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  • मुंबई एयरपोर्ट पर मौसम का असर, 8 फ्लाइटें सूरत डायवर्ट; 1,255 यात्री सुरक्षित

    मुंबई एयरपोर्ट पर मौसम का असर, 8 फ्लाइटें सूरत डायवर्ट; 1,255 यात्री सुरक्षित

    Mumbai Airport पर तेज हवाओं, गरज-चमक और बारिश से उड़ानें प्रभावित हुईं। 8 फ्लाइटें सूरत डायवर्ट हुईं, 1,255 यात्री सुरक्षित रहे।

    मुंबई : मुंबई एयरपोर्ट पर मंगलवार 29 सितंबर की शाम खराब मौसम ने हवाई परिचालन को प्रभावित कर दिया। गरज-चमक, तेज हवाओं और बारिश के बीच मुंबई आने वाली कई उड़ानों को दूसरे एयरपोर्ट की ओर मोड़ना पड़ा। इनमें सूरत डायवर्ट की गई 8 उड़ानों में कुल 1,255 यात्री सवार थे। सभी विमानों ने सूरत एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंडिंग की। वहीं, व्यापक स्तर पर मुंबई एयरपोर्ट पर उड़ानों की देरी और कुछ उड़ानों के रद्द होने की भी जानकारी सामने आई है।

    मंगलवार शाम करीब 6:50 बजे से मुंबई जाने वाली उड़ानों के डायवर्जन का सिलसिला शुरू हुआ। सबसे पहले तिरुचिरापल्ली से मुंबई जा रही IndiGo की फ्लाइट 6E-2017 सूरत पहुंची। इसमें 182 यात्री सवार थे। इसके कुछ ही मिनट बाद दिल्ली से मुंबई जा रही IndiGo की फ्लाइट 6E-864 को भी सूरत डायवर्ट किया गया। इस विमान में 122 यात्री थे।

    इसके बाद दिल्ली से मुंबई जा रही Air India की फ्लाइट AI-2941 सूरत पहुंची। इस विमान में 186 यात्री सवार थे। चेन्नई से मुंबई जा रही IndiGo की फ्लाइट 6E-5104 और गोवा से मुंबई जा रही Air India की फ्लाइट AI-2746 को भी सूरत भेजा गया। AI-2746 में 135 यात्री सवार थे।

    बेंगलुरु से मुंबई जा रही IndiGo की फ्लाइट 6E-5255 करीब 7:47 बजे सूरत पहुंची। इसमें 135 यात्री थे। इसके लगभग तीन मिनट बाद चेन्नई से मुंबई जा रही Air India की फ्लाइट AI-640 ने सूरत में लैंडिंग की। इसमें 112 यात्री सवार थे। सबसे आखिर में भोपाल से मुंबई जा रही IndiGo की फ्लाइट 6E-5312 करीब 8 बजे सूरत पहुंची। इस विमान में 204 यात्री सवार थे।

    इस तरह सूरत डायवर्ट की गई इन 8 उड़ानों में कुल 1,255 यात्री थे। सूरत एयरपोर्ट पर सभी विमानों की सुरक्षित लैंडिंग कराई गई और यात्रियों के लिए जरूरी व्यवस्थाएं की गईं। सूरत एयरपोर्ट के निदेशक आनंद नारायण शर्मा ने भी इन उड़ानों के डायवर्जन और सुरक्षित लैंडिंग की पुष्टि की थी।

    सिर्फ सूरत ही नहीं, दूसरे एयरपोर्ट भी बने वैकल्पिक ठिकाने

    मुंबई में मौसम बिगड़ने के बाद सूरत के अलावा दूसरे एयरपोर्ट का भी इस्तेमाल वैकल्पिक लैंडिंग के लिए किया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार कम-से-कम 11 से 12 मुंबई आने वाली उड़ानों के डायवर्जन की स्थिति सामने आई, हालांकि अलग-अलग समय पर जारी आंकड़ों में अंतर रहा। एक अपडेट में 8 उड़ानों के सूरत और 4 उड़ानों के वडोदरा पहुंचने की जानकारी दी गई। वडोदरा पहुंचने वाली उड़ानों में Air India की AI 2447, AI 599, AI 1780 और IndiGo की 6E 329 शामिल थीं।

    वहीं एक अन्य अपडेट में 11 उड़ानों के डायवर्ट होने की जानकारी सामने आई, जिनमें 6 उड़ानों को सूरत और 3 को अहमदाबाद भेजे जाने का विवरण दिया गया। इनमें IndiGo की 6E864, 6E2017 और 6E5104, Air India की AI2941, AI640 और AI2746 शामिल थीं। अहमदाबाद के लिए QP1150, 6E5259 और 6E5163 को डायवर्ट किए जाने की जानकारी दी गई।

    इस अंतर की वजह से डायवर्ट हुई कुल उड़ानों की संख्या को लेकर अलग-अलग समय पर अलग आंकड़े सामने आए। हालांकि इतना स्पष्ट है कि मुंबई के खराब मौसम का असर कई मुंबई-बाउंड उड़ानों पर पड़ा और उन्हें सुरक्षित रूप से वैकल्पिक एयरपोर्ट पर उतारा गया।

    213 उड़ानों में देरी, 16 रद्द होने की भी जानकारी

    मौसम का असर सिर्फ डायवर्ट हुई उड़ानों तक सीमित नहीं रहा। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार मुंबई एयरपोर्ट पर 213 उड़ानों में देरी हुई, जबकि 16 उड़ानें रद्द हुईं। डायवर्जन के कारण सूरत और दूसरे वैकल्पिक एयरपोर्ट पर भी यात्रियों और विमानों की अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ी।

    मुंबई में क्यों बिगड़ा मौसम?

    मंगलवार शाम मुंबई के कई हिस्सों में अचानक बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं का दौर देखा गया। मुलुंड, कुर्ला और अंधेरी समेत कई इलाकों में बारिश हुई और कुछ स्थानों पर जलभराव की स्थिति भी बनी। अंधेरी क्षेत्र में जलभराव के कारण आवाजाही प्रभावित होने की जानकारी सामने आई।

    भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुंबई-पवई पूर्वानुमान में 29 सितंबर को बादल छाए रहने के साथ बारिश या गरज-चमक की संभावना दर्ज थी। 30 सितंबर के लिए भी एक-दो दौर की बारिश या गरज-चमक का पूर्वानुमान दिया गया था।

    हवाई परिचालन पर मौसम का सीधा असर पड़ा। तेज हवाओं, बिजली चमकने और गरज-चमक जैसी परिस्थितियों में मुंबई में विमानों की लैंडिंग प्रभावित होने पर एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आने वाली उड़ानों को वैकल्पिक एयरपोर्ट की ओर भेजा। सभी डायवर्ट विमान सुरक्षित उतरे।

    सूरत और वडोदरा में यात्रियों के लिए क्या इंतजाम?

    डायवर्ट किए गए विमानों के यात्रियों को वैकल्पिक एयरपोर्ट पर जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई। सूरत और वडोदरा में यात्रियों के लिए पीने के पानी और रिफ्रेशमेंट की व्यवस्था की गई। वडोदरा में पहुंचे कुछ विमानों के यात्रियों को तत्काल विमान से बाहर नहीं उतारा गया था और आगे की उड़ान के लिए मौसम तथा परिचालन की स्थिति का इंतजार किया जा रहा था।

    अब यात्रियों को मुंबई कब पहुंचाया जाएगा?

    डायवर्ट किए गए विमानों की मुंबई वापसी वहां के मौसम और एयर ट्रैफिक कंट्रोल से मिलने वाली अनुमति पर निर्भर रही। मौसम सामान्य होने और मुंबई एयरपोर्ट पर लैंडिंग के लिए परिस्थितियां अनुकूल होने के बाद विमानों को मुंबई भेजने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी थी। इसलिए जिन यात्रियों की उड़ान प्रभावित हुई है, उनके लिए वास्तविक यात्रा समय एयरलाइन और फ्लाइट स्टेटस के अनुसार बदल सकता है।

    30 सितंबर को भी मौसम पर नजर

    मुंबई में 30 सितंबर को भी बारिश और गरज-चमक की संभावना बनी हुई है। ऐसे में मुंबई से उड़ान भरने या मुंबई पहुंचने वाले यात्रियों के लिए एयरपोर्ट रवाना होने से पहले अपनी फ्लाइट का ताजा स्टेटस जांचना महत्वपूर्ण है। मौसम की स्थिति के अनुसार देरी, रूट में बदलाव या डायवर्जन जैसी स्थिति दोबारा बन सकती है।

    मंगलवार की घटना में राहत की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि डायवर्ट की गई उड़ानों की लैंडिंग सुरक्षित रही और किसी यात्री के हताहत होने की जानकारी सामने नहीं आई। अब यात्रियों की आगे की यात्रा और उड़ानों के सामान्य संचालन की स्थिति मुंबई के मौसम तथा एयर ट्रैफिक की स्थिति पर निर्भर करेगी।

  • Borivali में 691 ग्राम हेरोइन जब्त, कीमत ₹1.38 करोड़; ANC ने एक आरोपी को पकड़ा

    Borivali में 691 ग्राम हेरोइन जब्त, कीमत ₹1.38 करोड़; ANC ने एक आरोपी को पकड़ा

    Borivali East के Khodiyar Nagar में ANC ने 691 ग्राम हेरोइन जब्त कर एक आरोपी को गिरफ्तार किया। NDPS Act के तहत मामला दर्ज, सप्लाई नेटवर्क की जांच जारी।

    मुंबई: Borivali East में Anti-Narcotics Cell (ANC) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 691 ग्राम हेरोइन जब्त की है। पुलिस के मुताबिक बरामद हेरोइन की अनुमानित कीमत करीब 1.38 करोड़ रुपये है। कार्रवाई Khodiyar Nagar इलाके में हुई, जहां संदिग्ध गतिविधि नजर आने के बाद एक व्यक्ति को रोककर उसकी तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान रक्सैक से हेरोइन बरामद हुई और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।

    यह कार्रवाई ANC की Kandivali Unit ने की। पुलिस के अनुसार टीम इलाके में गश्त कर रही थी, इसी दौरान एक व्यक्ति के व्यवहार पर संदेह हुआ। उसे रोककर जांच की गई तो उसके पास मौजूद रक्सैक से 691 ग्राम हेरोइन मिली। पुलिस ने हेरोइन और उसे रखने के लिए इस्तेमाल किए गए बैग को जब्त कर लिया।

    691 ग्राम हेरोइन का मामला कितना गंभीर है?

    बरामद मात्रा NDPS Act के तहत तय commercial quantity की सीमा से काफी अधिक है। केंद्र सरकार की अधिसूचना के अनुसार हेरोइन की small quantity 5 ग्राम और commercial quantity 250 ग्राम निर्धारित है। इस लिहाज से 691 ग्राम बरामदगी commercial quantity की सीमा से करीब 2.76 गुना अधिक है।

    मामले में आरोपी के खिलाफ Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act, 1985 की धारा 8(c) और 21(c) के तहत केस दर्ज किया गया है। Commercial quantity से जुड़े Section 21(c) के मामले में दोष सिद्ध होने पर 10 से 20 वर्ष तक के कठोर कारावास और जुर्माने का प्रावधान है। हालांकि इस मामले में आरोपी के खिलाफ आरोप अभी जांच के स्तर पर हैं और अंतिम दोषसिद्धि अदालत के निर्णय पर निर्भर करेगी।

    Kasturba Marg Police Station में केस दर्ज

    हेरोइन बरामद होने के बाद मामले में Kasturba Marg Police Station में प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि बरामद नशीला पदार्थ आरोपी तक कहां से पहुंचा था और इसे मुंबई या आसपास के इलाकों में किसे दिया जाना था।

    जांच का एक अहम हिस्सा यह भी है कि आरोपी खुद इस नेटवर्क का हिस्सा था या किसी अन्य व्यक्ति के लिए हेरोइन लेकर जा रहा था। फिलहाल पुलिस की ओर से इस संबंध में अंतिम जानकारी सामने नहीं आई है।

    कार्रवाई DCP (ANC) Purnima Chougule-Shringi और ACP Sudhir Hirdekar की निगरानी में हुई। Kandivali Unit की टीम का नेतृत्व Senior Police Inspector Rahul Lokhande और Police Sub-Inspector Nikhil Shelke ने किया।

