Category: Mumbai Crime

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  • दिशा सालियान केस में CBI ने दर्ज की FIR, आदित्य ठाकरे समेत 24 नाम जांच के घेरे में; हत्या, गैंगरेप और कथित कवर-अप की धाराओं में जांच

    दिशा सालियान केस में CBI ने दर्ज की FIR, आदित्य ठाकरे समेत 24 नाम जांच के घेरे में; हत्या, गैंगरेप और कथित कवर-अप की धाराओं में जांच

    दिशा सालियान केस में CBI ने FIR दर्ज कर जांच शुरू की। आदित्य ठाकरे, उद्धव ठाकरे, रिया चक्रवर्ती समेत 24 नामों और पुलिस-FSL अधिकारियों की भूमिका की जांच होगी।

    मुंबई: दिशा सालियान की मौत के मामले में करीब छह साल बाद बड़ा कानूनी मोड़ आया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI ने 14 सितंबर 2026 को FIR दर्ज कर मामले की जांच अपने हाथ में ले ली है। बॉम्बे हाईकोर्ट के 2 सितंबर 2026 के आदेश के बाद शुरू हुई इस कार्रवाई में हत्या, गैंगरेप, आपराधिक साजिश और कथित तौर पर सबूत दबाने, नष्ट करने या मामले को आत्महत्या का रूप देने जैसे आरोपों की जांच की जा रही है।

    इस FIR की सबसे बड़ी बात यह है कि जांच का दायरा सिर्फ बॉलीवुड से जुड़े कुछ नामों तक सीमित नहीं है। इसमें आदित्य ठाकरे, उद्धव ठाकरे, रिया चक्रवर्ती, शोविक चक्रवर्ती, डिनो मोरिया, सूरज पंचोली और रोहन रॉय के साथ पुलिस अधिकारियों, पोस्टमार्टम से जुड़े डॉक्टरों, फोरेंसिक अधिकारियों और मालवणी पुलिस से जुड़े अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई गई है।

    CBI FIR में किन-किन लोगों के नाम?

    दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान की शिकायत और बाद में CBI के सामने दर्ज बयान के आधार पर सामने आई जानकारी में निम्न नाम और पदों का उल्लेख किया गया है:

    1. आदित्य ठाकरे
    2. रोहन रॉय
    3. डिनो मोरिया
    4. सूरज पंचोली
    5. आदित्य ठाकरे के बॉडीगार्ड
    6. रिया चक्रवर्ती
    7. शोविक चक्रवर्ती
    8. सचिन वाजे
    9. परमबीर सिंह
    10. DCP विशाल ठाकुर
    11. उद्धव ठाकरे
    12. अनिल देशमुख
    13. API अशोक देवाड़े
    14. PI जगदेव कलापड़
    15. PI शैलेंद्र नगरकर
    16. PI चिमाजी आढाव
    17. PI अर्जुन राजाने
    18. मालवणी पुलिस स्टेशन के संबंधित अधिकारी
    19. देरी से पोस्टमार्टम से जुड़े डॉक्टर और स्टाफ
    20. डॉ. संजय जाधव
    21. कालिना स्थित फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी के संबंधित अधिकारी
    22. N.P. भाले, Assistant Chemical Analyser
    23. तत्कालीन संबंधित PI
    24. अन्य पुलिस अधिकारी

    इस तरह CBI की जांच का दायरा कथित घटना में मौजूद लोगों से लेकर उस समय की पुलिस जांच और फोरेंसिक प्रक्रिया तक पहुंचता है।

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    FIR में हत्या, गैंगरेप और कथित साजिश की जांच

    CBI FIR में मुख्य आपराधिक आरोपों के साथ criminal conspiracy, कथित तौर पर आत्महत्या की झूठी कहानी तैयार करने और उसे आगे बढ़ाने तथा सबूतों को दबाने, नष्ट करने या उनमें हेरफेर किए जाने के पहलुओं की जांच का उल्लेख है। FIR में सरकारी अधिकारियों और पुलिस मशीनरी की भूमिका से जुड़े आरोपों की भी जांच की जा रही है।

    दिशा के पिता सतीश सालियान ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि उनकी बेटी की मौत को जिस तरह पेश किया गया, उसमें गंभीर सवाल हैं। परिवार की ओर से हत्या और गैंगरेप के आरोप भी लगाए गए हैं। CBI अब इन आरोपों के पीछे उपलब्ध साक्ष्यों और घटनाक्रम की स्वतंत्र जांच करेगी।

    आदित्य ठाकरे से लेकर रिया चक्रवर्ती तक नाम क्यों महत्वपूर्ण?

    इस मामले में आदित्य ठाकरे का नाम सबसे ज्यादा राजनीतिक चर्चा का विषय रहा है। FIR में उनके साथ उनके बॉडीगार्ड्स का भी उल्लेख है।

    इसके अलावा रोहन रॉय की भूमिका जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण है क्योंकि दिशा जिस फ्लैट में मौजूद थीं, वह रोहन रॉय से जुड़ा था।

    डिनो मोरिया और सूरज पंचोली के नाम भी शिकायत और जांच के संदर्भ में सामने आए हैं। इसी तरह रिया चक्रवर्ती और शोविक चक्रवर्ती के नाम भी FIR में जांच के दायरे में बताए गए हैं।

    दिशा के पिता की ओर से CBI को दिए गए बयान में इन नामों के अलावा अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की मांग की गई थी।

    सचिन वाजे, परमबीर सिंह और DCP विशाल ठाकुर की भूमिका की भी जांच

    FIR का दूसरा बड़ा हिस्सा पुलिस और प्रशासनिक भूमिका से जुड़ा है।

    सचिन वाजे, पूर्व मुंबई पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह और DCP विशाल ठाकुर के साथ तत्कालीन पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच का उल्लेख है।

    इसके साथ ही API अशोक देवाड़े, PI जगदेव कलापड़, PI शैलेंद्र नगरकर, PI चिमाजी आधव और PI अर्जुन राजाने के नाम भी सामने आए हैं।

    मालवणी पुलिस स्टेशन के संबंधित अधिकारियों और तत्कालीन संबंधित PI की भूमिका भी जांच का हिस्सा है।

    यह पहलू इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दिशा की मौत के बाद शुरुआती जांच मालवणी पुलिस ने की थी और बाद में मामले में पुलिस की जांच प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठाए गए।

    पोस्टमार्टम और FSL अधिकारियों की भूमिका भी जांच में

    CBI ने केवल पुलिस कार्रवाई तक जांच सीमित नहीं रखी है। देरी से पोस्टमार्टम से जुड़े डॉक्टर और स्टाफ तथा डॉ. संजय जाधव की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

    इसी तरह कालिना स्थित फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी के संबंधित अधिकारियों और N.P. भाले, Assistant Chemical Analyser का नाम भी जांच से जुड़ा बताया गया है।

    इसका मतलब है कि CBI अब मेडिकल और फोरेंसिक रिकॉर्ड की भी दोबारा जांच करेगी और यह देखेगी कि घटनास्थल से लेकर पोस्टमार्टम और फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार होने तक पूरी प्रक्रिया में क्या हुआ था।

    हाईकोर्ट ने पहले की जांच में उठाए थे गंभीर सवाल

    CBI जांच की पृष्ठभूमि में बॉम्बे हाईकोर्ट का 2 सितंबर 2026 का आदेश बेहद महत्वपूर्ण है। अदालत ने पुरानी जांच में कई ऐसी विसंगतियों का उल्लेख किया था जिनके कारण मामले की स्वतंत्र जांच की जरूरत महसूस हुई।

    इनमें स्पॉट पंचनामा तैयार करने में देरी, पुलिस की घटनास्थल पर मौजूदगी की टाइमलाइन, ADR दर्ज करने के समय से जुड़े सवाल, CCTV रिकॉर्ड, घटनास्थल से खून के नमूने का मुद्दा, पोस्टमार्टम में दर्ज चोटें, कमरे के दरवाजे को लेकर विरोधाभास, FSL और मेडिकल रिकॉर्ड में अंतर तथा मोबाइल और लैपटॉप की जांच में हुई देरी शामिल थीं।

    हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि करीब छह साल तक चली जांच ने कई सवालों का समाधान करने के बजाय और सवाल खड़े किए। इसी कारण CBI को मामले की स्वतंत्र जांच सौंपने का आदेश दिया गया।

    पहले पुलिस और SIT का क्या निष्कर्ष था?

