Category: Maharashtra

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  • मुंबई में यात्रियों की जेब पर ‘मीटर गेम’ का खतरा? दहिसर में 5 वाहन पकड़े, आरटीओ से बड़े सवाल

    मुंबई में यात्रियों की जेब पर ‘मीटर गेम’ का खतरा? दहिसर में 5 वाहन पकड़े, आरटीओ से बड़े सवाल

    दहिसर में टैक्सी-रिक्शा के मीटर में इलेक्ट्रॉनिक छेड़छाड़ का खुलासा हुआ है। पुलिस ने 5 आरोपी और 5 वाहन पकड़े। अब पूरे मुंबई में जांच की मांग।

    मुंबई: मुंबई में टैक्सी या रिक्शा में बैठने के बाद मीटर पर दिखने वाला किराया ही यात्री के लिए भरोसे का आधार होता है। लेकिन दहिसर में किराया मीटर के साथ इलेक्ट्रॉनिक छेड़छाड़ का मामला सामने आने के बाद इस भरोसे पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। दहिसर पुलिस ने मीटर में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगाकर किराए में हेरफेर करने के आरोप में पांच लोगों के खिलाफ कार्रवाई की है और पांच वाहन जब्त किए हैं।

    पुलिस के मुताबिक, आरोपियों पर टैक्सी और रिक्शा के मीटर में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के जरिए छेड़छाड़ कर यात्रियों से निर्धारित किराए से ज्यादा रकम वसूलने का आरोप है। कार्रवाई में दो काली-पिली टैक्सी, दो रिक्शा और एक मारुति आर्टिगा जब्त की गई है।

    एक टैक्सी से खुला मामला, जांच में सामने आए पांच वाहन

    दहिसर पुलिस को टैक्सी और रिक्शा के मीटर में छेड़छाड़ कर यात्रियों से ज्यादा किराया वसूले जाने की जानकारी मिली थी। इसके बाद पुलिस ने संदिग्ध वाहन की जांच शुरू की।

    1 सितंबर 2026 की रात करीब 9 बजे एक यात्री को टैक्सी क्रमांक MH 01 CJ 6487 से सफर के लिए भेजा गया। पुलिस के अनुसार, टैक्सी चालक द्वारा मीटर में छेड़छाड़ किए जाने का संदेह हुआ। इसके बाद वाहन को जांच के लिए क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय, बोरीवली भेजा गया।

    आरटीओ की जांच में मीटर के भीतर इलेक्ट्रॉनिक रिंगिंग सर्किट जैसी डिवाइस लगाए जाने की बात सामने आई। पुलिस के मुताबिक इसी तरह की तकनीकी छेड़छाड़ के जरिए मीटर की रीडिंग को प्रभावित कर यात्रियों से ज्यादा किराया वसूला जा रहा था।

    जांच आगे बढ़ी तो पुलिस को ऐसे ही दूसरे वाहनों की भी जानकारी मिली। इसके बाद कुल पांच वाहनों को जब्त किया गया।

    कौन-कौन से वाहन पकड़े गए?

    पुलिस के मुताबिक कार्रवाई में ये वाहन जब्त किए गए हैं—

    • काली-पिली टैक्सी — MH 01 CJ 6487
    • काली-पिली रिक्शा — MH 02 DU 0777
    • काली-पिली रिक्शा — MH 03 BY 4268
    • काली-पिली टैक्सी — MH 02 BQ 7392
    • मारुति आर्टिगा — MH 01 EM 6048

    पुलिस ने मीटर में छेड़छाड़ के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक रिंगिंग सर्किट को भी जब्त किया है।

    पांच आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई

    इस मामले में पुलिस ने जौएब अल्ताफ देशमुख (32), अमीन रमजान पठाण (39), रियाज अब्दुलगनी शेख (45), नाजीर इब्राहिम पटेल (57) और आनंद कुमार नानाकप्रसाद राय (60) के खिलाफ कार्रवाई की है।

    पुलिस के मुताबिक मामले में भारतीय न्याय संहिता और मोटर वाहन कानून की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।

    मुंबई के यात्रियों के लिए सबसे बड़ा सवाल

    दहिसर में पांच वाहनों में मीटर से छेड़छाड़ सामने आने के बाद अब सवाल सिर्फ इन पांच वाहनों तक सीमित नहीं है।

    अगर एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के जरिए किराया मीटर में हेरफेर किया जा सकता है, तो मुंबई के दूसरे इलाकों में चल रहे टैक्सी और रिक्शा के मीटर कितने सुरक्षित हैं?

    यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि रोजाना बड़ी संख्या में मुंबईकर टैक्सी और रिक्शा से सफर करते हैं। यात्री मीटर में दिखाई देने वाली रकम को सही मानकर भुगतान करता है। ऐसे में मीटर के साथ तकनीकी छेड़छाड़ होने पर उसे अतिरिक्त किराया वसूले जाने का पता भी नहीं चल सकता।

    हालांकि, दहिसर के इन पांच वाहनों के मामले से पूरे मुंबई में इस तरह की धोखाधड़ी हो रही है, ऐसा निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी। लेकिन इस कार्रवाई ने परिवहन विभाग के सामने एक महत्वपूर्ण जांच का मुद्दा जरूर खड़ा कर दिया है।

    अब आरटीओ की जवाबदेही पर सवाल

    इस मामले में सबसे बड़ा सवाल क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) की भूमिका को लेकर भी है।

    दहिसर पुलिस की कार्रवाई के बाद क्या मुंबई के अलग-अलग इलाकों में टैक्सी और रिक्शा के मीटरों की विशेष जांच की जाएगी?

    क्या आरटीओ यह जांच करेगा कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगाकर मीटर की रीडिंग में हेरफेर करने जैसी तकनीक का इस्तेमाल दूसरे वाहनों में कहीं हो तो नहीं रहा?

    और अगर ऐसी जांच होती है तो कितने वाहनों के मीटर सही पाए जाते हैं और कितनों में गड़बड़ी सामने आती है, इसकी जानकारी क्या सार्वजनिक की जाएगी?

    इन सवालों का जवाब जरूरी है, क्योंकि मीटर में हेरफेर का सीधा असर यात्रियों की जेब पर पड़ता है।

    वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मार्गदर्शन में कार्रवाई

    यह कार्रवाई वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में की गई। जिसमें, अपर पुलिस आयुक्त शशिकुमार मीना, पुलिस उपायुक्त गजानन शिवलिंग राजमाने, सहायक पुलिस आयुक्त जयराज एरवडे, वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक सर्जेराव पाटील और दहिसर पुलिस थाने के अधिकारी मारुती सांगळे के मार्गदर्शन में टीम ने कार्रवाई की।

    कार्रवाई करने वाली टीम में सहायक पुलिस निरीक्षक निलेश शिवाजी साळुंके के साथ पुलिसकर्मी हेमंत बाबुराव दिवारे, सुनील चंद्रकांत राठोड, संतोष काशिनाथ भागवत और ऋषिकेश प्रवीण मोरे शामिल थे। बताया गया कि सबसे पहले इसकी जानकारी सहायक पुलिस निरीक्षक निलेश शिवाजी साळुंके को मिली थी जिसके निगरानी के बाद वरिष्ठ अधिकारियों से जांच के निर्देश मिले।

    दहिसर की कार्रवाई ने खोल दिया बड़ा सवाल

    दहिसर पुलिस की इस कार्रवाई से फिलहाल पांच वाहनों और पांच आरोपियों के खिलाफ मामला सामने आया है। लेकिन इससे मुंबई के परिवहन तंत्र के सामने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा हो गया है—क्या सिर्फ दहिसर में ही मीटर की ऐसी जांच होगी या आरटीओ पूरे मुंबई में टैक्सी-रिक्शा के मीटरों की व्यापक जांच शुरू करेगा?

    क्योंकि अगर मीटर ही गलत रीडिंग दिखाए, तो यात्री के पास सही किराया जानने का भरोसेमंद आधार क्या बचेगा?