    Borivali में पहले भी मिली थी बड़ी मात्रा में हेरोइन

    Borivali East में हेरोइन से जुड़ी यह पहली बड़ी कार्रवाई नहीं है। दिसंबर 2025 में ANC की Kandivali Unit ने Rashtriya Udyan Metro Station के पास एक घर से 511 ग्राम हेरोइन बरामद की थी। उस कार्रवाई में दो मोबाइल फोन और एक mixer grinder भी जब्त किया गया था। पुलिस की जांच में उस मामले में घर पर हेरोइन तैयार कर उसे छोटे पैकेटों में स्थानीय स्तर पर बेचने के आरोप सामने आए थे।

    हालांकि दिसंबर 2025 की उस कार्रवाई और Borivali East की मौजूदा 691 ग्राम हेरोइन बरामदगी के बीच किसी संबंध की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

    Mumbai में लगातार सामने आ रही बड़ी हेरोइन बरामदगी

    इस साल मुंबई के अलग-अलग इलाकों में हेरोइन की कई बड़ी खेप पकड़ी गई हैं। मई 2026 में ANC की Kandivali Unit ने Versova में 765 ग्राम हेरोइन जब्त की थी और दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पुलिस की जांच में दोनों के मुंबई में कई बार आकर नशीले पदार्थ की आपूर्ति करने की बात सामने आई थी।

    जून में Goregaon में ANC ने 750 ग्राम हेरोइन के साथ 20 वर्षीय Subhan Imran Gada को गिरफ्तार किया था। इस मामले में भी पुलिस ने source और आगे की supply chain की जांच शुरू की थी।

    अगस्त में Kandivali West में Crime Branch Unit 11 ने 651 ग्राम हेरोइन जब्त कर दो लोगों को गिरफ्तार किया था। उस कार्रवाई में हेरोइन के अलावा नकदी और मोबाइल फोन भी जब्त किए गए थे तथा कथित interstate network की जांच की जा रही थी।

    इससे पहले मई में Santacruz East में भी ANC की Kandivali Unit ने 508 ग्राम हेरोइन जब्त की थी। उस मामले में पुलिस source और intended recipients का पता लगाने की कोशिश कर रही थी।

    इन अलग-अलग मामलों को एक ही गिरोह से जोड़ने की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन हाल की कार्रवाइयों में जांच का प्रमुख फोकस नशीले पदार्थ की खेप के source, supplier और आगे के recipients तक पहुंचने पर रहा है।

    अब पुलिस की जांच किस दिशा में?

    Borivali के मौजूदा मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल हेरोइन की supply chain को लेकर है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि 691 ग्राम की खेप कहां से आई, आरोपी को यह किसने दी और इसे आगे किस स्थान या व्यक्ति तक पहुंचाया जाना था।

    जांच में आरोपी के संपर्कों, संभावित suppliers और अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल की जा सकती है। अगर पूछताछ या आगे की जांच में दूसरे लोगों की भूमिका सामने आती है तो मामले में और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।

    फिलहाल पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है और हेरोइन जब्ती के साथ दर्ज मामले की जांच जारी है। असली source और इस खेप के पीछे मौजूद नेटवर्क का पता चलना अब इस कार्रवाई का अगला महत्वपूर्ण हिस्सा है।

  • मुंबई की 39,111 झोपड़ियों पर BMC की कार्रवाई का क्या होगा? आयुक्त के स्पष्टीकरण से 1 अक्टूबर पर बड़ा सवाल

    मुंबई की 39,111 झोपड़ियों पर BMC की कार्रवाई का क्या होगा? आयुक्त के स्पष्टीकरण से 1 अक्टूबर पर बड़ा सवाल

    मुंबई की 39,111 झोपड़ियों पर 1 अक्टूबर से प्रस्तावित BMC कार्रवाई को लेकर नया मोड़ आया है। आयुक्त अश्विनी भिडे के स्पष्टीकरण से अभियान पर सवाल उठे।

    मुंबई: 39 हजार 111 झोपड़ियों पर 1 अक्टूबर से शुरू होने वाली प्रस्तावित BMC कार्रवाई को लेकर आखिरी वक्त में बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। 19 सितंबर को महापालिका ने 14 फीट या उससे अधिक ऊंचाई वाले 39,111 अनधिकृत झोपड़ी निर्माणों के खिलाफ 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर तक विशेष कार्रवाई की घोषणा की थी। अब 29 सितंबर को BMC आयुक्त अश्विनी भिडे के साथ हुई बैठक के बाद यह स्पष्ट किया गया है कि इन 39,111 झोपड़ियों को गिराने का कोई अलग से आदेश जारी नहीं किया गया है। मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष और सांसद वर्षा गायकवाड़ के अनुसार, आयुक्त ने बताया कि महापालिका नियमित कार्रवाई कर रही है।

    इस स्पष्टीकरण के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर 1 अक्टूबर से शुरू होने वाली वह विशेष कार्रवाई अब किस रूप में होगी, जिसकी घोषणा खुद महापालिका प्रशासन ने की थी।

    39,111 का आंकड़ा आया कहां से?

    BMC के आंकड़ों के अनुसार मुंबई में कुल 2 लाख 23 हजार 150 झोपड़ी संरचनाएं हैं। इनमें 39,111 ऐसी संरचनाएं चिन्हित की गई हैं जिनकी ऊंचाई 14 फीट या उससे अधिक है। इनमें मुंबई शहर की 3,348, पश्चिमी उपनगरों की 4,536 और पूर्वी उपनगरों की सबसे अधिक 31,227 संरचनाएं शामिल हैं।

    यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। 39,111 का आंकड़ा उन संरचनाओं का है जिन्हें BMC ने कार्रवाई के लिए चिन्हित किया है। इसका मतलब यह नहीं है कि इन सभी 39,111 घरों को अलग-अलग demolition notice जारी हो चुके हैं।

    BMC के अनुसार 4,584 संरचनाओं पर पहले ही कार्रवाई की जा चुकी थी, जबकि 611 को नोटिस दिए जा चुके थे। बाकी चिन्हित संरचनाओं के अनधिकृत हिस्से खुद हटाने के लिए कहा गया था और ऐसा नहीं करने पर कार्रवाई की बात कही गई थी।

    1 अक्टूबर से क्या होने वाला था?

    19 सितंबर को घोषित योजना के मुताबिक 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर तक तीन महीने की विशेष मुहिम चलनी थी। इसका फोकस झोपड़पट्टी क्षेत्रों में 14 फीट या उससे अधिक ऊंचाई वाले अनधिकृत निर्माण और अतिरिक्त निर्माण पर था। BMC ने लोगों से अपने स्तर पर अनधिकृत हिस्से हटाने की अपील भी की थी।

    यह कार्रवाई ऐसे समय घोषित हुई जब कुर्ला में पहाड़ी किनारे बसे आवासीय क्षेत्र में भूस्खलन की घटना में आठ लोगों की मौत हुई थी और मानखुर्द में भी मकान गिरने की घटना सामने आई थी। इन घटनाओं के बाद अनधिकृत और असुरक्षित निर्माणों पर कार्रवाई का मुद्दा और गंभीर हुआ। हालांकि 39,111 सभी संरचनाओं को खतरनाक घोषित किया गया है, ऐसा उपलब्ध आंकड़ों से साबित नहीं होता।

    अब आयुक्त के स्पष्टीकरण से क्या बदला?

    28 सितंबर को वर्षा गायकवाड़ के नेतृत्व में सांसदों, विधायक असलम शेख और नगरसेवकों के प्रतिनिधिमंडल ने BMC आयुक्त अश्विनी भिडे से मुलाकात की। इसके बाद गायकवाड़ ने बताया कि आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि 39,111 झोपड़ियों को गिराने का कोई आदेश प्रशासन की ओर से जारी नहीं किया गया है और नियमित कार्रवाई ही जारी है।

    लेकिन इस स्पष्टीकरण के बावजूद मामला पूरी तरह साफ नहीं हुआ है। उसी दिन BMC General Body में इस मुद्दे पर पांच घंटे से ज्यादा समय तक विवाद चला। BJP के Leader of House गणेश खनकर ने मांग की कि आयुक्त खुद सदन में आकर स्थिति स्पष्ट करें। आयुक्त के बैठक में नहीं पहुंचने के बाद Mayor रितु तावड़े ने सदन स्थगित कर दिया।

    यानी एक तरफ 19 सितंबर की विशेष कार्रवाई की घोषणा मौजूद है और दूसरी तरफ 29 सितंबर को आयुक्त के बारे में सामने आया स्पष्टीकरण है। 1 अक्टूबर को वास्तव में कौन-सी कार्रवाई होगी, इसका स्पष्ट प्रशासनिक स्वरूप अब इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा सवाल बन गया है।

    14 फीट की सीमा पर भी उठे सवाल

    इस कार्रवाई का दूसरा महत्वपूर्ण मुद्दा 14 फीट की ऊंचाई की सीमा है। Govandi New Sangam Welfare Society की ओर से अधिवक्ता Faiyaz Alam Shaikh ने BMC आयुक्त, SRA, MMRDA और Housing Department के Principal Secretary को कानूनी नोटिस भेजा था। नोटिस में 14 फीट की सीमा को पुराने कानूनी प्रावधान से जोड़ते हुए कार्रवाई पर आपत्ति जताई गई और demolition के बजाय structural audit, eligibility verification और rehabilitation जैसे विकल्पों की मांग की गई।

    समाजवादी पार्टी के विधायक Rais Shaikh ने कहा था कि इस कार्रवाई से करीब 34 हजार निवासियों का भविष्य प्रभावित हो सकता है। यह प्रभावित आबादी का राजनीतिक दावा है, BMC द्वारा जारी आधिकारिक population figure नहीं।

    रिहायश और पुनर्वसन का सवाल

    कार्रवाई के विरोध में सबसे बड़ा सवाल यह उठाया गया है कि यदि कोई संरचना हटाई जाती है तो वहां रहने वाले पात्र परिवारों का पुनर्वसन किस व्यवस्था के तहत होगा।

    वर्षा गायकवाड़ ने SRA, MHADA, PAP और cluster redevelopment जैसी व्यवस्थाओं के जरिए पात्र परिवारों के पुनर्वसन की मांग की है। BMC में विपक्ष की नेता किशोरी पेडणेकर ने भी झोपड़ीवासियों की पात्रता की जांच, 2011 या लागू cut-off date के आधार पर verification और उसके बाद rehabilitation की मांग उठाई है।

    इस बीच BMC House के Leader गणेश खनकर ने भी कार्रवाई स्थगित करने की मांग की थी। वहीं Mayor रितु तावड़े ने General Body में कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को विश्वास में लिए बिना फैसला आगे बढ़ाया गया तो उसे पलटने की मांग उठ सकती है।

    अब सवाल सिर्फ झोपड़ी तोड़ने का नहीं

    इस पूरे विवाद में एक और राजनीतिक मोड़ सामने आया है। शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे ने BJP पर दबाव में अपनी स्थिति संभालने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। दूसरी ओर कुछ नागरिक कार्यकर्ताओं ने कार्रवाई के विरोध को अनधिकृत झोपड़ियों को राजनीतिक संरक्षण देने के रूप में देखने की बात कही है। इन दावों और आरोपों के बीच प्रशासन के वास्तविक लिखित आदेश और कार्रवाई की प्रक्रिया सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज बन जाती है।

    वहीं समाजवादी पार्टी के नेता अबू आजमी ने भी आयुक्त अश्विनी भिडे से मुलाकात कर प्रस्तावित कार्रवाई रोकने की मांग की। बैठक के बाद उनके हवाले से यह बात सामने आई कि इतनी बड़ी संख्या में संरचनाओं को एक ही दिन में गिराना व्यावहारिक नहीं होगा।

    BMC के अभियान की कमान किसके पास?

    19 सितंबर की योजना में आयुक्त अश्विनी भिडे के निर्देश पर कार्रवाई किए जाने की बात सामने आई थी। इसके लिए अतिरिक्त महापालिका आयुक्त (शहर) प्राजक्ता वर्मा-लवंगारे के मार्गदर्शन और संयुक्त आयुक्त (दक्षता) देवेंदर सिंह के नेतृत्व में कार्रवाई की जानकारी भी प्रकाशित हुई थी।

    इसलिए अब सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक सवाल यह है कि 1 अक्टूबर से प्रस्तावित विशेष अभियान के लिए जारी की गई आंतरिक प्रक्रिया और वर्तमान स्थिति में क्या बदलाव हुआ है।

    आम झोपड़ीवासी क्या समझें?