    दिशा सालियान की मौत के बाद मुंबई पुलिस ने मामले को ADR के तौर पर दर्ज किया था। बाद की पुलिस जांच और SIT की जांच में मौत को आत्महत्या की दिशा में देखा गया और पुलिस ने foul play के पर्याप्त सबूत नहीं मिलने की बात कही थी।

    SIT ने भी पुराने रिकॉर्ड, CCTV, कॉल डिटेल और गवाहों से जुड़ी जानकारी की दोबारा समीक्षा की थी। उसकी रिपोर्ट भी आत्महत्या के पहले के निष्कर्ष से अलग नहीं गई थी।

    अब CBI उसी जांच रिकॉर्ड, मेडिकल दस्तावेज, CCTV फुटेज, डिजिटल सामग्री, फोरेंसिक रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों की स्वतंत्र तरीके से जांच करेगी।

    दिशा सालियान और सुशांत सिंह राजपूत की मौत का कनेक्शन

    दिशा सालियान की मौत 8 जून 2020 को हुई थी और सुशांत सिंह राजपूत की मौत 14 जून 2020 को। दोनों घटनाओं के बीच छह दिन का अंतर होने के कारण दोनों मामलों को लेकर लगातार सवाल उठते रहे।

    दिशा के मामले में आदित्य ठाकरे, रिया चक्रवर्ती, शोविक चक्रवर्ती, डिनो मोरिया, सूरज पंचोली, रोहन रॉय और अन्य नामों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं।

    अब CBI की जांच में यदि दोनों घटनाओं के बीच कोई प्रमाणित आपराधिक कड़ी सामने आती है तो एजेंसी उस दिशा में भी जांच आगे बढ़ा सकती है। फिलहाल दोनों मामलों की जांच अलग-अलग रही है।

    अब CBI की जांच में क्या होगा?

    CBI अब पूरे मामले की घटनाक्रम के स्तर पर जांच करेगी। इसमें मुख्य रूप से यह देखा जाएगा कि 8 जून 2020 की रात क्या हुआ, दिशा किन लोगों के संपर्क में थीं, घटनास्थल पर कौन मौजूद था, CCTV और डिजिटल रिकॉर्ड क्या बताते हैं और पहले की पुलिस जांच में सामने आए विरोधाभासों की वास्तविक वजह क्या थी।

    इसके साथ ही एजेंसी:

    • हत्या के आरोपों की जांच करेगी
    • गैंगरेप के आरोपों की जांच करेगी
    • कथित आपराधिक साजिश की जांच करेगी
    • कथित कवर-अप और सबूत दबाने के आरोपों की जांच करेगी
    • पुलिस अधिकारियों की कार्रवाई की जांच करेगी
    • पोस्टमार्टम और मेडिकल रिकॉर्ड की जांच करेगी
    • FSL और Chemical Analysis से जुड़े रिकॉर्ड की जांच करेगी
    • CCTV, मोबाइल, लैपटॉप और अन्य डिजिटल सामग्री की दोबारा जांच करेगी
    • FIR में नामित सभी व्यक्तियों की भूमिका को उपलब्ध सबूतों के आधार पर परखेगी

    अब छह साल पुराने केस में सामने आएगा असली घटनाक्रम?

    दिशा सालियान केस में CBI की FIR ने छह साल पुराने मामले को फिर से जांच के केंद्र में ला दिया है। इस बार जांच का दायरा केवल दिशा की मौत के कारण तक सीमित नहीं है, बल्कि घटना, कथित हत्या और गैंगरेप, आपराधिक साजिश, पुलिस जांच, पोस्टमार्टम, फोरेंसिक प्रक्रिया और कथित कवर-अप तक फैला हुआ है।

    सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि FIR में आदित्य ठाकरे, रोहन रॉय, डिनो मोरिया, सूरज पंचोली, आदित्य ठाकरे के बॉडीगार्ड, रिया चक्रवर्ती, शोविक चक्रवर्ती, सचिन वाजे, परमबीर सिंह, DCP विशाल ठाकुर, उद्धव ठाकरे, अनिल देशमुख, API अशोक देवाड़े, PI जगदेव कलापड़, PI शैलेंद्र नगरकर, PI चिमाजी आढाव, PI अर्जुन राजाने, डॉ. संजय जाधव, N.P. भाले और संबंधित पुलिस, मेडिकल, FSL व सुरक्षा अधिकारियों समेत पूरी जांच प्रक्रिया से जुड़े लोगों की भूमिका सामने आई है।

    अब CBI की जांच यह तय करेगी कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में से किन आरोपों को उपलब्ध साक्ष्य समर्थन देते हैं और 8 जून 2020 की रात दिशा सालियान के साथ वास्तव में क्या हुआ था।

  • जोगेश्वरी में 417 ग्राम MD जब्त, तीन MDMA गोलियां भी मिलीं; 1.26 करोड़ की बरामदगी

    जोगेश्वरी में 417 ग्राम MD जब्त, तीन MDMA गोलियां भी मिलीं; 1.26 करोड़ की बरामदगी

    जोगेश्वरी में मुंबई क्राइम ब्रांच ने 417 ग्राम MD और तीन MDMA गोलियां जब्त कर एक आरोपी को गिरफ्तार किया। कुल बरामदगी की कीमत 1.26 करोड़ रुपये है।

    मुंबई: जोगेश्वरी पश्चिम में मुंबई क्राइम ब्रांच की मादक पदार्थ निरोधक इकाई ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 417 ग्राम मेफेड्रोन (MD) जब्त किया है। कार्रवाई में तीन MDMA गोलियां, 25 हजार रुपये नकद और एक मोबाइल फोन भी बरामद हुआ। पुलिस के अनुसार पूरी बरामदगी की अनुमानित कीमत करीब 1.26 करोड़ रुपये है। मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है।

    गश्त के दौरान मिली सूचना, घर पर हुई कार्रवाई

    यह कार्रवाई 11 सितंबर को आजाद मैदान इकाई की टीम ने की। गश्त के दौरान पुलिस को कथित तौर पर सूचना मिली कि जोगेश्वरी पश्चिम के आक्सा मस्जिद रोड इलाके में एक व्यक्ति अपने घर से नशीले पदार्थों की बिक्री कर रहा है। इसके बाद पुलिस टीम ने संदिग्ध व्यक्ति और उसके घर की तलाशी ली।

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    तलाशी के दौरान मेफेड्रोन और MDMA गोलियों के अलावा नकदी तथा एक आईफोन 15 भी जब्त किया गया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ मादक पदार्थों से संबंधित कानून के तहत मामला दर्ज किया है।

    1.26 करोड़ की कीमत में क्या-क्या शामिल है?

    पुलिस के अनुसार 417 ग्राम मेफेड्रोन की अनुमानित कीमत करीब 1.25 करोड़ रुपये है। इसके अलावा तीन MDMA गोलियों की कीमत करीब 88 हजार रुपये बताई गई है। 25 हजार रुपये नकद और मोबाइल फोन समेत पूरी बरामदगी का मूल्य लगभग 1 करोड़ 26 लाख 43 हजार रुपये बताया गया है।

    अब ड्रग्स के स्रोत की तलाश

    गिरफ्तारी के बाद पुलिस की जांच का अगला अहम हिस्सा जब्त मेफेड्रोन के स्रोत और उसके संभावित खरीदारों तक पहुंचना है। पुलिस जब्त मोबाइल फोन और अन्य साक्ष्यों की भी जांच कर रही है। हालांकि, अब तक पुलिस की ओर से फोन से मिले किसी खास संपर्क, संदेश या कथित खरीदार की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

    मुंबई में MD के मामले पहले से चिंता का विषय

    जोगेश्वरी की यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब मुंबई में मेफेड्रोन समेत अन्य मादक पदार्थों के खिलाफ लगातार कार्रवाई हो रही है। 2026 की पहली तिमाही में मुंबई में 1,332 मादक पदार्थों से जुड़े मामले दर्ज किए गए थे और 1,287 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इस दौरान जब्त नशीले पदार्थों का कुल मूल्य 37 करोड़ रुपये से अधिक बताया गया था।

    इसी अवधि में मेफेड्रोन से जुड़े 82 मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई थी। वर्ष 2025 में मुंबई में MD से जुड़े 275 मामले दर्ज किए गए थे।

    हाल के दिनों में मुंबई और आसपास के इलाकों में अलग-अलग मामलों में MD की बड़ी खेप भी पकड़ी गई है। हालांकि, इन मामलों को जोगेश्वरी की वर्तमान कार्रवाई से जोड़ने की पुलिस की ओर से कोई पुष्टि नहीं हुई है।

    क्या किसी बड़े आपूर्ति नेटवर्क तक पहुंचेगी जांच?

    जोगेश्वरी मामले में अभी यह स्पष्ट नहीं है कि 417 ग्राम MD आरोपी तक कैसे पहुंचा और इसकी आपूर्ति किसे की जानी थी। हाल में मुंबई महानगर क्षेत्र में सामने आए कुछ अलग मामलों में जांच स्थानीय स्तर के आरोपियों से आगे बढ़कर कथित निर्माण और आपूर्ति नेटवर्क तक पहुंची है।

    ऐसे में जोगेश्वरी मामले में भी जांच का महत्वपूर्ण पहलू यह रहेगा कि पुलिस जब्त मादक पदार्थ के स्रोत और उससे जुड़े संभावित संपर्कों की पहचान कर पाती है या नहीं। फिलहाल इस मामले को किसी बड़े नेटवर्क से जोड़ने की पुष्टि नहीं हुई है।

    मामले की आगे की जांच जारी है। पुलिस की जांच से अब यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि जब्त MD का स्रोत क्या था, इसकी आपूर्ति कहां की जानी थी और क्या इस मामले में आगे किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है।

  • Cheque Bounce Case: सजा के बाद समझौते से खत्म हुई Conviction, Bombay HC के फैसले का असर

    Cheque Bounce Case: सजा के बाद समझौते से खत्म हुई Conviction, Bombay HC के फैसले का असर

    Cheque Bounce Case में समझौते के बाद दोषसिद्धि खत्म करने का रास्ता कैसे खुलता है? Bombay HC के 2019 फैसले और 2026 के Supreme Court आदेश से समझिए।

    मुंबई: चेक बाउंस मामले में दोषसिद्धि के बाद भी समझौते से राहत मिल सकती है। बॉम्बे हाई कोर्ट के 4 अक्टूबर 2019 के एक फैसले में ललिता कमल व्यास की दोषसिद्धि और उसके खिलाफ पारित निचली अदालतों के आदेश रद्द कर दिए गए थे। इस पुराने फैसले की कानूनी अहमियत अब इसलिए फिर सामने आती है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने 2025 और 2026 में भी चेक अनादरण के मामलों में दोषसिद्धि के बाद समझौते को स्वीकार करते हुए राहत दी है।

    ललिता कमल व्यास मामले में क्या हुआ था?

