Category: Mumbai Crime

  • Malad Extortion Case: Bishnoi Gang के नाम पर 5 करोड़ की फिरौती मांगने वाला दिल्ली का व्यापारी गिरफ्तार

    Malad Extortion Case: Bishnoi Gang के नाम पर 5 करोड़ की फिरौती मांगने वाला दिल्ली का व्यापारी गिरफ्तार

    मुंबई के Malad में शेयर बाजार के एक व्यापारी से Bishnoi Gang के नाम पर 5 करोड़ रुपये की फिरौती मांगने के मामले में Delhi के businessman Kailash Agarwal को Malad Police ने गिरफ्तार किया है। आरोपी ने अपनी लोकेशन छिपाने के लिए VPN का इस्तेमाल किया था।

    मुंबई: Malad इलाके में Bishnoi Gang के नाम पर 5 करोड़ रुपये की फिरौती मांगने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। Malad Police ने इस मामले में दिल्ली के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जो खुद को कुख्यात Bishnoi Gang का सदस्य बताकर एक शेयर बाजार के कारोबारी को लगातार धमकियां दे रहा था।

    गिरफ्तार आरोपी की पहचान Kailash Agarwal के रूप में हुई है। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी पीड़ित का रिश्तेदार ही है और उसने business losses की वजह से यह साजिश रची थी।

    बार-बार कॉल कर मांगे 5 करोड़ रुपये

    पुलिस के अनुसार आरोपी कई दिनों से Malad में रहने वाले share market businessman को फोन कर रहा था। वह खुद को Bishnoi Gang से जुड़ा हुआ बताकर कारोबारी को धमकी देता था कि अगर ₹5 करोड़ की फिरौती नहीं दी गई तो उसे जान से मार दिया जाएगा।

    लगातार मिल रही धमकियों से परेशान होकर पीड़ित कारोबारी ने आखिरकार Malad Police Station में शिकायत दर्ज कराई।

    लोकेशन छिपाने के लिए VPN का इस्तेमाल

    पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी बहुत चालाकी से काम कर रहा था। वह हर बार फोन कॉल और मैसेज भेजते समय VPN system का इस्तेमाल करता था ताकि उसकी असली लोकेशन छिपी रहे।

    लेकिन पुलिस की technical investigation के जरिए आखिरकार उस VPN नेटवर्क को ट्रेस कर लिया गया।

    दिल्ली से किया गया आरोपी को गिरफ्तार

    जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपी दिल्ली में मौजूद है। इसके बाद Malad Police Station के PSI Bachav और उनकी टीम तुरंत दिल्ली रवाना हुई।

    करीब एक हफ्ते की लगातार जांच और तकनीकी ट्रैकिंग के बाद पुलिस ने आरोपी Kailash Agarwal को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया।

    आरोपी खुद भी बड़ा व्यापारी निकला

    पूछताछ में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ। DCP Zone 11, Mumbai Police Sandeep Jadhav के अनुसार आरोपी खुद भी दिल्ली का एक बड़ा व्यापारी है और पीड़ित व्यक्ति का रिश्तेदार भी है।

    पुलिस के मुताबिक कारोबार में भारी आर्थिक नुकसान होने के कारण उसने यह पूरी साजिश रची थी।

    Bishnoi Gang के नाम से फैलाया डर

    पुलिस का कहना है कि आरोपी ने जानबूझकर Bishnoi Gang का नाम लेकर डर का माहौल बनाने की कोशिश की ताकि पीड़ित व्यक्ति जल्दी पैसे दे दे।

    उसने ₹5 करोड़ की बड़ी रकम वसूलने के लिए तकनीक और गैंगस्टर के डर का इस्तेमाल किया

    पुलिस कर रही है आगे की जांच

    अब Malad Police यह भी जांच कर रही है कि आरोपी का वास्तव में Bishnoi Gang से कोई संबंध है या नहीं

    इसके अलावा यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस साजिश में और कोई व्यक्ति शामिल था या नहीं

    पुलिस का कहना है कि अगर पीड़ित ने समय पर शिकायत नहीं की होती, तो आरोपी बड़ी रकम वसूलने में सफल हो सकता था।


    FAQ

    1. Malad में क्या मामला सामने आया है?

    Malad में एक व्यक्ति ने खुद को Bishnoi Gang का सदस्य बताकर 5 करोड़ रुपये की फिरौती मांगने की कोशिश की।

    2. आरोपी कौन है?

    आरोपी का नाम Kailash Agarwal है और वह दिल्ली का रहने वाला व्यापारी है।

    3. आरोपी ने अपनी लोकेशन कैसे छिपाई?

    आरोपी ने फोन कॉल और मैसेज करते समय VPN system का इस्तेमाल किया था।

    4. आरोपी को कहां से गिरफ्तार किया गया?

    पुलिस ने आरोपी को दिल्ली से गिरफ्तार किया।

    5. आरोपी ने यह अपराध क्यों किया?

    पुलिस के अनुसार business losses और आर्थिक परेशानी के कारण उसने यह साजिश रची।

  • Borivali KYC Scam: फर्जी KYC अपडेट के नाम पर वरिष्ठ नागरिक से ₹9.75 लाख की ठगी

    Borivali KYC Scam: फर्जी KYC अपडेट के नाम पर वरिष्ठ नागरिक से ₹9.75 लाख की ठगी

    Mumbai के Borivali में Fake KYC Update Scam का बड़ा मामला सामने आया है। Tata Power के नाम पर आए फोन कॉल और WhatsApp लिंक के जरिए 69 वर्षीय Senior Citizen के बैंक खाते से ₹9.75 लाख उड़ा लिए गए। Borivali Police और Cyber Cell मामले की जांच में जुटी है।

    मुंबई: Online Fraud और KYC Scam का एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। Borivali इलाके में रहने वाले 69 वर्षीय Senior Citizen को Fake KYC Update के नाम पर ठग लिया गया। ठग ने खुद को Tata Power का अधिकारी बताकर पीड़ित को एक फर्जी लिंक भेजा और KYC अपडेट करने के बहाने उनके बैंक खाते से ₹9,75,955 निकाल लिए।

    इस मामले में Mumbai Police के Borivali Police Station में केस दर्ज कर लिया गया है और Cyber Cell आरोपी की तलाश में जुट गई है।

    फोन कॉल से शुरू हुआ पूरा Online Fraud

    पुलिस के मुताबिक पीड़ित बुजुर्ग Borivali इलाके में अपने परिवार के साथ रहते हैं

    24 फरवरी को जब वह घर पर थे, तभी उन्हें एक अनजान नंबर से फोन कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को Tata Power Electricity का अधिकारी बताया और कहा कि उनका KYC Update Pending है, जिसे तुरंत पूरा करना जरूरी है।

