Category: Cyber Security

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  • Mumbai Cyber Crime: MGL का फर्जी कॉल और ‘Digital Arrest’ का डर, Senior Citizens से ₹14.48 लाख की ठगी; 3 गिरफ्तार

    Mumbai Cyber Crime: MGL का फर्जी कॉल और ‘Digital Arrest’ का डर, Senior Citizens से ₹14.48 लाख की ठगी; 3 गिरफ्तार

    मुंबई में दो cyber fraud मामलों में senior citizens से ₹14.48 लाख की ठगी का आरोप है। Dahisar Police ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया।

    Mumbai Crime News: मुंबई में senior citizens को निशाना बनाकर किए गए cyber fraud के दो अलग-अलग मामलों में Dahisar Police ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। दोनों मामलों में पीड़ितों से कुल ₹14.48 लाख की ठगी का आरोप है। एक मामले में 68 वर्षीय Borivali निवासी को Mahanagar Gas Limited MGL का प्रतिनिधि बनकर फोन किया गया और gas bill update करने के नाम पर APK file install कराई गई। दूसरे मामले में 71 वर्षीय Dahisar महिला को money-laundering case में फंसाने और arrest करने की धमकी देकर ₹4.5 लाख transfer कराए गए।

    पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि गिरफ्तार आरोपियों की भूमिका इन मामलों तक सीमित थी या इनके पीछे कोई बड़ा cyber fraud network भी सक्रिय है।

    ₹9.98 लाख की ठगी: MGL अधिकारी बनकर किया फोन

    पहला मामला Borivali East में रहने वाले 68 वर्षीय senior citizen से जुड़ा है। पुलिस के मुताबिक, 25 जुलाई को उन्हें एक व्यक्ति का फोन आया। उसने अपना नाम Vinay Sharma बताया और खुद को Mahanagar Gas Limited का प्रतिनिधि बताया।

    कॉलर ने कथित तौर पर senior citizen से कहा कि उनका gas connection बंद हो सकता है और bill details update करनी होंगी।

    इसके बाद उन्हें एक APK file भेजी गई। कथित तौर पर बताया गया कि gas bill की जानकारी update करने के लिए इस application को mobile में install करना जरूरी है।

    Senior citizen ने APK install कर ली। इसके बाद पुलिस को संदेह है कि आरोपियों ने उनके mobile और banking activity तक अनधिकृत पहुंच हासिल की और transactions के जरिए उनके बैंक खातों से करीब ₹9.98 लाख निकाल लिए।

    Bank transactions ने खोला आरोपियों तक पहुंचने का रास्ता

    मामले की जांच के दौरान पुलिस ने कथित money trail को track किया।

    पुलिस के अनुसार, करीब ₹3.49 लाख एक Canara Bank account तक पहुंचे, जिसे Aryan Rajesh Gupta (21) से जोड़ा गया।

    इसके अलावा करीब ₹2 लाख एक ICICI Bank account में पाए गए, जिसे Ankit Sanjay Tiwari (24) से संबंधित बताया गया।

    इसके बाद पुलिस ने Jogeshwari निवासी Aryan Rajesh Gupta और Vasai निवासी Ankit Sanjay Tiwari को गिरफ्तार किया।

    पुलिस को आशंका है कि इन bank accounts का इस्तेमाल कथित cyber fraud से प्राप्त रकम को receive और handle करने के लिए किया गया।

    Dahisar Police Station में इस मामले में 2 अगस्त को Bharatiya Nyaya Sanhita और Information Technology Act की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।

    दूसरा मामला: 71 वर्षीय महिला को बनाया ‘Digital Arrest’ का शिकार

    दूसरा मामला Dahisar की 71 वर्षीय महिला से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, 2 और 3 जुलाई के बीच महिला को ऐसे लोगों के calls आए, जिन्होंने खुद को senior police officials बताया।

    इनमें से एक व्यक्ति ने कथित तौर पर अपना नाम Rajesh Mishra बताया और महिला से कहा कि उनके खिलाफ money-laundering का मामला दर्ज हुआ है।

    कॉल करने वालों ने कथित तौर पर महिला को arrest करने की धमकी दी। पुलिस के अनुसार, इसके बाद WhatsApp video calls के जरिए महिला को लगातार निगरानी में रहने का दबाव बनाया गया।

    आरोपियों ने कथित तौर पर महिला के bank accounts और balances की जानकारी भी हासिल की।

    Arrest के डर से महिला ने आरोपियों के निर्देश पर ₹4.5 लाख एक IndusInd Bank account में transfer कर दिए। यह account Mahakal Enterprises से जुड़ा बताया गया है।

    Email ID और mobile phone की जांच से आरोपी तक पहुंची पुलिस

    इस मामले की जांच में पुलिस ने उस bank account और उससे जुड़े email ID की जानकारी हासिल की।

    Technical investigation और field-level investigation के बाद पुलिस ने Dhirajkumar Kesaram Prajapati (28) को गिरफ्तार किया।

    पुलिस का आरोप है कि ₹4.5 लाख की रकम से जुड़े bank account और email ID का संबंध Prajapati के mobile phone से सामने आया। पुलिस के अनुसार, email ID को उसके mobile phone का इस्तेमाल करके बनाया और access किया गया था।

    मामले में पुलिस अब अन्य संभावित आरोपियों की तलाश कर रही है।

    दो तरीके, एक निशाना—Senior Citizens

    Dahisar Police की इन दो कार्रवाइयों से cyber fraud के दो अलग-अलग तरीके सामने आते हैं।

    पहले मामले में fraudsters ने MGL के नाम और gas bill update का सहारा लेकर APK application install कराई।

    दूसरे मामले में आरोपियों ने police और money-laundering case का डर पैदा करके महिला से पैसे transfer कराए।

    दोनों मामलों में तरीका अलग था, लेकिन senior citizens को भरोसे और डर के जरिए financial fraud का शिकार बनाया गया।

    APK File: WhatsApp पर आई तो गलती से भी install न करें

    Cyber fraudsters कई बार bank KYC, electricity bill, gas connection, delivery, government service या account update जैसे बहानों का इस्तेमाल कर APK file भेजते हैं।

    किसी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजी गई APK file को mobile में install नहीं करना चाहिए।

    अगर कोई व्यक्ति application install करने का दबाव बनाए, तो पहले संबंधित company या विभाग की official website या customer-care channel से इसकी पुष्टि करें।

    ‘Digital Arrest’ के नाम पर डराने वालों से रहें सावधान

    अगर कोई व्यक्ति phone या video call पर खुद को police अधिकारी बताकर criminal case, money laundering या arrest की धमकी देता है और पैसे transfer करने को कहता है, तो तुरंत सतर्क हो जाएं।

    ऐसे मामलों में caller को bank details, OTP, PIN, password या अन्य confidential information नहीं देनी चाहिए।

    सबसे जरूरी बात—डर के कारण तुरंत पैसा transfer न करें।

    Cyber Fraud हुआ है तो 1930 पर तुरंत शिकायत करें

    अगर online financial fraud हो गया है, तो तुरंत 1930 पर शिकायत करें। National Cyber Crime Reporting Portal के जरिए भी cybercrime report की जा सकती है।

    Financial fraud में शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है, इसलिए घटना के बाद शिकायत करने में देरी नहीं करनी चाहिए।

    Dahisar Police की जांच जारी

    पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई DCP Gajanan Deshmane, North Division और ACP Jayraj Ranware, Dahisar Division के मार्गदर्शन में की गई।

