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  • टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: 8 गिरफ्तारी, हथियार सप्लाई की जांच तेज

    टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: 8 गिरफ्तारी, हथियार सप्लाई की जांच तेज

    टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में तीन मुख्य आरोपी 31 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में हैं। वहीं कुल 8 गिरफ्तारी, हथियारों की बरामदगी, अतिरिक्त गिरफ्तारियों और कथित गैंग कनेक्शन की जांच जारी है।

    मुंबई: अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के मामले में जांच का दायरा बढ़ गया है। तीन मुख्य आरोपियों को 31 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेजा गया है, जबकि कथित हथियार सप्लाई नेटवर्क से जुड़े चार अन्य लोगों और एक अतिरिक्त संदिग्ध की गिरफ्तारी की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस अब हथियारों की बरामदगी, हमले के मकसद और लॉरेंस बिश्नोई गैंग से कथित कनेक्शन की जांच कर रही है।

    आठ गिरफ्तारियां, हथियार सप्लाई नेटवर्क की जांच

    18 अक्टूबर को मुंबई के जुहू इलाके में टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग हुई थी। इस घटना में अभिनेता सुरक्षित बच गए, जबकि उनके ड्राइवर फिरदौस और राहगीर उमेश चव्हाण घायल हुए थे। हमलावर कथित तौर पर बाइक से फरार हो गए थे।

    इस मामले में तीन मुख्य आरोपियों की पहचान फुलसिंह नरेश, रेहान रशीदुद्दीन अंसारी और हृतिक कुमार उर्फ रोशन महतो के रूप में की गई है। बाद की जानकारी में इनके नाम फुल सिंह, रेहान उर्फ सुक्का और रितिक कुर्मी उर्फ रोशन भी बताए गए हैं।

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    मुंबई पुलिस ने तीनों को राजस्थान के कोटा रेलवे स्टेशन पर पकड़ा था। 21 अक्टूबर को मुंबई लाए जाने के बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया। पुलिस ने साजिश, हमले के मकसद और हथियारों की बरामदगी के लिए 14 दिन की हिरासत मांगी थी। अदालत ने तीनों को 31 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया।

    पुलिस के मुताबिक, आरोपियों पर हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। बचाव पक्ष ने लंबी पुलिस हिरासत का विरोध करते हुए दलील दी कि आरोपियों से पहले ही पूछताछ की जा चुकी है।

    दिल्ली और हरियाणा से चार गिरफ्तारियां, एक अन्य संदिग्ध भी पकड़ा गया

    जांच के दौरान दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने कथित हथियार सप्लाई नेटवर्क से जुड़े चार लोगों को गिरफ्तार किया। इनकी पहचान कुणाल (21), सुमित (19), राधा (23) और बबीता (23) के रूप में हुई है। कुणाल और सुमित हरियाणा के सोनीपत क्षेत्र के रहने वाले बताए गए हैं, जबकि राधा और बबीता उत्तर प्रदेश की निवासी हैं।

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    जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, कुणाल ने कथित तौर पर अमृतसर से एक पिस्तौल और 20 कारतूस जुटाए थे। सुमित पर उसके साथ जाने का आरोप है, जबकि राधा और बबीता पर हथियार मुंबई पहुंचाने का संदेह है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि हथियार किस माध्यम से शूटर्स तक पहुंचे और इस पूरी व्यवस्था को किसने निर्देशित किया।

    21 अक्टूबर को हरियाणा के सोनीपत जिले के बरोदा गांव से अंकित नाम के एक अन्य संदिग्ध की गिरफ्तारी की जानकारी भी सामने आई। उसे मामले की साजिश में शामिल होने के संदेह में पकड़े जाने की बात कही गई है।

    इन गिरफ्तारियों के बाद मामले में कुल आठ गिरफ्तारियों की जानकारी सामने आई है। हालांकि, सभी आरोपियों की औपचारिक गिरफ्तारी, संबंधित FIR और प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका की पुष्टि आधिकारिक रिकॉर्ड से ही हो पाएगा।

    कैब ड्राइवर के फोन कॉल से कोटा तक पहुंची पुलिस

    मुंबई क्राइम ब्रांच ने 18 अक्टूबर की फायरिंग के बाद करीब 20 टीमें बनाकर जांच शुरू की थी। घटनास्थल और संभावित भागने के रास्तों के आसपास लगे 500 से अधिक CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली गई।

    जांच के दौरान पुलिस को एक पीली पल्सर बाइक का सुराग मिला, जिसका इस्तेमाल हमलावरों के फरार होने में किए जाने का आरोप है। बाइक के मालिक से मिले मोबाइल नंबर के आधार पर पुलिस ने आरोपियों की गतिविधियों की पड़ताल की।

    पुलिस के मुताबिक, आरोपी अंधेरी से लोकल ट्रेन के जरिए बोरीवली पहुंचे और वहां से कैब लेकर सूरत गए। कैब ड्राइवर ने बुकिंग में इस्तेमाल किए गए नंबर पर फोन किया, जिससे जांचकर्ताओं को आरोपियों तक पहुंचने का अहम सुराग मिला। ड्राइवर ने पुलिस को बताया कि उसने तीन यात्रियों को सूरत रेलवे स्टेशन पर छोड़ा था।

    इसके बाद ट्रेन के शेड्यूल, आरक्षण और दूसरी यात्रा संबंधी जानकारियों की मदद से पुलिस ने पता लगाया कि आरोपी पुणे-जयपुर एक्सप्रेस में सवार हुए थे। मुंबई पुलिस ने राजस्थान पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद कोटा रेलवे स्टेशन पर तीनों को पकड़ लिया गया।

    जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने पुलिस से बचने के लिए यात्रा के साधन और रास्ते बदलने की कोशिश की थी। पुलिस अब उनके कथित फरार होने के पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।

    हथियारों की बरामदगी अब भी बड़ी चुनौती

    21 अक्टूबर को अदालत में पुलिस ने बताया कि फायरिंग में इस्तेमाल किए गए हथियार अभी बरामद नहीं हुए हैं। पुलिस ने यह भी दावा किया कि आरोपियों ने वारदात में इस्तेमाल किए गए दो मोबाइल फोन नष्ट कर दिए थे।

    हथियारों की सप्लाई से जुड़े संदिग्धों की गिरफ्तारी के बावजूद पुलिस को कथित तौर पर इस्तेमाल की गई पिस्तौल और कारतूसों की बरामदगी करनी है। इसके साथ ही जांच एजेंसियां मोबाइल फोन, डिजिटल बातचीत, वित्तीय लेनदेन और आरोपियों के बीच संपर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं।

    फायरिंग में इस्तेमाल की गई पल्सर बाइक कथित तौर पर हृतिक कुमार उर्फ रोशन महतो ने खरीदी थी। पुलिस के अनुसार, बाइक पहले कई लोगों के हाथों से गुजर चुकी थी और उसका रजिस्ट्रेशन महतो के नाम पर ट्रांसफर नहीं हुआ था। वह रैपिडो राइडर के तौर पर काम करता था।

    पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि बाइक किसने उपलब्ध कराई, हथियार कहां रखे गए थे और फायरिंग के बाद आरोपियों को भागने में किसने मदद की।

    अनिल पंडित और बिश्नोई गैंग कनेक्शन की जांच

    क्राइम ब्रांच अनिल पंडित की कथित भूमिका की जांच कर रही है, जिसे जांचकर्ताओं ने लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़ा ऑपरेटिव बताया है।

    फायरिंग के बाद सोशल मीडिया पर एक ऑडियो संदेश और फेसबुक पोस्ट के जरिए घटना की जिम्मेदारी लेने का दावा किया गया था। पुलिस इन संदेशों की प्रामाणिकता और उन्हें प्रकाशित करने वाले लोगों की पहचान की जांच कर रही है।

    जांचकर्ताओं को संदेह है कि रेहान का अनिल पंडित से Signal और Telegram के जरिए संपर्क था। हृतिक कुमार उर्फ रोशन महतो पर पंडित के संपर्क में रहने और कथित शूटर्स के लिए ठहरने, खाने तथा बाइक की व्यवस्था करने का आरोप है।

    पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हमले से पहले टाइगर श्रॉफ की लोकेशन किसने साझा की, आरोपियों को निर्देश किसने दिए और हथियारों की व्यवस्था के लिए पैसे कहां से आए। लॉरेंस बिश्नोई और उसके भाई अनमोल बिश्नोई को इस मामले में मुंबई पुलिस की हिरासत में नहीं बताया गया है।

    भुगतान और विदेश भागने की कथित योजना

    पुलिस के अनुसार, फुलसिंह और रेहान फायरिंग से करीब 20 दिन पहले हरियाणा के सोनीपत से मुंबई पहुंचे थे। जांचकर्ताओं को संदेह है कि रेहान को हमले की जिम्मेदारी सौंपी गई थी और उसने फुलसिंह को अपने साथ शामिल किया।

    मूल जांच संबंधी जानकारी में रेहान को शुरुआती खर्च के लिए 50,000 रुपये दिए जाने के आरोप की पड़ताल का उल्लेख है। दूसरी जानकारी में तीन आरोपियों को 37,000 रुपये दिए जाने का दावा सामने आया है। दोनों रकमों का संबंध और भुगतान करने वाले व्यक्ति की पहचान अभी स्पष्ट किया जाना अभी बाकी है।

    पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपियों को बड़ी रकम देने और भारत से बाहर निकलने में मदद करने का वादा किया गया था या नहीं। कुछ जानकारियों में कनाडा जाने की कथित योजना का उल्लेख है, जबकि दूसरी जानकारी में नेपाल के रास्ते फरार होने की आशंका जताई गई है।

    बॉलीवुड हस्तियों की सुरक्षा पर भी असर

    घटना के बाद बॉलीवुड की दूसरी हस्तियों की सुरक्षा को लेकर भी सतर्कता बढ़ाए जाने की जानकारी सामने आई। सलमान खान, आमिर खान और रोहित शेट्टी के आवासों के आसपास अतिरिक्त पुलिस व्यवस्था और गश्त की जारी की गई है । अक्षय कुमार के घर पर बुलेटप्रूफ ग्लास लगाने की जानकारी भी सामने आई है।

    टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के मामले में पुलिस की जांच अभी जारी है और किसी कथित गैंग की जिम्मेदारी या हमले के वास्तविक मकसद को अदालत में साबित नहीं किया गया है।

    फिलहाल पुलिस के सामने सबसे अहम सवाल हैं—फायरिंग में इस्तेमाल हथियार कहां हैं, कथित सप्लाई नेटवर्क में किसकी क्या भूमिका थी, हमले के पीछे वास्तविक मकसद क्या था और क्या इस साजिश में अन्य लोग भी शामिल थे।

  • टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: रेहान की मां का 2 लाख के लालच का दावा, जांच में नए नाम

    टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: रेहान की मां का 2 लाख के लालच का दावा, जांच में नए नाम

    टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में रेहान की मां ने दो लाख रुपये के लालच का दावा किया। जानें सोनीपत कनेक्शन, गिरफ्तार आरोपियों और पुलिस जांच के नए अपडेट।

    मुंबई: टाइगर श्रॉफ की कार पर मुंबई के जुहू इलाके में हुई फायरिंग के मामले में जांच का दायरा बढ़ने के बीच सोनीपत के रेहान की मां शमशीदा ने दावा किया है कि उनके बेटे को पैसों का लालच देकर घर से बाहर बुलाया गया था। मां के मुताबिक, करीब 20 दिन पहले रेहान खाना खा रहा था, तभी एक शख्स उसे बुलाने आया और वह काम पर जाने की बात कहकर घर से निकल गया। इसके बाद परिवार का उससे संपर्क नहीं हो पाया।

    इस मामले में रेहान समेत कई आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जांच में कथित तौर पर युवाओं को पैसों और विदेश में बसने का वादा करके अपराध में शामिल करने की आशंका की पड़ताल की जा रही है। हालांकि, रेहान को जबरन ले जाने या उसे अपराध की पूरी जानकारी नहीं होने की बात की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    खाने की थाली से उठकर गया रेहान, फिर घर नहीं लौटा

    हरियाणा के सोनीपत जिले के देवडू गांव में रहने वाली शमशीदा ने बताया कि रेहान घर में खाना खा रहा था, तभी एक व्यक्ति उसे बाहर बुलाने आया। रेहान ने परिवार को बताया कि वह काम से जा रहा है। इसके बाद वह घर से निकल गया, लेकिन वापस नहीं लौटा।

    परिवार ने उससे संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उसका मोबाइल फोन बंद आने लगा। मां के मुताबिक, घरवालों को यह जानकारी नहीं थी कि रेहान मुंबई पहुंच चुका है। परिवार को उसकी गतिविधियों और कथित फायरिंग की घटना के बारे में बाद में पता चला।

    शमशीदा का दावा है कि उनके बेटे को दो लाख रुपये के काम का लालच दिया गया था। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि कथित रकम किसने देने का वादा किया था, काम क्या बताया गया था और रेहान को उस काम की वास्तविक प्रकृति के बारे में कितनी जानकारी थी।

    दो लाख रुपये या 35 हजार रुपये, भुगतान को लेकर क्या जानकारी है?

    इस मामले में कथित भुगतान को लेकर अलग-अलग जानकारियां सामने आई हैं। रेहान की मां के बयान में दो लाख रुपये के लालच का जिक्र है, जबकि पुलिस जांच से जुड़ी जानकारी में रेहान को कथित तौर पर 35 हजार रुपये और विदेश में बसने का वादा दिए जाने की बात सामने आई है।

    फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों दावे अलग-अलग परिस्थितियों से जुड़े हैं या इनमें कोई अन्य अंतर है। पुलिस जांच में कथित भर्ती, पैसों के प्रलोभन और आरोपियों के आपसी संपर्क की भूमिका महत्वपूर्ण है।

    मां का बयान परिवार का पक्ष सामने रखता है, लेकिन इससे अपने आप यह साबित नहीं होता कि रेहान का अपहरण किया गया था या उसे फायरिंग में शामिल होने के लिए मजबूर किया गया था।

    टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग में क्या हुआ था?

    18 अक्टूबर 2026 को मुंबई के जुहू इलाके में टाइगर श्रॉफ की कार को निशाना बनाकर फायरिंग की गई थी। जहां, पांच से छह राउंड गोलियां चलाई गईं। टाइगर श्रॉफ सुरक्षित रहे, जबकि उनके ड्राइवर और एक अन्य व्यक्ति घायल हो गए।

    घटना के बाद पुलिस ने आरोपियों की पहचान करने और उनके भागने के रास्ते का पता लगाने के लिए जांच शुरू की। सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी सुराग, बाइक और यात्रा से जुड़ी जानकारी की मदद से आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश की गई।

    19 अक्टूबर को हरियाणा के रेहान और फूल सिंह तथा बिहार के ऋतिक कुमार को राजस्थान के कोटा में गिरफ्तार किया गया। आरोपियों के मुंबई से निकलकर सूरत के रास्ते कोटा पहुंचने की बात भी जांच से जुड़ी जानकारी में सामने आई। आरोपियों के पास से गिरफ्तारी के समय हथियार बरामद नहीं हुए।

    अनिल पंडित और समीर का नाम जांच में क्यों आया?

    जांच में अनिल पंडित का नाम कथित नेटवर्क से जुड़कर सामने आया है। आरोप है कि उसने युवाओं को पैसों और विदेश में बसने के वादे के जरिए अपराध में शामिल करने में भूमिका निभाई।

    20 अक्टूबर को समीर नाम के व्यक्ति की गिरफ्तारी की जानकारी भी सामने आई। आरोप है कि उसने रेहान और अन्य आरोपियों का अनिल पंडित से संपर्क कराने में भूमिका निभाई। समीर के परिवार की ओर से उसके मामले में शामिल होने से इनकार किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

    जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि आरोपियों का आपस में संपर्क कैसे हुआ, किसने उन्हें कथित काम के लिए तैयार किया और फायरिंग की योजना बनाने में किसकी क्या भूमिका थी। बिश्नोई गैंग से कथित संबंधों की भी जांच की बात सामने आई है।

    क्या टाइगर श्रॉफ ही हमलावरों का निशाना थे?

    इस मामले में एक और अहम सवाल यह है कि फायरिंग का मूल निशाना कौन था। जांच से जुड़ी एक जानकारी में दावा किया गया कि टाइगर श्रॉफ कथित तौर पर हमलावरों का मूल निशाना नहीं थे और इससे पहले किसी अन्य प्रमुख बॉलीवुड हस्ती को निशाना बनाने की योजना थी।

    इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि कथित योजना क्या थी, निशाना बदलने की वजह क्या थी और इसका फायरिंग की घटना से क्या संबंध था।

    फायरिंग के बाद बॉलीवुड हस्तियों की सुरक्षा बढ़ाई गई

    घटना के बाद मुंबई में कुछ अन्य फिल्मी हस्तियों की सुरक्षा को लेकर भी कदम उठाए जाने की जानकारी सामने आई। सलमान खान और रोहित शेट्टी के घरों के बाहर अतिरिक्त पुलिस सुरक्षा बढ़ाने और आमिर खान के आवास के आसपास गश्त तेज करने की बात सामने आई। उत्तर प्रदेश के बरेली में दिशा पटानी के परिवार के घर के आसपास भी सुरक्षा बढ़ाए जाने की जानकारी सामने आई।

    इस घटनाक्रम ने फिल्मी हस्तियों की सुरक्षा और धमकियों से निपटने की पुलिस व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, इन कदमों को अपने आप किसी दूसरे हमले की पुष्टि या पूरे शहर में सुरक्षा व्यवस्था की विफलता नहीं माना जा सकता।

    मामले में Rapido से जुड़े ऋतिक कुमार को लेकर भी कंपनी का पक्ष सामने आया है। कंपनी ने कहा कि वह 14 अक्टूबर से उसके प्लेटफॉर्म पर सक्रिय राइडर नहीं था। यह स्पष्टीकरण कंपनी की ओर से दिया गया है और इससे अपने आप आरोपी की कथित भूमिका या अपराध में शामिल होने की परिस्थितियां तय नहीं होतीं।

    अब पुलिस जांच में किन सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे?

    इस मामले में अब कथित भर्ती करने वालों की भूमिका, आरोपियों के बीच संपर्क, पैसों के लेन-देन और फायरिंग की योजना से जुड़े सवाल महत्वपूर्ण हैं। रेहान की मां के बयान की जांच के साथ यह भी स्पष्ट करना होगा कि घर से निकलने के बाद रेहान कहां-कहां गया और परिवार से उसका संपर्क क्यों टूट गया।

    आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद उनकी कानूनी स्थिति, पुलिस हिरासत, अदालत में पेशी और किसी हथियार या अन्य सबूत की बरामदगी से जुड़ी नवीनतम जानकारी भी मामले की दिशा समझने के लिए जरूरी है।

    फिलहाल, रेहान की मां का बयान इस केस में परिवार का पक्ष सामने लाता है, जबकि पुलिस जांच का मुख्य सवाल यह है कि फायरिंग की योजना किसने बनाई, आरोपियों को किसने जोड़ा और प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका क्या थी। इन सवालों का जवाब जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

  • Jio का ₹8,888 वाला एनिवर्सरी ऑफर, 4 महीने तक कैसे मिलेगी अतिरिक्त सर्विस?

    Jio का ₹8,888 वाला एनिवर्सरी ऑफर, 4 महीने तक कैसे मिलेगी अतिरिक्त सर्विस?

    Jio के ₹8,888 एनिवर्सरी प्लान में 16 महीने की वैधता, 30 Mbps स्पीड, OTT और लाइव टीवी के फायदे जानें। पात्रता, फीस और जरूरी शर्तें भी पढ़ें।

    Jio के ₹8,888 वाले एनिवर्सरी ब्रॉडबैंड ऑफर में ग्राहकों को 12 महीने के प्लान पर कुल 16 महीने की सर्विस मिल सकती है। इस ऑफर में इंटरनेट के साथ OTT प्लेटफॉर्म, लाइव टीवी चैनल और पार्टनर कूपन जैसे फायदे भी शामिल हैं। हालांकि, रिचार्ज करने से पहले यह समझना जरूरी है कि ऑफर किन ग्राहकों के लिए है और इसकी कुल कीमत में कौन-कौन से चार्ज शामिल हैं।

    इस पैक की औसत लागत 16 महीने के हिसाब से करीब ₹556 प्रति महीना बैठती है। लेकिन ₹8,888 की पूरी रकम को सिर्फ इंटरनेट का रेंटल समझना सही नहीं होगा, क्योंकि इसमें ₹5,000 के One-Time Charges (OTC) और ₹3,888 का नियमित प्लान शुल्क शामिल है।

    Jio के ₹8,888 प्लान में क्या मिलता है?