    ललिता कमल व्यास को मुंबई के अंधेरी स्थित 48वें महानगरीय मजिस्ट्रेट न्यायालय ने परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत दोषी ठहराया था। यह मामला C.C. No. 4281/SS/2017 से संबंधित था। 8 मार्च 2018 के इस आदेश को चुनौती दी गई, लेकिन 19 जनवरी 2019 को सत्र न्यायालय ने भी दोषसिद्धि को बरकरार रखा। इसके बाद मामला बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंचा।

    हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता और ललिता कमल व्यास के बीच विवाद आपसी समझौते से समाप्त हो गया। दोनों पक्षों ने 1 अक्टूबर 2019 को समझौता शर्तें और सहमति पत्र तैयार किया। शिकायतकर्ता की ओर से शपथपत्र भी दिया गया, जिसमें उसने आरोपी के खिलाफ आगे कोई शिकायत या दावा नहीं होने की बात कही।

    शिकायतकर्ता अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुआ और समझौते की पुष्टि की। इसके बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने निचली अदालत और सत्र न्यायालय के आदेशों को रद्द करते हुए ललिता कमल व्यास को धारा 138 के अपराध से बरी कर दिया। यह फैसला न्यायमूर्ति एस.एस. शिंदे ने 4 अक्टूबर 2019 को सुनाया था।

    क्या दोषसिद्धि के बाद भी चेक बाउंस मामले में समझौता हो सकता है?

    यही इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण कानूनी पहलू है।

    परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 147 के तहत धारा 138 का अपराध समझौते के जरिए समाप्त किया जा सकता है। इसका मतलब यह है कि मामला केवल इसलिए खत्म होने की संभावना से बाहर नहीं हो जाता कि आरोपी को पहले ही दोषी ठहराया जा चुका है।

    हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच निजी समझौता होते ही दोषसिद्धि अपने आप समाप्त हो जाती है। समझौते को न्यायिक प्रक्रिया के तहत स्वीकार किया जाना जरूरी है और अदालत के सामने पक्षों की सहमति तथा समझौते की शर्तों को रिकॉर्ड पर लाना महत्वपूर्ण होता है।

    2025 में सुप्रीम कोर्ट ने भी यही सिद्धांत दोहराया

    इस कानूनी स्थिति को अगस्त 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने और स्पष्ट किया।

    Gian Chand Garg बनाम Harpal Singh मामले में आरोपी को धारा 138 के तहत दोषी ठहराया गया था। निचली अदालत की दोषसिद्धि को अपीलीय अदालत ने बरकरार रखा और पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में पुनरीक्षण याचिका भी खारिज हो गई। इसके बाद 6 अप्रैल 2025 को शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच समझौता हुआ।

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि धारा 147 के कारण धारा 138 का अपराध समझौते योग्य है और पक्षों के स्वैच्छिक समझौते की स्थिति में कार्यवाही को उचित चरण पर समाप्त किया जा सकता है। अदालत ने शिकायतकर्ता द्वारा पूर्ण और अंतिम समझौते के रूप में राशि स्वीकार किए जाने के बाद दोषसिद्धि और सजा को रद्द कर दिया।

    2026 का सुप्रीम कोर्ट फैसला: जेल जाने के बाद भी मिली राहत

    इस कानूनी स्थिति का सबसे ताजा और महत्वपूर्ण उदाहरण Parsharvanath Weld Wires Pvt. Ltd. बनाम State of Chhattisgarh है।

    इस मामले में धारा 138 के तहत दोषसिद्धि के बाद आरोपी को एक वर्ष के साधारण कारावास और शिकायतकर्ता को 28 लाख रुपये मुआवजा देने की सजा मिली थी। सत्र न्यायालय और बाद में हाई कोर्ट ने भी दोषसिद्धि को बरकरार रखा।

    मामला यहां तक पहुंच गया कि कंपनी के निदेशक को 23 अप्रैल 2026 को सजा भुगतने के लिए जेल भेज दिया गया। इसके केवल दो दिन बाद, 25 अप्रैल को दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया। समझौते के तहत शिकायतकर्ता को 30 लाख रुपये देकर पूरे विवाद का अंतिम निपटारा किया गया।

    निचली अदालत और हाई कोर्ट ने अंतिम दोषसिद्धि के बाद मामले को दोबारा खोलने पर राहत देने से इनकार किया। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 को समझौता स्वीकार करते हुए धारा 138 के अपराध को समझौते के जरिए समाप्त किया और दोषसिद्धि तथा सजा को रद्द कर दिया। अदालत ने केंद्रीय जेल, रायपुर के अधीक्षक को आरोपी को तत्काल रिहा करने का निर्देश भी दिया।

    इसका सीधा मतलब क्या है?

    इन फैसलों से यह स्पष्ट होता है कि चेक बाउंस मामले में दोषसिद्धि हो जाने के बाद भी समझौते का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं होता।

    लेकिन इसे स्वतः मिलने वाली राहत नहीं माना जा सकता। शिकायतकर्ता की स्वैच्छिक सहमति, समझौते की वास्तविक शर्तें, भुगतान और मामले की न्यायिक स्थिति जैसे पहलू महत्वपूर्ण होते हैं। अदालत ही यह तय करती है कि समझौते को स्वीकार कर दोषसिद्धि और सजा समाप्त की जा सकती है या नहीं।

    2025 के Gian Chand Garg फैसले और 2026 के Parsharvanath Weld Wires फैसले ने इस बात को और मजबूत किया है कि केवल इस आधार पर समझौते को अस्वीकार नहीं किया जा सकता कि धारा 138 के मामले में दोषसिद्धि पहले ही अंतिम स्तर तक पहुंच चुकी है।

    ललिता कमल व्यास के फैसले की आज क्यों चर्चा हो रही है?

    ललिता कमल व्यास का मामला स्वयं 2026 का नया फैसला नहीं है। बॉम्बे हाई कोर्ट का मूल निर्णय 4 अक्टूबर 2019 का है। हाल में कानूनी वेबसाइटों पर इस पुराने फैसले को दोबारा प्रकाशित या सूचीबद्ध किए जाने के कारण यह मामला फिर सामने आया है।

    इसकी मौजूदा प्रासंगिकता इसलिए है क्योंकि 2025 और 2026 में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों ने उसी व्यापक कानूनी सिद्धांत को आगे स्पष्ट किया है—यानी धारा 138 के मामले में स्वैच्छिक समझौते के बाद, उचित न्यायिक प्रक्रिया के जरिए दोषसिद्धि और सजा समाप्त की जा सकती है।

    क्या हर चेक बाउंस मामले में समझौते के बाद सजा खत्म हो जाएगी?

    नहीं। ऐसा कोई स्वतः लागू होने वाला नियम नहीं है।

    समझौता होने के बाद भी उसे अदालत के समक्ष उचित तरीके से प्रस्तुत करना और न्यायिक आदेश प्राप्त करना जरूरी है। इसके अलावा, समझौते की शर्तें पूरी हुई हैं या नहीं और शिकायतकर्ता की सहमति वास्तविक और स्वैच्छिक है या नहीं, यह भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

    इसलिए धारा 138 के किसी मामले में केवल निजी समझौता हो जाने को अपने आप दोषसिद्धि समाप्त होने के बराबर नहीं माना जाना चाहिए।

    आम लोगों के लिए क्या मायने रखता है?