    फिलहाल 14 फीट या उससे अधिक ऊंचाई वाली संरचना का BMC की सूची में होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि उसी दिन पूरा घर गिरा दिया जाएगा। इसी तरह किसी संरचना पर जारी नोटिस, पहले की गई कार्रवाई और नई प्रस्तावित कार्रवाई—तीनों की कानूनी और प्रशासनिक स्थिति अलग हो सकती है।

    जिन लोगों को BMC का नोटिस मिला है, उन्हें अपने पास उपलब्ध पुराने दस्तावेज, पात्रता से जुड़े कागजात, redevelopment या SRA से संबंधित रिकॉर्ड और नोटिस की प्रतियां सुरक्षित रखनी चाहिए। किसी भी कार्रवाई की स्थिति में संबंधित BMC विभाग से लिखित स्थिति और लागू प्रक्रिया की जानकारी लेना महत्वपूर्ण होगा।

    फिलहाल 1 अक्टूबर सबसे अहम तारीख बनी हुई है। 19 सितंबर को घोषित तीन महीने की विशेष मुहिम, 39,111 चिन्हित संरचनाओं का आंकड़ा और 29 सितंबर को सामने आया आयुक्त का स्पष्टीकरण—इन तीनों के बीच प्रशासनिक स्थिति अब भी पूरी तरह स्पष्ट होना बाकी है। खास तौर पर यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि 1 अक्टूबर से BMC किस प्रकार की कार्रवाई शुरू करती है और क्या उसके लिए कोई स्पष्ट लिखित आदेश या वार्ड-स्तरीय प्रक्रिया सामने आती है।

  • Acme Boulevard Homebuyer Fraud: CBI की 21वीं Chargesheet, 2022 से अटके Project की पूरी कहानी

    Acme Boulevard Homebuyer Fraud: CBI की 21वीं Chargesheet, 2022 से अटके Project की पूरी कहानी

    Jogeshwari East के Acme Boulevard मामले में CBI ने 5 पूर्व प्रमोटर्स-डायरेक्टर्स पर chargesheet दाखिल की। जानिए project, insolvency और homebuyers की पूरी स्थिति।

    मुंबई: Jogeshwari East स्थित Acme Boulevard housing project से जुड़े कथित homebuyer fraud मामले में Central Bureau of Investigation (CBI) ने पांच पूर्व promoters/directors और Acme Realties Private Limited की holding company Acme Housing India Private Limited के खिलाफ chargesheet दाखिल की है। यह chargesheet Additional Chief Judicial Magistrate (CBI Cases), 3rd Court, Esplanade Court, Mumbai के सामने दाखिल हुई है। CBI के अनुसार, जांच में homebuyers को कथित तौर पर false assurances और fraudulent representations के जरिए प्रभावित कर financial benefits हासिल करने के आरोप सामने आए हैं।

    CBI ने आरोपों में criminal conspiracy, cheating, criminal breach of trust और dishonest receipt of stolen property से जुड़े भारतीय दंड संहिता के प्रावधान लगाए हैं। हालांकि chargesheet दाखिल होना आरोपों का न्यायिक रूप से साबित होना नहीं है और मामले में आगे अदालत की कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी।

    Acme Boulevard की कहानी सिर्फ CBI chargesheet तक सीमित नहीं है। इस project से जुड़े homebuyers के विवाद, MahaRERA proceedings, redevelopment dispute और बाद में शुरू हुई insolvency resolution process का लंबा background है। यही वजह है कि इस मामले में मौजूदा CBI कार्रवाई के साथ यह समझना भी जरूरी है कि project की स्थिति यहां तक कैसे पहुंची।

    Acme Boulevard project कहां है और विवाद क्या है?

    Acme Boulevard Village Majas, Sarvodaya Nagar, Jogeshwari East में स्थित redevelopment project है। NCLT के रिकॉर्ड के अनुसार जिस जमीन पर redevelopment हुआ, वह MHADA की लगभग 40,429.64 वर्ग मीटर जमीन थी। यहां पहले 88 chawls में 655 tenements थे। वर्ष 2008 में Majaswadi Sarvodayanagar Co-operative Housing Society के सदस्यों ने इस property के composite redevelopment का फैसला लिया था और redevelopment के लिए developers को आमंत्रित किया गया था।

    Project के development structure में J.P. Infra Mumbai Private Limited, Keemaya Developers Private Limited और Acme Realities Private Limited से जुड़े arrangements का उल्लेख NCLT और MahaRERA records में मिलता है। Acme Boulevard के Boulevard Tower 4 और Boulevard Tower 5 इसी redevelopment framework का हिस्सा हैं।

    2022 में बढ़ा विवाद

    Acme Boulevard Tower 5 के MahaRERA record में project की proposed completion date 30 December 2022 दर्ज थी। बाद में revised completion date 30 December 2023 की गई, लेकिन promoter ने extension के लिए आवेदन नहीं किया था। MahaRERA के 2025 interim order में project को 30 December 2023 के बाद lapsed बताया गया और उस समय Occupation Certificate भी नहीं मिला था।

    इसी दौरान Majaswadi Sarvodayanagar Society ने नवंबर 2022 में termination notice और public notice जारी किया था। Acme Realities ने इसका विरोध करते हुए legal proceedings शुरू कीं। MahaRERA के रिकॉर्ड में Acme की ओर से यह भी दर्ज है कि विवाद को Bombay High Court के सामने ले जाया गया और arbitration का रास्ता अपनाया गया।

    यानी project का विवाद केवल individual homebuyers की possession समस्या तक सीमित नहीं रहा, बल्कि developer और redevelopment society के बीच भी गंभीर विवाद सामने आया।

    Homebuyers का विवाद NCLT तक कैसे पहुंचा?

    Acme Boulevard Tower 4 और Tower 5 के homebuyers ने possession में देरी को लेकर insolvency proceedings का रास्ता अपनाया। NCLT के रिकॉर्ड के अनुसार Abhishek Ranganathan और अन्य homebuyers ने Acme Realities के खिलाफ Corporate Insolvency Resolution Process यानी CIRP शुरू करने की मांग की थी। Petition में इन buyers को financial creditors/homebuyers के रूप में दर्ज किया गया और बताया गया कि उन्होंने Boulevard Tower 4 और Boulevard Tower 5 में residential units खरीदे थे।

    NCLT ने 21 February 2024 को Acme Realities के खिलाफ CIRP शुरू किया। इसके बाद company के लिए resolution process शुरू हुआ। IBBI के रिकॉर्ड में Acme Realities Private Limited के लिए resolution plan process और Resolution Professional के रूप में Subodh Kumar Agrawal का उल्लेख मिलता है।

    Homebuyers के दावे कितने बड़े थे?

    CIRP के दौरान homebuyers के admitted claims लगभग 525.65 करोड़ रुपये दर्ज किए गए। यह रकम CBI द्वारा बताए गए alleged fraud amount के रूप में नहीं देखी जानी चाहिए। यह insolvency proceedings में homebuyers के admitted financial claims से संबंधित figure है।

    यही अंतर इस मामले को समझने में महत्वपूर्ण है। CBI की मौजूदा chargesheet में इस specific case के alleged fraud की कुल रकम सार्वजनिक तौर पर सामने नहीं आई है, जबकि insolvency proceedings में homebuyers के financial claims का अलग रिकॉर्ड मौजूद है।

    Project के लिए आया resolution plan

    Acme Realities की insolvency process के दौरान Mantra Properties & Developers Private Limited resolution applicant के तौर पर सामने आया। NCLT के रिकॉर्ड के अनुसार Mantra Properties को 13 February 2025 को 100 प्रतिशत voting के साथ Successful Resolution Applicant घोषित किया गया था। इसके बाद 26 August 2025 को NCLT ने resolution plan को मंजूरी दी।

    Resolution plan में homebuyers के लिए flats की delivery को महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया था। NCLT के रिकॉर्ड में homebuyers से संबंधित flats की aggregate value लगभग 525.67 करोड़ रुपये बताई गई है। Acme Boulevard के Tower 4 और Tower 5 के लिए Effective Date से 18 महीने के भीतर completion और delivery का framework रखा गया था, हालांकि इसके साथ project implementation और अन्य आवश्यक conditions भी जुड़ी थीं।

    इसका मतलब यह है कि CBI की criminal proceedings और Acme project की insolvency-resolution process दो अलग कानूनी tracks हैं। CBI chargesheet पूर्व promoters/directors के खिलाफ alleged criminal conduct से जुड़ी है, जबकि NCLT resolution plan project को आगे बढ़ाने और creditors तथा homebuyers के claims को resolution mechanism के जरिए address करने से संबंधित है।

    MahaRERA में homebuyers की शिकायतें भी दर्ज

    Acme Boulevard Tower 5 के खिलाफ MahaRERA proceedings में homebuyers की शिकायतें सामने आई हैं। एक MahaRERA proceeding में Vijay Rammurat Singh तथा Anoop Chokhani और Jaigovind Chokhani की complaints दर्ज हैं, जिसमें Acme Realities, J.P. Infra और संबंधित entities को respondents बनाया गया था।

    इन proceedings में homebuyers को RERA के तहत allottees और संबंधित companies को promoters के रूप में दर्ज किया गया था। इससे यह स्पष्ट होता है कि project से संबंधित buyer disputes CBI investigation से पहले भी regulatory और insolvency forums तक पहुंच चुके थे।

    Project की completion अब कब तक?

    Acme Boulevard के Tower 4 और Tower 5 के उपलब्ध RERA-linked records में original completion timeline December 2022 की थी। बाद की project information में revised completion timeline June 2027 दिखाई देती है। इस बदलाव को project की लंबी regulatory, redevelopment और insolvency journey के संदर्भ में देखना जरूरी है।

    इसलिए homebuyers के लिए मौजूदा सबसे बड़ा सवाल केवल CBI chargesheet नहीं है। असली सवाल यह है कि resolution plan के तहत project completion और flat possession का implementation किस गति से आगे बढ़ता है।

    92 redevelopment members के लिए भी अलग obligations

    NCLT resolution proceedings में Majaswadi Sarvodayanagar Society के 92 members से जुड़े obligations का भी उल्लेख है। Resolution arrangement में पुराने rent dues, hardship compensation और आगे के rent से जुड़े भुगतान का framework रखा गया था।

    इसके अलावा redevelopment/rehabilitation component के Occupation Certificate को लेकर भी समयसीमा से जुड़ी condition दर्ज है। यदि निर्धारित अवधि में आवश्यक Occupation Certificate हासिल नहीं होता, तो settlement terms में कुछ परिस्थितियों में enhanced rent का प्रावधान रखा गया था।

    इससे Acme Boulevard dispute का असर केवल private flat buyers तक सीमित नहीं रहता। Project के पुराने occupants और redevelopment beneficiaries भी इसके outcome से जुड़े हुए हैं।

    अब CBI chargesheet के बाद क्या होगा?

    CBI की chargesheet के बाद मामला अदालत की प्रक्रिया में आगे बढ़ेगा। आरोपों पर न्यायिक निर्णय होना बाकी है। दूसरी तरफ Acme Realities की insolvency resolution process के तहत मंजूर किए गए plan का project completion और homebuyers की delivery पर प्रभाव अलग से बना रहेगा।

    CBI ने कहा है कि Acme मामला उसकी nationwide homebuyer fraud investigation का हिस्सा है। Agency के अनुसार इस broader investigation में विभिन्न builder companies और financial institutions के unidentified officials से जुड़े 32 अन्य मामले भी जांच के दायरे में हैं। Acme मामले की chargesheet इस nationwide probe में 21वीं chargesheet है।

    Homebuyers के लिए सबसे अहम बात

    Acme Boulevard मामले में फिलहाल तीन अलग-अलग developments को एक साथ समझना जरूरी है। पहला, CBI ने पांच पूर्व promoters/directors के खिलाफ alleged cheating और अन्य आपराधिक धाराओं के तहत chargesheet दाखिल की है। दूसरा, Acme Realities पहले ही insolvency proceedings से गुजर चुकी है और Mantra Properties का resolution plan NCLT से मंजूर हो चुका है। तीसरा, homebuyers और redevelopment society से जुड़े विवादों का रिकॉर्ड MahaRERA और NCLT proceedings में पहले से मौजूद है।

    इसलिए CBI की नई chargesheet मामले का एक नया कानूनी चरण है, लेकिन Acme Boulevard project की पूरी कहानी इससे कहीं पुरानी है। अब इस मामले में आगे की निगरानी दो स्तरों पर होगी—अदालत में criminal proceedings और दूसरी तरफ resolution plan के तहत project completion तथा homebuyers को possession मिलने की प्रक्रिया।

  • Cooper Hospital Death Certificate Case: 6 साल बाद भी जांच का जवाब नहीं, डॉक्टर अब BMC के अहम पद पर

    Cooper Hospital Death Certificate Case: 6 साल बाद भी जांच का जवाब नहीं, डॉक्टर अब BMC के अहम पद पर

    Cooper Hospital के 2020 death certificate मामले में ₹10,000 रिश्वत मांगने का आरोप लगा था। डॉक्टर Niranjan Kshirsagar suspend हुए, लेकिन जांच का अंतिम नतीजा अब भी स्पष्ट नहीं।

