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मुंबई के कांदिवली में इमिटेशन ज्वेलरी कारखाने से 13 नाबालिग मुक्त कराए गए। पुलिस के मुताबिक बच्चे 9-10 घंटे काम करते और वहीं रहते थे। जांच जारी है।
मुंबई: कांदिवली पश्चिम में चारकोप पुलिस ने बाल श्रम के खिलाफ कार्रवाई करते हुए इमिटेशन ज्वेलरी बनाने वाले एक कारखाने से 13 नाबालिगों को मुक्त कराया है। बच्चों की उम्र 13 से 17 वर्ष के बीच बताई जा रही है। पुलिस के अनुसार, इन बच्चों से कथित तौर पर रोजाना 9 से 10 घंटे तक काम कराया जाता था और उन्हें उचित मजदूरी भी नहीं दी जाती थी।
कार्रवाई चारकोप इंडस्ट्रियल एरिया के ‘जहारा फैशन एरा’ नमक इमिटेशन ज्वेलरी कारखाने में की गई। पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, इस कार्रवाई से जुड़ी जानकारी उत्तर परिमंडल-2 के पुलिस उपायुक्त संदीप घुगे और चारकोप पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक महेश बळवंतराव की ओर से दी गई।
कारखाने में काम के साथ रह भी रहे थे बच्चे
पुलिस के मुताबिक, कारखाने में नाबालिगों से इमिटेशन ज्वेलरी और चूड़ियां बनाने का काम कराया जा रहा था। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि बच्चे जिस जगह काम करते थे, वहीं पर रह रहे थे।
मुक्त कराए गए सभी 13 बच्चे पश्चिम बंगाल के अलग-अलग जिलों के रहने वाले बताए जा रहे हैं। पुलिस के अनुसार, कारखाने के मालिक और संचालक बच्चों की उम्र साबित करने वाले जरूरी दस्तावेज भी पेश नहीं कर सके।
मालिक और संचालक हिरासत में
पुलिस ने कारखाने के मालिक अंकित कुमार महेंद्र रावल और संचालक समीनुर मोतियार रहमान शेख को हिरासत में लिया है। दोनों के खिलाफ बाल एवं किशोर श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम तथा किशोर न्याय अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि नाबालिगों को कारखाने में काम पर रखने की प्रक्रिया क्या थी और इसमें अन्य किसी व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।
पश्चिम बंगाल से मुंबई कौन लेकर आया?
मामले में पुलिस की जांच अब इस सवाल पर भी केंद्रित है कि पश्चिम बंगाल के अलग-अलग जिलों से ये बच्चे मुंबई के कांदिवली तक कैसे पहुंचे।
पुलिस यह पता कर रही है कि क्या बच्चों को काम दिलाने के नाम पर मुंबई लाया गया था, क्या किसी बिचौलिए की भूमिका थी और उन्हें कारखाने तक पहुंचाने में किसकी मदद ली गई।
जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या इस मामले के पीछे बाल श्रम से जुड़ा कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है। फिलहाल इस संबंध में जांच जारी है और पुलिस की ओर से कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
13 नाबालिगों को संबंधित विभाग को सौंपा गया
कार्रवाई के बाद सभी 13 नाबालिगों को आगे की देखभाल और जरूरी कार्रवाई के लिए संबंधित विभाग को सौंप दिया गया है।
अब बच्चों की उम्र, पहचान और परिवार से जुड़ी जानकारी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। उनके परिजनों से संपर्क और बच्चों को सुरक्षित तरीके से परिवार तक पहुंचाने को लेकर भी आगे की कार्रवाई की जाएगी।
बच्चों की पढ़ाई और भविष्य को लेकर भी संबंधित विभाग की ओर से आगे की प्रक्रिया की जाएगी।
बाल श्रम कानून में क्या प्रावधान है?
बाल श्रम कानून के तहत 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को काम पर रखना प्रतिबंधित है। वहीं 14 से 18 वर्ष की उम्र के किशोरों को खतरनाक काम या प्रक्रिया में लगाने पर रोक है।
मुंबई के विले पार्ले में 210 कथित फर्जी कर्मचारियों के नाम पर ₹4.15 करोड़ का लोन घोटाला सामने आया है। पूर्व CEO समेत 4 पर FIR दर्ज हुई।
मुंबई: विले पार्ले में बैंक से जुड़े एक बड़े लोन घोटाले का मामला सामने आया है। पुलिस ने मराठा बैंक के पूर्व CEO समेत चार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। आरोप है कि 210 कथित ‘भूतिया कर्मचारियों’ के नाम पर कुल ₹4.15 करोड़ से ज्यादा का लोन जारी कराया गया।
पुलिस के मुताबिक, लोन लेने के लिए जिन लोगों के नाम और दस्तावेज इस्तेमाल किए गए, उन्होंने बाद में इन कंपनियों में काम करने से इनकार किया। मामले में बैंक के तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
एफआईआर के मुताबिक, मुंबई पैरामेडिकल कंपनी के 126 कथित कर्मचारियों के नाम पर करीब ₹2.47 करोड़ के लोन जारी किए गए। वहीं पीपल पैरामेडिकल कंपनी के 84 कथित कर्मचारियों के नाम पर करीब ₹1.68 करोड़ का लोन दिया गया।
इस तरह कुल 210 लोगों के नाम पर 210 लोन खातों से ₹4,15,05,000 की रकम निकाले जाने का आरोप है।
लोन के लिए लगाए गए दस्तावेज भी कथित तौर पर फर्जी
पुलिस की जांच में सामने आया कि लोन के लिए इस्तेमाल किए गए कई दस्तावेज कथित तौर पर फर्जी थे।
इनमें:
आईडी कार्ड
Salary Slips
Salary Certificates
Rubber Stamps
शामिल हैं।
जिन लोगों के नाम पर लोन लिया गया, उन्होंने कथित तौर पर कंपनियों में काम करने से ही इनकार कर दिया।
Merger के बाद Cosmos Bank की शिकायत पर विले पार्ले पुलिस ने FIR दर्ज की।
अब पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। जांच में कथित फर्जी documents, 210 loan accounts, पैसों के transactions और इस पूरे मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका को भी देखा जा रहा है।
Andheri में टिकटलेस यात्री ने Western Railway के TC को धक्का देकर घायल कर दिया। आंख के ऊपर चोट लगी। यात्री को पकड़कर GRP के हवाले किया गया।
मुंबई: Andheri स्टेशन पर मंगलवार शाम ticket checking के दौरान हंगामा हो गया। Western Railway के Ticket Checker (TC) Prakash Dubey को एक ticketless passenger ने कथित तौर पर धक्का दे दिया। धक्का लगने से Dubey जमीन पर गिर गए और उनकी बाईं आंख के ऊपर चोट लग गई, जिससे bleeding शुरू हो गई।
