CJP का 2 अक्टूबर मुंबई प्रदर्शन: ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के अलावा क्या हैं मांगें?

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CJP के 2 अक्टूबर मुंबई प्रदर्शन से पहले जानिए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, SIR, 2025 की मतदाता सूची और चुनाव आयोग सुधार से जुड़ी पूरी मांगें।

मुंबई: 2 अक्टूबर को मुंबई में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के साथ चुनाव आयोग और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर कई अन्य मांगें भी सामने आई हैं। अभिजीत दिपके के नेतृत्व में होने वाला यह प्रदर्शन शिवाजी पार्क के गेट नंबर 6 पर शाम 4 बजे शुरू करने की घोषणा की गई है। मुंबई पुलिस से अनुमति नहीं मिलने के बावजूद CJP ने आंदोलन जारी रखने और जरूरत पड़ने पर जेल भरो आंदोलन करने की बात कही है।

इस आंदोलन का केंद्र सिर्फ ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा नहीं है। CJP ने एसआईआर को रोकने, जनवरी 2025 की मतदाता सूची बहाल करने, चुनाव आयोग से जुड़े 2023 के कानून को बदलने और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए स्वतंत्र व पारदर्शी व्यवस्था बनाने जैसी मांगें भी रखी हैं।

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के साथ आपराधिक जांच की मांग

CJP की पहली प्रमुख मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की है। इसके साथ संगठन ने उनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू करने और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े कथित फैसलों के संबंध में यह स्पष्ट करने की मांग की है कि आदेश किस स्तर से दिए गए थे।

CJP ने चुनाव आयोग की मतदाता सूची से जुड़ी केंद्रीकृत प्रक्रिया और एसआईआर के दौरान लिए गए फैसलों पर स्वतंत्र जांच की मांग भी उठाई है। संगठन का कहना है कि एसआईआर से जुड़े फैसलों की जांच ऐसी स्वतंत्र संस्था से होनी चाहिए जिस पर लोगों का भरोसा हो।

एसआईआर रोकने और जनवरी 2025 की मतदाता सूची बहाल करने की मांग

CJP की दूसरी बड़ी मांग विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को तत्काल रोकने की है। संगठन जनवरी 2025 की मतदाता सूची को फिर से आधार बनाने और आगामी चुनावों को फिलहाल रोकने की मांग कर रहा है।

इसके अलावा एसआईआर से जुड़े फैसलों और कार्रवाई की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है। CJP ने एसआईआर से संबंधित फाइलों और रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने तथा इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका की भी मांग उठाई है।

महाराष्ट्र में एसआईआर को लेकर क्या स्थिति है?

महाराष्ट्र में एसआईआर के कारण यह विवाद आम मतदाताओं के लिए भी महत्वपूर्ण हो गया है। 31 अगस्त को जारी प्रारूप मतदाता सूची में करीब 7.72 करोड़ नाम शामिल हुए थे, जबकि एसआईआर से पहले महाराष्ट्र में करीब 9.79 करोड़ मतदाता थे। लगभग 2.07 करोड़ मतदाताओं के गणना प्रपत्र उस चरण में उपलब्ध नहीं हो सके थे।

हालांकि 2.07 करोड़ का आंकड़ा अंतिम रूप से मतदाता सूची से हटाए गए लोगों की संख्या नहीं है। इन मतदाताओं के लिए दावा और आपत्ति की प्रक्रिया उपलब्ध है। इसके अलावा करीब 1.22 करोड़ मतदाताओं के रिकॉर्ड में विसंगतियां चिन्हित की गई हैं, जिनमें पिछले रिकॉर्ड से जानकारी का मेल नहीं होना या संबंधित व्यक्ति से रिकॉर्ड का मिलान नहीं हो पाना शामिल है।

महाराष्ट्र में दावा और आपत्ति की तारीख बढ़ी

एसआईआर को लेकर महाराष्ट्र के मतदाताओं के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि दावा और आपत्ति दाखिल करने की अंतिम तारीख 30 सितंबर से बढ़ाकर 12 अक्टूबर 2026 कर दी गई है। नोटिस, दावे और आपत्तियों के निपटारे की प्रक्रिया 10 नवंबर तक चलेगी और अंतिम मतदाता सूची 16 नवंबर 2026 को प्रकाशित की जानी है।

नोटिस पाने वाले मतदाताओं के लिए भी प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। ‘अनमैप्ड’ या ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ जैसे कारणों से नोटिस पाने वाले मतदाताओं से दस्तावेज लेने के लिए बूथ लेवल अधिकारी घर जा सकते हैं। ऐसे मामलों में मतदाता को केवल दस्तावेज जमा करने के लिए अनिवार्य रूप से चुनाव कार्यालय पहुंचने की जरूरत नहीं होगी।

2023 के चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून में बदलाव की मांग

CJP की तीसरी प्रमुख मांग चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को खत्म करने की है। संगठन इसके स्थान पर ऐसी नई व्यवस्था चाहता है जिसमें चुनाव आयोग में नियुक्तियों की प्रक्रिया अधिक स्वतंत्र और पारदर्शी हो तथा नागरिक समाज की भागीदारी हो।

मौजूदा कानून का आधिकारिक नाम ‘Chief Election Commissioner and Other Election Commissioners (Appointment, Conditions of Service and Term of Office) Act, 2023’ है। CJP इसी नियुक्ति व्यवस्था में बदलाव को चुनाव आयोग के व्यापक सुधार से जोड़ रही है।

ईसीआई के भीतर मतभेदों की खबर के बाद विवाद क्यों बढ़ा?

चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर विवाद उस समय और बढ़ा जब आयोग के भीतर एसआईआर और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों पर मतभेदों की जानकारी सामने आई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर आपत्तियां दर्ज की थीं।

दूसरी ओर चुनाव आयोग ने आंतरिक मतभेद को संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा बताया है और कहा है कि एसआईआर सहित आयोग के फैसले तीनों आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए। इसलिए इन आपत्तियों को आयोग के कामकाज में किसी अंतिम रूप से सिद्ध टूट के तौर पर पेश नहीं किया जा सकता।

एसआईआर विवाद के बीच चुनाव आयोग ने भी किए बदलाव

विवाद के बीच चुनाव आयोग ने मतदाता सूची से जुड़े सॉफ्टवेयर की समीक्षा के लिए एक समिति बनाने की घोषणा की है। इसमें एक वरिष्ठ चुनाव अधिकारी के साथ स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञ को शामिल किया जाना है।

आयोग ने यह भी कहा है कि जिन मतदाताओं के रिकॉर्ड में विसंगतियां मिलती हैं, उनके दस्तावेज लेने के लिए स्थानीय अधिकारी जरूरत पड़ने पर उनके घर जा सकते हैं। इसका उद्देश्य ऐसे मतदाताओं पर कार्यालयों में व्यक्तिगत रूप से पहुंचने का बोझ कम करना है।

फॉर्म 6 में एसआईआर से जुड़ी घोषणा भी बदली

30 सितंबर को एसआईआर से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण बदलाव सामने आया। जिन राज्यों में एसआईआर पूरा हो चुका है, वहां ईसीआई के ईसीआईनेट पोर्टल पर ऑनलाइन फॉर्म 6 में जोड़ी गई अतिरिक्त एसआईआर घोषणा हटा दी गई। जिन राज्यों में एसआईआर अभी जारी है, वहां यह घोषणा दिखाई दे रही थी।

यह बदलाव उस समय सामने आया जब फॉर्म 6 में अतिरिक्त घोषणा जोड़ने की प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग के भीतर भी सवाल उठे थे।

मुंबई में प्रदर्शन को पुलिस की अनुमति नहीं

2 अक्टूबर के प्रदर्शन के लिए CJP ने शिवाजी पार्क को स्थान चुना है, लेकिन मुंबई पुलिस ने अनुमति नहीं दी है। पुलिस की ओर से शिवाजी पार्क में सभा से जुड़े नियमों, 2013 के बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश, यातायात, शोर और आसपास के अस्पतालों तक आपातकालीन आवाजाही जैसे मुद्दों का हवाला दिया गया है।

इसके बावजूद CJP ने प्रदर्शन जारी रखने का फैसला किया है। संगठन ने पहले ही कहा है कि अनुमति नहीं मिलने की स्थिति में मुंबई में जेल भरो आंदोलन किया जाएगा।

CJP ने प्रदर्शन का स्थान भी स्पष्ट किया

2 अक्टूबर को मुंबई के अलावा अलग-अलग शहरों में प्रदर्शन की खबरों के बीच CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने स्पष्ट किया कि 2 अक्टूबर का निर्धारित प्रदर्शन केवल मुंबई के शिवाजी पार्क में होगा। दूसरे शहरों में आंदोलन की जानकारी बाद में घोषित करने की बात कही गई है।

CJP के आंदोलन में अभिजीत दिपके के साथ सौरव दास और आशुतोष रांका भी प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। CJP के राष्ट्रीय संगठन में दिपके राष्ट्रीय संयोजक, जबकि दास और रांका सह-संयोजक की भूमिका में हैं।

2 अक्टूबर के बाद क्या होगा?

CJP ने 2 अक्टूबर के मुंबई प्रदर्शन को व्यापक आंदोलन की शुरुआत बताया है। संगठन ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही है और आगे गोवा, बेंगलुरु और कोलकाता समेत दूसरे शहरों में प्रदर्शन की योजना बताई है।

मुंबई में 4 अक्टूबर को राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में एसआईआर और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर अलग मार्च की भी घोषणा हो चुकी है। इस तरह 2 अक्टूबर का CJP प्रदर्शन और 4 अक्टूबर का ठाकरे गुटों का मार्च अलग-अलग कार्यक्रम हैं, हालांकि दोनों में एसआईआर और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दे साझा हैं।

महाराष्ट्र के मतदाताओं के लिए फिलहाल सबसे अहम तारीख 12 अक्टूबर है, जब तक एसआईआर की प्रारूप मतदाता सूची पर दावे और आपत्तियां दाखिल की जा सकती हैं। इसके बाद 10 नवंबर तक दावों और नोटिसों के निपटारे की प्रक्रिया चलेगी और 16 नवंबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जानी है।

इस बीच CJP का 2 अक्टूबर का प्रदर्शन ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के साथ-साथ एसआईआर, मतदाता सूची और चुनाव आयोग की नियुक्ति व्यवस्था में बदलाव की मांग को लेकर होने वाला है। आंदोलन के अगले चरण और महाराष्ट्र की अंतिम मतदाता सूची पर होने वाली कार्रवाई से इस विवाद की आगे की दिशा स्पष्ट होगी।

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