    Dahisar cyber police के API Sandeep Pachangne तथा investigation और cyber teams ने technical और field investigation के जरिए दोनों मामलों की जांच की।

    मुंबई पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों के कथित links की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास जारी है कि इन cyber fraud मामलों में और कौन लोग शामिल हो सकते हैं।

    महत्वपूर्ण: इस रिपोर्ट में आरोपियों के संबंध में दी गई जानकारी पुलिस जांच और पुलिस द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है। आरोप साबित होना अभी और आगे न्यायिक प्रक्रिया का विषय है।

  • देश की बड़ी खबर: साइबर क्राइम के मास्टरमाइंड को मुंबई पुलिस ने किया गिरफ्तार

    देश की बड़ी खबर: साइबर क्राइम के मास्टरमाइंड को मुंबई पुलिस ने किया गिरफ्तार

    मुंबई पुलिस ने फर्जी APK फाइलें बनाकर साइबर ठगों को सप्लाई करने वाले कथित मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार 92 APK फाइलों से ₹63 करोड़ की ठगी हुई, जबकि 967 नई फाइलों से ₹1000 करोड़ तक की संभावित साइबर ठगी की आशंका थी।

    मुंबई: मुंबई पुलिस ने देशभर में फैले एक बड़े साइबर अपराध नेटवर्क का खुलासा करते हुए फर्जी APK फाइलें तैयार कर साइबर ठगों तक पहुंचाने वाले कथित मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी की बनाई गई APK फाइलों का इस्तेमाल कर अब तक करीब ₹63 करोड़ की साइबर ठगी की जा चुकी है। जांच के दौरान आरोपी के पास से 967 नई APK फाइलें भी बरामद हुई हैं। पुलिस का कहना है कि यदि इनका इस्तेमाल हो जाता, तो संभावित ठगी का आंकड़ा ₹1000 करोड़ तक पहुंच सकता था।

    मुंबई पुलिस की यह कार्रवाई डीबी मार्ग पुलिस स्टेशन में दर्ज एक साइबर फ्रॉड मामले की जांच के दौरान सामने आई है। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी है।

    कैसे खुला पूरे नेटवर्क का राज?

    इस मामले की शुरुआत दक्षिण मुंबई के एक व्यक्ति के साथ हुई साइबर ठगी से हुई। पीड़ित को महानगर गैस (MGL) का बिल भरने के नाम पर एक लिंक भेजा गया। लिंक पर क्लिक कर APK फाइल डाउनलोड करते ही उसके बैंक खाते से करीब ₹70 हजार निकाल लिए गए।

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    मामले की जांच करते-करते मुंबई पुलिस सीधे उस व्यक्ति तक पहुंची, जो साइबर अपराधियों के लिए फर्जी APK फाइलें तैयार करता था। इसी गिरफ्तारी के बाद पूरे नेटवर्क की परतें खुलनी शुरू हुईं।

    DCP राजसुधा आर. ने क्या बताया?

    मुंबई पुलिस की डीसीपी राजसुधा आर. के अनुसार गिरफ्तार आरोपी केवल फर्जी APK फाइलें ही नहीं बनाता था, बल्कि साइबर ठगों को संभावित शिकारों का डेटा भी उपलब्ध कराता था।

    पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 37,200 लोगों का बैंकिंग और व्यक्तिगत डेटा भी बरामद किया है। इस डेटा की फॉरेंसिक जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि किन-किन लोगों को निशाना बनाया गया।

    जांच में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े

    मुंबई पुलिस के अनुसार जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं।

    • 92 फर्जी APK फाइलें देशभर के साइबर अपराधियों को बेची गईं।
    • इनसे जुड़े मामलों में करीब ₹63 करोड़ की साइबर ठगी सामने आई।
    • देशभर से 2,993 शिकायतें दर्ज हुईं।
    • इनमें 512 शिकायतें महाराष्ट्र और मुंबई की हैं।
    • आरोपी के पास से 967 नई APK फाइलें बरामद हुईं, जिनके इस्तेमाल से बड़े पैमाने पर साइबर ठगी की आशंका जताई गई है।

    पुलिस का कहना है कि यह जांच अभी जारी है और आगे और भी खुलासे हो सकते हैं।

    साइबर ठगों को ऐसे बेचता था APK फाइलें

    जांच के अनुसार आरोपी प्रत्येक APK फाइल ₹15,000 से ₹20,000 में बेचता था। इन फाइलों की वैधता लगभग 40 से 45 दिन होती थी। समय पूरा होने पर साइबर अपराधियों को नई APK फाइल खरीदनी पड़ती थी।

    पुलिस के मुताबिक यह एक संगठित नेटवर्क था, जिसमें तकनीकी सहायता उपलब्ध कराकर विभिन्न राज्यों में साइबर ठगी को अंजाम दिया जाता था।

    कैसे काम करती हैं ये फर्जी APK फाइलें?

    साइबर अपराधी लोगों को गैस बिल, RTO चालान, KYC अपडेट, बिजली बिल, बैंक वेरिफिकेशन या अन्य सरकारी सेवाओं के नाम पर लिंक भेजते थे।

    जैसे ही कोई व्यक्ति उस लिंक से APK फाइल डाउनलोड और इंस्टॉल करता, उसके मोबाइल की कई महत्वपूर्ण अनुमतियां ठगों के हाथ में चली जाती थीं। इसके बाद बैंकिंग जानकारी, OTP और अन्य संवेदनशील डेटा का दुरुपयोग कर खाते से पैसे निकाल लिए जाते थे।

    कौन है गिरफ्तार आरोपी?

    मुंबई पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी की पहचान एस.के. मंडल के रूप में हुई है। उसे पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया गया है। वह मूल रूप से झारखंड के गिरिडीह का रहने वाला है।

    पुलिस के मुताबिक आरोपी ने साइंस से पढ़ाई की थी और सोशल मीडिया तथा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए कोडिंग सीखी। इसके बाद उसने फर्जी APK फाइलें तैयार कर साइबर अपराधियों को बेचना शुरू कर दिया।

    अब आगे क्या होगा?

    मुंबई पुलिस अब उन साइबर अपराधियों की पहचान कर रही है जिन्होंने इस आरोपी से APK फाइलें खरीदी थीं। जब्त किए गए लैपटॉप, मोबाइल, हार्ड डिस्क और डिजिटल रिकॉर्ड की फॉरेंसिक जांच की जा रही है। यदि जांच में अन्य राज्यों या अंतरराज्यीय गिरोहों के लिंक सामने आते हैं, तो संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    आम लोगों के लिए जरूरी सलाह

    साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी अनजान लिंक से APK फाइल डाउनलोड न करें। Android फोन में केवल Google Play Store जैसे अधिकृत प्लेटफॉर्म से ही ऐप इंस्टॉल करें। गैस, बैंक, बिजली, KYC या सरकारी विभाग के नाम पर आए किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी आधिकारिक वेबसाइट या हेल्पलाइन से पुष्टि जरूर करें।

    Official Sources

    1. Mumbai Policehttps://mumbaipolice.gov.in/
    2. National Cyber Crime Reporting Portal (I4C)https://cybercrime.gov.in/
    3. Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C), Ministry of Home Affairshttps://i4c.mha.gov.in/

    FAQ

    Q1. मुंबई पुलिस ने किसे गिरफ्तार किया है?

    मुंबई पुलिस ने फर्जी APK फाइलें बनाकर साइबर अपराधियों को बेचने वाले कथित मास्टरमाइंड एस.के. मंडल को गिरफ्तार किया है।

    Q2. APK फ्रॉड क्या होता है?