    यही वह सवाल है जिसका जवाब अब मुंबई के यात्रियों को आरटीओ और संबंधित परिवहन अधिकारियों से चाहिए।

  • BMC रिश्वत कांड: ₹70 हजार मांगे, ₹60 हजार पर सौदा; ACB ने इंजीनियर और कर्मचारी को रंगे हाथ पकड़ा

    BMC रिश्वत कांड: ₹70 हजार मांगे, ₹60 हजार पर सौदा; ACB ने इंजीनियर और कर्मचारी को रंगे हाथ पकड़ा

    मुंबई के अंधेरी में BMC के जूनियर इंजीनियर और कर्मचारी पर ₹60 हजार रिश्वत लेने का आरोप। ACB ट्रैप में गिरफ्तारी, ₹2.78 लाख कैश बरामद।

    मुंबई: अंधेरी पश्चिम के BMC K/West Ward कार्यालय में Anti-Corruption Bureau (ACB) ने रिश्वत के मामले में BMC के एक जूनियर इंजीनियर और कर्मचारी को गिरफ्तार किया है। ACB के मुताबिक, एक बेकरी संचालक से कथित तौर पर ₹70 हजार की रिश्वत मांगी गई थी। बातचीत के बाद ₹60 हजार में सौदा तय हुआ, जिसके बाद ACB ने ट्रैप लगाकर कर्मचारी को रकम लेते हुए पकड़ लिया।

    मामले में जूनियर इंजीनियर नीरवकुमार चुनीलाल जैसूर (43) और BMC कर्मचारी विजय रमेश पाटील (46) को आरोपी बनाया गया है।

    बेकरी पर कार्रवाई रोकने के बदले रिश्वत का आरोप

    ACB के मुताबिक, शिकायतकर्ता 50 वर्षीय बेकरी संचालक है। आरोप है कि पाटील ने उससे ₹70 हजार मांगे थे। कथित तौर पर यह रकम बेकरी को चलाने देने और उसके खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई नहीं करने के बदले मांगी गई थी।

    शिकायत मिलने के बाद ACB ने रिश्वत की मांग की पुष्टि की। इसी दौरान पाटील ने शिकायतकर्ता की मुलाकात जूनियर इंजीनियर जैसूर से कराई। इसके बाद कथित तौर पर रिश्वत की रकम ₹70 हजार से घटकर ₹60 हजार तय हुई।

    ₹60 हजार लेते ही ACB का ट्रैप

    रकम तय होने के बाद ACB ने K/West Ward कार्यालय में ट्रैप लगाया।

    ACB के अनुसार, विजय पाटील को ₹60 हजार स्वीकार करते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया। इसके बाद जांच टीम ने BMC के छठी मंजिल स्थित कार्यालय से जूनियर इंजीनियर जैसूर को भी हिरासत में लिया।

    दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

    कर्मचारी के पास ₹2.78 लाख कैश मिला

    ट्रैप के बाद ACB ने पाटील की तलाशी ली। उसके पास से ₹40,820 नकद और बैग से ₹2,37,600 नकद बरामद हुआ।

    इस तरह कुल ₹2,78,420 कैश मिला।

    तीन मोबाइल फोन भी जब्त

    ACB ने मामले में मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं। जूनियर इंजीनियर जैसूर के दो मोबाइल फोन और पाटील का एक मोबाइल फोन जांच के लिए लिया गया है।

    अब जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि कथित रिश्वत की मांग और लेन-देन में दोनों आरोपियों की क्या भूमिका थी और क्या इस मामले में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल है।

    अब आगे क्या होगा?

    ACB की कार्रवाई के बाद मामले की जांच जारी है। इस केस में सबसे अहम सवाल अब यह है कि ₹2.78 लाख की अतिरिक्त नकदी का स्रोत क्या था और क्या उसका कथित रिश्वत प्रकरण से कोई संबंध सामने आता है।

    फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इतना स्पष्ट है कि ACB ने ₹60 हजार की कथित रिश्वत के ट्रैप में BMC के दो कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की है।

  • BMC से PWD तक Transfer-Posting का खेल? नेताओं की सिफारिश पर उठे बड़े सवाल

    BMC से PWD तक Transfer-Posting का खेल? नेताओं की सिफारिश पर उठे बड़े सवाल

    BMC से PWD तक Transfer-Posting पर सवाल उठे हैं। 225 राजनीतिक सिफारिशों, BMC Randomisation और PWD tenure विवाद का पूरा मामला जानिए।

    मुंबई: सरकारी नौकरी में Transfer-Posting नियम से होना चाहिए या किसी नेता की recommendation से? BMC से लेकर महाराष्ट्र PWD तक सामने आ रही घटनाएं इसी बुनियादी सवाल को सामने ला रही हैं। BMC के रिकॉर्ड में पिछले एक साल में 225 अधिकारियों-कर्मचारियों के Transfer और Promotion को लेकर राजनीतिक सिफारिशें मिली हैं। दूसरी तरफ नागपुर PWD में कुछ Junior Engineers के लंबे समय तक एक ही जगह बने रहने और extension की प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं। ऐसे माहौल में BMC ने Engineers के Transfer के लिए अब Online Randomisation की व्यवस्था लागू की है।

    225 सिफारिशें, सवाल सिर्फ संख्या का नहीं

    RTI से सामने आई जानकारी के मुताबिक BMC के City Engineer Office में पिछले एक साल में 225 Transfer/Promotion recommendation letters मिले। इनमें Union Ministers, State Ministers, MPs, MLAs, MLCs और अलग-अलग राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधियों के नाम शामिल हैं।

    रिकॉर्ड में Eknath Shinde का नाम 10 बार और Ramdas Athawale का 9 बार सामने आया। Girish Mahajan और Kalidas Kolambkar के नाम 7-7 बार दर्ज हैं। कई अन्य नेताओं के नाम भी रिकॉर्ड में हैं।

    यहां असली सवाल 225 की संख्या से आगे है—किसी कर्मचारी की Transfer-Posting का प्रशासनिक फैसला जिस competent authority को करना है, वहां किसी राजनीतिक जनप्रतिनिधि की recommendation की भूमिका क्या है?

    Recommendation अपने-आप में किसी Transfer को गैरकानूनी साबित नहीं करती। कई बार जनप्रतिनिधि health problem, family circumstances, travel distance या दूसरी व्यक्तिगत दिक्कतों को लेकर representation भी करते हैं। लेकिन अंतिम फैसला नियमों और सक्षम प्रशासनिक authority के आधार पर होना चाहिए। इसलिए सवाल recommendation के अस्तित्व से ज्यादा उसके प्रभाव और उसके बाद हुए फैसले की प्रक्रिया पर है।

    अब BMC में बदली Computer तय करेगा

    इसी विवाद के बीच BMC ने City Engineer Office में JE, SE और AE के लिए Employee Transfer System Based on Randomization शुरू किया है।

    2 सितंबर के circular के मुताबिक एक ही department/section में तीन साल या उससे ज्यादा समय से काम कर रहे Engineers को 5 से 20 सितंबर के बीच Online Transfer Preference देनी होगी। कर्मचारी कम से कम एक और अधिकतम पांच विकल्प दे सकते हैं। इसके बाद available manpower और vacant posts के आधार पर computerised system Transfer process करेगा।

    ध्यान देने वाली बात यह है कि यह व्यवस्था फिलहाल City Engineer Office के JE, SE और AE पर लागू है। इसे BMC के हर कर्मचारी के लिए लागू नया Transfer rule नहीं कहा जाएगा।

    लेकिन क्या इससे Recommendation का रास्ता बंद होगा?

    यही इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण सवाल है।

    अगर Transfer को computerised randomisation से तय किया जाना है, तो किसी खास कर्मचारी के लिए बाहर से आने वाली recommendation का उस process पर क्या असर होगा? क्या ऐसे मामलों के लिए कोई अलग exception mechanism होगा? और अगर exception होगा तो उसका कारण और approval public record में आएगा या नहीं?

    यानी असली transparency सिर्फ software लगाने से नहीं आएगी। Transparency तब मानी जाएगी जब Transfer का पूरा trail—tenure, vacancy, preference, competent authority का decision और exception का कारण—स्पष्ट हो।

    2025 का विवाद भी इसी सवाल को और गंभीर बनाता है

    BMC में Transfer-Posting को लेकर विवाद पहली बार नहीं उठा। 2025 में करीब 160 Engineers के Transfer को लेकर political influence और “cash-for-transfer” जैसे आरोप लगाए गए थे। विवाद बढ़ने के बाद proposed transfer process पर रोक लगी थी।

    मई 2026 में BJP MLA Mihir Kotecha ने आरोप लगाया कि पहले विवादित list में शामिल करीब 55 अधिकारियों को दोबारा उन्हीं या समान postings पर लाने की कोशिश हो रही है। BMC ने उस समय ऐसी किसी final list की जानकारी से इनकार किया था।

    इन आरोपों की पुष्टि को लेकर अंतिम निष्कर्ष अलग बात है, लेकिन लगातार उठते सवाल बताते हैं कि Transfer-Posting की प्रक्रिया पर भरोसा ही इस विवाद का केंद्र बन चुका है।

    PWD में सवाल अलग, लेकिन मुद्दा वही

    नागपुर PWD की रिपोर्ट ने Transfer और tenure की दूसरी तस्वीर सामने रखी है।

    सरकारी नियम के मुताबिक सामान्य तौर पर एक जगह तीन साल की tenure के बाद Transfer होना चाहिए और उससे आगे extension exceptional circumstances में ही होना चाहिए। लेकिन कुछ Junior Engineers के 8 से 10 साल तक एक ही जगह काम करने की जानकारी सामने आई है। कुछ मामलों में extension के लिए लिखित आदेश नहीं होने पर भी सवाल उठे हैं।

    यहीं प्रशासनिक जवाबदेही का मुद्दा आता है—अगर tenure खत्म हो गया तो किसी कर्मचारी को उसी जगह बनाए रखने का आधार क्या था, और वह आधार किस लिखित आदेश में दर्ज है?

    BMC में राजनीतिक recommendations और PWD में tenure-extension एक ही मामला नहीं हैं। लेकिन दोनों घटनाएं एक ही बड़ी चिंता सामने लाती हैं: सरकारी Transfer-Posting में नियम कितना साफ है और उसका पालन कितना दिखाई देता है?

