मुंबई में 88 वर्षीय बुजुर्ग महिला से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 1.55 करोड़ रुपये की ठगी। नॉर्थ साइबर पुलिस ने चेंबूर से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
मुंबई: मुंबई पुलिस की नॉर्थ साइबर सेल ने मालाड वेस्ट की एक 88 वर्षीय सेवानिवृत्त महिला को ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर ₹1.55 करोड़ की ठगी करने वाले गिरोह के दो गुर्गों को चेंबूर से गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान यश योगेश चौहान (20), जो एक छात्र है, और समीर बाळू भोसले (21), जो फूड डिलीवरी बॉय का काम करता है, के रूप में हुई है। ये दोनों आरोपी रमाबाई आंबेडकर कॉलोनी, चेंबूर के रहने वाले हैं।
जानकारी के मुताबिक, यह दोनों आरोपी मुख्य साइबर ठगों के लिए ‘म्यूल अकाउंट’ (पैसा घुमाने वाले फर्जी बैंक खाते) खोलने और अपने मौजूदा खातों को कमीशन के लालच में मुहैया कराने का काम करते थे।
20 दिनों तक बंधक बनाकर वसूले ₹1.55 करोड़
ठगी के इस सुनियोजित खेल की शुरुआत 7 अप्रैल 2026 को हुई। पीड़िता मालाड वेस्ट में अकेली रहती हैं। उनके पास एक अनजान नंबर से फोन आया, जिसमें कॉलर ने खुद को नाशिक का सीनियर पुलिस अधिकारी ‘संदीप राव’ बताया। उसने दावा किया कि महिला के आधार कार्ड का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग (हवाला) में हुआ है और उनके नाम पर अरेस्ट वारंट जारी हुआ है। इसके तुरंत बाद एक अन्य आरोपी ने जांच अधिकारी ‘जॉर्ज मैथ्यू’ बनकर व्हाट्सएप पर फर्जी सुप्रीम कोर्ट अरेस्ट वारंट और आधिकारिक नोटिस भेजे।
ठगों ने कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर बुजुर्ग महिला को स्काइप और व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर चौबीसों घंटे निगरानी में रखा, जिसे तकनीकी भाषा में ‘डिजिटल अरेस्ट’ कहा जाता है। इस दौरान उनसे बैंक खातों, फिक्स्ड डिपॉजिट और संपत्तियों की पूरी जानकारी ली गई। जेल जाने के डर से सहमी महिला ने 7 अप्रैल से 25 अप्रैल के बीच कई ट्रांजैक्शन के जरिए कुल ₹1,55,10,000 ठगों के बताए खातों में ट्रांसफर कर दिए। ठगों ने झांसा दिया था कि सरकारी वेरिफिकेशन के बाद यह पूरी रकम वापस कर दी जाएगी।
अखबार की खबर से खुला राज, ऐसे हुई गिरफ्तारी
इस धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब पीड़ित महिला ने अखबार में डिजिटल अरेस्ट स्कैम से जुड़ी एक खबर पढ़ी। उन्होंने तुरंत अपनी बहन को इसकी जानकारी दी, जिसने इस रैकेट को भांपकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी। पीड़िता की शिकायत पर नॉर्थ साइबर सेल ने धोखाधड़ी, आपराधिक धमकी और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपी यश चौहान के बैंक खाते का इस्तेमाल ठगी की रकम में से ₹5 लाख को रूट करने के लिए किया गया था। बैंक से मिले KYC (Know Your Customer) डिटेल्स और तकनीकी इंटेलिजेंस की मदद से विशेष पुलिस टीम ने जाल बिछाकर दोनों आरोपियों को चेंबूर से हिरासत में लिया। बोरिवली कोर्ट ने दोनों आरोपियों को पुलिस कस्टडी में भेज दिया है।
युवाओं और बैंक कर्मचारियों का बड़ा सिंडिकेट
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मुंबई में इस तरह के सिंडिकेट का एक बहुत बड़ा नेटवर्क सक्रिय है, जिसमें कई अन्य लोगों के शामिल होने की आशंका है। साइबर अपराधी अक्सर कॉलेज के छात्रों और कम आय वाले युवाओं को कुछ हजार रुपये के कमीशन का लालच देकर उनके नाम पर डमी बैंक खाते खुलवाते हैं। हाल ही में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और मुंबई पुलिस की जांच में कई सफेदपोशों और बैंक कर्मचारियों की संलिप्तता भी सामने आई है, जो इन अवैध खातों को सक्रिय करने में मदद करते हैं।
सुप्रीम कोर्ट का रुख और गाइडलाइंस
देश में बढ़ते डिजिटल अरेस्ट के मामलों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को सख्त निर्देश दिए हैं कि संदिग्ध ‘म्यूल अकाउंट्स’ की पहचान होते ही बैंक 24 घंटे के भीतर उन पर अस्थाई रोक लगाएं। सरकारी गाइडलाइंस के मुताबिक, भारत में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई कानूनी व्यवस्था नहीं है। कोई भी पुलिस या जांच एजेंसी वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार या प्रताड़ित नहीं कर सकती और न ही फोन पर पैसों की मांग करती है।
मामले में पुलिस अब पैसों के ट्रांसफर की कड़ियों को जोड़ रही है ताकि मुख्य मास्टरमाइंड तक पहुंचा जा सके।
