Category: Civic Issues

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  • मालवणी में एक ही सोनोग्राफी के ₹2,400 बनाम ₹1,600, BMC से जांच की मांग

    मालवणी में एक ही सोनोग्राफी के ₹2,400 बनाम ₹1,600, BMC से जांच की मांग

    मालवणी में एक ही सोनोग्राफी सेवा के लिए ₹2,400 और ₹1,600 की फीस का मामला सामने आया है। शिकायत के बाद BMC से रेट कार्ड और बिलिंग रिकॉर्ड की जांच की मांग की गई है।

    मुंबई: मलाड पश्चिम के मालवणी इलाके में सोनोग्राफी की फीस को लेकर एक शिकायत के बाद निजी डायग्नोस्टिक सेंटर की शुल्क व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। Gold Life Welfare Trust की ओर से BMC के P/West Ward के Medical Officer of Health को दी गई शिकायत में Alpha Imaging and Diagnostic Centre पर एक ही सोनोग्राफी सेवा के लिए ₹2,400 मांगे जाने का आरोप लगाया गया है।

    शिकायतकर्ता Ibrahim Shaikh के अनुसार, 17 सितंबर 2026 को वह अपनी मां के साथ किडनी स्टोन की जांच के लिए Alpha Imaging and Diagnostic Centre पहुंचे थे। शिकायत में कहा गया है कि दोनों की सोनोग्राफी के लिए कुल ₹2,400 मांगे गए। फीस को लेकर जानकारी और रेट कार्ड के आधार के बारे में पूछने पर काउंटर पर मौजूद महिला कर्मचारी द्वारा कथित तौर पर उन्हें कहीं और जांच कराने के लिए कहा गया।

    Ibrahim Shaikh ने ₹2,400 का भुगतान नहीं किया। इसके बाद उसी दिन उन्होंने अपनी और अपनी मां की वही सोनोग्राफी दूसरे डायग्नोस्टिक सेंटर में कराई, जहां दोनों की जांच के लिए कुल ₹1,600 का भुगतान किया गया। इस तरह शिकायत में एक ही सोनोग्राफी सेवा के लिए दोनों सेंटरों के बीच ₹800 के शुल्क अंतर को मुख्य आधार बनाया गया है।

    हालांकि, इस शुल्क अंतर से अपने आप यह साबित नहीं होता कि Alpha Imaging द्वारा मांगी गई ₹2,400 की राशि नियमों के खिलाफ थी। इसका वास्तविक आधार संबंधित सेंटर का लागू रेट कार्ड, शुल्क संरचना, बिलिंग रिकॉर्ड और उस दिन मरीजों से लिए या मांगे गए शुल्क के रिकॉर्ड की जांच से स्पष्ट होगा।

    शिकायतकर्ता का कहना है, कि मलवानी जैसे गरीब बाहुल्य इलाके में जरूरी इलाज और जांच रिपोर्ट कम से कम दामों में किया जाना चाहिए। जबकि प्रत्येक सोनोग्राफी पर 400 रुपये का अंतर गरीबों के लिए भारी पड़ सकता है।

    शिकायत में BMC से Alpha Imaging and Diagnostic Centre के पंजीकरण और अनुमति की जांच करने के साथ सोनोग्राफी सेवा से जुड़े डॉक्टरों की योग्यता और पंजीकरण रिकॉर्ड की जांच की मांग की गई है। इसके अलावा सोनोग्राफी मशीन के पंजीकरण, सेंटर के PCPNDT पंजीकरण, आवश्यक रिकॉर्ड और 17 सितंबर 2026 के शुल्क एवं लेनदेन संबंधी दस्तावेजों की जांच की मांग भी की गई है।

    शिकायत में यह भी पूछा गया है कि सेंटर पर मरीजों के लिए लागू शुल्क और रेट कार्ड स्पष्ट रूप से प्रदर्शित क्यों नहीं किया जाता। शिकायतकर्ता ने BMC से सेंटर का भौतिक निरीक्षण कर पूरे मामले की जांच करने और कार्रवाई की स्थिति की जानकारी लिखित रूप में देने की मांग की है।

    Alpha Imaging and Diagnostic Centre की वेबसाइट पर मालवणी स्थित सेंटर में 3D/4D Sonography और Ultrasound सहित कई डायग्नोस्टिक सेवाएं उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी में सेंटर के मालवणी स्थित पते का भी उल्लेख है।

    महाराष्ट्र में सोनोग्राफी केंद्रों के लिए PCPNDT कानून के तहत पंजीकरण और निर्धारित रिकॉर्ड रखना अनिवार्य है। ऐसे केंद्रों की जांच में पंजीकरण, डॉक्टरों की जानकारी, मशीन और निर्धारित रिकॉर्ड सहित विभिन्न दस्तावेजों का परीक्षण किया जा सकता है।

    अब इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि 17 सितंबर को मांगी गई ₹2,400 की राशि किस शुल्क संरचना के आधार पर तय की गई थी और क्या उस समय लागू रेट कार्ड तथा बिलिंग रिकॉर्ड में यही राशि दर्ज थी। BMC की जांच के बाद ही इस शुल्क को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

    शिकायत के साथ दूसरे डायग्नोस्टिक सेंटर की 17 सितंबर की सोनोग्राफी रिपोर्ट, ₹1,600 के भुगतान का प्रमाण, Alpha Imaging का विज्ञापन/पैम्फलेट और सेंटर के साइनबोर्ड की तस्वीर उपलब्ध कराए जाने का उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता ने जांच के दौरान आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने की बात भी कही है।

    फिलहाल BMC की ओर से इस शिकायत पर निरीक्षण किए जाने का आश्वासन दिया गया है। जांच के बाद ही मामला स्पष्ट रूप से सामने आ सकेगा।

  • Petrol Pump UPI Rule: ₹2,000 से ज्यादा के भुगतान पर बदलेंगे नियम, जानिए ग्राहकों पर क्या होगा असर

    Petrol Pump UPI Rule: ₹2,000 से ज्यादा के भुगतान पर बदलेंगे नियम, जानिए ग्राहकों पर क्या होगा असर

    15 अक्टूबर से ₹2,000 से ज्यादा UPI मर्चेंट पेमेंट पर MDR लागू होगा। पेट्रोल पंपों पर ₹5 शुल्क को लेकर डीलर्स के विरोध से ग्राहकों के भुगतान विकल्प बदल सकते हैं।

    मध्यप्रदेश: ₹2,000 से ज्यादा के पेट्रोल-डीजल भुगतान के लिए UPI इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों को जल्द नया नियम देखने को मिल सकता है। 15 अक्टूबर 2026 से हाई-वैल्यू UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर नया Merchant Discount Rate (MDR) लागू होना है। पेट्रोल और डीजल जैसे fuel transactions के लिए ₹2,000 से ऊपर के भुगतान पर flat ₹5 MDR तय किया गया है। इसी शुल्क का विरोध करते हुए मध्य प्रदेश के पेट्रोल पंप डीलर्स ने 16 अक्टूबर से ₹2,000 से ज्यादा के UPI भुगतान स्वीकार नहीं करने का फैसला किया है।

    इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि पेट्रोल पंपों पर UPI पूरी तरह बंद हो जाएगा। ₹2,000 तक के भुगतान पर UPI जारी रहेगा। विवाद सिर्फ ₹2,000 से ज्यादा के merchant payment पर लगने वाले MDR को लेकर है। सरकार की व्यवस्था के मुताबिक यह शुल्क ग्राहक से सीधे वसूलने के लिए नहीं है, बल्कि merchant-side payment processing cost है।

    क्या बदलेगा 15 अक्टूबर से?

    नए framework में सामान्य eligible UPI merchant transactions पर ₹2,000 से ऊपर 0.4 प्रतिशत MDR रखा गया है। वहीं fuel, railway, telecom और कुछ अन्य श्रेणियों के लिए ₹2,000 से ऊपर flat ₹5 MDR का प्रावधान है। सामान्य category में बहुत बड़े transactions के लिए ₹300 की अधिकतम सीमा भी रखी गई है।

    इसलिए पेट्रोल पंप के मामले में 0.4 प्रतिशत और ₹5 MDR के बीच अंतर समझना जरूरी है। उदाहरण के लिए ₹10,000 के सामान्य eligible merchant UPI payment पर 0.4 प्रतिशत के हिसाब से ₹40 MDR बन सकता है, जबकि fuel transaction के लिए ₹2,000 से ऊपर flat ₹5 का प्रावधान है।

    ग्राहक को ₹5 अलग से देना होगा?

    नहीं। MDR को ग्राहक पर सीधे UPI शुल्क के रूप में डालने की व्यवस्था नहीं की गई है। इसका असर merchant और payment ecosystem के बीच होने वाली processing cost पर है। हालांकि पेट्रोल पंप डीलर्स का कहना है कि उनके कम और निर्धारित मार्जिन में यह अतिरिक्त लागत उठाना मुश्किल होगा।

    मध्य प्रदेश में 4,700 पेट्रोल पंपों पर असर

    मध्य प्रदेश में यह फैसला करीब 4,700 पेट्रोल पंपों को प्रभावित कर सकता है। मध्य प्रदेश पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह के मुताबिक प्रत्येक पंप पर रोजाना औसतन करीब 100 ऐसे ग्राहक होते हैं जिनका fuel payment ₹2,000 से ज्यादा होता है। एसोसिएशन ने अनुमान लगाया है कि MDR और GST को मिलाकर एक पंप पर करीब ₹590 प्रतिदिन और लगभग ₹17,700 प्रति माह का अतिरिक्त खर्च बैठ सकता है।

    इस गणना के आधार पर 4,700 पंपों पर संभावित लागत करीब ₹8.3 करोड़ प्रति माह बैठती है। यह डीलर्स के अनुमान पर आधारित गणना है, सरकार की ओर से जारी कोई स्वतंत्र cost assessment नहीं।

    डीलर्स क्यों कर रहे हैं विरोध?

    पेट्रोल पंप कारोबार में fuel की बिक्री पर dealer margin सीमित और निर्धारित होता है। डीलर्स का तर्क है कि बड़े UPI भुगतान पर flat MDR उनकी कमाई को सीधे प्रभावित करेगा। अजय सिंह ने कहा है कि पंप का profit margin बहुत कम है और इस अतिरिक्त खर्च को ग्राहकों से वसूलना भी आसान नहीं है।

    मध्य प्रदेश में डीलर्स ने इस मुद्दे पर अपने State-Level Coordinator को पत्र भी भेजा है और सरकार से UPI को MDR से छूट देने की मांग की है। उनका कहना है कि petrol pumps को credit और debit card transactions में पहले से MDR संबंधी छूट मिली हुई है, इसलिए UPI के लिए भी इसी तरह की राहत दी जानी चाहिए।

    ग्राहकों के पास कौन-कौन से विकल्प रहेंगे?

