Category: Cyber Security

  • Mumbai Railway में Facial Recognition System से क्राइम कंट्रोल, मिनटों में आरोपी ट्रैक!

    Mumbai Railway में Facial Recognition System से क्राइम कंट्रोल, मिनटों में आरोपी ट्रैक!

    Mumbai Western Railway का Facial Recognition System (FRS) तेजी से अपराध सुलझा रहा है। जानिए कैसे CCTV और AI technology से criminals और missing persons को ट्रैक किया जा रहा है।

    मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई शहर में मुंबई लोकल रेलवे नेटवर्क में अब सुरक्षा का स्तर और मजबूत हो गया है। Western Railway ने Facial Recognition System (FRS) के जरिए अपराधियों को ट्रैक करने और missing लोगों को ढूंढने में बड़ी सफलता हासिल की है।

    हाल के महीनों में कई केस इस सिस्टम की मदद से तेजी से solve किए गए हैं।

    🚨 Recent Cases: मिनटों में आरोपी गिरफ्तार

    FRS की मदद से कई बड़े केस सुलझे:

    • एक Portuguese tourist को stalk करने वाले 2 आरोपी कुछ ही दिनों में पकड़े गए
    • Mumbai के Goregaon का 14 साल का लड़का, जो missing था, उसे राजस्थान में ट्रेस किया गया
    • Malad Railway Station पर professor पर चाकू से हमला करने वाला आरोपी 2 दिन में गिरफ्तार
    • Actor Saif Ali Khan पर हमले के केस में भी suspect को बाद में FRS से ट्रैक कर पकड़ा गया

    अधिकारियों के मुताबिक, ये सभी केस FRS technology की वजह से जल्दी solve हुए।

    🧠 FRS कैसे काम करता है? (How Facial Recognition Works)

    Facial Recognition System किसी भी इंसान के चेहरे की unique पहचान करता है—जैसे:

    • आंखों के बीच की दूरी
    • नाक का shape
    • चेहरे की बनावट

    इन सभी डेटा को digital code यानी “faceprint” में बदला जाता है।

    जैसे ही कोई suspect कैमरे में आता है, सिस्टम तुरंत alert भेज देता है।

    🎥 463 CCTV कैमरों का बड़ा नेटवर्क

    FRS सिस्टम Western Railway के 114 स्टेशनों पर लगे 463 CCTV cameras से जुड़ा है।

    यह नेटवर्क:

    • Churchgate Railway Station से लेकर Surat
    • और Jalgaon तक फैला हुआ है

    जैसे ही database में मौजूद चेहरा कैमरे में दिखता है, तुरंत control room और पुलिस को alert मिल जाता है।

    🔍 Investigation में बड़ा गेम चेंजर

    Portuguese tourist वाले केस में पुलिस पहले suspects को identify नहीं कर पाई थी।

    बाद में CCTV के screenshots को FRS में डाला गया, जहां एक आरोपी Marine Lines Railway Station पर पहचान में आ गया।

    इसी तरह Malad stabbing केस में आरोपी का daily travel pattern (सुबह Malad से आना, शाम को Marine Lines लौटना) ट्रैक किया गया—और इसी से गिरफ्तारी संभव हुई।

    👶 Missing Children: बच्चों को ढूंढने में बड़ी मदद

    भीड़भाड़ वाले स्टेशन जैसे:

    • Chhatrapati Shivaji Maharaj Terminus
    • Churchgate Railway Station

    यहां लोगों को पहचानना मुश्किल होता है।

    लेकिन अब:

    • देशभर की एजेंसियां missing बच्चों की फोटो Railway Protection Force के साथ शेयर करती हैं
    • FRS system उन्हें पहचानकर उनकी last location बता देता है
    • Low quality image होने पर भी multiple matches generate करता है

    📈 Data Report: हर साल बढ़ रहे केस

    RPF के डेटा के मुताबिक FRS से सुलझे केस:

    • 2024: 54 baggage theft, 3 robbery
    • 2025: 59 baggage theft, 5 bag snatching
    • 2026 (Feb तक): 15 baggage theft

    इसके अलावा हर दिन करीब 10–15 requests अलग-अलग पुलिस यूनिट्स से आती हैं।

    🇮🇳 India में तेजी से फैल रही Technology

    Western Railway भारत का पहला रेलवे नेटवर्क था जिसने FRS शुरू किया।

    अब इसे पूरे देश में expand किया जा रहा है।

    साथ ही Mumbai Police (5000+ cameras) भी अपने नेटवर्क को इससे जोड़ने की तैयारी कर रही है।

    🧾 NIA-CBI डेटा भी जुड़ा

    2024 में:

    • National Investigation Agency
    • Central Bureau of Investigation

    जैसी एजेंसियों के 10,000+ suspects images इस सिस्टम में upload किए गए।

    🎯 Goal: Safe Railway Travel

    अधिकारियों का कहना है कि इस सिस्टम का मुख्य उद्देश्य है:

    • passengers की safety बढ़ाना
    • crime prevention
    • faster investigation

    आने वाले समय में training और expansion के साथ यह सिस्टम और powerful बनने वाला है।

    🔗 सरकारी और ऑफिशियल लिंक


    FAQ (Frequently Asked Questions)

    Q1. Facial Recognition System (FRS) क्या है?
    यह एक AI-based technology है जो चेहरे की पहचान करके suspects और missing लोगों को ट्रैक करती है।

    Q2. Mumbai में FRS कहां इस्तेमाल हो रहा है?
    Western Railway के 114 स्टेशनों और 463 CCTV कैमरों में।

    Q3. क्या यह system accurate है?
    हाँ, यह multiple matches और confidence levels के साथ काफी accurate tracking देता है।

    Q4. इससे कौन-कौन से केस सुलझे?
    Stalking, stabbing, theft, missing children जैसे कई केस।

    Q5. क्या यह पूरे India में लागू होगा?
    हाँ, सरकार इसे धीरे-धीरे पूरे देश के रेलवे नेटवर्क में लागू कर रही है।

  • मुंबई ब्रेकिंग: कांदिवली पुलिस ने सेना के जवान को दिलाए 7.25 लाख रुपये, Online Investment Scam का बड़ा खुलासा

    मुंबई ब्रेकिंग: कांदिवली पुलिस ने सेना के जवान को दिलाए 7.25 लाख रुपये, Online Investment Scam का बड़ा खुलासा