    WhatsApp पर भेजा गया Fake KYC Link

    फोन कॉल के बाद आरोपी ने पीड़ित को WhatsApp पर एक लिंक भेजा और कहा कि उसी लिंक पर जाकर KYC Update Process पूरा करें।

    क्योंकि बुजुर्ग को इस प्रक्रिया की ज्यादा जानकारी नहीं थी, इसलिए उन्होंने कॉलर के बताए अनुसार लिंक ओपन किया और अपनी Personal Details भर दीं

    ₹10 UPI ट्रांजेक्शन के बहाने शुरू हुई ठगी

    फर्जी वेबसाइट पर फॉर्म भरने के बाद पीड़ित से कहा गया कि KYC Verification के लिए ₹10 का UPI Payment करना होगा।

    बुजुर्ग ने निर्देशों का पालन करते हुए ₹10 ट्रांसफर कर दिए। इसके कुछ ही समय बाद कॉलर ने फोन काट दिया।

    दोस्त की चेतावनी के बाद डिलीट किया चैट

    बाद में जब पीड़ित ने इस घटना के बारे में अपने एक दोस्त को बताया तो उसने उन्हें चेतावनी दी कि ऐसे लिंक अक्सर Cyber Fraud के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं

    इस बात से घबराकर पीड़ित ने WhatsApp चैट और लिंक दोनों डिलीट कर दिए

    3 मार्च को बैंक मैसेज देख उड़े होश

    कुछ दिन बाद 3 मार्च को पीड़ित के मोबाइल पर Bank Transaction Alerts आने लगे।

    जब उन्होंने मैसेज चेक किए तो वह यह देखकर हैरान रह गए कि उनके बैंक खाते से ₹9,75,955 रुपये डेबिट हो चुके थे

    Borivali Police में दर्ज हुई शिकायत

    अपने साथ हुई ठगी का एहसास होने के बाद पीड़ित तुरंत Borivali Police Station पहुंचे और शिकायत दर्ज करवाई।

    पीड़ित के बयान के आधार पर पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ Cheating और Information Technology Act की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

    Cyber Cell कर रही आरोपी की तलाश

    पुलिस अधिकारियों के मुताबिक Borivali Police Station की Cyber Cell टीम इस मामले की जांच कर रही है।

    जांच के दौरान यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि फर्जी लिंक कहां से भेजा गया और बैंक खाते से पैसे किस अकाउंट में ट्रांसफर हुए

    पुलिस की नागरिकों को चेतावनी

    पुलिस ने इस मामले के बाद एक बार फिर नागरिकों को सावधान रहने की सलाह दी है।

    अधिकारियों का कहना है कि:

    • किसी भी Unknown Caller पर भरोसा न करें
    • KYC Update Link पर बिना जांच क्लिक न करें
    • Banking Details, OTP या Personal Information किसी से साझा न करें
    • संदेह होने पर तुरंत Police या Cyber Cell से संपर्क करें

    FAQ (People Also Ask)

    1. Borivali KYC Scam में कितने रुपये की ठगी हुई?

    इस मामले में बुजुर्ग के बैंक खाते से ₹9,75,955 रुपये निकाल लिए गए।

    2. आरोपी ने ठगी कैसे की?

    आरोपी ने खुद को Tata Power अधिकारी बताकर Fake KYC Link भेजा और उसी के जरिए बैंक खाते से पैसे ट्रांसफर कर लिए।

    3. घटना कब हुई?

    फोन कॉल 24 फरवरी को आया था, जबकि 3 मार्च को बैंक मैसेज से ठगी का पता चला।

    4. केस कहां दर्ज हुआ?

    इस मामले में Borivali Police Station में केस दर्ज किया गया है।

    5. पुलिस क्या जांच कर रही है?

    Cyber Cell आरोपी की पहचान और पैसे किस अकाउंट में ट्रांसफर हुए, इसकी जांच कर रही है।

  • Mumbai Bomb Threat Case: Hoax Email भेजने वाला 28 साल का आरोपी गिरफ्तार

    Mumbai Bomb Threat Case: Hoax Email भेजने वाला 28 साल का आरोपी गिरफ्तार

    Mumbai में स्कूल, Stock Exchange और Metro Stations को Bomb Threat Email भेजने वाले 28 वर्षीय आरोपी को Gujarat Police ने गिरफ्तार किया। Dindoshi Police अब MaladGoregaon केस में उसकी कस्टडी लेने की तैयारी कर रही है।

    मुंबई: Bomb Threat Email Case को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। स्कूलों, Stock Exchange और Metro Stations को बम से उड़ाने की धमकी देने वाले एक 28 वर्षीय युवक को Gujarat Police ने गिरफ्तार कर लिया है। फिलहाल पुलिस यह जांच कर रही है कि इन धमकी भरे ईमेल्स के पीछे उसका असली मकसद क्या था। शुरुआती जांच में सामने आया है कि सभी धमकियां Hoax Bomb Threat यानी झूठी निकलीं।

    Mumbai-Bomb-Threat-Case-hoax-email-news

    Gujarat Police ने आरोपी को किया गिरफ्तार

    पुलिस के मुताबिक आरोपी को Ahmedabad की Cyber Police ने 1 मार्च को गिरफ्तार किया। जांच में पता चला कि उसने सिर्फ मुंबई ही नहीं बल्कि देश के कई शहरों में ईमेल भेजकर Bomb Blast Threat दी थी।

    इन शहरों में शामिल हैं:

    • Mumbai
    • Delhi
    • Punjab
    • Ahmedabad

    पुलिस का कहना है कि आरोपी ने अलग-अलग संस्थानों और सार्वजनिक जगहों को निशाना बनाते हुए धमकी भरे ईमेल भेजे थे।

    Mumbai के Malad-Goregaon इलाके में भेजे थे ईमेल

    मुंबई में यह मामला Dindoshi Police Station के अधिकार क्षेत्र में दर्ज हुआ था।

    पुलिस के अनुसार आरोपी ने 26 फरवरी को ईमेल भेजकर धमकी दी थी कि स्कूलों, Stock Exchange और Metro Stations पर बम धमाके होंगे।

    ये सभी संस्थान मुख्य रूप से Malad-Goregaon belt में आने वाले इलाकों से जुड़े बताए जा रहे हैं।

    सभी जगहों की हुई जांच, कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला

    ईमेल मिलने के बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां तुरंत अलर्ट हो गईं।

    पुलिस टीमों ने जिन जगहों को धमकी दी गई थी, वहां पूरी तरह से सर्च ऑपरेशन चलाया। हालांकि जांच के दौरान कहीं भी कोई विस्फोटक या संदिग्ध वस्तु नहीं मिली, जिससे साफ हो गया कि यह Hoax Bomb Threat था।