घटना के तुरंत बाद passenger को पकड़ लिया गया और आगे की कार्रवाई के लिए Andheri GRP के हवाले कर दिया गया।
Borivali से शुरू हुआ था पूरा मामला
मिली जानकारी के मुताबिक, Dubey शाम करीब 6:40 बजे Borivali में Virar-Dadar local के second-class ordinary coach में ticket checking कर रहे थे। इसी दौरान एक passenger बिना ticket यात्रा करता मिला।
Dubey ने passenger से fine भरने को कहा। आरोप है कि passenger ने ticket arrange करने की बात कही। जब local Andheri स्टेशन पहुंची, तो Dubey ने उसे ट्रेन से उतरने को कहा।
आरोप है कि ट्रेन से नीचे उतरते ही passenger ने Dubey को धक्का दे दिया। अचानक हुए इस हमले में TC गिर पड़े और उनकी आंख के ऊपर चोट लग गई।
घायल होने के बावजूद passenger को पकड़ा
चोट लगने के बावजूद Dubey ने senior railway staffer Ganesh Rokde की मदद से passenger को पकड़ लिया। उसे पहले TC office ले जाया गया और बाद में Andheri GRP को सौंप दिया गया।
वहीं, Dubey को master office को जानकारी देने के बाद railway dispensary ले जाया गया, जहां उनकी चोट का treatment किया गया।
बिना टिकट यात्रा पर अब ₹500 minimum excess charge
इस घटना के बीच commuters के लिए यह जानना भी जरूरी है कि 2026 में railway के ticketless-travel rules में minimum excess charge ₹500 किया गया है। इसके अलावा applicable fare या fare difference भी देना पड़ सकता है।
यानी ticket को लेकर कोई dispute हो तो passenger को railway की तय प्रक्रिया का इस्तेमाल करना चाहिए। Ticket checking के दौरान physical confrontation करना अलग कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है।
Passenger को Andheri GRP के हवाले किए जाने के बाद अब मामले में FIR, आरोपी पर लगने वाली धाराएं और आगे की legal action महत्वपूर्ण होगी।
Western Railway ने ticket checking के दौरान होने वाले disputes को record करने के लिए body-camera pilot भी शुरू किया है। इसका उद्देश्य passenger और railway staff के बीच विवाद की स्थिति में recorded evidence उपलब्ध कराना है।
मुंबई से रेप के आरोपी सब-इंस्पेक्टर अजमल हक गिरफ्तार। सॉल्ट लेक गेस्ट हाउस केस में बिधाननगर पुलिस ने ट्रांजिट रिमांड पर कोलकाता लाया।
मुंबई: पश्चिम बंगाल के सॉल्ट लेक में महिला से रेप के आरोप में फरार चल रहे सब-इंस्पेक्टर अजमल हक को बिधाननगर ईस्ट पुलिस ने मुंबई से गिरफ्तार किया है। आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर कोलकाता ले जाया गया है और अब उसे बिधाननगर कोर्ट में पेश किया जाएगा।
पश्चिम बंगाल के सॉल्ट लेक इलाके में एक महिला से रेप के आरोप में फरार चल रहे पुलिस अधिकारी को बिधाननगर ईस्ट पुलिस ने मुंबई से गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान अजमल हक के रूप में हुई है, जो बीरभूम जिले के नलहाटी थाने में सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात था।
पुलिस ने आरोपी को मुंबई से गिरफ्तार करने के बाद स्थानीय अदालत में पेश किया। वहां से ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद उसे कोलकाता ले गई है। अब आरोपी सब-इंस्पेक्टर को बिधाननगर कोर्ट में पेश किया जाएगा, जहां पुलिस उसकी कस्टडी की मांग कर सकती है।
सॉल्ट लेक के गेस्ट हाउस में रेप का आरोप
पुलिस के मुताबिक, मामला पिछले साल का बताया जा रहा है। महिला ने जुलाई में बिधाननगर ईस्ट थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि सब-इंस्पेक्टर अजमल हक महिला को सॉल्ट लेक के सीएल ब्लॉक स्थित एक गेस्ट हाउस में लेकर गया था, जहां उसके साथ रेप किया गया।
शिकायत मिलने के बाद बिधाननगर ईस्ट पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और आरोपी पुलिस अधिकारी की तलाश की।
जमानत मिलने के बाद हो गया था फरार
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में आरोपी सब-इंस्पेक्टर को पहले जमानत मिल गई थी। इसके बाद जब बिधाननगर ईस्ट पुलिस ने बीरभूम जिला पुलिस से आरोपी अधिकारी के संबंध में संपर्क किया, तो उसके गायब होने की जानकारी सामने आई।
इसके बाद पुलिस ने आरोपी की तलाश तेज कर दी।
जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि आरोपी मुंबई में मौजूद है। सूचना के आधार पर बिधाननगर ईस्ट पुलिस की टीम ने कार्रवाई की और उसे मुंबई से गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की परिस्थितियां क्या थीं और मामले से जुड़े कौन-कौन से सबूत उपलब्ध हैं। जांच के दौरान पुलिस आरोपी से पूछताछ के साथ-साथ मामले से जुड़े अन्य लोगों और उपलब्ध साक्ष्यों की भी जांच करेगी।
फिलहाल आरोपी पर लगाए गए रेप के आरोप जांच का विषय हैं। मामले में अंतिम निष्कर्ष अदालत में पेश किए जाने वाले सबूतों और आगे की न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही सामने आएगा।
मुंबई लोकल में महिलाओं की Gold Chain और Mangalsutra चोरी करने वाली पुणे की 65 वर्षीय अनघा जोशी गिरफ्तार, CCTV से खुला राज।
मुंबई: Local Train में महिलाओं के गले से Gold Chain और Mangalsutra चोरी करने वाली एक 65 साल की महिला को Railway Police ने गिरफ्तार किया है। आरोपी महिला का नाम अनघा जोशी है और वह पुणे की रहने वाली है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि अनघा जोशी चोरी करने के लिए पुणे से मुंबई आती थी और खास बात ये है कि वह हर दिन चोरी नहीं करती थी। उसका अपना एक अलग ‘Lucky Day’ था—शनिवार।
बताया जा रहा है कि वह महीने के पहले और तीसरे शनिवार को ही मुंबई आती और Local Train में महिलाओं को अपना Target बनाती थी।
पुलिस जांच के मुताबिक अनघा जोशी का मानना था कि शनिवार उसके लिए Lucky है। इसी वजह से वह महीने के पहले और तीसरे शनिवार को पुणे से मुंबई आती थी।
