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  • मालाड में Tata Power का नया EV Charging Hub शुरू, 120 kW फास्ट चार्जर समेत 4 चार्जर

    मालाड में Tata Power का नया EV Charging Hub शुरू, 120 kW फास्ट चार्जर समेत 4 चार्जर

    मालाड के न्यू महाकाली नगर में Tata Power का नया EV Charging Hub शुरू हुआ। 120 kW चार्जर, 8 पार्किंग बे और 24×7 सुविधा की पूरी जानकारी।

    मुंबई: मालाड वेस्ट में इलेक्ट्रिक वाहन चालकों के लिए नया हाई-कैपेसिटी चार्जिंग हब शुरू हो गया है। Tata Power EZ Charge ने न्यू महाकाली नगर, मालवानी में यह EV Charging Hub शुरू किया है, जहां एक 120 kW और तीन 60 kW फास्ट चार्जर लगाए गए हैं। तीनों 60 kW चार्जरों को भविष्य में 120 kW तक अपग्रेड किया जा सकता है। हब 24 घंटे खुला रहेगा और यहां पार्किंग शुल्क नहीं लिया जाएगा।

    मालाड में कहां है नया EV Charging Hub?

    Tata Motors के आधिकारिक EV Charging Point Locator में इस स्थान को “Tata Power Malad Receiving Station” के नाम से दर्ज किया गया है। इसका पता न्यू महाकाली नगर, मालवानी, मालाड वेस्ट, मुंबई-400095 है। यह Mindspace Business Park और Infinity Mall के आसपास के इलाके के लिए भी उपयोगी charging point होगा।

    मालाड के इस हब में कितने चार्जर लगाए गए हैं?

    नए हब में कुल 8 dedicated parking bays और 4 high-capacity chargers हैं। इनमें एक 120 kW charger और तीन 60 kW chargers शामिल हैं। तीनों 60 kW units को भविष्य में 120 kW capacity तक upgrade करने की सुविधा रखी गई है। सभी चार्जर CCS2 fast-charging standard को support करते हैं और auto-charging feature से लैस हैं।

    इसका मतलब यह है कि मौजूदा चारों chargers की कुल rated capacity 300 kW है। यदि तीनों 60 kW chargers को 120 kW तक upgrade किया जाता है, तो चारों की संभावित संयुक्त rated capacity 480 kW तक पहुंच सकती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि किसी एक EV को 480 kW की charging speed मिलेगी। वास्तविक charging speed वाहन की अपनी maximum DC charging क्षमता, battery की स्थिति और charging curve पर निर्भर करेगी।

    120 kW Charger होने से EV को कितनी तेजी से चार्ज किया जा सकेगा?

    120 kW charger की उपलब्धता अपने आप यह तय नहीं करती कि हर electric car 120 kW की speed पर charge होगी। जिस EV की maximum DC charging capability इससे कम है, वह अपनी निर्धारित सीमा के अनुसार ही power लेगी।

    इसी तरह battery का State of Charge बढ़ने पर कई EVs में charging speed कम हो सकती है। इसलिए मालाड के इस हब पर 120 kW charger उपलब्ध होने का अर्थ अधिकतम उपलब्ध charger capacity है, हर वाहन के लिए guaranteed charging speed नहीं।

    कौन-कौन सी EV यहां चार्ज हो सकती हैं?

    नए हब के चारों chargers CCS2 fast-charging standard को support करते हैं। इसलिए CCS2-compatible electric vehicles यहां fast charging कर सकती हैं। हालांकि किसी particular EV की वास्तविक charging speed उसके manufacturer द्वारा निर्धारित DC charging capability पर निर्भर करेगी।

    Charging का खर्च कितना होगा?

    नए मालाड हब के लिए मौजूदा प्रति यूनिट charging tariff की सार्वजनिक घोषणा उपलब्ध जानकारी में नहीं की गई है। इसलिए किसी पुराने charging station या third-party listing की दर को इस नए हब का वर्तमान tariff मानना सही नहीं होगा।

    Tata Power के EZ Charge platform पर charging stations की जानकारी के साथ charger status और अन्य charging details उपलब्ध हैं। कंपनी का platform users को available, in-use और inactive chargers की स्थिति देखने की सुविधा देता है। लागू charging price को station चुनने के बाद check करना बेहतर रहेगा।

    मालाड जाने से पहले EV चालक क्या चेक कर सकते हैं?

    Tata Power EZ Charge platform पर मालाड के charging station को खोजकर charger की उपलब्धता देखी जा सकती है। कंपनी के अनुसार users real-time charger availability देखने और payment करने के लिए EZ Charge app का इस्तेमाल कर सकते हैं।

    इससे EV चालक स्टेशन पहुंचने से पहले यह देख सकता है कि संबंधित charger उपलब्ध है या पहले से उपयोग में है। खासकर व्यस्त समय में यह जानकारी उपयोगी हो सकती है।

    मालाड में इस हब की जरूरत क्यों महत्वपूर्ण है?

    मुंबई में electric vehicles की संख्या लगातार बढ़ रही है। सितंबर 2026 में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार मुंबई में 77,196 registered EVs हैं, जिनमें 40,086 e-bikes और 30,137 e-cars शामिल हैं। महाराष्ट्र में EV की कुल संख्या करीब 11.5 लाख बताई गई है।

    ऐसे में केवल घर पर charging की सुविधा पर निर्भर रहने के बजाय public fast-charging infrastructure की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण हो जाती है। मालाड के न्यू महाकाली नगर में नया hub स्थानीय EV owners के साथ-साथ fleet operators को भी charging facility उपलब्ध कराता है।

    मालाड के EV नेटवर्क में नया हब कितना बड़ा बदलाव है?

    यह नया charging hub मालाड में उपलब्ध Tata Power charging infrastructure का एक नया location है। Tata Motors के official locator में मालाड-मरवे रोड पर एक अलग Tata Power charging station भी listed है, जबकि न्यू महाकाली नगर वाला location “Tata Power Malad Receiving Station” के नाम से दर्ज है। इसलिए EV users को navigation करते समय सही location चुनना जरूरी होगा।

    मुंबई और महाराष्ट्र में Tata Power का EV charging network

    इस नए hub के जुड़ने के बाद Tata Power EZ Charge ने महाराष्ट्र में 2,400 से ज्यादा charging points और मुंबई तथा नवी मुंबई में 1,800 से ज्यादा charging points होने की जानकारी दी है। राष्ट्रीय स्तर पर कंपनी 6,500 से ज्यादा public और captive charging points, 2.5 लाख से ज्यादा home chargers और 1,200 से ज्यादा electric bus charging points का नेटवर्क बताती है।

    Tata Power की EZ Charge service अपने charging network में अलग-अलग power levels और charging standards को list करती है तथा users को charger status देखने और route planning जैसी सुविधाएं भी देती है।

    नया मालाड हब किन लोगों के लिए उपयोगी होगा?

    न्यू महाकाली नगर का यह hub निजी EV owners के अलावा fleet operators के लिए भी उपलब्ध है। Mindspace Business Park और Infinity Mall के आसपास की commercial और commuter movement को देखते हुए यह location स्थानीय users तथा इस corridor से गुजरने वाले electric fleet vehicles के लिए charging access बढ़ाती है।

    हालांकि चार chargers जुड़ने का अर्थ यह नहीं है कि मालाड या मुंबई की पूरी charging जरूरत पूरी हो गई है। मुंबई में EV registrations बढ़ने के साथ charging infrastructure को भी लगातार विस्तार की जरूरत बनी रहेगी।

    फिलहाल मालाड के न्यू महाकाली नगर में शुरू हुआ यह 24×7 EV Charging Hub स्थानीय EV users को 120 kW तक की fast-charging capacity, चार CCS2 chargers, आठ dedicated parking bays और बिना parking charge के charging access देता है। Charger की वास्तविक उपलब्धता और लागू charging tariff की जानकारी लेने के लिए स्टेशन पर जाने से पहले Tata Power EZ Charge platform पर location check करना उपयोगी रहेगा।

  • मुंबई लोकल को मिलेगी नई रफ्तार: Borivali, Andheri और Virar में 4 नए प्लेटफॉर्म, 30-40 अतिरिक्त सर्विस की बनेगी गुंजाइश

    मुंबई लोकल को मिलेगी नई रफ्तार: Borivali, Andheri और Virar में 4 नए प्लेटफॉर्म, 30-40 अतिरिक्त सर्विस की बनेगी गुंजाइश

    Western Railway Borivali, Andheri और Virar में 4 नए प्लेटफॉर्म बनाएगी। 5वीं-6वीं लाइन से Virar तक 30-40 अतिरिक्त लोकल सर्विस की क्षमता बढ़ेगी।

    मुंबई: मुंबई लोकल ट्रेन से सफर करने वाले लाखों यात्रियों के लिए Western Railway के तीन बड़े स्टेशनों पर capacity augmentation का काम आगे बढ़ रहा है। Borivali में दो, Andheri में एक और Virar में एक नया प्लेटफॉर्म प्रस्तावित है।

    इसके साथ Borivali-Virar के बीच 5वीं और 6वीं रेल लाइन का काम भी आगे बढ़ रहा है, जिससे भविष्य में Virar तक करीब 30-40 अतिरिक्त suburban local services चलाने के लिए operational capacity बन सकती है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि 30-40 नई लोकल ट्रेनें तुरंत शुरू होने जा रही हैं।

    इस पूरे infrastructure expansion का मकसद सिर्फ प्लेटफॉर्म बढ़ाना नहीं है। Borivali-Virar corridor में suburban और लंबी दूरी की ट्रेनों के लिए अलग capacity तैयार करना, स्टेशन संचालन को ज्यादा flexible बनाना और बढ़ते passenger load के मुताबिक भविष्य की local services के लिए जगह तैयार करना इसका बड़ा उद्देश्य है।

    Borivali में दो नए प्लेटफॉर्म, अलग-अलग projects से जुड़ा काम

    Borivali में बनने वाले दोनों प्लेटफॉर्म एक ही उद्देश्य के लिए नहीं हैं। पहला Platform 3A, Borivali-Virar 5वीं और 6वीं लाइन project से जुड़ा है। दूसरा Platform 1A, Goregaon-Borivali Harbour Line extension के लिए बनाया जाएगा। दोनों प्लेटफॉर्म करीब 330 मीटर लंबे और 7 मीटर चौड़े होने की योजना है।