    अगर मध्य प्रदेश के डीलर्स का फैसला बिना बदलाव लागू होता है, तो ₹2,000 से ज्यादा के fuel payment पर ग्राहक को UPI के बजाय उपलब्ध दूसरे payment mode का इस्तेमाल करना पड़ सकता है।

    ₹2,000 तक के fuel payment के लिए UPI उपलब्ध रहेगा। मध्य प्रदेश डीलर्स एसोसिएशन ने debit और credit card payment सुविधा जारी रखने की बात कही है। इसलिए इसे पूरे पेट्रोल पंप पर cash-only व्यवस्था के रूप में समझना सही नहीं होगा। अलग-अलग पंपों पर उपलब्ध payment options अलग हो सकते हैं।

    क्या ₹2,000 से ज्यादा का UPI भुगतान पूरे देश में बंद होगा?

    नहीं। नया MDR framework पूरे देश में लागू होने वाला payment-cost framework है, लेकिन ₹2,000 से ज्यादा का UPI स्वीकार करना या न करना merchant का अलग operational decision हो सकता है।

    फिलहाल fuel dealers के बीच इसका विरोध कई जगह दिखाई दे रहा है। मध्य प्रदेश में 4,700 पंपों का फैसला सामने आया है, जबकि महाराष्ट्र में भी fuel dealers ने UPI पर MDR से छूट की मांग की है। मुंबई के पेट्रोल पंप संचालकों ने भी 15 अक्टूबर से high-value UPI payments रोकने की चेतावनी दी है, अगर fuel retailers को MDR से छूट नहीं मिलती।

    महाराष्ट्र में भी बढ़ रहा विरोध

    महाराष्ट्र में fuel dealers का कहना है कि ₹5 का flat MDR कम margin वाले कारोबार पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। महाराष्ट्र के dealer organisations इस मुद्दे पर 27 सितंबर के आसपास आगे की रणनीति पर फैसला लेने की बात कह चुके हैं।

    मुंबई में डीलर्स की मांग सिर्फ MDR हटाने तक सीमित नहीं है। उनका एक प्रस्ताव यह भी है कि अगर UPI payment पर कोई processing cost आती है तो उसका बोझ oil marketing companies उठाएं, ताकि पेट्रोल पंप डीलर्स के निर्धारित margin पर सीधा असर न पड़े।

    सरकार और डीलर्स के बीच बातचीत जारी

    इस विवाद के बीच 17 सितंबर को All India Petroleum Dealers Association (AIPDA) के प्रतिनिधियों ने Petroleum and Natural Gas Ministry के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। बैठक में UPI fuel transactions पर MDR exemption की मांग उठाई गई। मंत्रालय की ओर से MDR व्यवस्था के पीछे digital payment infrastructure को मजबूत करने का उद्देश्य भी समझाया गया।

    AIPDA के अध्यक्ष अजय बंसल ने भी Finance Minister के हस्तक्षेप की मांग करते हुए fuel retailers को ₹2,000 से ऊपर UPI payments पर MDR से पूरी छूट देने की मांग की है।

    CAIT ने भी जताई चिंता

    Confederation of All India Traders (CAIT) ने मध्य प्रदेश में high-value UPI payments रोकने के फैसले को डिजिटल transactions के लिए चिंता का विषय बताया है। CAIT के भोपाल जिला अध्यक्ष और मध्य प्रदेश मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र शर्मा के अनुसार राज्य के करीब 4,700 पेट्रोल पंप इस फैसले से प्रभावित हो सकते हैं।

    धर्मेंद्र शर्मा ने यह भी स्पष्ट किया कि सामान्य merchant transactions और fuel transactions के MDR में अंतर है। सामान्य eligible merchant payment पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होता है, जबकि fuel transactions के लिए ₹2,000 से ऊपर flat ₹5 MDR का प्रावधान है।

    एक और जरूरी बात: UPI पूरी तरह महंगा नहीं हुआ है

    नए MDR framework का मतलब यह नहीं है कि हर UPI payment पर शुल्क लगेगा। ₹2,000 तक के merchant payments पर MDR नहीं लगाया गया है और person-to-person UPI transactions भी इस merchant MDR व्यवस्था से अलग हैं। सरकार के मुताबिक नए framework से अधिकांश छोटे-value P2M transactions प्रभावित नहीं होंगे।

    आगे क्या होगा?

    अब मुख्य सवाल यह है कि 15 अक्टूबर से पहले fuel dealers को MDR से छूट मिलती है या नहीं। सरकार और petroleum dealers के बीच बातचीत हो चुकी है, लेकिन उपलब्ध ताजा जानकारी में fuel sector के लिए पूर्ण MDR exemption की अंतिम घोषणा सामने नहीं आई है। इसलिए मध्य प्रदेश में 16 अक्टूबर से ₹2,000 से ऊपर UPI रोकने का फैसला फिलहाल डीलर्स की घोषित स्थिति है और इसमें सरकार के अगले फैसले के आधार पर बदलाव हो सकता है।

    ग्राहकों के लिए फिलहाल सबसे जरूरी बात यही है कि ₹2,000 तक का UPI payment जारी रहेगा, जबकि इससे ज्यादा के fuel payment के लिए 15-16 अक्टूबर के बाद संबंधित पेट्रोल पंप पर उपलब्ध payment option पहले से जांचना जरूरी होगा।

  • महाराष्ट्र में ₹2,000 से ऊपर UPI पर संकट, पेट्रोल पंपों का 27 सितंबर को बड़ा फैसला

    महाराष्ट्र में ₹2,000 से ऊपर UPI पर संकट, पेट्रोल पंपों का 27 सितंबर को बड़ा फैसला

    महाराष्ट्र के करीब 8,000 पेट्रोल पंपों पर ₹2,000 से ऊपर UPI भुगतान को लेकर विरोध तेज है। 27 सितंबर की बैठक के बाद 15 अक्टूबर से नियम बदल सकते हैं।

    मुंबई: महाराष्ट्र में पेट्रोल-डीजल भराने वाले वाहन चालकों के लिए UPI भुगतान को लेकर बड़ा बदलाव सामने आ रहा है। ₹2,000 से अधिक के ईंधन भुगतान पर लागू होने वाले नए Merchant Discount Rate (MDR) के विरोध में राज्य के पेट्रोल पंप डीलर्स लामबंद हैं। करीब 8,000 पेट्रोल पंपों वाले महाराष्ट्र में इस मुद्दे पर 27 सितंबर को होने वाली बैठक के बाद आगे की कार्रवाई तय हो सकती है।

    अगर शुल्क से पेट्रोल पंपों को छूट नहीं मिलती है, तो मुंबई समेत राज्य के कई हिस्सों में ₹2,000 से ऊपर के UPI भुगतान स्वीकार करना बंद करने की चेतावनी दी गई है। हालांकि, अभी पूरे महाराष्ट्र में UPI बंद करने का अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

    ₹2,000 तक UPI भुगतान पर क्या होगा

    नए UPI ढांचे के तहत ₹2,000 तक के व्यापारी भुगतान पर MDR नहीं लगेगा। केंद्र सरकार के अनुसार लगभग 96 प्रतिशत P2M UPI लेनदेन नए शुल्क से प्रभावित नहीं होंगे। व्यक्ति से व्यक्ति होने वाले UPI भुगतान भी मुफ्त रहेंगे।

    ईंधन क्षेत्र के लिए ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर सामान्य 0.4 प्रतिशत MDR के बजाय प्रति लेनदेन ₹5 का फ्लैट MDR निर्धारित किया गया है। यह शुल्क ग्राहक से सीधे वसूलने के लिए नहीं है, बल्कि भुगतान व्यवस्था से जुड़े पक्षों के बीच वितरित किया जाता है।

    यानी महाराष्ट्र में अगर कोई ग्राहक ₹1,800 का पेट्रोल या डीजल UPI से भरवाता है, तो इस नए MDR का सवाल नहीं उठेगा। लेकिन ₹2,000 से ज्यादा के ईंधन भुगतान पर पंप डीलर के लिए अतिरिक्त लागत जुड़ सकती है।

    महाराष्ट्र के पेट्रोल पंप डीलर्स क्यों नाराज हैं

    Federation of All Maharashtra Petrol Dealers Association यानी FAMPEDA ने नए MDR का विरोध किया है। संगठन के अध्यक्ष अमित गुप्ता का कहना है कि पेट्रोल पंपों का डीलर मार्जिन प्रति लीटर तय होता है और डीलर्स ईंधन की बिक्री कीमत या अपना मार्जिन अपनी तरफ से नहीं बढ़ा सकते। ऐसे में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त लागत सीधे उनके मार्जिन को प्रभावित करेगी।

    Petrol Dealers Association Pune के अध्यक्ष और FAMPEDA के उपाध्यक्ष ध्रुव रुपारेल ने भी कहा है कि पेट्रोल-डीजल की बड़ी संख्या में खरीद ₹2,000 से ऊपर होती है। इसलिए किसी भी तरह का MDR या डिजिटल भुगतान शुल्क डीलर्स के खर्च पर सीधा असर डाल सकता है।

    27 सितंबर को महाराष्ट्र के लिए बड़ा फैसला

    महाराष्ट्र के पेट्रोल डीलर्स की अगली महत्वपूर्ण बैठक 27 सितंबर को होगी। FAMPEDA अध्यक्ष अमित गुप्ता के अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर डीलर्स संगठन जो फैसला करेंगे, उसका असर महाराष्ट्र में भी लागू होगा। इसी बैठक के बाद यह स्पष्ट हो सकता है कि राज्य के पेट्रोल पंप ₹2,000 से ऊपर UPI स्वीकार करना जारी रखेंगे या नहीं।

    इसका मतलब यह है कि अभी से यह कहना सही नहीं होगा कि 15 अक्टूबर से पूरे महाराष्ट्र के सभी पेट्रोल पंपों पर ₹2,000 से ज्यादा का UPI भुगतान बंद हो जाएगा।

    मुंबई में पहले ही दी जा चुकी है चेतावनी

    मुंबई में स्थिति थोड़ी ज्यादा स्पष्ट है। Petrol Dealers Association, Mumbai के अध्यक्ष चेतन मोदी ने RBI और वित्त मंत्रालय से पेट्रोल पंपों को नए MDR से पूरी तरह छूट देने की मांग की है। राहत नहीं मिलने पर मुंबई के पेट्रोल पंपों पर 15 अक्टूबर से ₹2,000 से ऊपर के UPI भुगतान बंद करने की चेतावनी दी गई है।

    मुंबई के डीलर्स का एक विकल्प यह भी है कि यदि Oil Marketing Companies यानी तेल कंपनियां MDR का खर्च खुद उठाने के लिए तैयार होती हैं, तो डीलर्स अपना विरोध वापस लेने पर विचार कर सकते हैं।

