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  • नाना पाटेकर का निधन, 2:30 बजे दोस्त को किया था मैसेज; 5:20 बजे मौत

    नाना पाटेकर का निधन, 2:30 बजे दोस्त को किया था मैसेज; 5:20 बजे मौत

    नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में गोवा में निधन हुआ। 2:30 बजे दोस्त को मैसेज के बाद CPR की कोशिश हुई, अब पुणे में राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार होगा।

    मुंबई: बॉलीवुड के दिग्गज कलाकार नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में निधन हो गया। गोवा के डोना पाउला स्थित उनके घर पर अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें मणिपाल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक उन्हें बचाने की कोशिश की। सुबह 5:20 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टर डॉ. शेखर सालकर के अनुसार, मौत कार्डियक अरेस्ट के कारण हुई, हालांकि इसके पीछे की सटीक वजह अभी स्पष्ट नहीं है और पोस्टमार्टम कराया जा रहा है।

    रात 2:30 बजे दोस्त को किया था मैसेज

    डॉ. शेखर सालकर के मुताबिक, नाना पाटेकर ने रात करीब 2:30 बजे अपने एक दोस्त को मैसेज करके बताया था कि उनकी तबीयत ठीक नहीं लग रही है। दोस्त ने करीब 4 बजे मैसेज देखा और उनके घर पहुंचा। उस समय नाना पाटेकर बेहोशी की हालत में फर्श पर पड़े थे और उनकी हालत गंभीर थी।

    इसके बाद उनके केयरटेकर ने मणिपाल अस्पताल से एम्बुलेंस ली। करीब 4:18 से 4:20 बजे मेडिकल टीम उनके फ्लैट पहुंची। डॉक्टरों ने मौके पर ही CPR शुरू किया और CPR देते हुए उन्हें अस्पताल लाया गया। अस्पताल पहुंचने में करीब 10 मिनट लगे।

    अस्पताल में भी डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की कोशिश जारी रखी, लेकिन करीब 45 मिनट के प्रयास के बाद भी उन्हें होश में नहीं लाया जा सका। सुबह 5:20 बजे उन्हें मृत घोषित किया गया। डॉ. सालकर ने बताया कि अस्पताल पहुंचने तक उनकी हालत ऐसी थी कि उन्हें मृत अवस्था में लाया गया प्रतीत हो रहा था।

    कार्डियक अरेस्ट की वजह अभी साफ नहीं

    डॉ. शेखर सालकर ने बताया कि यह कार्डियक अरेस्ट का मामला था, लेकिन इसके पीछे की वजह अस्पताल को पता नहीं है। उनके अनुसार, उन्हें जानकारी दी गई थी कि नाना पाटेकर पहले से दिल की बीमारी के मरीज थे और दवाएं लेते थे। उनके पास उस समय मेडिकल फाइल उपलब्ध नहीं थी, इसलिए अस्पताल उनकी पूरी मेडिकल हिस्ट्री नहीं देख सका।

    मौत के बाद मामले को मेडिको-लीगल केस के तौर पर दर्ज किया गया। उनका शव गोवा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, बांबोलिम भेजा गया, जहां पोस्टमार्टम से मौत के सटीक कारण की जांच की जाएगी।

    पुणे में होगा अंतिम संस्कार, राजकीय सम्मान से विदाई

    नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार पुणे के डोणजे स्थित उनके फार्महाउस पर किया जाएगा। महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई देने का फैसला किया है। महाराष्ट्र के सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशीष शेलार ने बताया कि मराठी रंगमंच के साथ मराठी और हिंदी सिनेमा में उनके योगदान को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।

    नाम फाउंडेशन के CEO गणेश थोरात के मुताबिक, नाना पाटेकर का पार्थिव शरीर पुणे लाया जाएगा और डोणजे फार्महाउस पर अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके बाद वहीं अंतिम संस्कार होगा।

    नाना पाटेकर के बेटे मल्हार पाटेकर ने उनके निधन की पुष्टि की है। उनके परिवार में पत्नी नीलकांति पाटेकर और बेटे मल्हार पाटेकर हैं।

    निधन से चार दिन पहले सार्वजनिक कार्यक्रम में थे

    नाना पाटेकर की अचानक मौत इसलिए भी चौंकाने वाली है क्योंकि वह निधन से कुछ दिन पहले ही सार्वजनिक कार्यक्रम में नजर आए थे। 4 अक्टूबर को गोवा के डोना पाउला में सम्राट क्लब इंटरनेशनल के कार्यक्रम में उन्होंने हिस्सा लिया था और सभा को संबोधित भी किया था। कार्यक्रम के वीडियो में वह स्थानीय कलाकारों के साथ बातचीत करते, प्रस्तुति का आनंद लेते और पारंपरिक वाद्य शमेल बजाते नजर आए।

    कार्यक्रम में नाना पाटेकर ने जिंदगी और समाज के लिए कुछ करने की बात भी कही थी। उन्होंने भविष्य को लेकर अनिश्चितता जताते हुए कहा था कि वह आज यहां हैं, लेकिन कल यहां होंगे या नहीं, यह पता नहीं। उनके निधन के बाद उनका यह आखिरी सार्वजनिक संबोधन सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है।

    PM मोदी ने जताया दुख

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नाना पाटेकर के निधन पर शोक जताते हुए उनके अभिनय की विशिष्टता, अलग पहचान और प्रभावशाली व्यक्तित्व को याद किया। उन्होंने कहा कि नाना पाटेकर ने हिंदी और मराठी सिनेमा में अपनी भूमिकाओं से ऐसी छाप छोड़ी, जिसे लंबे समय तक याद किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने उनके परिवार, दोस्तों और प्रशंसकों के प्रति संवेदना व्यक्त की।

    महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि देते हुए उनके बेबाक व्यक्तित्व, अभिनय यात्रा और सामाजिक काम को याद किया। गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने भी उनके निधन पर शोक जताया।

    पांच दशक से ज्यादा का दमदार फिल्मी सफर

    नाना पाटेकर का जन्म विश्वनाथ पाटेकर के रूप में महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के मुरुड-जंजीरा में हुआ था। उन्होंने मराठी रंगमंच से अपने अभिनय सफर की शुरुआत की और 1978 की फिल्म गमन से हिंदी सिनेमा में पहचान बनानी शुरू की। इसके बाद परिंदा, प्रहार, अंगार, क्रांतिवीर, तिरंगा, खामोशी, अग्निसाक्षी, अब तक छप्पन, वेलकम और नटसम्राट जैसी फिल्मों में उनके अलग-अलग किरदारों ने उन्हें दर्शकों के बीच खास पहचान दी।

    उन्हें तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिले। परिंदा के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता, क्रांतिवीर के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता और अग्निसाक्षी के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार उनके खाते में रहा। उन्हें 2013 में पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया था।

    किसानों और ग्रामीण इलाकों के लिए भी किया काम

    नाना पाटेकर की पहचान सिर्फ अभिनेता के तौर पर नहीं रही। उन्होंने अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ नाम फाउंडेशन की स्थापना की थी। यह संस्था किसानों, सूखा प्रभावित इलाकों, जल संरक्षण और ग्रामीण क्षेत्रों में मदद से जुड़े काम करती रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी उनके सामाजिक योगदान और किसानों के लिए किए गए काम को याद किया।

    नाना पाटेकर के निधन के साथ हिंदी और मराठी सिनेमा ने एक ऐसे अभिनेता को खो दिया है, जिसकी पहचान सिर्फ लोकप्रिय फिल्मों तक सीमित नहीं थी। रंगमंच, सिनेमा और सामाजिक काम—तीनों क्षेत्रों में उनकी अलग मौजूदगी रही। अब उनके अंतिम संस्कार और पोस्टमार्टम से जुड़ी प्रक्रिया पर नजर है।

  • राहुल गांधी की हिरासत पर मुंबई में आधी रात रास्ता रोको

    राहुल गांधी की हिरासत पर मुंबई में आधी रात रास्ता रोको

    राहुल गांधी को दिल्ली में रोके जाने के विरोध में मुंबई युवक कांग्रेस ने वांद्रे रिक्लेमेशन में रास्ता रोको किया। कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया।

    मुंबई: राहुल गांधी को दिल्ली में रोके जाने के विरोध में मुंबई युवक कांग्रेस ने बुधवार रात बांद्रा रिक्लेमेशन में रास्ता रोको आंदोलन किया। रात करीब 11 बजे हुए प्रदर्शन में कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी की। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाकर कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया।

    मुंबई युवक कांग्रेस की अध्यक्ष जीनत शबरीन के नेतृत्व में यह आंदोलन किया गया। कार्यकर्ताओं ने सड़क पर बैठकर राहुल गांधी के समर्थन में नारे लगाए। रास्ता रोको के कारण कुछ समय के लिए इस मार्ग पर यातायात भी प्रभावित हुआ।

    महिला कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट का आरोप

    युवक कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन को रोकने के दौरान पुलिस ने महिला कार्यकर्ताओं के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की। पार्टी का आरोप है कि कुछ महिला कार्यकर्ताओं को बाल पकड़कर खींचा गया और बाद में उन्हें पुलिस वाहन में बैठाकर हिरासत में लिया गया।

    महिला कार्यकर्ताओं के साथ कथित मारपीट के आरोप को लेकर पुलिस की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।

    राहुल गांधी को दिल्ली में क्यों रोका गया?

    यह पूरा विवाद चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच मतदाता सूची को लेकर चल रहे टकराव से जुड़ा है। राहुल गांधी और विपक्षी सांसद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात कर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े मुद्दे उठाना चाहते थे। विपक्ष ने चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी की है।

    6 अक्टूबर को राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य विपक्षी नेता चुनाव आयोग की ओर बढ़ रहे थे। दिल्ली पुलिस ने उन्हें रोका और बाद में राहुल गांधी समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया। 7 अक्टूबर को भी राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं को दोबारा रोके जाने और हिरासत में लिए जाने की घटना सामने आई।

    चुनाव आयोग ने भी अपना पक्ष स्पष्ट किया है। आयोग के अनुसार, उसे शाम 4 बजे तक किसी राजनीतिक दल की ओर से बैठक का अनुरोध नहीं मिला था। बाद में राहुल गांधी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में सांसदों के साथ मुलाकात की मांग सामने आई। आयोग ने अपने वरिष्ठ अधिकारी के जरिए ज्ञापन लेने की पेशकश की, लेकिन विपक्षी सांसदों ने इसे स्वीकार नहीं किया।

    राहुल और प्रियंका गांधी के खिलाफ प्राथमिकी

    दिल्ली में हुए पिछले प्रदर्शन के मामले में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के खिलाफ आकाशवाणी भवन परिसर में प्रवेश से जुड़े मामले में प्राथमिकी दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इससे यह विवाद अब केवल राजनीतिक प्रदर्शन और हिरासत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कानूनी कार्रवाई तक पहुंच गया है।

    मुंबई में बढ़ रहा राजनीतिक विरोध

    राहुल गांधी की हिरासत के बाद मुंबई में युवक कांग्रेस का देर रात सड़क पर उतरना इस विवाद का स्थानीय असर है। कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग की भूमिका और केंद्र सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। इससे पहले भी मुंबई में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन हो चुके हैं।