    मुंबई: Cooper Hospital में अप्रैल 2020 में मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने के लिए ₹10,000 मांगने और ₹7,000 लेने के आरोप से जुड़ा मामला छह साल बाद फिर सवालों के घेरे में है। उस समय BMC ने Casualty Medical Officer Dr Niranjan Kshirsagar को जांच लंबित रहने तक निलंबित किया था। अब 2026 में इसी नाम के Dr Niranjan Kshirsagar को Jogeshwari के Hindu Hriday Samrat Balasaheb Thackeray Trauma Care Municipal Hospital में Medical Superintendent के रूप में सार्वजनिक रूप से दर्ज किया गया है। हालांकि उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड से दोनों पदों पर दर्ज व्यक्ति की पहचान को अंतिम रूप से एक ही व्यक्ति साबित करने वाला BMC सेवा रिकॉर्ड सामने नहीं आया है।

    2020 में क्या हुआ था

    अप्रैल 2020 में Andheri West के Gaondevi निवासी Abu Bakar Gulab Khan की हार्ट अटैक से मौत के बाद उनके परिवार को Cooper Hospital में मृत्यु प्रमाणपत्र लेने के दौरान कथित तौर पर परेशानी का सामना करना पड़ा था। परिवार के सदस्य Yusuf Jafri Ali Shaikh ने दावा किया था कि अस्पताल से जुड़े डॉक्टरों ने Covid-19 के कारण मृत्यु प्रमाणपत्र जारी होने में कई दिन लगने की बात कही और ₹10,000 की मांग की। आरोप के मुताबिक बाद में ₹7,000 पर मामला तय हुआ और परिवार को एक डॉक्टर के पास भेजा गया।

    मामला सामने आने के बाद Andheri West के तत्कालीन BJP MLA Ameet Satam ने ऑडियो रिकॉर्डिंग Municipal Commissioner Praveen Pardeshi को भेजकर जांच की मांग की थी। Cooper Hospital के तत्कालीन Dean Dr Pinakin Gujjar ने जांच शुरू होने की पुष्टि की थी, जबकि तत्कालीन Additional Municipal Commissioner (Health) Suresh Kakani ने दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की बात कही थी।

    Dr Niranjan Kshirsagar ने रिश्वत लेने से इनकार किया था। उनका कहना था कि वह उस रात ड्यूटी पर नहीं थे और परिवार ने करीब रात 2 बजे उनसे संपर्क किया था। उनके अनुसार ₹7,000 रिश्वत नहीं बल्कि उनकी फीस थी, जिसमें देर रात consultation का charge भी शामिल था। उन्होंने यह भी कहा था कि परिवार postmortem नहीं चाहता था और उन्होंने मदद की थी। Kshirsagar ने खुद को फंसाए जाने का आरोप लगाते हुए कहा था कि वह 15 वर्षों की सेवा में पहले कभी रिश्वत के आरोप का सामना नहीं कर चुके थे।

    BMC ने क्या कार्रवाई की थी

    ऑडियो सामने आने के एक दिन बाद BMC ने Dr Niranjan Kshirsagar को inquiry pending रहने तक suspend कर दिया था। उस समय सामने आई जानकारी के अनुसार preliminary inquiry में परिवार जिस डॉक्टर को private doctor बता रहा था, उसके Cooper Hospital से जुड़े होने की बात भी सामने आई थी। Ameet Satam ने उन दूसरे डॉक्टरों की भूमिका की भी जांच की मांग की थी, जिन्होंने परिवार को Kshirsagar तक पहुंचाया था।

    लेकिन इस मामले का सबसे बड़ा अनुत्तरित सवाल आज भी यही है कि उस departmental inquiry का अंतिम परिणाम क्या निकला। उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड में इस specific मामले की final inquiry report, अंतिम disciplinary order, charge-sheet, clean chit, dismissal या अन्य अंतिम कार्रवाई का स्पष्ट दस्तावेज सामने नहीं आता।

    Death Certificate और Cause of Death Certificate एक नहीं

    इस मामले को समझने के लिए मृत्यु प्रमाणपत्र और Medical Certificate of Cause of Death के बीच अंतर समझना जरूरी है।

    Medical Certificate of Cause of Death वह चिकित्सकीय प्रमाणपत्र है जिसमें मृत्यु का कारण दर्ज किया जाता है। Registration of Births and Deaths Act की मौजूदा Section 10 के अनुसार, किसी medical institution में मृत्यु होने पर institution को cause-of-death certificate बिना शुल्क उपलब्ध कराना होता है। इस प्रमाणपत्र पर उस medical practitioner के हस्ताक्षर होते हैं जिसने मृतक को हाल की बीमारी के दौरान attend किया था और इसकी एक copy निकटतम रिश्तेदार को दी जानी है।

    2023 के संशोधन के बाद यह जिम्मेदारी medical institution के स्तर पर और स्पष्ट की गई। नए प्रावधान के मुताबिक medical institution, चाहे वह सरकारी हो या निजी, death होने पर cause-of-death certificate free of charge उपलब्ध कराएगा।

    इसका मतलब यह नहीं है कि हर परिस्थिति में मृत्यु से जुड़े किसी भी अलग medical service के लिए कोई निजी शुल्क असंभव है। लेकिन Cooper मामले में Dr Kshirsagar द्वारा बताए गए ₹7,000 को official death-certificate fee मानने का कोई सार्वजनिक BMC fee record उपलब्ध नहीं है। उनका पक्ष यह था कि यह late-night consultation की फीस थी।

    आज BMC से Death Certificate लेने की प्रक्रिया क्या है

    महाराष्ट्र सरकार के Aaple Sarkar portal पर BMC के लिए Death Certificate जारी करने की notified service timeline 3 दिन है। इसमें designated officer Divisional Medical Health Officer (Deputy Registrar), first appellate officer Divisional Deputy Executive Health Officer और second appellate officer Executive Health Officer बताए गए हैं।

    यह वर्तमान व्यवस्था है। इसे अप्रैल 2020 में लागू Covid-period procedure पर सीधे लागू नहीं किया जा सकता। 2020 में महामारी के दौरान deaths की जांच और documentation को लेकर अलग प्रशासनिक व्यवस्था लागू थी।

    Covid काल में death certificate को लेकर क्या बदला था

    Cooper Hospital का यह मामला ऐसे समय सामने आया था जब Covid-19 के कारण मृत्यु की जांच और documentation को लेकर अस्पतालों और परिवारों के सामने अतिरिक्त प्रक्रियात्मक दबाव था। बाद में BMC ने non-Covid deaths को लेकर यह स्पष्ट किया था कि apparent non-Covid death के मामले में death certificate पाने के लिए Covid certificate जरूरी नहीं था। उस समय BMC ने non-Covid deaths के cause-of-death certificate को लेकर अलग procedure भी जारी की थी।

    इसलिए 2020 की घटना में परिवार को बताई गई संभावित देरी और उस समय लागू वास्तविक BMC procedure के बीच अंतर की जांच इस मामले की महत्वपूर्ण कड़ी है।

    ₹7,000 की payment पर अब भी बड़ा सवाल

    Dr Kshirsagar का दावा था कि ₹7,000 उनकी फीस थी। दूसरी तरफ परिवार की ओर से इसे death certificate जल्दी दिलाने के लिए भुगतान बताया गया था। उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों में इस राशि की कोई ऐसी receipt, official fee schedule या BMC-authorised private consultation record सामने नहीं आया जिससे इस payment की प्रकृति निर्णायक रूप से स्पष्ट हो सके।

    उपलब्ध जानकारी में यह आरोप और डॉक्टर का अलग बचाव दोनों मौजूद हैं, जबकि departmental inquiry का अंतिम सार्वजनिक निष्कर्ष स्पष्ट नहीं है।

    अगर सरकारी काम के बदले पैसे मांगे जाएं तो क्या करें

    महाराष्ट्र Anti-Corruption Bureau की मौजूदा व्यवस्था के अनुसार सरकारी कर्मचारी द्वारा रिश्वत मांगने की शिकायत ACB में की जा सकती है। ACB के complaint system में public servant, department, bribe demand और pending government work जैसी जानकारी देने के साथ audio, video और image evidence उपलब्ध कराने की सुविधा भी है।

    ऐसी स्थिति में नागरिक को payment का receipt मांगने, अधिकारी का नाम और पद दर्ज करने, तारीख-समय नोट करने और उपलब्ध documentary या audio-video evidence सुरक्षित रखने की जरूरत है। प्रशासनिक service में देरी या certificate जारी नहीं होने जैसी समस्या के लिए BMC की grievance mechanism भी उपलब्ध है।

    2026 में death registration के नियमों में भी बदलाव

    महाराष्ट्र सरकार ने 31 जुलाई 2026 को Maharashtra Registration of Births and Deaths (Amendment) Rules, 2026 को notify किया है। यह बदलाव Maharashtra Birth and Death Registration Rules, 2000 में संशोधन करता है।

    इसके अलावा केंद्र के स्तर पर Registration of Births and Deaths कानून में हालिया संशोधनों के बाद birth और death registration व्यवस्था में कई बदलाव लागू हुए हैं। Cause-of-death certificate से संबंधित statutory provisions भी 2023 के संशोधन के बाद बदले हैं।

    2026 में Dr Niranjan Kshirsagar की वर्तमान भूमिका

    अगस्त 2026 की सार्वजनिक रिपोर्टों में Jogeshwari के Hindu Hriday Samrat Balasaheb Thackeray Trauma Care Municipal Hospital में Medical Superintendent के रूप में Dr Niranjan Kshirsagar का नाम सामने आया है। 20 अगस्त 2026 की hospital inspection report में Medical Superintendents Dr Chhaya Shinde और Dr Niranjan Kshirsagar की मौजूदगी दर्ज है।

    15 अगस्त 2026 की रिपोर्ट में भी इसी अस्पताल के Medical Superintendent Dr Niranjan Kshirsagar ने canteen से जुड़े विवाद पर hospital administration का पक्ष रखा था।

    हालांकि 2020 के Cooper Hospital मामले में दर्ज Dr Niranjan Kshirsagar और 2026 में Jogeshwari Trauma Care Hospital में दर्ज Dr Niranjan Kshirsagar एक ही व्यक्ति हैं, इसकी अंतिम पुष्टि के लिए BMC का आधिकारिक service/transfer record जरूरी है। इसलिए दोनों records को अभी एक ही व्यक्ति मानकर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा

    सबसे बड़ा सवाल अब भी जांच के अंतिम नतीजे का

    Cooper Hospital के 2020 के मामले में तत्कालीन कार्रवाई स्पष्ट है—जांच शुरू हुई और Dr Niranjan Kshirsagar को suspension का सामना करना पड़ा। लेकिन छह साल बाद भी उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड से यह स्पष्ट नहीं होता कि departmental inquiry अंततः किस निष्कर्ष पर पहुंची।

    यही इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण unanswered question है: क्या ₹7,000 की payment को लेकर डॉक्टर की सफाई स्वीकार हुई, क्या कोई departmental punishment हुआ, क्या आरोप साबित नहीं हुए, या जांच किसी अन्य निष्कर्ष तक पहुंची?

    जब तक BMC की final inquiry report या संबंधित service record सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आता, इस मामले को आरोप, suspension और डॉक्टर के defence के स्तर पर ही तथ्यात्मक रूप से प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

  • Manori Desalination Plant के खिलाफ 19 अक्टूबर को मोर्चा, समुद्री जीवन और मछुआरों की रोजी पर उठे सवाल

    Manori Desalination Plant के खिलाफ 19 अक्टूबर को मोर्चा, समुद्री जीवन और मछुआरों की रोजी पर उठे सवाल

    Manori Desalination Plant के खिलाफ 19 अक्टूबर को मोर्चा होगा। 400 MLD परियोजना, brine discharge, मछली कारोबार और पर्यावरणीय शर्तों पर जानिए पूरा मामला।

    मुंबई: मनोरी में प्रस्तावित समुद्री जल शुद्धिकरण परियोजना को लेकर मछुआरा समुदाय और तटीय गांवों के लोगों का विरोध अब तेज हो गया है। गोरेई में 26 सितंबर को हुई बैठक में 19 अक्टूबर को जिला कलेक्टर कार्यालय तक मोर्चा निकालने का फैसला लिया गया। प्रदर्शनकारी बृहन्मुंबई महानगरपालिका की मनोरी-गोरेई Desalination Plant परियोजना को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। उनका मुख्य सवाल समुद्र से बड़े पैमाने पर पानी खींचने, अत्यधिक नमक वाले brine को वापस समुद्र में छोड़ने और इसके संभावित असर को लेकर है।

    बैठक में गोरेई, मनोरी, पाली, मालवणी, उत्तन और उरण से जुड़े मछुआरा, किसान और तटीय समुदायों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में गोरेई विलेजर्स वेलफेयर एसोसिएशन की अध्यक्ष स्विटी हेन्रिक्स, अखिल महाराष्ट्र मच्छीमार कृती समिति के कार्याध्यक्ष और उत्तन निवासी बर्नार्ड डी’मेलो, गोरेई मच्छीमार सोसायटी के अध्यक्ष ओल्डिन वसाईकर, अखिल महाराष्ट्र मच्छीमार कृती समिति के अध्यक्ष देवेंद्र तांडेल, नगरसेविका शर्मिला बागाजी, राजाराम पाटील, मनोज माशेलकर, हेमंत कोली, पाली-उत्तन मच्छिमार सहकारी सोसायटी के सचिव आल्सन निग्रेल लिंटन मुनीस, डेनिस डिसोजा और धारावी बेट के स्थानीय नागरिक मौजूद थे।

    19 अक्टूबर के मोर्चे में क्या मांग होगी?