    Platform 3A का संबंध Borivali-Virar corridor की suburban capacity से है। नई 5वीं और 6वीं लाइनें उपलब्ध होने के बाद local और दूसरे train movements को ज्यादा व्यवस्थित तरीके से अलग-अलग capacity मिल सकेगी। इससे existing four-line corridor पर train paths को लेकर होने वाले operational conflicts कम करने में मदद मिलेगी।

    Borivali station पर Platform 10 को भी north और south दिशा में extend करने तथा northern-end yard को नई 5वीं और 6वीं lines से जोड़ने जैसे infrastructure works की योजना का हिस्सा बनाया गया है। इससे station की handling capacity और operational flexibility बढ़ाने का प्रयास होगा।

    Andheri में सिर्फ नया प्लेटफॉर्म नहीं, East-side exit भी बदलेगा

    Andheri में expansion का passenger impact अलग तरह का है। पहले चरण में platforms 4 और 5 को south की ओर extend किया जाएगा। Platform 5 से Virar दिशा में train reversal की operational सुविधा विकसित करने की योजना है।

    Platforms 6 और 7 को भी extend किया जाएगा और signalling में बदलाव होंगे। Signal S-49 को south की ओर shift करने तथा Platform 7 के northern end पर नया signal लगाने की योजना है। इससे longer trains को platform पर पूरी तरह accommodate करने में मदद मिलेगी।

    Andheri expansion का दूसरा चरण यात्रियों के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण है। Sixth line के साथ station के north side पर नया 12-coach home platform प्रस्तावित है। इसे double-discharge platform के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे Platform 9 पर आने वाली ट्रेन के यात्रियों को दोनों तरफ से उतरने की सुविधा मिल सकेगी।

    इस व्यवस्था का एक बड़ा फायदा Andheri East की तरफ जाने वाले यात्रियों को हो सकता है। प्रस्तावित व्यवस्था में यात्रियों को Andheri East Road की दिशा में सीधे निकलने का रास्ता मिलेगा। अभी peak hours में यात्रियों को काफी हद तक foot overbridges और संकरी सीढ़ियों का इस्तेमाल करना पड़ता है, जिससे भीड़ बढ़ती है। नए arrangement का उद्देश्य passenger flow को बेहतर करना और FOB तथा staircases पर दबाव कम करना है।

    Andheri station रोजाना करीब 4.5 लाख यात्रियों और 1,000 से ज्यादा suburban train movements को संभालता है। इसलिए यहां capacity augmentation का मतलब केवल अतिरिक्त train handling नहीं, बल्कि यात्रियों की station के अंदर आवाजाही को बेहतर बनाना भी है।

    Virar में नए प्लेटफॉर्म के साथ 15-coach local का भी बड़ा connection

    Virar में प्रस्तावित नया प्लेटफॉर्म Borivali-Virar 5वीं और 6वीं लाइन project से जुड़ा है। लेकिन Virar station पर इससे अलग capacity augmentation का काम पहले ही महत्वपूर्ण चरण तक पहुंच चुका है।

    अप्रैल 2026 में Platform 3A और 4A को 6.5 मीटर से बढ़ाकर 10.5 मीटर चौड़ा किया गया और इन्हें 15-coach suburban trains को accommodate करने के लिए extend किया गया। इसके अलावा western side पर नया home Platform 5A भी बनाया गया। Western Railway और Mumbai Railway Vikas Corporation ने upgraded infrastructure पर EMU trial run भी किया था।

    Virar corridor में capacity बढ़ाने की रणनीति केवल नई railway lines तक सीमित नहीं है। Longer 15-coach trains को संभालने के लिए platform infrastructure भी तैयार किया जा रहा है।

    30-40 अतिरिक्त लोकल सेवाओं का मतलब क्या है?

    यह इस पूरे development का सबसे अहम सवाल है। जानकारी के अनुसार नई platforms और 5वीं-6वीं lines करीब 30-40 अतिरिक्त local services के लिए operational flexibility पैदा कर सकती हैं। इसे तत्काल 30-40 नई ट्रेनों की घोषणा के रूप में नहीं समझना चाहिए।

    पहले Borivali-Virar corridor की अतिरिक्त tracks और associated infrastructure तैयार होंगे। इसके बाद available capacity, signalling, train paths, rakes और operational requirements के आधार पर services बढ़ाने की योजना बनाई जा सकती है। Western Railway के मौजूदा network में पहले से बड़ी संख्या में suburban services चलती हैं और 15-coach trains तथा नए rakes के जरिए passenger carrying capacity बढ़ाने का भी काम चल रहा है।

    5वीं और 6वीं लाइन से local trains को क्या फायदा होगा?

    Borivali-Virar का 5वीं और 6वीं लाइन project 26 किलोमीटर लंबा है और इसकी स्वीकृत लागत ₹2,184 करोड़ है। इसका मुख्य उद्देश्य heavily utilised corridor में अतिरिक्त rail capacity तैयार करना और suburban तथा अन्य train movements के बीच बेहतर segregation करना है।

    अगस्त 2026 में इस project की physical progress करीब 30 प्रतिशत बताई गई थी और completion target 2029 रखा गया था। Project में land acquisition, bridges, platforms, foot overbridges, railway structures और अन्य civil works शामिल हैं।

    Project की प्रगति में Borivali से Virar के बीच कई locations पर railway structures को relocate करने का काम भी शामिल है। Dahisar, Mira Road, Bhayandar, Naigaon, Nalasopara और Vasai Road जैसे हिस्सों में relocation और associated works progress में रहे हैं।

    Latest project status में land acquisition और statutory clearances भी महत्वपूर्ण हैं। उपलब्ध project status के अनुसार लगभग 16 hectare में से 17 hectare के आसपास required land acquisition का बड़ा हिस्सा पूरा हो चुका था, जबकि bridge, earthwork, FOB और station-related works अलग-अलग चरणों में चल रहे थे।

    Virar के आगे Dahanu तक भी बढ़ रही है railway capacity

    Borivali-Virar expansion को अलग project मानकर देखना पूरी तस्वीर नहीं देता। Virar के आगे Virar-Dahanu Road section में भी 3rd और 4th railway lines का project चल रहा है।

    यह project करीब 64 किलोमीटर लंबा है और इसकी sanctioned cost ₹3,587 करोड़ है। इसका उद्देश्य Virar से Dahanu Road तक railway capacity बढ़ाना है।

    इससे Western Railway के northern suburban corridor में Borivali से Virar और आगे Dahanu तक capacity augmentation की एक बड़ी श्रृंखला तैयार हो रही है। Virar station पर 15-coach trains के लिए किए गए upgrades इसी broader capacity expansion का हिस्सा हैं।

    Harbour Line extension से Borivali को मिलेगा एक और connection

    Borivali का दूसरा नया platform Goregaon-Borivali Harbour Line extension से जुड़ा है। यह extension करीब 7 किलोमीटर लंबा है और इसकी sanctioned cost ₹826 करोड़ है।

    इस project के पूरा होने के बाद Harbour Line की connectivity Borivali तक बढ़ाने के लिए infrastructure तैयार होगा। इसलिए Borivali में Platform 1A का निर्माण केवल Virar-bound local capacity का हिस्सा नहीं है, बल्कि western suburbs में Harbour Line network को आगे बढ़ाने की योजना से भी जुड़ा है।

    Mumbai local network में यह बदलाव क्यों महत्वपूर्ण है?

    Mumbai suburban railway में passenger demand लगातार ऊंची है और existing corridors पर suburban तथा long-distance trains के बीच track capacity का इस्तेमाल करना पड़ता है। अतिरिक्त lines का सबसे बड़ा operational benefit यह है कि railway को train movements को ज्यादा व्यवस्थित तरीके से plan करने के लिए अतिरिक्त track capacity मिलेगी।

    इसके साथ 15-coach trains, नए rakes, station platforms, signalling और passenger circulation infrastructure में सुधार होने से capacity augmentation कई स्तरों पर हो रही है। Mumbai suburban network की capacity बढ़ाने के लिए 238 नए 12-car rakes की procurement भी sanctioned है, जिसकी लागत ₹19,293 करोड़ बताई गई है।

    यात्रियों को फायदा कब मिलेगा?

    चार नए platforms और associated station works का फायदा construction और commissioning के बाद ही पूरी तरह दिखाई देगा। Borivali-Virar 5वीं और 6वीं लाइन project का latest reported completion target 2029 है। इसलिए 30-40 अतिरिक्त local services की संभावित capacity को भी long-term infrastructure benefit के रूप में देखना होगा, न कि तत्काल timetable change के रूप में।

    Virar में 15-coach trains के लिए platform infrastructure का upgrade पहले ही पूरा हो चुका है, जबकि Borivali-Virar corridor की नई lines और Borivali तथा Andheri के station works आगे की capacity को मजबूत करेंगे।

    कुल मिलाकर Western Railway के Borivali, Andheri और Virar में होने वाले ये काम केवल नए platforms जोड़ने तक सीमित नहीं हैं। इनके साथ नई railway lines, longer local trains, Harbour Line connectivity, signalling और passenger circulation में बदलाव जुड़े हैं। अगर निर्धारित infrastructure works और commissioning समय पर आगे बढ़ते हैं, तो इसका सबसे बड़ा असर Virar तक suburban services की future capacity और heavily crowded Western Railway corridor के operational flexibility पर देखने को मिलेगा।

  • मुंबई में गर्मी-उमस के बीच बारिश जारी, 24 से 26 सितंबर तक कैसा रहेगा मौसम? IMD का अपडेट

    मुंबई में गर्मी-उमस के बीच बारिश जारी, 24 से 26 सितंबर तक कैसा रहेगा मौसम? IMD का अपडेट

    मुंबई में गर्मी और उमस के बीच बारिश का दौर जारी है। IMD के अनुसार 24 से 26 सितंबर तक बारिश की संभावना, लेकिन कोई चेतावनी नहीं।

    मुंबई: सितंबर के आखिरी दिनों में बारिश और गर्मी-उमस का मिला-जुला असर देखने को मिल रहा है। बुधवार, 23 सितंबर को शहर में बारिश के कुछ दौर के बीच तापमान 32 से 33 डिग्री सेल्सियस तक रहा। वहीं भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक मुंबई में अगले कुछ दिनों तक बारिश पूरी तरह थमने वाली नहीं है। 24 से 26 सितंबर के बीच बादल छाए रहने और बारिश की संभावना बनी हुई है, हालांकि मुंबई के लिए फिलहाल कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है।

    मुंबई में अगले तीन दिन बारिश का क्या हाल रहेगा?

