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मुंबई के वर्सोवा में स्ट्रोक से पीड़ित 73 वर्षीय शरद कदम को पुलिस ने कथित तौर पर शराबी समझकर पांच घंटे थाने में रखा। इलाज में देरी के बाद उनके शरीर का दाहिना हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया।
मुंबई: वर्सोवा इलाके में पुलिस की कथित लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है। 73 वर्षीय सेवानिवृत्त व्यवसायी शरद कदम को कार चलाते समय स्ट्रोक आया, लेकिन परिवार का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें शराब के नशे में समझकर करीब पांच घंटे तक वर्सोवा पुलिस स्टेशन में बैठाए रखा। इलाज में देरी के बाद उनके शरीर का दाहिना हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया।
क्या है पूरा मामला?
परिवार के अनुसार, 25 जुलाई की सुबह करीब 9 बजे वर्सोवा निवासी शरद कदम अपनी कार चला रहे थे। इसी दौरान उन्हें अचानक स्ट्रोक आया और वह वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सके। उनकी कार दूसरी कार से टकरा गई।
घटना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने कथित तौर पर उनकी लड़खड़ाती आवाज और असामान्य व्यवहार को शराब के नशे का संकेत माना। परिवार का आरोप है कि पुलिस ने तुरंत चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के बजाय उन्हें थाने ले जाकर बैठा दिया।
वर्सोवा पुलिस ने एक कांस्टेबल की शिकायत के आधार पर शरद कदम के खिलाफ लापरवाही, गैर-जिम्मेदाराना तरीके से वाहन चलाने और नशे में ड्राइविंग करने का मामला दर्ज किया है।
एफआईआर के अनुसार, पुलिसकर्मी ने दावा किया कि दुर्घटनास्थल पर कदम के मुंह से शराब की गंध आ रही थी। पुलिस का कहना है कि बाद में उन्हें रक्त में अल्कोहल की जांच के लिए कूपर अस्पताल ले जाया गया था। पुलिस के मुताबिक, मेडिकल रिपोर्ट का अभी इंतजार है।
हालांकि, परिवार का आरोप है कि पुलिस ने मौके पर कोई ब्रेथलाइजर टेस्ट नहीं कराया और उनकी बिगड़ती हालत को गंभीरता से नहीं लिया।
परिवार ने लगाए गंभीर आरोप
शरद कदम के भतीजे और अंधेरी पश्चिम के पार्षद रोहन राठौड़ ने आरोप लगाया कि पुलिस और दुर्घटना में शामिल दूसरी कार में मौजूद एक डॉक्टर ने स्ट्रोक के स्पष्ट संकेतों को नजरअंदाज कर दिया।
राठौड़ के अनुसार, जब एक रिश्तेदार, जो पेशे से वकील हैं, पुलिस स्टेशन पहुंचीं तो उन्होंने देखा कि शरद कदम वहां गिर पड़े थे और ठीक से बोल भी नहीं पा रहे थे। इसके बावजूद उन्हें तत्काल अस्पताल नहीं ले जाया गया।
परिवार का कहना है कि चिकित्सा सहायता में हुई देरी के कारण उनके शरीर का दाहिना हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया।
रात में अस्पताल में कराया गया भर्ती
परिवार के मुताबिक, शरद कदम को रात करीब 8 बजे कूपर अस्पताल से नानावती अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने उन्हें स्ट्रोक का मरीज बताया।
विशेषज्ञों के अनुसार, स्ट्रोक के मरीजों के लिए शुरुआती कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। समय पर इलाज मिलने से कई मामलों में स्थायी नुकसान को रोका जा सकता है।
विधायक अमित साठम ने मांगी कार्रवाई
इस मामले के सामने आने के बाद विधायक अमित साठम ने मुंबई पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर वर्सोवा पुलिस स्टेशन के संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
उन्होंने डीसीपी पुरुषोत्तम कराड से पूछा है कि अगर बुजुर्ग व्यक्ति की हालत गंभीर थी तो उन्हें तुरंत चिकित्सा सहायता क्यों नहीं दी गई। साथ ही उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग भी की है।
आगे क्या हो सकता है?
फिलहाल पुलिस का कहना है कि मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। दूसरी ओर, परिवार पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहा है।
यदि जांच में लापरवाही साबित होती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
मुंबई पुलिस ने लोकभवन के फर्जी लेटरहेड और नकली हस्ताक्षरों के जरिए रेलवे के इमरजेंसी कोटे से टिकट दिलाने वाले रैकेट का भंडाफोड़ किया है। जांच में देशभर में फैले 200 एजेंटों के नेटवर्क का खुलासा हुआ है।
मुंबई: मुंबई पुलिस ने रेलवे के वीआईपी और इमरजेंसी कोटे के कथित दुरुपयोग से जुड़े एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है। जांच में सामने आया है कि महाराष्ट्र के लोकभवन के नाम पर फर्जी लेटरहेड, नकली मुहर और राज्यपाल कार्यालय के जाली हस्ताक्षरों का इस्तेमाल कर यात्रियों के वेटिंग टिकट कन्फर्म कराए जा रहे थे। इस मामले में पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
प्रारंभिक जांच के अनुसार, यह नेटवर्क केवल मुंबई तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में फैले करीब 200 एजेंटों के जरिए संचालित किया जा रहा था। ये एजेंट यात्रियों को तत्काल और कन्फर्म टिकट दिलाने का झांसा देकर उनसे मोटी रकम वसूलते थे।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी सबसे पहले यात्रियों के नाम पर वेटिंग टिकट बुक करते थे। इसके बाद महाराष्ट्र लोकभवन के नाम से तैयार किए गए फर्जी पत्र रेलवे अधिकारियों तक पहुंचाए जाते थे। इन पत्रों में राज्यपाल के निजी सहायक के कथित नकली हस्ताक्षर और फर्जी सरकारी मुहर का इस्तेमाल किया जाता था।
इमरजेंसी कोटे के जरिए सीट कन्फर्म होने के बाद यात्रियों से अतिरिक्त पैसे वसूले जाते थे।
रेलवे सत्यापन में खुला फर्जीवाड़ा
फरवरी 2026 में मध्य रेलवे के चीफ कमर्शियल मैनेजर कार्यालय ने लोकभवन से कुछ संदिग्ध पत्रों का सत्यापन मांगा था। जांच के दौरान पता चला कि पत्रों पर किए गए हस्ताक्षर और मुहर फर्जी थे।
लोकभवन प्रशासन ने दस्तावेजों की जांच के बाद मलबार हिल पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में शत्रुंजय राजकुमार यादव उर्फ अनूप (34) समेत चार दलाल शामिल हैं। वहीं, अमरीश ठक्कर को इस पूरे नेटवर्क का कथित मास्टरमाइंड बताया जा रहा है।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस रैकेट के जरिए अब तक कितने फर्जी पत्र तैयार किए गए और कितने यात्रियों को टिकट उपलब्ध कराए गए।
किन ट्रेनों में कन्फर्म कराए गए टिकट?