    मछुआरा समुदाय की मुख्य मांग परियोजना को रद्द करने की है। समुदाय का कहना है कि मनोरी-गोरेई तट के समुद्री क्षेत्र पर उनकी आजीविका निर्भर है और परियोजना के कारण समुद्र से पानी लेने तथा प्रक्रिया के बाद अधिक नमक वाले पानी को वापस समुद्र में छोड़ने से मछली पकड़ने के क्षेत्र, समुद्री जैव विविधता और पारंपरिक रोजगार पर असर पड़ने की आशंका है।

    स्विटी हेन्रिक्स ने कहा कि स्थानीय लोगों से पर्याप्त चर्चा किए बिना पर्यावरण प्रभाव आकलन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई और परियोजना का मछली पकड़ने, नौवहन तथा मछुआरों की आजीविका पर क्या असर होगा, इस पर स्पष्टता नहीं है। सितंबर में हुए विरोध के बाद अधिकारियों की ओर से बातचीत की पहल होने की बात भी सामने आई है।

    बर्नार्ड डी’मेलो ने कहा कि कोली समुदाय के लिए समुद्र केवल आय का साधन नहीं बल्कि उनकी परंपरा, संस्कृति और पहचान से जुड़ा है। उन्होंने परियोजना से मछली पकड़ने के क्षेत्रों पर खतरे की आशंका जताई है।

    400 MLD की परियोजना में पहले कितना पानी बनेगा?

    मनोरी परियोजना को Sea Water Reverse Osmosis यानी SWRO तकनीक पर विकसित किया जा रहा है। इसकी पहली चरण की क्षमता 200 MLD रखी गई है और आगे इसे 400 MLD तक बढ़ाया जा सकता है। BMC के आधिकारिक दस्तावेजों में भी 200 MLD Phase-I और भविष्य में 400 MLD क्षमता का उल्लेख है।

    परियोजना के लिए मनोरी गांव में लगभग 20 एकड़ जमीन चिन्हित की गई है। आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार यह महाराष्ट्र सरकार की जमीन है, जो महाराष्ट्र पर्यटन विकास निगम के अधिकार क्षेत्र में थी। इसमें सर्वे नंबर 257 (भाग), 263, 289/1, 290 और 291 शामिल हैं। जमीन को पथरीली और बंजर प्रकृति की बताया गया है।

    समुद्र से पानी लेने के बाद क्या समुद्र में वापस जाएगा?

    यही विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पर्यावरणीय पहलू है।

    RO प्रक्रिया में समुद्री पानी से कम लवणता वाला पानी अलग किया जाता है और बचा हुआ ज्यादा लवणता वाला पानी brine के रूप में निकलता है। मनोरी परियोजना में इस brine को समुद्र में छोड़े जाने का प्रस्ताव है।

    पर्यावरणीय आकलन से जुड़े आंकड़ों के अनुसार Phase-I में brine reject करीब 300 MLD और Phase-II में करीब 600 MLD तक पहुंच सकता है। प्रस्तावित brine की औसत लवणता लगभग 56.8 PSU बताई गई है, जबकि intake क्षेत्र के समुद्री पानी की लवणता करीब 35.5 PSU बताई गई है।

    मछुआरा संगठनों को आशंका है कि इस तरह के concentrated brine discharge से मछलियों के प्रजनन क्षेत्र, plankton और समुद्री food chain पर असर पड़ सकता है। हालांकि उपलब्ध पर्यावरणीय दस्तावेजों में इसे संभावित प्रभाव के रूप में जांचने और नियंत्रित करने के उपाय भी शामिल किए गए हैं; इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि परियोजना से निश्चित रूप से समुद्री नुकसान होगा।

    सरकारी दस्तावेजों में भी brine के असर पर सवाल उठा

    25 मार्च 2026 की महाराष्ट्र तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक में परियोजना पर चर्चा के दौरान concentrated brine discharge और मछलियों पर संभावित असर से जुड़ा सवाल सामने आया था। परियोजना के सलाहकार पक्ष ने discharge location और उससे जुड़े नियंत्रण उपायों की जानकारी दी थी।

    इसके बाद परियोजना को CRZ मंजूरी मिली, लेकिन मंजूरी के साथ marine ecology की निगरानी और brine के दीर्घकालीन प्रभाव का अध्ययन करने की शर्तें भी रखी गईं। पर्यावरणीय असर पर शोध के लिए शुरुआती तौर पर 10 करोड़ रुपये का प्रावधान करने की शर्त सामने आई है। इसमें brine के पुन: उपयोग, बेहतर desalination technology और marine pollution कम करने के उपायों पर भी शोध शामिल है।

    मनोरी क्रीक और मैंग्रोव को लेकर क्या शर्तें हैं?

    परियोजना से जुड़े CRZ दस्तावेजों में साइट को CRZ-I(B), CRZ-III और CRZ-IV क्षेत्रों से संबंधित बताया गया है। मनोरी क्रीक में स्थानीय मछुआरों की गतिविधियों और पर्यावरणीय संवेदनशीलता को लेकर भी विशेष ध्यान दिया गया है।

    CRZ मंजूरी में मनोरी क्रीक में गतिविधियों पर प्रतिबंध, आसपास के मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा और समुद्र की सतह तथा समुद्री तल पर असर कम करने के उपाय शामिल किए गए हैं। पाइपलाइन बिछाने में tunnelling का इस्तेमाल करने की शर्त भी रखी गई है ताकि seabed disturbance कम किया जा सके।

    इसका मतलब यह है कि परियोजना को पर्यावरणीय मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन मंजूरी बिना शर्त नहीं है। Marine ecology, brine discharge, मैंग्रोव और समुद्री क्षेत्र की निगरानी से जुड़ी जिम्मेदारियां भी परियोजना का हिस्सा हैं।

    मछुआरों की आजीविका का सवाल कितना बड़ा है?

    मनोरी और आसपास के तटीय इलाकों में विवाद केवल समुद्र में मछली पकड़ने तक सीमित नहीं है। पर्यावरणीय आकलन से जुड़ी जानकारी के अनुसार परियोजना क्षेत्र की लगभग 70 प्रतिशत आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से fishing और उससे जुड़ी गतिविधियों पर निर्भर बताई गई है। मनोरी में करीब 200 motorised और 150 non-motorised boats तथा उत्तन में लगभग 400 fishing boats का उल्लेख किया गया है।

    मछली कारोबार से जुड़े रोजगार में मछली पकड़ने के अलावा fish-seed collection, sorting, झींगा छीलना, मछली सुखाना, बिक्री, जाल बनाना, नावों की मरम्मत और अन्य shore-based activities भी शामिल हैं। महिलाओं की भूमिका भी इस पूरी अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण बताई गई है।

    मछली पकड़ने का सामान्य मौसम 15 अगस्त से 31 मई तक बताया गया है। ऐसे में अक्टूबर में प्रस्तावित मोर्चा उस समय हो रहा है जब स्थानीय fishing season चल रहा होगा।

    BMC को इस परियोजना की जरूरत क्यों लगती है?

    मुंबई की बढ़ती जल जरूरत को देखते हुए BMC desalination को अतिरिक्त और climate-resilient water source के रूप में विकसित करना चाहता है। BMC के आधिकारिक दस्तावेजों में मनोरी परियोजना को शहर की जल आपूर्ति बढ़ाने के लिए प्रस्तावित किया गया है। 2041 के लिए मुंबई की projected water demand 6,424 MLD बताई गई है।

    इस परियोजना का उद्देश्य मौजूदा जल स्रोतों पर निर्भरता के साथ एक अतिरिक्त समुद्री जल स्रोत तैयार करना है। Phase-I में 200 MLD और आगे 400 MLD तक क्षमता बढ़ाने की योजना इसी दीर्घकालीन जरूरत से जुड़ी है।

    मनोरी से मुंबई तक पानी कैसे पहुंचेगा?

    Desalination plant से तैयार पानी को शहर के वितरण नेटवर्क तक पहुंचाने के लिए अलग underground conveyance system तैयार किया जा रहा है। मनोरी से चर्कोप और आगे महावीर नगर, कांदिवली तक लगभग 7.2 किलोमीटर का underground tunnel प्रस्तावित है।

    इस tunnel और संबंधित infrastructure के लिए लगभग 2,241.3 करोड़ रुपये का contract Afcons Infrastructure Ltd से जुड़ा है। परियोजना को पूरा करने की अवधि 45 महीने और commissioning का लक्ष्य दिसंबर 2029 बताया गया है।

    11,166 करोड़ रुपये का आंकड़ा सिर्फ plant की निर्माण लागत नहीं

    मनोरी परियोजना की लागत को लेकर अलग-अलग आंकड़ों के कारण भ्रम की स्थिति रही है। BMC से जुड़े दस्तावेजों और tender information के अनुसार 11,166 करोड़ रुपये का आंकड़ा केवल plant बनाने की लागत नहीं बल्कि लंबे समय के operation, maintenance, electricity और अन्य खर्चों को भी शामिल करता है। GVPR Engineers Limited को परियोजना के लिए चुना गया था।

    परियोजना की मूल construction cost करीब 4,077 करोड़ रुपये बताई गई है। इसके अलावा 20 साल के maintenance और electricity समेत अन्य lifecycle expenses जुड़े हैं। दूसरी ओर, 2,241.3 करोड़ रुपये का आंकड़ा अलग underground water-conveyance tunnel package से संबंधित है।

    परियोजना की शुरुआत से अब तक क्या हुआ?

    मनोरी desalination project को BMC के Standing Committee और Municipal Corporation से फरवरी 2021 में मंजूरी मिली थी। शुरुआत में 200 MLD plant को भविष्य में 400 MLD तक विस्तार योग्य बनाने की योजना रखी गई थी। शुरुआती tender प्रक्रिया में पर्याप्त प्रतिक्रिया नहीं मिलने के बाद BMC ने 28 मई 2025 को Design-Build-Operate आधार पर नया tender जारी किया।

    मार्च 2026 में पुराने baseline environmental data की validity समाप्त होने के बाद जनवरी-फरवरी 2026 में environmental baseline monitoring दोबारा की गई और updated EIA पेश किया गया।

    इसके बाद परियोजना को CRZ मंजूरी मिली। मंजूरी के साथ marine research, brine monitoring, मैंग्रोव सुरक्षा, मनोरी क्रीक की सुरक्षा, tunnelling और renewable-energy से जुड़ी शर्तें लागू की गईं।

    अब आगे क्या होगा?