मुंबई पहुंचने के बाद वह Railway Station और Local Train की भीड़ में महिलाओं पर नजर रखती थी। खासकर ऐसी महिलाएं उसके निशाने पर होती थीं, जिनके गले में Gold Chain या Mangalsutra होता था।
भीड़ में धक्का-मुक्की के दौरान वह मौका देखकर Jewellery निकाल लेती और फिर पुणे वापस चली जाती थी।
दो चोरी की घटनाओं ने खोला पूरा राज
इस मामले में पुलिस को सबसे बड़ा सुराग दो अलग-अलग चोरी की घटनाओं के बाद मिला।
2 मई को दादर Railway Station पर Borivali Local पकड़ते समय एक 44 वर्षीय महिला Banker के गले से करीब 67 हजार रुपये की Gold Chain और Pendant चोरी हो गई।
इसके करीब एक महीने बाद 6 जून को दादर में ही Borivali Local में चढ़ते समय एक महिला Finance Executive के गले से करीब 89 हजार रुपये का Mangalsutra और Gold Chain चोरी हो गई।
दोनों मामलों में शिकायत मिलने के बाद Railway Police ने जांच शुरू की।
गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में अनघा जोशी ने कथित तौर पर बताया कि वह करीब 20 साल पहले भी कुछ समय तक Chain Snatching में शामिल रही थी।
पुलिस के मुताबिक मुंबई से चोरी किए गए Gold Jewellery को वह पुणे ले जाती थी और वहां कुछ ज्वैलर्स को बेच देती थी।
Police ने पुणे के कुछ ज्वैलर्स की दुकानों से चोरी के Jewellery भी बरामद किए हैं। अब जांच इस बात की भी की जा रही है कि अनघा ने पहले कितनी चोरी की वारदातों को अंजाम दिया था और इस पूरे काम में उसके साथ कोई और भी शामिल था या नहीं।
पुलिस जांच में अनघा जोशी की Family Background को लेकर भी जानकारी सामने आई है।
बताया गया है कि उनके बेटे की एक Accident में मौत हो गई थी, जबकि उनके पति की Alcohol Addiction के चलते मौत हुई थी। इसके बाद घर चलाने और रोजमर्रा के खर्च को लेकर आर्थिक परेशानियां बढ़ गईं।
पुलिस के अनुसार, इन्हीं परिस्थितियों के बाद उन्होंने कथित तौर पर चोरी का रास्ता अपनाया।
हालांकि आर्थिक परेशानी अपनी जगह है, लेकिन महिलाओं की Jewellery चोरी करने के आरोप में Railway Police ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है।
अब पुलिस को और कितनी वारदातों का पता चलेगा?
अनघा जोशी फिलहाल Judicial Custody में हैं। पुलिस अब उनके पुराने Record और Mumbai में हुई दूसरी Jewellery Theft की घटनाओं को भी खंगाल रही है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ‘पहले और तीसरे शनिवार’ वाला उनका Lucky Day वाला Pattern सिर्फ इन घटनाओं तक सीमित था या उन्होंने लंबे समय से इसी तरीके से Mumbai की Local Trains में कई महिलाओं को Target किया था?
Police Investigation पूरी होने के बाद इस मामले में और भी खुलासे होने की उम्मीद है।
Bangladesh deport हुई 27 साल की महिला एक महीने में फिर Mumbai पहुंची। Gamdevi Police ने गिरफ्तार किया, अब re-entry route और contacts की जांच जारी है।
मुंबई: भारत बांग्लादेश बॉर्डर सुरक्षा को लेकर मुंबई में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जिस 27 साल की बांग्लादेशी महिला को पिछले महीने ही भारत से Bangladesh deport किया गया था, वह कथित तौर पर एक बार फिर मुंबई पहुंच गई। 15 अगस्त की सुबह Gamdevi Police ने उसे Wilson College के सामने Chowpatty से सटे फुटपाथ इलाके से गिरफ्तार किया।
अब इस पूरे मामले में पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल है—Bangladesh भेजे जाने के बाद महिला सिर्फ कुछ ही समय में दोबारा India में कैसे दाखिल हुई और Mumbai तक कैसे पहुंची?
महिला की पहचान नदीरा सुल्ताना के तौर पर हुई है। Police के मुताबिक उसके पास India में रहने के लिए जरूरी valid documents नहीं थे और जांच में उसका previous deportation record भी सामने आया।
पुलिस के मुताबिक 15 अगस्त की सुबह करीब 8:15 बजे Gamdevi Police को सूचना मिली कि एक संदिग्ध बांग्लादेशी महिला N.S. Patkar Road पर Wilson College के सामने, Chowpatty से लगे फुटपाथ इलाके में घूम रही है।
सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची। मुखबिर द्वारा बताए गए हुलिए के आधार पर एक महिला को वहां पाया गया।
पुलिस ने उससे उसकी पहचान और पते के बारे में पूछताछ की। हालांकि उसके जवाब स्पष्ट नहीं थे। इसके बाद पुलिस उसे आगे की पूछताछ के लिए Gamdevi Police Station ले गई।
पहले बताया Navi Mumbai का पता, फिर सामने आई Bangladesh की पहचान
Police Station में महिला से उसका नाम, पता और India में रहने से जुड़े documents मांगे गए।
पूछताछ में उसने शुरुआत में Koparkhairane, Navi Mumbai का address बताया। लेकिन जब पुलिस ने उससे India में रहने या भारतीय नागरिकता से जुड़े valid documents मांगे तो वह उन्हें पेश नहीं कर सकी।
जांच आगे बढ़ने पर महिला ने कथित तौर पर खुद को Bangladeshi national बताया। उसकी पहचान नदीरा सुल्ताना के रूप में हुई और Bangladesh में उसका address Gopalganj बताया गया।
इसके बाद Police ने उसके पुराने records check किए।
यहीं से इस मामले ने नया मोड़ ले लिया।
खुलासा: महिला को जुलाई में ही Bangladesh भेजा गया था
Police investigation में सामने आया कि नदीरा सुल्ताना को जुलाई 2026 में ही India से Bangladesh deport किया गया था।
उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक उसके previous deportation order की तारीख 22 जुलाई 2026 बताई गई है और इस मामले में पहले Govandi Police की कार्रवाई का रिकॉर्ड सामने आया है।
यानी जिस महिला को कुछ समय पहले ही India से बाहर भेजा गया था, वह अब फिर Mumbai में मिल गई।
महिला ने पूछताछ के दौरान Koparkhairane, Navi Mumbai का address बताया था।
अब Police के लिए यह जानना भी important होगा कि यह address उसने क्यों बताया और क्या उसका वहां कोई पुराना connection है।
क्या वह पहले वहां रह चुकी थी?