    Mumbai Kandivali Cyber Cell ने Army soldier के साथ हुए ₹7.25 lakh online investment scam में पूरी रकम recover कर वापस दिलाई। जानिए कैसे हुई कार्रवाई, Cyber Crime Helpline 1930 की पूरी जानकारी।

    मुंबई: कांदिवली इलाके से एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है, जहां Cyber Crime के शिकार हुए भारतीय सेना के जवान को उनकी पूरी ठगी गई रकम वापस मिल गई है। Kandivali Police Cyber Cell ने तेजी से कार्रवाई करते हुए ₹7,25,000 की पूरी रकम recover कर पीड़ित के खाते में जमा कर दी।

    🪖 Army जवान से Online Investment के नाम पर ठगी

    कांदिवली पश्चिम, साईनगर निवासी श्री मनोज पाल, जो भारतीय सेना में कार्यरत हैं और वर्तमान में जम्मू-कश्मीर के उच्च क्षेत्र में देश की सेवा दे रहे हैं, अप्रैल 2025 में Online Investment Scam का शिकार हो गए थे।

    ठगों ने उन्हें “High Return Investment” का लालच देकर टप्पों में कुल ₹7,25,000 ऑनलाइन ट्रांसफर करवाए और बाद में संपर्क तोड़ दिया।

    📞 Cyber Helpline 1930 पर शिकायत, तुरंत हुई कार्रवाई

    घटना के बाद मनोज पाल ने तुरंत Cyber Crime Helpline 1930 पर शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत मिलते ही कांदिवली साइबर सेल हरकत में आई और मामले की जांच शुरू की गई।

    👉 आधिकारिक लिंक:

    🔍 Bank Accounts ट्रैक कर रकम को किया गया Hold

    कांदिवली साइबर सेल के सहायक पुलिस निरीक्षक दीपक कादबाने और उनकी टीम ने तुरंत जांच करते हुए उन सभी बैंक खातों का पता लगाया जहां ठगी की रकम ट्रांसफर की गई थी।

    👉 संबंधित बैंकों से संपर्क कर पूरी रकम को “Hold” कराया गया ताकि पैसे आगे ट्रांसफर न हो सकें।

    ⚖️ कोर्ट ऑर्डर के बाद पूरी रकम वापस

    इसके बाद बोरिवली के 17वें न्यायालय (प्रथम वर्ग न्यायाधीश) से आदेश प्राप्त कर पूरी ₹7,25,000 की रकम वापस मनोज पाल के बैंक खाते में जमा कर दी गई।

    यह कार्रवाई Cyber Crime मामलों में एक मिसाल मानी जा रही है।

    👮‍♂️ वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में बड़ी सफलता

    यह पूरी कार्रवाई वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में की गई:

    • पुलिस उपायुक्त (Zone 11) – श्री संदीप जाधव
    • सहायक पुलिस आयुक्त (मालवणी विभाग) – श्रीमती नीता पाडवी
    • वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक – करण सोनकवडे
    • पुलिस निरीक्षक (क्राइम) – शेखर शिंदे

    👉 टीम में शामिल अधिकारी:

    • API दीपक कादबाने
    • पुलिस हवलदार बाळकृष्ण खाडे
    • पुलिस कर्मचारी संकेत सावंत
    • महिला पुलिस कर्मचारी जयश्री तलवारे

    इन सभी ने मिलकर बेहद तेजी और सूझबूझ से काम करते हुए यह बड़ी सफलता हासिल की।

    🚨 Cyber Fraud से बचने के लिए जरूरी टिप्स

    • Unknown investment offers से दूर रहें
    • High return का लालच = Scam का संकेत
    • किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले जांच करें
    • तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें

    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. Cyber Fraud होने पर क्या करें?
    👉 तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत करें।

    Q2. क्या ठगी के पैसे वापस मिल सकते हैं?
    👉 हां, अगर समय रहते शिकायत की जाए तो बैंक ट्रांजैक्शन ट्रैक कर पैसे होल्ड किए जा सकते हैं।

    Q3. Investment Scam कैसे पहचानें?
    👉 High returns, unknown apps/websites, जल्दी पैसा कमाने का लालच – ये सभी Scam के संकेत हैं।

    Q4. Mumbai में Cyber Crime की शिकायत कहां करें?
    👉 मुंबई पुलिस की वेबसाइट या Cyber Cell में सीधे संपर्क करें।

  • Social Media Ban: Karnataka में 16 साल से कम बच्चों के लिए Social Media Ban का प्रस्ताव, सरकार ने बजट में किया ऐलान

    Social Media Ban: Karnataka में 16 साल से कम बच्चों के लिए Social Media Ban का प्रस्ताव, सरकार ने बजट में किया ऐलान

    Karnataka सरकार ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए Social Media Ban का प्रस्ताव रखा है। CM Siddaramaiah ने राज्य के ₹4,48,004 करोड़ के बजट में डिजिटल एडिक्शन, स्क्रीन टाइम और बच्चों की मानसिक सेहत को देखते हुए यह बड़ा कदम सुझाया है।

    देश में Digital Addiction और Social Media Use को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच Karnataka सरकार ने एक बड़ा प्रस्ताव रखा है। राज्य सरकार 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए Social Media Ban लागू करने की योजना पर विचार कर रही है।

    यह प्रस्ताव Siddaramaiah ने शुक्रवार को राज्य का ₹4,48,004 करोड़ का बजट पेश करते समय रखा। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य बच्चों को Smartphone Addiction, Excessive Screen Time और Online Dependency से बचाना है।

    Budget Speech में सामने आया Social Media Ban का प्रस्ताव

    मुख्यमंत्री Siddaramaiah ने राज्य का 17वां बजट पेश करते हुए कहा कि सरकार बच्चों में बढ़ती Digital Addiction को लेकर गंभीर है।

    सरकार का मानना है कि Social Media Platforms का अत्यधिक उपयोग बच्चों की पढ़ाई, मानसिक स्वास्थ्य और शारीरिक गतिविधियों पर नकारात्मक असर डाल रहा है।

    इसी कारण 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए Social Media Access पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव रखा गया है।

    Smartphone Addiction और Screen Time बना बड़ी चिंता

    राज्य सरकार के अनुसार आजकल बच्चों में Smartphone Addiction, Online Gaming और Excessive Screen Time तेजी से बढ़ रहा है।

    सरकार को चिंता है कि सोशल मीडिया और मोबाइल गेमिंग के कारण बच्चों की Mental Health, Academic Performance और Physical Fitness पर असर पड़ रहा है।

