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  • जमुई कांड में बड़ा एक्शन: नंदन यादव को पैर में गोली, हरेराम भी गिरफ्तार; 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल पर FIR

    जमुई कांड में बड़ा एक्शन: नंदन यादव को पैर में गोली, हरेराम भी गिरफ्तार; 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल पर FIR

    बिहार के जमुई में नाबालिगों से बदसलूकी मामले में नंदन यादव पुलिस मुठभेड़ में घायल हुआ। हरेराम गिरफ्तार और 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल पर FIR हुई।

    बिहार: जमुई में नाबालिग छात्र-छात्रा के साथ बदसलूकी और अश्लील हरकत के वायरल वीडियो मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। मामले के प्रमुख आरोपी नंदन यादव को पुलिस कार्रवाई के दौरान पैर में गोली लगी, जबकि दूसरे आरोपी हरेराम यादव को भी पकड़ लिया गया है। दोनों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। इसी मामले में नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने वाले वीडियो को सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के आरोप में करीब 120 प्रोफाइल संचालकों के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की गई है।

    पुलिस के मुताबिक, घटना 19 सितंबर की शाम जमुई-लखीसराय मार्ग के पास मड़वा पहाड़ क्षेत्र में हुई थी। नाबालिग छात्रा अपने एक नाबालिग दोस्त के साथ कोचिंग से लौट रही थी। दोनों इलाके में गए थे, जहां कुछ युवकों ने उन्हें रोक लिया। इसके बाद दोनों के साथ कथित तौर पर मारपीट और अभद्र व्यवहार किया गया। छात्रा के साथ अश्लील हरकत किए जाने का वीडियो भी बनाया गया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

    वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की। पुलिस ने वीडियो फुटेज और अन्य सुरागों के आधार पर आरोपियों की पहचान की। वाहन के नंबर की मदद से पुलिस पीड़ितों तक पहुंची और इसके बाद प्राथमिकी दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई गई।

    नंदन यादव के पैर में लगी गोली

    मामले में फरार चल रहे प्रमुख आरोपी नंदन यादव की तलाश के दौरान पुलिस की उसके साथ मुठभेड़ हुई। पुलिस के अनुसार, कार्रवाई के दौरान नंदन यादव के पैर में गोली लगी। इसके बाद उसे हिरासत में लेकर जमुई सदर अस्पताल पहुंचाया गया। नंदन यादव जमुई सदर थाना क्षेत्र के प्रतापपुर गांव का रहने वाला बताया जा रहा है और ट्रैक्टर चलाकर बालू ढोने का काम करता था।

    दूसरे आरोपी हरेराम यादव को भी पुलिस ने पकड़ लिया है। हरेराम यादव भी प्रतापपुर गांव का रहने वाला बताया गया है और उसके ट्रैक्टर चालक होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस कार्रवाई के दौरान उसके पैर में चोट लगने की भी जानकारी है। मामले में दोनों की भूमिका की जांच की जा रही है।

    रामआशीष चौधरी समेत अन्य आरोपियों पर भी कार्रवाई

    मामले की जांच में रामआशीष चौधरी नाम के आरोपी की गिरफ्तारी की जानकारी भी सामने आई है। इसके अलावा कुछ नाबालिगों को भी पुलिस ने हिरासत में लिया है। पुलिस वीडियो में दिखाई दे रहे अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है और उनकी गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई जारी है।

    पुलिस ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम यानी SIT का गठन किया है। जांच में वीडियो बनाने वाले लोगों, घटना में सीधे शामिल आरोपियों और वीडियो को सोशल मीडिया पर फैलाने वालों की भूमिका अलग-अलग स्तर पर देखी जा रही है।

    120 सोशल मीडिया प्रोफाइल पर FIR

    जमुई मामले में पुलिस की कार्रवाई केवल घटना में शामिल आरोपियों तक सीमित नहीं रही। नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने वाले वीडियो को सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के आरोप में करीब 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल संचालकों के खिलाफ साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है।

    पुलिस ने लोगों से अपील की है कि नाबालिग पीड़िता से जुड़ा वीडियो डाउनलोड, शेयर या दोबारा पोस्ट न करें। पुलिस का कहना है कि नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करना गंभीर अपराध है और वीडियो को आगे प्रसारित करने वालों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

    FIR में POCSO और BNS की धाराएं

    मामले में BNS की धारा 74, 76 और 3(5) के साथ POCSO Act की धारा 8 और 12 के तहत कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई है। प्राथमिकी जमुई थाना कांड संख्या 428/26 के तहत दर्ज किए जाने की जानकारी उपलब्ध है। अंतिम कानूनी स्थिति जांच और आगे की कार्रवाई के साथ स्पष्ट होगी।

    पुलिस पेट्रोलिंग भी जांच के दायरे में

    घटना के बाद सिर्फ आरोपियों की गिरफ्तारी ही जांच का विषय नहीं है। घटना जिस इलाके में हुई और जिस समय नाबालिग छात्र-छात्रा वहां मौजूद थे, उस दौरान पुलिस पेट्रोलिंग की स्थिति की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों की ओर से पेट्रोलिंग व्यवस्था को लेकर भी जांच की बात सामने आई है।

    महिला आयोग ने भी लिया संज्ञान

    घटना के बाद महिला सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठे हैं। बिहार महिला आयोग और राष्ट्रीय महिला आयोग की ओर से मामले का संज्ञान लिए जाने और प्रशासन से रिपोर्ट मांगे जाने की जानकारी सामने आई है। इस कार्रवाई का उद्देश्य घटना की स्थिति और प्रशासनिक कार्रवाई की जानकारी लेना है।

    अब जांच में किन सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे?

    जांच में यह पता लगाया जाएगा कि घटना में कुल कितने लोग सीधे तौर पर शामिल थे, वीडियो किसने बनाया, इसे सोशल मीडिया पर किसने सबसे पहले प्रसारित किया और किन लोगों ने इसे आगे फैलाया। साथ ही पुलिस यह भी जांच रही है कि घटना के समय वहां मौजूद अन्य लोगों की क्या भूमिका थी।

    फिलहाल नंदन यादव और हरेराम यादव पुलिस की गिरफ्त में हैं। नंदन यादव का अस्पताल में उपचार कराया जा रहा है। मामले में SIT की जांच और अन्य आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई जारी है। वहीं, नाबालिग पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करने वाले सोशल मीडिया अकाउंट्स पर दर्ज मामलों की साइबर जांच भी आगे बढ़ रही है।

  • जमुई में नाबालिग छात्र-छात्रा से बदसलूकी, 7 पर FIR; 3 गिरफ्तार, राहुल गांधी ने उठाए सवाल

    जमुई में नाबालिग छात्र-छात्रा से बदसलूकी, 7 पर FIR; 3 गिरफ्तार, राहुल गांधी ने उठाए सवाल

    बिहार के जमुई में 19 सितंबर को 10वीं के नाबालिग छात्र-छात्रा को रोककर बदसलूकी का वीडियो वायरल हुआ। POCSO में FIR, 3 गिरफ्तार।

    बिहार: जमुई में 10वीं कक्षा के नाबालिग छात्र और छात्रा को रास्ते में रोककर कथित तौर पर बदसलूकी करने का मामला सामने आया है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। अब तक 7 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज होने और 3 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। मामले में POCSO Act और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है।

    घटना 19 सितंबर की शाम करीब 6 से 7 बजे के बीच की बताई जा रही है। दोनों नाबालिग जमुई शहर के रहने वाले और 10वीं कक्षा के छात्र हैं। जानकारी के अनुसार, दोनों कोचिंग से लौटने के दौरान स्कूटी से मड़वा पहाड़ की तरफ गए थे। वापस लौटते समय जमुई सदर थाना क्षेत्र में युवकों के एक समूह ने उन्हें रास्ते में रोक लिया।

    वायरल वीडियो में क्या दिखा ?

    वायरल वीडियो में दोनों नाबालिगों को कई लोगों से घिरा हुआ देखा जा सकता है। छात्र और छात्रा लोगों से उन्हें जाने देने की गुहार लगाते दिखाई देते हैं। वीडियो में छात्र के साथ खींचतान और मारपीट तथा छात्रा के साथ कथित तौर पर अनुचित शारीरिक व्यवहार दिखाई देता है। एक अन्य दृश्य में एक व्यक्ति छात्रा को पकड़कर कुछ दूरी तक ले जाने की कोशिश करता दिखाई देता है।

    वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया। जमुई के पुलिस अधीक्षक विश्वजीत दयाल के नेतृत्व में जांच आगे बढ़ी और दोनों नाबालिगों की पहचान कर उनके बयान लिए गए। पुलिस ने वीडियो में दिखाई देने वाले लोगों की पहचान की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई। जांच में 6 से 7 युवकों के शामिल होने की बात सामने आई है।

    प्रशासन ने क्या कहा ?