    चेक अनादरण के मामलों में मुकदमा लंबा चलने के बावजूद विवाद को समझौते से समाप्त करने का रास्ता उपलब्ध रह सकता है। यहां तक कि दोषसिद्धि के बाद भी अदालत के समक्ष समझौते के आधार पर राहत मांगी जा सकती है।

    ललिता कमल व्यास का 2019 का बॉम्बे हाई कोर्ट फैसला और 2025-26 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले मिलकर यह दिखाते हैं कि धारा 138 के मामलों में समझौता केवल मुकदमे की शुरुआती अवस्था तक सीमित विकल्प नहीं है।

    हालांकि, अंतिम राहत अदालत के आदेश पर निर्भर करती है और प्रत्येक मामले के तथ्य तथा समझौते की शर्तें अलग हो सकती हैं।

  • गोरेगांव में कपड़ों को लेकर दोस्त की हत्या, पत्थर से चेहरे पर वार

    गोरेगांव में कपड़ों को लेकर दोस्त की हत्या, पत्थर से चेहरे पर वार

    मुंबई के गोरेगांव में कपड़े और निजी सामान के विवाद में 26 वर्षीय युवक की मौत हो गई। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू की है।

    मुंबई: गोरेगांव पश्चिम में कपड़े और निजी सामान इस्तेमाल करने को लेकर दो दोस्तों के बीच हुआ विवाद जानलेवा हो गया। पुलिस के मुताबिक, 26 वर्षीय सूरज शंकर डोले पर उसके दोस्त बाबासाहेब उर्फ सुबोध भीमराव वाघमारे ने कथित तौर पर पहले हाथों से हमला किया और फिर फुटपाथ पर पड़ा पत्थर उसके चेहरे पर मार दिया। गंभीर चोटों के बाद सूरज की मौत हो गई। आरोपी घटना के बाद मौके से फरार हो गया और पुलिस उसकी तलाश कर रही है।

    गोरेगांव पश्चिम में कहां हुई घटना?

    पुलिस के अनुसार, घटना 9 सितंबर की रात करीब 11:30 बजे गोरेगांव पश्चिम में एसवी रोड पर किंग स्टूडियो के पास, उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक के सामने हुई। मृतक सूरज डोले मीरा रोड का रहने वाला था और गोरेगांव में पशु देखभाल के क्षेत्र में काम करता था। आरोपी सुबोध वाघमारे भी इसी क्षेत्र में काम करता था।

    कपड़े ही नहीं, बैग और निजी सामान को लेकर था विवाद

    पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, सूरज कथित तौर पर सुबोध के कपड़े और दूसरी निजी चीजें उसकी अनुमति के बिना इस्तेमाल करता था। सुबोध ने यह भी आरोप लगाया कि सूरज उसके कपड़ों से भरा बैग लेकर गया था और मांगने के बावजूद वापस नहीं किया था। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद चल रहा था।

    घटना के समय दोनों के बीच बहस हो रही थी। उनके दोस्त सुधांशु पांडे ने बीच-बचाव करते हुए झगड़े की वजह पूछी। शिकायत के अनुसार, इसी दौरान सुबोध ने सूरज के कपड़े और सामान इस्तेमाल करने की बात कही।

    बहस के बाद पत्थर से चेहरे पर हमला

    एफआईआर में दर्ज विवरण के मुताबिक, बहस के दौरान सूरज ने कथित तौर पर सुबोध को गाली दी। इसके बाद सुबोध ने उस पर हाथों से हमला किया। विवाद बढ़ने पर उसने फुटपाथ पर पड़ा पत्थर उठाकर सूरज के चेहरे पर वार कर दिया।

    हमले में सूरज को गंभीर चोट लगी और काफी खून बहा। इसके बाद सुबोध मौके से फरार हो गया। बाद में सूरज मृत पाया गया।

    पिता की शिकायत पर हत्या का मामला दर्ज

    मामले में सूरज के पिता शंकर डोले की शिकायत के आधार पर गोरेगांव पुलिस ने मामला दर्ज किया है। आरोपी की पहचान बाबासाहेब उर्फ सुबोध भीमराव वाघमारे के रूप में हुई है। उसकी उम्र 37 वर्ष बताई गई है। पुलिस के मुताबिक, वह पशु देखभाल का काम करता है और गोरेगांव पश्चिम में फुटपाथ पर रहता है।

    पुलिस ने हत्या समेत अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। उपलब्ध एफआईआर की रिपोर्ट में भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1), 115(2) और 352 का उल्लेख है।

    आरोपी की तलाश जारी

    घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। मामले की जांच पुलिस निरीक्षक मनोज गाडले के नेतृत्व में की जा रही है। पुलिस अब घटना के पूरे घटनाक्रम और आरोपी की तलाश से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है।

    घटना को लेकर उपलब्ध जानकारी में अभी सीसीटीवी फुटेज, हमले में इस्तेमाल पत्थर की बरामदगी या पोस्टमार्टम की विस्तृत रिपोर्ट जैसी जानकारियां सामने नहीं आई हैं। इन पहलुओं पर पुलिस की आगे की कार्रवाई से मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

  • 36 की उम्र में 35 अपराध, एक तमंचा और 3 जिंदा कारतूस के साथ गोरेगांव में गिरफ्तार

    36 की उम्र में 35 अपराध, एक तमंचा और 3 जिंदा कारतूस के साथ गोरेगांव में गिरफ्तार

    गोरेगांव में वनराई पुलिस ने 36 वर्षीय रोहित सावंत को तमंचा और 3 जिंदा कारतूस के साथ गिरफ्तार किया। आरोपी पर 35 मामले दर्ज हैं।

    मुंबई: गोरेगांव पूर्व में आगामी उत्सव से पहले वनराई पुलिस ने अवैध हथियार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 36 वर्षीय रोहित अविनाश सावंत को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार उसके पास से एक तमंचा और तीन जिंदा कारतूस बरामद हुए हैं। खास बात यह है कि आरोपी के खिलाफ पहले से 35 मामले दर्ज होने की जानकारी पुलिस ने दी है।

    यह कार्रवाई 9 सितंबर को पुलिस उपनिरीक्षक प्रदीप शिंदे और एटीसी पथक को मिली गुप्त सूचना के आधार पर की गई। सूचना मिली थी कि रोहित सावंत शिवधाम हिंदू श्मशानभूमि के बाहर, पश्चिम द्रुतगति महामार्ग की दक्षिण दिशा में गोरेगांव पूर्व में मौजूद है। सूचना की पुष्टि के बाद वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में दो पुलिस टीमें तैयार की गईं और मौके पर जाल बिछाया गया।

    कमर के पास मिला तमंचा

    पुलिस के मुताबिक आरोपी मौके पर दिखाई देने के बाद टीम ने उसे हिरासत में लिया। पूछताछ में उसकी पहचान रोहित अविनाश सावंत, उम्र 36 वर्ष, निवासी मलपा डोंगरी नंबर-1, चकाला, अंधेरी पूर्व के रूप में हुई।

    तलाशी के दौरान उसकी कमर के पास लोहे की नली और काली मुठ वाला एक तमंचा मिला। पुलिस ने इसकी अनुमानित कीमत 55 हजार रुपये बताई है। वहीं दाहिनी जेब से तीन जिंदा कारतूस बरामद हुए। पुलिस के अनुसार हथियार और कारतूस की कुल अनुमानित कीमत 58 हजार रुपये है।

    पुलिस के अनुसार आरोपी के पास हथियार रखने का कोई वैध लाइसेंस नहीं था। इसके बाद वनराई पुलिस थाने में अपराध क्रमांक 675/2026 के तहत मामला दर्ज किया गया।

    आरोपी पर पहले से 35 मामले

    पुलिस के अनुसार रोहित सावंत के खिलाफ पहले से 35 मामले दर्ज हैं। हालांकि पुलिस की ओर से जारी जानकारी में इन मामलों की धाराओं और उनकी वर्तमान स्थिति का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।

    मौजूदा मामले में पुलिस उसके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड के साथ हथियार बरामदगी के संबंध की भी जांच कर रही है। हथियार उसे कहां से मिला और इसके पीछे किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका है या नहीं, यह भी जांच का अहम हिस्सा हो सकता है।

    आगामी उत्सव के दौरान किस काम के लिए लाया था हथियार?

    इस मामले का सबसे अहम पहलू आगामी उत्सव को लेकर पुलिस की जांच है। गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को है और यह कार्रवाई उत्सव शुरू होने से कुछ दिन पहले हुई है। पुलिस के मुताबिक अब यह पता लगाया जा रहा है कि रोहित सावंत यह अवैध हथियार आगामी उत्सव की अवधि में किस उद्देश्य से लेकर आया था।

    फिलहाल पुलिस ने आरोपी द्वारा किसी विशेष वारदात की तैयारी या किसी व्यक्ति को निशाना बनाने की पुष्टि नहीं की है। इसलिए जांच पूरी होने से पहले हथियार बरामदगी को किसी संभावित हमले या साजिश से जोड़ना उचित नहीं होगा।

    वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में कार्रवाई

    इस कार्रवाई में पुलिस आयुक्त, संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था), अतिरिक्त पुलिस आयुक्त उत्तर प्रादेशिक विभाग, पुलिस उपायुक्त उत्तर प्रादेशिक विभाग-3 और सहायक पुलिस आयुक्त दिंडोशी के मार्गदर्शन में कार्रवाई की गई।

    वनराई पुलिस के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक अब्दुल रऊफ शेख, पुलिस निरीक्षक सुभाषचंद्र पोस्टुरे, पुलिस निरीक्षक संदीप वाघमारे तथा पुलिस उपनिरीक्षक प्रदीप शिंदे की टीम ने कार्रवाई में भूमिका निभाई। पुलिसकर्मी 01920/सालुंखे, 041277/तेली और पुलिस सिपाही 140073/शिंदे भी कार्रवाई में शामिल रहे।

