कूपर अस्पताल का ब्लड बैंक 2 दिन बंद, FDA को मिलीं ये गंभीर खामियां

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मुंबई के कूपर अस्पताल का ब्लड बैंक 5 और 6 नवंबर को बंद रहा। FDA की जांच में स्टाफ, रक्तदाता रिकॉर्ड और मशीनों से जुड़ी कमियां मिलीं। मरीजों के लिए जोगेश्वरी में वैकल्पिक व्यवस्था की गई।

मुंबई: जुहू स्थित डॉ. आर.एन. कूपर अस्पताल का ब्लड सेंटर 5 और 6 नवंबर को बंद रहा। महाराष्ट्र FDA की कार्रवाई के बाद मरीजों को रक्त और उसके जरूरी घटकों के लिए जोगेश्वरी स्थित HBT Trauma Care Hospital पर निर्भर रहना पड़ा। जांच में रक्तदाताओं के अधूरे रिकॉर्ड, जरूरी कर्मचारियों की कमी और उपकरणों के रखरखाव से जुड़ी कई खामियां सामने आई थीं।

यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब महाराष्ट्र में ब्लड बैंकों और ब्लड स्टोरेज सेंटरों की जांच तेज की गई है। अप्रैल से अक्टूबर 2026 के बीच राज्य में 40 ब्लड बैंक और 37 ब्लड स्टोरेज सेंटरों के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं।

कूपर अस्पताल के ब्लड सेंटर में क्या कमियां मिलीं?

महाराष्ट्र FDA ने 4 अगस्त 2026 को कूपर अस्पताल के ब्लड सेंटर का निरीक्षण किया था। जांच में ब्लड सेंटर के संचालन और रिकॉर्ड प्रबंधन से संबंधित कई कमियां सामने आईं।

जांच के दौरान स्वीकृत रजिस्टर्ड नर्स और मेडिकल सोशल वर्कर उपलब्ध नहीं थे। इसके अलावा कई रक्तदाताओं के चयन फॉर्म अधूरे पाए गए। कुछ फॉर्म में रक्तदाताओं के पूरे नाम और पते दर्ज नहीं थे।

ब्लड सेंटर में रक्त की जांच के लिए इस्तेमाल होने वाले ELISA Reader और ELISA Washer की लॉगबुक भी अपडेट नहीं थी। ब्लड कंपोनेंट अलग करने के लिए इस्तेमाल होने वाले सेंट्रीफ्यूज के रखरखाव का रिकॉर्ड भी अधूरा मिला।

इसके अलावा अगस्त में आयोजित रक्तदान शिविर का विवरण मास्टर रजिस्टर में दर्ज नहीं था। जांच के समय Apheresis मशीन भी काम नहीं कर रही थी।

Apheresis मशीन का इस्तेमाल रक्तदाता के रक्त से प्लेटलेट्स या प्लाज्मा जैसे जरूरी घटक अलग करने के लिए किया जाता है। कूपर अस्पताल के ब्लड सेंटर को Single Donor Platelets और Single Donor Plasma तैयार करने की अनुमति थी। मशीन बंद होने के कारण इन प्रक्रियाओं की उपलब्धता प्रभावित हो रही थी।

दो दिन तक मरीजों को कहां मिलेगा रक्त?

कूपर अस्पताल का ब्लड सेंटर Samarprit Bahuuddeshiya Sevabhavi Vikas Sanstha द्वारा संचालित किया जाता है। FDA के निलंबन आदेश के बाद केंद्र ने अस्पताल के डीन को सूचना दी थी कि 5 नवंबर की मध्यरात्रि से सभी सेवाएं बंद रहेंगी और 7 नवंबर की मध्यरात्रि से दोबारा शुरू करने का कार्यक्रम निर्धारित है।

इस दौरान अस्पताल में भर्ती मरीजों को रक्त और उसके घटकों की जरूरत पड़ने पर HBT Trauma Care Hospital, जोगेश्वरी के ब्लड सेंटर से संपर्क करने की व्यवस्था की गई।