    फिलहाल मुंबई के प्रदर्शन में हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं की सटीक संख्या और महिला कार्यकर्ताओं के साथ कथित मारपीट को लेकर पुलिस का विस्तृत पक्ष सामने आना बाकी है। दिल्ली में राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं के विरोध प्रदर्शन तथा चुनाव आयोग के साथ जारी विवाद के बीच आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव और बढ़ने के संकेत हैं।

  • India vs Uruguay: थापा के ऐतिहासिक गोल के बाद भारत 1-6 से हारा, जमील ने ली जिम्मेदारी

    India vs Uruguay: थापा के ऐतिहासिक गोल के बाद भारत 1-6 से हारा, जमील ने ली जिम्मेदारी

    India vs Uruguay: अनिरुद्ध थापा के ऐतिहासिक गोल के बावजूद भारत 1-6 से हार गया। खालिद जमील ने गेम प्लान की कमी मानी, अब नजर नवंबर के न्यूजीलैंड दौरे पर।

    India vs Uruguay: अनिरुद्ध थापा के ऐतिहासिक गोल के बावजूद भारत को उरुग्वे के खिलाफ 1-6 की करारी हार झेलनी पड़ी। कोलकाता के सॉल्ट लेक स्टेडियम में खेले गए इस इंटरनेशनल फ्रेंडली में भारत ने एक समय 1-1 से बराबरी कर ली थी, लेकिन इसके बाद उरुग्वे ने मैच पर पूरी तरह कब्जा कर लिया। मैच के बाद भारतीय कोच खालिद जमील ने हार की जिम्मेदारी लेते हुए माना कि उनका गेम प्लान उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा।

    भारत के लिए इस मैच का सबसे खास पल 22वें मिनट में आया। रयान विलियम्स के शॉट को उरुग्वे के गोलकीपर थियागो कार्डोजो पूरी तरह रोक नहीं सके और गेंद छूटने के बाद अनिरुद्ध थापा ने मौका नहीं गंवाया। उन्होंने गेंद को गोल में डालकर स्कोर 1-1 कर दिया। यह उरुग्वे के खिलाफ भारत का 44 साल में सिर्फ दूसरा सीनियर इंटरनेशनल गोल था। इससे पहले 1982 में मानस भट्टाचार्य ने गोल किया था।

    इससे पहले उरुग्वे ने डार्विन नुनेज की पेनल्टी से बढ़त बनाई थी। भारत के लिए थापा का गोल सिर्फ बराबरी कराने वाला गोल नहीं था, बल्कि भारतीय फुटबॉल के इतिहास में दर्ज होने वाला पल भी था। थापा ने लंबे समय बाद राष्ट्रीय टीम के लिए गोल किया और सॉल्ट लेक स्टेडियम में मौजूद दर्शकों को मैच में वापसी की उम्मीद दी।

    बिजली और खराब मौसम से रुका मैच

    1-1 के बाद मुकाबला कुछ देर के लिए रोकना पड़ा। कोलकाता में बिजली चमकने और खराब मौसम के कारण खिलाड़ियों को मैदान से बाहर जाना पड़ा। यह ब्रेक करीब 34 से 35 मिनट तक चला। मौसम की वजह से मैच की लय जरूर टूटी, लेकिन दोनों टीमों के लिए परिस्थितियां एक जैसी थीं। मैच दोबारा शुरू होने के बाद उरुग्वे ने तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर ली।

    मैच दोबारा शुरू होने के बाद 28वें मिनट में मैक्सिमिलियानो अराउजो ने उरुग्वे को फिर आगे कर दिया। इसके बाद भारत के लिए मुकाबले में वापसी करना लगातार मुश्किल होता गया।

    दूसरे हाफ में भारत की डिफेंस बिखरी

    दूसरे हाफ में उरुग्वे ने भारत की डिफेंसिव कमजोरियों का पूरा फायदा उठाया। 53वें मिनट में रोड्रिगो सालाजार ने गोल करके बढ़त 3-1 कर दी। छह मिनट बाद अराउजो ने अपना दूसरा गोल किया और स्कोर 4-1 हो गया।

    इसके बाद जुआन मैनुअल सनाब्रिया ने 71वें मिनट में उरुग्वे का पांचवां गोल किया, जबकि रोड्रिगो अगुइरे ने 86वें मिनट में गोल करके स्कोर 6-1 कर दिया। उरुग्वे की तरफ से नुनेज, अराउजो, सालाजार, सनाब्रिया और अगुइरे ने गोल किए, जिसमें अराउजो ने दो गोल दागे।

    भारत ने शुरुआत में कुछ अच्छे attacking moves बनाए थे। रयान विलियम्स और एडमंड ललरिंदिका ने आगे जाकर मौके बनाने की कोशिश की, जबकि अकाश मिश्रा और अभिषेक सिंह ने भी फ्लैंक से गेंदें बॉक्स में पहुंचाईं। लेकिन जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ा, उरुग्वे की गति और पासिंग के सामने भारत की defensive organisation कमजोर पड़ती गई।

    उरुग्वे ने खास तौर पर तेज counter-attacks से भारत को परेशान किया। 71वें मिनट का गोल भी तेज हमले के बाद आया। भारत के आगे बढ़ने के दौरान गेंद गंवाने के बाद उरुग्वे ने तेजी से हमला बनाया और सनाब्रिया ने उसे गोल में बदल दिया। यही अंतर दोनों टीमों की quality में साफ नजर आया।

    खालिद जमील ने हार की जिम्मेदारी ली

    मैच के बाद खालिद जमील ने खिलाड़ियों पर हार का ठीकरा नहीं फोड़ा। उन्होंने साफ कहा कि उरुग्वे के खिलाफ उनका गेम प्लान उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। ब्राजील के खिलाफ 0-4 और उरुग्वे के खिलाफ 1-6 की हार के बाद भारत ने दो मैचों में 10 गोल खाए हैं।

    जमील ने यह भी माना कि भारत के प्रदर्शन में मैच आगे बढ़ने के साथ गिरावट दिखाई देती है। उनके मुताबिक शुरुआती करीब 30 मिनट में टीम ठीक रहती है, लेकिन उसके बाद फिटनेस या concentration से जुड़ी दिक्कतें नजर आती हैं। उन्होंने खास तौर पर 60 से 70 मिनट के आसपास टीम में ज्यादा समस्याएं दिखने की बात कही।

    उरुग्वे के खिलाफ गोल का क्रम भी इसी तरफ इशारा करता है। भारत 1-1 तक मुकाबले में था, लेकिन इसके बाद 53वें, 59वें और 71वें मिनट में तीन गोल खाने के बाद मैच पूरी तरह हाथ से निकल गया।

    जमील को चाहिए ज्यादा कैंप

    खालिद जमील ने आगे की तैयारी के लिए ज्यादा राष्ट्रीय कैंप की जरूरत बताई है। उनका कहना है कि टीम में खिलाड़ियों के बीच प्रतिस्पर्धा है और आने वाले मैचों में प्रदर्शन के आधार पर सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों का चयन किया जाएगा। उन्होंने मजबूत टीमों के खिलाफ खेलने के फैसले का भी बचाव किया और कहा कि सिर्फ नतीजा खराब आने के कारण ऐसे मुकाबलों को गलत नहीं कहा जा सकता।

    यह बात इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारतीय टीम का अगला बड़ा इंटरनेशनल असाइनमेंट नवंबर में है। भारत को न्यूजीलैंड के खिलाफ 12 नवंबर को ऑकलैंड और 15 नवंबर को क्राइस्टचर्च में खेलना है। न्यूजीलैंड भी 2026 फीफा वर्ल्ड कप खेल चुका है, यानी उरुग्वे और ब्राजील के बाद भारतीय टीम के सामने एक और वर्ल्ड कप स्तर की टीम होगी।

    इससे पहले घरेलू स्तर पर इंडियन सुपर लीग का नया सीजन 10 अक्टूबर से शुरू होना है। ऐसे में भारतीय खिलाड़ियों को क्लब फुटबॉल और राष्ट्रीय टीम की तैयारियों के बीच तालमेल बनाना होगा।

    तीन मैचों की विंडो में भारत का रिकॉर्ड

    भारत ने इस इंटरनेशनल विंडो की शुरुआत पनामा के खिलाफ 1-1 ड्रॉ से की थी। इसके बाद ब्राजील ने भारत को 4-0 से हराया और अब उरुग्वे ने 6-1 से जीत दर्ज की।

    यानी तीन मैचों में भारत ने एक ड्रॉ और दो हार दर्ज कीं। टीम ने कुल दो गोल किए, जबकि 11 गोल खाए। इनमें थापा का उरुग्वे के खिलाफ गोल भारत के लिए सबसे खास व्यक्तिगत उपलब्धि रहा।

    इन तीनों मुकाबलों में भारत को वर्ल्ड कप स्तर की टीमों के खिलाफ अपनी कमियां देखने का मौका मिला। स्कोरलाइन भले भारत के लिए खराब रही, लेकिन अब असली चुनौती इन मैचों से मिली सीख को अगले मुकाबलों में लागू करने की है।

    उरुग्वे के खिलाफ भारत के लिए क्या बचा?

    6-1 की हार के बावजूद थापा का गोल भारतीय टीम के लिए एक सकारात्मक पल रहा। 44 साल बाद उरुग्वे के खिलाफ भारत के लिए दूसरा सीनियर इंटरनेशनल गोल आया। लेकिन इससे ज्यादा जरूरी सवाल अब भारतीय डिफेंस, मैच के आखिरी हिस्से में प्रदर्शन और मजबूत विपक्ष के दबाव में टीम की प्रतिक्रिया को लेकर है।

    खालिद जमील ने अपनी जिम्मेदारी स्वीकार कर ली है और ज्यादा कैंप की जरूरत भी बताई है। अब नवंबर में न्यूजीलैंड दौरे पर यह देखना होगा कि भारत इन तीन मैचों में सामने आई कमजोरियों पर कितना काम कर पाता है और क्या टीम लंबे समय तक मुकाबले में टिकने की क्षमता दिखा पाती है।

  • दिवाली-दशहरा पर 102 स्पेशल ट्रेन फेरे, जानें रूट-टाइमिंग

    दिवाली-दशहरा पर 102 स्पेशल ट्रेन फेरे, जानें रूट-टाइमिंग

    दशहरा-दिवाली पर मुंबई, लातूर, चेन्नई, कोल्हापुर और कलबुर्गी के लिए 102 अतिरिक्त स्पेशल ट्रेन फेरे चलेंगे। जानें ट्रेन नंबर, तारीख और समय।

    मुंबई: दशहरा और दिवाली के दौरान ट्रेनों में बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए रेलवे ने यात्रियों के लिए 102 अतिरिक्त फेस्टिवल स्पेशल ट्रेन फेरे चलाने का फैसला किया है। ये सेवाएं मुंबई-चेन्नई, मुंबई-लातूर और कोल्हापुर-कलबुर्गी रूट पर उपलब्ध होंगी। इन ट्रेनों की बुकिंग शुरू हो चुकी है और यात्रा अक्टूबर से नवंबर के बीच होगी।