    Vice-Chancellors Conclave में भी उठाया गया था मुद्दा

    इससे पहले Bengaluru में आयोजित Vice-Chancellors (VC) Conclave के दौरान भी मुख्यमंत्री Siddaramaiah ने इस मुद्दे को उठाया था।

    उन्होंने वहां भी बच्चों में मोबाइल फोन और सोशल मीडिया के बढ़ते उपयोग को लेकर चिंता जताई और इस विषय पर विस्तृत चर्चा की जरूरत बताई थी।

    देश का पहला राज्य बन सकता है Karnataka

    अगर यह प्रस्ताव लागू होता है तो Karnataka भारत का पहला राज्य बन सकता है, जहां 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए Social Media Ban लागू किया जाएगा।

    इससे पहले राज्य के IT Minister Priyank Kharge ने भी संकेत दिए थे कि सरकार Minors के लिए Social Media Access Restriction पर विचार कर रही है।

    अन्य राज्यों में भी शुरू हुई चर्चा

    केवल Karnataka ही नहीं, बल्कि भारत के कई अन्य राज्यों में भी बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर नियंत्रण को लेकर चर्चा शुरू हो चुकी है।

    • Andhra Pradesh सरकार ने पिछले साल स्कूलों में Mobile Phone Ban की संभावना पर चर्चा की थी।
    • वहीं Goa के IT मंत्री ने भी 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए Social Media Restriction लागू करने की बात कही थी।

    बच्चों की Online Safety पर फोकस

    सरकार का कहना है कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को Online Safety Risks, Cyberbullying और Digital Addiction से बचाना है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सही तरीके से लागू किया गया तो यह कदम बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और पढ़ाई के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।


    FAQ (People Also Ask)

    1. क्या Karnataka में बच्चों के लिए Social Media Ban लागू होगा?

    राज्य सरकार ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए Social Media Ban का प्रस्ताव रखा है। अभी इस पर विचार चल रहा है।

    2. यह घोषणा किसने की?

    यह प्रस्ताव Karnataka के मुख्यमंत्री Siddaramaiah ने बजट भाषण के दौरान रखा।

    3. सरकार यह कदम क्यों उठाना चाहती है?

    सरकार का कहना है कि Smartphone Addiction, Screen Time और Mental Health Issues को देखते हुए यह कदम जरूरी है।

    4. क्या भारत में पहले कहीं ऐसा Ban लागू है?

    अगर लागू हुआ तो Karnataka भारत का पहला राज्य होगा जहां ऐसा प्रतिबंध लागू किया जाएगा।

    5. क्या अन्य राज्य भी ऐसा सोच रहे हैं?

    हाँ, Andhra Pradesh और Goa में भी बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को सीमित करने पर चर्चा हो चुकी है।

  • Borivali KYC Scam: फर्जी KYC अपडेट के नाम पर वरिष्ठ नागरिक से ₹9.75 लाख की ठगी

    Borivali KYC Scam: फर्जी KYC अपडेट के नाम पर वरिष्ठ नागरिक से ₹9.75 लाख की ठगी

    Mumbai के Borivali में Fake KYC Update Scam का बड़ा मामला सामने आया है। Tata Power के नाम पर आए फोन कॉल और WhatsApp लिंक के जरिए 69 वर्षीय Senior Citizen के बैंक खाते से ₹9.75 लाख उड़ा लिए गए। Borivali Police और Cyber Cell मामले की जांच में जुटी है।

    मुंबई: Online Fraud और KYC Scam का एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। Borivali इलाके में रहने वाले 69 वर्षीय Senior Citizen को Fake KYC Update के नाम पर ठग लिया गया। ठग ने खुद को Tata Power का अधिकारी बताकर पीड़ित को एक फर्जी लिंक भेजा और KYC अपडेट करने के बहाने उनके बैंक खाते से ₹9,75,955 निकाल लिए।

    इस मामले में Mumbai Police के Borivali Police Station में केस दर्ज कर लिया गया है और Cyber Cell आरोपी की तलाश में जुट गई है।

    फोन कॉल से शुरू हुआ पूरा Online Fraud

    पुलिस के मुताबिक पीड़ित बुजुर्ग Borivali इलाके में अपने परिवार के साथ रहते हैं

    24 फरवरी को जब वह घर पर थे, तभी उन्हें एक अनजान नंबर से फोन कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को Tata Power Electricity का अधिकारी बताया और कहा कि उनका KYC Update Pending है, जिसे तुरंत पूरा करना जरूरी है।

    WhatsApp पर भेजा गया Fake KYC Link

    फोन कॉल के बाद आरोपी ने पीड़ित को WhatsApp पर एक लिंक भेजा और कहा कि उसी लिंक पर जाकर KYC Update Process पूरा करें।

    क्योंकि बुजुर्ग को इस प्रक्रिया की ज्यादा जानकारी नहीं थी, इसलिए उन्होंने कॉलर के बताए अनुसार लिंक ओपन किया और अपनी Personal Details भर दीं

    ₹10 UPI ट्रांजेक्शन के बहाने शुरू हुई ठगी

    फर्जी वेबसाइट पर फॉर्म भरने के बाद पीड़ित से कहा गया कि KYC Verification के लिए ₹10 का UPI Payment करना होगा।

    बुजुर्ग ने निर्देशों का पालन करते हुए ₹10 ट्रांसफर कर दिए। इसके कुछ ही समय बाद कॉलर ने फोन काट दिया।

    दोस्त की चेतावनी के बाद डिलीट किया चैट

    बाद में जब पीड़ित ने इस घटना के बारे में अपने एक दोस्त को बताया तो उसने उन्हें चेतावनी दी कि ऐसे लिंक अक्सर Cyber Fraud के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं

    इस बात से घबराकर पीड़ित ने WhatsApp चैट और लिंक दोनों डिलीट कर दिए

    3 मार्च को बैंक मैसेज देख उड़े होश

    कुछ दिन बाद 3 मार्च को पीड़ित के मोबाइल पर Bank Transaction Alerts आने लगे।

    जब उन्होंने मैसेज चेक किए तो वह यह देखकर हैरान रह गए कि उनके बैंक खाते से ₹9,75,955 रुपये डेबिट हो चुके थे

    Borivali Police में दर्ज हुई शिकायत

    अपने साथ हुई ठगी का एहसास होने के बाद पीड़ित तुरंत Borivali Police Station पहुंचे और शिकायत दर्ज करवाई।