प्रारंभिक जांच में एलटीटी-राजगीर एक्सप्रेस और छपरा एक्सप्रेस समेत कई ट्रेनों के नाम सामने आए हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि रेलवे को इस घोटाले से कितना आर्थिक नुकसान हुआ।
यात्रियों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यात्री केवल अधिकृत रेलवे प्लेटफॉर्म और लाइसेंस प्राप्त एजेंटों के माध्यम से ही टिकट बुक करें। सोशल मीडिया या निजी एजेंटों के जरिए “गारंटीड कन्फर्म टिकट” के दावों से बचें।
मुंबई पुलिस ने फर्जी APK फाइलें बनाकर साइबर ठगों को सप्लाई करने वाले कथित मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार 92 APK फाइलों से ₹63 करोड़ की ठगी हुई, जबकि 967 नई फाइलों से ₹1000 करोड़ तक की संभावित साइबर ठगी की आशंका थी।
मुंबई: मुंबई पुलिस ने देशभर में फैले एक बड़े साइबर अपराध नेटवर्क का खुलासा करते हुए फर्जी APK फाइलें तैयार कर साइबर ठगों तक पहुंचाने वाले कथित मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी की बनाई गई APK फाइलों का इस्तेमाल कर अब तक करीब ₹63 करोड़ की साइबर ठगी की जा चुकी है। जांच के दौरान आरोपी के पास से 967 नई APK फाइलें भी बरामद हुई हैं। पुलिस का कहना है कि यदि इनका इस्तेमाल हो जाता, तो संभावित ठगी का आंकड़ा ₹1000 करोड़ तक पहुंच सकता था।
मुंबई पुलिस की यह कार्रवाई डीबी मार्ग पुलिस स्टेशन में दर्ज एक साइबर फ्रॉड मामले की जांच के दौरान सामने आई है। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी है।
कैसे खुला पूरे नेटवर्क का राज?
इस मामले की शुरुआत दक्षिण मुंबई के एक व्यक्ति के साथ हुई साइबर ठगी से हुई। पीड़ित को महानगर गैस (MGL) का बिल भरने के नाम पर एक लिंक भेजा गया। लिंक पर क्लिक कर APK फाइल डाउनलोड करते ही उसके बैंक खाते से करीब ₹70 हजार निकाल लिए गए।
मामले की जांच करते-करते मुंबई पुलिस सीधे उस व्यक्ति तक पहुंची, जो साइबर अपराधियों के लिए फर्जी APK फाइलें तैयार करता था। इसी गिरफ्तारी के बाद पूरे नेटवर्क की परतें खुलनी शुरू हुईं।
मुंबई पुलिस की डीसीपी राजसुधा आर. के अनुसार गिरफ्तार आरोपी केवल फर्जी APK फाइलें ही नहीं बनाता था, बल्कि साइबर ठगों को संभावित शिकारों का डेटा भी उपलब्ध कराता था।
पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 37,200 लोगों का बैंकिंग और व्यक्तिगत डेटा भी बरामद किया है। इस डेटा की फॉरेंसिक जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि किन-किन लोगों को निशाना बनाया गया।
जांच में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
मुंबई पुलिस के अनुसार जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं।
92 फर्जी APK फाइलें देशभर के साइबर अपराधियों को बेची गईं।
इनसे जुड़े मामलों में करीब ₹63 करोड़ की साइबर ठगी सामने आई।
देशभर से 2,993 शिकायतें दर्ज हुईं।
इनमें 512 शिकायतें महाराष्ट्र और मुंबई की हैं।
आरोपी के पास से 967 नई APK फाइलें बरामद हुईं, जिनके इस्तेमाल से बड़े पैमाने पर साइबर ठगी की आशंका जताई गई है।
पुलिस का कहना है कि यह जांच अभी जारी है और आगे और भी खुलासे हो सकते हैं।
जांच के अनुसार आरोपी प्रत्येक APK फाइल ₹15,000 से ₹20,000 में बेचता था। इन फाइलों की वैधता लगभग 40 से 45 दिन होती थी। समय पूरा होने पर साइबर अपराधियों को नई APK फाइल खरीदनी पड़ती थी।
पुलिस के मुताबिक यह एक संगठित नेटवर्क था, जिसमें तकनीकी सहायता उपलब्ध कराकर विभिन्न राज्यों में साइबर ठगी को अंजाम दिया जाता था।
कैसे काम करती हैं ये फर्जी APK फाइलें?
साइबर अपराधी लोगों को गैस बिल, RTO चालान, KYC अपडेट, बिजली बिल, बैंक वेरिफिकेशन या अन्य सरकारी सेवाओं के नाम पर लिंक भेजते थे।
जैसे ही कोई व्यक्ति उस लिंक से APK फाइल डाउनलोड और इंस्टॉल करता, उसके मोबाइल की कई महत्वपूर्ण अनुमतियां ठगों के हाथ में चली जाती थीं। इसके बाद बैंकिंग जानकारी, OTP और अन्य संवेदनशील डेटा का दुरुपयोग कर खाते से पैसे निकाल लिए जाते थे।
कौन है गिरफ्तार आरोपी?
मुंबई पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी की पहचान एस.के. मंडल के रूप में हुई है। उसे पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया गया है। वह मूल रूप से झारखंड के गिरिडीह का रहने वाला है।
पुलिस के मुताबिक आरोपी ने साइंस से पढ़ाई की थी और सोशल मीडिया तथा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए कोडिंग सीखी। इसके बाद उसने फर्जी APK फाइलें तैयार कर साइबर अपराधियों को बेचना शुरू कर दिया।
मुंबई पुलिस अब उन साइबर अपराधियों की पहचान कर रही है जिन्होंने इस आरोपी से APK फाइलें खरीदी थीं। जब्त किए गए लैपटॉप, मोबाइल, हार्ड डिस्क और डिजिटल रिकॉर्ड की फॉरेंसिक जांच की जा रही है। यदि जांच में अन्य राज्यों या अंतरराज्यीय गिरोहों के लिंक सामने आते हैं, तो संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
आम लोगों के लिए जरूरी सलाह
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी अनजान लिंक से APK फाइल डाउनलोड न करें। Android फोन में केवल Google Play Store जैसे अधिकृत प्लेटफॉर्म से ही ऐप इंस्टॉल करें। गैस, बैंक, बिजली, KYC या सरकारी विभाग के नाम पर आए किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी आधिकारिक वेबसाइट या हेल्पलाइन से पुष्टि जरूर करें।
Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C), Ministry of Home Affairs – https://i4c.mha.gov.in/
FAQ
Q1. मुंबई पुलिस ने किसे गिरफ्तार किया है?
