मुंबई के अप्पा पाड़ा में 1,600 से अधिक परिवारों के पुनर्वास पर विवाद। 225 वर्गफुट के मकानों, 300 वर्गफुट की मांग और महादेव अपार्टमेंट की लिफ्ट पर सवाल।
मुंबई: मलाड पूर्व स्थित अप्पा पाड़ा और क्रांतिनगर के 1,600 से अधिक परिवारों के पुनर्वास को लेकर बीएमसी की योजना पर विवाद बढ़ गया है। दिंडोशी में प्रस्तावित 120 फुट चौड़ी सड़क के लिए परिवारों को हटाने की प्रक्रिया के बीच 225 वर्गफुट के मकान आवंटित किए जाने पर स्थानीय निवासियों ने आपत्ति जताई है। इसी बीच, कांदिवली के ठाकुर विलेज स्थित महादेव अपार्टमेंट की तीन लिफ्ट बदलने के लिए बीएमसी ने 5 नवंबर को नई निविदा जारी की है। जिस इमारत में प्रभावित परिवारों को बसाया जा रहा है, वहां लिफ्ट की सुविधा बंद होने और अन्य बुनियादी समस्याओं की शिकायतें भी सामने आई हैं।
प्रभावित परिवारों की मांग है कि उन्हें पुनर्वास नियमों के अनुसार 300 वर्गफुट के मकान दिए जाएं। उनका कहना है कि वे सड़क परियोजना के विरोध में नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर उन्हें छोटे और सुविधाओं से वंचित मकानों में रहने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।
120 फुट की सड़क के लिए हजारों परिवारों को हटाने की तैयारी
बीएमसी की प्रस्तावित सड़क परियोजना का उद्देश्य दिंडोशी के फिल्म सिटी रोड को गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड (GMLR) से सीधे जोड़ना है। इसके लिए अप्पा पाड़ा से रत्नागिरी होटल जंक्शन तक सड़क का विकास किया जाना है।
इस परियोजना से अप्पा पाड़ा और क्रांतिनगर के 1,600 से अधिक परिवार प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। स्थानीय स्तर पर प्रभावित लोगों की संख्या 1,700 से अधिक भी बताई गई है। परियोजना को तीन से चार चरणों में पूरा करने की योजना है।

पहले चरण में करीब 140 से 150 परिवारों को स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इन परिवारों को कांदिवली के ठाकुर विलेज स्थित महादेव अपार्टमेंट में 225 वर्गफुट के मकान आवंटित किए गए हैं। हालांकि, मकानों के आकार और आवंटन की प्रक्रिया को लेकर निवासियों में नाराजगी है।
225 वर्गफुट के मकानों पर क्यों उठा विवाद?
प्रभावित परिवारों का कहना है कि पुनर्वास के लिए निर्धारित आवासीय क्षेत्रफल 300 वर्गफुट होना चाहिए। उनका सवाल है कि जब पुनर्वास नियमों में 300 वर्गफुट के मकान का प्रावधान है, तो उन्हें 225 वर्गफुट के मकान क्यों दिए जा रहे हैं?
स्थानीय निवासी आशा सावंत ने अपने परिवार की परेशानी बताते हुए कहा कि वे कई दशकों से इस इलाके में रह रही हैं। उनके पति लकवे से पीड़ित हैं। ऐसे में एक कमरे और रसोई वाले छोटे मकान में परिवार के लिए रहना मुश्किल होगा। उनका कहना है कि उन्हें नियमों के अनुसार बड़ा घर मिलना चाहिए।
एक अन्य प्रभावित निवासी प्रतीक तिवारी ने महादेव अपार्टमेंट की स्थिति पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि करीब 20 साल पुरानी सात मंजिला इमारत में लिफ्ट काम नहीं कर रही है। ऐसे में बुजुर्गों और चलने-फिरने में परेशानी वाले लोगों के लिए ऊपरी मंजिलों तक पहुंचना बड़ी समस्या बन सकता है।
पंकज तिवारी ने भी भवन की स्थिति को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि परिवार कई दशकों से अप्पा पाड़ा में रह रहे हैं और वे विकास परियोजना में सहयोग करने को तैयार हैं, लेकिन उन्हें रहने योग्य मकान मिलने चाहिए।
300 वर्गफुट के मकान या 225 वर्गफुट के साथ आर्थिक मुआवजा
इस विवाद पर बीएमसी के अतिरिक्त नगर आयुक्त अभिजीत बांगर ने बताया कि प्रभावित परिवारों को दो विकल्प दिए गए हैं। पहला विकल्प दूर स्थित 300 वर्गफुट के PAP मकान का है, जबकि दूसरा विकल्प मौजूदा इलाके के नजदीक 225 वर्गफुट के मकान का है।