    जमुई के जिलाधिकारी नवीन ने कहा है कि घटना 19 सितंबर की शाम जमुई सदर थाना क्षेत्र की है। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने स्वतः संज्ञान लिया, दोनों नाबालिगों से जानकारी ली गई और प्राथमिकी दर्ज की गई। प्रशासन ने नाबालिगों की निजता बनाए रखते हुए दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का भरोसा दिया है।

    पॉक्सो कानून के तहत मामला दर्ज

    मामले में सात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है और अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी है। पुलिस बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई कर रही है। जांच में POCSO Act के साथ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराएं भी लगाई गई हैं। पुलिस ने पीड़ितों के बयान भी दर्ज किए हैं।

    इस मामले की जांच में जमुई के एसपी विश्वजीत दयाल के साथ DIG राकेश कुमार भी निगरानी कर रहे हैं। पुलिस का फोकस वीडियो में दिखाई देने वाले सभी लोगों की भूमिका तय करने और बाकी आरोपियों तक पहुंचने पर है।

    राहुल गांधी ने उठाए सवाल

    मामले को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी बिहार सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि जमुई का वीडियो बेहद परेशान करने वाला है। राहुल गांधी ने घटना में शामिल लोगों की पहचान कर POCSO के तहत कार्रवाई और जल्द सजा की मांग की। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि घटना 19 सितंबर की है तो आरोपी अब तक सलाखों के पीछे क्यों नहीं हैं और शाम के समय बिहार की सड़कों पर लड़कियों की सुरक्षा को लेकर सरकार जवाब दे।

    हालांकि अब तक सामने आए पुलिस अपडेट के अनुसार कार्रवाई शुरू हो चुकी है और तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी और उनकी भूमिका की जांच जारी है।

    नाबालिग पीड़ितों की पहचान कानूनन संरक्षित है। इसलिए उनकी पहचान, चेहरा, स्कूल, पता या ऐसी कोई जानकारी प्रकाशित नहीं की जानी चाहिए जिससे उनकी पहचान सार्वजनिक हो सके। मामले में आगे की कार्रवाई पुलिस जांच और अदालत की प्रक्रिया के आधार पर तय होगी।

  • ‘मुझे जल्दी लखपति बनना था’, शराब तस्करी में पकड़ी गई महिला ने पुलिस के सामने उगले राज

    ‘मुझे जल्दी लखपति बनना था’, शराब तस्करी में पकड़ी गई महिला ने पुलिस के सामने उगले राज

    शराब तस्करी में पकड़ी गई सीतामढ़ी की महिला से पूछताछ में कई अहम बातें सामने आईं। 68 लीटर शराब गुप्त तहखाने से बरामद हुई थी।

    बिहार: बगहा में शराब तस्करी के मामले में गिरफ्तार सीतामढ़ी की एक महिला से पूछताछ के दौरान तस्करी के तरीके को लेकर कई अहम जानकारी सामने आई है। महिला समेत तीन लोगों को उस समय गिरफ्तार किया गया था, जब चारपहिया वाहन से करीब 68 लीटर अंग्रेजी शराब बरामद हुई। शराब वाहन के अंदर बनाए गए गुप्त तहखाने में छिपाकर रखी गई थी।

    पूछताछ में महिला ने कथित तौर पर बताया कि वह शराब लदी गाड़ियों में साथ चलने के बदले पैसे लेती थी। उसे उम्मीद थी कि परिवार की महिला के साथ होने पर वाहन पुलिस की जांच से बच सकता है। महिला के अनुसार, इसी लालच में वह इस काम से जुड़ी थी।

    रोजाना 10 हजार रुपये मिलने का दावा

    उत्पाद विभाग से जुड़ी जानकारी के अनुसार, महिला ने पूछताछ में बताया कि शराब लदी गाड़ी में सफर करने के लिए उसे प्रतिदिन 10 हजार रुपये दिए जाते थे। वह उत्तर प्रदेश की ओर से आने वाली शराब की गाड़ियों में घरेलू महिला की तरह बैठती थी।

    तस्करों की कथित रणनीति यह थी कि वाहन में महिला या परिवार का सदस्य दिखाई देने पर पुलिस का शक कम हो सकता है। हालांकि इस बयान से जुड़े सभी विवरणों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं है, इसलिए इन्हें पूछताछ में सामने आई जानकारी के तौर पर ही देखा जा रहा है।

    गाड़ी में बना था शराब छिपाने का गुप्त तहखाना

    उत्पाद विभाग की टीम धनहा पुल चेकपोस्ट पर वाहनों की जांच कर रही थी। इसी दौरान एक चारपहिया वाहन को रोककर उसकी जांच की गई। चालक ने महिला को अपनी रिश्तेदार बताते हुए वाहन से बेतिया जाने की बात बताई।

    जांच के दौरान वाहन की स्क्रीनिंग की गई तो सीट और गेट के अंदर बनाए गए गुप्त हिस्से का पता चला। सघन तलाशी लेने पर वहां से करीब 68 लीटर अंग्रेजी शराब बरामद हुई। इसके बाद वाहन चालक समेत तीन आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया।

    गिरफ्तार आरोपितों में उत्तर प्रदेश के तरबगंज क्षेत्र का अवध किशोर पांडेय, सीतामढ़ी के बथनाहा क्षेत्र का संजीव कुमार और सीतामढ़ी जिले की महिला शामिल है। शराब और वाहन को भी जब्त किया गया है।

    तस्करी के नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश

    उत्पाद विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि शराब की खेप कहां से लाई गई थी और इसे किस स्थान पर पहुंचाया जाना था। गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ के आधार पर तस्करी में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। मामले में मद्यनिषेध कानून के तहत कार्रवाई शुरू की गई है।

    इस घटना के बाद भी इलाके में शराब तस्करी के खिलाफ कार्रवाई जारी है। 8 सितंबर को धनहा थाना पुलिस ने एक कार से 624 बोतल अंग्रेजी शराब बरामद की। पुलिस के अनुसार वाहन जांच के दौरान चालक कार छोड़कर फरार हो गया। कार के अंदर 13 कार्टन में शराब मिली, जिसके बाद वाहन नंबर के आधार पर उसके मालिक और शराब कारोबारी की पहचान की जा रही है।

    लगातार सामने आ रही ऐसी कार्रवाइयों के बीच अब जांच एजेंसियों की नजर केवल शराब की बरामदगी तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बात पर भी है कि सीमा क्षेत्र में शराब पहुंचाने और आगे सप्लाई करने वाले नेटवर्क के पीछे कौन लोग हैं। महिला से हुई पूछताछ इसी कड़ी में अहम मानी जा रही है। मामले में आगे की जांच जारी है।

  • गोपालगंज में चोरी के डर से छत पर चढ़ाई Scorpio, क्रेन से पहुंची 2.5 टन की SUV; VIDEO वायरल

    गोपालगंज में चोरी के डर से छत पर चढ़ाई Scorpio, क्रेन से पहुंची 2.5 टन की SUV; VIDEO वायरल

    गोपालगंज में चोरी के डर से Scorpio को क्रेन की मदद से दो मंजिला मकान की छत पर पहुंचाने का वीडियो वायरल है। जानिए पूरा मामला और सुरक्षा सवाल।

    बिहार: गोपालगंज में एक नई Scorpio को चोरी से बचाने के लिए दो मंजिला मकान की छत पर चढ़ाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। स्थानीय जानकारी के मुताबिक, मांझागढ़ थाना क्षेत्र के मीरा टोला गांव में मनोज यादव ने कार को घर के बाहर छोड़ने के बजाय क्रेन की मदद से छत पर पहुंचवाया। इस असामान्य तरीके ने जहां लोगों को हैरान कर दिया है, वहीं अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि करीब ढाई टन वजन वाली SUV को आवासीय मकान की छत पर रखना कितना सुरक्षित है।

    विदेश में नौकरी, घर पर कार की सुरक्षा की चिंता

    स्थानीय जानकारी के अनुसार, मनोज यादव इजराइल में नौकरी करते हैं। बताया गया है कि घर में पुरुष सदस्य की मौजूदगी कम रहने वाली थी और कार चलाने वाला ड्राइवर भी विदेश चला गया था। ऐसे में नई Scorpio को घर के बाहर खड़ा छोड़ने पर चोरी या नुकसान का डर था। इसी वजह से कार को सुरक्षित रखने के लिए क्रेन बुलाकर उसे मकान की दूसरी मंजिल की छत तक पहुंचाया गया।

    क्रेन से छत तक कैसे पहुंची Scorpio?

    वायरल वीडियो में भारी-भरकम Scorpio को क्रेन की मदद से ऊपर उठाते हुए देखा जा सकता है। वाहन को पहले lifting equipment के जरिए ऊपर ले जाया गया और फिर मकान की छत पर उतारा गया। वीडियो में यह पूरा दृश्य इतना असामान्य है कि सोशल मीडिया यूजर्स के बीच यह चर्चा का विषय बन गया।

    लेकिन ऐसी lifting प्रक्रिया में सिर्फ क्रेन की क्षमता ही नहीं, बल्कि load balance, lifting arrangement और नीचे मौजूद लोगों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण होती है। इसलिए किसी वायरल वीडियो को देखकर आम लोगों के लिए इसी तरह भारी वाहन को छत पर रखने की कोशिश करना उचित नहीं माना जा सकता।

    क्या मकान की छत Scorpio का वजन सह सकती है?

    यही इस वायरल घटना से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण सवाल है।

    Mahindra Scorpio Classic के आधिकारिक owner manual में 2WD मॉडल का अधिकतम gross vehicle weight 2,510 किलोग्राम तक दिया गया है। यानी वाहन का कुल अनुमत भार लगभग 2.5 टन है।

    लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि इस खास मकान की छत असुरक्षित है। किसी भवन की वास्तविक क्षमता केवल कार के वजन से तय नहीं होती। स्लैब की मोटाई, reinforcement, beams और columns की व्यवस्था, निर्माण की गुणवत्ता तथा भवन का structural design जैसे कई factors महत्वपूर्ण होते हैं।

    इसी वजह से किसी सामान्य residential roof को देखकर यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि वह SUV का वजन आसानी से सह लेगी। भारी वाहन को छत पर खड़ा करने से पहले structural engineer से भवन की क्षमता की जांच कराना जरूरी हो सकता है।

    कार को वापस नीचे कैसे उतारा जाएगा?