कूपर अस्पताल मुंबई के पश्चिमी उपनगरों का एक प्रमुख सरकारी अस्पताल है। यहां लगभग 697 बेड हैं और वर्ष 2025 के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार हर साल 7.5 लाख से अधिक मरीज ओपीडी में इलाज के लिए पहुंचते हैं। प्रतिदिन औसतन 2,000 से ज्यादा मरीज अस्पताल की सेवाएं लेते हैं।

अस्पताल की नियमित जरूरत लगभग 10 यूनिट रक्त बताई गई है। ऐसे में वैकल्पिक ब्लड सेंटर से आपूर्ति की व्यवस्था मरीजों के इलाज और इमरजेंसी सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण थी।

अपील के बाद निलंबन की अवधि में हुई कटौती

कूपर अस्पताल के ब्लड सेंटर पर FDA ने शुरुआत में पांच दिन के निलंबन का आदेश दिया था। बाद में अपील के बाद इस अवधि में तीन दिन की कटौती की गई। इसके बाद 5 और 6 नवंबर को सेवाएं बंद रखने का निर्णय लागू हुआ।

FDA अधिकारियों के अनुसार, अस्पताल को कार्रवाई से लगभग 90 दिन पहले नोटिस दिया गया था। यानी ब्लड सेंटर को अपनी कमियां सुधारने का अवसर भी दिया गया था।

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FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे ने रक्तदाताओं के रिकॉर्ड और दस्तावेजों को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा है कि इनके माध्यम से रक्त के स्रोत और उसकी गुणवत्ता का पता लगाने में मदद मिलती है।

घाटकोपर के दो अन्य ब्लड सेंटरों पर भी कार्रवाई

मुंबई में कूपर अस्पताल के अलावा घाटकोपर के दो अन्य ब्लड सेंटरों पर भी FDA ने कार्रवाई की है।

घाटकोपर के पंत नगर स्थित Samarpan Blood Centre का लाइसेंस 28 अक्टूबर से 7 नवंबर तक निलंबित किया गया। जांच में दूसरे अस्पताल के ब्लड स्टोरेज सेंटर को जरूरी समझौते और अनुमति के बिना रक्त की आपूर्ति करने की जानकारी सामने आई।

इसके अलावा फ्रीजर में आंशिक रूप से पिघले Fresh Frozen Plasma यूनिट पाए गए। प्लेटलेट्स की स्टेरिलिटी जांच और रक्तदाताओं की सहमति से जुड़े रिकॉर्ड में भी कमियां मिलीं।

इसी तरह घाटकोपर ईस्ट के एमजी रोड स्थित Deepak Foundation द्वारा संचालित Anviksha Blood Centre पर भी कार्रवाई की गई।

जांच में खुले ब्लड बैग के फॉयल पैक को दोबारा ठीक से सील नहीं करने, खाली ब्लड बैग की स्टेरिलिटी जांच निर्धारित समय के अनुसार नहीं करने और पॉजिटिव ब्लड बैग को निर्धारित तरीके से डिसइन्फेक्ट नहीं करने जैसी कमियां सामने आईं।

महाराष्ट्र में 40 ब्लड बैंक और 37 स्टोरेज सेंटरों पर कार्रवाई

महाराष्ट्र FDA ने अप्रैल से अक्टूबर 2026 के बीच राज्यभर में ब्लड बैंकों और ब्लड स्टोरेज सेंटरों का निरीक्षण किया।

इस दौरान सामने आए आंकड़े इस प्रकार हैं:

कार्रवाईब्लड बैंकब्लड स्टोरेज सेंटर
निरीक्षण190219
लाइसेंस निलंबित4037
लाइसेंस रद्द513

अक्टूबर महीने में अकेले 43 ब्लड बैंकों और 57 ब्लड स्टोरेज सेंटरों का निरीक्षण किया गया।