    मामले में वनराई पुलिस ने अपराध क्रमांक 675/26 दर्ज किया है। आरोपी के खिलाफ आर्म्स एक्ट की धारा 3 और 25 तथा महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम की धारा 37(1)(अ) और 135 के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस अब हथियार की आपूर्ति, आरोपी के पुराने मामलों और हथियार रखने के वास्तविक उद्देश्य से जुड़ी जानकारी जुटा रही है।

  • मुंबई में फर्जी PMO ID और हथियार का मामला: दो गिरफ्तार, आरोपी ने कहा- “मेरे साथ फ्रॉड हुआ है”

    मुंबई में फर्जी PMO ID और हथियार का मामला: दो गिरफ्तार, आरोपी ने कहा- “मेरे साथ फ्रॉड हुआ है”

    मुंबई के BKC में फर्जी PMO ID और हथियार के मामले में दो गिरफ्तार हुए। कोर्ट में आरोपी ने दावा किया कि उसके साथ फ्रॉड हुआ है।

    मुंबई: बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे से पहले फर्जी PMO पहचान पत्र और हथियार के साथ प्रवेश के मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य आरोपी की ओर से कोर्ट में दावा किया गया कि “मेरे साथ फ्रॉड हुआ है।”**

    पुलिस के मुताबिक, घटना BKC के Jio World परिसर से जुड़े इलाके में सामने आई। एक व्यक्ति ने कथित तौर पर खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से जुड़ा अधिकारी बताया था। उसके साथ मौजूद व्यक्ति के पास हथियार मिला। हालांकि, मुंबई पुलिस ने फिलहाल कहा है कि इस घटना का प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रम से कोई सीधा संबंध सामने नहीं आया है।

    BKC में कैसे सामने आया मामला?

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुंबई दौरे को देखते हुए 7 सितंबर को BKC इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी थी। इसी दौरान सुरक्षा जांच के बीच एक व्यक्ति की पहचान और गतिविधियों पर संदेह हुआ।

    पुलिस जांच के अनुसार, उस व्यक्ति ने कथित तौर पर PMO का पहचान पत्र दिखाया। जांच में पहचान पत्र की authenticity पर सवाल उठे और बाद में इसे फर्जी बताया गया।

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    गिरफ्तार आरोपी को कोर्ट से बाहर लाते मुंबई पुलिस की तस्वीर

    खबर के मुताबिक, कथित ID में पदनाम और validity से जुड़ी विसंगतियां थीं। इसी दौरान साथ मौजूद व्यक्ति की तलाशी में हथियार बरामद हुआ।

    दो लोगों की गिरफ्तारी

    मामले में पुलिस ने रोहन प्रेमल पारेख और दिलीप राजाराम कुंडे को गिरफ्तार किया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कुंडे के पास मिला firearm लाइसेंसी बताया गया है।

    पुलिस अब यह पता लगा रही है कि हथियार किसके नाम पर है और उसे हाई-सिक्योरिटी वाले इलाके में किन परिस्थितियों में लाया गया था।

    मामले में एक तीसरे व्यक्ति की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस ने इस मामले में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है।

    कोर्ट में आरोपी ने कहा- “मेरे साथ फ्रॉड हुआ है”

    मामले में सबसे अहम नया मोड़ कोर्ट की सुनवाई के दौरान सामने आया। मुख्य आरोपी की ओर से बचाव पक्ष ने दावा किया कि उसे कथित तौर पर एक offer letter, पहचान पत्र और कुछ सरकारी communications मिले थे।

    बचाव पक्ष के मुताबिक, आरोपी को विश्वास दिलाया गया था कि वह किसी सरकारी या PMO से जुड़ी भूमिका में है। इसी आधार पर यह दावा किया गया कि आरोपी खुद किसी धोखाधड़ी का शिकार हो सकता है।

    हालांकि, यह आरोपी और उसके बचाव पक्ष का दावा है, जिसकी पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।

    अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कथित PMO ID और offer letter किसने तैयार किए तथा ये दस्तावेज आरोपी तक कैसे पहुंचे।

    फर्जी PMO ID की जांच क्यों महत्वपूर्ण?

    किसी सरकारी संस्था की पहचान का कथित तौर पर इस्तेमाल इस मामले को सामान्य पहचान संबंधी विवाद से आगे ले जाता है।

    पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ID वास्तव में कहां तैयार हुई, उसे किसने आरोपी को दिया और क्या इसके पीछे किसी अन्य व्यक्ति या नेटवर्क की भूमिका है।

    आरोपियों के मोबाइल फोन और communications से भी इस कड़ी को जोड़ने की कोशिश की जा रही है।

    हथियार लाइसेंसी था, फिर भी सवाल क्यों उठे?

    बरामद firearm के लाइसेंसी होने की बात सामने आई है। लेकिन पुलिस की जांच केवल हथियार के लाइसेंस तक सीमित नहीं है।

    जांच में यह भी देखा जा रहा है कि हथियार किसके नाम पर था, उसे लेकर आरोपी वहां क्यों पहुंचा और उस स्थान पर हथियार ले जाने की परिस्थितियां क्या थीं।

    क्या PM मोदी के कार्यक्रम से था कोई संबंध?

    मुंबई पुलिस के अनुसार, अब तक आरोपियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम के बीच कोई सीधा संबंध सामने नहीं आया है।

    घटना ऐसे समय हुई जब PM मोदी के दौरे को लेकर BKC में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई थी। इसी वजह से फर्जी PMO ID और हथियार से जुड़ी जानकारी सामने आते ही पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया।

    जांच में अब क्या पता लगाना बाकी है?

    पुलिस की जांच मुख्य रूप से इन सवालों पर केंद्रित है कि कथित फर्जी PMO ID किसने बनाई, आरोपी को यह दस्तावेज कैसे मिला और उसके पास मौजूद कथित offer letter व communications का स्रोत क्या था।

    इसके अलावा, आरोपी के BKC पहुंचने का वास्तविक उद्देश्य, हथियार की परिस्थितियां और मामले में तीसरे व्यक्ति की भूमिका भी जांच का हिस्सा है।

    सबसे अहम सवाल यह है कि क्या आरोपी वास्तव में किसी सरकारी पहचान के नाम पर ठगा गया था या उसने जानबूझकर फर्जी पहचान का इस्तेमाल किया?

    इसका जवाब जांच में सामने आने वाले दस्तावेजों, डिजिटल सबूतों और पूछताछ के आधार पर ही स्पष्ट होगा।

    फिलहाल पुलिस जांच जारी

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुंबई में Global Fintech Fest 2026 से जुड़े कार्यक्रम के लिए आए थे। उनके दौरे से पहले BKC में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई थी।

    इसी दौरान सामने आए फर्जी PMO ID और हथियार के मामले में दो आरोपी पुलिस कार्रवाई का सामना कर रहे हैं। वहीं, “मेरे साथ फ्रॉड हुआ है” वाला आरोपी का दावा भी जांच के दायरे में है।

    अब जांच का फोकस कथित फर्जी पहचान पत्र के स्रोत, दस्तावेज तैयार करने वाले व्यक्ति और आरोपियों की वास्तविक मंशा का पता लगाने पर है।

  • अंधेरी में फर्जी Income Tax Raid का खुलासा, कारोबारी से ₹1 करोड़ की मांग; 6 गिरफ्तार

    अंधेरी में फर्जी Income Tax Raid का खुलासा, कारोबारी से ₹1 करोड़ की मांग; 6 गिरफ्तार

    अंधेरी में फर्जी Income Tax और Crime Branch अधिकारियों ने कारोबारी पर रेड का नाटक कर ₹1 करोड़ मांगे। पुलिस ने 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया।

    मुंबई: अंधेरी ईस्ट में फर्जी Income Tax और Crime Branch अधिकारियों की पूरी टीम बनाकर एक कारोबारी के ऑफिस पर कथित रेड डालने और उससे ₹1 करोड़ की मांग करने का मामला सामने आया है। Andheri Police ने इस मामले में अब तक 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश और पूरे नेटवर्क की जांच जारी है।

    यह घटना 17 जुलाई 2026 को चकाला के Sahar Cargo Estate स्थित Two M Ophthotronics Pvt Ltd में हुई थी। पुलिस के मुताबिक आरोपी फर्जी पहचान पत्र, दस्तावेज और कथित search warrant के सहारे खुद को सरकारी अधिकारी बताते हुए करीब चार घंटे तक कारोबारी और कर्मचारियों पर दबाव बनाते रहे।

    कारोबारी और पत्नी को ऑफिस तक कैसे ले जाया गया?

