगे नहीं बढ़े। इसके बाद भिवंडी पश्चिम में 44.72 प्रतिशत और मुंब्रा-कलवा में 42.91 प्रतिशत का आंकड़ा रहा।

    विधानसभा क्षेत्रमुस्लिम आबादीप्रारूप सूची में आगे नहीं बढ़े
    भिवंडी पूर्व51.0%49.10%
    भिवंडी पश्चिम49.5%44.72%
    मुंब्रा-कलवा43.7%42.91%
    मानखुर्द शिवाजी नगर53.0%42.31%
    चांदिवली27.6%41.44%
    सायन-कोलीवाड़ा21.1%40.73%
    पुणे कैंटोनमेंट20.7%40.36%
    मालाड पश्चिम27.7%38.57%
    मुंबादेवी50.9%38.52%
    वर्सोवा33.5%38.46%
    नागपुर मध्य22.1%38.01%
    कुर्ला30.7%36.37%
    अंधेरी पश्चिम27.1%36.37%
    भायखला41.5%34.88%
    धारावी33.4%34.55%
    बांद्रा पूर्व33.1%34.44%

    इन आंकड़ों से यह जरूर पता चलता है कि कई मुस्लिम आबादी वाले शहरी क्षेत्रों में प्रारूप सूची से आगे नहीं बढ़े मतदाताओं का अनुपात राज्य के औसत से काफी अधिक है। लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि ये सभी मतदाता मुस्लिम थे या धर्म के आधार पर हटाए गए।

    37.51 लाख मतदाताओं के नाम आगे क्यों नहीं बढ़े?

    यहां SIR की प्रक्रिया को समझना जरूरी है। प्रारूप सूची में नाम का आगे नहीं बढ़ना अपने आप में स्थायी रूप से मतदाता सूची से नाम हट जाना नहीं है।

    38 विधानसभा क्षेत्रों के उपलब्ध आंकड़ों में सबसे बड़ी श्रेणी स्थायी रूप से स्थानांतरित मतदाताओं की है। इसके बाद अनुपस्थित या पता नहीं चल पाने वाले मतदाता हैं।

    कारणहिस्सेदारी
    स्थायी रूप से स्थानांतरित42.05%
    अनुपस्थित/पता नहीं चला35.59%
    मृत12.76%
    दोहरी प्रविष्टि8.33%
    अन्यशेष

    इससे यह भी स्पष्ट होता है कि 29.77 प्रतिशत का पूरा आंकड़ा फर्जी मतदाताओं की संख्या नहीं है। इसमें ऐसे लोग भी शामिल हैं जो दूसरे स्थान पर चले गए या पुनरीक्षण के दौरान उपलब्ध नहीं मिले।

    क्या मुस्लिम आबादी ज्यादा होने पर नाम भी ज्यादा हटे?

    इस सवाल का सीधा जवाब अभी नहीं है।

    इसका सबसे बड़ा उदाहरण मालेगांव मध्य है। यहां मुस्लिम आबादी करीब 78.4 प्रतिशत है, जो इन 38 सीटों में सबसे ज्यादा है, लेकिन प्रारूप सूची में आगे नहीं बढ़े मतदाताओं का अनुपात 23.46 प्रतिशत रहा।

    विधानसभा क्षेत्रमुस्लिम आबादीआगे नहीं बढ़े मतदाता
    मालेगांव मध्य78.4%23.46%
    भिवंडी पूर्व51.0%49.10%
    मानखुर्द शिवाजी नगर53.0%42.31%
    मुंबादेवी50.9%38.52%

    इसलिए उपलब्ध आंकड़े मुस्लिम मतदाताओं की धर्म आधारित व्यापक कटौती का निष्कर्ष निकालने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए धर्मवार मतदाता आंकड़े और व्यक्तिगत प्रविष्टियों की जांच जरूरी होगी।

    क्या सिर्फ मुस्लिम आबादी वाले इलाकों में ही ज्यादा नाम बाहर हुए?

    नहीं। यही इस मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू है।

    महाराष्ट्र में 53 विधानसभा सीटों पर आगे नहीं बढ़े मतदाताओं का अनुपात 29.77 प्रतिशत से भी ज्यादा रहा। इनमें कोलाबा, खड़कवासला, कोथरूड और कल्याण ग्रामीण जैसे क्षेत्र भी शामिल हैं।

    इससे संकेत मिलता है कि SIR का असर केवल मुस्लिम आबादी वाले क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। बड़े शहरों और तेजी से बदलती आबादी वाले इलाकों में पता बदलने, स्थानांतरण और मतदाताओं की उपलब्धता का सवाल भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

    मुंबई और ठाणे में भी बड़ा असर

    मुंबई में प्रारूप मतदाता सूची से आगे नहीं बढ़े मतदाताओं का अनुपात करीब 34.75 प्रतिशत बताया गया है। ठाणे में यह आंकड़ा करीब 38.37 प्रतिशत रहा।

    मुंबई महानगर क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग नौकरी, किराये के मकान और अन्य कारणों से एक इलाके से दूसरे इलाके में स्थानांतरित होते हैं। ऐसे में SIR के दौरान किसी पुराने पते पर मतदाता नहीं मिलने की स्थिति कई प्रविष्टियों को प्रभावित कर सकती है।

    हालांकि, किसी खास मतदाता का नाम किस कारण से आगे नहीं बढ़ा, इसका सही जवाब उसकी व्यक्तिगत प्रविष्टि और दर्ज कारण की जांच के बाद ही मिल सकता है।

    विपक्ष ने उठाए सवाल, चुनाव आयोग का जवाब भी अहम

    मतदाता सूची में इतने बड़े बदलाव को लेकर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं। विपक्षी नेताओं का दावा है कि मुंबई, मुंबई महानगर क्षेत्र और कुछ अल्पसंख्यक आबादी वाले क्षेत्रों में ज्यादा नाम प्रभावित हुए हैं। राहुल गांधी ने भी महाराष्ट्र में अलग-अलग चुनावों के दौरान मतदाताओं की संख्या में हुए बदलाव पर सवाल उठाया है।

    दूसरी ओर, चुनाव अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा सूची प्रारूप सूची है। जिन पात्र मतदाताओं के नाम नहीं हैं, उन्हें दावा दाखिल करने का अवसर दिया गया है। इसलिए प्रारूप सूची के आंकड़े को अंतिम मतदाता सूची का आंकड़ा मानना अभी जल्दबाजी होगी।

    ड्राफ्ट सूची में नाम नहीं है तो क्या करें?

    सबसे पहले मतदाता को महाराष्ट्र की आधिकारिक चुनाव संबंधी वेबसाइट पर अपना नाम खोजकर यह देखना चाहिए कि उसका नाम प्रारूप सूची में है या नहीं और यदि नहीं है तो संबंधित कारण क्या दर्ज किया गया है।

    पात्र मतदाता का नाम शामिल नहीं है तो फॉर्म 6 के माध्यम से दावा किया जा सकता है। गलत नाम हटाने पर आपत्ति के लिए फॉर्म 7 और मतदाता सूची में नाम, पता या अन्य विवरण में सुधार के लिए फॉर्म 8 का इस्तेमाल किया जाता है।

    इसलिए अगर किसी व्यक्ति का नाम प्रारूप सूची में नहीं दिखाई दे रहा है, तो उसे इसे अंतिम रूप से नाम कटने की स्थिति मानकर चुप नहीं बैठना चाहिए।

    30 सितंबर तक मिलेगा दावा करने का मौका

    SIR की प्रारूप सूची जारी होने के बाद दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया 30 सितंबर 2026 तक चलेगी। इसके बाद दावों की जांच और निपटारे की प्रक्रिया होगी।

    अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर 2026 को प्रकाशित होने वाली है।

    यानी अभी सामने आया 29.77 प्रतिशत का आंकड़ा अंतिम स्थिति नहीं है। असली तस्वीर तब स्पष्ट होगी जब दावों और आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम सूची जारी होगी।

    अब सबसे बड़ा सवाल क्या है?