    यह ऐसा साइबर फ्रॉड है जिसमें फर्जी Android ऐप डाउनलोड करवाकर मोबाइल और बैंकिंग डेटा तक अनधिकृत पहुंच बनाई जाती है।

    Q3. अब तक कितनी साइबर ठगी सामने आई है?

    मुंबई पुलिस के अनुसार आरोपी की APK फाइलों से जुड़े मामलों में करीब ₹63 करोड़ की ठगी सामने आई है। पुलिस ने यह भी कहा है कि बरामद 967 नई फाइलों का इस्तेमाल होता तो संभावित ठगी का आंकड़ा ₹1000 करोड़ तक पहुंच सकता था।

    Q4. इस तरह की ठगी से कैसे बचें?

    केवल आधिकारिक ऐप स्टोर से ऐप डाउनलोड करें, किसी अनजान लिंक से APK फाइल इंस्टॉल न करें और बैंकिंग या KYC संबंधी संदेशों की आधिकारिक स्रोत से पुष्टि करें।

  • Mumbai Boss Scam: WhatsApp से 10.40 करोड़ की ठगी, 6 गिरफ्तार

    Mumbai Boss Scam: WhatsApp से 10.40 करोड़ की ठगी, 6 गिरफ्तार

    Mumbai Boss Scam में फर्जी WhatsApp प्रोफाइल से कंपनी के अधिकारी को फंसाकर 10.40 करोड़ रुपये ठगे गए। पुलिस ने 5.63 करोड़ रुपये फ्रीज किए।

    मुंबई: मुंबई क्राइम ब्रांच ने कथित WhatsApp इम्पर्सोनेशन से जुड़े एक बड़े ‘Boss Scam’ का खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार, एक कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी को उसके वरिष्ठ अधिकारी के नाम और तस्वीर वाले फर्जी WhatsApp अकाउंट से निर्देश भेजे गए, जिसके बाद 63 ट्रांजैक्शन में 10.40 करोड़ रुपये से अधिक की रकम ट्रांसफर हुई। मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है और 5.63 करोड़ रुपये से अधिक की रकम फ्रीज कराई गई है।

    मुंबई में साइबर ठगी का तरीका लगातार बदल रहा है। अब हर फ्रॉड में OTP, बैंकिंग पासवर्ड या फिशिंग लिंक की जरूरत नहीं पड़ती। मुंबई क्राइम ब्रांच के सामने आए इस मामले में कथित तौर पर ठगों ने तकनीकी हैकिंग के बजाय कंपनी के अंदर मौजूद भरोसे और वरिष्ठ अधिकारी के नाम का इस्तेमाल किया। इसी वजह से इस तरह की ठगी को ‘Boss Scam’ कहा जा रहा है।

    WhatsApp पर बॉस बनकर भेजे गए भुगतान के निर्देश

    पुलिस के अनुसार, आरोपी ने कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी से WhatsApp के जरिए संपर्क किया और खुद को कंपनी के डायरेक्टर के रूप में पेश किया। फर्जी प्रोफाइल पर वरिष्ठ अधिकारी की तस्वीर का इस्तेमाल किया गया था।

    कथित तौर पर आरोपी ने अधिकारी को बताया कि डायरेक्टर एक महत्वपूर्ण मीटिंग में व्यस्त हैं और कुछ जरूरी कारोबारी भुगतान तत्काल करने हैं। संदेशों को वास्तविक समझकर अधिकारी ने कंपनी के बैंक खाते से अलग-अलग खातों में रकम ट्रांसफर कर दी।

    जांच के अनुसार, इस तरह कुल 63 ट्रांजैक्शन में 10.40 करोड़ रुपये से अधिक की रकम ट्रांसफर हुई। बाद में जब अधिकारी ने वास्तविक डायरेक्टर से संपर्क किया, तब कथित धोखाधड़ी का खुलासा हुआ।

    इस मामले की खास बात यह है कि उपलब्ध जांच विवरण के अनुसार, ठगी का मुख्य तरीका किसी OTP या बैंकिंग क्रेडेंशियल को हासिल करना नहीं था। ठगों ने कथित तौर पर वरिष्ठ अधिकारी की पहचान और कारोबारी भरोसे का इस्तेमाल कर भुगतान के निर्देश मनवाए।

    5.63 करोड़ रुपये से अधिक की रकम फ्रीज

    शिकायत मिलने के बाद मुंबई क्राइम ब्रांच ने बैंकिंग ट्रेल और पैसों के लेन-देन की जांच शुरू की। जांच के दौरान रकम को अलग-अलग बैंक खातों में भेजे जाने का पता चला।

    पुलिस की कार्रवाई के बाद 5.63 करोड़ रुपये से अधिक की रकम विभिन्न बैंक खातों में फ्रीज कराई गई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने महाराष्ट्र, बिहार और दिल्ली से जुड़े संदिग्धों के खिलाफ कार्रवाई की और छह लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस कथित मास्टरमाइंड और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

    ठगी की रकम से खरीदा जाता था सोना

    जांच में कथित तौर पर ठगी की रकम को कई बैंक खातों के जरिए आगे भेजने और उसके बाद सोना खरीदने का तरीका सामने आया। पुलिस के अनुसार, इस प्रक्रिया का उद्देश्य पैसों के डिजिटल ट्रेल को जटिल बनाना और रकम की सीधी पहचान मुश्किल करना था।

    रिपोर्टों के मुताबिक, कथित तौर पर उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और महाराष्ट्र में अलग-अलग ज्वेलरी शोरूम से सोना खरीदा गया। जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि इस प्रक्रिया में किन लोगों और खातों का इस्तेमाल किया गया।

    पुलिस ने जांच के दौरान मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं। इन साक्ष्यों के आधार पर कथित मनी ट्रेल और आरोपियों के बीच संबंधों की जांच की जा रही है।

    बॉस स्कैम से कंपनियों को क्यों है बड़ा खतरा?

    इस तरह के साइबर फ्रॉड में अपराधी किसी CEO, Director या Senior Executive की पहचान का इस्तेमाल कर सकते हैं। कारोबारी माहौल में वरिष्ठ अधिकारी के नाम से आने वाले तत्काल भुगतान निर्देशों पर कर्मचारी कई बार बिना अतिरिक्त पुष्टि के भरोसा कर लेते हैं।

    इसी भरोसे का फायदा उठाकर कथित ठग:

    • वरिष्ठ अधिकारी के नाम और तस्वीर का इस्तेमाल कर सकते हैं
    • अलग WhatsApp नंबर को “Personal” या “Private Number” बता सकते हैं
    • तत्काल भुगतान का दबाव बना सकते हैं
    • कर्मचारी को निर्देश किसी अन्य व्यक्ति से साझा न करने को कह सकते हैं
    • रकम को कई बैंक खातों में भेजकर ट्रेल को जटिल बना सकते हैं

    मुंबई के इस मामले की जांच से यह संकेत मिलता है कि कंपनियों को केवल OTP और पासवर्ड आधारित साइबर सुरक्षा पर निर्भर रहने के बजाय Payment Verification Protocol भी मजबूत करना होगा।

    मुंबई पुलिस की कंपनियों से अपील

    ऐसे मामलों से बचने के लिए किसी भी वरिष्ठ अधिकारी के नाम से आए बड़े या असामान्य भुगतान निर्देश की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करनी चाहिए। केवल WhatsApp मैसेज, प्रोफाइल फोटो या नाम देखकर करोड़ों रुपये का भुगतान नहीं किया जाना चाहिए।

