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  • Mumbai Cyber Fraud: Facebook-Instagram Ads से 3 लोगों ने गंवाए ₹7.55 लाख

    Mumbai Cyber Fraud: Facebook-Instagram Ads से 3 लोगों ने गंवाए ₹7.55 लाख

    मुंबई में Facebook-Instagram Ads, Fake Calls, Job Offer और APK के जरिए तीन लोगों से ₹7.55 लाख की ठगी हुई। जानें Scam का तरीका और बचाव के उपाय।

    मुंबई: Facebook और Instagram पर दिखने वाले Ads और Social Media Posts को आधार बनाकर तीन अलग-अलग मामलों में एक कारोबारी, होटल का वेटर और एक सेल्समैन से कुल ₹7,55,734 की साइबर ठगी सामने आई है। तीनों मामलों में ठगी का तरीका अलग था, लेकिन एक बात समान रही—पहले सोशल मीडिया के जरिए भरोसा बनाया गया और उसके बाद Fake Call, WhatsApp, Personal Details या APK File के जरिए पीड़ित को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया।

    इन मामलों में 58 वर्षीय Andheri निवासी कारोबारी Ketan Shah से ₹3,34,534, होटल में काम करने वाले Ramesh Singh Anand Singh Asnal से ₹2,41,200 और मॉल में सेल्समैन Salim Ibrahim Patel से ₹1,80,000 की ठगी हुई।

    Facebook पर Credit Card Ad, फिर Fake HSBC Customer Care Call

    58 वर्षीय कारोबारी Ketan Shah ने Facebook पर HSBC Credit Card से संबंधित एक Advertisement देखा। Advertisement पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने अपना नाम और मोबाइल नंबर दिया।

    14 अगस्त को उन्हें Rahul नाम के व्यक्ति का फोन आया, जिसने खुद को HSBC Customer Care Executive बताया। कॉल के दौरान उन्हें एक Link भेजा गया और मौजूदा Bank Cards की जानकारी देने को कहा गया।

    Shah ने IndusInd Bank और ICICI Bank से संबंधित Card Details दर्ज कीं। इसके कुछ ही समय बाद उनके IndusInd Bank Account से ₹3,34,534 निकाल लिए गए।

    Transaction के बाद उनका मोबाइल फोन अचानक बंद हो गया। दोबारा फोन चालू करने पर उन्हें Transaction Alerts मिले। उन्होंने तुरंत Card Block कराया और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

    यह मामला दिखाता है कि Credit Card या Banking Service का नाम इस्तेमाल करने वाला कोई भी Caller अपने आप वास्तविक Bank Executive नहीं बन जाता। Social Media Advertisement पर दिया गया Mobile Number बाद में Social Engineering के लिए इस्तेमाल किए जाने का जोखिम भी पैदा करता है।

    Dubai Job के नाम पर होटल वेटर से ₹2.41 लाख

    दूसरे मामले में होटल वेटर Ramesh Singh Anand Singh Asnal विदेश में नौकरी की तलाश कर रहे थे। उन्होंने Celebrity Chef Shubham Rawat से जुड़ी एक पोस्ट Instagram और Facebook पर देखी और नौकरी की उम्मीद में Comment Section में अपना Mobile Number डाल दिया।

    27 अगस्त को उन्हें WhatsApp पर Sohan Bhandari नाम के व्यक्ति का Call आया। उसने दावा किया कि Chef Shubham Rawat ने उनका नंबर उसे दिया है और Dubai में नौकरी की व्यवस्था हो गई है।

    इसके बाद Visa Processing, Medical Test और Offer Letter के नाम पर पैसे मांगे गए। Asnal ने 27 अगस्त से 3 सितंबर के बीच 18 अलग-अलग Transactions में कुल ₹2,41,200 भेज दिए।

    जब नौकरी का Offer Letter नहीं आया और संपर्क भी बंद हो गया, तब उन्हें ठगी का पता चला। जांच में सामने आया कि Shubham Rawat का इस ठगी से कोई संबंध नहीं था। कथित तौर पर उनकी Profile Photograph का इस्तेमाल Fake WhatsApp Account बनाकर भरोसा कायम करने के लिए किया गया था। पुलिस ने Sohan Bhandari बनकर संपर्क करने वाले व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की है।

    इस मामले में सबसे बड़ा खतरा Social Media Impersonation का है। किसी व्यक्ति की Profile Photo, नाम या किसी परिचित की पहचान का इस्तेमाल होने से यह साबित नहीं होता कि WhatsApp Account वास्तव में उसी व्यक्ति का है।

    Instagram पर ICICI Credit Card Ad, WhatsApp से आया APK

    तीसरे मामले में मॉल में काम करने वाले Salesman Salim Ibrahim Patel ने Instagram पर ICICI Bank Credit Card का Advertisement देखा। Credit Card की जरूरत होने के कारण उन्होंने Advertisement पर Click किया।

    अगली सुबह एक Unknown Number से Call आया। Caller ने खुद को ICICI Credit Card Department का कर्मचारी बताया और कहा कि KYC Process पूरी करनी होगी।

    इसके बाद WhatsApp पर “ICICI CREDIT CARD.apk” नाम की File भेजी गई। Patel को इसे Open करने और PAN Card तथा मौजूदा SBI Credit Card की जानकारी दर्ज करने के लिए कहा गया।

    निर्देशों का पालन करने के कुछ ही मिनट बाद उनके SBI Credit Card से दो Transactions के जरिए ₹1,80,000 निकाल लिए गए। इसके बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। मामले में Unknown Cyber Fraudster के खिलाफ जांच चल रही है।

    Social Media Ad से WhatsApp तक पहुंच रहा है Scam

    इन तीनों मामलों को साथ देखने पर ठगी का एक स्पष्ट Pattern सामने आता है।

    Facebook या Instagram पर Ad या Post दिखाई देता है। User किसी जरूरत के कारण उस पर प्रतिक्रिया देता है। इसके बाद Mobile Number या अन्य जानकारी के जरिए संपर्क बनाया जाता है। फिर Scammer Bank Executive, Recruiter या किसी भरोसेमंद व्यक्ति की पहचान इस्तेमाल करता है। बातचीत अक्सर WhatsApp तक पहुंचती है और यहीं से Payment, Card Details, PAN Details या App Installation के जरिए ठगी आगे बढ़ती है।

    यानी Scam की शुरुआत हमेशा पैसे मांगने से नहीं होती। कई बार शुरुआत केवल Mobile Number, Comment या Credit Card Enquiry से होती है।

    APK File को लेकर क्यों बढ़ी चिंता

    “ICICI CREDIT CARD.apk” जैसे नाम से भेजी गई File सामान्य KYC प्रक्रिया का हिस्सा नहीं मानी जानी चाहिए। खासकर जब कोई Unknown Caller WhatsApp पर APK भेजकर उसे Install करने के लिए कहे।

    सितंबर 2026 में Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) की ओर से Malicious Android Applications के जरिए Financial Fraud बढ़ने को लेकर चेतावनी सामने आई थी। Facebook और Instagram पर ऐसे Advertisements के जरिए Users को Suspicious Websites और APK Files तक पहुंचाए जाने की बात सामने आई। कुछ Malicious Apps Device Accessibility Permissions का दुरुपयोग करके Smartphone पर नियंत्रण हासिल करने में सक्षम हो सकते हैं।

    देश भर में APK आधारित ठगी के मामले सामने आते रहे हैं। इसलिए किसी Bank, Credit Card, KYC, Pension या Refund के नाम पर WhatsApp से भेजी गई APK File को Install करना गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।

    मुंबई में Online Fraud का कितना बड़ा खतरा है

    मुंबई में 2026 के पहले सात महीनों में 3,689 Online Fraud Cases दर्ज किए गए। इनमें Credit Card और अन्य Digital Fraud के 914 मामले सबसे बड़े दर्ज किए गए Categories में रहे। इन 914 मामलों में 142 मामलों का Detection हुआ और 81 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है।

    इसी अवधि में Fake Social Media Profiles और Email/SMS Morphing से जुड़े 136 मामले तथा Phishing, Man-in-the-Middle और Spoofing से जुड़े 103 मामले दर्ज हुए। Job Fraud के 70 और Fake Websites के 72 मामले भी सामने आए। कुल 3,689 मामलों में 847 मामलों का Detection और 637 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आ चुकी है।

    इन आंकड़ों के बीच Facebook-Instagram से जुड़े मौजूदा मामले यह दिखाते हैं कि Cyber Fraud अब केवल Unknown Phone Calls तक सीमित नहीं है। Social Media Advertising, Fake Profiles, Messaging Apps और Digital Payment Systems एक ही Fraud Chain का हिस्सा बन सकते हैं।

    2,898 SIM Cards और ₹24 करोड़ के Transaction का जांच कनेक्शन

    मुंबई पुलिस की Crime Branch ने सितंबर में एक अलग Cyber Fraud Network की जांच में तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। जांच में 2,898 SIM Cards और 10 Bank Accounts के जरिए करीब ₹24 करोड़ के Transactions का Financial Trail सामने आया। पुलिस अभी इस बात की जांच कर रही है कि इन Transactions के अंतिम Beneficiaries कौन थे और नेटवर्क कितना बड़ा था।

    यह मामला मौजूदा तीन ठगी की घटनाओं से सीधे जुड़ा हुआ नहीं है, लेकिन इससे यह समझ आता है कि Cyber Fraud में इस्तेमाल होने वाले Phone Numbers, SIM Cards और Bank Accounts के पीछे अलग-अलग स्तरों पर काम करने वाला नेटवर्क हो सकता है।

    अगर Social Media Scam में पैसा कट जाए तो तुरंत क्या करें ?

