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श्रीनगर एयरपोर्ट पर पार्किंग के दौरान IndiGo की 6E 225 उड़ान VDGS पोल से टकरा गई। सभी यात्री सुरक्षित हैं, विमान को नुकसान हुआ।
जम्मू-कश्मीर: श्रीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर शुक्रवार सुबह नवी मुंबई से पहुंची IndiGo की उड़ान 6E 225 पार्किंग के दौरान एक सिग्नल खंभे से टकरा गई। हादसा करीब सुबह 9:02 बजे बे नंबर 6 में विमान को पार्क करते समय हुआ। विमान में सवार सभी यात्री और चालक दल के सदस्य सुरक्षित हैं और किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।
विमान का पंजीकरण VT-NOG बताया गया है। टक्कर के बाद विमान के अगले हिस्से को नुकसान पहुंचा और यात्रियों को विमान से उतारने के लिए सीढ़ियों का इस्तेमाल किया गया।
लैंडिंग के समय नहीं, पार्किंग के दौरान हुआ हादसा
यह घटना विमान के रनवे पर उतरते समय नहीं हुई। उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, विमान श्रीनगर पहुंचने के बाद पार्किंग बे में अपनी जगह पर लगाया जा रहा था, तभी वह VDGS पोल के संपर्क में आया। यानी लैंडिंग हादसा नहीं है, जमीन पर पार्किंग के दौरान हुई घटना है।
VDGS यानी Visual Docking Guidance System विमान को पार्किंग की सही स्थिति और रुकने की जगह बताने वाला सिग्नल पोल है। श्रीनगर एयरपोर्ट की घटना में इसी सिस्टम के पोल से विमान का संपर्क हुआ। जानकारी के मुताबिक इस पोल पर विमान को दिशा और स्थिति बताने वाली प्रदर्शन इकाई के साथ लेजर और कैमरा सेंसर भी जुड़े होते हैं।
श्रीनगर एयरपोर्ट पर मुंबई से श्रीनगर जा रही इंडिगो की उड़ान पार्किंग के दौरान एक खंभे से टकरा गई। यह घटना सुबह करीब 9:02 बजे बे नंबर 06 पर हुई। विमान में सवार सभी यात्री और चालक दल के सदस्य सुरक्षित हैं और किसी के घायल होने की खबर नहीं है। यात्रियों को सीढ़ियों की मदद से विमान से pic.twitter.com/CY0qWHjicx
टक्कर के बाद विमान को नुकसान हुआ है। तस्वीरों और मौके से सामने आई जानकारी में विमान के अगले हिस्से के पास क्षति दिखाई दे रही है, लेकिन नुकसान की सटीक तकनीकी सीमा और विमान दोबारा उड़ान के लिए कब उपलब्ध होगा, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
विमान की पहचान Airbus A321neo के रूप में की गई है।
क्या श्रीनगर एयरपोर्ट की दूसरी उड़ानें प्रभावित हुईं?
एयरपोर्ट प्रशासन के मुताबिक घटना के बावजूद श्रीनगर एयरपोर्ट का सामान्य संचालन जारी रहा और दूसरी उड़ानों के आगमन-प्रस्थान पर तत्काल कोई व्यापक असर नहीं पड़ा।
हालांकि, जिस विमान के साथ यह घटना हुई, उसकी अगली उड़ान को लेकर स्थिति पर यात्रियों की नजर बनी हुई है। कुछ उड़ान-ट्रैकिंग सेवाओं में 6E 226, यानी श्रीनगर से नवी मुंबई जाने वाली वापसी उड़ान की स्थिति रद्द दिखाई गई है, लेकिन अलग-अलग ट्रैकिंग सेवाओं में स्थिति एक जैसी नहीं है। इसलिए इसके आधार पर अंतिम फैसला मानने से पहले IndiGo की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
ब्रेक फेल होने की बात कितनी सही?
घटना के बाद कुछ मीडिया रिपोर्टों में विमान के ब्रेक सिस्टम में खराबी को संभावित वजह बताया गया है। लेकिन यह बात अभी आधिकारिक तौर पर पुष्ट नहीं हुई है।
श्रीनगर एयरपोर्ट प्रशासन ने कहा है कि घटना की परिस्थितियों की जांच संबंधित सक्षम अधिकारियों द्वारा की जाएगी और जांच पूरी होने के बाद ही सही कारण सामने आएगा। इसलिए फिलहाल ब्रेक फेल होने को हादसे की निश्चित वजह बताना सही नहीं है।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विमान में सवार सभी यात्री और चालक दल सुरक्षित हैं। विमान को हुई तकनीकी क्षति, घटना का वास्तविक कारण और वापसी की उड़ान पर इसका अंतिम असर जांच और एयरलाइन की आगे की जानकारी के बाद स्पष्ट होगा।
ISRO EOS-05 Launch: GSLV-F17 आज रात 2:55 बजे Sriharikota से उड़ान भरेगा। जानिए 36,000 KM ऊपर से भारत को मिलने वाली नई satellite eye कितनी खास है।
नई दिल्ली: भारत की नजर अब आसमान में 36 हजार किलोमीटर ऊपर जाने वाली एक नई ‘आंख’ पर है। ISRO का GSLV-F17 रॉकेट 4 सितंबर की सुबह 2:55 बजे यानी आज देर रात EOS-05 Earth Observation Satellite को लेकर Sriharikota से उड़ान भरने वाला है। यह भारत का पहला imaging satellite है जिसे Geosynchronous Orbit से Earth observation के लिए तैनात किया जाएगा।
इस मिशन की खासियत सिर्फ satellite को अंतरिक्ष में पहुंचाना नहीं है। EOS-05 को ऐसी orbit में काम करने के लिए बनाया गया है जहां से यह भारत और आसपास के बड़े इलाके को बार-बार observe कर सकेगा। इसी वजह से इसे weather monitoring, disaster management, agriculture, environment और strategic surveillance के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
EOS-05, जिसे GISAT-1A के नाम से भी जाना जाता है, करीब 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई वाली Geosynchronous Orbit में काम करेगा। सामान्य Low Earth Orbit satellites पृथ्वी के चारों तरफ घूमते रहते हैं और किसी इलाके को देखने के बाद वहां दोबारा पहुंचने में समय लग सकता है। EOS-05 का orbital design एक बड़े क्षेत्र को ज्यादा frequent तरीके से observe करने के लिए तैयार किया गया है।
भारतीय अंतराळ संशोधन संस्था (ISRO) ने अंतराळ मोहिमांमध्ये पुन्हा एकदा आपले निर्विवाद वर्चस्व सिद्ध केले आहे!
जानेवारी २०२६ मधील मोहिमेनंतर केवळ ८ महिन्यांतच इस्रोने लाँच पॅडवर दणक्यात पुनरागमन केले. श्रीहरिकोटा येथील सतीश धवन अंतराळ केंद्रावरून पहाटे 'GSLV-F17' या महाकाय… pic.twitter.com/5tYv9q94xC
ISRO के अनुसार यह भारत का पहला imaging satellite है जो Geosynchronous Orbit से काम करेगा। GSLV-F17 इसे सीधे अंतिम operational orbit में नहीं पहुंचाएगा, बल्कि पहले Sub-Geosynchronous Transfer Orbit यानी Sub-GTO में छोड़ेगा। इसके बाद satellite अपने onboard propulsion system की मदद से अपनी orbit को धीरे-धीरे बदलकर अंतिम Geosynchronous position तक पहुंचेगा।
इस Sub-GTO की planned orbit लगभग 170 किलोमीटर perigee और 28,934 किलोमीटर apogee वाली elliptical orbit बताई गई है। वहां से satellite अपनी propulsion system का इस्तेमाल करके करीब 35,786 किलोमीटर की final geosynchronous altitude की ओर बढ़ेगा।
EOS-05 की सबसे बड़ी उपयोगिता frequent Earth observation है। इसके जरिए बड़े इलाके में मौसम और environmental changes को ज्यादा बार देखा जा सकेगा। इससे cyclone, flood, forest fire और दूसरी natural disasters के दौरान तेजी से information मिलने में मदद हो सकती है। Agriculture और land/environment monitoring में भी इसके data का इस्तेमाल किया जा सकता है।
Satellite में multispectral और hyperspectral imaging capabilities से जुड़े payloads हैं। उपलब्ध technical विवरणों के मुताबिक इसके imaging system में Visible and Near-Infrared (VNIR) और Short-Wave Infrared (SWIR) bands में observation की क्षमता शामिल है। GISAT programme के technical specifications में 700 mm Ritchey–Chrétien telescope और अलग-अलग spectral bands में imaging का उल्लेख मिलता है।
Multispectral VNIR imaging के लिए 42 metre spatial resolution का आंकड़ा भी technical sources में दिया गया है। Hyperspectral VNIR और SWIR sensors की resolution अलग है, इसलिए 42 metre को satellite की हर तरह की imaging की एक समान resolution समझना सही नहीं होगा।
Border surveillance का भी मिलेगा फायदा?
यही EOS-05 का सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला strategic angle है।
Geosynchronous orbit से एक ही बड़े geographical region को लगातार और ज्यादा frequent तरीके से observe करने की क्षमता conventional low-orbit Earth observation satellites से अलग है। इसी वजह से इसे India की border और strategically important areas की monitoring के लिए भी अहम बताया गया है।
हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि satellite जमीन पर मौजूद हर छोटी चीज को 36,000 किलोमीटर ऊपर से लगातार high-resolution में देख पाएगा। इसका primary classification Earth Observation है और इसके applications में weather, disaster, agriculture, environment तथा strategic monitoring शामिल हैं।
GSLV-F17 की अपनी भी बड़ी परीक्षा
EOS-05 के साथ GSLV-F17 की performance भी इस मिशन का अहम हिस्सा है। यह GSLV की 19वीं flight है और इसमें 4-metre diameter का Ogive composite payload fairing इस्तेमाल किया गया है। Launch Sriharikota के Satish Dhawan Space Centre के Second Launch Pad से होगा।
GSLV को ISRO के भीतर उसके शुरुआती दौर की कुछ unpredictable performances के कारण ‘Naughty Boy’ nickname भी मिला था। पहले 18 GSLV missions में छह missions full mission success हासिल नहीं कर पाए थे, हालांकि बाद के वर्षों में vehicle ने कई सफल flights भी की हैं।
इस बार एक जरूरी distinction भी समझना होगा। हाल के PSLV failures को सीधे GSLV-F17 की technical failure risk से जोड़ना सही नहीं होगा। GSLV Mk II और PSLV की propulsion architecture और प्रमुख propulsion systems अलग हैं।
2021 की असफलता से जुड़ा है इस मिशन का इतिहास
EOS-05 की कहानी नई नहीं है। इसके पहले GISAT-1 यानी EOS-03 को GSLV-F10 से 12 अगस्त 2021 को लॉन्च किया गया था, लेकिन वह mission सफल नहीं हुआ। ISRO के official mission records में EOS-03 को “Launch unsuccessful” दर्ज किया गया है।
अब EOS-05 यानी GISAT-1A उसी broad geosynchronous imaging concept को आगे बढ़ाता है। करीब पांच साल बाद इस capability के लिए replacement satellite को launch किया जा रहा है। इसी वजह से शुक्रवार का मिशन केवल routine satellite launch नहीं बल्कि ISRO के लिए एक महत्वपूर्ण technology और confidence test के रूप में देखा जा रहा है।
इसके अलावा जनवरी 2026 में PSLV-C62/EOS-N1 launch unsuccessful रहा था। ISRO के official records में EOS-N1 को भी “Launch unsuccessful” दर्ज किया गया है। GSLV-F17 इसलिए लगभग आठ महीने के launch gap के बाद ISRO के launch programme की वापसी का भी महत्वपूर्ण मिशन बन गया है।
Launch कब और कहां होगा?