    इस एनिवर्सरी पैक की सबसे बड़ी खासियत चार महीने की अतिरिक्त वैधता है। सामान्य 12 महीने की अवधि के बजाय ग्राहकों को कुल 16 महीने की सर्विस मिलती है। प्लान के साथ 30 Mbps इंटरनेट स्पीड, वॉइस कॉलिंग और मनोरंजन से जुड़े फायदे भी बताए गए हैं।

    Jio के होम ब्रॉडबैंड ऑफर में Amazon Prime Lite, JioHotstar, SonyLIV, ZEE5, Sun NXT, Hoichoi, Discovery+ और दूसरे OTT प्लेटफॉर्म शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा, 1,000 से ज्यादा लाइव टीवी चैनलों का एक्सेस भी दिया जाता है। हालांकि, रिचार्ज करने से पहले अपने प्लान में शामिल OTT ऐप्स और उनकी सदस्यता की मौजूदा सूची जरूर चेक करें।

    30 Mbps की स्पीड सामान्य ब्राउज़िंग, सोशल मीडिया और वीडियो देखने जैसे कामों के लिए ठीक हो सकती है। लेकिन घर में कई लोग एक साथ वीडियो स्ट्रीमिंग, वीडियो कॉल और बड़े डाउनलोड करते हैं, तो ज्यादा स्पीड वाला प्लान देखना बेहतर रहेगा।

    ₹8,888 की कीमत का पूरा हिसाब समझें

    इस पैक की कुल कीमत को समझने के लिए उसके अलग-अलग चार्ज पर ध्यान देना जरूरी है।

    शुल्क का प्रकाररकम
    One-Time Charges (OTC)₹5,000
    नियमित प्लान शुल्क₹3,888
    कुल पैकेज कीमत₹8,888
    16 महीने की औसत लागत₹555.50 प्रति महीना

    इस हिसाब से पूरे पैकेज की औसत मासिक लागत करीब ₹556 है। यह गणना 16 महीने की कुल अवधि पर आधारित है। इसे सिर्फ मासिक इंटरनेट रेंटल नहीं समझना चाहिए, क्योंकि पैकेज में एकमुश्त शुल्क और दूसरी सुविधाएं भी शामिल हैं।

    टैक्स और बिलिंग की शर्तों को लेकर भुगतान से पहले MyJio ऐप में दिखाई गई अंतिम राशि और इनवॉइस चेक करना जरूरी है।

    क्या नए ग्राहक भी इस ऑफर का फायदा ले सकते हैं?

    यह सबसे जरूरी सवाल है। उपलब्ध आधिकारिक नियमों के मुताबिक, यह ऑफर सक्रिय JioFiber या JioAirFiber कनेक्शन का रिन्यूअल करने वाले व्यक्तिगत ग्राहकों के लिए है। इसलिए इसे हर नए ग्राहक के लिए उपलब्ध ऑफर मानना सही नहीं होगा।

    ऑफर का फायदा मिलने के लिए कनेक्शन की तकनीकी उपलब्धता, नेटवर्क कवरेज और अनुकूल उपकरण जैसी शर्तें लागू हो सकती हैं। रिचार्ज करने से पहले MyJio में अपने कनेक्शन की पात्रता चेक करें।

    एक और बात ध्यान रखने वाली है कि लंबी अवधि के लिए भुगतान करने के बाद एडवांस रेंटल को नकद वापस लेना या दूसरे खाते में ट्रांसफर करना आसान नहीं है। इसलिए ऑफर की शर्तें पढ़कर ही भुगतान करें।

    फ्री रिलॉकेशन और पार्टनर कूपन का भी फायदा

    इस पैक में एक बार मुफ्त कनेक्शन शिफ्ट करने के लिए ₹1,200 मूल्य का रिलॉकेशन वाउचर और ₹1,200 मूल्य की प्राथमिकता वाली कस्टमर केयर सुविधा शामिल है। हालांकि, नई जगह पर नेटवर्क उपलब्ध होना जरूरी है। अतिरिक्त सिविल वर्क या तय सीमा से ज्यादा फाइबर की जरूरत होने पर अलग चार्ज लग सकते हैं।

    इसके अलावा AbhiBus, EaseMyTrip, District, ZoomIn, Neeman’s और AJIO जैसे पार्टनर के कूपन भी शामिल हैं। इनकी कुल घोषित कीमत ₹4,459 है। लेकिन इसे सीधे नकद बचत नहीं माना जा सकता, क्योंकि हर कूपन की अपनी शर्तें हो सकती हैं।

    कूपन रिचार्ज सफल होने के 48 से 72 घंटे के भीतर MyJio ऐप में मिल सकते हैं। उनकी वैधता और इस्तेमाल की शर्तें अलग-अलग हो सकती हैं। अगर ग्राहक संबंधित सेवाओं का इस्तेमाल नहीं करता, तो इन कूपन की पूरी घोषित कीमत का फायदा मिलना जरूरी नहीं है।

    JioFiber और JioAirFiber में क्या अंतर है?

    JioFiber वायर्ड फाइबर कनेक्शन है, जबकि JioAirFiber वायरलेस 5G आधारित होम इंटरनेट सेवा है। दोनों की उपलब्धता और नेटवर्क की स्थिति इलाके के हिसाब से अलग हो सकती है।

    डेटा सीमा को लेकर भी सावधानी जरूरी है। उपलब्ध प्लान विवरणों में JioAirFiber के लिए 1,000 GB और वायर्ड JioFiber के लिए 3,300 GB मासिक सीमा बताई गई है। लेकिन रिचार्ज करने से पहले यह पुष्टि करें कि ये सीमाएं आपके चुने हुए एनिवर्सरी पैक पर लागू हैं या नहीं।

    Jio के दिए गए राउटर, सेट-टॉप बॉक्स और दूसरे उपकरण भी कंपनी की संपत्ति रहते हैं। कनेक्शन बंद करने पर इन्हें वापस करना पड़ सकता है, इसलिए इन्हें अपनी निजी संपत्ति समझकर नहीं रखना चाहिए।

    ₹10,000 वाला Jio पैक भी एक विकल्प

    जिन ग्राहकों को ज्यादा स्पीड चाहिए, वे ₹10,000 वाले ब्रॉडबैंड फ्रीडम पैक को भी देख सकते हैं। उपलब्ध जानकारी में इस पैक के साथ 15 महीने की वैधता और 100 Mbps तक की स्पीड बताई गई है।

    दोनों पैक में कीमत, सेवा अवधि और सुविधाओं का अंतर है। ₹8,888 वाले पैक की औसत लागत करीब ₹556 प्रति महीना बैठती है, जबकि ₹10,000 वाले पैक की 15 महीने की अवधि के हिसाब से औसत लागत करीब ₹667 प्रति महीना है। ये पूरे पैकेज की औसत लागत हैं, सिर्फ इंटरनेट रेंटल नहीं।

    अगर आपकी जरूरत सामान्य इंटरनेट इस्तेमाल तक सीमित है, तो कम कीमत वाला पैक पर्याप्त हो सकता है। वहीं, ज्यादा स्पीड और भारी इंटरनेट इस्तेमाल के लिए दूसरे विकल्प पर विचार किया जा सकता है। सही चुनाव आपके इलाके की कनेक्टिविटी, वास्तविक जरूरत और प्लान की शर्तों पर निर्भर करेगा।

    रिचार्ज से पहले ये बातें जरूर चेक करें

    Jio के ₹8,888 वाले ऑफर का फायदा लेने से पहले MyJio ऐप में अपनी पात्रता, अंतिम देय राशि, कनेक्शन का प्रकार, डेटा सीमा और OTT की मौजूदा सूची चेक करें। साथ ही, पार्टनर कूपन की वैधता और इस्तेमाल की शर्तें भी पढ़ लें।

    ऑफर की उपलब्धता नेटवर्क कवरेज और तकनीकी व्यवहार्यता पर निर्भर है। इसलिए भुगतान करने से पहले अपने कनेक्शन पर लागू शर्तों की पुष्टि करना बेहतर रहेगा।

  • तमिलनाडु में पानी का संकट: चेन्नई के लिए कृष्णा नदी का पानी मांगेंगे विजय, नायडू से अहम मुलाकात

    तमिलनाडु में पानी का संकट: चेन्नई के लिए कृष्णा नदी का पानी मांगेंगे विजय, नायडू से अहम मुलाकात

    तमिलनाडु में पानी का संकट बढ़ने के बीच मुख्यमंत्री विजय की चंद्रबाबू नायडू से मुलाकात अहम है। चेन्नई के लिए कृष्णा नदी के पानी और जल बंटवारे पर नजरें।

    चेन्नई: तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई के लिए कृष्णा नदी से मिलने वाले पानी की कमी अब अंतरराज्यीय स्तर पर बड़ा मुद्दा बन गई है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय मंगलवार, 13 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू से विजयवाड़ा में मुलाकात करने पहुंचे हैं। इस बातचीत का मुख्य एजेंडा चेन्नई के लिए कृष्णा नदी के पानी की आपूर्ति बढ़ाना और दक्षिण भारत की नदियों को जोड़ने की प्रस्तावित योजना पर चर्चा करना है।

    सबसे अहम बात यह है कि तेलुगु गंगा योजना के तहत तमिलनाडु को हर साल 12 हजार मिलियन घन फुट पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था है, लेकिन 9 अक्टूबर तक राज्य को केवल 2.251 हजार मिलियन घन फुट पानी ही मिला था। ऐसे में विजय की यह बैठक चेन्नई की पेयजल जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    तय मात्रा का करीब 19 प्रतिशत पानी ही मिला

    तेलुगु गंगा योजना के तहत आंध्र प्रदेश से तमिलनाडु की सीमा तक कृष्णा नदी का पानी पहुंचाया जाता है। इसका एक अहम उद्देश्य चेन्नई की पेयजल जरूरतों को पूरा करना है। दोनों राज्यों के बीच वर्ष 1983 में हुए समझौते से इस व्यवस्था की नींव पड़ी थी।

    निर्धारित सालाना मात्रा 12 हजार मिलियन घन फुट है। इसमें जुलाई से अक्टूबर के बीच 8 हजार मिलियन घन फुट और जनवरी से अप्रैल के बीच 4 हजार मिलियन घन फुट पानी देने की व्यवस्था बताई गई है।

    लेकिन इस साल 9 अक्टूबर तक तमिलनाडु को केवल 2.251 हजार मिलियन घन फुट पानी मिला। यानी तय सालाना मात्रा का करीब 18.8 प्रतिशत। इस आंकड़े से पानी की आपूर्ति में बड़ी कमी का अंदाजा लगाया जा सकता है। हालांकि, यह 9 अक्टूबर तक का आंकड़ा है, पूरे साल का अंतिम हिसाब नहीं।

    जलाशयों में कम भंडारण भी बड़ी वजह

    कृष्णा नदी के पानी की आपूर्ति पर जलाशयों में उपलब्ध पानी का सीधा असर पड़ता है। श्रीशैलम, सोमशिला और कंडालेरू जैसे जलाशयों में कम भंडारण होने से पानी छोड़ने की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

    आंध्र प्रदेश को अपनी सिंचाई और पेयजल जरूरतों का भी ध्यान रखना पड़ता है। ऐसे में दोनों राज्यों के सामने चुनौती यह है कि उपलब्ध पानी का प्रबंधन करते हुए चेन्नई की जरूरतों को कैसे पूरा किया जाए।