    मुंबई पेट्रोल डीलर्स के अनुसार पेट्रोल पंपों पर डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल पहले ही काफी बढ़ चुका है। ऐसे में अचानक बड़े UPI भुगतान रोकने से ग्राहकों और पंप संचालकों दोनों के लिए भुगतान व्यवस्था में बदलाव आएगा।

    ट्रक और व्यावसायिक वाहनों के लिए भी चिंता

    महाराष्ट्र State Vahan Chalak Malak Pratinidhi Mahasangh के अध्यक्ष बाबा शिंदे ने बड़े UPI भुगतान बंद होने की स्थिति में ट्रक ड्राइवरों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर के सामने आने वाली व्यावहारिक समस्याओं की ओर ध्यान दिलाया है।

    बड़े वाहनों में ईंधन भराने के लिए ₹2,000 से अधिक का भुगतान सामान्य है। यदि ऐसे भुगतान पर UPI उपलब्ध नहीं रहता है, तो ड्राइवरों को नकद या उपलब्ध अन्य भुगतान माध्यमों पर निर्भर रहना पड़ सकता है। बाबा शिंदे ने नकदी रखने से जुड़े सुरक्षा जोखिमों की भी चिंता जताई है।

    सरकार की तरफ से क्या रुख है

    महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 20 सितंबर को UPI शुल्क को लेकर कहा कि डिजिटल भुगतान से व्यापार और लेनदेन की पारदर्शिता बढ़ी है। उन्होंने व्यापारियों और पेट्रोल पंप संचालकों से मामूली शुल्क का विरोध नहीं करने की अपील की। फडणवीस के अनुसार UPI व्यवस्था से कारोबार को फायदा हुआ है और नए शुल्क का उद्देश्य भुगतान व्यवस्था की लागत को पूरा करना है।

    वहीं केंद्र सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि नया MDR सभी UPI भुगतान पर लागू नहीं होगा। ₹2,000 तक के P2M भुगतान और P2P लेनदेन मुफ्त रहेंगे। ईंधन जैसे आवश्यक और कम मार्जिन वाले क्षेत्र के लिए ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर ₹5 का फ्लैट MDR रखा गया है।

    15 अक्टूबर से महाराष्ट्र में क्या बदल सकता है

    फिलहाल तीन बातें सबसे महत्वपूर्ण हैं। पहली, ₹2,000 तक के पेट्रोल-डीजल भुगतान पर UPI जारी रहेगा। दूसरी, ₹2,000 से अधिक के ईंधन भुगतान पर ₹5 MDR की व्यवस्था लागू होने वाली है। तीसरी, महाराष्ट्र के पेट्रोल पंप डीलर्स का राज्यव्यापी रुख 27 सितंबर की बैठक के बाद स्पष्ट होगा।

    मुंबई के डीलर्स ने 15 अक्टूबर से बड़े UPI भुगतान रोकने की चेतावनी पहले ही दे दी है, जबकि महाराष्ट्र के स्तर पर अंतिम सामूहिक फैसला अभी बाकी है। इसलिए फिलहाल ग्राहकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि 27 सितंबर के बाद डीलर्स संगठन क्या निर्णय लेते हैं और क्या उससे पहले MDR में पेट्रोल पंपों को कोई छूट मिलती है।

  • कांजुरमार्ग में 13वीं मंजिल से गिरी 200 किलो की बीम, पहले भी गिरता था सामान; 4 पर केस

    कांजुरमार्ग में 13वीं मंजिल से गिरी 200 किलो की बीम, पहले भी गिरता था सामान; 4 पर केस

    कांजुरमार्ग में 13वीं मंजिल से 200 किलो की लोहे की बीम पुलिस कार्यालय के सामने गिरी। पहले भी निर्माण सामग्री गिरने की शिकायत थी, 4 पर केस दर्ज।

    मुंबई: कांजुरमार्ग में निर्माणाधीन इमारत की 13वीं मंजिल से करीब 200 किलो वजनी लोहे की बीम गिरने की घटना के बाद निर्माण स्थल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बीम सीधे कांजुरमार्ग पुलिस स्टेशन के एक्सटर्नमेंट विभाग के कार्यालय के प्रवेश द्वार के सामने गिरी। घटना में किसी व्यक्ति के घायल होने की जानकारी नहीं है, लेकिन कार्यालय की टिन की छत और पास का पेड़ क्षतिग्रस्त हुआ है। पुलिस ने मामले में ठेकेदार समेत चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है।

    यह घटना 18 सितंबर की दोपहर की है। एक्सटर्नमेंट विभाग में तैनात सहायक पुलिस उपनिरीक्षक (ASI) विश्वास दशरथ देसाई उस समय कार्यालय में कंप्यूटर पर काम कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें तेज आवाज सुनाई दी। बाहर निकलने पर कार्यालय के प्रवेश द्वार के सामने भारी लोहे की बीम पड़ी मिली। बीम नीचे आने से पहले एक पेड़ और कार्यालय की टिन की छत से टकराई थी।

    200 किलो की बीम के गिरने से पहले भी सामने आई थी समस्या

    इस घटना को गंभीर बनाने वाली सबसे अहम बात यह है कि निर्माण स्थल से निर्माण सामग्री गिरने की शिकायत पहले भी सामने आई थी। पुलिस के अनुसार, इससे पहले भी पत्थर, गिट्टी और लोहे की रॉड आसपास गिर चुकी थीं। निर्माण स्थल के ठेकेदार को इस संबंध में पहले भी चेतावनी दी जा चुकी है।

    ऐसे में अब जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पहले की शिकायतों और चेतावनी के बाद साइट पर सुरक्षा व्यवस्था में क्या बदलाव किए गए थे। यह भी जांच का विषय है कि इतनी भारी बीम 13वीं मंजिल से नीचे गिरने की स्थिति तक कैसे पहुंची और उस समय उसे सुरक्षित रखने के लिए क्या इंतजाम मौजूद थे।

    ठेकेदार, इंजीनियर और दो सेफ्टी सुपरवाइजर पर केस

    पुलिस ने KAMS Realtor से जुड़े साइट ठेकेदार मितेश जैन, साइट इंजीनियर धनराज रामचंद्र जगताप और सेफ्टी सुपरवाइजर विक्रम तथा सोहेल मिर्जा के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि निर्माण स्थल पर लोगों की जान और व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने से रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं किए गए। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।

    पुलिस ने घटना के बाद निर्माण स्थल पर मौजूद कर्मचारियों से भी पूछताछ की। मौके पर मौजूद कर्मचारियों से मिली जानकारी के आधार पर बीम के निर्माण स्थल से गिरने की पुष्टि की गई। हालांकि बीम के गिरने की वास्तविक तकनीकी वजह क्या थी, इसकी जांच अभी जारी है।

    जिस प्रोजेक्ट की 13वीं मंजिल से बीम गिरी, उसका RERA रिकॉर्ड

    सार्वजनिक रियल एस्टेट रिकॉर्ड में KAMS Realtors का Kams Krystel प्रोजेक्ट कांजुरमार्ग ईस्ट के Purshotam Godbole Road पर दर्ज है और इसका MahaRERA registration number P51800051412 है। परियोजना अभी निर्माणाधीन दर्ज है और इसके लिए 31 दिसंबर 2026 की completion date दर्ज है। RERA-derived रिकॉर्ड में प्रोजेक्ट के लिए Ground + 24 Floor संरचना दर्ज है।

    रिकॉर्ड यह भी दिखाते हैं कि इस प्रोजेक्ट से संबंधित MahaRERA में CC12501288 नंबर की एक शिकायत 17 अप्रैल 2025 को दर्ज हुई थी और वह disposed/order approved स्थिति में दिखाई देती है। हालांकि उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड से यह स्थापित नहीं होता कि वह शिकायत निर्माण स्थल की सुरक्षा से संबंधित थी।

    हादसे में किसी की जान नहीं गई, लेकिन खतरा गंभीर था

    घटना के समय कार्यालय में कर्मचारी मौजूद थे और बीम कार्यालय के प्रवेश द्वार के ठीक सामने आकर गिरी। बीम का पेड़ और कार्यालय की छत से टकराना इस बात को महत्वपूर्ण बनाता है कि निर्माण स्थल से गिरने वाली सामग्री का जोखिम केवल वहां काम कर रहे मजदूरों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आसपास मौजूद कार्यालयों और लोगों तक भी पहुंच सकता है। इस मामले में किसी के घायल नहीं होने की पुष्टि है, जबकि कार्यालय की टिन की छत को नुकसान पहुंचा है।

    मुंबई में निर्माण स्थलों से गिरने वाली भारी सामग्री को लेकर हाल के दिनों में अलग-अलग घटनाएं भी सामने आई हैं। ऐसे मामलों में site barricading, material handling, ऊंचाई पर सामग्री की सुरक्षित व्यवस्था और आसपास के सार्वजनिक क्षेत्र को सुरक्षित रखने के उपाय जांच के महत्वपूर्ण हिस्से बनते हैं।

    अब जांच में इन सवालों के जवाब अहम

    कांजुरमार्ग की इस घटना में पुलिस जांच के सामने अब केवल यह सवाल नहीं है कि बीम कैसे गिरी। यह भी महत्वपूर्ण होगा कि पहले निर्माण सामग्री गिरने की शिकायतें कब-कब हुईं, ठेकेदार को किस तरह की चेतावनी दी गई, उसके बाद क्या सुरक्षा उपाय किए गए और घटना के समय साइट पर भारी सामग्री को संभालने की व्यवस्था क्या थी।

    फिलहाल पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। बीम गिरने की तकनीकी वजह, साइट पर सुरक्षा व्यवस्था और पहले की शिकायतों के बाद उठाए गए कदमों से जुड़े तथ्य जांच आगे बढ़ने के साथ स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • मुंबई में 39,111 झोपड़ियां BMC के रडार पर, 1 अक्टूबर से 14 फीट से ऊंची संरचनाओं पर कार्रवाई

    मुंबई में 39,111 झोपड़ियां BMC के रडार पर, 1 अक्टूबर से 14 फीट से ऊंची संरचनाओं पर कार्रवाई

    मुंबई में 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर तक BMC की विशेष कार्रवाई, 14 फीट या उससे ऊंची 39,111 झोपड़ियां जांच के दायरे में, जानिए किस पर होगा असर।

    मुंबई: मुंबई के झोपड़पट्टी क्षेत्रों में बने अनधिकृत निर्माणों के खिलाफ बृहन्मुंबई महानगरपालिका 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक विशेष अभियान चलाएगी। इस अभियान के तहत 14 फीट और उससे अधिक ऊंचाई वाली झोपड़ियों तथा उनसे जुड़े अनधिकृत निर्माणों पर कार्रवाई की जाएगी। BMC के आंकड़ों के अनुसार मुंबई में कुल 2 लाख 23 हजार 150 झोपड़ियां हैं, जिनमें 39 हजार 111 संरचनाएं 14 फीट या उससे अधिक ऊंचाई की पाई गई हैं। हालांकि, इन सभी 39,111 संरचनाओं को इस अवधि में अनिवार्य रूप से तोड़ा जाएगा, ऐसा BMC की घोषणा में नहीं कहा गया है।

    BMC आयुक्त अश्विनी भिडे के निर्देश पर अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त (शहर) प्राजक्ता वर्मा-लवंगारे के मार्गदर्शन में और सह आयुक्त (दक्षता) देवेंदर सिंह के नेतृत्व में यह कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन ने संबंधित रहवासियों से अनधिकृत निर्माण स्वयं हटाने की अपील की है और ऐसा नहीं करने पर नियमानुसार कार्रवाई की चेतावनी दी है।

    39,111 संरचनाओं में सबसे बड़ा हिस्सा पूर्वी उपनगरों का है। यहां 31,227 झोपड़ियां 14 फीट या उससे अधिक ऊंचाई की पाई गई हैं। मुंबई शहर में ऐसी 3,348 और पश्चिमी उपनगरों में 4,536 संरचनाएं हैं। यानी इस पूरी सूची में करीब 80 प्रतिशत संरचनाएं पूर्वी उपनगरों में स्थित हैं।

    कार्रवाई का पूरा आंकड़ा क्या है?