    Bhartiya Nyaya Sanhita के तहत दर्ज हुआ केस

    मुंबई पुलिस ने इस मामले में Bhartiya Nyaya Sanhita की धाराओं के तहत केस दर्ज किया है।

    अब Dindoshi Police आरोपी को मुंबई लाकर पूछताछ करने के लिए उसकी कस्टडी लेने की तैयारी कर रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या यह सब Prank था या इसके पीछे कोई और बड़ा मकसद था।

    पुलिस कर रही है Motive की जांच

    फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि आरोपी ने देशभर में इस तरह के Bomb Threat Emails क्यों भेजे।

    पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि:

    • क्या यह सिर्फ मजाक (Prank) था
    • या फिर किसी को डराने की कोशिश
    • या इसके पीछे कोई Cyber Crime Network जुड़ा है

    जांच एजेंसियां आरोपी के ईमेल अकाउंट, डिजिटल डिवाइस और इंटरनेट गतिविधियों की भी जांच कर रही हैं।


    FAQ (People Also Ask)

    1. Mumbai Bomb Threat Case में आरोपी कौन है?

    इस मामले में 28 वर्षीय युवक को गुजरात पुलिस ने गिरफ्तार किया है।

    2. आरोपी को कब और कहां गिरफ्तार किया गया?

    उसे 1 मार्च को Ahmedabad Cyber Police ने गिरफ्तार किया।

    3. मुंबई में धमकी कब दी गई थी?

    मुंबई में 26 फरवरी को ईमेल के जरिए धमकी दी गई थी।

    4. किन जगहों को Bomb Threat मिला था?

    स्कूलों, Stock Exchange और Metro Stations को बम धमाके की धमकी दी गई थी।

    5. क्या धमकी सच थी?

    नहीं, पुलिस जांच में यह Hoax Bomb Threat यानी झूठी धमकी निकली।

  • Mumbai Cyber Cell ने 71 साल के बुजुर्ग के ₹2.5 लाख लौटाए, Fake RTO e-Challan से हुआ था Online Fraud

    Mumbai Cyber Cell ने 71 साल के बुजुर्ग के ₹2.5 लाख लौटाए, Fake RTO e-Challan से हुआ था Online Fraud

    Mumbai के Andheri West में 71 वर्षीय senior citizen से Fake RTO e-Challan WhatsApp link के जरिए ₹2.5 lakh की ठगी हुई। Oshiwara Police Cyber Cell ने 1930 helpline और HDFC Bank की मदद से पूरा पैसा recover कर लिया।

    मुंबई: Mumbai में एक बार फिर online fraud का मामला सामने आया, लेकिन इस बार राहत की खबर भी है। Andheri West के Lokhandwala इलाके में रहने वाले 71 वर्षीय Ashok Dingrani को Fake RTO e-Challan WhatsApp link के जरिए ₹2.5 lakh की चपत लग गई थी। लेकिन Oshiwara Police Station के Cyber Cell ने फुर्ती दिखाते हुए पूरा पैसा वापस दिला दिया।

    🛑 Fake RTO e-Challan से Senior Citizen बना शिकार

    पुलिस के मुताबिक, Ashok Dingrani को WhatsApp पर एक मैसेज मिला जिसमें लिखा था कि उनके वाहन पर ₹2,000 का traffic fine पेंडिंग है। मैसेज में एक लिंक दिया गया था, जो बिल्कुल असली RTO e-challan जैसा दिख रहा था।

    बुजुर्ग ने मैसेज को असली समझकर लिंक पर क्लिक किया और वहां अपनी गाड़ी की डिटेल्स के साथ HDFC Bank का credit card details भर दिया। कुछ ही देर में उनके मोबाइल पर मैसेज आया कि उनके कार्ड से ₹2.5 lakh डेबिट हो चुके हैं।

    🚨 तुरंत Police Station पहुंचे, दर्ज कराई शिकायत

    जैसे ही उन्हें एहसास हुआ कि वे cyber fraud का शिकार हो गए हैं, वे तुरंत Oshiwara Police Station पहुंचे और शिकायत दर्ज कराई।

    Senior Police Inspector Sanjay Chavan के मार्गदर्शन में Cyber Team ने तुरंत कार्रवाई शुरू की।

    📞 1930 Helpline और National Cyber Crime Portal से मिली मदद

    पुलिस ने तुरंत National Cyber Crime Portal पर शिकायत दर्ज की और 1930 helpline पर अलर्ट जारी किया। बैंक से मिले transaction alert की जांच में पता चला कि रकम Croma को ट्रांसफर की गई थी।

    Cyber टीम ने तुरंत HDFC Bank के nodal officers से संपर्क किया और urgent email communication के जरिए transaction को hold करवाया। फुर्ती दिखाते हुए पूरा ₹2.5 lakh फ्रीज कर लिया गया और बाद में बुजुर्ग को refund कर दिया गया।

    ⚠️ Police Advisory: ऐसे Fake Links से रहें सावधान

    पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि WhatsApp या SMS पर आने वाले किसी भी Fake RTO e-Challan, traffic fine या government notice वाले लिंक पर क्लिक न करें।

    ✔️ केवल official government portal पर ही challan verify करें
    ✔️ कभी भी banking details या OTP शेयर न करें
    ✔️ Fraud होने पर तुरंत 1930 helpline पर कॉल करें


    ❓ FAQ Section

    Q1: Fake RTO e-Challan scam क्या है?
    यह एक online fraud है जिसमें WhatsApp या SMS के जरिए फर्जी challan लिंक भेजकर लोगों से banking details ली जाती है।

    Q2: अगर ऐसे scam का शिकार हो जाएं तो क्या करें?
    तुरंत 1930 helpline पर कॉल करें और National Cyber Crime Portal पर शिकायत दर्ज करें।

    Q3: क्या Mumbai Police पैसे वापस दिला सकती है?
    अगर तुरंत शिकायत की जाए और transaction freeze हो जाए तो recovery संभव है, जैसा इस केस में हुआ।

    Q4: Official RTO challan कैसे check करें?
    सिर्फ government के official website पर जाकर ही challan verify करें, किसी third-party link पर भरोसा न करें।

  • Malad Digital Arrest Scam: 6 दिन की ‘ऑनलाइन नजरबंदी’, 67 साल की महिला से ₹12 लाख ठगे

    Malad Digital Arrest Scam: 6 दिन की ‘ऑनलाइन नजरबंदी’, 67 साल की महिला से ₹12 लाख ठगे

    मुंबई के मालाड में 67 वर्षीय महिला ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम का शिकार, जालसाजों ने फर्जी कोर्ट ऑर्डर और पुलिस बनकर 6 दिन वीडियो कॉल पर रखकर ₹12 लाख RTGS से ट्रांसफर कराए। 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत, FIR दर्ज।

    मुंबई: मालाड इलाके में 67 साल की एक गृहिणी को ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर 12 लाख रुपये का चूना लगा दिया गया। जालसाज खुद को पुलिस और सेंट्रल एजेंसी अधिकारी बताकर छह दिन तक महिला को वीडियो कॉल पर “हाउस अरेस्ट” में रखते रहे। मामला तब खुला जब बेटी ने 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत की। पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    🔎 कैसे बिछाया गया Malad में जाल?