    26 सितंबर की बैठक के बाद 19 अक्टूबर को जिला कलेक्टर कार्यालय तक प्रस्तावित मोर्चा इस विवाद का अगला बड़ा घटनाक्रम होगा। मछुआरा और तटीय समुदाय परियोजना को रद्द करने की मांग पर कायम हैं।

    दूसरी ओर, परियोजना को CRZ मंजूरी मिल चुकी है और BMC इसे मुंबई की दीर्घकालीन जल सुरक्षा के लिए विकसित कर रहा है। अब विवाद का महत्वपूर्ण हिस्सा यह रहेगा कि पर्यावरणीय मंजूरी में रखी गई marine monitoring, brine management, मैंग्रोव संरक्षण और मनोरी क्रीक से जुड़ी शर्तों को जमीन पर किस तरह लागू किया जाता है और स्थानीय मछुआरा समुदाय के साथ आगे कितनी प्रभावी बातचीत होती है।

    19 अक्टूबर का मोर्चा इसी टकराव का अगला चरण होगा—एक तरफ मुंबई की बढ़ती पानी की जरूरत और दूसरी तरफ मनोरी-गोरेई के समुद्र पर निर्भर समुदाय की पर्यावरण और आजीविका संबंधी चिंताएं।

  • आदिवासी छात्रों का 180 किमी मुंबई मार्च शुरू, 584 मौतों से लेकर स्कूल सुविधाओं तक उठे सवाल

    आदिवासी छात्रों का 180 किमी मुंबई मार्च शुरू, 584 मौतों से लेकर स्कूल सुविधाओं तक उठे सवाल

    महाराष्ट्र में आदिवासी छात्रों ने नाशिक से मुंबई तक 180 किमी मार्च शुरू किया। आश्रमशालाओं में 584 मौतें, सुरक्षा, भोजन और लंबित मांगें मुद्दा बनीं।

    मुंबई: नाशिक से मुंबई तक आदिवासी छात्रों का 180 किमी ‘Tribal Gen Z Ulgulan’ मार्च सोमवार, 28 सितंबर को शुरू हो गया। करीब 40 दिनों से नाशिक में चल रहे धरने के बाद सकल आदिवासी विद्यार्थी आंदोलन कृति समिति के नेतृत्व में छात्र और आदिवासी समुदाय के लोग मुंबई के राजभवन की ओर पैदल रवाना हुए हैं। आंदोलन का केंद्र सिर्फ स्कूलों की सुविधाएं नहीं, बल्कि आश्रमशालाओं में छात्रों की सुरक्षा, मौतों की जांच, भोजन व्यवस्था, छात्रावास सुविधाएं, लंबित आर्थिक सहायता और सरकारी आश्वासनों के क्रियान्वयन का सवाल बन चुका है।

    आयोजकों के अनुसार पहले दिन करीब 1,500 छात्र शामिल हो सकते हैं। यह मार्च नाशिक, खानदेश, उत्तर महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और विदर्भ सहित अलग-अलग क्षेत्रों से छात्रों और समर्थकों को जोड़ रहा है। मार्च का अंतिम पड़ाव मुंबई का राजभवन है और उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इसके 4 से 5 अक्टूबर के बीच मुंबई पहुंचने की संभावना है।

    आखिर छात्र 180 किमी पैदल मुंबई क्यों आ रहे हैं?

    छात्रों का कहना है कि नाशिक में लंबे धरने और सरकार के साथ बातचीत के बावजूद उनकी कई प्रमुख मांगों पर ठोस और लिखित कार्रवाई नहीं हुई है। उनकी मांगों में आदिवासी विकास मंत्री अशोक उईके का इस्तीफा, आदिवासी विकास विभाग के सचिव विजय वाघमारे और आयुक्त लीना बंसोडे के तबादले, आश्रमशालाओं और छात्रावासों में बुनियादी सुविधाओं में सुधार, विद्यार्थियों की मौतों की स्वतंत्र जांच तथा पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता शामिल है।

    25 सितंबर को आदिवासी विकास विभाग और छात्र प्रतिनिधियों के बीच बैठक भी हुई थी। सरकार ने 27 मांगों पर अपनी स्थिति बताते हुए सात पन्नों का पत्र जारी किया। कुछ मांगों पर काम शुरू होने की जानकारी दी गई, जबकि कई मामलों को नीतिगत निर्णय से जोड़कर अभी लंबित रखा गया है। छात्रों की मुख्य आपत्ति यह है कि उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि स्पष्ट लिखित प्रतिबद्धता और जमीन पर कार्रवाई चाहिए।

    दो साल में 584 आदिवासी छात्रों की मौत का आंकड़ा क्यों बना बड़ा मुद्दा?

    इस आंदोलन का सबसे गंभीर पहलू महाराष्ट्र की आश्रमशालाओं से जुड़ा 584 विद्यार्थियों की मौत का सरकारी आंकड़ा है। आदिवासी विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार 2024-25 और 2025-26 के दौरान सरकारी और सहायता प्राप्त आश्रमशालाओं में कुल 584 विद्यार्थियों की मौत दर्ज हुई। इनमें 384 मौतें सरकारी आश्रमशालाओं और 200 मौतें सहायता प्राप्त आश्रमशालाओं से जुड़ी थीं।

    इन मौतों के कारणों में गंभीर बीमारी, सिकल सेल, दुर्घटना, आत्महत्या और सर्पदंश शामिल बताए गए हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 273 मौतें गंभीर बीमारी, 228 दुर्घटना, 55 फांसी और 28 सर्पदंश से जुड़ी थीं। कुल मौतों में लगभग 88 प्रतिशत मौतें विद्यार्थियों के घर पर और करीब 11 प्रतिशत आश्रमशाला परिसर में हुईं। हालांकि 584 मौतों का सवाल सीधे स्कूल की लापरवाही से जुड़ा नहीं है। असल सवाल प्रत्येक मौत के कारण, इलाज, सुरक्षा व्यवस्था और संस्थागत जिम्मेदारी की जांच का है।

    इसी वजह से आंदोलनकारी स्वतंत्र और मामले-दर-मामले जांच की मांग कर रहे हैं। नाशिक के सांसद भास्कर भगरे ने भी 584 मौतों की अलग-अलग परिस्थितियों की जांच की मांग उठाई है, जिसमें इलाज, पोषण, पेयजल, स्वच्छता, आवास, कर्मचारियों की उपलब्धता और आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधाओं की जांच शामिल है।

    गढ़चिरौली की तीन छात्राओं की मौत ने बढ़ाए सवाल

    9 अगस्त को गढ़चिरौली के जपतलाई गांव स्थित सहायता प्राप्त आदिवासी आवासीय स्कूल के छात्रावास में सांप के काटने से तीन आदिवासी छात्राओं की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद राज्य सरकार ने संबंधित स्कूल का लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द करने की कार्रवाई की और पूरे राज्य की आश्रमशालाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे।

    मामला बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ तक भी पहुंचा। अदालत के रिकॉर्ड में छात्रावास में पर्याप्त शौचालय और स्नानघर, अलमारियों, भोजन कक्ष और सीसीटीवी जैसी व्यवस्थाओं से जुड़ी कमियों का उल्लेख है। एक निरीक्षण में 9 सीसीटीवी में से केवल 5 के काम करने की जानकारी भी सामने आई। अदालत ने पहले के निरीक्षण और बाद की जांच में सामने आई स्थितियों के अंतर को देखते हुए संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी विस्तृत जांच की जरूरत बताई।

    मामले में मारोतराव कोवसे, उनके बेटे विश्वजीत कोवसे और छात्रावास अधीक्षक भाग्यश्री चिल्लमवार से जुड़ी अग्रिम जमानत याचिकाएं भी हाईकोर्ट के सामने आईं और अदालत ने उन्हें खारिज किया। इस मामले की कानूनी जांच अभी महत्वपूर्ण चरण में है।

    584 मौतों की जांच के लिए बनी समिति, लेकिन सवाल रिपोर्ट पर

    आदिवासी विकास मंत्री अशोक उईके ने 584 विद्यार्थियों की मौत के कारणों की जांच के लिए विशेषज्ञ समिति बनाए जाने की जानकारी दी है। सरकार के अनुसार आश्रमशालाओं की जांच चल रही है और रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदारी तय करने तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

    अब छात्रों की मांग यह है कि जांच केवल विभागीय प्रक्रिया तक सीमित न रहे और मौतों की स्वतंत्र तथा पारदर्शी जांच हो। दूसरी ओर सरकार की ओर से विशेषज्ञ समिति और आश्रमशालाओं के निरीक्षण की प्रक्रिया चलने की बात कही गई है। इस पूरे मामले में अगला महत्वपूर्ण कदम समिति की रिपोर्ट और उसके आधार पर होने वाली कार्रवाई होगी।

    511 सहायता प्राप्त आश्रमशालाओं के ऑडिट पर भी नजर

    गढ़चिरौली की घटना के बाद राज्य सरकार ने लगभग 511 सहायता प्राप्त आश्रमशालाओं का तीसरे पक्ष से सुरक्षा ऑडिट कराने की प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य स्कूलों में सुरक्षा, आधारभूत ढांचे और बच्चों के रहने की परिस्थितियों की जांच करना था।

    अब सवाल यह है कि 28 सितंबर तक कितनी आश्रमशालाओं का ऑडिट पूरा हुआ, कितनी जगह कमियां मिलीं और कितने संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई हुई। यह जानकारी सामने आना आंदोलन की सबसे महत्वपूर्ण मांगों में से एक पर सरकार की वास्तविक प्रगति स्पष्ट कर सकता है।

    केंद्रीय रसोई व्यवस्था पर भी बड़ा विवाद

    आंदोलनकारी आश्रमशालाओं के लिए केंद्रीय रसोई से खाना भेजने की व्यवस्था खत्म करने की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि खाना पहले तैयार होने और लंबी दूरी तक ले जाए जाने के कारण उसकी गुणवत्ता प्रभावित होती है। कच्चे माल की लेबलिंग, एक्सपायरी और गुणवत्ता जांच को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

    सरकार ने कहा है कि केंद्रीय रसोई से लगभग 50 किलोमीटर के दायरे में भोजन पहुंचाया जाता है और इस व्यवस्था की समीक्षा के लिए समिति बनाई गई है। इसी बीच स्कूलों, छात्रावासों, आश्रमशालाओं, केंद्रीय रसोई और भोजन आपूर्तिकर्ताओं की जांच के लिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन की विशेष निरीक्षण मुहिम भी शुरू की गई है। इसमें भोजन के नमूने, एफएसएसएआई पंजीकरण, प्रशिक्षित कर्मचारियों और खाद्य सुरक्षा मानकों की जांच शामिल है।

    सरकारी छात्रावास मुफ्त, फिर फीस वसूली का आरोप क्यों?

    आदिवासी विकास विभाग की आधिकारिक जानकारी के अनुसार पात्र अनुसूचित जनजाति विद्यार्थियों के लिए सरकारी छात्रावास में रहने, भोजन और शैक्षणिक सामग्री जैसी सुविधाएं मुफ्त उपलब्ध कराने का प्रावधान है।

    इसके बावजूद आंदोलन से जुड़े लोगों ने कुछ संस्थानों में प्रवेश, दान और अन्य शुल्क के नाम पर बड़ी रकम वसूले जाने का आरोप लगाया है। कुछ मामलों में यह रकम एक लाख रुपये तक होने का दावा किया गया है। छात्रों ने ऐसी कथित वसूली की जांच और कार्रवाई की मांग की है।

    इस आरोप की वास्तविक स्थिति तय करने के लिए संबंधित संस्थानों के शुल्क रिकॉर्ड और विभागीय जांच का सामने आना जरूरी होगा।

    Swayam योजना का पैसा भी आंदोलन का मुद्दा

    आंदोलन में पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्वयम् योजना के लंबित प्रत्यक्ष लाभ अंतरण की राशि जारी करने और सहायता बढ़ाने की मांग भी शामिल है।

    स्वयम् योजना उन अनुसूचित जनजाति विद्यार्थियों के लिए है जिन्हें सरकारी छात्रावास में प्रवेश नहीं मिल पाता और जो उच्च शिक्षा के लिए आगे बढ़ते हैं। योजना के तहत भोजन, आवास, निर्वाह और शैक्षणिक सामग्री जैसी जरूरतों के लिए आर्थिक सहायता का प्रावधान है। छात्रों का कहना है कि लंबित भुगतान और सहायता की अपर्याप्त राशि के कारण उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।

    अगस्त में छात्रावास के नियम बदले, फिर भी आंदोलन क्यों जारी?

    अगस्त में छात्रावास प्रवेश और नियमों को लेकर छात्रों का विरोध तेज हुआ था। 30 वर्ष की आयु सीमा सहित नए प्रावधानों को लेकर विवाद के बाद सरकार ने 14 अगस्त के संबंधित शासन निर्णय और संशोधित नियम वापस लेने तथा आयु सीमा हटाने की घोषणा की थी।

    लेकिन इसके बाद आंदोलन खत्म नहीं हुआ। इसका कारण यह है कि छात्रों की मौजूदा मांगें केवल छात्रावास की आयु सीमा तक सीमित नहीं हैं। अब मुद्दा आश्रमशालाओं की सुरक्षा, 584 मौतों की जांच, भोजन, छात्रावास, स्वास्थ्य सुविधा, आर्थिक सहायता और अधिकारियों की जवाबदेही तक फैल चुका है।

    नाशिक से मुंबई तक आगे क्या?