    यहां यह समझना जरूरी है कि 102 का मतलब 102 अलग-अलग ट्रेनें नहीं, बल्कि दोनों दिशाओं को मिलाकर 102 अतिरिक्त फेरे हैं। इनमें सबसे ज्यादा 64 फेरे कोल्हापुर-कलबुर्गी रूट पर रखे गए हैं। मुंबई-लातूर के बीच 26 और मुंबई-चेन्नई के बीच 12 फेरे होंगे।

    मुंबई-चेन्नई के बीच 12 स्पेशल फेरे

    CSMT मुंबई और चेन्नई बीच के बीच साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन दोनों दिशाओं में छह-छह फेरे लगाएगी। मुंबई से चेन्नई जाने वाली ट्रेन 14 अक्टूबर से 18 नवंबर तक प्रत्येक बुधवार को चलेगी। ट्रेन संख्या 01015 CSMT से रात 12:35 बजे रवाना होकर उसी दिन रात 11:30 बजे चेन्नई बीच पहुंचेगी।

    वापसी में ट्रेन संख्या 01016 चेन्नई बीच से प्रत्येक गुरुवार को सुबह 4 बजे चलेगी और अगले दिन सुबह 4 बजे CSMT पहुंचेगी। यह सेवा 15 अक्टूबर से 19 नवंबर तक चलेगी।

    इस रूट पर दादर, ठाणे, कल्याण, लोनावला, पुणे, दौंड, कुर्डूवाड़ी, सोलापुर, कलबुर्गी, वाडी, रायचूर, मंत्रालयम रोड, गुंतकल, रेणिगुंटा, अरक्कोनम और पेरंबूर समेत कई प्रमुख स्टेशनों पर ठहराव रहेगा।

    मुंबई-लातूर के बीच 26 फेरे

    CSMT मुंबई और लातूर के बीच ट्रेन संख्या 01105 और 01106 के जरिए 26 अतिरिक्त फेरे लगाए जाएंगे। मुंबई से लातूर जाने वाली ट्रेन 13 अक्टूबर से 24 नवंबर तक मंगलवार और गुरुवार को चलेगी।

    ट्रेन संख्या 01105 CSMT से रात 12:35 बजे रवाना होकर सुबह 11:40 बजे लातूर पहुंचेगी। रास्ते में दादर, ठाणे, कल्याण, लोनावला, पुणे, दौंड, कुर्डूवाड़ी, धाराशिव और हरंगुल जैसे प्रमुख स्टेशन आएंगे।

    वापसी में ट्रेन संख्या 01106 लातूर से मंगलवार और गुरुवार को शाम 4:30 बजे चलेगी और अगले दिन सुबह 4:10 बजे CSMT पहुंचेगी।

    इस ट्रेन से मुंबई के अलावा ठाणे, कल्याण, पुणे, दौंड, कुर्डूवाड़ी, धाराशिव और आसपास के इलाकों के यात्रियों को भी त्योहार के दौरान अतिरिक्त यात्रा का विकल्प मिलेगा।

    कोल्हापुर-कलबुर्गी रूट पर सबसे ज्यादा 64 फेरे

    तीनों सेवाओं में सबसे ज्यादा अतिरिक्त फेरे कोल्हापुर-कलबुर्गी के बीच रखे गए हैं। ट्रेन संख्या 01451 और 01452 दोनों दिशाओं में 32-32 फेरे लगाएंगी।

    कोल्हापुर से कलबुर्गी जाने वाली ट्रेन 10 अक्टूबर से 15 नवंबर तक शुक्रवार को छोड़कर सप्ताह में छह दिन चलेगी। ट्रेन संख्या 01451 कोल्हापुर से सुबह 6:10 बजे रवाना होकर शाम 4:10 बजे कलबुर्गी पहुंचाएगी।

    वापसी में ट्रेन संख्या 01452 कलबुर्गी से शाम 6:10 बजे रवाना होगी और अगले दिन सुबह 5:40 बजे कोल्हापुर पहुंचेगी।

    इस रूट पर हातकणंगले, जयसिंगपुर, मिरज जंक्शन, अरग, बेलंकी, सुलगरे, कवठे महांकाळ, लंगरपेठ, ढालगांव, सांगोला, पंढरपुर, कुर्डूवाड़ी और सोलापुर समेत कई स्टेशन शामिल हैं। इससे कोल्हापुर, सांगली-मिरज क्षेत्र, पंढरपुर, सोलापुर और कलबुर्गी क्षेत्र के यात्रियों को त्योहार के दौरान अतिरिक्त विकल्प मिलेगा।

    टिकट बुकिंग कैसे करें?

    इन स्पेशल ट्रेनों के आरक्षित टिकट IRCTC की वेबसाइट, IRCTC ऐप और रेलवे के कंप्यूटरीकृत आरक्षण केंद्रों से बुक किए जा सकते हैं। RailOne ऐप के जरिए भी रेलवे की सेवाओं और यात्रा से जुड़ी जानकारी हासिल की जा सकती है।

    इन ट्रेनों में सामान्य ट्रेनों की तुलना में विशेष किराया लागू हो सकता है। इसलिए टिकट बुक करते समय संबंधित ट्रेन, यात्रा की तारीख, श्रेणी और गंतव्य के आधार पर प्रदर्शित किराए को ही अंतिम माना जाना चाहिए।

    मुंबई से त्योहारों पर जाने वालों के लिए बड़ी योजना

    102 अतिरिक्त फेरे सिर्फ इस पूरी फेस्टिवल ट्रेन व्यवस्था का एक हिस्सा हैं। मध्य रेलवे ने दुर्गा पूजा, दिवाली और छठ के दौरान बढ़ने वाली भीड़ को संभालने के लिए मुंबई, पुणे और नागपुर सहित विभिन्न स्टेशनों से कुल 418 विशेष ट्रेन सेवाओं की घोषणा की है। इनमें CSMT से गोरखपुर, चेन्नई, बेंगलुरु, लातूर, नागपुर और कोल्हापुर जैसे रूट भी शामिल हैं।

    इसका मतलब मुंबई से त्योहार के दौरान यात्रा करने वाले यात्रियों के पास सिर्फ इन तीन रूटों तक सीमित विकल्प नहीं रहेंगे। उत्तर भारत, दक्षिण भारत और महाराष्ट्र के अलग-अलग शहरों के लिए भी अतिरिक्त सेवाएं उपलब्ध रहेंगी।

    CSMT से यात्रा करने वालों को इस बदलाव का ध्यान रखना होगा

    मुंबई के यात्रियों के लिए एक और महत्वपूर्ण बात CSMT से जुड़ी है। स्टेशन के पुनर्विकास के चलते 1 अक्टूबर से 15 दिसंबर तक 75 दिनों का ट्रैफिक और पावर ब्लॉक चल रहा है। प्लेटफॉर्म 14 और 15 तथा स्टेब्लिंग लाइन 15 पर काम के कारण आठ लंबी दूरी की ट्रेनों को अस्थायी रूप से CSMT के बजाय दादर या ठाणे में समाप्त किया जा रहा है।

    हालांकि इस व्यवस्था का मतलब यह नहीं है कि ऊपर बताई गई सभी फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनों का टर्मिनल बदल गया है। यात्रियों को अपनी ट्रेन के नंबर के आधार पर यात्रा से पहले ताजा परिचालन स्थिति जरूर जांचनी चाहिए।

    यात्रा से पहले इन बातों का रखें ध्यान

    त्योहारों के दौरान अतिरिक्त ट्रेनें चलने के बावजूद मांग काफी ज्यादा रहने की संभावना है। इसलिए टिकट बुक करने से पहले ट्रेन नंबर, यात्रा की तारीख, बोर्डिंग स्टेशन और गंतव्य की सही जानकारी जांचना जरूरी है। यात्रा के दिन ट्रेन के समय और ठहराव में किसी बदलाव की जानकारी के लिए रेलवे की आधिकारिक ट्रेन इन्क्वायरी और RailOne की ताजा जानकारी देखना बेहतर रहेगा।

    दशहरा और दिवाली की भीड़ को देखते हुए इन 102 अतिरिक्त फेरों से मुंबई, महाराष्ट्र और कर्नाटक के कई प्रमुख शहरों के यात्रियों को नियमित सेवाओं के अलावा अतिरिक्त यात्रा विकल्प मिलेगा।

  • इंस्टाग्राम की दोस्ती से लिव-इन तक पहुंची अंजली, दुर्ग में मौत से खुली कहानी

    इंस्टाग्राम की दोस्ती से लिव-इन तक पहुंची अंजली, दुर्ग में मौत से खुली कहानी

    कल्याण की अंजली घोडेश्वर की दुर्ग में मौत मामले में शॉर्ट पोस्टमार्टम में आत्महत्या के संकेत मिले हैं, लेकिन परिवार के सवालों पर जांच जारी है।

    ठाणे: कल्याण की 26 वर्षीय अंजली घोडेश्वर की छत्तीसगढ़ के दुर्ग में हुई मौत का मामला अब भी कई सवालों में उलझा हुआ है। 8 सितंबर को परिवार को दिल्ली में पुलिस भर्ती की तैयारी करने की बात बताकर घर से निकली अंजली आखिर दुर्ग कैसे पहुंची, वह सीआईएसएफ आरक्षक करण सिंह के साथ कब से रह रही थी और 27 सितंबर को उसके साथ वास्तव में क्या हुआ, इसकी जांच जारी है। पुलिस के अनुसार शॉर्ट पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आत्महत्या के अनुरूप चोट का उल्लेख किया गया है, लेकिन परिवार ने मौत की परिस्थितियों पर सवाल उठाए हैं।

    अंजली कल्याण में अपने परिवार के साथ रहती थी। उसने 8 सितंबर 2026 को घरवालों को दिल्ली जाकर पुलिस भर्ती की तैयारी करने की बात बताई थी। परिवार को भरोसा दिलाने के लिए वह कथित तौर पर कोचिंग कक्षाओं की तस्वीरें भी भेजती थी। इन तस्वीरों में कक्षा, विद्यार्थी और पढ़ाई से संबंधित जानकारी दिखाई देती थी। परिवार को लंबे समय तक यही जानकारी थी कि अंजली दिल्ली में रहकर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रही है।

    लेकिन उसकी मौत के बाद परिवार को पता चला कि अंजली दिल्ली में नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के दुर्ग में रह रही थी।

    इंस्टाग्राम से हुई थी करण से दोस्ती

    अंजली की पहचान इंस्टाग्राम के माध्यम से 23 वर्षीय करण सिंह से हुई थी। दोनों की दोस्ती धीरे-धीरे प्रेम संबंध में बदल गई और बाद में वे लिव-इन रिलेशनशिप में रहने लगे। करण सिंह पंजाब का रहने वाला है और भिलाई में सीआईएसएफ आरक्षक के पद पर तैनात बताया गया है।

    अंजली के परिवार को करण के बारे में जानकारी थी और उसे वे अंजली का मित्र मानते थे। हालांकि, दोनों दुर्ग में एक साथ रह रहे हैं, इसकी जानकारी परिवार को नहीं थी।

