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  • नेपाल बाढ़ में 320 भारतीय अब भी लापता, 3 हजार लोग Missing; Rescue में सामने आया नया खतरा

    नेपाल बाढ़ में 320 भारतीय अब भी लापता, 3 हजार लोग Missing; Rescue में सामने आया नया खतरा

    नेपाल में फ्लैश बाढ़ के बाद 320 भारतीय अब भी संपर्क से बाहर हैं। करीब 3 हजार लोग लापता हैं। जानिए rescue operation, मौतों और नए खतरे का ताजा अपडेट आज यहां भी।

    काठमांडू: नेपाल में आई विनाशकारी फ्लैश बाढ़ के बाद हालात अभी भी बेहद गंभीर बने हुए हैं। सबसे बड़ी चिंता उन लोगों को लेकर है, जिनसे हादसे के बाद संपर्क नहीं हो पाया। इनमें कम से कम 320 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। दूसरी तरफ नेपाल और Tibet को मिलाकर करीब 3 हजार लोगों के अब भी लापता होने की जानकारी सामने आ रही है। ऐसे में rescue operation तेज होने के बावजूद कई परिवारों को अपने लोगों की खबर का इंतजार है।

    नेपाल बाढ़ में 320 भारतीयों का क्या हुआ?

    भारत के विदेश मंत्रालय के मुताबिक नेपाल में आई बाढ़ के बाद करीब 320 Indian nationals अब भी contact में नहीं हैं। इसके अलावा 100 से ज्यादा Indian-origin लोगों के भी लापता होने की जानकारी सामने आई है।

    इसमें कई लोग Kailash Mansarovar Yatra पर गए भारतीय यात्री हैं। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास अचानक आई बाढ़ और landslide के बाद कई यात्रियों से संपर्क टूट गया। परिवार अब हेल्पलाइन, अस्पतालों और स्थानीय authorities के जरिए अपने लोगों की जानकारी तलाश रहे हैं।

    एक जरूरी बात यह है कि 320 भारतीयों का मतलब 320 मौतें नहीं है। ये वे लोग हैं जिनसे फिलहाल संपर्क नहीं हो पाया है। Rescue और identification operation आगे बढ़ने के साथ यह आंकड़ा बदल सकता है।

    चीन की तरफ फंसे भारतीयों का क्या हुआ?

    नेपाल के साथ China side पर भी कई भारतीय यात्री फंसे हुए थे। विदेश मंत्रालय ने बताया था कि करीब 400 भारतीय वहां सुरक्षित और संपर्क में थे। इनमें से 96 लोग जमीन के रास्ते Nepal पहुंच चुके थे, जबकि 21 भारतीयों को सुरक्षित Delhi लाया गया।

    इसके अलावा Nepal में एक hydropower project से जुड़े भारतीयों को भी rescue किया गया है। अलग-अलग rescue operations में भारतीय नागरिकों के सुरक्षित निकलने की खबरें लगातार सामने आ रही हैं।

    करीब 3 हजार लोग अब भी Missing

    यह disaster सिर्फ भारतीयों तक सीमित नहीं है। Nepal और Tibet में करीब 3 हजार लोग अब भी missing बताए जा रहे हैं। Reuters के मुताबिक Nepal में 669 और Tibet में 7 लोगों की मौत दर्ज की गई है, यानी कुल मौतों का आंकड़ा 676 तक पहुंच गया है।

    ताजा जानकारी के मुताबिक 3,700 से ज्यादा लोगों को Nepal में rescue किया जा चुका है। लेकिन पहाड़ी इलाकों में मलबा, टूटे रास्ते और संकरी घाटियां search operation को मुश्किल बना रही हैं।

    सबसे मुश्किल तलाश hydropower projects के आसपास चल रही है

    बाढ़ ने Trishuli River corridor में मौजूद hydropower projects को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। Upper Trishuli-1 project के आसपास mud और debris से भरे इलाकों में workers की तलाश की जा रही है। कुछ लोगों के tunnel में फंसे होने की आशंका के चलते rescue teams का फोकस इन जगहों पर भी है।

    इसी वजह से Nepal में rescue operation अब सिर्फ सड़क और गांवों तक सीमित नहीं है। नदी किनारे, मलबे में दबे इलाकों और hydropower tunnels तक search operation बढ़ाया गया है।

    आखिर इतनी खतरनाक बाढ़ आई कैसे?

    26 अगस्त को Nepal-Tibet border के पास अचानक आई flash flood ने कुछ ही समय में बड़े इलाके को अपनी चपेट में ले लिया। तेज पानी के साथ भारी मात्रा में rock, ice और debris नीचे आया, जिससे bridges, roads, buildings और infrastructure को भारी नुकसान हुआ।

    खबर के मुताबिक glacier collapse से शुरू हुए debris flow ने इस disaster को और खतरनाक बना दिया। बाढ़ का असर Bhote Koshi और Trishuli river corridor तक पहुंचा और कई settlements तथा infrastructure इसकी चपेट में आए।

    Kailash Mansarovar यात्रियों पर क्यों पड़ा बड़ा असर?

    इस पूरी घटना में Kailash Mansarovar Yatra का angle सबसे ज्यादा चिंता बढ़ाने वाला है। Nepal और Tibet के रास्ते इस समय बड़ी संख्या में भारतीय यात्री यात्रा कर रहे थे। अचानक आई बाढ़ ने कई border routes और access points को प्रभावित कर दिया।

    इसी वजह से कई परिवारों को अपने रिश्तेदारों की आखिरी location तक पता लगाने में भी मुश्किल हुई। कुछ परिवार Nepal पहुंचकर खुद अपने लोगों की तलाश कर रहे हैं।

    क्या rescue operation अब तेज हुआ है?

    खराब मौसम की वजह से rescue operation में रुकावट आई थी, लेकिन अब search and rescue activities फिर से शुरू हो गई हैं। Nepal की तरफ से remote और मुश्किल इलाकों में technical assistance की जरूरत भी बताई गई है।

    India समेत कई देशों से relief material और rescue support पहुंचाया जा रहा है। Helicopters के जरिए लोगों को सुरक्षित निकालने और जरूरी सामान पहुंचाने का काम भी चल रहा है।

    लेकिन एक और खतरा सामने है

    बाढ़ के बाद Himalayan region में एक नई lake बनने से भी authorities की चिंता बढ़ी हुई है। फिलहाल इसके water level में कमी आने की बात सामने आई है, लेकिन इसे लगातार monitor किया जा रहा है।

    अगर पानी का दबाव फिर बढ़ता है तो आसपास के इलाकों में दोबारा flood risk पैदा हो सकता है। इसलिए rescue operation के साथ-साथ secondary flood threat पर भी नजर रखी जा रही है।

    अभी सबसे बड़ा सवाल क्या है?

    फिलहाल सबसे बड़ा सवाल उन करीब 320 भारतीयों को लेकर है जिनसे संपर्क नहीं हो पाया है। इनके अलावा Nepal और Tibet में हजारों दूसरे लोग भी missing हैं।

    Rescue teams मलबे, नदी किनारे, remote villages और hydropower sites पर लगातार search कर रही हैं। जैसे-जैसे प्रभावित इलाकों तक पहुंच बढ़ेगी, missing लोगों को लेकर तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।

    फिलहाल परिवारों की नजर एक ही चीज पर है—कहीं से भी फोन आए और पता चले कि उनका अपना इंसान सुरक्षित है।

  • मुंबई में ₹17.67 लाख की Chemical ठगी का खुलासा, फर्जी कंपनी-SIM से खेल; राजस्थान से 2 आरोपी गिरफ्तार

    मुंबई में ₹17.67 लाख की Chemical ठगी का खुलासा, फर्जी कंपनी-SIM से खेल; राजस्थान से 2 आरोपी गिरफ्तार

    मुंबई में ₹17.67 लाख की केमिकल ठगी का खुलासा, MHB कॉलोनी पुलिस ने राजस्थान से दो आरोपियों को पकड़ा। फर्जी कंपनी, SIM, Aadhaar-PAN और नकली UTR से ठगी का प्लान।

    मुंबई: बोरीवली पश्चिम के MHB कॉलोनी पुलिस ने Chemical कारोबार से जुड़ी ₹17.67 लाख की ठगी के मामले में राजस्थान से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में फर्जी Aadhaar-PAN, SIM, कंपनी के कागजात और नकली Payment Screenshot/UTR के जरिए कारोबारियों को भरोसे में लेने का मामला सामने आया है। खास बात यह है कि आरोपी सिर्फ एक कंपनी के संपर्क में नहीं थे, बल्कि करीब 38 Chemical कंपनियों से इसी तरह संपर्क किए जाने की जानकारी पुलिस को मिली है।

    WhatsApp पर Chemical का ऑर्डर, फिर शुरू हुआ पूरा खेल

    मामला MHB कॉलोनी पुलिस स्टेशन में दर्ज शिकायत से सामने आया। शिकायतकर्ता निर्मित संजय अजमेरा, उम्र 32 वर्ष, Chemical कारोबार से जुड़े हैं। उनके मोबाइल नंबर पर WhatsApp के जरिए “प्रीमियर सॉल्व्हेंट्स” कंपनी के नाम से Chemical का ऑर्डर दिया गया।

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    बोरीवली एम एच बी कॉलोनी पुलिस टीम के साथ गिरफ्तार आरोपियों की तस्वीर

    शुरुआत में सब कुछ एक सामान्य कारोबारी डील जैसा दिखाई दिया, लेकिन आगे की जांच में पता चला कि ऑर्डर देने वाले लोगों ने अपनी असली पहचान छिपाकर पूरा फर्जी सेटअप तैयार किया था।

    Shyam Industries के नाम से बनाई फर्जी कंपनी

    आरोपियों ने “Shyam Industries” नाम से फर्जी कंपनी तैयार की। इसके लिए फर्जी Aadhaar Card और PAN Card का इस्तेमाल किया गया। इतना ही नहीं, कंपनी को असली दिखाने के लिए विजिटिंग कार्ड और लेटरहेड भी तैयार किए गए।

    इसके बाद Chemical कारोबारियों से संपर्क कर ऑर्डर देने और पेमेंट करने का भरोसा दिलाया गया।

    मामला तब संदिग्ध हुआ जब आरोपियों ने पेमेंट किए जाने का दावा करते हुए WhatsApp पर Payment Screenshot और UTR नंबर भेजा। स्क्रीनशॉट से ऐसा दिखाने की कोशिश की गई कि रकम ट्रांसफर हो चुकी है, जबकि वास्तव में ₹17,67,375 का भुगतान नहीं हुआ था।

    इसके बाद Chemical को Transporter के जरिए मंगाने की कोशिश की गई। पुलिस की जांच में यही पूरा तरीका ठगी के मुख्य पैटर्न के तौर पर सामने आया।

    पुलिस को 38 और Chemical कंपनियों से संपर्क का पता चला

    जांच आगे बढ़ी तो मामला एक कारोबारी तक सीमित नहीं रहा। पुलिस को जानकारी मिली कि आरोपियों ने इसी तरह करीब 38 अलग-अलग Chemical कंपनियों से संपर्क किया था और Chemical मंगाने के लिए बातचीत की थी।

    इससे पुलिस को शक हुआ कि फर्जी कंपनी और पहचान तैयार करने के पीछे एक बड़ा ठगी का प्लान था और दूसरे कारोबारियों को भी इसी तरीके से निशाना बनाया जा सकता था।

    Fake SIM से लेकर Fake Identity तक

    पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने आपस में मिलीभगत कर एक और फर्जी SIM हासिल की थी। इस दौरान सोनूकुमार प्रजापत के नाम का इस्तेमाल करते हुए फर्जी पहचान तैयार की गई।

    इसी पहचान के आधार पर Aadhaar और PAN तैयार किए गए और फिर Shyam Industries के नाम से कारोबार करने का दिखावा किया गया।

    यानी इस पूरे मामले में सिर्फ नकली पेमेंट स्क्रीनशॉट ही नहीं, बल्कि पहचान से लेकर कंपनी के दस्तावेज तक कई स्तर पर फर्जीवाड़ा किया गया।

    आरोपी बार-बार बदल रहा था Location

    मामला दर्ज होने के बाद MHB कॉलोनी पुलिस की Crime Detection टीम ने मोबाइल नंबर और दूसरी तकनीकी जानकारी के आधार पर आरोपियों की तलाश शुरू की।

    जांच के दौरान आरोपी लगातार अपनी Location बदल रहा था। पुलिस ने उसके इस्तेमाल किए जा रहे मोबाइल नंबरों की जानकारी निकाली और तकनीकी जांच के जरिए उसकी गतिविधियों को ट्रैक किया।

    जांच में आरोपी का संपर्क राजस्थान से सामने आया। इसके बाद पुलिस टीम राजस्थान पहुंची और स्थानीय पुलिस की मदद से आरोपी को ट्रेस किया।

    राजस्थान के Jodhpur से मुख्य आरोपी गिरफ्तार

    तकनीकी जांच के आधार पर मुख्य आरोपी ललितकुमार भगवानराम बिश्नोई, उम्र 36 वर्ष, को राजस्थान के Jodhpur क्षेत्र से पकड़ा गया। पूछताछ के दौरान उसके खिलाफ सामने आए आरोपों और मामले में उसकी भूमिका की जांच की गई।

    पुलिस के अनुसार पूछताछ में अपराध से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत गिरफ्तार किया गया।

    मामले में उसके साथी विकास बिश्नोई, उम्र 19 वर्ष, को भी सहभागी पाए जाने पर गिरफ्तार किया गया है।

    दोनों की भूमिका सामने आने के बाद केस में भारतीय न्याय संहिता की धारा 3(5) भी जोड़ी गई है।

    कौन-कौन सी धाराओं में मामला दर्ज है?

