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रणबीर कपूर और यश की Ramayana: Part One की worldwide advance booking ₹115 करोड़ पार। जानें भारत की टिकट बिक्री, Toxic से मुकाबला और ओपनिंग कलेक्शन का अनुमान।
रणबीर कपूर और यश स्टारर फिल्म Ramayana: Part One की worldwide advance booking रिलीज से दो दिन पहले ₹115 करोड़ के पार पहुंच गई है। नितेश तिवारी के निर्देशन में बनी इस फिल्म को भारत के साथ विदेशी बाजारों में भी अच्छी टिकट बिक्री मिल रही है। हालांकि, भारत में पहले दिन की एडवांस बुकिंग अभी ₹40 करोड़ के आंकड़े तक नहीं पहुंची है।
5 नवंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही इस फिल्म के लिए 4 नवंबर को अमेरिका में पेड प्रीव्यू शो भी रखे गए हैं। फिल्म की एडवांस बुकिंग में तेजी के बीच अब इसकी ओपनिंग बॉक्स ऑफिस कमाई और यश की Toxic तथा दूसरी बड़ी फिल्मों के रिकॉर्ड से मुकाबले पर नजर है।
Ramayana की भारत में पहले दिन की एडवांस बुकिंग कितनी हुई?
3 नवंबर दोपहर 12 बजे तक उपलब्ध टिकट बिक्री के आंकड़ों के अनुसार, Ramayana: Part One ने भारत में पहले दिन के लिए ₹32.59 करोड़ की एडवांस बुकिंग ग्रॉस दर्ज की। इस दौरान 20,159 शो में लगभग 8.16 लाख टिकट बिक चुके थे। ब्लॉक सीटों को हटाने के बाद पहले दिन की एडवांस बुकिंग ₹27.34 करोड़ रही।
फिल्म की पहले चार दिनों की घरेलू एडवांस बुकिंग ₹75.56 करोड़ तक पहुंच गई, जिसमें ब्लॉक सीटें शामिल हैं। ब्लॉक सीटों के बिना यह आंकड़ा ₹60.09 करोड़ रहा। इन चार दिनों के लिए लगभग 61,835 शो में 19.13 लाख टिकटों की बिक्री दर्ज की गई।
दुनिया भर में ₹115 करोड़ की एडवांस बुकिंग
Ramayana की वैश्विक एडवांस बुकिंग में विदेशी बाजारों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। विदेशों में टिकटों की प्री-सेल्स ₹40 करोड़ से अधिक बताई गई है। इसके साथ भारत और विदेशों की ओपनिंग वीकेंड बुकिंग को मिलाकर फिल्म का worldwide advance booking gross ₹115 करोड़ से ऊपर पहुंच गया है।
नॉर्थ अमेरिका में फिल्म की टिकट बिक्री खास चर्चा में है। अमेरिका में 4 नवंबर को होने वाले पेड प्रीव्यू के लिए 51,000 से अधिक टिकट बिकने की जानकारी सामने आई है। इन प्रीव्यू शो की बिक्री से फिल्म को रिलीज से पहले ही अतिरिक्त कमाई का अवसर मिल रहा है।
विदेशों में अमेरिका के अलावा ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन जैसे बाजारों से भी एडवांस बुकिंग में योगदान मिला है।
हिंदी के अलावा कन्नड़ और तेलुगु में भी टिकटों की बिक्री
Ramayana को हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम भाषाओं में रिलीज किया जाना है। भारत में हिंदी संस्करण एडवांस बुकिंग के मामले में सबसे आगे है।
भाषा के अनुसार उपलब्ध एडवांस बुकिंग ग्रॉस के आंकड़े इस प्रकार हैं:
भाषा
एडवांस बुकिंग
हिंदी
₹59.60 करोड़
कन्नड़
₹6.06 करोड़
तेलुगु
₹5.37 करोड़
तमिल
₹1.01 करोड़
मलयालम
₹22.27 लाख
इन आंकड़ों में बुकिंग के समय और ब्लॉक सीटों के आधार पर बदलाव हो सकता है। हिंदी संस्करण की मजबूत बिक्री के साथ कन्नड़ और तेलुगु बाजार भी फिल्म के शुरुआती प्रदर्शन में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
रणबीर कपूर की Ramayana और यश की Toxic में किसका पलड़ा भारी?
Ramayana की एडवांस बुकिंग के बीच यश की Toxic के साथ तुलना भी चर्चा में है। शुरुआती एडवांस बुकिंग के दौरान Ramayana की बिक्री Toxic से पीछे बताई गई थी। लेकिन रिलीज से पहले पिछले कुछ दिनों में Ramayana की टिकट बिक्री में तेजी आई है।
दोनों फिल्मों के आंकड़ों की तुलना करते समय बुकिंग की अवधि और बाजार को ध्यान में रखना जरूरी है। Ramayana की ₹115 करोड़ से अधिक की वैश्विक एडवांस बुकिंग पूरे ओपनिंग वीकेंड की बिक्री से संबंधित है, जबकि पहले दिन की घरेलू बिक्री अलग आंकड़ा है।
Ramayana की पहले दिन की कमाई कितनी हो सकती है?
फिल्म की एडवांस बुकिंग और ट्रेड अनुमानों के आधार पर हिंदी संस्करण से पहले दिन ₹50–65 करोड़ की कमाई की संभावना जताई गई है। वहीं अन्य भाषाओं से संयुक्त रूप से ₹45–50 करोड़ की कमाई का अनुमान सामने आया है।
ये ट्रेड अनुमान हैं, आधिकारिक बॉक्स ऑफिस आंकड़े नहीं। फिल्म की वास्तविक ओपनिंग इस बात पर निर्भर करेगी कि रिलीज के दिन कितने दर्शक सिनेमाघरों में पहुंचते हैं और टिकटों की बिक्री किस रफ्तार से होती है।
एडवांस बुकिंग में मजबूत शुरुआत के बावजूद फिल्म की वास्तविक कमाई का आकलन रिलीज के बाद ही किया जा सकेगा।
Ramayana की रिलीज डेट, शो टाइमिंग और टिकट कीमतें
Ramayana: Part One 5 नवंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म का रनटाइम 3 घंटे 15 मिनट बताया गया है और इसे केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड से U सर्टिफिकेट मिला है।
दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और कोलकाता जैसे शहरों में सुबह के शो भी रखे गए हैं। मुंबई में कुछ सिनेमाघरों में सुबह 6:30 बजे से शो शुरू होने की जानकारी है।
टिकट कीमतें सिनेमाघर और फॉर्मेट के अनुसार अलग हैं। सामान्य 2D शो की तुलना में 3D, IMAX 3D और 4DX 3D टिकटों की कीमत अधिक हो सकती है। दर्शक BookMyShow और District जैसे प्लेटफॉर्म पर अपने शहर के शो टाइमिंग और उपलब्ध सीटों की जानकारी देख सकते हैं।
Ramayana में कौन-कौन से कलाकार हैं?
नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही Ramayana: Part One में रणबीर कपूर भगवान राम की भूमिका में नजर आएंगे। साई पल्लवी सीता और यश रावण की भूमिका निभा रहे हैं। रवि दुबे लक्ष्मण और सनी देओल हनुमान के किरदार में हैं।
फिल्म के अन्य प्रमुख कलाकारों में लारा दत्ता, अरुण गोविल, शीबा चड्ढा, रकुल प्रीत सिंह, विवेक ओबेरॉय, कुणाल कपूर और अनुपम खेर शामिल हैं।
फिल्म का निर्माण नमित मल्होत्रा के Prime Focus Studios ने DNEG और यश की Monster Mind Creations के साथ मिलकर किया है। यह दो भागों में बनाई जा रही फिल्म का पहला हिस्सा है। दूसरे भाग को दिवाली 2027 पर रिलीज करने की योजना है।
रिलीज से पहले Ramayana के लिए बढ़ी उम्मीदें
Ramayana की एडवांस बुकिंग में तेजी ने फिल्म के शुरुआती बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन को लेकर उम्मीदें बढ़ा दी हैं। भारत में पहले दिन की टिकट बिक्री और विदेशी बाजारों से मिल रही मांग फिल्म के लिए महत्वपूर्ण संकेत हैं।
हालांकि, ₹115 करोड़ की वैश्विक एडवांस बुकिंग के बावजूद फिल्म की वास्तविक ओपनिंग और बॉक्स ऑफिस रिकॉर्ड का फैसला रिलीज के बाद दर्शकों की प्रतिक्रिया और टिकट बिक्री से होगा।
BJP की ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा के बीच सवाल उठ रहे हैं कि सरकार जनता के विरोध, बेरोजगारी, महंगाई और घरेलू बचत जैसे मुद्दों पर कितनी जवाबदेह है।
नई दिल्ली: देश में लोकतंत्र, चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर सियासी बहस तेज है। विपक्षी INDIA गठबंधन की ओर से 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली आयोजित करने की तैयारी के बीच भारतीय जनता पार्टी ने भी अपना अभियान शुरू किया है। BJP ने ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ के नारे के साथ देशभर में पदयात्रा और जनसंपर्क कार्यक्रमों की शुरुआत की है। भाजपा पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन ने 28 अक्टूबर को दिल्ली के चांदनी चौक में पदयात्रा का नेतृत्व किया। BJP का कहना है कि इस अभियान के जरिए विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया जाएगा और चुनावी प्रक्रिया तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति जनता का भरोसा मजबूत किया जाएगा।
लेकिन इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम के बीच एक बड़ा सवाल यह भी है कि क्या रैलियों और पदयात्राओं से ही जनता का भरोसा हासिल किया जा सकता है? क्या सरकार में बैठी राजनीतिक दल की रैली यह साबित कर सकती है कि सरकार सही है और विपक्ष गलत? लोकतंत्र में राजनीतिक दलों को अपना पक्ष रखने और विरोध करने का पूरा अधिकार है, लेकिन जनता को भी सरकार से सवाल पूछने और अपने मुद्दों पर जवाब मांगने का अधिकार है।
आज आम नागरिकों के सामने रोजगार, महंगाई, आमदनी, बचत, शिक्षा और भविष्य की सुरक्षा जैसे कई सवाल हैं। ऐसे में लोकतंत्र बचाने की राजनीतिक मुहिम के साथ यह चर्चा भी जरूरी है कि आम जनता की रोजमर्रा की समस्याओं पर सरकार की प्राथमिकता क्या है?
जब प्रधानमंत्री की अपील पर देश एक साथ आया, तो जनता की आवाज क्यों नहीं सुनी जाती?
