Category: Mumbai Crime

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  • 10वीं पास ने यूट्यूब से सीख कर साइबर ठगों को Server दिए, 17.42 लाख की ठगी के बाद खुला 1,100 लोगों का नेटवर्क

    10वीं पास ने यूट्यूब से सीख कर साइबर ठगों को Server दिए, 17.42 लाख की ठगी के बाद खुला 1,100 लोगों का नेटवर्क

    मुंबई में ₹17.42 लाख की MGL ठगी की जांच में 1,100 VPS users का नेटवर्क सामने आया। पुलिस ने हरियाणा से 10वीं पास आरोपी को गिरफ्तार किया।

    मुंबई: ₹17.42 लाख की साइबर ठगी की जांच करते-करते मुंबई पुलिस ऐसे सर्वर नेटवर्क तक पहुंच गई, जिसके करीब 1,100 users सामने आए हैं। इस मामले में मुंबई पुलिस की साउथ रीजन साइबर पुलिस ने हरियाणा के भिवानी खेड़ा से 32 वर्षीय प्रवीण हुकुम चंद को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, 10वीं पास प्रवीण ने YouTube और ऑनलाइन tutorials से RDP और VPS की तकनीक सीखी और बाद में server किराये पर देने का काम शुरू किया।

    जांच में सामने आया है कि उसके customers से जुड़े कुछ मोबाइल नंबर पहले से लगभग 30 cybercrime complaints में दर्ज हैं। अब Crime Branch यह पता लगाने में जुटी है कि इन 1,100 users में कितने लोग वास्तव में cyber fraud से जुड़े थे और प्रवीण को उनकी गतिविधियों की जानकारी थी या नहीं।

    ₹17.42 लाख की ठगी से खुली server की कड़ी

    इस पूरे मामले की शुरुआत एक MGL Gas Bill Update वाले fraud से हुई। पुलिस के मुताबिक, पीड़ित को Mahanagar Gas Limited के नाम से message भेजा गया और bill update करने के नाम पर एक APK install करने के लिए कहा गया।

    APK मोबाइल में install होने के बाद उसमें मौजूद malware ने फोन की sensitive information तक पहुंच बनाई। इसी दौरान करीब ₹17.42 लाख की बैंकिंग ठगी हुई।

    साउथ रीजन साइबर पुलिस ने जब इस मामले की technical investigation शुरू की तो फर्जी APK के पीछे इस्तेमाल हो रहे server का IP address सामने आया। इसी digital trail को आगे बढ़ाते हुए जांचकर्ता server provider Hostinger तक पहुंचे और वहां से मिली जानकारी के आधार पर VPS operation का connection प्रवीण हुकुम चंद तक पहुंचा।

    YouTube से सीखी RDP-VPS की तकनीक

    पुलिस के मुताबिक, प्रवीण ने computer या IT की कोई formal technical education नहीं ली थी। उसने YouTube videos और internet पर उपलब्ध tutorials से web development, Remote Desktop Protocol यानी RDP और Virtual Private Server यानी VPS चलाना सीखा।

    इसके बाद उसने rdpwale.in नाम से website शुरू की और VPS तथा RDP services उपलब्ध कराने लगा। पुलिस का आरोप है कि customers से KYC या पहचान की पर्याप्त जानकारी लिए बिना server उपलब्ध कराए जाते थे। जांच के मुताबिक, अलग-अलग configurations के लिए ₹1,699 से ₹13,199 महीने तक charge किया जाता था।

    Server का इस्तेमाल सिर्फ website चलाने के लिए नहीं हुआ?

    पुलिस की जांच में आरोप है कि प्रवीण से लिए गए कुछ VPS का इस्तेमाल malicious APK चलाने वाले operators ने command-and-control यानी C2 server की तरह किया।

    सरल भाषा में समझें तो ऐसे server को fraudsters अपने malware और compromised मोबाइल के बीच communication के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे संक्रमित फोन से मिलने वाला sensitive data attacker तक पहुंच सकता है।

    Cyber forensic expert Nishant Salunkhe के मुताबिक, ऐसे fraudulent APK SMS, notifications और accessibility जैसी permissions का गलत इस्तेमाल करके OTP और दूसरी sensitive जानकारी हासिल कर सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि OTP को technically crack करने के बजाय compromised device से intercept किया जा सकता है। APK, उसके permissions, network connections और server infrastructure की जांच से investigators fraud की पूरी digital chain को समझ सकते हैं।

    1,100 customers का मतलब 1,100 cyber criminals नहीं

    इस मामले का सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि प्रवीण से server लेने वाले करीब 1,100 लोगों में वास्तव में कितने cybercrime में शामिल थे।

    पुलिस ने अभी सभी customers को cyber criminals घोषित नहीं किया है। जांच में सिर्फ इतना सामने आया है कि इन customers से जुड़े कुछ mobile numbers लगभग 30 NCRP cybercrime complaints में दिखाई दिए हैं।

    Crime Branch अब इन 1,100 users को अलग-अलग cybercrime cases से match कर रही है। साथ ही subscription के जरिए प्रवीण को मिली रकम, customer details, server logs और IP addresses की भी जांच हो रही है।

    rdpwale.in पर आज भी दिख रही हैं RDP services

    जांच के बीच rdpwale.in की public website भी उपलब्ध है। Website पर RDP plans ₹699 महीने से शुरू होते दिख रहे हैं। अलग-अलग plans में Windows Server, dedicated/private IP और full admin access जैसी सुविधाएं दी गई हैं। Website के “About RDPWALE” हिस्से में इसे “Owned by Praveen” बताया गया है और Bhiwani, Haryana का address दिया गया है।

    यहां एक महत्वपूर्ण अंतर भी सामने आता है। पुलिस की रिपोर्ट में उस समय उपलब्ध कराई गई services की कीमत ₹1,699 से ₹13,199 महीने बताई गई है, जबकि current public website पर ₹699, ₹899 और ₹1,499 जैसे plans दिखाई दे रहे हैं। इन दोनों pricing details के बीच अंतर का कारण अभी स्पष्ट नहीं है।

    MGL के नाम पर पहले भी हो चुकी है बड़ी ठगी

    यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब मुंबई में MGL के नाम पर fake APK वाले कई cyber fraud cases सामने आ चुके हैं।

    अप्रैल 2026 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ एक महीने में 100 से ज्यादा MGL consumers और applicants से करीब ₹2.7 करोड़ की ठगी की गई थी। Victims में 26 से 83 साल तक के लोग शामिल थे। Fraudsters gas connection बंद होने या bill update नहीं होने का डर दिखाकर APK download करवाते थे।

    यानी इस मामले में ₹17.42 लाख की एक ठगी सिर्फ एक isolated incident नहीं थी। इसी तरह के APK-based fraud में पहले भी लोगों के मोबाइल और banking information को निशाना बनाए जाने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं।

    Laptop और mobile से खुलेगा आगे का राज

    पुलिस ने प्रवीण के पास से laptop और mobile phone जब्त किया है। अब इन devices से customer records, server logs, payment details, IP addresses और communications की जांच की जा रही है।

    सबसे अहम सवाल यह है कि प्रवीण को अपने servers के इस्तेमाल की जानकारी कितनी थी। पुलिस यह भी जांच रही है कि उसने जानबूझकर cybercrime operators को infrastructure दिया या customers की गतिविधियों को नजरअंदाज किया।

    अगर server logs और payment records से customers का connection अलग-अलग cyber fraud cases से साबित होता है, तो यह जांच सिर्फ एक आरोपी की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगी। 1,100 users की mapping से देश के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे cybercrime cases के बीच नई कड़ियां सामने आ सकती हैं। फिलहाल इन सभी connections की जांच जारी है और आरोपों का अंतिम निष्कर्ष जांच तथा कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

  • मुंबई पुलिस की पेट्रोलिंग SUV में Reel, जांच शुरू; आखिर युवक ड्राइवर सीट तक पहुंचा कैसे? चाबी और CCTV पर सवाल

    मुंबई पुलिस की पेट्रोलिंग SUV में Reel, जांच शुरू; आखिर युवक ड्राइवर सीट तक पहुंचा कैसे? चाबी और CCTV पर सवाल

    मुंबई पुलिस की पेट्रोलिंग SUV में Reel का वीडियो वायरल होने के बाद जांच शुरू हुई। युवक पुलिस वाहन के अंदर कैसे पहुंचा, चाबी और CCTV पर सवाल हैं।

    मुंबई: मुंबई पुलिस की पेट्रोलिंग SUV में Instagram Reel बनाए जाने का वीडियो सामने आने के बाद जांच शुरू हो गई है। वायरल वीडियो में एक युवक पुलिस की गाड़ी की ड्राइवर सीट पर बैठकर स्टीयरिंग पकड़े नजर आ रहा है। अब जांच का सबसे अहम सवाल यही है कि वह पुलिस वाहन के अंदर पहुंचा कैसे?