    MHB कॉलोनी पुलिस स्टेशन में CR No. 960/2026 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

    मामले में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 316(2), 336(2), 318(4), 340(2) और 3(5) के तहत कार्रवाई की गई है।

    पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि 38 अन्य Chemical कंपनियों से संपर्क करने के पीछे आरोपियों का मकसद क्या था और इस नेटवर्क से कितने कारोबारियों को नुकसान पहुंचा सकता था।

    वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में हुई कार्रवाई

    इस कार्रवाई में मुंबई पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का मार्गदर्शन रहा। पुलिस आयुक्त देवेन भारती, पुलिस सह आयुक्त मनोजकुमार शर्मा, अपर पुलिस आयुक्त डॉ. अभिनव देशमुख और पुलिस उपायुक्त संदीप घुगे के मार्गदर्शन में जांच आगे बढ़ाई गई।

    गोराई विभाग के सहायक पुलिस आयुक्त सुधाकर हूंबे की निगरानी में MHB कॉलोनी पुलिस की टीम ने कार्रवाई की।

    MHB कॉलोनी पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक विवेक सोनवणे और पुलिस निरीक्षक (गुन्हे) मिलिंद नागपुरे के मार्गदर्शन में सहायक पुलिस निरीक्षक तथा अपराध प्रकटीकरण अधिकारी श्रीकांत मगर और उनकी टीम ने तकनीकी जांच के जरिए आरोपियों तक पहुंच बनाई।

    कार्रवाई में पुलिस हवलदार संदीप पाटील, सतीश देवकर, अर्जुन आहेर, पुलिस नाईक सचिन मंजुळे और सिद्धेश पाटील भी शामिल रहे।

    अब 38 कंपनियों वाले कनेक्शन की जांच

    दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस के सामने अगला बड़ा सवाल यह है कि Shyam Industries नाम की फर्जी कंपनी बनाकर कितने कारोबारियों को इसी तरीके से संपर्क किया गया था और कितनी जगह Chemical मंगाने की कोशिश की गई।

    ₹17.67 लाख की शिकायत से शुरू हुई जांच में करीब 38 Chemical कंपनियों से संपर्क का खुलासा होने के बाद पुलिस इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।

    खबर का सार

    मामलाजानकारी
    पुलिस स्टेशनMHB कॉलोनी पुलिस स्टेशन, मुंबई
    शिकायतकर्तानिर्मित संजय अजमेरा, 32 वर्ष
    ठगी की रकम₹17,67,375
    मुख्य आरोपीललितकुमार भगवानराम बिश्नोई, 36 वर्ष
    दूसरा आरोपीविकास बिश्नोई, 19 वर्ष
    फर्जी कंपनीShyam Industries
    इस्तेमाल की गई पहचानफर्जी Aadhaar-PAN और SIM
    ठगी का तरीकाWhatsApp ऑर्डर, नकली Payment Screenshot/UTR
    अन्य कंपनियों से संपर्ककरीब 38 Chemical कंपनियां
    गिरफ्तारीराजस्थान, Jodhpur क्षेत्र
    केस नंबरCR No. 960/2026
    धाराएंBNS 316(2), 336(2), 318(4), 340(2), 3(5)
  • ISRO Recruitment 2026: 175 Scientist Engineer पदों पर भर्ती शुरू, ₹56,100 Salary; Apply करने से पहले ये Rule जरूर देखें

    ISRO Recruitment 2026: 175 Scientist Engineer पदों पर भर्ती शुरू, ₹56,100 Salary; Apply करने से पहले ये Rule जरूर देखें

    ISRO Recruitment 2026 में Scientist Engineer के 175 पदों पर आवेदन शुरू हो गया है। ₹56,100 बेसिक सैलरी, eligibility, exam और fee की पूरी जानकारी।

    नई दिल्ली/मुंबई: Engineering करने वाले युवाओं के लिए बड़ी खबर है। ISRO ने Scientist/Engineer ‘SC’ के 175 पदों पर भर्ती के लिए online application शुरू कर दिया है। आवेदन की प्रक्रिया 27 अगस्त 2026 से शुरू हो चुकी है और eligible candidates 16 सितंबर 2026 रात 11:55 बजे तक form भर सकते हैं।

    इस recruitment में Electronics, Mechanical और Computer Science Engineering से जुड़े candidates को मौका मिलेगा। Selected candidates को Level-10 Pay Matrix में नौकरी मिलेगी, जहां minimum basic salary ₹56,100 प्रति माह से शुरू होगी।

    लेकिन यहां सबसे जरूरी बात vacancy या salary नहीं, बल्कि eligibility के rules हैं। 65% marks होने के बावजूद कुछ candidates eligible नहीं होंगे। Degree का नाम, CGPA, backlog, course duration, MCA/M.Tech और AMIE से जुड़े rules application से पहले समझना जरूरी है।

    175 पदों में किस Branch के लिए कितनी Vacancy?

    ISRO ने vacancies को तीन मुख्य disciplines में रखा है।

    DisciplineISRO CentresPRLकुल
    Electronics991100
    Mechanical52153
    Computer Science21122
    कुल1723175

    यानी सबसे ज्यादा 100 vacancies Electronics में हैं। Mechanical में 53 और Computer Science में 22 posts हैं।

    PRL यानी Physical Research Laboratory की तीन vacancies भी इसी कुल 175 में शामिल हैं।

    एक और जरूरी बात—Scientist/Engineer ‘SC’ में ‘SC’ का मतलब Scheduled Caste नहीं है। यह सिर्फ post का designation है।

    सबसे पहले देखें: क्या आप Eligible हैं?

    इस recruitment के लिए relevant BE/B.Tech या equivalent qualification जरूरी है।

    PostQualification
    ElectronicsBE/B.Tech या accepted allied discipline
    MechanicalBE/B.Tech या accepted allied discipline
    Computer ScienceBE/B.Tech या accepted allied discipline

    तीनों disciplines में graduation में minimum 65% marks या 6.84 CGPA जरूरी है।

    Age की बात करें तो 16 सितंबर 2026 को maximum age 28 साल होनी चाहिए।

    लेकिन यहीं से कुछ important rules शुरू होते हैं।

    आपकी Degree का नाम अलग है तो भी मौका हो सकता है

    अगर आपकी degree का नाम exactly Electronics, Mechanical या Computer Science नहीं है तो तुरंत खुद को ineligible न मानें।

    Electronics category में Applied Electronics, Electrical & Electronics, Electronics & Communication, Electronics & Instrumentation, Electronics & Telecommunication, Industrial Electronics, Power Electronics, Telecommunication, Instrumentation & Control, Avionics जैसी कई allied disciplines स्वीकार की गई हैं।

    Mechanical में Aeronautical, Aerospace, Industrial & Production, Manufacturing, Mechanical & Automation, Mechatronics, Production Engineering, Metallurgical & Materials और Mechanical Engineering Design जैसी disciplines शामिल हैं।

    Computer Science category में Computer Engineering, Computer Science & Technology, CS & IT, Information Technology, Information Science, AI & ML, AI & Data Science, Cyber Security, Software Engineering, Big Data Analytics, Cloud Computing और Computer Networking जैसी disciplines भी शामिल हैं।

    इसलिए degree का नाम अलग होने पर official discipline list से match करना जरूरी है।

    65% है फिर भी Form Reject हो सकता है!

    ISRO का 65% rule जितना simple दिखता है, उतना है नहीं।

    अगर आपकी marksheet में सिर्फ CGPA है तो वही CGPA 6.84 या उससे ज्यादा होना चाहिए। University की conversion formula लगाकर कम CGPA को percentage में बदलकर eligibility हासिल नहीं की जा सकती।

    अगर marksheet में percentage और CGPA दोनों दिए हैं तो दोनों में से कम से कम एक ISRO के required benchmark को पूरा करना चाहिए।

    सबसे बड़ा trap course duration का है।

    अगर आपकी B.Tech चार साल की थी लेकिन backlog के कारण आपने पांच साल में graduation पूरी की, तो आप eligible नहीं होंगे।

    इसलिए apply करने से पहले यह check करें:

    Eligibility CheckRule
    Percentage65% या ज्यादा
    CGPA6.84 या ज्यादा
    Course durationनिर्धारित अवधि में graduation complete
    QualificationRelevant BE/B.Tech/equivalent

    MCA या M.Tech किया है तो क्या Apply कर सकते हैं?

    सिर्फ MCA के आधार पर Scientist/Engineer ‘SC’ के लिए eligibility नहीं बनती।

    सिर्फ M.Tech होने से भी BE/B.Tech की essential qualification replace नहीं होती। अगर आपकी BE/B.Tech required marks पूरा नहीं करती तो M.Tech के अच्छे marks से यह कमी पूरी नहीं होगी।

    AMIE और Grad-IETE candidates के लिए अलग eligibility conditions हैं। इसलिए ऐसे candidates को सामान्य BE/B.Tech rule मानकर form submit नहीं करना चाहिए।

    SC/ST/OBC को 65% में Relaxation मिलेगी?

    नहीं।

    Category के आधार पर educational qualification के minimum 65% या 6.84 CGPA में relaxation नहीं दी गई है।

    यानी reservation benefit अलग है, लेकिन minimum qualification पहले पूरी करनी होगी।

    Salary सुनकर चौंक जाएंगे!

    ISRO Scientist/Engineer ‘SC’ का Pay Level 10 है।

    Minimum Basic Pay: ₹56,100 प्रति माह

    इसके अलावा applicable rules के अनुसार:

    • Dearness Allowance
    • House Rent Allowance
    • Transport Allowance
    • Medical facilities
    • Subsidised canteen
    • Limited quarters facility
    • Leave Travel Concession
    • Group Insurance
    • House Building Advance

    जैसी सुविधाएं मिलती हैं।

    ध्यान रखें, ₹56,100 basic pay है। Actual in-hand salary posting और applicable allowances के हिसाब से अलग हो सकती है।

    ISRO की Job Permanent है या Temporary?

    यह सवाल भी काफी candidates के मन में रहता है।

    Scientist/Engineer ‘SC’ posts permanent nature की हैं। Notification में temporary शब्द probation period के context में इस्तेमाल किया गया है।

    Selected candidate को ISRO या Department of Space के किसी भी Centre/Unit में posting दी जा सकती है और जरूरत के अनुसार transfer भी किया जा सकता है।

    Selection Process में बड़ा Twist: Exam सिर्फ Technical नहीं है

    Selection Written Test/CBT और Interview से होगा।

    Written Test 100 marks का होगा।

    PartQuestionsMarksTime
    Part A – Technical80 MCQs8090 मिनट
    Part B – AptitudeMaximum 15 MCQs2030 मिनट

    Part A में गलत answer पर one-third negative marking होगी।

    Part B में negative marking नहीं है। इसमें numerical, logical, diagrammatic, abstract और deductive reasoning के questions आएंगे।

    इसलिए सिर्फ अपनी engineering branch पढ़ना काफी नहीं है।

    Written Test में Qualify करने के लिए कितने Marks?

    Unreserved candidates के लिए दोनों parts में अलग-अलग minimum 50% marks जरूरी हैं।

    PwBD candidates के लिए reserved posts में दोनों parts में 40% minimum qualifying marks हैं।

    Final qualifying criteria:

    CandidateWritten TestInterview
    Unreserved60% aggregate50%
    PwBD, reserved post50% aggregate40%

    Written Test के बाद लगभग 1:5 ratio में candidates को interview के लिए shortlist किया जाएगा, लेकिन minimum 10 candidates का provision है।

    Interview में क्या पूछा जाएगा?

    Interview 100 marks का होगा।

    ComponentMarks
    Technical/Academic Knowledge40
    General Awareness in Specialisation20
    Presentation & Communication20
    Comprehension10
    Academic Achievements10

    Final selection में Written Test और Interview को 50:50 weightage दिया जाएगा।

    Tie होने पर पहले Written Test marks, फिर essential qualification marks और उसके बाद age को देखा जाएगा। Older candidate को preference दी जाएगी।

    ₹750 Fee देखकर Confuse मत होना

    सभी candidates को application के समय ₹750 pay करना होगा।

    लेकिन पूरी राशि हर candidate के लिए final cost नहीं है।

    CategoryPayWritten Test देने पर Refund
    Women₹750₹750
    SC/ST₹750₹750
    PwBD₹750₹750
    Ex-servicemen₹750₹750
    अन्य candidates₹750₹500

    यानी अन्य candidates के लिए ₹250 actual application fee रह जाती है, जबकि बाकी राशि exam में उपस्थित होने पर refund होती है।

    अगर form भर दिया लेकिन Written Test में नहीं पहुंचे, तो refund नहीं मिलेगा।

    Refund उसी bank account में जाएगा जो application में दिया गया है। Account number और IFSC भरते समय खास सावधानी रखें।

    ₹750 कट गया लेकिन Payment Status नहीं आया?

    Bank से पैसा debit होने का message आना ही successful payment का final proof नहीं है।

    Payment status update होने में 24 घंटे तक लग सकते हैं। ISRO portal पर payment status check करें।

    Weekend या public holiday में update होने में और समय लग सकता है।

    Form भरने के बाद गलती सुधार पाएंगे?

    नहीं।

    Submitted application को बाद में edit करने का provision नहीं है।

    इसलिए final submit करने से पहले Name, DOB, marks, CGPA, discipline, category, email, bank details और examination city carefully check करें।

    जरूरत पड़ने पर fresh application submit की जा सकती है, लेकिन अंतिम valid application और fee receipt के rules लागू होंगे।

    Photograph और Signature में भी गलती न करें

    Photograph:

    • Recent colour passport-size
    • 4.5 cm × 3.5 cm
    • 100 KB से 200 KB
    • तीन महीने से ज्यादा पुराना नहीं
    • Light-coloured/preferably white background
    • Cap, hat या dark glasses नहीं

    Signature:

    • White paper पर black ink
    • 80 KB से 150 KB
    • Capital letters में नहीं

    Unclear या गलत upload होने पर application reject हो सकती है।

    Government या PSU में नौकरी करते हैं?

    अगर आप Government, PSU या Autonomous Body में working हैं तो employer को inform करके prior permission लेना जरूरी है।

    Interview के समय original NOC नहीं होने पर interview में बैठने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

    Interview में online application में दी गई details को prove करने वाले original documents भी दिखाने होंगे।

    Exam Centre कहां मिलेगा?

    ISRO ने Written Test के लिए 37 cities दी हैं।

    इनमें Mumbai, Pune, Bengaluru, Ahmedabad, Chennai, Hyderabad, Delhi, Kolkata, Jaipur, Nagpur, Lucknow, Patna, Varanasi, Thiruvananthapuram, Vijayawada और Visakhapatnam समेत कई शहर शामिल हैं।

    लेकिन exam city और job posting को एक न समझें।

    Mumbai चुनने का मतलब यह नहीं कि selection के बाद posting Mumbai में ही होगी।

    Application submit होने के बाद exam centre बदलने का provision भी नहीं है।

    ISRO की तैयारी के लिए Previous Papers भी उपलब्ध

    इस recruitment की तैयारी करने वाले candidates के लिए ISRO ने official recruitment page पर Electronics, Mechanical और Computer Science के 2023 और 2025 के previous papers उपलब्ध कराए हैं।

    पहले इन papers से question level समझना और फिर technical तथा aptitude preparation करना ज्यादा useful रहेगा।

    PwBD Candidates के लिए जरूरी Rule

    PwBD reservation के लिए minimum 40% relevant benchmark disability जरूरी है।

    Disability categories में blindness/low vision, deaf/hard of hearing, locomotor disability, autism/intellectual disability/specific learning disability/mental illness और multiple disabilities शामिल हैं।

    Backlog PwBD vacancies को applicable rules के अनुसार categories के बीच interchange किया जा सकता है। इसलिए किसी category में zero दिखने पर भी eligible PwBD candidate को apply करने से पहले पूरी notification check करनी चाहिए।

    कौन-सी गलती candidature खत्म कर सकती है?