    दोनों करीब 15 दिन पहले दुर्ग के शंकर नगर, गली नंबर 10 स्थित एक किराए के मकान में रहना शुरू किये थे।

    27 सितंबर को सामने आई मौत

    27 सितंबर को अंजली की मौत की जानकारी सामने आई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। घटनास्थल की परिस्थितियों और उपलब्ध जानकारी के आधार पर मामले की जांच शुरू की गई।

    करण सिंह ने परिवार को फोन कर अंजली की मौत की जानकारी दी। उसने खुद को अंजली का बॉयफ्रेंड बताते हुए दोनों के जल्द शादी करने की बात भी कही थी। करण के अनुसार अंजली ने फांसी लगाकर अपनी जान दी थी और उसने उसे नीचे उतारा था।

    मौत की जानकारी मिलने के बाद अंजली के परिजन दुर्ग पहुंचे और पोस्टमार्टम के बाद शव को लेकर कल्याण लौटे।

    शॉर्ट पोस्टमार्टम में आत्महत्या के संकेत

    दुर्ग के सीएसपी हर्षित मेहर के अनुसार, शॉर्ट पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सुसाइडल इंजरी का उल्लेख किया गया है। हालांकि, इससे मामले की जांच पूरी नहीं हो जाती। पुलिस घटनास्थल से मिले साक्ष्यों, फॉरेंसिक जांच, मोबाइल फोन और अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।

    घटनास्थल से सुसाइड नोट मिलने की जानकारी सामने नहीं आई है। पुलिस ने करण सिंह के साथ मकान मालिक और आसपास के लोगों से भी पूछताछ की है।

    परिवार ने उठाए मौत की परिस्थितियों पर सवाल

    अंजली के परिवार ने उसकी मौत को लेकर संदेह जताया है। परिवार का कहना है कि पुलिस की ओर से दिखाई गई तस्वीरों में अंजली के शरीर की स्थिति उन्हें सामान्य आत्महत्या जैसी नहीं लगी। परिवार ने यह भी दावा किया है कि उसकी एक कान की बाली गायब थी।

    इसके अलावा परिवार की ओर से करण सिंह के चेहरे पर सूजन या चोट दिखाई देने का भी दावा किया गया है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और इन्हें जांच के दायरे में ही देखा जा रहा है।

    अंजली की छोटी बहन रेशम सौरभ फुल्लुके ने करण सिंह पर अंजली की हत्या का आरोप लगाया है और परिवार ने मामले में न्याय की मांग की है। हालांकि, अभी तक हत्या का आरोप पुलिस जांच में साबित नहीं हुआ है।

    पैसों के लेन-देन ने भी खड़े किए सवाल

    जांच में अंजली और करण के बीच हुए ऑनलाइन पैसों के लेन-देन का पहलू भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। परिवार के पास बताए गए लेन-देन के स्क्रीनशॉट में 5 हजार, 2 हजार और 1,500 रुपये जैसी अलग-अलग रकम का उल्लेख है। परिवार के अनुसार दोनों के बीच कुल करीब 25 से 30 हजार रुपये का लेन-देन हुआ था।

    हालांकि, इन रकमों का उद्देश्य क्या था और इनका अंजली की मौत से कोई संबंध था या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है। बैंक और डिजिटल लेन-देन की जांच इस सवाल का जवाब दे सकती है।

    दिल्ली की तस्वीरों से दुर्ग तक पहुंचने का सवाल

    इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल अंजली के आखिरी दिनों को लेकर है। 8 सितंबर को दिल्ली जाने की बात कहकर घर से निकलने के बाद वह दुर्ग कब पहुंची, करण के साथ कब रहने लगी और शंकर नगर के किराए के मकान में दोनों कब से थे, इसकी पूरी समयरेखा अभी स्पष्ट नहीं हुई है।

    परिवार को भेजी गई कोचिंग की तस्वीरें भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकती हैं। यह पता लगाना जरूरी है कि तस्वीरें कब और कहां ली गई थीं तथा उस समय अंजली वास्तव में किस स्थान पर थी।

    मोबाइल और डिजिटल रिकॉर्ड से मिल सकती है अहम जानकारी

    पुलिस की जांच में अंजली और करण के मोबाइल फोन, दोनों के बीच हुई बातचीत, कॉल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया गतिविधियां और डिजिटल लेन-देन अहम हो सकते हैं। इसके अलावा घटनास्थल से मिले भौतिक साक्ष्य और फॉरेंसिक जांच से भी मौत की परिस्थितियों को समझने में मदद मिल सकती है।

    अगर अंजली ने आत्महत्या की थी, तो उसके पीछे की परिस्थितियों का पता लगाना भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। वहीं, परिवार द्वारा उठाए गए सवालों की पुष्टि या खंडन भी मेडिकल और फॉरेंसिक साक्ष्यों से ही हो सकेगा।

    अंजली की मौत के मामले में फिलहाल पुलिस की जांच जारी है। शॉर्ट पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आत्महत्या के अनुरूप चोट का उल्लेख सामने आया है, लेकिन परिवार की ओर से उठाए गए सवालों और घटनास्थल से जुड़े अन्य साक्ष्यों की जांच पूरी होने के बाद ही मौत की परिस्थितियों को लेकर अंतिम तस्वीर साफ हो सकेगी।

  • अरावली में 500 किलो पोशडोडा के साथ तस्कर गिरफ्तार, फायरिंग में 3 पुलिसकर्मी घायल

    अरावली में 500 किलो पोशडोडा के साथ तस्कर गिरफ्तार, फायरिंग में 3 पुलिसकर्मी घायल

    गुजरात के अरावली में करीब 500 किलो पोशडोडा (अफीम की भूसी) और दो माउजर पिस्तौल बरामद हुईं। फायरिंग में एक आरोपी घायल हुआ, जबकि तीन पुलिसकर्मी भी जख्मी हुए।

    गुजरात: अरावली जिले में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई के दौरान पुलिस और संदिग्ध तस्करों के बीच फायरिंग हो गई। मालपुर क्षेत्र के मोरडूंगरी के पास तड़के करीब तीन बजे हुई कार्रवाई में करीब 500 किलो पोशडोडा (अफीम की भूसी) और दो माउजर पिस्तौल बरामद की गईं। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में एक आरोपी के पैर में गोली लगी और उसे गिरफ्तार कर इलाज के लिए भेजा गया, जबकि उसका साथी फरार हो गया। मुठभेड़ में तीन पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं।

    वाहन रोकने पर शुरू हुई फायरिंग

    स्थानीय क्राइम ब्रांच की टीम को सूचना मिली थी कि मध्य प्रदेश से राजस्थान की ओर पोशडोडा (अफीम की भूसी) की खेप ले जाई जा रही है। निगरानी के दौरान संदिग्ध वाहन को रोकने की कोशिश की गई। पुलिस के मुताबिक, वाहन में सवार लोगों ने इस दौरान दो राउंड फायर किए, जिसके बाद टीम ने जवाबी कार्रवाई की।

    घायल आरोपी की पहचान राजाराम बिश्नोई के रूप में हुई है। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फरार आरोपी की तलाश जारी है। पुलिस ने मौके से दो माउजर पिस्तौल और अन्य सामग्री जब्त की है।

    कार्रवाई में LCB PI एम.एच. झाला, PSI पी.पी. सोलंकी और ASI कल्पेश सिंह घायल हुए। उनकी चोटों की विस्तृत स्थिति की जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

    10 दिन में दूसरी बार ड्रग तस्करी के दौरान फायरिंग

    अरावली में यह घटना करीब 10 दिन के भीतर ऐसी दूसरी कार्रवाई है, जिसमें मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के दौरान पुलिस को फायरिंग का सामना करना पड़ा।

    22 सितंबर को धंसूरा तालुका के शिनोल के पास पुलिस ने एक स्कॉर्पियो से 278.77 किलो पोशडोडा बरामद किया था। उस मामले में दो संदिग्ध फरार हो गए थे। वाहन से मोबाइल फोन, मैगजीन, दो जिंदा कारतूस और अलग-अलग नंबर प्लेट भी मिली थीं। जब्त सामग्री और वाहन की कुल अनुमानित कीमत करीब 50.10 लाख रुपये बताई गई थी।

    उस जांच में पुलिस को मंदसौर, मध्य प्रदेश से सांचौर, राजस्थान तक पोशडोडा पहुंचाने वाले कथित नेटवर्क की जानकारी मिली थी। 2 अक्टूबर की कार्रवाई में भी खेप के स्रोत और संभावित गंतव्य की जांच इसी वजह से महत्वपूर्ण हो गई है।

    2025 में भी सामने आया था ऐसा मामला

    अरावली के मालपुर क्षेत्र में इससे पहले अगस्त 2025 में करीब 437 किलो पोशडोडा पकड़ा गया था। उस कार्रवाई में भी पुलिस के पीछा करने के दौरान फायरिंग हुई थी। एक आरोपी गिरफ्तार हुआ था, जबकि दूसरा भाग निकला था। जांच में मंदसौर से गुजरात होते हुए राजस्थान तक खेप पहुंचाए जाने की जानकारी सामने आई थी।

    500 किलो की बरामदगी का कानूनी महत्व

    केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो के अनुसार पोशडोडा की छोटी मात्रा एक किलोग्राम और कॉमर्शियल मात्रा 50 किलोग्राम है। ऐसे में करीब 500 किलो की बरामदगी कॉमर्शियल मात्रा की सीमा से लगभग दस गुना है।

    NDPS Act की धारा 15 के तहत कमर्शियल मात्रा वाले पोशडोडा के अपराध में 10 से 20 वर्ष तक के कठोर कारावास और जुर्माने का प्रावधान है। आगे की कानूनी कार्रवाई जांच में बरामदगी और अन्य साक्ष्यों की पुष्टि पर निर्भर करेगी।

    अब जांच में किन कड़ियों की तलाश

    पुलिस की जांच अब फरार आरोपी की तलाश के साथ हथियारों के स्रोत और पोशडोडा की सप्लाई चेन तक पहुंचने पर केंद्रित है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि खेप मध्य प्रदेश में कहां से चली, गुजरात के रास्ते किस नेटवर्क ने इसे आगे बढ़ाया और राजस्थान में इसका अंतिम प्राप्तकर्ता कौन था।

    जांच में 22 सितंबर की बरामदगी और पुराने मामलों से कोई सीधा संबंध सामने आता है या नहीं, यह भी महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल एक आरोपी गिरफ्तार है, जबकि दूसरे की तलाश जारी है।

  • ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मुंबई-दिल्ली में प्रदर्शन, SIR विवाद के बीच 2.07 करोड़ मतदाताओं पर नजर

    ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मुंबई-दिल्ली में प्रदर्शन, SIR विवाद के बीच 2.07 करोड़ मतदाताओं पर नजर

    ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मुंबई-दिल्ली में प्रदर्शन, SIR को लेकर विवाद तेज। महाराष्ट्र में 2.07 करोड़ मतदाताओं के नाम और 12 अक्टूबर की समयसीमा जानिए।