    तमिलनाडु के मुख्यमंत्री की बैठक में इसी कमी को दूर करने और पानी की आपूर्ति तेज करने का मुद्दा प्रमुख रहने की उम्मीद है। हालांकि, बैठक के बाद अतिरिक्त पानी छोड़ने या किसी नई समय-सारणी पर सहमति बनने की आधिकारिक पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है।

    गोदावरी-कृष्णा-कावेरी नदी जोड़ने पर भी चर्चा

    विजय और नायडू की बातचीत का दूसरा प्रमुख विषय गोदावरी, कृष्णा और कावेरी नदियों को जोड़ने की प्रस्तावित योजना है। इस परियोजना के जरिए अतिरिक्त पानी को जरूरत वाले क्षेत्रों तक पहुंचाने की संभावना पर काम किया जा रहा है।

    प्रस्तावित योजना में गोदावरी नदी से लगभग 41 हजार मिलियन घन फुट पानी अंतरराज्यीय सीमा तक पहुंचाने की बात सामने आई है। राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण ने वर्ष 2023 में इस परियोजना की विस्तृत योजना में संशोधन किया था। तमिलनाडु ने कत्तलाई बैराज के पास मणिमुक्तनदी क्षेत्र के नजदीक नहर को अधिक ऊंचाई वाले स्तर तक ले जाने का अनुरोध किया था।

    हालांकि, नदी जोड़ने की योजना एक लंबी प्रक्रिया है। इसके लिए पानी की उपलब्धता, निर्माण लागत, पर्यावरणीय प्रभाव और संबंधित राज्यों की सहमति जैसे पहलुओं पर विचार करना जरूरी है।

    पवन कल्याण और अनंतन भी चर्चा से जुड़े

    विजयवाड़ा दौरे के कार्यक्रम में आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण से मुलाकात भी शामिल थी। तमिलनाडु के जल संसाधन मंत्री अनंतन के भी जल संबंधी बातचीत में शामिल होने की संभावना बताई गई थी।

    पर्यावरण कार्यकर्ता जी. सुंदरराजन ने भी मुख्यमंत्री विजय से आग्रह किया था कि वह आंध्र प्रदेश से कंडालेरू जलाशय से पानी तुरंत छोड़ने और तेलुगु गंगा योजना के लिए श्रीशैलम से पानी उपलब्ध कराने का अनुरोध करें। उन्होंने चेन्नई की मौजूदा पेयजल जरूरतों, पूंडी सहित प्रमुख जलाशयों में पानी के स्तर और इस साल मिली कृष्णा नदी की जल मात्रा से जुड़े आंकड़े बातचीत में रखने की सलाह दी थी।

    इससे स्पष्ट है कि मामला केवल निर्धारित पानी की मात्रा तक सीमित नहीं है। उपलब्ध जल भंडारण, भविष्य की जरूरतों और दोनों राज्यों के बीच समन्वय पर भी ध्यान देना होगा।

    कनक दुर्गा मंदिर और विजयवाड़ा उत्सव का कार्यक्रम

    मुख्यमंत्री विजय के दौरे में प्रशासनिक बातचीत के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी शामिल हैं। उनके प्रसिद्ध कनक दुर्गा मंदिर में दर्शन करने और विजयवाड़ा उत्सव के दूसरे संस्करण में शामिल होने का कार्यक्रम है।

    विजयवाड़ा उत्सव 11 से 20 अक्टूबर तक आयोजित किया जा रहा है। इसका आयोजन कृष्णा नदी के किनारे पुन्नमी घाट क्षेत्र में किया गया है। कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और विभिन्न गतिविधियों के जरिए शहर की कला और परंपराओं को सामने लाने पर जोर दिया गया है।

    विजय की यात्रा को दोनों राज्यों के बीच राजनीतिक और प्रशासनिक संपर्क के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री बनने के बाद आंध्र प्रदेश का यह उनका पहला दौरा है।

    अब चेन्नई को कितनी राहत मिलेगी?

    फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस बातचीत के बाद चेन्नई के लिए कृष्णा नदी के पानी की आपूर्ति में कितनी तेजी आएगी। तमिलनाडु के सामने तय मात्रा के मुकाबले बड़ी कमी है, जबकि आंध्र प्रदेश को अपने जलाशयों की स्थिति और घरेलू जरूरतों का भी संतुलन बनाना है।

    दोनों राज्यों के बीच किसी ठोस सहमति, अतिरिक्त पानी छोड़ने के आदेश या नई आपूर्ति समय-सारणी की आधिकारिक पुष्टि सामने आने पर ही यह स्पष्ट होगा कि चेन्नई को तत्काल कितनी राहत मिल सकती है। तब तक इस बैठक का महत्व पानी की कमी पर बातचीत और आगे के समाधान की संभावनाओं तक सीमित है।

  • Jantar Mantar : प्रदर्शन की अनुमति रद्द होने के बाद CJP ने दिल्ली पुलिस को दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम

    Jantar Mantar : प्रदर्शन की अनुमति रद्द होने के बाद CJP ने दिल्ली पुलिस को दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम

    जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति के लिए CJP ने दिल्ली पुलिस को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया। जानें मांगें, हाई कोर्ट की सुनवाई और आगे की कार्रवाई।

    नई दिल्ली: 12 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रंका ने दिल्ली पुलिस से जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए तारीख और समय तय करने की मांग की। पार्टी ने पुलिस को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि जवाब नहीं मिलने पर वह खुद प्रदर्शन की नई तारीख घोषित करेगी।

    CJP की यह मांग ऐसे समय आई है, जब दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाकर रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और CBD ग्राउंड को नए स्थल घोषित किया है। अब विवाद का अगला चरण प्रदर्शन की अनुमति, पुलिस के जवाब और अदालत में चल रही कानूनी चुनौती से जुड़ गया है।

    CJP ने पुलिस से क्या मांग की?

    CJP के सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रंका 12 अक्टूबर को संसद मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचे और पुलिस उपायुक्त (DCP) को पत्र सौंपा। पार्टी ने जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति मांगी और तारीख तथा समय तय करने का अधिकार पुलिस को देने की पेशकश की।

    सौरव दास ने कहा कि पुलिस आम तौर पर प्रदर्शन से कम-से-कम 10 दिन पहले आवेदन देने की बात करती है। इसी आपत्ति को दूर करने के लिए पार्टी ने पुलिस से अपनी सुविधा के अनुसार तारीख तय करने को कहा। CJP ने पत्र पर 24 घंटे के भीतर जवाब मांगा।

    पार्टी ने यह भी मांग की कि राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर की जा रही भारी तैनाती कम की जाए। CJP ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ दिनों की सुरक्षा व्यवस्था से आम लोगों और कारोबारियों को परेशानी हुई। पार्टी ने हिरासत में लिए गए लोगों और पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार का मुद्दा भी उठाया।

    पुलिस ने पहले अनुमति क्यों नहीं दी थी?

    दिल्ली पुलिस ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। पुलिस और केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से कानून-व्यवस्था, यातायात और पहले के आयोजनों में नियमों के पालन से संबंधित चिंताएं जताई गई थीं।

    यही इस विवाद का महत्वपूर्ण पहलू है। CJP का कहना है कि वह शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए तैयार है और पुलिस अपनी सुविधा के अनुसार तारीख तय कर सकती है। दूसरी ओर, पुलिस की पहले की कार्रवाई में सुरक्षा व्यवस्था और प्रक्रियात्मक नियमों का हवाला दिया गया था।

    अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस नए पत्र पर क्या जवाब देती है और क्या प्रदर्शन के लिए कोई तारीख या शर्तें तय की जाती हैं।

    दिल्ली हाई कोर्ट में भी पहुंचा मामला

    12 अक्टूबर को दिल्ली हाई कोर्ट ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने और वैकल्पिक स्थल की उपलब्धता से जुड़े एक मामले में तत्काल सुनवाई की मांग स्वीकार नहीं की। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन सांब्रे ने मामले को 13 अक्टूबर को उठाने की बात कही।

    भारतीय युवा कांग्रेस की प्रदर्शन अनुमति से जुड़ी याचिका भी अलग कानूनी मामला है। दोनों याचिकाओं को एक ही मामला समझना उचित नहीं होगा।

    प्रदर्शन किस मुद्दे पर करना चाहता है CJP?

    CJP मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision यानी SIR) को लेकर विरोध कर रही है। पार्टी ने चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाए हैं।

    इस विवाद में एक तरफ प्रदर्शनकारियों की शांतिपूर्ण सभा की मांग है, तो दूसरी तरफ प्रशासन की कानून-व्यवस्था और अनुमति प्रक्रिया से जुड़ी दलीलें हैं। इन दोनों पक्षों की स्थिति समझने के लिए पुलिस का नया जवाब और अदालत की कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी।

    फिलहाल सबसे अहम सवाल यही है कि क्या दिल्ली पुलिस 24 घंटे की समयसीमा के भीतर CJP को जवाब देती है और क्या जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए कोई नई तारीख तय होती है। साथ ही, संबंधित अदालत की सुनवाई से यह स्पष्ट हो सकेगा कि निर्धारित प्रदर्शन स्थल और वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर कानूनी स्थिति आगे किस दिशा में बढ़ती है।

  • Nepal Flash Floods: गोरखा में घर-पुल बहे, 5 लोग लापता; बिहार पर बाढ़ का खतरा?

    Nepal Flash Floods: गोरखा में घर-पुल बहे, 5 लोग लापता; बिहार पर बाढ़ का खतरा?

