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  • मुंबई एयरपोर्ट पर मौसम का असर, 8 फ्लाइटें सूरत डायवर्ट; 1,255 यात्री सुरक्षित

    मुंबई एयरपोर्ट पर मौसम का असर, 8 फ्लाइटें सूरत डायवर्ट; 1,255 यात्री सुरक्षित

    Mumbai Airport पर तेज हवाओं, गरज-चमक और बारिश से उड़ानें प्रभावित हुईं। 8 फ्लाइटें सूरत डायवर्ट हुईं, 1,255 यात्री सुरक्षित रहे।

    मुंबई : मुंबई एयरपोर्ट पर मंगलवार 29 सितंबर की शाम खराब मौसम ने हवाई परिचालन को प्रभावित कर दिया। गरज-चमक, तेज हवाओं और बारिश के बीच मुंबई आने वाली कई उड़ानों को दूसरे एयरपोर्ट की ओर मोड़ना पड़ा। इनमें सूरत डायवर्ट की गई 8 उड़ानों में कुल 1,255 यात्री सवार थे। सभी विमानों ने सूरत एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंडिंग की। वहीं, व्यापक स्तर पर मुंबई एयरपोर्ट पर उड़ानों की देरी और कुछ उड़ानों के रद्द होने की भी जानकारी सामने आई है।

    मंगलवार शाम करीब 6:50 बजे से मुंबई जाने वाली उड़ानों के डायवर्जन का सिलसिला शुरू हुआ। सबसे पहले तिरुचिरापल्ली से मुंबई जा रही IndiGo की फ्लाइट 6E-2017 सूरत पहुंची। इसमें 182 यात्री सवार थे। इसके कुछ ही मिनट बाद दिल्ली से मुंबई जा रही IndiGo की फ्लाइट 6E-864 को भी सूरत डायवर्ट किया गया। इस विमान में 122 यात्री थे।

    इसके बाद दिल्ली से मुंबई जा रही Air India की फ्लाइट AI-2941 सूरत पहुंची। इस विमान में 186 यात्री सवार थे। चेन्नई से मुंबई जा रही IndiGo की फ्लाइट 6E-5104 और गोवा से मुंबई जा रही Air India की फ्लाइट AI-2746 को भी सूरत भेजा गया। AI-2746 में 135 यात्री सवार थे।

    बेंगलुरु से मुंबई जा रही IndiGo की फ्लाइट 6E-5255 करीब 7:47 बजे सूरत पहुंची। इसमें 135 यात्री थे। इसके लगभग तीन मिनट बाद चेन्नई से मुंबई जा रही Air India की फ्लाइट AI-640 ने सूरत में लैंडिंग की। इसमें 112 यात्री सवार थे। सबसे आखिर में भोपाल से मुंबई जा रही IndiGo की फ्लाइट 6E-5312 करीब 8 बजे सूरत पहुंची। इस विमान में 204 यात्री सवार थे।

    इस तरह सूरत डायवर्ट की गई इन 8 उड़ानों में कुल 1,255 यात्री थे। सूरत एयरपोर्ट पर सभी विमानों की सुरक्षित लैंडिंग कराई गई और यात्रियों के लिए जरूरी व्यवस्थाएं की गईं। सूरत एयरपोर्ट के निदेशक आनंद नारायण शर्मा ने भी इन उड़ानों के डायवर्जन और सुरक्षित लैंडिंग की पुष्टि की थी।

    सिर्फ सूरत ही नहीं, दूसरे एयरपोर्ट भी बने वैकल्पिक ठिकाने

    मुंबई में मौसम बिगड़ने के बाद सूरत के अलावा दूसरे एयरपोर्ट का भी इस्तेमाल वैकल्पिक लैंडिंग के लिए किया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार कम-से-कम 11 से 12 मुंबई आने वाली उड़ानों के डायवर्जन की स्थिति सामने आई, हालांकि अलग-अलग समय पर जारी आंकड़ों में अंतर रहा। एक अपडेट में 8 उड़ानों के सूरत और 4 उड़ानों के वडोदरा पहुंचने की जानकारी दी गई। वडोदरा पहुंचने वाली उड़ानों में Air India की AI 2447, AI 599, AI 1780 और IndiGo की 6E 329 शामिल थीं।

    वहीं एक अन्य अपडेट में 11 उड़ानों के डायवर्ट होने की जानकारी सामने आई, जिनमें 6 उड़ानों को सूरत और 3 को अहमदाबाद भेजे जाने का विवरण दिया गया। इनमें IndiGo की 6E864, 6E2017 और 6E5104, Air India की AI2941, AI640 और AI2746 शामिल थीं। अहमदाबाद के लिए QP1150, 6E5259 और 6E5163 को डायवर्ट किए जाने की जानकारी दी गई।

    इस अंतर की वजह से डायवर्ट हुई कुल उड़ानों की संख्या को लेकर अलग-अलग समय पर अलग आंकड़े सामने आए। हालांकि इतना स्पष्ट है कि मुंबई के खराब मौसम का असर कई मुंबई-बाउंड उड़ानों पर पड़ा और उन्हें सुरक्षित रूप से वैकल्पिक एयरपोर्ट पर उतारा गया।

    213 उड़ानों में देरी, 16 रद्द होने की भी जानकारी

    मौसम का असर सिर्फ डायवर्ट हुई उड़ानों तक सीमित नहीं रहा। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार मुंबई एयरपोर्ट पर 213 उड़ानों में देरी हुई, जबकि 16 उड़ानें रद्द हुईं। डायवर्जन के कारण सूरत और दूसरे वैकल्पिक एयरपोर्ट पर भी यात्रियों और विमानों की अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ी।

    मुंबई में क्यों बिगड़ा मौसम?

    मंगलवार शाम मुंबई के कई हिस्सों में अचानक बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं का दौर देखा गया। मुलुंड, कुर्ला और अंधेरी समेत कई इलाकों में बारिश हुई और कुछ स्थानों पर जलभराव की स्थिति भी बनी। अंधेरी क्षेत्र में जलभराव के कारण आवाजाही प्रभावित होने की जानकारी सामने आई।

    भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुंबई-पवई पूर्वानुमान में 29 सितंबर को बादल छाए रहने के साथ बारिश या गरज-चमक की संभावना दर्ज थी। 30 सितंबर के लिए भी एक-दो दौर की बारिश या गरज-चमक का पूर्वानुमान दिया गया था।

    हवाई परिचालन पर मौसम का सीधा असर पड़ा। तेज हवाओं, बिजली चमकने और गरज-चमक जैसी परिस्थितियों में मुंबई में विमानों की लैंडिंग प्रभावित होने पर एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आने वाली उड़ानों को वैकल्पिक एयरपोर्ट की ओर भेजा। सभी डायवर्ट विमान सुरक्षित उतरे।

    सूरत और वडोदरा में यात्रियों के लिए क्या इंतजाम?

    डायवर्ट किए गए विमानों के यात्रियों को वैकल्पिक एयरपोर्ट पर जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई। सूरत और वडोदरा में यात्रियों के लिए पीने के पानी और रिफ्रेशमेंट की व्यवस्था की गई। वडोदरा में पहुंचे कुछ विमानों के यात्रियों को तत्काल विमान से बाहर नहीं उतारा गया था और आगे की उड़ान के लिए मौसम तथा परिचालन की स्थिति का इंतजार किया जा रहा था।

    अब यात्रियों को मुंबई कब पहुंचाया जाएगा?

    डायवर्ट किए गए विमानों की मुंबई वापसी वहां के मौसम और एयर ट्रैफिक कंट्रोल से मिलने वाली अनुमति पर निर्भर रही। मौसम सामान्य होने और मुंबई एयरपोर्ट पर लैंडिंग के लिए परिस्थितियां अनुकूल होने के बाद विमानों को मुंबई भेजने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी थी। इसलिए जिन यात्रियों की उड़ान प्रभावित हुई है, उनके लिए वास्तविक यात्रा समय एयरलाइन और फ्लाइट स्टेटस के अनुसार बदल सकता है।

    30 सितंबर को भी मौसम पर नजर

    मुंबई में 30 सितंबर को भी बारिश और गरज-चमक की संभावना बनी हुई है। ऐसे में मुंबई से उड़ान भरने या मुंबई पहुंचने वाले यात्रियों के लिए एयरपोर्ट रवाना होने से पहले अपनी फ्लाइट का ताजा स्टेटस जांचना महत्वपूर्ण है। मौसम की स्थिति के अनुसार देरी, रूट में बदलाव या डायवर्जन जैसी स्थिति दोबारा बन सकती है।

    मंगलवार की घटना में राहत की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि डायवर्ट की गई उड़ानों की लैंडिंग सुरक्षित रही और किसी यात्री के हताहत होने की जानकारी सामने नहीं आई। अब यात्रियों की आगे की यात्रा और उड़ानों के सामान्य संचालन की स्थिति मुंबई के मौसम तथा एयर ट्रैफिक की स्थिति पर निर्भर करेगी।

  • Mumbai Police ने CJP के 2 अक्टूबर Shivaji Park Protest को रोका, Dipke का Jail Bharo ऐलान

    Mumbai Police ने CJP के 2 अक्टूबर Shivaji Park Protest को रोका, Dipke का Jail Bharo ऐलान

    Mumbai Police ने CJP के 2 अक्टूबर Shivaji Park प्रदर्शन को अनुमति नहीं दी। Dipke ने Jail Bharo की चेतावनी दी, Azad Maidan पर नजर।

    मुंबई: 2 अक्टूबर को प्रस्तावित Cockroach Janta Party (CJP) के प्रदर्शन को लेकर विवाद बढ़ गया है। Mumbai Police ने Shivaji Park में प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। इसके बाद CJP के संस्थापक Abhijeet Dipke ने कहा है कि अगर प्रदर्शन के अधिकार से वंचित किया गया तो 2 अक्टूबर, गांधी जयंती के दिन मुंबई में Jail Bharo Andolan शुरू किया जाएगा। हालांकि, प्रदर्शन रद्द होने की घोषणा नहीं हुई है और वैकल्पिक स्थल पर कार्यक्रम आयोजित करने की कोशिश जारी है।

    CJP ने 2 अक्टूबर को मुंबई से अपने राष्ट्रव्यापी आंदोलन की शुरुआत करने की घोषणा की थी। संगठन की मुख्य मांग Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar के इस्तीफे से जुड़ी है। CJP इसके साथ Special Intensive Revision (SIR) को रोकने, जनवरी 2025 की मतदाता सूची बहाल करने और Election Commissioners की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून में बदलाव की भी मांग कर रहा है।

    Shivaji Park में अनुमति क्यों नहीं मिली?

    26 सितंबर को CJP National Organisation Head Ajinkya Shinde की ओर से 2 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे से रात 9 बजे तक Shivaji Park में प्रदर्शन के लिए आवेदन दिया गया था। Mumbai Police ने इसे अनुमति देने से इनकार करते हुए Bombay High Court के PIL No. 116/2009 में 4 जनवरी 2013 के फैसले और Maharashtra Government के 20 जनवरी 2016 के आदेश का हवाला दिया है।

    Shivaji Park में गैर-खेल गतिविधियों के आयोजन को लेकर पहले से लागू कानूनी और प्रशासनिक व्यवस्था के अलावा Police ने इलाके के silence zone होने, ध्वनि प्रदूषण की आशंका और बड़े जमावड़े से traffic व्यवस्था प्रभावित होने की संभावना का उल्लेख किया है। आसपास के अस्पतालों और अन्य संस्थानों तक पहुंच प्रभावित होने की चिंता भी जताई गई है। Police communication में BMC से संबंधित आवश्यक अनुमति का मुद्दा भी सामने आया है।

    क्या 2 अक्टूबर का CJP प्रदर्शन रद्द हो गया?