    IMD के मुंबई-वर्ली केंद्र के अनुसार 24 सितंबर को न्यूनतम तापमान करीब 26 डिग्री और अधिकतम 32 डिग्री सेल्सियस रह सकता है। आसमान सामान्यतः बादलों से घिरा रहने और मध्यम बारिश की संभावना है। 25 और 26 सितंबर को भी करीब 26 से 32 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ बादल और मध्यम बारिश का पूर्वानुमान है। इन तीनों दिनों के लिए फिलहाल कोई चेतावनी नहीं है।

    मुंबई के पश्चिमी उपनगरों के लिए तस्वीर थोड़ी अलग है। IMD के बोरीवली केंद्र के अनुसार 24 से 26 सितंबर के दौरान आम तौर पर बादल छाए रहेंगे और हल्की बारिश की संभावना है। 23 सितंबर को एक-दो दौर बारिश या गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना बताई गई है। यहां भी किसी चेतावनी का उल्लेख नहीं है।

    इसका मतलब यह है कि अगले तीन दिनों में मुंबई में बारिश की संभावना बनी रहेगी, लेकिन पूरे शहर में लगातार तेज बारिश होने की स्थिति फिलहाल नजर नहीं आ रही है। शहर के अलग-अलग हिस्सों में बारिश की तीव्रता अलग हो सकती है।

    गर्मी और उमस के बावजूद मुंबईकरों को बारिश क्यों झेलनी पड़ रही है?

    बारिश के बीच गर्मी महसूस होने की बड़ी वजह तापमान के साथ बनी रहने वाली नमी है। 23 सितंबर को मुंबई में अधिकतम तापमान करीब 32 से 33 डिग्री सेल्सियस तक रहा है। अधिक नमी के कारण पसीना जल्दी नहीं सूखता और शरीर को वास्तविक तापमान से ज्यादा गर्मी महसूस हो रही थी।

    यही वजह है कि आसमान में बादल और बीच-बीच में बारिश होने के बावजूद मुंबई में चिपचिपी गर्मी और उमस महसूस हो रही है। मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए इसे हीटवेव नहीं कह सकते लेकिन गर्मी महसूस की जा सकती है।

    मुंबई में हर जगह एक जैसी बारिश नहीं

    मुंबई में बारिश का असर हमेशा पूरे शहर में एक जैसा नहीं रहता। 23 सितंबर की सुबह तक दर्ज बारिश के आंकड़ों में भी शहर और उपनगरों के बीच अंतर दिखाई दिया। इससे आने वाले दिनों में भी एक इलाके में बारिश होने और दूसरे इलाके में केवल बादल छाए रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

    यही कारण है कि मुंबई के लिए जारी स्थानीय पूर्वानुमान में वर्ली और बोरीवली के बीच बारिश की तीव्रता के अलग-अलग अनुमान दिखाई दे रहे हैं। वर्ली में मध्यम बारिश का पूर्वानुमान है, जबकि बोरीवली में हल्की बारिश की संभावना बताई गई है।

    क्या मुंबई में भारी बारिश का अलर्ट है?

    फिलहाल मुंबई-वर्ली और मुंबई-बोरीवली के IMD forecast में 23 से आगे के दिनों के लिए कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है। इसका मतलब यह नहीं है कि बारिश नहीं होगी, बल्कि फिलहाल मौसम की स्थिति warning-level heavy rainfall event के रूप में चिन्हित नहीं की गई है।

    हालांकि पूरे कोंकण और गोवा क्षेत्र के मौसम को मुंबई के स्थानीय forecast से अलग समझना जरूरी है। इसलिए आसपास के इलाकों में जारी मौसम चेतावनियों को मुंबई की city-level warning के बराबर नहीं माना जाना चाहिए।

    क्या मुंबई से मानसून लौटना शुरू हो गया है?

    अभी मुंबई में बारिश जारी रहने के कारण इसे मानसून की पूरी तरह विदाई नहीं माना जा सकता। सितंबर के आखिरी सप्ताह में बारिश के दौर जारी रह सकते हैं और स्थानीय मौसम परिस्थितियों के कारण कुछ दिनों में बारिश कम या ज्यादा हो सकती है।

    इसलिए अगले कुछ दिनों में बारिश कमजोर पड़ने की संभावना को सीधे मुंबई से मानसून की विदाई के रूप में देखना सही नहीं होगा। मानसून की वापसी और किसी एक शहर में बारिश कम होने की प्रक्रिया अलग-अलग मौसम संकेतों पर निर्भर करती है।

    मुंबईकरों के लिए अगले तीन दिनों का सीधा मतलब

    24 सितंबर को मुंबई में बादल और बारिश की संभावना बनी रहेगी। 25 और 26 सितंबर को भी बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। पश्चिमी उपनगरों में हल्की बारिश की संभावना है, जबकि वर्ली के पूर्वानुमान में मध्यम बारिश का उल्लेख है। तीनों दिनों के लिए फिलहाल कोई warning नहीं है।

    इसलिए ऑफिस, यात्रा या रोजमर्रा के काम के लिए निकलने वाले लोगों के लिए मौसम पूरी तरह सूखा रहने की उम्मीद करना उचित नहीं होगा। वहीं मौजूदा forecast लगातार भारी बारिश वाले दिन की ओर भी संकेत नहीं करता।

    मुंबई में फिलहाल मौसम का सबसे बड़ा बदलाव यही है कि बारिश पूरी तरह विदा नहीं हुई है, लेकिन उसके बीच गर्मी और उमस लगातार महसूस हो रही है। अगले कुछ दिनों में बादल और बारिश का दौर जारी रहने की संभावना के बीच अब नजर इस बात पर रहेगी कि सितंबर के आखिरी सप्ताह में बारिश की तीव्रता किस तरह बदलती है।

  • मुंबई FDA का बड़ा एक्शन: नकली घी से Kandivali Jain Sweet तक, कई ठिकानों पर कार्रवाई; Gallops का लाइसेंस सस्पेंड

    मुंबई FDA का बड़ा एक्शन: नकली घी से Kandivali Jain Sweet तक, कई ठिकानों पर कार्रवाई; Gallops का लाइसेंस सस्पेंड

    मुंबई FDA की बड़ी कार्रवाई में Gallops समेत 5 food establishments के लाइसेंस सस्पेंड किए गए। Malad में संदिग्ध मिलावटी घी, जबकि Kandivali के Jain Sweet & Bhelpuri House पर hygiene violations को लेकर कार्रवाई।

    मुंबई: त्योहारी सीजन के बीच महाराष्ट्र Food and Drug Administration (FDA) ने मुंबई में food safety को लेकर कार्रवाई तेज कर दी है। Mahalaxmi Racecourse स्थित मशहूर Gallops Restaurant समेत पांच food establishments के लाइसेंस या registrations सस्पेंड किए गए हैं। वहीं अलग कार्रवाई में Kandivali West के Jain Sweet & Bhelpuri House पर भी food licence suspension की कार्रवाई हुई है।

    इस पूरे enforcement drive में सबसे बड़ी कार्रवाई Malad East स्थित Gurukrupa Dairy Products में सामने आई, जहां FDA अधिकारियों ने refined sunflower oil, vanaspati और branded ghee को मिलाकर कथित तौर पर ‘Pooja Ghee’ तैयार किए जाने का मामला पकड़ा। कार्रवाई के दौरान करीब 2,464.05 किलो संबंधित food stock जब्त किया गया। FDA के अनुसार जब्त stock की कीमत करीब 13.55 लाख रुपये थी, जबकि machinery सहित कुल जब्ती का मूल्य करीब 15.15 लाख रुपये बताया गया है।

    Gallops के kitchen में blood और ketchup-stained ice, cockroaches भी मिले

    Mahalaxmi Racecourse स्थित Gallops Restaurant में FDA inspection के दौरान refrigerator में रखी ice पर non-vegetarian food से जुड़े blood और ketchup के stains पाए गए। इसके अलावा raw material को torn और damaged packaging में रखने की बात सामने आई।

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    Inspection में kitchen में grease accumulation, खराब हालत वाली दीवारें, drainage points की inadequate covering, cockroach traps की खराब स्थिति, पानी जमा होना तथा live cockroaches और ants की मौजूदगी दर्ज की गई।

    FDA के अनुसार food handlers के annual medical examination और vaccination से संबंधित जरूरी records भी उपलब्ध नहीं थे। इन food-safety और hygiene violations के आधार पर Gallops का food licence suspend किया गया। Restaurant की ओर से कहा गया कि food-safety requirements पूरी करने के लिए operations को अस्थायी रूप से रोका गया है।

    Malad में ‘Pooja Ghee’ को लेकर बड़ा मामला

    Malad East स्थित Gurukrupa Dairy Products में FDA अधिकारियों ने refined sunflower oil, vanaspati यानी hydrogenated fat और branded ghee को दो boilers में मिलाए जाने का मामला पकड़ा।

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    FDA के अनुसार इस मिश्रण से white और yellow ghee तैयार किया जा रहा था और इसे ‘Pooja Ghee’ के नाम से बेचने की व्यवस्था थी। अधिकारियों ने labelling को भी misleading बताया है।

    Inspection के दौरान परिसर में rats और cockroaches की मौजूदगी की जानकारी भी सामने आई।

    कार्रवाई में करीब 2,464.05 किलो adulterated और misleadingly labelled ghee, refined sunflower oil और vanaspati जब्त किए गए। इनकी कीमत करीब ₹13.55 लाख बताई गई है। इसके अलावा दो boilers और एक khoya-making machine भी जब्त की गई, जिनकी कीमत करीब ₹1.60 लाख बताई गई। इस तरह stock और equipment की कुल कीमत करीब ₹15.15 लाख तक पहुंचती है।

    Kandivali West के Jain Sweet & Bhelpuri House पर भी FDA कार्रवाई

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    FDA की इसी enforcement कार्रवाई में Kandivali West रेलवे स्टेशन के पास Madhu Kunj, V.L. Road स्थित Jain Sweet & Bhelpuri House का food licence भी suspend किया गया।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई hygiene violations को लेकर हुई थी। Jain Sweet & Bhelpuri House को उन food establishments में शामिल किया गया है जिनके licences FDA ने हालिया inspection drive के दौरान suspend किए।

    Gufran Seekh Corner बिना valid food licence के मिला

    Andheri West के Versova-Yari Road स्थित Gufran Seekh Corner में FDA अधिकारियों को valid food licence या registration नहीं मिला।

    Inspection के दौरान food storage और segregation, premises और equipment की cleanliness, pest control तथा potable water testing से संबंधित कमियां भी सामने आईं। Food handlers के medical examination records से संबंधित deficiencies भी बताई गईं।