    Incomplete application, गलत information, missing documents, unclear uploads, false NOC claim या recruitment procedure से deviation candidature cancel करा सकता है।

    Canvassing भी disqualification का कारण बन सकती है।

    Written Test के लिए TA नहीं मिलेगा। Interview के लिए applicable rules के अनुसार second-class train fare का TA दिया जा सकता है।

    ISRO Recruitment 2026 की Important Dates

    EventDate
    Advertisement27 अगस्त 2026
    Application शुरू27 अगस्त 2026
    Last Date16 सितंबर 2026, रात 11:55 बजे
    Fee Payment Last Date16 सितंबर 2026
    Age Calculation16 सितंबर 2026
    Answer KeyWritten Test के 3 working days के अंदर
    Objection WindowAnswer Key के बाद 5 दिन

    Written Test, Admit Card और Interview की exact date अभी announce नहीं की गई है।

    आगे की सूचना email और ISRO website के जरिए दी जाएगी। इसलिए application में active email ID देना और spam folder check करते रहना जरूरी है।

    आखिर में: Apply करने से पहले ये 7 चीजें Check करें

    1. आपकी BE/B.Tech relevant या accepted allied discipline में है?
    2. 65% या 6.84 CGPA पूरा है?
    3. Graduation prescribed course duration में पूरी हुई?
    4. 16 सितंबर 2026 को आपकी age 28 साल या उससे कम है?
    5. Photograph और signature सही format में हैं?
    6. Bank details और IFSC सही हैं?
    7. अगर Government/PSU job में हैं तो NOC की तैयारी है?

    अगर इन सवालों का जवाब हां है, तो ISRO Scientist/Engineer ‘SC’ Recruitment 2026 में आपके लिए आवेदन का रास्ता खुला है।

    आवेदन की आखिरी तारीख 16 सितंबर 2026 रात 11:55 बजे है। Last day का इंतजार करने के बजाय form पहले complete करना बेहतर रहेगा, क्योंकि गलत marks, degree details, bank information या uploaded document की वजह से बाद में correction का मौका नहीं मिलेगा।

    Official Notification, Apply Online, FAQ और Previous Year Papers ISRO की official recruitment website पर उपलब्ध हैं।

    ISRO Scientist/Engineer Recruitment 2026: जरूरी Links

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  • भारत-चीन सीमा विवाद पर डोभाल की चीन में बड़ी बैठक, वांग यी से बातचीत के बाद क्या बदला?

    भारत-चीन सीमा विवाद पर डोभाल की चीन में बड़ी बैठक, वांग यी से बातचीत के बाद क्या बदला?

    डोभाल-वांग यी की 25वीं बैठक में भारत-चीन सीमा विवाद पर क्या निकला? जानिए सीमा पर शांति, पुराने समझौते, व्यापार, कैलाश यात्रा और 2027 के अगले कदम की बड़ी खबर।

    नई दिल्ली: भारत-चीन के रिश्तों को लेकर बीजिंग से बड़ी खबर सामने आई है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच 25 अगस्त को 25वें दौर की विशेष प्रतिनिधि स्तर की बातचीत हुई। करीब छह साल पहले गलवान के बाद जिस रिश्ते में भारी तनाव आ गया था, उसमें अब बातचीत, सीमा प्रबंधन और कारोबारी गतिविधियों के जरिए धीरे-धीरे सामान्य स्थिति लौटने के संकेत जरूर हैं। लेकिन इस पूरी कहानी में एक बड़ा पेंच अभी भी बाकी है।

    25वें दौर की बातचीत के बाद दोनों देशों ने सीमा विवाद के राजनीतिक समाधान की कोशिश जारी रखने पर सहमति जताई है। यानी बातचीत आगे बढ़ी है, लेकिन सीमा विवाद खत्म होने या वास्तविक नियंत्रण रेखा का अंतिम सीमांकन तय होने की घोषणा नहीं हुई है। अगली विशेष प्रतिनिधि स्तर की बैठक 2027 में भारत में होगी।

    यही इस बैठक का सबसे बड़ा मतलब है—भारत और चीन के बीच रिश्तों में जमी बर्फ कुछ हद तक पिघली है, लेकिन सीमा का सबसे मुश्किल सवाल अभी भी टेबल पर है।

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    डोभाल और वांग यी की बैठक में आखिर क्या हुआ?

    बीजिंग में हुई बैठक में सीमा विवाद के साथ-साथ पूरे भारत-चीन संबंधों पर भी बातचीत हुई। दोनों पक्षों ने पिछले कुछ समय में रिश्तों में आई सकारात्मक गति और नेताओं के स्तर पर बनी सहमतियों को लागू करने में हुई प्रगति पर चर्चा की।

    बातचीत में सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने, सीमा से जुड़े मुद्दों पर लगातार संवाद जारी रखने और सीमा के अंतिम समाधान की दिशा में काम करने पर जोर रहा। चीन ने भी कहा कि दोनों पक्ष सीमा विवाद पर बातचीत के साथ-साथ द्विपक्षीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान जारी रखेंगे।

    डोभाल के लिए यह बैठक इसलिए भी अहम थी क्योंकि यह 2025 के 24वें दौर में बनी सहमतियों को आगे बढ़ाने का अगला बड़ा कदम था।

    सबसे पहले जानिए—क्या भारत-चीन सीमा विवाद खत्म हो गया?

    सीधा जवाब है—नहीं।

    25वें दौर में ऐसा कोई अंतिम समझौता सामने नहीं आया जिससे भारत-चीन सीमा की पूरी लाइन तय हो गई हो। न ही पूरे सीमा विवाद के समाधान की घोषणा हुई है।

    जो बात आगे बढ़ी है, वह है राजनीतिक बातचीत और सीमा प्रबंधन की प्रक्रिया। दोनों देश अभी भी 2005 में तय राजनीतिक मापदंडों और मार्गदर्शक सिद्धांतों के आधार पर निष्पक्ष, उचित और दोनों को स्वीकार्य समाधान तलाशने की बात कर रहे हैं।

    यानी एक तरफ सैनिकों के बीच तनाव कम हुआ है, दूसरी तरफ सीमा का अंतिम सवाल अभी बाकी है। यही अंतर समझना इस पूरी खबर को समझने के लिए सबसे जरूरी है।

    डिसएंगेजमेंट हुआ, लेकिन सीमा तय होना अभी बाकी

    भारत-चीन सीमा विवाद में अक्सर डिसएंगेजमेंट, तनाव कम करने और सीमा समाधान को एक ही चीज समझ लिया जाता है, जबकि तीनों अलग-अलग हैं।

    डिसएंगेजमेंट का मतलब है कि जहां दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने थे, वहां से उन्हें पीछे हटाना। 21 अक्टूबर 2024 के समझौते के बाद देपसांग और डेमचोक में गश्त की व्यवस्था को लेकर सहमति लागू हुई और भारत सरकार ने संसद में कहा था कि 2020 में बने सभी फ्रिक्शन पॉइंट्स से डिसएंगेजमेंट हो चुका है।

    लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि भारत और चीन के बीच सीमा की अंतिम रेखा तय हो गई है।

    सीमा का अंतिम सीमांकन और राजनीतिक समाधान उससे कहीं बड़ा और लंबा मामला है। 25वें दौर में इसी बड़े सवाल को आगे बढ़ाने की बात हुई है।

    2025 में जो 10 बातें तय हुई थीं, उनका क्या हुआ?

    यहां कहानी और दिलचस्प हो जाती है।

    अगस्त 2025 में हुए 24वें दौर की बातचीत में दोनों देशों ने सिर्फ सामान्य बयान नहीं दिए थे, बल्कि 10 बिंदुओं पर सहमति बनाई थी। इनमें सीमा पर शांति बनाए रखना, 2005 के समझौते को आधार बनाकर राजनीतिक समाधान तलाशना, सीमा निर्धारण के कुछ हिस्सों में शुरुआती प्रगति की संभावना तलाशना, सीमा प्रबंधन के लिए नया कार्य समूह बनाना और सैन्य-कूटनीतिक माध्यमों से तनाव कम करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाना शामिल था।

    सहमति के बाकी अहम हिस्सों में पूर्वी और मध्य सेक्टर के लिए नए स्तर के संवाद तंत्र, सीमा-पार नदियों पर बातचीत, आपात स्थिति में मानवीय आधार पर जल संबंधी जानकारी साझा करना और तीन पारंपरिक सीमा व्यापार बाजारों को फिर खोलना शामिल था।

    24वें दौर की 10 सूत्रीय सहमति में 2026 में 25वें दौर की बैठक चीन में करने का फैसला भी शामिल था, जो अब पूरा हो चुका है।

    एक साल बाद सबसे बड़ा सवाल—कितना काम जमीन पर हुआ?

    यहीं से सिर्फ बयान और जमीन पर बदलाव के बीच फर्क दिखाई देता है।

    25वें दौर के दौरान दोनों पक्षों ने कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली और तीन तय सीमा व्यापार मार्गों से सीमापार कारोबार फिर शुरू होने को सकारात्मक प्रगति के तौर पर माना।

    यानी 2025 की सहमतियों के कुछ हिस्से अब जमीन पर दिखाई देने लगे हैं।

    लेकिन सीमा के अंतिम सीमांकन वाला सबसे मुश्किल हिस्सा अभी भी जारी बातचीत में है।

    छह साल बाद फिर खुला सीमा व्यापार

    1 अगस्त 2026 से भारत और चीन के बीच नाथू ला के रास्ते सीमा व्यापार फिर शुरू हुआ। सिक्किम सरकार के मुताबिक यह कारोबार छह साल बाद दोबारा शुरू हुआ है।

    इसी दौरान हिमाचल प्रदेश के शिपकी ला के रास्ते भी भारत-चीन सीमा व्यापार बहाल हुआ। उत्तराखंड के लिपुलेख मार्ग से भी पारंपरिक सीमा व्यापार गतिविधियां फिर शुरू हुईं।

    यह सिर्फ कारोबार की खबर नहीं है। सीमा क्षेत्रों में रहने वाले स्थानीय कारोबारियों और लोगों के लिए यह पुराने संपर्कों की वापसी का संकेत भी है।

    यही वजह है कि भारत-चीन रिश्तों को सिर्फ सीमा पर सैनिकों की स्थिति देखकर समझना अब अधूरा होगा।

    कैलाश मानसरोवर यात्रा भी फिर पटरी पर

    2026 में कैलाश मानसरोवर यात्रा भी भारत और चीन के बीच सामान्य होते संपर्क की एक बड़ी तस्वीर पेश कर रही है।

    विदेश मंत्रालय के मुताबिक 2026 की यात्रा जून से अगस्त के बीच आयोजित की गई और लिपुलेख तथा नाथू ला, दोनों रास्तों से यात्रियों को भेजा गया। कुल 1,000 यात्रियों का चयन 20 बैचों में किया गया।

    यह इसलिए अहम है क्योंकि कैलाश मानसरोवर यात्रा सिर्फ धार्मिक यात्रा नहीं है। यह भारत और चीन के बीच लोगों के सीधे संपर्क का भी एक पुराना माध्यम रही है।

    इसलिए सीमा व्यापार और कैलाश यात्रा का दोबारा शुरू होना रिश्तों में लौटती सामान्य स्थिति के व्यावहारिक संकेत माने जा सकते हैं।

    फिर भी सब कुछ सामान्य नहीं हुआ है

    यहीं कहानी का दूसरा पहलू सामने आता है।

    भारत और चीन के बीच व्यापार तेजी से बढ़ा है, लेकिन व्यापार असंतुलन अभी भी बड़ा मुद्दा है। वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार करीब 151.1 अरब डॉलर रहा और भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा करीब 112.16 अरब डॉलर तक पहुंच गया।

    दूसरी तरफ भारतीय कंपनियों के लिए चीन में कारोबारी वीजा से जुड़ी दिक्कतें भी अगस्त 2026 में सामने आई हैं। रिपोर्टों के मुताबिक कई भारतीय कंपनियों के अधिकारियों को चीन की यात्रा और कारोबारी बैठकों के लिए वीजा हासिल करने में परेशानी हुई है।

    इससे साफ है कि रिश्तों में सुधार के संकेत जरूर हैं, लेकिन भरोसा और कारोबारी पहुंच से जुड़े सारे सवाल खत्म नहीं हुए हैं।

    उड़ानें और निवेश में भी धीरे-धीरे बदलाव

    2025 में भारत और चीन के बीच सीधी उड़ानें फिर शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी और अक्टूबर 2025 से पांच साल से ज्यादा समय बाद सीधी उड़ानों की बहाली हुई। यह भी दोनों देशों के रिश्तों में धीरे-धीरे लौटती सामान्य स्थिति का एक संकेत था।

    निवेश के मोर्चे पर भी 2026 में भारत ने कुछ सीमित ढील दी। मई 2026 में संशोधित व्यवस्था के तहत जमीन से जुड़े पड़ोसी देशों के निवेशकों को कुछ शर्तों के साथ 10 प्रतिशत तक गैर-नियंत्रक हिस्सेदारी के लिए स्वचालित रास्ता दिया गया। अगस्त तक ऐसी 29 निवेश प्रस्तावों की जानकारी सामने आई, जिनकी कुल कीमत करीब 4,895 करोड़ रुपये थी।

    इसका मतलब यह नहीं है कि भारत ने चीन के लिए निवेश के दरवाजे पूरी तरह खोल दिए हैं। बल्कि यह एक नियंत्रित और सावधानी वाली आर्थिक वापसी है।

    6 अगस्त की बैठक ने 25वें दौर का रास्ता तैयार किया था

    25 अगस्त की डोभाल-वांग बातचीत अचानक नहीं हुई थी।

    इससे पहले 6 अगस्त को भारत और चीन के बीच सीमा मामलों पर बातचीत के लिए 36वीं WMCC बैठक हुई थी। इसमें 2025 की 24वें दौर की सहमतियों को लागू करने, सीमा निर्धारण, सीमा प्रबंधन, नए तंत्र बनाने और सीमा-पार संपर्क पर चर्चा हुई थी।

    दोनों देशों ने कूटनीतिक और सैन्य माध्यमों से संपर्क बनाए रखने और सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखने पर भी सहमति जताई थी। इस बैठक में 25वें दौर की विशेष प्रतिनिधि स्तर की बातचीत की तैयारी पर भी काम हुआ था।

    यानी 25 अगस्त की बैठक एक अकेली बैठक नहीं थी। इसके पीछे कई स्तरों पर चल रही बातचीत की पूरी प्रक्रिया थी।

    आखिर यह Special Representatives की बैठक होती क्या है?

    आम भाषा में समझें तो यह भारत-चीन सीमा विवाद पर दोनों देशों का सबसे अहम राजनीतिक बातचीत वाला तंत्र है।

    भारत की तरफ से अजीत डोभाल और चीन की तरफ से वांग यी इस व्यवस्था में विशेष प्रतिनिधि हैं। यह तंत्र सिर्फ सीमा पर तनाव की स्थिति पर बात करने के लिए नहीं है, बल्कि सीमा के राजनीतिक समाधान और दोनों देशों के व्यापक रिश्तों से जुड़े मुद्दों पर भी बातचीत का मंच है।

    चीनी विदेश मंत्रालय ने भी 25वें दौर से पहले इसे सीमा सवाल पर बातचीत का मुख्य माध्यम और आपसी हितों से जुड़े मुद्दों पर संवाद का महत्वपूर्ण मंच बताया था।

    2020 के गलवान संकट से यहां तक कैसे पहुंचे?