मुंबई पुलिस ने फर्जी APK फाइलें बनाकर साइबर अपराधियों को बेचने वाले कथित मास्टरमाइंड एस.के. मंडल को गिरफ्तार किया है।
Q2. APK फ्रॉड क्या होता है?
यह ऐसा साइबर फ्रॉड है जिसमें फर्जी Android ऐप डाउनलोड करवाकर मोबाइल और बैंकिंग डेटा तक अनधिकृत पहुंच बनाई जाती है।
Q3. अब तक कितनी साइबर ठगी सामने आई है?
मुंबई पुलिस के अनुसार आरोपी की APK फाइलों से जुड़े मामलों में करीब ₹63 करोड़ की ठगी सामने आई है। पुलिस ने यह भी कहा है कि बरामद 967 नई फाइलों का इस्तेमाल होता तो संभावित ठगी का आंकड़ा ₹1000 करोड़ तक पहुंच सकता था।
Q4. इस तरह की ठगी से कैसे बचें?
केवल आधिकारिक ऐप स्टोर से ऐप डाउनलोड करें, किसी अनजान लिंक से APK फाइल इंस्टॉल न करें और बैंकिंग या KYC संबंधी संदेशों की आधिकारिक स्रोत से पुष्टि करें।
मुंबई में FDA ने खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर 5 प्रतिष्ठित क्लबों के FSSAI लाइसेंस निलंबित कर दिए। जांच में कॉकरोच, एक्सपायर्ड फूड और गंभीर गंदगी मिलने का दावा किया गया।
मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई शहर में खाद्य सुरक्षा को लेकर महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक को अंजाम दिया है। शहर के पांच प्रतिष्ठित क्लबों के किचन में गंभीर स्वच्छता संबंधी खामियां मिलने के बाद उनके FSSAI लाइसेंस अस्थायी रूप से निलंबित कर दिए गए हैं। निरीक्षण के दौरान कॉकरोच, एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री, गंदगी और कई अन्य नियमों के उल्लंघन सामने आने का दावा किया गया है।
यह कार्रवाई FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे के ‘जीरो टॉलरेंस’ अभियान के तहत की गई है। विभाग का कहना है कि खाद्य सुरक्षा मानकों से समझौता करने वाले किसी भी प्रतिष्ठान को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना भी बड़ा या प्रतिष्ठित क्यों न हो।
किन क्लबों पर हुई कार्रवाई?
FDA ने जिन क्लबों के खिलाफ कार्रवाई की है, उनमें शामिल हैं:
द क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया (CCI)
आरके जुहू जिमखाना
द अपर्णा जुहू जिमखाना
एमआईजी क्रिकेट क्लब, बांद्रा पूर्व
द विलिंग्डन स्पोर्ट्स क्लब
इसके अलावा गोरेगांव स्पोर्ट्स क्लब को लाइसेंस और पंजीकरण संबंधी अनियमितताओं के कारण कारोबार बंद करने का नोटिस जारी किया गया है।
FDA की जांच में क्या मिला?
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को कई गंभीर कमियां मिलीं। विभाग के अनुसार कई रसोइयों में जिंदा कॉकरोच, मक्खियां और मकड़ी के जाले पाए गए। कई स्थानों पर किचन की साफ-सफाई बेहद खराब थी और कचरा निपटान की व्यवस्था भी मानकों के अनुरूप नहीं मिली।
जांच के दौरान एक्सपायर्ड खाद्य पदार्थ, सड़ी हुई सब्जियां और जरूरत से ज्यादा पुराने मशरूम भी मिले। कुछ जगहों पर बर्तन सीधे फर्श पर रखे हुए थे, जबकि भोजन तैयार करने वाली जगह के आसपास ग्रीस और गंदा पानी जमा था।
वेज और नॉन-वेज भोजन में भी मिली बड़ी लापरवाही
FDA अधिकारियों के अनुसार कुछ क्लबों में शाकाहारी और मांसाहारी भोजन तैयार करने के लिए अलग-अलग व्यवस्था नहीं थी। खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक इससे क्रॉस-कंटैमिनेशन का खतरा बढ़ सकता है।
निरीक्षण में यह भी पाया गया कि कोल्ड स्टोरेज में रखे खाद्य पदार्थों पर पानी टपक रहा था, कई कटिंग बोर्ड गंदे थे और नालियां जाम थीं। ये सभी स्थितियां खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन मानी जाती हैं।
एमआईजी क्रिकेट क्लब में बिना वैध लाइसेंस के कैटरिंग एजेंसी
FDA के अनुसार बांद्रा पूर्व स्थित एमआईजी क्रिकेट क्लब में एक ऐसी कैटरिंग एजेंसी संचालित होती मिली, जिसके पास वैध FSSAI लाइसेंस नहीं था। निरीक्षण के दौरान वहां भी कॉकरोच और अन्य स्वच्छता संबंधी कमियां सामने आईं। इसके बाद विभाग ने संबंधित कार्रवाई की।
FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे के कार्यभार संभालने के बाद खाद्य सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर लगातार सख्ती दिखाई जा रही है। हाल के दिनों में छोटे होटल, डेयरी और खाद्य प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई के बाद अब शहर के नामी क्लबों पर हुई इस कार्रवाई ने स्पष्ट संदेश दिया है कि नियमों के उल्लंघन पर किसी को भी राहत नहीं मिलेगी।
अब आगे क्या होगा?
लाइसेंस निलंबित होने के बाद संबंधित क्लबों को निरीक्षण में बताई गई कमियों को दूर करना होगा। इसके बाद FDA दोबारा निरीक्षण करेगा। यदि सभी खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता मानकों का पालन संतोषजनक पाया जाता है, तभी नियमानुसार लाइसेंस बहाल करने पर विचार किया जाएगा।
खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी कार्रवाई से अन्य होटल, रेस्तरां और क्लब भी अपने किचन की स्वच्छता और FSSAI नियमों के पालन को लेकर अधिक सतर्क होंगे।
1. मुंबई में किन क्लबों के लाइसेंस निलंबित हुए हैं?