    मुंबई: मुंबई और दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शुक्रवार को विरोध प्रदर्शन हुए। मुंबई में कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी ने शिवाजी पार्क में ‘जेल भरो आंदोलन’ का आह्वान किया, जबकि दिल्ली में जंतर-मंतर के आसपास प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया। विरोध का मुख्य मुद्दा मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर है। महाराष्ट्र में इस प्रक्रिया के तहत करीब 2.07 करोड़ मतदाताओं के नाम प्रारूप सूची में शामिल नहीं हुए हैं, हालांकि यह संख्या अंतिम रूप से हटाए गए मतदाताओं की नहीं है।

    मुंबई में शिवाजी पार्क के बाहर कड़ी सुरक्षा

    मुंबई पुलिस ने शिवाजी पार्क में प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। इसके बावजूद सीजेपी ने शुक्रवार शाम 4 बजे शिवाजी पार्क के गेट नंबर 6 के पास आंदोलन करने का ऐलान किया। पुलिस ने शिवाजी पार्क में सभा से जुड़े न्यायिक निर्देश, आवश्यक स्थानीय अनुमति, यातायात, शोर और आसपास के अस्पतालों तक पहुंच जैसे कारणों का हवाला दिया है। प्रदर्शन को देखते हुए शिवाजी पार्क और दादर रेलवे स्टेशन के आसपास बैरिकेडिंग तथा अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की गई।

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    सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आंदोलन को देशव्यापी अभियान की शुरुआत बताया है। उनके साथ सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और सह-संयोजक आशुतोष रांका भी अभियान में सक्रिय हैं। सीजेपी ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, एसआईआर पर रोक, जनवरी 2025 की मतदाता सूची को आधार बनाकर चुनाव कराने और मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा नागरिक समाज की भागीदारी की मांग रखी है। पार्टी ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग भी की है।

    अभिजीत दीपके को लेकर हिरासत की खबर पर भी स्थिति स्पष्ट हुई। एक दिन पहले मरीन ड्राइव के पास उन्हें पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई थी, लेकिन सीजेपी ने इसका खंडन किया और दीपके ने कार के भीतर से अपनी तस्वीर साझा की।

    शिवाजी पार्क में स्थानीय लोगों की आपत्ति

    प्रदर्शन को लेकर दादर के कुछ स्थानीय निवासियों ने भी आपत्ति जताई है। सुनील भगवत ने कहा कि शिवाजी पार्क में लगातार प्रदर्शनों से आम लोगों की परेशानी बढ़ती है। स्थानीय निवासी रविंद्र ने पिछले प्रदर्शनों के दौरान भीड़, यातायात और आसपास के स्कूलों तथा अस्पताल पर पड़ने वाले असर का मुद्दा उठाया। ये स्थानीय निवासियों की आपत्तियां हैं और इन्हें पूरे इलाके की सामूहिक राय के रूप में नहीं देखा जा सकता।

    दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और हिरासत

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    दिल्ली में जंतर-मंतर के पास एसएफआई और डीवाईएफआई के कार्यकर्ताओं ने भी प्रदर्शन किया। सीपीआई(एम) महासचिव एमए बेबी ने ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की। एएपी के दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज समेत विपक्षी नेताओं और छात्र संगठनों के कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। बाद की जानकारी में हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों की संख्या 500 से अधिक बताई गई। आरजेडी सांसद मनोज झा भी हिरासत में लिए गए लोगों में शामिल बताए गए हैं।

    दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी और नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू की गई। इसके तहत बिना लिखित अनुमति के सभा, जुलूस, प्रदर्शन, धरना, नारेबाजी और भाषण पर प्रतिबंध लगाया गया। जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में अतिरिक्त पुलिस तथा सुरक्षा बल तैनात किए गए और कई प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग की गई।

    एसआईआर विवाद के केंद्र में महाराष्ट्र के 2.07 करोड़ मतदाता

    महाराष्ट्र में एसआईआर के कारण मतदाता सूची को लेकर सबसे बड़ा सवाल 2.07 करोड़ नामों का है। राज्य में एसआईआर से पहले करीब 9.79 करोड़ मतदाता थे। 31 अगस्त को प्रकाशित प्रारूप मतदाता सूची में करीब 7.72 करोड़ नाम शामिल हुए। लगभग 2.07 करोड़ मतदाताओं के गणना प्रपत्र उपलब्ध नहीं होने के कारण उनके नाम प्रारूप सूची में नहीं आए।

    हालांकि, 2.07 करोड़ का आंकड़ा अंतिम रूप से हटाए गए मतदाताओं की संख्या नहीं है। पात्र मतदाता दावा और आपत्ति की प्रक्रिया के जरिए अपना नाम शामिल करा सकते हैं। चुनाव आयोग ने ऐसे छूटे हुए पात्र मतदाताओं के लिए विशेष नामांकन अभियान चलाने के निर्देश भी दिए हैं।

    1.22 करोड़ मतदाताओं का मामला क्या है?

    महाराष्ट्र में करीब 1.22 करोड़ मतदाता ऐसे भी हैं जिन्हें उनके पुराने चुनावी रिकॉर्ड से जुड़े विवरण में विसंगति या मैपिंग नहीं होने के कारण नोटिस प्रक्रिया में चिन्हित किया गया है। इनमें करीब 62.48 लाख मामले ऐसे हैं जिनमें पुराने रिकॉर्ड में रिश्तेदारों की जानकारी को लेकर तार्किक विसंगति बताई गई, जबकि करीब 59.76 लाख मतदाता पुराने रिकॉर्ड में रिश्तेदार से मैप नहीं हो सके।

    यह आंकड़ा 2.07 करोड़ से अलग है। इसलिए 1.22 करोड़ और 2.07 करोड़ को जोड़कर या दोनों को ‘हटाए गए मतदाता’ बताकर देखना सही नहीं होगा।

    नोटिस मिला है तो क्या करना होगा?

    एसआईआर प्रक्रिया में ‘नो मैपिंग’ या ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ से जुड़े नोटिस पाने वाले मतदाताओं के लिए चुनाव आयोग ने प्रक्रिया आसान की है। अब सामान्य स्थिति में ऐसे मतदाता को हर मामले में व्यक्तिगत रूप से निर्वाचन कार्यालय जाकर सुनवाई में उपस्थित होना जरूरी नहीं है।

    बूथ लेवल अधिकारी यानी बीएलओ मतदाता के घर जाकर जरूरी दस्तावेज ले सकता है और उन्हें ईसीआईनेट पर अपलोड किया जा सकता है। कुछ मामलों में जरूरत पड़ने पर सुनवाई ऑनलाइन भी की जा सकती है और परिवार का कोई वयस्क सदस्य मतदाता की ओर से उपस्थित हो सकता है।

    चुनाव आयोग के नागरिक सेवा पोर्टल पर एसआईआर 2026 के लिए नाम खोजने, प्रारूप मतदाता सूची देखने, नोटिस के जवाब में दस्तावेज जमा करने और बीएलओ से संपर्क करने की सुविधाएं उपलब्ध हैं। पात्र व्यक्ति लगातार चलने वाली मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया के तहत नाम शामिल कराने के लिए संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी के पास आवेदन भी कर सकते हैं।

    महाराष्ट्र में 12 अक्टूबर तक दावा-आपत्ति

    महाराष्ट्र में एसआईआर से संबंधित दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख बढ़ाकर 12 अक्टूबर 2026 कर दी गई है। नोटिस, दावों और आपत्तियों के निपटारे की समयसीमा 10 नवंबर तक रखी गई है और संशोधित कार्यक्रम के अनुसार अंतिम मतदाता सूची 16 नवंबर को प्रकाशित की जानी है।

    इसका मतलब है कि प्रारूप सूची में नाम नहीं मिलने या एसआईआर नोटिस मिलने वाले मतदाताओं के लिए अभी प्रक्रिया पूरी तरह बंद नहीं हुई है। चुनाव आयोग की व्यवस्था के अनुसार ऐसे मामलों में दावा, आपत्ति और दस्तावेज जमा करने का अवसर उपलब्ध है।

    ईसीआई के भीतर कथित मतभेद पर भी विवाद

    ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध का एक कारण चुनाव आयोग के भीतर निर्णय प्रक्रिया को लेकर उठे सवाल भी हैं। चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से करीब 10 महीने में कम से कम 14 अवसरों पर कुछ फैसलों और आदेशों को लेकर आपत्तियां दर्ज किए जाने की बात सामने आई थी।

    इनमें मतदाता सूची, नाम जोड़ने और हटाने तथा चुनाव आयोग की तकनीकी और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े विषय शामिल बताए गए। दूसरी ओर चुनाव आयोग ने कहा है कि एसआईआर सहित उसके महत्वपूर्ण फैसले तीनों आयुक्तों की सहमति से लिए गए।

    मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच चुका है। याचिका में चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया और एसआईआर को लेकर सवाल उठाए गए हैं। अदालत में उठाई गई मांगों को अभी न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।

    4 अक्टूबर को मुंबई में फिर बड़ा मार्च

    2 अक्टूबर के आंदोलन के बाद महाराष्ट्र में विरोध का अगला बड़ा कार्यक्रम 4 अक्टूबर को प्रस्तावित है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे के संयुक्त मार्च में कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) भी शामिल होने की घोषणा कर चुकी हैं।

    मार्च भायखला से शुरू होकर बीएमसी मुख्यालय तक जाने का कार्यक्रम है। कांग्रेस की ओर से नाना पटोले और एनसीपी (शरदचंद्र पवार) की ओर से सुप्रिया सुले ने भागीदारी की पुष्टि की है।

    आगे क्या होगा?