    नहीं। Shivaji Park की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद CJP ने 2 अक्टूबर के आंदोलन को वापस लेने की घोषणा नहीं की है। Police ने संगठन को मुंबई में किसी वैकल्पिक स्थान की पहचान कर नई अनुमति के लिए आवेदन करने को कहा है।

    Azad Maidan को संभावित वैकल्पिक स्थल के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार वहां प्रदर्शन की अंतिम अनुमति की पुष्टि अभी नहीं हुई है, जबकि venue को लेकर प्रक्रिया जारी है।

    अनुमति नहीं मिली तो Jail Bharo की चेतावनी

    Shivaji Park में अनुमति से इनकार के बाद Abhijeet Dipke ने Mumbai Police के फैसले पर सवाल उठाया। उनका कहना है कि प्रदर्शन का अधिकार लगातार रोका गया तो CJP गांधी जयंती पर मुंबई में Jail Bharo Andolan शुरू करेगा।

    इस घटनाक्रम के बीच CJP के 2 अक्टूबर के कार्यक्रम को राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर समर्थन भी मिला है। Aaditya Thackeray ने आंदोलन का समर्थन किया है। Shiv Sena (UBT) की ओर से भी 2 अक्टूबर के CJP कार्यक्रम में समर्थन और भागीदारी की बात सामने आई है। Sonam Wangchuk ने भी CJP के आंदोलन के उद्देश्य का समर्थन किया है, हालांकि उनके कार्यक्रम स्थल पर स्वयं मौजूद रहने की पुष्टि नहीं है।

    Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग क्यों?

    CJP का आंदोलन Election Commission और SIR को लेकर चल रहे विवाद के बीच हो रहा है। संगठन Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar के इस्तीफे के साथ उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है।

    CJP का आरोप है कि SIR प्रक्रिया और चुनावी व्यवस्था से जुड़े फैसलों ने मतदाताओं के अधिकारों पर सवाल खड़े किए हैं। संगठन जनवरी 2025 की मतदाता सूची बहाल करने और Election Commissioners की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून में बदलाव की मांग भी कर रहा है।

    इस विवाद की पृष्ठभूमि में Election Commission के भीतर SIR से जुड़े फैसलों पर मतभेद को लेकर भी रिपोर्ट सामने आई हैं। एक जांच में Sukhbir Singh Sandhu और Vivek Joshi की ओर से पिछले 10 महीनों में कम-से-कम 14 बार कुछ फैसलों और आदेशों पर आपत्तियां दर्ज किए जाने की बात सामने आई थी। दूसरी ओर Election Commission ने 26 सितंबर को आंतरिक मतभेद की व्याख्या को खारिज करते हुए कहा कि SIR से जुड़े प्रमुख फैसले तीनों Election Commissioners की unanimous approval से लिए गए थे।

    SIR को लेकर क्या है विवाद?

    Special Intensive Revision यानी SIR के दौरान विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की draft electoral rolls में बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की draft lists में 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने की बात सामने आई है। इन आंकड़ों को लेकर CJP और विपक्षी दल सवाल उठा रहे हैं, जबकि Election Commission प्रक्रिया को कानूनी और निर्धारित नियमों के अनुसार बता रहा है।

    इस मामले में यह भी महत्वपूर्ण है कि मतदाता सूची से नाम हटना अपने-आप में यह साबित नहीं करता कि सभी हटाए गए लोग वैध मतदाता थे। SIR प्रक्रिया में मृत, स्थानांतरित, दोहराए गए या अन्य कारणों से अयोग्य नामों की पहचान और दावों-आपत्तियों की प्रक्रिया भी शामिल है।

    Supreme Court में भी SIR पर सुनवाई

    SIR से जुड़े विवाद का कानूनी पहलू भी सामने आया है। Supreme Court ने Delhi में SIR के दौरान जारी किए गए “logical discrepancy” notices को लेकर Election Commission से स्पष्टीकरण मांगा है। Court के सामने यह सवाल भी आया कि ऐसे notices किस आधार पर जारी किए गए और उनकी प्रक्रिया किस तरह अपनाई गई।

    SIR को लेकर विवाद केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है। चुनावी प्रक्रिया से जुड़े कुछ पहलुओं की न्यायिक जांच भी चल रही है। हालांकि Supreme Court की इन कार्यवाहियों को Gyanesh Kumar के खिलाफ किसी अंतिम न्यायिक निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता।

    Maharashtra के मतदाताओं के लिए भी महत्वपूर्ण तारीख

    Maharashtra में SIR से जुड़े claims और objections दाखिल करने की अंतिम तारीख 12 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाई गई है। इन claims और objections के निपटारे की समयसीमा 10 नवंबर 2026 तक रखी गई है। यह जानकारी उन मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण है जिन्हें अपनी electoral roll entry को लेकर कोई आपत्ति या दावा दर्ज करना है।

    Mumbai में 28 सितंबर से 4 अक्टूबर तक बढ़ेगी राजनीतिक हलचल

    CJP का 2 अक्टूबर का कार्यक्रम मुंबई में अकेला विरोध प्रदर्शन नहीं है। Maharashtra Congress ने 28 सितंबर को राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है। इसके बाद 2 अक्टूबर को CJP का प्रस्तावित आंदोलन है। 4 अक्टूबर को Raj Thackeray और Uddhav Thackeray की ओर से भी Election Commission और SIR के मुद्दे पर मुंबई में अलग march प्रस्तावित है।

    इस बीच 27 सितंबर को Assam के Guwahati में CJP के co-convener Ashutosh Ranka सहित संगठन के कई कार्यकर्ताओं को Police द्वारा हिरासत में लिए जाने की खबर भी सामने आई। CJP ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।

    अब मुंबई में सबसे बड़ा सवाल यह है कि 2 अक्टूबर को CJP का प्रदर्शन किस स्थान पर होगा और क्या Police वैकल्पिक venue के लिए अनुमति देगी। फिलहाल Shivaji Park में अनुमति नहीं है, CJP ने आंदोलन जारी रखने की बात कही है और Abhijeet Dipke ने अनुमति नहीं मिलने की स्थिति में Jail Bharo Andolan की चेतावनी दी है। आगामी दिनों में alternative venue और प्रशासनिक अनुमति पर होने वाला फैसला 2 अक्टूबर के कार्यक्रम की तस्वीर साफ करेगा।

  • Mushtaq Khan Death: ‘Welcome’ और ‘Gadar’ के अभिनेता का 56 की उम्र में निधन, आखिरी दिनों तक कर रहे थे शूटिंग

    Mushtaq Khan Death: ‘Welcome’ और ‘Gadar’ के अभिनेता का 56 की उम्र में निधन, आखिरी दिनों तक कर रहे थे शूटिंग

    Mushtaq Khan का 24 सितंबर को मुंबई के Nanavati Hospital में निधन हो गया। 56 वर्षीय अभिनेता कैंसर से जूझ रहे थे और मौत से पहले तक शूटिंग कर रहे थे।

    मुंबई: ‘Welcome’, ‘Gadar: Ek Prem Katha’, ‘Gadar 2’, ‘Aashiqui’ और ‘Jodi No. 1’ जैसी फिल्मों में यादगार supporting और comic roles निभाने वाले अभिनेता Mushtaq Khan का गुरुवार, 24 सितंबर 2026 को निधन हो गया। वह 56 वर्ष के थे। उन्होंने मुंबई के Nanavati Hospital में शाम करीब 7 बजे अंतिम सांस ली। पिछले करीब 15 दिनों से उनका इलाज चल रहा था और हाल के दिनों में उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ी थी।

    Mushtaq Khan पिछले कुछ वर्षों से कैंसर से जूझ रहे थे। करीब पांच साल पहले उन्हें बीमारी का पता चला था और इलाज के बाद उनकी हालत में सुधार हुआ था। हाल में बीमारी दोबारा गंभीर होने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनके बेटे Mohsin के अनुसार अस्पताल ले जाने से पहले तक वह काम कर रहे थे और उनकी कोई बड़ी स्वास्थ्य समस्या सामने नहीं आई थी।

    अस्पताल जाने से पहले तक शूटिंग कर रहे थे Mushtaq Khan

    Mushtaq Khan के निधन से जुड़ी सबसे अहम जानकारी यह है कि वह अस्पताल में भर्ती होने से पहले तक शूटिंग कर रहे थे। उनके बेटे Mohsin के अनुसार अभिनेता Salman Khan के बॉडीगार्ड Shera के बेटे की debut film की शूटिंग में व्यस्त थे। इसके बाद पेट में दर्द की शिकायत हुई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। जांच के दौरान कैंसर की जानकारी सामने आई और पिछले कुछ दिनों में उनकी हालत बिगड़ती चली गई।

    25 सितंबर को मुंबई में होगी अंतिम विदाई

    Mushtaq Khan का अंतिम संस्कार शुक्रवार, 25 सितंबर को मुंबई में किया जाएगा। उनकी अंतिम विदाई Yari Road Kabristan में होगी। वह अपने पीछे पत्नी, एक बेटे और एक बेटी को छोड़ गए हैं।

    ‘Welcome’ के Balu और ‘Gadar’ के Gul Khan से मिली खास पहचान

    Mushtaq Khan ने अपने लंबे करियर में मुख्य भूमिकाओं से ज्यादा supporting और character roles के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई। 2007 की फिल्म ‘Welcome’ में Balu के किरदार ने उन्हें घर-घर पहचान दिलाई। फिल्म में उनका ‘Meri ek taang nakli hai, main hockey ka bahot bada khiladi tha…’ वाला संवाद आज भी उनके सबसे यादगार comic moments में गिना जाता है।

    ‘Gadar: Ek Prem Katha’ में उन्होंने Gul Khan का किरदार निभाया था। 2001 में आई इस फिल्म के बाद वह 2023 में ‘Gadar 2’ में भी इसी franchise का हिस्सा बने। इसके अलावा ‘Aashiqui’ में Rafoo Master, ‘Hum Hain Rahi Pyar Ke’, ‘Dil Hai Ki Manta Nahin’, ‘Sadak’, ‘Jodi No. 1’, ‘Mujhse Shaadi Karogi’, ‘Hera Pheri’, ‘Wanted’, ‘Rowdy Rathore’, ‘Welcome Back’, ‘Stree’, ‘Badhaai Do’ और ‘Stree 2’ जैसी फिल्मों में भी नजर आए।

    1980 से शुरू हुआ था फिल्मी सफर

    Mushtaq Khan ने 1980 में ‘Albert Pinto Ko Gussa Kyon Aata Hai’ से screen debut किया था। इसके बाद उन्होंने फिल्मों के साथ television और theatre में भी काम किया। उनका career चार दशक से ज्यादा समय तक चला और supporting roles में उनकी comic timing, dialogue delivery और अलग अंदाज ने उन्हें लगातार काम दिलाया।

    उनके करियर की खास बात यह रही कि उन्होंने केवल comedy तक खुद को सीमित नहीं रखा। Crime, drama, social और character-based फिल्मों में भी उन्होंने अलग-अलग तरह की भूमिकाएं निभाईं।