द क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया, आरके जुहू जिमखाना, द अपर्णा जुहू जिमखाना, एमआईजी क्रिकेट क्लब और द विलिंग्डन स्पोर्ट्स क्लब के FSSAI लाइसेंस अस्थायी रूप से निलंबित किए गए हैं।
2. FDA ने कार्रवाई क्यों की?
निरीक्षण के दौरान कॉकरोच, एक्सपायर्ड खाद्य पदार्थ, गंदगी और खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन जैसी गंभीर कमियां मिलने का दावा किया गया।
3. क्या क्लब हमेशा के लिए बंद हो गए हैं?
नहीं। फिलहाल लाइसेंस अस्थायी रूप से निलंबित किए गए हैं। कमियां दूर करने और दोबारा निरीक्षण के बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा।
4. गोरेगांव स्पोर्ट्स क्लब के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई?
लाइसेंस और पंजीकरण संबंधी अनियमितताओं के कारण कारोबार बंद करने का नोटिस जारी किया गया है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। जानें किन राज्यों में अलर्ट है और अगले 72 घंटे क्यों महत्वपूर्ण हैं।
नई दिल्ली / मुंबई: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश के कई हिस्सों के लिए भारी से अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी से बना Deep Depression अब मध्य भारत की ओर बढ़ रहा है, जिसके प्रभाव से ओडिशा, छत्तीसगढ़ और विदर्भ (महाराष्ट्र) में अत्यधिक भारी बारिश की संभावना है। वहीं मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, दिल्ली-एनसीआर, कर्नाटक, झारखंड और महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों में भी अगले 24 से 48 घंटों के दौरान तेज बारिश, गरज-चमक और कुछ स्थानों पर तेज हवाएं चलने की आशंका जताई गई है। IMD ने लोगों से केवल आधिकारिक मौसम अपडेट पर भरोसा करने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।
देशभर में क्यों बिगड़ा मौसम?
जुलाई के अंतिम सप्ताह में दक्षिण-पश्चिम मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव का क्षेत्र (Low Pressure Area) मजबूत होकर Deep Depression में बदल गया है। यही सिस्टम अब मध्य भारत की ओर बढ़ रहा है और इसके कारण कई राज्यों में लगातार बारिश का दौर देखने को मिल रहा है।
मौसम विभाग का कहना है कि यह सिस्टम अपने साथ बड़ी मात्रा में नमी लेकर आगे बढ़ रहा है। यही वजह है कि मध्य भारत, पश्चिम भारत और उत्तर भारत के कई राज्यों में भारी बारिश की स्थिति बनी हुई है।
विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे सिस्टम के दौरान कुछ स्थानों पर कम समय में अत्यधिक वर्षा हो सकती है, जिससे शहरी जलभराव, नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने और यातायात प्रभावित होने जैसी स्थितियां बन सकती हैं।
IMD के ताज़ा बुलेटिन के अनुसार देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग स्तर की चेतावनी जारी की गई है।
🔴 रेड अलर्ट वाले प्रमुख क्षेत्र
सबसे गंभीर स्थिति फिलहाल इन क्षेत्रों में बताई गई है—
ओडिशा
छत्तीसगढ़
विदर्भ (महाराष्ट्र)
इन क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी वर्षा होने की संभावना व्यक्त की गई है। प्रशासन को सतर्क रहने और स्थानीय स्तर पर आवश्यक तैयारियां रखने की सलाह दी गई है।
🟠 ऑरेंज अलर्ट वाले क्षेत्र
मौसम विभाग ने कई राज्यों में भारी बारिश की संभावना को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट भी जारी किया है।
इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
मध्य प्रदेश
गुजरात
राजस्थान
दिल्ली-एनसीआर
कर्नाटक
झारखंड
तेलंगाना के कुछ हिस्से
महाराष्ट्र के कई अन्य जिले
इन इलाकों में तेज बारिश, गरज-चमक और कुछ स्थानों पर तेज हवाओं की संभावना जताई गई है।
IMD Weather Alert : अगले 72 घंटे क्यों हैं महत्वपूर्ण? जानिए किन राज्यों में सबसे ज्यादा खतरा और क्या बरतें सावधानी
अगले 3 दिनों का मौसम कैसा रहेगा?
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार अगले 48 से 72 घंटे देश के कई राज्यों के लिए महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। Deep Depression पश्चिम की ओर बढ़ रहा है और इसके प्रभाव से पूर्व, मध्य, पश्चिम और उत्तर भारत के कई हिस्सों में भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि कुछ क्षेत्रों में कम समय में अत्यधिक वर्षा होने से स्थानीय स्तर पर बाढ़, जलभराव और यातायात प्रभावित हो सकता है।
राज्यवार मौसम अपडेट
राज्य
स्थिति
संभावित असर
ओडिशा
रेड अलर्ट
अत्यधिक भारी बारिश, निचले इलाकों में जलभराव
छत्तीसगढ़
रेड अलर्ट
कई जिलों में तेज बारिश, नदी-नालों का जलस्तर बढ़ सकता है
विदर्भ (महाराष्ट्र)
रेड अलर्ट
भारी से अत्यधिक भारी वर्षा की संभावना
मध्य प्रदेश
ऑरेंज अलर्ट
कई जिलों में तेज बारिश
गुजरात
ऑरेंज अलर्ट
भारी बारिश और कुछ स्थानों पर जलभराव
दिल्ली-एनसीआर
येलो/ऑरेंज चेतावनी
गरज-चमक, तेज बारिश, ट्रैफिक प्रभावित होने की आशंका
राजस्थान
ऑरेंज अलर्ट
पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में भारी बारिश
झारखंड
ऑरेंज अलर्ट
गरज-चमक के साथ वर्षा
कर्नाटक
भारी बारिश की संभावना
कई जिलों में मानसून सक्रिय
पूर्वोत्तर भारत
भारी वर्षा
लगातार बारिश का दौर जारी रहने की संभावना
क्या स्कूल बंद होंगे?
फिलहाल पूरे महाराष्ट्र या पूरे देश में स्कूल बंद करने का कोई आदेश नहीं है। हालांकि, यदि किसी जिले में मौसम गंभीर होता है, तो स्थानीय प्रशासन अलग से छुट्टी या अन्य निर्देश जारी कर सकता है।
कुछ राज्यों में जिला प्रशासन स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर निर्णय ले सकता है। अभिभावकों को अपने जिले के प्रशासन और शिक्षा विभाग की आधिकारिक सूचना पर ही भरोसा करना चाहिए।
फिलहाल देशभर में रेल और हवाई सेवाओं के व्यापक स्तर पर बंद होने की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है, लेकिन स्थानीय स्तर पर देरी संभव है।
मुंबईवासियों के लिए क्या महत्वपूर्ण है?