    वायरल वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर लोगों का एक स्वाभाविक सवाल यह भी है कि जिस Scorpio को क्रेन से छत पर चढ़ाया गया है, उसे वापस जमीन पर कैसे लाया जाएगा।

    अगर मकान में वाहन के लिए विशेष ramp या दूसरी व्यवस्था नहीं है, तो कार को नीचे लाने के लिए दोबारा lifting equipment की जरूरत पड़ सकती है। उपलब्ध जानकारी में फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि वाहन को छत पर कितने समय के लिए रखा गया है और उसे वापस नीचे लाने की क्या योजना है।

    यही इस मामले का एक अहम अनुत्तरित पहलू है।

    गोपालगंज में वाहन चोरी का सवाल कितना प्रासंगिक है?

    कार को छत पर रखने की वजह स्थानीय जानकारी में चोरी का डर बताई गई है। वहीं गोपालगंज से हाल के महीनों में वाहन चोरी से जुड़े मामले भी सामने आए हैं। जुलाई 2026 में पुलिस ने गोपालगंज से चोरी हुई एक Scorpio बरामद करने और मामले में आरोपियों को पकड़ने की कार्रवाई की थी। हालांकि उस घटना का इस वायरल वीडियो से कोई सीधा संबंध नहीं है।

    इसलिए इस घटना को इलाके में बढ़ती वाहन चोरी का परिणाम बताना अभी सही नहीं होगा। फिलहाल चोरी का डर ही कार को छत पर रखने की बताई गई वजह है।

    पुलिस ने क्या कहा?

    उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस वायरल वीडियो को लेकर पुलिस की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। फिलहाल कार मालिक के फैसले को लेकर किसी कानूनी उल्लंघन या पुलिस कार्रवाई का दावा अभी तक नहीं किया गया है।

    सोशल मीडिया पर क्यों वायरल हुआ वीडियो?

    एक SUV को क्रेन से दो मंजिला मकान की छत पर पहुंचाने का दृश्य सामान्य पार्किंग से बिल्कुल अलग है। इसी वजह से वीडियो तेजी से लोगों का ध्यान खींच रहा है। शुरुआती वायरल पोस्ट 3 सितंबर 2026 को X पर सामने आई थी, जिसके बाद अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इसका प्रसार हुआ।

    लोगों की दिलचस्पी सिर्फ इस बात में नहीं है कि कार छत पर क्यों रखी गई, बल्कि इस सवाल में भी है कि इतनी भारी SUV को छत पर रखना तकनीकी रूप से कितना सुरक्षित है और बाद में उसे नीचे कैसे उतारा जाएगा।

    क्या दूसरे लोग भी ऐसा कर सकते हैं?

    सिर्फ वायरल वीडियो देखकर इस तरीके की नकल करना सुरक्षित नहीं माना जा सकता। किसी भवन की छत पर कार रखने का फैसला उस भवन की वास्तविक structural capacity जाने बिना नहीं किया जाना चाहिए।

    इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि क्रेन से कार ऊपर उठाना संभव होना और किसी residential roof का उस वाहन का भार सुरक्षित रूप से सह पाना—दो अलग-अलग बातें हैं।

    फिलहाल गोपालगंज की यह Scorpio सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। लेकिन वायरल वीडियो से आगे असली सवाल भवन की structural safety, वाहन को लंबे समय तक छत पर रखने की क्षमता और उसे भविष्य में सुरक्षित तरीके से नीचे उतारने का है। इन पहलुओं पर किसी अधिकृत structural assessment या प्रशासनिक जानकारी के सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

  • बोरीवली में ₹12.92 लाख की चोरी, caretaker समेत 2 गिरफ्तार; बिहार-राजस्थान तक भागे आरोपी

    बोरीवली में ₹12.92 लाख की चोरी, caretaker समेत 2 गिरफ्तार; बिहार-राजस्थान तक भागे आरोपी

    बोरीवली में घर से ₹12.92 लाख के गहने और डॉलर चोरी मामले में caretaker समेत 2 आरोपी गिरफ्तार, बिहार-राजस्थान तक फरारी के बाद पुलिस ने पकड़ा!

    मुंबई: बोरीवली में घर के अंदर से करीब ₹12.92 लाख के सोने-चांदी के गहने और अमेरिकी डॉलर चोरी होने के मामले में पुलिस ने caretaker समेत दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, घर में काम करने वाले Manoj Rajdev Mandal ने कथित तौर पर घर से valuables चोरी की और बाद में अपने साथी Sanjeev Hira Mandal के साथ मुंबई से बाहर निकलकर फरार हो गया। दोनों को बिहार और राजस्थान में तलाश के बाद पुलिस ने गिरफ्तार किया है।

    घर में काम करने वाले caretaker पर ही चोरी का आरोप

    बोरीवली पुलिस के मुताबिक, मामला Crime No. 528/2026 से जुड़ा है। इस मामले में BNS की धारा 306 और 317(2)(5) के तहत केस दर्ज किया गया है।

    पुलिस के अनुसार शिकायत में बताया गया कि 12 अगस्त 2024 की सुबह करीब 10 बजे से 19 मई 2025 की रात करीब 8 बजे के बीच घर के bedroom में रखी cupboard से सोने-चांदी के आभूषण और अमेरिकी डॉलर गायब हुए। इनकी कुल कीमत करीब ₹12.92 लाख बताई गई है।

    जांच में पुलिस का आरोप है कि घर में caretaker के तौर पर काम करने वाले Manoj Rajdev Mandal ने चोरी की। पुलिस के मुताबिक बाद में चोरी के माल से जुड़े मामले में Sanjeev Hira Mandal की भूमिका भी सामने आई।

    चोरी के बाद मुंबई से बाहर निकल गए थे आरोपी

    पुलिस के अनुसार मामला सामने आने के बाद आरोपियों की तलाश शुरू की गई। जांच के दौरान पता चला कि दोनों मुंबई से बाहर निकल चुके हैं और बिहार तथा राजस्थान की तरफ चले गए हैं।

    पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने अपना मोबाइल बंद कर दिया था और फरार हो गए थे। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी जांच और अन्य जांच माध्यमों से आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश जारी रखी।

    लगातार जांच के बाद Manoj Rajdev Mandal को पकड़ा गया। उससे मिली जानकारी के आधार पर Sanjeev Hira Mandal को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया।

    पुलिस ने कैसे आगे बढ़ाई जांच?

    पुलिस के मुताबिक, आरोपी के पकड़े जाने के बाद उससे पूछताछ की गई और उसके आधार पर दूसरे आरोपी तक पहुंच बनाई गई। चोरी के मामले में दोनों आरोपियों से जुड़े सुरागों की जांच की जा रही है।

    इस मामले में चोरी गई पूरी संपत्ति में से कितनी रकम या valuables बरामद हुई हैं, इसकी पूरी जानकारी पुलिस की ओर से सामने आना बाकी है। पुलिस आगे यह भी जांच कर रही है कि चोरी की गई संपत्ति कहां-कहां ले जाई गई और उसमें किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।

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    बोरीवली पुलिस के साथ गिरफ्तार आरोपियों की तस्वीर

    BNS की धाराओं में क्या मामला है?

    इस केस में BNS की धारा 306 के तहत नौकर या कर्मचारी द्वारा मालिक के कब्जे वाली संपत्ति की चोरी से जुड़ा प्रावधान लागू होता है। वहीं BNS की धारा 317(2) चोरी की संपत्ति को जानते हुए रखने या हासिल करने से संबंधित है, जबकि धारा 317(5) चोरी की संपत्ति को छिपाने या उसे ठिकाने लगाने में मदद करने से जुड़ी है।

    यानी इस मामले में पुलिस सिर्फ चोरी की घटना ही नहीं, बल्कि चोरी के बाद संपत्ति से जुड़े कथित लेन-देन और उसे रखने या छिपाने में किसी अन्य की भूमिका की भी जांच कर सकती है।

    इस केस में कई सवालों के जवाब अभी बाकी

    पुलिस की जांच के दौरान यह साफ होना बाकी है कि घर से valuables एक ही बार में चोरी किए गए थे या अलग-अलग मौकों पर। यह भी जांच का हिस्सा है कि परिवार को चोरी का पता कब चला और cupboard में रखे गहने और डॉलर गायब होने की जानकारी किस तरह सामने आई।

    इसके अलावा ₹12.92 लाख की कुल कीमत में सोने और चांदी के आभूषणों तथा अमेरिकी डॉलर का अलग-अलग valuation कितना है, यह भी पुलिस जांच से स्पष्ट होगा।

    दूसरे आरोपी Sanjeev Hira Mandal की कथित भूमिका क्या थी, चोरी का सामान उसके पास पहुंचा था या नहीं और चोरी की संपत्ति में से कितना माल recover हुआ है, इन पहलुओं पर भी आगे की जांच जारी है।

    घर में domestic help रखने वालों के लिए जरूरी बात

    इस घटना के बाद घर में काम करने वाले staff की identity और background verification को लेकर सवाल फिर सामने आते हैं। मुंबई पुलिस की ओर से domestic servant की जानकारी देने के लिए online facility उपलब्ध है, जिसमें घरेलू कर्मचारी का नाम, संपर्क, पता, पहचान से जुड़ी जानकारी और employment से संबंधित details दर्ज की जा सकती हैं।

    इस तरह की verification का मकसद किसी पूरे वर्ग पर शक करना नहीं, बल्कि employer और domestic worker दोनों की security को बेहतर बनाना है। खासकर उन परिवारों के लिए यह जरूरी है जहां घर में senior citizens रहते हैं या घरेलू staff को घर के अंदर लंबे समय तक access मिलता है।