    पुलिस के मुताबिक महिला को व्हाट्सऐप वीडियो कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को Mumbai Police का अधिकारी बताया और प्रोफाइल फोटो में पुलिस का लोगो लगाया हुआ था। उसने कहा कि लखनऊ में महिला के नाम से खुला बैंक अकाउंट “जम्मू-कश्मीर में आतंकी फंडिंग” के लिए 17 करोड़ रुपये ट्रांसफर करने में इस्तेमाल हुआ है।

    उसे 10% कमीशन लेने और 10 साल तक की जेल की धमकी दी गई—यहीं से डर की शुरुआत हुई।

    📄 फर्जी दस्तावेज़, असली डर

    विश्वास जमाने के लिए आरोपियों ने कथित Supreme Court of India का आदेश, अरेस्ट वारंट और Reserve Bank of India (RBI) नोटिस के फर्जी कागज भेजे। महिला को कहा गया कि मामला “नेशनल सिक्योरिटी” से जुड़ा है, इसलिए परिवार को कुछ न बताएं।

    साइबर पुलिस का कहना है—यही तरीका है जिससे ठग पहले डर पैदा करते हैं और फिर भरोसा जीतते हैं।

    🏠 ‘डिजिटल हाउस अरेस्ट’ में 6 दिन

    महिला को लगातार वीडियो कॉल पर रहने को कहा गया, रोज़ रिपोर्ट करने को बोला गया—“मैं सुरक्षित हूं।” घबराने पर आरोपी उसे शांत कराता और “मदद” का भरोसा देता। इसी दौरान उसने महिला से सारी बैंक डिटेल्स निकलवा लीं।

    तीसरे दिन महिला से 12 लाख की FD तोड़कर “वेरिफिकेशन” के नाम पर कोयंबटूर के एक अकाउंट में RTGS से ट्रांसफर करा लिया गया।

    📞 ऐसे खुला मामला

    छह दिन बाद बेटी ने फोन चेक किया तो पूरा खेल समझ आया। तुरंत 1930 साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और संदिग्ध खातों की पड़ताल की जा रही है।

    🛑 साइबर सेफ्टी एडवाइजरी (जरूर पढ़ें)

    • किसी भी साइबर फ्रॉड की तुरंत शिकायत 1930 पर करें
    • पुलिस कभी भी WhatsApp पर “डिजिटल अरेस्ट” नहीं करती
    • कोई भी सरकारी एजेंसी “वेरिफिकेशन” के नाम पर पैसे ट्रांसफर नहीं करवाती
    • कोर्ट वारंट/नोटिस मैसेजिंग ऐप से नहीं भेजे जाते

    ❓ FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. डिजिटल अरेस्ट क्या होता है?
    👉 यह एक नया साइबर फ्रॉड तरीका है, जिसमें ठग खुद को पुलिस/एजेंसी बताकर वीडियो कॉल पर “नजरबंद” रखते हैं और पैसे ट्रांसफर करवाते हैं।

    Q2. क्या पुलिस WhatsApp पर अरेस्ट करती है?
    👉 नहीं। पुलिस कभी भी WhatsApp या वीडियो कॉल पर अरेस्ट नहीं करती।

    Q3. साइबर फ्रॉड होने पर क्या करें?
    👉 तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

    Q4. क्या पैसे वापस मिल सकते हैं?
    👉 जल्दी शिकायत करने पर बैंक अकाउंट फ्रीज होने की संभावना रहती है, जिससे रिकवरी संभव हो सकती है।

  • अंधेरी स्टेशन पर चाकू की नोंक पर लूट, CCTV से खुलासा, 2 आरोपी गिरफ्तार

    अंधेरी स्टेशन पर चाकू की नोंक पर लूट, CCTV से खुलासा, 2 आरोपी गिरफ्तार

    Mumbai News: अंधेरी रेलवे स्टेशन पर 22 साल के कारपेंटर से चाकू दिखाकर मोबाइल और ATM से कैश लूटा गया। CCTV फुटेज के आधार पर RPF ने 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया, मास्टरमाइंड फरार।

    मुंबई: अंधेरी रेलवे स्टेशन पर 30 जनवरी की रात उस वक्त दहशत फैल गई, जब एक 22 वर्षीय कारपेंटर को चाकू की नोंक पर लूट लिया गया। यह सनसनीखेज वारदात रात करीब 9:30 बजे स्टेशन के ब्रिज पर, भीड़ के बीच अंजाम दी गई। तीन युवकों ने पीड़ित से पहले मोबाइल छीना, फिर ATM कार्ड और PIN लेकर पास के ATM से कैश भी निकाल लिया। पूरी घटना CCTV कैमरों में कैद हो गई, जिसकी मदद से रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने 3 फरवरी को दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। तीसरा आरोपी और कथित मास्टरमाइंड अभी फरार है।

    कैसे हुई पूरी वारदात?

    पीड़ित सिराज खान, जो पेशे से कारपेंटर हैं, जोगेश्वरी में दिनभर काम करने के बाद अपने दो दोस्तों के साथ साकीनाका जाने के लिए मेट्रो पकड़ने अंधेरी स्टेशन पहुंचे थे।
    स्टेशन के ब्रिज पर ही तीन युवकों ने उन्हें घेर लिया।

    सिराज के मुताबिक,

    “एक आरोपी ने कमर में चाकू फंसाया हुआ था और बोला – ‘मेरे पास चाकू है, मैं तुम्हें मार दूंगा’। डर के मारे मुझे अपना मोबाइल देना पड़ा।”

    ATM से भी निकलवाए पैसे

    मोबाइल छीनने के बाद आरोपियों ने सिराज को धमकाकर ATM कार्ड और उसका PIN भी उगलवा लिया। इसके बाद तीनों ने पास के ATM से कैश निकाला और जाते-जाते सिराज को धमकी दी कि वह वहीं खड़ा रहे और हिले नहीं।