    Cyber Fraud में समय बहुत महत्वपूर्ण है। पैसा कटने के बाद सबसे पहले Bank या Card Issuer को तुरंत सूचना देकर Card या संबंधित Account को सुरक्षित कराना चाहिए।

    इसके बाद Financial Cyber Fraud की शिकायत के लिए 1930 Helpline पर तुरंत संपर्क किया जा सकता है और National Cyber Crime Reporting Portal पर Complaint दर्ज की जा सकती है।

    Caller का Mobile Number, WhatsApp Chat, Advertisement का Screenshot, Website Link, APK का नाम, Transaction ID, Bank Alert और अन्य उपलब्ध Evidence सुरक्षित रखना चाहिए। इन्हें Delete करने के बजाय जांच के लिए सुरक्षित रखना अधिक उपयोगी है।

    यदि किसी संदिग्ध APK को Install किया गया है, तो उस Device से आगे Banking Activity करने से बचना और Device तथा संबंधित Accounts की Security जांच कराना जरूरी है।

    सिर्फ अपना पैसा नहीं, Scammer की जानकारी भी Report करें

    National Cyber Crime Reporting Portal पर Suspicious Phone Numbers, WhatsApp Numbers, Telegram Handles, Email IDs, URLs और Social Media Accounts से संबंधित जानकारी Report करने की सुविधा भी उपलब्ध है।

    इसलिए किसी Scam का सामना होने पर केवल Transaction Dispute तक सीमित रहने के बजाय उपलब्ध Digital Evidence के साथ संदिग्ध Number, Account या Link की भी जानकारी देना महत्वपूर्ण है।

    Social Media पर Cyber Fraud से बचने के 7 जरूरी नियम

    1. Facebook या Instagram पर दिखाई देने वाले Advertisement को केवल Platform पर मौजूद होने के आधार पर Genuine न मानें।
    2. Bank या Credit Card के नाम पर आए Call पर Card Number, CVV, PIN या अन्य Sensitive Details साझा न करें।
    3. WhatsApp पर Unknown Number से भेजी गई APK File Install न करें।
    4. Job के नाम पर Visa, Medical या Processing Fee मांगने वाले व्यक्ति की पहचान और Employer को अलग माध्यम से Verify करें।
    5. किसी Celebrity, Chef, Businessman या परिचित व्यक्ति की Profile Photo को Identity Proof न मानें।
    6. Social Media Comment Section में अपना Mobile Number और अन्य Personal Information सार्वजनिक रूप से देने से बचें।
    7. Fraud होने पर Bank को तुरंत सूचना दें और 1930 पर जल्द से जल्द शिकायत करें।

    Facebook और Instagram पर शुरू हुई इन तीन घटनाओं में कुल ₹7.55 लाख का नुकसान हुआ है। मामलों की जांच जारी है, लेकिन घटनाओं का तरीका एक स्पष्ट चेतावनी देता है—Social Media पर दिखने वाला Ad, WhatsApp Profile या फोन पर बताई गई पहचान अपने आप भरोसे का प्रमाण नहीं है। Cyber Fraud से बचने के लिए किसी भी Payment, KYC, Job Processing या App Installation से पहले स्वतंत्र Verification करना सबसे जरूरी कदम है।

  • Mumbai Cyber Crime: Snapchat पर महिला को ब्लैकमेल करने का आरोप, Punjab से 22 वर्षीय युवक गिरफ्तार

    Mumbai Cyber Crime: Snapchat पर महिला को ब्लैकमेल करने का आरोप, Punjab से 22 वर्षीय युवक गिरफ्तार

    मुंबई के मुलुंड में Snapchat और सोशल मीडिया के जरिए महिला को निजी फोटो-वीडियो वायरल करने की धमकी देने के आरोप में 22 वर्षीय युवक गिरफ्तार।

    मुंबई: मुलुंड में सोशल मीडिया के जरिए एक महिला को कथित तौर पर ब्लैकमेल करने और निजी फोटो-वीडियो वायरल करने की धमकी देकर पैसे मांगने के मामले में पुलिस ने पंजाब से 22 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान Satnam Mandeep Singh के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, महिला द्वारा आगे की मांग मानने से इनकार करने के बाद आरोपी ने उसका एक वीडियो उसके रिश्तेदारों और अन्य लोगों को भेज दिया।

    मुलुंड पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने सोशल मीडिया के माध्यम से महिला से संपर्क किया और धीरे-धीरे उसके साथ परिचय बढ़ाया। इसके बाद उसके पास मौजूद महिला के निजी फोटो और वीडियो को सार्वजनिक करने की धमकी देकर पैसों की मांग की गई। मामला तब गंभीर हो गया जब महिला ने आरोपी की आगे की मांग पूरी करने से इनकार कर दिया और कथित तौर पर उसने वीडियो दूसरे लोगों तक पहुंचा दिया।

    इसके बाद महिला की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। तकनीकी जांच के जरिए आरोपी की पहचान और लोकेशन का पता लगाया गया, जिसके बाद पुलिस की कार्रवाई पंजाब तक पहुंची और Satnam Mandeep Singh को गिरफ्तार किया गया।

    आरोपी पर BNS और IT Act की धाराएं

    मामले में आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 308(2) और 351(2) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(E) और 67(A) के तहत कार्रवाई की गई है।

    इन धाराओं में कथित जबरन वसूली, आपराधिक धमकी, निजता के उल्लंघन और इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील या यौन रूप से स्पष्ट सामग्री के प्रसारण से जुड़े अपराध शामिल हैं।

    हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि आरोपी ने महिला से कुल कितनी रकम मांगी थी या अब तक कितनी रकम हासिल की गई थी। इसी तरह आरोपी ने महिला के निजी फोटो और वीडियो किस माध्यम से हासिल किए, इसकी पूरी जानकारी भी सामने नहीं आई है। इन पहलुओं की जांच का परिणाम आगे की पुलिस कार्रवाई में स्पष्ट हो सकता है।

    निजी फोटो-वीडियो से ब्लैकमेल करने का खतरा

    मुलुंड का यह मामला उस साइबर अपराध के पैटर्न को सामने लाता है जिसमें किसी व्यक्ति की निजी या संवेदनशील तस्वीरों और वीडियो को दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे मामलों में आरोपी अक्सर सामग्री सार्वजनिक करने की धमकी देकर पैसे या दूसरी मांगें पूरी कराने की कोशिश करता है।

    मुंबई और आसपास के इलाकों में हाल के महीनों में निजी डिजिटल सामग्री का इस्तेमाल कर कथित ब्लैकमेल और उगाही के अलग-अलग मामले सामने आए हैं। अगस्त 2026 में एक अलग मामले में मुंबई की 35 वर्षीय महिला पर ठाणे के एक व्यक्ति से निजी फोटो-वीडियो सार्वजनिक करने की धमकी देकर कथित तौर पर करीब 1.39 करोड़ रुपये की उगाही करने का मामला दर्ज हुआ था।

    सितंबर 2026 में मुंबई क्राइम ब्रांच ने एक अन्य कथित सेक्सटॉर्शन मामले में 1,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। उस मामले में निजी WhatsApp चैट सार्वजनिक करने और परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी देकर 64 लाख रुपये लेने का आरोप है। यह मुलुंड मामले से अलग घटना है और दोनों मामलों को एक ही नेटवर्क से जोड़ने की कोई पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

    अगर निजी फोटो-वीडियो वायरल करने की धमकी मिले तो क्या करें?

    ऐसी स्थिति में सबसे पहले आरोपी की धमकी के दबाव में आकर चैट या अन्य डिजिटल सबूत मिटाने से बचना चाहिए। बातचीत के स्क्रीनशॉट, आरोपी का मोबाइल नंबर, सोशल मीडिया प्रोफाइल या यूजरनेम, वीडियो या फोटो, संबंधित URL और अगर कोई ऑनलाइन भुगतान हुआ है तो उसकी रसीद या बैंक रिकॉर्ड सुरक्षित रखना महत्वपूर्ण है।

    राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर ऑनलाइन अपराध की शिकायत दर्ज की जा सकती है। पोर्टल के अनुसार शिकायत के दौरान चैट, स्क्रीनशॉट, वीडियो, फोटो, URL और वित्तीय लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड जैसे साक्ष्य उपयोगी हो सकते हैं। सोशल मीडिया पर मौजूद आपत्तिजनक सामग्री को संबंधित प्लेटफॉर्म पर भी रिपोर्ट किया जा सकता है।

    अगर मामला आर्थिक साइबर धोखाधड़ी या ऑनलाइन पैसे के तत्काल ट्रांसफर से जुड़ा हो तो साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 के जरिए भी सहायता ली जा सकती है।

    जांच में आगे क्या सामने आ सकता है?

    मुलुंड पुलिस की कार्रवाई के बाद अब जांच का अगला महत्वपूर्ण हिस्सा यह हो सकता है कि आरोपी ने महिला के निजी कंटेंट का इस्तेमाल किस तरह किया, क्या उसके पास अन्य लोगों की ऐसी सामग्री भी थी और मामले में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका है या नहीं। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में ऐसे किसी अतिरिक्त आरोपी या दूसरे पीड़ित की पुष्टि नहीं हुई है।

    पुलिस की जांच के साथ यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि आरोपी ने महिला से कितनी रकम की मांग की थी, कोई भुगतान हुआ था या नहीं और निजी वीडियो कितने लोगों तक भेजा गया। इन तथ्यों की पुष्टि होने के बाद मामले की पूरी तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

    फिलहाल मुलुंड पुलिस की कार्रवाई ने एक महत्वपूर्ण बात सामने रखी है। निजी फोटो या वीडियो को सार्वजनिक करने की धमकी देकर दबाव बनाने वाला व्यक्ति सोशल मीडिया के पीछे छिपा हो, तब भी तकनीकी जांच के जरिए उसकी पहचान और लोकेशन तक पहुंचा जा सकता है।

  • मुंबई में 124 पेड़ों की कटाई पर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, IICT प्रोजेक्ट पर उठे कई सवाल

    मुंबई में 124 पेड़ों की कटाई पर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, IICT प्रोजेक्ट पर उठे कई सवाल

    मुंबई Film City में IICT के लिए 124 पेड़ काटने और 333 पेड़ों के ट्रांसप्लांट पर सुप्रीम कोर्ट ने जवाब मांगा।

    मुंबई: Film City के पास प्रस्तावित Indian Institute of Creative Technologies (IICT) के स्थायी कैंपस के लिए 124 पेड़ों की कटाई और 333 पेड़ों के ट्रांसप्लांटेशन का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। बुधवार को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने महाराष्ट्र सरकार और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने पेड़ काटने की अनुमति नहीं दी है।

    चीफ जस्टिस सूर्य कांत के साथ जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के सामने मुंबई की Tree Authority की ओर से यह आवेदन रखा गया था। मामला Aarey में पेड़ों की कटाई से संबंधित सुप्रीम कोर्ट की पहले से चल रही कार्यवाही से जुड़ा है।

    IICT के लिए 124 पेड़ काटने और 333 पेड़ों को दूसरी जगह लगाने का प्रस्ताव

    प्रस्तावित कैंपस के लिए कुल 457 पेड़ प्रभावित होने की बात सामने आई है। इनमें 124 पेड़ों को काटने और 333 पेड़ों को ट्रांसप्लांट करने की अनुमति मांगी गई है।

    Tree Authority की ओर से कोर्ट को बताया गया कि संबंधित जमीन Film City में है और Aarey Forest के अंदर नहीं आती। कोर्ट के सामने आवेदन इसलिए भी रखा गया क्योंकि जनवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने Aarey Colony क्षेत्र में पेड़ों की कटाई की अनुमति को लेकर Tree Authority पर बिना कोर्ट की मंजूरी के आगे बढ़ने पर रोक लगाई थी।

    इस मामले में अभी सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि प्रस्तावित कैंपस की जमीन की वास्तविक कानूनी और भौगोलिक स्थिति क्या है और पेड़ों की कटाई तथा ट्रांसप्लांटेशन का मौजूदा प्रस्ताव किस आधार पर तैयार किया गया है।

    IICT आखिर क्या है?