    पुलिस के मुताबिक कंपनी के मालिक राजकुमार कंदासामी, 49, को कर्मचारियों से फोन पर जानकारी मिली कि Income Tax अधिकारियों ने उनके ऑफिस में रेड की है। इसके बाद उन्हें तुरंत ऑफिस पहुंचने के लिए कहा गया।

    कंदासामी अपनी पत्नी के साथ घर से निकले। रास्ते में कथित तौर पर दो लोगों ने खुद को Income Tax अधिकारी बताया, पहचान पत्र दिखाया और दोनों को उसी कैब में बैठकर ऑफिस ले गए। इसी दौरान आरोपियों ने कारोबारी और उनकी पत्नी के मोबाइल फोन भी अपने कब्जे में ले लिए।

    ऑफिस पहुंचने के बाद कथित फर्जी टीम ने कर्मचारियों से पूछताछ की, कंपनी के दस्तावेजों की जांच की और उनकी गतिविधियों पर नियंत्रण रखा। एक आरोपी ने कथित तौर पर search warrant दिखाकर कंदासामी के हस्ताक्षर भी लिए।

    ₹1.70 लाख से ₹1.44 करोड़ की धमकी और फिर ₹1 करोड़ की मांग

    पुलिस के अनुसार आरोपियों ने कारोबारी से उसके cash expenses के बारे में पूछताछ की। उन्होंने कथित तौर पर ₹1.70 लाख के cash transaction को आधार बनाकर भारी penalty की धमकी दी।

    आरोपियों ने कथित तौर पर ₹1.44 करोड़ की penalty का डर दिखाया और इसके बाद मामला खत्म करने के लिए ₹1 करोड़ देने की मांग की। कारोबारी ने पैसे देने के बजाय कहा कि यदि कोई tax violation है तो Income Tax Department की ओर से उसे औपचारिक notice दिया जाए और वह पैसा सीधे विभाग को देगा।

    यहीं से आरोपियों की योजना कमजोर पड़ गई। कारोबारी ने बाद में अपने Chartered Accountant से संपर्क किया और Income Tax Department से इसकी पुष्टि कराई। तब पता चला कि उसके ऑफिस में कोई अधिकृत Income Tax raid नहीं हुई थी। इसके बाद उसने Andheri Police से शिकायत की।

    पूर्व ड्राइवर पर क्यों गया पुलिस का शक?

    जांच में संतोष उदय खोपटकर का नाम सामने आया, जो कारोबारी का पूर्व ड्राइवर बताया गया है। पुलिस के अनुसार उसके पास कारोबारी की आर्थिक गतिविधियों और ऑफिस में cash होने की जानकारी थी।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार जांचकर्ताओं का कहना है कि खोपटकर अपने पूर्व मालिक से नाराज था और उसने कथित तौर पर कारोबारी की financial information दूसरे आरोपियों तक पहुंचाई। इसी जानकारी के आधार पर ऑफिस को निशाना बनाए जाने की आशंका है।

    हालांकि, यह पुलिस की जांच में सामने आया आरोप है और मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच तथा अदालत की प्रक्रिया के बाद ही तय होगा।

    पुलिस ने मोबाइल बंद होने के बाद भी मुख्य आरोपी को कैसे पकड़ा?

    Andheri Police ने आरोपियों तक पहुंचने के लिए Call Detail Records (CDR), mobile numbers, dump data, cell-ID और location inputs के साथ CCTV फुटेज का इस्तेमाल किया। अलग-अलग टीमों ने Andheri, Vile Parle, Pune और Nalasopara में जांच की।

    पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी प्रेम किसन सबनानी, 50, ने अपना मोबाइल फोन बंद कर दिया था। इससे उसकी live location नहीं मिल रही थी। लेकिन पुराने CDR और cell-ID data से उसके फोन से जुड़े लोगों की लोकेशन Pune के Sinhagad Road इलाके में मिलने लगी।

    पुलिस टीम ने वहां Mumbai-registered वाहनों की तलाश की। एक scooter मिलने के बाद उसके registration details के जरिए सबनानी के ठिकाने तक पहुंच बनाई गई। पूछताछ के बाद उसे मामले में गिरफ्तार किया गया।

    अब तक कौन-कौन गिरफ्तार हुआ?

    पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में शामिल हैं:

    • Santosh Uday Khopatkar, 37
    • Vinay Ramesh More, 37
    • Prem Kishan Sabnani, 50
    • Pragya Harish Main/Maine, 27
    • Reshma Shyamrao Warang, 41
    • Sabina Hafiz Shaikh, 48

    पुलिस ने Jitendra More और Ashok Shinde समेत अन्य संदिग्धों की पहचान की है। पुलिस उनकी भूमिका और मौजूदा कानूनी स्थिति की जांच कर रही है।

    क्या आरोपी पहले भी ऐसी वारदात कर चुके हैं?

    जांच में एक महत्वपूर्ण बात सामने आई है। पुलिस के मुताबिक आरोपी Prem Sabnani के खिलाफ तीन समान मामलों के पहले से दर्ज होने की जानकारी मिली है। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि क्या मौजूदा गिरोह ने इसी तरीके से दूसरे कारोबारियों को भी निशाना बनाया था।

    जांच टीम फर्जी पहचान पत्र, सरकारी लोगो, rubber stamps, letterheads और search-warrant documents की तलाश कर रही है। जब्त किए गए मोबाइल फोन से calls, WhatsApp chats और financial transactions की भी जांच की जा रही है।

    फर्जी Income Tax Raid को असली समझने की गलती क्यों हुई?

    इस मामले में आरोपियों ने केवल पहचान पत्र दिखाकर भरोसा हासिल करने की कोशिश नहीं की, बल्कि formal कपड़े, files और कथित search warrant का इस्तेमाल किया। इससे पूरी कार्रवाई को वास्तविक सरकारी raid जैसा दिखाने की कोशिश की गई।

    लेकिन Income Tax Department की वास्तविक search और seizure कार्रवाई कानून के तहत अधिकृत अधिकारी द्वारा की जाती है। Income-tax Act की Section 132 अधिकृत अधिकारी को search और seizure की निर्धारित शक्तियां देती है। विभाग के official Search and Seizure Manual में भी authorised officer और search authorisation की भूमिका स्पष्ट की गई है।

    इसलिए केवल ID card, uniform-जैसे कपड़े या कोई कागज देखकर किसी टीम को genuine मान लेना सुरक्षित नहीं है। किसी संदिग्ध कार्रवाई में स्वतंत्र और आधिकारिक माध्यम से सत्यापन करना महत्वपूर्ण है।

    कारोबारी ऐसी स्थिति में क्या सावधानी रखें?

    अगर कोई व्यक्ति खुद को Income Tax या किसी अन्य सरकारी जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर अचानक कार्रवाई शुरू करता है, तो घबराने के बजाय उसकी पहचान और अधिकार की पुष्टि करना जरूरी है।

    खास तौर पर किसी कथित अधिकारी को व्यक्तिगत खाते, cash handover या मौके पर “settlement” के नाम पर पैसा देना गंभीर red flag हो सकता है। यदि मामला संदिग्ध लगे तो कारोबारी अपने Chartered Accountant या कानूनी सलाहकार से संपर्क कर सकता है और जरूरत पड़ने पर पुलिस की मदद ले सकता है।

    हालांकि, genuine statutory search में अधिकृत अधिकारियों के पास कानून द्वारा निर्धारित search और seizure powers हो सकती हैं। इसलिए केवल इस आधार पर कि कोई notice पहले नहीं आया, हर search को fake मानना भी सही नहीं होगा। क्यों कि Section 132 के तहत अधिकृत अधिकारी को निर्धारित परिस्थितियों में search और seizure की शक्ति दी गई है।

    पुलिस अब किस दिशा में जांच कर रही है?

    Andheri Police अब कथित गिरोह के पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। सबसे अहम सवाल यह है कि आरोपियों को कारोबारी की financial information कहां से मिली और क्या इस जानकारी का इस्तेमाल पहले भी किसी दूसरे businessman को निशाना बनाने में हुआ था।

    पुलिस जब्त मोबाइल फोन, CCTV footage, call records और financial transactions की जांच के साथ उन लोगों की भूमिका भी verify कर रही है जिनके नाम पूछताछ के दौरान Income Tax Department से कथित तौर पर जोड़े गए हैं। पुलिस ने अभी तक ऐसे किसी departmental connection को अंतिम रूप से प्रमाणित नहीं किया है।

    फिलहाल मामला फर्जी सरकारी अधिकारी बनकर कार्रवाई करने, कारोबारी और उसकी पत्नी को कथित तौर पर जबरन ले जाने तथा ₹1 करोड़ की कथित extortion demand के आरोपों की जांच के केंद्र में है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और फरार संदिग्धों की तलाश के साथ पुलिस यह भी पता लगा रही है कि इस नेटवर्क का दायरा कितना बड़ा है।

  • मुंबई में यात्रियों की जेब पर ‘मीटर गेम’ का खतरा? दहिसर में 5 वाहन पकड़े, आरटीओ से बड़े सवाल

    मुंबई में यात्रियों की जेब पर ‘मीटर गेम’ का खतरा? दहिसर में 5 वाहन पकड़े, आरटीओ से बड़े सवाल

    दहिसर में टैक्सी-रिक्शा के मीटर में इलेक्ट्रॉनिक छेड़छाड़ का खुलासा हुआ है। पुलिस ने 5 आरोपी और 5 वाहन पकड़े। अब पूरे मुंबई में जांच की मांग।