    22 सितंबर को FDA ने binding order जारी कर establishment को तत्काल business बंद करने का निर्देश दिया। यह तब तक जारी रहेगा जब तक valid licence या registration प्राप्त नहीं किया जाता और बताई गई deficiencies को दूर नहीं किया जाता।

    Bandra के Dreamer Hospitality और Mirari पर भी कार्रवाई

    Bandra West के Bandstand इलाके में स्थित Dreamer Hospitality Pvt Ltd के inspection में hygiene और health-related provisions के उल्लंघन पाए गए। इसके बाद licence suspension और आगे की legal action की प्रक्रिया शुरू की गई।

    इसी तरह St Dominic Road, Bandra West स्थित Mirari में भी hygiene और health से संबंधित violations सामने आने के बाद regulatory action लिया गया।

    इस FDA की प्रमुख ताजा कार्रवाई में मुंबई के पांच establishments — Gallops, Gurukrupa Dairy Products, Gufran Seekh Corner, Dreamer Hospitality Pvt Ltd और Mirari — शामिल रहे।

    सिर्फ restaurants नहीं, food supply chain भी FDA के निशाने पर

    मुंबई FDA की हालिया कार्रवाई से यह भी सामने आता है कि food safety inspection केवल restaurants तक सीमित नहीं है।

    एक तरफ Gallops जैसे restaurant में kitchen hygiene, food storage और pest control की जांच हुई, तो दूसरी तरफ Gurukrupa Dairy Products में food manufacturing और product composition की जांच सामने आई। Gufran Seekh Corner में licensing compliance भी कार्रवाई का आधार बना।

    इसके अलावा हालिया अलग कार्रवाई में Kandivali East के एक Amazon-linked warehouse और अन्य food establishments पर भी sanitation, drainage, segregation और storage से जुड़ी कमियों को लेकर licence suspension किया गया।

    घी में vegetable oil या vanaspati की मिलावट क्यों गंभीर है?

    FSSAI के notified standards के अनुसार ghee milk fat आधारित regulated food product है। ऐसे में refined vegetable oil या vanaspati की मिलावट केवल ingredient बदलने का मामला नहीं है, बल्कि product की composition और labelling से भी जुड़ सकता है।

    हालांकि किसी product को केवल रंग, खुशबू, जमने या घरेलू test के आधार पर असली या मिलावटी घोषित नहीं किया जा सकता। अंतिम निष्कर्ष के लिए निर्धारित laboratory testing और regulatory assessment जरूरी होता है।

    महाराष्ट्र में food safety enforcement तेज

    महाराष्ट्र में FDA ने पिछले महीनों में food safety enforcement को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया है। खबर के अनुसार जून से अगस्त 2026 के दौरान राज्य में 12,083 food establishments की inspections की गईं। इस दौरान 5,269 improvement notices जारी किए गए और 603 food licences suspend किए गए।

    इसी enforcement period में food products की करीब ₹67.20 करोड़ की जब्ती, 655 FIR और 875 गिरफ्तारियों** की जानकारी भी सामने आई है।

    त्योहारी सीजन में ghee, khoya, sweets, oil, jaggery और अन्य food products की मांग बढ़ने के बीच FDA की निगरानी और enforcement का दायरा भी बढ़ाया गया है।

    त्योहारी सीजन में consumers कैसे रहें सावधान?

    खाद्य पदार्थ खरीदते समय consumers को packaged product का label ध्यान से पढ़ना चाहिए। खासकर manufacturer details, FSSAI licence/registration details, manufacturing date, expiry/best-before information और ingredients की जानकारी देखना जरूरी है।

    Dairy products, ghee, sweets और अन्य खुले खाद्य पदार्थ खरीदते समय साफ-सफाई और storage conditions पर भी ध्यान दिया जा सकता है। हालांकि किसी दुकान की बाहरी cleanliness देखकर किसी food product की authenticity की अंतिम पुष्टि नहीं की जा सकती।

    Food product की quality या safety को लेकर गंभीर शिकायत होने पर संबंधित food-safety authority के पास शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। FDA की ओर से food-quality complaints के लिए toll-free number 1800222365 और Food & Drug Grievance Portal की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

    आगे क्या होगा?

    Gallops समेत licence suspension की कार्रवाई झेल रहे establishments को संबंधित food-safety deficiencies को दूर करना होगा। Gufran Seekh Corner के मामले में valid food licence या registration हासिल करने और deficiencies दूर करने तक closure order लागू है।

    Gurukrupa Dairy Products से जब्त stock और machinery के मामले में आगे regulatory और कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। वहीं Kandivali West के Jain Sweet & Bhelpuri House समेत अन्य establishments पर हुई कार्रवाई में संबंधित hygiene deficiencies को दूर करने के बाद regulatory process आगे बढ़ेगा।

    FDA Commissioner Tukaram Mundhe ने food safety से समझौता नहीं करने और expired, tampered या unhygienically prepared food के खिलाफ कार्रवाई जारी रखने की बात कही है।

    नोट: इस रिपोर्ट में “नकली घी” शब्द FDA और मीडिया रिपोर्टों में इस्तेमाल किए गए आरोप/विवरण के संदर्भ में है। Malad में जब्त stock की अंतिम प्रकृति और composition का निर्धारण संबंधित regulatory/laboratory प्रक्रिया से होगा।

  • मालवणी में एक ही सोनोग्राफी के ₹2,400 बनाम ₹1,600, BMC से जांच की मांग

    मालवणी में एक ही सोनोग्राफी के ₹2,400 बनाम ₹1,600, BMC से जांच की मांग

    मालवणी में एक ही सोनोग्राफी सेवा के लिए ₹2,400 और ₹1,600 की फीस का मामला सामने आया है। शिकायत के बाद BMC से रेट कार्ड और बिलिंग रिकॉर्ड की जांच की मांग की गई है।

    मुंबई: मलाड पश्चिम के मालवणी इलाके में सोनोग्राफी की फीस को लेकर एक शिकायत के बाद निजी डायग्नोस्टिक सेंटर की शुल्क व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। Gold Life Welfare Trust की ओर से BMC के P/West Ward के Medical Officer of Health को दी गई शिकायत में Alpha Imaging and Diagnostic Centre पर एक ही सोनोग्राफी सेवा के लिए ₹2,400 मांगे जाने का आरोप लगाया गया है।

    शिकायतकर्ता Ibrahim Shaikh के अनुसार, 17 सितंबर 2026 को वह अपनी मां के साथ किडनी स्टोन की जांच के लिए Alpha Imaging and Diagnostic Centre पहुंचे थे। शिकायत में कहा गया है कि दोनों की सोनोग्राफी के लिए कुल ₹2,400 मांगे गए। फीस को लेकर जानकारी और रेट कार्ड के आधार के बारे में पूछने पर काउंटर पर मौजूद महिला कर्मचारी द्वारा कथित तौर पर उन्हें कहीं और जांच कराने के लिए कहा गया।

    Ibrahim Shaikh ने ₹2,400 का भुगतान नहीं किया। इसके बाद उसी दिन उन्होंने अपनी और अपनी मां की वही सोनोग्राफी दूसरे डायग्नोस्टिक सेंटर में कराई, जहां दोनों की जांच के लिए कुल ₹1,600 का भुगतान किया गया। इस तरह शिकायत में एक ही सोनोग्राफी सेवा के लिए दोनों सेंटरों के बीच ₹800 के शुल्क अंतर को मुख्य आधार बनाया गया है।

    हालांकि, इस शुल्क अंतर से अपने आप यह साबित नहीं होता कि Alpha Imaging द्वारा मांगी गई ₹2,400 की राशि नियमों के खिलाफ थी। इसका वास्तविक आधार संबंधित सेंटर का लागू रेट कार्ड, शुल्क संरचना, बिलिंग रिकॉर्ड और उस दिन मरीजों से लिए या मांगे गए शुल्क के रिकॉर्ड की जांच से स्पष्ट होगा।

    शिकायतकर्ता का कहना है, कि मलवानी जैसे गरीब बाहुल्य इलाके में जरूरी इलाज और जांच रिपोर्ट कम से कम दामों में किया जाना चाहिए। जबकि प्रत्येक सोनोग्राफी पर 400 रुपये का अंतर गरीबों के लिए भारी पड़ सकता है।

    शिकायत में BMC से Alpha Imaging and Diagnostic Centre के पंजीकरण और अनुमति की जांच करने के साथ सोनोग्राफी सेवा से जुड़े डॉक्टरों की योग्यता और पंजीकरण रिकॉर्ड की जांच की मांग की गई है। इसके अलावा सोनोग्राफी मशीन के पंजीकरण, सेंटर के PCPNDT पंजीकरण, आवश्यक रिकॉर्ड और 17 सितंबर 2026 के शुल्क एवं लेनदेन संबंधी दस्तावेजों की जांच की मांग भी की गई है।

    शिकायत में यह भी पूछा गया है कि सेंटर पर मरीजों के लिए लागू शुल्क और रेट कार्ड स्पष्ट रूप से प्रदर्शित क्यों नहीं किया जाता। शिकायतकर्ता ने BMC से सेंटर का भौतिक निरीक्षण कर पूरे मामले की जांच करने और कार्रवाई की स्थिति की जानकारी लिखित रूप में देने की मांग की है।

    Alpha Imaging and Diagnostic Centre की वेबसाइट पर मालवणी स्थित सेंटर में 3D/4D Sonography और Ultrasound सहित कई डायग्नोस्टिक सेवाएं उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी में सेंटर के मालवणी स्थित पते का भी उल्लेख है।

    महाराष्ट्र में सोनोग्राफी केंद्रों के लिए PCPNDT कानून के तहत पंजीकरण और निर्धारित रिकॉर्ड रखना अनिवार्य है। ऐसे केंद्रों की जांच में पंजीकरण, डॉक्टरों की जानकारी, मशीन और निर्धारित रिकॉर्ड सहित विभिन्न दस्तावेजों का परीक्षण किया जा सकता है।

    अब इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि 17 सितंबर को मांगी गई ₹2,400 की राशि किस शुल्क संरचना के आधार पर तय की गई थी और क्या उस समय लागू रेट कार्ड तथा बिलिंग रिकॉर्ड में यही राशि दर्ज थी। BMC की जांच के बाद ही इस शुल्क को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

    शिकायत के साथ दूसरे डायग्नोस्टिक सेंटर की 17 सितंबर की सोनोग्राफी रिपोर्ट, ₹1,600 के भुगतान का प्रमाण, Alpha Imaging का विज्ञापन/पैम्फलेट और सेंटर के साइनबोर्ड की तस्वीर उपलब्ध कराए जाने का उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता ने जांच के दौरान आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने की बात भी कही है।