    घर में काम करने वाले किसी भी व्यक्ति को रखने से पहले उसकी पहचान, वर्तमान और स्थायी पता, पुराने employment details और उपलब्ध references की जानकारी रखना परिवार की सुरक्षा के लिहाज से मददगार हो सकता है।

    पुलिस अधिकारियों की निगरानी में हुई कार्रवाई

    बोरीवली पुलिस की इस कार्रवाई का नेतृत्व पुलिस उप आयुक्त, उत्तर परिमंडल-2 संदीप घुगे और सहायक पुलिस आयुक्त संतोष धनवडे के मार्गदर्शन में किया गया। वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक श्रीमती पुष्पलता मंडले और पुलिस निरीक्षक अपराध दिग्विजय पाटील की निगरानी में मामले की जांच आगे बढ़ाई गई।

    क्राइम डिटेक्शन अधिकारी राजू कोरडे के साथ पुलिस हवालदार देसाई, शेलार, सिपाही कदम, पुलिस सिपाही लहांगे और झिरवा ने कार्रवाई में हिस्सा लिया।

    पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और अब चोरी की संपत्ति की recovery समेत मामले से जुड़े बाकी पहलुओं की जांच जारी है। दोनों पर लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत की प्रक्रिया के बाद ही होगी।

  • गिरफ्तार महिला को छुड़ाने थाने में घुसी भीड़, पुलिस से मारपीट; 9 गिरफ्तार

    गिरफ्तार महिला को छुड़ाने थाने में घुसी भीड़, पुलिस से मारपीट; 9 गिरफ्तार

    बिहार के पश्चिम चंपारण में गिरफ्तार महिला को छुड़ाने 15-20 लोग नवलपुर थाने में घुसे और पुलिस से मारपीट की। 9 आरोपी गिरफ्तार, बाकी की तलाश जारी। जानिए घटना अब।

    बिहार: पश्चिम चंपारण जिले में गिरफ्तार एक महिला को पुलिस हिरासत से छुड़ाने की कोशिश ने नवलपुर थाने में हंगामा खड़ा कर दिया। मंगलवार रात करीब 9:40 बजे 15 से 20 लोग अचानक थाना परिसर में पहुंचे और जबरन OD यानी Officer on Duty कक्ष में घुस गए। पुलिस के मुताबिक, इस दौरान ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की, गाली-गलौज और मारपीट की गई। मौके से पुलिस ने 9 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि कई अन्य आरोपी फरार बताए जा रहे हैं।

    आखिर गिरफ्तार महिला कौन है?

    पूरी घटना की शुरुआत करीब 8:30 बजे हुई, जब नवलपुर थाना पुलिस ने चनपटिया थाना क्षेत्र के कैथवलिया गांव निवासी हरेंद्र साह की पत्नी किरण देवी को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, किरण देवी किशोरी के अपहरण से जुड़े एक मामले में पिछले करीब सात महीने से फरार चल रही थी।

    नवलपुर पुलिस ने चनपटिया पुलिस की मदद से उसे पकड़ा और फिर नवलपुर थाना लेकर आई। महिला को थाने में महिला पुलिसकर्मी की निगरानी में रखा गया था।

    इसके करीब कुछ देर बाद दो लोग थाना पहुंचे और गिरफ्तार महिला के बारे में पुलिस से उग्र तरीके से पूछताछ करने लगे। पुलिसकर्मियों ने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन आरोप है कि दोनों शांत नहीं हुए।

    फोन कर जुटाई भीड़

    पुलिस के अनुसार, दोनों लोगों ने मोबाइल फोन से संपर्क कर कुछ और लोगों को थाने पर बुला लिया। करीब आधे घंटे के अंदर 15 से 20 लोग मोटरसाइकिल से थाना परिसर के गेट पर पहुंच गए।

    इसके बाद भीड़ जबरन OD कक्ष में घुस गई।

    आरोप है कि वहां ड्यूटी पर तैनात सहायक अवर निरीक्षक मितेंद्र कुमार राम और महिला सिपाही रितु कुमारी के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट शुरू कर दी।

    बीच-बचाव करने पहुंचे दूसरे पुलिसकर्मियों के साथ भी हाथापाई किए जाने का आरोप है।

    पुलिस अधिकारी भी पहुंचे, फिर बढ़ गया विवाद

    थाने में हंगामे की सूचना मिलने के बाद अपर थानाध्यक्ष मुकेश कुमार पाल, सअनि आसिफ अली खान और अन्य पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे।

    पुलिस के मुताबिक, स्थिति संभालने और बीच-बचाव करने की कोशिश के दौरान उपद्रवियों ने उनके साथ भी मारपीट शुरू कर दी।

    इसके बाद पुलिस बल ने आत्मरक्षा और सरकारी काम जारी रखने के लिए आवश्यक बल का इस्तेमाल किया। कार्रवाई के दौरान मौके से 9 लोगों को पकड़ लिया गया।

    नवलपुर थाने से पकड़े गए 9 आरोपी कौन हैं?

    पुलिस ने जिन 9 लोगों को गिरफ्तार किया है, उनकी पहचान:

    • राजू कुमार
    • राम नारायण कुमार
    • प्रकाश कुमार
    • जितेश कुमार
    • मनीष कुमार
    • अनुपम कुमार
    • बलिराम कुमार
    • रवि कुमार
    • नवनीत कुमार

    के रूप में हुई है।

    पुलिस के मुताबिक, इनमें ज्यादातर आरोपी चनपटिया थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं। कुछ आरोपी मुफस्सिल और नवलपुर थाना क्षेत्र से भी बताए गए हैं।

    कितने लोग अभी फरार हैं?

    पुलिस के अनुसार, घटना के दौरान करीब 15 से 20 लोग थाना परिसर में पहुंचे थे। कार्रवाई के दौरान 9 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि करीब 5 से 10 अन्य लोग मौके से भाग निकले।

    नवलपुर थानाध्यक्ष देवेंद्र कुमार के मुताबिक, मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। फरार आरोपियों की पहचान की जा रही है और उनकी गिरफ्तारी के लिए आगे कार्रवाई की जाएगी।

    सात महीने से फरार महिला की गिरफ्तारी के बाद ही क्यों हुआ हंगामा?

    यह इस पूरे मामले का सबसे अहम हिस्सा है। पुलिस ने जिस महिला को गिरफ्तार किया था, वह किशोरी के अपहरण से जुड़े मामले में करीब सात महीने से फरार बताई जा रही है।

    ऐसे में पुलिस की कार्रवाई के बाद उसके बारे में जानकारी लेने के लिए पहले दो लोग थाने पहुंचे और फिर कुछ ही देर में बड़ी संख्या में लोग वहां जुट गए।

    हालांकि, इन लोगों ने किस वजह से महिला को छुड़ाने की कोशिश की और उन्हें गिरफ्तारी के बारे में क्या जानकारी दी गई थी, इसकी पूरी तस्वीर पुलिस जांच के बाद ही साफ होगी।

    नवलपुर में पुलिस पर हमले का यह पहला मामला नहीं

    नवलपुर थाना क्षेत्र में इससे पहले भी पुलिस टीम पर हमले की घटना सामने आ चुकी है। जून 2025 में एक आरोपी को पकड़ने गई पुलिस टीम पर उसके परिजनों और अन्य लोगों द्वारा हमला किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। उस घटना में नवलपुर थानाध्यक्ष देवेंद्र कुमार समेत कई पुलिसकर्मियों के घायल होने की बात सामने आई थी और पुलिस ने नामजद आरोपियों पर कार्रवाई की थी।

    ऐसे में मौजूदा घटना के बाद नवलपुर थाना क्षेत्र में पुलिस टीम की सुरक्षा और किसी आरोपी की गिरफ्तारी के बाद संभावित भीड़ को लेकर पुलिस की आगे की कार्रवाई भी महत्वपूर्ण होगी।

    अब आगे क्या होगा?

    फिलहाल पुलिस की कार्रवाई तीन स्तर पर आगे बढ़ेगी। एक तरफ गिरफ्तार किए गए 9 लोगों के खिलाफ दर्ज मामले में कानूनी प्रक्रिया चलेगी, दूसरी तरफ फरार लोगों की पहचान और गिरफ्तारी की कोशिश होगी।

    इसके साथ ही जिस किशोरी के अपहरण मामले में किरण देवी को गिरफ्तार किया गया है, उसकी जांच भी आगे बढ़ेगी।

    मामले में FIR की वास्तविक धाराएं, गिरफ्तार आरोपियों की कोर्ट में पेशी और फरार लोगों की गिरफ्तारी के बाद ही यह साफ होगा कि इस पूरे प्रकरण में आगे कितनी बड़ी कार्रवाई होती है।

    थाने में घुसकर पुलिस की कार्रवाई रोकने और हिरासत में रखे गए व्यक्ति को जबरन छुड़ाने की कोशिश ने इस मामले को सामान्य गिरफ्तारी से आगे बढ़ाकर law and order का मुद्दा बना दिया है। अब निगाह इस बात पर है कि पुलिस फरार आरोपियों तक कब पहुंचती है और मामले में आगे क्या कानूनी कार्रवाई होती है।

  • मेरठ में महिला दरोगा अनु रानी Suspend, वायरल वीडियो ने मचाई हलचल; QR Code को लेकर भी उठे सवाल

    मेरठ में महिला दरोगा अनु रानी Suspend, वायरल वीडियो ने मचाई हलचल; QR Code को लेकर भी उठे सवाल

    मेरठ में महिला दरोगा अनु रानी को वायरल वीडियो मामले में Suspend किया गया। Social Media Activity और QR Code को लेकर उठे सवालों की Cyber Cell जांच कर रही है।

    नई दिल्ली: मेरठ में महिला सब-इंस्पेक्टर अनु रानी से जुड़े सोशल मीडिया वीडियो को लेकर पुलिस विभाग ने बड़ा action लिया है। वायरल हो रहे आपत्तिजनक बताए जा रहे वीडियो और उनकी सोशल मीडिया activity को लेकर अनु रानी को suspend कर दिया गया है। अब इस पूरे मामले की departmental inquiry के साथ Cyber Cell भी जांच कर रही है।

    मामला सिर्फ एक वायरल वीडियो तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया पर उनके Live sessions, QR Code और कथित तौर पर पैसे मांगने को लेकर भी अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। हालांकि, इन सभी दावों को अभी official investigation से confirmed fact नहीं माना जा सकता। पुलिस की जांच का एक अहम हिस्सा यही पता करना है कि वायरल content असली है, edited है या उसके साथ किसी तरह की छेड़छाड़ की गई है।

    मेरठ में आखिर हुआ क्या?