    कंपनियां बड़े भुगतान के लिए:

    • Two-Person Approval System लागू कर सकती हैं
    • भुगतान से पहले Voice या Video Call Verification कर सकती हैं
    • नए बैंक अकाउंट पर भुगतान के लिए अतिरिक्त मंजूरी ले सकती हैं
    • अचानक आए “Urgent” Payment Requests को दोबारा Verify कर सकती हैं
    • कर्मचारियों को Executive Impersonation और Boss Scam के बारे में प्रशिक्षित कर सकती हैं

    यदि कोई व्यक्ति साइबर वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार होता है, तो भारत सरकार के National Cyber Crime Reporting Portal के अनुसार तुरंत 1930 पर शिकायत करनी चाहिए और ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज करनी चाहिए। त्वरित रिपोर्टिंग से बैंकिंग चैनल के जरिए रकम को फ्रीज कराने की संभावना बढ़ सकती है।

    जांच जारी, मास्टरमाइंड की तलाश

    मुंबई क्राइम ब्रांच इस मामले में कथित नेटवर्क के अन्य सदस्यों और मास्टरमाइंड की भूमिका की जांच कर रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इसी तरह के WhatsApp इम्पर्सोनेशन मॉडल से अन्य कंपनियों या वरिष्ठ अधिकारियों को भी निशाना बनाया गया था।

    मामले में गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है और जांच पूरी होने तक आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष अदालत की प्रक्रिया के बाद ही तय होगा।

    मुंबई का यह कथित Boss Scam इस बात का संकेत है कि साइबर ठगी अब केवल OTP या फिशिंग लिंक तक सीमित नहीं रही। वरिष्ठ अधिकारियों की पहचान का इस्तेमाल कर भरोसे के जरिए किए जाने वाले फर्जी भुगतान से बचने के लिए कंपनियों को हर बड़े वित्तीय निर्देश की स्वतंत्र पुष्टि करनी चाहिए।

    Official Sources

    • Mumbai Police – Official Website — मुंबई पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट और साइबर क्राइम विभाग की जानकारी।
    • National Cyber Crime Reporting Portal — भारत सरकार का आधिकारिक साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल।
    • Cyber Crime Helpline 1930 — वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की तत्काल रिपोर्टिंग के लिए आधिकारिक हेल्पलाइन जानकारी।

    FAQ

    Boss Scam क्या होता है?

    Boss Scam में साइबर अपराधी CEO, Director या किसी वरिष्ठ अधिकारी की पहचान का इस्तेमाल कर कर्मचारी से भुगतान या संवेदनशील जानकारी हासिल करने की कोशिश करते हैं।

    इस मुंबई साइबर फ्रॉड में कितनी रकम की ठगी हुई?

    पुलिस जांच से जुड़े उपलब्ध विवरणों के अनुसार, कंपनी के खाते से 10.40 करोड़ रुपये से अधिक की रकम 63 ट्रांजैक्शन में ट्रांसफर हुई।

    क्या इस मामले में कोई रकम फ्रीज हुई है?

    हां। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 5.63 करोड़ रुपये से अधिक की रकम फ्रीज कराई गई है।

    साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत क्या करना चाहिए?

    तुरंत 1930 पर कॉल करें और National Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत दर्ज करें।

  • Mumbai Railway में Facial Recognition System से क्राइम कंट्रोल, मिनटों में आरोपी ट्रैक!

    Mumbai Railway में Facial Recognition System से क्राइम कंट्रोल, मिनटों में आरोपी ट्रैक!

    Mumbai Western Railway का Facial Recognition System (FRS) तेजी से अपराध सुलझा रहा है। जानिए कैसे CCTV और AI technology से criminals और missing persons को ट्रैक किया जा रहा है।

    मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई शहर में मुंबई लोकल रेलवे नेटवर्क में अब सुरक्षा का स्तर और मजबूत हो गया है। Western Railway ने Facial Recognition System (FRS) के जरिए अपराधियों को ट्रैक करने और missing लोगों को ढूंढने में बड़ी सफलता हासिल की है।

    हाल के महीनों में कई केस इस सिस्टम की मदद से तेजी से solve किए गए हैं।

    🚨 Recent Cases: मिनटों में आरोपी गिरफ्तार

    FRS की मदद से कई बड़े केस सुलझे:

    • एक Portuguese tourist को stalk करने वाले 2 आरोपी कुछ ही दिनों में पकड़े गए
    • Mumbai के Goregaon का 14 साल का लड़का, जो missing था, उसे राजस्थान में ट्रेस किया गया
    • Malad Railway Station पर professor पर चाकू से हमला करने वाला आरोपी 2 दिन में गिरफ्तार
    • Actor Saif Ali Khan पर हमले के केस में भी suspect को बाद में FRS से ट्रैक कर पकड़ा गया

    अधिकारियों के मुताबिक, ये सभी केस FRS technology की वजह से जल्दी solve हुए।

    🧠 FRS कैसे काम करता है? (How Facial Recognition Works)

    Facial Recognition System किसी भी इंसान के चेहरे की unique पहचान करता है—जैसे:

    • आंखों के बीच की दूरी
    • नाक का shape
    • चेहरे की बनावट

    इन सभी डेटा को digital code यानी “faceprint” में बदला जाता है।

    जैसे ही कोई suspect कैमरे में आता है, सिस्टम तुरंत alert भेज देता है।

    🎥 463 CCTV कैमरों का बड़ा नेटवर्क

    FRS सिस्टम Western Railway के 114 स्टेशनों पर लगे 463 CCTV cameras से जुड़ा है।

    यह नेटवर्क:

    • Churchgate Railway Station से लेकर Surat
    • और Jalgaon तक फैला हुआ है

    जैसे ही database में मौजूद चेहरा कैमरे में दिखता है, तुरंत control room और पुलिस को alert मिल जाता है।

    🔍 Investigation में बड़ा गेम चेंजर

    Portuguese tourist वाले केस में पुलिस पहले suspects को identify नहीं कर पाई थी।

    बाद में CCTV के screenshots को FRS में डाला गया, जहां एक आरोपी Marine Lines Railway Station पर पहचान में आ गया।

    इसी तरह Malad stabbing केस में आरोपी का daily travel pattern (सुबह Malad से आना, शाम को Marine Lines लौटना) ट्रैक किया गया—और इसी से गिरफ्तारी संभव हुई।

    👶 Missing Children: बच्चों को ढूंढने में बड़ी मदद

    भीड़भाड़ वाले स्टेशन जैसे:

    • Chhatrapati Shivaji Maharaj Terminus
    • Churchgate Railway Station

    यहां लोगों को पहचानना मुश्किल होता है।

    लेकिन अब:

    • देशभर की एजेंसियां missing बच्चों की फोटो Railway Protection Force के साथ शेयर करती हैं
    • FRS system उन्हें पहचानकर उनकी last location बता देता है
    • Low quality image होने पर भी multiple matches generate करता है

    📈 Data Report: हर साल बढ़ रहे केस

    RPF के डेटा के मुताबिक FRS से सुलझे केस:

    • 2024: 54 baggage theft, 3 robbery
    • 2025: 59 baggage theft, 5 bag snatching
    • 2026 (Feb तक): 15 baggage theft

    इसके अलावा हर दिन करीब 10–15 requests अलग-अलग पुलिस यूनिट्स से आती हैं।

    🇮🇳 India में तेजी से फैल रही Technology

    Western Railway भारत का पहला रेलवे नेटवर्क था जिसने FRS शुरू किया।

    अब इसे पूरे देश में expand किया जा रहा है।

    साथ ही Mumbai Police (5000+ cameras) भी अपने नेटवर्क को इससे जोड़ने की तैयारी कर रही है।