    महाराष्ट्र SIR के आंकड़े निश्चित तौर पर एक बड़े बदलाव की ओर इशारा करते हैं। मुस्लिम आबादी 20 प्रतिशत से अधिक वाली 38 सीटों में प्रारूप सूची से आगे नहीं बढ़े मतदाताओं का अनुपात राज्य के औसत से करीब 8.63 प्रतिशत अंक ज्यादा है।

    लेकिन इस अंतर को केवल धार्मिक आधार पर मतदाता हटाए जाने का प्रमाण मानना उपलब्ध आंकड़ों से संभव नहीं है। अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह देखना होगी कि 30 सितंबर तक कितने पात्र मतदाता दावा दाखिल करते हैं और 4 नवंबर की अंतिम सूची में कितने नाम वापस जुड़ते हैं।

    यही अंतिम आंकड़ा बताएगा कि SIR के दौरान सामने आया बड़ा अंतर वास्तविक मतदाता बदलाव कितना था और प्रारूप स्तर पर हुई अनुपलब्धता या अन्य प्रविष्टियों का हिस्सा कितना।

  • मुंबई में BOCW सम्मेलन से पहले महाराष्ट्र की बड़ी तस्वीर, CAG ने उठाए थे ये सवाल**

    मुंबई में BOCW सम्मेलन से पहले महाराष्ट्र की बड़ी तस्वीर, CAG ने उठाए थे ये सवाल**

    मुंबई में 11-12 सितंबर को BOCW सम्मेलन होगा। महाराष्ट्र में श्रमिक पंजीकरण, कल्याण निधि और योजनाओं पर CAG की आपत्तियों के बीच नई पहल पर नजर।

    मुंबई: 11 और 12 सितंबर 2026 को मुंबई में इमारत एवं अन्य निर्माण श्रमिकों यानी बीओसीडब्ल्यू के कल्याण पर राष्ट्रीय सम्मेलन होने जा रहा है। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के श्रम मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी तथा बीओसीडब्ल्यू कल्याण बोर्डों के पदाधिकारी शामिल होंगे। सम्मेलन में श्रमिकों के पंजीकरण, कल्याणकारी योजनाओं, उपकर से मिलने वाली राशि, डिजिटल सेवाओं, कौशल और रोजगार के साथ अंतरराष्ट्रीय रोजगार के अवसरों पर चर्चा होगी।

    लेकिन मुंबई में होने वाला यह सम्मेलन सिर्फ नई योजनाओं और डिजिटल व्यवस्था की समीक्षा तक सीमित नहीं है। महाराष्ट्र के संदर्भ में इसकी अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि राज्य की निर्माण श्रमिक कल्याण व्यवस्था पर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी कैग की एक विस्तृत रिपोर्ट पहले ही कई कमियां सामने ला चुकी है।

    सम्मेलन में किन मुद्दों पर होगा मंथन?

    केंद्र सरकार के अनुसार सम्मेलन में राज्यों की अच्छी कार्यप्रणालियों और सफल उपायों को साझा किया जाएगा। इसके साथ ही श्रमिकों के पंजीकरण, कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, कल्याण निधि के प्रबंधन और तकनीक के जरिए सेवाओं को आसान बनाने पर चर्चा होगी।

    नवंबर 2025 में राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन के दौरान शुरू किए गए तीन प्रमुख प्रयासों की प्रगति की भी समीक्षा होगी। इनमें राज्य बीओसीडब्ल्यू डिजिटल लेबर चौक, लेबर चौक-सह-सुविधा केंद्र और ऑनलाइन बीओसीडब्ल्यू उपकर संग्रह पोर्टल शामिल हैं।

    इसका सीधा मतलब है कि अब चर्चा केवल योजना बनाने की नहीं, बल्कि यह देखने की भी है कि इन व्यवस्थाओं का जमीन पर कितना असर पड़ा है।

    महाराष्ट्र में कैग ने क्या तस्वीर दिखाई थी?

    महाराष्ट्र के बीओसीडब्ल्यू कल्याण की कार्यप्रणाली पर कैग की रिपोर्ट संख्या 4, 2025 में 2017-18 से 2021-22 की अवधि का प्रदर्शन ऑडिट किया गया था। इसमें श्रमिकों और निर्माण प्रतिष्ठानों के पंजीकरण, उपकर की वसूली, स्वास्थ्य और सुरक्षा, कल्याण योजनाओं तथा निधि के इस्तेमाल की जांच की गई थी।

    रिपोर्ट के मुताबिक, 60 निर्माण कार्यों की जांच में 44 यानी करीब 73 प्रतिशत प्रतिष्ठान पंजीकृत नहीं पाए गए। छह जिलों में जांचे गए 24 पंजीकृत और 24 अपंजीकृत प्रतिष्ठानों में काम कर रहे 1,391 श्रमिकों में से 894 यानी 64 प्रतिशत श्रमिक बोर्ड के साथ पंजीकृत नहीं थे। कैग ने कहा कि इससे पात्र श्रमिक विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से बाहर रह सकते हैं।

    रिपोर्ट में पंजीकरण की प्रक्रिया में देरी भी सामने आई। अप्रैल 2021 से मार्च 2022 के दौरान पंजीकृत किए गए 10.81 लाख श्रमिकों में करीब 48.18 प्रतिशत के पंजीकरण में 100 दिन से अधिक का समय लगा था। कुछ मामलों में यह अवधि 833 दिन तक पहुंची।

    कल्याण निधि के इस्तेमाल पर भी सवाल

    कैग के अनुसार 2017-18 से 2021-22 के दौरान महाराष्ट्र बोर्ड के पास कुल 16,151.82 करोड़ रुपये की उपलब्ध राशि थी। इसमें से कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर 4,253.77 करोड़ रुपये यानी केवल 26.34 प्रतिशत राशि खर्च की गई। इसी अवधि में उपकर संग्रह 7,689.73 करोड़ रुपये था।

    कैग ने यह भी दर्ज किया कि मार्च 2022 तक बोर्ड ने 11,350 करोड़ रुपये राष्ट्रीयकृत बैंकों में सावधि जमा में निवेश किए थे। रिपोर्ट में योजनाओं के क्रियान्वयन और श्रमिकों तक लाभ पहुंचाने की व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत बताई गई।

    यह आंकड़े पुराने ऑडिट काल से जुड़े हैं। इसलिए इन्हें 2026 की मौजूदा स्थिति का आंकड़ा नहीं माना जा सकता। लेकिन 11-12 सितंबर के राष्ट्रीय सम्मेलन के संदर्भ में ये आंकड़े यह सवाल जरूर खड़ा करते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में पंजीकरण, निधि के इस्तेमाल और लाभ पहुंचाने की व्यवस्था में कितना सुधार हुआ है।

    2026 में महाराष्ट्र ने क्या बदला?

    महाराष्ट्र सरकार ने जुलाई 2026 में निर्माण श्रमिकों के लिए कई नई सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को लागू करने संबंधी फैसले जारी किए हैं। महाराष्ट्र इमारत एवं अन्य निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड की आधिकारिक सूची के अनुसार 13 जुलाई 2026 को सेवानिवृत्ति पेंशन योजना, मृत्यु सहायता एवं जीवन बीमा योजना, प्रसूति सहायता योजना और पंजीकृत सक्रिय श्रमिकों के बच्चों के लिए शैक्षणिक सहायता योजना से संबंधित फैसले जारी किए गए।

    यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कैग की रिपोर्ट में 60 वर्ष से अधिक उम्र के लाभार्थियों के लिए पेंशन और समूह बीमा जैसी योजनाएं तैयार नहीं किए जाने की बात सामने आई थी। अब महाराष्ट्र में पेंशन और बीमा से संबंधित नई व्यवस्था के फैसले सामने आ चुके हैं।

    अब असली सवाल पंजीकरण और लाभ पहुंचने का है

    निर्माण श्रमिकों के लिए सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में पंजीकरण सबसे महत्वपूर्ण चरणों में से एक है। कैग की रिपोर्ट में दर्ज व्यवस्था के अनुसार 18 से 60 वर्ष की आयु का ऐसा निर्माण श्रमिक, जिसने पिछले 12 महीनों में कम से कम 90 दिन निर्माण कार्य किया हो, पात्रता की शर्तें पूरी करने पर बीओसीडब्ल्यू लाभार्थी के रूप में पंजीकरण करा सकता था।

    महाराष्ट्र बोर्ड ने ऑनलाइन व्यवस्था के जरिए पंजीकरण, नवीनीकरण और विभिन्न योजनाओं के लिए दावे जमा करने की सुविधा भी विकसित की थी। इसके बावजूद ऑडिट अवधि में पंजीकरण और नवीनीकरण में देरी जैसी समस्याएं सामने आईं।

    यही वजह है कि मुंबई सम्मेलन में डिजिटल व्यवस्था की प्रगति की समीक्षा केवल तकनीकी मुद्दा नहीं होगी। अगर डिजिटल माध्यम से पंजीकरण, रोजगार के अवसर और कल्याणकारी योजनाओं तक पहुंच आसान होती है, तो इसका सीधा असर उन श्रमिकों पर पड़ सकता है जो अब तक व्यवस्था से बाहर रहे हैं।

    डिजिटल लेबर चौक से क्या बदलेगा?