    पीड़ित के बयान के आधार पर पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ Cheating और Information Technology Act की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

    Cyber Cell कर रही आरोपी की तलाश

    पुलिस अधिकारियों के मुताबिक Borivali Police Station की Cyber Cell टीम इस मामले की जांच कर रही है।

    जांच के दौरान यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि फर्जी लिंक कहां से भेजा गया और बैंक खाते से पैसे किस अकाउंट में ट्रांसफर हुए

    पुलिस की नागरिकों को चेतावनी

    पुलिस ने इस मामले के बाद एक बार फिर नागरिकों को सावधान रहने की सलाह दी है।

    अधिकारियों का कहना है कि:

    • किसी भी Unknown Caller पर भरोसा न करें
    • KYC Update Link पर बिना जांच क्लिक न करें
    • Banking Details, OTP या Personal Information किसी से साझा न करें
    • संदेह होने पर तुरंत Police या Cyber Cell से संपर्क करें

    FAQ (People Also Ask)

    1. Borivali KYC Scam में कितने रुपये की ठगी हुई?

    इस मामले में बुजुर्ग के बैंक खाते से ₹9,75,955 रुपये निकाल लिए गए।

    2. आरोपी ने ठगी कैसे की?

    आरोपी ने खुद को Tata Power अधिकारी बताकर Fake KYC Link भेजा और उसी के जरिए बैंक खाते से पैसे ट्रांसफर कर लिए।

    3. घटना कब हुई?

    फोन कॉल 24 फरवरी को आया था, जबकि 3 मार्च को बैंक मैसेज से ठगी का पता चला।

    4. केस कहां दर्ज हुआ?

    इस मामले में Borivali Police Station में केस दर्ज किया गया है।

    5. पुलिस क्या जांच कर रही है?

    Cyber Cell आरोपी की पहचान और पैसे किस अकाउंट में ट्रांसफर हुए, इसकी जांच कर रही है।

  • Mumbai Bomb Threat Case: Hoax Email भेजने वाला 28 साल का आरोपी गिरफ्तार

    Mumbai Bomb Threat Case: Hoax Email भेजने वाला 28 साल का आरोपी गिरफ्तार

    Mumbai में स्कूल, Stock Exchange और Metro Stations को Bomb Threat Email भेजने वाले 28 वर्षीय आरोपी को Gujarat Police ने गिरफ्तार किया। Dindoshi Police अब MaladGoregaon केस में उसकी कस्टडी लेने की तैयारी कर रही है।

    मुंबई: Bomb Threat Email Case को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। स्कूलों, Stock Exchange और Metro Stations को बम से उड़ाने की धमकी देने वाले एक 28 वर्षीय युवक को Gujarat Police ने गिरफ्तार कर लिया है। फिलहाल पुलिस यह जांच कर रही है कि इन धमकी भरे ईमेल्स के पीछे उसका असली मकसद क्या था। शुरुआती जांच में सामने आया है कि सभी धमकियां Hoax Bomb Threat यानी झूठी निकलीं।

    Mumbai-Bomb-Threat-Case-hoax-email-news

    Gujarat Police ने आरोपी को किया गिरफ्तार

    पुलिस के मुताबिक आरोपी को Ahmedabad की Cyber Police ने 1 मार्च को गिरफ्तार किया। जांच में पता चला कि उसने सिर्फ मुंबई ही नहीं बल्कि देश के कई शहरों में ईमेल भेजकर Bomb Blast Threat दी थी।

    इन शहरों में शामिल हैं:

    • Mumbai
    • Delhi
    • Punjab
    • Ahmedabad

    पुलिस का कहना है कि आरोपी ने अलग-अलग संस्थानों और सार्वजनिक जगहों को निशाना बनाते हुए धमकी भरे ईमेल भेजे थे।

    Mumbai के Malad-Goregaon इलाके में भेजे थे ईमेल

    मुंबई में यह मामला Dindoshi Police Station के अधिकार क्षेत्र में दर्ज हुआ था।

    पुलिस के अनुसार आरोपी ने 26 फरवरी को ईमेल भेजकर धमकी दी थी कि स्कूलों, Stock Exchange और Metro Stations पर बम धमाके होंगे।

    ये सभी संस्थान मुख्य रूप से Malad-Goregaon belt में आने वाले इलाकों से जुड़े बताए जा रहे हैं।

    सभी जगहों की हुई जांच, कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला

    ईमेल मिलने के बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां तुरंत अलर्ट हो गईं।

    पुलिस टीमों ने जिन जगहों को धमकी दी गई थी, वहां पूरी तरह से सर्च ऑपरेशन चलाया। हालांकि जांच के दौरान कहीं भी कोई विस्फोटक या संदिग्ध वस्तु नहीं मिली, जिससे साफ हो गया कि यह Hoax Bomb Threat था।

    Bhartiya Nyaya Sanhita के तहत दर्ज हुआ केस

    मुंबई पुलिस ने इस मामले में Bhartiya Nyaya Sanhita की धाराओं के तहत केस दर्ज किया है।

    अब Dindoshi Police आरोपी को मुंबई लाकर पूछताछ करने के लिए उसकी कस्टडी लेने की तैयारी कर रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या यह सब Prank था या इसके पीछे कोई और बड़ा मकसद था।

    पुलिस कर रही है Motive की जांच

    फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि आरोपी ने देशभर में इस तरह के Bomb Threat Emails क्यों भेजे।

    पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि:

    • क्या यह सिर्फ मजाक (Prank) था
    • या फिर किसी को डराने की कोशिश
    • या इसके पीछे कोई Cyber Crime Network जुड़ा है

    जांच एजेंसियां आरोपी के ईमेल अकाउंट, डिजिटल डिवाइस और इंटरनेट गतिविधियों की भी जांच कर रही हैं।


    FAQ (People Also Ask)

    1. Mumbai Bomb Threat Case में आरोपी कौन है?

    इस मामले में 28 वर्षीय युवक को गुजरात पुलिस ने गिरफ्तार किया है।

    2. आरोपी को कब और कहां गिरफ्तार किया गया?

    उसे 1 मार्च को Ahmedabad Cyber Police ने गिरफ्तार किया।

    3. मुंबई में धमकी कब दी गई थी?

    मुंबई में 26 फरवरी को ईमेल के जरिए धमकी दी गई थी।

    4. किन जगहों को Bomb Threat मिला था?