कोरोना महामारी के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से कई बार सामूहिक अपील की थी। 22 मार्च 2020 को जनता कर्फ्यू के दौरान शाम 5 बजे स्वास्थ्यकर्मियों और आवश्यक सेवाओं से जुड़े लोगों के सम्मान में ताली बजाने, थाली बजाने और घंटियां बजाने की अपील की गई थी। इसके बाद 5 अप्रैल 2020 को रात 9 बजे नौ मिनट तक घरों की लाइट बंद कर दीपक, मोमबत्ती, टॉर्च या मोबाइल की फ्लैशलाइट जलाने का आह्वान किया गया था।
इन अपीलों का मकसद कोरोना संकट के दौरान एकजुटता और सेवा में जुटे लोगों के प्रति आभार व्यक्त करना था। देशभर में बड़ी संख्या में लोगों ने इन कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। यह दिखाता है कि प्रधानमंत्री की अपील देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंच सकती है और करोड़ों लोग एक ही समय पर किसी सार्वजनिक आह्वान में शामिल हो सकते हैं।
ऐसे में सवाल उठता है कि जब सरकार देशभर में किसी संदेश को पहुंचाने और लोगों को एक साथ जोड़ने की क्षमता रखती है, तो बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा, सरकारी भर्ती और नागरिकों की शिकायतों जैसे मुद्दों पर भी इतनी ही गंभीरता क्यों नहीं दिखाई जाती?
जनता को केवल अपील और संदेश नहीं, बल्कि अपनी समस्याओं का समाधान भी चाहिए।
नोटबंदी के फैसले पर भी जनता आज तक सवाल पूछती है
8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1,000 रुपये के पुराने नोटों को आधी रात से कानूनी रूप से अमान्य करने का ऐलान किया था। सरकार ने इस फैसले के पीछे काले धन, नकली नोटों और आतंकवाद की फंडिंग पर रोक लगाने जैसे उद्देश्य बताए थे।
इस फैसले के बाद आम नागरिकों को पुराने नोट जमा कराने और नकदी प्राप्त करने के लिए बैंकों तथा एटीएम के बाहर लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ा। छोटे कारोबारियों, दैनिक मजदूरी करने वालों और नकदी पर निर्भर लोगों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
यहां सवाल किसी एक फैसले का समर्थन या विरोध करने का नहीं, बल्कि सरकार की जवाबदेही का है। जब सरकार देश की पूरी अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाला बड़ा फैसला ले सकती है और जनता से उसका पालन करवा सकती है, तो उस फैसले के परिणामों पर जनता के सवालों का जवाब देना भी उसकी जिम्मेदारी है।
क्या किसी बड़े सरकारी फैसले की सफलता केवल उसके ऐलान से तय होनी चाहिए, या उसके वास्तविक परिणामों और आम लोगों पर पड़े प्रभाव का भी हिसाब होना चाहिए?
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाले छात्रों और युवाओं के साथ क्या हुआ?
लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध और अपनी मांग रखने का अधिकार महत्वपूर्ण है। जंतर-मंतर लंबे समय से छात्रों, सामाजिक संगठनों, कर्मचारियों और आम नागरिकों के विरोध-प्रदर्शन का प्रमुख स्थान रहा है।
अक्टूबर 2026 में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान दिल्ली में पुलिस ने बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। NDTV की 3 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने करीब 1,000 लोगों को हिरासत में लिया था। पुलिस का कहना था कि प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं ली गई थी और नई दिल्ली जिले में निषेधाज्ञा लागू थी।
इसके अलावा, 10 और 11 अक्टूबर के दौरान युवा प्रदर्शनकारियों के विरोध को रोकने और हिरासत में लेने की घटनाओं पर भी सवाल उठे। Associated Press ने अपनी रिपोर्ट में हजारों लोगों को हिरासत में लिए जाने, प्रदर्शन स्थल की ओर जाने वाले रास्तों पर रोक और पुलिस की कार्रवाई का विवरण दिया। वहीं Amnesty International ने 14 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की कोशिश करने वाले Cockroach Janta Party के नेताओं की गिरफ्तारी और विरोध स्थल के दर्जे में बदलाव पर चिंता जताई।
यहां पुलिस का पक्ष और प्रदर्शनकारियों के आरोप दोनों सामने रखना जरूरी है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को अधिकार प्राप्त हैं, लेकिन उन अधिकारों का इस्तेमाल किस परिस्थिति में और किस सीमा तक किया गया, यह भी सार्वजनिक जवाबदेही का विषय है।
यदि कोई प्रदर्शन शांतिपूर्ण है, तो क्या उसे अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिलना चाहिए? यदि किसी प्रदर्शन में हिंसा या कानून का उल्लंघन हुआ है, तो उसकी स्पष्ट जानकारी और कार्रवाई का आधार जनता के सामने क्यों नहीं रखा जाना चाहिए?
लोकतंत्र में विरोध का अधिकार असीमित नहीं है, लेकिन कानून-व्यवस्था के नाम पर शांतिपूर्ण असहमति की जगह भी खत्म नहीं होनी चाहिए। सरकार और प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि विरोध-प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थानों और अनुमति की व्यवस्था में बदलाव किस आधार पर किए जा रहे हैं।
क्या राजनीतिक रैलियों से बेरोजगार युवाओं की समस्या हल होगी?
देश में बेरोजगारी और रोजगार की गुणवत्ता युवाओं के लिए बड़े मुद्दे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, PLFS 2025 में 15 से 29 वर्ष के युवाओं की बेरोजगारी दर 9.9 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि 2024 में यह 10.3 प्रतिशत थी। शहरी युवाओं में यह दर 13.6 प्रतिशत रही।
सरकारी आंकड़ों में सुधार दर्ज होना महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि हर युवा को रोजगार मिल गया है या नौकरी की तलाश कर रहे सभी लोगों की परेशानी समाप्त हो गई है। बड़ी संख्या में युवा सरकारी भर्तियों, प्रतियोगी परीक्षाओं, निजी नौकरियों और स्थायी रोजगार के अवसरों का इंतजार कर रहे हैं।
कई युवा वर्षों तक परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। भर्ती प्रक्रिया में देरी, परीक्षा रद्द होने, पेपर लीक के आरोप और नियुक्तियों में लंबा इंतजार उनके भविष्य को प्रभावित करते हैं। दूसरी ओर, निजी क्षेत्र में नौकरी मिलने के बाद भी कम वेतन, अस्थायी रोजगार और नौकरी की सुरक्षा का सवाल बना रहता है।
ऐसे में राजनीतिक दलों को केवल लोकतंत्र और चुनावी प्रक्रिया पर बयान देने के बजाय यह भी बताना चाहिए कि युवाओं के लिए स्थायी और सम्मानजनक रोजगार के अवसर बढ़ाने की उनकी ठोस योजना क्या है।
GDP की वृद्धि के साथ आम परिवार की आर्थिक स्थिति पर भी चर्चा जरूरी
भारत की अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर को लेकर सरकार और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के अपने-अपने अनुमान हैं। अक्टूबर 2026 में Reuters के अर्थशास्त्रियों के सर्वे में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की GDP वृद्धि दर 7.1 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि देश की GDP खत्म होती जा रही है।
लेकिन GDP की वृद्धि और आम परिवार की आर्थिक स्थिति एक ही बात नहीं हैं। किसी देश की अर्थव्यवस्था बढ़ सकती है, फिर भी कई परिवारों को अपनी आय, खर्च, कर्ज और बचत के बीच संतुलन बनाने में परेशानी हो सकती है।
महंगाई के कारण घर का बजट प्रभावित होता है। किराया, बच्चों की पढ़ाई, इलाज, यात्रा और रोजमर्रा की जरूरतों पर खर्च बढ़ने से परिवारों के पास बचत के लिए कम पैसा बच सकता है। छोटे कारोबारियों और मध्यम वर्ग के लिए भी आमदनी और खर्च का संतुलन एक बड़ी चुनौती हो सकता है।
घरेलू बचत को लेकर सरकारी आंकड़े बताते हैं कि 2024-25 में परिवारों की कुल बचत में वृद्धि दर्ज हुई। वित्त मंत्रालय की ओर से संसद में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, घरेलू बचत 2022-23 के 52.25 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 69.01 लाख करोड़ रुपये हुई। वहीं घरेलू देनदारियां 2023-24 के 18.8 लाख करोड़ रुपये से घटकर 2024-25 में 15.7 लाख करोड़ रुपये दर्ज की गईं।
इसलिए यह दावा करना भी सही नहीं होगा कि देश की कुल घरेलू बचत लगातार घट रही है। लेकिन राष्ट्रीय स्तर के आंकड़े हर परिवार की आर्थिक स्थिति नहीं बताते। सवाल यह है कि क्या आम परिवार अपनी आय से घर चलाने, बच्चों की शिक्षा, इलाज और भविष्य के लिए पर्याप्त बचत कर पा रहा है? क्या कम और मध्यम आय वाले परिवारों की आर्थिक सुरक्षा मजबूत हो रही है?
सोना खरीदने की क्षमता, बैंक में जमा बचत और रोजमर्रा के खर्च जैसे मुद्दों को भी इसी व्यापक आर्थिक चर्चा का हिस्सा बनाना चाहिए। सरकार को केवल GDP की वृद्धि नहीं, बल्कि आम नागरिक की क्रय शक्ति और आर्थिक सुरक्षा पर भी ध्यान देना होगा।
योजनाओं का प्रचार जनता तक पहुंच सकता है, तो शिकायतों का जवाब क्यों नहीं?
केंद्र और राज्य सरकारें अपनी योजनाओं के प्रचार के लिए विज्ञापन, सोशल मीडिया, सरकारी कार्यक्रम, जनसभाएं और जनसंपर्क अभियान चलाती हैं। सरकारी योजनाओं की जानकारी देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने के लिए बड़े स्तर पर प्रयास किए जाते हैं।
ऐसे में सवाल है कि जब सरकार किसी योजना का प्रचार करके उसे जनता तक पहुंचा सकती है, तो योजना का लाभ नहीं मिलने वाले लोगों की शिकायतों के समाधान के लिए भी क्या उतनी ही प्रभावी व्यवस्था नहीं होनी चाहिए?
कई बार नागरिकों को सरकारी योजना की पात्रता, आवेदन, दस्तावेज, लाभार्थी सूची और भुगतान से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने में परेशानी होती है। किसी योजना का प्रचार होना और उसका लाभ सही पात्र व्यक्ति तक पहुंचना दो अलग-अलग बातें हैं।
सरकार को यह भी बताना चाहिए कि कितने पात्र लोगों को योजनाओं का लाभ मिला, कितने आवेदन लंबित हैं और शिकायतों के निपटारे में कितना समय लग रहा है।
क्या लोकतंत्र केवल चुनाव और रैलियों तक सीमित है?
लोकतंत्र का अर्थ केवल चुनाव कराना, राजनीतिक सभाएं करना या किसी दल के समर्थन में रैली निकालना नहीं है। लोकतंत्र में जनता को सरकार चुनने के साथ-साथ उससे सवाल पूछने, नीतियों की आलोचना करने और अपनी समस्याओं को सामने रखने का अधिकार भी है।
BJP का ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान विपक्ष के SIR संबंधी आरोपों का जवाब देने और अपनी राजनीतिक स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास है। दूसरी ओर, विपक्ष चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर सवाल उठा रहा है। दोनों पक्षों को अपने दावों के समर्थन में तथ्य और प्रमाण जनता के सामने रखने चाहिए।
लेकिन इस राजनीतिक बहस के बीच आम जनता के मुद्दे पीछे नहीं छूटने चाहिए। जनता को यह जानने का अधिकार है कि उसकी नौकरी, आमदनी, बचत, शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य से जुड़े सवालों पर सरकार क्या कर रही है।
रैली निकालना राजनीतिक अधिकार है, विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है और सरकार से जवाब मांगना नागरिकों का अधिकार है। इनमें से किसी एक अधिकार को दूसरे के खिलाफ खड़ा नहीं किया जाना चाहिए।
सरकार से जनता के ये सवाल जवाब मांगते हैं
जब प्रधानमंत्री की अपील पर देशभर में करोड़ों लोगों तक संदेश पहुंच सकता है, तो आम जनता की शिकायतों के समाधान के लिए ऐसी प्रभावी व्यवस्था क्यों नहीं बनाई जाती?