    2026 में भी लगातार एक्टिंग कर रहे थे

    निधन से पहले Mushtaq Khan का काम रुका नहीं था। 2026 में उनकी कई फिल्में रिलीज हुईं, जिनमें ‘Bhabiji Ghar Par Hain’, ‘Drop Out’, ‘Hum Angrezon Ke Zamane Ke Jailor Hai’ और ‘Cocaine’ शामिल हैं। ‘Cocaine’ 5 सितंबर 2026 को रिलीज हुई और उपलब्ध filmography में इसे उनकी सबसे हालिया रिलीज फिल्मों में दर्ज किया गया है। कुछ अन्य projects 2026 में completed या under-production status में भी दर्ज हैं।

    यानी अस्पताल में भर्ती होने से कुछ समय पहले तक वह सक्रिय रूप से फिल्मों के लिए काम कर रहे थे।

    Salim Khan की मदद से Mahesh Bhatt तक पहुंचे थे

    Mushtaq Khan ने निधन से करीब एक महीने पहले अपने संघर्ष के दिनों की एक कहानी साझा की थी, जो उनके शुरुआती फिल्मी सफर को समझने के लिए खास है।

    1980 के दशक में वह Mahesh Bhatt के साथ काम करना चाहते थे। Salim Khan की recommendation के जरिए उन्हें Bhatt से मिलने का मौका मिला। उस समय Mushtaq Khan के घर में telephone तक नहीं था। उन्होंने पास के एक किराना दुकानदार से कहा था कि अगर उनके लिए कोई फोन आए तो उन्हें जानकारी दे दें। इसके बदले वह दुकानदार को हर message के लिए 1 रुपये देते थे।

    करीब 15 दिन इंतजार करने के बाद आखिरकार वह संदेश आया जिसका उन्हें इंतजार था। इसके बाद Mahesh Bhatt के साथ उनका professional association आगे बढ़ा और उन्होंने Bhatt की कई फिल्मों में काम किया। यह रिश्ता ‘Kabzaa’ से आगे बढ़कर ‘Aashiqui’, ‘Dil Hai Ki Manta Nahin’, ‘Sadak’, ‘Saathi’, ‘Sir’, ‘Hum Hain Rahi Pyar Ke’, ‘Gumrah’, ‘Naaraaz’ और ‘Chaahat’ जैसी फिल्मों तक पहुंचा।

    2024 में हुआ था Mushtaq Khan का अपहरण

    Mushtaq Khan की जिंदगी के आखिरी वर्षों में एक बड़ी आपराधिक घटना भी जुड़ी रही। नवंबर 2024 में उन्हें एक event में बुलाने के बहाने दिल्ली बुलाया गया और इसके बाद उनका अपहरण कर लिया गया। उन्हें बिजनौर ले जाया गया था, जहां उनसे करीब 2.20 लाख रुपये की फिरौती वसूले जाने का मामला सामने आया था। इसी गिरोह ने बाद में comedian Sunil Pal को भी निशाना बनाया था।

    इस मामले में 2026 में भी पुलिस की कार्रवाई जारी रही। फरवरी में आरोपियों पर Gangster Act के तहत कार्रवाई की गई और कई आरोपियों की गिरफ्तारी हुई। इसके बाद 28 फरवरी को दो और आरोपियों की गिरफ्तारी तथा गिरोह के सरगना के surrender की जानकारी सामने आई। अप्रैल 2026 में मामले में वांछित आरोपी Shashank को भी गिरफ्तार किया गया।

    पुलिस की कार्रवाई के अनुसार इस मामले में कुल 10 आरोपियों पर Gangster Act के तहत कार्रवाई की गई थी। फरवरी में गिरफ्तार किए गए आरोपियों में पूर्व सभासद Sarthak Chaudhary और Ankit Pahadi के नाम भी सामने आए थे।

    आखिरी समय में भी काम और लंबा करियर पीछे छोड़ गए

    Mushtaq Khan ने अपने career में 500 से ज्यादा फिल्मों में काम किया था। उनकी पहचान उन कलाकारों में रही जो मुख्य भूमिका में न होते हुए भी कहानी में अपनी मौजूदगी दर्ज करा देते थे। ‘Welcome’ के Balu से लेकर ‘Gadar’ के Gul Khan और ‘Stree 2’ जैसे बाद के projects तक उनका काम कई पीढ़ियों के दर्शकों तक पहुंचा।

    उनके निधन की खबर के बाद फिल्म और television industry में शोक की लहर है। ‘Welcome’ के निर्देशक Anees Bazmee ने उन्हें याद करते हुए उनके काम और व्यक्तित्व को श्रद्धांजलि दी। अभिनेता Sanjay Mishra ने भी उनके निधन पर दुख जताया और Mushtaq Khan को अपने लिए guardian जैसा बताया। Theatre और television से जुड़े उनके पुराने साथी Ashoke Pandit ने भी उनके साथ लंबे professional संबंध को याद किया।

    56 वर्ष की उम्र में Mushtaq Khan का निधन ऐसे समय हुआ जब वह अब भी अभिनय में सक्रिय थे। उनकी 2026 की फिल्में और निधन से ठीक पहले चल रहा काम उनके लंबे career की आखिरी कड़ी बन गए।

  • Fixed Deposit Interest Rate Comparison: सितंबर 2026 में किस बैंक की FD सबसे ज्यादा ब्याज दे रही?

    Fixed Deposit Interest Rate Comparison: सितंबर 2026 में किस बैंक की FD सबसे ज्यादा ब्याज दे रही?

    Best Bank for FD: सितंबर 2026 में SBI, HDFC, ICICI और Small Finance Banks की FD rates की तुलना करें। जानें 1, 3 और 5 साल की FD, senior citizen rate, tax, DICGC insurance और premature withdrawal के नियम।

    Fixed Deposit Interest Rate Comparison: अगर आप FD कराने की तैयारी कर रहे हैं और कौन सी बैंक फिक्स डिपॉजिट पर ज्यादा ब्याज दे रहा है? जैसे सवाल के जवाब खोज रहे हैं, तो केवल सबसे ज्यादा ब्याज दर देखना पर्याप्त नहीं है। सितंबर 2026 में कुछ Small Finance Banks चुनिंदा अवधि की FD पर 8% से ज्यादा ब्याज दे रहे हैं, जबकि बड़े सरकारी और प्राइवेट बैंकों की दरें अलग हैं। सबसे ज्यादा FD rate किस अवधि पर मिल रही है, senior citizens को कितना फायदा है और FD कराने से पहले DICGC insurance, tax तथा premature withdrawal जैसे नियमों को समझना भी जरूरी है।

    सितंबर 2026 में सबसे ज्यादा FD ब्याज कहां मिल रहा है?

    16 सितंबर 2026 के उपलब्ध comparative data के मुताबिक Suryoday Small Finance Bank ने चुनिंदा tenure में 8.25% तक की FD दर दी। Equitas Small Finance Bank, ESAF Small Finance Bank, Jana Small Finance Bank और Shivalik Small Finance Bank की दरें भी चुनिंदा अवधि में 8% तक पहुंचीं।

    हालांकि यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 8.25% को सभी FD अवधि की दर नहीं समझना चाहिए। उदाहरण के लिए Suryoday की सबसे ऊंची दर एक खास 5-year tenure से जुड़ी थी, जबकि दूसरी अवधि में दर अलग थी। इसी तरह Jana Small Finance Bank की 8% दर 2 से 3 साल की अवधि के लिए थी।

    यानी किसी बैंक की FD को चुनने से पहले ब्याज दर के साथ tenure भी देखना जरूरी है।

    चुनिंदा Small Finance Banks की FD दरें

    बैंकअधिकतम दरकिस अवधि पर
    Suryoday Small Finance Bank8.25%5 साल
    Equitas Small Finance Bank8.00%चुनिंदा अवधि
    ESAF Small Finance Bank8.00%800 दिन
    Jana Small Finance Bank8.00%2–3 साल
    Shivalik Small Finance Bank8.00%चुनिंदा अवधि

    दरें उपलब्ध 16 सितंबर 2026 के comparative data के आधार पर हैं। FD कराने से पहले संबंधित बैंक की वर्तमान दर और शर्तें जरूर जांचें।

    SBI, HDFC और दूसरे बड़े बैंकों की FD दरों से तुलना क्यों जरूरी है?

    FD चुनने वाला ग्राहक अक्सर सबसे पहले SBI, HDFC Bank, ICICI Bank और Axis Bank जैसे बड़े बैंकों की दर देखता है। लेकिन Small Finance Banks की कुछ special-tenure FD दरें इन बड़े बैंकों की सामान्य retail FD दरों से ज्यादा हो सकती हैं।

    उदाहरण के लिए HDFC Bank की आधिकारिक rate page पर 22 सितंबर 2026 के लिए अलग-अलग deposit slabs और tenures की दरें दी गई हैं। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि FD rate केवल बैंक के नाम से तय नहीं होती, बल्कि राशि, अवधि और FD के प्रकार के अनुसार बदल सकती है।

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    इसलिए “कौन सा बैंक सबसे अच्छा है?” का जवाब केवल एक highest-rate number देखकर देना सही नहीं होगा।

    1 साल, 3 साल या 5 साल—किस FD में कितना फर्क पड़ता है?

    FD की ब्याज दर tenure के साथ बदलती है। हालिया comparison में कई Small Finance Banks की 1-year और 3-year rates में काफी अंतर दिखाई देता है। उदाहरण के लिए Jana Small Finance Bank की उपलब्ध दर 1-year tenure के लिए 7% और 3-year tenure के लिए 8% थी, जबकि 5-year tenure पर यह 7.77% थी।

    इसका मतलब है कि अगर आपको केवल एक साल के लिए पैसा रखना है, तो 5-year FD की headline rate देखकर बैंक चुनना उपयोगी नहीं होगा।

    FD चुनते समय पहले अपनी जरूरत की अवधि तय करें और फिर उसी अवधि की दरों की तुलना करें।

    501 दिन की FD पर भी मिल सकता है ज्यादा ब्याज

    FD comparison में केवल 1, 2, 3 और 5 साल की अवधि देखना भी पर्याप्त नहीं है। कुछ बैंक special tenure FD लेकर आते हैं।

    Unity Small Finance Bank की उपलब्ध revised rates में 501-day FD पर सामान्य ग्राहकों के लिए 8% और senior citizens के लिए 8.50% की दर बताई गई है। बैंक ने premature withdrawal पर 1% penalty की शर्त भी बताई है।

    यही वजह है कि FD की तुलना करते समय special tenure को भी देखना चाहिए।

    Senior Citizens के लिए FD में कितना ज्यादा ब्याज?

    Senior citizens को कई बैंक सामान्य ग्राहकों की तुलना में अतिरिक्त ब्याज देते हैं। हालिया market comparisons में कुछ Small Finance Banks की senior-citizen rates 8% से ऊपर रही हैं।

    कुछ special-tenure products में senior citizens के लिए दर 8.50% तक पहुंची है। Unity Small Finance Bank की 501-day FD इसका एक उदाहरण है।

    इसलिए 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के निवेशक को सामान्य FD rate के बजाय senior citizen FD rate अलग से देखनी चाहिए।

    Income Tax Department के अनुसार tax purposes के लिए 60 वर्ष या उससे अधिक लेकिन 80 वर्ष से कम उम्र का resident individual senior citizen और 80 वर्ष या उससे अधिक उम्र का व्यक्ति super senior citizen माना जाता है।

    FD पर 8.50% ब्याज दिख रहा है तो क्या पूरा पैसा सुरक्षित है?