    पूरी कहानी को समझने के लिए पिछले छह साल की कड़ी जोड़ना जरूरी है।

    अप्रैल-मई 2020 से पूर्वी लद्दाख में तनाव बढ़ा और वास्तविक नियंत्रण रेखा पर लंबे समय तक सैन्य गतिरोध बना रहा। भारत सरकार के अनुसार इसके बाद सीमा पर शांति बहाल करने के लिए सैन्य और कूटनीतिक दोनों स्तरों पर लगातार बातचीत चली।

    2024 में देपसांग और डेमचोक की गश्त व्यवस्था पर समझौते के बाद 2020 में बने सभी फ्रिक्शन पॉइंट्स से डिसएंगेजमेंट की प्रक्रिया पूरी होने की बात भारत सरकार ने कही।

    इसके बाद अक्टूबर 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की कज़ान में मुलाकात हुई। यह दोनों नेताओं की करीब पांच साल बाद प्रतिनिधिमंडल स्तर की पहली द्विपक्षीय बैठक थी। इसमें दोनों ने सीमा पर शांति बनाए रखने और Special Representatives व्यवस्था की भूमिका को महत्वपूर्ण माना।

    अगस्त 2025 में दोनों नेताओं की तियानजिन में फिर मुलाकात हुई और उसके बाद 24वें दौर की विशेष प्रतिनिधि बातचीत में 10 बिंदुओं पर सहमति बनी।

    अब अगस्त 2026 में 25वां दौर हो चुका है।

    यानी 2020 के सैन्य संकट से 2026 की बातचीत तक सफर में एक चीज साफ दिखती है—तनाव कम करने और रिश्ते संभालने के लिए बातचीत के कई रास्ते फिर सक्रिय हुए हैं।

    लेकिन अरुणाचल प्रदेश और सीमा का सवाल अभी भी आसान नहीं

    भारत-चीन संबंधों में अरुणाचल प्रदेश का मुद्दा पुराना और संवेदनशील है। चीन इस क्षेत्र पर अपना दावा करता रहा है, जबकि भारत का रुख स्पष्ट है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है।

    इसके साथ सीमा निर्धारण का बड़ा सवाल भी बाकी है। इसलिए व्यापार, यात्रा, उड़ान और कूटनीतिक बातचीत वापस आने के बावजूद यह कहना जल्दबाजी होगी कि भारत-चीन सीमा विवाद खत्म होने की स्थिति में पहुंच गया है।

    असल चुनौती अब यह है कि दोनों देश सीमा पर शांति को लंबे समय तक बनाए रखते हुए राजनीतिक समाधान की दिशा में कितनी ठोस प्रगति कर पाते हैं।

    शी जिनपिंग का भारत कनेक्शन क्यों अहम है?

    25वें दौर की बातचीत का समय भी ध्यान खींचता है।

    सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत आने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि 26 अगस्त तक चीन की तरफ से उनकी यात्रा की अंतिम आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी। रिपोर्टों के मुताबिक संभावित यात्रा सितंबर में हो सकती है।

    अगर यह यात्रा होती है, तो डोभाल-वांग बातचीत के बाद भारत और चीन के शीर्ष नेतृत्व के बीच एक और महत्वपूर्ण संपर्क का रास्ता खुल सकता है।

    इसलिए 25वें दौर की बातचीत को सिर्फ सीमा बैठक के रूप में देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी।

    अब आगे क्या होगा?

    सबसे साफ अगला कदम सामने है—भारत में 2027 में 26वां Special Representatives दौर होगा।

    लेकिन उससे पहले कई स्तरों पर काम जारी रहना है।

    सीमा प्रबंधन के तंत्र चलते रहेंगे। कूटनीतिक और सैन्य संवाद जारी रहेगा। 2025 में तय किए गए सीमा प्रबंधन और सीमा निर्धारण से जुड़े काम आगे बढ़ेंगे। सीमा व्यापार, लोगों की आवाजाही और दूसरे व्यावहारिक संपर्कों को स्थिर करने की कोशिश होगी।

    सबसे बड़ा सवाल फिर वही रहेगा—क्या दोनों देश केवल सीमा पर शांति बनाए रखने से आगे बढ़कर सीमा की अंतिम रेखा तय करने की दिशा में ठोस राजनीतिक प्रगति कर पाते हैं?

    एक नजर में पूरी तस्वीर

    2020 — गलवान के बाद बड़ा सैन्य तनाव और सीमा पर लंबा गतिरोध।

    2024 — देपसांग और डेमचोक की गश्त व्यवस्था पर समझौता और 2020 के फ्रिक्शन पॉइंट्स से डिसएंगेजमेंट।

    अक्टूबर 2024 — कज़ान में मोदी-शी की अहम मुलाकात।

    अगस्त 2025 — 24वें दौर में सीमा प्रबंधन, शुरुआती सीमा निर्धारण, व्यापार और दूसरे मुद्दों पर 10 सूत्रीय सहमति।

    अगस्त 2025 — तियानजिन में मोदी-शी की फिर मुलाकात।

    मई 2026 — दोनों देशों के बीच सीमा मामलों पर WMCC का 35वां दौर।

    जून-अगस्त 2026 — कैलाश मानसरोवर यात्रा 20 बैचों के साथ लिपुलेख और नाथू ला मार्ग से आयोजित हुई।

    1 अगस्त 2026 — नाथू ला और शिपकी ला से सीमा व्यापार फिर शुरू हुआ।

    6 अगस्त 2026 — 36वीं WMCC बैठक में 25वें दौर की तैयारी और सीमा निर्धारण पर चर्चा।

    25 अगस्त 2026 — डोभाल और वांग यी की 25वें दौर की बातचीत; राजनीतिक समाधान की कोशिश जारी रखने पर सहमति।

    2027 — अगली विशेष प्रतिनिधि स्तर की बैठक भारत में होगी।

    सबसे अहम बात क्या है?

    भारत-चीन रिश्तों में अब सिर्फ बयान नहीं, बल्कि कुछ जमीन पर दिखने वाले बदलाव भी नजर आ रहे हैं—सीमा पर 2020 के फ्रिक्शन पॉइंट्स से डिसएंगेजमेंट, गश्त व्यवस्था, सीमा व्यापार, कैलाश मानसरोवर यात्रा, सीधी उड़ानों की वापसी और आर्थिक संपर्क को धीरे-धीरे आगे बढ़ाने की कोशिश।

    लेकिन दूसरी तरफ अंतिम सीमा समाधान, सीमा निर्धारण, अरुणाचल से जुड़े मतभेद, व्यापार घाटा और कारोबारी आवाजाही की दिक्कतें अभी भी मौजूद हैं।

    इसलिए 25वें दौर की सबसे सटीक तस्वीर यही है:

    भारत और चीन के रिश्ते पहले से ज्यादा बातचीत की पटरी पर लौटे हैं, लेकिन सीमा विवाद का आखिरी अध्याय अभी लिखा जाना बाकी है। 2027 की भारत में होने वाली अगली बैठक अब इस प्रक्रिया का अगला बड़ा पड़ाव होगी।

  • MRPL Assistant Engineer Recruitment 2026: GATE 2026 से 26 पदों पर भर्ती, ₹50,000 सैलरी; आवेदन 19 सितंबर तक

    MRPL Assistant Engineer Recruitment 2026: GATE 2026 से 26 पदों पर भर्ती, ₹50,000 सैलरी; आवेदन 19 सितंबर तक

    MRPL Assistant Engineer Recruitment 2026 में 26 पदों पर भर्ती है। GATE 2026 से Chemical, Mechanical और Electrical AE पदों के लिए आवेदन 19 सितंबर तक करें अब!

    नई दिल्ली: Mangalore Refinery and Petrochemicals Limited (MRPL) ने Assistant Engineer के 26 पदों के लिए भर्ती शुरू कर दी है। यह भर्ती E2 Grade Management Cadre में Chemical, Mechanical और Electrical Engineering के लिए है। आवेदन प्रक्रिया 21 अगस्त 2026 से शुरू हो चुकी है और इच्छुक उम्मीदवार 19 सितंबर 2026 शाम 6 बजे तक ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं।

    इस भर्ती में सबसे जरूरी बात यह है कि MRPL सिर्फ GATE 2026 के marks स्वीकार करेगा। GATE 2025 या उससे पुराने score के आधार पर इस भर्ती में आवेदन नहीं किया जा सकता। Selection में कोई written exam नहीं रखा गया है। GATE 2026 marks के आधार पर shortlisting होगी, जिसके बाद Group Discussion और Personal Interview लिया जाएगा।

    MRPL Assistant Engineer Recruitment 2026 में कितने पद हैं?

    कुल 26 Assistant Engineer vacancies निकाली गई हैं। Chemical Engineering में 15, Mechanical में 8 और Electrical में 3 पद हैं।

    DisciplineGATE PaperVacancies
    Assistant Engineer – ChemicalCH15
    Assistant Engineer – MechanicalME8
    Assistant Engineer – ElectricalEE3
    Total26

    Chemical के 15 पद सभी categories के लिए खुले हैं। इनमें UR 8, EWS 1, OBC-NCL 3, SC 1 और ST 2 सीटें हैं।

    Mechanical के 8 पद Special Recruitment Drive के तहत OBC-NCL 4, SC 3 और ST 1 के लिए हैं। इस discipline में UR और EWS के लिए कोई seat नहीं है।

    Electrical के 3 पदों में OBC-NCL 1, SC 1 और ST 1 vacancy है। यहां भी UR और EWS candidates के लिए post उपलब्ध नहीं है।

    कुल category-wise vacancies में UR 8, EWS 1, OBC-NCL 8, SC 5 और ST 4 पद शामिल हैं।

    PwBD candidates के लिए कितनी seats हैं?

    PwBD reservation horizontal basis पर लागू है। इसका मतलब ये posts ऊपर दी गई category vacancies के अंदर ही शामिल हैं और अलग से अतिरिक्त seats नहीं हैं। इसके लिए minimum 40% benchmark disability जरूरी है।

    Chemical में 2 PwBD posts, Mechanical में 1 और Electrical में 1 post earmarked है।

    Chemical में SLD और HH categories को identified किया गया है। Mechanical में HH, LV, OA, BA, OL, CP, Dw, AAV, ASD (M), SLD और MI categories suitable हैं। Electrical में HH, OL, Dw, AAV, ASD (M), SLD और MI categories शामिल हैं।

    अगर earmarked category का suitable candidate उपलब्ध नहीं होता है, तो post दूसरी identified category में जा सकती है।

    यहां HH का मतलब hard of hearing, LV low vision, OA one arm, BA both arms, OL one leg, CP cerebral palsy, Dw dwarfism, AAV acid attack victim, ASD (M) autism spectrum disorder mild, SLD specific learning disability और MI mental illness है।

    MRPL Assistant Engineer के लिए कौन apply कर सकता है?

    उम्मीदवार के पास चार साल की BE, B.Tech या B.Sc. Engineering degree संबंधित discipline में होनी चाहिए। Degree और GATE paper का combination MRPL की eligibility के मुताबिक होना जरूरी है।

    DisciplineEligible Degree
    ChemicalChemical Engineering, Chemical Technology, Petrochemical Engineering, Petrochemical Technology
    MechanicalMechanical Engineering
    ElectricalElectrical Engineering, Electrical and Electronics Engineering

    Production, Automobile, Mechatronics और Construction Engineering जैसी degrees eligible नहीं मानी जाएंगी। MRPL ने साफ किया है कि ये examples indicative हैं और exclusions सिर्फ इन्हीं courses तक सीमित नहीं हैं।

    Degree किसी UGC-recognised Indian university या deemed university, AICTE-approved autonomous institution, संबंधित statutory council या Board of Technical Education से recognised होनी चाहिए।

    कितने प्रतिशत marks जरूरी हैं?

    UR, EWS और OBC-NCL candidates के लिए minimum aggregate 60% है। SC, ST और PwBD candidates के लिए minimum 50% aggregate marks चाहिए।

    यह percentage सभी semesters के average से निकलेगा और इसे round off नहीं किया जाएगा। यानी 59.99% को 60% नहीं माना जाएगा।

    अगर university CGPA conversion formula देती है, तो उसी formula का इस्तेमाल करना होगा। जहां university ने कोई conversion formula नहीं दिया है, वहां CGPA × 10 लागू किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए university से documentary proof देना होगा कि कोई निर्धारित formula मौजूद नहीं है।

    Five-year integrated dual degree में BE या B.Tech plus ME या M.Tech को four-year engineering degree के बराबर माना जाएगा।

    अगर किसी candidate ने qualifying BE, B.Tech या B.Sc. Engineering discipline में की है और GATE 2026 का valid score उसी eligible paper में है, तो अलग discipline में M.Tech होने के बावजूद eligibility बनी रह सकती है।

    Integrated course में दो degrees मिलने पर BE या B.Tech का percentage देखा जाएगा। अगर integrated course के बाद सिर्फ एक ME या M.Tech degree जारी हुई है, तो consolidated integrated-course marks consider किए जाएंगे।

    MRPL AE Recruitment के लिए age limit क्या है?

    19 सितंबर 2026 को UR और EWS candidates की maximum age 27 years होनी चाहिए।

    OBC-NCL candidates को 3 years और SC/ST candidates को 5 years की age relaxation मिलेगी। 40% या उससे ज्यादा disability वाले PwBD candidates को category relaxation के अलावा 10 years की additional relaxation दी जाएगी।

    Ex-Servicemen candidates के लिए age relaxation Government of India rules के अनुसार लागू होगी।

    PwBD relaxation category relaxation के ऊपर लागू होती है, लेकिन यह उसी category के reserved post के लिए लागू होगी।

    Direct Online Apply Link

    MRPL Careers – Online Apply

    ऊपर दिए MRPL के official Careers page पर जाकर:

    1. “Advt. No. 94/2026: Recruitment of Assistant Engineers in E2 Grade…” चुनें।
    2. “Click here to register online” पर क्लिक करें।
    3. Email ID और Mobile Number से registration करें।
    4. Login करके application form भरें।
    5. GATE 2026 Score Card, Photograph, Signature और applicable certificates upload करें।
    6. General/OBC-NCL/EWS candidates को ₹118 online fee देनी होगी। SC/ST/PwBD/Ex-Servicemen candidates fee से exempt हैं।

    Last Date: 19 September 2026, शाम 6:00 बजे।

    ध्यान रखें: MRPL ने साफ कहा है कि application सिर्फ उसके official online portal से ही स्वीकार होगी; किसी agency या individual के जरिए आवेदन नहीं किया जा सकता।

    Selection Process में exam होगा या नहीं?

    MRPL Assistant Engineer recruitment में अलग से written examination नहीं होगा।

    सबसे पहले GATE 2026 marks के आधार पर candidates की shortlisting होगी। Shortlisted candidates को Group Discussion के लिए बुलाया जाएगा और इसके बाद Personal Interview होगा।

    इस भर्ती के लिए GATE 2026 के केवल CH, ME और EE papers मान्य हैं। पुराने GATE scores इस selection process में स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

    MRPL Assistant Engineer की salary कितनी है?