    Nepal Flash Floods: गोरखा में अचानक बाढ़ से घर, पुल और हाइड्रोपावर निर्माण स्थल प्रभावित हुए। पांच लोग लापता, जानें बचाव अभियान और भारत पर असर।

    नेपाल: गोरखा जिले में 11 अक्टूबर को बुढी गंडकी नदी में अचानक आई फ्लैश फ्लड से कई घर बह गए, पुल क्षतिग्रस्त हुए और जलविद्युत परियोजना का निर्माण स्थल प्रभावित हुआ। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, पांच लोग लापता हैं और बचाव अभियान में नेपाल सेना, पुलिस तथा सशस्त्र पुलिस बल के सैकड़ों जवानों को लगाया गया। इस घटना के बाद भारत के सीमावर्ती इलाकों में भी नदी के जलस्तर पर नजर रखी गई, हालांकि बिहार के जल संसाधन विभाग ने बड़े खतरे की संभावना कम बताई।

    गोरखा जिले के चुमनुब्री और धार्चे ग्रामीण नगरपालिका क्षेत्रों में बाढ़ का सबसे ज्यादा असर सामने आया। स्थानीय बस्तियों में घर बहने, पैदल आवाजाही वाले पुल टूटने और सड़क संपर्क प्रभावित होने की जानकारी मिली है। शुरुआती आकलन में लगभग 35 से 40 घर बहने की आशंका जताई गई, लेकिन नुकसान का अंतिम आंकड़ा अभी स्पष्ट नहीं है।

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    भूस्खलन से नदी का रास्ता रुकने की आशंका

    बाढ़ की वजह को लेकर शुरुआती वैज्ञानिक आकलन में भूस्खलन की भूमिका सामने आई है। चुमचेत के आसपास पहाड़ी मलबे के कारण नदी का बहाव बाधित होने और पानी जमा होने के बाद अचानक अवरोध टूटने की आशंका जताई गई। इसके चलते पानी और मलबा तेजी से नीचे की ओर बढ़ा।

    इस घटना को लेकर एक अहम सवाल यह है कि आसपास के इलाकों में भारी बारिश दर्ज नहीं होने के बावजूद नदी में अचानक इतना तेज बहाव कैसे आया। शुरुआती जानकारी में उपग्रह तस्वीरों के जरिए भूस्खलन के संकेत मिलने की बात सामने आई है। हालांकि, बाढ़ के सटीक कारण की अंतिम पुष्टि अभी बाकी है। इसे बादल फटने या ग्लेशियर टूटने का निश्चित नतीजा बताने के लिए पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।

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    बचाव अभियान में 437 सुरक्षाकर्मी तैनात

    बाढ़ के बाद नेपाल सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के कुल 437 कर्मियों को राहत एवं बचाव अभियान में लगाया गया। अभियान के लिए चार सैन्य हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया गया। शुरुआती जानकारी के अनुसार, 47 लोगों को हेलीकॉप्टर के जरिए सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया।

    बाढ़ की सूचना मिलने के बाद अधिकारियों ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को SMS अलर्ट भेजे और सुरक्षित जगहों पर जाने की सलाह दी। सुबह करीब 6:20 बजे बाढ़ की सूचना मिलने के बाद लगभग 20 मिनट के भीतर चेतावनी जारी किए जाने की जानकारी सामने आई। समय पर अलर्ट मिलने से लोगों को ऊंचे स्थानों पर जाने का मौका मिला।

    हालांकि, बाढ़ में लापता लोगों की तलाश और नुकसान का आकलन चुनौती बना हुआ है। दुर्गम पहाड़ी इलाकों में सड़क और पुल क्षतिग्रस्त होने से राहत टीमों की आवाजाही भी मुश्किल हो सकती है।

    घर, पुल और जलविद्युत निर्माण स्थल प्रभावित

    चुमनुब्री और धार्चे के कई इलाकों में घर बहने या उनमें पानी घुसने की जानकारी मिली। सल्लीरी, पायुन और जगत बगर जैसे स्थानों में नुकसान की खबरें सामने आईं। न्याकचेत-सिरदिबास और माछीखोला-केरौजा के बीच पैदल आवाजाही वाले पुल भी बाढ़ में बह गए। गोरखा और धादिंग जिलों के बीच संपर्क के लिए इस्तेमाल होने वाले एक मोटर योग्य पुल को भी नुकसान पहुंचा।

    बाढ़ का असर जलविद्युत परियोजना के निर्माण स्थल पर भी पड़ा। लगभग 341 मेगावाट की परियोजना के निर्माण शिविर और कुछ उपकरण बहने की जानकारी मिली है। चूंकि परियोजना निर्माणाधीन थी, इसलिए फिलहाल इसे बिजली उत्पादन बंद होने की घटना कहना सही नहीं होगा। वास्तविक आर्थिक नुकसान और निर्माण कार्य दोबारा शुरू होने की समयसीमा का आकलन अभी बाकी है।

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    राहत के लिए ड्रोन और सैटेलाइट की मदद

    दुर्गम इलाकों में नुकसान का पता लगाने के लिए LiDAR ड्रोन और सैटेलाइट इमेजरी की मदद ली गई। संयुक्त राष्ट्र की नेपाल टीम ने प्रभावित क्षेत्रों के आकलन के लिए UNOSAT के साथ समन्वय किया। विश्व खाद्य कार्यक्रम ने राहत सामग्री पहुंचाने के लिए तीन ट्रक उपलब्ध कराए और प्रभावित परिवारों के लिए हाई-एनर्जी बिस्कुट भेजने की व्यवस्था की।

    आगे की चुनौती सिर्फ लोगों को सुरक्षित निकालने की नहीं है। प्रभावित परिवारों को पीने का पानी, भोजन, स्वास्थ्य सेवाएं और रहने की जगह उपलब्ध कराना भी जरूरी होगा। गांवों में सड़क संपर्क बहाल होने तक राहत सामग्री पहुंचाने में परेशानी आ सकती है।

    बिहार और उत्तर प्रदेश पर कितना खतरा?

    नेपाल में बाढ़ के बाद भारत में गंडक नदी के जलस्तर को लेकर निगरानी बढ़ाई गई। केंद्रीय जल आयोग की ओर से गंडक बेसिन में संभावित जलस्तर वृद्धि को देखते हुए सतर्कता बरतने की जरूरत बताई गई थी।

    हालांकि, 11 अक्टूबर को बिहार के जल संसाधन विभाग ने कहा कि इस बाढ़ से राज्य में बड़े खतरे की संभावना कम है। विभाग के आकलन के मुताबिक, वाल्मीकिनगर बैराज तक पहुंचने के दौरान बाढ़ की लहर का असर कम हो सकता है। बैराज से लगभग 50,000 क्यूसेक से बढ़कर 75,000 क्यूसेक तक पानी छोड़े जाने का अनुमान बताया गया था, जिसे सामान्य सीमा में माना गया।

    इसका मतलब यह नहीं है कि बिहार और उत्तर प्रदेश की सभी नदियों में बाढ़ का खतरा खत्म हो गया है। अलग-अलग नदी बेसिनों में जलस्तर की स्थिति अलग हो सकती है। इसलिए किसी जिले को सुरक्षित या खतरे में बताने से पहले संबंधित प्रशासन की ताजा चेतावनी देखना जरूरी है।

    अगस्त की विनाशकारी बाढ़ से अलग है अक्टूबर की घटना

    नेपाल में 26 अगस्त को आई बड़ी बाढ़ और अक्टूबर की बुढी गंडकी फ्लैश फ्लड को अलग-अलग घटनाओं के रूप में समझना जरूरी है। अगस्त की आपदा के बाद 5 अक्टूबर को सक्रिय खोज एवं बचाव अभियान समाप्त करने और पुनर्वास पर ध्यान देने की घोषणा की गई थी।

    उस आपदा में कम-से-कम 1,455 लोगों की मौत और 5,285 लोगों के लापता होने की जानकारी दी गई थी। करीब 13,795 लोगों को बचाया गया था। नेपाल ने शुरुआती पुनर्बहाली और पुनर्वास के लिए लगभग 5 अरब डॉलर की जरूरत बताई थी।

    अगस्त की बाढ़ का असर सड़क, परिवहन, पर्यटन, कृषि और जलविद्युत क्षेत्र पर पड़ा था। विश्व बैंक के आकलन में 12 जलविद्युत परियोजनाओं के प्रभावित होने का उल्लेख किया गया था। इन आंकड़ों का संबंध अगस्त की आपदा से है, अक्टूबर में आई नई बाढ़ से नहीं।

    फिलहाल क्या है स्थिति?

    11 अक्टूबर की बाढ़ के बाद गोरखा के प्रभावित इलाकों में लापता लोगों की तलाश, नुकसान का आकलन और राहत पहुंचाने का काम प्राथमिकता में है। पांच लोगों के लापता होने और लगभग 35 से 40 घर बहने के आंकड़े शुरुआती जानकारी पर आधारित हैं। अलग-अलग आकलनों में घरों की संख्या का अंतर होने के कारण अंतिम नुकसान का आंकड़ा स्पष्ट होना बाकी है।

    आने वाले समय में सबसे अहम जानकारी यह होगी कि लापता लोगों का पता चला या नहीं, प्रभावित गांवों में सड़क और पुल संपर्क कब बहाल होता है, जलविद्युत निर्माण स्थल को कितना नुकसान हुआ और निचले नदी क्षेत्रों में जलस्तर की स्थिति कैसी रहती है। भारत में भी गंडक नदी और संबंधित जलग्रहण क्षेत्रों की निगरानी महत्वपूर्ण बनी हुई है।

  • इमरान खान घर लौटे, तुषार गांधी भी रिहा; मुंबई में CJP प्रदर्शन पर 600 तक हिरासत

    इमरान खान घर लौटे, तुषार गांधी भी रिहा; मुंबई में CJP प्रदर्शन पर 600 तक हिरासत

    इमरान खान और तुषार गांधी की हिरासत के बाद क्या हुआ? मुंबई में CJP प्रदर्शन, पुलिस की कार्रवाई, रिहाई, SIR विवाद और किरीट सोमैया की मांग की पूरी जानकारी।

    मुंबई: 10 अक्टूबर को मुंबई में CJP के प्रदर्शन के दौरान अभिनेता इमरान खान और सामाजिक कार्यकर्ता तुषार गांधी समेत कई लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया। अब इमरान खान के घर लौटने और तुषार गांधी की रिहाई की जानकारी सामने आई है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए इस प्रदर्शन में पुलिस की कार्रवाई और हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या पर भी सवाल उठे हैं।

    इमरान खान, लेखा वॉशिंगटन और जायन मैरी खान भी हिरासत में

    अभिनेता इमरान खान मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में CJP के समर्थन में आयोजित प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे थे। उनके साथ उनकी साथी लेखा वॉशिंगटन और कजिन जायन मैरी खान भी थीं। पुलिस ने तीनों को हिरासत में लिया।

    इमरान खान ने सोशल मीडिया पर पुलिस वाहन के अंदर से तस्वीर साझा करते हुए कहा कि वह किसी राजनीतिक संगठन की ओर से नहीं, बल्कि एक नागरिक के तौर पर वहां पहुंचे थे। उन्होंने लोगों की आवाज दबाए जाने और स्वतंत्र रूप से अपनी बात रखने के अधिकार पर सवाल उठाए।

    बाद में इमरान खान घर लौट गए। लेखा वॉशिंगटन ने सोशल मीडिया पर बताया कि हिरासत से छोड़े जाने के बाद उन्हें वाहन बुक करने में परेशानी हुई और वे पैदल घर की ओर जा रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि सभी सुरक्षित हैं।

    तुषार गांधी को करीब आठ घंटे बाद छोड़ा गया

    महात्मा गांधी के पड़पोते और Hum Bharat Ke Log के अध्यक्ष तुषार गांधी को अगस्त क्रांति मैदान पर प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने जाते समय बांद्रा इलाके में हिरासत में लिया गया था। उन्हें DN Nagar पुलिस स्टेशन ले जाया गया। बाद में उन्हें बोरीवली पुलिस स्टेशन ले जाने की भी जानकारी सामने आई।

    तुषार गांधी की रिहाई की मांग को लेकर शिवसेना (UBT) के नेता आदित्य ठाकरे और संजय राउत पुलिस स्टेशन पहुंचे। तुषार गांधी को लगभग आठ घंटे हिरासत में रखने के बाद छोड़ दिया गया।

    इस कार्रवाई में तुषार गांधी की पोती कस्तूरी गांधी और शिवसेना (UBT) विधायक वरुण सरदेसाई समेत अन्य लोगों के हिरासत में लिए जाने की भी जानकारी सामने आई। प्रदर्शन से जुड़े लोगों में Feeroz Mithiborwala का नाम भी शामिल है।

    मुंबई में कितने लोग हिरासत में लिए गए?