    खबर के मुताबिक अनु रानी मेरठ पुलिस लाइंस में तैनात सब-इंस्पेक्टर थीं और सोशल मीडिया पर भी active थीं। उनकी online profiles पर fitness, gym और personal-life से जुड़ा content होने की जानकारी सामने आई है। खबरों के अनुसार उनके social-media profiles पर UP Police में सब-इंस्पेक्टर होने की पहचान भी दिखाई देती थी।

    इसी दौरान उनसे जुड़ा एक आपत्तिजनक बताया जा रहा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। मामले ने तेजी तब पकड़ी जब सोशल मीडिया पर इस content को लेकर सवाल उठाए गए और शिकायत की बात सामने आई।

    इसके बाद पुलिस विभाग ने मामले को serious मानते हुए अनु रानी को suspend कर दिया और जांच शुरू करा दी।

    Viral Video में क्या है और क्या दावा किया जा रहा है?

    इस मामले में सोशल मीडिया पर कई तरह की बातें चल रही हैं। इनमें कथित Live sessions, objectionable content और QR Code दिखाए जाने से जुड़े दावे शामिल हैं।

    लेकिन यहां एक बात समझना जरूरी है—सोशल मीडिया पर किसी दावे का वायरल होना उसकी official confirmation नहीं है।

    खास तौर पर QR Code को लेकर यह दावा किया जा रहा है कि उसके जरिए पैसे मांगे जाते थे। खबरों के अनुसार कुछ शिकायतों में QR Code का जिक्र है, लेकिन इससे वास्तव में पैसे मांगे गए या कोई payment हुआ, इसका स्वतंत्र और आधिकारिक confirmation अभी सामने नहीं आया है।

    Cyber Cell अब क्या जांचेगी?

    इस मामले में सबसे अहम हिस्सा Cyber investigation है। जांच सिर्फ यह देखने तक सीमित नहीं रहेगी कि वीडियो viral हुआ या नहीं।

    जांच में कई सवालों के जवाब तलाशे जा सकते हैं—

    • वीडियो का original source क्या है?
    • सबसे पहले इसे किस account से upload किया गया?
    • वायरल version original है या edited?
    • वीडियो में कोई manipulation या digital alteration हुई है या नहीं?
    • QR Code किस account से जुड़ा था?
    • वीडियो को social media पर बड़े स्तर पर किसने circulate किया?
    • वायरल content के पीछे original uploader और बाद में उसे फैलाने वाले लोग एक ही हैं या अलग?

    यानी अभी इस मामले का पूरा digital trail सामने आना बाकी है।

    खबर के अनुसार departmental inquiry की जिम्मेदारी सौम्या सिंह को दी गई है, जबकि cyber-related aspects की भी जांच की जा रही है।

    क्या वायरल वीडियो असली है?

    अभी इसका final answer नहीं है।

    यही इस खबर का सबसे important point है।

    वीडियो वायरल होने के बाद suspension जरूर हुआ है, लेकिन इससे यह automatically साबित नहीं होता कि वीडियो में किए जा रहे सभी दावे सही हैं।

    पुलिस की जांच यह भी देख रही है कि content genuine है या उसके साथ editing/manipulation की गई है। इसलिए official investigation पूरी होने से पहले वायरल वीडियो को final evidence मानना सही नहीं होगा।

    UP Police ने Social Media को लेकर पहले से सख्ती क्यों बढ़ाई है?

    मेरठ का यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब UP Police पिछले कुछ समय से अपने personnel की social-media activity को लेकर काफी strict हुई है।

    UP Police की Social Media Policy-2023 में पुलिसकर्मियों के social-media इस्तेमाल को लेकर कई restrictions और guidelines हैं। इसमें official work, police identity, confidential information और departmental image से जुड़ी online activity को लेकर सावधानी बरतने की बात कही गई है।

    इसके बाद 2026 में social-media violations को लेकर enforcement और ज्यादा दिखाई दी।

    मई 2026 में UP Police Headquarters ने objectionable posts और reels पर नजर रखने, violations का record रखने और departmental action की reporting को लेकर निर्देश जारी किए थे।

    इसके बाद duty के दौरान reels बनाने को लेकर भी police personnel को चेतावनी दी गई।

    यानी मेरठ की कार्रवाई को सिर्फ एक isolated incident की तरह देखना पूरी तस्वीर नहीं देता। यह UP Police में social-media discipline को लेकर बढ़ती सख्ती के broader trend का भी हिस्सा है।

    क्या पुलिसकर्मी Social Media चला ही नहीं सकते?

    ऐसा नहीं है।

    मुद्दा सिर्फ यह नहीं है कि कोई पुलिसकर्मी Instagram, YouTube या Facebook account रखता है या नहीं।

    असल सवाल यह है कि—

    वह क्या content डाल रहा है, किस situation में डाल रहा है, क्या वह uniform या official identity का इस्तेमाल कर रहा है, क्या departmental rules टूट रहे हैं और क्या उसकी online activity police की professional image को प्रभावित कर रही है।

    यही वजह है कि किसी police officer की personal social-media activity और उसकी सरकारी जिम्मेदारी के बीच balance महत्वपूर्ण हो जाता है।

    क्या Suspension का मतलब नौकरी चली गई?

    नहीं।

    Suspension को सीधे dismissal या नौकरी से बर्खास्तगी नहीं माना जाता। यह departmental proceedings के दौरान की जाने वाली कार्रवाई हो सकती है।

    इस मामले में आगे क्या होगा, यह जांच रिपोर्ट और सामने आने वाले facts पर depend करेगा।

    अगर investigation में departmental violation साबित होता है तो आगे नियमों के मुताबिक कार्रवाई हो सकती है। वहीं अगर वायरल content को लेकर कोई बड़ा digital manipulation सामने आता है तो investigation का focus दूसरे लोगों और उसके source/circulation की तरफ भी जा सकता है।

    इसलिए अभी final punishment को लेकर कोई conclusion निकालना जल्दबाजी होगी।

    अगर वीडियो Fake या Edited निकला तो?

    यह सवाल इस मामले में खास तौर पर important है।

    अगर Cyber Cell को पता चलता है कि वीडियो digitally manipulated था, तो investigation का focus यह पता लगाने पर जा सकता है कि original content क्या था, उसमें किसने बदलाव किया और manipulated version को viral किसने किया।

    यानी उस स्थिति में कहानी सिर्फ police officer की departmental conduct की नहीं रहेगी, बल्कि digital manipulation और content circulation की भी हो जाएगी।

    लेकिन फिलहाल ऐसा हुआ है, यह कहना भी जल्दबाजी होगी। इसकी पुष्टि investigation के बाद ही हो सकेगी।

    अगर वीडियो Genuine निकला तो?

    अगर investigation में content और उससे जुड़ी social-media activity को genuine पाया जाता है, तो departmental inquiry यह देखेगी कि इसमें कौन-कौन से service rules या social-media guidelines लागू होते हैं।

    इसके बाद suspension के आगे भी departmental action की संभावना rules और inquiry findings पर depend करेगी।

    इसलिए अभी सबसे महत्वपूर्ण चीज है—investigation report।

    क्या वीडियो वायरल करने वालों पर भी Action हो सकता है?

    यह भी जांच का अहम हिस्सा है।

    अगर Cyber Cell सिर्फ officer की social-media activity नहीं बल्कि वीडियो के source और circulation की भी जांच कर रही है, तो यह पता लगाना जरूरी होगा कि content originally कहां से आया और किस तरह बड़े स्तर पर circulate हुआ।

    अगर investigation में कोई अलग digital offence सामने आता है, तो उसके आधार पर संबंधित लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।

    लेकिन फिलहाल किसी व्यक्ति को दोषी बताना सही नहीं होगा जब तक official investigation उसके खिलाफ कोई निष्कर्ष नहीं देती।

    क्या 2026 में ऐसे और Police Social Media Cases सामने आए हैं?

    मेरठ का मामला अकेला नहीं है।

    2026 में अलग-अलग राज्यों में police personnel से जुड़े reels, objectionable videos और viral-content मामलों में departmental action की खबरें सामने आई हैं।

    बिहार में एक महिला थाना SHO पर social-media reels से जुड़ी कार्रवाई हुई। उत्तर प्रदेश के मऊ में भी duty के दौरान reel को लेकर महिला police personnel के suspension की रिपोर्ट सामने आई। दूसरी तरफ UP में ऐसे मामले भी सामने आए जहां police misconduct का वीडियो viral होने के बाद संबंधित personnel पर action हुआ।

    इन मामलों को एक साथ देखने पर साफ है कि police departments के लिए social media अब सिर्फ personal entertainment का मामला नहीं रह गया है। यह discipline, public image और accountability से भी जुड़ चुका है।

    इस मामले का Police की Image पर क्या असर पड़ सकता है?