मुंबई में फिलहाल लगातार रुक-रुक कर बारिश की संभावना बनी हुई है। यदि बारिश की तीव्रता बढ़ती है तो:
निचले इलाकों में जलभराव हो सकता है।
सड़क यातायात धीमा पड़ सकता है।
समुद्र में ऊंची लहरें उठ सकती हैं।
समुद्र किनारे जाने से बचने की सलाह दी जा सकती है।
यात्रा से पहले IMD, BMC और स्थानीय प्रशासन के अपडेट देखना उचित रहेगा।
किसानों के लिए सलाह
लगातार बारिश वाले क्षेत्रों में किसानों को सलाह दी जाती है कि:
खेतों में जल निकासी की व्यवस्था रखें।
फसल कटाई मौसम सामान्य होने पर करें।
कृषि विभाग की स्थानीय सलाह का पालन करें।
पशुओं को सुरक्षित स्थान पर रखें।
मछुआरों के लिए IMD की चेतावनी
मौसम विभाग ने अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के प्रभावित समुद्री क्षेत्रों में मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी है। खराब मौसम और ऊंची लहरों के कारण समुद्री गतिविधियां जोखिमपूर्ण हो सकती हैं।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार सक्रिय मानसून और Deep Depression के कारण अगले कुछ दिनों तक कई राज्यों में वर्षा जारी रह सकती है। हालांकि, प्रत्येक जिले की स्थिति अलग हो सकती है, इसलिए स्थानीय IMD बुलेटिन और जिला प्रशासन के निर्देश सबसे महत्वपूर्ण माने जाने चाहिए।
देश में मानसून फिर से पूरी तरह सक्रिय हो गया है। Deep Depression के कारण पूर्वी, मध्य और पश्चिमी भारत के कई राज्यों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में सबसे अधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता है, जबकि मुंबई सहित कोंकण क्षेत्र में भी रुक-रुक कर बारिश जारी रह सकती है। मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों से बचें और केवल आधिकारिक अपडेट के आधार पर ही निर्णय लें।
1. IMD ने किन राज्यों के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है?
महाराष्ट्र, ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, दिल्ली-एनसीआर, झारखंड, कर्नाटक और अन्य कई राज्यों के लिए विभिन्न स्तर की चेतावनी जारी की गई है।
2. क्या मुंबई में रेड अलर्ट है?
उपलब्ध ताज़ा जानकारी के अनुसार मुंबई में स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। विदर्भ क्षेत्र के लिए अधिक गंभीर चेतावनी जारी की गई है। स्थानीय IMD अपडेट देखते रहें।
3. क्या स्कूल बंद रहेंगे?
देशभर में स्कूल बंद करने का कोई सार्वभौमिक आदेश नहीं है। निर्णय संबंधित राज्य या जिला प्रशासन लेगा।
4. Deep Depression क्या है?
यह कम दबाव वाली मौसम प्रणाली का अधिक शक्तिशाली रूप होता है, जो भारी बारिश और तेज हवाओं का कारण बन सकता है।
5. सबसे विश्वसनीय मौसम अपडेट कहां देखें?
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की आधिकारिक वेबसाइट और स्थानीय प्रशासन की सलाह सबसे विश्वसनीय स्रोत हैं।
महाराष्ट्र सरकार ने Versova-Bandra Sea Link के लिए ₹1,722 करोड़ के नए एप्रोच रोड को मंजूरी दी है। जानिए परियोजना, ट्रैफिक और पर्यावरण पर इसका असर।
Versova-Bandra Sea Link: ₹1,722 करोड़ के नए एप्रोच रोड को मंजूरी, मुंबई ट्रैफिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव
मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई के सबसे महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में शामिल Versova-Bandra Sea Link के लिए ₹1,722 करोड़ की लागत वाले नए एप्रोच रोड को मंजूरी दे दी है। इस फैसले का उद्देश्य समुद्री पुल तक आसान और तेज़ कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना, ट्रैफिक दबाव कम करना और शहर के पश्चिमी हिस्से में यात्रा को अधिक सुगम बनाना है।
सरकारी मंजूरी के बाद इस परियोजना को मुंबई के भविष्य के ट्रैफिक नेटवर्क के लिए एक अहम कदम माना जा रहा है। हालांकि, परियोजना के साथ पर्यावरणीय प्रभाव और बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई जैसे मुद्दे भी चर्चा में हैं।
स्वीकृत योजना के अनुसार लगभग 3.55 किलोमीटर लंबा नया एप्रोच रोड तैयार किया जाएगा। यह मार्ग बांद्रा फोर्ट क्षेत्र को प्रस्तावित Versova-Bandra Sea Link से जोड़ेगा, जिससे समुद्री पुल तक पहुंच अधिक व्यवस्थित और तेज़ होने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल समुद्री पुल बनाना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उससे जुड़ने वाले एप्रोच रोड भी ट्रैफिक प्रबंधन में समान रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मुंबई ट्रैफिक पर क्या पड़ेगा असर?
यदि परियोजना तय योजना के अनुसार आगे बढ़ती है, तो इसके कई संभावित लाभ सामने आ सकते हैं।
पश्चिमी उपनगरों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी।
प्रमुख जंक्शनों पर ट्रैफिक दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।
समुद्री पुल तक पहुंचने का समय घट सकता है।
भविष्य के सड़क नेटवर्क के साथ बेहतर एकीकरण संभव होगा।
व्यावसायिक और दैनिक आवागमन को सुविधा मिलने की संभावना है।
यातायात विशेषज्ञों का कहना है कि अंतिम प्रभाव परियोजना के पूरा होने और ट्रैफिक प्रबंधन की रणनीति पर निर्भर करेगा।
उपलब्ध परियोजना जानकारी के अनुसार Versova-Bandra Sea Link का निर्माण कार्य जारी है और इसकी प्रगति लगातार आगे बढ़ रही है। नया एप्रोच रोड इसी परियोजना को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से स्वीकृत किया गया है।
सरकारी एजेंसियां आगे भूमि, निर्माण और अन्य तकनीकी प्रक्रियाओं को निर्धारित समय-सीमा के अनुसार पूरा करने की दिशा में काम करेंगी।
पर्यावरण को लेकर भी उठे सवाल
इस परियोजना को लेकर पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कई संगठनों ने चिंता व्यक्त की है।
रिपोर्टों के अनुसार निर्माण कार्य के दौरान बड़ी संख्या में पेड़ों के प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि विकास परियोजनाओं के साथ हरित संतुलन बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है।
इस संबंध में अंतिम पर्यावरणीय मंजूरियां और संबंधित प्रक्रियाएं नियमानुसार पूरी की जाएंगी।
मुंबई लगातार बढ़ती आबादी और वाहनों के दबाव का सामना कर रही है। ऐसे में बड़े सड़क और समुद्री कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट शहर की भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किए जा रहे हैं।
Versova-Bandra Sea Link को भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है, जिससे भविष्य में यात्रा समय कम होने और ट्रैफिक प्रबंधन बेहतर होने की उम्मीद है।
किन क्षेत्रों को मिल सकता है लाभ?