    🧾 NIA-CBI डेटा भी जुड़ा

    2024 में:

    • National Investigation Agency
    • Central Bureau of Investigation

    जैसी एजेंसियों के 10,000+ suspects images इस सिस्टम में upload किए गए।

    🎯 Goal: Safe Railway Travel

    अधिकारियों का कहना है कि इस सिस्टम का मुख्य उद्देश्य है:

    • passengers की safety बढ़ाना
    • crime prevention
    • faster investigation

    आने वाले समय में training और expansion के साथ यह सिस्टम और powerful बनने वाला है।

    🔗 सरकारी और ऑफिशियल लिंक


    FAQ (Frequently Asked Questions)

    Q1. Facial Recognition System (FRS) क्या है?
    यह एक AI-based technology है जो चेहरे की पहचान करके suspects और missing लोगों को ट्रैक करती है।

    Q2. Mumbai में FRS कहां इस्तेमाल हो रहा है?
    Western Railway के 114 स्टेशनों और 463 CCTV कैमरों में।

    Q3. क्या यह system accurate है?
    हाँ, यह multiple matches और confidence levels के साथ काफी accurate tracking देता है।

    Q4. इससे कौन-कौन से केस सुलझे?
    Stalking, stabbing, theft, missing children जैसे कई केस।

    Q5. क्या यह पूरे India में लागू होगा?
    हाँ, सरकार इसे धीरे-धीरे पूरे देश के रेलवे नेटवर्क में लागू कर रही है।

  • मुंबई ब्रेकिंग: कांदिवली पुलिस ने सेना के जवान को दिलाए 7.25 लाख रुपये, Online Investment Scam का बड़ा खुलासा

    मुंबई ब्रेकिंग: कांदिवली पुलिस ने सेना के जवान को दिलाए 7.25 लाख रुपये, Online Investment Scam का बड़ा खुलासा

    Mumbai Kandivali Cyber Cell ने Army soldier के साथ हुए ₹7.25 lakh online investment scam में पूरी रकम recover कर वापस दिलाई। जानिए कैसे हुई कार्रवाई, Cyber Crime Helpline 1930 की पूरी जानकारी।

    मुंबई: कांदिवली इलाके से एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है, जहां Cyber Crime के शिकार हुए भारतीय सेना के जवान को उनकी पूरी ठगी गई रकम वापस मिल गई है। Kandivali Police Cyber Cell ने तेजी से कार्रवाई करते हुए ₹7,25,000 की पूरी रकम recover कर पीड़ित के खाते में जमा कर दी।

    🪖 Army जवान से Online Investment के नाम पर ठगी

    कांदिवली पश्चिम, साईनगर निवासी श्री मनोज पाल, जो भारतीय सेना में कार्यरत हैं और वर्तमान में जम्मू-कश्मीर के उच्च क्षेत्र में देश की सेवा दे रहे हैं, अप्रैल 2025 में Online Investment Scam का शिकार हो गए थे।

    ठगों ने उन्हें “High Return Investment” का लालच देकर टप्पों में कुल ₹7,25,000 ऑनलाइन ट्रांसफर करवाए और बाद में संपर्क तोड़ दिया।

    📞 Cyber Helpline 1930 पर शिकायत, तुरंत हुई कार्रवाई

    घटना के बाद मनोज पाल ने तुरंत Cyber Crime Helpline 1930 पर शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत मिलते ही कांदिवली साइबर सेल हरकत में आई और मामले की जांच शुरू की गई।

    👉 आधिकारिक लिंक:

    🔍 Bank Accounts ट्रैक कर रकम को किया गया Hold

    कांदिवली साइबर सेल के सहायक पुलिस निरीक्षक दीपक कादबाने और उनकी टीम ने तुरंत जांच करते हुए उन सभी बैंक खातों का पता लगाया जहां ठगी की रकम ट्रांसफर की गई थी।

    👉 संबंधित बैंकों से संपर्क कर पूरी रकम को “Hold” कराया गया ताकि पैसे आगे ट्रांसफर न हो सकें।

    ⚖️ कोर्ट ऑर्डर के बाद पूरी रकम वापस

    इसके बाद बोरिवली के 17वें न्यायालय (प्रथम वर्ग न्यायाधीश) से आदेश प्राप्त कर पूरी ₹7,25,000 की रकम वापस मनोज पाल के बैंक खाते में जमा कर दी गई।

    यह कार्रवाई Cyber Crime मामलों में एक मिसाल मानी जा रही है।

    👮‍♂️ वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में बड़ी सफलता

    यह पूरी कार्रवाई वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में की गई:

    • पुलिस उपायुक्त (Zone 11) – श्री संदीप जाधव
    • सहायक पुलिस आयुक्त (मालवणी विभाग) – श्रीमती नीता पाडवी
    • वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक – करण सोनकवडे
    • पुलिस निरीक्षक (क्राइम) – शेखर शिंदे

    👉 टीम में शामिल अधिकारी:

    • API दीपक कादबाने
    • पुलिस हवलदार बाळकृष्ण खाडे
    • पुलिस कर्मचारी संकेत सावंत
    • महिला पुलिस कर्मचारी जयश्री तलवारे

    इन सभी ने मिलकर बेहद तेजी और सूझबूझ से काम करते हुए यह बड़ी सफलता हासिल की।

    🚨 Cyber Fraud से बचने के लिए जरूरी टिप्स

    • Unknown investment offers से दूर रहें
    • High return का लालच = Scam का संकेत
    • किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले जांच करें
    • तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें

    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. Cyber Fraud होने पर क्या करें?
    👉 तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत करें।

    Q2. क्या ठगी के पैसे वापस मिल सकते हैं?
    👉 हां, अगर समय रहते शिकायत की जाए तो बैंक ट्रांजैक्शन ट्रैक कर पैसे होल्ड किए जा सकते हैं।

    Q3. Investment Scam कैसे पहचानें?
    👉 High returns, unknown apps/websites, जल्दी पैसा कमाने का लालच – ये सभी Scam के संकेत हैं।

    Q4. Mumbai में Cyber Crime की शिकायत कहां करें?
    👉 मुंबई पुलिस की वेबसाइट या Cyber Cell में सीधे संपर्क करें।

  • मुंबई में मोबाइल का IMEI नंबर बदलने वाला गिरोह पकड़ा गया, क्राइम ब्रांच ने दो को किया गिरफ्तार

    मुंबई में मोबाइल का IMEI नंबर बदलने वाला गिरोह पकड़ा गया, क्राइम ब्रांच ने दो को किया गिरफ्तार

    मुंबई क्राइम ब्रांच ने पवई इलाके से दो लोगों को गिरफ्तार किया, जो मोबाइल फोन का IMEI नंबर बदलने का गैरकानूनी काम कर रहे थे। पुलिस ने मौके से संदिग्ध मोबाइल जब्त किए और मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

    मुंबई: पवई इलाके में मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने शुक्रवार को एक मोबाइल शॉप में छापामारी कर दो लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि ये लोग मोबाइल फोन का IMEI नंबर बदलने का गैरकानूनी काम कर रहे थे।

    पकड़े गए आरोपियों के नाम हैं –

    • रामप्रसाद सरगुन राजभर (37)
    • गुलाम रसूल राशिद खान, जो पवई में मोबाइल शॉप चलाता है और टेक्नीशियन भी है।

    क्राइम ब्रांच यूनिट 6 को जब पुख्ता सूचना मिली, तो उन्होंने छापा मारकर इस धंधे का खुलासा किया।

    📱 IMEI नंबर क्या होता है और क्यों है ज़रूरी?