    केंद्र सरकार ने डिजिटल लेबर चौक की अवधारणा के जरिए निर्माण श्रमिकों को रोजगार के अवसरों से जोड़ने और कल्याणकारी सेवाओं तक पहुंच आसान बनाने की दिशा में पहल की है। लेबर चौक-सह-सुविधा केंद्रों का उद्देश्य श्रमिकों के लिए अधिक व्यवस्थित और सम्मानजनक सेवा उपलब्ध कराना है।

    वहीं ऑनलाइन बीओसीडब्ल्यू उपकर संग्रह पोर्टल का उद्देश्य उपकर के संग्रह और उसकी निगरानी को अधिक पारदर्शी तथा प्रभावी बनाना है। सम्मेलन में इन तीनों पहलों की प्रगति की समीक्षा होने वाली है।

    उपकर से जुटने वाली राशि और श्रमिकों का सवाल

    बीओसीडब्ल्यू व्यवस्था में निर्माण कार्यों से मिलने वाला उपकर कल्याणकारी योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय आधार है। इसलिए सम्मेलन में उपकर संग्रह की निगरानी और उसके उपयोग पर चर्चा का सीधा संबंध श्रमिकों को मिलने वाले लाभ से है।

    महाराष्ट्र में पहले भी बड़ा उपकर संग्रह और उपलब्ध निधि होने के बावजूद कैग ने उस अवधि में योजनाओं पर कम उपयोग और लाभ पहुंचाने में कमियों की ओर ध्यान दिलाया था। अब नई डिजिटल व्यवस्था के सामने सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि क्या पैसा जमा होने से लेकर पात्र श्रमिक तक लाभ पहुंचने की पूरी प्रक्रिया समयबद्ध और पारदर्शी बन पाती है?

    कौशल और रोजगार पर भी रहेगा जोर

    दो दिवसीय सम्मेलन में केवल कल्याणकारी योजनाओं पर चर्चा नहीं होगी। कौशल विकास, रोजगार के अवसर, श्रमिकों से संबंधित आंकड़े और अंतरराष्ट्रीय श्रम गतिशीलता के रास्तों पर भी विचार किया जाएगा।

    इसका महत्व इसलिए है क्योंकि निर्माण क्षेत्र बड़ी संख्या में श्रमिकों को रोजगार देता है और इस क्षेत्र में कौशल के आधार पर बेहतर रोजगार उपलब्ध कराने की संभावना भी है। अगर राज्यों की डिजिटल और कौशल आधारित व्यवस्थाओं को एक-दूसरे से जोड़ा जाता है, तो श्रमिकों के लिए रोजगार खोजने और सही अवसर तक पहुंचने की प्रक्रिया आसान हो सकती है।

    अब नजर 11-12 सितंबर के फैसलों पर

    मुंबई में होने वाली राष्ट्रीय परिषद के सामने सबसे महत्वपूर्ण चुनौती यह होगी कि अलग-अलग राज्यों में चल रही अच्छी व्यवस्थाओं को किस तरह बड़े स्तर पर लागू किया जाए और पुरानी कमियों को कैसे दूर किया जाए।

    महाराष्ट्र के मामले में खास तौर पर तीन सवाल महत्वपूर्ण रहेंगे—पात्र निर्माण श्रमिकों का पंजीकरण कितना बढ़ा, कल्याण निधि का उपयोग कितना प्रभावी हुआ और नई सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक कितनी तेजी से पहुंच रहा है।

    सम्मेलन में इन मुद्दों पर होने वाली चर्चा से यह स्पष्ट हो सकता है कि बीओसीडब्ल्यू व्यवस्था अब केवल निधि और योजनाओं के संचालन तक सीमित रहती है या फिर रोजगार, सामाजिक सुरक्षा, डिजिटल सेवाओं और श्रमिकों के अधिकारों को एक साथ जोड़ने वाली नई व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ती है।

  • Mumbai C&D Waste: BMC ने 23 सितंबर तक MDCTS Registration किया अनिवार्य

    Mumbai C&D Waste: BMC ने 23 सितंबर तक MDCTS Registration किया अनिवार्य

    Mumbai में C&D Waste पर BMC सख्त, MDCTS registration की deadline 23 सितंबर 2026। बिना VTMS वाले वाहनों पर ₹25,000 जुर्माने की कार्रवाई होगी।

    मुंबई: शहर में निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाले मलबे (C&D Waste) पर BMC ने अब डिजिटल निगरानी सख्त कर दी है।** 9 सितंबर 2026 की सार्वजनिक सूचना के मुताबिक C&D Waste से जुड़े projects, waste generators, transporters और processing/recycling से जुड़े stakeholders को Mumbai Debris Control & Tracking System (MDCTS) पर registration करना होगा। इसकी deadline 23 सितंबर 2026 है।

    इसके साथ C&D Waste ले जाने वाले वाहनों में BMC द्वारा अधिकृत Vehicle Tracking and Monitoring System (VTMS) लगाना अनिवार्य किया गया है। बिना registration या authorised और functioning VTMS के transport करने वाले वाहन पर प्रति वाहन, प्रति उल्लंघन ₹25,000 का दंड लगाया जा सकता है।

    किन लोगों को MDCTS Registration करना होगा?

    यह नियम सिर्फ बड़े builders तक सीमित नहीं है। C&D Waste पैदा करने वाले projects, developers, contractors, सरकारी व अन्य agencies, transporters तथा processing, recycling, unloading और authorised backfilling से जुड़े stakeholders इसके दायरे में हैं।

    संबंधित पक्षों को निर्धारित format में C&D Waste Management Plan भी देना होगा। Excavation से निकलने वाली मिट्टी या अन्य सामग्री को C&D Waste से अलग रखना और अलग transport करना जरूरी होगा।

    VTMS से मलबे वाले वाहनों पर कैसे नजर रखी जाएगी?

    VTMS के जरिए वाहन की movement को source से authorised destination तक track करने की व्यवस्था होगी। इससे route और disposal location की निगरानी के साथ unauthorised dumping की पहचान आसान हो सकती है।

    BMC ने यह भी अनिवार्य किया है कि transport के दौरान वाहनों को ठीक से cover रखा जाए, ताकि मलबा सड़क पर न गिरे और धूल से प्रदूषण न फैले।

    घर में Renovation कराने वालों पर क्या असर होगा?

    घर, दुकान या अन्य property में repair, renovation या demolition से निकलने वाला मलबा भी C&D Waste management व्यवस्था के दायरे में आ सकता है।

    इसलिए renovation कराने वालों को मलबा सड़क, खाली प्लॉट या किसी अनधिकृत जगह पर नहीं डलवाना चाहिए। इसे authorised collection, transportation और disposal/processing व्यवस्था के जरिए भेजना होगा।

    छोटे स्तर के debris के लिए BMC की मौजूदा व्यवस्था में authorised collection सुविधा का प्रावधान है। लागू मात्रा और प्रक्रिया के लिए MDCTS/BMC की वर्तमान guidelines देखना जरूरी होगा।

    नियम तोड़ने पर ₹25,000 के अलावा क्या होगा?

    MDCTS registration या authorised VTMS के बिना C&D Waste transport करने वाले वाहन पर ₹25,000 प्रति vehicle, प्रति violation का दंड लगाया जा सकता है।

    Unauthorised dumping, बिना अनुमति transportation या disposal तथा अन्य नियमों के उल्लंघन पर काम रोकने, permissions cancel करने, bank guarantee जब्त करने और अन्य कानूनी कार्रवाई का भी प्रावधान है।

    BMC ने पहले ही कितनी कार्रवाई की?