    यह परियोजना केवल एक सामान्य फिल्म इंस्टीट्यूट नहीं है। Indian Institute of Creative Technologies को Animation, Visual Effects, Gaming, Comics और Extended Reality यानी AVGC-XR क्षेत्र के लिए National Centre of Excellence के रूप में विकसित किया जा रहा है।

    IICT एक Section 8 कंपनी के रूप में केंद्र सरकार, महाराष्ट्र सरकार और उद्योग जगत की भागीदारी से बनाई गई है। इसमें केंद्र सरकार की 34 प्रतिशत और महाराष्ट्र सरकार की 14 प्रतिशत हिस्सेदारी बताई गई है। बाकी हिस्सेदारी उद्योग संगठनों की है।

    केंद्र सरकार ने IICT की स्थापना के लिए 391.15 करोड़ रुपये की one-time budgetary support को मंजूरी दी थी। वहीं Film City के स्थायी कैंपस से जुड़ी पहले की जानकारी में अलग project cost सामने आई थी, इसलिए दोनों आंकड़ों को एक ही लागत मानना सही नहीं होगा।

    IICT का मौजूदा काम पहले से जारी है। संस्थान ने मुंबई के NFDC परिसर से जुलाई 2025 में काम शुरू किया था। अप्रैल 2026 तक 18 courses में 136 students के enrolled होने की जानकारी सामने आई थी। Film City में प्रस्तावित परिसर इसका permanent campus होगा।

    सरकार ने IICT को AVGC-XR ecosystem के विस्तार से भी जोड़ा है। 15,000 secondary schools और 500 colleges में AVGC Content Creator Labs स्थापित करने की योजना भी सामने आ चुकी है।

    Aarey और Film City को लेकर क्यों उठ रहा है सवाल?

    इस मामले में Aarey Forest, Aarey Colony और Film City को एक ही जगह मानना सही नहीं होगा। परियोजना पक्ष का कहना है कि जिस जमीन पर IICT campus प्रस्तावित है, वह Film City में है और Aarey Forest का हिस्सा नहीं है।

    वहीं पर्यावरण कार्यकर्ता और NGO Vanashakti की ओर से इस location और project के लिए वैकल्पिक जगहों की संभावना पर सवाल उठाए गए हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता अरुंधति काटजू ने कोर्ट में पूछा कि जंगल से सटे क्षेत्र में इस तरह का संस्थान बनाने के लिए यही जगह क्यों जरूरी है और क्या दूसरे स्थानों की suitability का अध्ययन किया गया है।

    पेड़ों की संख्या में बदलाव ने भी सवाल खड़े किए

    इस पूरे मामले में पेड़ों के आंकड़ों का बदलना भी ध्यान देने योग्य है। जनवरी 2026 में सामने आई जानकारी में इसी IICT campus के लिए 255 पेड़ों की कटाई और 201 पेड़ों के transplantation का आंकड़ा बताया गया था। उस हिसाब से कुल 456 पेड़ प्रभावित होने थे।

    अब सुप्रीम कोर्ट के सामने 124 पेड़ काटने और 333 पेड़ों के transplantation का आंकड़ा रखा गया है। कुल संख्या 457 होती है, लेकिन दोनों प्रस्तावों में कटाई और transplantation की संख्या में बड़ा बदलाव है।

    उपलब्ध जानकारी से यह स्पष्ट नहीं है कि यह बदलाव revised tree survey, project design में परिवर्तन, पेड़ों की श्रेणी में बदलाव या किसी अन्य तकनीकी मूल्यांकन के कारण हुआ। इसलिए इस अंतर का आधिकारिक स्पष्टीकरण आगे महत्वपूर्ण हो सकता है।

    सुप्रीम कोर्ट में स्वतंत्र पेड़ मूल्यांकन का विकल्प

    सुनवाई के दौरान पेड़ों की संख्या और उनके मूल्यांकन को लेकर भी चर्चा हुई। Tree Authority की ओर से यह बताया गया कि जरूरत पड़ने पर स्वतंत्र संस्था से assessment कराया जा सकता है। इसके लिए IIT Bombay, VJTI और Bombay Natural History Society जैसे संस्थानों के नाम भी सामने आए।

    इससे मामले का फोकस सिर्फ पेड़ काटने की संख्या तक सीमित नहीं रहता। यह भी देखा जा सकता है कि कौन से पेड़ काटने की श्रेणी में रखे गए हैं, किन पेड़ों को ट्रांसप्लांट किया जा सकता है और क्या परियोजना में पेड़ों को बचाने के लिए वैकल्पिक डिजाइन या व्यवस्था संभव है।

    5,000 पेड़ लगाने का undertaking

    परियोजना पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट को compensatory afforestation के तहत महाराष्ट्र Forest Development Corporation के माध्यम से 5,000 पेड़ लगाने का undertaking दिए जाने की जानकारी दी है।

    लेकिन compensatory plantation में सिर्फ संख्या महत्वपूर्ण नहीं होती। plantation की जगह, पेड़ों की प्रजातियां, survival monitoring और लंबे समय तक उनकी देखरेख भी महत्वपूर्ण होंगी।

    Aarey से जुड़े पुराने मामलों में भी compensatory afforestation और पेड़ों के survival की निगरानी सुप्रीम कोर्ट के सामने महत्वपूर्ण मुद्दा रही है। इसलिए इस मामले में भी 5,000 पेड़ों के plantation की वास्तविक निगरानी आगे अहम हो सकती है।

    2025 के 95 पेड़ों वाले मामले से भी जुड़ता है मामला

    Film City क्षेत्र में पेड़ों की कटाई को लेकर 2025 में Goregaon-Mulund Link Road से संबंधित 95 पेड़ों का मामला भी सुप्रीम कोर्ट के सामने आया था। उस मामले में भी Film City की जमीन और Aarey से संबंधित कोर्ट के आदेश के बीच संबंध को लेकर सवाल उठा था।

    सुप्रीम कोर्ट ने उस कार्यवाही में alternative options, expert assessment और compensatory afforestation जैसे पहलुओं पर ध्यान दिया था। वर्तमान IICT मामले में भी alternative site और पेड़ों के independent assessment का मुद्दा सामने आया है।

    जनवरी 2025 का सुप्रीम कोर्ट आदेश क्यों महत्वपूर्ण है?

    10 जनवरी 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने Aarey Colony क्षेत्र में Tree Authority द्वारा पेड़ काटने की अनुमति देने की प्रक्रिया पर महत्वपूर्ण निर्देश दिए थे। Tree Authority आवेदन पर विचार कर सकती है, लेकिन Aarey Colony में पेड़ों की कटाई के लिए कोर्ट की अनुमति के बिना आगे नहीं बढ़ सकती।

    इसी पृष्ठभूमि में वर्तमान IICT आवेदन सुप्रीम कोर्ट के सामने आया है। हालांकि वर्तमान मामले में परियोजना पक्ष का स्पष्ट कहना है कि संबंधित जमीन Aarey Forest के भीतर नहीं है।

    Environmental clearance और tree-cutting permission अलग-अलग हैं

    IICT campus को लेकर environmental और wildlife clearance से संबंधित प्रक्रिया भी आगे बढ़ चुकी है। अगस्त 2026 में परियोजना के Sanjay Gandhi National Park के आसपास के eco-sensitive zone से जुड़े पर्यावरणीय पहलुओं पर भी मंजूरी और शर्तों की जानकारी सामने आई थी।

    इन शर्तों में wildlife conservation के लिए राशि जमा करना, compound wall और सुरक्षा उपाय तथा wildlife को प्रभावित करने वाली high-intensity lighting पर नियंत्रण जैसे प्रावधान शामिल बताए गए थे।

    हालांकि environmental या wildlife clearance को Supreme Court की tree-felling permission के बराबर नहीं माना जा सकता। वर्तमान सुनवाई में 124 पेड़ों की कटाई और 333 पेड़ों के transplantation के लिए Court की भूमिका इसी वजह से महत्वपूर्ण है।

    IICT का विस्तार भी जारी

    IICT का permanent campus ऐसे समय में प्रस्तावित है जब संस्थान अपने education और industry ecosystem का विस्तार कर रहा है। अगस्त 2026 में Netflix के साथ partnership के तहत 100 students के लिए scholarships की घोषणा की गई थी। छह professional programmes के लिए financial support का प्रावधान किया गया है।

    इससे IICT का दायरा traditional filmmaking से आगे animation, VFX, gaming और अन्य creative technologies तक दिखाई देता है।

    अब आगे क्या होगा?

    सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है और इसके लिए दो सप्ताह का समय दिया है। इसके बाद कोर्ट tree-felling proposal, पेड़ों की संख्या, project location, alternative possibilities और compensatory afforestation से जुड़े पहलुओं पर आगे विचार कर सकता है।

    अगर स्वतंत्र tree assessment कराया जाता है, तो 124 पेड़ों की कटाई और 333 पेड़ों के transplantation के मौजूदा आंकड़ों की स्वतंत्र जांच भी महत्वपूर्ण हो सकती है।

    फिलहाल स्थिति साफ है: IICT के स्थायी Film City campus के लिए 124 पेड़ काटने और 333 पेड़ों को ट्रांसप्लांट करने की अनुमति का मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने है, लेकिन पेड़ काटने की अंतिम अनुमति अभी नहीं मिली है। आने वाले दो सप्ताह में महाराष्ट्र सरकार और अन्य पक्षों के जवाब के बाद इस मामले की अगली दिशा स्पष्ट होगी।

  • सानपाड़ा LPG ब्लास्ट: गैस लीक के बाद जमा हुई LPG में आग, दो भाई गंभीर; 6 दुकानें क्षतिग्रस्त

    सानपाड़ा LPG ब्लास्ट: गैस लीक के बाद जमा हुई LPG में आग, दो भाई गंभीर; 6 दुकानें क्षतिग्रस्त

    नवी मुंबई के सानपाड़ा में LPG गैस लीक के बाद धमाका हुआ। दो भाई गंभीर रूप से झुलसे, 6 दुकानें और सामने के अस्पताल की कांच की खिड़कियां टूटीं।

    नवी मुंबई: सानपाड़ा सेक्टर-1 में मंगलवार सुबह हुए जोरदार धमाके को लेकर शुरुआती जानकारी में सिलेंडर ब्लास्ट की बात सामने आई थी, लेकिन बाद की प्रारंभिक फॉरेंसिक जांच में गैस लीक होने के बाद LPG के जमा होने और फिर आग पकड़ने की संभावना सामने आई है। हादसे में दो भाई गंभीर रूप से झुलस गए, जबकि धमाके के असर से छह दुकानों को नुकसान पहुंचा और सामने स्थित अस्पताल की कांच की खिड़कियां टूट गईं।

    यह घटना करीब सुबह 6 बजे सेक्टर-1 स्थित प्रतीक को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी के ग्राउंड फ्लोर के एक खाद्य प्रतिष्ठान में हुई। धमाका Sagar Family Restaurant होने की जानकारी प्राप्त हुई है।

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    घटना स्थल की तस्वीर

    गैस लीक के बाद हुआ जोरदार धमाका

    फायर विभाग के अनुसार दुकान में तीन कमर्शियल LPG सिलेंडर रखे हुए थे। शुरुआती जानकारी में एक सिलेंडर से गैस लीक होने की बात सामने आई थी। बाद में घटनास्थल पर पहुंची फॉरेंसिक टीम ने परिसर और सिलेंडरों की जांच की। प्रारंभिक आकलन में यह संभावना सामने आई कि सिलेंडर के खुद फटने के बजाय LPG लीक होकर बंद परिसर में जमा हुई और किसी ignition source के संपर्क में आने के बाद आग लगी, जिससे जोरदार धमाका हुआ।

    प्रारंभिक जांच के हवाले से बताया गया, कि दोनों भाई दुकान में ही रहते और फास्ट-फूड का कारोबार चलाते थे। रात के दौरान एक LPG सिलेंडर से गैस लीक होने की आशंका है। सुबह काम शुरू करने के दौरान लाइट स्विच से निकली संभावित electrical spark से जमा गैस के ignite होने की बात सामने आई है। हालांकि पुलिस अभी घटना की परिस्थितियों और ignition के वास्तविक स्रोत की जांच कर रही है।

    दो भाई गंभीर रूप से झुलसे

    हादसे में मनीष लालबहादुर यादव और उनके भाई अर्जुन लालबहादुर यादव गंभीर रूप से घायल हुए हैं। मनीष की उम्र 27 वर्ष और अर्जुन की उम्र 46 वर्ष बताई है। दोनों को गंभीर रूप से झुलसने के बाद उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। जहां उनका इलाज चल रहा है।

    मनीष को करीब 75 प्रतिशत और अर्जुन को 85 से 90 प्रतिशत तक झुलसने की जानकारी दी गई है।

    छह दुकानों को नुकसान, अस्पताल की कांच भी टूटी

    धमाका इतना तेज था कि सिर्फ संबंधित खाद्य दुकान ही प्रभावित नहीं हुई। प्रतीक CHS की दो आसपास की दुकानों और बगल की अभिमन्यु को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी की तीन अन्य दुकानों को भी नुकसान पहुंचा। इस तरह कुल छह दुकानों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है।

    धमाके का असर सामने स्थित Suraj Hospital तक पहुंचा। अस्पताल की कांच की facade और खिड़कियां टूट गईं। हालांकि अस्पताल के मरीजों और कर्मचारियों में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।

    फायर ब्रिगेड को 6:13 बजे मिली सूचना

    वाशी फायर स्टेशन के डिविजनल अधिकारी पुरुषोत्तम जाधव के अनुसार सुबह 6:13 बजे धमाके की सूचना फायर स्टेशन को मिली। फायर ब्रिगेड की टीम करीब पांच मिनट में घटनास्थल पर पहुंच गई। मौके पर स्थिति को नियंत्रित करने के साथ घटना के कारणों की जांच शुरू की गई।

    पुलिस और फॉरेंसिक टीम कर रही जांच

    घटना के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया। फॉरेंसिक टीम ने दुकान और वहां रखे LPG सिलेंडरों की जांच की है। प्रारंभिक फॉरेंसिक आकलन गैस लीक के बाद ignition की ओर इशारा करता है, लेकिन गैस लीक होने का सटीक कारण और आग पकड़ने का वास्तविक स्रोत अभी जांच का विषय है।

    इस हादसे में फिलहाल सबसे अहम सवाल यह है कि तीन कमर्शियल LPG सिलेंडरों में से किस हिस्से से गैस लीक हुई और leakage का कारण क्या था। इसके साथ ही LPG पाइप, रेगुलेटर और अन्य उपकरणों की स्थिति तथा दुकान में गैस के जमा होने की परिस्थितियों की जांच भी घटना की पूरी वजह सामने लाने में महत्वपूर्ण होगी।

    घटना की जांच जारी है और दोनों घायलों की चिकित्सकीय स्थिति पर भी आगे की आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।

  • Palghar Hospital Violence: रोहित गावित समेत 23 गिरफ्तार, 22 को पुलिस हिरासत; हाईकोर्ट की जांच पर नजर

    Palghar Hospital Violence: रोहित गावित समेत 23 गिरफ्तार, 22 को पुलिस हिरासत; हाईकोर्ट की जांच पर नजर

    पालघर अस्पताल हिंसा में रोहित गावित समेत 23 गिरफ्तारियां हुईं। 22 आरोपियों की पुलिस हिरासत, CCTV जांच और हाईकोर्ट की निगरानी पर पूरी जानकारी।

    पालघर: मुंबई से सटे पालघर जिले के रिलीफ हॉस्पिटल में दही-हांडी के बाद हुई हिंसा के मामले में जांच अब गिरफ्तारी से आगे बढ़कर डिजिटल सबूत और पुलिस जांच की निगरानी तक पहुंच गई है। विधायक राजेंद्र गावित के बेटे रोहित गावित और शिवसेना के पूर्व जिला प्रमुख कुंदन सांखे समेत आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई जारी है। मिली जानकारी के अनुसार अब तक कुल 23 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जबकि 22 आरोपियों को 16 सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेजे जाने की रिपोर्ट सामने आई है।

    मामले में पुलिस CCTV फुटेज, मोबाइल फोन और कथित तौर पर उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। वहीं, बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुरुआती जांच के तरीके पर गंभीर सवाल उठाते हुए कोकण विभाग के विशेष पुलिस महानिरीक्षक को जांच की व्यक्तिगत निगरानी करने और रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।

    पालघर अस्पताल में विवाद कैसे शुरू हुआ?

    यह मामला 5 सितंबर की रात और 6 सितंबर की शुरुआती घंटों में पालघर के रिलीफ हॉस्पिटल में हुआ। दही-हांडी समारोह के दौरान घायल हुए कुछ गोविंदा अस्पताल में भर्ती थे। उपचार, जांच, डिस्चार्ज और अस्पताल के बिल को लेकर विवाद के बाद शिवसेना से जुड़े लोगों के अस्पताल पहुंचने का आरोप है।

    पुलिस और अस्पताल की शिकायत के अनुसार, अस्पताल में कथित तौर पर तोड़फोड़ की गई, डॉक्टरों को धमकाया गया और कर्मचारियों के साथ मारपीट हुई। एक घायल व्यक्ति को ICU से जबरन बाहर ले जाने का आरोप भी मामले का हिस्सा है। पुलिस ने CCTV फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान किए जाने की बात कही है।

    शुरुआती रिपोर्टों में पांच घायल गोविंदाओं के इलाज और करीब 19,866 रुपये के बिल को लेकर विवाद सामने आया था। एक घायल गोविंदा को आगे की जांच के लिए स्कैन कराने की सलाह दिए जाने की बात भी सामने आई। बाद में घायल गोविंदा केशव ठाकुर को वर्टिब्रल कंप्रेशन फ्रैक्चर पाए जाने और D10-D12 कशेरुकाओं की स्थिरीकरण सर्जरी किए जाने की जानकारी दी गई।

    23 गिरफ्तारियां कैसे हुईं?

