मुंबई CDR रैकेट: दो पुलिस कांस्टेबल समेत 5 गिरफ्तार, 550 से ज्यादा नंबरों की लोकेशन डेटा सप्लाई का आरोप

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मुंबई में कथित CDR रैकेट में पांच लोग गिरफ्तार हुए हैं। इनमें झारखंड और बिहार पुलिस के दो कांस्टेबल शामिल हैं। जांच में 550 से ज्यादा मोबाइल नंबरों की लोकेशन संबंधी जानकारी सामने आई।

मुंबई: कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), सब्सक्राइबर डिटेल रिकॉर्ड (SDR) और मोबाइल लोकेशन डेटा की कथित अवैध सप्लाई करने वाले अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा हुआ है। इस मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें झारखंड और बिहार पुलिस के दो कांस्टेबल भी शामिल हैं। शुरुआती जांच में 550 से ज्यादा मोबाइल नंबरों की लोकेशन संबंधी जानकारी, 520 से अधिक SDR और 420 से ज्यादा IMEI नंबरों से जुड़ी जानकारी सामने आई है।

मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच में महाराष्ट्र, झारखंड और बिहार तक फैले कथित नेटवर्क के नौ संदिग्ध सदस्यों की पहचान होने की जानकारी सामने आई है। इस मामले में सात मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। जांच का प्रमुख पहलू यह है कि संवेदनशील मोबाइल डेटा आरोपियों तक कैसे पहुंचा और इसका इस्तेमाल किन उद्देश्यों के लिए किया जा रहा था।

खोए हुए मोबाइल फोन खोजने के नाम पर सामने आया मामला

जांच के अनुसार, यह मामला सोशल मीडिया पर खोए या चोरी हुए मोबाइल फोन वापस दिलाने का दावा करने वाले एक व्यक्ति से जुड़ा है। आरोपी ने इंस्टाग्राम पर इस तरह की सेवा का प्रचार किया था। आरोप है कि उसने खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए अपना परिचय “इंस्पेक्टर संजय” के रूप में दिया और मोबाइल फोन तलाशने के लिए संपर्क करने वाले लोगों से पैसे लिए।

क्राइम ब्रांच को सूचना मिलने के बाद जोगेश्वरी पश्चिम में कार्रवाई की गई। आरोपी के पास मौजूद दो मोबाइल फोन की जांच के दौरान कथित तौर पर CDR, SDR और लोकेशन डेटा हासिल करने से जुड़े संपर्कों की जानकारी सामने आई। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया और दूसरे राज्यों में मौजूद संदिग्धों की भूमिका की पड़ताल की गई।

जांच में पांच गिरफ्तार, दो पुलिस कांस्टेबल भी शामिल

इस मामले में गिरफ्तार पांच आरोपियों में झारखंड और बिहार पुलिस के दो सक्रिय कांस्टेबल शामिल हैं। हालांकि, दोनों की कथित भूमिका क्या थी, उन्होंने अपने पद का इस्तेमाल किया था या नहीं और डेटा हासिल करने में उनकी वास्तविक भागीदारी कितनी थी, इसका विस्तृत ब्योरा अभी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है।

ओशिवारा पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस मामले की प्राथमिकी संख्या 935/2026 और क्राइम ब्रांच केस संख्या 68/2026 बताई गई है। मुख्य संदिग्ध को 22 जून 2026 को जोगेश्वरी पश्चिम में पकड़े जाने का विवरण भी सामने आया है। मामले में आगे की जांच जारी है।

550 से ज्यादा मोबाइल नंबरों की लोकेशन संबंधी जानकारी मिली

प्रारंभिक जांच में सामने आए डेटा का विवरण इस प्रकार है:

  • लगभग 50 कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR)
  • 520 से अधिक सब्सक्राइबर डिटेल रिकॉर्ड (SDR)
  • 550 से ज्यादा मोबाइल नंबरों की लोकेशन संबंधी जानकारी
  • 420 से अधिक IMEI नंबरों से जुड़ी जानकारी
  • सात मोबाइल फोन जब्त