    फिलहाल BMC की ओर से इस शिकायत पर निरीक्षण किए जाने का आश्वासन दिया गया है। जांच के बाद ही मामला स्पष्ट रूप से सामने आ सकेगा।

  • महाराष्ट्र में ₹2,000 से ऊपर UPI पर संकट, पेट्रोल पंपों का 27 सितंबर को बड़ा फैसला

    महाराष्ट्र में ₹2,000 से ऊपर UPI पर संकट, पेट्रोल पंपों का 27 सितंबर को बड़ा फैसला

    महाराष्ट्र के करीब 8,000 पेट्रोल पंपों पर ₹2,000 से ऊपर UPI भुगतान को लेकर विरोध तेज है। 27 सितंबर की बैठक के बाद 15 अक्टूबर से नियम बदल सकते हैं।

    मुंबई: महाराष्ट्र में पेट्रोल-डीजल भराने वाले वाहन चालकों के लिए UPI भुगतान को लेकर बड़ा बदलाव सामने आ रहा है। ₹2,000 से अधिक के ईंधन भुगतान पर लागू होने वाले नए Merchant Discount Rate (MDR) के विरोध में राज्य के पेट्रोल पंप डीलर्स लामबंद हैं। करीब 8,000 पेट्रोल पंपों वाले महाराष्ट्र में इस मुद्दे पर 27 सितंबर को होने वाली बैठक के बाद आगे की कार्रवाई तय हो सकती है।

    अगर शुल्क से पेट्रोल पंपों को छूट नहीं मिलती है, तो मुंबई समेत राज्य के कई हिस्सों में ₹2,000 से ऊपर के UPI भुगतान स्वीकार करना बंद करने की चेतावनी दी गई है। हालांकि, अभी पूरे महाराष्ट्र में UPI बंद करने का अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

    ₹2,000 तक UPI भुगतान पर क्या होगा

    नए UPI ढांचे के तहत ₹2,000 तक के व्यापारी भुगतान पर MDR नहीं लगेगा। केंद्र सरकार के अनुसार लगभग 96 प्रतिशत P2M UPI लेनदेन नए शुल्क से प्रभावित नहीं होंगे। व्यक्ति से व्यक्ति होने वाले UPI भुगतान भी मुफ्त रहेंगे।

    ईंधन क्षेत्र के लिए ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर सामान्य 0.4 प्रतिशत MDR के बजाय प्रति लेनदेन ₹5 का फ्लैट MDR निर्धारित किया गया है। यह शुल्क ग्राहक से सीधे वसूलने के लिए नहीं है, बल्कि भुगतान व्यवस्था से जुड़े पक्षों के बीच वितरित किया जाता है।

    यानी महाराष्ट्र में अगर कोई ग्राहक ₹1,800 का पेट्रोल या डीजल UPI से भरवाता है, तो इस नए MDR का सवाल नहीं उठेगा। लेकिन ₹2,000 से ज्यादा के ईंधन भुगतान पर पंप डीलर के लिए अतिरिक्त लागत जुड़ सकती है।

    महाराष्ट्र के पेट्रोल पंप डीलर्स क्यों नाराज हैं

    Federation of All Maharashtra Petrol Dealers Association यानी FAMPEDA ने नए MDR का विरोध किया है। संगठन के अध्यक्ष अमित गुप्ता का कहना है कि पेट्रोल पंपों का डीलर मार्जिन प्रति लीटर तय होता है और डीलर्स ईंधन की बिक्री कीमत या अपना मार्जिन अपनी तरफ से नहीं बढ़ा सकते। ऐसे में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त लागत सीधे उनके मार्जिन को प्रभावित करेगी।

    Petrol Dealers Association Pune के अध्यक्ष और FAMPEDA के उपाध्यक्ष ध्रुव रुपारेल ने भी कहा है कि पेट्रोल-डीजल की बड़ी संख्या में खरीद ₹2,000 से ऊपर होती है। इसलिए किसी भी तरह का MDR या डिजिटल भुगतान शुल्क डीलर्स के खर्च पर सीधा असर डाल सकता है।

    27 सितंबर को महाराष्ट्र के लिए बड़ा फैसला

    महाराष्ट्र के पेट्रोल डीलर्स की अगली महत्वपूर्ण बैठक 27 सितंबर को होगी। FAMPEDA अध्यक्ष अमित गुप्ता के अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर डीलर्स संगठन जो फैसला करेंगे, उसका असर महाराष्ट्र में भी लागू होगा। इसी बैठक के बाद यह स्पष्ट हो सकता है कि राज्य के पेट्रोल पंप ₹2,000 से ऊपर UPI स्वीकार करना जारी रखेंगे या नहीं।

    इसका मतलब यह है कि अभी से यह कहना सही नहीं होगा कि 15 अक्टूबर से पूरे महाराष्ट्र के सभी पेट्रोल पंपों पर ₹2,000 से ज्यादा का UPI भुगतान बंद हो जाएगा।

    मुंबई में पहले ही दी जा चुकी है चेतावनी

    मुंबई में स्थिति थोड़ी ज्यादा स्पष्ट है। Petrol Dealers Association, Mumbai के अध्यक्ष चेतन मोदी ने RBI और वित्त मंत्रालय से पेट्रोल पंपों को नए MDR से पूरी तरह छूट देने की मांग की है। राहत नहीं मिलने पर मुंबई के पेट्रोल पंपों पर 15 अक्टूबर से ₹2,000 से ऊपर के UPI भुगतान बंद करने की चेतावनी दी गई है।

    मुंबई के डीलर्स का एक विकल्प यह भी है कि यदि Oil Marketing Companies यानी तेल कंपनियां MDR का खर्च खुद उठाने के लिए तैयार होती हैं, तो डीलर्स अपना विरोध वापस लेने पर विचार कर सकते हैं।

    मुंबई पेट्रोल डीलर्स के अनुसार पेट्रोल पंपों पर डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल पहले ही काफी बढ़ चुका है। ऐसे में अचानक बड़े UPI भुगतान रोकने से ग्राहकों और पंप संचालकों दोनों के लिए भुगतान व्यवस्था में बदलाव आएगा।

    ट्रक और व्यावसायिक वाहनों के लिए भी चिंता

    महाराष्ट्र State Vahan Chalak Malak Pratinidhi Mahasangh के अध्यक्ष बाबा शिंदे ने बड़े UPI भुगतान बंद होने की स्थिति में ट्रक ड्राइवरों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर के सामने आने वाली व्यावहारिक समस्याओं की ओर ध्यान दिलाया है।

    बड़े वाहनों में ईंधन भराने के लिए ₹2,000 से अधिक का भुगतान सामान्य है। यदि ऐसे भुगतान पर UPI उपलब्ध नहीं रहता है, तो ड्राइवरों को नकद या उपलब्ध अन्य भुगतान माध्यमों पर निर्भर रहना पड़ सकता है। बाबा शिंदे ने नकदी रखने से जुड़े सुरक्षा जोखिमों की भी चिंता जताई है।

    सरकार की तरफ से क्या रुख है

    महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 20 सितंबर को UPI शुल्क को लेकर कहा कि डिजिटल भुगतान से व्यापार और लेनदेन की पारदर्शिता बढ़ी है। उन्होंने व्यापारियों और पेट्रोल पंप संचालकों से मामूली शुल्क का विरोध नहीं करने की अपील की। फडणवीस के अनुसार UPI व्यवस्था से कारोबार को फायदा हुआ है और नए शुल्क का उद्देश्य भुगतान व्यवस्था की लागत को पूरा करना है।

    वहीं केंद्र सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि नया MDR सभी UPI भुगतान पर लागू नहीं होगा। ₹2,000 तक के P2M भुगतान और P2P लेनदेन मुफ्त रहेंगे। ईंधन जैसे आवश्यक और कम मार्जिन वाले क्षेत्र के लिए ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर ₹5 का फ्लैट MDR रखा गया है।

    15 अक्टूबर से महाराष्ट्र में क्या बदल सकता है

    फिलहाल तीन बातें सबसे महत्वपूर्ण हैं। पहली, ₹2,000 तक के पेट्रोल-डीजल भुगतान पर UPI जारी रहेगा। दूसरी, ₹2,000 से अधिक के ईंधन भुगतान पर ₹5 MDR की व्यवस्था लागू होने वाली है। तीसरी, महाराष्ट्र के पेट्रोल पंप डीलर्स का राज्यव्यापी रुख 27 सितंबर की बैठक के बाद स्पष्ट होगा।

    मुंबई के डीलर्स ने 15 अक्टूबर से बड़े UPI भुगतान रोकने की चेतावनी पहले ही दे दी है, जबकि महाराष्ट्र के स्तर पर अंतिम सामूहिक फैसला अभी बाकी है। इसलिए फिलहाल ग्राहकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि 27 सितंबर के बाद डीलर्स संगठन क्या निर्णय लेते हैं और क्या उससे पहले MDR में पेट्रोल पंपों को कोई छूट मिलती है।

  • कांजुरमार्ग में 13वीं मंजिल से गिरी 200 किलो की बीम, पहले भी गिरता था सामान; 4 पर केस

    कांजुरमार्ग में 13वीं मंजिल से गिरी 200 किलो की बीम, पहले भी गिरता था सामान; 4 पर केस

    कांजुरमार्ग में 13वीं मंजिल से 200 किलो की लोहे की बीम पुलिस कार्यालय के सामने गिरी। पहले भी निर्माण सामग्री गिरने की शिकायत थी, 4 पर केस दर्ज।

    मुंबई: कांजुरमार्ग में निर्माणाधीन इमारत की 13वीं मंजिल से करीब 200 किलो वजनी लोहे की बीम गिरने की घटना के बाद निर्माण स्थल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बीम सीधे कांजुरमार्ग पुलिस स्टेशन के एक्सटर्नमेंट विभाग के कार्यालय के प्रवेश द्वार के सामने गिरी। घटना में किसी व्यक्ति के घायल होने की जानकारी नहीं है, लेकिन कार्यालय की टिन की छत और पास का पेड़ क्षतिग्रस्त हुआ है। पुलिस ने मामले में ठेकेदार समेत चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है।

    यह घटना 18 सितंबर की दोपहर की है। एक्सटर्नमेंट विभाग में तैनात सहायक पुलिस उपनिरीक्षक (ASI) विश्वास दशरथ देसाई उस समय कार्यालय में कंप्यूटर पर काम कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें तेज आवाज सुनाई दी। बाहर निकलने पर कार्यालय के प्रवेश द्वार के सामने भारी लोहे की बीम पड़ी मिली। बीम नीचे आने से पहले एक पेड़ और कार्यालय की टिन की छत से टकराई थी।