नोटबंदी जैसे बड़े फैसले के वास्तविक परिणामों और आम नागरिकों पर पड़े प्रभाव का निष्पक्ष मूल्यांकन जनता के सामने किस तरह रखा गया?
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाले छात्रों और युवाओं को हिरासत में लेने तथा प्रदर्शन स्थल पर प्रतिबंधों के पीछे प्रशासन का स्पष्ट आधार क्या था?
शांतिपूर्ण प्रदर्शन और कानून-व्यवस्था की स्थिति में अंतर तय करने के लिए पुलिस की जवाबदेही कैसे सुनिश्चित की जाएगी?
सरकारी भर्तियों में देरी, परीक्षा विवाद और युवाओं के रोजगार से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए क्या समयबद्ध योजना है?
GDP की वृद्धि के साथ आम परिवारों की आय, बचत और क्रय शक्ति मजबूत करने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है?
सरकारी योजनाओं के प्रचार के साथ पात्र लाभार्थियों तक वास्तविक लाभ पहुंचाने और शिकायतों के निपटारे की निगरानी कैसे की जा रही है?
क्या सरकार विपक्ष और नागरिक संगठनों के सवालों का जवाब राजनीतिक आरोपों के बजाय दस्तावेजों, आंकड़ों और सार्वजनिक संवाद के माध्यम से देगी?
जनता को नारों से आगे जवाब चाहिए
देश में राजनीतिक दलों के बीच लोकतंत्र, चुनावी प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं को लेकर बहस जारी है। BJP अपनी पदयात्रा के जरिए विपक्ष के आरोपों का जवाब देना चाहती है, जबकि विपक्ष भी रैली और विरोध-प्रदर्शन के माध्यम से अपने सवाल उठा रहा है। यह राजनीतिक गतिविधियां लोकतंत्र का हिस्सा हैं।
लेकिन आम नागरिक के लिए सबसे जरूरी सवाल यह है कि उसकी जिंदगी में क्या बदलाव आ रहा है। क्या युवा को रोजगार मिल रहा है? क्या परिवार अपनी आमदनी से सम्मानजनक जीवन जी पा रहा है? क्या छोटे कारोबारियों को राहत मिल रही है? क्या सरकारी योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंच रहा है? क्या छात्र और नागरिक बिना डर के अपनी बात रख सकते हैं?
सरकार और विपक्ष दोनों को यह समझना होगा कि जनता केवल राजनीतिक नारों से संतुष्ट नहीं हो सकती। लोकतंत्र में भरोसा तभी मजबूत होता है जब सत्ता में बैठे लोग सवालों का जवाब दें, विपक्ष तथ्यों के साथ अपनी बात रखे और नागरिकों की समस्याओं को राजनीतिक बहस से ऊपर प्राथमिकता मिले।
आखिरकार, लोकतंत्र बचाने का दावा केवल रैलियों और पदयात्राओं से नहीं, बल्कि जनता के अधिकारों की रक्षा, जवाबदेही, रोजगार, आर्थिक सुरक्षा और नागरिकों की आवाज सुनने से मजबूत होता है। देश की जनता को यह जानना है कि राजनीतिक दलों की इस बहस के बीच उसके वास्तविक मुद्दों पर काम कब और कैसे होगा।
प्रकाशन से पहले संपादकीय नोट: जंतर-मंतर से जुड़ी अक्टूबर की अलग-अलग घटनाओं को लेख में अलग संदर्भों के साथ रखा गया है। पुलिस के अनुमति और कानून-व्यवस्था संबंधी पक्ष तथा मानवाधिकार संगठनों की आपत्तियां दोनों शामिल हैं। इससे लेख में तथ्य और विश्लेषण अलग बने रहते हैं।
जम्मू-कश्मीर के CM उमर अब्दुल्ला ने पत्रकार निधि राजदान से शादी की। जानिए शादी की तारीख, परिवार, पहली पत्नी पायल और निधि का पूरा परिचय।
नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पत्रकार निधि राजदान से शादी कर ली है। दोनों ने 31 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीरें साझा कर इस नए रिश्ते की जानकारी सार्वजनिक की। यह शादी 30 अक्टूबर को हुई थी। उमर की पहली पत्नी पायल अब्दुल्ला से सुप्रीम कोर्ट द्वारा तलाक मंजूर किए जाने के करीब तीन महीने बाद यह शादी हुई है।
उमर अब्दुल्ला ने अपनी पोस्ट में लिखा, “A new journey began yesterday” यानी एक नई शुरुआत कल हुई। वहीं निधि राजदान ने जवाब में लिखा, “It’s done bro”। दोनों की पोस्ट के साथ साझा की गई तस्वीरों के बाद यह खबर सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गई।
शादी Special Marriage Act के तहत नई दिल्ली में संपन्न हुई। दोनों परिवारों के सदस्य इस विवाह में गवाह बने। इसके अलावा श्रीनगर और नई दिल्ली में परिवार के सदस्यों और करीबी रिश्तेदारों के साथ शादी के कार्यक्रम आयोजित किए गए।
उमर अब्दुल्ला और निधि राजदान की शादी में कौन-कौन शामिल हुआ?
शादी के कार्यक्रमों में उमर अब्दुल्ला के पिता और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला, उनकी मां मॉली अब्दुल्ला, उमर की तीन बहनें और परिवार के अन्य करीबी सदस्य शामिल हुए।
निधि राजदान के माता-पिता, वरिष्ठ पत्रकार एमके राजदान और सरला राजदान भी इस मौके पर मौजूद रहे। दोनों परिवारों की मौजूदगी में यह निजी समारोह आयोजित किया गया।
उमर अब्दुल्ला और निधि राजदान ने शादी की घोषणा खुद सोशल मीडिया के जरिए की। दोनों ने अपनी तस्वीरें साझा कीं, लेकिन समारोह से जुड़ी अन्य निजी जानकारियां सार्वजनिक नहीं की हैं।
कौन हैं निधि राजदान?
निधि राजदान भारत की जानी-मानी पत्रकार, न्यूज एंकर और लेखिका हैं। उन्होंने NDTV में लगभग दो दशक तक काम किया है और राष्ट्रीय राजनीति, विदेश नीति तथा अंतरराष्ट्रीय मामलों की रिपोर्टिंग की है।
निधि NDTV के लोकप्रिय प्राइम टाइम कार्यक्रम Left, Right and Centre की एंकर भी रही हैं। पत्रकारिता के दौरान उन्होंने पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ईरान, चीन, तिब्बत और अन्य अंतरराष्ट्रीय क्षेत्रों से जुड़ी खबरों को कवर किया है।
उनकी किताब ‘Left, Right and Centre: The Idea of India’ जुलाई 2017 में प्रकाशित हुई थी। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में रामनाथ गोयनका अवॉर्ड सहित कई सम्मान मिल चुके हैं। वह NDTV की पूर्व Executive Editor भी रह चुकी हैं।
निधि राजदान की पहचान केवल न्यूज एंकर के तौर पर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर रिपोर्टिंग करने वाली अनुभवी पत्रकार के रूप में भी रही है।
उमर अब्दुल्ला की पहली पत्नी कौन हैं? पायल नाथ से कब हुई थी शादी?
उमर अब्दुल्ला की पहली पत्नी पायल अब्दुल्ला हैं, जिन्हें पायल नाथ के नाम से भी जाना जाता है। दोनों की शादी 1 सितंबर 1994 को इंग्लैंड में हुई थी। इस विवाह से उनके दो बेटे जाहिर अब्दुल्ला और जमीर अब्दुल्ला हैं।
उमर और पायल के बीच लंबे समय से वैवाहिक विवाद चल रहा था। दोनों वर्ष 2011 से अलग रह रहे थे। तलाक का मामला कई वर्षों तक अदालतों में चला।
दिल्ली हाईकोर्ट में दिसंबर 2023 में उमर अब्दुल्ला की तलाक संबंधी अपील खारिज होने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। बाद में दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ और आपसी सहमति से विवाह समाप्त करने का फैसला लिया गया।
उमर अब्दुल्ला और पायल अब्दुल्ला का तलाक कब हुआ?
31 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने उमर अब्दुल्ला और पायल अब्दुल्ला का विवाह समाप्त करने का आदेश दिया था।
न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेष अधिकार का इस्तेमाल करते हुए दोनों का विवाह आपसी सहमति से समाप्त किया।
अदालत के आदेश में दर्ज है कि दोनों 2011 से अलग रह रहे थे और उनके बीच सुलह की संभावना नहीं बची थी। दोनों ने समझौते के तहत एक-दूसरे के खिलाफ लंबित मामलों को वापस लेने पर भी सहमति जताई थी।
इस तरह जुलाई में पहली शादी कानूनी रूप से समाप्त होने के बाद अक्टूबर में उमर अब्दुल्ला ने निधि राजदान के साथ विवाह किया।
क्या निधि राजदान की भी पहली शादी हो चुकी है?
निधि राजदान का भी पहले विवाह हो चुका है। उनकी शादी वर्ष 2005 में पत्रकार और गीतकार नीलेश मिश्रा से हुई थी। दोनों का तलाक वर्ष 2007 में हो गया था।
इस लिहाज से उमर अब्दुल्ला और निधि राजदान दोनों के लिए यह दूसरी शादी है।
उमर अब्दुल्ला और निधि राजदान के रिश्ते की चर्चा कब शुरू हुई?
उमर अब्दुल्ला और निधि राजदान के संबंधों को लेकर सार्वजनिक चर्चाएं पहले भी सामने आती रही हैं।
वर्ष 2020 में उमर अब्दुल्ला की एक सोशल मीडिया पोस्ट पर निधि राजदान की टिप्पणी के बाद दोनों के बीच संबंधों को लेकर अटकलें लगाई गई थीं। हालांकि उस समय दोनों की ओर से किसी रिश्ते की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई थी।
अक्टूबर 2024 में उमर अब्दुल्ला के जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के समारोह में निधि राजदान की मौजूदगी ने भी इन चर्चाओं को फिर से हवा दी थी।
अब 31 अक्टूबर 2026 को दोनों ने अपनी शादी की जानकारी सार्वजनिक कर दी है।
उमर अब्दुल्ला और निधि राजदान की शादी से जुड़े सवाल
उमर अब्दुल्ला की नई पत्नी कौन हैं?