    Police और public के बीच trust बहुत important है।

    अगर किसी serving officer से जुड़ा genuine misconduct सामने आता है, तो लोगों के बीच police department की image पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

    लेकिन इसका दूसरा side भी उतना ही important है।

    अगर कोई manipulated या fake video किसी officer को बदनाम करने के लिए viral किया जाता है, तो बिना verification के उसे सच मान लेना भी public trust के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

    यानी इस तरह के मामले में तीन चीजों का balance जरूरी है—

    Accountability, Privacy और Verification.

    इसी वजह से मेरठ मामले में Cyber Cell की जांच सिर्फ departmental action के लिए नहीं, बल्कि वायरल content की वास्तविकता समझने के लिए भी महत्वपूर्ण है।

    महिला Police Officer से जुड़े मामले में Privacy क्यों जरूरी है?

    सोशल मीडिया पर किसी महिला officer से जुड़ा objectionable content viral होने के बाद मामला अक्सर professional conduct से हटकर personal और abusive commentary तक पहुंच जाता है।

    अब मेरठ मामले में आगे क्या होगा?

    फिलहाल तीन चीजों पर नजर रहेगी—

    पहला: Cyber Cell की जांच में वायरल वीडियो की authenticity और digital trail को लेकर क्या सामने आता है।

    दूसरा: सौम्या सिंह की departmental inquiry में अनु रानी की social-media activity और alleged violations को लेकर क्या findings आती हैं।

    तीसरा: जांच के बाद suspension के आगे कोई departmental action होता है या मामला किसी दूसरे digital angle में बदलता है।

    इसलिए फिलहाल इस मामले का final conclusion निकालना जल्दबाजी होगी।

    मेरठ में महिला SI अनु रानी का suspension हो चुका है, लेकिन इस कहानी का सबसे बड़ा सवाल अभी बाकी है—वायरल content की असली कहानी क्या है? इसका जवाब अब Cyber Cell और departmental inquiry की रिपोर्ट से सामने आएगा।

  • Bigg Boss फेम के घर ₹1 करोड़ की चोरी, आरोपी दरभंगा से गिरफ्तार; ₹51 लाख बरामद

    Bigg Boss फेम के घर ₹1 करोड़ की चोरी, आरोपी दरभंगा से गिरफ्तार; ₹51 लाख बरामद

    Bigg Boss फेम लोपामुद्रा राउत के घर ₹1 करोड़ की चोरी का आरोपी दरभंगा से गिरफ्तार। पुलिस ने ₹51 लाख की नकदी और कीमती सामान बरामद किया।

    मुंबई: फिल्म अभिनेत्री और मॉडल लोपामुद्रा राउत के मुंबई स्थित घर में हुई करीब ₹1 करोड़ की चोरी के मामले में मुंबई पुलिस ने बिहार के दरभंगा से एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान चंदन मुखिया के रूप में हुई है, जो दरभंगा जिले के सोनकी थाना क्षेत्र के गोठ मिट्टी गांव का रहने वाला बताया गया है।

    मुंबई पुलिस की टीम ने दरभंगा पुलिस के सहयोग से कार्रवाई करते हुए आरोपी को पकड़ा। उसके पास से महंगी घड़ी, सोने के बिस्किट और नकदी समेत चोरी से जुड़ी करीब ₹51 लाख की संपत्ति बरामद होने की जानकारी सामने आई है।

    सांताक्रूज पुलिस थाने में दर्ज हुई थी FIR

    लोपामुद्रा राउत के घर चोरी के बाद मुंबई के सांताक्रूज पुलिस थाने में FIR दर्ज कराई गई थी। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।

    जांच के दौरान तकनीकी जानकारी, मोबाइल फोन और लोकेशन से जुड़े सुरागों के आधार पर पुलिस आरोपी तक पहुंची। जांच की कड़ी बिहार के दरभंगा तक पहुंचने के बाद मुंबई पुलिस की टीम वहां गई और स्थानीय पुलिस के सहयोग से सोनकी थाना क्षेत्र में छापेमारी कर चंदन मुखिया को गिरफ्तार किया गया।

    वेंटिलेटर के रास्ते घर में घुसने का दावा

    पुलिस जांच से जुड़ी अहम कड़ी के अनुसार, आरोपी ने अभिनेत्री के घर में वेंटिलेटर के रास्ते प्रवेश किया था। बताया गया है कि वारदात से पहले घर की रेकी की गई थी और आरोपी ने कथित तौर पर यह सुनिश्चित किया कि घर में कोई मौजूद न हो।

    सांताक्रूज पुलिस से मिली जानकारी में यह भी बताया गया है कि आरोपी बंद घरों की रेकी करता था। इसी दौरान उसकी नजर लोपामुद्रा राउत के सांताक्रूज स्थित घर पर पड़ी। इसके बाद कथित तौर पर मौका देखकर चोरी की वारदात को अंजाम दिया गया।

    ₹12.50 लाख की लग्जरी घड़ी और सोने के बिस्किट बरामद

    दरभंगा में गिरफ्तारी के बाद आरोपी के पास से चोरी से जुड़ी कई कीमती वस्तुएं बरामद होने की बात सामने आई है। इनमें करीब ₹12.50 लाख कीमत की लग्जरी घड़ी, लगभग ₹30 लाख मूल्य के दो सोने के बिस्किट और करीब ₹9 लाख नकद शामिल बताए गए हैं।

    मिली जानकारी में इन बरामद वस्तुओं और नकदी की कुल कीमत कभी करीब ₹51 लाख बता रही है। तो कभी पुलिस सूत्रों में कभी करीब ₹50 लाख के सामान और ₹9 लाख नकद बरामद होने का उल्लेख किया जा रहा है।

    हालांकि, चोरी की पूरी रकम और संपत्ति की बरामदगी अभी नहीं हुई है। पुलिस अन्य सामानों का पता लगाने में जुटी है।

    चोरी की रकम से जमीन खरीदने की भी जांच

    जांच में आरोपी के बिहार कनेक्शन के सामने आने के बाद पुलिस ने उसके आर्थिक लेन-देन की भी पड़ताल की। वहीं पुलिस सूत्रों के अनुसार, चंदन मुखिया ने कथित तौर पर चोरी के पैसों का इस्तेमाल अपनी बहन के नाम पर करीब दो कट्ठा जमीन खरीदने में किया।

    इस जमीन की खरीद से जुड़े मामले में सोनकी थाना क्षेत्र के देकुली बाजार के एक हार्डवेयर व्यवसायी कैलाश साह से भी पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आई है।

    पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि चोरी की रकम का इस्तेमाल किन-किन जगहों पर किया गया और इस पूरी प्रक्रिया में आरोपी के साथ कोई अन्य व्यक्ति शामिल था या नहीं।

    ज्वेलरी कारोबारी से पूछताछ के बाद सोने के बिस्किट मिले

    खबर के मुताबिक, जांच के दौरान पुलिस ने एक ज्वेलरी कारोबारी से भी पूछताछ की। इसके बाद दो सोने के बिस्किट बरामद किए गए।

    इन दोनों बिस्किट की कीमत करीब ₹30 लाख बताई गई है। इसके अलावा आरोपी के पास से महंगी घड़ी और नकदी बरामद होने की बात सामने आई है।

    मुंबई से दरभंगा तक पहुंची पुलिस की जांच

    इस मामले में मुंबई पुलिस ने तकनीकी जांच के जरिए आरोपी की गतिविधियों का पता लगाया। मोबाइल लोकेशन और अन्य तकनीकी सुरागों के आधार पर जांच दरभंगा तक पहुंची।

    इसके बाद मुंबई पुलिस की टीम ने दरभंगा की स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर कार्रवाई की। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को मुंबई लाने के लिए ट्रांजिट रिमांड की प्रक्रिया किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

    करीब ₹1 करोड़ की चोरी, आधे से ज्यादा रकम की बरामदगी

    लोपामुद्रा राउत के घर से चोरी की कुल कीमत करीब ₹1 करोड़ बताई गई है। अब तक सामने आई जानकारी के अनुसार, पुलिस करीब ₹51 लाख की संपत्ति और नकदी बरामद कर चुकी है।

    बरामदगी में लग्जरी घड़ी, सोने के बिस्किट और नकदी शामिल हैं। पुलिस अब चोरी की बाकी संपत्ति का पता लगाने के साथ-साथ यह भी जांच कर रही है कि चोरी की रकम को कहां-कहां इस्तेमाल किया गया।

    आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब मामले में उसके संभावित सहयोगियों और चोरी के पूरे नेटवर्क की भी जांच कर रही है। मामले की आगे की जांच जारी है।

  • PM Kisan 2026 Registration: Easy Way to Get ₹6,000

    PM Kisan 2026 Registration: Easy Way to Get ₹6,000

    PM Kisan 2026 Registration complete guide. Check online apply process, e-KYC, Farmer ID, 23rd installment date, status check & documents

    PM Kisan Yojana 2026 Registration: Complete Step-by-Step Guide for New Farmers

    Pradhan Mantri Kisan Samman Nidhi has become one of the biggest financial support schemes for farmers in India. Under this scheme, eligible farmers receive ₹6,000 every year directly into their bank accounts through DBT (Direct Benefit Transfer).