    Selected Assistant Engineer को E2 Grade Management Cadre में नियुक्त किया जाएगा। Starting basic pay ₹50,000 है और pay scale ₹50,000 से ₹1,60,000 तक है।

    Salary structure में IDA pattern पर Dearness Allowance, HRA या township accommodation, cafeteria approach के तहत perks और allowances तथा Performance Related Pay शामिल हैं।

    Job location कहां होगी?

    Posting MRPL की requirement के हिसाब से तय की जाएगी। Selected employees को India या abroad में transfer किया जा सकता है।

    Transfer MRPL, ONGC group companies या अन्य organisation के भीतर भी हो सकता है। जरूरत के मुताबिक shift और night-shift duty भी करनी पड़ सकती है।

    MRPL ने working knowledge of Hindi को desirable qualification के तौर पर रखा है।

    Service Bond कितना है?

    Selected candidate को joining के बाद 3 years का service bond पूरा करना होगा।

    MRPL suitable candidates का panel भी बना सकता है और यह panel one year तक operate किया जा सकता है।

    कंपनी को minimum eligibility standards बढ़ाने, notified posts को भरने या किसी position को vacant रखने का अधिकार भी है और इसके लिए अलग reason देना जरूरी नहीं होगा।

    MRPL Assistant Engineer Recruitment 2026 Application Fee

    General category सहित applicable candidates के लिए application fee ₹118 है।

    SC, ST, PwBD और Ex-Servicemen candidates को application fee से exemption दी गई है।

    Serving Government, PSU या autonomous-body employees को application process के दौरान proper channel से printed application forward करना होगा या interview के समय NOC प्रस्तुत करना होगा।

    MRPL Recruitment 2026 में आवेदन कब तक करें?

    Online application window 21 अगस्त 2026 से शुरू है। आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख 19 सितंबर 2026 है और application window शाम 6 बजे बंद होगी।

    इसलिए eligible candidates को GATE 2026 paper, engineering degree, category, marks और age criteria check करने के बाद application submit करना चाहिए।

    MRPL Assistant Engineer Recruitment 2026: जरूरी जानकारी एक नजर में

    जानकारीDetails
    OrganisationMangalore Refinery and Petrochemicals Limited
    Parent CompanyONGC
    PostAssistant Engineer – E2 Grade
    CadreManagement Cadre
    Total Posts26
    Chemical Posts15
    Mechanical Posts8
    Electrical Posts3
    GATE RequirementGATE 2026 only
    GATE PapersCH, ME, EE
    SelectionGATE Shortlisting, Group Discussion, Personal Interview
    Starting Basic Pay₹50,000
    Pay Scale₹50,000 – ₹1,60,000
    Application Start21 August 2026
    Last Date19 September 2026, 6:00 PM
    Application Fee₹118
    ExemptionSC, ST, PwBD, Ex-Servicemen
    Service Bond3 years
    Job LocationMRPL requirements के अनुसार

    MRPL Assistant Engineer Recruitment 2026

    अगर आपके पास eligible engineering degree है और आपने GATE 2026 में संबंधित CH, ME या EE paper दिया है, तो यह भर्ती आपके लिए relevant opportunity है। Application submit करने से पहले अपनी degree nomenclature, aggregate percentage, category और age की conditions जरूर match करें, क्योंकि MRPL ने discipline-wise eligibility अलग रखी है।

  • CM Vijay Thalapathy का Fake Video दिखाकर ₹12 लाख की ठगी, सरकारी मदद के नाम पर ऐसे बिछाया जाल

    CM Vijay Thalapathy का Fake Video दिखाकर ₹12 लाख की ठगी, सरकारी मदद के नाम पर ऐसे बिछाया जाल

    वसई में 66 साल की महिला को CM Vijay Thalapathy के Deepfake Video से ₹12 लाख की ठगी का शिकार बनाया गया। जानिए पूरा मामला और Cyber Fraud से बचने का आसान रास्ता।

    पालघर/ वसई: सोशल मीडिया पर दिखने वाला कोई Video कितना भी असली क्यों न लगे, अब उस पर आंख बंद करके भरोसा करना भारी पड़ सकता है। वसई में 66 साल की एक महिला को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय यानी Thalapathy Vijay के नाम और चेहरे से बनाए गए Fake AI Video के जरिए आर्थिक मदद का भरोसा दिलाया गया और करीब 12 लाख रुपये की ठगी कर ली गई।

    पुलिस के मुताबिक, महिला ने Instagram पर एक Reel देखी थी, जिसमें विजय को कथित तौर पर गरीब और जरूरतमंद लोगों को Financial Assistance देने की बात करते दिखाया गया था। Reel में संपर्क करने के लिए एक Phone Number भी दिया गया था। महिला ने जब उस नंबर पर संपर्क किया तो उन्हें दूसरे नंबर पर बात करने के लिए कहा गया। इसके बाद शुरू हुआ पैसे ऐंठने का पूरा खेल।

    Instagram Reel देखकर किया भरोसा

    मामला 27 जुलाई से शुरू हुआ। महिला की नजर Instagram पर एक ऐसी Reel पर पड़ी जिसमें विजय को लोगों को आर्थिक मदद देने की बात कहते हुए दिखाया गया था।

    महिला ने Reel में दिए गए नंबर पर फोन किया। दूसरी तरफ मौजूद लोगों ने उनसे बातचीत शुरू की और उन्हें भरोसा दिलाया कि उन्हें आर्थिक मदद मिल सकती है।

    महिला ने करीब 5 लाख रुपये की मदद मांगी। इसके बाद ठगों ने कहा कि मदद की रकम हासिल करने के लिए पहले 5 हजार रुपये Processing Fee जमा करनी होगी।

    महिला ने यह रकम दे दी।

    यहीं से ठगी का सिलसिला और आगे बढ़ गया।

    ₹5 हजार के बाद ₹77 लाख का नया झांसा

    Processing Fee देने के बाद ठगों ने महिला को बताया कि उन्हें विदेश से करीब 77 लाख रुपये मिलने वाले हैं। इसके लिए Tax और दूसरे Charges के नाम पर लगातार पैसे जमा करने को कहा गया।

    मदद की रकम मिलने की उम्मीद में महिला ठगों की बातों पर भरोसा करती रहीं और अलग-अलग समय पर पैसे भेजती रहीं।

    पुलिस के मुताबिक, महिला ने एक Private Credit Society से Loan लिया, अपनी Jewellery गिरवी रखी और अपनी बेटी के Bank Account से भी पैसे निकाले। इसके बाद ठगों की ओर से बताए गए Bank Accounts में कुल करीब 12 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए गए।

    पूरी रकम करीब 10 दिनों के दौरान भेजी गई।

    12 लाख देने के बाद भी नहीं मिली मदद

    महिला को जब वादा की गई Financial Assistance नहीं मिली और ठग लगातार पैसे मांगते रहे, तब उन्हें शक हुआ।

    इसके बाद उन्हें समझ आया कि जिस Video को देखकर उन्होंने भरोसा किया था, वह असली नहीं बल्कि AI से बनाया गया Fake Video था।

    महिला ने इसके बाद वालिव पुलिस से संपर्क किया।

    वालिव पुलिस ने दर्ज किया मामला

    मामले में वालिव Police Station में शिकायत दर्ज की गई है। पुलिस ने Bharatiya Nyaya Sanhita और Information Technology Act के तहत Cheating का मामला दर्ज किया है।

    Police Inspector Gorakshnath Zaid ने मामले की पुष्टि की है। अब पुलिस उन लोगों का पता लगाने की कोशिश कर रही है जिन्होंने महिला से संपर्क किया और जिन Bank Accounts में रकम ट्रांसफर करवाई गई।

    Deepfake Video के बाद ऐसे आगे बढ़ा Fraud

    इस मामले में ठगों ने सीधे पैसे की मांग नहीं की। पहले Social Media पर एक भरोसेमंद चेहरे का इस्तेमाल किया गया।

    पहले Fake Video दिखाया गया।

    फिर Video में दिए गए नंबर पर संपर्क करवाया गया।

    इसके बाद आर्थिक मदद का भरोसा दिया गया।

    पहले सिर्फ 5 हजार रुपये की Processing Fee मांगी गई।

    इसके बाद 77 लाख रुपये मिलने का दावा किया गया।

    फिर Tax और दूसरे Charges के नाम पर लगातार Payment करवाया गया।

    आखिर में महिला से करीब 12 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए।

    यानी Fake Video ने भरोसा बनाया और उसके बाद Phone Call और अलग-अलग Payment के जरिए ठगी को आगे बढ़ाया गया।

    देश में Deepfake से जुड़े ऐसे और मामले

    वसई का मामला अकेला नहीं है। हाल के महीनों में देश के अलग-अलग हिस्सों से Deepfake Video के जरिए Financial Fraud और Blackmail के मामले सामने आए हैं।

    पुणे में 38 साल की एक महिला को Instagram पर उद्योगपति रतन टाटा का Deepfake Video दिखाया गया। इस Video में Share Trading से जुड़े निवेश और अच्छे Return का दावा किया गया था। महिला ने Advertisement पर क्लिक किया और बाद में एक App के जरिए कथित Investment Scheme में पैसे लगाए। पुलिस के अनुसार उन्हें करीब 4.09 लाख रुपये का नुकसान हुआ।

    इसके अलावा वहीं, पुणे में ही 56 साल के एक Businessman को Finance Minister Nirmala Sitharaman के Deepfake Video के जरिए Investment के नाम पर फंसाया गया। इसके बाद Fake Forex Trading Platform, Fake Investment Advisor और SpaceX Shares के नाम पर करीब 1.07 करोड़ रुपये की ठगी की गई। Fake Platform पर कथित Profit बढ़ता हुआ दिखाया गया और पैसा निकालने के लिए आगे और रकम मांगी गई।

    बेंगलुरु में एक Retired Professor को Facebook पर Nirmala Sitharaman का Deepfake Video दिखाया गया। इसके बाद उन्हें एक Fake Trading Platform, Telegram Chat और Overseas Calls के जरिए Investment के नाम पर फंसाया गया और 61 लाख रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ।

    पटना में Deepfake का इस्तेमाल अलग तरीके से किया गया। एक Hotel Owner को उनके चेहरे से बनाए गए कथित अश्लील AI Videos के जरिए Blackmail किया गया और करीब 97 लाख रुपये की रकम वसूली गई। पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था और अंतिम 20 लाख रुपये की किस्त बरामद की गई।

    इन मामलों से साफ है कि Deepfake का इस्तेमाल अब सिर्फ Fake News फैलाने के लिए नहीं बल्कि Investment Fraud, Financial Assistance Scam और Blackmail जैसे अपराधों में भी किया जा रहा है।

    Video में नेता या Celebrity दिखे तो भी तुरंत भरोसा न करें

    AI की मदद से किसी व्यक्ति का चेहरा और आवाज इस्तेमाल करके ऐसा Video तैयार किया जा सकता है जिसमें वह व्यक्ति ऐसी बात कहता हुआ दिखाई दे सकता है जो उसने वास्तव में कही ही नहीं।

    इसलिए अगर किसी Social Media Video में कोई नेता, Celebrity, कारोबारी या सरकारी अधिकारी पैसे, Investment, नौकरी, Lottery या Financial Assistance का दावा करता दिखाई दे और साथ में कोई Mobile Number, WhatsApp Number, Website या Payment Request दी गई हो तो सीधे पैसे भेजना जोखिम भरा हो सकता है।

    ऐसी जानकारी को पहले संबंधित व्यक्ति या संस्था के Official Source से Verify करना जरूरी है।

    सरकारी मदद के नाम पर Processing Fee मांगी जाए तो सावधान

    वसई के मामले में ठगी की शुरुआत सिर्फ 5 हजार रुपये की Processing Fee से हुई। इसके बाद रकम बढ़ती चली गई।

    यही वजह है कि किसी भी Government Scheme या Financial Assistance के नाम पर पहले पैसे जमा करने को कहा जाए तो सावधान रहें।

    किसी अनजान व्यक्ति के बताए Bank Account, UPI ID, Website या App पर Payment करने से पहले उसकी जानकारी Official Government Source से जांचना जरूरी है।

    पैसा चला गया तो तुरंत 1930 पर करें शिकायत

    अगर किसी व्यक्ति के साथ Financial Cyber Fraud हो गया है और उसने पैसे ट्रांसफर कर दिए हैं तो शिकायत करने में देरी नहीं करनी चाहिए।

    Indian Cyber Crime Coordination Centre यानी I4C के मुताबिक Financial Cyber Fraud की शिकायत National Helpline Number 1930 पर की जा सकती है। इसके बाद Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत की जानकारी पूरी करनी होती है।

    शिकायत करते समय Transaction ID, Transaction Date, Bank या Payment App की जानकारी, UPI ID, Account Details, Phone Numbers, Chat और Screenshots जैसी जानकारी सुरक्षित रखना जरूरी है।

    साथ ही अपने Bank या संबंधित Payment Service Provider को भी तुरंत Fraud Transaction की जानकारी देनी चाहिए।

    I4C का Citizen Financial Cyber Fraud Reporting and Management System Financial Fraud की शिकायतों पर Banks और Payment Intermediaries के साथ कार्रवाई के लिए बनाया गया है।

    साइबर फ्रॉड के खिलाफ सरकार की कार्रवाई भी तेज

    सरकार के मुताबिक 30 जून 2026 तक CFCFRMS के जरिए 32.80 लाख से ज्यादा शिकायतों में 11,158 करोड़ रुपये से अधिक की रकम बचाई गई। इसी अवधि तक I4C ने 3,718 Mobile Apps को भी Block किया था। सरकार ने यह भी बताया कि Suspect Registry के जरिए संदिग्ध Identifiers और Mule Accounts की जानकारी Banks और Financial Institutions के साथ साझा की जा रही है।

    अप्रैल 2026 से Money Restoration Module और Grievance Redressal Module भी काम कर रहे हैं, जिनका उद्देश्य Cyber Fraud में फंसी रकम की बहाली और Bank Accounts के Freeze या Lien से जुड़ी शिकायतों को तेजी से संभालना है।

    Deepfake को लेकर नए नियम भी लागू

    भारत सरकार ने 2026 में AI-generated और Deepfake Content से जुड़े नियमों को और मजबूत किया है। फरवरी 2026 में IT Rules में बदलाव करके Synthetically Generated Information यानी AI से तैयार सामग्री से होने वाले नुकसान को लेकर नया regulatory framework लाया गया। इसमें Deepfake और AI-generated content भी शामिल है।

    सरकार ने Social Media Platforms के लिए AI-generated content की स्पष्ट पहचान और traceable information से जुड़ी व्यवस्था भी तय की है। Unlawful content की शिकायतों पर Platforms को तेजी से कार्रवाई करने की जिम्मेदारी दी गई है।

    अब Social Media पर दिखने वाले Video को लेकर क्या सावधानी रखें?