ISRO के official schedule के मुताबिक:
जानकारी
विवरण
Mission
GSLV-F17 / EOS-05
Launch date
4 सितंबर 2026
Launch time
सुबह 2:55 बजे IST
Launch site
Second Launch Pad, Satish Dhawan Space Centre, Sriharikota
Rocket
GSLV-F17
GSLV flight number
19वीं
Satellite
EOS-05
Satellite type
Earth Observation
Initial orbit
Sub-Geosynchronous Transfer Orbit
ISRO ने mission की official live streaming व्यवस्था भी जारी की है। Live coverage launch से पहले शुरू होने वाली है और mission को ISRO के official platforms पर follow किया जा सकता है।
अब सबसे अहम इंतजार 2:55 बजे के liftoff का है। इसके बाद पहला बड़ा milestone होगा GSLV-F17 का EOS-05 को निर्धारित Sub-GTO में सफलतापूर्वक पहुंचाना। इसके बाद satellite की अपनी propulsion system के जरिए final Geosynchronous Orbit तक पहुंचने की प्रक्रिया शुरू होगी।
अगर mission planned sequence के मुताबिक पूरा होता है, तो भारत के पास पहली बार Geosynchronous Orbit से dedicated imaging capability होगी—यानी ऐसी satellite eye जो बड़े क्षेत्र को बार-बार देख सकेगी और मौसम, disaster management, agriculture, environment तथा strategic monitoring जैसे कामों के लिए ज्यादा frequent observation उपलब्ध करा सकेगी।
मुंबई में ₹17.42 लाख की MGL ठगी की जांच में 1,100 VPS users का नेटवर्क सामने आया। पुलिस ने हरियाणा से 10वीं पास आरोपी को गिरफ्तार किया।
मुंबई: ₹17.42 लाख की साइबर ठगी की जांच करते-करते मुंबई पुलिस ऐसे सर्वर नेटवर्क तक पहुंच गई, जिसके करीब 1,100 users सामने आए हैं। इस मामले में मुंबई पुलिस की साउथ रीजन साइबर पुलिस ने हरियाणा के भिवानी खेड़ा से 32 वर्षीय प्रवीण हुकुम चंद को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, 10वीं पास प्रवीण ने YouTube और ऑनलाइन tutorials से RDP और VPS की तकनीक सीखी और बाद में server किराये पर देने का काम शुरू किया।
जांच में सामने आया है कि उसके customers से जुड़े कुछ मोबाइल नंबर पहले से लगभग 30 cybercrime complaints में दर्ज हैं। अब Crime Branch यह पता लगाने में जुटी है कि इन 1,100 users में कितने लोग वास्तव में cyber fraud से जुड़े थे और प्रवीण को उनकी गतिविधियों की जानकारी थी या नहीं।
₹17.42 लाख की ठगी से खुली server की कड़ी
इस पूरे मामले की शुरुआत एक MGL Gas Bill Update वाले fraud से हुई। पुलिस के मुताबिक, पीड़ित को Mahanagar Gas Limited के नाम से message भेजा गया और bill update करने के नाम पर एक APK install करने के लिए कहा गया।
APK मोबाइल में install होने के बाद उसमें मौजूद malware ने फोन की sensitive information तक पहुंच बनाई। इसी दौरान करीब ₹17.42 लाख की बैंकिंग ठगी हुई।
साउथ रीजन साइबर पुलिस ने जब इस मामले की technical investigation शुरू की तो फर्जी APK के पीछे इस्तेमाल हो रहे server का IP address सामने आया। इसी digital trail को आगे बढ़ाते हुए जांचकर्ता server provider Hostinger तक पहुंचे और वहां से मिली जानकारी के आधार पर VPS operation का connection प्रवीण हुकुम चंद तक पहुंचा।
YouTube से सीखी RDP-VPS की तकनीक
पुलिस के मुताबिक, प्रवीण ने computer या IT की कोई formal technical education नहीं ली थी। उसने YouTube videos और internet पर उपलब्ध tutorials से web development, Remote Desktop Protocol यानी RDP और Virtual Private Server यानी VPS चलाना सीखा।
इसके बाद उसने rdpwale.in नाम से website शुरू की और VPS तथा RDP services उपलब्ध कराने लगा। पुलिस का आरोप है कि customers से KYC या पहचान की पर्याप्त जानकारी लिए बिना server उपलब्ध कराए जाते थे। जांच के मुताबिक, अलग-अलग configurations के लिए ₹1,699 से ₹13,199 महीने तक charge किया जाता था।
Server का इस्तेमाल सिर्फ website चलाने के लिए नहीं हुआ?
पुलिस की जांच में आरोप है कि प्रवीण से लिए गए कुछ VPS का इस्तेमाल malicious APK चलाने वाले operators ने command-and-control यानी C2 server की तरह किया।
सरल भाषा में समझें तो ऐसे server को fraudsters अपने malware और compromised मोबाइल के बीच communication के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे संक्रमित फोन से मिलने वाला sensitive data attacker तक पहुंच सकता है।
Cyber forensic expert Nishant Salunkhe के मुताबिक, ऐसे fraudulent APK SMS, notifications और accessibility जैसी permissions का गलत इस्तेमाल करके OTP और दूसरी sensitive जानकारी हासिल कर सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि OTP को technically crack करने के बजाय compromised device से intercept किया जा सकता है। APK, उसके permissions, network connections और server infrastructure की जांच से investigators fraud की पूरी digital chain को समझ सकते हैं।
1,100 customers का मतलब 1,100 cyber criminals नहीं
इस मामले का सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि प्रवीण से server लेने वाले करीब 1,100 लोगों में वास्तव में कितने cybercrime में शामिल थे।
पुलिस ने अभी सभी customers को cyber criminals घोषित नहीं किया है। जांच में सिर्फ इतना सामने आया है कि इन customers से जुड़े कुछ mobile numbers लगभग 30 NCRP cybercrime complaints में दिखाई दिए हैं।
Crime Branch अब इन 1,100 users को अलग-अलग cybercrime cases से match कर रही है। साथ ही subscription के जरिए प्रवीण को मिली रकम, customer details, server logs और IP addresses की भी जांच हो रही है।
जांच के बीच rdpwale.in की public website भी उपलब्ध है। Website पर RDP plans ₹699 महीने से शुरू होते दिख रहे हैं। अलग-अलग plans में Windows Server, dedicated/private IP और full admin access जैसी सुविधाएं दी गई हैं। Website के “About RDPWALE” हिस्से में इसे “Owned by Praveen” बताया गया है और Bhiwani, Haryana का address दिया गया है।
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर भी सामने आता है। पुलिस की रिपोर्ट में उस समय उपलब्ध कराई गई services की कीमत ₹1,699 से ₹13,199 महीने बताई गई है, जबकि current public website पर ₹699, ₹899 और ₹1,499 जैसे plans दिखाई दे रहे हैं। इन दोनों pricing details के बीच अंतर का कारण अभी स्पष्ट नहीं है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब मुंबई में MGL के नाम पर fake APK वाले कई cyber fraud cases सामने आ चुके हैं।
अप्रैल 2026 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ एक महीने में 100 से ज्यादा MGL consumers और applicants से करीब ₹2.7 करोड़ की ठगी की गई थी। Victims में 26 से 83 साल तक के लोग शामिल थे। Fraudsters gas connection बंद होने या bill update नहीं होने का डर दिखाकर APK download करवाते थे।
यानी इस मामले में ₹17.42 लाख की एक ठगी सिर्फ एक isolated incident नहीं थी। इसी तरह के APK-based fraud में पहले भी लोगों के मोबाइल और banking information को निशाना बनाए जाने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं।
पुलिस ने प्रवीण के पास से laptop और mobile phone जब्त किया है। अब इन devices से customer records, server logs, payment details, IP addresses और communications की जांच की जा रही है।
सबसे अहम सवाल यह है कि प्रवीण को अपने servers के इस्तेमाल की जानकारी कितनी थी। पुलिस यह भी जांच रही है कि उसने जानबूझकर cybercrime operators को infrastructure दिया या customers की गतिविधियों को नजरअंदाज किया।
अगर server logs और payment records से customers का connection अलग-अलग cyber fraud cases से साबित होता है, तो यह जांच सिर्फ एक आरोपी की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगी। 1,100 users की mapping से देश के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे cybercrime cases के बीच नई कड़ियां सामने आ सकती हैं। फिलहाल इन सभी connections की जांच जारी है और आरोपों का अंतिम निष्कर्ष जांच तथा कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
Poonch में suspected पाकिस्तानी ड्रोन दिखने के बाद search operation शुरू हुआ। Rajouri में 3 drones की हलचल और suspicious movement से LoC पर alert बढ़ा।
ताजा अपडेट:
Poonch और Rajouri के LoC क्षेत्रों में suspected drone activity के बाद security forces का search operation जारी है। Poonch में यह जांच की जा रही है कि drone ने जमीन पर कोई suspicious material तो नहीं गिराया। फिलहाल किसी weapon, narcotics या दूसरे payload की recovery की official confirmation नहीं हुई है।
जम्मू-कश्मीर: Poonch और Rajouri में सामने आई drone activity ने LoC पर security alert बढ़ा दिया है। Poonch के Mendhar सेक्टर में 28 अगस्त की रात suspected Pakistan-origin drone दिखाई दिया, जबकि इसी दौरान Rajouri के Nowshera सेक्टर से तीन suspected Pakistani drones की movement की जानकारी सामने आई।
लेकिन इस पूरे मामले में सिर्फ आसमान में दिखाई दिए drones ही चिंता की वजह नहीं हैं। Rajouri में suspicious ground movement की खबरों के बाद security forces ने जमीन पर भी search operation शुरू किया है।
28 अगस्त की रात करीब 8:05 बजे Poonch के Mendhar सेक्टर के Balakote इलाके में Behrooti गांव के ऊपर एक suspected drone देखा गया।
बताया गया कि drone Mangalnar-Dabrote की दिशा में आगे बढ़ा और बाद में Pakistan की तरफ वापस चला गया।
Drone के वापस जाने के बाद भी security forces ने इलाके की तलाश शुरू कर दी। वजह साफ है—drone वापस चला गया, इसका मतलब यह जरूरी नहीं कि उसने जमीन पर कुछ छोड़ा ही नहीं।
इसीलिए आसपास के इलाके में search operation के जरिए संभावित suspicious material की तलाश की जा रही है।
Rajouri में एक नहीं, तीन drones की हलचल
Poonch की घटना के बीच Rajouri से सामने आई जानकारी ने security concern और बढ़ा दिया।
Nowshera सेक्टर के Rumlidhara इलाके में तीन suspected Pakistani drones की movement की रिपोर्ट सामने आई। Security forces ने counter-drone measures activate किए और drones को वापस जाने पर मजबूर किया गया।
इसके बाद आसपास के इलाके में search operation शुरू किया गया।
यानी एक ही समय में Poonch और Rajouri के LoC belt में suspected drone activity की दो अलग घटनाएं सामने आईं।
सिर्फ drone नहीं, जमीन पर भी suspicious movement
Rajouri के Nowshera इलाके में border fence के पास backpack लिए एक संदिग्ध व्यक्ति की movement देखे जाने की रिपोर्ट है। इसके बाद security forces ने आसपास तलाश शुरू की।
इसके अलावा Rajouri के Gaibas, Mithiyani, Mogla और Narla इलाकों में दो suspected armed persons देखे जाने की सूचना के बाद भी search operation चलाया गया।
इस वजह से security agencies को aerial surveillance के साथ ground-level search भी बढ़ाना पड़ा।
एक नजर में पूरा मामला
इलाका
क्या हुआ
Poonch-Mendhar
Suspected Pakistani drone दिखाई दिया
Balakote-Behrooti
रात करीब 8:05 बजे drone movement
Rajouri-Nowshera
3 suspected drones की movement
Rumlidhara
Counter-drone measures के बाद search
Rajouri के कुछ इलाके
Suspicious ground movement की reports
Poonch
संभावित material की तलाश
फिलहाल
Search और security surveillance जारी
क्या Poonch वाले drone ने हथियार या drugs गिराए?