    If you want to complete PM Kisan Registration 2026, update e-KYC, check Farmer ID, track beneficiary status, or know the expected 23rd installment date, this detailed guide covers everything in simple language.

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    Many farmers face problems during Aadhaar verification, bank account seeding, land record validation, and e-KYC completion. Therefore, this article explains the complete process along with rejection reasons, troubleshooting solutions, state-wise requirements, and official support links.

    What is PM Kisan Yojana?

    Ministry of Agriculture and Farmers Welfare launched PM Kisan Samman Nidhi Yojana to provide financial support to small and marginal farmers across India.

    Under this scheme:

    • Farmers receive ₹6,000 every year
    • The amount is paid in 3 installments
    • Each installment is ₹2,000
    • Money is transferred directly through DBT
    • e-KYC is mandatory

    PM Kisan Quick Overview

    DetailsInformation
    Scheme NamePM Kisan Samman Nidhi Yojana
    Launched ByGovernment of India
    Annual Benefit₹6,000
    Payment MethodDBT
    Official PortalPM Kisan Official Portal
    Registration ModeOnline / CSC
    e-KYC RequirementMandatory

    PM Kisan 2026 Eligibility Criteria

    Before applying, farmers must check the latest eligibility rules carefully.

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    Who Can Apply?

    • Small and marginal farmers
    • Farmers owning agricultural land
    • Rural and urban farmers
    • Farmers with Aadhaar-linked bank accounts
    • Farmers whose land records are updated in state databases

    Who Cannot Apply?

    Ineligible CategoryReason
    Income Tax PayersExcluded from scheme
    Government EmployeesExcept Group D staff
    Doctors, Engineers, CA, LawyersProfessional category
    Pensioners receiving ₹10,000+ monthlyNot eligible
    Institutional LandholdersExcluded category

    Documents Required for PM Kisan Registration 2026

    DocumentPurpose
    Aadhaar CardIdentity verification
    Bank PassbookAccount number and IFSC
    Land RecordsProof of land ownership
    Mobile NumberOTP authentication
    Passport PhotoRegistration form
    Farmer ID (if available)Status tracking

    Important Note

    The name on Aadhaar and the bank account must match exactly. Most applications are rejected because of name mismatch errors.

    How to Register for PM Kisan Yojana 2026 Online

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    Official Registration Link

    PM Kisan New Farmer Registration Form

    Step-by-Step Registration Process

    1. Open the PM Kisan portal
    2. Go to “Farmer Corner”
    3. Click on “New Farmer Registration”
    4. Select Rural or Urban Farmer
    5. Enter Aadhaar Number
    6. Complete OTP verification
    7. Fill personal details
    8. Enter bank account and IFSC code
    9. Add land details
    10. Submit the application

    What to Do After Registration?

    • Save your registration number
    • Complete e-KYC immediately
    • Check beneficiary status regularly

    PM Kisan Registration Through CSC Center

    Farmers facing Aadhaar OTP or biometric issues can visit the nearest Common Service Centre (CSC).

    Benefits of CSC Registration

    • Biometric authentication support
    • Instant verification
    • e-KYC assistance
    • Land record guidance
    • Error correction support

    PM Kisan Mobile App Registration

    The government has also launched the official PM Kisan mobile application.

    PMKISAN GoI App on Google Play

    Features Available in the App

    • New Registration
    • e-KYC
    • Beneficiary Status Check
    • Installment Tracking
    • Farmer ID Access

    Website vs Mobile App Comparison

    FeatureWebsiteMobile App
    RegistrationYesYes
    e-KYCYesYes
    Status CheckYesYes
    Language SupportLimitedMultiple Languages
    Beginner FriendlyMediumEasy

    PM Kisan e-KYC 2026 Complete Guide

    Without e-KYC, farmers cannot receive installments. The government has made e-KYC mandatory for all beneficiaries.

    Online e-KYC Process

    1. Open the PM Kisan portal
    2. Go to the e-KYC section
    3. Enter Aadhaar Number
    4. Verify OTP
    5. Submit successfully

    Common e-KYC Problems and Solutions

    ProblemSolution
    OTP not receivedCheck Aadhaar-linked mobile number
    Aadhaar authentication failedUpdate Aadhaar details
    Name mismatchMatch Aadhaar and bank details
    Biometric failedVisit nearest CSC center

    Aadhaar Update Link

    UIDAI Official Website

    What is Farmer ID (FID)?

    Farmer ID or FID is a unique identification number generated after successful PM Kisan registration and verification.

    Why is Farmer ID Important?

    • Installment tracking
    • Beneficiary verification
    • Future government scheme integration
    • DBT payment validation

    How to Check Farmer ID?

    • Open PM Kisan portal
    • Go to “Know Your Registration”
    • Enter Aadhaar or Mobile Number
    • Verify OTP
    • View Farmer ID details

    PM Kisan Beneficiary Status Check 2026

    Official Status Check Link

    PM Kisan Beneficiary Status Page

    Steps to Check Status

    1. Enter Registration Number
    2. Verify OTP
    3. View payment history
    4. Check installment details

    Common PM Kisan Registration Rejection Reasons

    Many farmers complete registration but still do not receive installments. Below are the most common reasons.

    Rejection ReasonSolutionExpected Time
    Aadhaar-bank name mismatchUpdate bank records7–15 days
    Wrong IFSC CodeCorrect details online2–7 days
    Land record issueContact local revenue office15–30 days
    e-KYC incompleteComplete OTP or biometric e-KYCImmediate
    Aadhaar not linked to bankRequest Aadhaar seeding3–7 days

    State-Wise PM Kisan Registration Requirements

    Different states may require additional land verification.

    StatePortal
    Uttar PradeshUP Agriculture Portal
    BiharDBA Agriculture Portal
    MaharashtraMahabhulekh
    RajasthanApna Khata
    Madhya PradeshMP Bhulekh

    Maharashtra Farmers

    Farmers in Maharashtra should keep updated 7/12 extracts from Mahabhulekh records for smooth verification.

    What is DBT in PM Kisan?

    DBT (Direct Benefit Transfer) means the government transfers installment money directly into the farmer’s Aadhaar-linked bank account.

    Benefits of DBT

    • Faster payment
    • No middlemen
    • Transparent system
    • Secure transactions

    How to Make Your Bank Account DBT Ready

    • Link Aadhaar with bank account
    • Keep mobile number active
    • Verify IFSC code carefully
    • Ensure account is operational

    PM Kisan 23rd Installment 2026 Expected Date

    The expected 23rd installment of PM Kisan Yojana may be released between June and July 2026. Farmers should complete e-KYC before the official release date.

    Previous Installment History

    InstallmentRelease Period
    20th InstallmentFebruary 2025
    21st InstallmentJuly 2025
    22nd InstallmentMarch 2026
    23rd InstallmentExpected June–July 2026

    What to Do If PM Kisan Installment Is Delayed?

    If your payment is delayed, follow these steps carefully.

    1. Check beneficiary status
    2. Verify e-KYC completion
    3. Confirm Aadhaar-bank linking
    4. Check IFSC code
    5. Contact PM Kisan helpline
    6. Contact State Nodal Officer

    PM Kisan Helpline Numbers

    Support TypeDetails
    PM Kisan Helpline155261 / 011-24300606
    Email Supportpmkisan-ict@gov.in
    Official WebsitePM Kisan Portal
    Agriculture MinistryMinistry of Agriculture and Farmers Welfare

    Frequently Asked Questions (FAQ)

    How do I register for PM Kisan Yojana 2026?

    Visit the official PM Kisan portal, open Farmer Corner, click New Farmer Registration, enter Aadhaar details, complete OTP verification, fill the form, and submit the application.

    What documents are required for PM Kisan registration?

    You need Aadhaar Card, bank passbook, land records, Aadhaar-linked mobile number, and passport-size photo.

    What is Farmer ID in PM Kisan?

    Farmer ID is a unique identification number generated after successful registration and verification.

    Why is my PM Kisan installment not coming?

    The most common reasons are incomplete e-KYC, Aadhaar mismatch, bank seeding issues, incorrect IFSC code, or pending land verification.

    Is e-KYC mandatory for PM Kisan?

    Yes. Farmers must complete e-KYC to continue receiving installments.

    Can urban farmers apply for PM Kisan?

    Yes. Urban farmers owning cultivable agricultural land can apply.

    How can I check PM Kisan beneficiary status?

    Visit the beneficiary status page, enter your registration number, verify OTP, and check your payment details.

    When will the 23rd installment be released?

    The 23rd installment is expected between June and July 2026.

    Conclusion

    PM Kisan Yojana 2026 continues to provide major financial support to eligible farmers across India. However, successful registration now depends heavily on correct Aadhaar details, updated land records, completed e-KYC, and proper bank verification.

    Farmers should always use the official portal for registration and status checks. Completing e-KYC on time, verifying Farmer ID, and checking beneficiary status regularly can help avoid payment delays and rejection issues.

    For the safest experience, always verify updates only through the official PM Kisan portal and government sources.

    Recommended Official Links

    Disclaimer: This article is published for educational and informational purposes only. We are not associated with the Government of India or the official PM Kisan portal. Farmers are advised to verify all information through the official website.

    Do Follow Links:
    PM Kisan Official Portal
    Ministry of Agriculture

    No Follow Links:
    UIDAI
    India.gov.in

  • Ayushman Card Apply Online 2026: Fast ₹5 Lakh Guide

    Ayushman Card Apply Online 2026: Fast ₹5 Lakh Guide

    Apply for Ayushman Card online in 2026 using portal, app, CSC or hospital. Check eligibility, documents, status and download card fast.