    यहां FD rate के साथ deposit insurance समझना बेहद जरूरी है।

    DICGC के अनुसार eligible bank deposits में एक depositor को एक bank में, एक ही right और capacity में principal और interest मिलाकर अधिकतम ₹5 लाख तक insurance cover मिलता है। एक ही बैंक की अलग-अलग branches में रखे deposits को insurance calculation के लिए जोड़ा जाता है।

    उदाहरण के लिए, केवल अलग-अलग branches में FD खोलने से insurance limit अलग-अलग ₹5 लाख नहीं हो जाती।

    इसलिए बड़ी राशि की FD करते समय केवल ब्याज दर नहीं, बल्कि deposit insurance structure को भी समझना जरूरी है।

    FD तोड़ने पर क्या होगा?

    अगर FD को maturity से पहले बंद किया जाता है, तो बैंक की applicable premature withdrawal policy लागू होती है। इसमें ब्याज की गणना अलग दर पर हो सकती है और penalty भी लग सकती है।

    उदाहरण के तौर पर Unity Small Finance Bank ने अपनी 501-day FD के लिए premature withdrawal पर 1% penalty का उल्लेख किया है।

    इसलिए FD खोलने से पहले यह जरूर देखें:

    • premature withdrawal allowed है या नहीं
    • penalty कितनी है
    • ब्याज किस rate से calculate होगा
    • partial withdrawal की सुविधा है या नहीं
    • auto-renewal की शर्त क्या है

    FD के ब्याज पर टैक्स लगता है?

    FD का interest सामान्य तौर पर taxable income के दायरे में आता है। इसलिए केवल FD rate देखकर वास्तविक return का अंदाजा नहीं लगाना चाहिए।

    Senior citizens के लिए Income Tax Department के अनुसार Section 80TTB के तहत eligible deposit interest पर ₹50,000 तक deduction उपलब्ध है। इसमें bank और post office के साथ cooperative banks के deposits से मिलने वाला interest भी शामिल है।

    Income Tax Department यह भी बताता है कि senior citizen को bank, post office या cooperative bank द्वारा interest payment पर ₹50,000 तक की सीमा के भीतर TDS नहीं काटा जाता। TDS नहीं कटना और interest का tax-free होना एक ही बात नहीं है।

    Tax-saving FD और सामान्य FD में क्या अंतर है?

    अगर आपका उद्देश्य tax saving है, तो सामान्य FD और tax-saving FD को एक जैसा नहीं समझना चाहिए।

    Tax-saving FD में आम तौर पर 5 साल का lock-in होता है और eligible investment पर Section 80C के तहत tax benefit मिल सकता है। लेकिन इसकी liquidity सामान्य FD जैसी नहीं होती।

    इसलिए अगर आपको अगले एक-दो साल में पैसे की जरूरत पड़ सकती है, तो केवल tax benefit देखकर ऐसी FD चुनना उचित नहीं होगा।

    Bank FD या Post Office Time Deposit?

    FD की तुलना केवल banks के बीच करने से पूरी तस्वीर नहीं मिलती। Post Office Time Deposit भी conservative savers के लिए एक अलग विकल्प है।

    इसलिए final decision से पहले इन बातों की तुलना की जा सकती है:

    Bank FD: बैंक की FD rate, tenure, premature withdrawal rules और applicable deposit insurance देखें।

    Post Office Time Deposit: संबंधित अवधि की सरकारी small-savings rate और उसके नियम देखें।

    इस comparison में सिर्फ headline interest rate नहीं, बल्कि tenure और liquidity को समान आधार पर देखना जरूरी है।

    अगर ₹5 लाख FD में लगाएं तो क्या देखें?

    मान लीजिए आपके पास ₹5 लाख हैं। दो FD में केवल 1 percentage point का rate difference दिखाई देता है। तब भी actual maturity amount में अंतर आएगा।

    लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण बात है: FD का final maturity amount compounding frequency, payout option, tenure और bank की calculation methodology पर निर्भर कर सकता है।

    इसलिए किसी भी FD में ₹5 लाख लगाने से पहले बैंक के official maturity calculator या deposit terms से final maturity amount verify करना बेहतर है।

    FD चुनते समय ये 7 चीजें जरूर देखें

    1. Interest rate — केवल highest rate नहीं, अपने tenure की rate देखें।
    2. Tenure — 1, 2, 3, 5 साल या special tenure में क्या जरूरत है।
    3. Premature withdrawal — FD समय से पहले तोड़ने पर penalty और interest rule।
    4. Senior citizen benefit — लागू होने पर अतिरिक्त ब्याज।
    5. Tax impact — interest income पर tax और TDS rules।
    6. DICGC cover — eligible deposits पर ₹5 लाख तक insurance limit।
    7. Liquidity — पैसा बीच में चाहिए तो कौन-सी FD सुविधा उपलब्ध है।

    तो कौन सा बैंक FD के लिए सबसे अच्छा है?

    इसका जवाब केवल एक बैंक के नाम से नहीं दिया जा सकता। सितंबर 2026 के उपलब्ध data में अलग-अलग banks की highest FD rates अलग-अलग tenures पर हैं। Suryoday Small Finance Bank की 8.25% दर 5-year tenure से जुड़ी थी, जबकि Jana Small Finance Bank की 8% दर 2–3 साल की अवधि पर थी। Unity Small Finance Bank ने 501-day FD पर सामान्य ग्राहकों के लिए 8% और senior citizens के लिए 8.50% की दर बताई है।

    इसलिए FD चुनने का तरीका यह होना चाहिए:

    पहले तय करें पैसा कितने समय के लिए रखना है → फिर उसी tenure की rates compare करें → senior citizen benefit देखें → premature withdrawal और tax rules देखें → अंत में deposit insurance और बैंक की applicable terms जांचें।

    यानी “सबसे ज्यादा FD rate” और “आपके लिए सही FD” हमेशा एक ही चीज नहीं होती।

    जरूरी नोट

    FD interest rates बैंक द्वारा समय-समय पर बदली जा सकती हैं। ऊपर दिए गए rates संबंधित उपलब्ध तारीखों के market/official data पर आधारित हैं। FD खोलने से पहले संबंधित बैंक की official website या branch से उस दिन लागू interest rate, tenure, premature withdrawal, tax और अन्य terms की पुष्टि जरूर करें।

  • ₹11 के IV सेट की ₹325 MRP, 2,841% का अंतर; केंद्र ने अस्पतालों से मांगा कीमतों का हिसाब

    ₹11 के IV सेट की ₹325 MRP, 2,841% का अंतर; केंद्र ने अस्पतालों से मांगा कीमतों का हिसाब

    महाराष्ट्र FDA के सर्वे में IV सेट, सिरिंज और कैथेटर की खरीद कीमत और MRP में भारी अंतर मिला। केंद्र ने अब मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतों पर समीक्षा शुरू की।

    मुंबई: महाराष्ट्र में अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले जरूरी मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतों में सामने आया बड़ा अंतर अब केंद्र सरकार की निगरानी तक पहुंच गया है। महाराष्ट्र FDA के सर्वे में एक IV इन्फ्यूजन सेट 11.05 रुपये की ट्रेड कीमत पर मिलने के बावजूद 325 रुपये की छपी MRP वाला पाया गया। इस अंतर को 2,841 प्रतिशत तक बताया गया है। इसके बाद अब केंद्र सरकार अस्पतालों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतों को तर्कसंगत बनाने पर चर्चा कर रही है। हालांकि, सभी मेडिकल कंज्यूमेबल्स पर एक समान कीमत सीमा लागू करने का अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

    IV सेट से सिरिंज और कैथेटर तक बड़ी कीमत तफावत

    महाराष्ट्र FDA के जुलाई 2026 के सर्वे में मुंबई महानगर क्षेत्र, पुणे और छत्रपति संभाजीनगर के अस्पतालों में भर्ती मरीजों के इलाज के दौरान इस्तेमाल होने वाली मेडिकल वस्तुओं की कीमतों की जांच की गई। जांच में ट्रेड या खरीद कीमत और छपी MRP के बीच कई मामलों में बड़ा अंतर सामने आया।

    सबसे बड़ा उदाहरण IV इन्फ्यूजन सेट का है। इसकी ट्रेड कीमत 11.05 रुपये मिली, जबकि उस पर MRP 325 रुपये छपी थी। इसी तरह 6.75 रुपये में खरीदी गई 10 एमएल सिरिंज की MRP 57.20 रुपये और 29.41 रुपये की खरीद कीमत वाले कैथेटर की MRP 310 रुपये पाई गई।

    सर्वे में IV सेट, सिरिंज, कैथेटर, नेब्युलाइजर, ऑक्सीजन मास्क और अन्य मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतों को देखा गया। कुछ अन्य वस्तुओं में भी खरीद कीमत और MRP के बीच काफी अंतर पाया गया।

    2,841 प्रतिशत का आंकड़ा आखिर बताता क्या है?

    यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। 11.05 रुपये की ट्रेड कीमत और 325 रुपये की MRP के बीच 2,841 प्रतिशत का अंतर है, लेकिन इसका अर्थ यह सीधे नहीं है कि पूरा अंतर अस्पताल का शुद्ध मुनाफा है।

    किसी मेडिकल वस्तु की अंतिम कीमत तक पहुंचने में निर्माता, आयातक, वितरक, स्टॉकिस्ट और अस्पताल जैसे अलग-अलग स्तर शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा अस्पतालों की ओर से स्टोरेज, स्टेराइल हैंडलिंग, इन्वेंटरी, संक्रमण नियंत्रण और अन्य संचालन लागतों का भी तर्क दिया जाता है। इसी वजह से केंद्र अब अस्पतालों और दूसरे हितधारकों से कीमत और बिलिंग की पूरी व्यवस्था समझने की कोशिश कर रहा है।

    इसलिए सामने आया 2,841 प्रतिशत का आंकड़ा मुख्य रूप से खरीद कीमत और घोषित MRP के बीच के अंतर को दिखाता है। इसे हर मामले में सीधे अस्पताल के मुनाफे के बराबर मानना सही नहीं होगा।

    तुकाराम मुंढे ने केंद्र से क्या मांग की?

    महाराष्ट्र FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे ने इस कीमत अंतर के बाद केंद्रीय औषध विभाग और राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण यानी NPPA के सामने मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतों की समीक्षा का मुद्दा उठाया है।

    उनकी मांग में ट्रेड मार्जिन के लिए स्पष्ट व्यवस्था, जरूरी मेडिकल उपकरणों की कीमतों की निगरानी और खरीद कीमत तथा घोषित MRP के बीच स्वीकार्य अंतर को लेकर स्पष्ट दिशानिर्देश की जरूरत शामिल है। उन्होंने यह भी मुद्दा उठाया कि इलाज के दौरान इस्तेमाल होने वाली किसी वस्तु की वास्तविक खरीद कीमत मरीज को आमतौर पर पता नहीं होती।

    महाराष्ट्र FDA ने अस्पतालों की बिलिंग दरें तय करने का अधिकार अपने स्तर पर होने का दावा नहीं किया है। मुद्दा मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमत निर्धारण व्यवस्था और उसके नियमन से जुड़ा है।

    अब केंद्र सरकार ने क्या कदम उठाया?