    स्कूलों, Stock Exchange और Metro Stations को बम धमाके की धमकी दी गई थी।

    5. क्या धमकी सच थी?

    नहीं, पुलिस जांच में यह Hoax Bomb Threat यानी झूठी धमकी निकली।

  • Mumbai Cyber Cell ने 71 साल के बुजुर्ग के ₹2.5 लाख लौटाए, Fake RTO e-Challan से हुआ था Online Fraud

    Mumbai Cyber Cell ने 71 साल के बुजुर्ग के ₹2.5 लाख लौटाए, Fake RTO e-Challan से हुआ था Online Fraud

    Mumbai के Andheri West में 71 वर्षीय senior citizen से Fake RTO e-Challan WhatsApp link के जरिए ₹2.5 lakh की ठगी हुई। Oshiwara Police Cyber Cell ने 1930 helpline और HDFC Bank की मदद से पूरा पैसा recover कर लिया।

    मुंबई: Mumbai में एक बार फिर online fraud का मामला सामने आया, लेकिन इस बार राहत की खबर भी है। Andheri West के Lokhandwala इलाके में रहने वाले 71 वर्षीय Ashok Dingrani को Fake RTO e-Challan WhatsApp link के जरिए ₹2.5 lakh की चपत लग गई थी। लेकिन Oshiwara Police Station के Cyber Cell ने फुर्ती दिखाते हुए पूरा पैसा वापस दिला दिया।

    🛑 Fake RTO e-Challan से Senior Citizen बना शिकार

    पुलिस के मुताबिक, Ashok Dingrani को WhatsApp पर एक मैसेज मिला जिसमें लिखा था कि उनके वाहन पर ₹2,000 का traffic fine पेंडिंग है। मैसेज में एक लिंक दिया गया था, जो बिल्कुल असली RTO e-challan जैसा दिख रहा था।

    बुजुर्ग ने मैसेज को असली समझकर लिंक पर क्लिक किया और वहां अपनी गाड़ी की डिटेल्स के साथ HDFC Bank का credit card details भर दिया। कुछ ही देर में उनके मोबाइल पर मैसेज आया कि उनके कार्ड से ₹2.5 lakh डेबिट हो चुके हैं।

    🚨 तुरंत Police Station पहुंचे, दर्ज कराई शिकायत

    जैसे ही उन्हें एहसास हुआ कि वे cyber fraud का शिकार हो गए हैं, वे तुरंत Oshiwara Police Station पहुंचे और शिकायत दर्ज कराई।

    Senior Police Inspector Sanjay Chavan के मार्गदर्शन में Cyber Team ने तुरंत कार्रवाई शुरू की।

    📞 1930 Helpline और National Cyber Crime Portal से मिली मदद

    पुलिस ने तुरंत National Cyber Crime Portal पर शिकायत दर्ज की और 1930 helpline पर अलर्ट जारी किया। बैंक से मिले transaction alert की जांच में पता चला कि रकम Croma को ट्रांसफर की गई थी।

    Cyber टीम ने तुरंत HDFC Bank के nodal officers से संपर्क किया और urgent email communication के जरिए transaction को hold करवाया। फुर्ती दिखाते हुए पूरा ₹2.5 lakh फ्रीज कर लिया गया और बाद में बुजुर्ग को refund कर दिया गया।

    ⚠️ Police Advisory: ऐसे Fake Links से रहें सावधान

    पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि WhatsApp या SMS पर आने वाले किसी भी Fake RTO e-Challan, traffic fine या government notice वाले लिंक पर क्लिक न करें।

    ✔️ केवल official government portal पर ही challan verify करें
    ✔️ कभी भी banking details या OTP शेयर न करें
    ✔️ Fraud होने पर तुरंत 1930 helpline पर कॉल करें


    ❓ FAQ Section

    Q1: Fake RTO e-Challan scam क्या है?
    यह एक online fraud है जिसमें WhatsApp या SMS के जरिए फर्जी challan लिंक भेजकर लोगों से banking details ली जाती है।

    Q2: अगर ऐसे scam का शिकार हो जाएं तो क्या करें?
    तुरंत 1930 helpline पर कॉल करें और National Cyber Crime Portal पर शिकायत दर्ज करें।

    Q3: क्या Mumbai Police पैसे वापस दिला सकती है?
    अगर तुरंत शिकायत की जाए और transaction freeze हो जाए तो recovery संभव है, जैसा इस केस में हुआ।

    Q4: Official RTO challan कैसे check करें?
    सिर्फ government के official website पर जाकर ही challan verify करें, किसी third-party link पर भरोसा न करें।

  • Malad Digital Arrest Scam: 6 दिन की ‘ऑनलाइन नजरबंदी’, 67 साल की महिला से ₹12 लाख ठगे

    Malad Digital Arrest Scam: 6 दिन की ‘ऑनलाइन नजरबंदी’, 67 साल की महिला से ₹12 लाख ठगे

    मुंबई के मालाड में 67 वर्षीय महिला ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम का शिकार, जालसाजों ने फर्जी कोर्ट ऑर्डर और पुलिस बनकर 6 दिन वीडियो कॉल पर रखकर ₹12 लाख RTGS से ट्रांसफर कराए। 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत, FIR दर्ज।

    मुंबई: मालाड इलाके में 67 साल की एक गृहिणी को ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर 12 लाख रुपये का चूना लगा दिया गया। जालसाज खुद को पुलिस और सेंट्रल एजेंसी अधिकारी बताकर छह दिन तक महिला को वीडियो कॉल पर “हाउस अरेस्ट” में रखते रहे। मामला तब खुला जब बेटी ने 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत की। पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    🔎 कैसे बिछाया गया Malad में जाल?