    वीडियो में क्या दिखा?

    वायरल क्लिप में युवक मुंबई पुलिस की SUV के ड्राइवर सीट पर बैठकर कैमरे के लिए पोज करता दिखाई देता है। वीडियो में “Daddy’s Home” ऑडियो इस्तेमाल किया गया है। ऑनलाइन रिपोर्ट्स में वीडियो को Instagram अकाउंट @harijan6282 से जोड़ा गया है और युवक का नाम विजय हरिजन बताया गया है। हालांकि, उसकी पुलिस से किसी तरह की आधिकारिक संबद्धता की पुष्टि नहीं हुई है।

    वायरल हो रहा यह वीडियो Instagram पर अब उपलब्ध नहीं है। बताया जा रहा है कि विवाद के बाद वीडियो डिलीट कर दिया गया। जबकि वीडियो वायरल हो गया। वीडियो में एक युवक मुंबई पुलिस की SUV के ड्राइवर सीट पर बैठकर Reel बनाता नजर आता है। वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर यह सवाल उठ रहे हैं कि उसे पुलिस वाहन के अंदर जाने की अनुमति कैसे मिली और वाहन की चाबी उसके पास कैसे पहुंची।

    चाबी किसके पास थी?

    इस मामले में सिर्फ Reel बनाना मुद्दा नहीं है। बड़ा सवाल पुलिस की पेट्रोलिंग गाड़ी तक पहुंच का है।

    अगर युवक पुलिसकर्मी नहीं था, तो वह वाहन के अंदर कैसे पहुंचा? क्या SUV उस समय लॉक थी? चाबी किसके पास थी? वाहन किसकी ड्यूटी में था और क्या किसी ने उसे अंदर जाने की अनुमति दी?

    इन सवालों के जवाब CCTV फुटेज, वाहन की ड्यूटी एंट्री और संबंधित पुलिसकर्मियों से पूछताछ के जरिए सामने आ सकते हैं।

    वीडियो में युवक को ड्राइवर सीट पर बैठे देखा जा सकता है, लेकिन वह वाहन चला रहा था, ऐसा साबित करने वाला कोई स्पष्ट दृश्य सामने नहीं आया है।

    पुलिस के सोशल मीडिया नियम भी अहम

    फरवरी 2026 में मुंबई पुलिस ने अपने कर्मचारियों के लिए सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर सख्त निर्देश जारी किए थे। करीब 51,000 पुलिसकर्मियों को जारी आदेश में वर्दी में Reels और mini-vlogs बनाने पर रोक लगाई गई थी। पुलिस ने इसकी वजह सुरक्षा और गोपनीयता से जुड़े जोखिम बताए थे, क्योंकि ऐसे वीडियो में सरकारी वाहन, पुलिस परिसर और ड्यूटी से जुड़ी जानकारी सामने आ सकती है।

    महाराष्ट्र सरकार ने 2025 में सरकारी कर्मचारियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल के लिए भी दिशा-निर्देश जारी किए थे, जिनमें सरकारी वाहन और संपत्ति को निजी सोशल मीडिया पोस्ट में दिखाने को लेकर नियम शामिल थे।

    पुलिस वाहन की निगरानी पर फिर सवाल

    मुंबई में हाल ही में Coastal Road पर पुलिस वाहन से जुड़ा एक अलग मामला भी सामने आया था। जहां एक पुलिस वाहन कथित तौर पर बिना निगरानी रह गया था और उसकी चाबी वाहन में थी। बाद में वाहन को लेकर घटना हुई और CCTV की जांच की गई।

    दोनों मामले अलग हैं, लेकिन इनके सामने आने से पुलिस वाहनों की चाबी, custody और निगरानी को लेकर सवाल जरूर उठे हैं।

    जांच में अब क्या साफ होना बाकी?

    जांच में सबसे पहले वाहन की पहचान, घटना की जगह और समय तथा उस वक्त वाहन किस पुलिसकर्मी के जिम्मे था, यह स्पष्ट होना जरूरी है। इसके साथ CCTV, वाहन रिकॉर्ड और चाबी की स्थिति से यह पता चल सकता है कि युवक को SUV तक पहुंच कैसे मिली।

    अगर किसी पुलिसकर्मी की लापरवाही या अनुमति सामने आती है तो विभागीय कार्रवाई का सवाल उठ सकता है। वहीं, अगर युवक ने बिना अनुमति पुलिस वाहन में प्रवेश किया था, तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी जांच के निष्कर्ष पर निर्भर करेगी।

    फिलहाल FIR, गिरफ्तारी या किसी पुलिसकर्मी पर कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए इस स्तर पर सबसे बड़ा सवाल यही है—पुलिस की पेट्रोलिंग SUV तक युवक पहुंचा कैसे और उस वक्त वाहन की जिम्मेदारी किसके पास थी?

  • Malad Road Accident: 65 साल के ड्राइवर पर केस, महिला की मौत; थाने में VIP ट्रीटमेंट के आरोपों से मचा बवाल

    Malad Road Accident: 65 साल के ड्राइवर पर केस, महिला की मौत; थाने में VIP ट्रीटमेंट के आरोपों से मचा बवाल

    Malad Road Accident में महिला की मौत के बाद 65 वर्षीय ड्राइवर गिरफ्तार हुआ। पुलिस स्टेशन में VIP ट्रीटमेंट के आरोपों ने मामले को और गरमा दिया है।

    मुंबई: मालाड वेस्ट में 30 अगस्त की रात हुए सड़क हादसे के मामले में 65 वर्षीय कार ड्राइवर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के मुताबिक, मामलतदार वाडी जंक्शन पर कार ने एक स्कूटर और इसके बाद तीन ऑटो रिक्शा को टक्कर मारी, जिसमें प्रियंका शाह की मौत हो गई और कई लोग घायल हुए। वहीं, आरोपी को पुलिस स्टेशन में कथित तौर पर VIP सुविधाएं दिए जाने के आरोपों ने अब हादसे के साथ-साथ पुलिस के रवैये पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

    मामलेदार वाडी जंक्शन पर कैसे हुआ हादसा?

    पुलिस के मुताबिक, हादसा 30 अगस्त की रात करीब 8 बजे मालाड वेस्ट के मामलेदार वाडी जंक्शन पर हुआ। उस वक्त Mayank Satra अपनी पत्नी Priyanka Satra के साथ Activa स्कूटर पर थे और दोनों ट्रैफिक सिग्नल पर रुके हुए थे।

    पुलिस का आरोप है कि कृष्ण चमनाकर नाम के 65 वर्षीय ड्राइवर ने कथित तौर पर तेज और लापरवाही से कार चलाते हुए स्कूटर को टक्कर मारी। इसके बाद कार तीन अन्य ऑटो रिक्शा से भी जा टकराई। हादसे में कई लोग घायल हुए, जिनमें कुछ की हालत गंभीर बताई गई। प्रियंका सातरा को गंभीर चोटें आईं और बाद में उनकी मौत हो गई।

    आरोपी ड्राइवर गिरफ्तार, इन धाराओं में केस

    प्रियंका सातरा के परिवार की शिकायत के आधार पर मालाड पुलिस ने आरोपी कृष्ण चमनाकर के खिलाफ मामला दर्ज किया है। उपलब्ध पुलिस जानकारी के अनुसार उस पर BNS की धारा 106(1), 281 और 125(A)(B) के साथ Motor Vehicles Act की धारा 184 के तहत कार्रवाई की गई है।

    पुलिस के मुताबिक आरोपी का मेडिकल परीक्षण कराया गया और उसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया। मामले की आगे की जांच जारी है।

    अब पुलिस स्टेशन में ‘VIP ट्रीटमेंट’ के आरोप क्यों?