    BMC के सामने एक और बड़ा accountability test

    इसी समय Bombay High Court BMC की sanitation workers को housing देने की नीति पर भी लगातार जवाब मांग रहा है। 2008 की State Government policy के बावजूद करीब 18 साल में housing implementation नहीं होने पर Court ने BMC से उसके land resources की विस्तृत जानकारी मांगी है।

    BMC Commissioner के affidavit में करीब 4,176 leasehold properties, 3,505 tenanted properties/staff quarters, 3,668 vacant land tenancies, करीब 8,000 existing amenities और लगभग 6,000 public-purpose reservations का उल्लेख हुआ था। Court ने BMC की land pool को व्यापक रूप से examine करने और sanitation workers के लिए उपलब्ध land identify करने को कहा है।

    31 अगस्त की proceedings के बाद BMC को fresh comprehensive affidavit दाखिल करने के लिए 9 सितंबर 2026 तक का समय दिया गया है। Court ने जरूरत पड़ने पर independent committee के जरिए land की स्थिति की जांच की संभावना भी रखी है।

    यह Transfer case का हिस्सा नहीं है, लेकिन BMC की broader administrative accountability पर चल रही judicial scrutiny को जरूर दिखाता है।

    अब असली कसौटी

    BMC के 225 recommendation letters हों, Engineers के लिए Randomisation System हो या PWD में tenure-extension का सवाल—मुद्दा किसी एक नेता, अधिकारी या कर्मचारी का नहीं है।

    मुद्दा यह है कि सरकारी पद पर Transfer-Posting का फैसला आखिर नियम करेगा या influence?

    BMC ने Randomisation के जरिए एक रास्ता जरूर चुना है। अब देखना यही है कि यह व्यवस्था सिर्फ Transfer order बनाने का नया software बनती है या वास्तव में ऐसी प्रक्रिया तैयार करती है जिसमें किसी की recommendation से ज्यादा महत्व नियम, tenure, vacancy और documented administrative decision का हो।

  • मुंबई में जज की SUV रोककर ‘न्यायाधीश’ प्लेट का बनाया वीडियो, विरोध पर जान से मारने की धमकी

    मुंबई में जज की SUV रोककर ‘न्यायाधीश’ प्लेट का बनाया वीडियो, विरोध पर जान से मारने की धमकी

    मुंबई के दादर में MACT सदस्य शशिकांत बांगर की SUV रोककर दो लोगों ने ‘Nyayadhish’ प्लेट की रिकॉर्डिंग की और धमकी दी। पुलिस ने FIR दर्ज की।

    मुंबई: दादर में Motor Accident Claims Tribunal (MACT) के सदस्य शशिकांत एकनाथराव बांगर की SUV रोककर दो अज्ञात लोगों द्वारा कथित तौर पर वीडियो रिकॉर्डिंग करने और उन्हें जान से मारने की धमकी देने का मामला सामने आया है। दोनों ने कार के dashboard पर लगी ‘Nyayadhish’ प्लेट को लेकर सवाल किए। विरोध करने पर कथित तौर पर जज और उनकी पत्नी से गाली-गलौज की गई और एक व्यक्ति ने उन्हें धक्का देने की कोशिश भी की। मामले में Matunga Police ने दो अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    दादर में आखिर हुआ क्या था?

    मामला 13 जुलाई की रात करीब 10.15 बजे का है। 54 वर्षीय शशिकांत बांगर अपनी पत्नी और बेटी के साथ दादर इलाके में थे। बेटी को छोड़ने के बाद जब वे Dadar TT में Irani Mansion के पास से लौट रहे थे, तभी दो लोगों ने कथित तौर पर उनकी SUV का रास्ता रोक लिया। इसके बाद दोनों उनकी गाड़ी की फोटो और वीडियो बनाने लगे।

    बांगर की शिकायत के मुताबिक, दोनों का खास ध्यान dashboard पर रखी ‘Nyayadhish’ प्लेट पर था। उन्होंने सवाल किया कि गाड़ी पर यह प्लेट क्यों लगाई गई है और इसे लगाने की अनुमति किसने दी है।

    बांगर ने उन्हें बताया कि वह District Judge और MACT के सदस्य हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वाहन का इस्तेमाल residence और court के बीच official travel के लिए किया जाता है और वाहन की जानकारी Bombay High Court को दी गई है। इसके बाद भी दोनों कथित तौर पर आक्रामक हो गए।

    पत्नी से भी गाली-गलौज, जज को धक्का देने की कोशिश

    शिकायत के मुताबिक, विवाद बढ़ने पर दोनों लोगों ने जज और उनकी पत्नी के साथ कथित तौर पर गाली-गलौज की। जब उनकी पत्नी और मौके पर मौजूद एक बुजुर्ग व्यक्ति ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराने की कोशिश की, तो एक आरोपी ने बांगर को धक्का देने की कोशिश की।

    बांगर ने दोनों को शांत होने के लिए कहा और पुलिस को बुलाकर अपनी पहचान तथा वाहन की जानकारी verify कराने की बात कही। उन्होंने emergency helpline नंबर 100 और 112 से संपर्क करने की भी कोशिश की। आरोप है कि दोनों लोगों ने पुलिस से संपर्क करने की कोशिश का भी विरोध किया।

    इसके बाद दोनों कथित तौर पर वहां से निकल गए। शिकायत के आधार पर Matunga Police ने मामले की जांच शुरू की है। आरोपियों की पहचान और इस पूरे विवाद की वजह फिलहाल पुलिस की जांच का विषय है।

    50 दिन बाद सामने आया मामला

    इस घटना की शिकायत 1 सितंबर को Matunga Police में की गई, यानी 13 जुलाई की घटना के करीब 50 दिन बाद मामला पुलिस तक पहुंचा। इसके बाद पुलिस ने मंगलवार को दो अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की। उपलब्ध रिपोर्टों में शिकायत दर्ज कराने में हुई देरी की वजह स्पष्ट नहीं बताई गई है।

    FIR में Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) की धारा 126(2), 130, 3(5), 351(3) और 352 लगाई गई हैं। इन धाराओं में रास्ता रोकने, assault से जुड़े आचरण, common intention, गंभीर criminal intimidation और जानबूझकर अपमान जैसे आरोपों से जुड़े प्रावधान शामिल हैं।

    पुलिस अब आरोपियों तक कैसे पहुंचेगी?

    Matunga Police के मुताबिक, आरोपियों की पहचान अभी नहीं हुई है और उनकी तलाश जारी है। पुलिस घटना वाली जगह और आसपास के CCTV footage के साथ दूसरे available evidence को verify कर रही है।

    शिकायत में बांगर ने एक आरोपी के बारे में बताया कि उसने dark-coloured checked shirt पहनी थी और motorcycle पर था। यह जानकारी CCTV और दूसरे evidence के साथ मिलाकर आरोपियों की पहचान करने में इस्तेमाल की जा सकती है।

    ‘Nyayadhish’ प्लेट पर इतना विवाद क्यों हुआ?

    इस मामले की सबसे अहम कड़ी यही प्लेट बनी। आरोपियों ने कथित तौर पर इसी को लेकर सवाल शुरू किए और पूछा कि इसे लगाने की अनुमति किसने दी।

    हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इस particular SUV पर ‘Nyayadhish’ प्लेट लगाने की अनुमति किस नियम या आदेश के तहत थी। बांगर ने पुलिस को बताया है कि वाहन की details Bombay High Court को submitted थीं। इसलिए इस मामले में दो अलग सवाल हैं—आरोपियों ने प्लेट पर आपत्ति क्यों की और वाहन पर ऐसी पहचान प्रदर्शित करने की official व्यवस्था क्या थी। इन दोनों बातों का अंतिम जवाब पुलिस की जांच या संबंधित judicial authorities की पुष्टि के बाद ही साफ होगा।

    शशिकांत बांगर कौन हैं?

    शशिकांत एकनाथराव बांगर judicial officer हैं। उपलब्ध court records में उनका नाम Mumbai City Civil & Sessions Court में Special Judge under the Prevention of Corruption Act के रूप में दर्ज है। National Judicial Academy के रिकॉर्ड में भी उन्हें District Judge और Additional Sessions Judge के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। वर्तमान घटना में वे Motor Accident Claims Tribunal से जुड़े judicial officer के तौर पर शिकायतकर्ता हैं।

    अब आगे क्या?

    फिलहाल FIR दो अज्ञात आरोपियों के खिलाफ है। उनकी पहचान, घटना के पीछे की वजह और क्या दोनों ने किसी योजना के तहत जज की गाड़ी को रिकॉर्ड किया था—इन सवालों का जवाब CCTV और दूसरे evidence की जांच के बाद सामने आएगा।

    एक और अहम बात यह है कि पुलिस से मिली जानकारी में अभी तक आरोपियों की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की जांच जारी है और फिलहाल सबसे ज्यादा नजर CCTV footage से दोनों की पहचान होने, उनकी motorcycle/route की जानकारी मिलने और ‘Nyayadhish’ प्लेट को लेकर हुए विवाद की असली वजह सामने आने पर है।

  • Mumbai Metro 7A: ₹250 करोड़ का काम खतरे में, आखिर जनता के पैसे की जिम्मेदारी किसकी?

    Mumbai Metro 7A: ₹250 करोड़ का काम खतरे में, आखिर जनता के पैसे की जिम्मेदारी किसकी?