    शुरुआत में पुलिस ने 17 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इनमें शिवसेना के पालघर शहर प्रमुख राहुल घरात और तत्कालीन जिला प्रमुख कुंदन सांखे सहित आरोपी शामिल थे। 7 सितंबर को राहुल घरात की गिरफ्तारी हुई।

    इसके बाद 11 सितंबर को विधायक राजेंद्र गावित के बेटे रोहित गावित और 12 गोविंदा सदस्यों को गिरफ्तार किया गया। रोहित गावित को मीरा रोड से पकड़े जाने की जानकारी पुलिस की ओर से दी गई। पुलिस के अनुसार, उनके पुराने मोबाइल में नया SIM इस्तेमाल किए जाने के बाद तकनीकी निगरानी के जरिए उनका पता लगाने में मदद मिली

    इसके बाद फरार बताए जा रहे आरोपियों पर कार्रवाई तेज हुई। 13-14 सितंबर को आठ शिवसेना पदाधिकारी पुलिस के सामने पेश हुए, जबकि साईराज पाटील के चालक साहिल राउत को भी गिरफ्तार किया गया। इससे कुल गिरफ्तारियों की संख्या 23 तक पहुंच गई।

    पुलिस के सामने पेश होने वालों में कुंदन सांखे, साईराज पाटील, मनीष उर्फ विक्की सांखे, राहुल सांखे, ऋषभ वारे, नगरसेविका नीलम सांखे और मनोज घरात के नाम सामने आए हैं।

    22 या 23 गिरफ्तार? आंकड़े में अंतर क्यों दिख रहा है?

    मामले में 22 और 23 दोनों आंकड़े दिखाई दे रहे हैं। 14 सितंबर को 22 आरोपियों को 16 सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेजा गया था। इसी रिपोर्ट में पुलिस द्वारा CCTV के आधार पर 22 लोगों की पहचान किए जाने का उल्लेख है।

    इसके बाद आठ आरोपियों के surrender और साईराज पाटील के चालक साहिल राउत की गिरफ्तारी के बाद कुल गिरफ्तारियां 23 बताई गईं। इसलिए 22 का आंकड़ा पुलिस हिरासत में भेजे गए आरोपियों से और 23 का आंकड़ा कुल गिरफ्तारियों से जुड़ा दिखाई देता है।

    रोहित गावित और कुंदन सांखे पर क्या आरोप हैं?

    रोहित गावित, विधायक राजेंद्र गावित के बेटे हैं। पुलिस कार्रवाई के बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया और पुलिस हिरासत दी गई। उनके बचाव पक्ष की ओर से यह दलील दी गई कि घटनास्थल पर उनकी भूमिका को लेकर आरोपों की जांच जरूरी है और उन्होंने किसी गैरकानूनी इरादे से अस्पताल जाने से इनकार किया। दूसरी ओर पुलिस ने उनकी भूमिका और घटना से पहले तथा बाद की गतिविधियों की जांच के लिए हिरासत की जरूरत बताई।

    कुंदन सांखे, जो शिवसेना के पूर्व जिला प्रमुख रहे हैं, बाद में पुलिस के सामने पेश हुए। पुलिस के मुताबिक वह उन आरोपियों में शामिल हैं जिनकी भूमिका की जांच CCTV और अन्य साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है।

    पुलिस को आरोपियों की हिरासत क्यों चाहिए थी?

    पुलिस ने अदालत से पांच दिन की हिरासत मांगते हुए जांच के कई कारण बताए। इनमें आरोपियों के voice samples लेना, मोबाइल डिवाइस जब्त करना और CCTV के cloud storage में मौजूद फुटेज को सुरक्षित करना शामिल था। पुलिस ने अदालत को बताया कि CCTV से संबंधित cloud data बेंगलुरु स्थित सर्वर पर होने की जानकारी है।

    आरोपियों के बचाव पक्ष ने पुलिस हिरासत का विरोध करते हुए कहा कि वे घायल दोस्त से मिलने अस्पताल गए थे और उनके पीछे कोई गैरकानूनी इरादा नहीं था। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद मजिस्ट्रेट योगेश एच. गजभिये ने अपराध की गंभीरता और प्रथम दृष्टया संलिप्तता को देखते हुए पुलिस हिरासत मंजूर की।

    किन धाराओं में मामला दर्ज है?

    मामले में भारतीय न्याय संहिता और महाराष्ट्र मेडिकेयर सर्विस पर्सन्स एंड मेडिकेयर सर्विस इंस्टीट्यूशंस (हिंसा और संपत्ति को नुकसान या हानि की रोकथाम) अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है।

    मिली जानकारी के अनुसार आरोपों में दंगा, मारपीट, आपराधिक धमकी, बिना अनुमति प्रवेश, गैरकानूनी जमावड़ा और अन्य संबंधित अपराध शामिल हैं।

    हाईकोर्ट ने पुलिस जांच पर क्यों सवाल उठाए?

    इस मामले की सबसे महत्वपूर्ण developments में से एक बॉम्बे हाईकोर्ट की दखल है। अदालत ने पालघर पुलिस की शुरुआती जांच के तरीके पर कड़ी नाराजगी जताई और जांच को पर्याप्त तरीके से आगे नहीं बढ़ाए जाने पर सवाल उठाए।

    अदालत ने पंचनामा, गवाहों के बयान और घटनास्थल से महत्वपूर्ण सबूतों के संग्रह को लेकर सवाल उठाए। अस्पताल में मौजूद सलाइन बोतल जैसे संभावित सबूत को जब्त नहीं किए जाने पर भी अदालत ने नाराजगी जताई।

    हाईकोर्ट ने कोकण विभाग के विशेष पुलिस महानिरीक्षक को जांच की व्यक्तिगत निगरानी करने और रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट पेश करने की समयसीमा 17 सितंबर बताई गई है।

    जांच अधिकारी भी बदले गए

    मामले की जांच के दौरान पुलिस अधिकारियों में बदलाव भी हुआ। शुरुआती जांच PSI विनायक केसरकर के पास थी। इसके बाद पालघर SDPO उमेश गावली और फिर डहाणू SDPO निशा जाधव को जांच की जिम्मेदारी दी गई। 14 सितंबर की रिपोर्ट में निशा जाधव को पुलिस की ओर से अदालत में आरोपियों की हिरासत की मांग करते हुए पेश होने की जानकारी दी गई है।

    हाईकोर्ट की निगरानी में अब जांच का अगला चरण महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    शिवसेना ने क्या कार्रवाई की?

    मामले में नाम सामने आने के बाद शिवसेना ने अपने कई पदाधिकारियों के खिलाफ संगठनात्मक कार्रवाई की। जिसमें राहुल घरात, कुंदन सांखे, साईराज पाटील समेत सात पदाधिकारियों के निलंबित कर दिया गया है।

    अब आगे क्या होगा?

    16 सितंबर तक दी गई पुलिस हिरासत के बाद यानी कल 17 सितंबर आरोपियों को अदालत के सामने फिर पेश किया जाना है। इसके बाद अदालत यह तय करेगी कि आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा जाए या पुलिस हिरासत बढ़ाई जाए या किसी आरोपी को जमानत संबंधी राहत मिले।

    साथ ही पुलिस के लिए CCTV फुटेज, मोबाइल फोन, voice samples और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच महत्वपूर्ण होगी। दूसरी ओर, बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार कोकण विभाग के विशेष पुलिस महानिरीक्षक की निगरानी रिपोर्ट भी अगले चरण में महत्वपूर्ण होगी।

    मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। फिलहाल पुलिस जांच और अदालत की निगरानी दोनों साथ-साथ आगे बढ़ रही हैं।

  • मुंबई ऑटो-टैक्सी मीटर अपडेट में चिप की कमी, 30 नवंबर की डेडलाइन से बढ़ी चालकों की चिंता

    मुंबई ऑटो-टैक्सी मीटर अपडेट में चिप की कमी, 30 नवंबर की डेडलाइन से बढ़ी चालकों की चिंता

    मुंबई में नया ऑटो-टैक्सी किराया लागू है, लेकिन मीटर चिप की कमी से रिकैलिब्रेशन धीमा है। 30 नवंबर की डेडलाइन और जुर्माने का पूरा अपडेट जानें।

    मुंबई: मुंबई महानगर क्षेत्र में ऑटो-रिक्शा और काली-पीली टैक्सियों का नया किराया 1 सितंबर से लागू हो चुका है, लेकिन डिजिटल मीटरों में नई दरें अपडेट करने की प्रक्रिया अब चिप की कमी के कारण धीमी पड़ गई है। परिवहन विभाग ने मीटर रिकैलिब्रेशन के लिए 30 नवंबर 2026 तक का समय दिया है। ऐसे में बड़ी संख्या में वाहनों के मीटर तय समय में अपडेट कराने को लेकर चालकों की चिंता बढ़ गई है।

    नए नियम के तहत ऑटो का पहले 1.5 किलोमीटर का न्यूनतम किराया 26 रुपये से बढ़कर 27 रुपये और काली-पीली टैक्सी का 31 रुपये से बढ़कर 33 रुपये हो गया है। इसके बाद ऑटो का किराया 18.22 रुपये प्रति किलोमीटर और टैक्सी का 21.90 रुपये प्रति किलोमीटर निर्धारित किया गया है।

    मीटर में चिप नहीं तो नया किराया कैसे लिया जा रहा है?