    पीड़ित ने बताया कि यह सब अंधेरी ब्रिज जैसी बेहद व्यस्त जगह पर हुआ, जिससे वह पूरी तरह सदमे में आ गया।

    दोस्तों ने बचाने की कोशिश की, लेकिन…

    जब सिराज को लूटा जा रहा था, उसके दोस्तों ने मदद करने की कोशिश की, लेकिन चाकू से लैस आरोपियों ने उन्हें भी डरा-धमकाकर पीछे हटा दिया। वारदात रेलवे परिसर में होने के बावजूद अपराधियों के हौसले इतने बुलंद थे कि उन्होंने किसी से डर महसूस नहीं किया।

    CCTV फुटेज बना सबसे बड़ा सबूत

    पूरी घटना स्टेशन पर लगे CCTV कैमरों में रिकॉर्ड हो गई। बाद में जब सिराज ने अंधेरी GRP से संपर्क किया, तो GRP ने RPF को मेमो देकर CCTV फुटेज खंगालने को कहा।

    इसके बाद RPF के

    • सब-इंस्पेक्टर मुकेश त्यागी
    • इंस्पेक्टर राजीव सलारिया

    ने आरोपियों पर नजर रखनी शुरू की।

    3 फरवरी को 2 आरोपी दबोचे गए

    3 फरवरी को प्लेटफॉर्म नंबर 8 पर CCTV में दिख रहे हुलिए से मिलते-जुलते दो युवक घूमते नजर आए।
    RPF के कॉन्स्टेबल अंकित पटेल और दीपक वर्मा ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दोनों को पकड़ लिया।

    पूछताछ के दौरान और CCTV फुटेज दिखाने पर दोनों ने अपराध कबूल कर लिया

    FIR दर्ज, तीसरा आरोपी फरार

    हालांकि वारदात 30 जनवरी को हुई थी, लेकिन FIR 4 फरवरी को अंधेरी GRP में दर्ज की गई।
    GRP के वरिष्ठ निरीक्षक नितिन लोंढे ने बताया:

    • FIR धारा 309(4) के तहत दर्ज
    • गिरफ्तार आरोपी: अयान शेख और अभिषेक केवट
    • फरार आरोपी: अनस शेख (19), धारावी निवासी

    उन्होंने यह भी बताया कि अयान शेख पहले भी मोबाइल चोरी के मामले में बांद्रा GRP द्वारा पकड़ा जा चुका है।

    मोबाइल और ATM कार्ड अब तक बरामद नहीं

    दोनों आरोपियों को अंधेरी कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।
    फिलहाल पुलिस पीड़ित का मोबाइल फोन और ATM कार्ड बरामद करने की कोशिश में जुटी है।


    FAQ | अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

    Q1. अंधेरी स्टेशन पर लूट कब हुई?
    👉 30 जनवरी को रात करीब 9:30 बजे।

    Q2. पीड़ित कौन है?
    👉 22 वर्षीय कारपेंटर सिराज खान।

    Q3. कितने आरोपी थे और कितने पकड़े गए?
    👉 कुल 3 आरोपी थे, 2 गिरफ्तार, 1 फरार।

    Q4. पुलिस को सबूत कैसे मिला?
    👉 स्टेशन के CCTV फुटेज से।

    Q5. क्या पीड़ित का मोबाइल और ATM कार्ड मिल गया है?
    👉 नहीं, अभी बरामदगी बाकी है।

  • नकली ट्रेडिंग ऐप से 48.5 लाख की ठगी, मुंबई साइबर पुलिस ने तीन आरोपियों को पकड़ा

    नकली ट्रेडिंग ऐप से 48.5 लाख की ठगी, मुंबई साइबर पुलिस ने तीन आरोपियों को पकड़ा

    मुंबई के बोरीवली के व्यापारी से नकली ट्रेडिंग ऐप और WhatsApp ग्रुप के जरिए 48.5 लाख की साइबर ठगी। नॉर्थ साइबर पुलिस ने पुणे से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया।

    मुंबई: साइबर पुलिस ने नकली शेयर मार्केट ट्रेडिंग ऐप स्कैम का बड़ा खुलासा करते हुए पुणे के तीन युवकों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने बोरीवली के एक बिजनेसमैन को WhatsApp स्टॉक टिप्स ग्रुप और नकली ट्रेडिंग ऐप के जरिए 48.50 लाख रुपये की ठगी का शिकार बनाया। पुलिस ने बैंक ट्रांजैक्शन, मोबाइल नंबर और डिजिटल सबूतों के आधार पर कार्रवाई की है। मामले की आगे जांच जारी है।

    📍 कैसे शुरू हुई ठगी की कहानी

    पीड़ित, 43 वर्षीय कारोबारी, बीकेसी के डायमंड मार्केट में एग्जीक्यूटिव ऑफिसर के तौर पर काम करता है।
    अक्टूबर 2025 में उसे एक अंजान महिला का कॉल आया, जिसने अपना नाम “रिया” बताया और खुद को SEBI से जुड़े ब्रोकर्स के साथ काम करने वाला बताया।

    इसके बाद पीड़ित को “Daily Recommendations 602” नाम के WhatsApp ग्रुप में जोड़ा गया, जहां रोज़

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    • QIB इन्वेस्टमेंट
    • मुनाफे के फर्जी स्क्रीनशॉट

    शेयर किए जाते थे।

    📲 VIP ग्रुप और फेक ट्रेडिंग ऐप का जाल

    विश्वास बढ़ाने के लिए पीड़ित को बिना अनुमति “VIP Study Group” में भी जोड़ दिया गया।
    यहां उसे एक लिंक भेजकर TMGPLUS नाम का ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड करवाया गया।

    यह ऐप दिखने में असली ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म जैसा था और उसमें

    • फर्जी मुनाफा
    • बढ़ती हुई रकम
      दिखाई जाती थी, जिससे पीड़ित और ज्यादा निवेश करने लगा।

    💰 48.50 लाख रुपये कैसे निकाले गए

    पुलिस के अनुसार,
    18 नवंबर से 12 दिसंबर 2025 के बीच पीड़ित ने

    • IMPS
    • NEFT
    • RTGS

    के जरिए 48.50 लाख रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किए।

    शुरुआत में छोटी रकम निकालने दी गई, ताकि भरोसा बने।
    लेकिन जब बड़ी रकम निकालने की कोशिश की गई, तो अकाउंट ब्लॉक कर दिया गया।

    🧾 IPO अलॉटमेंट का बहाना

    जब पीड़ित ने अपनी रकम और मुनाफा निकालना चाहा, तो आरोपियों ने कहा कि

    • पैसा IPO अलॉटमेंट में फंसा है
    • रकम रिलीज करने के लिए 50 लाख रुपये और जमा करने होंगे