    Mumbai Metro 7A में Airport Colony के पास करीब ₹250 करोड़ का काम खतरे में है। AAI clearance, OHE height और जिम्मेदारी पर अब बड़े सवाल उठ रहे हैं।

    मुंबई: Mumbai Metro 7A के Airport Colony वाले हिस्से पर करीब ₹250-260 करोड़ का काम अब सवालों में है। वजह है Airport के air funnel में metro viaduct और OHE की height का mismatch। अगर Airports Authority of India (AAI) से अतिरिक्त height की मंजूरी नहीं मिली, तो Vile Parle East में करीब 1 किलोमीटर का बना हुआ elevated हिस्सा बदलना या दोबारा बनाना पड़ सकता है। अभी demolition final नहीं हुआ है और AAI की technical report का इंतजार है।

    सवाल सिर्फ Metro का नहीं, जनता के पैसे का है

    Metro 7A करीब 3.42 किलोमीटर लंबी extension है, जो Andheri East से Chhatrapati Shivaji Maharaj International Airport के Terminal 2 तक पहुंचेगी। इसका करीब 2.5 किलोमीटर हिस्सा underground और लगभग 1 किलोमीटर हिस्सा elevated है।

    दिक्कत Airport Colony station और उससे जुड़े ramp/viaduct के हिस्से में सामने आई। Metro को चलाने के लिए सिर्फ track की height काफी नहीं होती, ऊपर OHE यानी बिजली की व्यवस्था के लिए भी अतिरिक्त जगह चाहिए। इसी requirement को लेकर मौजूदा structure और AAI की permissible height के बीच अंतर सामने आया है।

    सबसे बड़ा सवाल यही है—अगर aviation restrictions पहले से लागू थे, तो construction आगे बढ़ने से पहले final height requirement पूरी तरह clear क्यों नहीं हुई?

    2024 में clearance मिली, फिर समस्या कहां हुई?

    MMRDA ने नवंबर 2023 में Airport Colony station और ramp के लिए AAI से clearance मांगी थी। 2 जनवरी 2024 को मंजूरी मिली, लेकिन इसमें project design के मुकाबले करीब 2.9 मीटर कम height की सीमा थी।

    इसके बाद 31 जनवरी 2024 को Airport Colony station और ramp के बीच viaduct के लिए अलग clearance मांगी गई। 18 मार्च 2024 को AAI ने इस हिस्से के लिए 0.53 से 2.75 मीटर तक की height limit तय की, जो Metro operation के लिए जरूरी height से कम बताई गई।

    यहीं से मामला उलझ गया। MMRDA के अनुसार, design और statutory permissions के coordination की जिम्मेदारी general consultant SYSTRA-CEG-SMCIPL की थी और OHE के लिए जरूरी अतिरिक्त height को planning में पर्याप्त रूप से शामिल नहीं किया गया। SYSTRA ने इस जिम्मेदारी पर आपत्ति जताई है।

    कितना पैसा खतरे में है?

    संभावित financial exposure ₹250 करोड़ से ₹260 करोड़ से ज्यादा बताया गया है। यह रकम अभी “डूब गई” नहीं है। AAI अगर अतिरिक्त height को मंजूरी देता है या कोई technical solution निकल आता है, तो reconstruction की जरूरत टल सकती है।

    लेकिन अगर मौजूदा structure को हटाकर दोबारा बनाना पड़ा, तो जनता के पैसे से तैयार किया जा चुका बड़ा हिस्सा दोबारा खर्च मांग सकता है। खबर के मुताबिक करीब 1 किलोमीटर का elevated stretch प्रभावित हो सकता है।

    यानी असली सवाल सिर्फ यह नहीं कि structure दोबारा बनेगा या नहीं। सवाल यह भी है कि अगर दोबारा बनाना पड़ा तो अतिरिक्त खर्च किसकी जिम्मेदारी होगी?

    हर जगह समस्या एक जैसी नहीं है

    Height mismatch सभी locations पर समान नहीं बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक कुछ जगह अतिरिक्त requirement करीब 2.5 सेंटीमीटर से शुरू होकर लगभग 2.4 मीटर तक है।

    Airport Colony station खुद approved height limit के भीतर बताया गया है, लेकिन उससे जुड़े ramp में OHE poles के लिए करीब 2.4 मीटर अतिरिक्त height की जरूरत बताई गई है। यही वजह है कि मामला सिर्फ “station बहुत ऊंचा बन गया” इतना सीधा नहीं है।

    काम कितना हो चुका था?

    समस्या तब सामने आई जब project का बड़ा हिस्सा काफी आगे बढ़ चुका था। फरवरी 2026 तक MMRDA के project status में elevated viaduct का civil work 100%, elevated ramp करीब 95% और Airport Colony station से जुड़े ज्यादातर काम काफी आगे बताए गए थे।

    Underground section में भी बड़ा काम पूरा हो चुका है। 2025 में Andheri East से Airport की तरफ twin tunnel construction के अहम breakthroughs हुए और underground tunnelling पूरा किया गया।

    यानी height issue किसी शुरुआती drawing stage पर नहीं रुका; यह उस समय सामने आया जब जमीन पर बड़ी construction हो चुकी।

    अब जिम्मेदारी किसकी?

    MMRDA की तरफ से consultant की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। SYSTRA-CEG-SMCIPL general consultant था, जबकि J Kumar Infraprojects civil construction से जुड़ा contractor है।

    इससे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि design, aviation clearance और OHE requirement के बीच coordination में चूक हुई तो contractual responsibility किस पर तय होगी। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी पर final financial liability तय होने की बात सामने नहीं आई है।

    SYSTRA और MMRDA के बीच पहले भी contractual विवाद रहा है। 2025 में Bombay High Court ने MMRDA द्वारा SYSTRA का contract खत्म करने का आदेश रद्द कर fresh decision लेने को कहा था। हालांकि उस मामले को मौजूदा Metro 7A height issue का सीधा सबूत नहीं माना जा सकता।

    Metro 7A इतनी जरूरी क्यों है?

    Metro 7A का मकसद सिर्फ Airport तक एक और metro line पहुंचाना नहीं है। यह Line 7 और Line 9 के network को Airport के Terminal 2 से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण link है।

    Terminal 2 तक Metro 3 की connectivity पहले से है, लेकिन 7A के शुरू होने से Mira-Bhayandar, Dahisar और northern suburbs की तरफ से आने वाले passengers को airport network से ज्यादा सीधा connection मिलेगा।

    इसीलिए construction में एक साल की देरी भी सिर्फ project deadline का मामला नहीं है—इसका असर airport connectivity और पूरे metro network की planning पर पड़ता है।

    अब आगे क्या होगा?

    फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण फैसला AAI की final technical assessment पर टिका है। MMRDA अतिरिक्त height की अनुमति मिलने की उम्मीद कर रहा है और technical solution की संभावना भी देखी जा रही है।

    अगर मंजूरी मिलती है तो मौजूदा structure को बचाया जा सकता है। अगर मंजूरी नहीं मिली और कोई workable engineering solution नहीं निकला, तभी modification या reconstruction की स्थिति गंभीर होगी।

    और जनता के लिए सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा—जिस height और aviation clearance का पता 2024 में चल गया था, उसका समाधान construction इतनी आगे बढ़ने के बाद क्यों खोजा जा रहा है और अगर इसका अतिरिक्त बोझ पड़ा तो उसकी जिम्मेदारी आखिर किस पर तय होगी?

  • मुंबईकरों के ₹248 करोड़ का नया Flyover, कई बाइकर्स फिसलकर गिरे; अब BMC ने सड़क पर लगाए Speed Breaker

    मुंबईकरों के ₹248 करोड़ का नया Flyover, कई बाइकर्स फिसलकर गिरे; अब BMC ने सड़क पर लगाए Speed Breaker

    मुंबई के ₹248 करोड़ के Mrinaltai Gore Flyover पर बाइकर्स के फिसलने के बाद BMC ने rumble strips लगाए। 2021 की Vigilance रिपोर्ट भी सवाल उठा चुकी थी।

    मुंबई: गोरेगांव में करीब ₹248 करोड़ की लागत से बने Mrinaltai Gore Flyover Extension पर बाइकर्स के फिसलने की शिकायतों के बाद BMC ने अब कार्रवाई शुरू की है। Relief Road की तरफ जाने वाले हिस्से के sharp turns पर BMC ने रफ्तार कम करने वाले rumble strips लगाए हैं। 29 अगस्त को इसी फ्लाईओवर की दीवार से एक ट्रक टकरा गया था, जिसके बाद sound barrier का एक हिस्सा नीचे SV Road पर गिर गया था। गनीमत रही कि इस घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है।

    नया फ्लाईओवर 6 जून 2026 को आम लोगों के लिए खोला गया था। इसके बाद से Relief Road की तरफ जाने वाले arm की सड़क को लेकर लगातार शिकायतें सामने आईं। खासकर बारिश या सड़क गीली होने पर दोपहिया वाहन फिसलने और बाइकर्स के गिरने के वीडियो सामने आए। यह हिस्सा नीचे उतरने के बाद एक turn पर आता है, जहां बाइक को सड़क की पर्याप्त grip मिलना ज्यादा जरूरी है।