    IMEI (International Mobile Equipment Identity) एक 15 अंकों का यूनिक नंबर होता है, जो हर मोबाइल फोन की पहचान बताता है।

    • इससे फोन का असली मालिक और लोकेशन ट्रैक करना आसान होता है।
    • चोरी हुए या गुम फोन को ट्रेस करने में पुलिस को IMEI बहुत मदद करता है।
      👉 लेकिन जब इसका नंबर बदल दिया जाता है, तो मोबाइल की पहचान बदल जाती है और अपराधियों को पकड़ना मुश्किल हो जाता है।

    🔍 कैसे पकड़ा गया गिरोह?

    क्राइम ब्रांच यूनिट 6 (चेंबूर) की टीम को खबर मिली थी कि पवई के एक मोबाइल शॉप में संदिग्ध तरीके से IMEI नंबर बदला जा रहा है।

    • पुलिस ने छापा मारते समय पाया कि आरोपी “App Unlock Tool” (गूगल क्रोम के जरिए) इस्तेमाल कर रहे थे।
    • इस सॉफ्टवेयर की मदद से मोबाइल का असली IMEI बदलकर नया नंबर डाला जा रहा था।

    👮 पुलिस की कार्रवाई

    • छापे में कई संदिग्ध और फर्जी सेकेंड-हैंड मोबाइल बरामद हुए।
    • पूछताछ में दोनों आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल किया।
    • उन्हें भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita – BNS) की संबंधित धाराओं में बुक किया गया।
    • मेडिकल टेस्ट के बाद उन्हें मुंबई कोर्ट में पेश किया गया।

    📌 पुलिस अधिकारियों की भूमिका

    यह पूरी कार्रवाई पुलिस इंस्पेक्टर भारत घोणे (यूनिट 6, चेंबूर) की देखरेख में हुई।
    आगे की जांच का जिम्मा पुलिस इंस्पेक्टर सुशांत सावंत की टीम को सौंपा गया है।

    ⚖️ कानून और IMEI छेड़छाड़ का अपराध

    भारत में मोबाइल का IMEI नंबर बदलना या छेड़छाड़ करना एक गंभीर अपराध है।

    • भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत इस पर सख्त सज़ा और जुर्माना हो सकता है।
    • मोबाइल कंपनियों और पुलिस दोनों के लिए यह अपराध ट्रैकिंग सिस्टम को नुकसान पहुंचाता है।

    🌐 मुंबई में बढ़ते साइबर क्राइम केस

    मुंबई जैसे बड़े शहर में मोबाइल और साइबर क्राइम तेजी से बढ़ रहे हैं।

    • IMEI नंबर बदलने वाले ऐसे गैंग चोरी हुए फोन, ब्लैक मार्केट और धोखाधड़ी में शामिल होते हैं।
    • कई बार इन मोबाइल का इस्तेमाल बड़े क्राइम (फ्रॉड, स्मगलिंग, ड्रग्स नेटवर्क) में किया जाता है।
      👉 इसीलिए पुलिस लगातार इस तरह के नेटवर्क पर नज़र बनाए हुए है।

    📊 मोबाइल यूज़र्स के लिए चेतावनी

    • सेकेंड हैंड फोन खरीदते वक्त हमेशा IMEI नंबर चेक करें।
    • IMEI चेक करने के लिए *#06# डायल करें।
    • नकली, ब्लैकलिस्टेड या बदले हुए IMEI वाले फोन पर नेटवर्क सर्विस बंद हो सकती है।
    • ऐसे फोन खरीदने पर कानूनी पचड़े में फंसने का खतरा रहता है।

    📱 IMEI नंबर कैसे चेक करें?

    (हर मोबाइल यूज़र के लिए ज़रूरी जानकारी)

    • अपने मोबाइल पर *#06# डायल करें 👉 IMEI नंबर स्क्रीन पर दिखेगा।
    • फोन की सेटिंग्स → अबाउट फोन → IMEI में भी यह नंबर मिलता है।
    • मोबाइल के डिब्बे और बिल पर भी IMEI प्रिंट होता है।
    • कभी भी सेकेंड-हैंड मोबाइल खरीदते समय IMEI ज़रूर मिलाएं।

    ⚖️ IMEI छेड़छाड़ पर क्या सज़ा है?

    भारत में IMEI नंबर बदलना या छेड़छाड़ करना है गंभीर अपराध

    • 📌 भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं में केस दर्ज होता है।
    • ⛔ अपराध साबित होने पर जेल + भारी जुर्माना हो सकता है।
    • 🚔 IMEI बदलने वाले फोन का इस्तेमाल ब्लैकलिस्ट हो जाता है।

    🚨 मुंबई पुलिस की चेतावनी

    • नकली या बदले हुए IMEI वाले मोबाइल का इस्तेमाल न करें।
    • सेकेंड-हैंड मोबाइल खरीदने से पहले IMEI ऑनलाइन चेक करें।
    • संदिग्ध मोबाइल की तुरंत पुलिस या सर्विस प्रोवाइडर को जानकारी दें।
  • मुंबई में बुज़ुर्ग महिला से फर्जी पेंशन स्कीम के नाम पर ठगी, लगभग ₹ 8 लाख का प्रीमियम

    मुंबई में बुज़ुर्ग महिला से फर्जी पेंशन स्कीम के नाम पर ठगी, लगभग ₹ 8 लाख का प्रीमियम

    मुंबई की 69 वर्षीय श्रीमती ललिता मल्होत्रा को एक प्राइवेट इंश्योरेंस एजेंट ने फर्जी पेंशन स्कीम के बहाने लगभग ₹ 7.95 लाख प्रीमियम भरवाकर धोखा दिया। एक साल बाद पेंशन न मिलने पर पुलिस में FIR दर्ज। जानिए पूरा मामला, सावधानियाँ और कानूनी प्रक्रिया।

    मुंबई: मलाड (वेस्ट) क्षेत्र की इक निवासी, ६९ वर्षीय ललिता मल्होत्रा नाम की एक बुज़ुर्ग महिला, पेंशन स्कीम का झांसा देकर लगभग ₹ 8 लाख से कम नहीं की गई राशि एक एजेंट को चुकाने के लिए मजबूर हुई। आरोपी संस्था एक निजी इंश्योरेंस कंपनी का प्रतिनिधि कहलाई जा रही है।

    कैसे हुआ धोखा?