क्या वहां उसका कोई contact या परिचित है?
क्या किसी ने उसे Mumbai में रहने की जगह उपलब्ध कराई?
इन सवालों के जवाब मिलने पर Police को यह समझने में मदद मिल सकती है कि Bangladesh से कथित re-entry के बाद वह Mumbai तक किस network या contact के जरिए पहुंची।
Mumbai में पहले भी सामने आए हैं ऐसे Repeat-Entry Cases
नदीरा सुल्ताना का मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2026 में Mumbai में पहले भी ऐसे cases सामने आए हैं, जिनमें पहले deport किए गए Bangladeshi nationals के कथित तौर पर दोबारा India आने की बात सामने आई।
कुछ मामलों में Police को jungle/forest route से दोबारा entry की जानकारी मिली, जबकि एक अन्य मामले में Nepal-Guwahati route की बात सामने आई थी।
जुलाई 2026 में Borivali में पकड़े गए एक Bangladeshi national के मामले में Police ने alleged human traffickers की भूमिका की भी जांच की थी।
इससे यह जरूर सामने आता है कि deportation के बाद alleged re-entry Mumbai Police के लिए एक recurring investigation angle बन चुका है।
Maharashtra में 2025 में 2,376 Deportation
महाराष्ट्र में illegal immigration को लेकर पिछले कुछ समय से Police और security agencies की कार्रवाई तेज रही है।
सरकार की ओर से उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 2025 में Maharashtra से 2,376 alleged illegal Bangladeshi nationals को deport किया गया था। Mumbai से भी बड़ी संख्या में deportation की कार्रवाई हुई थी।
लेकिन यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है।
Deportation की संख्या और repeat-entry cases की संख्या अलग-अलग होती है।
इसलिए 2,376 deportations को सीधे repeat-entry का आंकड़ा नहीं माना जा सकता।
नदीरा का मामला इसी वजह से एक अलग सवाल खड़ा करता है—deport किए गए व्यक्ति के दोबारा India में आने की कोशिश को border और immigration system कितनी जल्दी detect कर पाता है?
India में foreigners और immigration से जुड़े मामलों के लिए Immigration and Foreigners Act, 2025 लागू है।
Valid passport या required travel document के बिना India में entry करने से जुड़े मामलों में इस कानून के तहत कार्रवाई का provision है। Forged या fraudulently obtained passport, travel document या visa का इस्तेमाल सामने आने पर अलग provisions लागू हो सकते हैं।
अब Police के सामने सबसे बड़ा सवाल ?
इस पूरे मामले में गिरफ्तारी से ज्यादा important अब Re-Entry का पूरा route है।
Police को यह पता लगाना है कि:
Bangladesh deport होने के बाद नदीरा सुल्ताना India कब वापस आई, किस border से आई, forest route कौन-सा था, India में आने के बाद Mumbai तक कैसे पहुंची और क्या किसी व्यक्ति ने उसकी मदद की।
इसके साथ उसके previous deportation record, mobile contacts, travel details और Mumbai में रहने की व्यवस्था की भी जांच महत्वपूर्ण होगी।
मुंबई के दहिसर पश्चिम में घर के अंदर हाइड्रोपोनिक गांजा उगाने का खुलासा। MHB पुलिस ने बब्बू कामत को गिरफ्तार किया, 2 आरोपी फरार बताए जा रहे हैं।
मुंबई: मुंबई में गांजे की खेती का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस के साथ-साथ आसपास के लोगों को भी हैरान कर दिया है। दहिसर पश्चिम के गणपत पाटील नगर, गली नंबर 4 यानी (आएसी कॉलोनी) के एक घर में कथित तौर पर हाइड्रोपोनिक तरीके से गांजा उगाया जा रहा था। MHB पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जबकि सूत्रों के मुताबिक दो अन्य आरोपी फरार बताए जा रहे हैं।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान बब्बू सोनू कामत के रूप में हुई है। वहीं, सूत्रों के मुताबिक राहुल और अभिषेक कन्नौजिया इस मामले में फरार बताए जा रहे हैं। दोनों की भूमिका और इस पूरे मामले में उनकी exact involvement की पुष्टि पुलिस की जांच के बाद ही होगी।
इस कार्रवाई की सबसे खास बात यह है कि पुलिस को सिर्फ तैयार गांजा नहीं मिला, बल्कि घर के अंदर पौधे उगाने के लिए इस्तेमाल होने वाला पूरा setup भी बरामद हुआ है।
दहिसर के घर में चल रहा था कथित गांजा cultivation setup
मिली जानकारी के मुताबिक MHB पुलिस ने गणपत पाटील नगर, गली नंबर 4, दहिसर पश्चिम स्थित एक घर में कार्रवाई की।
पुलिस से उपलब्ध विवरण के मुताबिक यहां हाइड्रोपोनिक पद्धति से गांजा उगाने का कथित setup तैयार किया गया था। मौके से सूखा गांजा, जीवित पौधे और cultivation में इस्तेमाल होने वाले कई तरह के equipment और chemicals बरामद किए गए।
बरामद पौधे और सूखे गंजे कि तस्वीर
यानी मामला सिर्फ गांजा रखने तक सीमित था या इसके पीछे बाकायदा local production और supply का network काम कर रहा था, अब पुलिस की जांच का बड़ा focus यही है।
54 ग्राम गांजा और 179 ग्राम जीवित पौधे बरामद
एनएचबी पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक विवेक सोनावणे ने बताया कि कार्रवाई में करीब 54 ग्राम सूखा गांजा बरामद किया गया। इसकी अनुमानित कीमत करीब ₹1.62 लाख आंकी गई है।
इसके अलावा करीब 179 ग्राम जीवित गांजे के पौधे भी मिले हैं। इनकी अनुमानित कीमत करीब ₹2.68 लाख आंकी जा रही है।
यानी सूखे गांजे और जीवित पौधों की कुल अनुमानित कीमत करीब ₹4.30 लाख बताई गई है।
लेकिन पुलिस के लिए इससे भी ज्यादा important बरामदगी उस cultivation setup की है, जिसे कथित तौर पर इन पौधों को grow करने के लिए तैयार किया गया था।
घर में मिला AC, LED, Pump से लेकर pH Meter तक
पुलिस के मुताबिक मौके से cultivation के लिए इस्तेमाल होने वाले कई equipment और chemicals बरामद किए गए हैं।
इनमें पानी की टंकी, water pump, air filter, LED lights, AC, fans, pH meter, TDS meter, temperature meter, air circulation से जुड़े सामान, grow tent और अलग-अलग chemicals शामिल बताए गए हैं।
इन equipment और chemicals की पुलिस द्वारा बताई गई अनुमानित कीमत करीब ₹1.76 लाख है।
इस तरह मुंबई पुलिस के मुताबिक गांजा, पौधे और cultivation equipment व chemicals सहित पूरी जब्ती की अनुमानित कीमत करीब ₹6.07 लाख है।
यह valuation पुलिस द्वारा बताई गई estimated value है।
आखिर घर में गांजा उगाने की जरूरत क्यों पड़ी?