    200 किलो की बीम के गिरने से पहले भी सामने आई थी समस्या

    इस घटना को गंभीर बनाने वाली सबसे अहम बात यह है कि निर्माण स्थल से निर्माण सामग्री गिरने की शिकायत पहले भी सामने आई थी। पुलिस के अनुसार, इससे पहले भी पत्थर, गिट्टी और लोहे की रॉड आसपास गिर चुकी थीं। निर्माण स्थल के ठेकेदार को इस संबंध में पहले भी चेतावनी दी जा चुकी है।

    ऐसे में अब जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पहले की शिकायतों और चेतावनी के बाद साइट पर सुरक्षा व्यवस्था में क्या बदलाव किए गए थे। यह भी जांच का विषय है कि इतनी भारी बीम 13वीं मंजिल से नीचे गिरने की स्थिति तक कैसे पहुंची और उस समय उसे सुरक्षित रखने के लिए क्या इंतजाम मौजूद थे।

    ठेकेदार, इंजीनियर और दो सेफ्टी सुपरवाइजर पर केस

    पुलिस ने KAMS Realtor से जुड़े साइट ठेकेदार मितेश जैन, साइट इंजीनियर धनराज रामचंद्र जगताप और सेफ्टी सुपरवाइजर विक्रम तथा सोहेल मिर्जा के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि निर्माण स्थल पर लोगों की जान और व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने से रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं किए गए। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।

    पुलिस ने घटना के बाद निर्माण स्थल पर मौजूद कर्मचारियों से भी पूछताछ की। मौके पर मौजूद कर्मचारियों से मिली जानकारी के आधार पर बीम के निर्माण स्थल से गिरने की पुष्टि की गई। हालांकि बीम के गिरने की वास्तविक तकनीकी वजह क्या थी, इसकी जांच अभी जारी है।

    जिस प्रोजेक्ट की 13वीं मंजिल से बीम गिरी, उसका RERA रिकॉर्ड

    सार्वजनिक रियल एस्टेट रिकॉर्ड में KAMS Realtors का Kams Krystel प्रोजेक्ट कांजुरमार्ग ईस्ट के Purshotam Godbole Road पर दर्ज है और इसका MahaRERA registration number P51800051412 है। परियोजना अभी निर्माणाधीन दर्ज है और इसके लिए 31 दिसंबर 2026 की completion date दर्ज है। RERA-derived रिकॉर्ड में प्रोजेक्ट के लिए Ground + 24 Floor संरचना दर्ज है।

    रिकॉर्ड यह भी दिखाते हैं कि इस प्रोजेक्ट से संबंधित MahaRERA में CC12501288 नंबर की एक शिकायत 17 अप्रैल 2025 को दर्ज हुई थी और वह disposed/order approved स्थिति में दिखाई देती है। हालांकि उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड से यह स्थापित नहीं होता कि वह शिकायत निर्माण स्थल की सुरक्षा से संबंधित थी।

    हादसे में किसी की जान नहीं गई, लेकिन खतरा गंभीर था

    घटना के समय कार्यालय में कर्मचारी मौजूद थे और बीम कार्यालय के प्रवेश द्वार के ठीक सामने आकर गिरी। बीम का पेड़ और कार्यालय की छत से टकराना इस बात को महत्वपूर्ण बनाता है कि निर्माण स्थल से गिरने वाली सामग्री का जोखिम केवल वहां काम कर रहे मजदूरों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आसपास मौजूद कार्यालयों और लोगों तक भी पहुंच सकता है। इस मामले में किसी के घायल नहीं होने की पुष्टि है, जबकि कार्यालय की टिन की छत को नुकसान पहुंचा है।

    मुंबई में निर्माण स्थलों से गिरने वाली भारी सामग्री को लेकर हाल के दिनों में अलग-अलग घटनाएं भी सामने आई हैं। ऐसे मामलों में site barricading, material handling, ऊंचाई पर सामग्री की सुरक्षित व्यवस्था और आसपास के सार्वजनिक क्षेत्र को सुरक्षित रखने के उपाय जांच के महत्वपूर्ण हिस्से बनते हैं।

    अब जांच में इन सवालों के जवाब अहम

    कांजुरमार्ग की इस घटना में पुलिस जांच के सामने अब केवल यह सवाल नहीं है कि बीम कैसे गिरी। यह भी महत्वपूर्ण होगा कि पहले निर्माण सामग्री गिरने की शिकायतें कब-कब हुईं, ठेकेदार को किस तरह की चेतावनी दी गई, उसके बाद क्या सुरक्षा उपाय किए गए और घटना के समय साइट पर भारी सामग्री को संभालने की व्यवस्था क्या थी।

    फिलहाल पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। बीम गिरने की तकनीकी वजह, साइट पर सुरक्षा व्यवस्था और पहले की शिकायतों के बाद उठाए गए कदमों से जुड़े तथ्य जांच आगे बढ़ने के साथ स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • मुंबई Coastal Road पर BMW 75 फीट नीचे गिरी, 3 छात्रों की मौत, 1 गंभीर

    मुंबई Coastal Road पर BMW 75 फीट नीचे गिरी, 3 छात्रों की मौत, 1 गंभीर

    मुंबई Coastal Road पर तेज रफ्तार BMW हादसे में Sanay Gujjar, Aditya Jakasania और Dhairya Sheth की मौत, Aditya Oswal गंभीर घायल।

    मुंबई: Coastal Road पर रविवार तड़के तेज रफ्तार BMW के भीषण हादसे में तीन छात्रों की मौत हो गई, जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल है। हादसा Marine Drive से Haji Ali की ओर जा रही BMW के नियंत्रण से बाहर होने के बाद हुआ। कार Coastal Road की बाहरी दीवार से टकराकर करीब 75 फीट नीचे निर्माणाधीन पार्किंग क्षेत्र में जा गिरी। चारों युवकों को Nair Hospital ले जाया गया, जहां तीन को मृत घोषित किया गया और एक का इलाज जारी है।

    हादसा सुबह करीब 5 बजे Northbound stretch पर Lotus Jetty और Lala Lajpatrai College के सामने हुआ। CCTV फुटेज में BMW तेज रफ्तार में आती, बाहरी railing से टकराती और उसके बाद हवा में उछलकर नीचे गिरती दिखाई दे रही है। पुलिस के अनुसार शुरुआती जांच में तेज रफ्तार के कारण चालक का नियंत्रण खोना हादसे की संभावित वजह सामने आई है। हालांकि BMW की वास्तविक गति कितनी थी, यह जांच से स्पष्ट होना बाकी है।

    मृतकों की पहचान Sanay Gujjar (21), Aditya Jakasania (19) और Dhairya Sheth (17) के रूप में हुई है। गंभीर रूप से घायल युवक की पहचान Aditya Kalpeshwar Oswal (23) के रूप में हुई है। उसे Nair Hospital के Trauma Ward में भर्ती कराया गया है और उसकी हालत गंभीर बताई गई है।

    पुलिस के मुताबिक Sanay Gujjar BMW चला रहे थे। Sanay Ahmedabad के रहने वाले थे और मुंबई में Paying Guest के तौर पर रहकर पढ़ाई कर रहे थे। उपलब्ध पुलिस जानकारी के अनुसार Sanay Gujjar, Aditya Oswal और Dhairya Sheth BBA की पढ़ाई कर रहे थे। चारों युवकों के Ahmedabad से होने और मुंबई में पढ़ाई के लिए रहने की जानकारी भी सामने आई है।

    पुलिस के अनुसार BMW Sanay Gujjar के परिवार की थी। दुर्घटना के समय चारों युवक Marine Drive से लौट रहे थे और Haji Ali की दिशा में जा रहे थे। हादसे के बाद पुलिस ने मृतकों के परिवारों को सूचना दी है और दोस्तों तथा अन्य संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।

    CCTV में हादसे का पूरा क्रम

    CCTV में दिखाई दे रहा है कि BMW Coastal Road के elevated हिस्से पर तेज गति से आगे बढ़ रही थी। Lotus Jetty के पास वाहन बाहरी railing से टकराया। टक्कर के बाद BMW सड़क के किनारे से नीचे चली गई और हवा में कई बार पलटते हुए निर्माणाधीन क्षेत्र में जा गिरी। दुर्घटना के बाद कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।

    पुलिस के अनुसार घटना का CCTV समय करीब 5:03 बजे दर्ज हुआ, जबकि Coastal Road Control Room को दुर्घटना की सूचना करीब 5:20 बजे मिली। दोनों समय अलग होने की वजह CCTV timestamp और Control Room को सूचना मिलने का समय है।

    BMW का रजिस्ट्रेशन नंबर भी सामने आया

    दुर्घटनाग्रस्त BMW का registration number DD-01-C-6302 बताया गया है। यह जानकारी दुर्घटना के बाद वाहन की पहचान और उसके ownership तथा registration records की जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

    इस वाहन से जुड़ी एक अलग जानकारी भी सामने आती है। मार्च 2026 में इसी registration number वाली कार को लेकर Gamdevi Police ने rash and negligent driving का मामला दर्ज किया था। उस मामले में चालक के रूप में Sanay Gujjar का ही नाम दर्ज किया गया था।

    हादसे की वजह पर जांच जारी

    फिलहाल पुलिस की प्राथमिक जांच में तेज रफ्तार के कारण चालक का नियंत्रण खोना सामने आया है। लेकिन हादसे की अंतिम वजह तय होना अभी बाकी है। वाहन की वास्तविक गति, दुर्घटना से पहले की driving conditions और अन्य संभावित कारणों की जांच की जा रही है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर इस हादसे को racing या शराब के प्रभाव में driving का मामला बताना अभी जल्दबाजी होगी।

    Coastal Road पर इस हादसे के बाद तेज रफ्तार और road safety को लेकर सवाल फिर सामने आए हैं। यह corridor Marine Drive को Worli की ओर Bandra-Worli Sea Link के अंतिम हिस्से से जोड़ता है और इसकी कुल लंबाई करीब 10.58 किलोमीटर है। ऐसे में तेज रफ्तार वाहनों की निगरानी और दुर्घटना संभावित हिस्सों पर सुरक्षा व्यवस्था हादसे की जांच के साथ महत्वपूर्ण मुद्दा बन गई है।