    मीटर रिकैलिब्रेशन पूरा होने तक चालकों को RTO की ओर से स्वीकृत संशोधित टैरिफ कार्ड के आधार पर नया किराया लेने की अनुमति है। यानी सिर्फ इसलिए कि इलेक्ट्रॉनिक मीटर में अभी पुरानी दर दिखाई दे रही है, यात्री को अनिवार्य रूप से पुराना किराया देना जरूरी नहीं है। संशोधित टैरिफ कार्ड मीटर अपडेट होने तक लागू रहेगा।

    यही व्यवस्था 30 नवंबर तक लागू रहेगी। इसके बाद वाहनों के इलेक्ट्रॉनिक मीटरों में संशोधित दरें अपडेट होना जरूरी होगा।

    चिप की कमी बनी सबसे बड़ी बाधा

    नए किराए के लिए डिजिटल मीटर में संशोधित दरों वाली विशेष चिप लगानी पड़ती है। उपलब्ध ताजा रिपोर्टों के अनुसार चिप की पर्याप्त उपलब्धता नहीं होने से रिकैलिब्रेशन की गति प्रभावित हो रही है। परिवहन विभाग ने मीटर कंपनियों और आपूर्तिकर्ताओं के साथ मिलकर चिप का उत्पादन और प्रोग्रामिंग शुरू की है, लेकिन अभी आपूर्ति जरूरत के मुताबिक नहीं पहुंच पाई है।

    रिकैलिब्रेशन की प्रक्रिया में अधिकृत केंद्र पर पुरानी सील हटाकर नई किराया दर वाली चिप लगाई जाती है। इसके बाद मीटर की जांच होती है और फिर RTO की मौजूदगी में सड़क पर टेस्ट किया जाता है। प्रक्रिया सही पाए जाने पर मीटर को सील कर प्रमाणपत्र जारी किया जाता है।

    लाखों वाहनों के मीटर अपडेट करने की चुनौती

    MMR में ऑटो और काली-पीली टैक्सियों की संख्या लाखों में है। करीब 5 लाख ऑटो और 45 हजार काली-पीली टैक्सियों का उल्लेख है।

    इसके मुकाबले क्षेत्र में मीटर टेस्टिंग और रिकैलिब्रेशन के लिए करीब 15 से 20 अधिकृत केंद्र होने की बात सामने आई है। इतनी बड़ी संख्या में वाहनों और सीमित केंद्रों के बीच 30 नवंबर की समय-सीमा पूरी करना परिवहन विभाग के लिए बड़ी प्रशासनिक चुनौती है।

    एक वाहन का रिकैलिब्रेशन पूरा होने में लग सकते हैं 2-3 दिन

    रिकैलिब्रेशन सिर्फ चिप लगाने तक सीमित नहीं है। एक बार वाहन अधिकृत केंद्र पर पहुंचने के बाद पूरी प्रक्रिया में दो से तीन दिन लग सकते हैं। इसमें मीटर अपडेट, परीक्षण, RTO प्रक्रिया और सीलिंग शामिल है।

    यही वजह है कि चालकों के लिए केवल चिप की उपलब्धता ही नहीं, बल्कि अधिकृत केंद्रों की क्षमता और वहां मिलने वाली तारीख भी महत्वपूर्ण हो गई है।

    रिकैलिब्रेशन शुल्क कितना है?

    परिवहन विभाग ने मीटर रिकैलिब्रेशन के लिए 700 रुपये प्रति वाहन की राशि तय किए जाने की जानकारी 6 सितंबर की रिपोर्ट में सामने आई थी। इसके साथ मीटर निर्माताओं और अधिकृत एजेंसियों को GST सहित रसीद जारी करने तथा वसूली का रिकॉर्ड रखने के निर्देश दिए गए हैं।

    हालांकि 13 और 15 सितंबर की कुछ रिपोर्टों में 600 रुपये का शुल्क और उसका अलग-अलग मदों में ब्योरा दिया गया है। इसलिए चालकों को किसी भी अतिरिक्त राशि का भुगतान करने से पहले अधिकृत केंद्र पर प्रदर्शित सरकारी शुल्क सूची और कंप्यूटर जनरेटेड रसीद जरूर लेनी चाहिए। परिवहन विभाग के निर्देशों के अनुसार केंद्रों पर CCTV निगरानी और मीटर की सील संख्या का रिकॉर्ड रखना भी जरूरी है।

    30 नवंबर के बाद क्या होगा?

    30 नवंबर 2026 तक मीटर रिकैलिब्रेशन पूरा करना है। इसके बाद बिना अपडेट वाले वाहनों पर विभागीय कार्रवाई की बात कही गई है। RTO अधिकारियों के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों में 50 रुपये प्रतिदिन के संभावित दंड, अधिकतम 5,000 रुपये तक, का उल्लेख किया गया है।

    हालांकि यह राशि उपलब्ध रिपोर्टों में प्रस्तावित/संभावित दंड के रूप में सामने आई है। इसलिए अंतिम कार्रवाई और दंड की शर्तें संबंधित परिवहन विभाग के आदेश के अनुसार ही लागू होंगी।

    इस स्थिति में चालकों के सामने एक अहम सवाल यह भी है कि यदि कोई चालक समय रहते अधिकृत केंद्र पर पहुंचता है, लेकिन चिप उपलब्ध नहीं होने के कारण उसका मीटर अपडेट नहीं हो पाता, तो क्या उसे भी deadline के बाद दंड का सामना करना पड़ेगा। उपलब्ध रिपोर्टों में इस स्थिति पर स्पष्ट छूट का उल्लेख नहीं है।

    यात्रियों के लिए नया किराया कितना?

    नई दरों के अनुसार:

    वाहनपहले 1.5 किमीउसके बाद
    ऑटो रिक्शा₹27₹18.22 प्रति किमी
    काली-पीली टैक्सी₹33₹21.90 प्रति किमी

    10 किलोमीटर की यात्रा का उदाहरण लें तो ऑटो का किराया करीब 182 रुपये और काली-पीली टैक्सी का करीब 219 रुपये बैठता है। पहले यही दूरी लगभग 171 रुपये और 207 रुपये थी।

    रात 12 बजे से सुबह 5 बजे के बीच 25 प्रतिशत अतिरिक्त किराया लागू है। संशोधित न्यूनतम दर के आधार पर यह ऑटो के लिए 33.75 रुपये और टैक्सी के लिए 41.25 रुपये के आसपास बैठता है।

    वसई और मीरा-भायंदर के चालकों को अलग सुविधा

    वसई और मीरा-भायंदर क्षेत्र में चलने वाले ऑटो और टैक्सी चालकों को ठाणे RTO के अंतर्गत आने वाले अधिकृत केंद्रों पर मीटर रिकैलिब्रेशन कराने की सुविधा दी गई है। अन्य क्षेत्रों के वाहनों को संबंधित RTO क्षेत्र के अधिकृत केंद्रों के जरिए प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

    अब सबसे बड़ी चिंता 30 नवंबर की समय-सीमा

    नई दरें लागू हो चुकी हैं, लेकिन मीटरों को अपडेट करने वाली चिप की उपलब्धता और सीमित रिकैलिब्रेशन केंद्रों के कारण प्रक्रिया की रफ्तार पर सवाल खड़े हो रहे हैं। दूसरी ओर, चालकों के पास 30 नवंबर तक मीटर अपडेट कराने की समय-सीमा है और उसके बाद कार्रवाई तथा संभावित दैनिक दंड का प्रावधान बताया गया है।

    फिलहाल परिवहन विभाग के सामने दोहरी चुनौती है—चिप की आपूर्ति को पर्याप्त करना और उपलब्ध अधिकृत केंद्रों की क्षमता के जरिए बड़ी संख्या में वाहनों के मीटर समय पर अपडेट कराना। वहीं, यात्रियों के लिए इस अवधि में RTO-approved tariff card ही संशोधित किराए का प्रमुख आधार बना रहेगा।

  • मुंबई में तीन दशक पुराने दो मामलों के आरोपी गिरफ्तार, पुराने रिकॉर्ड से मिली लोकेशन

    मुंबई में तीन दशक पुराने दो मामलों के आरोपी गिरफ्तार, पुराने रिकॉर्ड से मिली लोकेशन

    मुंबई में 1995 और 1997 के अलग-अलग मामलों में वांछित दो आरोपी करीब तीन दशक बाद गिरफ्तार हुए। पुलिस ने पुराने रिकॉर्ड और तकनीकी सुरागों से तलाश की।

    मुंबई: करीब तीन दशक पुराने दो अलग-अलग आपराधिक मामलों में वांछित दो आरोपियों को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार किया है। कांदिवली पूर्व की समता नगर पुलिस ने 53 वर्षीय सुकेन शिवसागर विश्वकर्मा को कांदिवली ईस्ट से गिरफ्तार किया, जबकि मलाड पूर्व की दिंडोशी पुलिस ने 48 वर्षीय मोहम्मद मुस्तफा सैयद को बांद्रा ईस्ट के बेहरामपाड़ा इलाके से पकड़ा है। दोनों मामलों में आरोपी लंबे समय से पुलिस की तलाश में थे।

    1997 के अपहरण और दुष्कर्म मामले में गिरफ्तारी

    समता नगर पुलिस के अनुसार, विश्वकर्मा के खिलाफ Crime No. 347/1997 दर्ज किया गया था। मामले में IPC की धारा 363, 366 और 376 के तहत कार्रवाई की गई थी। पुलिस के अनुसार मामला नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म के आरोपों से जुड़ा था।

    करीब 29 साल से लंबित इस मामले में पुलिस ने पुराने पते और परिचितों से जुड़ी जानकारी दोबारा जुटाई। स्थानीय पूछताछ और उपलब्ध तकनीकी सुरागों के आधार पर उसके कांदिवली ईस्ट के ठाकुर विलेज स्थित जीवाला पाड़ा में होने की जानकारी मिली। पुलिस ने उसे 3 सितंबर 2026 को गिरफ्तार किया।

    1995 के मामले में बेहरामपाड़ा से आरोपी पकड़ा

    दिंडोशी पुलिस के अनुसार, मोहम्मद मुस्तफा सैयद के खिलाफ Crime No. 146/1995 में IPC की धारा 376(1) के तहत मामला दर्ज था। पुलिस के मुताबिक कथित अपराध के समय सैयद नाबालिग था। उसके खिलाफ डोंगरी स्थित Juvenile Court से search warrant जारी हुआ था।

    करीब 30 साल बाद उसके बेहरामपाड़ा में होने की सूचना मिलने पर पुलिस टीम ने इलाके में चार दिनों तक तलाश की। पुराने स्थानीय निवासियों, पड़ोसियों, दुकानदारों और अन्य लोगों से मिली जानकारी के साथ उपलब्ध रिकॉर्ड और मतदाता सूची का इस्तेमाल कर उसकी पहचान की गई। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर Juvenile Court के समक्ष पेश किया गया।

    पुराने मामलों में ऐसे पहुंची पुलिस

    दोनों मामलों में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती दशकों बाद आरोपियों की मौजूदा पहचान और ठिकाना तलाशना था। इसके लिए पुराने पुलिस रिकॉर्ड और पते को वर्तमान स्थानीय जानकारी से जोड़ा गया। समता नगर मामले में तकनीकी जानकारी से मिले सुराग भी जांच का हिस्सा रहे, जबकि दिंडोशी पुलिस ने स्थानीय स्तर पर लगातार पूछताछ की।

    दोनों गिरफ्तारियों के बाद संबंधित मामलों की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत की न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