यही इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल है।
अगर पुलिस की शुरुआती जांच में यह साबित होता है कि बरामद equipment का इस्तेमाल cannabis cultivation के लिए किया जा रहा था, तो investigation सिर्फ बब्बू कामत की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगी।
गिरफ्तार आरोपी के साथ एनएचबी पुलिस की टीम
पुलिस को यह पता लगाना होगा कि बीज या पौधे कहां से आए, equipment किसने खरीदा, यह setup कब से चल रहा था और तैयार गांजा किसे supply किया जाना था।
इसके अलावा आरोपी के mobile phone, WhatsApp या दूसरे communication channels और financial transactions की जांच से भी आगे की कड़ी मिल सकती है।
सूत्रों के मुताबिक इस मामले में राहुल और अभिषेक कन्नौजिया नाम के दो अन्य लोग फरार बताए जा रहे हैं।
हालांकि इन दोनों के खिलाफ आरोपों और उनकी exact भूमिका को अभी पुलिस की जांच के आधार पर ही समझना होगा। इसलिए फिलहाल उन्हें “फरार बताए जा रहे आरोपी” के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
अगर पुलिस की जांच में दोनों की भूमिका की पुष्टि होती है, तो यह पता लगाना अहम होगा कि cultivation setup तैयार करने, पौधे लाने, गांजा बेचने या customers तक पहुंचाने में उनकी क्या भूमिका थी।
पुलिस टीम की निगरानी में हुई कार्रवाई
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक इस कार्रवाई को वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में अंजाम दिया गया।
इसमें पुलिस उपायुक्त संदीप पुंजे, गोरेगांव विभाग के ACP सुधाकर शिंदे, वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक विवेक सोनावणे, पुलिस निरीक्षक मिलिंद नागपुरे और पुलिस निरीक्षक दिलीप इंगळे के मार्गदर्शन का उल्लेख है।
जांच टीम में पुलिस उपनिरीक्षक संदीप वत्रे समेत पुलिसकर्मियों के नाम भी कार्रवाई से जुड़े बताए गए हैं।
मामले की जांच फिलहाल MHB पुलिस कर रही है।
मुंबई में Hydroponic Weed का बढ़ता नेटवर्क?
दहिसर का यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब मुंबई में hydroponic weed से जुड़े बड़े smuggling cases भी सामने आते रहे हैं।
मार्च 2026 में Mumbai Customs के Air Intelligence Unit ने Bangkok से आने वाले चार passengers के खिलाफ कार्रवाई करते हुए करीब 64.394 kg suspected hydroponic weed जब्त किया था। इसकी estimated illicit market value करीब ₹64.394 करोड़ बताई गई थी। खबर के मुताबिक उस समय तक वित्त वर्ष 2025-26 में CSMIA Airport Commissionerate ने 244 मामलों में 1,330 kg से ज्यादा hydroponic weed जब्त की थी और 286 लोगों को गिरफ्तार किया था।
जून 2026 में भी Mumbai Airport पर Bangkok से आए passenger से करीब 11.824 kg hydroponic weed बरामद होने का मामला सामने आया था। Customs के मुताबिक इसकी estimated illicit market value करीब ₹11.82 करोड़ थी।
इससे साफ है कि मुंबई में hydroponic cannabis को लेकर enforcement agencies पहले से alert हैं।
यह सवाल इस कार्रवाई के बाद काफी लोगों के मन में आएगा।
NDPS Act के तहत cannabis plant की cultivation प्रतिबंधित है। इसलिए सिर्फ यह कहने से कि पौधे घर के अंदर, गमले में या किसी controlled setup में उगाए जा रहे थे, activity legal नहीं हो जाती।
हालांकि किसी specific case में कौन-सी धाराएं लागू होंगी और prosecution को क्या साबित करना होगा, यह FIR, seizure, forensic evidence और investigation पर depend करता है।
इसलिए दहिसर मामले में भी आगे की legal position MHB पुलिस की FIR और court proceedings से ज्यादा साफ होगी।
मामला सिर्फ गांजे की खेती का है या पीछे कोई बड़ा network?
अगर घर में सिर्फ कुछ पौधे मिलते तो मामला अलग होता। लेकिन यहां पुलिस के मुताबिक जीवित पौधे, सूखा गांजा और cultivation के लिए इस्तेमाल होने वाला equipment व chemicals भी मिले हैं।
अब पुलिस के सामने तीन बड़ी कड़ियां हैं—
पौधे कहां से आए?
गांजा किसे जाना था?
पैसा किसके जरिए आ रहा था और किस तक पहुंच रहा था?
अगर इन सवालों के जवाब में कोई supplier या buyer सामने आता है, तो दहिसर की यह कार्रवाई एक बड़े drug network की तरफ भी इशारा कर सकती है।
हालांकि अभी ऐसा कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
Drug cultivation और supply का असर सिर्फ आरोपी तक सीमित नहीं रहता।
सबसे बड़ा concern यह है कि drug networks में युवाओं को छोटे-level sellers, couriers या carriers के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। Mumbai Airport के पुराने और हालिया मामलों में भी agencies ने international routes और larger syndicates की जांच की है। मार्च 2026 की एक बड़ी कार्रवाई में Customs ने कहा था कि गिरफ्तार किए गए passengers को Bangkok से cannabis लेकर Mumbai में associates तक पहुंचाना था।
ऐसे में दहिसर जैसे residential area में कथित cultivation setup मिलना local community के लिए भी चिंता की बात है।
अब पुलिस को यह पता लगाना होगा कि यह isolated operation था या इसके पीछे customers, suppliers और distributors की कोई chain भी थी।
बब्बू कामत की गिरफ्तारी के बाद investigation का अगला step सिर्फ पूछताछ तक सीमित नहीं होगा।
पुलिस को कथित तौर पर बीज और पौधों का source, cultivation equipment की खरीद, mobile communication, financial transactions, potential buyers और suppliers तक पहुंचने की कोशिश करनी होगी।
साथ ही सूत्रों के मुताबिक फरार बताए जा रहे राहुल और अभिषेक कन्नौजिया की भूमिका और whereabouts की भी जांच महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक बब्बू सोनू कामत गिरफ्तार है, राहुल और अभिषेक कन्नौजिया फरार बताए जा रहे हैं और MHB पुलिस मामले की जांच कर रही है।
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक कार्रवाई में 54 ग्राम सूखा गांजा, करीब 179 ग्राम जीवित पौधे और cultivation equipment व chemicals समेत करीब ₹6.07 लाख का माल जब्त किया गया है।
Mumbai के कांदिवली में Amul-Gokul के नाम पर दूध में मिलावट का मामला सामने आया है। पुलिस ने 74 लीटर मिलावटी दूध और पाउच जब्त कर 48 साल के आरोपी को गिरफ्तार किया। जानिए पूरा मामला और इसका Mumbai connection.