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि FDA की कार्रवाई केवल मुंबई तक सीमित नहीं है। राज्य के अलग-अलग हिस्सों में रक्त संग्रह, जांच, भंडारण और वितरण से जुड़ी व्यवस्थाओं की निगरानी बढ़ाई गई है।

JJ और Nair अस्पताल के ब्लड सेंटर भी आए थे कार्रवाई के दायरे में

अक्टूबर 2026 में मुंबई के तीन अन्य प्रमुख ब्लड सेंटरों के खिलाफ भी FDA ने कार्रवाई की थी।

इनमें Indian Red Cross Society Blood Centre, Grant Medical College और Sir JJ Group of Hospitals Blood Centre तथा BYL Nair Charitable Hospital Blood Centre शामिल थे।

यह मामला अप्रैल 2026 में Altamount Road पर आयोजित एक रक्तदान शिविर से जुड़ा था। Young Star Committee द्वारा आयोजित शिविर के प्रचार में रक्तदाताओं को Titan wristwatch देने की बात सामने आई थी।

FDA की जांच में कुछ रक्तदाताओं ने घड़ी मिलने की पुष्टि की थी। इसके बाद Indian Red Cross Society के ब्लड सेंटर पर 9 से 13 अक्टूबर तक पांच दिन का निलंबन लगाया गया। JJ और Nair अस्पताल के ब्लड सेंटरों को भी तीन दिन के निलंबन के आदेश दिए गए थे, लेकिन अपील के बाद इन दोनों केंद्रों को अस्थायी राहत मिली।

राष्ट्रीय रक्त आधान परिषद के दिशानिर्देशों के अनुसार स्वैच्छिक रक्तदान के बदले उपहार या आर्थिक प्रलोभन देना स्वीकार्य नहीं है।

ब्लड बैंक के रिकॉर्ड में गड़बड़ी मरीजों के लिए क्यों गंभीर है?

ब्लड बैंक में रक्त संग्रह करना ही पूरी प्रक्रिया नहीं है। रक्तदाता की पहचान, रक्त की जांच, उसके अलग-अलग घटकों की तैयारी, उचित तापमान पर भंडारण और मरीज तक सुरक्षित आपूर्ति का रिकॉर्ड रखना भी जरूरी होता है।

रक्तदाता के अधूरे विवरण या उपकरणों की लॉगबुक अपडेट नहीं होने से किसी समस्या की स्थिति में रक्त के स्रोत और उसकी जांच से जुड़ी जानकारी प्राप्त करना मुश्किल हो सकता है।

इसी तरह Apheresis मशीन और अन्य जरूरी उपकरणों का सही तरीके से काम करना भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि कई मरीजों को सामान्य रक्त के बजाय प्लेटलेट्स या प्लाज्मा की आवश्यकता होती है।

हालांकि कूपर अस्पताल में सामने आई कमियों का अर्थ यह नहीं है कि मरीजों को दूषित रक्त दिया गया था। उपलब्ध जानकारी में ऐसे किसी मामले की पुष्टि नहीं हुई है।

7 नवंबर से सेवाएं दोबारा शुरू होने का कार्यक्रम

कूपर अस्पताल के ब्लड सेंटर की सेवाएं 7 नवंबर 2026 की मध्यरात्रि से दोबारा शुरू करने का कार्यक्रम निर्धारित किया गया था। इसके लिए निलंबन आदेश की शर्तों और FDA के निर्देशों का पालन जरूरी है।

इस पूरे मामले ने मुंबई सहित महाराष्ट्र के सरकारी और निजी अस्पतालों में ब्लड बैंक की व्यवस्था, रक्त की उपलब्धता और गुणवत्ता नियंत्रण को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं। मरीजों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि इलाज के दौरान आवश्यक रक्त और उसके घटक समय पर उपलब्ध रहें तथा सभी ब्लड सेंटर निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करें।

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