    इसके बाद पीड़ित को शक हुआ और उसने

    • साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत की
    • फिर पुलिस से संपर्क किया।

    👮‍♂️ मुंबई पुलिस की कार्रवाई कैसे हुई

    बैंक ट्रांजैक्शन, WhatsApp ग्रुप्स, मोबाइल नंबर और डिजिटल ट्रेल की तकनीकी जांच के बाद
    नॉर्थ साइबर पुलिस स्टेशन की टीम ने
    30 जनवरी 2026 को पुणे के अंबेगांव पुलिस स्टेशन की मदद से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया।

    टीम का नेतृत्व

    • इंस्पेक्टर किरण आहेर
    • एपीआई सुदर्शन पाटिल

    ने किया।

    🧑‍⚖️ गिरफ्तार आरोपी कौन हैं

    पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों के नाम हैं:

    • अमर बापू शिंदे (31)
    • प्रशांत सुनील कडव (33)
    • प्रणिल संजय राठोड (25)

    तीनों पुणे के रहने वाले हैं और पढ़े-लिखे हैं।

    🔍 आरोपियों की भूमिका

    पुलिस जांच में सामने आया कि:

    • शिंदे ने अपने बैंक अकाउंट उपलब्ध कराए
    • कडव ने मिडलमैन बनकर दूसरे अकाउंट्स जुटाए
    • राठोड ने खातों से पैसा निकालकर मास्टरमाइंड तक पहुंचाया

    तीनों को हर ट्रांजैक्शन पर कमीशन मिलता था।

    🏦 33 लाख का अहम ट्रांजैक्शन ट्रेस

    पुलिस ने RBL बैंक के एक अकाउंट से जुड़े
    33 लाख रुपये के ट्रांजैक्शन को ट्रेस किया,
    जो Sunenergier Solutions Pvt Ltd, पुणे के नाम पर रजिस्टर्ड था।

    इससे तीनों की संलिप्तता पुख्ता हुई।

    ⚠️ पुलिस की जनता से अपील

    मुंबई साइबर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि:

    • अनजान WhatsApp स्टॉक टिप्स ग्रुप से दूर रहें
    • किसी भी ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसकी जांच करें
    • बिना वेरिफिकेशन निवेश न करें

    ❓ FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

    Q1. ठगी की रकम कितनी है?
    👉 48.50 लाख रुपये।

    Q2. ठगी कैसे की गई?
    👉 WhatsApp ग्रुप और फेक ट्रेडिंग ऐप के जरिए।

    Q3. आरोपी कहां के रहने वाले हैं?
    👉 पुणे के।

    Q4. शिकायत कहां दर्ज की गई थी?
    👉 साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 और नॉर्थ साइबर पुलिस स्टेशन।

    Q5. क्या जांच अभी जारी है?
    👉 हां, मास्टरमाइंड और बाकी आरोपियों की तलाश जारी है।

  • मुंबई में बिना ISI खिलौनों पर BIS की बड़ी कार्रवाई, 1,057 खिलौने जब्त

    मुंबई में बिना ISI खिलौनों पर BIS की बड़ी कार्रवाई, 1,057 खिलौने जब्त

    मुंबई के गोरेगांव में BIS ने बिना ISI मार्क और लाइसेंस के बिक रहे बच्चों के खिलौनों पर छापा मारकर 1,057 खिलौने जब्त किए। दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी।

    मुंबई: बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में सख्ती दिखाते हुए भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने मुंबई के गोरेगांव (पश्चिम) इलाके में बड़ी कार्रवाई की है।
    28 जनवरी 2026 को BIS की मुंबई शाखा ने छापा मारकर बिना ISI मार्क और बिना वैध BIS लाइसेंस के बेचे जा रहे 1,057 खिलौनों को जब्त किया है। ये खिलौने 14 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए बनाए गए थे, जो सुरक्षा मानकों के खिलाफ पाए गए।

    मुंबई के गोरेगांव में खिलौना विक्रेता पर छापा

    BIS अधिकारियों ने गोरेगांव (वेस्ट) स्थित M/s Daddy Drones नाम की फर्म के परिसर में तलाशी अभियान चलाया। जांच के दौरान वहां बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रिकल और नॉन-इलेक्ट्रिकल खिलौने मिले, जिन पर अनिवार्य ISI मार्क मौजूद नहीं था

    इसके अलावा, फर्म के पास BIS Certification Marks (ISI) का कोई वैध लाइसेंस भी नहीं पाया गया।

    कानून का उल्लंघन, आपराधिक कार्रवाई तय

    BIS के अनुसार, यह मामला BIS अधिनियम, 2016 की धारा 17 का सीधा उल्लंघन है।
    धारा 17 को धारा 29 के साथ पढ़ने पर यह स्पष्ट होता है कि ऐसे मामलों में आपराधिक शिकायत दर्ज की जाती है

    अब BIS इस फर्म के खिलाफ अदालत में आपराधिक मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू करेगा

    ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म भी रडार पर

    BIS ने साफ किया है कि केवल विक्रेता ही नहीं, बल्कि ऐसे गैर-प्रमाणित उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा देने वाले ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर भी कार्रवाई की जाएगी
    अगर कोई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बिना BIS प्रमाणन वाले खिलौनों की बिक्री करता पाया गया, तो उसके खिलाफ भी कानूनी कदम उठाए जाएंगे।

    कड़ी सजा का प्रावधान

    BIS अधिनियम, 2016 के तहत दोषी पाए जाने पर:

    • पहली बार उल्लंघन पर
      👉 कम से कम ₹2 लाख का जुर्माना या 2 साल तक की जेल, या दोनों
    • दूसरी और आगे की बार उल्लंघन पर
      👉 कम से कम ₹5 लाख का जुर्माना, जो माल की कीमत के 10 गुना तक बढ़ सकता है, या जेल, या दोनों

    सजा का फैसला सक्षम न्यायालय द्वारा किया जाएगा।

    बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं

    BIS अधिकारियों का कहना है कि खिलौनों में इलेक्ट्रिक शॉक, जहरीले पदार्थ और आग लगने का खतरा हो सकता है।
    इसलिए सरकार ने बच्चों के खिलौनों के लिए ISI मार्क अनिवार्य किया है, ताकि बच्चों की जान और स्वास्थ्य सुरक्षित रह सके।

    देशभर में लगातार कार्रवाई

    BIS नियमित रूप से देशभर में गुप्त सूचना के आधार पर सर्च और सीज़र ऑपरेशन चलाता है।
    इसका मकसद है:

    • घटिया और असुरक्षित सामान की बिक्री रोकना
    • उपभोक्ताओं को गुमराह होने से बचाना
    • मानकों का सख्ती से पालन कराना

    उपभोक्ताओं के लिए BIS की सलाह

    BIS ने आम नागरिकों से अपील की है कि कोई भी सामान खरीदने से पहले:

    • BIS Care App पर लाइसेंस की जांच करें
    • अगर लाइसेंस सस्पेंड, एक्सपायर या रद्द दिखे, तो शिकायत दर्ज करें

    शिकायत कैसे करें?