    फिलहाल Tardeo Police हादसे की परिस्थितियों की जांच कर रही है। CCTV फुटेज, वाहन की स्थिति, प्रत्यक्षदर्शियों और मृतकों के दोस्तों के बयान जांच का हिस्सा हैं। Aditya Oswal का इलाज जारी है, जबकि तीन मृतकों के शवों को आगे की कानूनी और चिकित्सकीय प्रक्रिया के लिए रखा गया है। जांच पूरी होने के बाद ही हादसे की अंतिम वजह और जिम्मेदारी को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।

  • ₹11 के IV सेट की ₹325 MRP, 2,841% का अंतर; केंद्र ने अस्पतालों से मांगा कीमतों का हिसाब

    ₹11 के IV सेट की ₹325 MRP, 2,841% का अंतर; केंद्र ने अस्पतालों से मांगा कीमतों का हिसाब

    महाराष्ट्र FDA के सर्वे में IV सेट, सिरिंज और कैथेटर की खरीद कीमत और MRP में भारी अंतर मिला। केंद्र ने अब मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतों पर समीक्षा शुरू की।

    मुंबई: महाराष्ट्र में अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले जरूरी मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतों में सामने आया बड़ा अंतर अब केंद्र सरकार की निगरानी तक पहुंच गया है। महाराष्ट्र FDA के सर्वे में एक IV इन्फ्यूजन सेट 11.05 रुपये की ट्रेड कीमत पर मिलने के बावजूद 325 रुपये की छपी MRP वाला पाया गया। इस अंतर को 2,841 प्रतिशत तक बताया गया है। इसके बाद अब केंद्र सरकार अस्पतालों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतों को तर्कसंगत बनाने पर चर्चा कर रही है। हालांकि, सभी मेडिकल कंज्यूमेबल्स पर एक समान कीमत सीमा लागू करने का अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

    IV सेट से सिरिंज और कैथेटर तक बड़ी कीमत तफावत

    महाराष्ट्र FDA के जुलाई 2026 के सर्वे में मुंबई महानगर क्षेत्र, पुणे और छत्रपति संभाजीनगर के अस्पतालों में भर्ती मरीजों के इलाज के दौरान इस्तेमाल होने वाली मेडिकल वस्तुओं की कीमतों की जांच की गई। जांच में ट्रेड या खरीद कीमत और छपी MRP के बीच कई मामलों में बड़ा अंतर सामने आया।

    सबसे बड़ा उदाहरण IV इन्फ्यूजन सेट का है। इसकी ट्रेड कीमत 11.05 रुपये मिली, जबकि उस पर MRP 325 रुपये छपी थी। इसी तरह 6.75 रुपये में खरीदी गई 10 एमएल सिरिंज की MRP 57.20 रुपये और 29.41 रुपये की खरीद कीमत वाले कैथेटर की MRP 310 रुपये पाई गई।

    सर्वे में IV सेट, सिरिंज, कैथेटर, नेब्युलाइजर, ऑक्सीजन मास्क और अन्य मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतों को देखा गया। कुछ अन्य वस्तुओं में भी खरीद कीमत और MRP के बीच काफी अंतर पाया गया।

    2,841 प्रतिशत का आंकड़ा आखिर बताता क्या है?

    यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। 11.05 रुपये की ट्रेड कीमत और 325 रुपये की MRP के बीच 2,841 प्रतिशत का अंतर है, लेकिन इसका अर्थ यह सीधे नहीं है कि पूरा अंतर अस्पताल का शुद्ध मुनाफा है।

    किसी मेडिकल वस्तु की अंतिम कीमत तक पहुंचने में निर्माता, आयातक, वितरक, स्टॉकिस्ट और अस्पताल जैसे अलग-अलग स्तर शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा अस्पतालों की ओर से स्टोरेज, स्टेराइल हैंडलिंग, इन्वेंटरी, संक्रमण नियंत्रण और अन्य संचालन लागतों का भी तर्क दिया जाता है। इसी वजह से केंद्र अब अस्पतालों और दूसरे हितधारकों से कीमत और बिलिंग की पूरी व्यवस्था समझने की कोशिश कर रहा है।

    इसलिए सामने आया 2,841 प्रतिशत का आंकड़ा मुख्य रूप से खरीद कीमत और घोषित MRP के बीच के अंतर को दिखाता है। इसे हर मामले में सीधे अस्पताल के मुनाफे के बराबर मानना सही नहीं होगा।

    तुकाराम मुंढे ने केंद्र से क्या मांग की?

    महाराष्ट्र FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे ने इस कीमत अंतर के बाद केंद्रीय औषध विभाग और राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण यानी NPPA के सामने मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतों की समीक्षा का मुद्दा उठाया है।

    उनकी मांग में ट्रेड मार्जिन के लिए स्पष्ट व्यवस्था, जरूरी मेडिकल उपकरणों की कीमतों की निगरानी और खरीद कीमत तथा घोषित MRP के बीच स्वीकार्य अंतर को लेकर स्पष्ट दिशानिर्देश की जरूरत शामिल है। उन्होंने यह भी मुद्दा उठाया कि इलाज के दौरान इस्तेमाल होने वाली किसी वस्तु की वास्तविक खरीद कीमत मरीज को आमतौर पर पता नहीं होती।

    महाराष्ट्र FDA ने अस्पतालों की बिलिंग दरें तय करने का अधिकार अपने स्तर पर होने का दावा नहीं किया है। मुद्दा मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमत निर्धारण व्यवस्था और उसके नियमन से जुड़ा है।

    अब केंद्र सरकार ने क्या कदम उठाया?

    मामले के सामने आने के बाद केंद्र ने NPPA से कीमतों में इस तरह के अंतर को लेकर रिपोर्ट मांगी है। इसके साथ ही अस्पतालों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ consultation की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की गई है। इसका उद्देश्य यह समझना है कि मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमत और मार्जिन तय करते समय अस्पतालों की वास्तविक लागत, सप्लाई चेन और मरीजों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।

    19 सितंबर तक स्थिति यह है कि सभी मेडिकल कंज्यूमेबल्स पर एक समान price cap लगाने का अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। आगे का नियामक फैसला अलग-अलग उत्पादों और उनकी कीमत संरचना की समीक्षा के बाद लिया जाना है।

    क्या हर मेडिकल डिवाइस की कीमत NPPA तय करता है?

    नहीं। मेडिकल डिवाइस के लिए मौजूदा नियामक व्यवस्था अलग-अलग श्रेणियों में काम करती है।

    NPPA के अनुसार कुछ मेडिकल डिवाइस price-control व्यवस्था के तहत आते हैं, जबकि अन्य non-scheduled medical devices के मामले में सीधे ceiling price तय नहीं होता। DPCO 2013 के तहत ऐसे non-scheduled products की MRP में एक साल में 10 प्रतिशत से ज्यादा वृद्धि की निगरानी का प्रावधान है। कुछ विशेष मामलों में NPPA ने non-scheduled medical devices की कीमत या ट्रेड मार्जिन को भी नियंत्रित किया है।

    इससे मौजूदा विवाद का मूल सवाल सामने आता है कि जिन जरूरी hospital consumables पर सीधी ceiling price व्यवस्था नहीं है, उनमें खरीद कीमत और MRP के बीच कितना अंतर उचित माना जाए।

    पहले भी मेडिकल उपकरणों की कीमतों पर हस्तक्षेप हो चुका है

    मेडिकल डिवाइस की कीमतों को लेकर सरकारी हस्तक्षेप नया नहीं है। NPPA ने coronary stents और knee implants की कीमतों को नियंत्रित किया है। कोविड काल में oxygen concentrators, pulse oximeters, blood pressure monitoring machines, nebulisers, digital thermometers और glucometers समेत छह मेडिकल डिवाइस पर 70 प्रतिशत तक trade margin की सीमा लागू की गई थी।

    NPPA के पुराने दस्तावेजों में यह भी दर्ज है कि कुछ मेडिकल डिवाइस में अस्पतालों को कम कीमत पर उत्पाद मिलने और मरीजों की बिलिंग में छपी MRP के इस्तेमाल के बीच अंतर pricing regulation के लिए चिंता का विषय रहा है।

    अस्पतालों की कीमत में क्या-क्या शामिल हो सकता है?

    मेडिकल कंज्यूमेबल की खरीद कीमत और मरीज से लिया गया अंतिम शुल्क हमेशा एक ही चीज नहीं होता। अस्पतालों की ओर से उपचार की पूरी व्यवस्था में स्टोरेज, स्टेराइल प्रोसेसिंग, संक्रमण नियंत्रण, नर्सिंग, इन्वेंटरी और बर्बादी जैसी लागतों को ध्यान में रखने की बात कही गई है।

    इसी वजह से आगे होने वाली सरकारी चर्चा में केवल MRP और खरीद कीमत की तुलना के बजाय पूरे pricing chain और hospital billing structure को देखना महत्वपूर्ण होगा।

    दूसरे राज्यों से भी सामने आईं ऐसी चिंताएं

    यह मुद्दा केवल महाराष्ट्र तक सीमित रहने के संकेत नहीं दे रहा है। पंजाब, राजस्थान और तमिलनाडु के औषध नियंत्रण तंत्र से भी मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतों से जुड़ी समान शिकायतें या representations मिलने की बात सामने आई है। ऐसे में मामला राष्ट्रीय स्तर पर मेडिकल डिवाइस pricing framework की समीक्षा तक पहुंच सकता है।

    हालांकि, महाराष्ट्र के सर्वे में सामने आए 2,841 प्रतिशत के आंकड़े को पूरे देश के सभी अस्पतालों या सभी मेडिकल कंज्यूमेबल्स पर लागू करना सही नहीं होगा।

    मरीजों के लिए सबसे अहम सवाल क्या है?

    अस्पताल में भर्ती मरीज के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बिल में इस्तेमाल की गई वस्तु का नाम, मात्रा, MRP और बिल की गई राशि स्पष्ट हो। किसी मेडिकल कंज्यूमेबल की खरीद कीमत और मरीज से ली गई राशि में बड़ा अंतर होने की स्थिति में itemised bill और संबंधित विवरण देखना मरीज के लिए उपयोगी हो सकता है।

    लेकिन 11.05 रुपये की खरीद कीमत और 325 रुपये की MRP सामने आने का मतलब यह भी नहीं है कि हर अस्पताल हर मरीज से उसी MRP पर पैसा ले रहा है। वास्तविक बिलिंग अस्पताल की व्यवस्था, पैकेज, बीमा और इस्तेमाल की गई वस्तुओं के आधार पर अलग हो सकती है।

    अब आगे क्या होगा?