CDR में आमतौर पर कॉल का समय, अवधि और संबंधित नंबरों जैसी जानकारी हो सकती है। SDR में मोबाइल कनेक्शन के ग्राहक से जुड़ी जानकारी हो सकती है, जबकि IMEI मोबाइल उपकरण की पहचान के लिए इस्तेमाल होने वाला नंबर है। लोकेशन डेटा का विवरण इस बात पर निर्भर करता है कि जानकारी किस तकनीक और रिकॉर्ड से हासिल की गई थी।

इन आंकड़ों को सीधे प्रभावित व्यक्तियों की संख्या नहीं माना जा सकता। एक ही मोबाइल नंबर से कई रिकॉर्ड जुड़े हो सकते हैं और एक व्यक्ति के पास एक से ज्यादा मोबाइल नंबर भी हो सकते हैं। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इस कथित नेटवर्क से कुल कितने लोगों की निजी जानकारी प्रभावित हुई।

मोबाइल डेटा का गलत इस्तेमाल कैसे नुकसान पहुंचा सकता है?

कॉल रिकॉर्ड और लोकेशन संबंधी जानकारी संवेदनशील होती है। यदि ऐसी जानकारी अनधिकृत लोगों तक पहुंच जाए, तो उससे किसी व्यक्ति के संपर्कों, कॉल करने के पैटर्न और मोबाइल उपकरण की गतिविधियों का अनुमान लगाया जा सकता है। परिस्थितियों के अनुसार इसका इस्तेमाल ठगी, निजी जानकारी जुटाने या किसी की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए किए जाने का जोखिम हो सकता है।

हालांकि, इस मामले में बरामद या सप्लाई किए गए डेटा का इस्तेमाल किसी अन्य अपराध में हुआ है या किसी व्यक्ति की निजता को वास्तविक नुकसान पहुंचा है, इसकी पुष्टि जानकारी इस वक्त नहीं है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि डेटा के बदले कितनी रकम दी जाती थी, इसे किन लोगों तक पहुंचाया गया और क्या किसी दूरसंचार कंपनी या सरकारी सिस्टम का दुरुपयोग हुआ था।

कानूनी पहलू पर भी जरूरी जांच

कॉल डिटेल रिकॉर्ड और लोकेशन संबंधी जानकारी तक पहुंच अधिकृत प्रक्रिया और लागू कानूनों के अधीन होती है। किसी व्यक्ति के पास मोबाइल नंबर होने से उसे उस नंबर के मालिक के कॉल रिकॉर्ड या लोकेशन डेटा तक पहुंच का अधिकार नहीं मिल जाता।

खोया मोबाइल खोजने के नाम पर पैसे मांगने वालों से सावधान रहें

मोबाइल फोन खो जाने पर अनजान सोशल मीडिया खातों या खुद को पुलिस अधिकारी बताने वाले व्यक्तियों को बिना सत्यापन पैसे देना जोखिमपूर्ण हो सकता है। फोन खोने या चोरी होने की स्थिति में नागरिक संचार साथी पोर्टल पर उपलब्ध CEIR सुविधा के जरिए मोबाइल ब्लॉक करने की प्रक्रिया देख सकते हैं। धोखाधड़ी होने पर साइबर अपराध की शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर की जा सकती है। तत्काल वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में 1930 पर भी संपर्क किया जा सकता है।

फिलहाल जांच का प्रमुख उद्देश्य कथित डेटा सप्लाई के स्रोत, नेटवर्क में शामिल बाकी संदिग्धों की भूमिका और संवेदनशील मोबाइल जानकारी के इस्तेमाल का पता लगाना है। यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि डेटा किस माध्यम से हासिल किया गया और क्या इस मामले में किसी अन्य व्यक्ति या संस्था की भूमिका सामने आती है।

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