    BMC के अनुसार 39,111 ऊंची संरचनाओं में से 4,584 पर पहले ही निष्कासन की कार्रवाई की जा चुकी है, जबकि 611 संरचनाओं को नोटिस जारी किए गए हैं। हालांकि, BMC के सार्वजनिक आंकड़ों से यह स्पष्ट नहीं है कि 611 नोटिस वाली संरचनाएं 4,584 पर की गई कार्रवाई के आंकड़े में शामिल हैं या अलग श्रेणी में हैं। इसलिए केवल इन दोनों आंकड़ों को घटाकर अक्टूबर से कार्रवाई के लिए बची संरचनाओं की सटीक संख्या बताना अभी सही नहीं होगा।

    यह अंतर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 39,111 का आंकड़ा identified structures का है, न कि 39,111 परिवारों का। BMC की घोषणा में यह जानकारी नहीं दी गई है कि इन संरचनाओं में कुल कितने परिवार या लोग रहते हैं। इसलिए इस अभियान से 39 हजार परिवार सीधे प्रभावित होंगे, ऐसा कहना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा।

    14 फीट से ज्यादा ऊंचाई का मतलब क्या पूरा घर टूटेगा?

    इस अभियान का सबसे अहम सवाल यही है। BMC ने 14 फीट और उससे अधिक ऊंचाई वाली झोपड़ियों को कार्रवाई के दायरे में रखा है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं निकाला जा सकता कि हर मामले में पूरी संरचना को ही जमीन पर गिराया जाएगा।

    जून 2026 के एक Bombay High Court मामले में 14 फीट से ऊपर बने अनधिकृत vertical extension को हटाने का मामला सामने आया था। अदालत के रिकॉर्ड में संबंधित व्यक्ति के पास 14 फीट से ऊपर vertical extension की अनुमति नहीं होने का उल्लेख है। अदालत ने लागू नियमों के तहत अनुमति के लिए आवेदन करने की संभावना का भी उल्लेख किया था। इससे स्पष्ट होता है कि मूल संरचना और बाद में किए गए अनधिकृत ऊर्ध्वाधर विस्तार की स्थिति अलग-अलग हो सकती है।

    यानी किसी झोपड़ी की ऊंचाई 14 फीट से अधिक पाए जाने पर कार्रवाई किस हिस्से पर होगी, यह संबंधित निर्माण की प्रकृति, उपलब्ध अनुमति और रिकॉर्ड पर निर्भर कर सकता है। BMC की मौजूदा घोषणा में प्रत्येक संरचना के लिए कार्रवाई का अलग प्रारूप सार्वजनिक नहीं किया गया है।

    पुराने झोपड़ीधारकों के दस्तावेज भी महत्वपूर्ण

    इस अभियान को केवल ऊंचाई के आधार पर समझना सही नहीं होगा। झोपड़ी की ऊंचाई और उसमें रहने वाले व्यक्ति की पात्रता दो अलग-अलग मुद्दे हैं।

    महाराष्ट्र सरकार की उपलब्ध पात्रता संबंधी जानकारी में 1 जनवरी 2000 या उससे पहले के आवासीय ground-floor structures के लिए निर्धारित पात्रता प्रक्रिया का उल्लेख है। पात्रता के लिए पुराने मतदाता रिकॉर्ड, अधिकृत बिजली रिकॉर्ड, सर्वेक्षण संबंधी दस्तावेज, संपत्ति कर रिकॉर्ड और अन्य स्वीकार्य दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जा सकता है, हालांकि अंतिम पात्रता संबंधित रिकॉर्ड की जांच के बाद तय होती है।

    मार्च 2026 के Bombay High Court के एक मामले में भी झोपड़ीधारक की पात्रता तय करते समय प्रस्तुत दस्तावेजों की उचित जांच और प्रत्येक संबंधित दस्तावेज पर स्पष्ट निष्कर्ष की आवश्यकता पर जोर दिया गया था।

    इसलिए किसी पुराने झोपड़ीधारक के पास photo-pass या अन्य पुराने दस्तावेज मौजूद होने की स्थिति और बाद में किए गए अनधिकृत निर्माण की स्थिति को एक ही आधार पर नहीं देखा जा सकता।

    मुंबई में पहले भी तेज हुई है अनधिकृत निर्माणों पर कार्रवाई

    BMC के अनुसार 24 अगस्त से 15 सितंबर 2026 के बीच मुंबई के अलग-अलग प्रशासनिक विभागों में 128 अनधिकृत निर्माणों पर निष्कासन की कार्रवाई की गई, जबकि 140 अन्य निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई नियोजित थी। अक्टूबर से शुरू होने वाला अभियान इसी enforcement को झोपड़पट्टी क्षेत्रों में विशेष रूप से 14 फीट और उससे अधिक ऊंचाई वाली संरचनाओं पर केंद्रित करता है।

    मुंबई के पूर्वी उपनगरों में इस समय अनधिकृत कब्जों और निर्माणों के खिलाफ अलग-अलग स्तर पर भी कार्रवाई जारी है। सितंबर 2026 में Mankhurd में सरकारी जमीन से करीब 57 अनधिकृत व्यावसायिक इकाइयों को हटाया गया और लगभग छह एकड़ जमीन को अतिक्रमणमुक्त करने की कार्रवाई की गई। अप्रैल 2026 में Ghatkopar-Mankhurd Link Road के आसपास भी 1,200 से अधिक अनधिकृत झोपड़ी संरचनाओं पर कार्रवाई की गई थी। ये कार्रवाई वर्तमान 14 फीट वाली BMC विशेष मुहिम से अलग हैं, लेकिन मुंबई में अनधिकृत निर्माण के खिलाफ बढ़ी enforcement का व्यापक संदर्भ देती हैं।

    सुरक्षा का सवाल भी बड़ा कारण

    अनधिकृत vertical extensions और कमजोर संरचनाओं का मुद्दा केवल जमीन या निर्माण नियमों तक सीमित नहीं है। 2026 में Mankhurd में मकान गिरने की घटना में छह लोगों की मौत हुई थी, जिनमें पांच नाबालिग थे। इसके बाद अनधिकृत और असुरक्षित संरचनाओं को लेकर मुंबई में सुरक्षा संबंधी सवाल और गंभीर हुए।

    मुंबई में landslide-prone क्षेत्रों को लेकर भी चिंता बनी हुई है। उपलब्ध BMC Climate Action Plan से जुड़े आंकड़ों के अनुसार मुंबई में 287 landslide-prone locations चिन्हित किए गए हैं, जिनमें 209 informal settlements के भीतर हैं। 2026 में Kurla में landslide की घटना में भी आठ लोगों की मौत हुई थी। हालांकि इन घटनाओं को 39,111 संरचनाओं के अभियान का प्रत्यक्ष कारण बताने के लिए अलग आधिकारिक पुष्टि जरूरी होगी।

    अब सबसे बड़ा सवाल: 1 अक्टूबर के बाद क्या होगा?

    अक्टूबर से दिसंबर तक चलने वाली इस विशेष मुहिम में BMC का लक्ष्य 14 फीट या उससे अधिक ऊंचाई वाली identified structures पर कार्रवाई करना है। लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि 39,111 संरचनाओं में से कितनी पर इस तीन महीने की अवधि में वास्तविक निष्कासन कार्रवाई की जाएगी, कार्रवाई किस क्रम में होगी और 611 नोटिस जारी की गई संरचनाओं तथा पहले से कार्रवाई झेल चुकी 4,584 संरचनाओं के आंकड़ों में कितना overlap है।

    यही वजह है कि इस अभियान का वास्तविक असर आने वाले दिनों में ward-wise कार्रवाई, जारी होने वाले notices और प्रत्येक संरचना के रिकॉर्ड की जांच के बाद ज्यादा स्पष्ट होगा।

    फिलहाल BMC ने झोपड़पट्टी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से अनधिकृत निर्माण स्वयं हटाने की अपील की है। 1 अक्टूबर से शुरू होने वाली कार्रवाई में 14 फीट या उससे अधिक ऊंचाई वाली संरचनाएं मुख्य फोकस में रहेंगी, जबकि किसी विशेष घर या उसके हिस्से पर कार्रवाई का स्वरूप संबंधित निर्माण और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर तय होना महत्वपूर्ण होगा।

  • Chakan Reel Stunt: चार SUVs से सड़क Block, Drone से शूट; Traffic Crisis के बीच Police Action

    Chakan Reel Stunt: चार SUVs से सड़क Block, Drone से शूट; Traffic Crisis के बीच Police Action

    चाकण MIDC में चार SUVs से सड़क रोककर Reel शूट करने के मामले में 4 आरोपी गिरफ्तार हुए। Drone, Traffic Block और Police Action के बीच पूरा मामला जानें।

    पुणे: चाकण MIDC इलाके में सोशल मीडिया Reel बनाने के लिए चार वाहनों से सड़क पर कथित खतरनाक स्टंट और Traffic Block करने के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। 3 सितंबर की शाम चार वाहनों को एक साथ सड़क पर चलाने, अचानक स्पीड कम करने और बीच सड़क पर रोककर वीडियो शूट करने के आरोप में चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इस दौरान Camera के साथ Drone का भी इस्तेमाल किया गया, जबकि सभी चार वाहनों को जब्त किए जाने की बात कही गई है।

    यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब चाकण के औद्योगिक क्षेत्र में पहले से ही Traffic Congestion कम करने के लिए प्रशासन अलग-अलग स्तर पर कदम उठा रहा है। 17 सितंबर को पुणे के जिलाधिकारी जितेंद्र डुडी ने चाकण में Traffic, सड़क, बढ़ते औद्योगिक वाहन आवागमन और अनधिकृत पार्किंग की समस्या के लिए विभिन्न विभागों को समन्वित Action Plan तैयार करने के निर्देश दिए। ऐसे में सार्वजनिक सड़क को Reel शूट के लिए रोकना इस पूरे Traffic Management challenge को और गंभीर बनाता है।

    चाकण MIDC में 3 सितंबर को क्या हुआ?