    किसी बड़े नेता या Celebrity का Video देखकर सिर्फ इसलिए भरोसा न करें क्योंकि उसमें चेहरा और आवाज बिल्कुल असली जैसी लग रही है।

    अगर Video में Financial Assistance, Investment, नौकरी, Lottery या किसी दूसरी आर्थिक मदद का दावा है तो पहले Official Source से जानकारी Verify करें।

    Video में दिए गए किसी अनजान Phone Number या Link पर तुरंत संपर्क न करें।

    Processing Fee, Tax, Verification Charge या Withdrawal Charge के नाम पर पैसे मांगने पर रुक जाएं।

    किसी अनजान Bank Account या UPI ID में Payment न करें।

    और अगर गलती से पैसा भेज दिया है तो इंतजार करने के बजाय तुरंत 1930 पर शिकायत करें और Cyber Crime Portal पर मामला दर्ज करें।

    वसई की 66 साल की महिला के साथ हुई यह घटना बताती है कि Social Media पर दिखने वाला भरोसेमंद चेहरा भी ठगी का जरिया बन सकता है। यहां 5 हजार रुपये की छोटी Payment से शुरू हुआ मामला करीब 12 लाख रुपये के नुकसान तक पहुंच गया।

    इसलिए अगली बार किसी Video में कोई बड़ा नेता, Celebrity या सरकारी व्यक्ति आर्थिक मदद या Investment का दावा करता दिखाई दे तो Video देखकर फैसला लेने के बजाय पहले उसकी सच्चाई Verify करें। यही सावधानी आपके पैसे को ऐसे Deepfake Cyber Fraud से बचा सकती है।

  • प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना पर बड़ा खुलासा: 41 FIR, 178 ट्रेनिंग सेंटर ब्लैकलिस्ट और 34 लाख भुगतान अटके, CAG रिपोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल

    प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना पर बड़ा खुलासा: 41 FIR, 178 ट्रेनिंग सेंटर ब्लैकलिस्ट और 34 लाख भुगतान अटके, CAG रिपोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल

    प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना में 41 FIR, 178 ट्रेनिंग सेंटर ब्लैकलिस्ट और 34 लाख भुगतान अटके। CAG की रिपोर्ट में सामने आईं गंभीर अनियमितताएं।

    नई दिल्ली: प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना यानी युवाओं को skill training देकर job और self-employment के मौके देने वाली देश की बड़ी सरकारी schemes में से एक अब गंभीर सवालों के घेरे में है। CAG की audit findings से लेकर 2026 में दर्ज हुई 41 FIR, 178 Training Centres की blacklisting और NSDC के करीब 20 current और former employees को भेजे गए show-cause notices तक, इस पूरी scheme को लेकर लगातार कार्रवाई सामने आ रही है।

    सबसे बड़ा सवाल उन युवाओं का है जिन्होंने इस scheme के तहत training ली, certificate हासिल किया और payment या job का इंतजार किया। क्या training सही तरीके से हुई? क्या beneficiary का record सही था? Payment क्यों अटका? और certificate मिलने के बाद नौकरी कितनों को मिली?

    41 FIR और 178 Training Centres पर कार्रवाई

    2026 में सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना से जुड़े मामलों में 167 cases को FIR के लिए identify किया गया और 41 FIR दर्ज की गईं।

    वहीं प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 4.0 के तहत 178 Training Centres को blacklist किया गया। इन centres के खिलाफ आगे की payments रोकने और नियमों के उल्लंघन से जुड़े payments की recovery शुरू करने के निर्देश दिए गए।

    हालांकि यहां यह समझना जरूरी है कि FIR दर्ज होना किसी मामले में आरोप या investigation की शुरुआत है, conviction नहीं। इसी तरह 178 blacklisted centres को सीधे 178 “fake centres” कहना भी सही नहीं होगा। Blacklisting scheme guidelines और inspection findings के आधार पर की गई कार्रवाई है।

    34 लाख से ज्यादा candidates का payment क्यों अटका?

    इस पूरी कहानी का सबसे सीधा असर उन candidates पर पड़ता है जिन्होंने training पूरी की लेकिन उनका payment नहीं पहुंचा।

    CAG के मुताबिक प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के दूसरे और तीसरे phase में 34 लाख candidates के DBT payments outstanding थे।

    पहले phase में भी करीब ₹40 करोड़ की DBT राशि incorrect या incomplete bank और Aadhaar details की वजह से beneficiaries तक नहीं पहुंच सकी थी।

    यानी अगर किसी candidate ने training और certification पूरा किया है, लेकिन उसके खाते में पैसा नहीं आया, तो सिर्फ “payment pending” देखकर मामला खत्म नहीं होता। Bank details, Aadhaar linking और beneficiary record में mismatch भी इसकी वजह हो सकता है।

    एक bank account से 2,106 candidates का record

    CAG audit में bank details की जांच के दौरान एक और बड़ी गड़बड़ी सामने आई।

    प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के दूसरे और तीसरे phase के data में 12,122 unique bank accounts ऐसे पाए गए जो एक से ज्यादा candidates के लिए इस्तेमाल हुए थे।

    इन accounts से कुल 52,381 candidates जुड़े हुए थे।

    सबसे चौंकाने वाला मामला एक ऐसे account का था जिसे 2,106 candidates के records में इस्तेमाल किया गया था।

    कुछ records में 11111111111, zeros, blank और दूसरे apparently invalid entries भी मिले।

    इसका मतलब यह नहीं कि इन सभी candidates को fake घोषित कर दिया गया। लेकिन beneficiary और payment data की verification system पर गंभीर सवाल जरूर खड़े हुए। CAG ने कहा कि उपलब्ध bank-account data से beneficiaries की identity को लेकर पर्याप्त assurance नहीं मिल रही थी।

    क्या training centre सच में चल रहा था?

    CAG की जांच में कुछ Training Centres physical inspection के दौरान बंद मिले।

    कुछ जगह training records और ground reality के बीच mismatch भी सामने आया। Candidate photographs के repeat होने और attendance तथा identity verification में gaps की findings भी सामने आईं।

    यानी सवाल यह भी है कि जिस candidate के नाम पर training और certification का record बना, क्या वह candidate वास्तव में उस training में मौजूद था?

    यहां भी हर irregular record को सीधे fake candidate मानना सही नहीं है। Audit findings मुख्य रूप से verification और monitoring system में मौजूद कमजोरियों की तरफ इशारा करती हैं।

    “Ghost Candidate” का मतलब क्या है?

    अगर किसी व्यक्ति का नाम scheme के record में मौजूद है, लेकिन उसकी identity, attendance, bank details या training participation properly verify नहीं हो पाती, तो मामला questionable या ghost beneficiary verification तक पहुंच सकता है।

    CAG ने candidate eligibility को लेकर भी सवाल उठाए।

    कुछ records में age, education और दूसरे eligibility criteria की proper checking नहीं होने की बात सामने आई।

    यानी scheme में सिर्फ यह देखना काफी नहीं था कि candidate का नाम system में दर्ज है। यह भी जरूरी था कि वह candidate scheme के लिए eligible था और उसकी identity सही तरीके से verify हुई थी।

    Certificate मिला, लेकिन नौकरी कितनों को मिली?

    प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना का असली मकसद सिर्फ training और certificate देना नहीं था। इसका final outcome रोजगार और बेहतर income से जुड़ा था।

    लेकिन CAG की audit में पुराने phases के Short Term Training component में certified candidates की placement करीब 41 प्रतिशत के आसपास पाई गई।

    सरकार की बाद की reporting में PMKVY 3.0 तक reported placement करीब 43 प्रतिशत बताई गई।

    इसका सीधा मतलब है कि training या certificate और actual job एक ही चीज नहीं हैं।

    यही वजह है कि किसी भी candidate के लिए सबसे जरूरी सवाल यह होना चाहिए कि course पूरा करने के बाद उसे वास्तव में job या self-employment का फायदा मिला या नहीं।

    कुछ बड़े Training Providers में placement 10% से भी कम

    CAG की detailed जांच में training providers के performance में काफी बड़ा difference सामने आया।

    Top training providers में भी 114 providers ऐसे पाए गए जिनका placement rate 10 प्रतिशत से कम था।

    इन providers ने करीब 5.88 लाख candidates को certify किया, लेकिन लगभग 20,000 candidates ही placement तक पहुंच पाए।

    इससे साफ होता है कि सिर्फ overall placement percentage देखने से पूरी तस्वीर सामने नहीं आती। अलग-अलग Training Providers का actual performance काफी अलग रहा।

    Training Providers को इतने बड़े targets कैसे मिले?

    CAG ने Training Providers को मिले targets और certifications को भी examine किया।

    PMKVY 2.0 में top 10 प्रतिशत Training Providers ने करीब 83 प्रतिशत batches और 85.61 प्रतिशत certifications संभालीं।

    PMKVY 3.0 में top 10 प्रतिशत providers ने करीब 82 प्रतिशत batches और 85.31 प्रतिशत certifications संभालीं।

    इसके मुकाबले bottom 50 प्रतिशत providers का share काफी कम था।

    इससे यह सवाल उठता है कि scheme के बड़े targets कुछ Training Providers के पास इतने concentrated क्यों हुए और उनके performance की monitoring कितनी प्रभावी थी।

    Certificate मिलने में सालों की देरी

    Training पूरी होने के बाद candidate के लिए अगला जरूरी step assessment और certification होता है।

    लेकिन CAG की जांच में selected states में कुछ cases में training पूरी होने के बाद assessment में 1,270 दिनों तक की देरी सामने आई।

    Assessment के बाद certification में भी 1,257 दिनों तक की delay दर्ज हुई।

    करीब 23.87 लाख candidates ऐसे थे जिनके certification में सात दिनों से ज्यादा की delay पाई गई।

    जिस युवा को certificate के आधार पर job या आगे की career opportunity तलाशनी हो, उसके लिए इतनी लंबी delay का सीधा असर पड़ सकता है।

    Inspection system पर भी सवाल

    CAG ने inspection records के timestamps को भी examine किया।

    295 cases में एक ही inspector द्वारा अलग-अलग locations पर inspection शुरू करने के बीच पांच मिनट से भी कम का gap पाया गया।

    Ministry ने इन discrepancies को technical issues से जोड़ते हुए बाद में photo-upload और monitoring controls मजबूत करने की जानकारी दी।

    इसलिए इसे सीधे fake inspection कहना सही नहीं होगा, लेकिन audit ने ऐसी discrepancy जरूर दर्ज की जिसे system level पर explain और correct करना जरूरी था।

    RPL में भी सामने आईं गड़बड़ियां

    प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना का Recognition of Prior Learning यानी RPL component उन लोगों की existing skills को certify करने के लिए है जो पहले से किसी trade या काम में skilled हैं।

    CAG ने RPL-BICE component में भी कई irregularities दर्ज कीं।

    एक मामले में Radiate Designs ने करीब 15,218 candidates को certify किया था। CAG के मुताबिक company 2014-15 के बाद ROC returns file नहीं कर रही थी और ROC records में struck off थी। Audit team को दिए गए address पर एक shop मिली, जहां company का visible signboard नहीं था।

    CAG ने इस तरह के records के आधार पर certification process की verification पर सवाल उठाए।

    एक दूसरे fitness trainer से जुड़े case में 10,000 candidates की placement और 30,000 employees की capacity का दावा किया गया था, जबकि संबंधित gyms में Ministry के records के अनुसार employees की संख्या काफी कम थी।

    Jharkhand में 8,922 certifications में से 7,145 East Singhbhum में और Rajasthan में सभी 5,444 certifications Churu district में concentrated थीं।

    Audit ने employee-employer relationship की proper verification के बिना certifications किए जाने पर सवाल उठाए।

    PMKVY 4.0 में भी data से जुड़े सवाल

    यहां एक जरूरी फर्क समझना होगा।

    CAG की मुख्य audit findings प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के पहले तीन phases से जुड़ी हैं। PMKVY 4.0 बाद में शुरू हुई और इसमें technology-based verification को मजबूत किया गया है।

    लेकिन CAG ने PMKVY 4.0 के उपलब्ध data की भी कुछ जांच की।

    इसमें:

    • 175 invalid mobile numbers
    • 2,263 repeated mobile numbers
    • करीब 2.72 लाख null email addresses
    • करीब 3.08 लाख repeated email addresses

    मिले।

    इन आंकड़ों का मतलब यह नहीं कि इतने candidates fake थे। लेकिन इससे यह जरूर पता चलता है कि digital system में भी data validation को लगातार मजबूत रखने की जरूरत है।

    अब सरकार ने क्या बदला?

    PMKVY 4.0 में beneficiary verification और monitoring के लिए कई technology-based controls बढ़ाए गए हैं।

    इनमें:

    • Aadhaar-based verification
    • Face Authentication
    • AEBAS attendance
    • e-KYC
    • duplicate candidate checks
    • digital monitoring
    • physical inspections
    • geo-tagged evidence
    • candidate feedback
    • third-party assessment

    जैसे measures शामिल हैं।

    PMKVY 4.0 में AI, drones, robotics, green energy, semiconductor manufacturing और दूसरे new-age sectors से जुड़े courses पर भी ज्यादा focus किया जा रहा है।

    जून 2026 तक सरकार के मुताबिक PMKVY 4.0 के तहत 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 738 जिलों में 28.17 लाख candidates train किए जा चुके थे। इसके implementation ecosystem में 16,900 से ज्यादा institutions और 6,800 से ज्यादा Skill Hubs शामिल थे।

    PMKVY 4.0 को लेकर सरकार के आंकड़े क्या कहते हैं?

    पुरानी phases की CAG findings के बावजूद PMKVY 4.0 के impact को लेकर सरकार ने positive results भी जारी किए हैं।

    29 जुलाई 2026 को सरकार ने independent impact evaluation का हवाला देते हुए बताया कि Short Term Training candidates में employed और self-employed लोगों का combined share training से पहले 26.6 प्रतिशत था, जो training के बाद 45.4 प्रतिशत हो गया।

    यानी 18.8 percentage points का increase दर्ज किया गया।

    सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 41.4 प्रतिशत STT candidates और 48.9 प्रतिशत RPL candidates ने training और certification के बाद income बढ़ने की बात भी बताई।

    इसलिए आज की स्थिति को सिर्फ पुरानी CAG findings से देखना पूरी तस्वीर नहीं देगा। पुराने phases में गंभीर implementation problems सामने आईं, जबकि PMKVY 4.0 को लेकर सरकार के पास employment और income outcomes में improvement का evaluation data भी है।

    Maharashtra और Mumbai के युवाओं के लिए क्या जरूरी है?

    महाराष्ट्र भी PMKVY की implementation और audit scrutiny में शामिल रहा है।

    अगर आपने Mumbai या Maharashtra में प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत training ली है, तो अपने record को जरूर verify करें।

    क्या आपका Training Centre अभी भी active है?

    क्या आपकी attendance सही दर्ज है?

    क्या Aadhaar और bank details सही हैं?

    क्या DBT payment मिला है?

    क्या certificate में आपका सही job role है?

    क्या Training Centre ने placement का दावा किया था?

    और सबसे जरूरी—

    क्या आपको वास्तव में job या income का फायदा मिला?