    BMC ने पहले बताया था कि flyover की 40 mm मोटी mastic asphalt surface पर stone aggregates डाले गए हैं ताकि tyre को friction मिले और वाहन फिसलें नहीं। लेकिन मौजूदा शिकायतों के बाद अब चार ऐसे spots चिन्हित किए गए हैं जहां turn और slope है। BMC अधिकारी के मुताबिक दो जगह 15 mm thick rumblers लगाए जा चुके हैं और दो अन्य जगहों पर भी इन्हें लगाया जाना है। साथ ही cautionary और speed-limit boards लगाने तथा sound barriers की मरम्मत की बात कही गई है।

    यहां Speed Breaker शब्द आम लोगों के लिए समझने में आसान है, लेकिन तकनीकी तौर पर लगाए गए rumble strips सामान्य ऊंचे speed breaker जैसे नहीं हैं। इनका मकसद सड़क पर vibration और अतिरिक्त grip देकर वाहन चालकों को turn और slope पर सावधान करना तथा रफ्तार कम कराना है।

    सवाल सिर्फ फिसलन का नहीं, ₹248 करोड़ के पूरे प्रोजेक्ट का है

    सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस 750 मीटर लंबे, चार लेन वाले flyover पर करीब ₹248 करोड़ खर्च हुए, उसे शुरू हुए अभी तीन महीने भी पूरे नहीं हुए और उसके एक हिस्से पर दोपहिया वाहनों की safety को लेकर corrective treatment करना पड़ा। यह वही project है जिसकी construction timeline करीब आठ साल तक खिंची और जिसकी लागत भी बार बार बढ़ाई गई।

    BMC ने नवंबर 2018 में इसका work order जारी किया था और शुरुआती completion target 24 महीने का था। लेकिन project 2026 में जाकर पूरा हुआ। अंतिम लागत ₹247.97 करोड़ तक पहुंची, जबकि मिली जानकारी के मुताबिक शुरुआती estimate ₹170.82 करोड़ था—यानी करीब 45 फीसदी की बढ़ोतरी।

    काम के दौरान contractor पर penalties भी लगाई गईं। BMC के मुताबिक आठ साल में कुल करीब ₹27 लाख की penalty लागू की गई, जो ₹248 करोड़ के project cost का एक फीसदी भी नहीं है। इनमें construction delay और site safety से जुड़े मामलों की penalties शामिल थीं।

    लेकिन असली सवाल 2026 में नहीं, 2021 में उठ चुका था

    इस flyover की कहानी में सबसे गंभीर कड़ी BMC की अपनी Vigilance रिपोर्ट है। जून 2021 की internal vigilance inspection में construction quality, structural elements और monitoring से जुड़े कई सवाल उठाए गए थे—यानी flyover के public use में आने से करीब पांच साल पहले।

    रिपोर्ट में flyover के कई joints और piers में cracks तथा honeycombing मिलने की बात कही गई थी। पांच pillars में cracks और honeycombing का उल्लेख था। Honeycombing concrete में बनने वाली खाली जगहों को कहा जाता है, जो खराब compaction से जुड़ी हो सकती हैं और concrete की strength पर असर डाल सकती हैं।

    Vigilance team ने यह भी सवाल उठाया था कि flyover के piers के पास मौजूद road panels के उठने या damage होने की संभावना को design में पर्याप्त तरीके से address किया गया था या नहीं। अगर ऐसी स्थिति में सड़क unsafe होती है तो उसकी repair contractor की जिम्मेदारी होने की बात रिपोर्ट में दर्ज थी।

    रिपोर्ट में quality records को लेकर भी सवाल थे। Steel और ready-mix concrete यानी RMC से जुड़े जरूरी records उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई थी। इसके अलावा मई 2019 और नवंबर 2020 में concrete strength के tests fail होने के बावजूद कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठे थे।

    और यहां monitoring का सवाल भी सामने आता है। नियुक्त consulting engineer को महीने में कम से कम दो site inspections करनी थीं, लेकिन Vigilance रिपोर्ट में ऐसे visits के records उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई। Contractors और supervising municipal engineers पर effective quality control और monitoring सुनिश्चित नहीं करने को लेकर भी सवाल उठाए गए थे।

    सबसे चौंकाने वाली बात penalties को लेकर थी। फरवरी से मई 2019 के बीच चार अलग-अलग मामलों में contractor पर ₹500 की penalty लगाई गई, जबकि contract conditions में minimum penalty ₹5,000 बताई गई थी। रिपोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि cracks, honeycombing और rough concrete surfaces के लिए penalty क्यों नहीं लगाई गई।

    हालांकि, 1 जून 2021 की compliance report में Bridges Department ने बताया था कि contractor को penalty और warning letter दिया गया, corrective measures और rectification work किए गए तथा records update किए गए। Supervisory staff को भी ज्यादा सतर्क रहने के निर्देश दिए गए थे।

    यानी आज का सवाल सिर्फ यह नहीं है कि सड़क पर rumble strips क्यों लगाने पड़े। बड़ा सवाल यह भी है कि 2021 में Vigilance ने जो कमियां बताई थीं, उनके बाद rectification वास्तव में कितनी प्रभावी रही और बाद के वर्षों में किस स्तर पर उसकी जांच हुई।

    आठ साल का project, बढ़ी लागत और फिर safety correction

    Mrinaltai Gore Flyover Extension का मकसद Goregaon में east-west connectivity को बेहतर करना था। 750 मीटर का यह four-lane arm existing flyover network को Ram Mandir Road और Relief Road से जोड़ता है। लेकिन project को पूरा होने में शुरुआती 24 महीने के target के मुकाबले करीब आठ साल लग गए।

    मार्च 2026 में भी project करीब 80 फीसदी complete बताया गया था और cost escalation को लेकर BMC Standing Committee में सवाल उठ चुके थे। इसी दौरान corporators ने project delay और बढ़ती लागत पर भी आपत्ति जताई थी।

    फिर जून में flyover खुला तो शुरुआती दिनों में uneven surface, loose grit और patchy stretches को लेकर शिकायतें सामने आईं। BMC ने उस समय road condition को structural deficiency नहीं माना और mastic asphalt तथा stone chips को technical construction process का हिस्सा बताया था। Experts ने भी यह कहा था कि mastic asphalt और stone aggregates का इस्तेमाल friction देने के लिए किया जाता है, हालांकि curved हिस्सों पर पर्याप्त grip बेहद जरूरी है।

    अब सितंबर में situation यह है कि उसी नए flyover के कुछ turns और slopes पर BMC को rumble treatment करना पड़ रहा है। एक न्यूज एजेंसी से बात करते हुए transport planner Vivek Pai ने इस तरह की slick surface के संभावित कारणों में mastic surface के बहुत smooth होने और bitumen bleeding जैसे technical factors की चर्चा की है। इसे flyover की खराबी का अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता, लेकिन surface grip का सवाल जरूर गंभीर बन गया है।

    BMC से अब जवाब किस बात का चाहिए?

    BMC का मौजूदा safety action जरूरी है और अगर rumble strips, warning boards और sound barrier repairs से दुर्घटनाओं का risk कम होता है तो यह स्वागत योग्य कदम है।

    लेकिन ₹248 करोड़ के इस project में accountability का सवाल इससे खत्म नहीं होता।

    अब यह साफ होना चाहिए कि 2021 की Vigilance रिपोर्ट में उठाए गए सवालों पर किस अधिकारी ने compliance verify किया, rectification की final inspection किसने की, consultant ने कितनी site inspections कीं, quality records किस स्तर पर verify हुए, concrete और road surface की final quality किसने certify की और public opening से पहले safety assessment किस आधार पर किया गया।

    BMC ने जुलाई 2026 में bridge, flyover और tunnel projects के लिए पांच साल के लिए 29 technical consultants का panel बनाने का प्रस्ताव भी रखा था। प्रस्ताव में consultant की design-related गलती से project cost या design variation बढ़ने पर penalty का प्रावधान रखने की बात कही गई थी।

    अब Mrinaltai Gore Flyover का मामला एक सीधा सवाल छोड़ता है—अगर ₹248 करोड़ खर्च करके बना नया flyover तीन महीने के भीतर ही ऐसे turns पर safety correction मांगने लगे जहां बाइकर्स फिसल रहे हैं, तो गलती सिर्फ सड़क पर rumble strips लगाने से खत्म मानी जाए या फिर पूरे project की planning, quality monitoring और accountability की भी दोबारा जांच होनी चाहिए?