    मामले के सामने आने के बाद केंद्र ने NPPA से कीमतों में इस तरह के अंतर को लेकर रिपोर्ट मांगी है। इसके साथ ही अस्पतालों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ consultation की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की गई है। इसका उद्देश्य यह समझना है कि मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमत और मार्जिन तय करते समय अस्पतालों की वास्तविक लागत, सप्लाई चेन और मरीजों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।

    19 सितंबर तक स्थिति यह है कि सभी मेडिकल कंज्यूमेबल्स पर एक समान price cap लगाने का अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। आगे का नियामक फैसला अलग-अलग उत्पादों और उनकी कीमत संरचना की समीक्षा के बाद लिया जाना है।

    क्या हर मेडिकल डिवाइस की कीमत NPPA तय करता है?

    नहीं। मेडिकल डिवाइस के लिए मौजूदा नियामक व्यवस्था अलग-अलग श्रेणियों में काम करती है।

    NPPA के अनुसार कुछ मेडिकल डिवाइस price-control व्यवस्था के तहत आते हैं, जबकि अन्य non-scheduled medical devices के मामले में सीधे ceiling price तय नहीं होता। DPCO 2013 के तहत ऐसे non-scheduled products की MRP में एक साल में 10 प्रतिशत से ज्यादा वृद्धि की निगरानी का प्रावधान है। कुछ विशेष मामलों में NPPA ने non-scheduled medical devices की कीमत या ट्रेड मार्जिन को भी नियंत्रित किया है।

    इससे मौजूदा विवाद का मूल सवाल सामने आता है कि जिन जरूरी hospital consumables पर सीधी ceiling price व्यवस्था नहीं है, उनमें खरीद कीमत और MRP के बीच कितना अंतर उचित माना जाए।

    पहले भी मेडिकल उपकरणों की कीमतों पर हस्तक्षेप हो चुका है

    मेडिकल डिवाइस की कीमतों को लेकर सरकारी हस्तक्षेप नया नहीं है। NPPA ने coronary stents और knee implants की कीमतों को नियंत्रित किया है। कोविड काल में oxygen concentrators, pulse oximeters, blood pressure monitoring machines, nebulisers, digital thermometers और glucometers समेत छह मेडिकल डिवाइस पर 70 प्रतिशत तक trade margin की सीमा लागू की गई थी।

    NPPA के पुराने दस्तावेजों में यह भी दर्ज है कि कुछ मेडिकल डिवाइस में अस्पतालों को कम कीमत पर उत्पाद मिलने और मरीजों की बिलिंग में छपी MRP के इस्तेमाल के बीच अंतर pricing regulation के लिए चिंता का विषय रहा है।

    अस्पतालों की कीमत में क्या-क्या शामिल हो सकता है?

    मेडिकल कंज्यूमेबल की खरीद कीमत और मरीज से लिया गया अंतिम शुल्क हमेशा एक ही चीज नहीं होता। अस्पतालों की ओर से उपचार की पूरी व्यवस्था में स्टोरेज, स्टेराइल प्रोसेसिंग, संक्रमण नियंत्रण, नर्सिंग, इन्वेंटरी और बर्बादी जैसी लागतों को ध्यान में रखने की बात कही गई है।

    इसी वजह से आगे होने वाली सरकारी चर्चा में केवल MRP और खरीद कीमत की तुलना के बजाय पूरे pricing chain और hospital billing structure को देखना महत्वपूर्ण होगा।

    दूसरे राज्यों से भी सामने आईं ऐसी चिंताएं

    यह मुद्दा केवल महाराष्ट्र तक सीमित रहने के संकेत नहीं दे रहा है। पंजाब, राजस्थान और तमिलनाडु के औषध नियंत्रण तंत्र से भी मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतों से जुड़ी समान शिकायतें या representations मिलने की बात सामने आई है। ऐसे में मामला राष्ट्रीय स्तर पर मेडिकल डिवाइस pricing framework की समीक्षा तक पहुंच सकता है।

    हालांकि, महाराष्ट्र के सर्वे में सामने आए 2,841 प्रतिशत के आंकड़े को पूरे देश के सभी अस्पतालों या सभी मेडिकल कंज्यूमेबल्स पर लागू करना सही नहीं होगा।

    मरीजों के लिए सबसे अहम सवाल क्या है?

    अस्पताल में भर्ती मरीज के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बिल में इस्तेमाल की गई वस्तु का नाम, मात्रा, MRP और बिल की गई राशि स्पष्ट हो। किसी मेडिकल कंज्यूमेबल की खरीद कीमत और मरीज से ली गई राशि में बड़ा अंतर होने की स्थिति में itemised bill और संबंधित विवरण देखना मरीज के लिए उपयोगी हो सकता है।

    लेकिन 11.05 रुपये की खरीद कीमत और 325 रुपये की MRP सामने आने का मतलब यह भी नहीं है कि हर अस्पताल हर मरीज से उसी MRP पर पैसा ले रहा है। वास्तविक बिलिंग अस्पताल की व्यवस्था, पैकेज, बीमा और इस्तेमाल की गई वस्तुओं के आधार पर अलग हो सकती है।

    अब आगे क्या होगा?

    महाराष्ट्र FDA के सर्वे और तुकाराम मुंढे की पहल के बाद मामला अब केंद्र के स्तर पर पहुंच चुका है। NPPA से रिपोर्ट, अस्पतालों और अन्य stakeholders के साथ consultation तथा मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतों और मार्जिन की समीक्षा अगले चरण हैं।

    आगे की चुनौती यह तय करने की होगी कि जरूरी मेडिकल कंज्यूमेबल्स के लिए कीमतों की निगरानी किस तरह की जाए, खरीद कीमत और MRP के बीच कितना अंतर स्वीकार्य हो, supply chain में किस स्तर पर मार्जिन जोड़ा जा रहा है और मरीजों के लिए बिलिंग में कितनी पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।

    फिलहाल 11.05 रुपये के IV सेट की 325 रुपये MRP और 2,841 प्रतिशत के अंतर ने अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली छोटी दिखने वाली लेकिन बड़ी संख्या में इस्तेमाल होने वाली मेडिकल वस्तुओं की कीमतों को राष्ट्रीय नियामक बहस के केंद्र में ला दिया है।

  • Salman Khan का Katrina Kaif की ट्रोलिंग पर बयान, Bigg Boss 20 में trolls को कहा ‘parasites’

    Salman Khan का Katrina Kaif की ट्रोलिंग पर बयान, Bigg Boss 20 में trolls को कहा ‘parasites’

    Katrina Kaif की पोस्ट-प्रेग्नेंसी बॉडी शेमिंग के बीच Salman Khan ने Bigg Boss 20 में trolling, age-shaming और paparazzi culture पर सवाल उठाए।

    मुंबई: Salman Khan ने Bigg Boss 20 के Weekend Ka Vaar में सोशल मीडिया trolling, body-shaming और celebrity privacy को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। उनका यह बयान Katrina Kaif की पोस्ट-प्रेग्नेंसी appearance को लेकर चल रही ऑनलाइन ट्रोलिंग के बीच आया है। हालांकि Salman ने Katrina का नाम नहीं लिया, लेकिन pregnancy के बाद महिलाओं के बढ़े वजन को लेकर किए जाने वाले comments पर उन्होंने सवाल उठाया। इसी दौरान उन्होंने लगातार celebrities की शक्ल-सूरत पर निजी टिप्पणियां करने वाले trolls को ‘parasites’ भी कहा।

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    Katrina Kaif की पोस्ट-प्रेग्नेंसी बॉडी पर क्यों शुरू हुई ट्रोलिंग

    Katrina Kaif 14 सितंबर को अपने पति Vicky Kaushal के साथ Mumbai में Ambani परिवार के Ganesh Chaturthi समारोह में नजर आई थीं। बेटे Vihaan के जन्म के बाद यह उनकी चर्चित सार्वजनिक appearances में से एक थी। इसके बाद सोशल मीडिया पर कुछ users ने उनकी पुरानी तस्वीरों से तुलना करते हुए उनके वजन और appearance पर टिप्पणियां शुरू कर दीं। Fans ने इन comments को body-shaming बताते हुए Katrina का बचाव किया।

    Katrina और Vicky Kaushal ने 7 नवंबर 2025 को अपने बेटे Vihaan का स्वागत किया था। मां बनने के बाद Katrina ने फिल्मों से दूरी बनाए रखते हुए अपने परिवार और Kay Beauty से जुड़े काम पर ध्यान दिया है।

    Salman Khan ने Katrina का नाम लिए बिना क्या कहा?

    Bigg Boss 20 के Weekend Ka Vaar में Salman Khan ने pregnancy और motherhood के बाद महिलाओं के शरीर में होने वाले बदलावों को लेकर की जाने वाली trolling पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि किसी महिला को pregnant होने या मां बनने के कारण troll क्यों किया जाना चाहिए। Salman ने यह भी कहा कि जब कोई महिला दोबारा काम पर लौटेगी तो अपने तरीके से fitness पर ध्यान दे सकती है।

    इस बयान को Katrina Kaif की मौजूदा controversy से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन यह स्पष्ट है कि Salman ने अपने segment में Katrina का नाम नहीं लिया। इसलिए इसे सीधे तौर पर “Salman ने Katrina के trolls को जवाब दिया” कहना पूरी तरह सटीक नहीं होगा।

    ‘Parasites’ किसे कहा Salman ने?

    Salman का ‘parasites’ वाला बयान भी इसी broader trolling discussion का हिस्सा था। उन्होंने उन लोगों पर निशाना साधा जो celebrities की शक्ल, शरीर, उम्र और निजी जिंदगी को लगातार online comments का विषय बनाते हैं।

    उन्होंने अपनी appearance को लेकर होने वाली trolling का भी जिक्र किया। Salman ने बताया कि उनके वजन, उम्र और looks को लेकर comments किए जाते हैं। इसके बाद उन्होंने मंच पर अपना hat और jacket उतारा और अपने शरीर को लेकर होने वाली टिप्पणियों का सामना करने का अंदाज दिखाया।

    Salman ने खुद की उम्र को लेकर भी कहा कि वह 60 साल के हो चुके हैं और उनसे हमेशा वही appearance बनाए रखने की उम्मीद नहीं की जा सकती जो उनकी शुरुआती फिल्मों के दौर में थी। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि किसी के काम को पसंद नहीं करना अलग बात है, लेकिन उस व्यक्ति पर व्यक्तिगत हमला करना अलग है।

    ScoutOP और Arishfa Khan के विवाद से शुरू हुई चर्चा

    Weekend Ka Vaar में trolling की चर्चा ScoutOP और Arishfa Khan से जुड़े विवाद के संदर्भ में भी हुई। Salman ने ScoutOP की online comments और gaming community से जुड़ी बातों को लेकर सवाल उठाए और इसके बाद चर्चा celebrity trolling तथा सोशल मीडिया behaviour तक पहुंच गई।

    Salman ने पुराने एक मामले का भी जिक्र किया, जिसमें उनके मुताबिक एक व्यक्ति लगातार सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक comments करता था और cyber cell की मदद से उसकी पहचान तक पहुंची थी। Salman ने anonymous accounts के पीछे छिपकर लोगों पर निजी टिप्पणियां करने की मानसिकता पर सवाल उठाया।

    Sohail Khan और Varun Sharma का भी आया जिक्र

    Salman ने केवल अपनी trolling की बात नहीं की। उन्होंने Sohail Khan और Varun Sharma जैसे लोगों की appearance पर किए जाने वाले comments का भी संदर्भ दिया। उनका कहना था कि किसी के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताना अलग बात है, लेकिन किसी की शक्ल या शरीर का मजाक बनाना अलग मामला है।

    Paparazzi culture पर भी भड़के Salman Khan

    Salman का निशाना सिर्फ social media trolls तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने कुछ paparazzi द्वारा female celebrities की ऐसी तस्वीरें लेने पर सवाल उठाया जिनमें कैमरे का focus उनके शरीर के खास हिस्सों पर होता है।

    इस दौरान Salman ने actresses और अपने परिवार की महिलाओं से जुड़े experiences का भी जिक्र किया। उन्होंने सवाल उठाया कि किसी celebrity का सार्वजनिक स्थान पर होना क्या उसकी privacy और dignity खत्म कर देता है।

    उन्होंने दर्शकों और celebrities के रिश्ते को लेकर भी कहा कि फिल्म की ticket खरीदने का मतलब किसी actor की निजी जिंदगी पर अधिकार मिल जाना नहीं है। उनका तर्क था कि दर्शक फिल्म के काम को पसंद या नापसंद कर सकते हैं, लेकिन इससे व्यक्तिगत अपमान का अधिकार नहीं मिलता।

    Katrina Kaif ने खुद क्या कहा?