    C&D Waste dumping पर BMC की कार्रवाई पहले से जारी है। 1 अप्रैल से 31 अगस्त 2026 के बीच 419 C&D Waste-related violations में ₹31.64 लाख का जुर्माना लगाया गया। इनमें 349 unauthorised dumping और 70 approved plan के बिना transportation के मामले थे।

    अगस्त में ही 65 C&D Waste violations पर ₹8.54 लाख की कार्रवाई हुई।

    मुंबई में रोज 8,000 टन मलबा, Processing Capacity कितनी?

    MDCTS की जरूरत के पीछे मुंबई में पैदा होने वाला भारी C&D Waste भी बड़ी वजह है।

    उपलब्ध जानकारी के अनुसार मुंबई में रोज करीब 8,000 टन C&D Waste निकलता है, जबकि Dahisar और Diaghar की मौजूदा processing facilities की combined capacity करीब 1,200 टन प्रतिदिन है। इससे waste generation और processing capacity के बीच बड़ा gap सामने आता है।

    यह gap illegal dumping, road dust, drainage blockage और खुले स्थानों पर debris जमा होने जैसी समस्याओं को बढ़ा सकता है।

    BMC 2,000 TPD नई Processing Capacity जोड़ने की तैयारी में

    BMC City, Eastern Suburbs और Western Suburbs में integrated C&D Waste processing facilities विकसित करने की प्रक्रिया पर काम कर रही है। इसके जरिए कुल 2,000 TPD तक additional processing capacity विकसित करने का प्रस्ताव है।

    BMC tender records के अनुसार संबंधित प्रक्रिया में bid submission की deadline 10 सितंबर 2026 और bid opening 11 सितंबर 2026 निर्धारित थी।

    इससे स्पष्ट है कि महानगरपालिका illegal dumping पर enforcement के साथ processing infrastructure बढ़ाने पर भी काम कर रही है।

    MDCTS से क्या बदलेगा?

    MDCTS और VTMS का उद्देश्य C&D Waste की movement को अधिक traceable बनाना है। यानी waste generator से transporter और फिर authorised processing/disposal location तक की chain पर digital monitoring बढ़ेगी।

    इससे unauthorised dumping करने वाले वाहनों की पहचान और transporter तथा waste generator की accountability मजबूत हो सकती है। हालांकि इसकी सफलता authorised processing capacity, collection network और field-level enforcement पर भी निर्भर करेगी।

    23 सितंबर से पहले क्या करना जरूरी है?

    C&D Waste से जुड़े stakeholders को deadline से पहले:

    • MDCTS registration पूरा करना होगा।
    • जरूरी C&D Waste Management Plan जमा करना होगा।
    • authorised transporter का इस्तेमाल करना होगा।
    • वाहनों में authorised, functioning VTMS रखना होगा।
    • excavation material को C&D Waste से अलग रखना होगा।
    • मलबा केवल authorised destination पर भेजना होगा।
    • transport के दौरान vehicle को ठीक से cover रखना होगा।

    BMC ने MDCTS portal पर जारी होने वाली आगे की instructions पर नजर रखने की सलाह दी है।

    23 सितंबर 2026 के बाद compliance को लेकर BMC की enforcement और सख्त हो सकती है। मुंबई में C&D Waste की बड़ी मात्रा को देखते हुए अब चुनौती सिर्फ illegal dumping रोकने की नहीं, बल्कि waste की पूरी chain—generation, collection, transportation, tracking और processing—को प्रभावी बनाने की है।

  • संजय दत्त को मराठी सीखने का न्योता, अभिजीत राणे बोले- हमारी कक्षा में आइए

    संजय दत्त को मराठी सीखने का न्योता, अभिजीत राणे बोले- हमारी कक्षा में आइए

    संजय दत्त के मराठी बयान पर विवाद के बीच अभिजीत राणे ने उन्हें मराठी प्रशिक्षण कक्षा में आने का न्योता दिया। जानिए पूरा मामला और सरकार का नियम।

    मुंबई: संजय दत्त के मराठी भाषा को लेकर दिए गए बयान पर चर्चा के बीच भाजपा कामगार आघाड़ी के अध्यक्ष अभिजीत राणे ने अभिनेता को मराठी सीखने के लिए अपनी प्रशिक्षण कक्षा में आने का न्योता दिया है। यह निमंत्रण गोरेगांव पश्चिम के बांगुर नगर स्थित अय्यप्पा मंदिर परिसर में आयोजित मराठी प्रशिक्षण कक्षा के प्रमाणपत्र वितरण समारोह में दिया गया।

    महाराष्ट्र शासन के परिवहन विभाग, राज्य मराठी विकास संस्था, कोकण मराठी साहित्य परिषद तथा धड़क कामगार यूनियन महासंघ की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में गैर-मराठी भाषी रिक्शा चालकों को प्रशिक्षण दिया गया। आयोजकों के अनुसार, करीब 5,000 चालकों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए।

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    कार्यक्रम की तस्वीर

    दहीहंडी में संजय दत्त ने क्या कहा था?

    हाल ही में दहीहंडी कार्यक्रम में परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक की मौजूदगी में संजय दत्त से मराठी में बोलने का आग्रह किया गया था। इसके जवाब में अभिनेता ने मजाकिया अंदाज में कहा था कि वह छह साल येरवडा जेल में रहे, लेकिन फिर भी मराठी नहीं सीख पाए। उनका यह वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर तेजी से प्रसारित हुआ।

    इसी घटनाक्रम के बाद राणे ने संजय दत्त को अपनी मराठी प्रशिक्षण कक्षा में प्रवेश लेने का निमंत्रण दिया है।

    मंत्री ने वायरल वीडियो पर क्या सफाई दी?

    विवाद बढ़ने के बाद परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा कि संजय दत्त ने कार्यक्रम में मराठी बोली थी और प्रसारित किया जा रहा वीडियो काटकर संदर्भ से अलग पेश किया गया है।

    इस बीच संजय दत्त का एक पुराना वीडियो भी सामने आया, जिसमें वह मराठी में बातचीत करते दिखाई दे रहे हैं। इससे अभिनेता के मराठी ज्ञान को लेकर चर्चा और तेज हुई। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है कि उन्होंने जानबूझकर मराठी बोलने से इनकार किया था।

    महाराष्ट्र में चालकों को मराठी क्यों सिखाई जा रही है?

    राणे का निमंत्रण महाराष्ट्र में चल रहे मराठी प्रशिक्षण अभियान से जुड़ा है। सरकार की पहल के तहत रिक्शा, टैक्सी और अन्य व्यावसायिक यात्री वाहन चालकों को रोजमर्रा के कामकाज में इस्तेमाल होने वाली मराठी सिखाई जा रही है।

    प्रशिक्षण में साहित्यिक या कठिन भाषा के बजाय यात्रियों से बातचीत, गंतव्य पूछने, किराया बताने, मीटर और यात्रा से जुड़ी सामान्य बातचीत जैसे व्यावहारिक विषयों पर जोर दिया जा रहा है।

    अगस्त के अंत तक सामने आए आंकड़ों के अनुसार, राज्य में करीब 1.65 लाख व्यावसायिक वाहन चालकों को इस तरह का प्रशिक्षण दिया जा चुका था।

    क्या मराठी सीखना चालकों के लिए जरूरी है?

    महाराष्ट्र में रिक्शा, टैक्सी और अन्य व्यावसायिक यात्री वाहन चालकों के लिए मराठी के व्यावहारिक ज्ञान से जुड़े नियम लागू किए गए हैं। अगस्त 2026 में नियमों में बदलाव के बाद इसका दायरा ऐप आधारित कैब चालकों और संबंधित परमिट धारकों तक भी बढ़ाया गया।

    हालांकि, नियमों के पालन के लिए चालकों को अतिरिक्त समय दिया गया है। ऐप आधारित कैब चालकों की ओर से नियम को अदालत में चुनौती दिए जाने के बाद राज्य सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट को बताया था कि उन्हें मराठी सीखने के लिए एक साल का अतिरिक्त समय दिया जाएगा।

    इससे साफ है कि प्रशिक्षण की नीति खत्म नहीं हुई है, बल्कि नियमों का पालन करने के लिए चालकों को समय दिया गया है।

    कार्यक्रम में कौन-कौन मौजूद रहा?