उमर अब्दुल्ला की नई पत्नी पत्रकार और पूर्व NDTV एंकर निधि राजदान हैं।
उमर अब्दुल्ला और निधि राजदान की शादी कब हुई?
दोनों का विवाह 30 अक्टूबर 2026 को हुआ और 31 अक्टूबर को उन्होंने सोशल मीडिया पर इसकी घोषणा की।
उमर अब्दुल्ला की पहली पत्नी कौन थीं?
उमर अब्दुल्ला की पहली पत्नी पायल अब्दुल्ला हैं, जिन्हें पायल नाथ के नाम से भी जाना जाता है।
उमर अब्दुल्ला और पायल का तलाक कब हुआ?
सुप्रीम कोर्ट ने 31 जुलाई 2026 को आपसी सहमति से उनका विवाह समाप्त करने का आदेश दिया था।
क्या निधि राजदान की भी दूसरी शादी है?
हां, निधि राजदान की पहली शादी वर्ष 2005 में पत्रकार नीलेश मिश्रा से हुई थी। दोनों का 2007 में तलाक हो गया था।
निधि राजदान के माता-पिता कौन हैं?
निधि राजदान के पिता वरिष्ठ पत्रकार एमके राजदान और मां सरला राजदान हैं।
उमर अब्दुल्ला और निधि राजदान की शादी किस कानून के तहत हुई?
जानकारी के अनुसार दोनों का विवाह Special Marriage Act के तहत नई दिल्ली में संपन्न हुआ।
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पत्रकार निधि राजदान ने अपनी शादी की घोषणा के साथ अपने जीवन की नई शुरुआत सार्वजनिक कर दी है। दोनों परिवारों की मौजूदगी में हुए इस विवाह के बाद अब यह जोड़ी देश की चर्चित राजनीतिक और मीडिया हस्तियों में शामिल हो गई है।
Shweta Tripathi ने कम AMH लेवल, फर्टिलिटी और मातृत्व पर खुलकर बात की। जानें क्यों उन्हें अपनी रिपोर्ट से झटका लगा और क्या है Low AMH का मतलब।
मुंबई: अभिनेत्री Shweta Tripathi ने अपनी फर्टिलिटी को लेकर एक ऐसा निजी अनुभव साझा किया है, जिसने महिलाओं के मातृत्व और व्यक्तिगत फैसले से जुड़े सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है। एक्ट्रेस ने बताया कि जब उन्हें अपने AMH (Anti-Müllerian Hormone) का स्तर काफी कम होने की जानकारी मिली, तो वह बहुत परेशान हो गई थीं। उनकी चिंता सिर्फ मां बनने को लेकर नहीं थी, बल्कि इस बात को लेकर भी थी कि उन्हें बच्चा चाहिए या नहीं, इसका फैसला करने का अधिकार उनके पास होना चाहिए।
Shweta ने यह खुलासा Soha Ali Khan के पॉडकास्ट ‘All About Her’ में किया। बातचीत के दौरान उन्होंने अपनी फर्टिलिटी, शादी, मां बनने की जिम्मेदारियों और समाज की अपेक्षाओं पर खुलकर अपनी बात रखी।
Low AMH रिपोर्ट देखकर क्यों परेशान हुई थीं Shweta Tripathi?
Shweta Tripathi ने बताया कि जब पहली बार उन्हें अपनी फर्टिलिटी के कम स्तर की जानकारी मिली, तब वह काफी upset हो गई थीं। उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहती थीं कि कोई दूसरा व्यक्ति या मेडिकल स्थिति उनके लिए यह तय करे कि वह मां बन सकती हैं या नहीं।
उन्होंने पॉडकास्ट में कहा, “मैं याद कर सकती हूं कि मैं बहुत परेशान थी, क्योंकि मैं चाहती थी कि यह फैसला मेरा हो। मैं नहीं चाहती थी कि कोई दूसरा मुझे बताए कि तुम बच्चा नहीं कर सकती। उस समय भले ही मैं खुद यह सोच रही थी कि मुझे बच्चा चाहिए या नहीं।”
उनके इस बयान का मुख्य पहलू यह है कि वह मातृत्व को अपनी पसंद मानती थीं। वह इस विकल्प को खुला रखना चाहती थीं, न कि किसी मेडिकल रिपोर्ट के कारण खुद को पहले से किसी एक फैसले तक सीमित महसूस करना चाहती थीं।
AMH टेस्ट में क्या पता चला था?
Shweta के खुलासे में AMH टेस्ट का भी जिक्र सामने आया। AMH का पूरा नाम Anti-Müllerian Hormone है। यह महिलाओं के अंडाशय (Ovaries) में मौजूद छोटे विकसित हो रहे फॉलिकल्स से बनने वाला हार्मोन है। इसका टेस्ट Ovarian Reserve यानी अंडाशय में उपलब्ध अंडाणुओं की अनुमानित संख्या का आकलन करने में मदद करता है।
कम AMH स्तर का मतलब यह हो सकता है कि अंडाशय में उपलब्ध अंडाणुओं का रिजर्व अपेक्षाकृत कम है। हालांकि, कम AMH का अर्थ यह नहीं है कि महिला प्राकृतिक रूप से गर्भधारण नहीं कर सकती।
AMH टेस्ट अकेले किसी महिला की गर्भधारण करने की पूरी क्षमता निर्धारित नहीं करता। इसकी रिपोर्ट को उम्र, मेडिकल हिस्ट्री और दूसरी जांचों के साथ समझा जाता है। फर्टिलिटी ट्रीटमेंट, खासकर IVF के दौरान भी इस टेस्ट का इस्तेमाल अंडाशय की संभावित प्रतिक्रिया का अनुमान लगाने के लिए किया जाता है।
इसलिए Shweta के कम AMH स्तर को बांझपन या मां न बन पाने की पुष्टि के रूप में देखना सही नहीं होगा।
पहले मां बनना चाहती थीं, फिर क्यों बदल गया नजरिया?
Shweta ने बताया कि एक समय ऐसा था जब उन्होंने हमेशा खुद को मां बनते हुए देखा था। लेकिन समय के साथ उनकी सोच बदली और उन्होंने इस बात पर विचार करना शुरू किया कि क्या मातृत्व वास्तव में उनके जीवन का जरूरी हिस्सा होना चाहिए।
उन्होंने अपनी दोस्तों और अपनी भाभी को मां बनने के बाद जिम्मेदारियां निभाते हुए देखा है। उनका कहना था कि मां बनना बाहर से जितना आसान दिखाई देता है, वास्तविक जिंदगी में उतना ही चुनौतीपूर्ण होता है।
Shweta ने कहा कि मां बनने के बाद महिलाएं एक तरह से सुपरह्यूमन बन जाती हैं। उन्होंने अपनी भाभी और दोस्तों के अनुभवों का जिक्र करते हुए बताया कि मातृत्व में काफी मेहनत, हिम्मत, त्याग और जिम्मेदारी की जरूरत होती है।
उन्होंने यह भी कहा कि पिछली पीढ़ियों की महिलाओं ने इन जिम्मेदारियों को किस तरह संभाला, यह देखकर उन्हें आश्चर्य होता है। उनके अनुसार, कई बार महिलाओं को मातृत्व की वास्तविक चुनौतियों के बारे में पहले से पर्याप्त जानकारी नहीं दी जाती।
पति Chaitanya Sharma के साथ भी हुई थी बच्चे को लेकर बातचीत
Shweta Tripathi ने अपने पति Chaitanya Sharma के साथ भी मातृत्व को लेकर हुई बातचीत का जिक्र किया। Chaitanya को SlowCheeta के नाम से भी जाना जाता है। दोनों ने जून 2018 में शादी की थी।
Shweta के अनुसार, उनकी बातचीत में पहले दो बच्चे होने, फिर एक बच्चा होने और अंत में बच्चे न करने जैसे विकल्पों पर भी विचार हुआ। इससे पता चलता है कि उनके लिए मातृत्व का फैसला समय के साथ बदलती सोच और आपसी बातचीत का हिस्सा रहा है।
उन्होंने अपने पति को अपना सबसे अच्छा दोस्त और पसंदीदा व्यक्ति बताया। उनके लिए किसी भी बड़े जीवन के फैसले में आपसी समझ और जिम्मेदारियों की साझेदारी महत्वपूर्ण है।
बातचीत में Shweta ने अपने पुराने एक अस्वस्थ रिश्ते का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उस अनुभव ने उन्हें यह सोचने पर मजबूर किया कि कई बार महिलाओं से बच्चे की जिम्मेदारी उठाने के साथ-साथ घर और पार्टनर की देखभाल की अपेक्षा भी की जाती है।
वह ऐसी स्थिति नहीं चाहती थीं, जिसमें पूरी जिम्मेदारी सिर्फ महिला के ऊपर आ जाए।
33 साल की उम्र में शादी के बाद भी सुनने पड़ते थे सवाल
Shweta ने बताया कि उनकी शादी 33 साल की उम्र में हुई थी। शादी से पहले उन्हें आसपास के लोगों से लगातार यह सवाल सुनने पड़ते थे कि वह शादी कब करेंगी।
उन्होंने कहा कि यह दबाव उनके माता-पिता की तरफ से नहीं था, बल्कि आसपास के लोगों की ओर से आता था। ऐसे सवाल उन्हें परेशान करते थे।
शादी के बाद बच्चे को लेकर भी सवालों का सामना करना पड़ा। उन्होंने बताया कि उनकी भाभी के मां बनने के बाद घर में काम करने वाली कुछ महिलाओं ने उनसे पूछना शुरू कर दिया कि अब उनकी बारी कब आएगी और वह गुड न्यूज कब देंगी।
हालांकि, Shweta ने अपने दोनों परिवारों की तारीफ की। उन्होंने बताया कि उनके परिवार के लोग दादा-दादी और नाना-नानी बनने की इच्छा रखते थे, लेकिन उन्होंने कभी उन पर बच्चा पैदा करने के लिए दबाव नहीं बनाया।
उनके अनुसार, परिवार की ओर से उन्हें हमेशा अपनी जिंदगी के फैसले लेने की आजादी मिली।
भारत में महिलाओं पर मातृत्व का कितना दबाव है?