    पुलिस के मुताबिक महिला को व्हाट्सऐप वीडियो कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को Mumbai Police का अधिकारी बताया और प्रोफाइल फोटो में पुलिस का लोगो लगाया हुआ था। उसने कहा कि लखनऊ में महिला के नाम से खुला बैंक अकाउंट “जम्मू-कश्मीर में आतंकी फंडिंग” के लिए 17 करोड़ रुपये ट्रांसफर करने में इस्तेमाल हुआ है।

    उसे 10% कमीशन लेने और 10 साल तक की जेल की धमकी दी गई—यहीं से डर की शुरुआत हुई।

    📄 फर्जी दस्तावेज़, असली डर

    विश्वास जमाने के लिए आरोपियों ने कथित Supreme Court of India का आदेश, अरेस्ट वारंट और Reserve Bank of India (RBI) नोटिस के फर्जी कागज भेजे। महिला को कहा गया कि मामला “नेशनल सिक्योरिटी” से जुड़ा है, इसलिए परिवार को कुछ न बताएं।

    साइबर पुलिस का कहना है—यही तरीका है जिससे ठग पहले डर पैदा करते हैं और फिर भरोसा जीतते हैं।

    🏠 ‘डिजिटल हाउस अरेस्ट’ में 6 दिन

    महिला को लगातार वीडियो कॉल पर रहने को कहा गया, रोज़ रिपोर्ट करने को बोला गया—“मैं सुरक्षित हूं।” घबराने पर आरोपी उसे शांत कराता और “मदद” का भरोसा देता। इसी दौरान उसने महिला से सारी बैंक डिटेल्स निकलवा लीं।

    तीसरे दिन महिला से 12 लाख की FD तोड़कर “वेरिफिकेशन” के नाम पर कोयंबटूर के एक अकाउंट में RTGS से ट्रांसफर करा लिया गया।

    📞 ऐसे खुला मामला

    छह दिन बाद बेटी ने फोन चेक किया तो पूरा खेल समझ आया। तुरंत 1930 साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और संदिग्ध खातों की पड़ताल की जा रही है।

    🛑 साइबर सेफ्टी एडवाइजरी (जरूर पढ़ें)

    • किसी भी साइबर फ्रॉड की तुरंत शिकायत 1930 पर करें
    • पुलिस कभी भी WhatsApp पर “डिजिटल अरेस्ट” नहीं करती
    • कोई भी सरकारी एजेंसी “वेरिफिकेशन” के नाम पर पैसे ट्रांसफर नहीं करवाती
    • कोर्ट वारंट/नोटिस मैसेजिंग ऐप से नहीं भेजे जाते

    ❓ FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. डिजिटल अरेस्ट क्या होता है?
    👉 यह एक नया साइबर फ्रॉड तरीका है, जिसमें ठग खुद को पुलिस/एजेंसी बताकर वीडियो कॉल पर “नजरबंद” रखते हैं और पैसे ट्रांसफर करवाते हैं।

    Q2. क्या पुलिस WhatsApp पर अरेस्ट करती है?
    👉 नहीं। पुलिस कभी भी WhatsApp या वीडियो कॉल पर अरेस्ट नहीं करती।

    Q3. साइबर फ्रॉड होने पर क्या करें?
    👉 तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

    Q4. क्या पैसे वापस मिल सकते हैं?
    👉 जल्दी शिकायत करने पर बैंक अकाउंट फ्रीज होने की संभावना रहती है, जिससे रिकवरी संभव हो सकती है।

  • नकली ट्रेडिंग ऐप से 48.5 लाख की ठगी, मुंबई साइबर पुलिस ने तीन आरोपियों को पकड़ा

    नकली ट्रेडिंग ऐप से 48.5 लाख की ठगी, मुंबई साइबर पुलिस ने तीन आरोपियों को पकड़ा

    मुंबई के बोरीवली के व्यापारी से नकली ट्रेडिंग ऐप और WhatsApp ग्रुप के जरिए 48.5 लाख की साइबर ठगी। नॉर्थ साइबर पुलिस ने पुणे से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया।

    मुंबई: साइबर पुलिस ने नकली शेयर मार्केट ट्रेडिंग ऐप स्कैम का बड़ा खुलासा करते हुए पुणे के तीन युवकों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने बोरीवली के एक बिजनेसमैन को WhatsApp स्टॉक टिप्स ग्रुप और नकली ट्रेडिंग ऐप के जरिए 48.50 लाख रुपये की ठगी का शिकार बनाया। पुलिस ने बैंक ट्रांजैक्शन, मोबाइल नंबर और डिजिटल सबूतों के आधार पर कार्रवाई की है। मामले की आगे जांच जारी है।

    📍 कैसे शुरू हुई ठगी की कहानी

    पीड़ित, 43 वर्षीय कारोबारी, बीकेसी के डायमंड मार्केट में एग्जीक्यूटिव ऑफिसर के तौर पर काम करता है।
    अक्टूबर 2025 में उसे एक अंजान महिला का कॉल आया, जिसने अपना नाम “रिया” बताया और खुद को SEBI से जुड़े ब्रोकर्स के साथ काम करने वाला बताया।

    इसके बाद पीड़ित को “Daily Recommendations 602” नाम के WhatsApp ग्रुप में जोड़ा गया, जहां रोज़

    • शेयर टिप्स
    • IPO अपडेट
    • QIB इन्वेस्टमेंट
    • मुनाफे के फर्जी स्क्रीनशॉट

    शेयर किए जाते थे।

    📲 VIP ग्रुप और फेक ट्रेडिंग ऐप का जाल

    विश्वास बढ़ाने के लिए पीड़ित को बिना अनुमति “VIP Study Group” में भी जोड़ दिया गया।
    यहां उसे एक लिंक भेजकर TMGPLUS नाम का ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड करवाया गया।

    यह ऐप दिखने में असली ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म जैसा था और उसमें

    • फर्जी मुनाफा
    • बढ़ती हुई रकम
      दिखाई जाती थी, जिससे पीड़ित और ज्यादा निवेश करने लगा।

    💰 48.50 लाख रुपये कैसे निकाले गए

    पुलिस के अनुसार,
    18 नवंबर से 12 दिसंबर 2025 के बीच पीड़ित ने

    • IMPS
    • NEFT
    • RTGS

    के जरिए 48.50 लाख रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किए।

    शुरुआत में छोटी रकम निकालने दी गई, ताकि भरोसा बने।
    लेकिन जब बड़ी रकम निकालने की कोशिश की गई, तो अकाउंट ब्लॉक कर दिया गया।

    🧾 IPO अलॉटमेंट का बहाना

    जब पीड़ित ने अपनी रकम और मुनाफा निकालना चाहा, तो आरोपियों ने कहा कि

    • पैसा IPO अलॉटमेंट में फंसा है
    • रकम रिलीज करने के लिए 50 लाख रुपये और जमा करने होंगे

    इसके बाद पीड़ित को शक हुआ और उसने

    • साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत की
    • फिर पुलिस से संपर्क किया।