यह इस समय सबसे बड़ा सवाल है, लेकिन इसका जवाब अभी साफ नहीं है।
Poonch की मौजूदा घटना में weapon, heroin, narcotics या किसी दूसरे payload की recovery की official confirmation सामने नहीं आई है।
Security forces की search का एक मकसद यही पता करना है कि drone ने जमीन पर कोई suspicious material छोड़ा था या नहीं।
Drone को लेकर इतनी चिंता क्यों?
Border areas में drone का इस्तेमाल केवल surveillance के लिए नहीं होता। पिछले मामलों में drones के जरिए weapons और narcotics की cross-border delivery की जांच सामने आ चुकी है।
इसी वजह से LoC के पास किसी suspected drone की sighting के बाद security forces केवल आसमान पर नजर नहीं रखतीं, बल्कि जमीन पर भी संभावित drop locations की तलाश करती हैं।
हालांकि Poonch की मौजूदा घटना में यह कहना जल्दबाजी होगी कि drone किसी weapon या drug delivery के लिए आया था। अभी ऐसी कोई पुष्टि नहीं है।
क्या यह पहली घटना है? नहीं
Poonch और Rajouri की मौजूदा घटनाओं को समझने के लिए पिछले कुछ हफ्तों की घटनाएं भी महत्वपूर्ण हैं।
23 अगस्त को Kathua के Hiranagar के Bobiyan इलाके में suspected Pakistan-origin drone देखा गया था। इसके बाद search operation चलाया गया और यह जांच की गई कि कहीं drone से weapons या narcotics तो नहीं गिराए गए। उस search में कुछ suspicious मिलने की पुष्टि नहीं हुई थी।
16 अगस्त को Hiranagar सेक्टर के Katli गांव के पास भी एक suspected drone मिलने की खबर सामने आई थी, जिसे security team ने कब्जे में लिया था।
4 अगस्त को Kathua में suspected Pakistani drone activity के बाद search operation शुरू किया गया था। इसी दौरान Poonch में suspected terrorist movement की information के आधार पर security forces ने searches की थीं।
इससे पहले 27 जुलाई को Samba के Nandpur और Rajouri के Nowshera सेक्टर में suspected Pakistani drone activity के बाद भी search operations शुरू किए गए थे।
यानी हाल के मामलों में Poonch, Rajouri, Samba और Kathua के border areas से drone alerts और उसके बाद security searches की घटनाएं सामने आई हैं।
क्या drone surveillance कर रहा था?
हर drone sighting को हमला या smuggling attempt मानना सही नहीं होगा।
Security agencies को ऐसे मामलों में कई possibilities देखनी पड़ती हैं—क्या drone सिर्फ surveillance कर रहा था, क्या किसी location की जानकारी जुटाई जा रही थी, क्या कोई material पहुंचाने की कोशिश हुई या क्या इसकी activity किसी ground movement से जुड़ी थी।
मौजूदा Poonch घटना में इनमें से किसी भी possibility की अभी official confirmation नहीं हुई है।
Amritsar के मामलों से क्यों जुड़ता है यह angle?
Drone-based smuggling का खतरा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि Punjab में हाल के मामलों में Pakistan-based handlers से allegedly जुड़े arms और heroin networks की जांच सामने आई है।
एक मामले में weapons और drone की recovery की जानकारी दी गई थी। NIA की जांच में Pakistan और Australia links को भी खंगालने की बात सामने आई।
इसका मतलब यह नहीं कि Poonch वाला drone भी हथियार या drugs लेकर आया था। दोनों घटनाओं को सीधे जोड़ने की अभी कोई official confirmation नहीं है।
लेकिन पुराने मामलों की वजह से border पर drone activity को security agencies गंभीरता से लेती हैं।
Bayraktar TB2 वाला angle कितना सही है?
Pakistan की drone capability को लेकर भी हाल में चर्चा रही है। कुछ reports में LoC के पास Turkish-made Bayraktar TB2 drones की deployment के claims सामने आए हैं। ऐसे drones surveillance और reconnaissance के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
लेकिन Poonch में 28 अगस्त को दिखाई दिए suspected drone को Bayraktar TB2 बताने की कोई verified confirmation अभी सामने नहीं आई है।
LoC पर इसका असर क्या होगा?
लगातार drone alerts के बाद border areas में aerial surveillance और counter-drone preparedness बढ़ानी पड़ सकती है।
अगर drone activity के साथ जमीन पर suspicious movement भी सामने आए, तो security forces को forest और village areas में cordon-and-search operation चलाना पड़ता है।
इससे security deployment और निगरानी दोनों बढ़ते हैं। Poonch और Rajouri में मौजूदा घटनाओं में यही broader security concern दिखाई दे रहा है।
अब आगे क्या होगा?
इस पूरे मामले में अगला बड़ा update Poonch और Rajouri में चल रहे search operations से मिल सकता है।
अगर search के दौरान कोई suspicious object, weapon, narcotics या दूसरा material मिलता है, तो मामले का security angle और गंभीर हो सकता है।
अगर कुछ नहीं मिलता, तो फिलहाल मामला suspected drone intrusion और security alert तक सीमित रह सकता है।
फिलहाल Poonch में drone sighting, Rajouri में तीन drones की reported movement और suspicious ground movement की खबरों के बाद LoC के इस हिस्से में security agencies की निगरानी बढ़ी हुई है।
अब सबसे ज्यादा नजर इस बात पर है कि search operation में क्या सामने आता है और security agencies की तरफ से अगला official update क्या आता है।
नेपाल में फ्लैश बाढ़ के बाद 320 भारतीय अब भी संपर्क से बाहर हैं। करीब 3 हजार लोग लापता हैं। जानिए rescue operation, मौतों और नए खतरे का ताजा अपडेट आज यहां भी।
काठमांडू: नेपाल में आई विनाशकारी फ्लैश बाढ़ के बाद हालात अभी भी बेहद गंभीर बने हुए हैं। सबसे बड़ी चिंता उन लोगों को लेकर है, जिनसे हादसे के बाद संपर्क नहीं हो पाया। इनमें कम से कम 320 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। दूसरी तरफ नेपाल और Tibet को मिलाकर करीब 3 हजार लोगों के अब भी लापता होने की जानकारी सामने आ रही है। ऐसे में rescue operation तेज होने के बावजूद कई परिवारों को अपने लोगों की खबर का इंतजार है।
नेपाल बाढ़ में 320 भारतीयों का क्या हुआ?
भारत के विदेश मंत्रालय के मुताबिक नेपाल में आई बाढ़ के बाद करीब 320 Indian nationals अब भी contact में नहीं हैं। इसके अलावा 100 से ज्यादा Indian-origin लोगों के भी लापता होने की जानकारी सामने आई है।
इसमें कई लोग Kailash Mansarovar Yatra पर गए भारतीय यात्री हैं। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास अचानक आई बाढ़ और landslide के बाद कई यात्रियों से संपर्क टूट गया। परिवार अब हेल्पलाइन, अस्पतालों और स्थानीय authorities के जरिए अपने लोगों की जानकारी तलाश रहे हैं।
एक जरूरी बात यह है कि 320 भारतीयों का मतलब 320 मौतें नहीं है। ये वे लोग हैं जिनसे फिलहाल संपर्क नहीं हो पाया है। Rescue और identification operation आगे बढ़ने के साथ यह आंकड़ा बदल सकता है।
चीन की तरफ फंसे भारतीयों का क्या हुआ?
नेपाल के साथ China side पर भी कई भारतीय यात्री फंसे हुए थे। विदेश मंत्रालय ने बताया था कि करीब 400 भारतीय वहां सुरक्षित और संपर्क में थे। इनमें से 96 लोग जमीन के रास्ते Nepal पहुंच चुके थे, जबकि 21 भारतीयों को सुरक्षित Delhi लाया गया।
इसके अलावा Nepal में एक hydropower project से जुड़े भारतीयों को भी rescue किया गया है। अलग-अलग rescue operations में भारतीय नागरिकों के सुरक्षित निकलने की खबरें लगातार सामने आ रही हैं।
करीब 3 हजार लोग अब भी Missing
यह disaster सिर्फ भारतीयों तक सीमित नहीं है। Nepal और Tibet में करीब 3 हजार लोग अब भी missing बताए जा रहे हैं। Reuters के मुताबिक Nepal में 669 और Tibet में 7 लोगों की मौत दर्ज की गई है, यानी कुल मौतों का आंकड़ा 676 तक पहुंच गया है।
ताजा जानकारी के मुताबिक 3,700 से ज्यादा लोगों को Nepal में rescue किया जा चुका है। लेकिन पहाड़ी इलाकों में मलबा, टूटे रास्ते और संकरी घाटियां search operation को मुश्किल बना रही हैं।
सबसे मुश्किल तलाश hydropower projects के आसपास चल रही है
बाढ़ ने Trishuli River corridor में मौजूद hydropower projects को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। Upper Trishuli-1 project के आसपास mud और debris से भरे इलाकों में workers की तलाश की जा रही है। कुछ लोगों के tunnel में फंसे होने की आशंका के चलते rescue teams का फोकस इन जगहों पर भी है।
इसी वजह से Nepal में rescue operation अब सिर्फ सड़क और गांवों तक सीमित नहीं है। नदी किनारे, मलबे में दबे इलाकों और hydropower tunnels तक search operation बढ़ाया गया है।
26 अगस्त को Nepal-Tibet border के पास अचानक आई flash flood ने कुछ ही समय में बड़े इलाके को अपनी चपेट में ले लिया। तेज पानी के साथ भारी मात्रा में rock, ice और debris नीचे आया, जिससे bridges, roads, buildings और infrastructure को भारी नुकसान हुआ।
खबर के मुताबिक glacier collapse से शुरू हुए debris flow ने इस disaster को और खतरनाक बना दिया। बाढ़ का असर Bhote Koshi और Trishuli river corridor तक पहुंचा और कई settlements तथा infrastructure इसकी चपेट में आए।
Kailash Mansarovar यात्रियों पर क्यों पड़ा बड़ा असर?