Shweta का अनुभव भारत में महिलाओं के सामने आने वाली एक बड़ी सामाजिक चुनौती की ओर भी ध्यान दिलाता है। शादी के बाद महिलाओं से बच्चे को लेकर सवाल करना कई परिवारों और सामाजिक परिस्थितियों में सामान्य व्यवहार माना जाता है।
अक्टूबर 2026 में सामने आए Outlook-Toluna सर्वे में महानगरों और टियर-1 शहरों की 1,334 महिलाओं को शामिल किया गया था। सर्वे में विवाहित महिलाओं के बीच बेटे को जन्म देने की अपेक्षा से जुड़े दबाव की बात सामने आई।
इसमें 39 प्रतिशत विवाहित महिलाओं ने बेटे की चाह से जुड़े दबाव का अनुभव करने की बात कही। 34 प्रतिशत ने माता-पिता, 27 प्रतिशत ने सास-ससुर और 26 प्रतिशत ने पति की ओर से इस तरह के दबाव की जानकारी दी।
यह सर्वे सामान्य मातृत्व दबाव का नहीं, बल्कि विशेष रूप से बेटे की चाह से संबंधित है। फिर भी यह दिखाता है कि महिलाओं के प्रजनन संबंधी फैसलों में परिवार और समाज की अपेक्षाएं कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
दुनिया में हर छह में से एक व्यक्ति को Infertility की समस्या
फर्टिलिटी से जुड़ी समस्या सिर्फ सेलिब्रिटी या किसी एक देश तक सीमित नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया में लगभग हर छह में से एक व्यक्ति अपने जीवनकाल में Infertility का अनुभव करता है।
WHO की क्लिनिकल परिभाषा के अनुसार, नियमित असुरक्षित यौन संबंध के बावजूद 12 महीने या उससे अधिक समय तक गर्भधारण नहीं होना Infertility की स्थिति मानी जाती है।
भारत में 2026 में प्रकाशित एक Systematic Review और Meta-analysis में प्रजनन आयु की महिलाओं से जुड़े आठ अध्ययनों का विश्लेषण किया गया। इसमें कुल 25,778 महिलाओं का डेटा शामिल था। शोधकर्ताओं ने Primary Infertility का संयुक्त अनुमान लगभग 5 प्रतिशत और Secondary Infertility का लगभग 2 प्रतिशत बताया।
एक अन्य अध्ययन में NFHS-5 के 2019 से 2021 के आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए 5,12,408 विवाहित महिलाओं का डेटा शामिल किया गया था। उसमें Primary Infertility का अनुमान 3.28 प्रतिशत और Secondary Infertility का 13.9 प्रतिशत बताया गया।
इन दोनों अध्ययनों की परिभाषाएं और अध्ययन पद्धति अलग हैं, इसलिए इनके आंकड़ों को सीधे एक-दूसरे से तुलना नहीं करनी चाहिए।
फर्टिलिटी की समस्या का असर सिर्फ गर्भधारण तक सीमित नहीं रहता। इसका संबंध मानसिक तनाव, पारिवारिक संबंधों, सामाजिक दबाव और इलाज के आर्थिक खर्च से भी हो सकता है।
Shweta Tripathi कौन हैं?
Shweta Tripathi भारतीय अभिनेत्री हैं, जिन्हें खासतौर पर वेब सीरीज ‘Mirzapur’ में Golu Gupta के किरदार के लिए पहचान मिली। इसके अलावा उन्होंने फिल्मों और अन्य डिजिटल प्रोजेक्ट्स में भी काम किया है।
उनके पति Chaitanya Sharma अभिनेता, रैपर और लेखक हैं तथा SlowCheeta नाम से पहचाने जाते हैं।
Shweta ने अपने इस पॉडकास्ट इंटरव्यू में जिस तरह फर्टिलिटी, मातृत्व और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर बात की, उससे एक महत्वपूर्ण सवाल सामने आया है: क्या मां बनना हर महिला के जीवन का अनिवार्य लक्ष्य होना चाहिए?
उनका अनुभव बताता है कि मातृत्व का फैसला महिला की अपनी इच्छा, परिस्थितियों और प्राथमिकताओं के अनुसार होना चाहिए। किसी महिला से बार-बार शादी या बच्चे को लेकर सवाल करना उसके निजी जीवन में अनावश्यक दबाव पैदा कर सकता है।
टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में मुंबई क्राइम ब्रांच ने हरियाणा के सोनीपत से अमन को गिरफ्तार किया। बैंक खाते में 50 हजार रुपये के लेनदेन की जांच जारी है।
मुंबई: टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में मुंबई क्राइम ब्रांच ने 12वीं गिरफ्तारी की है। हरियाणा के सोनीपत जिले के रोहणा गांव से अमन को गिरफ्तार किया गया है। उसके बैंक खाते में 50 हजार रुपये के कथित लेनदेन की जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस रकम का 18 अक्टूबर को मुंबई के जुहू में हुई फायरिंग से क्या संबंध है।
अमन को पहले गिरफ्तार किए गए आरोपी कुणाल का दोस्त बताया जा रहा है। मुंबई पुलिस की टीम उसे आगे की पूछताछ के लिए मुंबई लेकर आई है। जांच का मुख्य फोकस अब पैसों के लेनदेन, आरोपियों के आपसी संपर्क और फायरिंग की कथित साजिश में अमन की भूमिका पर है।
अमन के बैंक खाते में 50 हजार रुपये की जांच
जांच से जुड़े इनपुट के मुताबिक, अमन का नाम बैंक खाते में हुए लेनदेन की पड़ताल के दौरान सामने आया। पुलिस यह पता लगाना चाहती है कि उसके खाते में रकम किसने भेजी, पैसे भेजने का उद्देश्य क्या था और क्या इसका संबंध फायरिंग मामले में गिरफ्तार अन्य आरोपियों से है।
फिलहाल 50 हजार रुपये के लेनदेन को लेकर जांच जारी है। केवल खाते में रकम आने से किसी व्यक्ति की आपराधिक भूमिका साबित नहीं होती। पुलिस की पूछताछ और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच से इस संबंध में आगे की जानकारी सामने आ सकती है।
11 आरोपियों को 6 नवंबर तक पुलिस हिरासत
अमन की गिरफ्तारी से पहले इस मामले में गिरफ्तार 11 आरोपियों को 29 अक्टूबर को मुंबई की विशेष MCOCA अदालत में पेश किया गया था। अदालत ने उन्हें 6 नवंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है।
इन आरोपियों में दो महिलाएं भी शामिल हैं। क्राइम ब्रांच ने पूछताछ के लिए 10 दिन की हिरासत मांगी थी। पुलिस का कहना है कि आरोपियों के बीच कथित साजिश, हथियारों की व्यवस्था और आर्थिक लेनदेन से जुड़े पहलुओं की जांच की जानी है।
मामले में महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (MCOCA) के प्रावधान भी लागू किए गए हैं। पुलिस ने कथित संगठित आपराधिक नेटवर्क, आर्थिक लाभ और समाज में डर पैदा करने की आशंका को जांच का हिस्सा बनाया है। अदालत में लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
अनिल पंडित की तलाश, कथित गैंग कनेक्शन की जांच
इस मामले में अनिल पंडित को वांछित आरोपी बताया गया है। पुलिस को संदेह है कि उसका लॉरेंस बिश्नोई गैंग से संबंध हो सकता है। जांच एजेंसी कथित हमले की योजना, हथियारों की सप्लाई और आरोपियों के बीच संपर्क की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश कर रही है।
पुलिस ने अदालत में डिजिटल सबूत, वॉइस चैट और मैसेजिंग ऐप पर हुई बातचीत की जांच का भी जिक्र किया है। इन सबूतों के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कथित हमले के निर्देश किसने दिए और इसमें शामिल लोगों की क्या भूमिका थी। अनिल पंडित की कथित भूमिका और गैंग से संबंधों को अभी आरोपों और जांच के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
18 अक्टूबर को जुहू में हुई थी फायरिंग
यह मामला 18 अक्टूबर 2026 को मुंबई के जुहू इलाके में हुई गोलीबारी से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, टाइगर श्रॉफ फुटबॉल ग्राउंड से निकल रहे थे, तभी मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने उनकी कार पर गोलियां चलाईं। अभिनेता इस घटना में सुरक्षित रहे, जबकि उनके ड्राइवर और एक अन्य व्यक्ति घायल हुए।
घटना के बाद पुलिस ने अलग-अलग राज्यों में कार्रवाई कर आरोपियों को गिरफ्तार किया। जांच में कथित हमलावरों के अलावा हथियारों की सप्लाई, वित्तीय लेनदेन और अन्य सहयोगियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।
अमन की गिरफ्तारी के बाद अब मुंबई क्राइम ब्रांच के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि उसके बैंक खाते में आए 50 हजार रुपये का मामले से कोई सीधा संबंध है या नहीं। साथ ही, पुलिस यह भी जांच कर रही है कि पहले गिरफ्तार आरोपियों के साथ उसके संपर्क किस प्रकार के थे और क्या इस मामले में अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।
कल का मौसम 30 अक्टूबर 2026 को कैसा रहेगा? जानें बारिश, आंधी-तूफान, चक्रवात के असर और राज्यों में मौसम से जुड़ी जरूरी जानकारी।
नई दिल्ली: 30 अक्टूबर 2026 को देश के कई हिस्सों में बारिश, गरज-चमक और खराब मौसम की संभावना के बीच लोगों की नजर मौसम के ताजा अपडेट पर है। चक्रवात अर्णब से जुड़े मौसम सिस्टम के प्रभाव के साथ मध्य भारत और पूर्वी भारत के कुछ इलाकों में मौसम बदल सकता है। हालांकि, हर राज्य और जिले में बारिश की स्थिति एक जैसी नहीं होगी।
छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, ओडिशा और झारखंड में मौसम की स्थिति पर खास नजर रखने की जरूरत है। दिल्ली-NCR, उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों को भी अपने इलाके का ताजा पूर्वानुमान और मौसम विभाग की चेतावनी देखकर ही यात्रा या दूसरे जरूरी कामों की योजना बनानी चाहिए।
कल का मौसम: किन राज्यों में बारिश की संभावना?
30 अक्टूबर के लिए मौसम का अनुमान लगाते समय चक्रवात से जुड़े सिस्टम की स्थिति, स्थानीय बारिश की संभावना और भारतीय मौसम विभाग (IMD) के राज्यवार अलर्ट को ध्यान में रखना जरूरी है।
छत्तीसगढ़ और ओडिशा के कुछ इलाकों में बारिश का असर जारी रह सकता है। मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्सों और झारखंड में भी स्थानीय मौसम परिस्थितियों के अनुसार बारिश या गरज-चमक की संभावना पर नजर रखनी होगी।
उत्तर प्रदेश, बिहार और दिल्ली-NCR के लिए भी मौसम की जानकारी लेते समय पूरे राज्य के बजाय अपने शहर या जिले का पूर्वानुमान देखना ज्यादा उपयोगी रहेगा। बारिश की संभावना, हवा की गति और चेतावनी का स्तर जगह के अनुसार बदल सकता है।
बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में भारी बारिश की आशंका
30 अक्टूबर को बिहार के उत्तरी हिस्सों में कहीं-कहीं बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। उत्तराखंड में भारी बारिश और कुछ इलाकों में ओलावृष्टि की आशंका को लेकर मौसम विभाग के अपडेट पर नजर रखना जरूरी है।
हर जिले में एक जैसी स्थिति नहीं होगी। इसलिए घर से निकलने से पहले स्थानीय मौसम चेतावनी देखना और जलभराव वाले रास्तों से बचना उपयोगी रहेगा।
दिल्ली-NCR में कैसा रहेगा मौसम?
दिल्ली-NCR में 30 अक्टूबर को गरज-चमक और ओलावृष्टि की संभावना को लेकर पूर्वानुमान सामने आया है। मौसम की वास्तविक स्थिति स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। लोगों को यात्रा के दौरान सावधानी बरतनी चाहिए और अचानक मौसम बदलने की स्थिति में खुले स्थानों पर रुकने से बचना चाहिए।
चक्रवात अर्णब कमजोर होने के बाद भी बारिश क्यों हो सकती है?