Mumbai Breaking News: अगर आप रोज सुबह packet वाला दूध खरीदते हैं और सिर्फ brand देखकर उसे safe मान लेते हैं, तो Kandivali से सामने आई यह खबर आपके लिए important है।
मुंबई के Kandivali East में Samta Nagar Police ने दूध में कथित मिलावट करने के आरोप में एक 48 साल के आरोपी को गिरफ्तार किया है। Police के मुताबिक आरोपी branded milk में impure water मिलाकर उसे आगे बेचने की तैयारी कर रहा था। Raid के दौरान करीब 74 litres adulterated milk, Amul और Gokul के नाम वाले empty milk pouches और मिलावट में इस्तेमाल होने वाली सामग्री बरामद की गई।
Police के मुताबिक आरोपी को मौके पर ही पकड़ा गया। मामला इसलिए ज्यादा serious है क्योंकि यहां सिर्फ दूध में पानी मिलाने की बात नहीं है। Amul और Gokul के नाम वाले pouches मिलने से अब यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या branded packaging का इस्तेमाल करके मिलावटी दूध customers तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही थी?
हालांकि, अभी यह कहना सही नहीं होगा कि Amul या Gokul की official supply chain का दूध मिलावटी पाया गया है। उपलब्ध reports के मुताबिक आरोपी के पास इन brands के नाम वाले pouches मिले हैं। यह जांच का विषय है कि ये pouches genuine थे या fake।
Kandivali में raid के दौरान क्या मिला?
Police के मुताबिक Samta Nagar Police की Detection Squad को information मिली थी कि Kandivali East में एक जगह पर branded milk में मिलावट की जा रही है।
इसके बाद 12 August 2026 की सुबह करीब 5:50 बजे police team ने raid की। Police का दावा है कि आरोपी को milk में impure water मिलाते हुए पकड़ा गया।
Raid में करीब 74 litres adulterated milk मिला। इसके अलावा Amul और Gokul के नाम वाले empty pouches और कथित तौर पर milk में मिलावट करने के लिए इस्तेमाल होने वाला material भी जब्त किया गया।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक milk को 1-litre और 500-ml packets में तैयार किया जा रहा था और आरोपी की पहचान Iranna Lingayya Gopanabonei, 48 के तौर पर हुई है।
74 लीटर दूध पकड़ा गया, लेकिन असली सवाल इससे बड़ा है
Police ने raid के दौरान 74 litres milk जब्त किया है। लेकिन यह सिर्फ वही quantity है जो कार्रवाई के समय मिली।
अब सबसे important सवाल यह है कि:
क्या इससे पहले भी इसी तरह का milk market में भेजा गया था?
अगर हां, तो कितना?
Police investigation में अब यह पता लगाना important होगा कि आरोपी यह काम कितने time से कर रहा था, रोज कितनी quantity तैयार करता था और यह milk किन लोगों या दुकानों तक पहुंचने वाला था।
यह भी पता लगाना होगा कि क्या आरोपी अकेले काम कर रहा था या उसके साथ कोई supplier, distributor या retailer भी जुड़ा हुआ था।
Amul-Gokul का नाम क्यों आया और इसका क्या मतलब है?
यह बात consumers के लिए समझना बहुत जरूरी है।
“Amul या Gokul का original milk adulterated था” और “किसी ने Amul-Gokul के नाम वाले pouches का इस्तेमाल करके adulterated milk तैयार किया”—ये दोनों अलग बातें हैं।
Available reports में आरोपी के पास Amul और Gokul के नाम वाले pouches मिलने की बात है।
इसलिए investigation का एक बड़ा हिस्सा यह होना चाहिए कि ये pouches original supply chain के थे या counterfeit।
जब तक इसकी official confirmation नहीं होती, तब तक consumers को यह मान लेना सही नहीं होगा कि Amul या Gokul का पूरा branded milk unsafe है।
Mumbai में पहले भी सामने आ चुका है Fake Milk का मामला
Kandivali की यह घटना Mumbai में सामने आए recent milk-related cases से अलग नहीं देखी जा सकती।
कुछ समय पहले Mumbai Crime Branch ने Dahisar और Vasai area में एक alleged milk-adulteration network पर action लिया था।
उस case में police ने counterfeit Amul और Gokul milk pouches तैयार करने वाली alleged unit तक पहुंचने की बात कही थी। चार लोगों की गिरफ्तारी की report भी सामने आई थी। इसलिए Mumbai में अब सवाल सिर्फ milk की quality का नहीं है।
Fake packaging और branded names के misuse का angle भी सामने आ रहा है।
लेकिन Kandivali के आरोपी को उस पुराने case से जोड़ना अभी सही नहीं होगा। दोनों cases के बीच कोई direct link police investigation से confirm होना बाकी है।
Maharashtra में Synthetic Milk पर भी बड़ी कार्रवाई
Kandivali का मामला ऐसे time पर सामने आया है जब Maharashtra में synthetic milk और food adulteration को लेकर authorities पहले से action mode में हैं।
July में Maharashtra FDA ने Thane, Ahilyanagar, Solapur, Jalna और Pune में simultaneous raids की थीं। इन raids में alleged synthetic milk network के खिलाफ action लिया गया और कई लोगों की गिरफ्तारी की गई। Officials ने supply chain के अलग-अलग हिस्सों की जांच की बात कही थी।
Maharashtra में food-safety authorities अब सिर्फ manufacturing point तक सीमित रहने के बजाय milk collection से लेकर transport, distribution और retail तक पूरी chain पर ज्यादा focus करने की कोशिश कर रही हैं।
यही वजह है कि Kandivali case में भी supply chain की जांच आगे की सबसे important कड़ी हो सकती है।
Dharashiv से Mathura तक, Milk Adulteration का बड़ा सवाल
Maharashtra के Dharashiv district में भी synthetic milk को लेकर बड़ा मामला सामने आ चुका है। Reports में officials के हवाले से 2.3 crore litres तक कथित adulterated/synthetic milk से जुड़े अनुमान की बात कही गई थी।
वहीं Mathura में food-safety officials की कार्रवाई में करीब 1,500 kg alleged fake paneer और 3,000 litres synthetic milk मिलने की report सामने आई है।
दोनों cases Kandivali case से अलग हैं, लेकिन consumer concern एक ही है:
जो milk और dairy products हम रोज खरीदते हैं, उनकी quality और authenticity कैसे ensure होगी?