    मुंबई में सीजेपी ने आंदोलन को गोवा, बेंगलुरु और कोलकाता समेत दूसरे शहरों तक ले जाने की घोषणा की है। संगठन का कहना है कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रखा जाएगा। दूसरी ओर विपक्षी दलों ने भी एसआईआर और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर अलग-अलग कार्यक्रमों की घोषणा की है।

    फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम का सीधा असर दो स्तरों पर दिखाई दे रहा है। एक तरफ ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध देश के कई हिस्सों में फैल रहा है, वहीं दूसरी तरफ महाराष्ट्र के लाखों मतदाताओं के लिए एसआईआर प्रक्रिया में अपने नाम और दस्तावेज की स्थिति जांचना महत्वपूर्ण हो गया है। महाराष्ट्र में 12 अक्टूबर की दावा-आपत्ति समयसीमा और 16 नवंबर की प्रस्तावित अंतिम मतदाता सूची अब इस विवाद का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव है।

  • घर में दुकान या कारोबार चलाने वालों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सील करने की प्रक्रिया से मचा हड़कंप

    घर में दुकान या कारोबार चलाने वालों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सील करने की प्रक्रिया से मचा हड़कंप

    आवासीय इलाके में बिना मंजूरी कारोबार चलाने पर सुप्रीम कोर्ट ने सील करने का निर्देश दिया है। जानें किन संपत्तियों पर कार्रवाई होगी और किसे फिलहाल राहत है।

    नई दिल्ली: आवासीय इलाके में घर या संपत्ति का दुकान, कार्यालय या दूसरे व्यावसायिक काम के लिए इस्तेमाल करने वालों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 22 सितंबर 2026 के आदेश में स्थिति स्पष्ट कर दी है। जिन इलाकों को स्पष्ट रूप से केवल आवासीय उपयोग के लिए निर्धारित किया गया है और जहां स्वीकृति भी आवासीय उपयोग की है, वहां व्यावसायिक गतिविधि पाए जाने पर संबंधित परिसर को पहली कार्रवाई के तौर पर सील किया जा सकता है। हालांकि, यह आदेश हर घर में चल रहे हर कारोबार पर स्वतः लागू नहीं होता। भूमि उपयोग, स्वीकृत भवन योजना और संबंधित क्षेत्र के नियम इसके लिए अहम होंगे।

    यह मामला लॉगनाथन बनाम तमिलनाडु सरकार से जुड़ा है। इसकी सुनवाई न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ कर रही है। मामले की निगरानी के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार सिन्हा को न्याय मित्र बनाया गया है। अगली सुनवाई 23 नवंबर 2026 को होगी और राज्यों तथा संबंधित प्राधिकरणों को उससे एक सप्ताह पहले अद्यतन स्थिति रिपोर्ट दाखिल करनी है।

    आवासीय इलाके में कारोबार मिला तो पहले होगा सील

    सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि जिन क्षेत्रों को विशेष रूप से आवासीय घोषित किया गया है और जहां राज्य सरकार या सक्षम प्राधिकरण ने केवल आवासीय उपयोग की अनुमति दी है, वहां व्यावसायिक गतिविधि नहीं चलनी चाहिए। ऐसी गतिविधि मिलने पर परिसर को पहली कार्रवाई के तौर पर सील किया जाना है।

    इसमें केवल सड़क किनारे बनी बड़ी दुकानें ही नहीं, बल्कि आवासीय संपत्ति का स्वीकृत उपयोग बदलकर चलाया जा रहा अन्य व्यावसायिक इस्तेमाल भी जांच के दायरे में आ सकता है। कोचिंग केंद्र, कार्यालय, पीजी और दूसरे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से जुड़े मामले भी इस व्यापक भूमि उपयोग जांच का हिस्सा रहे हैं।

    हर घर में दुकान चलाने पर तुरंत कार्रवाई नहीं

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि केवल किसी घर में कोई व्यावसायिक गतिविधि दिखाई देने से यह निष्कर्ष नहीं निकलेगा कि उसे तुरंत सील कर दिया जाएगा।

    सबसे पहले यह देखा जाएगा कि संबंधित जमीन या इलाका किस उपयोग के लिए निर्धारित है। इसके बाद स्वीकृत भवन योजना और सक्षम प्राधिकरण से मिली अनुमति की स्थिति देखी जाएगी। यदि क्षेत्र स्पष्ट रूप से आवासीय है और भवन का उपयोग भी केवल आवासीय उद्देश्य के लिए स्वीकृत है, लेकिन वहां नियमों के खिलाफ व्यावसायिक गतिविधि चल रही है, तो सीलिंग की कार्रवाई हो सकती है।

    मिश्रित उपयोग वाले इलाकों में फिलहाल राहत

    ऐसे इलाके जहां भूमि उपयोग स्पष्ट रूप से केवल आवासीय या केवल व्यावसायिक निर्धारित नहीं है, वहां स्थिति अलग है। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल ऐसे मामलों में जमीन पर मौजूदा स्थिति नहीं बदलने का निर्देश दिया है। हालांकि संबंधित प्रशासनिक और कानूनी कार्यवाही कागजों पर जारी रह सकती है।

    इसके साथ ही आप को बता दें, कि मिश्रित उपयोग वाले इलाके में दुकान चलाने वाले हर व्यक्ति के लिए तत्काल सील का खतरा नहीं है। यहां संबंधित क्षेत्र का मास्टर प्लान और लागू नियम देखना जरूरी होगा।

    मालिकाना विवाद भी नहीं बनेगा अपने आप बचाव

    यदि किसी मकान, जमीन या इमारत को लेकर अदालत में मुकदमा चल रहा है, तो केवल मुकदमा लंबित होने से कार्रवाई अपने आप नहीं रुकेगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यदि संपत्ति का वास्तविक उपयोग उस उद्देश्य के खिलाफ है जिसके लिए जमीन या भवन आवंटित किया गया था और सक्षम प्राधिकरण ने जिस योजना को मंजूरी दी थी, तो लंबित मुकदमा होने के बावजूद परिसर को सील किया जा सकता है।

    बिना किसी मंजूरी का निर्माण मिला तो सील होगा या ध्वस्तीकरण

    सुप्रीम कोर्ट ने उन संरचनाओं को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिया है जो पूरी तरह बिना किसी सक्षम प्राधिकरण की मंजूरी के बनाई गई हैं। ऐसी संरचनाओं के मामले में कानून के अनुसार सील या ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ सकती है।

    नगर निकाय मनमानी कार्रवाई नहीं कर सकते

    सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ संपत्ति मालिकों और कारोबारियों पर ही ध्यान नहीं दिया है। नगर निकायों और संबंधित अधिकारियों को भी स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि कार्रवाई में भेदभाव नहीं होना चाहिए।

    यदि समान परिस्थितियों वाली संपत्तियों में से कुछ पर कार्रवाई और कुछ को बिना कारण छोड़ने की शिकायत सामने आती है, तो अदालत ने इसे गंभीरता से लेने की चेतावनी दी है। आदेश में अधिकारियों को किसी भी तरह की चुनिंदा कार्रवाई से बचने को कहा गया है।

    भोपाल में सील प्रक्रिया को लेकर भी उठे सवाल

    सुप्रीम कोर्ट के सामने भोपाल की कार्रवाई का मामला भी आया। वहां कुछ संपत्तियों को सील करने के बाद थोड़े समय में दोबारा खोलने की स्थिति पर सवाल उठे। अदालत को बताया गया कि कुछ मामलों में सील करने के बाद ऐसा कोई नया घटनाक्रम सामने नहीं आया था, जिससे संपत्ति खोलने का आधार स्पष्ट हो। कोर्ट ने कार्रवाई में एकरूपता और नियमों के पालन पर जोर दिया।

    भोपाल का मास्टर प्लान भी इस मामले में महत्वपूर्ण है। अदालत के सामने यह बताया गया कि वहां मास्टर प्लान लंबे समय से संशोधित नहीं हुआ था और नया मसौदा तैयार किया गया है। हालांकि संपत्तियों के मौजूदा उपयोग की वैधता जांचते समय लागू मास्टर प्लान और भवन नियमों को आधार बनाने की बात स्पष्ट की गई है।

    देशभर में क्यों बढ़ी चिंता

    यह मामला मूल रूप से एक बिना स्वीकृति बने जी+1 भवन से जुड़ा था, लेकिन मार्च 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे व्यापक स्तर पर लेते हुए राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की राजधानियों में आवासीय इलाकों के गैर-आवासीय इस्तेमाल की जांच का निर्देश दिया था। संबंधित नगर निकायों को अपने क्षेत्र में ऐसे मामलों की पहचान कर स्थिति अदालत के सामने रखने को कहा गया था।

    इसके बाद भूमि उपयोग और अनधिकृत निर्माण से जुड़े मामले दिल्ली, लखनऊ, जयपुर, मेरठ और अन्य शहरों तक पहुंचे। सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों से जमीन पर की गई वास्तविक कार्रवाई का ब्योरा मांगा है, केवल कागजी अनुपालन को पर्याप्त नहीं माना है।

    घर में दुकान चलाने वालों को क्या जांचना चाहिए

    ऐसी संपत्ति के मालिक या किरायेदार को सबसे पहले यह देखना चाहिए कि जमीन और भवन का स्वीकृत उपयोग क्या है। इसके साथ स्वीकृत भवन योजना, संबंधित क्षेत्र का मास्टर प्लान, भवन उपविधियां और व्यावसायिक उपयोग से जुड़ी अनुमति की स्थिति देखना जरूरी है।

    सिर्फ व्यापार संबंधी पंजीकरण या लाइसेंस होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि भवन का भूमि उपयोग भी नियमों के अनुसार है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले में स्वीकृत उपयोग और वास्तविक उपयोग के बीच अंतर को महत्वपूर्ण माना है।

    मुंबई में क्या स्थिति है

    सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद बीएमसी से जुड़ी ऐसी कोई भी प्रक्रिया सामने नहीं आई है।हालांकि मुंबई में आवासीय संपत्ति के व्यावसायिक इस्तेमाल को लेकर स्थानीय स्तर पर कार्रवाई के मामले सामने आ रहे हैं। जुहू में एक आवासीय संपत्ति में व्यावसायिक उपयोग के लिए किए जा रहे काम को लेकर बीएमसी ने स्टॉप वर्क नोटिस जारी किया था। स्थानीय निवासियों ने आपत्ति जताई थी। ऐसे कई मामले देखने को मिल सकते है।

    अगली सुनवाई में क्या होगा

    लॉगनाथन मामले में अगली सुनवाई 23 नवंबर 2026 को दोपहर 2 बजे निर्धारित है। राज्यों और संबंधित प्राधिकरणों को उससे एक सप्ताह पहले अपनी अद्यतन स्थिति रिपोर्ट दाखिल करनी है। न्याय मित्र अजीत कुमार सिन्हा को भी समेकित रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है।

    फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आवासीय क्षेत्र में चल रहा कारोबार अपने आप अवैध नहीं माना जाएगा, लेकिन जहां क्षेत्र स्पष्ट रूप से केवल आवासीय उपयोग के लिए निर्धारित है और स्वीकृत उपयोग के विपरीत व्यावसायिक गतिविधि चल रही है, वहां सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तहत सीलिंग की कार्रवाई का रास्ता साफ है। वहीं मिश्रित या स्पष्ट रूप से निर्धारित नहीं किए गए उपयोग वाले क्षेत्रों में फिलहाल जमीनी स्थिति बनाए रखने का निर्देश है।

  • Rakhi Sawant: जिसे Bollywood ने तमाशा समझा, वही कैसे बनी Pop Culture की पहचान?

    Rakhi Sawant: जिसे Bollywood ने तमाशा समझा, वही कैसे बनी Pop Culture की पहचान?

    Rakhi Sawant फिर चर्चा में हैं। Govinda विवाद से Hania Aamir तक जानिए कैसे संघर्ष, रियलिटी टीवी और वायरल कल्चर ने उन्हें पॉप कल्चर का चेहरा बनाया।

    मुंबई: राखी सावंत एक बार फिर सुर्खियों में हैं। सितंबर 2026 में गणेश उत्सव के दौरान गोविंदा के कोमल रानी स्वर्णकार के साथ लालबागचा राजा पहुंचने पर उन्होंने सार्वजनिक रूप से गोविंदा को अपनी पत्नी सुनीता आहूजा के साथ रहने की सलाह दी। इसी महीने राखी पाकिस्तानी अभिनेत्री हानिया आमिर के म्यूजिक वीडियो में नजर आईं और इससे पहले कंगना रनौत के साथ उनके बयान को लेकर विवाद भी हुआ। लेकिन राखी सावंत की कहानी को सिर्फ इन विवादों तक सीमित कर देना उनके करीब दो दशक लंबे सफर को अधूरा छोड़ देता है।

    राखी सावंत आज भी खबर क्यों बनती हैं?

    यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 2026 में राखी सावंत की मौजूदगी सिर्फ किसी फिल्म, रियलिटी शो या एक वायरल बयान तक सीमित नहीं रही। बीबीसी हिंदी के जुलाई 2026 के इंटरव्यू में भी यही सवाल सामने आया कि वर्षों से रील्स, वीडियो और बयानों में दिखाई देने वाली राखी के पीछे की राखी कौन है।

    मई 2026 के The Bombay Journey इंटरव्यू में राखी ने अपनी जिंदगी के कई ऐसे हिस्सों पर बात की जिन्हें उनकी ग्लैमरस और विवादित छवि अक्सर ढक देती है। उन्होंने पानीपुरी बेचने, छोटे-मोटे काम करने, आर्थिक संघर्ष, बॉलीवुड में अस्वीकृति, सरोज खान से प्रशिक्षण, साकीनाका में पीजी जीवन, शुरुआती मुश्किलों और बाद में रियलिटी टेलीविजन से मिली पहचान के बारे में बात की। इसी बातचीत में उन्होंने पापाराजी को अपनी पब्लिसिटी रणनीति का हिस्सा बनाने और अपने बारे में यह विचार भी व्यक्त किया कि वह खुद को बेचती हैं।

    यही शायद राखी सावंत को समझने की सबसे महत्वपूर्ण कुंजी है।

    2000 के दशक की वह लड़की, जिसे बॉलीवुड की चमकदार दुनिया में आसानी से जगह नहीं मिली, धीरे-धीरे अपनी पहचान उसी चीज से बनाने लगी जिसे दूसरे लोग उसके खिलाफ इस्तेमाल करते थे—उसकी बेबाकी, निजी जिंदगी, असामान्य अंदाज और कैमरे के सामने बिना झिझक रहने की क्षमता।

    Koffee With Karan से शुरू हुआ एक अलग तरह का सेलिब्रिटी सफर

    2007 में Koffee With Karan के दूसरे सीजन में करण जौहर के सामने बैठी राखी सावंत बाकी मेहमानों से बिल्कुल अलग दिखाई दी थीं। इससे पहले शो पर शाहरुख खान, काजोल और अमिताभ बच्चन जैसे बड़े नाम आ चुके थे। राखी ने अंग्रेजी के बजाय हिंदी में बात की, भावुक हुईं और अपने अंदाज में कैमरे के सामने खुलकर जवाब दिए।

    कॉस्मेटिक सर्जरी से जुड़े सवाल पर उनका यह जवाब कि जो चीज भगवान नहीं देता, वह डॉक्टर दे सकता है, उस दौर की सेलिब्रिटी बातचीत का चर्चित हिस्सा बन गया।

    राखी की खासियत यही थी कि वह उस समय की पारंपरिक बॉलीवुड स्टार छवि में फिट नहीं बैठती थीं। उन्होंने अपनी असहजता छिपाने के बजाय उसे ही अपनी पहचान बना लिया।

    इसके बाद Bigg Boss, रियलिटी टीवी और निजी जिंदगी से जुड़े कार्यक्रमों ने उनकी सार्वजनिक पहचान को और मजबूत किया। 2009 में Rakhi Ka Swayamwar इसका बड़ा उदाहरण बना, जिसमें उन्होंने 16 पुरुषों से मुलाकात की और अंत में कनाडा के कारोबारी एलेश परुजनवाला को चुना। लेकिन सितंबर 2026 में राखी ने इस पुराने शो के पीछे की अपनी सोच के बारे में नया खुलासा किया। उनके मुताबिक उस समय वह आर्थिक सुरक्षा चाहती थीं और लोखंडवाला में अपना घर खरीदने के लिए पैसे कमाना चाहती थीं।

    इस खुलासे से उनके पुराने करियर को देखने का एक नया रास्ता खुलता है। जिस कार्यक्रम को दर्शकों ने प्रेम और शादी के रियलिटी शो के रूप में देखा, राखी अब उसे अपने आर्थिक संघर्ष और भविष्य सुरक्षित करने की कोशिश के संदर्भ में याद करती हैं।

    रियलिटी टीवी ने राखी को बनाया, लेकिन राखी ने भी रियलिटी टीवी को बदलने में भूमिका निभाई

    Bigg Boss के साथ राखी सावंत का रिश्ता भी लंबा रहा है। 2026 में उन्होंने Bigg Boss Marathi 6 में वाइल्ड कार्ड के रूप में प्रवेश किया। उनका सफर अप्रैल में खत्म हुआ, लेकिन बाहर निकलते समय भी कहानी साधारण नहीं रही। उन्हें तीन दरवाजों में से एक चुनना था, जिनके पीछे 10 हजार रुपये, 10 लाख रुपये और 7 लाख रुपये की राशि थी। राखी ने 7 लाख रुपये वाला विकल्प चुना, जिससे शो की विजेता राशि बढ़कर 15 लाख रुपये हो गई।

    शो के दौरान राकेश बापट के साथ उनकी नजदीकी भी चर्चा में रही। बाहर आने के बाद दिए गए एक इंटरव्यू में राखी ने राकेश के लिए अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त किया।

    यानी जिस दौर में सेलिब्रिटी की निजी जिंदगी को कैमरे से दूर रखना प्रतिष्ठा का हिस्सा माना जाता था, राखी ने निजी जिंदगी को ही मनोरंजन का हिस्सा बना दिया।

    रितेश, आदिल और बाद के रिश्तों से लेकर राकेश बापट तक, उनकी जिंदगी के रिश्ते बार-बार सार्वजनिक बातचीत का हिस्सा बने। यह सिर्फ उनकी निजी कहानी नहीं रही; यह उनके सार्वजनिक व्यक्तित्व का भी हिस्सा बन गई।

    पापाराजी से दूरी नहीं, बल्कि कैमरे के साथ सीधा रिश्ता

    राखी के करियर में एक और बदलाव बेहद महत्वपूर्ण है। पहले किसी सेलिब्रिटी को खबर बनाने के लिए टेलीविजन चैनल या अखबार की जरूरत होती थी। अब इंस्टाग्राम, पापाराजी, यूट्यूब और शॉर्ट वीडियो खुद मीडिया प्लेटफॉर्म बन चुके हैं।

    राखी इस बदलाव को बहुत पहले समझने वाली सेलिब्रिटीज में दिखाई देती हैं।

    The Bombay Journey में उन्होंने पापाराजी को खुद बुलाने और कैमरे के सामने अपनी मौजूदगी को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें अपनी सार्वजनिक छवि को लेकर काफी जागरूकता है।

    यही कारण है कि आज राखी से जुड़ा एक छोटा वीडियो भी टीवी स्टोरी, इंस्टाग्राम रील, यूट्यूब वीडियो और मनोरंजन वेबसाइट की खबर में बदल सकता है।

    यानी राखी सिर्फ मीडिया की खबर नहीं हैं। कई बार वह खुद खबर बनने की प्रक्रिया का हिस्सा बन जाती हैं।

    2026 में राखी सावंत की नई पहचान

    जून 2026 में वरुण धवन ने कॉमेडियन समय भाट की जगह यहां संदर्भ में Tanmay Bhat के शो पर राखी सावंत को पॉप कल्चर का हिस्सा और आइकन बताया। उन्होंने कहा कि लोगों ने राखी की नकल करने की कोशिश की, लेकिन राखी जैसी दूसरी कोई नहीं है।

    यह टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सिर्फ राखी की अपनी बनाई हुई छवि नहीं है। बॉलीवुड की नई पीढ़ी का एक चर्चित अभिनेता भी उनकी सार्वजनिक पहचान को भारतीय पॉप कल्चर से जोड़ रहा था।

    और इसके बाद 2026 में राखी की पहचान का एक और नया पहलू सामने आया।

    दिल्ली के ड्रैग और क्वियर कल्चर में राखी

    अगस्त 2026 में दिल्ली के एक ड्रैग कार्यक्रम में राखी सावंत ने हिस्सा लिया। वहां उनका स्वागत जोरदार तालियों और नारों के साथ हुआ। उन्होंने खुद को ड्रैग क्वीन के रूप में पेश किया और LGBTQ समुदाय के समर्थन की बात कही।

    Vogue India के अगस्त 2026 के प्रोफाइल में राखी ने कहा कि उन्होंने पूरी जिंदगी ड्रैग किया है, भले ही उस समय उन्हें इसे इसी नाम से समझ नहीं आता था। उन्होंने अपने मेकअप, हेयर और कपड़ों को लेकर वर्षों तक होने वाले मजाक का भी जिक्र किया। इसी बातचीत के दौरान उन्होंने मक्का से क्वियर समुदाय के लिए प्रार्थना करने की बात कही।

    यह राखी के सार्वजनिक व्यक्तित्व का एक नया पहलू है।

    जिस महिला के कपड़े, मेकअप और बोलने के अंदाज को कभी मुख्यधारा की मनोरंजन संस्कृति में मजाक का विषय बनाया गया, वही महिला 2026 में क्वियर और ड्रैग स्पेस में दर्शकों के बीच सम्मान और उत्साह के साथ दिखाई दी।

    मक्का, उमराह और धार्मिक पहचान

    अगस्त 2026 में राखी उमराह के लिए मक्का पहुंचीं। वहां उनके कई वीडियो सामने आए। एक वीडियो में वह जायनमाज बांटती दिखाई दीं और भीड़ बढ़ने के बाद उन्हें परेशानी का सामना भी करना पड़ा। उन्होंने भारत के साथ-साथ जेन-जी और नेपाल के बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए प्रार्थना करने की बात कही।

    यहां राखी की कहानी एक और दिशा में जाती है।

    एक तरफ वह ड्रैग और क्वियर समुदाय के कार्यक्रम में दिखाई देती हैं, दूसरी तरफ मक्का में उमराह करती हैं। इन दोनों पहलुओं को एक-दूसरे के विरोध के रूप में देखना जरूरी नहीं है, लेकिन इतना जरूर है कि 2026 की राखी सावंत को केवल उनकी पुरानी “बोल्ड और विवादित” छवि से समझना मुश्किल है।

    हानिया आमिर के साथ सीमा पार पहचान

    सितंबर 2026 में पाकिस्तानी अभिनेत्री हानिया आमिर के डेब्यू म्यूजिक वीडियो में राखी सावंत की विशेष आवाज मौजूदगी ने एक और नया अध्याय जोड़ा। राखी ने बाद में हानिया के लिए प्यार और प्रशंसा भी व्यक्त की।

    करीब दो दशक पहले जिनकी पहचान मुख्यतः मुंबई के बॉलीवुड और रियलिटी टीवी से जुड़ी थी, वह अब सोशल मीडिया और डिजिटल पॉप कल्चर के जरिए भारत से बाहर भी दिखाई दे रही हैं।