    Ayushman Card Apply Online 2026: Complete Step-by-Step Guide

    Last Updated: 2026

    The Ayushman Card has become one of the most important healthcare benefits for millions of Indian families. Under the Pradhan Mantri Jan Arogya Yojana (PM-JAY), eligible families can receive up to ₹5 lakh per year for cashless treatment at empanelled hospitals across India.

    In 2026, the online application process is much faster and easier. You can now apply through the official portal, mobile app, CSC center, or hospital-based Ayushman Mitra service.

    This guide explains everything in a simple step-by-step format, including eligibility, required documents, application methods, status check, card download process, hospital usage, and solutions for common problems.

    read also- राज्य सरकार का बड़ा फैसला: मुंबई के नागरिक अब किसी भी स्टाम्प ऑफिस में करा सकेंगे दस्तावेज़ों की एंट्री

    Quick Answer: How to Apply for Ayushman Card Online

    To apply for Ayushman Card online:

    1. Visit beneficiary.nha.gov.in
    2. Log in using your mobile number and OTP
    3. Select your state and PMJAY scheme
    4. Search using Aadhaar number
    5. Click “Do e-KYC”
    6. Complete Aadhaar OTP verification
    7. Download your Ayushman Card PDF

    What Is Ayushman Card?

    National Health Authority manages the Ayushman Bharat PM-JAY scheme, which provides free health insurance coverage to eligible families.

    The scheme offers:

    • ₹5 lakh annual health coverage
    • Cashless treatment
    • Coverage at government and private hospitals
    • Nationwide portability
    • Coverage for pre-existing diseases
    • 1,900+ medical procedures

    The Ayushman Card is also called:

    • PMJAY Card
    • Golden Card
    • Ayushman Bharat Card

    Ayushman Card Eligibility 2026

    Eligibility is mainly based on SECC 2011 data and state-specific rules.

    Rural Eligibility Criteria

    The following rural families are generally eligible:

    • Landless laborers
    • Families living in kutcha houses
    • SC/ST households
    • Female-headed households
    • Families with disabled members
    • Daily wage workers

    Urban Eligibility Categories

    read also- BMC का हेल्थ चॅटबॉट लॉन्च, मुंबईकरों को मिलेगी डिजिटल स्वास्थ्य सुविधा

    Urban workers in these occupations may qualify:

    • Drivers
    • Construction workers
    • Domestic workers
    • Street vendors
    • Plumbers
    • Electricians
    • Sanitation workers
    • Rickshaw pullers

    Ayushman Vaya Vandana Card for Senior Citizens (70+)

    The government expanded PMJAY benefits for citizens aged 70 years and above.

    Under the Ayushman Vaya Vandana Card:

    • All citizens aged 70+ can apply
    • Income limit is not mandatory
    • Additional healthcare support is available
    • Aadhaar-based e-KYC is required

    Who Is Not Eligible?

    These categories are usually excluded:

    • Income tax payers
    • Government employees
    • Owners of large agricultural land
    • High-income households
    • Owners of four-wheelers in certain categories
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    Documents Required for Ayushman Card

    DocumentMandatoryPurpose
    Aadhaar CardYesIdentity verification
    Mobile NumberYesOTP verification
    Ration CardRecommendedFamily verification
    Address ProofYesResidence verification
    Passport PhotoSometimesCard generation
    Family ID / PPPState specificAdditional verification

    How to Apply for Ayushman Card Online 2026

    Apply for Ayushman Card

    Method 1: Apply Through Official Website

    This is the fastest and most trusted method.

    Step 1: Open Official Portal

    Visit:

    • beneficiary.nha.gov.in
    • pmjay.gov.in

    Step 2: Enter Mobile Number

    Type your mobile number and verify using OTP.

    Step 3: Select State and Scheme

    Choose:

    • State
    • PMJAY Scheme

    Step 4: Search Beneficiary Details

    Search using:

    • Aadhaar Number
    • Family ID
    • Mobile Number

    Step 5: Click “Do e-KYC”

    This step verifies your identity.

    Step 6: Complete Aadhaar OTP Verification

    Enter OTP and provide consent.

    Step 7: Download Ayushman Card

    Once approved, download your PDF card instantly.

    Method 2: Apply Using Ayushman App

    Ayushman App allows users to complete the entire process from mobile.

    App Application Process

    1. Install the app
    2. Log in with OTP
    3. Search beneficiary details
    4. Complete face authentication
    5. Finish e-KYC
    6. Download card

    Method 3: Apply Through CSC Center

    CSC centers help users who are not comfortable with online applications.

    CSC Application Process

    Carry:

    • Aadhaar Card
    • Ration Card
    • Mobile Number

    The CSC operator will:

    • Verify eligibility
    • Complete biometric verification
    • Generate the card

    Service charges may range between ₹10–₹30.

    Method 4: Apply Through Ayushman Mitra at Hospital

    Many empanelled hospitals provide Ayushman Mitra support.

    Ayushman Bharat Pradhan Mantri Jan Arogya Yojana hospital representatives help with:

    • Eligibility verification
    • e-KYC
    • Card generation
    • Hospital registration support

    State-Wise Ayushman Card Application

    read also- Passport Rule 2025: Birth Certificate पर बड़ा सच, वायरल खबरों का पूरा पर्दाफाश

    Uttar Pradesh

    Official portal:

    • ayushmanup.in

    Bihar

    NFSA-based verification is widely used in Bihar.

    Delhi

    Residents can use the national PMJAY portal directly.

    Maharashtra

    National portal support is available for Maharashtra residents.

    Karnataka

    Karnataka integrates PMJAY with Arogya Karnataka services.

    How to Check Ayushman Card Status

    Status Check Process

    1. Visit beneficiary.nha.gov.in
    2. Log in using OTP
    3. Search beneficiary details
    4. Check application status

    Possible status types:

    • Generated
    • Pending
    • Rejected

    How to Download Ayushman Card PDF

    Download Process

    1. Log in to the portal
    2. Search beneficiary details
    3. Click “Download Card”
    4. Save PDF copy

    Common Problems and Solutions

    read also- MHADA Lottery 2026: मुंबई में 2,640 सस्ते घर, 30 मार्च से आवेदन शुरू

    Name Not Found in Beneficiary List

    If your name is missing:

    • Visit nearest CSC
    • Submit grievance request
    • Contact State Health Agency

    OTP Not Received

    Solutions:

    • Check network signal
    • Verify Aadhaar-linked number
    • Retry after a few minutes

    e-KYC Failed

    Common reasons:

    • Aadhaar mismatch
    • Incorrect date of birth
    • Low face matching score

    Solutions:

    • Update Aadhaar details
    • Upload clear photo
    • Retry authentication

    How Long Does It Take?

    MethodApproximate Time
    Online Portal10–15 Minutes
    Mobile App10 Minutes
    CSC Center20–30 Minutes
    Grievance Process15–30 Days

    How to Use Ayushman Card at Hospitals

    After generating your card:

    1. Visit an empanelled hospital
    2. Show Ayushman Card at help desk
    3. Complete verification
    4. Receive cashless treatment

    How to Find Empanelled Hospitals

    PMJAY Hospital Search

    Search by:

    • State
    • District
    • Specialty

    Ayushman Card Benefits

    BenefitDetails
    Annual Coverage₹5 Lakh
    Cashless TreatmentYes
    Private Hospital AccessYes
    Nationwide ValidityYes
    Pre-existing DiseasesCovered

    What Is Not Covered?

    Certain treatments are excluded:

    • Cosmetic surgery
    • Fertility treatments
    • OPD services
    • Non-medical expenses

    Ayushman Card vs Private Health Insurance

    FeatureAyushman CardPrivate Insurance
    PremiumFreePaid
    Coverage₹5 LakhDepends on policy
    EligibilityLimitedOpen to all
    HospitalsEmpanelled onlyNetwork hospitals

    Difference Between ABHA Card and Ayushman Card

    Ayushman Bharat Digital Mission introduced the ABHA Card system.

    Ayushman CardABHA Card
    Health insurance benefitDigital health ID
    ₹5 lakh treatment coverageMedical record storage
    PMJAY scheme basedABDM platform based

    Official Ayushman Card Helpline Numbers

    National Helpline

    • 14555

    Alternate Helpline

    • 1800-111-565

    Senior Citizen Support

    • 1800-110-770

    Frequently Asked Questions

    How to apply for Ayushman Card online in 2026?

    Visit beneficiary.nha.gov.in, log in using OTP, complete e-KYC, and download your card.

    Can I apply using mobile phone?

    Yes, you can apply using the official Ayushman App.

    Is Ayushman Card valid in private hospitals?

    Yes, it is valid at empanelled private hospitals.

    How to check eligibility?

    Use Aadhaar number or mobile number on the beneficiary portal.

    What is Ayushman Vaya Vandana Card?

    It is a special healthcare card for senior citizens aged 70 years and above.

    Can I use the card in another state?

    Yes, PMJAY provides nationwide portability.

    What if my name is missing?

    Visit CSC center or file grievance through the official portal.

    Is Aadhaar mandatory?

    Yes, Aadhaar verification is usually required.

    Conclusion

    The Ayushman Card application process in 2026 is simpler, faster, and more accessible than before. Whether you apply through the official portal, mobile app, CSC center, or hospital, the process can usually be completed within minutes if your documents are ready.

    Always use official government portals and trusted sources while applying. Keep your Aadhaar details updated and complete e-KYC carefully to avoid rejection.

    Disclaimer: This article is for informational purposes only. Please verify all updates through official government portals before applying.

    DoFollow References: PMJAY Official Portal, NHA Beneficiary Portal

    NoFollow References: Hospital Search, CSC Locator