    Katrina Kaif ने इस specific body-shaming controversy पर सीधे तौर पर trolls को जवाब नहीं दिया है। हालांकि इसी दौरान उन्होंने pregnancy के बाद अपने शरीर और skin में हुए बदलावों तथा beauty को लेकर अपनी बदलती सोच पर बात की।

    एक interview में Katrina ने बताया कि pregnancy के बाद उनकी skin पहले से ज्यादा sensitive हो गई और उन्हें अपने लिए suitable skincare products तलाशने पड़े। उन्होंने यह भी कहा कि अब उनके लिए “looking my best” का मतलब सिर्फ बाहर से अच्छा दिखना नहीं, बल्कि भीतर से healthy और अच्छा महसूस करना है।

    Katrina ने balanced diet, active रहने, meditation, सुबह कुछ समय phone से दूर रहने और natural light लेने जैसी अपनी daily habits का भी जिक्र किया। उन्होंने परिवार और दोस्तों के साथ downtime को भी अपने लिए महत्वपूर्ण बताया।

    Hrithik Roshan और Ali Zafar ने भी दिखाई प्रतिक्रिया

    Katrina की appearance पर शुरू हुई body-shaming के बीच Hrithik Roshan ने Katrina के बचाव में लिखी गई एक social media post को like किया। Hrithik की ओर से इस मामले पर कोई अलग विस्तृत बयान सामने नहीं आया, इसलिए उनके reaction को post like करने तक सीमित रखना सही है।

    वहीं Katrina के Mere Brother Ki Dulhan co-star Ali Zafar ने खुलकर body-shaming की आलोचना की। उन्होंने महिलाओं के लिए एक तय beauty standard की अपेक्षा को गलत बताते हुए लोगों से दूसरों की परिस्थितियों को समझने और अधिक empathy के साथ व्यवहार करने की अपील की।

    Karishma Tanna ने भी postpartum body पर रखी अपनी बात

    इसी controversy के बीच Karishma Tanna ने अपने postpartum body को लेकर सोशल मीडिया पर खुलकर बात की। उन्होंने अपने शरीर में childbirth के बाद आए बदलावों को स्वीकार करने की बात कही और महिलाओं को दुनिया की expectations के कारण अपने शरीर को लेकर शर्म महसूस न करने का संदेश दिया।

    इससे Katrina Kaif की controversy केवल एक celebrity की appearance तक सीमित नहीं रही, बल्कि motherhood के बाद महिलाओं के शरीर को लेकर बनाए जाने वाले beauty standards पर भी चर्चा तेज हुई है।

    Post-pregnancy appearance को लेकर इतनी चर्चा क्यों?

    Pregnancy और childbirth के बाद शरीर में बदलाव होना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है। वजन, skin, hormones, sleep pattern और शरीर की overall appearance में बदलाव अलग-अलग महिलाओं में अलग तरह से दिखाई दे सकते हैं। इसलिए किसी celebrity की तस्वीर देखकर उसके स्वास्थ्य या recovery के बारे में निष्कर्ष निकालना सही नहीं है।

    Katrina की अपनी हालिया बातचीत भी इसी बदलाव की ओर इशारा करती है। उन्होंने pregnancy के बाद अपनी sensitive skin और बदलती self-care जरूरतों के बारे में बात की है, लेकिन उन्होंने अपने वर्तमान वजन को लेकर कोई specific medical explanation नहीं दिया है।

    Salman Khan की टिप्पणी के बाद अब मामला सिर्फ Katrina Kaif तक सीमित नहीं

    Bigg Boss 20 में Salman Khan की टिप्पणी ने Katrina Kaif की ongoing body-shaming controversy को एक बड़े celebrity-trolling debate से जोड़ दिया है। इसमें social media comments, age-shaming, body-shaming, anonymous trolling और paparazzi द्वारा privacy की सीमाओं का सवाल शामिल हो गया है।

    फिलहाल Katrina ने इस specific trolling controversy पर कोई सीधा जवाब नहीं दिया है। वहीं Salman Khan का बयान, Hrithik Roshan का defending post को like करना, Ali Zafar की प्रतिक्रिया और Karishma Tanna की postpartum body पर टिप्पणी ने इस मुद्दे को लगातार चर्चा में बनाए रखा है।

    Bigg Boss 20 का Weekend Ka Vaar इसी वजह से Salman Khan के trolling पर दिए गए बयान, Katrina Kaif की post-pregnancy controversy और celebrity privacy को लेकर उनकी टिप्पणियों के कारण चर्चा में है।

  • SIR में नाम हटने के बाद Sahida Fakir को Bangladesh भेजने का आरोप, Supreme Court ने Centre से जवाब मांगा

    SIR में नाम हटने के बाद Sahida Fakir को Bangladesh भेजने का आरोप, Supreme Court ने Centre से जवाब मांगा

    SIR में वोटर लिस्ट से नाम हटने के बाद Sahida Fakir को Mumbai से Bangladesh भेजने के आरोप पर Supreme Court ने Centre से जवाब मांगा। जानिए पूरा मामला।

    नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की Sahida Fakir को मुंबई से Bangladesh भेजे जाने के मामले में Supreme Court ने गुरुवार, 17 सितंबर 2026 को केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। Sahida के बेटे Sahin Fakir ने अदालत में याचिका दाखिल कर अपनी मां को भारत वापस लाने और उनके खिलाफ किसी भी प्रतिकूल कार्रवाई से सुरक्षा की मांग की है।

    Chief Justice of India Surya Kant, Justice Joymalya Bagchi और Justice V. Mohana की तीन सदस्यीय पीठ ने मामले की सुनवाई की। याचिकाकर्ता की ओर से Senior Advocate S. Muralidhar पेश हुए। मामला Sahin Fakir v. Union of India & Ors., WP(Crl) No. 372/2026 के रूप में सामने आया है।

    याचिका में Sahida Fakir को भारतीय नागरिक बताया गया है। उनके बेटे के अनुसार उनका स्थायी संबंध उत्तर 24 परगना, पश्चिम बंगाल के Gobindapur से है। परिवार का कहना है कि उनके दादा Badshah Gazi का नाम 1952 की मतदाता सूची में और माता-पिता के नाम 2002 की मतदाता सूची में दर्ज रहे हैं।

    Sahida करीब 20 साल पहले अपने पति के साथ काम की तलाश में मुंबई आई थीं और यहां घरेलू कामगार के रूप में काम कर रही थीं। याचिका के अनुसार 19 जुलाई 2026 को कुछ लोग, जिन्होंने खुद को पुलिसकर्मी बताया, उन्हें मुंबई में अपने साथ ले गए। उन्हें Chembur के एक holding centre में रखा गया और उनका Aadhaar कार्ड तथा मोबाइल फोन भी कथित तौर पर ले लिया गया।

    परिवार का आरोप है कि Sahida को 100 घंटे से अधिक समय तक हिरासत में रखा गया और इस दौरान उन्हें किसी Judicial Magistrate के सामने पेश नहीं किया गया। याचिका में यह भी कहा गया है कि उन्हें हिरासत के आधार की जानकारी और परिवार से संपर्क का प्रभावी अवसर नहीं मिला।

    इसके बाद Sahida को Border Security Force (BSF) को सौंपे जाने और करीब 20 अन्य लोगों के साथ उत्तर-पूर्वी क्षेत्र की ओर ले जाकर Bangladesh सीमा के पार भेजे जाने का आरोप लगाया गया है। याचिका में कहा गया है कि इसके बाद Sahida ने Bangladesh में अपनी मौजूदगी की जानकारी परिवार तक पहुंचाई और फिलहाल अस्थायी मानवीय आश्रय में रह रही हैं।

    SIR में नाम हटने का मामला क्या है?

    Sahida के मामले में सबसे महत्वपूर्ण कानूनी सवाल उनकी मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर है। याचिका के अनुसार Special Intensive Revision यानी SIR के दौरान उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया और इस फैसले के खिलाफ उनकी अपील लंबित है।

    परिवार का कहना है कि मतदाता सूची से नाम हटना अपने आप किसी व्यक्ति की भारतीय नागरिकता समाप्त होने का फैसला नहीं है। Supreme Court ने भी 17 जुलाई 2026 को West Bengal SIR से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया था कि electoral roll से नाम हटने का मतलब अपने आप नागरिकता खत्म होना नहीं है। अदालत ने यह भी कहा था कि नागरिकता तय करने का अंतिम अधिकार Election Commission के पास नहीं है।

    यही बिंदु Sahida Fakir की याचिका में भी महत्वपूर्ण है। याचिका में कहा गया है कि उनकी नागरिकता पर अंतिम निर्णय हुए बिना और SIR से नाम हटाने के खिलाफ उनकी अपील लंबित रहते हुए उन्हें Bangladesh भेज दिया गया।

    परिवार ने कौन से दस्तावेज बताए?

    याचिका में Sahida की भारतीय पहचान और पारिवारिक पृष्ठभूमि के समर्थन में कई दस्तावेजों का उल्लेख किया गया है। इनमें पुराने electoral records के अलावा पहचान और नागरिक दस्तावेज शामिल हैं।

    पहले सामने आए दस्तावेजों में 2008 का voter identity card, 1988 का birth certificate, school certificate और Gobindapur में जमीन से जुड़े दस्तावेज शामिल बताए गए हैं। परिवार का कहना है कि इन दस्तावेजों को अधिकारियों के सामने रखा गया था।

    हालांकि, इन दस्तावेजों का उल्लेख याचिका और परिवार के दावों के संदर्भ में है। Supreme Court ने अभी Sahida की नागरिकता पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है।

    याचिका में deportation प्रक्रिया पर भी सवाल

    Sahida के बेटे की याचिका केवल उनकी मां को वापस लाने तक सीमित नहीं है। इसमें 2 मई 2025 को जारी उस Standard Operating Procedure (SOP) को भी चुनौती दी गई है, जो कथित अवैध Bangladeshi nationals और Rohingya के deportation की प्रक्रिया से संबंधित है।

    याचिका में Immigration and Foreigners Order, 2025 के कुछ प्रावधानों को भी चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि किसी व्यक्ति को विदेशी या अवैध प्रवासी मानकर देश से बाहर भेजने से पहले उसकी nationality की उचित verification और कानूनी प्रक्रिया जरूरी है।

    याचिका में विशेष रूप से SOP के Para 9(iv) और Immigration and Foreigners Order, 2025 के Para 12(4)(C) के बीच प्रक्रिया संबंधी अंतर का मुद्दा उठाया गया है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि Sahida के मामले में nationality verification और उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया।

    Supreme Court ने अभी क्या आदेश दिया है?