क्या मिलावटी दूध पीना dangerous हो सकता है?
इसका जवाब इस बात पर depend करता है कि milk में क्या मिलाया गया है।
Kandivali case में police ने impure water मिलाने का आरोप लगाया है। अगर पानी contaminated हो, तो उसमें harmful bacteria या दूसरे contaminants होने का risk हो सकता है।
लेकिन seized milk में कौन-सा exact adulterant था और उससे health पर कितना असर हो सकता है, यह laboratory testing के बाद ही confirm होगा।
इसलिए फिलहाल “जहरीला दूध”, “cancer वाला दूध” या किसी specific disease का दावा करना सही नहीं होगा।
घर पर दूध में मिलावट कैसे check करें?
FSSAI के DART यानी Detect Adulteration with Rapid Test programme में milk और दूसरे food products में common adulterants की basic screening के तरीके बताए गए हैं।
Kandivali case में आगे की investigation से consumers के लिए कुछ सवालों के जवाब सबसे ज्यादा important होंगे:
क्या 74 litres seized milk की laboratory testing हुई?
उसमें exact adulterant क्या मिला?
आरोपी यह काम कितने समय से कर रहा था?
क्या इससे पहले भी adulterated milk market में भेजा गया?
यह milk किन shops या customers तक पहुंचने वाला था?
Amul-Gokul के pouches original थे या counterfeit?
क्या कोई supplier, distributor या retailer भी इस मामले से जुड़ा है?
क्या Mumbai में ऐसे दूसरे locations पर भी action होगा?
इन सवालों के जवाब मिलने पर ही पता चलेगा कि यह सिर्फ एक local incident था या इसके पीछे कोई बड़ा network था।
Kandivali की raid ने Mumbai के Milk Supply Chain पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया
Kandivali East में Samta Nagar Police ने 74 litres कथित adulterated milk जब्त कर 48 वर्षीय आरोपी को गिरफ्तार किया है। Police के मुताबिक branded milk में impure water मिलाया जा रहा था और मौके से Amul-Gokul के नाम वाले pouches भी मिले।
इन सवालों के जवाब police investigation और laboratory reports के बाद ही साफ होंगे।
फिलहाल consumers के लिए सबसे जरूरी बात यही है कि किसी भी suspicious milk packet को blindly consume न करें, packaging और batch details check करें और शक होने पर official food-safety authorities को complaint करें।
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Goregaon में Salman Hotel के बाहर युवक की मौत के मामले में Police ने 24 घंटे में 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया। दोनों Police Custody में, जांच जारी है।
मुंबई: Goregaon West के Prem Nagar इलाके में Salman Hotel के सामने हुई मारपीट में 30 साल के युवक की मौत के मामले में Goregaon Police ने बड़ी कार्रवाई की है। घटना के करीब 24 घंटे के अंदर Police ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों आरोपी फिलहाल Police Custody में हैं और मामले की आगे की जांच जारी है।
मामला 11 अगस्त 2026 की रात करीब 11:30 बजे का है। Police को Salman Hotel, Prem Nagar, Goregaon West के सामने मारपीट की जानकारी मिली थी। बताया गया कि यहां एक युवक के साथ विवाद के बाद मारपीट हुई और उसके सिर पर लकड़ी के डंडे से हमला किया गया। गंभीर रूप से घायल युवक को इलाज के लिए Trauma Care Hospital, Jogeshwari East ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
मृतक की पहचान अजीज मोहम्मद अतिक खान, उम्र 30 साल, निवासी Prem Nagar, Goregaon West के तौर पर हुई है। घटना की जानकारी मिलते ही Goregaon Police Station की टीम मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की।
होटल के बिल को लेकर शुरू हुआ था विवाद
Police के मुताबिक, मृतक के भाई हबीब मोहम्मद अतिक खान का Salman Hotel के मालिक दानीश खान से बिल को लेकर विवाद हुआ था। हबीब ने होटल का पूरा बिल देने के लिए कहा था। इसी दौरान वहां मौजूद दो लोगों से अजीज खान का भी विवाद हो गया।
आरोप है कि दोनों लोगों ने अजीज खान के साथ बहस करने के बाद उसे धमकी दी और हाथापाई शुरू कर दी। विवाद बढ़ने पर आरोपियों ने लकड़ी के डंडे से अजीज खान के सिर पर हमला कर दिया। सिर में गंभीर चोट लगने के बाद उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई।
इस मामले में Goregaon Police Station में BNS 2023 की धारा 103(1), 115(2), 352, 351(3) और 3(5) के तहत केस दर्ज किया गया।
मामले की शुरुआत में दोनों आरोपी Police के लिए अज्ञात थे। घटनास्थल पर मौजूद लोगों के पास भी उनकी पहचान से जुड़ी पूरी जानकारी नहीं थी। ऐसे में आरोपियों तक पहुंचना Police के लिए बड़ी चुनौती थी।
इसके बाद North Region-9 के DCP के मार्गदर्शन में Police ने Crime Detection Team बनाई। टीम ने Goregaon और आसपास के इलाकों में लगातार आरोपियों की तलाश शुरू की। Police ने मिली हुई local information और जांच के दौरान सामने आई दूसरी जानकारी के आधार पर दोनों आरोपियों का पता लगाया।
जांच आगे बढ़ने के बाद दोनों संदिग्धों को हिरासत में लिया गया। पूछताछ और जांच में उनकी इस मामले में भूमिका सामने आने के बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।
13 अगस्त की रात दोनों आरोपी गिरफ्तार
Police के मुताबिक, दोनों आरोपियों को 13 अगस्त 2026 को रात करीब 2:43 बजे गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अजय मुन्नी उपाध्याय, उम्र 39 साल, निवासी Hanuman Nagar, Goregaon West और विकास देवराज पासवान, उम्र 23 साल, निवासी Prem Nagar, Goregaon West के रूप में हुई है।
गोरेगांव पुलिस के साथ गिरफ्तार आरोपियों की तस्वीर