इस पूरी घटना में Kailash Mansarovar Yatra का angle सबसे ज्यादा चिंता बढ़ाने वाला है। Nepal और Tibet के रास्ते इस समय बड़ी संख्या में भारतीय यात्री यात्रा कर रहे थे। अचानक आई बाढ़ ने कई border routes और access points को प्रभावित कर दिया।
इसी वजह से कई परिवारों को अपने रिश्तेदारों की आखिरी location तक पता लगाने में भी मुश्किल हुई। कुछ परिवार Nepal पहुंचकर खुद अपने लोगों की तलाश कर रहे हैं।
खराब मौसम की वजह से rescue operation में रुकावट आई थी, लेकिन अब search and rescue activities फिर से शुरू हो गई हैं। Nepal की तरफ से remote और मुश्किल इलाकों में technical assistance की जरूरत भी बताई गई है।
India समेत कई देशों से relief material और rescue support पहुंचाया जा रहा है। Helicopters के जरिए लोगों को सुरक्षित निकालने और जरूरी सामान पहुंचाने का काम भी चल रहा है।
लेकिन एक और खतरा सामने है
बाढ़ के बाद Himalayan region में एक नई lake बनने से भी authorities की चिंता बढ़ी हुई है। फिलहाल इसके water level में कमी आने की बात सामने आई है, लेकिन इसे लगातार monitor किया जा रहा है।
अगर पानी का दबाव फिर बढ़ता है तो आसपास के इलाकों में दोबारा flood risk पैदा हो सकता है। इसलिए rescue operation के साथ-साथ secondary flood threat पर भी नजर रखी जा रही है।
अभी सबसे बड़ा सवाल क्या है?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल उन करीब 320 भारतीयों को लेकर है जिनसे संपर्क नहीं हो पाया है। इनके अलावा Nepal और Tibet में हजारों दूसरे लोग भी missing हैं।
Rescue teams मलबे, नदी किनारे, remote villages और hydropower sites पर लगातार search कर रही हैं। जैसे-जैसे प्रभावित इलाकों तक पहुंच बढ़ेगी, missing लोगों को लेकर तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।
मुंबई में ₹17.67 लाख की केमिकल ठगी का खुलासा, MHB कॉलोनी पुलिस ने राजस्थान से दो आरोपियों को पकड़ा। फर्जी कंपनी, SIM, Aadhaar-PAN और नकली UTR से ठगी का प्लान।
मुंबई: बोरीवली पश्चिम के MHB कॉलोनी पुलिस ने Chemical कारोबार से जुड़ी ₹17.67 लाख की ठगी के मामले में राजस्थान से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में फर्जी Aadhaar-PAN, SIM, कंपनी के कागजात और नकली Payment Screenshot/UTR के जरिए कारोबारियों को भरोसे में लेने का मामला सामने आया है। खास बात यह है कि आरोपी सिर्फ एक कंपनी के संपर्क में नहीं थे, बल्कि करीब 38 Chemical कंपनियों से इसी तरह संपर्क किए जाने की जानकारी पुलिस को मिली है।
WhatsApp पर Chemical का ऑर्डर, फिर शुरू हुआ पूरा खेल
मामला MHB कॉलोनी पुलिस स्टेशन में दर्ज शिकायत से सामने आया। शिकायतकर्ता निर्मित संजय अजमेरा, उम्र 32 वर्ष, Chemical कारोबार से जुड़े हैं। उनके मोबाइल नंबर पर WhatsApp के जरिए “प्रीमियर सॉल्व्हेंट्स” कंपनी के नाम से Chemical का ऑर्डर दिया गया।
बोरीवली एम एच बी कॉलोनी पुलिस टीम के साथ गिरफ्तार आरोपियों की तस्वीर
शुरुआत में सब कुछ एक सामान्य कारोबारी डील जैसा दिखाई दिया, लेकिन आगे की जांच में पता चला कि ऑर्डर देने वाले लोगों ने अपनी असली पहचान छिपाकर पूरा फर्जी सेटअप तैयार किया था।
Shyam Industries के नाम से बनाई फर्जी कंपनी
आरोपियों ने “Shyam Industries” नाम से फर्जी कंपनी तैयार की। इसके लिए फर्जी Aadhaar Card और PAN Card का इस्तेमाल किया गया। इतना ही नहीं, कंपनी को असली दिखाने के लिए विजिटिंग कार्ड और लेटरहेड भी तैयार किए गए।
इसके बाद Chemical कारोबारियों से संपर्क कर ऑर्डर देने और पेमेंट करने का भरोसा दिलाया गया।
मामला तब संदिग्ध हुआ जब आरोपियों ने पेमेंट किए जाने का दावा करते हुए WhatsApp पर Payment Screenshot और UTR नंबर भेजा। स्क्रीनशॉट से ऐसा दिखाने की कोशिश की गई कि रकम ट्रांसफर हो चुकी है, जबकि वास्तव में ₹17,67,375 का भुगतान नहीं हुआ था।
इसके बाद Chemical को Transporter के जरिए मंगाने की कोशिश की गई। पुलिस की जांच में यही पूरा तरीका ठगी के मुख्य पैटर्न के तौर पर सामने आया।
पुलिस को 38 और Chemical कंपनियों से संपर्क का पता चला
जांच आगे बढ़ी तो मामला एक कारोबारी तक सीमित नहीं रहा। पुलिस को जानकारी मिली कि आरोपियों ने इसी तरह करीब 38 अलग-अलग Chemical कंपनियों से संपर्क किया था और Chemical मंगाने के लिए बातचीत की थी।
इससे पुलिस को शक हुआ कि फर्जी कंपनी और पहचान तैयार करने के पीछे एक बड़ा ठगी का प्लान था और दूसरे कारोबारियों को भी इसी तरीके से निशाना बनाया जा सकता था।
Fake SIM से लेकर Fake Identity तक
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने आपस में मिलीभगत कर एक और फर्जी SIM हासिल की थी। इस दौरान सोनूकुमार प्रजापत के नाम का इस्तेमाल करते हुए फर्जी पहचान तैयार की गई।
इसी पहचान के आधार पर Aadhaar और PAN तैयार किए गए और फिर Shyam Industries के नाम से कारोबार करने का दिखावा किया गया।
यानी इस पूरे मामले में सिर्फ नकली पेमेंट स्क्रीनशॉट ही नहीं, बल्कि पहचान से लेकर कंपनी के दस्तावेज तक कई स्तर पर फर्जीवाड़ा किया गया।
आरोपी बार-बार बदल रहा था Location
मामला दर्ज होने के बाद MHB कॉलोनी पुलिस की Crime Detection टीम ने मोबाइल नंबर और दूसरी तकनीकी जानकारी के आधार पर आरोपियों की तलाश शुरू की।
जांच के दौरान आरोपी लगातार अपनी Location बदल रहा था। पुलिस ने उसके इस्तेमाल किए जा रहे मोबाइल नंबरों की जानकारी निकाली और तकनीकी जांच के जरिए उसकी गतिविधियों को ट्रैक किया।
जांच में आरोपी का संपर्क राजस्थान से सामने आया। इसके बाद पुलिस टीम राजस्थान पहुंची और स्थानीय पुलिस की मदद से आरोपी को ट्रेस किया।
तकनीकी जांच के आधार पर मुख्य आरोपी ललितकुमार भगवानराम बिश्नोई, उम्र 36 वर्ष, को राजस्थान के Jodhpur क्षेत्र से पकड़ा गया। पूछताछ के दौरान उसके खिलाफ सामने आए आरोपों और मामले में उसकी भूमिका की जांच की गई।
पुलिस के अनुसार पूछताछ में अपराध से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत गिरफ्तार किया गया।
मामले में उसके साथी विकास बिश्नोई, उम्र 19 वर्ष, को भी सहभागी पाए जाने पर गिरफ्तार किया गया है।
दोनों की भूमिका सामने आने के बाद केस में भारतीय न्याय संहिता की धारा 3(5) भी जोड़ी गई है।
MHB कॉलोनी पुलिस स्टेशन में CR No. 960/2026 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
मामले में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 316(2), 336(2), 318(4), 340(2) और 3(5) के तहत कार्रवाई की गई है।
पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि 38 अन्य Chemical कंपनियों से संपर्क करने के पीछे आरोपियों का मकसद क्या था और इस नेटवर्क से कितने कारोबारियों को नुकसान पहुंचा सकता था।
वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में हुई कार्रवाई
इस कार्रवाई में मुंबई पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का मार्गदर्शन रहा। पुलिस आयुक्त देवेन भारती, पुलिस सह आयुक्त मनोजकुमार शर्मा, अपर पुलिस आयुक्त डॉ. अभिनव देशमुख और पुलिस उपायुक्त संदीप घुगे के मार्गदर्शन में जांच आगे बढ़ाई गई।
गोराई विभाग के सहायक पुलिस आयुक्त सुधाकर हूंबे की निगरानी में MHB कॉलोनी पुलिस की टीम ने कार्रवाई की।
MHB कॉलोनी पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक विवेक सोनवणे और पुलिस निरीक्षक (गुन्हे) मिलिंद नागपुरे के मार्गदर्शन में सहायक पुलिस निरीक्षक तथा अपराध प्रकटीकरण अधिकारी श्रीकांत मगर और उनकी टीम ने तकनीकी जांच के जरिए आरोपियों तक पहुंच बनाई।
कार्रवाई में पुलिस हवलदार संदीप पाटील, सतीश देवकर, अर्जुन आहेर, पुलिस नाईक सचिन मंजुळे और सिद्धेश पाटील भी शामिल रहे।
अब 38 कंपनियों वाले कनेक्शन की जांच
दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस के सामने अगला बड़ा सवाल यह है कि Shyam Industries नाम की फर्जी कंपनी बनाकर कितने कारोबारियों को इसी तरीके से संपर्क किया गया था और कितनी जगह Chemical मंगाने की कोशिश की गई।
₹17.67 लाख की शिकायत से शुरू हुई जांच में करीब 38 Chemical कंपनियों से संपर्क का खुलासा होने के बाद पुलिस इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
ISRO Recruitment 2026 में Scientist Engineer के 175 पदों पर आवेदन शुरू हो गया है। ₹56,100 बेसिक सैलरी, eligibility, exam और fee की पूरी जानकारी।
नई दिल्ली/मुंबई: Engineering करने वाले युवाओं के लिए बड़ी खबर है। ISRO ने Scientist/Engineer ‘SC’ के 175 पदों पर भर्ती के लिए online application शुरू कर दिया है। आवेदन की प्रक्रिया 27 अगस्त 2026 से शुरू हो चुकी है और eligible candidates 16 सितंबर 2026 रात 11:55 बजे तक form भर सकते हैं।
इस recruitment में Electronics, Mechanical और Computer Science Engineering से जुड़े candidates को मौका मिलेगा। Selected candidates को Level-10 Pay Matrix में नौकरी मिलेगी, जहां minimum basic salary ₹56,100 प्रति माह से शुरू होगी।
लेकिन यहां सबसे जरूरी बात vacancy या salary नहीं, बल्कि eligibility के rules हैं। 65% marks होने के बावजूद कुछ candidates eligible नहीं होंगे। Degree का नाम, CGPA, backlog, course duration, MCA/M.Tech और AMIE से जुड़े rules application से पहले समझना जरूरी है।
इस recruitment के लिए relevant BE/B.Tech या equivalent qualification जरूरी है।
Post
Qualification
Electronics
BE/B.Tech या accepted allied discipline
Mechanical
BE/B.Tech या accepted allied discipline
Computer Science
BE/B.Tech या accepted allied discipline
तीनों disciplines में graduation में minimum 65% marks या 6.84 CGPA जरूरी है।
Age की बात करें तो 16 सितंबर 2026 को maximum age 28 साल होनी चाहिए।
लेकिन यहीं से कुछ important rules शुरू होते हैं।
आपकी Degree का नाम अलग है तो भी मौका हो सकता है
अगर आपकी degree का नाम exactly Electronics, Mechanical या Computer Science नहीं है तो तुरंत खुद को ineligible न मानें।
Electronics category में Applied Electronics, Electrical & Electronics, Electronics & Communication, Electronics & Instrumentation, Electronics & Telecommunication, Industrial Electronics, Power Electronics, Telecommunication, Instrumentation & Control, Avionics जैसी कई allied disciplines स्वीकार की गई हैं।
Mechanical में Aeronautical, Aerospace, Industrial & Production, Manufacturing, Mechanical & Automation, Mechatronics, Production Engineering, Metallurgical & Materials और Mechanical Engineering Design जैसी disciplines शामिल हैं।
Computer Science category में Computer Engineering, Computer Science & Technology, CS & IT, Information Technology, Information Science, AI & ML, AI & Data Science, Cyber Security, Software Engineering, Big Data Analytics, Cloud Computing और Computer Networking जैसी disciplines भी शामिल हैं।
इसलिए degree का नाम अलग होने पर official discipline list से match करना जरूरी है।
65% है फिर भी Form Reject हो सकता है!