    👮‍♂️ मुंबई पुलिस की कार्रवाई कैसे हुई

    बैंक ट्रांजैक्शन, WhatsApp ग्रुप्स, मोबाइल नंबर और डिजिटल ट्रेल की तकनीकी जांच के बाद
    नॉर्थ साइबर पुलिस स्टेशन की टीम ने
    30 जनवरी 2026 को पुणे के अंबेगांव पुलिस स्टेशन की मदद से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया।

    टीम का नेतृत्व

    • इंस्पेक्टर किरण आहेर
    • एपीआई सुदर्शन पाटिल

    ने किया।

    🧑‍⚖️ गिरफ्तार आरोपी कौन हैं

    पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों के नाम हैं:

    • अमर बापू शिंदे (31)
    • प्रशांत सुनील कडव (33)
    • प्रणिल संजय राठोड (25)

    तीनों पुणे के रहने वाले हैं और पढ़े-लिखे हैं।

    🔍 आरोपियों की भूमिका

    पुलिस जांच में सामने आया कि:

    • शिंदे ने अपने बैंक अकाउंट उपलब्ध कराए
    • कडव ने मिडलमैन बनकर दूसरे अकाउंट्स जुटाए
    • राठोड ने खातों से पैसा निकालकर मास्टरमाइंड तक पहुंचाया

    तीनों को हर ट्रांजैक्शन पर कमीशन मिलता था।

    🏦 33 लाख का अहम ट्रांजैक्शन ट्रेस

    पुलिस ने RBL बैंक के एक अकाउंट से जुड़े
    33 लाख रुपये के ट्रांजैक्शन को ट्रेस किया,
    जो Sunenergier Solutions Pvt Ltd, पुणे के नाम पर रजिस्टर्ड था।

    इससे तीनों की संलिप्तता पुख्ता हुई।

    ⚠️ पुलिस की जनता से अपील

    मुंबई साइबर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि:

    • अनजान WhatsApp स्टॉक टिप्स ग्रुप से दूर रहें
    • किसी भी ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसकी जांच करें
    • बिना वेरिफिकेशन निवेश न करें

    ❓ FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

    Q1. ठगी की रकम कितनी है?
    👉 48.50 लाख रुपये।

    Q2. ठगी कैसे की गई?
    👉 WhatsApp ग्रुप और फेक ट्रेडिंग ऐप के जरिए।

    Q3. आरोपी कहां के रहने वाले हैं?
    👉 पुणे के।

    Q4. शिकायत कहां दर्ज की गई थी?
    👉 साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 और नॉर्थ साइबर पुलिस स्टेशन।

    Q5. क्या जांच अभी जारी है?
    👉 हां, मास्टरमाइंड और बाकी आरोपियों की तलाश जारी है।

  • कांदिवली में मोबाइल छीनकर UPI से ₹76,269 उड़ाए

    कांदिवली में मोबाइल छीनकर UPI से ₹76,269 उड़ाए

    मुंबई के कांदिवली वेस्ट में मोबाइल स्नैचिंग के बाद साइबर फ्रॉड का सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां चोरी हुए फोन से युवक के बैंक खाते से ₹76,269 UPI ट्रांजैक्शन कर निकाल लिए गए। पुलिस जांच में जुटी है।

    मुंबई: मोबाइल स्नैचिंग के बाद डिजिटल ठगी का नया और खतरनाक ट्रेंड सामने आ रहा है। कांदिवली वेस्ट में एक युवक का मोबाइल फोन छीने जाने के बाद उसी फोन का UPI इस्तेमाल कर आरोपियों ने उसके बैंक खाते से ₹76,269 निकाल लिए। इतना ही नहीं, चोरों ने व्हाट्सऐप पर खुद को पीड़ित बताकर रिश्तेदार से भी पैसे मंगवा लिए। कांदिवली पुलिस ने मोबाइल स्नैचिंग और साइबर फ्रॉड का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    मुंबई में बढ़ती मोबाइल स्नैचिंग और UPI द्वारा डिजिटल फ्रॉड की वारदातें

    देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में अब सड़क पर मोबाइल छीनना ही अपराधियों का मकसद नहीं रह गया है। मोबाइल हाथ लगते ही वे सीधे डिजिटल बैंकिंग और UPI के जरिए खातों पर हाथ साफ कर रहे हैं। कांदिवली की यह घटना इसी बढ़ते साइबर क्राइम पैटर्न की एक बड़ी मिसाल है, जिसने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

    पीड़ित कौन है और क्या करता है?

    पुलिस के मुताबिक शिकायतकर्ता का नाम अंकितकुमार वैकुंठ तिवारी (24) है। वह टीवी सीरियल इंडस्ट्री में लाइट मैन के तौर पर काम करता है।
    12 जनवरी 2026 की रात कांदिवली वेस्ट के भूत बंगला, गार्डन रिट्रीट कॉम्प्लेक्स में एक सीरियल का प्रोमो शूट चल रहा था, जो 13 जनवरी तड़के करीब 3 बजे खत्म हुआ।

    सुबह-सुबह हुआ मोबाइल स्नैचिंग का शिकार

    शूट खत्म होने के बाद अंकितकुमार अपने पॉइंसुर इलाके स्थित घर की ओर पैदल जा रहा था।
    करीब सुबह 4:05 बजे, शताब्दी अस्पताल के पास अचानक बाइक पर सवार दो अज्ञात युवकों ने उसके हाथ से मोबाइल फोन झपट लिया और तेज़ रफ्तार में फरार हो गए।
    अंधेरा और बाइक की रफ्तार इतनी तेज़ थी कि वह वाहन का नंबर तक नोट नहीं कर पाया।

    ATM पहुंचा तो खुला खाते से पैसे उड़ने का राज

    घटना के अगले दिन जब अंकितकुमार ATM गया, तो उसे मैसेज मिला कि उसका ATM PIN गलत है।
    इसके बाद 15 जनवरी को वह बैंक शाखा पहुंचा, जहां अकाउंट स्टेटमेंट देखने पर उसके होश उड़ गए।
    13 से 15 जनवरी के बीच UPI ट्रांजैक्शन के ज़रिए ₹69,269 उसके खाते से निकाले जा चुके थे।

    व्हाट्सऐप पर भावुक मैसेज भेजकर रिश्तेदार से भी पैसे ठगे

    आरोपियों की चालाकी यहीं नहीं रुकी।
    चोरी किए गए मोबाइल से उन्होंने अंकितकुमार बनकर उसके बहनोई पवन मिश्रा को व्हाट्सऐप पर भावुक मैसेज भेजे और पैसों की मदद मांगी।
    मैसेज असली समझकर पवन मिश्रा ने ₹8,000 ट्रांसफर कर दिए, जिसे भी आरोपियों ने तुरंत निकाल लिया।
    इस तरह कुल रकम ₹76,269 हो गई।