    मुंबईकरों के टैक्स के पैसे से बने इस flyover पर अब असली जरूरत सिर्फ रफ्तार कम करने की नहीं, बल्कि यह पता लगाने की है कि शुरुआत से आखिर कहां-कहां निगरानी कमजोर पड़ी।

  • 10वीं पास ने यूट्यूब से सीख कर साइबर ठगों को Server दिए, 17.42 लाख की ठगी के बाद खुला 1,100 लोगों का नेटवर्क

    10वीं पास ने यूट्यूब से सीख कर साइबर ठगों को Server दिए, 17.42 लाख की ठगी के बाद खुला 1,100 लोगों का नेटवर्क

    मुंबई में ₹17.42 लाख की MGL ठगी की जांच में 1,100 VPS users का नेटवर्क सामने आया। पुलिस ने हरियाणा से 10वीं पास आरोपी को गिरफ्तार किया।

    मुंबई: ₹17.42 लाख की साइबर ठगी की जांच करते-करते मुंबई पुलिस ऐसे सर्वर नेटवर्क तक पहुंच गई, जिसके करीब 1,100 users सामने आए हैं। इस मामले में मुंबई पुलिस की साउथ रीजन साइबर पुलिस ने हरियाणा के भिवानी खेड़ा से 32 वर्षीय प्रवीण हुकुम चंद को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, 10वीं पास प्रवीण ने YouTube और ऑनलाइन tutorials से RDP और VPS की तकनीक सीखी और बाद में server किराये पर देने का काम शुरू किया।

    जांच में सामने आया है कि उसके customers से जुड़े कुछ मोबाइल नंबर पहले से लगभग 30 cybercrime complaints में दर्ज हैं। अब Crime Branch यह पता लगाने में जुटी है कि इन 1,100 users में कितने लोग वास्तव में cyber fraud से जुड़े थे और प्रवीण को उनकी गतिविधियों की जानकारी थी या नहीं।

    ₹17.42 लाख की ठगी से खुली server की कड़ी

    इस पूरे मामले की शुरुआत एक MGL Gas Bill Update वाले fraud से हुई। पुलिस के मुताबिक, पीड़ित को Mahanagar Gas Limited के नाम से message भेजा गया और bill update करने के नाम पर एक APK install करने के लिए कहा गया।

    APK मोबाइल में install होने के बाद उसमें मौजूद malware ने फोन की sensitive information तक पहुंच बनाई। इसी दौरान करीब ₹17.42 लाख की बैंकिंग ठगी हुई।

    साउथ रीजन साइबर पुलिस ने जब इस मामले की technical investigation शुरू की तो फर्जी APK के पीछे इस्तेमाल हो रहे server का IP address सामने आया। इसी digital trail को आगे बढ़ाते हुए जांचकर्ता server provider Hostinger तक पहुंचे और वहां से मिली जानकारी के आधार पर VPS operation का connection प्रवीण हुकुम चंद तक पहुंचा।

    YouTube से सीखी RDP-VPS की तकनीक

    पुलिस के मुताबिक, प्रवीण ने computer या IT की कोई formal technical education नहीं ली थी। उसने YouTube videos और internet पर उपलब्ध tutorials से web development, Remote Desktop Protocol यानी RDP और Virtual Private Server यानी VPS चलाना सीखा।

    इसके बाद उसने rdpwale.in नाम से website शुरू की और VPS तथा RDP services उपलब्ध कराने लगा। पुलिस का आरोप है कि customers से KYC या पहचान की पर्याप्त जानकारी लिए बिना server उपलब्ध कराए जाते थे। जांच के मुताबिक, अलग-अलग configurations के लिए ₹1,699 से ₹13,199 महीने तक charge किया जाता था।

    Server का इस्तेमाल सिर्फ website चलाने के लिए नहीं हुआ?

    पुलिस की जांच में आरोप है कि प्रवीण से लिए गए कुछ VPS का इस्तेमाल malicious APK चलाने वाले operators ने command-and-control यानी C2 server की तरह किया।

    सरल भाषा में समझें तो ऐसे server को fraudsters अपने malware और compromised मोबाइल के बीच communication के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे संक्रमित फोन से मिलने वाला sensitive data attacker तक पहुंच सकता है।

    Cyber forensic expert Nishant Salunkhe के मुताबिक, ऐसे fraudulent APK SMS, notifications और accessibility जैसी permissions का गलत इस्तेमाल करके OTP और दूसरी sensitive जानकारी हासिल कर सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि OTP को technically crack करने के बजाय compromised device से intercept किया जा सकता है। APK, उसके permissions, network connections और server infrastructure की जांच से investigators fraud की पूरी digital chain को समझ सकते हैं।

    1,100 customers का मतलब 1,100 cyber criminals नहीं

    इस मामले का सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि प्रवीण से server लेने वाले करीब 1,100 लोगों में वास्तव में कितने cybercrime में शामिल थे।

    पुलिस ने अभी सभी customers को cyber criminals घोषित नहीं किया है। जांच में सिर्फ इतना सामने आया है कि इन customers से जुड़े कुछ mobile numbers लगभग 30 NCRP cybercrime complaints में दिखाई दिए हैं।

    Crime Branch अब इन 1,100 users को अलग-अलग cybercrime cases से match कर रही है। साथ ही subscription के जरिए प्रवीण को मिली रकम, customer details, server logs और IP addresses की भी जांच हो रही है।

    rdpwale.in पर आज भी दिख रही हैं RDP services

    जांच के बीच rdpwale.in की public website भी उपलब्ध है। Website पर RDP plans ₹699 महीने से शुरू होते दिख रहे हैं। अलग-अलग plans में Windows Server, dedicated/private IP और full admin access जैसी सुविधाएं दी गई हैं। Website के “About RDPWALE” हिस्से में इसे “Owned by Praveen” बताया गया है और Bhiwani, Haryana का address दिया गया है।

    यहां एक महत्वपूर्ण अंतर भी सामने आता है। पुलिस की रिपोर्ट में उस समय उपलब्ध कराई गई services की कीमत ₹1,699 से ₹13,199 महीने बताई गई है, जबकि current public website पर ₹699, ₹899 और ₹1,499 जैसे plans दिखाई दे रहे हैं। इन दोनों pricing details के बीच अंतर का कारण अभी स्पष्ट नहीं है।

    MGL के नाम पर पहले भी हो चुकी है बड़ी ठगी

    यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब मुंबई में MGL के नाम पर fake APK वाले कई cyber fraud cases सामने आ चुके हैं।

    अप्रैल 2026 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ एक महीने में 100 से ज्यादा MGL consumers और applicants से करीब ₹2.7 करोड़ की ठगी की गई थी। Victims में 26 से 83 साल तक के लोग शामिल थे। Fraudsters gas connection बंद होने या bill update नहीं होने का डर दिखाकर APK download करवाते थे।

    यानी इस मामले में ₹17.42 लाख की एक ठगी सिर्फ एक isolated incident नहीं थी। इसी तरह के APK-based fraud में पहले भी लोगों के मोबाइल और banking information को निशाना बनाए जाने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं।

    Laptop और mobile से खुलेगा आगे का राज

    पुलिस ने प्रवीण के पास से laptop और mobile phone जब्त किया है। अब इन devices से customer records, server logs, payment details, IP addresses और communications की जांच की जा रही है।

    सबसे अहम सवाल यह है कि प्रवीण को अपने servers के इस्तेमाल की जानकारी कितनी थी। पुलिस यह भी जांच रही है कि उसने जानबूझकर cybercrime operators को infrastructure दिया या customers की गतिविधियों को नजरअंदाज किया।

    अगर server logs और payment records से customers का connection अलग-अलग cyber fraud cases से साबित होता है, तो यह जांच सिर्फ एक आरोपी की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगी। 1,100 users की mapping से देश के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे cybercrime cases के बीच नई कड़ियां सामने आ सकती हैं। फिलहाल इन सभी connections की जांच जारी है और आरोपों का अंतिम निष्कर्ष जांच तथा कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

  • मुंबई पुलिस की पेट्रोलिंग SUV में Reel, जांच शुरू; आखिर युवक ड्राइवर सीट तक पहुंचा कैसे? चाबी और CCTV पर सवाल

    मुंबई पुलिस की पेट्रोलिंग SUV में Reel, जांच शुरू; आखिर युवक ड्राइवर सीट तक पहुंचा कैसे? चाबी और CCTV पर सवाल

    मुंबई पुलिस की पेट्रोलिंग SUV में Reel का वीडियो वायरल होने के बाद जांच शुरू हुई। युवक पुलिस वाहन के अंदर कैसे पहुंचा, चाबी और CCTV पर सवाल हैं।

    मुंबई: मुंबई पुलिस की पेट्रोलिंग SUV में Instagram Reel बनाए जाने का वीडियो सामने आने के बाद जांच शुरू हो गई है। वायरल वीडियो में एक युवक पुलिस की गाड़ी की ड्राइवर सीट पर बैठकर स्टीयरिंग पकड़े नजर आ रहा है। अब जांच का सबसे अहम सवाल यही है कि वह पुलिस वाहन के अंदर पहुंचा कैसे?

    वीडियो में क्या दिखा?

    वायरल क्लिप में युवक मुंबई पुलिस की SUV के ड्राइवर सीट पर बैठकर कैमरे के लिए पोज करता दिखाई देता है। वीडियो में “Daddy’s Home” ऑडियो इस्तेमाल किया गया है। ऑनलाइन रिपोर्ट्स में वीडियो को Instagram अकाउंट @harijan6282 से जोड़ा गया है और युवक का नाम विजय हरिजन बताया गया है। हालांकि, उसकी पुलिस से किसी तरह की आधिकारिक संबद्धता की पुष्टि नहीं हुई है।

    वायरल हो रहा यह वीडियो Instagram पर अब उपलब्ध नहीं है। बताया जा रहा है कि विवाद के बाद वीडियो डिलीट कर दिया गया। जबकि वीडियो वायरल हो गया। वीडियो में एक युवक मुंबई पुलिस की SUV के ड्राइवर सीट पर बैठकर Reel बनाता नजर आता है। वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर यह सवाल उठ रहे हैं कि उसे पुलिस वाहन के अंदर जाने की अनुमति कैसे मिली और वाहन की चाबी उसके पास कैसे पहुंची।

    चाबी किसके पास थी?