    हादसे के बाद मृतका के परिजनों और स्थानीय लोगों की तरफ से मालाड पुलिस स्टेशन में आरोपी के साथ कथित तौर पर विशेष व्यवहार किए जाने के आरोप लगाए गए हैं।

    आरोपों में कहा गया है कि आरोपी को लॉकअप में मोबाइल इस्तेमाल करने दिया गया, बैठने के लिए कुर्सी दी गई और बाद में उसे पुलिस स्टेशन के पीछे एक AC कमरे में बैठाए जाने की बात सामने आई। यह भी दावा किया गया कि मेडिकल जांच के नाम पर आरोपी को लॉकअप से बाहर ले जाया गया और परिजनों को उसके बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।

    इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल उपलब्ध पुलिस बयान से नहीं हुई है। इसलिए इन्हें आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। इस मामले में पुलिस की ओर से कथित VIP सुविधाओं पर कोई स्पष्ट आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आने तक इन दावों को पुख्ता तथ्य मानना सही नहीं होगा।

    ‘20 लोगों को रौंदने’ के दावे पर क्या सामने आया?

    इस घटना को लेकर अब तक की जानकारी में 20 लोगों के चपेट में आने और दो लोगों की मौत का दावा किया गया है। हालांकि, उपलब्ध पुलिस-आधारित रिपोर्ट में हादसे में एक महिला की मौत, स्कूटर और तीन ऑटो रिक्शा के क्षतिग्रस्त होने तथा कई लोगों के घायल होने की जानकारी दी गई है। पुलिस जांच के बाद मामला साफ होने की गुंजाइश जताई जा रहीं है।

    अब नजर पुलिस की जांच पर

    फिलहाल सबसे अहम दो पहलू हैं—हादसे की पूरी परिस्थितियों की जांच और पुलिस स्टेशन में आरोपी के साथ कथित विशेष व्यवहार की शिकायतों की जांच।

    सड़क हादसे के मामले में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर केस दर्ज कर लिया है। वहीं, अगर पुलिस स्टेशन में मोबाइल, AC कमरे या अन्य विशेष सुविधाएं दिए जाने के आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।

    पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों की मांग है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच हो और पुलिस स्टेशन के CCTV फुटेज समेत उपलब्ध सबूतों की जांच की जाए। अब आगे की कार्रवाई और पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया से यह साफ होगा कि इन आरोपों में कितनी सच्चाई है।

  • कांदिवली स्टेशन के बाहर कथित देह व्यापार के आरोप, लॉज और Fire Safety पर उठे सवाल

    कांदिवली स्टेशन के बाहर कथित देह व्यापार के आरोप, लॉज और Fire Safety पर उठे सवाल

    कांदिवली स्टेशन के आसपास कथित देह व्यापार और लॉज को लेकर शिकायतों से सुरक्षा पर सवाल उठे हैं। Fire NOC और पुलिस कार्रवाई पर भी नजर।

    मुंबई: कांदिवली पश्चिम रेलवे स्टेशन के आसपास कथित देह व्यापार और एक लॉज की गतिविधियों को लेकर स्थानीय नागरिकों की शिकायतों ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि स्टेशन परिसर और स्टेशन के बाहर के रास्तों, पोस्ट ऑफिस गली और फाटक रोड इलाके में रात के समय संदिग्ध गतिविधियां बढ़ जाती हैं। इन शिकायतों के बीच अब लॉज की licensing, fire-safety compliance और पुलिस कार्रवाई की जांच की मांग उठ रही है।

    रात में स्टेशन के बाहर क्या आरोप लगाए गए?

    स्थानीय लोगों का दावा है कि शाम करीब 8 बजे के बाद पोस्ट ऑफिस गली, फाटक रोड और स्टेशन परिसर और आसपास कुछ महिलाएं और अन्य लोग व्यभिचार की लेनदेन करते हुए जमा देखे जाते हैं। इसका एक वीडियो भी रिकॉर्ड किया गया है। नागरिकों के मुताबिक, इसका असर वहां से गुजरने वाले यात्रियों, खासकर महिला यात्रियों की सुरक्षा और सहज आवाजाही पर पड़ रहा है।

    Happy Guest House को लेकर भी सवाल

    स्थानीय स्तर पर Happy Guest House/Happy Lodge को लेकर भी जांच की मांग की गई है। आरोप लगाए गए हैं कि वहां ठहरने वाले लोगों के दस्तावेजों और बांग्लादेशी नागरिकों के verification की जांच होनी चाहिए। हालांकि, इस लॉज के खिलाफ मौजूदा समय में देह व्यापार, अवैध विदेशी नागरिकों को ठहराने या अन्य अपराध को लेकर कोई आधिकारिक FIR या पुलिस कार्रवाई सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।

    ऐसे में अब सबसे अहम सवाल यही है कि संबंधित प्रशासन ने इस लॉज की licensing, guest records और सुरक्षा मानकों की जांच की है या नहीं।

    Fire Safety को लेकर चिंता क्यों बढ़ी?

    कांदिवली स्टेशन रोड पर 17 अगस्त 2026 को एक commercial building में आग लगी थी। दमकल विभाग ने smoke-filled building से 11 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला था। इस घटना के बाद स्टेशन रोड और आसपास के lodging establishments में fire-safety व्यवस्था की जांच का सवाल और महत्वपूर्ण हो जाता है।

    हालांकि, Happy Guest House के पास Fire NOC नहीं होने का specific दावा अभी किसी आधिकारिक स्रोत से confirm नहीं हुआ है। इसलिए इसकी जांच Mumbai Fire Brigade और संबंधित civic authorities के रिकॉर्ड से होना जरूरी है।

    GRP, RPF और स्थानीय पुलिस की भूमिका भी अहम

    रेलवे परिसर में GRP और RPF की जिम्मेदारियां अलग-अलग हैं। GRP रेलवे परिसर में law and order और criminal cases देखती है, जबकि RPF की प्रमुख जिम्मेदारी रेलवे संपत्ति और सुरक्षा से जुड़ी है।

    स्टेशन से बाहर के इलाके में स्थानीय पुलिस और civic authorities की भूमिका बनती है। इसलिए नागरिकों की शिकायत पर यह स्पष्ट होना जरूरी है कि किस agency ने क्या कार्रवाई की और क्या कोई शिकायत या मामला दर्ज हुआ है।

    अब नजर किस पर?

    फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण कदम आरोपों की स्वतंत्र जांच है। स्टेशन परिसर और आसपास के CCTV, स्थानीय शिकायतें, लॉज के licence और guest records, Fire NOC तथा संबंधित पुलिस रिकॉर्ड की जांच से ही तस्वीर साफ हो सकती है।

    फिलहाल कांदिवली परिसर में इन बाजारू महिलाओं का जमावड़ा सवालों के घेरे में है। इनके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।

  • Mumbai Accident: बांद्रा में 8 साल के बच्चे की मौत, फोन पर बात करने का आरोप; महिला ड्राइवर गिरफ्तार

    Mumbai Accident: बांद्रा में 8 साल के बच्चे की मौत, फोन पर बात करने का आरोप; महिला ड्राइवर गिरफ्तार

    मुंबई के बांद्रा में सड़क पार कर रहे 8 साल के बच्चे की कार की टक्कर से मौत हो गई। पुलिस ने महिला ड्राइवर को गिरफ्तार कर जांच शुरू की है।

    मुंबई: बांद्रा में रविवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे में 8 साल के बच्चे की मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, जान बैपटिस्ट रोड पर जीजामाता गार्डन के सामने सड़क पार कर रहे बच्चे को एक कार ने टक्कर मार दी। हादसे के बाद पुलिस ने कार चला रही महिला को गिरफ्तार किया है।

    पुलिस की शुरुआती जानकारी के मुताबिक, हादसे के वक्त महिला ड्राइवर के मोबाइल फोन पर बात करने और कार तेज रफ्तार में होने का आरोप है। हालांकि, इन पहलुओं की पुलिस अभी जांच कर रही है।

    बांद्रा में सड़क पार करते समय हुआ हादसा

    मृतक बच्चे की पहचान अंश रवींद्र गुप्ता के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, रविवार दोपहर अंश जान बैपटिस्ट रोड पर जीजामाता गार्डन के सामने सड़क पार कर रहा था। इसी दौरान कार की चपेट में आने से वह गंभीर रूप से घायल हो गया।

    टक्कर के बाद आसपास मौजूद लोगों की मदद से बच्चे को तुरंत अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

    महिला ड्राइवर गिरफ्तार

    हादसे के बाद पुलिस ने कार चला रही करीब 45 वर्षीय महिला को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी की पहचान बांद्रा निवासी मेघा रावल के तौर पर बताई गई है।

    पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में कार की रफ्तार और ड्राइविंग के दौरान मोबाइल फोन के इस्तेमाल का आरोप सामने आया है। हादसे के वक्त वास्तव में क्या हुआ था, इसे लेकर पुलिस दूसरे पहलुओं को भी verify कर रही है।

    BNS और Motor Vehicles Act के तहत मामला

    पुलिस ने महिला ड्राइवर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के साथ Motor Vehicles Act के तहत भी केस दर्ज किया है।

    अब पुलिस हादसे की पूरी परिस्थितियों की जांच कर रही है। इसमें कार की रफ्तार, घटना के समय ड्राइवर के मोबाइल इस्तेमाल और हादसा किस तरह हुआ, जैसे अहम पहलुओं को verify किया जा रहा है।

    फिलहाल मामले में जांच जारी है। पुलिस की आगे की जांच से यह साफ होगा कि हादसे के वक्त ड्राइविंग में किन परिस्थितियों की भूमिका रही और आरोपी ड्राइवर के खिलाफ दर्ज आरोपों में आगे क्या कार्रवाई होती है।

  • मुंबई Eid-e-Milad Clash: Viral Video पर 3 Instagram Accounts पर FIR, अब पुलिस का अगला एक्शन

    मुंबई Eid-e-Milad Clash: Viral Video पर 3 Instagram Accounts पर FIR, अब पुलिस का अगला एक्शन

    मुंबई Eid-e-Milad clash के viral video पर 3 Instagram accounts के खिलाफ FIR हुई है। Police अब video source और account operators की जांच कर रही है।

    मुंबई: Parel-Chinchpokli इलाके में Eid-e-Milad procession के दौरान हुआ विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। 26 अगस्त की घटना के बाद सामने आए एक viral video को लेकर Kalachowki Police ने 3 Instagram accounts के खिलाफ FIR दर्ज की है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि video कहां से आया, इसे किसने upload किया और इसके साथ किया गया दावा असल घटना से कितना मेल खाता है।

    यानी मामला अब सिर्फ सड़क पर हुए clash तक नहीं है। पुलिस की नजर उस video को social media पर फैलाने के तरीके पर भी है।

    क्या हुआ था Parel-Chinchpokli में?

    26 अगस्त को Eid-e-Milad procession के बाद Parel-Chinchpokli इलाके में दो groups के बीच विवाद हुआ था। इसके बाद धक्कामुक्की और तनाव की स्थिति बनी और पुलिस को मौके पर पहुंचकर हालात संभालने पड़े।

    घटना के बाद social media पर कई तरह के videos और claims सामने आए। इसी वजह से पुलिस ने लोगों से बिना पुष्टि किसी भी जानकारी पर भरोसा नहीं करने की अपील की थी।

    Joint Commissioner of Police (Law and Order) Manoj Sharma ने उस समय कहा था कि senior police officers मौके पर मौजूद हैं और situation control में है। उन्होंने लोगों से rumours से बचने की अपील की थी।

    Original clash में पहले क्या कार्रवाई हुई?

    इस विवाद के मामले में पहले पुलिस ने तीन लोगों को book किया था। Rehan Masood Sayyad, Adil Khan Ahmed Khan और Miraj Mohammad Firoz Rais के नाम सामने आए थे।

    पुलिस दूसरे लोगों की पहचान को लेकर भी जांच कर रही थी। लेकिन अब इस मामले में social media से जुड़ा एक अलग angle सामने आया है।

    29 अगस्त को Police की नजर पड़ी Viral Video पर

    Kalachowki Police के Cyber Squad में तैनात Police Constable Vikram Khaire की complaint के मुताबिक, 29 अगस्त को social-media monitoring के दौरान पुलिस की नजर एक video पर पड़ी।

    Complaint के अनुसार यह video करीब तीन दिन पहले Instagram पर upload किया गया था। Video में दो groups के बीच confrontation दिखाई देता है और police personnel भीड़ को control करते नजर आते हैं।

    लेकिन पुलिस की जांच का सबसे अहम point video के साथ लिखा गया caption है।

    Ganpati banner को लेकर क्या दावा किया गया?

    Police complaint के मुताबिक video के साथ लगाए गए caption में दावा किया गया था कि Parel-Lalbaug इलाके में Ganpati banner को नुकसान पहुंचाने की कोशिश के reaction में यह confrontation हुआ।

    पुलिस को आशंका है कि इस तरह घटना को धार्मिक angle से जोड़कर पेश करने वाला post लोगों के बीच गलतफहमी या तनाव बढ़ा सकता है।

    Complaint में video के background में “Jalwa Re Jalwa” song इस्तेमाल किए जाने का भी जिक्र है।

    यहीं से सवाल उठता है कि video में जो घटना दिखाई गई, क्या उसके साथ लगाया गया दावा भी सही था?

    फिलहाल पुलिस इसी कड़ी को verify कर रही है।

    3 Instagram Accounts पर FIR

    Kalachowki Police ने complaint के आधार पर 3 Instagram accounts को जांच के दायरे में लिया है। पुलिस का आरोप है कि इन accounts से allegedly ऐसा material circulate किया गया, जिसे misleading और inflammatory माना गया।

    पुलिस यह जांच रही है कि footage असल में कब और कहां record हुआ, उसका original source क्या है और उसे Instagram पर किसने upload किया।

    Police अब किन सवालों के जवाब तलाश रही है?

    सवालपुलिस की जांच
    Video कहां का है?Original footage का source पता किया जा रहा है
    Video किसने upload किया?3 Instagram accounts चलाने वालों की पहचान
    Video कब बना?Recording और upload की timeline की जांच
    Caption में किया गया दावाGanpati banner से जुड़े claim की पड़ताल
    Video का पूरा contextघटना में वास्तव में क्या हुआ, इसकी जांच

    इस जांच का एक अहम हिस्सा उन लोगों तक पहुंचना है जो इन Instagram accounts को operate कर रहे थे।

    Police का पहले भी था साफ message

    Parel-Chinchpokli विवाद के बाद Joint Commissioner Manoj Sharma ने लोगों से social media पर चल रहे rumours पर भरोसा नहीं करने को कहा था। पुलिस ने साफ किया था कि senior officers मौके पर मौजूद हैं और हालात control में हैं।

    अब उसी घटना से जुड़े viral video पर FIR होने के बाद पुलिस के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि social media पर सामने आई जानकारी original घटना को सही तरीके से दिखाती है या उसे अलग तरीके से पेश किया गया।

    Ganpati Aagman के बीच Parel-Lalbaug में हलचल

    इस बीच Parel-Lalbaug-Chinchpokli belt में Ganpati Aagman को लेकर भी बड़ी भीड़ जुट रही है। Chinchpokli Cha Chintamani Aagman के दौरान भारी police deployment की रिपोर्ट सामने आई थी।

    Aagman के दौरान करीब 800 से 1,000 police personnel deployment में लगाए गए थे।

    हालांकि इस deployment को Instagram FIR से सीधे जोड़ने की कोई official confirmation सामने नहीं आई है।

    अब पुलिस का अगला एक्शन

    3 Instagram accounts पर FIR के बाद अब पुलिस video के original source, उसके साथ किए गए claim और accounts चलाने वाले लोगों की पहचान पर आगे बढ़ रही है।

    फिलहाल investigation जारी है। इसलिए viral video या उसके caption को पूरी घटना का final सच मानना सही नहीं होगा।

    26 अगस्त के Parel-Chinchpokli clash के बाद सामने आया यह नया मामला दिखाता है कि अब पुलिस की जांच सिर्फ मौके पर हुए विवाद तक सीमित नहीं है। Viral video की पूरी कहानी, उसका source और उसके साथ किया गया दावा जांच के बाद ही साफ होगा।

  • चेंबूर में महिला की मौत के बाद Boyfriend गिरफ्तार, लेकिन मौत का राज खुला तो उड़ गए सबके होश

    चेंबूर में महिला की मौत के बाद Boyfriend गिरफ्तार, लेकिन मौत का राज खुला तो उड़ गए सबके होश

    चेंबूर में महिला की अचानक मौत के बाद Boyfriend गिरफ्तार हुआ। शुरुआत में मामला सामान्य लगा, लेकिन जांच आगे बढ़ी तो Murder का चौंकाने वाला राज सामने आया।

    मुंबई: चेंबूर में एक महिला की अचानक हुई मौत ने अब गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआत में मामला एक सामान्य या संदिग्ध मौत जैसा लग रहा था, लेकिन पुलिस की जांच आगे बढ़ते ही पूरी कहानी ने ऐसा मोड़ लिया कि महिला की मौत का मामला Murder Case में बदल गया।

    इस मामले में महिला के Boyfriend Ashish Magar को गिरफ्तार किया गया है। कोर्ट ने उसे पांच दिन की Police Custody में भेजा है। लेकिन पुलिस को आखिर ऐसा क्या मिला, जिससे मौत की पूरी कहानी बदल गई?