ISRO का 65% rule जितना simple दिखता है, उतना है नहीं।
अगर आपकी marksheet में सिर्फ CGPA है तो वही CGPA 6.84 या उससे ज्यादा होना चाहिए। University की conversion formula लगाकर कम CGPA को percentage में बदलकर eligibility हासिल नहीं की जा सकती।
अगर marksheet में percentage और CGPA दोनों दिए हैं तो दोनों में से कम से कम एक ISRO के required benchmark को पूरा करना चाहिए।
सबसे बड़ा trap course duration का है।
अगर आपकी B.Tech चार साल की थी लेकिन backlog के कारण आपने पांच साल में graduation पूरी की, तो आप eligible नहीं होंगे।
इसलिए apply करने से पहले यह check करें:
Eligibility Check
Rule
Percentage
65% या ज्यादा
CGPA
6.84 या ज्यादा
Course duration
निर्धारित अवधि में graduation complete
Qualification
Relevant BE/B.Tech/equivalent
MCA या M.Tech किया है तो क्या Apply कर सकते हैं?
सिर्फ MCA के आधार पर Scientist/Engineer ‘SC’ के लिए eligibility नहीं बनती।
सिर्फ M.Tech होने से भी BE/B.Tech की essential qualification replace नहीं होती। अगर आपकी BE/B.Tech required marks पूरा नहीं करती तो M.Tech के अच्छे marks से यह कमी पूरी नहीं होगी।
Interview में online application में दी गई details को prove करने वाले original documents भी दिखाने होंगे।
Exam Centre कहां मिलेगा?
ISRO ने Written Test के लिए 37 cities दी हैं।
इनमें Mumbai, Pune, Bengaluru, Ahmedabad, Chennai, Hyderabad, Delhi, Kolkata, Jaipur, Nagpur, Lucknow, Patna, Varanasi, Thiruvananthapuram, Vijayawada और Visakhapatnam समेत कई शहर शामिल हैं।
लेकिन exam city और job posting को एक न समझें।
Mumbai चुनने का मतलब यह नहीं कि selection के बाद posting Mumbai में ही होगी।
Application submit होने के बाद exam centre बदलने का provision भी नहीं है।
ISRO की तैयारी के लिए Previous Papers भी उपलब्ध
इस recruitment की तैयारी करने वाले candidates के लिए ISRO ने official recruitment page पर Electronics, Mechanical और Computer Science के 2023 और 2025 के previous papers उपलब्ध कराए हैं।
पहले इन papers से question level समझना और फिर technical तथा aptitude preparation करना ज्यादा useful रहेगा।
PwBD Candidates के लिए जरूरी Rule
PwBD reservation के लिए minimum 40% relevant benchmark disability जरूरी है।
Disability categories में blindness/low vision, deaf/hard of hearing, locomotor disability, autism/intellectual disability/specific learning disability/mental illness और multiple disabilities शामिल हैं।
Backlog PwBD vacancies को applicable rules के अनुसार categories के बीच interchange किया जा सकता है। इसलिए किसी category में zero दिखने पर भी eligible PwBD candidate को apply करने से पहले पूरी notification check करनी चाहिए।
कौन-सी गलती candidature खत्म कर सकती है?
Incomplete application, गलत information, missing documents, unclear uploads, false NOC claim या recruitment procedure से deviation candidature cancel करा सकता है।
अगर इन सवालों का जवाब हां है, तो ISRO Scientist/Engineer ‘SC’ Recruitment 2026 में आपके लिए आवेदन का रास्ता खुला है।
आवेदन की आखिरी तारीख 16 सितंबर 2026 रात 11:55 बजे है। Last day का इंतजार करने के बजाय form पहले complete करना बेहतर रहेगा, क्योंकि गलत marks, degree details, bank information या uploaded document की वजह से बाद में correction का मौका नहीं मिलेगा।
Official Notification, Apply Online, FAQ और Previous Year Papers ISRO की official recruitment website पर उपलब्ध हैं।
🔗 Official FAQ Allied branches, CGPA, MCA/M.Tech, AMIE, backlog, payment, application और eligibility से जुड़े सवालों के जवाब के लिए Official ISRO Recruitment FAQ 2026
डोभाल-वांग यी की 25वीं बैठक में भारत-चीन सीमा विवाद पर क्या निकला? जानिए सीमा पर शांति, पुराने समझौते, व्यापार, कैलाश यात्रा और 2027 के अगले कदम की बड़ी खबर।
नई दिल्ली:भारत-चीन के रिश्तों को लेकर बीजिंग से बड़ी खबर सामने आई है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच 25 अगस्त को 25वें दौर की विशेष प्रतिनिधि स्तर की बातचीत हुई। करीब छह साल पहले गलवान के बाद जिस रिश्ते में भारी तनाव आ गया था, उसमें अब बातचीत, सीमा प्रबंधन और कारोबारी गतिविधियों के जरिए धीरे-धीरे सामान्य स्थिति लौटने के संकेत जरूर हैं। लेकिन इस पूरी कहानी में एक बड़ा पेंच अभी भी बाकी है।
25वें दौर की बातचीत के बाद दोनों देशों ने सीमा विवाद के राजनीतिक समाधान की कोशिश जारी रखने पर सहमति जताई है। यानी बातचीत आगे बढ़ी है, लेकिन सीमा विवाद खत्म होने या वास्तविक नियंत्रण रेखा का अंतिम सीमांकन तय होने की घोषणा नहीं हुई है। अगली विशेष प्रतिनिधि स्तर की बैठक 2027 में भारत में होगी।
यही इस बैठक का सबसे बड़ा मतलब है—भारत और चीन के बीच रिश्तों में जमी बर्फ कुछ हद तक पिघली है, लेकिन सीमा का सबसे मुश्किल सवाल अभी भी टेबल पर है।
बीजिंग में हुई बैठक में सीमा विवाद के साथ-साथ पूरे भारत-चीन संबंधों पर भी बातचीत हुई। दोनों पक्षों ने पिछले कुछ समय में रिश्तों में आई सकारात्मक गति और नेताओं के स्तर पर बनी सहमतियों को लागू करने में हुई प्रगति पर चर्चा की।
बातचीत में सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने, सीमा से जुड़े मुद्दों पर लगातार संवाद जारी रखने और सीमा के अंतिम समाधान की दिशा में काम करने पर जोर रहा। चीन ने भी कहा कि दोनों पक्ष सीमा विवाद पर बातचीत के साथ-साथ द्विपक्षीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान जारी रखेंगे।
डोभाल के लिए यह बैठक इसलिए भी अहम थी क्योंकि यह 2025 के 24वें दौर में बनी सहमतियों को आगे बढ़ाने का अगला बड़ा कदम था।
सबसे पहले जानिए—क्या भारत-चीन सीमा विवाद खत्म हो गया?
सीधा जवाब है—नहीं।
25वें दौर में ऐसा कोई अंतिम समझौता सामने नहीं आया जिससे भारत-चीन सीमा की पूरी लाइन तय हो गई हो। न ही पूरे सीमा विवाद के समाधान की घोषणा हुई है।
जो बात आगे बढ़ी है, वह है राजनीतिक बातचीत और सीमा प्रबंधन की प्रक्रिया। दोनों देश अभी भी 2005 में तय राजनीतिक मापदंडों और मार्गदर्शक सिद्धांतों के आधार पर निष्पक्ष, उचित और दोनों को स्वीकार्य समाधान तलाशने की बात कर रहे हैं।
यानी एक तरफ सैनिकों के बीच तनाव कम हुआ है, दूसरी तरफ सीमा का अंतिम सवाल अभी बाकी है। यही अंतर समझना इस पूरी खबर को समझने के लिए सबसे जरूरी है।
भारत-चीन सीमा विवाद में अक्सर डिसएंगेजमेंट, तनाव कम करने और सीमा समाधान को एक ही चीज समझ लिया जाता है, जबकि तीनों अलग-अलग हैं।
डिसएंगेजमेंट का मतलब है कि जहां दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने थे, वहां से उन्हें पीछे हटाना। 21 अक्टूबर 2024 के समझौते के बाद देपसांग और डेमचोक में गश्त की व्यवस्था को लेकर सहमति लागू हुई और भारत सरकार ने संसद में कहा था कि 2020 में बने सभी फ्रिक्शन पॉइंट्स से डिसएंगेजमेंट हो चुका है।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि भारत और चीन के बीच सीमा की अंतिम रेखा तय हो गई है।
सीमा का अंतिम सीमांकन और राजनीतिक समाधान उससे कहीं बड़ा और लंबा मामला है। 25वें दौर में इसी बड़े सवाल को आगे बढ़ाने की बात हुई है।
2025 में जो 10 बातें तय हुई थीं, उनका क्या हुआ?
यहां कहानी और दिलचस्प हो जाती है।
अगस्त 2025 में हुए 24वें दौर की बातचीत में दोनों देशों ने सिर्फ सामान्य बयान नहीं दिए थे, बल्कि 10 बिंदुओं पर सहमति बनाई थी। इनमें सीमा पर शांति बनाए रखना, 2005 के समझौते को आधार बनाकर राजनीतिक समाधान तलाशना, सीमा निर्धारण के कुछ हिस्सों में शुरुआती प्रगति की संभावना तलाशना, सीमा प्रबंधन के लिए नया कार्य समूह बनाना और सैन्य-कूटनीतिक माध्यमों से तनाव कम करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाना शामिल था।
सहमति के बाकी अहम हिस्सों में पूर्वी और मध्य सेक्टर के लिए नए स्तर के संवाद तंत्र, सीमा-पार नदियों पर बातचीत, आपात स्थिति में मानवीय आधार पर जल संबंधी जानकारी साझा करना और तीन पारंपरिक सीमा व्यापार बाजारों को फिर खोलना शामिल था।
24वें दौर की 10 सूत्रीय सहमति में 2026 में 25वें दौर की बैठक चीन में करने का फैसला भी शामिल था, जो अब पूरा हो चुका है।
एक साल बाद सबसे बड़ा सवाल—कितना काम जमीन पर हुआ?