दोनों को Court में पेश किया गया। Court ने आरोपियों को 23 अगस्त 2026 तक Police Custody में भेज दिया है। मामले की आगे की जांच Goregaon Police Station की टीम कर रही है।
24 घंटे के अंदर गिरफ्तारी
इस केस में Goregaon Police की सबसे बड़ी कामयाबी यह रही कि गंभीर घटना के बाद Police ने तेजी से जांच करते हुए करीब 24 घंटे के अंदर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
इस कार्रवाई के लिए Mumbai Police Commissioner देवेन भारती, Joint Commissioner of Police (Law & Order) मनोजकुमार शर्मा, Additional Commissioner of Police, North Regional Division शशिकुमार मीना, Additional Commissioner of Police, Western Regional Division अभिनव देशमुख, DCP North Region-9 पुरुषोत्तम कराड और ACP Goregaon Division सुनील जाधव का मार्गदर्शन रहा।
Goregaon Police Station के Senior Police Inspector सतीश उमरे के नेतृत्व में उमेश दांडेले, PSI सोहन पेचे, API सतीश चौगले, राठोड, दीपक खराड, योगेश रंधे, Police Naik नवनाथ कांबणे, आकाश काळे, सत्यपाल बोधे, विशाल दौडकर, अक्षय मांडके, रोहन कोल्हारे, सुर्यभान घोलप और गजानन हरवळे ने जांच में काम किया।
Crime Detection Team में Police Amaldar पो.ह.वा. प्रदीप कुंटे, विनोद चव्हाण, दिनकर तावडे, दत्तात्रय बागुल, सचिन ढवळी, कल्पेश नेहरे, भरत कदम, पो.शि. सौरभ चव्हाण, प्रज्वल मोहिते, भूपेंद्र सालकर, विशाल दानी, सतीश पाटील, सचिन मेघाम और सुहास शिंदे ने भी कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
Police की इस तेज कार्रवाई के बाद अब इस बात की जांच की जा रही है कि विवाद की शुरुआत किस वजह से हुई और घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ था। फिलहाल दोनों आरोपी Police Custody में हैं और आगे की जांच के बाद मामले में और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
Mumbai Crime News: निर्मलनगर पुलिस ने ऑटो चोरी के मामले में 20 साल के आरोपी को गिरफ्तार किया। 4 चोरी की रिक्शा बरामद, आरोपी पर 14 केस दर्ज हैं।
मुंबई: मुंबई में ऑटो-रिक्शा चोरी की लगातार सामने आ रही वारदातों के बीच निर्मलनगर पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, 20 साल के कार्तिक शिवशंकर उपाध्याय की गिरफ्तारी के बाद ऑटो चोरी के 4 मामलों का खुलासा हुआ है। आरोपी के पास से कुल 4 चोरी की ऑटो-रिक्शा बरामद की गई हैं, जिनकी कीमत करीब ₹2.35 लाख बताई गई है।
खार ईस्ट से ऑटो चोरी के बाद शुरू हुई जांच
मामला 5 अगस्त 2026 का है। पुलिस के मुताबिक, गोलीबार रोड, अंबेवाडी पुलिस चौकी के सामने, खार ईस्ट से MH 02 DU 2868 नंबर की ऑटो-रिक्शा चोरी हो गई थी। शिकायत मिलने के बाद निर्मलनगर पुलिस स्टेशन में केस दर्ज कर जांच शुरू की गई।
पुलिस ने इस मामले में CCTV footage, technical information और local sources की मदद से जांच आगे बढ़ाई। जांच के दौरान पुलिस को एक संदिग्ध की activity के बारे में जानकारी मिली। पुलिस के अनुसार, आरोपी पहले MH 02 DU 0995 नंबर की ऑटो लेकर आया था और बाद में चोरी की गई रिक्शा लेकर वहां से निकल गया।
Surveillance के बाद आरोपी पुलिस के हाथ लगा
जांच आगे बढ़ने पर संदिग्ध की पहचान कार्तिक शिवशंकर उपाध्याय (20) के रूप में हुई। इसके बाद पुलिस ने उसकी movement पर नजर रखी।
पुलिस के मुताबिक, 10 अगस्त 2026 को दोपहर करीब 3 बजे से रात 11 बजे तक इलाके में surveillance रखा गया। इसके बाद आरोपी को पकड़ा गया और पुलिस स्टेशन लाकर पूछताछ की गई।
पूछताछ और आगे की जांच के दौरान पुलिस को चोरी की अन्य ऑटो-रिक्शा के बारे में भी जानकारी मिली। आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने कुल 4 चोरी की ऑटो-रिक्शा recover कीं।
4 चोरी की रिक्शा बरामद, कुल कीमत ₹2.35 लाख
पुलिस के मुताबिक बरामद की गई ऑटो-रिक्शाओं में MH 02 DU 2868, MH 02 FB 9636, MH 02 DU 0995 और MH 02 LE 3450 शामिल हैं।
इन चारों रिक्शाओं को निर्मलनगर, खेरवाडी और वाकोला पुलिस स्टेशन में दर्ज अलग-अलग चोरी के मामलों से जोड़ा गया है। पुलिस के अनुसार, इनकी कुल estimated value करीब ₹2.35 लाख है।
आरोपी पर पहले से 14 चोरी के केस
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी के खिलाफ पहले से निर्मलनगर, वाकोला और खेरवाडी पुलिस स्टेशन में चोरी के कुल 14 मामले दर्ज हैं।
इस वजह से पुलिस अब आरोपी से यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उसके पुराने मामलों के अलावा वह और कितनी ऑटो चोरी की वारदातों में शामिल रहा है और क्या इन घटनाओं में उसके साथ कोई और व्यक्ति भी जुड़ा हुआ था।
Senior Officers की निगरानी में हुई कार्रवाई
इस ताजा घटना में कार्यवाही पर आप को बता दें, कि यह कार्रवाई मुंबई पुलिस कमिश्नर देवेन भारती, पुलिस सह आयुक्त मनोजकुमार शर्मा, अपर पुलिस आयुक्त अभिनव देशमुख, पुलिस उपायुक्त निमित गोयल और सहायक पुलिस आयुक्त संजय गायकवाड के guidance में की गई।
इस कार्रवाई में निर्मलनगर पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक अजय कुलकर्णी, Police Inspector (Crime) सूर्यकांत पारटकर और Police Sub-Inspector भीमराव धापटे शामिल रहे।
टीम में स. फौ. फाटक, पुलिस हवलदार पवार (क्र. 9283), पुलिस हवलदार सावंत (क्र. 0453), पुलिस हवलदार शेख (क्र. 0899), पुलिस हवलदार माने (क्र. 0933) और पुलिस शिपाई राठोड (क्र. 3732) ने भी कार्रवाई में सहयोग किया।
फिलहाल पुलिस आरोपी से आगे पूछताछ कर रही है। जांच का फोकस यह पता लगाने पर है कि आरोपी का ऑटो चोरी का network कितना बड़ा है और क्या वह मुंबई में हुई दूसरी ऐसी वारदातों से भी जुड़ा हुआ है।