    मार्च के दौरान छात्र दिन में पैदल चलने और रात में खुले स्थानों पर रुकने की योजना के साथ आगे बढ़ रहे हैं। प्रस्तावित मार्ग नाशिक से इगतपुरी, कसारा, शाहपुर और ठाणे क्षेत्र होते हुए मुंबई तक जाने का है। आयोजकों का लक्ष्य राजभवन पहुंचकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से सीधे मुलाकात करना है।

    आंदोलन से जुड़े राहुल पावरा सहित नेताओं का कहना है कि अलग-अलग क्षेत्रों से छात्रों और आदिवासी समुदाय के लोगों की भागीदारी बढ़ रही है। पहले हुए संवादों में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, मंत्री अशोक उईके और नाशिक के तत्कालीन जिलाधिकारी आयुष प्रसाद से बातचीत का भी उल्लेख किया गया था। छात्रों की मांग है कि सरकार उनके मुद्दों पर लिखित और स्पष्ट निर्णय दे।

    इससे पहले 3 सितंबर को कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत डिपके ने प्रदर्शनकारियों से मुलाकात कर भूख हड़ताल समाप्त कर आंदोलन मुंबई ले जाने का आग्रह किया था। अब आंदोलन नाशिक से निकलकर सीधे राज्य की राजधानी की ओर बढ़ गया है।

    सबसे बड़ा सवाल अब यह है कि 180 किलोमीटर की इस पैदल यात्रा के मुंबई पहुंचने से पहले सरकार छात्रों के साथ कोई ठोस लिखित समझौता करती है या आंदोलन राजभवन तक पहुंचता है। 25 सितंबर के सात पन्नों के सरकारी जवाब के बाद अब छात्रों की नजर केवल घोषणाओं पर नहीं, बल्कि मांगों के वास्तविक क्रियान्वयन पर है।

  • Mumbai Police ने CJP के 2 अक्टूबर Shivaji Park Protest को रोका, Dipke का Jail Bharo ऐलान

    Mumbai Police ने CJP के 2 अक्टूबर Shivaji Park Protest को रोका, Dipke का Jail Bharo ऐलान

    Mumbai Police ने CJP के 2 अक्टूबर Shivaji Park प्रदर्शन को अनुमति नहीं दी। Dipke ने Jail Bharo की चेतावनी दी, Azad Maidan पर नजर।

    मुंबई: 2 अक्टूबर को प्रस्तावित Cockroach Janta Party (CJP) के प्रदर्शन को लेकर विवाद बढ़ गया है। Mumbai Police ने Shivaji Park में प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। इसके बाद CJP के संस्थापक Abhijeet Dipke ने कहा है कि अगर प्रदर्शन के अधिकार से वंचित किया गया तो 2 अक्टूबर, गांधी जयंती के दिन मुंबई में Jail Bharo Andolan शुरू किया जाएगा। हालांकि, प्रदर्शन रद्द होने की घोषणा नहीं हुई है और वैकल्पिक स्थल पर कार्यक्रम आयोजित करने की कोशिश जारी है।

    CJP ने 2 अक्टूबर को मुंबई से अपने राष्ट्रव्यापी आंदोलन की शुरुआत करने की घोषणा की थी। संगठन की मुख्य मांग Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar के इस्तीफे से जुड़ी है। CJP इसके साथ Special Intensive Revision (SIR) को रोकने, जनवरी 2025 की मतदाता सूची बहाल करने और Election Commissioners की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून में बदलाव की भी मांग कर रहा है।

    Shivaji Park में अनुमति क्यों नहीं मिली?

    26 सितंबर को CJP National Organisation Head Ajinkya Shinde की ओर से 2 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे से रात 9 बजे तक Shivaji Park में प्रदर्शन के लिए आवेदन दिया गया था। Mumbai Police ने इसे अनुमति देने से इनकार करते हुए Bombay High Court के PIL No. 116/2009 में 4 जनवरी 2013 के फैसले और Maharashtra Government के 20 जनवरी 2016 के आदेश का हवाला दिया है।

    Shivaji Park में गैर-खेल गतिविधियों के आयोजन को लेकर पहले से लागू कानूनी और प्रशासनिक व्यवस्था के अलावा Police ने इलाके के silence zone होने, ध्वनि प्रदूषण की आशंका और बड़े जमावड़े से traffic व्यवस्था प्रभावित होने की संभावना का उल्लेख किया है। आसपास के अस्पतालों और अन्य संस्थानों तक पहुंच प्रभावित होने की चिंता भी जताई गई है। Police communication में BMC से संबंधित आवश्यक अनुमति का मुद्दा भी सामने आया है।

    क्या 2 अक्टूबर का CJP प्रदर्शन रद्द हो गया?

    नहीं। Shivaji Park की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद CJP ने 2 अक्टूबर के आंदोलन को वापस लेने की घोषणा नहीं की है। Police ने संगठन को मुंबई में किसी वैकल्पिक स्थान की पहचान कर नई अनुमति के लिए आवेदन करने को कहा है।

    Azad Maidan को संभावित वैकल्पिक स्थल के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार वहां प्रदर्शन की अंतिम अनुमति की पुष्टि अभी नहीं हुई है, जबकि venue को लेकर प्रक्रिया जारी है।

    अनुमति नहीं मिली तो Jail Bharo की चेतावनी

    Shivaji Park में अनुमति से इनकार के बाद Abhijeet Dipke ने Mumbai Police के फैसले पर सवाल उठाया। उनका कहना है कि प्रदर्शन का अधिकार लगातार रोका गया तो CJP गांधी जयंती पर मुंबई में Jail Bharo Andolan शुरू करेगा।

    इस घटनाक्रम के बीच CJP के 2 अक्टूबर के कार्यक्रम को राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर समर्थन भी मिला है। Aaditya Thackeray ने आंदोलन का समर्थन किया है। Shiv Sena (UBT) की ओर से भी 2 अक्टूबर के CJP कार्यक्रम में समर्थन और भागीदारी की बात सामने आई है। Sonam Wangchuk ने भी CJP के आंदोलन के उद्देश्य का समर्थन किया है, हालांकि उनके कार्यक्रम स्थल पर स्वयं मौजूद रहने की पुष्टि नहीं है।

    Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग क्यों?

    CJP का आंदोलन Election Commission और SIR को लेकर चल रहे विवाद के बीच हो रहा है। संगठन Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar के इस्तीफे के साथ उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है।

    CJP का आरोप है कि SIR प्रक्रिया और चुनावी व्यवस्था से जुड़े फैसलों ने मतदाताओं के अधिकारों पर सवाल खड़े किए हैं। संगठन जनवरी 2025 की मतदाता सूची बहाल करने और Election Commissioners की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून में बदलाव की मांग भी कर रहा है।

    इस विवाद की पृष्ठभूमि में Election Commission के भीतर SIR से जुड़े फैसलों पर मतभेद को लेकर भी रिपोर्ट सामने आई हैं। एक जांच में Sukhbir Singh Sandhu और Vivek Joshi की ओर से पिछले 10 महीनों में कम-से-कम 14 बार कुछ फैसलों और आदेशों पर आपत्तियां दर्ज किए जाने की बात सामने आई थी। दूसरी ओर Election Commission ने 26 सितंबर को आंतरिक मतभेद की व्याख्या को खारिज करते हुए कहा कि SIR से जुड़े प्रमुख फैसले तीनों Election Commissioners की unanimous approval से लिए गए थे।

    SIR को लेकर क्या है विवाद?

    Special Intensive Revision यानी SIR के दौरान विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की draft electoral rolls में बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की draft lists में 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने की बात सामने आई है। इन आंकड़ों को लेकर CJP और विपक्षी दल सवाल उठा रहे हैं, जबकि Election Commission प्रक्रिया को कानूनी और निर्धारित नियमों के अनुसार बता रहा है।

    इस मामले में यह भी महत्वपूर्ण है कि मतदाता सूची से नाम हटना अपने-आप में यह साबित नहीं करता कि सभी हटाए गए लोग वैध मतदाता थे। SIR प्रक्रिया में मृत, स्थानांतरित, दोहराए गए या अन्य कारणों से अयोग्य नामों की पहचान और दावों-आपत्तियों की प्रक्रिया भी शामिल है।

    Supreme Court में भी SIR पर सुनवाई

    SIR से जुड़े विवाद का कानूनी पहलू भी सामने आया है। Supreme Court ने Delhi में SIR के दौरान जारी किए गए “logical discrepancy” notices को लेकर Election Commission से स्पष्टीकरण मांगा है। Court के सामने यह सवाल भी आया कि ऐसे notices किस आधार पर जारी किए गए और उनकी प्रक्रिया किस तरह अपनाई गई।

    SIR को लेकर विवाद केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है। चुनावी प्रक्रिया से जुड़े कुछ पहलुओं की न्यायिक जांच भी चल रही है। हालांकि Supreme Court की इन कार्यवाहियों को Gyanesh Kumar के खिलाफ किसी अंतिम न्यायिक निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता।

    Maharashtra के मतदाताओं के लिए भी महत्वपूर्ण तारीख

    Maharashtra में SIR से जुड़े claims और objections दाखिल करने की अंतिम तारीख 12 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाई गई है। इन claims और objections के निपटारे की समयसीमा 10 नवंबर 2026 तक रखी गई है। यह जानकारी उन मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण है जिन्हें अपनी electoral roll entry को लेकर कोई आपत्ति या दावा दर्ज करना है।

    Mumbai में 28 सितंबर से 4 अक्टूबर तक बढ़ेगी राजनीतिक हलचल

    CJP का 2 अक्टूबर का कार्यक्रम मुंबई में अकेला विरोध प्रदर्शन नहीं है। Maharashtra Congress ने 28 सितंबर को राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है। इसके बाद 2 अक्टूबर को CJP का प्रस्तावित आंदोलन है। 4 अक्टूबर को Raj Thackeray और Uddhav Thackeray की ओर से भी Election Commission और SIR के मुद्दे पर मुंबई में अलग march प्रस्तावित है।

    इस बीच 27 सितंबर को Assam के Guwahati में CJP के co-convener Ashutosh Ranka सहित संगठन के कई कार्यकर्ताओं को Police द्वारा हिरासत में लिए जाने की खबर भी सामने आई। CJP ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।

    अब मुंबई में सबसे बड़ा सवाल यह है कि 2 अक्टूबर को CJP का प्रदर्शन किस स्थान पर होगा और क्या Police वैकल्पिक venue के लिए अनुमति देगी। फिलहाल Shivaji Park में अनुमति नहीं है, CJP ने आंदोलन जारी रखने की बात कही है और Abhijeet Dipke ने अनुमति नहीं मिलने की स्थिति में Jail Bharo Andolan की चेतावनी दी है। आगामी दिनों में alternative venue और प्रशासनिक अनुमति पर होने वाला फैसला 2 अक्टूबर के कार्यक्रम की तस्वीर साफ करेगा।

  • राम मंदिर स्टेशन के पास सार्वजनिक शौचालय में दो युवकों की मौत, इलेक्ट्रोप्लेटिंग यूनिट के fumes पर जांच

    राम मंदिर स्टेशन के पास सार्वजनिक शौचालय में दो युवकों की मौत, इलेक्ट्रोप्लेटिंग यूनिट के fumes पर जांच

    मुंबई के राम मंदिर पूर्व में सार्वजनिक शौचालय में दो युवकों की मौत से हड़कंप मच गया। पड़ोसी इलेक्ट्रोप्लेटिंग यूनिट से chemical fumes आने की आशंका की जांच जारी है।

    मुंबई: गोरेगांव पूर्व में राम मंदिर रेलवे स्टेशन के पास शिवशंकर नगर इलाके में रविवार तड़के एक सार्वजनिक शौचालय के अंदर दो युवकों की मौत के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। दोनों युवक शौचालय के अंदर बेहोशी की हालत में मिले। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि पास में चल रही इलेक्ट्रोप्लेटिंग यूनिट से निकले chemical fumes शौचालय तक पहुंचे थे या नहीं। फिलहाल मौत का अंतिम कारण पोस्टमार्टम और जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

    मृतकों की पहचान 18 वर्षीय भाविन देसाई और 24 वर्षीय प्रभाकर धनिवार के रूप में की गई है। दोनों स्थानीय गणपति मंडल से जुड़े थे। शनिवार रात वे मंडल के छह अन्य सदस्यों के साथ खाना खाने गए थे और इसके बाद कुछ समय तक साथ बैठे रहे।

    करीब 2:30 बजे शौचालय गए थे दोनों युवक

    जानकारी के अनुसार रात करीब 2:30 बजे भाविन देसाई और प्रभाकर धनिवार सार्वजनिक शौचालय गए। काफी समय बीतने के बाद जब दोनों वापस नहीं लौटे तो उनके साथ मौजूद युवकों को चिंता हुई। वे शौचालय के अंदर पहुंचे तो दोनों को बेहोशी की हालत में पाया।

    साथियों ने दोनों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार दोनों को जोगेश्वरी पूर्व के ट्रॉमा केयर अस्पताल ले जाया गया था और करीब 3:45 से 3:49 बजे के बीच उनकी मौत की पुष्टि हुई।

    शौचालय से तेज chemical smell आने की बात

    घटना के बाद स्थानीय लोगों ने शौचालय से तेज chemical smell आने की जानकारी दी। इसी के बाद आशंका जताई गई कि अंदर किसी chemical substance या fumes का प्रभाव हो सकता है।

    हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि शौचालय के अंदर मौजूद chemical कौन-सा था, उसकी concentration कितनी थी या वह वहां तक किस रास्ते से पहुंचा। अधिकारियों की जांच का एक अहम हिस्सा इसी source की पहचान करना है।

    पास की इलेक्ट्रोप्लेटिंग यूनिट पर क्यों पहुंची जांच?

    पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि सार्वजनिक शौचालय के ठीक पास चल रही एक छोटी इलेक्ट्रोप्लेटिंग यूनिट में चल रही प्रक्रिया से chemical fumes निकले थे या नहीं।

    वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक अब्दुल शेख के अनुसार, यूनिट में electroplating process चल रहा था और यह जांच की जा रही है कि वहां से निकले fumes सार्वजनिक शौचालय तक पहुंचे थे या नहीं। यूनिट का मालिक घटना के समय मौके पर मौजूद नहीं था और पुलिस उसकी तलाश कर रही थी।

    पुलिस ने जांच का हवाला देते हुए दोनों मौतों के लिए यूनिट या उसके मालिक को जिम्मेदार नहीं ठहराया है। पुलिस की जांच यह निर्धारित करेगी कि fumes और मौतों के बीच वास्तव में कोई सीधा संबंध था या नहीं।

    कौन-सा chemical था, अभी सबसे बड़ा सवाल

    इस घटना में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि आखिर शौचालय के अंदर कौन-सा chemical या gas मौजूद था।

    पुलिस ने बताया कि किसी specific chemical या gas का नाम सामने नहीं आया है। न ही यह सार्वजनिक रूप से स्पष्ट हुआ है कि शौचालय के अंदर की हवा में किस पदार्थ की मौजूदगी पाई गई या उसकी कितनी मात्रा थी।

    BMC, Fire Brigade और MPCB की टीमें मौके पर पहुंचीं

    घटना की जानकारी मिलने के बाद मुंबई फायर ब्रिगेड, मुंबई पुलिस, 108 एंबुलेंस सेवा, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल यानी MPCB और BMC के वार्ड कर्मचारियों की टीमें मौके पर पहुंचीं।

    जांच में सार्वजनिक शौचालय के भीतर की स्थिति के साथ-साथ आसपास के क्षेत्र और संभावित chemical source की भी पड़ताल की जा रही है।

    अब यह भी महत्वपूर्ण होगा कि मौके पर की गई जांच में क्या पाया गया, क्या किसी chemical या gas का sample लिया गया और उसकी laboratory testing से क्या सामने आता है।

    सार्वजनिक शौचालय की ventilation पर भी उठेंगे सवाल

    घटना के बाद सिर्फ आसपास की industrial activity ही जांच का विषय नहीं है। यह भी देखा जाना जरूरी है कि सार्वजनिक शौचालय की ventilation व्यवस्था कैसी थी और वहां हवा के आने-जाने की पर्याप्त व्यवस्था थी या नहीं।

    अगर बाहरी fumes किसी तरह अंदर पहुंचे थे, तो यह पता लगाना भी जरूरी होगा कि शौचालय की संरचना, ventilation, drainage या किसी अन्य रास्ते ने fumes के जमा होने में कोई भूमिका निभाई थी या नहीं।

    यही वजह है कि घटना की पूरी जांच में केवल संभावित chemical source ही नहीं, बल्कि public toilet की physical condition और maintenance व्यवस्था को भी देखा जाना महत्वपूर्ण होगा।

    पुलिस ने accidental death report दर्ज की

    Vanrai Police ने मामले में accidental death report दर्ज की है। पुलिस के सामने फिलहाल सबसे बड़ा काम दोनों मौतों के वास्तविक कारण और chemical exposure की संभावित भूमिका को स्थापित करना है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और आगे की जांच से स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

    पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इलेक्ट्रोप्लेटिंग यूनिट से निकलने वाले fumes वास्तव में शौचालय तक पहुंचे थे या नहीं और अगर पहुंचे थे तो उनका दोनों युवकों पर क्या प्रभाव पड़ा।

    अब जांच के नतीजों पर टिकी नजर

    राम मंदिर पूर्व की इस घटना में फिलहाल दो मौतें हो चुकी हैं, लेकिन chemical source और मौत के बीच संबंध अभी जांच का विषय है। किस substance के कारण खतरा पैदा हुआ, वह कहां से आया, शौचालय तक कैसे पहुंचा और क्या किसी नियम या सुरक्षा व्यवस्था का उल्लंघन हुआ था—इन सवालों के जवाब जांच के अगले चरण में सामने आने की उम्मीद है।

    फिलहाल पुलिस, BMC, Fire Brigade और MPCB की जांच के साथ पोस्टमार्टम निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे। इन्हीं से यह स्पष्ट होगा कि शिवशंकर नगर के सार्वजनिक शौचालय में दोनों युवकों की मौत के पीछे वास्तविक कारण क्या था।

  • Bigg Boss Fame Divya Shinde पर डॉक्टर से 5 लाख मांगने और मारपीट का आरोप, केस दर्ज

    Bigg Boss Fame Divya Shinde पर डॉक्टर से 5 लाख मांगने और मारपीट का आरोप, केस दर्ज

    Bigg Boss Fame दिव्या शिंदे समेत कई लोगों पर पुणे में 65 वर्षीय डॉक्टर से 5 लाख रुपये मांगने और घर में घुसकर मारपीट का आरोप, पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की।

    पुणे: Bigg Boss मराठी फेम और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर दिव्या शिंदे समेत 8 से 10 लोगों के खिलाफ 65 वर्षीय सेवानिवृत्त डॉक्टर विद्याधर गायकवाड़ के घर में घुसकर मारपीट करने और 5 लाख रुपये मांगने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। काळेपडळ पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने घटनास्थल की सीसीटीवी फुटेज भी हासिल की है।

    यह मामला सिर्फ 24 सितंबर की रात हुए कथित हमले तक सीमित नहीं है। शिकायत के अनुसार, अगस्त से शुरू हुआ 5 लाख रुपये का विवाद 17 सितंबर को डॉक्टर के घर तक पहुंचा, 23 सितंबर को कथित धमकी दी गई और इसके अगले दिन डॉक्टर के घर में घुसकर मारपीट का आरोप लगाया गया।

    5 लाख रुपये की मांग को लेकर कैसे शुरू हुआ विवाद?

    डॉ. विद्याधर गायकवाड़ वर्ष 2021 में पुणे कैंटोनमेंट अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी पद से सेवानिवृत्त हुए थे। वह करुणादीप फाउंडेशन के सदस्य हैं। इसी संस्था की ओर से 1 से 3 सितंबर तक बालगंधर्व रंगमंदिर में ‘कला आविष्कार महोत्सव’ आयोजित किया गया था।

    शिकायत में आरोप है कि दिव्या शिंदे को इस कार्यक्रम के लिए संस्था या डॉ. गायकवाड़ की ओर से कोई आधिकारिक निमंत्रण नहीं दिया गया था। इसके बावजूद कार्यक्रम में शामिल होने और उसकी प्रसिद्धि में योगदान देने का दावा करते हुए अगस्त से 5 लाख रुपये की मांग किए जाने का आरोप है।

    इस विवाद में करीब 50 हजार रुपये गूगल पे के जरिए दिए जाने की बात भी सामने आई है। इसके बाद भी कथित तौर पर पूरी रकम की मांग जारी रही।

    17 सितंबर को डॉक्टर के घर पहुंचने का आरोप

    शिकायत के मुताबिक, 17 सितंबर को दिव्या शिंदे, अन्ना ढमढेरे और कुछ अन्य लोग डॉ. गायकवाड़ के मोहम्मदवाड़ी स्थित घर पहुंचे। उस समय डॉक्टर घर पर मौजूद नहीं थे। आरोप है कि उनके परिवार के सदस्यों से कथित तौर पर 5 लाख रुपये की मांग की गई और दबाव बनाया गया।

    डॉ. गायकवाड़ ने पुलिस शिकायत में कहा है कि कार्यक्रम संस्था ने आयोजित किया था और वह केवल उसके सदस्य थे। उनके अनुसार कार्यक्रम के वित्तीय लेन-देन की जिम्मेदारी उनके पास नहीं थी।

    23 सितंबर को होटल में बुलाकर धमकी का आरोप

    शिकायत के अनुसार, 23 सितंबर को अन्ना ढमढेरे ने डॉ. गायकवाड़ को फोन कर एक होटल में बुलाया। वहां कथित तौर पर फिर 5 लाख रुपये की मांग की गई।

    आरोप है कि रकम नहीं देने पर दो दिन के भीतर घर पर लोगों को भेजकर मारपीट करने की धमकी दी गई। इसके अगले ही दिन 24 सितंबर की रात डॉक्टर के घर पर हमला होने का आरोप है।

    24 सितंबर की रात घर में घुसकर मारपीट का आरोप

    शिकायत के मुताबिक, 24 सितंबर की रात करीब साढ़े आठ बजे डॉ. गायकवाड़ घर पर अकेले थे। आरोप है कि अन्ना ढमढेरे पहले वहां पहुंचे और दरवाजा खुलने के बाद दिव्या शिंदे समेत 8 से 10 लोग घर में दाखिल हुए।

    शिकायत में डॉक्टर के चेहरे, पेट और पीठ पर लात-घूंसों से मारपीट करने का आरोप लगाया गया है। इसके अलावा लकड़ी के डंडे, बेल्ट और लोहे के बर्तन से हमला करने तथा धारदार हथियार से सिर पर वार किए जाने की बात भी कही गई है। घर में सामान तोड़ने और डॉक्टर के परिवार को धमकाने का आरोप भी शिकायत में शामिल है।

    पुलिस के मुताबिक, डॉ. गायकवाड़ को गंभीर चोटों के बाद ससून जनरल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार चल रहा है।

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    बेटे और पत्नी को भी धमकी देने का आरोप

    शिकायत में आरोप है कि हमलावरों ने डॉक्टर के बेटे को भी धमकी दी। परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी दिए जाने की बात भी सामने आई है।

    आरोपियों पर घर में तोड़फोड़ करने और 5 लाख रुपये नहीं देने पर डॉक्टर की कार लेकर जाने का आरोप है। कार की बरामदगी को लेकर पुलिस जांच की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं हुई है।

    दिव्या शिंदे और अन्य पर कौन-कौन से आरोप?

    काळेपडळ पुलिस ने दिव्या शिंदे, अन्ना ढमढेरे समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इनमें हत्या के प्रयास, चोट पहुंचाने, आपराधिक धमकी, जबरन वसूली और घर में घुसकर हिंसा से जुड़े प्रावधान शामिल हैं।

    मामले की जांच सहायक पुलिस निरीक्षक अमित शेटे कर रहे हैं। पुलिस ने उस इमारत की सीसीटीवी फुटेज हासिल कर ली है, जहां कथित हमला हुआ था। अब जांच में फुटेज, डॉक्टर की मेडिकल रिपोर्ट और शिकायत में लगाए गए अन्य आरोपों की पुष्टि महत्वपूर्ण होगी।

    कौन हैं दिव्या शिंदे?

    दिव्या शिंदे ‘बिग बॉस मराठी सीजन 6’ में नजर आई थीं। सोशल मीडिया पर उन्हें ‘सरकार’ नाम से भी जाना जाता है और उनकी एक मिलियन से अधिक सोशल मीडिया फॉलोइंग होने की जानकारी सामने आई है। फरवरी 2026 में बिग बॉस मराठी से उन्हें बाहर किया गया था। उस समय भी साथी प्रतियोगियों को कथित धमकी देने से जुड़ा विवाद सामने आया था।

    अब पुलिस जांच में क्या महत्वपूर्ण होगा?

    फिलहाल मामले में सबसे अहम सवाल सीसीटीवी फुटेज, डॉक्टर की मेडिकल रिपोर्ट, कथित 50 हजार रुपये के भुगतान, फोन और संदेशों के रिकॉर्ड तथा डॉक्टर की कार से जुड़े घटनाक्रम की जांच है।

    साथ ही दिव्या शिंदे, अन्ना ढमढेरे और अन्य आरोपियों की भूमिका भी जांच का हिस्सा होगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है; आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच के बाद ही होगी।