यहीं से सिर्फ बयान और जमीन पर बदलाव के बीच फर्क दिखाई देता है।
25वें दौर के दौरान दोनों पक्षों ने कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली और तीन तय सीमा व्यापार मार्गों से सीमापार कारोबार फिर शुरू होने को सकारात्मक प्रगति के तौर पर माना।
यानी 2025 की सहमतियों के कुछ हिस्से अब जमीन पर दिखाई देने लगे हैं।
लेकिन सीमा के अंतिम सीमांकन वाला सबसे मुश्किल हिस्सा अभी भी जारी बातचीत में है।
छह साल बाद फिर खुला सीमा व्यापार
1 अगस्त 2026 से भारत और चीन के बीच नाथू ला के रास्ते सीमा व्यापार फिर शुरू हुआ। सिक्किम सरकार के मुताबिक यह कारोबार छह साल बाद दोबारा शुरू हुआ है।
इसी दौरान हिमाचल प्रदेश के शिपकी ला के रास्ते भी भारत-चीन सीमा व्यापार बहाल हुआ। उत्तराखंड के लिपुलेख मार्ग से भी पारंपरिक सीमा व्यापार गतिविधियां फिर शुरू हुईं।
यह सिर्फ कारोबार की खबर नहीं है। सीमा क्षेत्रों में रहने वाले स्थानीय कारोबारियों और लोगों के लिए यह पुराने संपर्कों की वापसी का संकेत भी है।
यही वजह है कि भारत-चीन रिश्तों को सिर्फ सीमा पर सैनिकों की स्थिति देखकर समझना अब अधूरा होगा।
कैलाश मानसरोवर यात्रा भी फिर पटरी पर
2026 में कैलाश मानसरोवर यात्रा भी भारत और चीन के बीच सामान्य होते संपर्क की एक बड़ी तस्वीर पेश कर रही है।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक 2026 की यात्रा जून से अगस्त के बीच आयोजित की गई और लिपुलेख तथा नाथू ला, दोनों रास्तों से यात्रियों को भेजा गया। कुल 1,000 यात्रियों का चयन 20 बैचों में किया गया।
यह इसलिए अहम है क्योंकि कैलाश मानसरोवर यात्रा सिर्फ धार्मिक यात्रा नहीं है। यह भारत और चीन के बीच लोगों के सीधे संपर्क का भी एक पुराना माध्यम रही है।
इसलिए सीमा व्यापार और कैलाश यात्रा का दोबारा शुरू होना रिश्तों में लौटती सामान्य स्थिति के व्यावहारिक संकेत माने जा सकते हैं।
फिर भी सब कुछ सामान्य नहीं हुआ है
यहीं कहानी का दूसरा पहलू सामने आता है।
भारत और चीन के बीच व्यापार तेजी से बढ़ा है, लेकिन व्यापार असंतुलन अभी भी बड़ा मुद्दा है। वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार करीब 151.1 अरब डॉलर रहा और भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा करीब 112.16 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
दूसरी तरफ भारतीय कंपनियों के लिए चीन में कारोबारी वीजा से जुड़ी दिक्कतें भी अगस्त 2026 में सामने आई हैं। रिपोर्टों के मुताबिक कई भारतीय कंपनियों के अधिकारियों को चीन की यात्रा और कारोबारी बैठकों के लिए वीजा हासिल करने में परेशानी हुई है।
इससे साफ है कि रिश्तों में सुधार के संकेत जरूर हैं, लेकिन भरोसा और कारोबारी पहुंच से जुड़े सारे सवाल खत्म नहीं हुए हैं।
उड़ानें और निवेश में भी धीरे-धीरे बदलाव
2025 में भारत और चीन के बीच सीधी उड़ानें फिर शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी और अक्टूबर 2025 से पांच साल से ज्यादा समय बाद सीधी उड़ानों की बहाली हुई। यह भी दोनों देशों के रिश्तों में धीरे-धीरे लौटती सामान्य स्थिति का एक संकेत था।
निवेश के मोर्चे पर भी 2026 में भारत ने कुछ सीमित ढील दी। मई 2026 में संशोधित व्यवस्था के तहत जमीन से जुड़े पड़ोसी देशों के निवेशकों को कुछ शर्तों के साथ 10 प्रतिशत तक गैर-नियंत्रक हिस्सेदारी के लिए स्वचालित रास्ता दिया गया। अगस्त तक ऐसी 29 निवेश प्रस्तावों की जानकारी सामने आई, जिनकी कुल कीमत करीब 4,895 करोड़ रुपये थी।
इसका मतलब यह नहीं है कि भारत ने चीन के लिए निवेश के दरवाजे पूरी तरह खोल दिए हैं। बल्कि यह एक नियंत्रित और सावधानी वाली आर्थिक वापसी है।
6 अगस्त की बैठक ने 25वें दौर का रास्ता तैयार किया था
25 अगस्त की डोभाल-वांग बातचीत अचानक नहीं हुई थी।
इससे पहले 6 अगस्त को भारत और चीन के बीच सीमा मामलों पर बातचीत के लिए 36वीं WMCC बैठक हुई थी। इसमें 2025 की 24वें दौर की सहमतियों को लागू करने, सीमा निर्धारण, सीमा प्रबंधन, नए तंत्र बनाने और सीमा-पार संपर्क पर चर्चा हुई थी।
दोनों देशों ने कूटनीतिक और सैन्य माध्यमों से संपर्क बनाए रखने और सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखने पर भी सहमति जताई थी। इस बैठक में 25वें दौर की विशेष प्रतिनिधि स्तर की बातचीत की तैयारी पर भी काम हुआ था।
यानी 25 अगस्त की बैठक एक अकेली बैठक नहीं थी। इसके पीछे कई स्तरों पर चल रही बातचीत की पूरी प्रक्रिया थी।
आखिर यह Special Representatives की बैठक होती क्या है?
आम भाषा में समझें तो यह भारत-चीन सीमा विवाद पर दोनों देशों का सबसे अहम राजनीतिक बातचीत वाला तंत्र है।
भारत की तरफ से अजीत डोभाल और चीन की तरफ से वांग यी इस व्यवस्था में विशेष प्रतिनिधि हैं। यह तंत्र सिर्फ सीमा पर तनाव की स्थिति पर बात करने के लिए नहीं है, बल्कि सीमा के राजनीतिक समाधान और दोनों देशों के व्यापक रिश्तों से जुड़े मुद्दों पर भी बातचीत का मंच है।
चीनी विदेश मंत्रालय ने भी 25वें दौर से पहले इसे सीमा सवाल पर बातचीत का मुख्य माध्यम और आपसी हितों से जुड़े मुद्दों पर संवाद का महत्वपूर्ण मंच बताया था।
2020 के गलवान संकट से यहां तक कैसे पहुंचे?
पूरी कहानी को समझने के लिए पिछले छह साल की कड़ी जोड़ना जरूरी है।
अप्रैल-मई 2020 से पूर्वी लद्दाख में तनाव बढ़ा और वास्तविक नियंत्रण रेखा पर लंबे समय तक सैन्य गतिरोध बना रहा। भारत सरकार के अनुसार इसके बाद सीमा पर शांति बहाल करने के लिए सैन्य और कूटनीतिक दोनों स्तरों पर लगातार बातचीत चली।
2024 में देपसांग और डेमचोक की गश्त व्यवस्था पर समझौते के बाद 2020 में बने सभी फ्रिक्शन पॉइंट्स से डिसएंगेजमेंट की प्रक्रिया पूरी होने की बात भारत सरकार ने कही।
इसके बाद अक्टूबर 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की कज़ान में मुलाकात हुई। यह दोनों नेताओं की करीब पांच साल बाद प्रतिनिधिमंडल स्तर की पहली द्विपक्षीय बैठक थी। इसमें दोनों ने सीमा पर शांति बनाए रखने और Special Representatives व्यवस्था की भूमिका को महत्वपूर्ण माना।
अगस्त 2025 में दोनों नेताओं की तियानजिन में फिर मुलाकात हुई और उसके बाद 24वें दौर की विशेष प्रतिनिधि बातचीत में 10 बिंदुओं पर सहमति बनी।
अब अगस्त 2026 में 25वां दौर हो चुका है।
यानी 2020 के सैन्य संकट से 2026 की बातचीत तक सफर में एक चीज साफ दिखती है—तनाव कम करने और रिश्ते संभालने के लिए बातचीत के कई रास्ते फिर सक्रिय हुए हैं।
लेकिन अरुणाचल प्रदेश और सीमा का सवाल अभी भी आसान नहीं
भारत-चीन संबंधों में अरुणाचल प्रदेश का मुद्दा पुराना और संवेदनशील है। चीन इस क्षेत्र पर अपना दावा करता रहा है, जबकि भारत का रुख स्पष्ट है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है।
इसके साथ सीमा निर्धारण का बड़ा सवाल भी बाकी है। इसलिए व्यापार, यात्रा, उड़ान और कूटनीतिक बातचीत वापस आने के बावजूद यह कहना जल्दबाजी होगी कि भारत-चीन सीमा विवाद खत्म होने की स्थिति में पहुंच गया है।
असल चुनौती अब यह है कि दोनों देश सीमा पर शांति को लंबे समय तक बनाए रखते हुए राजनीतिक समाधान की दिशा में कितनी ठोस प्रगति कर पाते हैं।
सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत आने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि 26 अगस्त तक चीन की तरफ से उनकी यात्रा की अंतिम आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी। रिपोर्टों के मुताबिक संभावित यात्रा सितंबर में हो सकती है।
अगर यह यात्रा होती है, तो डोभाल-वांग बातचीत के बाद भारत और चीन के शीर्ष नेतृत्व के बीच एक और महत्वपूर्ण संपर्क का रास्ता खुल सकता है।
इसलिए 25वें दौर की बातचीत को सिर्फ सीमा बैठक के रूप में देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी।
अब आगे क्या होगा?
सबसे साफ अगला कदम सामने है—भारत में 2027 में 26वां Special Representatives दौर होगा।
लेकिन उससे पहले कई स्तरों पर काम जारी रहना है।
सीमा प्रबंधन के तंत्र चलते रहेंगे। कूटनीतिक और सैन्य संवाद जारी रहेगा। 2025 में तय किए गए सीमा प्रबंधन और सीमा निर्धारण से जुड़े काम आगे बढ़ेंगे। सीमा व्यापार, लोगों की आवाजाही और दूसरे व्यावहारिक संपर्कों को स्थिर करने की कोशिश होगी।
सबसे बड़ा सवाल फिर वही रहेगा—क्या दोनों देश केवल सीमा पर शांति बनाए रखने से आगे बढ़कर सीमा की अंतिम रेखा तय करने की दिशा में ठोस राजनीतिक प्रगति कर पाते हैं?