    पुलिस के अनुसार, 3 सितंबर की शाम चाकण के Mahalunge MIDC क्षेत्र में Sant Tukaram Chowk से Mindewadi Road की दिशा में चार वाहन एक साथ चलाए गए। आरोप है कि वाहनों को एक-दूसरे के बेहद करीब और समानांतर चलाने के साथ कई बार तेज किया गया, धीमा किया गया और सड़क पर रोका गया।

    इसके बाद Vasuli गांव में Pack Time Company के सामने वाहनों को सड़क के बीच में रोककर वीडियो शूट किया गया। पीछे से आने वाले वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई और Traffic Congestion की स्थिति बनी। वीडियो बनाने के लिए Camera और Drone का इस्तेमाल किया गया था।

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    पुलिस द्वारा जप्त गाड़ियों की तस्वीर

    पुलिस ने जिन चार लोगों को आरोपी बनाया है, उनके नाम Ram Hiraman Raut, Sahil Barku Jambhale, Aditya Kailas Nikhade और Pranav Malak Pachpute हैं। ये सभी Khed तहसील के Bhamboli और Vasuli क्षेत्र से जुड़े बताए गए हैं।

    कौन-कौन सी गाड़ियों का इस्तेमाल हुआ?

    मामले में चार वाहनों की पहचान की गई है। इनमें Toyota Fortuner क्रमांक MH 14 NN 0005, सफेद Mahindra Scorpio क्रमांक MH 14 EC 1658, सफेद Maruti Suzuki Swift क्रमांक MH 14 HW 4708 और सफेद Hyundai Creta क्रमांक MH 14 LL 2520 शामिल हैं।

    पुलिस के अनुसार, इन वाहनों को इस तरह चलाया और रोका गया जिससे दूसरे वाहन सामान्य तरीके से आगे नहीं बढ़ सके। बाद में इन्हें सड़क के बीच में पार्क किए जाने का भी आरोप है।

    किस धाराओं में मामला दर्ज हुआ?

    मामले में Bharatiya Nyaya Sanhita की धारा 285, 281, 223 और 3(5) तथा Motor Vehicles Act की धारा 184 और 122 के तहत कार्रवाई की गई है।

    इनमें सार्वजनिक रास्ते में खतरा या अवरोध पैदा करना, लापरवाही या खतरनाक तरीके से वाहन चलाना, सार्वजनिक अधिकारी के आदेश की अवहेलना और खतरनाक स्थिति में वाहन छोड़ने जैसे प्रावधान शामिल हैं। मामले का अंतिम कानूनी परिणाम जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

    जांच में Police Inspector Anil Devre की भूमिका अहम रही है। वहीं मामले की शुरुआती FIR में Police Constable Sampat Maruti Mule की शिकायत के आधार पर कार्रवाई दर्ज की गई है। इस मामले में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी Shweta Khedkar ने सार्वजनिक सड़क पर Traffic रोककर Reel बनाने को लेकर कार्रवाई की पुष्टि की।

    Drone को लेकर भी कार्रवाई का सवाल

    इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू Drone से वीडियो शूट करना भी है। पुलिस के अनुसार, 20 अगस्त को Pimpri-Chinchwad के Joint Commissioner of Police की ओर से Drone operations को लेकर जारी प्रतिबंधात्मक आदेश के बावजूद Drone का इस्तेमाल किया गया। इसलिए मामला केवल Traffic obstruction और dangerous driving तक सीमित नहीं है; जांच में Drone से जुड़े आदेश के उल्लंघन का पहलू भी शामिल है।

    फिलहाल इस घटना में किसी व्यक्ति के घायल होने या संपत्ति के नुकसान की सूचना सामने नहीं आई है। हालांकि, सड़क पर कई वाहनों को एक साथ रोकने और दूसरे motorists की आवाजाही प्रभावित करने से road safety का जोखिम जरूर पैदा हुआ।

    चाकण में पहले से Traffic का बड़ा दबाव

    चाकण MIDC कोई सामान्य सड़क क्षेत्र नहीं है। यह बड़ा औद्योगिक इलाका है, जहां रोजाना बड़ी संख्या में कर्मचारी, निजी वाहन, दोपहिया और commercial vehicles आते-जाते हैं। इसी कारण यहां Traffic Congestion कम करना प्रशासन के लिए अलग से चुनौती बना हुआ है।

    सितंबर की शुरुआत में जिलाधिकारी जितेंद्र डुडी ने औद्योगिक इकाइयों के shift timings में अंतर रखने की व्यवस्था शुरू कराई। कुछ कंपनियों में staggered shifts के बाद peak hours में Traffic में कुछ राहत की जानकारी सामने आई। लेकिन 16 सितंबर तक औद्योगिक क्षेत्र के बाहर स्थित कई कंपनियों में इन बदलावों के सीमित implementation के कारण समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई थी।

    17 सितंबर को भी चाकण के लिए सड़क सुधार, प्रमुख junctions पर Traffic management, heavy vehicles के लिए alternative routes, organised parking और आधुनिक technology के इस्तेमाल को लेकर नया coordinated Action Plan तैयार करने के निर्देश दिए गए।

    यानी जिस क्षेत्र में Traffic flow सुधारने के लिए प्रशासन को अलग से manpower, road management, parking और technology-based उपायों पर काम करना पड़ रहा है, उसी क्षेत्र में सार्वजनिक सड़क को Reel शूट के लिए रोकने की घटना सामने आई है।

    Pune में इससे पहले भी सामने आया था ऐसा मामला

    चाकण की घटना से कुछ दिन पहले 27 अगस्त को Pune-Bengaluru Highway के Bavdhan-Wakad stretch पर भी नए वाहन की Reel शूट करने के लिए Traffic प्रभावित करने का मामला सामने आया था। Sahyadri Mahindra showroom और Bhujbal Chowk के बीच वाहनों को रोककर शूट किए गए Video के बाद Bavdhan Police ने कार्रवाई की थी।

    इस मामले में Somnath Ashok Kedari, दो Fortuner के drivers और SC Photography के Soham Chavan सहित चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था। Somnath Ashok Kedari और Ajay Sambhaji Yadav को हिरासत में लिया गया था तथा दो Toyota Fortuner जब्त की गई थीं।

    इसके बाद 7 सितंबर को चाकण MIDC में एक अलग Fortuner को सड़क के बीच आड़े खड़ा कर Reel शूट करने का Video भी सामने आया। इस Video में दूसरे वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती दिखाई दी थी। यह घटना चार वाहनों वाले 3 सितंबर के मामले से अलग थी।

    अब सवाल केवल एक Reel का नहीं

    पुणे और Pimpri-Chinchwad में कुछ ही दिनों के भीतर सार्वजनिक सड़कों पर Social Media Video बनाने के लिए वाहनों को रोकने या Traffic प्रभावित करने के कई मामले सामने आए हैं। 3 सितंबर के चाकण मामले में पुलिस कार्रवाई आगे बढ़ चुकी है, जबकि 7 सितंबर को सामने आए अलग Fortuner Video ने भी public road पर Reel shooting को लेकर सवाल खड़े किए थे।

    ऐसी घटनाओं में मुख्य सवाल यह है कि Social Media content तैयार करने के लिए public road का इस्तेमाल करते समय दूसरे motorists की सुरक्षा और Traffic movement को कितना प्रभावित किया गया। चाकण जैसे industrial corridor में थोड़े समय का road obstruction भी peak-hour traffic पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।

    फिलहाल 3 सितंबर के मामले में तीन आरोपियों की गिरफ्तारी, चौथे आरोपी की तलाश और चारों वाहनों की जब्ती के बाद जांच जारी है। पुलिस की जांच में Video footage, वाहनों की भूमिका, road obstruction और Drone के इस्तेमाल से जुड़े पहलुओं को आगे देखा जा रहा है।

  • मुंबई ऑटो-टैक्सी मीटर अपडेट में चिप की कमी, 30 नवंबर की डेडलाइन से बढ़ी चालकों की चिंता

    मुंबई ऑटो-टैक्सी मीटर अपडेट में चिप की कमी, 30 नवंबर की डेडलाइन से बढ़ी चालकों की चिंता

    मुंबई में नया ऑटो-टैक्सी किराया लागू है, लेकिन मीटर चिप की कमी से रिकैलिब्रेशन धीमा है। 30 नवंबर की डेडलाइन और जुर्माने का पूरा अपडेट जानें।

    मुंबई: मुंबई महानगर क्षेत्र में ऑटो-रिक्शा और काली-पीली टैक्सियों का नया किराया 1 सितंबर से लागू हो चुका है, लेकिन डिजिटल मीटरों में नई दरें अपडेट करने की प्रक्रिया अब चिप की कमी के कारण धीमी पड़ गई है। परिवहन विभाग ने मीटर रिकैलिब्रेशन के लिए 30 नवंबर 2026 तक का समय दिया है। ऐसे में बड़ी संख्या में वाहनों के मीटर तय समय में अपडेट कराने को लेकर चालकों की चिंता बढ़ गई है।

    नए नियम के तहत ऑटो का पहले 1.5 किलोमीटर का न्यूनतम किराया 26 रुपये से बढ़कर 27 रुपये और काली-पीली टैक्सी का 31 रुपये से बढ़कर 33 रुपये हो गया है। इसके बाद ऑटो का किराया 18.22 रुपये प्रति किलोमीटर और टैक्सी का 21.90 रुपये प्रति किलोमीटर निर्धारित किया गया है।

    मीटर में चिप नहीं तो नया किराया कैसे लिया जा रहा है?