    इस मामले में सिर्फ Reel बनाना मुद्दा नहीं है। बड़ा सवाल पुलिस की पेट्रोलिंग गाड़ी तक पहुंच का है।

    अगर युवक पुलिसकर्मी नहीं था, तो वह वाहन के अंदर कैसे पहुंचा? क्या SUV उस समय लॉक थी? चाबी किसके पास थी? वाहन किसकी ड्यूटी में था और क्या किसी ने उसे अंदर जाने की अनुमति दी?

    इन सवालों के जवाब CCTV फुटेज, वाहन की ड्यूटी एंट्री और संबंधित पुलिसकर्मियों से पूछताछ के जरिए सामने आ सकते हैं।

    वीडियो में युवक को ड्राइवर सीट पर बैठे देखा जा सकता है, लेकिन वह वाहन चला रहा था, ऐसा साबित करने वाला कोई स्पष्ट दृश्य सामने नहीं आया है।

    पुलिस के सोशल मीडिया नियम भी अहम

    फरवरी 2026 में मुंबई पुलिस ने अपने कर्मचारियों के लिए सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर सख्त निर्देश जारी किए थे। करीब 51,000 पुलिसकर्मियों को जारी आदेश में वर्दी में Reels और mini-vlogs बनाने पर रोक लगाई गई थी। पुलिस ने इसकी वजह सुरक्षा और गोपनीयता से जुड़े जोखिम बताए थे, क्योंकि ऐसे वीडियो में सरकारी वाहन, पुलिस परिसर और ड्यूटी से जुड़ी जानकारी सामने आ सकती है।

    महाराष्ट्र सरकार ने 2025 में सरकारी कर्मचारियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल के लिए भी दिशा-निर्देश जारी किए थे, जिनमें सरकारी वाहन और संपत्ति को निजी सोशल मीडिया पोस्ट में दिखाने को लेकर नियम शामिल थे।

    पुलिस वाहन की निगरानी पर फिर सवाल

    मुंबई में हाल ही में Coastal Road पर पुलिस वाहन से जुड़ा एक अलग मामला भी सामने आया था। जहां एक पुलिस वाहन कथित तौर पर बिना निगरानी रह गया था और उसकी चाबी वाहन में थी। बाद में वाहन को लेकर घटना हुई और CCTV की जांच की गई।

    दोनों मामले अलग हैं, लेकिन इनके सामने आने से पुलिस वाहनों की चाबी, custody और निगरानी को लेकर सवाल जरूर उठे हैं।

    जांच में अब क्या साफ होना बाकी?

    जांच में सबसे पहले वाहन की पहचान, घटना की जगह और समय तथा उस वक्त वाहन किस पुलिसकर्मी के जिम्मे था, यह स्पष्ट होना जरूरी है। इसके साथ CCTV, वाहन रिकॉर्ड और चाबी की स्थिति से यह पता चल सकता है कि युवक को SUV तक पहुंच कैसे मिली।

    अगर किसी पुलिसकर्मी की लापरवाही या अनुमति सामने आती है तो विभागीय कार्रवाई का सवाल उठ सकता है। वहीं, अगर युवक ने बिना अनुमति पुलिस वाहन में प्रवेश किया था, तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी जांच के निष्कर्ष पर निर्भर करेगी।

    फिलहाल FIR, गिरफ्तारी या किसी पुलिसकर्मी पर कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए इस स्तर पर सबसे बड़ा सवाल यही है—पुलिस की पेट्रोलिंग SUV तक युवक पहुंचा कैसे और उस वक्त वाहन की जिम्मेदारी किसके पास थी?

  • मुंबई लोकल में बड़ा बदलाव: Borivali की 2 ट्रेनें नहीं रुकेंगी, 6 नई सेवाएं और 6 बंद; AC लोकल बढ़ीं, Dadar-Dahanu direct, Virar-Churchgate भी बदला

    मुंबई लोकल में बड़ा बदलाव: Borivali की 2 ट्रेनें नहीं रुकेंगी, 6 नई सेवाएं और 6 बंद; AC लोकल बढ़ीं, Dadar-Dahanu direct, Virar-Churchgate भी बदला

    Western Railway का नया लोकल टाइमटेबल लागू है। Borivali halt, AC लोकल, नई-बंद सेवाओं और Virar-Dahanu connectivity में क्या बदला, जानें।

    मुंबई: मुंबईकरों के लिए Western Railway का नया Suburban Timetable No. 79 आज, 1 सितंबर 2026 से लागू हो गया है। इस बार कुल लोकल सेवाओं की संख्या बढ़ाने के बजाय मौजूदा 1,414 services का timetable बदला गया है। सबसे बड़ा प्रयोग Borivali में होगा, जहां शाम की 18:22 बजे वाली Churchgate–Virar AC और 19:05 बजे वाली Churchgate–Virar service को trial basis पर Borivali halt से हटा दिया गया है। दोनों सेवाओं का Dahisar halt बरकरार रखा गया है।

    रेलवे का मकसद Borivali के peak-hour congestion और उससे होने वाले train detention को कम करना है। लेकिन Borivali से रोज सफर करने वालों के लिए सीधा सवाल है—इन बदलावों से उनकी रोज की यात्रा आसान होगी या भीड़ सिर्फ दूसरी लोकल में चली जाएगी?

    Borivali में ट्रेन रोकना क्यों कम किया गया?

    Western Railway के मुताबिक Borivali पर peak hours में एक साथ बड़ी संख्या में passengers के चढ़ने-उतरने से door area में crowding बढ़ती है और train को station पर ज्यादा समय रुकना पड़ सकता है। इससे पीछे आने वाली services का punctuality pattern भी प्रभावित हो सकता है। इसी operational bottleneck को कम करने के लिए दो Churchgate–Virar services को Borivali पर रोकने का फैसला trial के तौर पर किया गया है।

    Borivali का passenger load इस फैसले को समझने के लिए अहम है। केंद्र सरकार के जून 2026 के आंकड़ों के मुताबिक स्टेशन करीब 3.65 लाख passengers रोज handle करता है। यहां करीब 1,200 suburban और करीब 191 long-distance train services आती-जाती हैं। Borivali suburban यात्रियों के साथ long-distance passengers के लिए भी boarding, de-boarding और interchange point है, जिससे peak hours में passenger movement और ज्यादा complex हो जाता है।

    यानी रेलवे का experiment सिर्फ दो trains का halt हटाने तक सीमित नहीं है। असली test यह होगा कि Borivali पर बचा हुआ crowd दूसरी services में कितना shift होता है और पूरे corridor की punctuality पर उसका क्या असर पड़ता है।

    18:22 और 19:05 वाली ट्रेन से Borivali जाने वालों को क्या करना होगा?

    18:22 बजे Churchgate से चलने वाली AC service के passengers के लिए एक स्पष्ट alternative मौजूद है। 18:28 बजे Churchgate से दूसरी AC local चलती है और वह Borivali पर रुकती है। यानी दोनों trains के बीच सिर्फ छह मिनट का अंतर है।

    19:05 वाली Churchgate–Virar service के लिए भी railway ने alternative services उपलब्ध होने की बात कही है, लेकिन इस particular train के Borivali passengers के लिए किसी एक replacement service को उसी तरह निर्धारित नहीं किया गया है। ऐसे यात्रियों के लिए revised timetable देखकर अपनी regular journey को adjust करना जरूरी होगा।

    दोनों affected trains का Dahisar halt बरकरार है। इसका मतलब Borivali पर उतरने या चढ़ने वाला passenger जरूरत के मुताबिक Dahisar तक जा सकता है, लेकिन वहां से आगे की यात्रा के लिए उसे अपनी सुविधा के हिसाब से अलग व्यवस्था करनी होगी।

    6 नई लोकल आईं, लेकिन कुल संख्या फिर भी 1,414

    नई timetable का दूसरा बड़ा बदलाव services की redistribution है। Western Railway ने 6 नई services शुरू की हैं और कम मांग वाली 6 existing services को withdraw किया है। इसलिए कुल suburban services की संख्या 1,414 पर ही बनी हुई है।

    नई services में मुख्य बदलाव extended suburban और late-night connectivity में हैं:

    नई सेवासमयबदलाव का फायदा
    Bhayandar–Virar07:46सुबह Virar side connectivity
    Bandra–Churchgate11:58दिन में अतिरिक्त service
    Borivali–Bhayandar22:14देर रात connectivity
    Borivali–Virar22:51Virar के लिए late-night option
    Virar–Borivali23:51रात में return connectivity
    Borivali–Bhayandar00:28आधी रात के बाद अतिरिक्त service

    इन बदलावों से खासकर late-evening और night commuters को अतिरिक्त options मिलेंगे।

    कौन-सी 6 services बंद हुईं?

    नए timetable में छह existing services हटाई गई हैं। इनमें दो Up और चार Down services शामिल हैं।

    Up direction में:

    • 94138 — Borivali–Churchgate AC
    • 90540 — Borivali–Churchgate

    Down direction में:

    • 94137 — Churchgate–Borivali AC
    • 90359 — Churchgate–Mumbai Central
    • 90483 — Churchgate–Borivali
    • 90911 — Churchgate–Mumbai Central

    Railway के मुताबिक withdrawn services मुख्य रूप से low-demand/non-peak runs हैं, इसलिए इन services को हटाकर उनके train paths और resources को दूसरे जरूरत वाले slots में इस्तेमाल किया गया है।

    AC लोकल 145 से बढ़कर 147, लेकिन तरीका क्या है?