    घटनाविवरण
    पहला संपर्क2023 में, ललिता ने एक पॉलिसी ली 5 साल के लिए, और पहली किश्त के रूप में ₹ 61,350 बैंक चेक से चुकाई गई।
    दूसरी किश्त की दबावजनवरी 2024 में, एजेंट अशिष तिवारी ने दूसरी किस्त भरने के लिए फोन किया। लेकिन महिला ने कहा कि अभी एक वर्ष पूरा नहीं हुआ है, तो नीति बंद़ करना चाहती हैं।
    वादा पेंशन कातिवारी ने कहा कि पॉलिसी में बोनस आ गया है, नीति का मूल्य बढ़ गया है, और यदि बाकी राशि चुकाई जाए तो नवंबर 2024 से पेंशन मिलना शुरू होगी।
    भुगतान की प्रक्रियामई 2024 से फ़रवरी 2025 तक, कुल 12 किश्तों में लगभग ₹ 7,95,000 गूगल पे से तिवारी द्वारा दिए गए बैंक खाते में जमा कराई गईं।
    पेंसन शुरू न होने पर आशंकानवंबर 2024 से पेंशन मिलने का जो वादा था, तिवारी ने वो पूरा नहीं किया। उसने कॉल और मैसेज का जवाब देना बन्द कर दिया।

    शिकायत और कानूनी कार्यवाही

    • ललिता-मल्होत्रा जब पेंशन न मिलने की बात पूछने लगीं, तब एजेंट उनसे बचने लगा। उसके बाद उन्होंने अपनी बेटी को सूचित किया और मेई 2025 में बंगुर नगर पुलिस थाने में लिखित शिकायत दर्ज करवाई।
    • पुलिस ने मामला जांचा और आशिष तिवारी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं, जैसे कि धोकाधड़ी (cheating), फर्जी आश्वासन देना वगैरह के तहत प्रकरण दर्ज किया है।

    ⚠️ वरिष्ठ नागरिकों के लिए चेतावनियाँ

    1. जाने-पहचाने एजेंटों या कंपनियों से ही व्यवसाय करें — यदि प्रतिनिधि का नाम, पहचान पत्र, कंपनी का नाम स्पष्ट नहीं हो, तो तुरंत संदिग्ध समझें।
    2. पहले लिखित दस्तावेज़ मांगें — पॉलिसी की पूरी जानकारी, प्रीमियम की राशि, पेंशन की शुरुआत की तिथि आदि सभी चीज़ों का दस्तावेज़ बने।
    3. भुगतान से पहले नीति की शर्तें पढ़ें — फाइन प्रिंट (terms & conditions), बोनस क्लॉज, पॉलिसी की समाप्ति आदि।
    4. लाखों त्वरित उपायों पर न बहकें — “पेंशन अब शुरू होगी”, “बोनस आ गया है”, “थोड़ी बार भुगतान करो” जैसे वादे सदैव सच नहीं होते।
    5. बैंक ट्रांज़ैक्शन्स के दस्तावेज़ सुरक्षित रखें — हर पेमेंट का रिकॉर्ड हो, चाहें चेक हो, ऑनलाइन ट्रांसफर हो या गूगल पे आदि।
    6. परिचित व्यक्ति या परिवार को जानकारी दें — यदि कोई निवेश प्रस्ताव बहुत अच्छा लगे, परिवार को बताएं, किसी भरोसेमंद से राय लें।

    ⚖️ कानूनी प्रक्रिया और क्या हो सकता है आगे

    • पुलिस ने आशिष तिवारी के ख़िलाफ़ बनार जनता न्याय संहिता की धाराएँ लगाई हैं: धोकाधड़ी (cheating), फोटोग्राफ़ी या दस्तावेज़ फर्जीवाड़ा (forgery), आदि।
    • बैंक खाते की जांच की जाएगी कि पैसे कहाँ गए हैं, कौन-से खाते में जमा हुए, और क्या पैसे बरामद हों सकते हैं।
    • यदि साबित हुआ कि एजेंट ने फर्जी वादे किए, तो वह जवाबदेह होगा और आरोपी के खिलाफ FIR, बाद में चार्ज शीट, न्यायालयिक सुनवाई हो सकती है।
    • वरिष्ठ नागरिकों के लिए सरकारी/पुलिस हेल्पलाइन्स हैं जहाँ ऐसे प्रकरण दर्ज कराए जा सकते हैं, साइबर क्राइम सेल को सूचित किया जा सकता है।

    🛡️ वरिष्ठ नागरिकों के लिए कानूनी अधिकार और बचाव गाइड

    1. कानूनी अधिकार

    • धोखाधड़ी (Cheating): भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316 (पूर्व IPC 420) लागू होती है।
    • फर्जी दस्तावेज़ / जाली साक्ष्य: धारा 336 (पूर्व IPC 468, 471) लागू हो सकती है।
    • साइबर अपराध: IT Act की धाराएँ भी लागू हो सकती हैं, जैसे धारा 66D (cheating by personation using computer resources)।
    • वरिष्ठ नागरिकों के अधिकार: Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act, 2007 के तहत वरिष्ठ नागरिकों को सुरक्षा, देखभाल और सहायता मिलती है।

    2. कहाँ शिकायत करें?

    • स्थानीय पुलिस थाने (FIR दर्ज कराना ज़रूरी है)
    • साइबर क्राइम पोर्टल: cybercrime.gov.in
    • हेल्पलाइन नंबर: 1930 (साइबर फ्रॉड हेल्पलाइन)
    • वरिष्ठ नागरिक हेल्पलाइन (मुंबई पुलिस): 1090

    3. बचाव के उपाय

    ✔️ किसी भी पेंशन स्कीम या इंश्योरेंस पॉलिसी को ऑनलाइन वेरिफाई करें।
    ✔️ एजेंट का IRDAI रजिस्ट्रेशन नंबर चेक करें (इंश्योरेंस रेग्युलेटर की वेबसाइट पर उपलब्ध)।
    ✔️ अनजाने खातों में गूगल पे / UPI से बड़ी रकम ट्रांसफर न करें
    ✔️ परिवार के किसी सदस्य या भरोसेमंद व्यक्ति को सभी निवेश योजनाओं के बारे में जानकारी दें।
    ✔️ हमेशा लिखित एग्रीमेंट / पॉलिसी डॉक्यूमेंट रखें।

    4. अगर धोखा हो जाए तो तुरंत क्या करें?

    1. अपने बैंक और UPI ऐप को कॉल कर “फ्रॉड रिपोर्ट” दर्ज कराएं।
    2. 1930 पर कॉल करें और साइबर पुलिस को सूचना दें।
    3. cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें।
    4. पुलिस थाने में FIR करवाएं और सारे पेमेंट स्क्रीनशॉट्स, बैंक स्टेटमेंट्स, मैसेजेस सबूत के तौर पर दें।

    👉 यह गाइड न सिर्फ इस केस में बल्कि हर उस स्थिति में काम आएगी, जहाँ बुज़ुर्गों को वित्तीय धोखाधड़ी का खतरा हो।

    यह मामला एक चेतावनी है कि कैसे बुज़ुर्ग लोग भरोसे के आधार पर आर्थिक नुक़सान उठा सकते हैं, खासकर जब उन्हें समय पर पेंशन या कोई वित्तीय लाभ मिलने का वादा किया जाए। सही जानकारी, दस्तावेज़, और धैर्य ही धोखाधड़ी से बचने की कुंजी है।

  • साइबर सुरक्षा: सीईआरटी-इन का फ्री बॉट रिमूवल टूल डाउनलोड करें

    साइबर सुरक्षा: सीईआरटी-इन का फ्री बॉट रिमूवल टूल डाउनलोड करें

    भारत सरकार का सीईआरटी-इन नागरिकों को साइबर सुरक्षा के लिए “फ्री बॉट रिमूवल टूल” डाउनलोड करने की सलाह दे रहा है। जानें कैसे बचे मालवेयर और बॉटनेट से। Cyber ​​Security: Download CERT-In’s Free Bot Removal Tool