    इस स्तर पर Supreme Court ने केवल केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने अभी यह घोषित नहीं किया है कि Sahida भारतीय नागरिक हैं, उनका Bangladesh भेजा जाना अवैध था या उन्हें तत्काल भारत वापस लाने का अंतिम आदेश दिया गया है।

    अदालत के सामने फिलहाल याचिकाकर्ता के आरोप, Sahida की कथित हिरासत और सीमा पार भेजे जाने की परिस्थितियां तथा nationality verification से जुड़े कानूनी सवाल हैं। केंद्र सरकार का जवाब इस मामले में महत्वपूर्ण होगा।

    SIR से जुड़े मामलों में पहले भी Supreme Court ने उठाए सवाल

    Sahida Fakir का मामला ऐसे समय Supreme Court पहुंचा है जब West Bengal में SIR के बाद मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर बड़ी संख्या में अपीलें लंबित हैं। 25 अगस्त 2026 को अदालत को बताया गया था कि SIR से संबंधित करीब 38.1 लाख अपीलें दाखिल हुई हैं। इनमें लगभग 7 लाख अपीलें उन लोगों की थीं जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे और जिन्होंने नाम बहाल करने की मांग की थी।

    Supreme Court पहले ही यह अंतर स्पष्ट कर चुका है कि electoral roll में नाम होना या हटना और किसी व्यक्ति की citizenship का अंतिम निर्धारण दो अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं। Sahida Fakir मामले में अब यही सवाल और गंभीर रूप से सामने आया है कि किसी व्यक्ति की nationality पर विवाद होने की स्थिति में उसे देश से बाहर भेजने से पहले कौन-सी verification और procedural safeguards लागू होंगे।

    अब केंद्र के जवाब पर नजर

    Supreme Court के नोटिस के बाद केंद्र सरकार को Sahida Fakir की हिरासत, nationality verification, Bangladesh भेजे जाने की प्रक्रिया और संबंधित कानूनी प्रावधानों पर अपना पक्ष रखना होगा। इसके बाद अदालत यह तय करेगी कि याचिका में उठाए गए सवालों पर आगे किस तरह की सुनवाई और राहत पर विचार किया जाना है।

    फिलहाल Sahida Fakir की वापसी की मांग Supreme Court के सामने लंबित है और मामले में अंतिम न्यायिक निष्कर्ष आना बाकी है।

  • Vimal Elaichi विवाद: 14 सितंबर को Delhi HC तय करेगा केस की सुनवाई का अधिकार

    Vimal Elaichi विवाद: 14 सितंबर को Delhi HC तय करेगा केस की सुनवाई का अधिकार

    Vimal Elaichi विवाद में Delhi HC 14 सितंबर को तय करेगा कि महाराष्ट्र FDA के नोटिस पर PB Agro की याचिका दिल्ली में सुनी जाएगी या नहीं।

    नई दिल्ली: Vimal Elaichi के विज्ञापन को लेकर चल रहे विवाद में सोमवार, 14 सितंबर 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट का अहम आदेश आने वाला है। कोर्ट यह तय करेगा कि महाराष्ट्र FDA की ओर से Shah Rukh Khan, Ajay Devgn और Tiger Shroff को जारी किए गए शो-कॉज नोटिस को चुनौती देने वाली PB Agro LLP की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट सुनवाई कर सकता है या नहीं। फिलहाल मामला विज्ञापन की वैधता के अंतिम फैसले तक नहीं पहुंचा है; 7 सितंबर को कोर्ट ने territorial jurisdiction के मुद्दे पर सुनवाई पूरी होने के बाद आदेश सुरक्षित रखा था।

    14 सितंबर को कोर्ट के सामने क्या सवाल है?

    इस मामले में तत्काल सवाल यह नहीं है कि Vimal Elaichi का विज्ञापन वास्तव में surrogate advertising है या नहीं। सबसे पहले यह तय होना है कि महाराष्ट्र FDA के खिलाफ दायर PB Agro की याचिका को Delhi High Court सुन सकता है या नहीं।

    PB Agro ने अदालत में महाराष्ट्र FDA की कार्रवाई को चुनौती दी है। कंपनी का कहना है कि FDA ने उसके ब्रांड एंबेसडरों को नोटिस जारी किया, जबकि कंपनी स्वयं इस कार्रवाई से सीधे प्रभावित है। याचिका में यह भी कहा गया है कि कंपनी को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया और विज्ञापन अभियान लागू कानूनों के अनुरूप है।

    दूसरी ओर, महाराष्ट्र से जुड़े regulatory action को लेकर jurisdiction पर आपत्ति उठाई गई है। इसलिए 14 सितंबर का आदेश यह तय करने में महत्वपूर्ण होगा कि इस कानूनी विवाद की अगली सुनवाई दिल्ली में होगी या कंपनी को किसी अन्य उपयुक्त forum का रुख करना पड़ सकता है।

    Maharashtra FDA ने Shah Rukh Khan, Ajay Devgn और Tiger Shroff को नोटिस क्यों दिया?

    महाराष्ट्र FDA ने 11 अगस्त 2026 को तीनों अभिनेताओं को Vimal Elaichi के विज्ञापन से जुड़े शो-कॉज नोटिस जारी किए थे। FDA की आपत्ति यह है कि भले ही विज्ञापन Elaichi उत्पाद का दिखाई देता हो, लेकिन उसके जरिए Vimal brand की ऐसी promotion हो सकती है जो प्रतिबंधित Pan Masala product की indirect या surrogate promotion का माध्यम बनती हो।

    FDA ने जिस regulatory background का हवाला दिया है, उसमें महाराष्ट्र में 13 जुलाई 2026 से लागू prohibition order भी शामिल है। इस आदेश के तहत राज्य में प्रतिबंधित tobacco और nicotine-containing products के manufacture, storage, transportation, distribution और sale पर रोक लागू की गई है। FDA ने Vimal brand के advertisement को इसी broader regulatory framework में देखा है।

    आप को बता दें, कि surrogate advertising का आरोप अभी अदालत की ओर से साबित किया गया तथ्य नहीं है। यह महाराष्ट्र FDA की regulatory आपत्ति है, जिस पर आगे कानूनी प्रक्रिया होनी है।

    Ajay Devgn और Tiger Shroff ने FDA को जवाब दिया, Shah Rukh Khan की स्थिति क्या है?

    मामले में एक अहम ताजा घटनाक्रम यह भी है कि Ajay Devgn और Tiger Shroff ने महाराष्ट्र FDA को अपने जवाब सौंप दिए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार FDA को दोनों के responses मिल चुके हैं, जबकि Shah Rukh Khan का जवाब अभी लंबित बताया गया था।

    हालांकि, इन दोनों अभिनेताओं के जवाबों की पूरी substantive सामग्री सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। इन जवाबों के हवाले से ये पता नहीं है कि उन्होंने FDA के आरोपों को स्वीकार किया है या खारिज किया है।

    PB Agro का क्या कहना है?

    PB Agro LLP, जो Vimal Elaichi से जुड़ा master licensee बताया गया है, ने Delhi High Court में कहा है कि वह Elaichi जैसे non-tobacco product के promotion के लिए प्रमुख अभिनेताओं की सेवाएं लेता है और उसके advertising campaigns लागू कानूनों का पालन करते हैं। कंपनी ने FDA की कार्रवाई पर कई कानूनी आपत्तियां उठाई हैं।

    कंपनी की याचिका में यह सवाल भी उठाया गया है कि यदि regulatory action का सीधा असर कंपनी के commercial campaign पर पड़ रहा है, तो केवल celebrities को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया कितनी उचित है और कंपनी को अपना पक्ष रखने का अवसर क्यों नहीं दिया गया।

    क्या Vimal Elaichi पर पहले भी कानूनी विवाद हुआ है?

    यह विवाद पूरी तरह नया नहीं है। जनवरी 2024 में भी Delhi High Court के सामने Vimal Elaichi से जुड़े surrogate advertising का मामला आया था। उस मामले में DGHS ने 2018 में जारी किए गए शो-कॉज नोटिस के खिलाफ कंपनियों को मिली stay को चुनौती दी थी। Delhi High Court ने trial court की stay को बरकरार रखा था।

    उस मामले में अदालत ने यह भी कहा था कि किसी brand name का इस्तेमाल Elaichi या Pan Masala जैसे उत्पादों के प्रचार में करना प्रतिबंधित tobacco या gutka की indirect या surrogate advertising है या नहीं, यह evidence का विषय हो सकता है। इसका मतलब यह नहीं था कि अदालत ने Vimal Elaichi को surrogate advertising से अंतिम तौर पर clean chit दे दी थी।

    यही पुराना legal background मौजूदा विवाद को और महत्वपूर्ण बनाता है।

    यह मामला celebrities के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

    मौजूदा विवाद का असर केवल Vimal brand या इन तीन अभिनेताओं तक सीमित नहीं हो सकता। मामला यह सवाल भी उठाता है कि किसी celebrity को किसी ऐसे brand के advertisement में शामिल होने से पहले product और brand architecture की कितनी due diligence करनी चाहिए, खासकर तब जब उसी brand name से जुड़े दूसरे products regulatory restrictions के दायरे में हों।

    महाराष्ट्र FDA ने अपने notices के जरिए advertisement और उससे जुड़े regulatory compliance पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, actors के responses और PB Agro की legal challenge से आगे यह तय होना है कि इस तरह के endorsement में individual celebrity की जिम्मेदारी किस सीमा तक बनती है।

    14 सितंबर के बाद क्या होगा?