एक नजर में पूरी तस्वीर
2020 — गलवान के बाद बड़ा सैन्य तनाव और सीमा पर लंबा गतिरोध।
2024 — देपसांग और डेमचोक की गश्त व्यवस्था पर समझौता और 2020 के फ्रिक्शन पॉइंट्स से डिसएंगेजमेंट।
अगस्त 2025 — 24वें दौर में सीमा प्रबंधन, शुरुआती सीमा निर्धारण, व्यापार और दूसरे मुद्दों पर 10 सूत्रीय सहमति।
अगस्त 2025 — तियानजिन में मोदी-शी की फिर मुलाकात।
मई 2026 — दोनों देशों के बीच सीमा मामलों पर WMCC का 35वां दौर।
जून-अगस्त 2026 — कैलाश मानसरोवर यात्रा 20 बैचों के साथ लिपुलेख और नाथू ला मार्ग से आयोजित हुई।
1 अगस्त 2026 — नाथू ला और शिपकी ला से सीमा व्यापार फिर शुरू हुआ।
6 अगस्त 2026 — 36वीं WMCC बैठक में 25वें दौर की तैयारी और सीमा निर्धारण पर चर्चा।
25 अगस्त 2026 — डोभाल और वांग यी की 25वें दौर की बातचीत; राजनीतिक समाधान की कोशिश जारी रखने पर सहमति।
2027 — अगली विशेष प्रतिनिधि स्तर की बैठक भारत में होगी।
सबसे अहम बात क्या है?
भारत-चीन रिश्तों में अब सिर्फ बयान नहीं, बल्कि कुछ जमीन पर दिखने वाले बदलाव भी नजर आ रहे हैं—सीमा पर 2020 के फ्रिक्शन पॉइंट्स से डिसएंगेजमेंट, गश्त व्यवस्था, सीमा व्यापार, कैलाश मानसरोवर यात्रा, सीधी उड़ानों की वापसी और आर्थिक संपर्क को धीरे-धीरे आगे बढ़ाने की कोशिश।
लेकिन दूसरी तरफ अंतिम सीमा समाधान, सीमा निर्धारण, अरुणाचल से जुड़े मतभेद, व्यापार घाटा और कारोबारी आवाजाही की दिक्कतें अभी भी मौजूद हैं।
भारत और चीन के रिश्ते पहले से ज्यादा बातचीत की पटरी पर लौटे हैं, लेकिन सीमा विवाद का आखिरी अध्याय अभी लिखा जाना बाकी है। 2027 की भारत में होने वाली अगली बैठक अब इस प्रक्रिया का अगला बड़ा पड़ाव होगी।
MRPL Assistant Engineer Recruitment 2026 में 26 पदों पर भर्ती है। GATE 2026 से Chemical, Mechanical और Electrical AE पदों के लिए आवेदन 19 सितंबर तक करें अब!
नई दिल्ली: Mangalore Refinery and Petrochemicals Limited (MRPL) ने Assistant Engineer के 26 पदों के लिए भर्ती शुरू कर दी है। यह भर्ती E2 Grade Management Cadre में Chemical, Mechanical और Electrical Engineering के लिए है। आवेदन प्रक्रिया 21 अगस्त 2026 से शुरू हो चुकी है और इच्छुक उम्मीदवार 19 सितंबर 2026 शाम 6 बजे तक ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं।
इस भर्ती में सबसे जरूरी बात यह है कि MRPL सिर्फ GATE 2026 के marks स्वीकार करेगा। GATE 2025 या उससे पुराने score के आधार पर इस भर्ती में आवेदन नहीं किया जा सकता। Selection में कोई written exam नहीं रखा गया है। GATE 2026 marks के आधार पर shortlisting होगी, जिसके बाद Group Discussion और Personal Interview लिया जाएगा।
MRPL Assistant Engineer Recruitment 2026 में कितने पद हैं?
कुल 26 Assistant Engineer vacancies निकाली गई हैं। Chemical Engineering में 15, Mechanical में 8 और Electrical में 3 पद हैं।
Discipline
GATE Paper
Vacancies
Assistant Engineer – Chemical
CH
15
Assistant Engineer – Mechanical
ME
8
Assistant Engineer – Electrical
EE
3
Total
—
26
Chemical के 15 पद सभी categories के लिए खुले हैं। इनमें UR 8, EWS 1, OBC-NCL 3, SC 1 और ST 2 सीटें हैं।
Mechanical के 8 पद Special Recruitment Drive के तहत OBC-NCL 4, SC 3 और ST 1 के लिए हैं। इस discipline में UR और EWS के लिए कोई seat नहीं है।
Electrical के 3 पदों में OBC-NCL 1, SC 1 और ST 1 vacancy है। यहां भी UR और EWS candidates के लिए post उपलब्ध नहीं है।
कुल category-wise vacancies में UR 8, EWS 1, OBC-NCL 8, SC 5 और ST 4 पद शामिल हैं।
PwBD candidates के लिए कितनी seats हैं?
PwBD reservation horizontal basis पर लागू है। इसका मतलब ये posts ऊपर दी गई category vacancies के अंदर ही शामिल हैं और अलग से अतिरिक्त seats नहीं हैं। इसके लिए minimum 40% benchmark disability जरूरी है।
Chemical में 2 PwBD posts, Mechanical में 1 और Electrical में 1 post earmarked है।
Chemical में SLD और HH categories को identified किया गया है। Mechanical में HH, LV, OA, BA, OL, CP, Dw, AAV, ASD (M), SLD और MI categories suitable हैं। Electrical में HH, OL, Dw, AAV, ASD (M), SLD और MI categories शामिल हैं।
अगर earmarked category का suitable candidate उपलब्ध नहीं होता है, तो post दूसरी identified category में जा सकती है।
यहां HH का मतलब hard of hearing, LV low vision, OA one arm, BA both arms, OL one leg, CP cerebral palsy, Dw dwarfism, AAV acid attack victim, ASD (M) autism spectrum disorder mild, SLD specific learning disability और MI mental illness है।
MRPL Assistant Engineer के लिए कौन apply कर सकता है?
उम्मीदवार के पास चार साल की BE, B.Tech या B.Sc. Engineering degree संबंधित discipline में होनी चाहिए। Degree और GATE paper का combination MRPL की eligibility के मुताबिक होना जरूरी है।
Discipline
Eligible Degree
Chemical
Chemical Engineering, Chemical Technology, Petrochemical Engineering, Petrochemical Technology
Mechanical
Mechanical Engineering
Electrical
Electrical Engineering, Electrical and Electronics Engineering
Production, Automobile, Mechatronics और Construction Engineering जैसी degrees eligible नहीं मानी जाएंगी। MRPL ने साफ किया है कि ये examples indicative हैं और exclusions सिर्फ इन्हीं courses तक सीमित नहीं हैं।
Degree किसी UGC-recognised Indian university या deemed university, AICTE-approved autonomous institution, संबंधित statutory council या Board of Technical Education से recognised होनी चाहिए।
कितने प्रतिशत marks जरूरी हैं?
UR, EWS और OBC-NCL candidates के लिए minimum aggregate 60% है। SC, ST और PwBD candidates के लिए minimum 50% aggregate marks चाहिए।
यह percentage सभी semesters के average से निकलेगा और इसे round off नहीं किया जाएगा। यानी 59.99% को 60% नहीं माना जाएगा।
अगर university CGPA conversion formula देती है, तो उसी formula का इस्तेमाल करना होगा। जहां university ने कोई conversion formula नहीं दिया है, वहां CGPA × 10 लागू किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए university से documentary proof देना होगा कि कोई निर्धारित formula मौजूद नहीं है।
Five-year integrated dual degree में BE या B.Tech plus ME या M.Tech को four-year engineering degree के बराबर माना जाएगा।
अगर किसी candidate ने qualifying BE, B.Tech या B.Sc. Engineering discipline में की है और GATE 2026 का valid score उसी eligible paper में है, तो अलग discipline में M.Tech होने के बावजूद eligibility बनी रह सकती है।
Integrated course में दो degrees मिलने पर BE या B.Tech का percentage देखा जाएगा। अगर integrated course के बाद सिर्फ एक ME या M.Tech degree जारी हुई है, तो consolidated integrated-course marks consider किए जाएंगे।
MRPL AE Recruitment के लिए age limit क्या है?
19 सितंबर 2026 को UR और EWS candidates की maximum age 27 years होनी चाहिए।
OBC-NCL candidates को 3 years और SC/ST candidates को 5 years की age relaxation मिलेगी। 40% या उससे ज्यादा disability वाले PwBD candidates को category relaxation के अलावा 10 years की additional relaxation दी जाएगी।
Ex-Servicemen candidates के लिए age relaxation Government of India rules के अनुसार लागू होगी।
PwBD relaxation category relaxation के ऊपर लागू होती है, लेकिन यह उसी category के reserved post के लिए लागू होगी।
ध्यान रखें: MRPL ने साफ कहा है कि application सिर्फ उसके official online portal से ही स्वीकार होगी; किसी agency या individual के जरिए आवेदन नहीं किया जा सकता।
Selection Process में exam होगा या नहीं?
MRPL Assistant Engineer recruitment में अलग से written examination नहीं होगा।
सबसे पहले GATE 2026 marks के आधार पर candidates की shortlisting होगी। Shortlisted candidates को Group Discussion के लिए बुलाया जाएगा और इसके बाद Personal Interview होगा।
इस भर्ती के लिए GATE 2026 के केवल CH, ME और EE papers मान्य हैं। पुराने GATE scores इस selection process में स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
MRPL Assistant Engineer की salary कितनी है?
Selected Assistant Engineer को E2 Grade Management Cadre में नियुक्त किया जाएगा। Starting basic pay ₹50,000 है और pay scale ₹50,000 से ₹1,60,000 तक है।
Salary structure में IDA pattern पर Dearness Allowance, HRA या township accommodation, cafeteria approach के तहत perks और allowances तथा Performance Related Pay शामिल हैं।
Posting MRPL की requirement के हिसाब से तय की जाएगी। Selected employees को India या abroad में transfer किया जा सकता है।
Transfer MRPL, ONGC group companies या अन्य organisation के भीतर भी हो सकता है। जरूरत के मुताबिक shift और night-shift duty भी करनी पड़ सकती है।
MRPL ने working knowledge of Hindi को desirable qualification के तौर पर रखा है।
Service Bond कितना है?
Selected candidate को joining के बाद 3 years का service bond पूरा करना होगा।
MRPL suitable candidates का panel भी बना सकता है और यह panel one year तक operate किया जा सकता है।
कंपनी को minimum eligibility standards बढ़ाने, notified posts को भरने या किसी position को vacant रखने का अधिकार भी है और इसके लिए अलग reason देना जरूरी नहीं होगा।
General category सहित applicable candidates के लिए application fee ₹118 है।
SC, ST, PwBD और Ex-Servicemen candidates को application fee से exemption दी गई है।
Serving Government, PSU या autonomous-body employees को application process के दौरान proper channel से printed application forward करना होगा या interview के समय NOC प्रस्तुत करना होगा।
MRPL Recruitment 2026 में आवेदन कब तक करें?