    क्योंकि scheme की सफलता सिर्फ certificate से तय नहीं होती।

    अगर आपने PMKVY की training ली है तो ये 8 चीजें check करें

    1. Certificate: आपका certificate official record में मौजूद है या नहीं।

    2. Training Centre: जिस centre से आपने course किया, उसकी status क्या है।

    3. Attendance: आपकी training attendance सही दर्ज है या नहीं।

    4. Aadhaar/e-KYC: आपकी identity details सही हैं या नहीं।

    5. Bank Account: आपके नाम से सही bank details linked हैं या नहीं।

    6. DBT Payment: payment मिला, pending है या transaction fail हुआ।

    7. Placement: अगर placement का दावा किया गया था तो employer और job details verify करें।

    8. Complaint: अगर आपके नाम पर ऐसी training या certification दिखाई दे रही है जो आपने की ही नहीं, या payment/identity में गलती है, तो official grievance mechanism पर complaint करें।

    इस पूरे मामले में अब आगे क्या देखना होगा?

    अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि कितने Training Centres blacklist हुए या कितनी FIR दर्ज हुईं।

    आगे यह देखना ज्यादा जरूरी होगा कि:

    41 FIR की investigation कहां तक पहुंचती है?

    178 blacklisted centres में recovery कितनी होती है?

    34 लाख pending payments में कितने candidates को पैसा मिलता है?

    NSDC के जिन करीब 20 current और former employees को notices दिए गए हैं, उनके खिलाफ आगे क्या action होता है?

    और सबसे बड़ा सवाल—

    क्या PMKVY 4.0 में technology-based safeguards पुराने loopholes को वास्तव में बंद कर पाते हैं?

    प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना का असली test यही है कि government records में कितने candidates trained और certified दिखते हैं, इससे आगे जाकर कितने युवाओं को वास्तव में skill, payment, job और बेहतर income मिलती है।

    CAG की findings ने पुराने system की कई कमजोरियां सामने रख दी हैं। 2026 की FIR और blacklisting के जरिए कार्रवाई भी चल रही है। वहीं PMKVY 4.0 के नए evaluation में employment और income outcomes में improvement का दावा किया गया है।

    अब नजर इस बात पर है कि पुरानी गलतियों से सीखकर मौजूदा system कितना मजबूत हुआ है और scheme से जुड़े युवाओं को उसका वास्तविक फायदा कितना मिल रहा है।

  • 93% मुआवजा फिर भी सत्याग्रह क्यों? केन-बेतवा पर आदिवासियों की लड़ाई में राहुल गांधी की एंट्री, 14 गांवों में फिर होगा सर्वे

    93% मुआवजा फिर भी सत्याग्रह क्यों? केन-बेतवा पर आदिवासियों की लड़ाई में राहुल गांधी की एंट्री, 14 गांवों में फिर होगा सर्वे

    केन-बेतवा परियोजना पर आदिवासी सत्याग्रह के बीच राहुल गांधी का समर्थन, 93% मुआवजे के सरकारी दावे और 14 गांवों के नए सर्वे से जुड़े सवाल जानिए।

    भोपाल/छतरपुर: केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर बुंदेलखंड में आदिवासी परिवारों का संघर्ष एक बार फिर तेज हो गया है। 19 अगस्त 2026 को राहुल गांधी ने आंदोलन कर रहे आदिवासी भाई-बहनों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं, मांगें और आपबीती सुनी और इस लड़ाई में उनके साथ खड़े रहने का भरोसा दिया।

    राहुल गांधी ने कहा कि सालों से अपने अधिकारों के लिए अन्याय और अत्याचार सह रहे बुंदेलखंड के निवासी सम्मान और समर्थन के हकदार हैं। उन्होंने साफ कहा कि आदिवासी भाई-बहनों की इस लड़ाई में वह और कांग्रेस उनके साथ हैं।

    लेकिन इस पूरी खबर में सबसे बड़ा सवाल राहुल गांधी का समर्थन नहीं, बल्कि यह है—

    जब सरकार खुद दावा कर रही है कि प्रभावित परिवारों को 93.78% rehabilitation compensation दिया जा चुका है, तो फिर आदिवासी परिवार अभी भी सत्याग्रह क्यों कर रहे हैं?

    यही सवाल अब केन-बेतवा परियोजना के पूरे विवाद के केंद्र में आ गया है।

    केन-बेतवा परियोजना आखिर क्यों इतनी बड़ी है?

    केन-बेतवा लिंक परियोजना का मकसद केन नदी के पानी को बेतवा नदी बेसिन तक पहुंचाना है। इसमें दाउधन बांध और करीब 221 किलोमीटर की link canal सहित कई बड़े infrastructure works शामिल हैं।

    सरकार का कहना है कि यह project बुंदेलखंड के लंबे समय से चले आ रहे water crisis को कम करने में मदद करेगा। सिंचाई का विस्तार होगा, किसानों को पानी मिलेगा और मध्य प्रदेश तथा उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में drinking water supply बेहतर होगी।

    Protest-against-Ken-Betwa-MP-Chhatarpur

    सरकारी project details के मुताबिक लाखों हेक्टेयर जमीन को irrigation coverage देने और लाखों लोगों तक drinking water पहुंचाने का target है।

    यानी एक तरफ सरकार इसे बुंदेलखंड के लिए पानी और विकास की बड़ी योजना बता रही है, वहीं दूसरी तरफ project area में रहने वाले परिवारों का सवाल है—

    “विकास होगा, लेकिन हमारी जमीन और हमारी जिंदगी का क्या होगा?”

    आदिवासी परिवारों का विरोध आखिर किस बात पर है?

    प्रदर्शन कर रहे परिवारों की शिकायत सिर्फ इतनी नहीं है कि उन्हें compensation नहीं चाहिए।

    उनकी मांग है कि अगर project की वजह से उन्हें अपनी जमीन, घर और livelihood छोड़ना पड़ रहा है, तो rehabilitation ऐसा होना चाहिए जिससे विस्थापन के बाद उनकी जिंदगी दोबारा खड़ी हो सके।

    आंदोलन में मुख्य तौर पर इन सवालों को उठाया गया है—

    • कौन-कौन से परिवार वास्तव में project से प्रभावित हैं?
    • क्या सभी eligible परिवारों के नाम rehabilitation list में हैं?
    • जमीन और मकान का assessment सही हुआ है या नहीं?
    • compensation कितना और किस आधार पर मिल रहा है?
    • rehabilitation के बाद खेती और रोजगार का क्या होगा?
    • जंगल और natural resources पर निर्भर परिवारों का क्या होगा?
    • नए स्थान पर घर, पानी, स्कूल और healthcare की व्यवस्था कैसी होगी?

    यानी मामला सिर्फ “पैसा कितना मिला” का नहीं है।

    मामला यह भी है कि “पैसा मिलने के बाद जिंदगी कैसे चलेगी?”

    सरकार का बड़ा दावा: 93.78% compensation paid

    इसी बीच केंद्र सरकार ने 19 अगस्त को केन-बेतवा परियोजना से जुड़े compensation और rehabilitation के आंकड़े सामने रखे हैं।

    सरकार के मुताबिक 5,039 project-affected families को rehabilitation के लिए चिन्हित किया गया है। इनके लिए ₹629.87 करोड़ के awards बनाए गए थे, जिसमें से ₹590.74 करोड़ यानी 93.78% भुगतान किया जा चुका है।

    कृषि भूमि से जुड़े 10,913 प्रभावित व्यक्तियों के लिए ₹360.66 करोड़ के awards बताए गए हैं। इनमें ₹320.45 करोड़ यानी 88.85% रकम का भुगतान होने की जानकारी दी गई है।

    आवासीय संपत्तियों के compensation में भी करीब 94% payment का सरकारी दावा है।

    सरकार का कहना है कि जिन मामलों में payment बाकी है, वहां जरूरी legal और administrative formalities पूरी होने के बाद भुगतान किया जाएगा और land records की verification भी जारी है।

    लेकिन फिर वही सवाल—

    अगर इतना बड़ा हिस्सा भुगतान हो चुका है, तो आंदोलन खत्म क्यों नहीं हुआ?

    असल पेंच: कौन प्रभावित है और किसे कितना मिलेगा?

    यहीं से पूरा विवाद और complicated हो रहा है।

    किसी परिवार का नाम compensation list में होना और हर प्रभावित व्यक्ति की वास्तविक जरूरत पूरी होना एक ही बात नहीं है।

    आंदोलन से जुड़े लोगों ने eligibility, beneficiary criteria, compensation calculation और rehabilitation package को लेकर सवाल उठाए हैं।

    कुछ प्रदर्शनकारियों की मांग है कि rehabilitation benefits तय करते समय परिवार में मौजूद eligible adult members और उनकी वास्तविक livelihood जरूरतों को भी ध्यान में रखा जाए।

    यानी सवाल सिर्फ यह नहीं कि “एक परिवार को कितना मिला?”

    सवाल यह भी है—

    “उस परिवार में कितने लोग अपनी आजीविका के लिए उसी जमीन पर depend थे?”

    14 गांवों में फिर से survey क्यों कराया जा रहा है?

    इस विवाद के बीच एक बड़ा administrative development सामने आया है।

    छतरपुर प्रशासन ने 14 प्रभावित गांवों में fresh survey का आदेश दिया है।

    इन गांवों में Sukwaha, Bhaurkhuwa, Ghughri, Naiguwan, Kakra, Kadwara, Palkoha, Kharyani, Dhodhan, Mainari, Kupi, Shahpura, Basudha और Dugaria शामिल हैं।

    Fresh verification में जमीन, मकान, पेड़, दूसरी assets और प्रभावित परिवारों की जानकारी दोबारा देखी जा रही है।

    इसका मकसद यह पता लगाना है कि कोई eligible परिवार या asset compensation और rehabilitation process से बाहर तो नहीं रह गया।

    यही fresh survey अब आंदोलनकारियों की मांग और सरकार के आंकड़ों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी बन गया है।

    अप्रैल से अगस्त तक कैसे बढ़ा आंदोलन?

    यह विरोध आज से शुरू नहीं हुआ।

    प्रभावित परिवारों ने पिछले कई महीनों में अलग-अलग तरीकों से अपनी बात सरकार तक पहुंचाई।

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    जल सत्याग्रह

    प्रदर्शनकारियों ने पानी में खड़े होकर अपना विरोध जताया।

    चिता आंदोलन

    आदिवासी महिलाओं ने symbolic चिताओं पर लेटकर protest किया। इसका संदेश था कि जमीन और livelihood छिनने के बाद उनके सामने जिंदगी और मौत जैसा सवाल खड़ा हो गया है।

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    Hunger Strike

    इसके बाद भूख हड़ताल शुरू हुई, जो कई दिनों तक चली।

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    Chulha Bandh

    जुलाई में protest का एक और symbolic तरीका सामने आया—Chulha Bandh। यानी खाना बनाना तक बंद कर विरोध जताया गया।

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    आंदोलन में महिलाओं की बड़ी भागीदारी ने इसे और गंभीर बना दिया।

    19 जुलाई को police action के बाद विवाद और बढ़ा

    जुलाई में आंदोलन उस समय और बड़ा मुद्दा बन गया जब प्रशासन और पुलिस ने protest site खाली कराया।

    19 जुलाई को प्रदर्शनकारियों को आंदोलन स्थल से हटाया गया। इसके बाद protesters की तरफ से police action पर सवाल उठाए गए।

    राहुल गांधी ने भी इस कार्रवाई की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण protest को दबाया गया।

    हालांकि police और administration का पक्ष अलग है, इसलिए इस मामले में दोनों पक्षों के दावों को अलग-अलग देखना जरूरी है।

    राहुल गांधी पहले भी उठा चुके हैं मुद्दा

    राहुल गांधी का यह इस मुद्दे पर पहला intervention नहीं है।

    7 अगस्त को Lok Sabha में भी Ken-Betwa project से जुड़े tribal displacement और rehabilitation का मुद्दा उठाया गया था।

    केंद्र के Tribal Affairs Ministry ने बताया कि इस विषय से जुड़ी complaints और representations मिली हैं और उन्हें मध्य प्रदेश सरकार को action और response के लिए भेजा गया है।

    इसके बाद 13 अगस्त को राहुल गांधी ने प्रभावित परिवारों के delegation से मुलाकात की।

    और अब 19 अगस्त को एक बार फिर उन्होंने सार्वजनिक तौर पर इस संघर्ष को समर्थन दिया है।

    इससे साफ है कि Ken-Betwa का tribal displacement issue अब local protest से निकलकर national political debate का हिस्सा बन चुका है।

    सिर्फ जमीन नहीं, जंगल और पर्यावरण का भी सवाल

    केन-बेतवा project का दूसरा बड़ा विवाद environmental impact को लेकर है।

    Project के लिए forest land diversion और Panna Tiger Reserve के आसपास के ecological impact को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं।

    पर्यावरण को लेकर concerns में forest habitat, wildlife movement और river ecosystem शामिल हैं।

    दूसरी तरफ project को जरूरी environmental और forest clearances मिल चुकी हैं और सरकार mitigation measures तथा project benefits पर जोर देती रही है।

    इसलिए सवाल यह नहीं है कि सिर्फ “project सही है या गलत?”

    सवाल यह है—

    “बुंदेलखंड को पानी देने वाली इस project के साथ जंगल और wildlife पर पड़ने वाले असर को कितना कम किया जा सकता है?”

    बुंदेलखंड को project से क्या फायदा मिलेगा?

    सरकार का तर्क है कि बुंदेलखंड लंबे समय से पानी की कमी से जूझता रहा है।

    Ken-Betwa project से:

    • irrigation coverage बढ़ेगा
    • किसानों को पानी मिलेगा
    • drinking water supply बेहतर होगी
    • water-stressed गांवों को फायदा मिलेगा
    • hydropower और दूसरे energy benefits मिलेंगे

    सरकार इसे बुंदेलखंड की water security से जोड़कर देख रही है।

    लेकिन प्रभावित परिवारों के लिए सवाल है—

    “अगर बुंदेलखंड को पानी मिलेगा, तो जिस जमीन पर हम रहते हैं, वहां रहने वाले लोगों का भविष्य भी सुरक्षित होगा या नहीं?”

    मुआवजा मिलना और जिंदगी दोबारा बसना एक बात नहीं

    यही इस पूरे विवाद की सबसे बड़ी मानवीय तस्वीर है।

    एक किसान के लिए जमीन सिर्फ जमीन नहीं होती।

    उसी जमीन से:

    खेती → income → पशुपालन → घर → परिवार का future

    जुड़ा होता है।

    आदिवासी परिवारों के लिए जंगल और आसपास के natural resources भी रोजमर्रा की livelihood का हिस्सा हो सकते हैं।

    ऐसे में compensation मिलने के बाद भी असली सवाल रहता है—

    नया घर कहां होगा? खेती कैसे होगी? रोजगार कहां मिलेगा? बच्चों की पढ़ाई कैसे चलेगी? पानी और healthcare की सुविधा कैसी होगी?