    मीटर रिकैलिब्रेशन पूरा होने तक चालकों को RTO की ओर से स्वीकृत संशोधित टैरिफ कार्ड के आधार पर नया किराया लेने की अनुमति है। यानी सिर्फ इसलिए कि इलेक्ट्रॉनिक मीटर में अभी पुरानी दर दिखाई दे रही है, यात्री को अनिवार्य रूप से पुराना किराया देना जरूरी नहीं है। संशोधित टैरिफ कार्ड मीटर अपडेट होने तक लागू रहेगा।

    यही व्यवस्था 30 नवंबर तक लागू रहेगी। इसके बाद वाहनों के इलेक्ट्रॉनिक मीटरों में संशोधित दरें अपडेट होना जरूरी होगा।

    चिप की कमी बनी सबसे बड़ी बाधा

    नए किराए के लिए डिजिटल मीटर में संशोधित दरों वाली विशेष चिप लगानी पड़ती है। उपलब्ध ताजा रिपोर्टों के अनुसार चिप की पर्याप्त उपलब्धता नहीं होने से रिकैलिब्रेशन की गति प्रभावित हो रही है। परिवहन विभाग ने मीटर कंपनियों और आपूर्तिकर्ताओं के साथ मिलकर चिप का उत्पादन और प्रोग्रामिंग शुरू की है, लेकिन अभी आपूर्ति जरूरत के मुताबिक नहीं पहुंच पाई है।

    रिकैलिब्रेशन की प्रक्रिया में अधिकृत केंद्र पर पुरानी सील हटाकर नई किराया दर वाली चिप लगाई जाती है। इसके बाद मीटर की जांच होती है और फिर RTO की मौजूदगी में सड़क पर टेस्ट किया जाता है। प्रक्रिया सही पाए जाने पर मीटर को सील कर प्रमाणपत्र जारी किया जाता है।

    लाखों वाहनों के मीटर अपडेट करने की चुनौती

    MMR में ऑटो और काली-पीली टैक्सियों की संख्या लाखों में है। करीब 5 लाख ऑटो और 45 हजार काली-पीली टैक्सियों का उल्लेख है।

    इसके मुकाबले क्षेत्र में मीटर टेस्टिंग और रिकैलिब्रेशन के लिए करीब 15 से 20 अधिकृत केंद्र होने की बात सामने आई है। इतनी बड़ी संख्या में वाहनों और सीमित केंद्रों के बीच 30 नवंबर की समय-सीमा पूरी करना परिवहन विभाग के लिए बड़ी प्रशासनिक चुनौती है।

    एक वाहन का रिकैलिब्रेशन पूरा होने में लग सकते हैं 2-3 दिन

    रिकैलिब्रेशन सिर्फ चिप लगाने तक सीमित नहीं है। एक बार वाहन अधिकृत केंद्र पर पहुंचने के बाद पूरी प्रक्रिया में दो से तीन दिन लग सकते हैं। इसमें मीटर अपडेट, परीक्षण, RTO प्रक्रिया और सीलिंग शामिल है।

    यही वजह है कि चालकों के लिए केवल चिप की उपलब्धता ही नहीं, बल्कि अधिकृत केंद्रों की क्षमता और वहां मिलने वाली तारीख भी महत्वपूर्ण हो गई है।

    रिकैलिब्रेशन शुल्क कितना है?

    परिवहन विभाग ने मीटर रिकैलिब्रेशन के लिए 700 रुपये प्रति वाहन की राशि तय किए जाने की जानकारी 6 सितंबर की रिपोर्ट में सामने आई थी। इसके साथ मीटर निर्माताओं और अधिकृत एजेंसियों को GST सहित रसीद जारी करने तथा वसूली का रिकॉर्ड रखने के निर्देश दिए गए हैं।

    हालांकि 13 और 15 सितंबर की कुछ रिपोर्टों में 600 रुपये का शुल्क और उसका अलग-अलग मदों में ब्योरा दिया गया है। इसलिए चालकों को किसी भी अतिरिक्त राशि का भुगतान करने से पहले अधिकृत केंद्र पर प्रदर्शित सरकारी शुल्क सूची और कंप्यूटर जनरेटेड रसीद जरूर लेनी चाहिए। परिवहन विभाग के निर्देशों के अनुसार केंद्रों पर CCTV निगरानी और मीटर की सील संख्या का रिकॉर्ड रखना भी जरूरी है।

    30 नवंबर के बाद क्या होगा?

    30 नवंबर 2026 तक मीटर रिकैलिब्रेशन पूरा करना है। इसके बाद बिना अपडेट वाले वाहनों पर विभागीय कार्रवाई की बात कही गई है। RTO अधिकारियों के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों में 50 रुपये प्रतिदिन के संभावित दंड, अधिकतम 5,000 रुपये तक, का उल्लेख किया गया है।

    हालांकि यह राशि उपलब्ध रिपोर्टों में प्रस्तावित/संभावित दंड के रूप में सामने आई है। इसलिए अंतिम कार्रवाई और दंड की शर्तें संबंधित परिवहन विभाग के आदेश के अनुसार ही लागू होंगी।

    इस स्थिति में चालकों के सामने एक अहम सवाल यह भी है कि यदि कोई चालक समय रहते अधिकृत केंद्र पर पहुंचता है, लेकिन चिप उपलब्ध नहीं होने के कारण उसका मीटर अपडेट नहीं हो पाता, तो क्या उसे भी deadline के बाद दंड का सामना करना पड़ेगा। उपलब्ध रिपोर्टों में इस स्थिति पर स्पष्ट छूट का उल्लेख नहीं है।

    यात्रियों के लिए नया किराया कितना?

    नई दरों के अनुसार:

    वाहनपहले 1.5 किमीउसके बाद
    ऑटो रिक्शा₹27₹18.22 प्रति किमी
    काली-पीली टैक्सी₹33₹21.90 प्रति किमी

    10 किलोमीटर की यात्रा का उदाहरण लें तो ऑटो का किराया करीब 182 रुपये और काली-पीली टैक्सी का करीब 219 रुपये बैठता है। पहले यही दूरी लगभग 171 रुपये और 207 रुपये थी।

    रात 12 बजे से सुबह 5 बजे के बीच 25 प्रतिशत अतिरिक्त किराया लागू है। संशोधित न्यूनतम दर के आधार पर यह ऑटो के लिए 33.75 रुपये और टैक्सी के लिए 41.25 रुपये के आसपास बैठता है।

    वसई और मीरा-भायंदर के चालकों को अलग सुविधा

    वसई और मीरा-भायंदर क्षेत्र में चलने वाले ऑटो और टैक्सी चालकों को ठाणे RTO के अंतर्गत आने वाले अधिकृत केंद्रों पर मीटर रिकैलिब्रेशन कराने की सुविधा दी गई है। अन्य क्षेत्रों के वाहनों को संबंधित RTO क्षेत्र के अधिकृत केंद्रों के जरिए प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

    अब सबसे बड़ी चिंता 30 नवंबर की समय-सीमा

    नई दरें लागू हो चुकी हैं, लेकिन मीटरों को अपडेट करने वाली चिप की उपलब्धता और सीमित रिकैलिब्रेशन केंद्रों के कारण प्रक्रिया की रफ्तार पर सवाल खड़े हो रहे हैं। दूसरी ओर, चालकों के पास 30 नवंबर तक मीटर अपडेट कराने की समय-सीमा है और उसके बाद कार्रवाई तथा संभावित दैनिक दंड का प्रावधान बताया गया है।

    फिलहाल परिवहन विभाग के सामने दोहरी चुनौती है—चिप की आपूर्ति को पर्याप्त करना और उपलब्ध अधिकृत केंद्रों की क्षमता के जरिए बड़ी संख्या में वाहनों के मीटर समय पर अपडेट कराना। वहीं, यात्रियों के लिए इस अवधि में RTO-approved tariff card ही संशोधित किराए का प्रमुख आधार बना रहेगा।

  • महाराष्ट्र हाउसिंग सोसायटी के नए नियम लागू, मेंटेनेंस से पुनर्विकास तक बड़ा बदलाव

    महाराष्ट्र हाउसिंग सोसायटी के नए नियम लागू, मेंटेनेंस से पुनर्विकास तक बड़ा बदलाव

    महाराष्ट्र की हाउसिंग सोसायटियों के लिए नए नियम लागू हैं। मेंटेनेंस, बकाया, पुनर्विकास, निधि, बैठक और नामांकन से जुड़े अहम बदलाव जानिए।

    मुंबई: महाराष्ट्र की सहकारी हाउसिंग सोसायटियों के कामकाज में बड़ा बदलाव हुआ है। राज्य सरकार ने जून 2026 में सहकारी गृहनिर्माण संस्थाओं के लिए अलग नियमों वाला नया अध्याय लागू किया है। इसके तहत मेंटेनेंस वसूली, बकाया पर ब्याज, अलग-अलग निधियों में योगदान, सामान्य सभा, पुनर्विकास और बकाया राशि की वसूली जैसी प्रक्रियाओं को अधिक स्पष्ट किया गया है। सहकार आयुक्त एवं निबंधक की आधिकारिक वेबसाइट पर 22 जून 2026 को गृहनिर्माण नियम 106-सी की अधिसूचना दर्ज है।

    लेकिन फ्लैट मालिकों के लिए एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। नए नियम लागू हो चुके हैं, जबकि संशोधित आदर्श उपविधियों का अलग मसौदा अभी अंतिम रूप की प्रक्रिया में है। सहकार आयुक्त की वेबसाइट पर 13 और 18 अगस्त 2026 के संशोधित आदर्श उपविधियों के मसौदे उपलब्ध हैं।

    मेंटेनेंस से जुड़े खर्च का हिसाब बदलेगा

    नए नियमों में सोसायटी के अलग-अलग खर्चों को बांटने का आधार स्पष्ट किया गया है। सेवा शुल्क सदस्यों के बीच समान रूप से बांटा जा सकता है, जबकि संपत्ति कर, पानी, बीमा, मरम्मत और कुछ अन्य खर्चों के लिए अलग-अलग आधार निर्धारित हैं। मरम्मत एवं रखरखाव निधि के लिए सामान्य सभा द्वारा तय राशि कम से कम निर्माण लागत के सालाना 0.75 प्रतिशत के बराबर होनी चाहिए। डूबत निधि के लिए न्यूनतम 0.25 प्रतिशत का प्रावधान है।

    इसका मतलब यह नहीं है कि हर सोसायटी अगले महीने से मनमाने तरीके से मेंटेनेंस बढ़ा सकती है। शुल्क किस मद में है और उसके लिए नियमों में कौन सा आधार तय है, यह देखना जरूरी होगा।

    फ्लैट खाली रहने पर कितना शुल्क लगेगा?