चक्रवात अर्णब 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश के तट के पास पहुंचने के बाद कमजोर हुआ। 29 अक्टूबर की सुबह तक इसका अवशिष्ट सिस्टम दक्षिण छत्तीसगढ़ और उससे सटे दक्षिण ओडिशा के ऊपर डिप्रेशन के रूप में मौजूद था। इसके आगे उत्तर की ओर बढ़ने और कमजोर होकर कम दबाव के क्षेत्र में बदलने की संभावना जताई गई थी।
चक्रवात की लाइव तस्वीरें
किसी चक्रवात के कमजोर होने का मतलब यह नहीं है कि उससे जुड़ी बारिश तुरंत खत्म हो जाएगी। वातावरण में मौजूद नमी और सिस्टम की बची हुई परिसंचरण गतिविधि के कारण कुछ क्षेत्रों में बारिश जारी रह सकती है।
दक्षिण अंडमान सागर के पास 29 अक्टूबर को एक नया कम दबाव का क्षेत्र भी बना था। इसके आगे विकसित होने की संभावना जताई गई, लेकिन इसे पहले से बना चक्रवात नहीं कहा जा सकता।
रांची में उड़ान प्रभावित, यात्रियों को क्या करना चाहिए?
रांची में खराब मौसम के कारण इंडिगो की उड़ान 6E 7463 के कोलकाता लौटने की घटना सामने आई। इससे पता चलता है कि खराब मौसम का असर हवाई यात्रा पर भी पड़ सकता है। हालांकि, एक उड़ान प्रभावित होने का अर्थ यह नहीं है कि अगले दिन सभी उड़ानें प्रभावित रहेंगी।
30 अक्टूबर को हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों को एयरलाइन की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप पर अपनी उड़ान का स्टेटस जांचना चाहिए। एयरपोर्ट के लिए निकलने से पहले संभावित देरी या बदलाव की जानकारी लेना भी जरूरी है।
किसानों और आम लोगों के लिए जरूरी सावधानी
मध्य प्रदेश के विदिशा में बारिश और गेहूं की बुवाई से जुड़ा सवाल किसानों के लिए महत्वपूर्ण है। खेत में काम करने का फैसला स्थानीय मौसम और मिट्टी की स्थिति को ध्यान में रखकर करना चाहिए। किसी एक क्षेत्र की कृषि सलाह को पूरे मध्य प्रदेश पर लागू नहीं किया जा सकता।
गरज-चमक के दौरान खुले मैदान, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहें। निचले इलाकों में पानी भरने की आशंका हो तो सुरक्षित रास्ता चुनें। भारी बारिश की चेतावनी वाले क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
स्कूल बंद होने की जानकारी के लिए भी केवल मौसम अलर्ट पर निर्भर न रहें। संबंधित जिला प्रशासन या शिक्षा विभाग का आधिकारिक आदेश ही देखें।
मौसम का अगला अपडेट कहां देखें?
30 अक्टूबर और उसके बाद के मौसम के लिए भारतीय मौसम विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर राज्यवार चेतावनी और पूर्वानुमान उपलब्ध हैं।
मौसम में बदलाव के साथ पूर्वानुमान भी अपडेट हो सकता है। इसलिए बारिश, आंधी या ओलावृष्टि से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने शहर या जिले के लिए जारी सबसे ताजा चेतावनी की जांच करना जरूरी है।
Tiger Shroff firing case: मुंबई क्राइम ब्रांच ने सूरत से दो हथियार और 10 जिंदा कारतूस बरामद किए। जानें जांच, गिरफ्तारियों और बैलिस्टिक टेस्ट की अहमियत।
मुंबई: बॉलीवुड के एक्शन हीरो टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई फायरिंग के मामले में जांच को अहम सुराग मिला है। मुंबई क्राइम ब्रांच ने गुजरात के सूरत से दो पिस्तौल और 10 जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। यह कार्रवाई 23 अक्टूबर को की गई। अब जांच में हथियारों के स्रोत, उनकी सप्लाई चेन और फायरिंग में उनके इस्तेमाल की पुष्टि अहम है।
पुलिस के मुताबिक, क्राइम ब्रांच की टीम हथियारों को हमलावरों तक पहुंचाने से जुड़े लॉजिस्टिकल नेटवर्क की पड़ताल कर रही थी। इसी कड़ी में टीम सूरत के एक ठिकाने तक पहुंची, जहां से दोनों हथियार बरामद किए गए। मामले में हथियारों की बरामदगी के बाद जांच का फोकस यह पता लगाने पर है कि इनका फायरिंग की घटना से सीधा संबंध है या नहीं।
सूरत से मिले हथियारों की होगी जांच
बरामद दो हथियार और 10 जिंदा कारतूस इस केस की जांच में महत्वपूर्ण सबूत हो सकते हैं। हालांकि, सिर्फ हथियार बरामद होने से यह साबित नहीं होता कि उनका इस्तेमाल टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के दौरान किया गया था।
इसके लिए बैलिस्टिक जांच अहम होगी। इसमें बरामद हथियारों की तकनीकी जांच कर घटनास्थल से मिले खाली कारतूसों या अन्य फॉरेंसिक सबूतों से उनका मिलान किया जा सकता है। जांच से यह स्पष्ट करने में मदद मिलेगी कि हथियारों का घटना से संबंध है या नहीं।
हथियार कहां से आए, उन्हें किसने उपलब्ध कराया और आरोपियों तक पहुंचाने में किन लोगों की भूमिका रही, इन सवालों के जवाब भी जांच का हिस्सा हैं। फिलहाल इस बरामदगी को अंतिम फॉरेंसिक निष्कर्ष के तौर पर नहीं देखा जा रहा है।
18 अक्टूबर को जुहू में हुई थी फायरिंग
यह मामला 18 अक्टूबर 2026 को मुंबई के जुहू इलाके में हुई गोलीबारी से जुड़ा है। जहां टाइगर श्रॉफ की कार को निशाना बनाकर फायरिंग की गई थी। घटना के बाद पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू की और मामले की जांच मुंबई क्राइम ब्रांच को सौंपी गई।
घटना के बाद जांचकर्ताओं ने हमले में शामिल लोगों की पहचान, हथियारों की व्यवस्था और आरोपियों के बीच संपर्कों की पड़ताल शुरू की। शुरुआती जांच में कथित रेकी और हमले से पहले की गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठे।
तीन आरोपियों की पुलिस हिरासत, गिरफ्तारियों की भी जांच
इस मामले में गिरफ्तारियों और कथित मददगारों की भूमिका की भी जांच हो रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, हरियाणा के सोनीपत से पकड़े गए तीन आरोपियों को 28 अक्टूबर 2026 तक पुलिस हिरासत में भेजा गया था। जांच में उनकी कथित भूमिका, हथियारों की व्यवस्था और अन्य संदिग्धों के साथ संपर्कों की पड़ताल शामिल है।
21 अक्टूबर के आसपास सामने आई जानकारी में मामले में गिरफ्तार लोगों की संख्या 10 तक पहुंच गया।
हथियारों की सप्लाई चेन से क्या खुल सकता है?
सूरत में हुई बरामदगी जांचकर्ताओं को हथियारों की सप्लाई चेन समझने में मदद कर सकती है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हथियार कहां से आए, उन्हें किसने रखा और कथित तौर पर हमलावरों तक पहुंचाने में कौन-कौन शामिल था।
जांच में कथित रेकी, आरोपियों के आपसी संपर्क और घटना से पहले की गतिविधियां भी महत्वपूर्ण हैं। लेकिन किसी बड़े नेटवर्क, गिरोह या हमले के मकसद को लेकर अंतिम निष्कर्ष तभी निकाला जा सकता है, जब उसके समर्थन में पर्याप्त सबूत सामने आएं।
इस मामले में आगे की जांच के लिए हथियारों की फॉरेंसिक रिपोर्ट, आरोपियों से पूछताछ और पुलिस की ओर से सामने आने वाली अतिरिक्त जानकारी महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल दो हथियारों और 10 जिंदा कारतूसों की बरामदगी जांच का नया घटनाक्रम है। अब यह स्पष्ट होना बाकी है कि बरामद हथियारों का फायरिंग से क्या संबंध है और हथियारों की सप्लाई चेन में किन लोगों की भूमिका सामने आती है।
Om Birla News: ज्ञानेश कुमार को हटाने के नए प्रस्ताव, पुराने नोटिस, संवैधानिक प्रक्रिया और SIR विवाद से जुड़े अहम सवालों के जवाब जानें।
नई दिल्ली: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए नए प्रस्ताव की संभावना पर कहा है कि कोई औपचारिक नोटिस मिलने पर निर्धारित नियमों और प्रक्रिया के अनुसार निर्णय लिया जाएगा। यह बयान ऐसे समय आया है, जब Special Intensive Revision (SIR) को लेकर विपक्ष चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहा है और ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग कर रहा है।
फिलहाल, ओम बिरला के बयान का मतलब यह नहीं है कि ज्ञानेश कुमार को हटाने का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया है। नए नोटिस पर निर्णय, उसकी जांच और मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया अलग-अलग चरण हैं।
ओम बिरला ने ज्ञानेश कुमार पर क्या कहा?
22 अक्टूबर को संसद परिसर में 12वें BRICS Parliamentary Forum से पहले पत्रकारों से बातचीत के दौरान ओम बिरला से मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ नए प्रस्ताव की संभावना पर सवाल पूछा गया। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव आने पर निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाएगा।
बिरला ने स्पष्ट किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए भी वही संवैधानिक प्रक्रिया लागू होती है, जो सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने के मामले में अपनाई जाती है। इसका अर्थ है कि किसी राजनीतिक मांग या बयान से पद से हटाने की प्रक्रिया अपने आप पूरी नहीं हो जाती।
ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए पहले क्या हुआ था?
विपक्ष ने 2026 में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई के लिए दो बार प्रयास किए हैं। पहली कोशिश के दौरान लोकसभा और राज्यसभा में दिए गए नोटिस दोनों सदनों के पीठासीन अधिकारियों ने खारिज कर दिए थे। इन नोटिसों को खारिज करने के पीछे बताया गया कारण यह था कि लगाए गए आरोप हटाने की संवैधानिक कार्यवाही शुरू करने के लिए आवश्यक प्रारंभिक मानक को पूरा नहीं करते थे।
दूसरी कोशिश के दौरान दिए गए नोटिस राज्यसभा में लंबित बताए गए हैं। इसलिए नए प्रस्ताव की चर्चा के साथ पहले से लंबित नोटिसों पर क्या हुआ यह भी जानना जरूरी है।
विपक्ष का आरोप है कि SIR के दौरान मतदाता सूची में संशोधन और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया को वापस लेने की मांग भी की है। हालांकि, ये राजनीतिक आरोप हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया क्या है?