    25 अगस्त की रात चेंबूर में क्या हुआ?

    मामला RCF Police Station के तहत आने वाली Mysore Colony के Bungalow No. 57-A का है। खबर के मुताबिक 25 अगस्त की रात करीब 11:30 बजे महिला की तबीयत अचानक खराब हो गई।

    पुलिस के मुताबिक इससे कुछ समय पहले महिला और उसके Boyfriend के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ था। आरोपी को कथित तौर पर महिला के किसी दूसरे व्यक्ति के साथ संबंध होने का शक था। इसी बात को लेकर दोनों के बीच बहस हुई।

    कुछ देर बाद मामला शांत हुआ, लेकिन इसके बाद महिला की तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी।

    अचानक उल्टी हुई और बिगड़ती चली गई हालत

    महिला को उल्टी होने लगी और उसकी हालत खराब होती गई। परिवार के लोग उसे इलाज के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे।

    पुलिस के मुताबिक उसे पहले एक Private Hospital ले जाया गया और बाद में चेम्बूर के सरकारी Shatabdi Hospital पहुंचाया गया। वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

    उस वक्त तक यह मामला एक अचानक हुई मौत जैसा ही नजर आ रहा था।

    लेकिन इसके बाद जांच में ऐसी कड़ी सामने आई, जिसने पुलिस का शक बढ़ा दिया।

    मौत के बाद पुलिस ने जांच का रुख बदला

    महिला की मौत की परिस्थितियों को लेकर पुलिस ने उसके आसपास मौजूद लोगों और घटना से जुड़े लोगों के बयान लेने शुरू किए।

    मेडिकल और Post-mortem findings को भी जांच में शामिल किया गया। इसी दौरान पुलिस को महिला की मौत सामान्य तरीके से होने पर संदेह हुआ।

    जांच आगे बढ़ी तो उसके Boyfriend की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई।

    यहीं से इस केस का सबसे बड़ा राज सामने आने लगा।

    कहानी में Cold Drink की एंट्री कैसे हुई?

    पुलिस के मुताबिक विवाद के बाद आरोपी ने महिला को एक Cold Drink दी थी। महिला ने उसे पीने के बाद ही तबीयत खराब होने की शिकायत शुरू की और उसकी हालत बिगड़ गई।

    इसके बाद पुलिस ने Cold Drink और उसमें कथित तौर पर मिलाए गए जहरीले पदार्थ के angle से जांच शुरू की।

    यानी जिस चीज को शुरुआत में एक सामान्य पेय समझा जा रहा था, वही अब इस पूरे Murder Investigation की अहम कड़ी बन गई।

    कुछ पुलिस सूत्रों में जहरीले पदार्थ को Mothballs यानी डांबर की गोलियों से जोड़ा गया। लेकिन इसकी exact nature की पुष्टि Forensic जांच के बाद की सामने आएगी।

    पुलिस को Boyfriend पर क्यों हुआ शक?

    पुलिस का आरोप है कि Ashish Magar को महिला के Character और उसके किसी दूसरे व्यक्ति के साथ संबंध को लेकर शक था।

    इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ था। पुलिस के मुताबिक इसके बाद महिला को कथित तौर पर जहरीली Cold Drink दी गई।

    जांच में पुलिस इस बात को भी देख रही है कि महिला की मौत को Natural या Accidental Death जैसा दिखाने की कोशिश तो नहीं की गई थी।

    यही वजह है कि मामला सिर्फ एक suspicious death तक सीमित नहीं रहा।

    महिला Pregnant भी थी

    इस मामले को और गंभीर बनाने वाली जानकारी यह है कि महिला करीब 2 से 2.5 महीने की Pregnant बताई जा रही थी।

    यह जानकारी भी Medical और Post-mortem जांच के दौरान सामने आने की बात कही गई है।

    28 अगस्त को Murder Case दर्ज

    जांच आगे बढ़ने के बाद 28 अगस्त को BNS की Section 103(1) के तहत Murder Case दर्ज किए जाने की रिपोर्ट है।

    इसके बाद पुलिस ने Ashish Magar को गिरफ्तार कर लिया। कोर्ट ने आरोपी को पांच दिन की Police Custody में भेजा है।

    अब पुलिस इस पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में लगी है।

    अब पुलिस किन सवालों के जवाब तलाश रही है?

    जांच में कई अहम सवालों का जवाब मिलना बाकी है—

    • Cold Drink में कथित तौर पर कौन-सा पदार्थ मिलाया गया था?
    • वह पदार्थ आरोपी तक कैसे पहुंचा?
    • महिला ने Drink किस परिस्थिति में पी?
    • Medical और Forensic findings क्या कहती हैं?
    • घटना के समय कौन-कौन लोग मौजूद थे?
    • आरोपी के बयान और बाकी सबूतों में कितना मेल है?
    • क्या मौत को सामान्य दिखाने की कोशिश की गई थी?
    • महिला और आरोपी के बीच विवाद का असली कारण क्या था?

    इन सवालों के जवाब इस केस की आगे की दिशा तय करेंगे।

    आरोपी गिरफ्तार है, लेकिन दोषी साबित नहीं हुआ

    फिलहाल Ashish Magar पुलिस की गिरफ्त में है और मामले की जांच जारी है। Police Custody में उससे पूछताछ और उपलब्ध सबूतों की जांच की जा रही है।

    यह भी समझना जरूरी है कि गिरफ्तारी का मतलब अदालत में दोष साबित होना नहीं है। आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और उपलब्ध सबूतों के आधार पर होगी।

    चेंबूर केस में सबसे बड़ा सवाल अब यही

    एक महिला की अचानक मौत से शुरू हुई यह कहानी अब Murder Investigation तक पहुंच चुकी है। विवाद, अचानक बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में मौत और फिर Cold Drink से जुड़े Poisoning के शक ने इस मामले को पूरी तरह बदल दिया है।

    अब सबकी नजर इस बात पर है कि Police Custody और Forensic जांच के बाद इस केस में और कौन-सी कड़ियां सामने आती हैं और उस रात वास्तव में क्या हुआ था।

  • दहिसर में बाइक चोरी गैंग का पर्दाफाश: 4 गिरफ्तार, 8 बाइक बरामद; 24 बाइक के पार्ट्स मिले, एक रेडियम स्टिकर से खुला पूरा राज

    दहिसर में बाइक चोरी गैंग का पर्दाफाश: 4 गिरफ्तार, 8 बाइक बरामद; 24 बाइक के पार्ट्स मिले, एक रेडियम स्टिकर से खुला पूरा राज

    दहिसर पुलिस ने बाइक चोरी गैंग के 4 आरोपियों को पकड़ा। 8 चोरी की बाइक मिलीं, 24 बाइक के नंबर प्लेट-इंजन-पार्ट्स जब्त हुए। जानिए CCTV से कैसे खुला राज। अब क्या?