इस परियोजना का लाभ मुख्य रूप से पश्चिमी मुंबई के कई इलाकों को मिलने की संभावना है।
बांद्रा
वर्सोवा
अंधेरी
जुहू
सांताक्रूज़
खार
पश्चिमी उपनगरों से दक्षिण मुंबई की ओर यात्रा करने वाले लोग
हालांकि वास्तविक लाभ परियोजना के पूर्ण होने के बाद ही स्पष्ट रूप से सामने आएगा।
सरकार का लक्ष्य मुंबई में आधुनिक सड़क नेटवर्क तैयार करना, यात्रा समय कम करना और भविष्य की परिवहन आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परियोजना निर्धारित समय में पूरी होती है, तो पश्चिमी तटीय क्षेत्र की यातायात व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल सकता है।
₹1,722 करोड़ के नए एप्रोच रोड को मिली मंजूरी मुंबई के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे Versova-Bandra Sea Link की उपयोगिता बढ़ने और पश्चिमी उपनगरों की कनेक्टिविटी मजबूत होने की उम्मीद है। वहीं पर्यावरण संरक्षण और निर्माण प्रक्रिया पर भी सभी की नजर रहेगी। परियोजना की प्रगति के साथ इसके प्रभाव की तस्वीर और स्पष्ट होगी।
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शिवसेना मंत्रियों की समीक्षा बैठक में कामकाज, विकास परियोजनाओं और जवाबदेही पर सख्त संदेश दिया। राष्ट्रीय स्तर पर जवाबदेही को लेकर चल रही चर्चा के बीच यह बैठक राजनीतिक रूप से भी अहम मानी जा रही है।
(मंत्रालय प्रतिनिधि) मुंबई: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अपनी पार्टी शिवसेना के मंत्रियों को साफ संदेश दिया है कि सरकार के कामकाज में अब किसी तरह की लापरवाही या गलती की कोई गुंजाइश नहीं है। मंगलवार को हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में शिंदे ने विभागों के पिछले डेढ़ साल के कामकाज, विकास परियोजनाओं और आगामी लक्ष्यों की विस्तार से समीक्षा करते हुए मंत्रियों से जवाबदेही और बेहतर प्रदर्शन पर जोर दिया।
यह बैठक ऐसे समय हुई है जब देश की राजनीति में जवाबदेही (Accountability) का मुद्दा प्रमुख चर्चा का विषय बना हुआ है। हाल ही में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार होने के बाद सरकारों में प्रदर्शन और जिम्मेदारी को लेकर नई बहस शुरू हुई है। हालांकि, शिंदे ने अपनी बैठक में उस घटनाक्रम का कोई प्रत्यक्ष उल्लेख नहीं किया, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा माहौल में उनका यह संदेश सरकार के भीतर जवाबदेही पर जोर देने वाला माना जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक बैठक में एकनाथ शिंदे ने मंत्रियों से कहा कि सरकार की छवि उनके कामकाज से तय होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कौन मंत्री क्या काम कर रहा है, इस पर लगातार नजर रखी जा रही है। मंत्री के प्रदर्शन और विवादों से दूरी, दोनों सरकार की कार्यशैली के लिए महत्वपूर्ण हैं।
शिंदे ने कहा कि हाल के घटनाक्रम यह संकेत देते हैं कि अब छोटी से छोटी चूक भी सरकार और पार्टी की छवि को प्रभावित कर सकती है। इसलिए सभी मंत्रियों को पूरी गंभीरता और जवाबदेही के साथ काम करना होगा।
फंड मिलेगा, लेकिन काम में ढिलाई नहीं चलेगी
बैठक में शिंदे ने भरोसा दिलाया कि जनता से जुड़े विकास कार्यों के लिए फंड की कमी नहीं आने दी जाएगी। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि संसाधनों की उपलब्धता के बावजूद यदि काम में लापरवाही हुई तो उसे गंभीरता से देखा जाएगा।
उन्होंने सभी विभागों को लंबित परियोजनाओं में तेजी लाने, प्रशासनिक प्रक्रियाओं को गति देने और जनता से जुड़े मामलों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।
डेढ़ साल के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड
बैठक में शिवसेना के सभी मंत्री और उनके OSD मौजूद रहे। पिछले लगभग डेढ़ साल के दौरान विभागों द्वारा लिए गए फैसलों और उनके क्रियान्वयन की समीक्षा की गई। साथ ही ‘विकसित महाराष्ट्र 2047’ के विजन के तहत वर्ष 2026-27 के विभागीय लक्ष्यों की भी समीक्षा हुई।
शिंदे ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं घोषित करना नहीं, बल्कि उनका लाभ समय पर आम जनता तक पहुंचाना है।
राजनीतिक मायने क्यों अहम हैं?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बैठक केवल विभागीय समीक्षा तक सीमित नहीं थी। हाल के दिनों में सरकारों के भीतर प्रदर्शन, जवाबदेही और प्रशासनिक दक्षता पर जिस तरह जोर बढ़ा है, उसी परिप्रेक्ष्य में शिंदे का संदेश भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि, बैठक में किसी मंत्री के खिलाफ कार्रवाई, फेरबदल या पद से हटाने जैसी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई। लेकिन कामकाज में अनुशासन और प्रदर्शन को लेकर दिया गया संदेश सरकार की प्राथमिकताओं को जरूर स्पष्ट करता है।
अब आगे क्या?