    यदि कहीं ISI मार्क या BIS हॉलमार्क का दुरुपयोग दिखे, तो जानकारी इस तरह दी जा सकती है:

    • BIS Care App (Android और iOS)
    • ईमेल या लिखित शिकायत
    • BIS कार्यालय से सीधे संपर्क

    👉 सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. कार्रवाई कहां हुई?
    मुंबई के गोरेगांव (पश्चिम) इलाके में।

    Q2. कितने खिलौने जब्त किए गए?
    कुल 1,057 खिलौने।

    Q3. किस वजह से कार्रवाई हुई?
    बिना ISI मार्क और बिना BIS लाइसेंस के खिलौनों की बिक्री।

    Q4. सजा क्या हो सकती है?
    जुर्माना, जेल या दोनों।

    Q5. असली BIS लाइसेंस कैसे जांचें?
    BIS Care App के जरिए।

  • Malad Local Train Murder: 12 घंटे में कातिल गिरफ्तार, 200 CCTV और FRS से खुला राज

    Malad Local Train Murder: 12 घंटे में कातिल गिरफ्तार, 200 CCTV और FRS से खुला राज

    मुंबई के Malad Local Train Murder केस में GRP ने 200 CCTV, फेसियल रिकग्निशन सिस्टम और 5 पुलिस टीमों की मदद से 12 घंटे में आरोपी को गिरफ्तार किया। जानिए पूरा मामला।

    मुंबई: मालाड रेलवे स्टेशन पर लोकल ट्रेन से उतरते वक्त हुए कॉलेज लेक्चरर की हत्या के मामले में GRP ने जबरदस्त तेजी दिखाते हुए महज 12 घंटे में आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। करीब 200 CCTV कैमरे, रेलवे का Facial Recognition System (FRS) और 5 पुलिस टीमों की मदद से आरोपी ओंकार एकनाथ शिंदे को मालाड के ऑटो रिक्शा स्टैंड के पास से दबोचा गया। आरोपी पर 32 साल के लेक्चरर आलोक कुमार सिंह की चाकू मारकर हत्या का आरोप है।

    क्या है पूरा मामला? (Malad Train Murder Case Details)

    शनिवार को मालाड रेलवे स्टेशन पर एक लोकल ट्रेन से उतरते समय यात्रियों की भीड़ में कॉलेज लेक्चरर आलोक कुमार सिंह (32) और आरोपी ओंकार एकनाथ शिंदे के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई। देखते ही देखते बहस हिंसक हो गई और आरोपी ने गुस्से में आलोक के पेट में नुकीली वस्तु (चिमटी/ट्वीजर) से वार कर दिया। गंभीर रूप से घायल आलोक की इलाज के दौरान मौत हो गई।

    200 CCTV और FRS से कैसे पकड़ा गया आरोपी

    हत्या के तुरंत बाद बोरिवली GRP ने मर्डर का केस दर्ज कर जांच शुरू की।

    • कुल 5 पुलिस टीमें बनाई गईं, हर टीम में 5–6 अधिकारी थे
    • रेलवे प्लेटफॉर्म, फुटओवर ब्रिज, मालाड, दिंडोशी, कुरार और वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे तक के करीब 200 CCTV कैमरे खंगाले गए
    • रेलवे के Facial Recognition System (FRS) से आरोपी की पहचान की गई

    CCTV फुटेज में आरोपी वारदात के बाद घबराया हुआ फुटओवर ब्रिज से भागता दिखा।

    आरोपी की रोज़ की ट्रेन रूटीन बनी गिरफ्तारी की वजह

    GRP के डिटेक्शन ऑफिसर PSI प्रकाश सालुंखे के मुताबिक,

    • आरोपी रोज सुबह 7:18 AM की ट्रेन से मालाड से चारणी रोड जाता था
    • शाम को 4:16 PM की ट्रेन से वापस लौटता था

    इसी रूटीन के आधार पर अंधेरी, बांद्रा, मुंबई सेंट्रल समेत कई स्टेशनों पर FRS से CCTV स्कैन किए गए।

    ऑटो रिक्शा स्टैंड से हुई गिरफ्तारी

    पुलिस को इनपुट मिला कि आरोपी कुरार गांव के त्रिवेणी नगर इलाके में देखा गया है। इसके बाद लोकल इंटेलिजेंस एक्टिव की गई और एक टीम को मालाड स्टेशन के पास ऑटो रिक्शा स्टैंड पर तैनात किया गया।

    रविवार सुबह करीब 7:40 बजे, आरोपी ऑटो से उतरते ही पुलिस ने उसे घेर लिया और मौके पर गिरफ्तार कर लिया।

    Malad-Local-Train-Murder-Murderer-arrested-within-12-hours-mystery-revealed-through-200-CCTV-and-FRS-news

    पूछताछ में आरोपी का कबूलनामा

    GRP ऑफिस, बोरिवली में पूछताछ के दौरान पुलिस ने आरोपी को CCTV फुटेज दिखाया।
    आरोपी ने खुद को पहचाना और जुर्म कबूल कर लिया।

    उसने बताया कि:

    • वह अपने पास रखी चिमटी (Tweezer) से आलोक को वार कर बैठा
    • उसे अंदाजा नहीं था कि चोट जानलेवा साबित होगी
    • भीड़ के डर से वह मौके से भाग गया

    कौन है आरोपी ओंकार शिंदे?