    मुंबई: दहिसर में बाइक चोरी के एक केस की जांच करते-करते पुलिस ऐसे नेटवर्क तक पहुंच गई, जहां सिर्फ एक चोरी की बाइक का सुराग नहीं मिला, बल्कि उत्तर मुंबई में दर्ज 8 मोटरसाइकिल चोरी के मामले भी खुल गए। दहिसर पुलिस ने इस कार्रवाई में 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। तलाशी के दौरान 8 चोरी की मोटरसाइकिलें मिलीं, जबकि 24 मोटरसाइकिलों से जुड़े नंबर प्लेट, चेसिस, इंजन और दूसरे पार्ट्स भी जब्त किए गए हैं।

    लेकिन इस पूरे केस में सबसे दिलचस्प बात यह है कि पुलिस को आरोपियों तक पहुंचाने वाला सुराग कोई बड़ा CCTV चेहरा या नंबर प्लेट नहीं था। एक खास रेडियम स्टिकर ने पूरी कहानी की दिशा बदल दी।

    एक बाइक चोरी हुई और CCTV में दिखा पूरा खेल

    मामला दहिसर ईस्ट के अशोकवन इलाके का है। शिकायतकर्ता ने अपनी Hero Honda Super Splendor मोटरसाइकिल नंबर MH 02 AZ 4549 को 20 अगस्त 2026 की सुबह करीब 10 बजे शिववल्लभ रोड पर पार्क किया था। 21 अगस्त की रात करीब 9 बजे के आसपास जब वह वापस आए तो बाइक वहां नहीं थी।

    शिकायत के बाद दहिसर पुलिस स्टेशन में गु.र.क्र. 1244/2026 के तहत BNS की धारा 303(2) में केस दर्ज किया गया। इसके बाद सहायक पुलिस निरीक्षक हेमंत गिते और उनकी क्राइम डिटेक्शन टीम ने आसपास के CCTV फुटेज खंगालने शुरू किए।

    फुटेज में तीन लोग एक बाइक पर सवार होकर चोरी की बाइक को धक्का मारते हुए ले जाते दिखाई दिए। यहीं से जांच में एक ऐसा clue मिला, जिसने पुलिस को आगे का रास्ता दिखाया।

    रेडियम स्टिकर बना गैंग तक पहुंचने का सबसे बड़ा सुराग

    CCTV में आरोपियों के साथ चल रही बाइक पर एक खास रेडियम स्टिकर दिखाई दिया। पुलिस ने इसी पहचान के आधार पर उस बाइक को ट्रेस करना शुरू किया।

    जांच आगे बढ़ी तो वही बाइक दहिसर ईस्ट के साईबाबा मंदिर रोड इलाके में मिली। इसके बाद पुलिस को आरोपियों के आनंद नगर परिसर में होने की जानकारी मिली और जांच धीरे-धीरे बाइक चोरी करने वाले लोगों तक पहुंच गई।

    यानी एक चोरी हुई बाइक से शुरू हुई जांच में CCTV, एक रेडियम स्टिकर और दूसरी बाइक की पहचान ने पूरा नेटवर्क खोलने में अहम भूमिका निभाई।

    सिर्फ बाइक चोरी नहीं, उसके बाद भी चलता था पूरा खेल

    पूछताछ में पुलिस के सामने कथित तौर पर एक और अहम pattern आया। आरोपी ऐसी मोटरसाइकिलों पर नजर रखते थे जो लंबे समय से एक ही जगह पार्क रहती थीं। मौका मिलने पर बाइक चोरी की जाती और बाद में उसे एक स्क्रैप डीलर को बेच दिया जाता था।

    पुलिस के मुताबिक, स्क्रैप डीलर चोरी की बाइक को खोलकर उसके अलग-अलग पार्ट्स करता और उन्हें भंगार में बेचता था। इसी कड़ी में पुलिस ने स्क्रैप गोदाम पर कार्रवाई की, जहां से 8 चोरी की मोटरसाइकिलों के साथ 24 मोटरसाइकिलों से जुड़े नंबर प्लेट, इंजन, चेसिस और दूसरे पार्ट्स जब्त किए गए।

    एक नजर में पूरी कार्रवाई

    पुलिस कार्रवाईसंख्या
    गिरफ्तार आरोपी4
    सामने आए मोटरसाइकिल चोरी के केस8
    बरामद चोरी की मोटरसाइकिलें8
    जिन मोटरसाइकिलों से जुड़े पार्ट्स मिले24
    संबंधित पुलिस स्टेशन4

    यहां एक बात साफ समझना जरूरी है: पुलिस ने 24 पूरी मोटरसाइकिलें बरामद नहीं की हैं। 8 चोरी की बाइक मिली हैं, जबकि 24 मोटरसाइकिलों से जुड़े नंबर प्लेट, चेसिस, इंजन और दूसरे पार्ट्स जब्त किए गए हैं।

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    दहिसर पुलिस की इनवेस्टिगेशन टीम के साथ गिरफ्तार आरोपियों की तस्वीर

    8 चोरी के मामले किन इलाकों से जुड़े?

    जांच में उत्तर मुंबई के अलग-अलग पुलिस स्टेशनों में दर्ज कुल 8 मोटरसाइकिल चोरी के मामले detect हुए हैं।

    पुलिस स्टेशनसामने आए केस
    दहिसर4
    MHB2
    कस्तूरबा1
    मालवणी1
    कुल8

    इससे साफ है कि जांच का दायरा सिर्फ उस एक बाइक चोरी तक सीमित नहीं रहा, जिससे केस की शुरुआत हुई थी।

    कौन-कौन गिरफ्तार हुआ?

    पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रोनीत भास्कर शेट्टी, उम्र 23 वर्ष, दहिसर पूर्व; पंकज मंगलप्रसाद गुप्ता, उम्र 20 वर्ष, केतकीपाड़ा, दहिसर पूर्व; आशुतोष संतोष दुबे, उम्र 20 वर्ष, धारखाड़ी रोड, दहिसर पूर्व; और पिंटू छोटेलाल गुप्ता, उम्र 29 वर्ष, केतकीपाड़ा, दहिसर पूर्व के रूप में हुई है। पिंटू छोटेलाल गुप्ता पर स्क्रैप गोदाम से जुड़ी भूमिका होने की बात सामने आई है।

    इसके अलावा 17 साल 8 महीने के एक नाबालिग बालक को भी इस मामले में पकड़ा गया था, जिसे बाद में उसके माता-पिता की देखरेख में सौंप दिया गया। उसकी पहचान सार्वजनिक नहीं की जा रही है।

    अब इस कार्रवाई का असर क्या होगा?

    इस कार्रवाई का सबसे बड़ा असर यह है कि एक ही जांच में उत्तर मुंबई के 8 बाइक चोरी के मामलों की कड़ी सामने आई है। साथ ही 24 मोटरसाइकिलों से जुड़े नंबर प्लेट, इंजन, चेसिस और दूसरे पार्ट्स मिलने से पुलिस के पास आगे की जांच के लिए अहम material आया है।

    Borivali में ‘भूत’ चला रहे थे ऑटो? RTO ने किया ज़ब्त

    पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि आरोपियों का इससे ज्यादा चोरी की गाड़ियों या दूसरे लोगों से कोई connection है या नहीं। यानी मामला 4 गिरफ्तारियों पर खत्म नहीं हुआ है और आगे कुछ और वारदातों का खुलासा होने की संभावना की जांच जारी है।

    अगर आपकी बाइक भी चोरी हुई है तो क्या करें?

    अगर आपकी मोटरसाइकिल पहले चोरी हुई है, खासकर दहिसर, MHB, कस्तूरबा या मालवणी इलाके से, तो अपने वाहन का registration number, chassis number और engine number संभालकर रखें। Mumbai Police की official “Stolen & Unclaimed Vehicles” सुविधा में registration, chassis और engine number से वाहन की जानकारी check करने का option उपलब्ध है।

    Mumbai Police – Stolen & Unclaimed Vehicles

    अगर आपकी बाइक इस केस से जुड़ी हो सकती है, तो खुद किसी बरामद वाहन या पार्ट को claim करने की कोशिश करने के बजाय संबंधित पुलिस स्टेशन से संपर्क करना ज्यादा सही रहेगा।

    बाइक मालिकों के लिए इस केस से क्या सीख?