आने वाले महीनों में सरकार विभिन्न विभागों के प्रदर्शन और विकास परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा जारी रख सकती है। ऐसे में मंत्रियों के सामने केवल योजनाओं की घोषणा नहीं, बल्कि उन्हें समय पर लागू करने की चुनौती भी रहेगी।
पालघर के जव्हार तहसील स्थित साखरशेत गांव में वर्षों पुरानी पेयजल समस्या खत्म हो गई है। ‘जलसेतु’ पहल के तहत 250 से अधिक परिवारों को अब गांव में ही सुरक्षित पेयजल मिल रहा है।
महाराष्ट्र/ पालघर: पालघर जिले के जव्हार तहसील के साखरशेत (उंबरखेड) गांव में रहने वाले 250 से अधिक परिवारों की वर्षों पुरानी पेयजल समस्या का समाधान हो गया है। जिन ग्रामीणों, खासकर महिलाओं को रोज़ाना करीब डेढ़ किलोमीटर पैदल चलकर पानी लाना पड़ता था, उन्हें अब गांव में ही सुरक्षित पेयजल मिलने लगा है। इस पहल से ग्रामीणों की दैनिक परेशानी कम होने के साथ स्वास्थ्य और जीवन स्तर में भी सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
यह सुविधा खावडा पावर ट्रांसमिशन लिमिटेड की ‘जलसेतु’ पहल के तहत शुरू की गई है। परियोजना का उद्घाटन 13 जुलाई को स्थानीय आदिवासी संस्कृति के प्रतीक पारंपरिक तारपा नृत्य के साथ किया गया, जिसमें ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों, ग्रामीणों और कंपनी के अधिकारियों ने भाग लिया।
1.5 किलोमीटर दूर से लाई गई पानी की पाइपलाइन
परियोजना के तहत गांव से लगभग 1.5 किलोमीटर दूर स्थित एक विश्वसनीय जलस्रोत से साखरशेत तक भूमिगत पाइपलाइन बिछाई गई है। इसके साथ ही पूरे गांव में 24 जल वितरण केंद्र स्थापित किए गए हैं, ताकि सभी परिवारों तक आसानी से सुरक्षित पेयजल पहुंच सके।
ग्रामीणों का कहना है कि पहले पानी लाने में हर दिन काफी समय और मेहनत लगती थी। अब घर के नजदीक पानी मिलने से महिलाओं और परिवारों को बड़ी राहत मिली है।
ग्रामीणों की दिनचर्या में आया बड़ा बदलाव
नई जलापूर्ति व्यवस्था शुरू होने के बाद अब महिलाओं को लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ रही है। इससे समय की बचत होने के साथ बच्चों और परिवार की देखभाल के लिए अधिक समय मिल सकेगा। स्वच्छ पेयजल मिलने से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी कम होने की उम्मीद है।
स्थानीय लोगों ने इसे गांव के लिए लंबे समय से प्रतीक्षित सुविधा बताते हुए स्वागत किया है।
कंपनी ने क्या कहा?
खावडा पावर ट्रांसमिशन लिमिटेड के उपाध्यक्ष निनाद पितळे ने कहा कि कंपनी का उद्देश्य केवल बिजली प्रसारण तक सीमित नहीं है, बल्कि जिन क्षेत्रों में वह काम कर रही है वहां के स्थानीय समुदायों के जीवन में भी सकारात्मक बदलाव लाना है। उन्होंने कहा कि ‘जलसेतु’ जैसी पहल ग्रामीणों के साथ दीर्घकालिक विश्वास और साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक प्रयास है।
ग्राम पंचायत ने जताया संतोष
कार्यक्रम में साखरशेत ग्राम पंचायत की सरपंच अनीता चौधरी, उपसरपंच रुकेश जयराम काव्हा तथा कंपनी के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
उपसरपंच रुकेश काव्हा ने बताया कि पहले गांव की महिलाओं को रोज़ाना लगभग डेढ़ किलोमीटर पैदल चलकर पानी लाना पड़ता था। नई पाइपलाइन शुरू होने के बाद अब गांव को नियमित और विश्वसनीय जलापूर्ति मिल रही है, जिससे वर्षों पुरानी समस्या का समाधान हुआ है।
सुरक्षित पेयजल किसी भी गांव के स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाता है। साखरशेत में शुरू हुई यह परियोजना केवल पानी की उपलब्धता तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीणों के समय, श्रम और दैनिक जीवन की गुणवत्ता में सुधार की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
FAQ
प्रश्न 1: यह परियोजना किस गांव में शुरू हुई है?
पालघर जिले के जव्हार तहसील स्थित साखरशेत (उंबरखेड) गांव में।
प्रश्न 2: इस परियोजना से कितने परिवारों को लाभ मिलेगा?
250 से अधिक परिवारों को सुरक्षित पेयजल की सुविधा मिलेगी।
प्रश्न 3: पहले ग्रामीणों को कितनी दूरी तय करनी पड़ती थी?
लगभग 1.5 किलोमीटर पैदल चलकर पानी लाना पड़ता था।
प्रश्न 4: परियोजना के तहत क्या-क्या बनाया गया है?
भूमिगत पाइपलाइन और गांव में 24 जल वितरण केंद्र स्थापित किए गए हैं।
पत्रकार विकास फाउंडेशन की नई कार्यकारिणी का गठन हुआ। यूसुफ राणा लगातार दूसरी बार निर्विरोध अध्यक्ष चुने गए, जबकि नजीफ़ आरज़ू, कुणाल जैन समेत कई पदाधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गईं।
मुंबई: मुंबई में पत्रकार विकास फाउंडेशन की नई कार्यकारिणी का गठन कर दिया गया है। संगठन की कोर कमेटी की बैठक में यूसुफ राणा को लगातार दूसरी बार सर्वसम्मति से निर्विरोध अध्यक्ष चुना गया। बैठक रविवार, 26 जुलाई को दैनिक हिंदुस्तान कार्यालय में वरिष्ठ पत्रकार हारून अफ़रोज़ की अध्यक्षता में आयोजित हुई, जिसमें संगठन के भविष्य और पत्रकार हित से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले भी लिए गए।
नई कार्यकारिणी में किन्हें मिली जिम्मेदारी?