    प्रमाणपत्र वितरण समारोह में भाजपा मुंबई के महासचिव आचार्य पवन त्रिपाठी, भाजपा मुंबई के महासचिव विनोद शेलार, सूचना के अधिकार कार्यकर्ता अनिल गलगली तथा धड़क कामगार यूनियन और भाजपा कामगार आघाड़ी के पदाधिकारी मौजूद रहे।

    संजय दत्त को मराठी कक्षा में शामिल होने का अभिजीत राणे का निमंत्रण अब इस पूरे घटनाक्रम में नया मोड़ है। अभिनेता की ओर से इस निमंत्रण पर कोई प्रतिक्रिया सामने आती है या वह प्रशिक्षण कक्षा में शामिल होते हैं, इस पर आगे नजर रहेगी।

  • साकीनाका मैनहोल हादसा: असलम शेख की पत्नी को ₹10 लाख मिले, जिम्मेदारी पर सवाल बरकरार

    साकीनाका मैनहोल हादसा: असलम शेख की पत्नी को ₹10 लाख मिले, जिम्मेदारी पर सवाल बरकरार

    साकीनाका मैनहोल हादसे में असलम शेख की पत्नी के खाते में ₹10 लाख जमा हुए। जानिए जांच, BMC कार्रवाई और जिम्मेदारी पर अब तक क्या हुआ।

    मुंबई: साकीनाका स्थित खैरानी रोड मैनहोल हादसे में दिवंगत असलम शेख के परिवार को बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की ओर से ₹10 लाख की आर्थिक सहायता मिल गई है। यह रकम असलम शेख की पत्नी अंजुम शेख के बैंक खाते में 4 अगस्त 2026 को सीधे जमा की गई थी। 8 सितंबर को उनकी ओर से महानगरपालिका को लिखित आभार पत्र दिए जाने के बाद यह जानकारी सामने आई।

    लेकिन इस आर्थिक मदद के साथ करीब दो महीने पुराने इस मामले में एक बड़ा सवाल अब भी बना हुआ है—2 जुलाई को खुले मैनहोल में गिरकर हुई असलम शेख की मौत के लिए अंतिम जिम्मेदारी किसकी तय हुई और जांच अब किस स्थिति में है?

    अंजुम शेख के खाते में कब जमा हुए ₹10 लाख?

    BMC के मुताबिक, दुर्घटना के बाद मुंबई की महापौर रितू तावडे ने शेख परिवार से मुलाकात कर ₹10 लाख की आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया था। इसके बाद एल विभाग कार्यालय ने परिवार से बैंक खाते और वारसाहक्क से जुड़े जरूरी दस्तावेज पूरे कराए।

    2 जुलाई को खैरानी रोड पर क्या हुआ था?

    2 जुलाई 2026 को साकीनाका के खैरानी रोड पर drainage-related काम के दौरान एक मैनहोल खुला हुआ था। इसी दौरान असलम शेख उसमें गिर गए और तेज पानी के बहाव में बह गए। कई घंटे की तलाश के बाद उनका शव drainage channel से बरामद किया गया। उस समय मौके पर पर्याप्त barricading और सुरक्षा इंतजाम नहीं होने को लेकर गंभीर सवाल उठे थे।

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    मृतक असलम शेख की फाइल तस्वीर

    जानकारी के अनुसार असलम शेख साकीनाका के यादव नगर इलाके के रहने वाले थे। घटना के बाद BMC और पुलिस दोनों स्तर पर कार्रवाई शुरू हुई।

    हादसे के बाद BMC ने क्या कार्रवाई की?

    हादसे के तत्काल बाद BMC ने चार अधिकारियों को निलंबित किया था। इसके साथ contractor की भूमिका की भी जांच शुरू हुई।

    पुलिस ने भी contractor और उससे जुड़े तीन contractual workers के खिलाफ मामला दर्ज किया था। तीन workers को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी, जबकि contractor के बारे में पुलिस ने कार्रवाई शुरू की थी।

    इससे मामला केवल एक दुर्घटना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि manhole maintenance, contractor supervision और civic accountability का मुद्दा बन गया।

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    घटना की पुरानी तस्वीर

    जांच में work order को लेकर क्यों उठे सवाल?

    इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू जांच के दौरान सामने आया।

    BMC की जांच से जुड़ी रिपोर्टों में अधिकारियों के बयानों में विरोधाभास सामने आने की बात कही गई। इसके बाद यह सवाल उठा कि जिस स्थान पर protective grille लगाने का काम चल रहा था, उस काम के लिए औपचारिक work order किसके पास था और काम किसकी अनुमति से शुरू हुआ था।

    अगस्त में सामने आई जानकारी के मुताबिक contractor ने show-cause notice के जवाब में दावा किया कि उसके work order की अवधि पहले ही समाप्त हो चुकी थी और उसने किसी को काम नहीं दिया था। इस दावे ने जांच को और जटिल बना दिया।

    सबसे गंभीर सवाल—अगर contractor का work order समाप्त हो चुका था, तो मैनहोल पर protective work कौन कर रहा था और वह काम किस अनुमति या निगरानी में किया जा रहा था?

    हालांकि यह सवाल जांच के संदर्भ में है और इसे किसी व्यक्ति की अंतिम जिम्मेदारी के रूप में नहीं माना जा सकता। संबंधित विभाग और पुलिस की कार्रवाई का अंतिम निष्कर्ष महत्वपूर्ण रहेगा।

    BMC की जांच में contractor और अधिकारियों की भूमिका पर क्या सामने आया?

    जुलाई के अंत तक BMC की inquiry report सार्वजनिक नहीं होने को लेकर भी सवाल उठे थे। 31 जुलाई की रिपोर्टों में बताया गया था कि हादसे के करीब एक महीने बाद भी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई थी।

    बाद की रिपोर्टिंग में fact-finding exercise से contractor और संबंधित ward अधिकारियों की ओर से safety और procedural lapses की बात सामने आई। इससे यह संकेत मिला कि जांच केवल contractor तक सीमित नहीं थी, बल्कि civic supervision की भूमिका भी जांच के दायरे में थी।

    हालांकि अंतिम जिम्मेदारी तय करने के लिए आधिकारिक जांच और कानूनी प्रक्रिया का निष्कर्ष महत्वपूर्ण रहने वाला है।

    हादसे से पहले ही BMC को High Court से मिल चुकी थी चेतावनी

    असलम शेख की मौत से कुछ ही दिन पहले Bombay High Court ने मुंबई में खुले मैनहोल को लेकर BMC को कड़ी फटकार लगाई थी।

    अदालत ने monsoon के दौरान खुले मैनहोल से किसी इंसानी जान के जाने की स्थिति को गंभीरता से लिया था और BMC से सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा था। असलम शेख की मौत के बाद यह सवाल और महत्वपूर्ण हो गया कि जब manhole safety पहले से न्यायिक निगरानी में थी, तब खैरानी रोड पर maintenance work के दौरान सुरक्षा व्यवस्था क्यों विफल हुई।

    BMC ने पूरे मुंबई के मैनहोल की safety को लेकर क्या कहा?

    हादसे के बाद BMC ने शहर के सभी 26 wards में manhole inspection और सुरक्षा उपायों को लेकर कार्रवाई शुरू करने की बात कही थी।

    लेकिन जुलाई में BMC के Additional Municipal Commissioner ने यह भी स्पष्ट किया था कि महानगरपालिका यह प्रमाणित नहीं कर सकती कि मुंबई के हर manhole chamber में protective safety net मौजूद है, क्योंकि safety-net installation एक continuous process है।

    यही बात इस मामले को सिर्फ साकीनाका की एक दुर्घटना से आगे ले जाती है। Mumbai में manhole safety की समस्या में पुराने covers, maintenance के दौरान खोले गए chambers, protective grills, barricading और monitoring—सभी शामिल हैं।

    जानकारी के अनुसार मुंबई में करीब 3,400 किलोमीटर का storm-water drain network और 2,081 किलोमीटर का sewer network है, जिसके maintenance के लिए बड़ी संख्या में manholes का इस्तेमाल होता है।

    क्या ₹10 लाख मिलने से मामला खत्म हो गया?