भारत के संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने जैसी प्रक्रिया अपनानी होती है। इसमें संसद की भूमिका महत्वपूर्ण है।
लोकसभा में प्रस्ताव संबंधी नोटिस के लिए कम से कम 100 सांसदों और राज्यसभा में कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं। संबंधित सदन के अध्यक्ष या सभापति नोटिस पर प्रारंभिक निर्णय लेते हैं। यदि प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो कानून के अनुसार जांच समिति गठित की जा सकती है।
अंतिम रूप से हटाने के लिए दोनों सदनों में कुल सदस्य संख्या के बहुमत और उपस्थित तथा मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पारित होना जरूरी है। इसके बाद राष्ट्रपति हटाने का आदेश जारी कर सकते हैं।
इसलिए ओम बिरला के बयान के बाद सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या नया औपचारिक नोटिस दिया जाता है और उस पर संसदीय प्रक्रिया के तहत क्या निर्णय होता है।
SIR विवाद में चुनाव आयोग पर क्या आरोप हैं?
Special Intensive Revision यानी SIR मतदाता सूची की विशेष गहन समीक्षा की प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया को लेकर विपक्ष ने आरोप लगाए हैं कि मतदाता सूची में संशोधन के दौरान अनियमितताएं हुईं और चुनाव आयोग के निर्णय लेने के तरीके पर सवाल उठे।
इस विवाद ने सितंबर 2026 में तब और ध्यान खींचा, जब चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से SIR से जुड़े कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर आपत्तियां उठाए जाने की खबरें सामने आईं। इन आपत्तियों में मतदाता पंजीकरण फॉर्म, चुनाव आयोग के सॉफ्टवेयर तक पहुंच और पश्चिम बंगाल में अपीलों की प्रक्रिया जैसे मुद्दे शामिल बताए गए।
चुनाव आयोग की ओर से यह पक्ष रखा गया कि आंतरिक मतभेद संस्थागत निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हो सकते हैं और प्रमुख निर्णय सामूहिक रूप से लिए गए।
सुप्रीम कोर्ट में भी उठा है मामला
SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त के कामकाज से जुड़े कुछ मुद्दे सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे हैं। याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह ने चुनाव आयोग में कथित तौर पर एकतरफा निर्णय लिए जाने और मतदाता सूची संशोधन की वैधता को लेकर सवाल उठाए हैं।
5 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसकी अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत कर रहे थे, ने ज्ञानेश कुमार को अंतरिम रूप से निलंबित करने की मांग स्वीकार नहीं की थी। अदालत ने केंद्र सरकार, चुनाव आयोग और संबंधित पक्षों से जवाब मांगे थे। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे।
अदालत ने स्पष्ट किया था कि केवल मीडिया रिपोर्टों के आधार पर एकतरफा अंतरिम आदेश नहीं दिया जा सकता। संबंधित रिकॉर्ड और कानूनी प्रावधानों की जांच के बाद ही आगे का निर्णय लिया जा सकता है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका लंबित होना अपने आप में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आरोप साबित होने का प्रमाण नहीं है।
विपक्ष की आगे की रणनीति क्या है?
विपक्षी INDIA गठबंधन ने SIR को वापस लेने और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग जारी रखी है। जानकारी के अनुसार, विपक्ष ने 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली आयोजित करने की योजना भी घोषित की है।
इस बीच, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलकर विपक्ष ने अपनी मांगें रखी हैं। विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित 2023 के कानून को लेकर भी आपत्तियां जताई हैं। आगे की राजनीतिक रणनीति इस बात पर निर्भर करेगी कि नया नोटिस औपचारिक रूप से आता है या नहीं और लंबित मामलों में क्या प्रगति होती है।
ओम बिरला के सामने एक और संसदीय मामला
मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़े मुद्दे के अलावा ओम बिरला ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) से अलग होकर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हुए 20 सांसदों से संबंधित अयोग्यता याचिकाओं पर भी बयान दिया है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों से जवाब मिलने के बाद प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी।
तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने इन सांसदों की अयोग्यता की मांग की है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी शीघ्र निर्णय की अपेक्षा जताई थी। हालांकि, यह ज्ञानेश कुमार को हटाने के प्रस्ताव से अलग संसदीय मामला है।
अब आगे क्या होगा?
ज्ञानेश कुमार के मामले में अगला महत्वपूर्ण घटनाक्रम नए औपचारिक नोटिस की स्थिति और पहले से लंबित नोटिसों पर होने वाली कार्रवाई होगी। यदि नया नोटिस दिया जाता है, तो उस पर नियमों के अनुसार विचार किया जाएगा। इसके बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रक्रिया आगे बढ़ती है या नोटिस प्रारंभिक चरण में ही खारिज हो जाता है। फिलहाल, ओम बिरला ने नए प्रस्ताव को मंजूरी देने या ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की घोषणा नहीं की है।
मुंबई के चार RTO में नवरात्रि के दौरान 11,090 वाहन रजिस्टर हुए, जो पिछले साल से 1,126 कम हैं। जानें दोपहिया, कारों और EV बाजार का हाल।
मुंबई:नवरात्रि के दौरान मुंबई में नए वाहनों के रजिस्ट्रेशन में करीब 9.2% की गिरावट दर्ज हुई है। 13 से 20 अक्टूबर 2026 के बीच Mumbai Central, Wadala, Borivali और Andheri के चार RTO में कुल 11,090 वाहन रजिस्टर हुए, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह संख्या 12,216 थी। यानी इस बार 1,126 कम वाहनों का रजिस्ट्रेशन हुआ।
हालांकि, वाहन बाजार की तस्वीर सभी कैटेगरी में एक जैसी नहीं है। दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा रही, जबकि कारों की मांग और त्योहारों के दौरान खरीदारी के रुझान को लेकर कुछ अहम सवाल सामने आए हैं। राष्ट्रीय स्तर पर भी नवरात्रि के दौरान कुल वाहन रिटेल में गिरावट दर्ज हुई, लेकिन इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में बढ़ोतरी देखने को मिली।
मुंबई में किस तरह के कितने वाहन रजिस्टर हुए?
चारों RTO के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 13 से 20 अक्टूबर के बीच 7,895 दोपहिया, 2,734 चारपहिया और 461 अन्य वाहनों का रजिस्ट्रेशन हुआ। अन्य वाहनों में ऑटो रिक्शा, बस, क्रेन और एम्बुलेंस जैसी कैटेगरी शामिल हैं।
इस अवधि में कुल रजिस्ट्रेशन में दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी करीब 71.2% रही। चारपहिया वाहनों का हिस्सा लगभग 24.7% और अन्य वाहनों का करीब 4.2% था।
दोपहिया वाहनों के रजिस्ट्रेशन में Mumbai Central सबसे आगे रहा, जहां 2,403 वाहन रजिस्टर हुए। Wadala में 2,164, Borivali में 1,862 और Andheri में 1,466 दोपहिया वाहनों का रजिस्ट्रेशन दर्ज किया गया।
चारपहिया वाहनों में भी Mumbai Central पहले स्थान पर रहा। यहां 924 कारों का रजिस्ट्रेशन हुआ। Borivali में 644, Andheri में 611 और Wadala में 555 चारपहिया वाहन रजिस्टर हुए।
क्या कारों की मांग में ज्यादा गिरावट आई?
मुंबई के वाहन बाजार से उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि इस साल दोपहिया वाहनों का कुल रजिस्ट्रेशन चारपहिया वाहनों से काफी ज्यादा रहा। हालांकि, केवल इस साल की संख्या के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि पिछले साल के मुकाबले किस कैटेगरी में कितनी गिरावट आई।
देशभर में भी वाहन रिटेल में गिरावट, EV की बिक्री बढ़ी
मुंबई के आंकड़ों के साथ राष्ट्रीय वाहन बाजार का रुझान भी महत्वपूर्ण है। FADA के प्रोविजनल आंकड़ों के अनुसार, 11 से 20 अक्टूबर 2026 के दौरान देशभर में करीब 11.23 लाख वाहन रिटेल हुए। यह पिछले साल की समान त्योहार अवधि के मुकाबले 6.52% कम है।
राष्ट्रीय स्तर पर दोपहिया वाहनों की रिटेल बिक्री में 2.79% की गिरावट दर्ज हुई, जबकि यात्री वाहनों की बिक्री 21.91% कम रही। कमर्शियल वाहनों की बिक्री में 1.12% की बढ़ोतरी हुई।
इसके उलट, इलेक्ट्रिक वाहनों की रिटेल बिक्री 26.78% बढ़कर 1,17,437 यूनिट पहुंच गई। इससे पता चलता है कि कुल वाहन बाजार में गिरावट के बावजूद EV सेगमेंट का रुझान अलग रहा।
पिछले साल से तुलना में त्योहारों की अवधि भी अहम
वाहन बाजार में सालाना बदलाव को समझने के लिए त्योहारों की अवधि और पिछले साल की बिक्री का आधार भी महत्वपूर्ण है। 2025 में नवरात्रि की अवधि 11 दिन थी, जबकि 2026 में संबंधित राष्ट्रीय तुलना 10 दिनों की है। पिछले साल GST 2.0 लागू होने के आसपास खरीदारी के समय में भी बदलाव आया था।
राष्ट्रीय बाजार में सितंबर 2026 के दौरान वाहन रिटेल में मजबूत सालाना बढ़ोतरी की जानकारी भी सामने आई थी। इससे स्पष्ट होता है कि किसी एक त्योहार की अवधि में आई गिरावट को पूरे साल के वाहन बाजार की कमजोरी नहीं माना जा सकता।
वाहन कंपनियों की तरफ से भी त्योहारों के दौरान बुकिंग और डिलीवरी को लेकर सकारात्मक आंकड़े सामने आए हैं। Maruti Suzuki ने गणेश चतुर्थी से दशहरे तक रिटेल बिक्री में पिछले साल के मुकाबले 35% बढ़ोतरी बताई, जबकि Hyundai Motor India ने श्राद्ध और नवरात्रि के दौरान लगभग 41,000 रजिस्ट्रेशन और 30% सालाना वृद्धि की जानकारी दी। Tata Motors Passenger Vehicles ने नवरात्रि में 50,000 से अधिक वाहनों की डिलीवरी होने की बात कही।
क्या महंगाई के कारण वाहन खरीदने से बच रहे हैं लोग?