  • कल्याण में 40 लाख की दिनदहाड़े लूट, व्यापारी को गिराकर कैश बैग ले गए 4 बदमाश

    कल्याण में 40 लाख की दिनदहाड़े लूट, व्यापारी को गिराकर कैश बैग ले गए 4 बदमाश

    कल्याण के आगरा रोड पर व्यापारी से 40 लाख रुपये की दिनदहाड़े लूट हुई। चार आरोपी बाइक से आए, हमला कर कैश बैग ले गए। CCTV से जांच जारी।

    ठाणे: कल्याण के आगरा रोड पर मंगलवार को दिनदहाड़े करीब 40 लाख रुपये की नकदी लूटने की सनसनीखेज वारदात सामने आई है। बैंक में रकम जमा करने जा रहे 62 वर्षीय व्यापारी फारूख अख्तर को दो बाइकों पर आए चार आरोपियों ने निशाना बनाया। आरोपियों ने उनकी दोपहिया गाड़ी को लात मारकर गिराया, मारपीट की और नकदी से भरा बैग लेकर फरार हो गए।

    यह वारदात आगरा रोड स्थित शू मॉल के सामने हुई और आसपास लगे CCTV कैमरों में कैद हो गई। घटना के बाद बाजारपेठ पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की है। पुलिस आरोपियों की पहचान और उनके भागने के रास्ते का पता लगाने के लिए CCTV फुटेज खंगाल रही है।

    बैंक में जमा करने जा रहे थे नकदी

    जानकारी के मुताबिक, फारूख अख्तर बिस्किट और सिगरेट का कारोबार करते हैं। वह अपने एक साथी के साथ वालधुनी इलाके से बैंक में नकदी जमा करने के लिए निकले थे। इसी दौरान आगरा रोड पर शू मॉल के सामने आरोपियों ने उनकी बाइक को निशाना बनाया।

    दो बाइकों पर सवार चार लोगों ने व्यापारी की गाड़ी को लात मारी, जिससे वह सड़क पर गिर गए। इसके बाद आरोपियों ने उनके साथ मारपीट की और नकदी से भरा बैग लेकर मौके से फरार हो गए।

    अपराध में इस्तेमाल की गई दोनों बाइकों को Suzuki Burgman और Splendor बताया गया है। दोनों वाहनों पर नंबर प्लेट नहीं होने की जानकारी भी सामने आई है।

    CCTV में कैद हुई वारदात

    लूट की पूरी घटना इलाके में लगे CCTV कैमरों में रिकॉर्ड हुई है। अब पुलिस इन फुटेज के जरिए आरोपियों के हुलिए, उनकी गतिविधियों और वारदात के बाद भागने के रास्ते की जानकारी जुटा रही है।

    जांच का एक अहम हिस्सा आसपास लगे दूसरे CCTV कैमरों की फुटेज को जोड़ना भी है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि आरोपी वारदात के बाद किस दिशा में गए और क्या उन्होंने भागने के लिए पहले से कोई रास्ता तय किया था।

    क्या आरोपियों ने पहले से की थी रेकी?

    इस वारदात में सबसे अहम सवाल यह है कि आरोपियों को व्यापारी के पास बड़ी मात्रा में नकदी होने की जानकारी कैसे मिली।

    फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि व्यापारी की पहले से रेकी की गई थी। हालांकि, बैंक में रकम जमा करने के लिए जाते समय व्यापारी को सीधे निशाना बनाए जाने के कारण पुलिस की जांच में यह पहलू महत्वपूर्ण हो सकता है। इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

    चार पुलिस टीमें जांच में जुटीं

    वारदात की सूचना मिलते ही बाजारपेठ पुलिस मौके पर पहुंची और पंचनामा किया। आरोपियों की तलाश के लिए चार पुलिस टीमें लगाई गई हैं। CCTV फुटेज और अन्य तकनीकी सुरागों के आधार पर आरोपियों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।

    पुलिस की जांच में अब यह पता लगाना भी महत्वपूर्ण होगा कि बिना नंबर प्लेट वाली बाइकों का इस्तेमाल कहां से हुआ और आरोपी वारदात के बाद किस रास्ते से निकले।

    त्योहार से पहले बड़ी नकदी की लूट ने बढ़ाई चिंता

    कल्याण के व्यस्त आगरा रोड जैसे इलाके में दिनदहाड़े करीब 40 लाख रुपये की लूट ने व्यापारियों और स्थानीय नागरिकों की चिंता बढ़ा दी है। खासतौर पर बड़ी रकम लेकर बैंक जाने वाले कारोबारियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

    यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब गणेशोत्सव को देखते हुए कल्याण में पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने के लिए रूट मार्च भी किया था। ऐसे में व्यस्त कारोबारी इलाके में हुई इस वारदात के बाद पुलिस की जांच और सुरक्षा व्यवस्था पर भी लोगों की नजर रहेगी।

    आरोपियों की गिरफ्तारी और रकम की बरामदगी का इंतजार

    फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार आरोपियों की गिरफ्तारी या करीब 40 लाख रुपये की नकदी बरामद होने की पुष्टि सामने नहीं आई है। पुलिस CCTV और अन्य सुरागों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

    अब जांच में सबसे अहम सवाल यही हैं कि चारों आरोपी कौन हैं, उन्हें नकदी की जानकारी कैसे मिली, वारदात के बाद वे किस रास्ते से फरार हुए और क्या पूरी रकम बरामद हो पाती है। पुलिस की अगली कार्रवाई से इस मामले में और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

  • मालवणी में 263 ग्राम हेरोइन जब्त, ₹78.90 लाख का माल; नालासोपारा से हरिद्वार तक जुड़ा कनेक्शन

    मालवणी में 263 ग्राम हेरोइन जब्त, ₹78.90 लाख का माल; नालासोपारा से हरिद्वार तक जुड़ा कनेक्शन

    मालवणी पुलिस ने 263 ग्राम हेरोइन जब्त कर एक आरोपी को गिरफ्तार किया। जांच में नालासोपारा से हरिद्वार तक सप्लाई कनेक्शन सामने आया है।

    मुंबई: मलाड पश्चिम के मालवणी इलाके में हेरोइन तस्करी के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कुल 263 ग्राम हेरोइन जब्त की है। पुलिस की जानकारी के अनुसार, जब्त हेरोइन की अंतरराष्ट्रीय अनुमानित कीमत ₹78.90 लाख है। इस कार्रवाई में 19 वर्षीय एक आरोपी को भी गिरफ्तार किया गया है, जबकि जांच में हेरोइन के स्रोत का कनेक्शन नालासोपारा से हरिद्वार, उत्तराखंड तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है।

    यह कार्रवाई 14 अगस्त 2026 को मालवणी के शांति वेलफेयर सोसायटी, लक्ष्मी नगर, अली तालाब रोड, खारोडी इलाके से शुरू हुए मामले की जांच के दौरान सामने आई।

    4.90 ग्राम हेरोइन के साथ पहली गिरफ्तारी

    पुलिस की जानकारी के अनुसार, 14 अगस्त की रात करीब 8 बजे मालवणी पुलिस को शांति वेलफेयर सोसायटी परिसर में एक 34 वर्षीय व्यक्ति के पास हेरोइन होने की जानकारी मिली। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से 4.90 ग्राम हेरोइन बरामद हुई, जिसकी अंतरराष्ट्रीय अनुमानित कीमत ₹1.50 लाख बताई गई है।

    पुलिस ने इस मामले में मालवणी पुलिस थाने में गु.र.क्र. 1361/2026 दर्ज कर NDPS Act की धारा 8(c) के साथ 21(a) के तहत कार्रवाई की।

    जांच के दौरान गिरफ्तार आरोपी से मिली जानकारी से पुलिस को पता चला कि यह हेरोइन नालासोपारा से लाई गई थी।

    नालासोपारा में 263 ग्राम हेरोइन तक पहुंची जांच

    इसके बाद आरोपी से मिली जानकारी और गुप्त सूचना के आधार पर मालवणी पुलिस ने नालासोपारा पश्चिम के वाघेश्वरी इलाके में स्थित गोल्डन अपार्टमेंट में कार्रवाई की।

    पुलिस की जानकारी के अनुसार, यहां उत्तर प्रदेश के रहने वाले 19 वर्षीय एक युवक के कब्जे से 263 ग्राम हेरोइन बरामद की गई। इस हेरोइन की अंतरराष्ट्रीय अनुमानित कीमत ₹78.90 लाख बताई गई है। आरोपी को गिरफ्तार कर इसी मामले की जांच में शामिल किया गया है।

    यानी शुरुआती 4.90 ग्राम की बरामदगी से शुरू हुई जांच आगे बढ़कर 263 ग्राम के बड़े स्टॉक तक पहुंची।

    263 ग्राम हेरोइन को Commercial Quantity क्यों माना जाता है?