    इस केस में पुलिस के सामने आया pattern यह है कि लंबे समय से एक ही जगह खड़ी रहने वाली बाइकें आरोपियों की नजर में थीं। इसलिए बाइक को संभव हो तो secure parking या अच्छी रोशनी वाली जगह पर पार्क करना, steering lock के साथ अतिरिक्त anti-theft lock इस्तेमाल करना और वाहन की पहचान से जुड़ी जानकारी सुरक्षित रखना जरूरी है।

    Mumbai Police भी secure parking, अच्छी रोशनी वाली जगह और steering/clutch/brake lock जैसे सुरक्षा उपायों की सलाह देती है। वाहन का नंबर कांच पर etch कराने जैसी पहचान संबंधी सावधानी भी पुलिस की safety guidance में शामिल है।

    कार्रवाई के पीछे पूरी पुलिस टीम

    यह कार्रवाई अपर पुलिस आयुक्त, उत्तर प्रादेशिक विभाग शशिकुमार मीना, पुलिस उपायुक्त उत्तर परिमंडल-03 गजानन राजमाने, सहायक पुलिस आयुक्त दहिसर विभाग जयराज रणवरे, वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक दहिसर पुलिस स्टेशन सर्जेराव पाटील और पुलिस निरीक्षक (गुन्हे) मारुती सांगळे के मार्गदर्शन में हुई।

    गुन्हे प्रकटीकरण अधिकारी सहायक पुलिस निरीक्षक हेमंत गिते के साथ पुलिस हवालदार अमोल जाधव, पुलिस हवालदार अमित पाटील, पुलिस हवालदार शाहनवाज सय्यद, पुलिस सिपाही सुशांत जाधव, कपिल चौधरी, महेंद्र महाले, ओमकार राणे और तकनीकी मदद देने वाले पुलिस हवलदार सागर पवार ने भी कार्रवाई में अहम भूमिका निभाई।

    फिलहाल दहिसर पुलिस की जांच जारी है। अब नजर इस बात पर है कि जब्त किए गए पार्ट्स और दूसरे सुरागों से क्या चोरी की और वारदातें या इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोग सामने आते हैं।

  • Navi Mumbai में 3,404 SIR फॉर्म मिलने से हड़कंप, 5 BLO सस्पेंड; BJP युवा नेता पर FIR

    Navi Mumbai में 3,404 SIR फॉर्म मिलने से हड़कंप, 5 BLO सस्पेंड; BJP युवा नेता पर FIR

    Navi Mumbai के Kharghar में 3,404 original SIR voter forms private photocopy shop से मिले। 5 BLO सस्पेंड और BJP youth leader पर FIR दर्ज हुई।

    मुंबई: Navi Mumbai के Kharghar में SIR यानी Special Intensive Revision को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। Sector 19 की एक private photocopy shop से 3,404 original भरे हुए SIR forms मिलने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया। जांच के बाद पांच Booth Level Officers (BLOs) को suspend कर दिया गया है, जबकि Suraj Patil के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।

    मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि बरामद forms blank नहीं थे। अधिकारियों के मुताबिक इनमें voters की photographs, personal details और BLOs के official signatures जैसी जानकारी थी। ये forms 188-Panvel Assembly Constituency के 11 polling stations से जुड़े थे। इनमें पांच polling stations से 100 से ज्यादा forms मिले, जबकि बाकी छह से एक-एक form मिलने की जानकारी है।

    Kharghar की photocopy shop में कैसे खुला मामला?

    27 अगस्त को SIR forms की photocopy किए जाने की शिकायत के बाद Election Department के अधिकारी Kharghar Sector 19 पहुंचे। वहां Suraj Patil के पास बड़ी संख्या में completed SIR forms मिले। अधिकारियों ने documents verify किए तो वे genuine और original पाए गए।

    बरामद forms को Election Commission के logo वाले bags में रखा गया था। इन्हें पांच bags में pack कर seal किया गया और police के हवाले किया गया। बड़ी संख्या में forms होने के कारण उनकी गिनती electoral-roll part numbers के हिसाब से record की गई।

    यहीं से इस मामले की जांच का सबसे अहम हिस्सा शुरू होता है—official custody में रहने वाले हजारों original voter forms private photocopy centre तक पहुंचे कैसे?

    पांच BLO सस्पेंड, जांच शुरू

    Raigad Collector Kishan Jawale के मुताबिक forms की verification के बाद पाया गया कि ये संबंधित BLOs की जिम्मेदारी में थे। इसी आधार पर पांच BLOs को suspend किया गया है और departmental inquiry शुरू की गई है।

    मिली जानकारी के मुताबिक suspended BLOs में Sulochana Mane, Prashant Mhatre और Rahul Bhagat नाम के तीन private-company data-entry operators भी शामिल हैं। इनके अलावा दो अन्य BLOs पर भी action हुआ है।

    navi-mumbai-kharghar-3404-sir
    खबर से संबंधित फाइल फोटो

    इस मामले की जांच के लिए Panvel Deputy Municipal Commissioner Nanasaheb Kamathe और Assistant Electoral Registration Officer वाली two-member committee भी बनाई गई है।

    Suraj Patil पर FIR, BJP ने किया किनारा

    Suraj Patil को Shiv Sena (UBT) नेताओं ने BJP youth wing/BJYM से जुड़ा office-bearer बताया है। उनके पास forms मिलने के बाद उनके खिलाफ FIR दर्ज की गई। BJP ने इस मामले में अपने workers के involvement से इनकार किया है।

    Police ने Patil को पूछताछ के लिए detain किया, notice दिया और legal procedure के तहत release किया। उनके खिलाफ BNS Section 314 और Representation of the People Act Section 128 के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले की जांच API Pradip Dwarka Navnath Avhad कर रहे हैं।

    UBT का आरोप, BJP का इनकार

    घटना के बाद Shiv Sena (UBT) ने SIR forms के private लोगों तक पहुंचने पर सवाल उठाए। UBT नेताओं ने आरोप लगाया कि BJP से जुड़े व्यक्ति के पास इतने forms मिलना गंभीर मामला है।

    वहीं BJP नेता Nitin Patil ने party workers का इस मामले से कोई संबंध नहीं होने की बात कही। NCP (SP) MLA Rohit Pawar ने भी सिर्फ BLO suspension को पर्याप्त नहीं बताते हुए पूरे मामले की जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर action की मांग की है।

    असली चिंता: voter के data का क्या होगा?

    SIR form में voter की पहचान और electoral-roll verification से जुड़ी जानकारी होती है। Kharghar में मिले forms original और completed थे, इसलिए उनकी private photocopying ने voter information की handling और security को लेकर चिंता बढ़ाई है।

    हालांकि अभी तक किसी voter के data के misuse होने की पुष्टि नहीं हुई है। जांच में यह पता चलना बाकी है कि कुल कितनी photocopies बनीं, क्या forms की digital copies भी तैयार हुईं और material private shop तक किसके जरिए पहुंचा।

    Maharashtra SIR के बीच सामने आया मामला

    Kharghar की घटना ऐसे समय सामने आई है जब Maharashtra में SIR की बड़ी exercise चल रही है। राज्य में करोड़ों voters के forms की verification और electoral-roll revision किया जा रहा है। इसी दौरान forms की custody और transparency को लेकर यह मामला अब चुनावी प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर रहा है।

    Maharashtra CEO की official website पर SIR 2026 से जुड़ी voter services, FAQs, ASDD list और BLO-related information उपलब्ध है। Voter अपना electoral record official ECI portal पर भी verify कर सकते हैं। (ceoelection.maharashtra.gov.in)

    Voters के लिए जरूरी बात

    अगर आपने SIR form भरा है तो अपना नाम और electoral details official voter services पर जरूर check करें। किसी अनजान व्यक्ति को SIR के नाम पर OTP, banking details या अन्य sensitive information न दें। SIR के नाम पर cyber-fraud को लेकर Mumbai में भी लोगों को target किए जाने की reports सामने आ चुकी हैं।

    फिलहाल Kharghar मामले में पांच BLO suspend हैं, एक व्यक्ति के खिलाफ FIR दर्ज है और departmental तथा police investigation जारी है। जांच अब यह साफ करेगी कि 3,404 original SIR forms private photocopy shop तक कैसे पहुंचे और उनकी photocopying के पीछे असल में क्या उद्देश्य था।

  • मुंबई में ₹17.67 लाख की Chemical ठगी का खुलासा, फर्जी कंपनी-SIM से खेल; राजस्थान से 2 आरोपी गिरफ्तार

    मुंबई में ₹17.67 लाख की Chemical ठगी का खुलासा, फर्जी कंपनी-SIM से खेल; राजस्थान से 2 आरोपी गिरफ्तार

    मुंबई में ₹17.67 लाख की केमिकल ठगी का खुलासा, MHB कॉलोनी पुलिस ने राजस्थान से दो आरोपियों को पकड़ा। फर्जी कंपनी, SIM, Aadhaar-PAN और नकली UTR से ठगी का प्लान।

    मुंबई: बोरीवली पश्चिम के MHB कॉलोनी पुलिस ने Chemical कारोबार से जुड़ी ₹17.67 लाख की ठगी के मामले में राजस्थान से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में फर्जी Aadhaar-PAN, SIM, कंपनी के कागजात और नकली Payment Screenshot/UTR के जरिए कारोबारियों को भरोसे में लेने का मामला सामने आया है। खास बात यह है कि आरोपी सिर्फ एक कंपनी के संपर्क में नहीं थे, बल्कि करीब 38 Chemical कंपनियों से इसी तरह संपर्क किए जाने की जानकारी पुलिस को मिली है।