    फ्लैट का मालिक खुद वहां नहीं रहता और उसे किसी अन्य उपयोग में देता है तो गैर-निवास शुल्क को लेकर भी सीमा तय की गई है। यह शुल्क सेवा शुल्क के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता। इसे पूरे मेंटेनेंस बिल का 10 प्रतिशत समझना सही नहीं होगा।

    यानी यदि किसी सोसायटी में सेवा शुल्क और अन्य मदों को अलग-अलग दिखाया गया है तो गैर-निवास शुल्क की गणना पूरे बिल पर 10 प्रतिशत लगाकर नहीं की जानी चाहिए।

    मेंटेनेंस नहीं देने पर 12 प्रतिशत तक ब्याज

    सोसायटी के बकाये पर ब्याज की अधिकतम सीमा 12 प्रतिशत साधारण ब्याज प्रति वर्ष रखी गई है। इसका अर्थ यह नहीं है कि हर सोसायटी स्वतः 12 प्रतिशत ब्याज लगाएगी। लागू दर सामान्य सभा द्वारा तय की जानी है और वह निर्धारित अधिकतम सीमा से अधिक नहीं हो सकती।

    बकाया वसूली की प्रक्रिया भी अधिक औपचारिक की गई है। नियम 106-सी के तहत निर्धारित प्रपत्र और दस्तावेजों के आधार पर वसूली प्रमाणपत्र की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। इससे सोसायटी के बकाये की वसूली के लिए स्पष्ट प्रशासनिक रास्ता मिलता है।

    समिति कितनी राशि तक खर्च कर सकती है?

    मरम्मत और रखरखाव के खर्च के लिए प्रबंध समिति की वित्तीय सीमा भी सदस्यों की संख्या के अनुसार निर्धारित की गई है। 25 तक सदस्यों वाली सोसायटी के लिए यह सीमा 1 लाख रुपये, 26 से 50 सदस्यों के लिए 2 लाख रुपये, 51 से 100 सदस्यों के लिए 3 लाख रुपये, 101 से 1,000 सदस्यों के लिए 4 लाख रुपये और 1,000 से अधिक सदस्यों वाली सोसायटी के लिए 5 लाख रुपये है। इससे अधिक के बड़े खर्च में सामान्य सभा की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।

    पुनर्विकास के लिए भी प्रक्रिया तय

    पुनर्विकास अब केवल समिति और विकासक के बीच की बातचीत तक सीमित नहीं रहेगा। नए नियमों में पुनर्विकास से जुड़ी सामान्य सभा की प्रक्रिया, सूचना और उपस्थिति से संबंधित प्रावधान रखे गए हैं।

    पुनर्विकास की बैठक के लिए 14 स्पष्ट दिनों की सूचना और कुल सदस्य संख्या के दो-तिहाई के बराबर गणपूर्ति का प्रावधान है। विकासक या ठेकेदार के चयन के लिए कुल सदस्यों के 51 प्रतिशत समर्थन की आवश्यकता बताई गई है। दोनों आंकड़ों को एक ही चीज समझना गलत होगा—दो-तिहाई गणपूर्ति और 51 प्रतिशत समर्थन अलग-अलग प्रक्रियाओं से जुड़े हैं।

    स्व-पुनर्विकास के मामले में भी उधारी की सीमा को लेकर विशेष प्रावधान है। नियमों के अनुसार निर्धारित परिस्थितियों में सरकारी मान्यता प्राप्त मूल्यांकनकर्ता द्वारा तय भूमि मूल्य के 10 गुना तक उधारी की सीमा का प्रावधान है। यह बैंक से स्वतः 10 गुना कर्ज मिलने की गारंटी नहीं है।

    मृत सदस्य के बाद फ्लैट का क्या होगा?

    नामांकन को लेकर भी फ्लैट मालिकों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव हैं। किसी सदस्य की मृत्यु के बाद नामांकित व्यक्ति को प्रक्रिया के अनुसार अस्थायी सदस्यता मिल सकती है, लेकिन केवल नामांकित व्यक्ति होने से संपत्ति का अंतिम स्वामित्व स्वतः उसके नाम नहीं हो जाता।

    जहां उत्तराधिकार को लेकर विवाद हो, वहां संबंधित कानूनी दस्तावेज और उत्तराधिकार की प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो सकती है। नए प्रावधानों में पंजीकृत पारिवारिक व्यवस्था के माध्यम से कुछ परिस्थितियों में हस्तांतरण की प्रक्रिया को भी जगह दी गई है।

    सामान्य सभा में ऑनलाइन भागीदारी का रास्ता

    नए नियमों में सामान्य सभा की बैठकों में वीडियो सम्मेलन या ऐसे दृश्य-श्रव्य माध्यम से भागीदारी की व्यवस्था को मान्यता दी गई है, जिसमें सदस्य की पहचान और बैठक का समयबद्ध रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जा सके। इससे दूसरे शहर या विदेश में रहने वाले सदस्यों के लिए भागीदारी आसान हो सकती है।

    अब संशोधित आदर्श उपविधियों की बारी

    नए नियम लागू होने के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण अगला चरण संशोधित आदर्श उपविधियों का अंतिम रूप है। राज्य सरकार ने 2026 में इनका विस्तृत मसौदा जारी कर सुझाव और आपत्तियां मांगी थीं। आधिकारिक पोर्टल पर इसका मसौदा 13 और 18 अगस्त को सूचीबद्ध है।

    सुझाव और आपत्तियां देने की अंतिम तारीख 27 अगस्त 2026 थी। 10 सितंबर की ताजा कानूनी जानकारी के अनुसार मसौदा अब अंतिम मंजूरी और राजपत्र में प्रकाशन की प्रक्रिया की ओर बढ़ रहा है तथा अक्टूबर 2026 में लागू होने की संभावना बताई गई है। हालांकि अक्टूबर की तारीख को अभी अंतिम सरकारी अधिसूचना के रूप में नहीं माना जा सकता।

    एक बार संशोधित आदर्श उपविधियां औपचारिक रूप से जारी होने के बाद सोसायटियों को उन्हें अपनाने की प्रक्रिया से गुजरना होगा। मौजूदा नियमों में आदर्श उपविधियां प्रकाशित होने के तीन महीने के भीतर उन्हें अपनाने का प्रावधान है।

    इसलिए महाराष्ट्र के फ्लैट मालिकों और सोसायटी समितियों के लिए अभी सबसे जरूरी बात यह है कि जून 2026 में लागू हुए नए वैधानिक नियमों और अभी अंतिम रूप की प्रतीक्षा कर रहे संशोधित आदर्श उपविधियों को एक ही चीज न समझें। आने वाले महीनों में उपविधियों की अंतिम अधिसूचना के बाद पार्किंग, शिकायत निवारण, विद्युत वाहन चार्जिंग, पुनर्विकास और सोसायटी के दैनिक संचालन से जुड़े कई प्रावधानों का व्यावहारिक असर और स्पष्ट होगा।

  • Mumbai Local: दिवा-मुंब्रा के बीच महिला लोकल से गिरी, VIDEO ने फिर उठाए सुरक्षा पर सवाल

    Mumbai Local: दिवा-मुंब्रा के बीच महिला लोकल से गिरी, VIDEO ने फिर उठाए सुरक्षा पर सवाल

    दिवा-मुंब्रा के बीच भीड़भरी लोकल से महिला नीचे गिर गई। सिग्नल पर ट्रेन रुकी होने से जान बची। वायरल VIDEO ने लोकल सुरक्षा पर सवाल उठाए।

    मुंबई: Mumbai local train में सुबह की भीड़ किस तरह जानलेवा स्थिति पैदा कर सकती है, इसका ताजा मामला गुरुवार सुबह दिवा-मुंब्रा के बीच सामने आया। CSMT की ओर जा रही भीड़भाड़ वाली लोकल से एक महिला यात्री नीचे गिर गई। गनीमत रही कि उस समय ट्रेन सिग्नल के कारण रुकी हुई थी, जिससे बड़ा हादसा टल गया। महिला रेलवे ट्रैक के किनारे बने नाले में गिरकर फंस गई और उसे मामूली चोटें आने की जानकारी सामने आई है। घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

    सिग्नल पर रुकी थी ट्रेन, तभी हुआ हादसा

    प्राथमिक जानकारी के मुताबिक, सुबह मुंबई की ओर जाने वाली लोकल में काफी भीड़ थी। दिवा और मुंब्रा के बीच ट्रेन सिग्नल पर रुकी हुई थी। इसी दौरान दरवाजे के पास मौजूद महिला यात्री भीड़ के दबाव में अपना संतुलन खो बैठी और ट्रेन से नीचे जा गिरी।

    महिला रेलवे ट्रैक के किनारे मौजूद नाले में जा गिरी। इसी वजह से वह सीधे ट्रेन के पहियों की चपेट में आने से बच गई। घटना के दौरान एक यात्री मोबाइल फोन से वीडियो बना रहा था, जिसके कैमरे में महिला के नीचे गिरने का पूरा घटनाक्रम रिकॉर्ड हो गया।

    घटना के बाद यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। उपलब्ध शुरुआती जानकारी के अनुसार महिला को मामूली चोटें आई हैं। उसकी पहचान और अस्पताल में इलाज से जुड़ी विस्तृत जानकारी की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।

    दिवा-मुंब्रा का यह रेल मार्ग फिर सवालों के घेरे में

    महिला के लोकल से गिरने की यह घटना इसलिए भी गंभीर है क्योंकि दिवा-मुंब्रा रेल मार्ग पहले भी इसी तरह की दुर्घटनाओं को लेकर चर्चा में रहा है।

    9 जून 2025 को इसी इलाके में दो लोकल ट्रेनों के बीच से गुजरते समय दरवाजे पर खड़े यात्रियों के गिरने की भीषण दुर्घटना हुई थी। हादसे में पांच यात्रियों की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे। उस घटना के बाद ट्रेन की भीड़, दरवाजे पर खड़े होकर यात्रा करने और इस हिस्से के तीखे मोड़ को लेकर सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठे थे।

    उस हादसे की जांच के दौरान दुर्घटना के कारण को लेकर अलग-अलग बातें सामने आई थीं। रेलवे की जांच में यात्रियों के सामान और आपस में टकराने जैसे पहलुओं पर ध्यान दिया गया, जबकि पुलिस जांच में ट्रैक और इंजीनियरिंग विभाग से जुड़े संभावित लापरवाही के पहलुओं की भी जांच की गई।

    एक साल बाद भी भीड़ से राहत क्यों नहीं?

    2025 की दुर्घटना के बाद रेलवे की ओर से मुंबई उपनगरीय नेटवर्क पर सेवाएं बढ़ाने और यात्री सुरक्षा के लिए कई कदम उठाए गए। सरकारी रिकॉर्ड में दिवा के लिए 14 और मुंब्रा के लिए 16 नई उपनगरीय सेवाओं का उल्लेख किया गया था।

    इसके बावजूद 2026 में भी दिवा-मुंब्रा और आसपास के मार्गों पर सुबह के व्यस्त समय में अत्यधिक भीड़ की शिकायतें सामने आती रही हैं। डोंबिवली से मुंबई की ओर जाने वाली लोकल में भीड़ का एक कारण दिवा-मुंब्रा क्षेत्र से आने वाले यात्रियों की संख्या को भी बताया गया है।

    यही वजह है कि आज की घटना के बाद सिर्फ यह सवाल नहीं है कि महिला लोकल से कैसे गिरी, बल्कि यह भी सवाल है कि अतिरिक्त सेवाओं और सुरक्षा उपायों के बावजूद peak hours में यात्रियों को दरवाजे तक पहुंचने वाली स्थिति क्यों बन रही है।

    Automatic Door वाली लोकल से क्या बदलेगा?