    डिजिटल डेस्क
    मुंबई:
    आज के डिजिटल दौर में हर कोई इंटरनेट और स्मार्टफोन का इस्तेमाल कर रहा है। लेकिन इसके साथ ही साइबर अपराध भी तेजी से बढ़ रहे हैं। हैकर्स अक्सर बॉटनेट (Botnet) और मालवेयर (Malware) के जरिए लोगों के मोबाइल, कंप्यूटर और अन्य डिवाइस पर हमला करते हैं। ऐसे हमलों से न केवल आपकी पर्सनल जानकारी चोरी हो सकती है, बल्कि बैंकिंग डिटेल्स, पासवर्ड और डिजिटल पेमेंट से जुड़ी जानकारियां भी खतरे में पड़ जाती हैं। Cyber ​​Security: Download CERT-In’s Free Bot Removal Tool

    इसी खतरे को देखते हुए भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत काम करने वाली सीईआरटी-इन (CERT-In) यानी इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम ने आम जनता के लिए खास पहल की है। Cyber ​​Security: Download CERT-In’s Free Bot Removal Tool

    सीईआरटी-इन का “फ्री बॉट रिमूवल टूल”

    सीईआरटी-इन ने लोगों को सलाह दी है कि वे अपने डिवाइस को सुरक्षित रखने के लिए सरकार की आधिकारिक वेबसाइट https://www.csk.gov.in से “फ्री बॉट रिमूवल टूल” डाउनलोड करें। यह टूल खास तौर पर ऐसे सॉफ़्टवेयर और प्रोग्राम को पहचानता है जो आपके डिवाइस को संक्रमित कर सकते हैं। Cyber ​​Security: Download CERT-In’s Free Bot Removal Tool

    इस टूल की मदद से –

    • आपके कंप्यूटर या मोबाइल में मौजूद हानिकारक बॉटनेट को हटाया जा सकता है।
    • डिवाइस की सिक्योरिटी को मजबूत बनाया जा सकता है।
    • ऑनलाइन लेन-देन और पर्सनल डाटा को चोरी होने से बचाया जा सकता है।

    बॉटनेट और मालवेयर क्या हैं?

    बॉटनेट ऐसे संक्रमित डिवाइसों का नेटवर्क होता है जिसे साइबर अपराधी कंट्रोल करते हैं। एक बार डिवाइस संक्रमित हो जाए, तो उसे रिमोटली इस्तेमाल कर स्पैम ईमेल भेजने, ऑनलाइन धोखाधड़ी करने या बड़े स्तर पर साइबर अटैक करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
    मालवेयर यानी हानिकारक सॉफ़्टवेयर आपके डिवाइस में घुसकर आपकी जानकारी चुरा सकता है या सिस्टम को नुकसान पहुंचा सकता है। Cyber ​​Security: Download CERT-In’s Free Bot Removal Tool

    कैसे बचें साइबर हमलों से?

    सीईआरटी-इन और दूरसंचार विभाग ने नागरिकों को कुछ आसान साइबर सुरक्षा टिप्स भी दिए हैं:

    1. फ्री बॉट रिमूवल टूल ज़रूर डाउनलोड करें।
    2. अपने मोबाइल और कंप्यूटर में हमेशा एंटीवायरस अपडेट रखें।
    3. अनजान लिंक या संदिग्ध ईमेल पर क्लिक करने से बचें।
    4. डिजिटल पेमेंट और बैंकिंग ऐप्स में हमेशा टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल करें।
    5. समय-समय पर पासवर्ड बदलते रहें और स्ट्रॉन्ग पासवर्ड रखें।

    क्यों है जरूरी यह टूल?

    मुंबई जैसे बड़े शहरों में रोज़ हजारों लोग ऑनलाइन ट्रांजैक्शन करते हैं। साइबर फ्रॉड के केस तेजी से बढ़ रहे हैं। हाल ही में कई मामलों में देखा गया कि लोगों के डिवाइस पर मालवेयर अटैक हुआ और उनकी बैंक अकाउंट डिटेल्स चोरी हो गईं। ऐसे में यह टूल हर नागरिक के लिए बेहद जरूरी है। Cyber ​​Security: Download CERT-In’s Free Bot Removal Tool

    नतीजा

    भारत सरकार की यह पहल आम नागरिकों को साइबर अपराधियों से सुरक्षित रखने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यदि हर कोई इस फ्री बॉट रिमूवल टूल को डाउनलोड कर लेता है और बुनियादी सावधानियां बरतता है, तो न केवल व्यक्तिगत डेटा सुरक्षित रहेगा बल्कि देश की साइबर सुरक्षा भी मजबूत होगी। Cyber ​​Security: Download CERT-In’s Free Bot Removal Tool

  • मुंबई: मैट्रिमोनियल साइट पर फर्जी प्रोफाइल, महिला का वीडियो बनाकर ब्लैकमेल

    मुंबई: मैट्रिमोनियल साइट पर फर्जी प्रोफाइल, महिला का वीडियो बनाकर ब्लैकमेल

    मुंबई में मैट्रिमोनियल साइट पर शादी का झांसा देकर महिला को फंसाया गया। आरोपी ने वीडियो चैट से निजी वीडियो बनाए और ब्लैकमेल कर पैसे वसूले। Mumbai: Fake profile on matrimonial site, blackmailed woman by making her video

    मुंबई: डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराध का एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मझगांव इलाके की 34 वर्षीय महिला को शादी के नाम पर मैट्रिमोनियल साइट धोखाधड़ी का शिकार होना पड़ा। आरोपी ने फर्जी प्रोफाइल बनाकर महिला को शादी का झांसा दिया, उसका भरोसा जीता और फिर वीडियो चैट के जरिए निजी वीडियो बनाकर उसे ब्लैकमेल करने लगा। Mumbai: Fake profile on matrimonial site, blackmailed woman by making her video

    आरोपी ने शादी का झांसा देकर जीता भरोसा

    9 अगस्त को महिला को एक कॉल आया। आरोपी ने खुद को शादी का इच्छुक बताया और धीरे-धीरे महिला से बातचीत कर उसका विश्वास हासिल किया। बातचीत के दौरान उसने चालाकी से महिला की निजी तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड कर लिए। इसके बाद वह ब्लैकमेलिंग पर उतर आया। Mumbai: Fake profile on matrimonial site, blackmailed woman by making her video

    वीडियो चैट के बाद असली खेला

    आरोपी ने महिला को वीडियो भेजकर धमकी दी कि अगर उसने पैसे नहीं दिए तो यह वीडियो सोशल मीडिया पर डाल देगा। डर के चलते महिला ने शुरुआत में 30 हजार रुपये दे दिए, लेकिन मांग लगातार बढ़ती गई। जब महिला को एहसास हुआ कि यह साइबर ठगी है, तो उसने भायखला पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। Mumbai: Fake profile on matrimonial site, blackmailed woman by making her video

    साइबर ठग गिरोह पर शक

    मुंबई पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और आरोपी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया है। पुलिस को शक है कि इस अपराध के पीछे कोई बड़ा साइबर ठग गिरोह सक्रिय है, जो महिलाओं को टारगेट कर इस तरह की ठगी कर रहा है। जांच जारी है और आरोपी की तलाश में टीमें जुटी हैं। Mumbai: Fake profile on matrimonial site, blackmailed woman by making her video

    पुलिस की अपील

    यह घटना डिजिटल दौर में ऑनलाइन धोखाधड़ी का बड़ा उदाहरण है। खासकर मैट्रिमोनियल साइट पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे ऑनलाइन किसी भी अनजान शख्स पर जल्दी भरोसा न करें, निजी जानकारी और तस्वीरें साझा करने से बचें। यदि कोई ब्लैकमेलिंग करे तो तुरंत पुलिस से संपर्क करें। Mumbai: Fake profile on matrimonial site, blackmailed woman by making her video