    नहीं। ₹10 लाख की आर्थिक सहायता परिवार के लिए तत्काल वित्तीय सहारा है, लेकिन इससे पुलिस जांच या प्रशासनिक जवाबदेही अपने आप समाप्त नहीं होती।

    असलम शेख की मौत के मामले में तीन अलग-अलग स्तरों को अलग-अलग देखना जरूरी है—

    • परिवार को आर्थिक सहायता: ₹10 लाख खाते में जमा हो चुके हैं।
    • प्रशासनिक कार्रवाई: BMC अधिकारियों के निलंबन और विभागीय जांच की प्रक्रिया हुई।
    • कानूनी जिम्मेदारी: contractor और workers के खिलाफ पुलिस कार्रवाई हुई और जांच का अंतिम निष्कर्ष अभी महत्वपूर्ण है।

    इसलिए आर्थिक सहायता को अंतिम कानूनी compensation या मामले की पूरी जिम्मेदारी तय होने के बराबर नहीं माना जा सकता, जब तक संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड अपनी जवाबदेही स्पष्ट न करे।

  • QR-Code धारक फेरीवालों को कारोबार की अनुमति की मांग, 10 सितंबर को बोरीवली में मोर्चा

    QR-Code धारक फेरीवालों को कारोबार की अनुमति की मांग, 10 सितंबर को बोरीवली में मोर्चा

    मुंबई के QR-Code धारक फेरीवालों को कारोबार की अनुमति देने की मांग को लेकर आजाद हॉकर यूनियन 10 सितंबर को बोरीवली में मोर्चा निकालेगी।

    मुंबई: QR-Code धारक फेरीवालों को कारोबार करने की अनुमति देने और उनके खिलाफ कार्रवाई रोकने की मांग को लेकर आजाद हॉकर यूनियन की ओर से 10 सितंबर 2026 को बोरीवली पश्चिम में मोर्चा निकाला जाएगा। यूनियन का दावा है कि QR-Code होने के बावजूद बड़ी संख्या में फेरीवाले पिछले दो वर्षों से कारोबार से वंचित हैं।

    यूनियन के मुताबिक, इस स्थिति के कारण फेरीवालों के सामने रोजगार और परिवार के भरण-पोषण का संकट खड़ा हो गया है। लगातार हो रही कार्रवाई को लेकर फेरीवालों में नाराजगी है। इसी मुद्दे को लेकर यह मोर्चा आयोजित किया जा रहा है।

    मोर्चा 10 सितंबर को दोपहर 12 बजे जांभली गली, मोक्ष प्लाजा, एस.वी. रोड, बोरीवली पश्चिम से शुरू होगा। इसके बाद प्रदर्शनकारी महानगरपालिका के आर/मध्य विभाग कार्यालय के सामने पहुंचेंगे।

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    QR-Code के बाद भी कारोबार से वंचित रखने का आरोप

    आजाद हॉकर यूनियन का कहना है कि QR-Code जारी होने के बावजूद संबंधित फेरीवालों को कारोबार करने की अनुमति नहीं मिल रही है। यूनियन ने दावा किया है कि पिछले करीब दो वर्षों से इस समस्या के कारण कई फेरीवाले अपने रोजमर्रा के रोजगार से वंचित हैं।

    यूनियन के अनुसार, एक तरफ फेरीवालों को पहचान और नियमन से जुड़ी प्रक्रिया के तहत QR-Code दिया गया है, वहीं दूसरी तरफ कारोबार करने के दौरान कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। यूनियन ने इसे लेकर प्रशासन से स्पष्ट नीति और कानूनी व्यवस्था के तहत कारोबार की अनुमति देने की मांग की है।

    Street Vendors Act लागू करने की मांग

    मोर्चे में Street Vendors Act, 2014 को पूरी तरह लागू करने की मांग भी उठाई जाएगी। यूनियन ने न्यायालय के आदेशों का पालन करने तथा संरक्षित फेरीवालों के खिलाफ अनावश्यक कार्रवाई और उत्पीड़न रोकने की मांग की है।

    आजाद हॉकर यूनियन की प्रमुख मांगों में QR-Code धारक फेरीवालों के खिलाफ कार्रवाई तत्काल रोकना, पिछले दो वर्षों से रोजगार से वंचित फेरीवालों को कारोबार का अवसर देना और कानून के तहत उन्हें सुरक्षित तरीके से कारोबार करने की व्यवस्था करना शामिल है।

    यूनियन का कहना है कि फेरीवालों को सड़कों पर अव्यवस्था फैलाने वाले लोगों के रूप में देखने के बजाय उन्हें कानून के दायरे में लाकर रोजगार का अवसर दिया जाना चाहिए।

    “यह सिर्फ बोरीवली के फेरीवालों का मुद्दा नहीं”

    यूनियन पदाधिकारियों के मुताबिक, यह मामला केवल बोरीवली तक सीमित नहीं है। मुंबई में बड़ी संख्या में फेरीवाले अपने परिवार का खर्च इसी रोजगार से चलाते हैं।

    यूनियन के पदाधिकारियों ने कहा, “यह सिर्फ बोरीवली के फेरीवालों की लड़ाई नहीं है, बल्कि मुंबई के हजारों मेहनतकश फेरीवालों के रोजगार और अधिकार की लड़ाई है। रोजगार हमारा अधिकार है। प्रशासन को फेरीवालों की समस्या को सहानुभूति और कानूनी दृष्टिकोण से देखना चाहिए।”

    यूनियन ने मुंबई के सभी QR-Code धारक फेरीवालों और अन्य मेहनतकश फेरीवालों से मोर्चे में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की है।

    कौन-कौन होंगे शामिल?

    आयोजकों के अनुसार, मोर्चे में नगर पथ विक्रेता समिति, मुंबई के सदस्य दया शंकर सिंह और जय शंकर सिंह तथा जोन 7 के सदस्य प्रकाश उदेसी और शांताराम शिंदे प्रमुख रूप से उपस्थित रहेंगे। इनके अलावा लवकुश तिवारी और सलाउद्दीन पटेल के भी शामिल होने की जानकारी दी गई है।

    मोर्चे का आयोजन शांताराम शिंदे, प्रवीण पाठक, रवी खावडिया, राकेश खावडिया, श्याम सुंदर झा, रविंद्र मिश्रा, फिरोज खान, अहसान अंसारी, पवन तांडले, मनोज राय और राजेश राऊत की ओर से किया जा रहा है।

    10 सितंबर को बोरीवली में जुटेंगे फेरीवाले

    आयोजकों के अनुसार, मोर्चा शांतिपूर्ण तरीके से निकाला जाएगा। इसकी शुरुआत दोपहर 12 बजे जांभली गली से होगी और आर/मध्य विभाग कार्यालय के सामने पहुंचकर फेरीवालों की मांगों को प्रशासन के सामने रखा जाएगा।

    अब मुख्य नजर इस बात पर रहेगी कि QR-Code धारक फेरीवालों की कारोबार संबंधी मांग और Street Vendors Act के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर महानगरपालिका प्रशासन क्या कदम उठाता है।

  • महाराष्ट्र में खिलाड़ियों को 5% नौकरी आरक्षण, 3 महीने में Sports Certificate Verification अनिवार्य

    महाराष्ट्र में खिलाड़ियों को 5% नौकरी आरक्षण, 3 महीने में Sports Certificate Verification अनिवार्य

    महाराष्ट्र में खिलाड़ियों के 5% नौकरी आरक्षण की नई नीति मंजूर, पुराने प्रमाणपत्रों का 3 महीने में सत्यापन जरूरी; जानिए किसे मिलेगा लाभ।

    मुंबई: महाराष्ट्र में सरकारी नौकरी का इंतजार कर रहे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के लिए बड़ा फैसला हुआ है। राज्य मंत्रिमंडल ने सरकारी, अर्ध-सरकारी और अन्य पात्र संस्थाओं में खिलाड़ियों के लिए लागू 5% नौकरी आरक्षण की संशोधित नीति को मंजूरी दे दी है। नई व्यवस्था में सबसे अहम बदलाव यह है कि आरक्षण का लाभ लेने वाले खिलाड़ियों को अपने Sports Certificate की वैधता का सत्यापन तीन महीने के भीतर कराना होगा।

    यह तीन महीने की समयसीमा नए संशोधित शासन निर्णय (GR) के जारी होने की तारीख से लागू होगी। सरकार ने Sports Quota से जुड़े पहले के सभी शासन निर्णयों को रद्द कर एक एकीकृत नीति लागू करने का फैसला किया है। नया GR जल्द जारी किया जाएगा।

    5% Sports Quota किन नौकरियों में लागू होगा?