    मुंबई: मुंबई में टैक्सी या रिक्शा में बैठने के बाद मीटर पर दिखने वाला किराया ही यात्री के लिए भरोसे का आधार होता है। लेकिन दहिसर में किराया मीटर के साथ इलेक्ट्रॉनिक छेड़छाड़ का मामला सामने आने के बाद इस भरोसे पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। दहिसर पुलिस ने मीटर में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगाकर किराए में हेरफेर करने के आरोप में पांच लोगों के खिलाफ कार्रवाई की है और पांच वाहन जब्त किए हैं।

    पुलिस के मुताबिक, आरोपियों पर टैक्सी और रिक्शा के मीटर में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के जरिए छेड़छाड़ कर यात्रियों से निर्धारित किराए से ज्यादा रकम वसूलने का आरोप है। कार्रवाई में दो काली-पिली टैक्सी, दो रिक्शा और एक मारुति आर्टिगा जब्त की गई है।

    एक टैक्सी से खुला मामला, जांच में सामने आए पांच वाहन

    दहिसर पुलिस को टैक्सी और रिक्शा के मीटर में छेड़छाड़ कर यात्रियों से ज्यादा किराया वसूले जाने की जानकारी मिली थी। इसके बाद पुलिस ने संदिग्ध वाहन की जांच शुरू की।

    1 सितंबर 2026 की रात करीब 9 बजे एक यात्री को टैक्सी क्रमांक MH 01 CJ 6487 से सफर के लिए भेजा गया। पुलिस के अनुसार, टैक्सी चालक द्वारा मीटर में छेड़छाड़ किए जाने का संदेह हुआ। इसके बाद वाहन को जांच के लिए क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय, बोरीवली भेजा गया।

    आरटीओ की जांच में मीटर के भीतर इलेक्ट्रॉनिक रिंगिंग सर्किट जैसी डिवाइस लगाए जाने की बात सामने आई। पुलिस के मुताबिक इसी तरह की तकनीकी छेड़छाड़ के जरिए मीटर की रीडिंग को प्रभावित कर यात्रियों से ज्यादा किराया वसूला जा रहा था।

    जांच आगे बढ़ी तो पुलिस को ऐसे ही दूसरे वाहनों की भी जानकारी मिली। इसके बाद कुल पांच वाहनों को जब्त किया गया।

    कौन-कौन से वाहन पकड़े गए?

    पुलिस के मुताबिक कार्रवाई में ये वाहन जब्त किए गए हैं—

    • काली-पिली टैक्सी — MH 01 CJ 6487
    • काली-पिली रिक्शा — MH 02 DU 0777
    • काली-पिली रिक्शा — MH 03 BY 4268
    • काली-पिली टैक्सी — MH 02 BQ 7392
    • मारुति आर्टिगा — MH 01 EM 6048

    पुलिस ने मीटर में छेड़छाड़ के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक रिंगिंग सर्किट को भी जब्त किया है।

    पांच आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई

    इस मामले में पुलिस ने जौएब अल्ताफ देशमुख (32), अमीन रमजान पठाण (39), रियाज अब्दुलगनी शेख (45), नाजीर इब्राहिम पटेल (57) और आनंद कुमार नानाकप्रसाद राय (60) के खिलाफ कार्रवाई की है।

    पुलिस के मुताबिक मामले में भारतीय न्याय संहिता और मोटर वाहन कानून की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।

    मुंबई के यात्रियों के लिए सबसे बड़ा सवाल

    दहिसर में पांच वाहनों में मीटर से छेड़छाड़ सामने आने के बाद अब सवाल सिर्फ इन पांच वाहनों तक सीमित नहीं है।

    अगर एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के जरिए किराया मीटर में हेरफेर किया जा सकता है, तो मुंबई के दूसरे इलाकों में चल रहे टैक्सी और रिक्शा के मीटर कितने सुरक्षित हैं?

    यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि रोजाना बड़ी संख्या में मुंबईकर टैक्सी और रिक्शा से सफर करते हैं। यात्री मीटर में दिखाई देने वाली रकम को सही मानकर भुगतान करता है। ऐसे में मीटर के साथ तकनीकी छेड़छाड़ होने पर उसे अतिरिक्त किराया वसूले जाने का पता भी नहीं चल सकता।

    हालांकि, दहिसर के इन पांच वाहनों के मामले से पूरे मुंबई में इस तरह की धोखाधड़ी हो रही है, ऐसा निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी। लेकिन इस कार्रवाई ने परिवहन विभाग के सामने एक महत्वपूर्ण जांच का मुद्दा जरूर खड़ा कर दिया है।

    अब आरटीओ की जवाबदेही पर सवाल

    इस मामले में सबसे बड़ा सवाल क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) की भूमिका को लेकर भी है।

    दहिसर पुलिस की कार्रवाई के बाद क्या मुंबई के अलग-अलग इलाकों में टैक्सी और रिक्शा के मीटरों की विशेष जांच की जाएगी?

    क्या आरटीओ यह जांच करेगा कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगाकर मीटर की रीडिंग में हेरफेर करने जैसी तकनीक का इस्तेमाल दूसरे वाहनों में कहीं हो तो नहीं रहा?

    और अगर ऐसी जांच होती है तो कितने वाहनों के मीटर सही पाए जाते हैं और कितनों में गड़बड़ी सामने आती है, इसकी जानकारी क्या सार्वजनिक की जाएगी?

    इन सवालों का जवाब जरूरी है, क्योंकि मीटर में हेरफेर का सीधा असर यात्रियों की जेब पर पड़ता है।

    वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मार्गदर्शन में कार्रवाई

    यह कार्रवाई वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में की गई। जिसमें, अपर पुलिस आयुक्त शशिकुमार मीना, पुलिस उपायुक्त गजानन शिवलिंग राजमाने, सहायक पुलिस आयुक्त जयराज एरवडे, वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक सर्जेराव पाटील और दहिसर पुलिस थाने के अधिकारी मारुती सांगळे के मार्गदर्शन में टीम ने कार्रवाई की।

    कार्रवाई करने वाली टीम में सहायक पुलिस निरीक्षक निलेश शिवाजी साळुंके के साथ पुलिसकर्मी हेमंत बाबुराव दिवारे, सुनील चंद्रकांत राठोड, संतोष काशिनाथ भागवत और ऋषिकेश प्रवीण मोरे शामिल थे। बताया गया कि सबसे पहले इसकी जानकारी सहायक पुलिस निरीक्षक निलेश शिवाजी साळुंके को मिली थी जिसके निगरानी के बाद वरिष्ठ अधिकारियों से जांच के निर्देश मिले।

    दहिसर की कार्रवाई ने खोल दिया बड़ा सवाल

    दहिसर पुलिस की इस कार्रवाई से फिलहाल पांच वाहनों और पांच आरोपियों के खिलाफ मामला सामने आया है। लेकिन इससे मुंबई के परिवहन तंत्र के सामने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा हो गया है—क्या सिर्फ दहिसर में ही मीटर की ऐसी जांच होगी या आरटीओ पूरे मुंबई में टैक्सी-रिक्शा के मीटरों की व्यापक जांच शुरू करेगा?

    क्योंकि अगर मीटर ही गलत रीडिंग दिखाए, तो यात्री के पास सही किराया जानने का भरोसेमंद आधार क्या बचेगा?

    यही वह सवाल है जिसका जवाब अब मुंबई के यात्रियों को आरटीओ और संबंधित परिवहन अधिकारियों से चाहिए।

  • BMC रिश्वत कांड: ₹70 हजार मांगे, ₹60 हजार पर सौदा; ACB ने इंजीनियर और कर्मचारी को रंगे हाथ पकड़ा

    BMC रिश्वत कांड: ₹70 हजार मांगे, ₹60 हजार पर सौदा; ACB ने इंजीनियर और कर्मचारी को रंगे हाथ पकड़ा

    मुंबई के अंधेरी में BMC के जूनियर इंजीनियर और कर्मचारी पर ₹60 हजार रिश्वत लेने का आरोप। ACB ट्रैप में गिरफ्तारी, ₹2.78 लाख कैश बरामद।

    मुंबई: अंधेरी पश्चिम के BMC K/West Ward कार्यालय में Anti-Corruption Bureau (ACB) ने रिश्वत के मामले में BMC के एक जूनियर इंजीनियर और कर्मचारी को गिरफ्तार किया है। ACB के मुताबिक, एक बेकरी संचालक से कथित तौर पर ₹70 हजार की रिश्वत मांगी गई थी। बातचीत के बाद ₹60 हजार में सौदा तय हुआ, जिसके बाद ACB ने ट्रैप लगाकर कर्मचारी को रकम लेते हुए पकड़ लिया।

    मामले में जूनियर इंजीनियर नीरवकुमार चुनीलाल जैसूर (43) और BMC कर्मचारी विजय रमेश पाटील (46) को आरोपी बनाया गया है।

    बेकरी पर कार्रवाई रोकने के बदले रिश्वत का आरोप

    ACB के मुताबिक, शिकायतकर्ता 50 वर्षीय बेकरी संचालक है। आरोप है कि पाटील ने उससे ₹70 हजार मांगे थे। कथित तौर पर यह रकम बेकरी को चलाने देने और उसके खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई नहीं करने के बदले मांगी गई थी।