    मुंबई में हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। अगस्त क्रांति मैदान के आसपास की कार्रवाई के लिए लगभग 200 लोगों का आंकड़ा बताया गया, जबकि शहर के दूसरे इलाकों की कार्रवाई को जोड़ने वाली खबरों में 400 से अधिक और लगभग 600 लोगों तक हिरासत की संख्या बताई गई।

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    अगस्त क्रांति मैदान के आसपास 500 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती और तीन स्तर की बैरिकेडिंग लगाई गई थी। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को मैदान तक पहुंचने से रोकने के लिए इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की और कई लोगों को पुलिस वाहनों से अलग-अलग पुलिस स्टेशनों पर ले जाया गया।

    प्रदर्शन क्यों बुलाया गया था?

    CJP यानी Cockroach Janata Party ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन बुलाया था। मुंबई में तुषार गांधी ने इसके समर्थन में अगस्त क्रांति मैदान पर दोपहर 3:30 बजे सभा आयोजित करने की अपील की थी।

    प्रदर्शन का प्रमुख मुद्दा मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR था। विपक्ष और प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने से पात्र मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। निर्वाचन आयोग का पक्ष है कि सूची का सत्यापन गलत, मृत या स्थान बदल चुके मतदाताओं की प्रविष्टियों को हटाने के लिए किया जाता है। मतदाता सूची में बदलाव को अपने आप चुनावी धांधली का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

    इस विवाद का असर केवल राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं है। यदि किसी पात्र मतदाता का नाम गलती से हट जाता है, तो उसके मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है। इसलिए मतदाताओं को अपनी प्रविष्टि निर्वाचन आयोग के आधिकारिक पोर्टल पर जांचनी चाहिए और किसी त्रुटि की स्थिति में निर्धारित सुधार प्रक्रिया अपनानी चाहिए।

    पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति क्यों नहीं दी?

    मुंबई पुलिस का कहना था कि अगस्त क्रांति मैदान पर प्रस्तावित सभा को अनुमति नहीं दी गई थी। पुलिस ने मैदान के भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधीन होने और वहां प्रदर्शन को लेकर न्यायालय के प्रतिबंधों का हवाला दिया।

    आयोजक पक्ष की ओर से अनुमति के लिए संपर्क किए जाने की बात भी सामने आई। इस मामले में यह स्पष्ट करने के लिए कि आवेदन कब और किस माध्यम से दिया गया था, उसका जवाब मिला या नहीं और संबंधित न्यायालय का आदेश इस आयोजन पर किस तरह लागू होता है, मूल दस्तावेजों की जांच जरूरी है।

    किरीट सोमैया ने इमरान खान के मामले में जांच की मांग की

    भाजपा नेता किरीट सोमैया ने इमरान खान की प्रदर्शन में भागीदारी को लेकर मुंबई पुलिस से जांच की मांग की। उन्होंने खान की कथित विदेशी नागरिकता और राजनीतिक प्रदर्शन में शामिल होने के लिए जरूरी अनुमति के संबंध में सवाल उठाए।

    यह सोमैया की ओर से उठाई गई मांग है, किसी कानूनी उल्लंघन का प्रमाण नहीं। इमरान खान की नागरिकता और इस मामले में किसी नियम के उल्लंघन के बारे में निष्कर्ष निकालने से पहले संबंधित दस्तावेजों और पुलिस की आधिकारिक जांच की जानकारी जरूरी है।

    दिल्ली में भी CJP नेताओं को हिरासत में लिया गया

    मुंबई की कार्रवाई के साथ दिल्ली में भी CJP के प्रदर्शन को रोकने के लिए पुलिस ने व्यापक कार्रवाई की। संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके को दिल्ली हवाई अड्डे पर हिरासत में लिया गया। संगठन के वरिष्ठ सदस्य सौरव दास और आशुतोष रंका को भी हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई।

    दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया। इस कार्रवाई को लेकर विपक्ष और नागरिक स्वतंत्रता से जुड़े समूहों ने सवाल उठाए, जबकि प्रशासन ने कानून-व्यवस्था और प्रतिबंधों का हवाला दिया।

  • Delhi CJP Protest: अभिजीत दिपके हिरासत में, सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से बढ़ा विवाद

    Delhi CJP Protest: अभिजीत दिपके हिरासत में, सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से बढ़ा विवाद

    दिल्ली में CJP प्रदर्शन, अभिजीत दिपके की हिरासत, SIR विवाद, मेट्रो-रेल प्रतिबंध और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से जुड़े अहम अपडेट जानें।

    नई दिल्ली: दिल्ली में CJP के प्रदर्शन को लेकर 10 अक्टूबर को सुरक्षा व्यवस्था, प्रदर्शनकारियों की हिरासत और रेल-मेट्रो प्रतिबंधों पर विवाद गहरा गया। Cockroach Janta Party (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके को दिल्ली पहुंचने के बाद हिरासत में ले लिया गया है। वहीं, परिवहन सेवाओं पर पाबंदियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और अवमानना याचिका दायर किए जाने से मामला और गंभीर हो गया है।

    यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और Special Intensive Revision (SIR) यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के विरोध में आयोजित किया गया था। दिपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर प्रदर्शनकारियों को रोकने का आरोप लगाया है।

    दिल्ली पहुंचते ही अभिजीत दिपके हिरासत में

    अभिजीत दिपके के साथ CJP से जुड़े सौरव दास और आशुतोष रांका को भी दिल्ली में हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई है। दिपके ने दिल्ली रवाना होने से पहले आरोप लगाया था कि सरकार युवाओं के प्रदर्शन से डर रही है और लोगों को राजधानी पहुंचने से रोकने के लिए कदम उठा रही है।

    उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तानाशाह बताते हुए कहा कि सरकार अपने ही नागरिकों के खिलाफ युद्ध जैसी स्थिति बना रही है। दिपके ने दिल्ली में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती पर सवाल उठाए। उन्होंने यह भी दावा किया कि दूसरे शहरों से दिल्ली आने वाले लोगों को ट्रेनों में रोका जा रहा है।

    दिपके ने कहा था, कि यदि पुलिस उन्हें हिरासत में लेती है या गिरफ्तार करती है, तो वह इसके लिए तैयार हैं। उन्होंने UAPA और NSA जैसे कानूनों के इस्तेमाल की स्थिति में भी चुनावी पारदर्शिता के लिए आंदोलन जारी रखने की बात कही।

    प्रदर्शन की अनुमति क्यों नहीं मिली?

    दिल्ली पुलिस ने CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन को अनुमति देने से इनकार किया था। पुलिस पक्ष के अनुसार, आवेदन देर से दिया गया था, पिछले प्रदर्शन में निर्धारित शर्तों का कथित उल्लंघन हुआ था और कानून-व्यवस्था को लेकर चिंताएं थीं।

    पुलिस से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, प्रदर्शन का आवेदन 7 अक्टूबर को मिला था, जबकि निर्धारित दिशानिर्देशों के तहत 10 दिन पहले सूचना देने की अपेक्षा थी। नई दिल्ली क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू होने का भी उल्लेख किया गया था।

    दिपके ने पुलिस की कार्रवाई को शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार के खिलाफ बताया। उनका कहना है कि संविधान का अनुच्छेद 19 नागरिकों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार देता है।

    हालांकि, प्रशासन सार्वजनिक सुरक्षा के लिए उचित प्रतिबंध लगा सकता है, लेकिन ऐसे प्रतिबंधों की वैधता और आनुपातिकता भी महत्वपूर्ण है।

    सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और अवमानना याचिका

    प्रदर्शन से पहले दिल्ली में रेल और मेट्रो सेवाओं पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी सामने आई। उपलब्ध न्यायिक घटनाक्रम के अनुसार, परिवहन सेवाओं को पूरी तरह बंद करने के बजाय नियंत्रित संचालन की जरूरत पर ध्यान दिलाया गया था।

    इसके बाद अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग वाली याचिका दायर किए जाने की जानकारी सामने आई है। याचिका में आरोप लगाया गया है, कि मेट्रो स्टेशनों को बंद रखने और रेल सेवाओं पर प्रतिबंध जारी रहने से न्यायालय के निर्देशों का पालन नहीं हुआ।

    न्यायालय के लिखित आदेश, प्रतिबंधों में हुए बदलाव और आगे की सुनवाई की स्थिति इस मामले के महत्वपूर्ण पहलू हैं।

    245 ट्रेनें रद्द होने और मेट्रो प्रतिबंधों का असर

    दिल्ली में प्रदर्शन के मद्देनजर परिवहन सेवाओं पर प्रतिबंध लगाए गए, जिससे राजधानी आने-जाने वाले यात्रियों की आवाजाही प्रभावित हुई।

    प्रकाशित जानकारी के अनुसार, नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों से संबंधित प्रतिबंधों के दौरान कम-से-कम 245 ट्रेनों के रद्द होने की बात सामने आई। यह आंकड़ा 10 अक्टूबर को सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे तक की समयावधि से संबंधित बताया गया।

    दिल्ली मेट्रो के मामले में 45 स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद रखने की जानकारी सामने आई। कुछ स्टेशनों पर इंटरचेंज की सुविधा को लेकर अलग व्यवस्था होने का भी उल्लेख किया गया।

    35,000 से अधिक सुरक्षा कर्मियों की तैनाती

    दिल्ली में प्रदर्शन के मद्देनजर पुलिस और अर्धसैनिक बलों की बड़ी तैनाती की तैयारी की गई थी। 35,000 से अधिक सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की योजना का आंकड़ा सामने आया था। सुरक्षा व्यवस्था में बॉडी-वॉर्न कैमरों और अन्य निगरानी उपायों का भी उल्लेख किया गया।