    अगर Delhi High Court territorial jurisdiction स्वीकार करता है, तो PB Agro की याचिका पर आगे substantive सुनवाई का रास्ता खुल सकता है। इसके बाद court को FDA के notices, regulator की powers और surrogate advertising से जुड़े वास्तविक कानूनी सवालों पर विचार करना पड़ सकता है।

    अगर Delhi High Court jurisdiction स्वीकार नहीं करता, तो इसका अर्थ यह नहीं होगा कि अदालत ने Vimal Elaichi advertisement को surrogate advertising घोषित कर दिया या तीनों अभिनेताओं को किसी उल्लंघन का दोषी माना। इसका तत्काल प्रभाव केवल forum से जुड़ा होगा और PB Agro को अपने कानूनी उपाय के लिए दूसरे उचित forum का रुख करना पड़ सकता है।

    यानी 14 सितंबर का आदेश इस विवाद का अंतिम फैसला नहीं, बल्कि आगे की कानूनी लड़ाई की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण कदम होगा।

    फिलहाल सबसे अहम सवाल यही है कि Delhi High Court महाराष्ट्र FDA की कार्रवाई के खिलाफ PB Agro की याचिका सुनने का अधिकार स्वीकार करता है या नहीं। इसके बाद ही Vimal Elaichi advertisement की legality, surrogate promotion के आरोप और celebrity endorsement की जिम्मेदारी जैसे मूल सवालों पर विवाद आगे बढ़ेगा।

  • मुंबई में फर्जी PMO ID और हथियार का मामला: दो गिरफ्तार, आरोपी ने कहा- “मेरे साथ फ्रॉड हुआ है”

    मुंबई में फर्जी PMO ID और हथियार का मामला: दो गिरफ्तार, आरोपी ने कहा- “मेरे साथ फ्रॉड हुआ है”

    मुंबई के BKC में फर्जी PMO ID और हथियार के मामले में दो गिरफ्तार हुए। कोर्ट में आरोपी ने दावा किया कि उसके साथ फ्रॉड हुआ है।

    मुंबई: बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे से पहले फर्जी PMO पहचान पत्र और हथियार के साथ प्रवेश के मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य आरोपी की ओर से कोर्ट में दावा किया गया कि “मेरे साथ फ्रॉड हुआ है।”**

    पुलिस के मुताबिक, घटना BKC के Jio World परिसर से जुड़े इलाके में सामने आई। एक व्यक्ति ने कथित तौर पर खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से जुड़ा अधिकारी बताया था। उसके साथ मौजूद व्यक्ति के पास हथियार मिला। हालांकि, मुंबई पुलिस ने फिलहाल कहा है कि इस घटना का प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रम से कोई सीधा संबंध सामने नहीं आया है।

    BKC में कैसे सामने आया मामला?

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुंबई दौरे को देखते हुए 7 सितंबर को BKC इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी थी। इसी दौरान सुरक्षा जांच के बीच एक व्यक्ति की पहचान और गतिविधियों पर संदेह हुआ।

    पुलिस जांच के अनुसार, उस व्यक्ति ने कथित तौर पर PMO का पहचान पत्र दिखाया। जांच में पहचान पत्र की authenticity पर सवाल उठे और बाद में इसे फर्जी बताया गया।

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    गिरफ्तार आरोपी को कोर्ट से बाहर लाते मुंबई पुलिस की तस्वीर

    खबर के मुताबिक, कथित ID में पदनाम और validity से जुड़ी विसंगतियां थीं। इसी दौरान साथ मौजूद व्यक्ति की तलाशी में हथियार बरामद हुआ।

    दो लोगों की गिरफ्तारी

    मामले में पुलिस ने रोहन प्रेमल पारेख और दिलीप राजाराम कुंडे को गिरफ्तार किया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कुंडे के पास मिला firearm लाइसेंसी बताया गया है।

    पुलिस अब यह पता लगा रही है कि हथियार किसके नाम पर है और उसे हाई-सिक्योरिटी वाले इलाके में किन परिस्थितियों में लाया गया था।

    मामले में एक तीसरे व्यक्ति की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस ने इस मामले में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है।

    कोर्ट में आरोपी ने कहा- “मेरे साथ फ्रॉड हुआ है”

    मामले में सबसे अहम नया मोड़ कोर्ट की सुनवाई के दौरान सामने आया। मुख्य आरोपी की ओर से बचाव पक्ष ने दावा किया कि उसे कथित तौर पर एक offer letter, पहचान पत्र और कुछ सरकारी communications मिले थे।

    बचाव पक्ष के मुताबिक, आरोपी को विश्वास दिलाया गया था कि वह किसी सरकारी या PMO से जुड़ी भूमिका में है। इसी आधार पर यह दावा किया गया कि आरोपी खुद किसी धोखाधड़ी का शिकार हो सकता है।

    हालांकि, यह आरोपी और उसके बचाव पक्ष का दावा है, जिसकी पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।

    अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कथित PMO ID और offer letter किसने तैयार किए तथा ये दस्तावेज आरोपी तक कैसे पहुंचे।

    फर्जी PMO ID की जांच क्यों महत्वपूर्ण?

    किसी सरकारी संस्था की पहचान का कथित तौर पर इस्तेमाल इस मामले को सामान्य पहचान संबंधी विवाद से आगे ले जाता है।

    पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ID वास्तव में कहां तैयार हुई, उसे किसने आरोपी को दिया और क्या इसके पीछे किसी अन्य व्यक्ति या नेटवर्क की भूमिका है।

    आरोपियों के मोबाइल फोन और communications से भी इस कड़ी को जोड़ने की कोशिश की जा रही है।

    हथियार लाइसेंसी था, फिर भी सवाल क्यों उठे?

    बरामद firearm के लाइसेंसी होने की बात सामने आई है। लेकिन पुलिस की जांच केवल हथियार के लाइसेंस तक सीमित नहीं है।

    जांच में यह भी देखा जा रहा है कि हथियार किसके नाम पर था, उसे लेकर आरोपी वहां क्यों पहुंचा और उस स्थान पर हथियार ले जाने की परिस्थितियां क्या थीं।

    क्या PM मोदी के कार्यक्रम से था कोई संबंध?

    मुंबई पुलिस के अनुसार, अब तक आरोपियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम के बीच कोई सीधा संबंध सामने नहीं आया है।

    घटना ऐसे समय हुई जब PM मोदी के दौरे को लेकर BKC में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई थी। इसी वजह से फर्जी PMO ID और हथियार से जुड़ी जानकारी सामने आते ही पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया।

    जांच में अब क्या पता लगाना बाकी है?

    पुलिस की जांच मुख्य रूप से इन सवालों पर केंद्रित है कि कथित फर्जी PMO ID किसने बनाई, आरोपी को यह दस्तावेज कैसे मिला और उसके पास मौजूद कथित offer letter व communications का स्रोत क्या था।

    इसके अलावा, आरोपी के BKC पहुंचने का वास्तविक उद्देश्य, हथियार की परिस्थितियां और मामले में तीसरे व्यक्ति की भूमिका भी जांच का हिस्सा है।

    सबसे अहम सवाल यह है कि क्या आरोपी वास्तव में किसी सरकारी पहचान के नाम पर ठगा गया था या उसने जानबूझकर फर्जी पहचान का इस्तेमाल किया?

    इसका जवाब जांच में सामने आने वाले दस्तावेजों, डिजिटल सबूतों और पूछताछ के आधार पर ही स्पष्ट होगा।

    फिलहाल पुलिस जांच जारी

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुंबई में Global Fintech Fest 2026 से जुड़े कार्यक्रम के लिए आए थे। उनके दौरे से पहले BKC में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई थी।

    इसी दौरान सामने आए फर्जी PMO ID और हथियार के मामले में दो आरोपी पुलिस कार्रवाई का सामना कर रहे हैं। वहीं, “मेरे साथ फ्रॉड हुआ है” वाला आरोपी का दावा भी जांच के दायरे में है।

    अब जांच का फोकस कथित फर्जी पहचान पत्र के स्रोत, दस्तावेज तैयार करने वाले व्यक्ति और आरोपियों की वास्तविक मंशा का पता लगाने पर है।

  • श्रीनगर एयरपोर्ट पर पार्किंग में खंभे से टकराया IndiGo विमान, यात्री सुरक्षित; वापसी उड़ान पर असर?

    श्रीनगर एयरपोर्ट पर पार्किंग में खंभे से टकराया IndiGo विमान, यात्री सुरक्षित; वापसी उड़ान पर असर?

    श्रीनगर एयरपोर्ट पर पार्किंग के दौरान IndiGo की 6E 225 उड़ान VDGS पोल से टकरा गई। सभी यात्री सुरक्षित हैं, विमान को नुकसान हुआ।

    जम्मू-कश्मीर: श्रीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर शुक्रवार सुबह नवी मुंबई से पहुंची IndiGo की उड़ान 6E 225 पार्किंग के दौरान एक सिग्नल खंभे से टकरा गई। हादसा करीब सुबह 9:02 बजे बे नंबर 6 में विमान को पार्क करते समय हुआ। विमान में सवार सभी यात्री और चालक दल के सदस्य सुरक्षित हैं और किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।

    विमान का पंजीकरण VT-NOG बताया गया है। टक्कर के बाद विमान के अगले हिस्से को नुकसान पहुंचा और यात्रियों को विमान से उतारने के लिए सीढ़ियों का इस्तेमाल किया गया।

    लैंडिंग के समय नहीं, पार्किंग के दौरान हुआ हादसा

    यह घटना विमान के रनवे पर उतरते समय नहीं हुई। उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, विमान श्रीनगर पहुंचने के बाद पार्किंग बे में अपनी जगह पर लगाया जा रहा था, तभी वह VDGS पोल के संपर्क में आया। यानी लैंडिंग हादसा नहीं है, जमीन पर पार्किंग के दौरान हुई घटना है।

    VDGS यानी Visual Docking Guidance System विमान को पार्किंग की सही स्थिति और रुकने की जगह बताने वाला सिग्नल पोल है। श्रीनगर एयरपोर्ट की घटना में इसी सिस्टम के पोल से विमान का संपर्क हुआ। जानकारी के मुताबिक इस पोल पर विमान को दिशा और स्थिति बताने वाली प्रदर्शन इकाई के साथ लेजर और कैमरा सेंसर भी जुड़े होते हैं।

    विमान को कितना नुकसान हुआ?

    टक्कर के बाद विमान को नुकसान हुआ है। तस्वीरों और मौके से सामने आई जानकारी में विमान के अगले हिस्से के पास क्षति दिखाई दे रही है, लेकिन नुकसान की सटीक तकनीकी सीमा और विमान दोबारा उड़ान के लिए कब उपलब्ध होगा, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

    विमान की पहचान Airbus A321neo के रूप में की गई है।

    क्या श्रीनगर एयरपोर्ट की दूसरी उड़ानें प्रभावित हुईं?

    एयरपोर्ट प्रशासन के मुताबिक घटना के बावजूद श्रीनगर एयरपोर्ट का सामान्य संचालन जारी रहा और दूसरी उड़ानों के आगमन-प्रस्थान पर तत्काल कोई व्यापक असर नहीं पड़ा।

    हालांकि, जिस विमान के साथ यह घटना हुई, उसकी अगली उड़ान को लेकर स्थिति पर यात्रियों की नजर बनी हुई है। कुछ उड़ान-ट्रैकिंग सेवाओं में 6E 226, यानी श्रीनगर से नवी मुंबई जाने वाली वापसी उड़ान की स्थिति रद्द दिखाई गई है, लेकिन अलग-अलग ट्रैकिंग सेवाओं में स्थिति एक जैसी नहीं है। इसलिए इसके आधार पर अंतिम फैसला मानने से पहले IndiGo की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।

    ब्रेक फेल होने की बात कितनी सही?

    घटना के बाद कुछ मीडिया रिपोर्टों में विमान के ब्रेक सिस्टम में खराबी को संभावित वजह बताया गया है। लेकिन यह बात अभी आधिकारिक तौर पर पुष्ट नहीं हुई है।

    श्रीनगर एयरपोर्ट प्रशासन ने कहा है कि घटना की परिस्थितियों की जांच संबंधित सक्षम अधिकारियों द्वारा की जाएगी और जांच पूरी होने के बाद ही सही कारण सामने आएगा। इसलिए फिलहाल ब्रेक फेल होने को हादसे की निश्चित वजह बताना सही नहीं है।

    फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विमान में सवार सभी यात्री और चालक दल सुरक्षित हैं। विमान को हुई तकनीकी क्षति, घटना का वास्तविक कारण और वापसी की उड़ान पर इसका अंतिम असर जांच और एयरलाइन की आगे की जानकारी के बाद स्पष्ट होगा।