    महाराष्ट्र FDA के सर्वे और तुकाराम मुंढे की पहल के बाद मामला अब केंद्र के स्तर पर पहुंच चुका है। NPPA से रिपोर्ट, अस्पतालों और अन्य stakeholders के साथ consultation तथा मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतों और मार्जिन की समीक्षा अगले चरण हैं।

    आगे की चुनौती यह तय करने की होगी कि जरूरी मेडिकल कंज्यूमेबल्स के लिए कीमतों की निगरानी किस तरह की जाए, खरीद कीमत और MRP के बीच कितना अंतर स्वीकार्य हो, supply chain में किस स्तर पर मार्जिन जोड़ा जा रहा है और मरीजों के लिए बिलिंग में कितनी पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।

    फिलहाल 11.05 रुपये के IV सेट की 325 रुपये MRP और 2,841 प्रतिशत के अंतर ने अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली छोटी दिखने वाली लेकिन बड़ी संख्या में इस्तेमाल होने वाली मेडिकल वस्तुओं की कीमतों को राष्ट्रीय नियामक बहस के केंद्र में ला दिया है।

  • Bappa.org क्या है? मुंबईकर अब घर के गणपति की कहानी भी डिजिटल संग्रह में दर्ज कर सकेंगे

    Bappa.org क्या है? मुंबईकर अब घर के गणपति की कहानी भी डिजिटल संग्रह में दर्ज कर सकेंगे

    मुंबई में गणेशोत्सव की परंपराओं को डिजिटल रूप से सहेजने के लिए BMC का Bappa.org अभियान, जानें फोटो-कहानी कैसे भेजें और क्या मिलेगा।

    मुंबई: गणेशोत्सव के दौरान मुंबई के घरों और सार्वजनिक मंडलों में निभाई जाने वाली परंपराओं, यादों और सांस्कृतिक गतिविधियों को अब डिजिटल रूप से सुरक्षित करने की पहल तेज हो गई है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने मुंबईकरों से Bappa.org पर अपने गणेशोत्सव की कहानी, तस्वीरें, वीडियो, पारंपरिक प्रथाएं और सामाजिक व पर्यावरणीय गतिविधियों की जानकारी दर्ज करने की अपील की है। खास बात यह है कि इस डिजिटल संग्रह में सिर्फ बड़े गणेश मंडल ही नहीं, बल्कि घरों में स्थापित होने वाले गणपति भी शामिल किए जा रहे हैं।

    Bappa.org क्या है?

    Bappa.org को महाराष्ट्र के गणेशोत्सव का डिजिटल राज्य संग्रह बताया गया है। इसका उद्देश्य महाराष्ट्र में पीढ़ियों से चली आ रही गणेशोत्सव की परंपराओं, परिवारों की यादों, सार्वजनिक मंडलों की गतिविधियों और मूर्ति व सजावट से जुड़ी कला को डिजिटल रिकॉर्ड के रूप में सुरक्षित करना है। पोर्टल के अनुसार यह महाराष्ट्र शासन के सांस्कृतिक कार्य विभाग का उपक्रम है।

    मुंबईकर इसमें क्या दर्ज कर सकते हैं?

    Bappa.org पर गणेशोत्सव से जुड़ी कई तरह की जानकारी साझा की जा सकती है। इसमें घर या मंडल की गणेश प्रतिमा की तस्वीर, सजावट, पारंपरिक आरती, परिवार की वर्षों पुरानी परंपरा, गणेशोत्सव से जुड़ी व्यक्तिगत यादें, सामाजिक कार्य, पर्यावरण संरक्षण के प्रयास और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियां शामिल हैं।

    इसका मतलब है कि किसी परिवार के घर में हर साल एक ही तरीके से होने वाला गणेशोत्सव भी इस डिजिटल संग्रह का हिस्सा बन सकता है। इसी तरह सार्वजनिक गणेश मंडल, गृहनिर्माण संस्था और गणेश प्रतिमा से जुड़ा काम करने वाले कारीगर भी अपनी कहानी साझा कर सकते हैं।

    मुंबई के घरों की परंपराएं भी बनेंगी डिजिटल रिकॉर्ड

    मुंबई में गणेशोत्सव का बड़ा हिस्सा केवल प्रसिद्ध सार्वजनिक मंडलों तक सीमित नहीं है। 15 सितंबर को डेढ़ दिन के गणपति विसर्जन के दौरान मुंबई में 24,631 गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन हुआ था, जिनमें 24,521 घरेलू और 110 सार्वजनिक मंडलों की प्रतिमाएं शामिल थीं। ऐसे में घर-घर मनाए जाने वाले गणेशोत्सव की परंपराओं को दर्ज करने का यह प्रयास शहर की व्यापक सांस्कृतिक तस्वीर को सामने ला सकता है।

    Bappa.org के मौजूदा संग्रह में मुंबई सिटी से Parel cha Raja, Saibaba Nagar Colony और Girgaon cha Raja जैसी प्रविष्टियां दिखाई दे रही हैं। इसका मतलब है कि मुंबई से नागरिकों और मंडलों की भागीदारी शुरू हो चुकी है।

    Bappa.org पर कहानी कैसे दर्ज करें?

    पोर्टल के अनुसार इसके लिए किसी विशेष ऐप को डाउनलोड करने या अलग अकाउंट बनाने की जरूरत नहीं है। एक फोटो और अपनी गणेशोत्सव परंपरा के बारे में कुछ पंक्तियों से शुरुआत की जा सकती है। जानकारी भेजने के बाद टीम उसकी जांच करती है और स्वीकार की गई कहानी को डिजिटल संग्रह में दर्ज किया जाता है।

    इसके अलावा ‘घरोघरी बाप्पा’ अभियान के तहत WhatsApp के जरिए भी गणेशोत्सव की कहानी भेजने की सुविधा दी गई है। इसके लिए +91 91361 72681 नंबर जारी किया गया है। इस अभियान में भाग लेना नि:शुल्क बताया गया है।

    कहानी भेजने के बाद क्या होगा?

    Bappa.org पर स्वीकार की गई प्रविष्टियों को एक अलग रिकॉर्ड नंबर दिया जाता है। उदाहरण के तौर पर 2026-00290 और 2026-00297 जैसी प्रविष्टियां संग्रह में दर्ज हैं। इन रिकॉर्ड में जमा करने और स्वीकार किए जाने की तारीख के साथ डिजिटल evidence भी दिखाई देता है।

    पोर्टल की जानकारी के अनुसार प्रत्येक योगदान को सत्यापन के बाद महाराष्ट्र के राज्य सांस्कृतिक संग्रह का हिस्सा बनाया जाता है। सफलतापूर्वक कहानी दर्ज कराने वाले परिवारों को सांस्कृतिक कार्य विभाग की ओर से आधिकारिक प्रमाणपत्र दिए जाने की जानकारी भी दी गई है।

    सिर्फ मुंबई नहीं, महाराष्ट्र और विदेशों की कहानियां भी

    Bappa.org पर फिलहाल महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों के साथ दूसरे स्थानों से भी गणेशोत्सव की कहानियां दिखाई दे रही हैं। पोर्टल पर मुंबई, सातारा, रायगढ़, पुणे और अन्य क्षेत्रों की प्रविष्टियों के साथ महाराष्ट्र के बाहर से भी योगदान दर्ज हैं।

    हाल की चयनित कहानियों में नए घर में पहला गणेशोत्सव, पारंपरिक गौरी-गणपति उत्सव, घर पर बनाई गई मिट्टी की गणेश प्रतिमा, वियतनाम में भारतीय विद्यार्थियों का गणेशोत्सव और विसर्जन के बाद बची मिट्टी के इस्तेमाल से जुड़ी पर्यावरणीय पहल जैसी अलग-अलग कहानियां शामिल रही हैं।

    इससे साफ है कि इस डिजिटल संग्रह का दायरा केवल गणेश प्रतिमा या पंडाल की तस्वीर तक सीमित नहीं है। परिवार, परंपरा, कला, पर्यावरण और विदेशों में रहने वाले भारतीयों का गणेशोत्सव भी इसका हिस्सा बन सकता है।

    गणेशोत्सव के डिजिटल दस्तावेजीकरण का बड़ा उद्देश्य

    महाराष्ट्र सरकार ने अगस्त 2025 में गणेशोत्सव को राज्य महोत्सव के रूप में मनाने को मंजूरी दी थी। इसके बाद गणेशोत्सव से जुड़ी कला, परंपरा, संस्कृति और सामाजिक गतिविधियों को व्यापक स्तर पर सामने लाने के प्रयास बढ़े हैं।

    इसी व्यापक संदर्भ में Bappa.org पर गणेशोत्सव की परंपराओं का डिजिटल दस्तावेजीकरण किया जा रहा है। गणेशोत्सव की सांस्कृतिक परंपराओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने और UNESCO की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत से जुड़े प्रयासों के संदर्भ में भी इस दस्तावेजीकरण को जोड़ा जा रहा है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि गणेशोत्सव को UNESCO की मान्यता मिल चुकी है।

    मुंबईकरों के लिए इसका क्या मतलब?

    मुंबई में हर साल लाखों लोग घरों और सार्वजनिक मंडलों के जरिए गणेशोत्सव मनाते हैं। अलग-अलग इलाकों, परिवारों और समुदायों की अपनी अलग परंपराएं हैं। कई परंपराएं केवल परिवार के बुजुर्गों की यादों तक सीमित रह जाती हैं और उनका कोई डिजिटल रिकॉर्ड नहीं होता।

    Bappa.org इसी अंतर को भरने की कोशिश करता है। किसी परिवार की कई दशक पुरानी पूजा पद्धति हो, किसी मंडल का सामाजिक काम हो, पर्यावरण-अनुकूल मूर्ति हो या किसी इलाके की अलग गणेशोत्सव परंपरा—इन अनुभवों को तस्वीर और कहानी के साथ दर्ज किया जा सकता है।

    मुंबईकरों के लिए आसान भाषा में कहें तो Bappa.org पर सिर्फ यह बताना जरूरी नहीं है कि आपके घर में गणपति की मूर्ति कैसी है। यह भी बताया जा सकता है कि आपके परिवार में बाप्पा की परंपरा कब से है, सजावट कैसे होती है, कौन-सी आरती या प्रथा निभाई जाती है और गणेशोत्सव के दौरान परिवार या मंडल क्या खास करता है।

    यानी इस साल का गणेशोत्सव खत्म होने के बाद भी उसकी कहानी डिजिटल संग्रह में दर्ज रह सकती है। मुंबईकर अपने घर या मंडल की परंपरा को Bappa.org के माध्यम से इस राज्यव्यापी सांस्कृतिक रिकॉर्ड का हिस्सा बना सकते हैं।