    शिकायत मिलने के बाद ACB ने रिश्वत की मांग की पुष्टि की। इसी दौरान पाटील ने शिकायतकर्ता की मुलाकात जूनियर इंजीनियर जैसूर से कराई। इसके बाद कथित तौर पर रिश्वत की रकम ₹70 हजार से घटकर ₹60 हजार तय हुई।

    ₹60 हजार लेते ही ACB का ट्रैप

    रकम तय होने के बाद ACB ने K/West Ward कार्यालय में ट्रैप लगाया।

    ACB के अनुसार, विजय पाटील को ₹60 हजार स्वीकार करते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया। इसके बाद जांच टीम ने BMC के छठी मंजिल स्थित कार्यालय से जूनियर इंजीनियर जैसूर को भी हिरासत में लिया।

    दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

    कर्मचारी के पास ₹2.78 लाख कैश मिला

    ट्रैप के बाद ACB ने पाटील की तलाशी ली। उसके पास से ₹40,820 नकद और बैग से ₹2,37,600 नकद बरामद हुआ।

    इस तरह कुल ₹2,78,420 कैश मिला।

    तीन मोबाइल फोन भी जब्त

    ACB ने मामले में मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं। जूनियर इंजीनियर जैसूर के दो मोबाइल फोन और पाटील का एक मोबाइल फोन जांच के लिए लिया गया है।

    अब जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि कथित रिश्वत की मांग और लेन-देन में दोनों आरोपियों की क्या भूमिका थी और क्या इस मामले में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल है।

    अब आगे क्या होगा?

    ACB की कार्रवाई के बाद मामले की जांच जारी है। इस केस में सबसे अहम सवाल अब यह है कि ₹2.78 लाख की अतिरिक्त नकदी का स्रोत क्या था और क्या उसका कथित रिश्वत प्रकरण से कोई संबंध सामने आता है।

    फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इतना स्पष्ट है कि ACB ने ₹60 हजार की कथित रिश्वत के ट्रैप में BMC के दो कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की है।

  • मुंबई में जज की SUV रोककर ‘न्यायाधीश’ प्लेट का बनाया वीडियो, विरोध पर जान से मारने की धमकी

    मुंबई में जज की SUV रोककर ‘न्यायाधीश’ प्लेट का बनाया वीडियो, विरोध पर जान से मारने की धमकी

    मुंबई के दादर में MACT सदस्य शशिकांत बांगर की SUV रोककर दो लोगों ने ‘Nyayadhish’ प्लेट की रिकॉर्डिंग की और धमकी दी। पुलिस ने FIR दर्ज की।

    मुंबई: दादर में Motor Accident Claims Tribunal (MACT) के सदस्य शशिकांत एकनाथराव बांगर की SUV रोककर दो अज्ञात लोगों द्वारा कथित तौर पर वीडियो रिकॉर्डिंग करने और उन्हें जान से मारने की धमकी देने का मामला सामने आया है। दोनों ने कार के dashboard पर लगी ‘Nyayadhish’ प्लेट को लेकर सवाल किए। विरोध करने पर कथित तौर पर जज और उनकी पत्नी से गाली-गलौज की गई और एक व्यक्ति ने उन्हें धक्का देने की कोशिश भी की। मामले में Matunga Police ने दो अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    दादर में आखिर हुआ क्या था?

    मामला 13 जुलाई की रात करीब 10.15 बजे का है। 54 वर्षीय शशिकांत बांगर अपनी पत्नी और बेटी के साथ दादर इलाके में थे। बेटी को छोड़ने के बाद जब वे Dadar TT में Irani Mansion के पास से लौट रहे थे, तभी दो लोगों ने कथित तौर पर उनकी SUV का रास्ता रोक लिया। इसके बाद दोनों उनकी गाड़ी की फोटो और वीडियो बनाने लगे।

    बांगर की शिकायत के मुताबिक, दोनों का खास ध्यान dashboard पर रखी ‘Nyayadhish’ प्लेट पर था। उन्होंने सवाल किया कि गाड़ी पर यह प्लेट क्यों लगाई गई है और इसे लगाने की अनुमति किसने दी है।

    बांगर ने उन्हें बताया कि वह District Judge और MACT के सदस्य हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वाहन का इस्तेमाल residence और court के बीच official travel के लिए किया जाता है और वाहन की जानकारी Bombay High Court को दी गई है। इसके बाद भी दोनों कथित तौर पर आक्रामक हो गए।

    पत्नी से भी गाली-गलौज, जज को धक्का देने की कोशिश

    शिकायत के मुताबिक, विवाद बढ़ने पर दोनों लोगों ने जज और उनकी पत्नी के साथ कथित तौर पर गाली-गलौज की। जब उनकी पत्नी और मौके पर मौजूद एक बुजुर्ग व्यक्ति ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराने की कोशिश की, तो एक आरोपी ने बांगर को धक्का देने की कोशिश की।

    बांगर ने दोनों को शांत होने के लिए कहा और पुलिस को बुलाकर अपनी पहचान तथा वाहन की जानकारी verify कराने की बात कही। उन्होंने emergency helpline नंबर 100 और 112 से संपर्क करने की भी कोशिश की। आरोप है कि दोनों लोगों ने पुलिस से संपर्क करने की कोशिश का भी विरोध किया।

    इसके बाद दोनों कथित तौर पर वहां से निकल गए। शिकायत के आधार पर Matunga Police ने मामले की जांच शुरू की है। आरोपियों की पहचान और इस पूरे विवाद की वजह फिलहाल पुलिस की जांच का विषय है।

    50 दिन बाद सामने आया मामला

    इस घटना की शिकायत 1 सितंबर को Matunga Police में की गई, यानी 13 जुलाई की घटना के करीब 50 दिन बाद मामला पुलिस तक पहुंचा। इसके बाद पुलिस ने मंगलवार को दो अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की। उपलब्ध रिपोर्टों में शिकायत दर्ज कराने में हुई देरी की वजह स्पष्ट नहीं बताई गई है।

    FIR में Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) की धारा 126(2), 130, 3(5), 351(3) और 352 लगाई गई हैं। इन धाराओं में रास्ता रोकने, assault से जुड़े आचरण, common intention, गंभीर criminal intimidation और जानबूझकर अपमान जैसे आरोपों से जुड़े प्रावधान शामिल हैं।

    पुलिस अब आरोपियों तक कैसे पहुंचेगी?

    Matunga Police के मुताबिक, आरोपियों की पहचान अभी नहीं हुई है और उनकी तलाश जारी है। पुलिस घटना वाली जगह और आसपास के CCTV footage के साथ दूसरे available evidence को verify कर रही है।

    शिकायत में बांगर ने एक आरोपी के बारे में बताया कि उसने dark-coloured checked shirt पहनी थी और motorcycle पर था। यह जानकारी CCTV और दूसरे evidence के साथ मिलाकर आरोपियों की पहचान करने में इस्तेमाल की जा सकती है।

    ‘Nyayadhish’ प्लेट पर इतना विवाद क्यों हुआ?

    इस मामले की सबसे अहम कड़ी यही प्लेट बनी। आरोपियों ने कथित तौर पर इसी को लेकर सवाल शुरू किए और पूछा कि इसे लगाने की अनुमति किसने दी।

    हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इस particular SUV पर ‘Nyayadhish’ प्लेट लगाने की अनुमति किस नियम या आदेश के तहत थी। बांगर ने पुलिस को बताया है कि वाहन की details Bombay High Court को submitted थीं। इसलिए इस मामले में दो अलग सवाल हैं—आरोपियों ने प्लेट पर आपत्ति क्यों की और वाहन पर ऐसी पहचान प्रदर्शित करने की official व्यवस्था क्या थी। इन दोनों बातों का अंतिम जवाब पुलिस की जांच या संबंधित judicial authorities की पुष्टि के बाद ही साफ होगा।

    शशिकांत बांगर कौन हैं?

    शशिकांत एकनाथराव बांगर judicial officer हैं। उपलब्ध court records में उनका नाम Mumbai City Civil & Sessions Court में Special Judge under the Prevention of Corruption Act के रूप में दर्ज है। National Judicial Academy के रिकॉर्ड में भी उन्हें District Judge और Additional Sessions Judge के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। वर्तमान घटना में वे Motor Accident Claims Tribunal से जुड़े judicial officer के तौर पर शिकायतकर्ता हैं।

    अब आगे क्या?

    फिलहाल FIR दो अज्ञात आरोपियों के खिलाफ है। उनकी पहचान, घटना के पीछे की वजह और क्या दोनों ने किसी योजना के तहत जज की गाड़ी को रिकॉर्ड किया था—इन सवालों का जवाब CCTV और दूसरे evidence की जांच के बाद सामने आएगा।

    एक और अहम बात यह है कि पुलिस से मिली जानकारी में अभी तक आरोपियों की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की जांच जारी है और फिलहाल सबसे ज्यादा नजर CCTV footage से दोनों की पहचान होने, उनकी motorcycle/route की जानकारी मिलने और ‘Nyayadhish’ प्लेट को लेकर हुए विवाद की असली वजह सामने आने पर है।