मुंबई में रजिस्ट्रेशन घटने के पीछे महंगाई को एक संभावित कारण माना जा रहा है। लेकिन उपलब्ध आंकड़ों से यह साबित नहीं होता कि ग्राहकों ने सिर्फ बढ़ती कीमतों या EMI के कारण वाहन खरीदना कम किया है।
इसके लिए वाहन ऋण की ब्याज दरों, ग्राहकों की बुकिंग, डिलीवरी में देरी, कैंसिलेशन और डीलरशिप पर मिलने वाले डिस्काउंट की जानकारी भी जरूरी होगी। त्योहारों के दौरान बुकिंग, वास्तविक डिलीवरी और RTO रजिस्ट्रेशन एक ही समय पर नहीं होते, इसलिए इन तीनों के बीच अंतर भी बिक्री के आंकड़ों को प्रभावित कर सकता है।
वाहन डीलरों के स्टॉक और छूट का राष्ट्रीय डेटा भी बाजार को समझने में मदद करता है, लेकिन उससे मुंबई की डीलरशिप की स्थिति तय नहीं की जा सकती।
फिलहाल उपलब्ध डेटा इतना जरूर बताता है कि नवरात्रि के दौरान मुंबई के चार RTO में कुल वाहन रजिस्ट्रेशन घटे, जबकि दोपहिया वाहन कुल रजिस्ट्रेशन में सबसे बड़ी कैटेगरी बने रहे। लेकिन गिरावट का सटीक कारण और कारों की मांग में वास्तविक बदलाव जानने के लिए श्रेणीवार तुलनीय आंकड़ों की जरूरत बनी हुई है।
टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में तीन मुख्य आरोपी 31 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में हैं। वहीं कुल 8 गिरफ्तारी, हथियारों की बरामदगी, अतिरिक्त गिरफ्तारियों और कथित गैंग कनेक्शन की जांच जारी है।
मुंबई: अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के मामले में जांच का दायरा बढ़ गया है। तीन मुख्य आरोपियों को 31 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेजा गया है, जबकि कथित हथियार सप्लाई नेटवर्क से जुड़े चार अन्य लोगों और एक अतिरिक्त संदिग्ध की गिरफ्तारी की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस अब हथियारों की बरामदगी, हमले के मकसद और लॉरेंस बिश्नोई गैंग से कथित कनेक्शन की जांच कर रही है।
आठ गिरफ्तारियां, हथियार सप्लाई नेटवर्क की जांच
18 अक्टूबर को मुंबई के जुहू इलाके में टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग हुई थी। इस घटना में अभिनेता सुरक्षित बच गए, जबकि उनके ड्राइवर फिरदौस और राहगीर उमेश चव्हाण घायल हुए थे। हमलावर कथित तौर पर बाइक से फरार हो गए थे।
इस मामले में तीन मुख्य आरोपियों की पहचान फुलसिंह नरेश, रेहान रशीदुद्दीन अंसारी और हृतिक कुमार उर्फ रोशन महतो के रूप में की गई है। बाद की जानकारी में इनके नाम फुल सिंह, रेहान उर्फ सुक्का और रितिक कुर्मी उर्फ रोशन भी बताए गए हैं।
मुंबई पुलिस ने तीनों को राजस्थान के कोटा रेलवे स्टेशन पर पकड़ा था। 21 अक्टूबर को मुंबई लाए जाने के बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया। पुलिस ने साजिश, हमले के मकसद और हथियारों की बरामदगी के लिए 14 दिन की हिरासत मांगी थी। अदालत ने तीनों को 31 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया।
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों पर हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। बचाव पक्ष ने लंबी पुलिस हिरासत का विरोध करते हुए दलील दी कि आरोपियों से पहले ही पूछताछ की जा चुकी है।
दिल्ली और हरियाणा से चार गिरफ्तारियां, एक अन्य संदिग्ध भी पकड़ा गया
जांच के दौरान दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने कथित हथियार सप्लाई नेटवर्क से जुड़े चार लोगों को गिरफ्तार किया। इनकी पहचान कुणाल (21), सुमित (19), राधा (23) और बबीता (23) के रूप में हुई है। कुणाल और सुमित हरियाणा के सोनीपत क्षेत्र के रहने वाले बताए गए हैं, जबकि राधा और बबीता उत्तर प्रदेश की निवासी हैं।
जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, कुणाल ने कथित तौर पर अमृतसर से एक पिस्तौल और 20 कारतूस जुटाए थे। सुमित पर उसके साथ जाने का आरोप है, जबकि राधा और बबीता पर हथियार मुंबई पहुंचाने का संदेह है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि हथियार किस माध्यम से शूटर्स तक पहुंचे और इस पूरी व्यवस्था को किसने निर्देशित किया।
21 अक्टूबर को हरियाणा के सोनीपत जिले के बरोदा गांव से अंकित नाम के एक अन्य संदिग्ध की गिरफ्तारी की जानकारी भी सामने आई। उसे मामले की साजिश में शामिल होने के संदेह में पकड़े जाने की बात कही गई है।
इन गिरफ्तारियों के बाद मामले में कुल आठ गिरफ्तारियों की जानकारी सामने आई है। हालांकि, सभी आरोपियों की औपचारिक गिरफ्तारी, संबंधित FIR और प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका की पुष्टि आधिकारिक रिकॉर्ड से ही हो पाएगा।
कैब ड्राइवर के फोन कॉल से कोटा तक पहुंची पुलिस
मुंबई क्राइम ब्रांच ने 18 अक्टूबर की फायरिंग के बाद करीब 20 टीमें बनाकर जांच शुरू की थी। घटनास्थल और संभावित भागने के रास्तों के आसपास लगे 500 से अधिक CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली गई।
जांच के दौरान पुलिस को एक पीली पल्सर बाइक का सुराग मिला, जिसका इस्तेमाल हमलावरों के फरार होने में किए जाने का आरोप है। बाइक के मालिक से मिले मोबाइल नंबर के आधार पर पुलिस ने आरोपियों की गतिविधियों की पड़ताल की।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी अंधेरी से लोकल ट्रेन के जरिए बोरीवली पहुंचे और वहां से कैब लेकर सूरत गए। कैब ड्राइवर ने बुकिंग में इस्तेमाल किए गए नंबर पर फोन किया, जिससे जांचकर्ताओं को आरोपियों तक पहुंचने का अहम सुराग मिला। ड्राइवर ने पुलिस को बताया कि उसने तीन यात्रियों को सूरत रेलवे स्टेशन पर छोड़ा था।
इसके बाद ट्रेन के शेड्यूल, आरक्षण और दूसरी यात्रा संबंधी जानकारियों की मदद से पुलिस ने पता लगाया कि आरोपी पुणे-जयपुर एक्सप्रेस में सवार हुए थे। मुंबई पुलिस ने राजस्थान पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद कोटा रेलवे स्टेशन पर तीनों को पकड़ लिया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने पुलिस से बचने के लिए यात्रा के साधन और रास्ते बदलने की कोशिश की थी। पुलिस अब उनके कथित फरार होने के पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।
हथियारों की बरामदगी अब भी बड़ी चुनौती
21 अक्टूबर को अदालत में पुलिस ने बताया कि फायरिंग में इस्तेमाल किए गए हथियार अभी बरामद नहीं हुए हैं। पुलिस ने यह भी दावा किया कि आरोपियों ने वारदात में इस्तेमाल किए गए दो मोबाइल फोन नष्ट कर दिए थे।
हथियारों की सप्लाई से जुड़े संदिग्धों की गिरफ्तारी के बावजूद पुलिस को कथित तौर पर इस्तेमाल की गई पिस्तौल और कारतूसों की बरामदगी करनी है। इसके साथ ही जांच एजेंसियां मोबाइल फोन, डिजिटल बातचीत, वित्तीय लेनदेन और आरोपियों के बीच संपर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं।
फायरिंग में इस्तेमाल की गई पल्सर बाइक कथित तौर पर हृतिक कुमार उर्फ रोशन महतो ने खरीदी थी। पुलिस के अनुसार, बाइक पहले कई लोगों के हाथों से गुजर चुकी थी और उसका रजिस्ट्रेशन महतो के नाम पर ट्रांसफर नहीं हुआ था। वह रैपिडो राइडर के तौर पर काम करता था।
पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि बाइक किसने उपलब्ध कराई, हथियार कहां रखे गए थे और फायरिंग के बाद आरोपियों को भागने में किसने मदद की।
अनिल पंडित और बिश्नोई गैंग कनेक्शन की जांच
क्राइम ब्रांच अनिल पंडित की कथित भूमिका की जांच कर रही है, जिसे जांचकर्ताओं ने लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़ा ऑपरेटिव बताया है।
फायरिंग के बाद सोशल मीडिया पर एक ऑडियो संदेश और फेसबुक पोस्ट के जरिए घटना की जिम्मेदारी लेने का दावा किया गया था। पुलिस इन संदेशों की प्रामाणिकता और उन्हें प्रकाशित करने वाले लोगों की पहचान की जांच कर रही है।
जांचकर्ताओं को संदेह है कि रेहान का अनिल पंडित से Signal और Telegram के जरिए संपर्क था। हृतिक कुमार उर्फ रोशन महतो पर पंडित के संपर्क में रहने और कथित शूटर्स के लिए ठहरने, खाने तथा बाइक की व्यवस्था करने का आरोप है।
पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हमले से पहले टाइगर श्रॉफ की लोकेशन किसने साझा की, आरोपियों को निर्देश किसने दिए और हथियारों की व्यवस्था के लिए पैसे कहां से आए। लॉरेंस बिश्नोई और उसके भाई अनमोल बिश्नोई को इस मामले में मुंबई पुलिस की हिरासत में नहीं बताया गया है।
भुगतान और विदेश भागने की कथित योजना
पुलिस के अनुसार, फुलसिंह और रेहान फायरिंग से करीब 20 दिन पहले हरियाणा के सोनीपत से मुंबई पहुंचे थे। जांचकर्ताओं को संदेह है कि रेहान को हमले की जिम्मेदारी सौंपी गई थी और उसने फुलसिंह को अपने साथ शामिल किया।
मूल जांच संबंधी जानकारी में रेहान को शुरुआती खर्च के लिए 50,000 रुपये दिए जाने के आरोप की पड़ताल का उल्लेख है। दूसरी जानकारी में तीन आरोपियों को 37,000 रुपये दिए जाने का दावा सामने आया है। दोनों रकमों का संबंध और भुगतान करने वाले व्यक्ति की पहचान अभी स्पष्ट किया जाना अभी बाकी है।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपियों को बड़ी रकम देने और भारत से बाहर निकलने में मदद करने का वादा किया गया था या नहीं। कुछ जानकारियों में कनाडा जाने की कथित योजना का उल्लेख है, जबकि दूसरी जानकारी में नेपाल के रास्ते फरार होने की आशंका जताई गई है।
बॉलीवुड हस्तियों की सुरक्षा पर भी असर
घटना के बाद बॉलीवुड की दूसरी हस्तियों की सुरक्षा को लेकर भी सतर्कता बढ़ाए जाने की जानकारी सामने आई। सलमान खान, आमिर खान और रोहित शेट्टी के आवासों के आसपास अतिरिक्त पुलिस व्यवस्था और गश्त की जारी की गई है । अक्षय कुमार के घर पर बुलेटप्रूफ ग्लास लगाने की जानकारी भी सामने आई है।
टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के मामले में पुलिस की जांच अभी जारी है और किसी कथित गैंग की जिम्मेदारी या हमले के वास्तविक मकसद को अदालत में साबित नहीं किया गया है।
फिलहाल पुलिस के सामने सबसे अहम सवाल हैं—फायरिंग में इस्तेमाल हथियार कहां हैं, कथित सप्लाई नेटवर्क में किसकी क्या भूमिका थी, हमले के पीछे वास्तविक मकसद क्या था और क्या इस साजिश में अन्य लोग भी शामिल थे।