    संशोधित नीति के तहत यह आरक्षण मंत्रालयीन विभागों और उनके अधीन सरकारी कार्यालयों के साथ जिला परिषद, पंचायत समिति, ग्राम पंचायत, महानगरपालिका, सरकारी उपक्रम, मंडल, महामंडल, विश्वविद्यालय, सरकारी अनुदान प्राप्त शैक्षणिक संस्थान, आश्रमशाला, सहकारी संस्थाओं और सरकारी निधि अथवा अनुदान प्राप्त अन्य पात्र संस्थाओं में सीधी भर्ती के पदों पर लागू रहेगा।

    इसमें समूह-अ, समूह-ब, समूह-क और समूह-ड के पद शामिल होंगे।

    महाराष्ट्र में 5% Sports Quota की व्यवस्था 30 अप्रैल 2005 से लागू है। क्रीड़ा विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार अब तक 4,949 खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी में इसका लाभ मिल चुका है।

    किस खिलाड़ी को किस पद के लिए पात्रता मिलेगी?

    नई नीति में खेल उपलब्धि और प्रतियोगिता के स्तर के आधार पर अलग-अलग समूहों के लिए पात्रता तय की गई है।

    समूह-अ: ओलंपिक, एशियन गेम्स, वरिष्ठ विश्व एवं एशियन चैंपियनशिप/कप, कॉमनवेल्थ गेम्स, टेनिस ग्रैंड स्लैम, ग्रैंडमास्टर स्तर की शतरंज प्रतियोगिताओं और पैरालंपिक सहित अधिकृत अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त खिलाड़ी।

    समूह-ब राजपत्रित: युवा/कनिष्ठ विश्व एवं एशियन चैंपियनशिप, कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप, यूथ ओलंपिक तथा संबंधित अंतरराष्ट्रीय स्कूल, विश्वविद्यालय और पैरा प्रतियोगिताओं के पदक विजेता।

    समूह-ब अराजपत्रित: नेशनल गेम्स, राष्ट्रीय चैंपियनशिप, राष्ट्रीय फेडरेशन कप, पैरा नेशनल गेम्स और राष्ट्रीय स्कूल खेल प्रतियोगिताओं के पदक विजेता।

    समूह-क: खेलो इंडिया, अखिल भारतीय अंतर-विश्वविद्यालय, राज्य स्तरीय वरिष्ठ/युवा/कनिष्ठ, स्कूल, अंतर-विश्वविद्यालय और पैरा खेल प्रतियोगिताओं के पदक विजेता।

    समूह-ड: निर्धारित खेल योग्यता रखने वाले खिलाड़ी अथवा वरिष्ठ वर्ग की राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता, राष्ट्रीय चैंपियनशिप और वरिष्ठ पैरा राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेने वाले खिलाड़ी।

    क्रिकेट, कबड्डी, खो-खो और शतरंज भी पात्र खेलों में

    नई नीति में खेलों की पात्रता का दायरा बढ़ाया गया है। 2005 के बाद लगातार तीन ओलंपिक में शामिल खेलों के साथ क्रिकेट, कबड्डी, खो-खो, शतरंज और मल्लखंब को भी शामिल किया गया है।

    ओलंपिक, पैरालंपिक, एशियन गेम्स, पैरा एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स में तीन ओलंपिक वाली शर्त लागू नहीं होगी।

    पात्र खेलों में एथलेटिक्स, बैडमिंटन, बॉक्सिंग, फुटबॉल, हॉकी, जूडो, रोइंग, शूटिंग, तैराकी, टेबल टेनिस, वेटलिफ्टिंग, कुश्ती, टेनिस, गोल्फ, घुड़सवारी, सेलिंग, स्पोर्ट्स क्लाइम्बिंग और अन्य निर्धारित खेल भी शामिल हैं।

    पुराने Sports Certificate वालों के लिए क्या बदलेगा?

    नई नीति का यह हिस्सा हजारों खिलाड़ियों के लिए महत्वपूर्ण है। पुराने शासन निर्णयों के तहत Sports Quota के पात्र खिलाड़ियों को भी नए GR की तारीख से तीन महीने के भीतर अपने Sports Certificate का verification कराना होगा।

    यानी केवल पहले से जारी प्रमाणपत्र होना पर्याप्त नहीं होगा। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उसकी वैधता की पुष्टि कराना जरूरी होगा।

    ‘क्रीड़ा ई-प्रमाण’ से होगी डिजिटल जांच

    सरकार Sports Certificate verification के लिए ‘क्रीड़ा ई-प्रमाण’ की डिजिटल व्यवस्था लागू कर रही है। प्रतियोगिता समाप्त होने के सात दिनों के भीतर परिणामों को डिजिटल हस्ताक्षर के साथ upload करना अनिवार्य होगा।

    Blockchain technology के जरिए रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने और automated cryptographic hash के माध्यम से उसकी authenticity जांचने की व्यवस्था की जाएगी। इसका उद्देश्य फर्जी और छेड़छाड़ किए गए खेल प्रमाणपत्रों पर रोक लगाना है।

    5% आरक्षण का उद्देश्य क्या है?

    सरकार के मुताबिक इस नीति का उद्देश्य राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सरकारी रोजगार में अवसर देना और उनकी सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा मजबूत करना है।

    Sports Quota को Mission Lakshyavedh जैसी खेल प्रोत्साहन पहलों के साथ देखने पर इसका व्यापक उद्देश्य खिलाड़ियों को बेहतर training और competition के साथ भविष्य की employment security उपलब्ध कराना भी है।

    महाराष्ट्र कैबिनेट के अन्य फैसले

    PRAGATI Health Project

    सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत करने के लिए 2026 से 2031 तक PRAGATI Project लागू करने को मंजूरी दी गई है। परियोजना की अनुमानित लागत ₹4,250 करोड़ है, जिसमें ₹2,975 करोड़ Asian Development Bank loan और ₹1,275 करोड़ राज्य का हिस्सा होगा।

    इसके तहत कोल्हापुर और नांदेड में 500-500 बेड, नागपुर और लातूर में 300-300 बेड तथा पुणे में 200 बेड का विशेष रेफरल अस्पताल प्रस्तावित है। कुल 2,430 पद भी बनाए जाएंगे।

    Hyosung India को Capital Grant

    छत्रपति संभाजीनगर के Auric City, Shendra में Hyosung India के Spandex/Elastomeric Yarn manufacturing project को Integrated and Sustainable Textile Policy 2023-28 के तहत विशेष मामले में capital grant देने को मंजूरी मिली है। सरकार ने इसे मराठवाड़ा और विदर्भ में निवेश तथा रोजगार की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया है।

    Madha में District and Additional Sessions Court

    सोलापुर के Madha में नया District and Additional Sessions Court स्थापित होगा। अभी यहां के मामले Barshi court में चलते हैं। नए न्यायालय के लिए 20 नियमित और 6 outsourced पद मंजूर किए गए हैं।

    मुंबई में दो भूमि संबंधी फैसले

    मुंबई के Bhuleshwar स्थित Kaivalyadham Yogic Centre के भूमि पट्टे का अगले 30 वर्षों के लिए ₹12 सालाना की रियायती दर पर नवीनीकरण मंजूर किया गया है।

    वहीं Chembur की Bhikkhu Sangh United Buddhist Mission संस्था को उसके कब्जे में रही 1,735 वर्ग मीटर सरकारी जमीन नाममात्र दर पर lease पर देने को मंजूरी दी गई है।

    Koradi में Mahalakshmi Jagdamba Sansthan को जमीन

    नागपुर के Koradi में तीर्थक्षेत्र विकास योजना के तहत विकसित सरकारी जमीन को Shri Mahalakshmi Jagdamba Sansthan को 30 वर्ष के लिए lease पर देने की मंजूरी दी गई है। इसका उद्देश्य तीर्थक्षेत्र में सुविधाओं और रखरखाव का बेहतर प्रबंधन करना है।

    आगे क्या?