उनके अनुसार, 225 वर्गफुट का मकान चुनने वाले परिवारों को शेष क्षेत्रफल के लिए आर्थिक मुआवजा दिया जाएगा।
हालांकि, इस प्रस्ताव में शेष क्षेत्रफल के बदले मिलने वाली वास्तविक रकम, उसकी गणना का आधार और भुगतान की समयसीमा महत्वपूर्ण हैं। प्रभावित परिवारों के लिए यह जानना भी जरूरी है कि आर्थिक मुआवजे का विकल्प स्वीकार करने पर भविष्य में बड़े मकान की मांग करने का अधिकार किस तरह प्रभावित होगा।
पूर्व भाजपा नगरसेवक विनोद मिश्रा ने बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिड़े को पत्र लिखकर इस विवाद के समाधान के लिए संयुक्त बैठक बुलाने की मांग की है। उनका कहना है कि जब परियोजना प्रभावित परिवारों के लिए 304 वर्गफुट मकान देने की बात सामने आती है, तो 225 वर्गफुट के मकान आवंटित करने के फैसले पर पुनर्विचार होना चाहिए।
पुनर्वास के नियमों में 300 वर्गफुट का प्रावधान
महाराष्ट्र में पुनर्वास के लिए मकानों का न्यूनतम क्षेत्रफल पिछले तीन दशकों में बढ़ाया गया है। वर्ष 1995 में झुग्गी पुनर्वास योजना शुरू होने पर न्यूनतम कारपेट एरिया 180 वर्गफुट निर्धारित किया गया था। वर्ष 2009 में इसे बढ़ाकर 225 वर्गफुट और 2014 में 269 वर्गफुट किया गया।
इसके बाद 2018 में लागू विकास नियंत्रण एवं प्रोत्साहन नियम 2034 (DCPR-2034) के तहत SRA और PAP आवास के लिए 27.88 वर्गमीटर यानी लगभग 300 वर्गफुट कारपेट एरिया का प्रावधान किया गया।
हालांकि, सड़क परियोजना से प्रभावित PAP परिवारों और SRA योजना के लाभार्थियों पर लागू नियमों में अंतर हो सकता है। इसलिए अप्पा पाड़ा के परिवारों के मामले में बीएमसी की संबंधित पुनर्वास नीति और पात्रता आदेश महत्वपूर्ण होंगे।
बीएमसी की PAP नीति पर पहले भी उठ चुके हैं सवाल
मुंबई में परियोजना प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए मकानों की उपलब्धता और उनके आवंटन का मुद्दा पहले भी उठता रहा है।
महाराष्ट्र सरकार ने 19 अगस्त 2024 को सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से प्रभावित लोगों के लिए PAP मकानों से संबंधित नीति जारी की थी। इस नीति में मुंबई की विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए लगभग 50,000 PAP मकानों की जरूरत का अनुमान लगाया गया था। मुंबई की विकास योजना को पूरा करने के लिए यह आवश्यकता लगभग 2.20 लाख मकानों तक बताई गई थी।
नीति में प्रभावित परिवारों को यथासंभव उसी वार्ड में मकान देने और वहां उपलब्धता नहीं होने पर आसपास के वार्डों में पुनर्वास को प्राथमिकता देने की व्यवस्था का उल्लेख है। इसके अलावा मकानों के ऑनलाइन आवंटन और पात्रता प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने पर भी जोर दिया गया है।
वहीं, बीएमसी की 2025 की PAP नीति में 225 वर्गफुट के मकानों का प्रावधान जारी रहने को लेकर भी अक्टूबर 2026 में आपत्ति उठाई गई थी। पूर्व सांसद गोपाल शेट्टी और बीएमसी में भाजपा नेता गणेश खणकर ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाए थे।
उन्होंने मांग की थी कि परियोजना प्रभावित परिवारों को 300 वर्गफुट के मकान उपलब्ध कराने के प्रावधान पर विचार किया जाए। इस मुद्दे पर प्रशासन की ओर से आयुक्त की मौजूदगी में बैठक में चर्चा कराने का आश्वासन दिया गया था।
महादेव अपार्टमेंट की तीन लिफ्ट बदलने के लिए बीएमसी की निविदा
पुनर्वास विवाद के बीच महादेव अपार्टमेंट की लिफ्टों को लेकर भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। बीएमसी ने 5 नवंबर को इस इमारत की E, F और G विंग में लगी तीन यात्री लिफ्टों को हटाकर नई लिफ्ट लगाने के लिए निविदा जारी की है।