    Weekdays पर AC local services अब 145 से बढ़कर 147 होंगी। इसके लिए दो existing non-AC services को AC में convert किया गया है।

    इनमें:

    • Churchgate–Borivali: 17:28
    • Borivali–Churchgate: 18:24

    शामिल हैं। इन services के route और timings को बरकरार रखते हुए AC operation किया गया है। इसलिए इसे दो पूरी तरह अतिरिक्त train services बढ़ने के बजाय existing network की AC capacity बढ़ने के रूप में समझना चाहिए।

    Virar और Dahanu Road वालों के लिए क्या बदला?

    नए timetable में extended suburban belt को भी ध्यान में रखा गया है।

    सुबह 08:23 बजे Virar से चलने वाली Virar–Dadar service को अब Churchgate तक extend किया गया है। यह करीब 09:48 बजे Churchgate पहुंचेगी। इससे सुबह Virar side से South Mumbai जाने वाले passengers को Churchgate तक direct option मिलता है।

    शाम को Dadar से Dahanu Road तक direct connectivity भी दी गई है। revised service Dadar से 17:22 बजे रवाना होकर करीब 19:30 बजे Dahanu Road पहुंचेगी। इसके लिए existing Dadar–Virar और Virar–Dahanu Road operations को integrate किया गया है।

    इस बदलाव का खास फायदा उन यात्रियों को मिलेगा जिन्हें शाम के समय Dadar से Virar के आगे Dahanu Road belt तक जाना होता है।

    Borivali की 10:24 वाली AC Slow भी बदली

    Borivali से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण बदलाव सुबह की AC service में है।

    Churchgate से 10:24 बजे चलने वाली AC Slow, जो पहले Borivali तक जाती थी, अब Goregaon तक operate करेगी। इसका return operation भी Goregaon से होगा। इसलिए जो passenger इस service को Borivali तक पहुंचने के लिए इस्तेमाल करते थे, उन्हें अब अपनी journey के लिए दूसरा option देखना होगा।

    रात में देर तक लोकल मिलने का फायदा

    नई timetable में late-night connectivity को भी जगह दी गई है। Borivali–Bhayandar–Virar corridor में रात 10 बजे के बाद और आधी रात के आसपास नई services जोड़ी गई हैं।

    इसका मतलब यह है कि timetable का पूरा focus सिर्फ office peak पर नहीं है। Western Railway ने रात के उन slots में भी service gaps को target किया है जहां यात्रियों के पास पहले comparatively कम options होते थे।

    सिर्फ timetable नहीं, capacity बढ़ाने की भी कोशिश

    Western Railway की strategy को केवल “नई ट्रेनें नहीं बढ़ीं” के रूप में देखना पूरी तस्वीर नहीं बताता।

    मार्च 2026 में 16 existing 12-car suburban services को 15-car trains में convert किया गया था। इससे 15-car services की संख्या 211 से बढ़कर 227 हुई, जबकि कुल suburban services 1,414 ही रहीं। इनमें आठ services morning और evening peak hours में operate की गईं।

    इससे एक बात साफ होती है—रेलवे केवल train count बढ़ाने के बजाय एक train में ज्यादा passengers carry करने, AC capacity बढ़ाने और existing train paths को ज्यादा efficiently इस्तेमाल करने की strategy पर भी काम कर रही है।

    इसी broader infrastructure push के तहत Kandivali–Borivali के बीच 3.21 किलोमीटर की sixth line जनवरी 2026 में commission की गई थी।

    Borivali के लिए station redevelopment और passenger circulation सुधारने की planning भी चल रही है। केंद्र सरकार के अनुसार proposed master plan में additional platform, बेहतर passenger circulation, upgraded concourse, foot overbridges और access systems जैसे काम शामिल हैं।

    अब सबसे बड़ा सवाल: Borivali experiment सफल हुआ या नहीं?

    इसका जवाब आने वाले दिनों के operational data से मिलेगा।

    अगर दो trains को Borivali से हटाने के बाद station पर boarding और alighting का pressure कम होता है, trains कम देर रुकती हैं और पीछे आने वाली services ज्यादा punctual होती हैं, तो रेलवे के इस experiment को फायदा माना जा सकता है।

    लेकिन अगर Borivali का passenger load अगली local में चला जाता है और दूसरी trains में crowding बढ़ने लगती है, तो यात्रियों के लिए समस्या सिर्फ एक train से दूसरी train में shift हो सकती है।

    इसीलिए नए timetable का सबसे अहम measure सिर्फ यह नहीं होगा कि Borivali पर दो trains कितनी जल्दी निकल गईं। असली सवाल यह होगा कि Churchgate–Borivali–Virar corridor की overall punctuality और passenger crowding में कितना वास्तविक सुधार आता है।

    यात्रियों के लिए एक जरूरी बदलाव

    Western Railway की official timetable listing में 1 सितंबर 2026 से लागू Mumbai Suburban Timetable उपलब्ध है। रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया है कि en-route stations पर कुछ suburban trains scheduled departure time से 3 मिनट पहले तक निकल सकती हैं। इसलिए रोज के commuters को सिर्फ अपनी पुरानी timing याद रखने के बजाय नए timetable के अनुसार departure check करना जरूरी है।

    फिलहाल Borivali की दो peak-hour services का halt हटाना trial basis पर है। बाकी बदलाव—नई और withdrawn services, AC conversion, Dadar–Dahanu direct connectivity, Virar–Churchgate extension और late-night services—नए timetable का हिस्सा हैं।

    अब नजर इस बात पर रहेगी कि Western Railway का यह “smart timetable” वास्तव में Borivali की भीड़ और Western line की delays को कितना कम कर पाता है और इसका फायदा सबसे ज्यादा किस corridor के यात्रियों को मिलता है।

  • मुंबई पोर्ट में अचानक पलटी क्रेन, जहाज से टकराते ही लगी आग; 2 कर्मचारी घायल

    मुंबई पोर्ट में अचानक पलटी क्रेन, जहाज से टकराते ही लगी आग; 2 कर्मचारी घायल

    मुंबई पोर्ट के बल्लार्ड पियर में क्रेन पलटकर जहाज से टकरा गई और आग लग गई। हादसे में दो कर्मचारी घायल हुए, पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

    मुंबई: मुंबई पोर्ट के बल्लार्ड पियर इलाके में रविवार शाम अचानक एक क्रेन पलटकर जहाज से टकरा गई। टक्कर के बाद क्रेन में आग लग गई और मौके पर अफरा-तफरी मच गई। हादसे में क्रेन संचालन से जुड़े दो कर्मचारी घायल हुए हैं। दोनों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।

    माल उतारते समय बिगड़ा क्रेन का संतुलन

    यह हादसा बीपीएस बंदरगाह क्षेत्र में हुआ। पुलिस के मुताबिक, बारबाडोस के झंडे वाले मालवाहक जहाज ‘वियना’ से करीब 140 मीट्रिक टन माल उतारा जा रहा था। इसके लिए दो क्रेनों का इस्तेमाल किया जा रहा था।

    माल उठाने के दौरान एक क्रेन से जुड़ा पट्टा असंतुलित होकर निकल गया। इसके बाद भार दूसरी क्रेन पर आ गया और उसका संतुलन बिगड़ गया। क्रेन का आगे का हिस्सा जहाज से जा टकराया।

    टक्कर के बाद लगी आग

    जहाज से टकराने के बाद क्रेन में आग लग गई। सूचना मिलते ही मुंबई पोर्ट के दमकल दल मौके पर पहुंचा और आग पर काबू पाया। करीब एक घंटे के भीतर आग बुझा दी गई।

    हादसे में बरकत कंपनी के कर्मचारी रंजीत सिंह और निशांत सिंह घायल हुए। दोनों को सेंट जॉर्ज अस्पताल ले जाया गया। उनकी चोटों की गंभीरता को लेकर फिलहाल विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

    जहाज और बंदरगाह के काम पर क्या असर?

    हादसे के बाद जहाज ‘वियना’ को मौके पर रखा गया और नुकसान का आकलन किया जा रहा था। प्रभावित जगह पर माल संभालने का काम कुछ समय के लिए प्रभावित हुआ। हालांकि पूरे मुंबई पोर्ट के कामकाज पर कितना असर पड़ा, इसकी स्पष्ट आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

    हादसा कैसे हुआ, इसकी जांच जारी

    पुलिस शुरुआती तौर पर तकनीकी गड़बड़ी और भार का संतुलन बिगड़ने की वजह की जांच कर रही है। जांच में यह भी देखा जाएगा कि माल उठाने के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और इस्तेमाल किए गए उपकरणों की स्थिति कैसी थी।

    फिलहाल हादसे में दो कर्मचारियों के घायल होने की पुष्टि है। क्रेन और जहाज को हुए नुकसान की पूरी तस्वीर तकनीकी आकलन के बाद साफ होगी। पुलिस की जांच जारी है और हादसे की वास्तविक वजह पर अब जांच एजेंसियों की नजर है।