    हालांकि, अलग-अलग जानकारियों में सुरक्षा कर्मियों की संख्या अलग बताई गई। इसलिए नियोजित तैनाती और वास्तव में ड्यूटी पर मौजूद कर्मियों की संख्या को एक ही आंकड़ा नहीं माना जा सकता।

    दिल्ली पुलिस के सामने प्रदर्शन स्थल पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ आम लोगों की आवाजाही और सार्वजनिक सेवाओं को प्रभावित होने से बचाने की चुनौती भी थी।

    महाराष्ट्र में प्रदर्शनकारियों को रोकने की तैयारी के आरोप

    दिल्ली में प्रदर्शन से पहले दूसरे राज्यों में भी संभावित प्रदर्शनकारियों को रोकने की तैयारी किए जाने के दावे सामने आए। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 4 अक्टूबर को केंद्रीय गृह सचिव ने कुछ राज्यों के पुलिस महानिदेशकों और चुनिंदा पुलिस आयुक्तों के साथ बैठक की थी।

    इस बैठक के संबंध में सामने आए दावों में संभावित प्रदर्शनकारियों को नोटिस देने, निवारक कार्रवाई और प्रदर्शन के लिए मिलने वाली फंडिंग की जांच जैसे विषय शामिल थे। 8 अक्टूबर को तैयारियों की समीक्षा के लिए एक और बैठक होने की बात भी सामने आई।

    महाराष्ट्र में पुलिस इकाइयों को कथित गोपनीय पत्र भेजे जाने और दिल्ली जाने की तैयारी कर रहे लोगों को रोकने की कोशिशों का भी दावा किया गया। मुंबई में 9 अक्टूबर को 200 से अधिक लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई। दूसरी ओर, पुलिस से जुड़े एक बयान में नोटिस की संख्या 50 से कम होने और राज्य पुलिस द्वारा हिरासत नहीं किए जाने की बात कही गई।

    इन आंकड़ों और बयानों में अंतर है। इसलिए महाराष्ट्र में जारी नोटिस, वास्तविक हिरासत और संबंधित अधिकारियों के आदेशों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं है। इन दावों के आधार पर सभी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एक समान कार्रवाई होने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

    SIR विवाद क्या है और प्रदर्शनकारी क्या मांग रहे हैं?

    CJP का प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर था।

    SIR का उद्देश्य मतदाता सूची का सत्यापन करना और उसे अपडेट करना है। इस प्रक्रिया में मतदाताओं के पते, पात्रता और सूची में दर्ज जानकारी की जांच की जाती है। विवाद इस बात पर है कि सत्यापन के दौरान किसी पात्र मतदाता का नाम गलती से हटने की आशंका को कैसे दूर किया जाए और मतदाताओं को अपनी जानकारी सुधारने का पर्याप्त अवसर कैसे मिले।

    उपलब्ध आंकड़ों में करीब 13 करोड़ मतदाता प्रविष्टियां हटाए जाने का उल्लेख सामने आया। इनमें लगभग 6.3 करोड़ ऐसे मतदाता बताए गए जिनके स्थान बदलने की जानकारी थी, करीब 3 करोड़ ऐसे लोग जिनका पता नहीं लगाया जा सका और लगभग 2.8 करोड़ मृत व्यक्तियों की प्रविष्टियां शामिल थीं।

    इन तीन श्रेणियों का कुल लगभग 12.1 करोड़ होता है। इसलिए इन्हें 13 करोड़ की पूरी संख्या का संपूर्ण विभाजन नहीं कहा जा सकता।

    निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया और विपक्षी दलों के आरोपों को अलग-अलग समझना जरूरी है। मतदाता सूची से प्रविष्टि हटना अपने-आप में यह साबित नहीं करता कि किसी पात्र व्यक्ति का वोट जानबूझकर छीना गया। इसी तरह यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि किसी पात्र मतदाता का नाम गलती से हटने पर उसे शिकायत और सुधार का अवसर मिले।

    मतदाता अपना नाम निर्वाचन आयोग के आधिकारिक पोर्टल https://voters.eci.gov.in/ पर जांच सकते हैं और पंजीकरण या सुधार से जुड़ी सेवाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं।

    अभिजीत दिपके और CJP आंदोलन की पृष्ठभूमि

    अभिजीत दिपके एक राजनीतिक रणनीतिकार हैं। Cockroach Janta Party का नाम बेरोजगार युवाओं पर की गई कथित ‘कॉकरोच’ टिप्पणी के विरोध से जुड़े सोशल मीडिया आंदोलन के संदर्भ में सामने आया।

    जुलाई में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद CJP को व्यापक पहचान मिलने की जानकारी सामने आई थी। अक्टूबर का प्रदर्शन इसी आंदोलन का अगला बड़ा चरण था।

    इस बार आंदोलन का केंद्र मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया बन गया। इससे विवाद का दायरा रोजगार और युवाओं से आगे बढ़कर चुनावी पारदर्शिता और नागरिक अधिकारों तक पहुंच गया।

    मानवाधिकार संगठनों ने भी उठाए सवाल

    Amnesty International ने दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले लगाए गए प्रतिबंधों पर चिंता जताई थी। संगठन ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति, परिवहन सेवाओं पर व्यापक रोक, इंटरनेट प्रतिबंध और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने जैसे कदमों को नागरिक स्वतंत्रता के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया।

    इंटरनेट प्रतिबंध के संबंध में केंद्रीय दिल्ली के प्रदर्शन स्थल के आसपास चार किलोमीटर के दायरे में 24 घंटे के मोबाइल इंटरनेट निलंबन का दावा सामने आया था। इसकी वास्तविक सीमा, समयावधि और लागू आदेश की पुष्टि नहीं हुई है।

    अब आगे क्या होगा?

    इस मामले में आगे की स्थिति मुख्य रूप से तीन घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी। पहला, अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत की आधिकारिक स्थिति और उनके खिलाफ लागू कानूनी प्रावधान। दूसरा, परिवहन प्रतिबंधों और अवमानना याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की आगे की कार्यवाही। तीसरा, SIR विवाद पर निर्वाचन आयोग और राजनीतिक दलों की अगली प्रतिक्रिया।

    CJP की ओर से आंदोलन जारी रखने की बात कही गई है। वहीं, पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई के कानूनी आधार तथा प्रतिबंधों की आनुपातिकता पर बहस जारी रहने की संभावना है।

    फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि चुनावी पारदर्शिता की मांग को लेकर होने वाले शांतिपूर्ण प्रदर्शन, सार्वजनिक सुरक्षा और आम नागरिकों की आवाजाही के बीच संतुलन कैसे बनाया जाएगा।

  • मुंबई CDR रैकेट: दो पुलिस कांस्टेबल समेत 5 गिरफ्तार, 550 से ज्यादा नंबरों की लोकेशन डेटा सप्लाई का आरोप

    मुंबई CDR रैकेट: दो पुलिस कांस्टेबल समेत 5 गिरफ्तार, 550 से ज्यादा नंबरों की लोकेशन डेटा सप्लाई का आरोप

    मुंबई में कथित CDR रैकेट में पांच लोग गिरफ्तार हुए हैं। इनमें झारखंड और बिहार पुलिस के दो कांस्टेबल शामिल हैं। जांच में 550 से ज्यादा मोबाइल नंबरों की लोकेशन संबंधी जानकारी सामने आई।

    मुंबई: कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), सब्सक्राइबर डिटेल रिकॉर्ड (SDR) और मोबाइल लोकेशन डेटा की कथित अवैध सप्लाई करने वाले अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा हुआ है। इस मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें झारखंड और बिहार पुलिस के दो कांस्टेबल भी शामिल हैं। शुरुआती जांच में 550 से ज्यादा मोबाइल नंबरों की लोकेशन संबंधी जानकारी, 520 से अधिक SDR और 420 से ज्यादा IMEI नंबरों से जुड़ी जानकारी सामने आई है।

    मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच में महाराष्ट्र, झारखंड और बिहार तक फैले कथित नेटवर्क के नौ संदिग्ध सदस्यों की पहचान होने की जानकारी सामने आई है। इस मामले में सात मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। जांच का प्रमुख पहलू यह है कि संवेदनशील मोबाइल डेटा आरोपियों तक कैसे पहुंचा और इसका इस्तेमाल किन उद्देश्यों के लिए किया जा रहा था।

    खोए हुए मोबाइल फोन खोजने के नाम पर सामने आया मामला

    जांच के अनुसार, यह मामला सोशल मीडिया पर खोए या चोरी हुए मोबाइल फोन वापस दिलाने का दावा करने वाले एक व्यक्ति से जुड़ा है। आरोपी ने इंस्टाग्राम पर इस तरह की सेवा का प्रचार किया था। आरोप है कि उसने खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए अपना परिचय “इंस्पेक्टर संजय” के रूप में दिया और मोबाइल फोन तलाशने के लिए संपर्क करने वाले लोगों से पैसे लिए।

    क्राइम ब्रांच को सूचना मिलने के बाद जोगेश्वरी पश्चिम में कार्रवाई की गई। आरोपी के पास मौजूद दो मोबाइल फोन की जांच के दौरान कथित तौर पर CDR, SDR और लोकेशन डेटा हासिल करने से जुड़े संपर्कों की जानकारी सामने आई। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया और दूसरे राज्यों में मौजूद संदिग्धों की भूमिका की पड़ताल की गई।

    जांच में पांच गिरफ्तार, दो पुलिस कांस्टेबल भी शामिल

    इस मामले में गिरफ्तार पांच आरोपियों में झारखंड और बिहार पुलिस के दो सक्रिय कांस्टेबल शामिल हैं। हालांकि, दोनों की कथित भूमिका क्या थी, उन्होंने अपने पद का इस्तेमाल किया था या नहीं और डेटा हासिल करने में उनकी वास्तविक भागीदारी कितनी थी, इसका विस्तृत ब्योरा अभी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है।

    ओशिवारा पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस मामले की प्राथमिकी संख्या 935/2026 और क्राइम ब्रांच केस संख्या 68/2026 बताई गई है। मुख्य संदिग्ध को 22 जून 2026 को जोगेश्वरी पश्चिम में पकड़े जाने का विवरण भी सामने आया है। मामले में आगे की जांच जारी है।

    550 से ज्यादा मोबाइल नंबरों की लोकेशन संबंधी जानकारी मिली

    प्रारंभिक जांच में सामने आए डेटा का विवरण इस प्रकार है:

    • लगभग 50 कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR)
    • 520 से अधिक सब्सक्राइबर डिटेल रिकॉर्ड (SDR)
    • 550 से ज्यादा मोबाइल नंबरों की लोकेशन संबंधी जानकारी
    • 420 से अधिक IMEI नंबरों से जुड़ी जानकारी
    • सात मोबाइल फोन जब्त

    CDR में आमतौर पर कॉल का समय, अवधि और संबंधित नंबरों जैसी जानकारी हो सकती है। SDR में मोबाइल कनेक्शन के ग्राहक से जुड़ी जानकारी हो सकती है, जबकि IMEI मोबाइल उपकरण की पहचान के लिए इस्तेमाल होने वाला नंबर है। लोकेशन डेटा का विवरण इस बात पर निर्भर करता है कि जानकारी किस तकनीक और रिकॉर्ड से हासिल की गई थी।

    इन आंकड़ों को सीधे प्रभावित व्यक्तियों की संख्या नहीं माना जा सकता। एक ही मोबाइल नंबर से कई रिकॉर्ड जुड़े हो सकते हैं और एक व्यक्ति के पास एक से ज्यादा मोबाइल नंबर भी हो सकते हैं। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इस कथित नेटवर्क से कुल कितने लोगों की निजी जानकारी प्रभावित हुई।

    मोबाइल डेटा का गलत इस्तेमाल कैसे नुकसान पहुंचा सकता है?