    Sports Quota के मामले में अब संशोधित एकीकृत Government Resolution जारी होना सबसे महत्वपूर्ण अगला कदम है। इसी के बाद verification की औपचारिक प्रक्रिया और तीन महीने की समयसीमा प्रभावी होगी।

    खिलाड़ियों के लिए नई नीति का सबसे बड़ा बदलाव केवल 5% आरक्षण जारी रखना नहीं, बल्कि eligibility, certificate verification और digital authentication को एकीकृत व्यवस्था में लाना है।

  • Mumbai FDA Action: IRCTC Kitchen और ISKCON Juhu पर बड़ा एक्शन, Zepto-linked Facility भी घेरे में

    Mumbai FDA Action: IRCTC Kitchen और ISKCON Juhu पर बड़ा एक्शन, Zepto-linked Facility भी घेरे में

    Mumbai FDA ने IRCTC की Kurla kitchen और ISKCON Juhu के 3 food units पर कार्रवाई की। Zepto-linked facility में भी food safety violations मिले।

    मुंबई: शहर में food safety को लेकर महाराष्ट्र FDA का crackdown लगातार सख्त होता जा रहा है। ताजा कार्रवाई में Kurla की IRCTC-linked base kitchen का licence suspend किया गया है, जबकि Juhu स्थित ISKCON के तीन food establishments पर भी licence suspension की कार्रवाई हुई है। जांच में cockroaches, खुले में रखा खाना, जाम नालियां, खराब hygiene और food-safety records में गंभीर कमियां सामने आईं। Zepto से जुड़ी एक facility में भी pest infestation और cold-chain management में खामियां मिली हैं।

    IRCTC की Kurla kitchen में क्या मिला?

    महाराष्ट्र FDA ने 2 सितंबर को Kurla West स्थित R K Associates & Hoteliers Pvt Ltd की base kitchen का निरीक्षण किया। यह kitchen IRCTC network के जरिए railway passengers के लिए food supply करती है।

    जांच के दौरान food storage और preparation areas में cockroaches पाए गए। कुछ food खुले में रखा था और garbage के पास food preparation होने की बात सामने आई। Kitchen infrastructure में भी कमियां मिलीं, जिनमें damaged tiles और अस्वच्छ surfaces शामिल हैं। बर्तनों और food-contact equipment पर गंदगी तथा जंग की शिकायत भी inspection findings में शामिल रही।

    Food handlers से जुड़े records ने भी सवाल खड़े किए। कुल 34 food handlers में केवल 21 के medical fitness certificates उपलब्ध थे। एक कर्मचारी उंगली पर चोट होने के बावजूद food handling करता मिला। Food transport vehicle की cleanliness और maintenance को लेकर भी FDA ने कमियां दर्ज कीं।

    इन findings के बाद संबंधित kitchen का food licence suspend कर दिया गया।

    क्या IRCTC की पूरी catering service बंद हो गई?

    नहीं। कार्रवाई एक specific IRCTC-linked kitchen पर हुई है। FDA ने मुंबई और ठाणे में IRCTC से जुड़े कुल पांच base kitchens/food plazas की जांच की थी। R K Associates का licence suspend किया गया, जबकि Om Sai Ram Enterprises, Ambuj Hotels & Real Estate Pvt Ltd, Express Food Services और Araha Hospitality Pvt Ltd को improvement notices दिए गए।

    इसका मतलब यह है कि पूरे IRCTC food network को बंद करने का आदेश नहीं दिया गया है।

    ISKCON Juhu के तीन food units पर भी licence suspension

    3 सितंबर को Juhu स्थित ISKCON परिसर में food operations की जांच की गई। FDA को यहां भी कई food-safety violations मिले और तीन establishments के licences suspend किए गए।

    Food Services Restaurant से जुड़ी findings में खुले kitchen entrance, pest-control में कमी, clogged drains, drains में food waste और pest droppings जैसी समस्याएं शामिल हैं। Raw material inspection, laboratory testing, cleaning, employee medical examination, vaccination और staff training से जुड़े records में भी deficiencies बताई गई हैं।

    Govindas Restaurant में pest infestation, clogged drains और cold-storage area में पानी जमा होने की बात सामने आई। Raw और cooked food को पर्याप्त रूप से अलग नहीं रखने की कमी भी दर्ज की गई, जिससे cross-contamination का risk पैदा हो सकता है। Food testing, drinking-water testing, raw-material inspection, pest control और staff records से जुड़े compliance gaps भी पाए गए।

    Zepto-linked facility में cockroaches और cold-chain की समस्या

    FDA की कार्रवाई में Malad West स्थित Drogheria Sellers Pvt Ltd भी शामिल है, जिसे Zepto-linked food facility के तौर पर रिपोर्ट किया गया है।

    Inspection में food-storage areas में cockroaches मिलने की जानकारी सामने आई। Dairy products की storage temperature को लेकर भी गंभीर सवाल उठे। रिपोर्ट के मुताबिक milk, paneer और curd करीब 14–15°C पर रखे मिले, जबकि cold room का temperature करीब 20–21°C बताया गया। इससे cold-chain management पर सवाल खड़े हुए।

    दूसरे food businesses पर भी कार्रवाई

    FDA की ताजा कार्रवाई केवल IRCTC, ISKCON और Zepto-linked facility तक सीमित नहीं रही। मुंबई और आसपास कई अन्य food businesses भी regulatory action की चपेट में आए हैं।

    Bombay’s The Food Fusion Cafe, Ghatkopar के खिलाफ licence suspension की recommendation की गई। यहां uncovered cooked rice, खुले container में raw chicken, improperly sealed vegetables, refrigeration और drainage से जुड़ी कमियां तथा जरूरी testing/training records की कमी रिपोर्ट हुई।

    Shree Madhuram, Borivali East के registration को suspend करने की recommendation की गई। Kothari Sweet और Mulund Farsan Mart पर भी food production, expired products और pest-related violations को लेकर कार्रवाई हुई।

    Maharashtra Biryani Center, Goregaon East का licence hygiene, pest control, drainage और जरूरी food-safety documentation से जुड़ी कमियों के कारण suspend किया गया।

    FDA की कार्रवाई में Mateshwari Milk, Kharghar भी शामिल है। यहां milk processing, temperature monitoring, calibration, sanitation और labelling से जुड़ी compliance deficiencies report हुई हैं।

    Licence suspend होने का क्या मतलब है?

    Food licence suspension का मतलब संबंधित food business को उस licence के तहत food activity जारी रखने की अनुमति नहीं रहती, जब तक regulatory compliance और आगे की प्रक्रिया पूरी न हो। इसलिए “licence suspended” और “improvement notice” को एक जैसा नहीं समझना चाहिए।

    इसी कार्रवाई में कुछ businesses के licences suspend हुए हैं, जबकि कुछ को केवल improvement notices दिए गए हैं और कुछ के खिलाफ suspension की recommendation की गई है।

    Maharashtra FDA का crackdown क्यों बढ़ा?

    यह कार्रवाई किसी एक दिन की isolated inspection नहीं दिखती। महाराष्ट्र FDA ने पिछले कुछ महीनों में food adulteration और hygiene violations के खिलाफ enforcement तेज किया है। Commissioner Tukaram Mundhe के नेतृत्व में विभाग ने food businesses की inspections और enforcement को अधिक systematic बनाने पर जोर दिया है।

    FDA ने अब year-round “Festival Enforcement Calendar” भी शुरू किया है। इसके तहत festivals, fairs, religious events और बड़े public gatherings के दौरान food adulteration और hygiene violations पर पहले से तय surveillance और sampling की व्यवस्था की जा रही है।

    इस plan में dairy products, sweets, edible oils, paneer, dry fruits और दूसरे high-risk food items पर विशेष निगरानी की जा सकती है। Festival से पहले manufacturing units, markets, cold stores, godowns और wholesale markets तक inspections की योजना बनाई गई है।

    आगे क्या होगा?

    ताजा कार्रवाई से संकेत साफ है कि Maharashtra FDA अब केवल restaurants पर ही नहीं, बल्कि railway food suppliers, institutional kitchens, e-commerce-linked food facilities, dairy businesses और festival-related food operations पर भी निगरानी बढ़ा रहा है।

    ऐसे में जिन businesses के licences suspend हुए हैं, उनके लिए अगला महत्वपूर्ण चरण compliance और regulatory review होगा, जबकि improvement notices पाने वाले establishments को FDA की बताई कमियों को दूर करना होगा।

    मुंबई में food safety को लेकर चल रहा यह crackdown आने वाले festival season में और तेज हो सकता है। FDA का नया enforcement calendar भी इसी दिशा में संकेत देता है कि high-risk food categories और बड़े food-distribution operations पर निगरानी अब पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित तरीके से की जाएगी।