इससे पहले 27 अक्टूबर को इन तीनों विंग के लिफ्ट शाफ्ट का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने के लिए भी निविदा प्रक्रिया शुरू की गई थी।

नई लिफ्ट लगाने संबंधी निविदा की अंतिम तारीख 18 नवंबर 2026 रखी गई है, जबकि तकनीकी बैठक 12 नवंबर को निर्धारित है।
इस घटनाक्रम के बाद पुनर्वास के लिए चुनी गई इमारत की मौजूदा सुविधाओं और उसकी तैयारी पर सवाल और महत्वपूर्ण हो गए हैं। निविदा जारी होना नई लिफ्ट लगने का प्रमाण नहीं है। जब तक काम पूरा होकर लिफ्ट चालू नहीं होती, तब तक वहां रहने वाले परिवारों को इसकी सुविधा नहीं मिल सकती।
खासकर बुजुर्गों, दिव्यांगों और गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए सात मंजिला इमारत में लिफ्ट की उपलब्धता बेहद जरूरी है। इमारत परिसर में खुले मैनहोल की शिकायतें भी निवासियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाती हैं।
सड़क परियोजना से मुंबई के यातायात को क्या फायदा होगा?
दिंडोशी की प्रस्तावित 120 फुट सड़क को गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड से जोड़ने की योजना मुंबई के पूर्व और पश्चिम उपनगरों के बीच सड़क संपर्क बेहतर बनाने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है।

GMLR परियोजना में संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के नीचे जुड़वां सुरंगों का निर्माण भी शामिल है। अक्टूबर 2026 में इस परियोजना की एक टनल बोरिंग मशीन ने 183 मीटर खुदाई पूरी कर ली थी। वहीं, दिंडोशी कोर्ट से फिल्म सिटी तक लगभग 1.26 किलोमीटर लंबे फ्लाईओवर का निर्माण पूरा होने की जानकारी भी सामने आई थी।
इस सड़क नेटवर्क के विकसित होने से दिंडोशी, फिल्म सिटी और गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड के बीच संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है। इससे पूर्व-पश्चिम आवागमन के लिए अतिरिक्त मार्ग उपलब्ध हो सकते हैं और आसपास की सड़कों पर यातायात का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, इस विकास का लाभ उठाने के लिए जिन परिवारों को अपनी पुरानी जगह छोड़नी पड़ रही है, उनके पुनर्वास की व्यवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। स्थान बदलने से बच्चों की शिक्षा, रोजगार, अस्पतालों तक पहुंच और परिवारों के दैनिक खर्च पर असर पड़ सकता है।
पुनर्वास के साथ मकान की गुणवत्ता भी जरूरी
अप्पा पाड़ा के परिवारों का मामला अब केवल 225 और 300 वर्गफुट के मकानों के बीच का विवाद नहीं रह गया है। इसमें पुनर्वास की पारदर्शिता, वैकल्पिक मकानों की दूरी, आर्थिक मुआवजे और भवन में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता जैसे मुद्दे भी शामिल हैं।
पूर्व सांसद गोपाल शेट्टी, भाजपा नेता गणेश खणकर और पूर्व नगरसेवक विनोद मिश्रा की ओर से भी पुनर्वास व्यवस्था पर सवाल उठाए गए हैं। वहीं, स्थानीय निवासियों आशा सावंत, प्रतीक तिवारी और पंकज तिवारी ने मकानों के आकार तथा महादेव अपार्टमेंट की स्थिति पर अपनी आपत्तियां रखी हैं।
अब प्रभावित परिवारों की नजर बीएमसी के अगले फैसले पर है। खास तौर पर 300 वर्गफुट के मकानों की उपलब्धता, 225 वर्गफुट के विकल्प के साथ मिलने वाले आर्थिक मुआवजे और महादेव अपार्टमेंट में लिफ्ट सहित जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था पर स्पष्टता जरूरी है।
मुंबई के विकास के लिए सड़क परियोजनाएं महत्वपूर्ण हैं, लेकिन विस्थापित होने वाले परिवारों को सुरक्षित और पर्याप्त आवास उपलब्ध कराना भी बीएमसी की जिम्मेदारी है।