    कॉल रिकॉर्ड और लोकेशन संबंधी जानकारी संवेदनशील होती है। यदि ऐसी जानकारी अनधिकृत लोगों तक पहुंच जाए, तो उससे किसी व्यक्ति के संपर्कों, कॉल करने के पैटर्न और मोबाइल उपकरण की गतिविधियों का अनुमान लगाया जा सकता है। परिस्थितियों के अनुसार इसका इस्तेमाल ठगी, निजी जानकारी जुटाने या किसी की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए किए जाने का जोखिम हो सकता है।

    हालांकि, इस मामले में बरामद या सप्लाई किए गए डेटा का इस्तेमाल किसी अन्य अपराध में हुआ है या किसी व्यक्ति की निजता को वास्तविक नुकसान पहुंचा है, इसकी पुष्टि जानकारी इस वक्त नहीं है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि डेटा के बदले कितनी रकम दी जाती थी, इसे किन लोगों तक पहुंचाया गया और क्या किसी दूरसंचार कंपनी या सरकारी सिस्टम का दुरुपयोग हुआ था।

    कानूनी पहलू पर भी जरूरी जांच

    कॉल डिटेल रिकॉर्ड और लोकेशन संबंधी जानकारी तक पहुंच अधिकृत प्रक्रिया और लागू कानूनों के अधीन होती है। किसी व्यक्ति के पास मोबाइल नंबर होने से उसे उस नंबर के मालिक के कॉल रिकॉर्ड या लोकेशन डेटा तक पहुंच का अधिकार नहीं मिल जाता।

    खोया मोबाइल खोजने के नाम पर पैसे मांगने वालों से सावधान रहें

    मोबाइल फोन खो जाने पर अनजान सोशल मीडिया खातों या खुद को पुलिस अधिकारी बताने वाले व्यक्तियों को बिना सत्यापन पैसे देना जोखिमपूर्ण हो सकता है। फोन खोने या चोरी होने की स्थिति में नागरिक संचार साथी पोर्टल पर उपलब्ध CEIR सुविधा के जरिए मोबाइल ब्लॉक करने की प्रक्रिया देख सकते हैं। धोखाधड़ी होने पर साइबर अपराध की शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर की जा सकती है। तत्काल वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में 1930 पर भी संपर्क किया जा सकता है।

    फिलहाल जांच का प्रमुख उद्देश्य कथित डेटा सप्लाई के स्रोत, नेटवर्क में शामिल बाकी संदिग्धों की भूमिका और संवेदनशील मोबाइल जानकारी के इस्तेमाल का पता लगाना है। यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि डेटा किस माध्यम से हासिल किया गया और क्या इस मामले में किसी अन्य व्यक्ति या संस्था की भूमिका सामने आती है।

  • कुर्ला में कांग्रेस का ‘सेव डेमोक्रेसी’ प्रदर्शन, SIR पर बढ़ा विरोध

    कुर्ला में कांग्रेस का ‘सेव डेमोक्रेसी’ प्रदर्शन, SIR पर बढ़ा विरोध

    मुंबई के कुर्ला में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ‘ब्लैक डे और सेव डेमोक्रेसी’ प्रदर्शन किया। SIR और चुनाव आयोग को लेकर मुंबई में पहले भी कई प्रदर्शन हुए।

    मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई शहर में SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर कांग्रेस का विरोध लगातार तेज होता दिख रहा है। 8 अक्टूबर को कुर्ला में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने ‘Black Day and Save Democracy’ के तहत प्रदर्शन किया और नारेबाजी की। यह प्रदर्शन ऐसे समय हुआ है जब कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर देशभर में विरोध का ऐलान किया है।

    कुर्ला का यह प्रदर्शन मुंबई में पिछले कुछ दिनों से चल रहे SIR विरोधी अभियान की अगली कड़ी है। इससे पहले दादर, मुलुंड और दक्षिण मुंबई में कांग्रेस से जुड़े अलग-अलग कार्यक्रम हो चुके हैं, जबकि 2 अक्टूबर को शिवाजी पार्क और 4 अक्टूबर को बड़े विपक्षी मार्च के जरिए भी यही मुद्दा सामने आया था।

    कुर्ला में क्या हुआ

    8 अक्टूबर को कुर्ला में कांग्रेस कार्यकर्ता और समर्थक ‘Black Day and Save Democracy’ के संदेश के साथ सड़क पर उतरे। यहां कार्यकर्ता हाथों में पार्टी के झंडे और पोस्टर लेकर नारे लगाते नजर आए।

    इस प्रदर्शन का तत्काल राजनीतिक संदर्भ SIR को लेकर चल रहा विवाद और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की कांग्रेस की मांग है। कांग्रेस ने 8 अक्टूबर को राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर प्रदर्शन का कार्यक्रम घोषित किया था।

    मुंबई में विरोध की शुरुआत कहां से हुई

    मुंबई में इस अभियान का प्रमुख चरण 29 सितंबर को दादर की चैत्यभूमि से सामने आया। यहां मुंबई कांग्रेस की ओर से आयोजित प्रदर्शन में करीब 200 लोग जुटे थे। कार्यक्रम दोपहर करीब 3 बजे शुरू हुआ और शाम 5 बजे तक चला। प्रदर्शन में मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष वर्षा गायकवाड और NCP-SP के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनिश गवांडे मौजूद रहे तथा संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक वाचन भी हुआ।

    इसी दिन चैत्यभूमि के कार्यक्रम में वर्षा गायकवाड के साथ पूर्व मंत्री एवं विधायक असलम शेख, विधायक अमीन पटेल, ज्योति गायकवाड, भाई जगताप और सामाजिक कार्यकर्ता तुषार गांधी भी मौजूद थे। वर्षा गायकवाड ने ज्ञानेश कुमार को हटाने और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।

    मुलुंड में भी कांग्रेस ने उठाया मुद्दा

    1 अक्टूबर को Mumbai North East District Congress Committee ने मुलुंड रेलवे स्टेशन के बाहर, दीपक होटल के सामने प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का नेतृत्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष केतन शाह ने किया। इसमें मुंबई प्रदेश कांग्रेस, महिला कांग्रेस, Youth Congress, Seva Dal, NSUI और पार्टी के विभिन्न प्रकोष्ठों के कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने ज्ञानेश कुमार को हटाने और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता की मांग से जुड़े पोस्टर और नारे लगाए।

    दक्षिण मुंबई में भी कांग्रेस की जिला इकाई ने इसी मुद्दे को लेकर प्रदर्शन किया। इस तरह सितंबर के अंतिम सप्ताह से मुंबई के अलग-अलग इलाकों में SIR और चुनाव आयोग को लेकर कांग्रेस का संगठनात्मक विरोध दिखाई दिया।

    चुनाव आयोग के मुद्दे पर विरोध और तेज हुआ

    30 सितंबर को मुंबई Youth Congress के कार्यकर्ताओं ने State Election Commission कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया था। इस दौरान कुछ कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया था। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और SIR को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर कार्रवाई शामिल थी।

    इसके बाद 2 अक्टूबर को दादर के शिवाजी पार्क में CEC के खिलाफ बड़ा नागरिक प्रदर्शन हुआ। इस कार्यक्रम में 10 हजार से ज्यादा लोगों के जुटने की जानकारी सामने आई थी। हालांकि यह कांग्रेस का स्वतंत्र कार्यक्रम नहीं था, लेकिन इससे मुंबई में SIR और चुनाव आयोग को लेकर चल रहे व्यापक विरोध का दायरा साफ हुआ।

    4 अक्टूबर को उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के संयुक्त मार्च में भी कांग्रेस और NCP-SP के नेता शामिल हुए। इस मार्च में SIR को लेकर विरोध, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग प्रमुख रही।

    SIR को लेकर कांग्रेस की आपत्ति क्या है

    SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूची की विशेष समीक्षा की प्रक्रिया है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में मतदाताओं के नाम हटने और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल हैं। विपक्ष इसी आधार पर चुनाव आयोग से जवाबदेही की मांग कर रहा है।

    कांग्रेस ने इस मुद्दे को अब केवल मतदाता सूची की तकनीकी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि इसे चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़कर लगातार राजनीतिक आंदोलन का रूप दिया है। चुनाव आयोग और भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है।

    दिल्ली की घटनाओं के बाद मुंबई में भी बढ़ा दबाव

    6 और 7 अक्टूबर को दिल्ली में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य विपक्षी नेताओं के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और हिरासत के बाद कांग्रेस ने 8 अक्टूबर को देशभर में बड़ा विरोध कार्यक्रम घोषित किया। दिल्ली में विपक्षी दलों ने लगातार तीसरे दिन भी प्रदर्शन किया और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई।

    इसी राष्ट्रीय अभियान के बीच मुंबई के कुर्ला में कांग्रेस का ‘Black Day and Save Democracy’ प्रदर्शन सामने आया है।

    अब आगे क्या

    मुंबई में पिछले करीब डेढ़ सप्ताह के घटनाक्रम से साफ है कि SIR और ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस का विरोध अलग-अलग जिला इकाइयों और स्थानीय स्तर तक पहुंच चुका है। दादर से मुलुंड और दक्षिण मुंबई तक हुए प्रदर्शनों के बाद अब कुर्ला में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं की mobilisation सामने आई है।

    फिलहाल इस आंदोलन का अगला चरण इस बात पर निर्भर करेगा कि चुनाव आयोग SIR को लेकर उठ रहे राजनीतिक सवालों पर क्या कदम उठाता है और कांग्रेस अपने घोषित राष्ट्रव्यापी विरोध को किस तरह आगे बढ़ाती है। कांग्रेस की ओर से ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग जारी है, जबकि चुनाव आयोग और भाजपा विपक्ष के आरोपों को स्वीकार नहीं करते हैं।