    WhatsApp पर Chemical का ऑर्डर, फिर शुरू हुआ पूरा खेल

    मामला MHB कॉलोनी पुलिस स्टेशन में दर्ज शिकायत से सामने आया। शिकायतकर्ता निर्मित संजय अजमेरा, उम्र 32 वर्ष, Chemical कारोबार से जुड़े हैं। उनके मोबाइल नंबर पर WhatsApp के जरिए “प्रीमियर सॉल्व्हेंट्स” कंपनी के नाम से Chemical का ऑर्डर दिया गया।

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    बोरीवली एम एच बी कॉलोनी पुलिस टीम के साथ गिरफ्तार आरोपियों की तस्वीर

    शुरुआत में सब कुछ एक सामान्य कारोबारी डील जैसा दिखाई दिया, लेकिन आगे की जांच में पता चला कि ऑर्डर देने वाले लोगों ने अपनी असली पहचान छिपाकर पूरा फर्जी सेटअप तैयार किया था।

    Shyam Industries के नाम से बनाई फर्जी कंपनी

    आरोपियों ने “Shyam Industries” नाम से फर्जी कंपनी तैयार की। इसके लिए फर्जी Aadhaar Card और PAN Card का इस्तेमाल किया गया। इतना ही नहीं, कंपनी को असली दिखाने के लिए विजिटिंग कार्ड और लेटरहेड भी तैयार किए गए।

    इसके बाद Chemical कारोबारियों से संपर्क कर ऑर्डर देने और पेमेंट करने का भरोसा दिलाया गया।

    मामला तब संदिग्ध हुआ जब आरोपियों ने पेमेंट किए जाने का दावा करते हुए WhatsApp पर Payment Screenshot और UTR नंबर भेजा। स्क्रीनशॉट से ऐसा दिखाने की कोशिश की गई कि रकम ट्रांसफर हो चुकी है, जबकि वास्तव में ₹17,67,375 का भुगतान नहीं हुआ था।

    इसके बाद Chemical को Transporter के जरिए मंगाने की कोशिश की गई। पुलिस की जांच में यही पूरा तरीका ठगी के मुख्य पैटर्न के तौर पर सामने आया।

    पुलिस को 38 और Chemical कंपनियों से संपर्क का पता चला

    जांच आगे बढ़ी तो मामला एक कारोबारी तक सीमित नहीं रहा। पुलिस को जानकारी मिली कि आरोपियों ने इसी तरह करीब 38 अलग-अलग Chemical कंपनियों से संपर्क किया था और Chemical मंगाने के लिए बातचीत की थी।

    इससे पुलिस को शक हुआ कि फर्जी कंपनी और पहचान तैयार करने के पीछे एक बड़ा ठगी का प्लान था और दूसरे कारोबारियों को भी इसी तरीके से निशाना बनाया जा सकता था।

    Fake SIM से लेकर Fake Identity तक

    पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने आपस में मिलीभगत कर एक और फर्जी SIM हासिल की थी। इस दौरान सोनूकुमार प्रजापत के नाम का इस्तेमाल करते हुए फर्जी पहचान तैयार की गई।

    इसी पहचान के आधार पर Aadhaar और PAN तैयार किए गए और फिर Shyam Industries के नाम से कारोबार करने का दिखावा किया गया।

    यानी इस पूरे मामले में सिर्फ नकली पेमेंट स्क्रीनशॉट ही नहीं, बल्कि पहचान से लेकर कंपनी के दस्तावेज तक कई स्तर पर फर्जीवाड़ा किया गया।

    आरोपी बार-बार बदल रहा था Location

    मामला दर्ज होने के बाद MHB कॉलोनी पुलिस की Crime Detection टीम ने मोबाइल नंबर और दूसरी तकनीकी जानकारी के आधार पर आरोपियों की तलाश शुरू की।

    जांच के दौरान आरोपी लगातार अपनी Location बदल रहा था। पुलिस ने उसके इस्तेमाल किए जा रहे मोबाइल नंबरों की जानकारी निकाली और तकनीकी जांच के जरिए उसकी गतिविधियों को ट्रैक किया।

    जांच में आरोपी का संपर्क राजस्थान से सामने आया। इसके बाद पुलिस टीम राजस्थान पहुंची और स्थानीय पुलिस की मदद से आरोपी को ट्रेस किया।

    राजस्थान के Jodhpur से मुख्य आरोपी गिरफ्तार

    तकनीकी जांच के आधार पर मुख्य आरोपी ललितकुमार भगवानराम बिश्नोई, उम्र 36 वर्ष, को राजस्थान के Jodhpur क्षेत्र से पकड़ा गया। पूछताछ के दौरान उसके खिलाफ सामने आए आरोपों और मामले में उसकी भूमिका की जांच की गई।

    पुलिस के अनुसार पूछताछ में अपराध से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत गिरफ्तार किया गया।

    मामले में उसके साथी विकास बिश्नोई, उम्र 19 वर्ष, को भी सहभागी पाए जाने पर गिरफ्तार किया गया है।

    दोनों की भूमिका सामने आने के बाद केस में भारतीय न्याय संहिता की धारा 3(5) भी जोड़ी गई है।

    कौन-कौन सी धाराओं में मामला दर्ज है?

    MHB कॉलोनी पुलिस स्टेशन में CR No. 960/2026 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

    मामले में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 316(2), 336(2), 318(4), 340(2) और 3(5) के तहत कार्रवाई की गई है।

    पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि 38 अन्य Chemical कंपनियों से संपर्क करने के पीछे आरोपियों का मकसद क्या था और इस नेटवर्क से कितने कारोबारियों को नुकसान पहुंचा सकता था।

    वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में हुई कार्रवाई

    इस कार्रवाई में मुंबई पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का मार्गदर्शन रहा। पुलिस आयुक्त देवेन भारती, पुलिस सह आयुक्त मनोजकुमार शर्मा, अपर पुलिस आयुक्त डॉ. अभिनव देशमुख और पुलिस उपायुक्त संदीप घुगे के मार्गदर्शन में जांच आगे बढ़ाई गई।

    गोराई विभाग के सहायक पुलिस आयुक्त सुधाकर हूंबे की निगरानी में MHB कॉलोनी पुलिस की टीम ने कार्रवाई की।

    MHB कॉलोनी पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक विवेक सोनवणे और पुलिस निरीक्षक (गुन्हे) मिलिंद नागपुरे के मार्गदर्शन में सहायक पुलिस निरीक्षक तथा अपराध प्रकटीकरण अधिकारी श्रीकांत मगर और उनकी टीम ने तकनीकी जांच के जरिए आरोपियों तक पहुंच बनाई।

    कार्रवाई में पुलिस हवलदार संदीप पाटील, सतीश देवकर, अर्जुन आहेर, पुलिस नाईक सचिन मंजुळे और सिद्धेश पाटील भी शामिल रहे।

    अब 38 कंपनियों वाले कनेक्शन की जांच

    दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस के सामने अगला बड़ा सवाल यह है कि Shyam Industries नाम की फर्जी कंपनी बनाकर कितने कारोबारियों को इसी तरीके से संपर्क किया गया था और कितनी जगह Chemical मंगाने की कोशिश की गई।

    ₹17.67 लाख की शिकायत से शुरू हुई जांच में करीब 38 Chemical कंपनियों से संपर्क का खुलासा होने के बाद पुलिस इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।

    खबर का सार

    मामलाजानकारी
    पुलिस स्टेशनMHB कॉलोनी पुलिस स्टेशन, मुंबई
    शिकायतकर्तानिर्मित संजय अजमेरा, 32 वर्ष
    ठगी की रकम₹17,67,375
    मुख्य आरोपीललितकुमार भगवानराम बिश्नोई, 36 वर्ष
    दूसरा आरोपीविकास बिश्नोई, 19 वर्ष
    फर्जी कंपनीShyam Industries
    इस्तेमाल की गई पहचानफर्जी Aadhaar-PAN और SIM
    ठगी का तरीकाWhatsApp ऑर्डर, नकली Payment Screenshot/UTR
    अन्य कंपनियों से संपर्ककरीब 38 Chemical कंपनियां
    गिरफ्तारीराजस्थान, Jodhpur क्षेत्र
    केस नंबरCR No. 960/2026
    धाराएंBNS 316(2), 336(2), 318(4), 340(2), 3(5)