    यही वजह है कि rehabilitation को सिर्फ bank account में पहुंची रकम से नहीं, बल्कि विस्थापित परिवार की नई जिंदगी कितनी स्थिर हुई, इससे भी देखा जाता है।

    देश में अकेला नहीं है Ken-Betwa विवाद

    भारत के अलग-अलग हिस्सों में बड़े dams, mining और infrastructure projects को लेकर tribal displacement और rehabilitation के सवाल उठते रहे हैं।

    राजस्थान के Mahi Bajaj Sagar से जुड़े मामलों में भी displaced families के rehabilitation और दोबारा विस्थापन की चिंता सामने आई है।

    छत्तीसगढ़ के Hasdeo क्षेत्र में mining, forest rights और tribal communities के अधिकारों को लेकर विरोध जारी रहा है।

    इन सभी मामलों में एक common सवाल सामने आता है—

    क्या development project की planning जितनी मजबूत होती है, उतनी ही मजबूत प्रभावित लोगों को बसाने की planning भी होती है?

    अब आगे क्या होगा?

    अब केन-बेतवा विवाद में सबसे ज्यादा नजर 14 गांवों के fresh survey पर रहेगी।

    देखना होगा कि दोबारा verification में कितने नए eligible families या assets सामने आते हैं और compensation तथा rehabilitation से जुड़े pending मामलों का क्या होता है।

    दूसरी तरफ आदिवासी संगठनों की मांगें और तेज होती हैं या सरकार के साथ बातचीत का रास्ता निकलता है, यह भी महत्वपूर्ण होगा।

    राहुल गांधी के समर्थन से इस आंदोलन को political momentum मिला है, जबकि केंद्र ने अपने ताजा आंकड़ों के जरिए compensation process पर अपना पक्ष सामने रखा है।

    लेकिन इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा सवाल अभी भी वही है—

    “93% से ज्यादा मुआवजा दिया जा चुका है, फिर भी आदिवासी सड़क पर क्यों हैं?”

    इस सवाल का जवाब सिर्फ compensation के आंकड़े में नहीं, बल्कि जमीन, rehabilitation, livelihood, जंगल और प्रभावित परिवारों की वास्तविक जिंदगी में छिपा है।

  • वायरल के चक्कर में तिरंगे का अपमान कितना सही? Riya Baliyan की माफी के बाद भी बड़ा सवाल—क्या माफीनामा पर्याप्त है?

    वायरल के चक्कर में तिरंगे का अपमान कितना सही? Riya Baliyan की माफी के बाद भी बड़ा सवाल—क्या माफीनामा पर्याप्त है?

    Riya Baliyan के तिरंगा विवाद पर माफी के बाद सवाल: क्या वायरल होने की कोशिश में राष्ट्रीय ध्वज का अपमान सही है और क्या सिर्फ माफीनामा पर्याप्त है?

    मुजफ्फरनगर: सोशल मीडिया पर वायरल होने की चाहत आज कई लोगों को ऐसे कंटेंट की तरफ ले जा रही है, जो कुछ ही घंटों में उन्हें चर्चा में ला देता है। लेकिन जब यह वायरल होने की कोशिश देश के राष्ट्रीय ध्वज से जुड़ जाए, तो सवाल सिर्फ views और followers का नहीं रह जाता। सवाल यह बन जाता है कि वायरल होने के लिए तिरंगे के सम्मान से समझौता आखिर कहां तक सही है?

    मुजफ्फरनगर की Instagram influencer Riya Baliyan से जुड़े एक वायरल वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद खड़ा हुआ। वीडियो में तिरंगे को कथित तौर पर गलत तरीके से प्रदर्शित किए जाने को लेकर लोगों ने सवाल उठाए और सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। विवाद बढ़ने के बाद Riya ने वीडियो जारी कर माफी मांगी और संबंधित वीडियो को हटा दिया।

    लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या माफीनामा इस विवाद को खत्म करने के लिए पर्याप्त है?

    गलती थी या वायरल होने की कोशिश?

    Riya ने अपनी सफाई में इसे अनजाने में हुई गलती बताया है। ऐसे में बिना ठोस सबूत यह कहना सही नहीं होगा कि उन्होंने जानबूझकर तिरंगे का गलत इस्तेमाल सिर्फ views या followers बढ़ाने के लिए किया।

    लेकिन सोशल मीडिया का मौजूदा सिस्टम एक दूसरी बहस जरूर खड़ी करता है।

    किसी विवादित वीडियो पर लोग नाराज होते हैं, उसे शेयर करते हैं, स्क्रीन रिकॉर्ड करते हैं, दूसरे pages पर पोस्ट करते हैं और creator का account खोजते हैं। यानी जिस content का विरोध किया जा रहा है, वही content कई बार creator को अतिरिक्त exposure भी दे सकता है।

    यही वजह है कि सवाल सिर्फ यह नहीं है कि वीडियो क्यों बनाया गया था?

    सवाल यह भी है कि उस विवाद से किसे क्या मिला?

    वीडियो डिलीट हुआ, लेकिन क्या Viral Traffic भी खत्म हो गया?

    यह मान लेना आसान है कि वीडियो delete होने के बाद विवाद खत्म हो गया।

    लेकिन डिजिटल दुनिया में ऐसा जरूरी नहीं है।

    एक बार कोई Reel viral हो जाए तो उसके screenshots, screen recordings, reposts और reaction videos अलग-अलग platforms पर घूम सकते हैं। लोग original creator का नाम search कर सकते हैं और उसके दूसरे content तक पहुंच सकते हैं।

    यानी:

    वीडियो delete हो सकता है, लेकिन उससे पैदा हुई पहचान और digital reach जरूरी नहीं कि delete हो जाए।

    क्या गुस्सा भी किसी Creator की Reach बढ़ा सकता है?

    सोशल मीडिया पर “rage bait” शब्द इसी phenomenon से जुड़ा है—ऐसा provocative content जो लोगों में गुस्सा पैदा करके engagement और traffic हासिल करता है। Oxford University Press ने “rage bait” को 2025 का Word of the Year चुना था और बताया था कि इस term का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है।

    इसका मतलब यह नहीं है कि Riya का वीडियो rage bait था।

    लेकिन यह जरूर समझने की जरूरत है कि सोशल मीडिया पर outrage खुद engagement पैदा कर सकता है।

    यानी कभी-कभी audience सोचती है—

    “हम इसका विरोध करके इसे सबक सिखा रहे हैं।”

    लेकिन platform की नजर से वही activity हो सकती है—

    Comment + Share + Profile Visit + Reaction = More Attention

    यही social media की सबसे बड़ी विडंबना है।

    क्या माफी मांगने के बाद भी जवाबदेही जरूरी है?

    माफी मांगना निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण कदम है।

    अगर कोई व्यक्ति गलती स्वीकार करता है, उसे हटाता है और सार्वजनिक रूप से माफी मांगता है, तो उसे सुनना भी जरूरी है।

    लेकिन राष्ट्रीय ध्वज जैसे संवेदनशील राष्ट्रीय प्रतीक के मामले में सवाल यह भी है कि क्या सिर्फ “गलती हो गई” कहना पर्याप्त है?

    कानून और Flag Code National Flag के सम्मानजनक प्रदर्शन और handling से जुड़े नियम निर्धारित करते हैं। National Flag के प्रति disrespect को Prevention of Insults to National Honour Act, 1971 के तहत भी संबोधित किया गया है।

    इसलिए किसी मामले में गलती, लापरवाही और जानबूझकर किए गए अपमान के बीच अंतर करना जरूरी है।

    तिरंगे से जुड़े विवाद सिर्फ Riya Baliyan तक सीमित नहीं

    यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देश के अलग-अलग हिस्सों में National Flag से जुड़े कई विवाद सामने आए हैं।

    हाल ही में Fatehpur में सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर पांच युवकों के खिलाफ तिरंगे के कथित अपमान को लेकर मामला दर्ज किया गया।

    वहीं दूसरी तरफ Nitin Nabin को लेकर वायरल हुई एक तस्वीर को BJP ने fake बताया और उसके खिलाफ पुलिस शिकायत दर्ज कराई। यानी तिरंगे से जुड़ा हर वायरल दावा वास्तविक घटना हो, यह भी जरूरी नहीं है।

    इसलिए सोशल मीडिया users के लिए दोहरी जिम्मेदारी बनती है—

    गलत तरीके से तिरंगे के इस्तेमाल का विरोध करें, लेकिन किसी unverified तस्वीर या वीडियो को बिना जांचे viral भी न करें।

    असली सवाल: देशभक्ति या सिर्फ Social Media Outrage?

    तिरंगे का सम्मान किसी भी भारतीय के लिए बेहद संवेदनशील विषय है।

    लेकिन देशभक्ति का मतलब सिर्फ किसी वायरल वीडियो पर गुस्सा करना नहीं है।

    अगर कोई गलती करता है तो सवाल उठना चाहिए। अगर नियमों का उल्लंघन हुआ है तो कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन बिना सबूत किसी व्यक्ति को देशद्रोही कहना, लगातार गाली देना या उसके हर पुराने content को खंगालकर उसे viral करना भी समाधान नहीं है।

    क्योंकि हो सकता है कि जिस account को आप “सबक सिखाने” के लिए search कर रहे हैं, उसी account की reach आप खुद बढ़ा रहे हों।

    Riya Baliyan की माफी के बाद अब क्या?

    Riya ने विवादित वीडियो हटाया है और माफी भी मांगी है।

    अब इस मामले में तीन सवाल सबसे महत्वपूर्ण हैं—

    पहला: क्या यह वास्तव में अनजाने में हुई गलती थी?

    दूसरा: क्या National Flag के display से जुड़े नियमों का उल्लंघन हुआ?

    तीसरा: क्या ऐसी गलती के बाद सार्वजनिक माफी पर्याप्त मानी जानी चाहिए या परिस्थितियों के अनुसार आगे भी कोई जवाबदेही बनती है?

    इन सवालों का जवाब भावनाओं से नहीं, बल्कि उपलब्ध तथ्य और कानून के आधार पर होना चाहिए।

    क्योंकि तिरंगा कोई Viral Content नहीं है

    सोशल मीडिया पर views कुछ घंटों में मिल सकते हैं, followers कुछ दिनों में बढ़ सकते हैं और controversy कुछ हफ्तों में खत्म हो सकती है।

    लेकिन राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान किसी algorithm का हिस्सा नहीं है।

    इसलिए सवाल Riya Baliyan से भी बड़ा है—

    “वायरल होने के चक्कर में तिरंगे का अपमान आखिर कहां तक सही है? और अगर गलती हो भी जाए, तो क्या सिर्फ एक माफीनामा उस गलती की पूरी कीमत चुका देता है?”

    इस विवाद का जवाब सिर्फ Riya Baliyan को नहीं, बल्कि उस पूरी सोशल मीडिया culture को देना होगा जहां attention के लिए outrage और outrage के लिए attention—दोनों एक-दूसरे को viral बनाते हैं।

  • मुंबई से गिरफ्तार हुआ रेप का आरोपी पुलिसकर्मी, कोलकाता के गेस्ट हाउस में महिला से दुष्कर्म का आरोप

    मुंबई से गिरफ्तार हुआ रेप का आरोपी पुलिसकर्मी, कोलकाता के गेस्ट हाउस में महिला से दुष्कर्म का आरोप

    मुंबई से रेप के आरोपी सब-इंस्पेक्टर अजमल हक गिरफ्तार। सॉल्ट लेक गेस्ट हाउस केस में बिधाननगर पुलिस ने ट्रांजिट रिमांड पर कोलकाता लाया।

    मुंबई: पश्चिम बंगाल के सॉल्ट लेक में महिला से रेप के आरोप में फरार चल रहे सब-इंस्पेक्टर अजमल हक को बिधाननगर ईस्ट पुलिस ने मुंबई से गिरफ्तार किया है। आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर कोलकाता ले जाया गया है और अब उसे बिधाननगर कोर्ट में पेश किया जाएगा।

    पश्चिम बंगाल के सॉल्ट लेक इलाके में एक महिला से रेप के आरोप में फरार चल रहे पुलिस अधिकारी को बिधाननगर ईस्ट पुलिस ने मुंबई से गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान अजमल हक के रूप में हुई है, जो बीरभूम जिले के नलहाटी थाने में सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात था।

    पुलिस ने आरोपी को मुंबई से गिरफ्तार करने के बाद स्थानीय अदालत में पेश किया। वहां से ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद उसे कोलकाता ले गई है। अब आरोपी सब-इंस्पेक्टर को बिधाननगर कोर्ट में पेश किया जाएगा, जहां पुलिस उसकी कस्टडी की मांग कर सकती है।

    सॉल्ट लेक के गेस्ट हाउस में रेप का आरोप

    पुलिस के मुताबिक, मामला पिछले साल का बताया जा रहा है। महिला ने जुलाई में बिधाननगर ईस्ट थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि सब-इंस्पेक्टर अजमल हक महिला को सॉल्ट लेक के सीएल ब्लॉक स्थित एक गेस्ट हाउस में लेकर गया था, जहां उसके साथ रेप किया गया।

    शिकायत मिलने के बाद बिधाननगर ईस्ट पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और आरोपी पुलिस अधिकारी की तलाश की।

    जमानत मिलने के बाद हो गया था फरार

    पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में आरोपी सब-इंस्पेक्टर को पहले जमानत मिल गई थी। इसके बाद जब बिधाननगर ईस्ट पुलिस ने बीरभूम जिला पुलिस से आरोपी अधिकारी के संबंध में संपर्क किया, तो उसके गायब होने की जानकारी सामने आई।

    इसके बाद पुलिस ने आरोपी की तलाश तेज कर दी।

    जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि आरोपी मुंबई में मौजूद है। सूचना के आधार पर बिधाननगर ईस्ट पुलिस की टीम ने कार्रवाई की और उसे मुंबई से गिरफ्तार कर लिया।

    मुंबई कोर्ट से ट्रांजिट रिमांड

    गिरफ्तारी के बाद आरोपी को मुंबई की स्थानीय अदालत में पेश किया गया। अदालत से ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद बिधाननगर ईस्ट पुलिस उसे कोलकाता लेकर पहुंची।

    अब पुलिस आरोपी से पूछताछ कर मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच करना चाहती है।

    आज बिधाननगर कोर्ट में पेशी

    अजमल हक को अब बिधाननगर कोर्ट में पेश किया जाएगा। पुलिस उसकी कस्टडी मांग सकती है, ताकि मामले की आगे जांच की जा सके।

    पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की परिस्थितियां क्या थीं और मामले से जुड़े कौन-कौन से सबूत उपलब्ध हैं। जांच के दौरान पुलिस आरोपी से पूछताछ के साथ-साथ मामले से जुड़े अन्य लोगों और उपलब्ध साक्ष्यों की भी जांच करेगी।

    फिलहाल आरोपी पर लगाए गए रेप के आरोप जांच का विषय हैं। मामले में अंतिम निष्कर्ष अदालत में पेश किए जाने वाले सबूतों और आगे की न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही सामने आएगा।