    2025 की दुर्घटना के बाद मुंबई में automatic door वाली non-AC लोकल का विकल्प भी तेजी से आगे बढ़ा। ऐसी लोकल में दरवाजे अपने आप बंद होने की व्यवस्था होगी, जिससे ट्रेन चलने के दौरान यात्रियों के दरवाजे पर खड़े रहने या बाहर लटकने की संभावना कम करने का प्रयास किया जा सकेगा।

    रेलवे की ओर से नए non-AC automatic-door rake को आगे बढ़ाया गया है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में यात्रियों की रोजाना जरूरत को देखते हुए ऐसी ट्रेनों की नियमित उपलब्धता और peak-hour capacity अहम मुद्दे बने हुए हैं।

    सिर्फ चेतावनी से नहीं रुकेगा खतरनाक सफर

    मुंबई की उपनगरीय रेलवे में यात्रियों को footboard पर यात्रा नहीं करने की लगातार चेतावनी दी जाती है। स्टेशनों पर घोषणाएं, जागरूकता अभियान और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा बलों की तैनाती जैसे उपाय भी किए जाते हैं।

    लेकिन दिवा-मुंब्रा के बीच हुई आज की घटना एक अलग चुनौती सामने रखती है। जब ट्रेन में क्षमता से ज्यादा भीड़ हो और यात्रियों का दबाव दरवाजे तक पहुंच जाए, तब सिर्फ चेतावनी के बजाय भीड़ प्रबंधन, पर्याप्त लोकल सेवाएं और सुरक्षित कोच व्यवस्था भी जरूरी हो जाती है।

    आज महिला की जान इसलिए बच गई क्योंकि ट्रेन उस समय सिग्नल पर रुकी हुई थी। वायरल वीडियो ने इस घटना को सामने ला दिया है, लेकिन असली सवाल अब भी वही है—दिवा-मुंब्रा जैसे संवेदनशील रेल मार्ग पर यात्रियों को सुरक्षित यात्रा देने के लिए रेलवे अगला ठोस कदम कब उठाएगा?

  • Mumbai FDA Action: IRCTC Kitchen और ISKCON Juhu पर बड़ा एक्शन, Zepto-linked Facility भी घेरे में

    Mumbai FDA Action: IRCTC Kitchen और ISKCON Juhu पर बड़ा एक्शन, Zepto-linked Facility भी घेरे में

    Mumbai FDA ने IRCTC की Kurla kitchen और ISKCON Juhu के 3 food units पर कार्रवाई की। Zepto-linked facility में भी food safety violations मिले।

    मुंबई: शहर में food safety को लेकर महाराष्ट्र FDA का crackdown लगातार सख्त होता जा रहा है। ताजा कार्रवाई में Kurla की IRCTC-linked base kitchen का licence suspend किया गया है, जबकि Juhu स्थित ISKCON के तीन food establishments पर भी licence suspension की कार्रवाई हुई है। जांच में cockroaches, खुले में रखा खाना, जाम नालियां, खराब hygiene और food-safety records में गंभीर कमियां सामने आईं। Zepto से जुड़ी एक facility में भी pest infestation और cold-chain management में खामियां मिली हैं।

    IRCTC की Kurla kitchen में क्या मिला?

    महाराष्ट्र FDA ने 2 सितंबर को Kurla West स्थित R K Associates & Hoteliers Pvt Ltd की base kitchen का निरीक्षण किया। यह kitchen IRCTC network के जरिए railway passengers के लिए food supply करती है।

    जांच के दौरान food storage और preparation areas में cockroaches पाए गए। कुछ food खुले में रखा था और garbage के पास food preparation होने की बात सामने आई। Kitchen infrastructure में भी कमियां मिलीं, जिनमें damaged tiles और अस्वच्छ surfaces शामिल हैं। बर्तनों और food-contact equipment पर गंदगी तथा जंग की शिकायत भी inspection findings में शामिल रही।

    Food handlers से जुड़े records ने भी सवाल खड़े किए। कुल 34 food handlers में केवल 21 के medical fitness certificates उपलब्ध थे। एक कर्मचारी उंगली पर चोट होने के बावजूद food handling करता मिला। Food transport vehicle की cleanliness और maintenance को लेकर भी FDA ने कमियां दर्ज कीं।

    इन findings के बाद संबंधित kitchen का food licence suspend कर दिया गया।

    क्या IRCTC की पूरी catering service बंद हो गई?

    नहीं। कार्रवाई एक specific IRCTC-linked kitchen पर हुई है। FDA ने मुंबई और ठाणे में IRCTC से जुड़े कुल पांच base kitchens/food plazas की जांच की थी। R K Associates का licence suspend किया गया, जबकि Om Sai Ram Enterprises, Ambuj Hotels & Real Estate Pvt Ltd, Express Food Services और Araha Hospitality Pvt Ltd को improvement notices दिए गए।

    इसका मतलब यह है कि पूरे IRCTC food network को बंद करने का आदेश नहीं दिया गया है।

    ISKCON Juhu के तीन food units पर भी licence suspension

    3 सितंबर को Juhu स्थित ISKCON परिसर में food operations की जांच की गई। FDA को यहां भी कई food-safety violations मिले और तीन establishments के licences suspend किए गए।

    Food Services Restaurant से जुड़ी findings में खुले kitchen entrance, pest-control में कमी, clogged drains, drains में food waste और pest droppings जैसी समस्याएं शामिल हैं। Raw material inspection, laboratory testing, cleaning, employee medical examination, vaccination और staff training से जुड़े records में भी deficiencies बताई गई हैं।

    Govindas Restaurant में pest infestation, clogged drains और cold-storage area में पानी जमा होने की बात सामने आई। Raw और cooked food को पर्याप्त रूप से अलग नहीं रखने की कमी भी दर्ज की गई, जिससे cross-contamination का risk पैदा हो सकता है। Food testing, drinking-water testing, raw-material inspection, pest control और staff records से जुड़े compliance gaps भी पाए गए।

    Zepto-linked facility में cockroaches और cold-chain की समस्या

    FDA की कार्रवाई में Malad West स्थित Drogheria Sellers Pvt Ltd भी शामिल है, जिसे Zepto-linked food facility के तौर पर रिपोर्ट किया गया है।

    Inspection में food-storage areas में cockroaches मिलने की जानकारी सामने आई। Dairy products की storage temperature को लेकर भी गंभीर सवाल उठे। रिपोर्ट के मुताबिक milk, paneer और curd करीब 14–15°C पर रखे मिले, जबकि cold room का temperature करीब 20–21°C बताया गया। इससे cold-chain management पर सवाल खड़े हुए।

    दूसरे food businesses पर भी कार्रवाई

    FDA की ताजा कार्रवाई केवल IRCTC, ISKCON और Zepto-linked facility तक सीमित नहीं रही। मुंबई और आसपास कई अन्य food businesses भी regulatory action की चपेट में आए हैं।

    Bombay’s The Food Fusion Cafe, Ghatkopar के खिलाफ licence suspension की recommendation की गई। यहां uncovered cooked rice, खुले container में raw chicken, improperly sealed vegetables, refrigeration और drainage से जुड़ी कमियां तथा जरूरी testing/training records की कमी रिपोर्ट हुई।

    Shree Madhuram, Borivali East के registration को suspend करने की recommendation की गई। Kothari Sweet और Mulund Farsan Mart पर भी food production, expired products और pest-related violations को लेकर कार्रवाई हुई।

    Maharashtra Biryani Center, Goregaon East का licence hygiene, pest control, drainage और जरूरी food-safety documentation से जुड़ी कमियों के कारण suspend किया गया।

    FDA की कार्रवाई में Mateshwari Milk, Kharghar भी शामिल है। यहां milk processing, temperature monitoring, calibration, sanitation और labelling से जुड़ी compliance deficiencies report हुई हैं।

    Licence suspend होने का क्या मतलब है?

    Food licence suspension का मतलब संबंधित food business को उस licence के तहत food activity जारी रखने की अनुमति नहीं रहती, जब तक regulatory compliance और आगे की प्रक्रिया पूरी न हो। इसलिए “licence suspended” और “improvement notice” को एक जैसा नहीं समझना चाहिए।

    इसी कार्रवाई में कुछ businesses के licences suspend हुए हैं, जबकि कुछ को केवल improvement notices दिए गए हैं और कुछ के खिलाफ suspension की recommendation की गई है।

    Maharashtra FDA का crackdown क्यों बढ़ा?

    यह कार्रवाई किसी एक दिन की isolated inspection नहीं दिखती। महाराष्ट्र FDA ने पिछले कुछ महीनों में food adulteration और hygiene violations के खिलाफ enforcement तेज किया है। Commissioner Tukaram Mundhe के नेतृत्व में विभाग ने food businesses की inspections और enforcement को अधिक systematic बनाने पर जोर दिया है।

    FDA ने अब year-round “Festival Enforcement Calendar” भी शुरू किया है। इसके तहत festivals, fairs, religious events और बड़े public gatherings के दौरान food adulteration और hygiene violations पर पहले से तय surveillance और sampling की व्यवस्था की जा रही है।

    इस plan में dairy products, sweets, edible oils, paneer, dry fruits और दूसरे high-risk food items पर विशेष निगरानी की जा सकती है। Festival से पहले manufacturing units, markets, cold stores, godowns और wholesale markets तक inspections की योजना बनाई गई है।

    आगे क्या होगा?

    ताजा कार्रवाई से संकेत साफ है कि Maharashtra FDA अब केवल restaurants पर ही नहीं, बल्कि railway food suppliers, institutional kitchens, e-commerce-linked food facilities, dairy businesses और festival-related food operations पर भी निगरानी बढ़ा रहा है।

    ऐसे में जिन businesses के licences suspend हुए हैं, उनके लिए अगला महत्वपूर्ण चरण compliance और regulatory review होगा, जबकि improvement notices पाने वाले establishments को FDA की बताई कमियों को दूर करना होगा।

    मुंबई में food safety को लेकर चल रहा यह crackdown आने वाले festival season में और तेज हो सकता है। FDA का नया enforcement calendar भी इसी दिशा में संकेत देता है कि high-risk food categories और बड़े food-distribution operations पर निगरानी अब पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित तरीके से की जाएगी।