Online application window 21 अगस्त 2026 से शुरू है। आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख 19 सितंबर 2026 है और application window शाम 6 बजे बंद होगी।
इसलिए eligible candidates को GATE 2026 paper, engineering degree, category, marks और age criteria check करने के बाद application submit करना चाहिए।
MRPL Assistant Engineer Recruitment 2026: जरूरी जानकारी एक नजर में
जानकारी
Details
Organisation
Mangalore Refinery and Petrochemicals Limited
Parent Company
ONGC
Post
Assistant Engineer – E2 Grade
Cadre
Management Cadre
Total Posts
26
Chemical Posts
15
Mechanical Posts
8
Electrical Posts
3
GATE Requirement
GATE 2026 only
GATE Papers
CH, ME, EE
Selection
GATE Shortlisting, Group Discussion, Personal Interview
Starting Basic Pay
₹50,000
Pay Scale
₹50,000 – ₹1,60,000
Application Start
21 August 2026
Last Date
19 September 2026, 6:00 PM
Application Fee
₹118
Exemption
SC, ST, PwBD, Ex-Servicemen
Service Bond
3 years
Job Location
MRPL requirements के अनुसार
MRPL Assistant Engineer Recruitment 2026
अगर आपके पास eligible engineering degree है और आपने GATE 2026 में संबंधित CH, ME या EE paper दिया है, तो यह भर्ती आपके लिए relevant opportunity है। Application submit करने से पहले अपनी degree nomenclature, aggregate percentage, category और age की conditions जरूर match करें, क्योंकि MRPL ने discipline-wise eligibility अलग रखी है।
वसई में 66 साल की महिला को CM Vijay Thalapathy के Deepfake Video से ₹12 लाख की ठगी का शिकार बनाया गया। जानिए पूरा मामला और Cyber Fraud से बचने का आसान रास्ता।
पालघर/ वसई: सोशल मीडिया पर दिखने वाला कोई Video कितना भी असली क्यों न लगे, अब उस पर आंख बंद करके भरोसा करना भारी पड़ सकता है। वसई में 66 साल की एक महिला को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय यानी Thalapathy Vijay के नाम और चेहरे से बनाए गए Fake AI Video के जरिए आर्थिक मदद का भरोसा दिलाया गया और करीब 12 लाख रुपये की ठगी कर ली गई।
पुलिस के मुताबिक, महिला ने Instagram पर एक Reel देखी थी, जिसमें विजय को कथित तौर पर गरीब और जरूरतमंद लोगों को Financial Assistance देने की बात करते दिखाया गया था। Reel में संपर्क करने के लिए एक Phone Number भी दिया गया था। महिला ने जब उस नंबर पर संपर्क किया तो उन्हें दूसरे नंबर पर बात करने के लिए कहा गया। इसके बाद शुरू हुआ पैसे ऐंठने का पूरा खेल।
मामला 27 जुलाई से शुरू हुआ। महिला की नजर Instagram पर एक ऐसी Reel पर पड़ी जिसमें विजय को लोगों को आर्थिक मदद देने की बात कहते हुए दिखाया गया था।
महिला ने Reel में दिए गए नंबर पर फोन किया। दूसरी तरफ मौजूद लोगों ने उनसे बातचीत शुरू की और उन्हें भरोसा दिलाया कि उन्हें आर्थिक मदद मिल सकती है।
महिला ने करीब 5 लाख रुपये की मदद मांगी। इसके बाद ठगों ने कहा कि मदद की रकम हासिल करने के लिए पहले 5 हजार रुपये Processing Fee जमा करनी होगी।
महिला ने यह रकम दे दी।
यहीं से ठगी का सिलसिला और आगे बढ़ गया।
₹5 हजार के बाद ₹77 लाख का नया झांसा
Processing Fee देने के बाद ठगों ने महिला को बताया कि उन्हें विदेश से करीब 77 लाख रुपये मिलने वाले हैं। इसके लिए Tax और दूसरे Charges के नाम पर लगातार पैसे जमा करने को कहा गया।
मदद की रकम मिलने की उम्मीद में महिला ठगों की बातों पर भरोसा करती रहीं और अलग-अलग समय पर पैसे भेजती रहीं।
पुलिस के मुताबिक, महिला ने एक Private Credit Society से Loan लिया, अपनी Jewellery गिरवी रखी और अपनी बेटी के Bank Account से भी पैसे निकाले। इसके बाद ठगों की ओर से बताए गए Bank Accounts में कुल करीब 12 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए गए।
पूरी रकम करीब 10 दिनों के दौरान भेजी गई।
12 लाख देने के बाद भी नहीं मिली मदद
महिला को जब वादा की गई Financial Assistance नहीं मिली और ठग लगातार पैसे मांगते रहे, तब उन्हें शक हुआ।
इसके बाद उन्हें समझ आया कि जिस Video को देखकर उन्होंने भरोसा किया था, वह असली नहीं बल्कि AI से बनाया गया Fake Video था।
मामले में वालिव Police Station में शिकायत दर्ज की गई है। पुलिस ने Bharatiya Nyaya Sanhita और Information Technology Act के तहत Cheating का मामला दर्ज किया है।
Police Inspector Gorakshnath Zaid ने मामले की पुष्टि की है। अब पुलिस उन लोगों का पता लगाने की कोशिश कर रही है जिन्होंने महिला से संपर्क किया और जिन Bank Accounts में रकम ट्रांसफर करवाई गई।
वसई का मामला अकेला नहीं है। हाल के महीनों में देश के अलग-अलग हिस्सों से Deepfake Video के जरिए Financial Fraud और Blackmail के मामले सामने आए हैं।
पुणे में 38 साल की एक महिला को Instagram पर उद्योगपति रतन टाटा का Deepfake Video दिखाया गया। इस Video में Share Trading से जुड़े निवेश और अच्छे Return का दावा किया गया था। महिला ने Advertisement पर क्लिक किया और बाद में एक App के जरिए कथित Investment Scheme में पैसे लगाए। पुलिस के अनुसार उन्हें करीब 4.09 लाख रुपये का नुकसान हुआ।
इसके अलावा वहीं, पुणे में ही 56 साल के एक Businessman को Finance Minister Nirmala Sitharaman के Deepfake Video के जरिए Investment के नाम पर फंसाया गया। इसके बाद Fake Forex Trading Platform, Fake Investment Advisor और SpaceX Shares के नाम पर करीब 1.07 करोड़ रुपये की ठगी की गई। Fake Platform पर कथित Profit बढ़ता हुआ दिखाया गया और पैसा निकालने के लिए आगे और रकम मांगी गई।
बेंगलुरु में एक Retired Professor को Facebook पर Nirmala Sitharaman का Deepfake Video दिखाया गया। इसके बाद उन्हें एक Fake Trading Platform, Telegram Chat और Overseas Calls के जरिए Investment के नाम पर फंसाया गया और 61 लाख रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ।
पटना में Deepfake का इस्तेमाल अलग तरीके से किया गया। एक Hotel Owner को उनके चेहरे से बनाए गए कथित अश्लील AI Videos के जरिए Blackmail किया गया और करीब 97 लाख रुपये की रकम वसूली गई। पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था और अंतिम 20 लाख रुपये की किस्त बरामद की गई।
इन मामलों से साफ है कि Deepfake का इस्तेमाल अब सिर्फ Fake News फैलाने के लिए नहीं बल्कि Investment Fraud, Financial Assistance Scam और Blackmail जैसे अपराधों में भी किया जा रहा है।
Video में नेता या Celebrity दिखे तो भी तुरंत भरोसा न करें
AI की मदद से किसी व्यक्ति का चेहरा और आवाज इस्तेमाल करके ऐसा Video तैयार किया जा सकता है जिसमें वह व्यक्ति ऐसी बात कहता हुआ दिखाई दे सकता है जो उसने वास्तव में कही ही नहीं।
इसलिए अगर किसी Social Media Video में कोई नेता, Celebrity, कारोबारी या सरकारी अधिकारी पैसे, Investment, नौकरी, Lottery या Financial Assistance का दावा करता दिखाई दे और साथ में कोई Mobile Number, WhatsApp Number, Website या Payment Request दी गई हो तो सीधे पैसे भेजना जोखिम भरा हो सकता है।
Indian Cyber Crime Coordination Centre यानी I4C के मुताबिक Financial Cyber Fraud की शिकायत National Helpline Number 1930 पर की जा सकती है। इसके बाद Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत की जानकारी पूरी करनी होती है।
शिकायत करते समय Transaction ID, Transaction Date, Bank या Payment App की जानकारी, UPI ID, Account Details, Phone Numbers, Chat और Screenshots जैसी जानकारी सुरक्षित रखना जरूरी है।
साथ ही अपने Bank या संबंधित Payment Service Provider को भी तुरंत Fraud Transaction की जानकारी देनी चाहिए।
I4C का Citizen Financial Cyber Fraud Reporting and Management System Financial Fraud की शिकायतों पर Banks और Payment Intermediaries के साथ कार्रवाई के लिए बनाया गया है।
साइबर फ्रॉड के खिलाफ सरकार की कार्रवाई भी तेज
सरकार के मुताबिक 30 जून 2026 तक CFCFRMS के जरिए 32.80 लाख से ज्यादा शिकायतों में 11,158 करोड़ रुपये से अधिक की रकम बचाई गई। इसी अवधि तक I4C ने 3,718 Mobile Apps को भी Block किया था। सरकार ने यह भी बताया कि Suspect Registry के जरिए संदिग्ध Identifiers और Mule Accounts की जानकारी Banks और Financial Institutions के साथ साझा की जा रही है।
अप्रैल 2026 से Money Restoration Module और Grievance Redressal Module भी काम कर रहे हैं, जिनका उद्देश्य Cyber Fraud में फंसी रकम की बहाली और Bank Accounts के Freeze या Lien से जुड़ी शिकायतों को तेजी से संभालना है।
Deepfake को लेकर नए नियम भी लागू
भारत सरकार ने 2026 में AI-generated और Deepfake Content से जुड़े नियमों को और मजबूत किया है। फरवरी 2026 में IT Rules में बदलाव करके Synthetically Generated Information यानी AI से तैयार सामग्री से होने वाले नुकसान को लेकर नया regulatory framework लाया गया। इसमें Deepfake और AI-generated content भी शामिल है।
सरकार ने Social Media Platforms के लिए AI-generated content की स्पष्ट पहचान और traceable information से जुड़ी व्यवस्था भी तय की है। Unlawful content की शिकायतों पर Platforms को तेजी से कार्रवाई करने की जिम्मेदारी दी गई है।
अब Social Media पर दिखने वाले Video को लेकर क्या सावधानी रखें?
किसी बड़े नेता या Celebrity का Video देखकर सिर्फ इसलिए भरोसा न करें क्योंकि उसमें चेहरा और आवाज बिल्कुल असली जैसी लग रही है।
अगर Video में Financial Assistance, Investment, नौकरी, Lottery या किसी दूसरी आर्थिक मदद का दावा है तो पहले Official Source से जानकारी Verify करें।
Video में दिए गए किसी अनजान Phone Number या Link पर तुरंत संपर्क न करें।
Processing Fee, Tax, Verification Charge या Withdrawal Charge के नाम पर पैसे मांगने पर रुक जाएं।
किसी अनजान Bank Account या UPI ID में Payment न करें।
और अगर गलती से पैसा भेज दिया है तो इंतजार करने के बजाय तुरंत 1930 पर शिकायत करें और Cyber Crime Portal पर मामला दर्ज करें।
वसई की 66 साल की महिला के साथ हुई यह घटना बताती है कि Social Media पर दिखने वाला भरोसेमंद चेहरा भी ठगी का जरिया बन सकता है। यहां 5 हजार रुपये की छोटी Payment से शुरू हुआ मामला करीब 12 लाख रुपये के नुकसान तक पहुंच गया।
इसलिए अगली बार किसी Video में कोई बड़ा नेता, Celebrity या सरकारी व्यक्ति आर्थिक मदद या Investment का दावा करता दिखाई दे तो Video देखकर फैसला लेने के बजाय पहले उसकी सच्चाई Verify करें। यही सावधानी आपके पैसे को ऐसे Deepfake Cyber Fraud से बचा सकती है।