अध्यक्ष यूसुफ राणा के प्रस्ताव पर संगठन की नई कार्यकारिणी का गठन किया गया। इसके तहत नजीफ़ आरज़ू को महासचिव और कुणाल जैन को कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया।
इसके अलावा—
यशपाल सिंह – संयुक्त सचिव
फवाद शेख – संयुक्त सचिव एवं मीडिया प्रभारी
शकील शेख – उपाध्यक्ष
साजिद बुखारी – उपाध्यक्ष
अता अहमद शेख – प्रकाशन विभाग प्रभारी
सादिया मर्चेंट – महिला विंग अध्यक्ष (पद पर बरकरार)
बैठक में मौजूद पदाधिकारियों ने पिछले कार्यकाल में पत्रकार हितों के लिए किए गए कार्यों की सराहना करते हुए यूसुफ राणा पर दोबारा विश्वास जताया।
बैठक के दौरान अध्यक्ष यूसुफ राणा ने संगठन की बीते वर्षों की गतिविधियों, पत्रकार कल्याण से जुड़े कार्यक्रमों और विभिन्न सामाजिक पहलों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। सदस्यों ने संगठन को सक्रिय बनाए रखने तथा पत्रकारों के हितों की रक्षा के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की।
संगठन ने भविष्य में पत्रकारों के प्रशिक्षण, सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यक्रमों और युवा पत्रकारों को मंच से जोड़ने पर भी विशेष जोर देने का निर्णय लिया।
सदस्यता को लेकर लिया गया बड़ा फैसला
बैठक में संगठन के विस्तार को लेकर भी अहम निर्णय लिया गया। सर्वसम्मति से तय किया गया कि अब केवल पारंपरिक मीडिया ही नहीं, बल्कि हिंदी, मराठी, उर्दू और अंग्रेज़ी भाषा के पत्रकारों के साथ-साथ डिजिटल एवं सोशल मीडिया से जुड़े सक्रिय पत्रकारों को भी पत्रकार विकास फाउंडेशन की सदस्यता दी जाएगी।
इस निर्णय का उद्देश्य विभिन्न माध्यमों में कार्यरत पत्रकारों को एक साझा मंच उपलब्ध कराना और उनके पेशेवर हितों को मजबूत करना बताया गया।
नवनिर्वाचित अध्यक्ष यूसुफ राणा ने कहा कि संगठन पत्रकारों के अधिकारों की रक्षा, प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन, युवा पत्रकारों को जोड़ने और संगठन को अधिक मजबूत बनाने की दिशा में काम करेगा। बैठक में उनके सुझावों को सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई।
नई टीम से संगठन को नई दिशा मिलने की उम्मीद
बैठक के अंत में वरिष्ठ पत्रकार हारून अफ़रोज़ ने सभी नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि नई कार्यकारिणी संगठन को और अधिक सक्रिय तथा प्रभावी बनाएगी। उल्लेखनीय है कि इससे पहले कोर कमेटी ने पुराने पदाधिकारियों को भंग कर नई कार्यकारिणी के गठन का निर्णय लिया था, जिसके बाद यह नई टीम गठित की गई।
FAQ
प्रश्न 1: पत्रकार विकास फाउंडेशन का नया अध्यक्ष कौन चुना गया?
उत्तर: यूसुफ राणा को लगातार दूसरी बार सर्वसम्मति से निर्विरोध अध्यक्ष चुना गया।
प्रश्न 2: महासचिव और कोषाध्यक्ष किसे बनाया गया?
उत्तर: नजीफ़ आरज़ू को महासचिव और कुणाल जैन को कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया।
प्रश्न 3: संगठन ने सदस्यता को लेकर क्या नया फैसला लिया?
उत्तर: अब हिंदी, मराठी, उर्दू, अंग्रेज़ी, डिजिटल और सोशल मीडिया के सक्रिय पत्रकार भी सदस्य बन सकेंगे।
प्रश्न 4: बैठक कब और कहाँ हुई?
उत्तर: बैठक 26 जुलाई को मुंबई स्थित दैनिक हिंदुस्तान कार्यालय में आयोजित की गई।
मुंबई के माहिम में टाइगर मेमन की जब्त दुकान अब SAFEMA कानून के तहत नीलाम कर दी गई है। जानिए सरकार ने यह कार्रवाई क्यों की, नीलामी में क्या हुआ और आगे क्या होगा।
मुंबई: 1993 मुंबई बम धमाकों के मामले से जुड़ी एक महत्वपूर्ण कार्रवाई में माहिम स्थित टाइगर मेमन की जब्त दुकान की नीलामी कर दी गई है। यह कार्रवाई Smugglers and Foreign Exchange Manipulators (Forfeiture of Property) Act, 1976 (SAFEMA) के तहत की गई। अधिकारियों के अनुसार, यह उन जब्त संपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया का हिस्सा है जिन्हें कानूनी कार्रवाई के बाद सरकार ने अपने कब्जे में लिया था।
आखिर कौन-सी दुकान हुई नीलाम?
नीलाम की गई संपत्ति मुंबई के माहिम स्थित शीतला देवी मंदिर के पास करीब 52 वर्गमीटर की एक व्यावसायिक दुकान है। जांच एजेंसियों के रिकॉर्ड के अनुसार, यहां से टाइगर मेमन कथित तौर पर अपनी कंपनी तिजारत इंटरनेशनल का संचालन करता था।
रिकॉर्ड के मुताबिक, 1993 के दंगों के दौरान इस दुकान को नुकसान पहुंचा था। बाद में मुंबई बम धमाकों की जांच के दौरान इसे जब्त कर लिया गया।
अधिकारियों के अनुसार, यह नीलामी SAFEMA Act के तहत जब्त संपत्तियों के कानूनी निस्तारण की प्रक्रिया का हिस्सा है। सक्षम प्राधिकरण समय-समय पर ऐसी संपत्तियों की कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद नीलामी करता है।
इस कार्रवाई का उद्देश्य जब्त संपत्तियों का कानून के अनुसार निस्तारण करना है।
नीलामी में क्या हुआ?
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, दुकान की रिजर्व कीमत ₹2.05 करोड़ तय की गई थी।
नीलामी प्रक्रिया में केवल एक बोलीदाता शामिल हुआ। फिलहाल सफल बोली लगाने वाले की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद आगे की जानकारी जारी की जा सकती है।
अधिकारियों के अनुसार, 1993 मुंबई बम धमाकों से जुड़े मामलों में जब्त की गई कई अन्य संपत्तियां भी सरकारी नियंत्रण में हैं। इनमें मुंबई के विभिन्न इलाकों की व्यावसायिक और अचल संपत्तियां शामिल हैं।
कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन संपत्तियों के संबंध में भी आगे कार्रवाई की जा सकती है।
1993 मुंबई बम धमाकों से क्या है संबंध?
12 मार्च 1993 को मुंबई में सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे, जिनमें 257 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। जांच एजेंसियों ने टाइगर मेमन को इस मामले में वांछित आरोपी बताया था। वह लंबे समय से फरार थे।
यह नीलामी उसी मामले में जब्त की गई संपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया का हिस्सा है।
अधिकारियों के अनुसार, नीलामी की शेष कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। अन्य जब्त संपत्तियों के मामलों में भी सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद चरणबद्ध तरीके से नीलामी की जा सकती है।