    हेरोइन के लिए अधिसूचित मात्रा के अनुसार 250 ग्राम Commercial Quantity की सीमा है। केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो की उपलब्ध जानकारी में हेरोइन के लिए Small Quantity 5 ग्राम और Commercial Quantity 250 ग्राम निर्धारित है।

    इस मामले में बरामद 263 ग्राम हेरोइन, 250 ग्राम की Commercial Quantity सीमा से 13 ग्राम अधिक है।

    NDPS Act की धारा 21(c) में Commercial Quantity से संबंधित मामलों के लिए कठोर सजा का प्रावधान है। हालांकि, इस मामले में संबंधित आरोपी के खिलाफ अंतिम रूप से कौन-कौन सी धाराएं लागू की गई हैं, इसकी पुष्टि आगे की केस रिकॉर्ड और जांच से होगी।

    हरिद्वार तक पहुंचा सप्लाई का धागा

    पुलिस की जांच में गिरफ्तार 19 वर्षीय आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि उसने यह हेरोइन हरिद्वार जिले के सिगरोड गांव, उत्तराखंड निवासी एक वांछित आरोपी से प्राप्त की थी।

    इस जानकारी के आधार पर अब जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा उस कथित सप्लायर तक पहुंचने और हेरोइन की पूरी सप्लाई चेन का पता लगाने पर केंद्रित हो सकता है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं और माल की अंतिम सप्लाई किन लोगों तक की जानी थी।

    मामले की आगे की जांच जारी है।

    नालासोपारा में हाल की ड्रग्स कार्रवाई भी चर्चा में

    इस मामले में नालासोपारा का नाम ऐसे समय सामने आया है जब हाल के दिनों में इस इलाके से जुड़े कई ड्रग्स मामलों में पुलिस कार्रवाई हुई है। 16 अगस्त को नालासोपारा पूर्व में एक कॉम्बिंग ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने 73 ग्राम कोकीन जब्त कर एक नाइजीरियाई नागरिक को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई थी।

    सितंबर में सामने आए एक अन्य बड़े मामले में नालासोपारा से शुरू हुई जांच कथित मेफेड्रोन नेटवर्क तक पहुंची थी। उस कार्रवाई में बड़ी मात्रा में ड्रग्स और उससे जुड़े सामान की बरामदगी की जानकारी दी गई थी।

    हालांकि, इन अलग-अलग मामलों को मालवणी के 263 ग्राम हेरोइन मामले से जोड़ने वाली कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए दोनों घटनाओं को अलग-अलग मामलों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

    मालवणी पुलिस की पूरी टीम ने की कार्रवाई

    यह कार्रवाई पुलिस आयुक्त देवेन भारती, पुलिस सह आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) डॉ. मनोजकुमार शर्मा, अपर पुलिस आयुक्त, उत्तर प्रादेशिक विभाग शशिकुमार मीना, पुलिस उपायुक्त, उत्तर परिमंडल-02 संदिप घुगे, सहायक पुलिस आयुक्त, मालवणी विभाग महेशकुमार ठाकुर और वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक रानी लक्ष्मण पुरी के मार्गदर्शन में की गई।

    कार्रवाई में सहायक पुलिस निरीक्षक मीना मरे, पुलिस उपनिरीक्षक प्रदिप लोंढे, पुलिस हेड कांस्टेबल 040193 रब्बिल शेख, पुलिस कांस्टेबल 140053 साजिद शेख, 140085 मुदस्सर देसाई, 141568 कालिदास खुडे, 142613 दत्तात्रय गावडे, 140660 सुमित सोरटे और तकनीकी सहायता के लिए पुलिस कांस्टेबल 100014 आदित्य राणे शामिल रहे।

    अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल क्या है?

    263 ग्राम हेरोइन की बरामदगी के बाद जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा केवल आरोपी की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगा। पुलिस को कथित सप्लायर तक पहुंचने के साथ-साथ हेरोइन कहां से लाई गई, किसके लिए लाई गई थी, इसके पीछे और कौन लोग हैं और माल की सप्लाई के लिए किस माध्यम का इस्तेमाल किया गया, जैसे पहलुओं की जांच करनी होगी।

    मालवणी पुलिस की जानकारी के अनुसार, इस मामले में हरिद्वार के सिगरोड गांव से जुड़े कथित वांछित आरोपी का पता लगाने और पूरी सप्लाई श्रृंखला की जानकारी हासिल करने की दिशा में जांच आगे बढ़ रही है।

    मामले में आगे की कार्रवाई और जांच के आधार पर ही कथित ड्रग्स नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।

  • Singapore Envoy Simon Wong ने Ganapati Sthapana की, Ganesh Chaturthi 2026 पर मांगी शांति-समृद्धि

    Singapore Envoy Simon Wong ने Ganapati Sthapana की, Ganesh Chaturthi 2026 पर मांगी शांति-समृद्धि

    Ganesh Chaturthi 2026 पर Singapore Envoy Simon Wong ने Ganapati Sthapana की। जानें 11:02 AM Muhurat, Mumbai Puja Timing और Visarjan की तारीख।

    नई दिल्ली: Ganesh Chaturthi 2026 के मौके पर भारत में Singapore के High Commissioner Simon Wong ने Ganapati Sthapana की तैयारी करते हुए सभी के लिए शांति और समृद्धि की कामना की। Wong ने 14 सितंबर को साझा किए गए संदेश में बताया कि वह 11:02 AM पर Ganpati Sthapana की तैयारी कर रहे थे, जब Madhyahna Puja Muhurat शुरू हो रहा था। उन्होंने लोगों को Happy Ganesh Chaturthi की शुभकामनाएं भी दीं।

    Simon Wong ने Ganesh Chaturthi पर क्या कहा?

    Simon Wong ने Ganapati Sthapana से पहले अपने संदेश में शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना की। उन्होंने बताया कि वह निर्धारित Madhyahna Puja Muhurat के दौरान Ganpati Sthapana की तैयारी कर रहे थे।

    उनका यह संदेश ऐसे समय आया जब Ganesh Chaturthi 2026 के अवसर पर भारत के अलग-अलग हिस्सों में घरों, मंदिरों और सार्वजनिक गणेश मंडलों में भगवान गणेश की स्थापना की जा रही है।

    Simon Wong का Ganesh Chaturthi संदेश इसलिए भी चर्चा में आया क्योंकि उन्होंने केवल festival greetings साझा नहीं किए, बल्कि स्वयं Ganapati Sthapana की तैयारी का उल्लेख किया।

    11:02 AM का Ganesh Puja Muhurat क्या है?

    Ganesh Chaturthi 2026 के लिए Chaturthi Tithi 14 सितंबर सुबह 7:06 बजे शुरू हुई और 15 सितंबर सुबह 7:44 बजे समाप्त होगी। गणेश पूजा और Ganpati Sthapana के लिए Madhyahna period को महत्वपूर्ण माना जाता है।

    New Delhi में Ganesh Chaturthi 2026 का Madhyahna Puja Muhurat 11:02 AM से 1:31 PM तक है। Simon Wong ने अपनी पोस्ट में इसी 11:02 AM समय का उल्लेख किया था।

    हालांकि, यह पूरे भारत के लिए एक समान समय नहीं है। स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग-अलग शहरों में Ganesh Puja Timing में अंतर है। Mumbai में Madhyahna Ganesh Puja Muhurat 11:20 AM से 1:48 PM तक है।

    Ganesh Chaturthi 2026: आज क्या खास है?

    Ganesh Chaturthi इस वर्ष 14 सितंबर 2026, सोमवार को मनाई जा रही है। यह दिन भगवान गणेश की स्थापना और पूजा के साथ Ganeshotsav की शुरुआत का प्रमुख अवसर है।

    देशभर में भक्त भगवान गणेश की पूजा कर रहे हैं और कई स्थानों पर सार्वजनिक गणेश मंडलों में बड़े स्तर पर आयोजन किए जा रहे हैं। Mumbai में Ganeshotsav का असर सार्वजनिक जीवन पर भी दिखाई दे रहा है।

    Mumbai में Ganesh Chaturthi का क्या असर है?

    Mumbai में Ganesh Chaturthi के कारण 14 सितंबर को स्कूल और कॉलेज बंद हैं। बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए भी holiday है और financial markets भी बंद हैं।

    शहर में गणेश मंडलों, मंदिरों और सार्वजनिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने के कारण कई इलाकों में भीड़ और traffic movement में बदलाव देखने को मिल रहा है। सार्वजनिक जुलूसों और बड़े आयोजनों को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई है।

    Mumbai Police ने Ganeshotsav के दौरान सुरक्षा और crowd management के लिए 16,000 से अधिक personnel तैनात किए हैं। इसमें सात Additional Commissioners of Police, 37 DCPs और 52 ACPs शामिल हैं। बड़े गणेश मंडलों, भीड़ वाले क्षेत्रों और processions पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।

    Mumbai में Lalbaugcha Raja के दर्शन के लिए उमड़ी भीड़

    Ganesh Chaturthi के पहले दिन Mumbai के प्रमुख गणेश मंडलों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। Lalbaugcha Raja के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भक्त पहुंच रहे हैं।

    Ganeshotsav के दौरान Mumbai में धार्मिक आयोजनों के साथ राजनीतिक और सार्वजनिक हस्तियों की मौजूदगी भी देखने को मिल रही है। ऐसे में शहर में सुरक्षा और crowd management प्रशासन के लिए प्रमुख प्राथमिकता बनी हुई है।

    Ganesh Visarjan 2026 कब होगा?

    Ganesh Chaturthi के बाद गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन परिवारों और गणेश मंडलों की परंपरा के अनुसार अलग-अलग दिनों में किया जाता है। कुछ परिवार डेढ़ दिन, तीन दिन, पांच दिन या सात दिन बाद विसर्जन करते हैं।

    Anant Chaturdashi 25 सितंबर 2026 को है और यह Ganesh Visarjan का प्रमुख दिन माना जाता है। इस दिन Mumbai समेत कई जगहों पर बड़े पैमाने पर विसर्जन जुलूस निकलेंगे।

    Singapore में भी Ganesh Chaturthi से जुड़े आयोजन

    भारत में Singapore के High Commissioner के तौर पर Simon Wong का Ganapati Sthapana में शामिल होना भारत में उनके सार्वजनिक cultural engagement का एक उदाहरण है। वहीं Singapore में भी Hindu organisations द्वारा Ganesh Chaturthi से जुड़े धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

    हालांकि, Simon Wong के इस संदेश को किसी नए India-Singapore agreement या policy announcement के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह मुख्य रूप से Ganesh Chaturthi के अवसर पर उनकी व्यक्तिगत और सांस्कृतिक सहभागिता तथा शुभकामना का सार्वजनिक संदेश है।

    Ganesh Chaturthi 2026 पर Simon Wong का संदेश क्यों चर्चा में है?

    Ganesh Chaturthi 2026 के पहले दिन Simon Wong ने Ganapati Sthapana की तैयारी और Madhyahna Puja Muhurat का उल्लेख करते हुए शांति और समृद्धि की कामना की। उनका 11:02 AM वाला उल्लेख New Delhi के स्थानीय पूजा समय से जुड़ा है, जबकि Mumbai समेत दूसरे शहरों में स्थानीय पंचांग के अनुसार समय अलग है।

    इस तरह Singapore Envoy की Ganapati Sthapana से जुड़ी यह पोस्ट जहां festival की सांस्कृतिक पहुंच को दिखाती है, वहीं Ganesh Chaturthi 2026 की date, Puja Timing और आगामी Visarjan को लेकर लोगों की जानकारी की जरूरत भी सामने आती है।