    • नाम: ओंकार एकनाथ शिंदे
    • उम्र: लगभग 30 वर्ष
    • रहने वाला: त्रिवेणी नगर, कुरार गांव, मालाड (पूर्व)
    • पेशा: ग्रांट रोड के तांबे गली में इमिटेशन ज्वेलरी की दुकान
    • मूल निवासी: रत्नागिरी
    • परिवार: माता-पिता और बड़ा भाई (प्राइवेट नौकरी में)

    पुलिस का बयान

    बोरिवली GRP के सीनियर इंस्पेक्टर डी.एम. खुपेरकर ने कहा,

    “सभी सबूतों की पुष्टि कर ली गई है। आरोपी को मर्डर के आरोप में गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया है।”

    कोर्ट ने आरोपी को 29 जनवरी तक पुलिस कस्टडी में भेज दिया है।


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. मालाड लोकल ट्रेन मर्डर केस में आरोपी कौन है?
    👉 आरोपी का नाम ओंकार एकनाथ शिंदे है।

    Q2. GRP ने कितने समय में आरोपी को गिरफ्तार किया?
    👉 महज 12 घंटे में।

    Q3. आरोपी को कैसे पकड़ा गया?
    👉 200 CCTV कैमरे, Facial Recognition System और लोकल इंटेलिजेंस से।

    Q4. मृतक कौन था?
    👉 आलोक कुमार सिंह, 32 वर्षीय कॉलेज लेक्चरर।

    Q5. आरोपी फिलहाल कहां है?
    👉 पुलिस कस्टडी में, 29 जनवरी तक।

  • कांदिवली में मोबाइल छीनकर UPI से ₹76,269 उड़ाए

    कांदिवली में मोबाइल छीनकर UPI से ₹76,269 उड़ाए

    मुंबई के कांदिवली वेस्ट में मोबाइल स्नैचिंग के बाद साइबर फ्रॉड का सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां चोरी हुए फोन से युवक के बैंक खाते से ₹76,269 UPI ट्रांजैक्शन कर निकाल लिए गए। पुलिस जांच में जुटी है।

    मुंबई: मोबाइल स्नैचिंग के बाद डिजिटल ठगी का नया और खतरनाक ट्रेंड सामने आ रहा है। कांदिवली वेस्ट में एक युवक का मोबाइल फोन छीने जाने के बाद उसी फोन का UPI इस्तेमाल कर आरोपियों ने उसके बैंक खाते से ₹76,269 निकाल लिए। इतना ही नहीं, चोरों ने व्हाट्सऐप पर खुद को पीड़ित बताकर रिश्तेदार से भी पैसे मंगवा लिए। कांदिवली पुलिस ने मोबाइल स्नैचिंग और साइबर फ्रॉड का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    मुंबई में बढ़ती मोबाइल स्नैचिंग और UPI द्वारा डिजिटल फ्रॉड की वारदातें

    देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में अब सड़क पर मोबाइल छीनना ही अपराधियों का मकसद नहीं रह गया है। मोबाइल हाथ लगते ही वे सीधे डिजिटल बैंकिंग और UPI के जरिए खातों पर हाथ साफ कर रहे हैं। कांदिवली की यह घटना इसी बढ़ते साइबर क्राइम पैटर्न की एक बड़ी मिसाल है, जिसने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

    पीड़ित कौन है और क्या करता है?

    पुलिस के मुताबिक शिकायतकर्ता का नाम अंकितकुमार वैकुंठ तिवारी (24) है। वह टीवी सीरियल इंडस्ट्री में लाइट मैन के तौर पर काम करता है।
    12 जनवरी 2026 की रात कांदिवली वेस्ट के भूत बंगला, गार्डन रिट्रीट कॉम्प्लेक्स में एक सीरियल का प्रोमो शूट चल रहा था, जो 13 जनवरी तड़के करीब 3 बजे खत्म हुआ।

    सुबह-सुबह हुआ मोबाइल स्नैचिंग का शिकार

    शूट खत्म होने के बाद अंकितकुमार अपने पॉइंसुर इलाके स्थित घर की ओर पैदल जा रहा था।
    करीब सुबह 4:05 बजे, शताब्दी अस्पताल के पास अचानक बाइक पर सवार दो अज्ञात युवकों ने उसके हाथ से मोबाइल फोन झपट लिया और तेज़ रफ्तार में फरार हो गए।
    अंधेरा और बाइक की रफ्तार इतनी तेज़ थी कि वह वाहन का नंबर तक नोट नहीं कर पाया।

    ATM पहुंचा तो खुला खाते से पैसे उड़ने का राज

    घटना के अगले दिन जब अंकितकुमार ATM गया, तो उसे मैसेज मिला कि उसका ATM PIN गलत है।
    इसके बाद 15 जनवरी को वह बैंक शाखा पहुंचा, जहां अकाउंट स्टेटमेंट देखने पर उसके होश उड़ गए।
    13 से 15 जनवरी के बीच UPI ट्रांजैक्शन के ज़रिए ₹69,269 उसके खाते से निकाले जा चुके थे।

    व्हाट्सऐप पर भावुक मैसेज भेजकर रिश्तेदार से भी पैसे ठगे

    आरोपियों की चालाकी यहीं नहीं रुकी।
    चोरी किए गए मोबाइल से उन्होंने अंकितकुमार बनकर उसके बहनोई पवन मिश्रा को व्हाट्सऐप पर भावुक मैसेज भेजे और पैसों की मदद मांगी।
    मैसेज असली समझकर पवन मिश्रा ने ₹8,000 ट्रांसफर कर दिए, जिसे भी आरोपियों ने तुरंत निकाल लिया।
    इस तरह कुल रकम ₹76,269 हो गई।

    पुलिस की कार्रवाई और जांच की दिशा

    कांदिवली पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ

    • मोबाइल स्नैचिंग
    • साइबर फ्रॉड
      की धाराओं में केस दर्ज किया है।

    पुलिस आसपास के इलाकों के CCTV फुटेज खंगाल रही है और मोबाइल के IMEI नंबर के ज़रिए फोन की लोकेशन ट्रेस करने की कोशिश की जा रही है।

    पुलिस की अपील: ऐसे रखें खुद को सुरक्षित

    वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार मुंबई में मोबाइल छीने जाने के बाद डिजिटल ठगी की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं।
    लोगों से अपील की गई है कि:

    • मोबाइल में मजबूत लॉक/बायोमेट्रिक जरूर रखें
    • बैंकिंग और UPI ऐप्स में अतिरिक्त सिक्योरिटी ऑन रखें
    • किसी भी संदिग्ध कॉल या मैसेज पर तुरंत भरोसा न करें
    • मोबाइल चोरी होते ही बैंक और पुलिस को सूचना दें

    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1: यह घटना कहां हुई?
    👉 मुंबई के कांदिवली वेस्ट इलाके में, शताब्दी अस्पताल के पास।

    Q2: कुल कितने पैसे निकाले गए?
    👉 कुल ₹76,269।

    Q3: पैसे किस तरह निकाले गए?
    👉 UPI ट्रांजैक्शन और व्हाट्सऐप ठगी के ज़रिए।

    Q4: पुलिस क्या कार्रवाई कर रही है?
    👉 CCTV फुटेज की जांच और IMEI नंबर से मोबाइल ट्रेस किया जा रहा है।

    Q5: मोबाइल चोरी होने पर क्या करें?
    👉 तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराएं और बैंक/UPI सेवाएं ब्लॉक करवाएं।