    पुलिस की कार्रवाई और जांच की दिशा

    कांदिवली पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ

    • मोबाइल स्नैचिंग
    • साइबर फ्रॉड
      की धाराओं में केस दर्ज किया है।

    पुलिस आसपास के इलाकों के CCTV फुटेज खंगाल रही है और मोबाइल के IMEI नंबर के ज़रिए फोन की लोकेशन ट्रेस करने की कोशिश की जा रही है।

    पुलिस की अपील: ऐसे रखें खुद को सुरक्षित

    वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार मुंबई में मोबाइल छीने जाने के बाद डिजिटल ठगी की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं।
    लोगों से अपील की गई है कि:

    • मोबाइल में मजबूत लॉक/बायोमेट्रिक जरूर रखें
    • बैंकिंग और UPI ऐप्स में अतिरिक्त सिक्योरिटी ऑन रखें
    • किसी भी संदिग्ध कॉल या मैसेज पर तुरंत भरोसा न करें
    • मोबाइल चोरी होते ही बैंक और पुलिस को सूचना दें

    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1: यह घटना कहां हुई?
    👉 मुंबई के कांदिवली वेस्ट इलाके में, शताब्दी अस्पताल के पास।

    Q2: कुल कितने पैसे निकाले गए?
    👉 कुल ₹76,269।

    Q3: पैसे किस तरह निकाले गए?
    👉 UPI ट्रांजैक्शन और व्हाट्सऐप ठगी के ज़रिए।

    Q4: पुलिस क्या कार्रवाई कर रही है?
    👉 CCTV फुटेज की जांच और IMEI नंबर से मोबाइल ट्रेस किया जा रहा है।

    Q5: मोबाइल चोरी होने पर क्या करें?
    👉 तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराएं और बैंक/UPI सेवाएं ब्लॉक करवाएं।

  • फर्जी ट्रैफिक चालान WhatsApp स्कैम: मालाड के कारोबारी से 21 लाख की ठगी

    फर्जी ट्रैफिक चालान WhatsApp स्कैम: मालाड के कारोबारी से 21 लाख की ठगी

    Mumbai Cyber Crime News: मालाड के एक कारोबारी से फर्जी RTO ई-चालान APK भेजकर 21 लाख रुपये की साइबर ठगी। नॉर्थ साइबर पुलिस ने सूरत के युवक को किया गिरफ्तार।

    मुंबई: साइबर ठगी का एक और गंभीर मामला सामने आया है, जहां मालाड के एक कारोबारी को WhatsApp पर भेजे गए फर्जी ट्रैफिक ई-चालान के जरिए 21 लाख रुपये से ज्यादा की चपत लगा दी गई। मुंबई नॉर्थ साइबर पुलिस ने इस मामले में सूरत के 25 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया है, जो खुद को RTO बताकर लोगों को ठगने वाले साइबर गिरोह का अहम सदस्य बताया जा रहा है।

    WhatsApp पर आया फर्जी RTO चालान

    पुलिस के मुताबिक, 42 वर्षीय पीड़ित कारोबारी नवंबर महीने में गुजरात में एक पारिवारिक शादी में शामिल होने गया था। इसी दौरान उसके WhatsApp पर एक अनजान नंबर से “RTO Challan” नाम की फाइल आई। यह फाइल असल में एक APK (Android Package Kit) थी, जिसे खोलते ही मोबाइल फोन हैक हो गया।

    APK फाइल से मोबाइल और बैंक अकाउंट पर कब्जा

    जांच में सामने आया है कि जैसे ही कारोबारी ने फर्जी चालान फाइल डाउनलोड की, ठगों को उसके मोबाइल का पूरा एक्सेस मिल गया। इसके बाद आरोपियों ने उसके बैंक अकाउंट, UPI और अन्य डिजिटल पेमेंट ऐप्स से 21 लाख रुपये से ज्यादा की रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर ली।

    सूरत का युवक गिरफ्तार, साइबर गिरोह से कनेक्शन

    मुंबई नॉर्थ साइबर पुलिस ने जांच के बाद हार्दिक अशोकभाई बोर्डा (25) को गिरफ्तार किया है, जो गुजरात के सूरत का रहने वाला है। पुलिस के अनुसार आरोपी बीकॉम का छात्र है और ऑनलाइन तौल मशीन (Weighing Machine) बेचने का कारोबार करता था।

    पुलिस का कहना है कि आरोपी एक संगठित साइबर फ्रॉड रैकेट का प्रमुख सदस्य था, जो खुद को RTO अधिकारी बताकर लोगों को निशाना बनाता था।

    RTO के नाम पर ठगी का नया तरीका

    पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी और उसका गिरोह लोगों को डराने के लिए ट्रैफिक चालान का सहारा लेता था।

    • WhatsApp पर APK फाइल भेजी जाती
    • फाइल खोलते ही मोबाइल हैक
    • बैंक और UPI से पैसे उड़ाए जाते

    इस तरीके से कई लोगों को निशाना बनाया गया है।

    जांच जारी, अन्य आरोपियों की तलाश

    पुलिस ने बताया कि आरोपी से पूछताछ जारी है और गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान की जा रही है। बैंक ट्रांजैक्शन, मोबाइल डेटा और डिजिटल सबूतों की गहन जांच की जा रही है।

    पुलिस की चेतावनी: ऐसे रहें सतर्क

    साइबर पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि—

    • अनजान नंबर से आई APK या लिंक न खोलें
    • RTO या सरकारी चालान केवल आधिकारिक वेबसाइट/ऐप पर ही चेक करें
    • किसी भी संदिग्ध मैसेज की तुरंत साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करें

    FAQ Section

    ❓ यह ठगी कैसे की गई?

    ➡️ WhatsApp पर फर्जी RTO चालान APK भेजकर मोबाइल हैक किया गया।

    ❓ कितनी रकम की ठगी हुई?

    ➡️ करीब 21 लाख रुपये

    ❓ आरोपी कौन है?

    ➡️ सूरत का 25 वर्षीय युवक, बीकॉम छात्र।

    ❓ क्या पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया है?

    ➡️ हां, मुंबई नॉर्थ साइबर पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया है।