    कंगना रनौत से विवाद और राखी की पुरानी छवि

    लेकिन राखी का पुराना विवादित पक्ष खत्म नहीं हुआ है।

    सितंबर 2026 में राखी की टिप्पणी पर कंगना रनौत ने सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी। कंगना ने राखी पर सफल महिलाओं के खिलाफ टिप्पणी करने का आरोप लगाया और अपनी आलोचना दर्ज की। यह विवाद भी सोशल मीडिया और मनोरंजन खबरों में चर्चा का विषय बना।

    इससे एक बात स्पष्ट होती है—राखी सावंत की नई पहचान बनने का मतलब यह नहीं है कि उनकी पुरानी विवादित छवि खत्म हो गई है।

    वह आज भी ऐसे बयान देती हैं जिन पर बहस होती है, और यही उनकी सार्वजनिक पहचान का एक हिस्सा बना हुआ है।

    गोविंदा विवाद ने फिर दिखाया कि राखी कैसे खबर बनाती हैं

    सितंबर के अंत में राखी ने गोविंदा और कोमल रानी स्वर्णकार के लालबागचा राजा दर्शन पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने गोविंदा को सुनीता आहूजा के साथ रहने की सलाह दी और सवाल उठाया कि वह किसी दूसरी महिला के साथ क्यों घूम रहे हैं।

    गोविंदा और कोमल रानी के संबंधों को लेकर मीडिया में चर्चाएं रही हैं, लेकिन उनके बीच किसी रोमांटिक रिश्ते की सार्वजनिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इस पूरे मामले को आरोप या अफवाह से आगे बढ़ाकर तथ्य के रूप में देखना सही नहीं होगा।

    फिर भी इस घटना ने राखी की एक खास भूमिका दोबारा सामने ला दी—वह खुद किसी विवाद की मुख्य पात्र न होते हुए भी उस विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया देकर उसे मनोरंजन की खबर में बदल सकती हैं।

    राखी सावंत की कहानी में असली बदलाव क्या है?

    राखी सावंत की कहानी को सिर्फ “ड्रामा क्वीन” कहना आसान है। लेकिन उनका सफर इससे कहीं ज्यादा जटिल है।

    उन्होंने आर्थिक संघर्ष देखा, छोटे काम किए, बॉलीवुड में अस्वीकृति का सामना किया, सरोज खान से प्रशिक्षण लिया, रियलिटी टीवी में पहचान बनाई, अपनी निजी जिंदगी को सार्वजनिक किया, पापाराजी के साथ एक अलग तरह का रिश्ता बनाया और फिर सोशल मीडिया के दौर में उसी सार्वजनिकता को अपने पक्ष में इस्तेमाल किया।

    अब वह सिर्फ किसी शो की प्रतियोगी नहीं रहना चाहतीं। 2026 में सामने आए इंटरव्यू और वीडियो में उन्होंने अपने शो, कॉमेडी और नेटफ्लिक्स जैसे प्लेटफॉर्म पर काम करने की इच्छा भी जताई है। यानी जिस महिला ने लंबे समय तक दूसरे लोगों के बनाए मनोरंजन formats में अपनी जगह बनाई, वह अब खुद अपना format चाहती दिखाई देती हैं।

    यही उनके करियर का सबसे दिलचस्प बदलाव है।

    राखी सावंत को सिर्फ तमाशा समझना क्यों अधूरा है

    राखी सावंत को न तो केवल पीड़ित मानकर उनकी पूरी कहानी समझी जा सकती है और न ही सिर्फ विवाद पैदा करने वाली सेलिब्रिटी के रूप में।

    उनकी सार्वजनिक छवि में संघर्ष भी है, प्रदर्शन भी, आत्म-प्रचार भी और लगातार बदलते मनोरंजन माध्यमों के साथ खुद को ढालने की क्षमता भी।

    2007 में करण जौहर के सामने बैठी राखी से लेकर 2026 में बीबीसी के इंटरव्यू में अपनी जिंदगी पर बात करने वाली राखी तक का सफर करीब दो दशक का है। इस दौरान बॉलीवुड बदला, रियलिटी टीवी बदला, पापाराजी संस्कृति बदली और सोशल मीडिया ने सेलिब्रिटी बनने का तरीका बदल दिया। राखी इन सभी बदलावों के बीच बनी रहीं।

    और शायद यही उनकी सबसे बड़ी कहानी है।

    राखी सावंत की लोकप्रियता को सिर्फ इस आधार पर समझना मुश्किल है कि उन्होंने कितने विवाद पैदा किए। असली सवाल यह है कि इतने वर्षों बाद भी कैमरा उनकी ओर क्यों लौटता है।

    2026 का जवाब यही दिखाई देता है—राखी सावंत अब केवल किसी खबर का हिस्सा नहीं हैं। वह खुद उस पॉप कल्चर का हिस्सा बन चुकी हैं, जिसमें खबर, वायरल वीडियो, पापाराजी, रियलिटी टीवी, सोशल मीडिया और सेलिब्रिटी की निजी जिंदगी एक-दूसरे में मिल चुके हैं। वरुण धवन का उन्हें पॉप कल्चर आइकन कहना इसी बदलती सार्वजनिक पहचान का एक उदाहरण है।

  • मुंबई एयरपोर्ट पर मौसम का असर, 8 फ्लाइटें सूरत डायवर्ट; 1,255 यात्री सुरक्षित

    मुंबई एयरपोर्ट पर मौसम का असर, 8 फ्लाइटें सूरत डायवर्ट; 1,255 यात्री सुरक्षित

    Mumbai Airport पर तेज हवाओं, गरज-चमक और बारिश से उड़ानें प्रभावित हुईं। 8 फ्लाइटें सूरत डायवर्ट हुईं, 1,255 यात्री सुरक्षित रहे।

    मुंबई : मुंबई एयरपोर्ट पर मंगलवार 29 सितंबर की शाम खराब मौसम ने हवाई परिचालन को प्रभावित कर दिया। गरज-चमक, तेज हवाओं और बारिश के बीच मुंबई आने वाली कई उड़ानों को दूसरे एयरपोर्ट की ओर मोड़ना पड़ा। इनमें सूरत डायवर्ट की गई 8 उड़ानों में कुल 1,255 यात्री सवार थे। सभी विमानों ने सूरत एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंडिंग की। वहीं, व्यापक स्तर पर मुंबई एयरपोर्ट पर उड़ानों की देरी और कुछ उड़ानों के रद्द होने की भी जानकारी सामने आई है।

    मंगलवार शाम करीब 6:50 बजे से मुंबई जाने वाली उड़ानों के डायवर्जन का सिलसिला शुरू हुआ। सबसे पहले तिरुचिरापल्ली से मुंबई जा रही IndiGo की फ्लाइट 6E-2017 सूरत पहुंची। इसमें 182 यात्री सवार थे। इसके कुछ ही मिनट बाद दिल्ली से मुंबई जा रही IndiGo की फ्लाइट 6E-864 को भी सूरत डायवर्ट किया गया। इस विमान में 122 यात्री थे।

    इसके बाद दिल्ली से मुंबई जा रही Air India की फ्लाइट AI-2941 सूरत पहुंची। इस विमान में 186 यात्री सवार थे। चेन्नई से मुंबई जा रही IndiGo की फ्लाइट 6E-5104 और गोवा से मुंबई जा रही Air India की फ्लाइट AI-2746 को भी सूरत भेजा गया। AI-2746 में 135 यात्री सवार थे।

    बेंगलुरु से मुंबई जा रही IndiGo की फ्लाइट 6E-5255 करीब 7:47 बजे सूरत पहुंची। इसमें 135 यात्री थे। इसके लगभग तीन मिनट बाद चेन्नई से मुंबई जा रही Air India की फ्लाइट AI-640 ने सूरत में लैंडिंग की। इसमें 112 यात्री सवार थे। सबसे आखिर में भोपाल से मुंबई जा रही IndiGo की फ्लाइट 6E-5312 करीब 8 बजे सूरत पहुंची। इस विमान में 204 यात्री सवार थे।

    इस तरह सूरत डायवर्ट की गई इन 8 उड़ानों में कुल 1,255 यात्री थे। सूरत एयरपोर्ट पर सभी विमानों की सुरक्षित लैंडिंग कराई गई और यात्रियों के लिए जरूरी व्यवस्थाएं की गईं। सूरत एयरपोर्ट के निदेशक आनंद नारायण शर्मा ने भी इन उड़ानों के डायवर्जन और सुरक्षित लैंडिंग की पुष्टि की थी।

    सिर्फ सूरत ही नहीं, दूसरे एयरपोर्ट भी बने वैकल्पिक ठिकाने

    मुंबई में मौसम बिगड़ने के बाद सूरत के अलावा दूसरे एयरपोर्ट का भी इस्तेमाल वैकल्पिक लैंडिंग के लिए किया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार कम-से-कम 11 से 12 मुंबई आने वाली उड़ानों के डायवर्जन की स्थिति सामने आई, हालांकि अलग-अलग समय पर जारी आंकड़ों में अंतर रहा। एक अपडेट में 8 उड़ानों के सूरत और 4 उड़ानों के वडोदरा पहुंचने की जानकारी दी गई। वडोदरा पहुंचने वाली उड़ानों में Air India की AI 2447, AI 599, AI 1780 और IndiGo की 6E 329 शामिल थीं।

    वहीं एक अन्य अपडेट में 11 उड़ानों के डायवर्ट होने की जानकारी सामने आई, जिनमें 6 उड़ानों को सूरत और 3 को अहमदाबाद भेजे जाने का विवरण दिया गया। इनमें IndiGo की 6E864, 6E2017 और 6E5104, Air India की AI2941, AI640 और AI2746 शामिल थीं। अहमदाबाद के लिए QP1150, 6E5259 और 6E5163 को डायवर्ट किए जाने की जानकारी दी गई।

    इस अंतर की वजह से डायवर्ट हुई कुल उड़ानों की संख्या को लेकर अलग-अलग समय पर अलग आंकड़े सामने आए। हालांकि इतना स्पष्ट है कि मुंबई के खराब मौसम का असर कई मुंबई-बाउंड उड़ानों पर पड़ा और उन्हें सुरक्षित रूप से वैकल्पिक एयरपोर्ट पर उतारा गया।

    213 उड़ानों में देरी, 16 रद्द होने की भी जानकारी

    मौसम का असर सिर्फ डायवर्ट हुई उड़ानों तक सीमित नहीं रहा। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार मुंबई एयरपोर्ट पर 213 उड़ानों में देरी हुई, जबकि 16 उड़ानें रद्द हुईं। डायवर्जन के कारण सूरत और दूसरे वैकल्पिक एयरपोर्ट पर भी यात्रियों और विमानों की अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ी।

    मुंबई में क्यों बिगड़ा मौसम?

    मंगलवार शाम मुंबई के कई हिस्सों में अचानक बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं का दौर देखा गया। मुलुंड, कुर्ला और अंधेरी समेत कई इलाकों में बारिश हुई और कुछ स्थानों पर जलभराव की स्थिति भी बनी। अंधेरी क्षेत्र में जलभराव के कारण आवाजाही प्रभावित होने की जानकारी सामने आई।

    भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुंबई-पवई पूर्वानुमान में 29 सितंबर को बादल छाए रहने के साथ बारिश या गरज-चमक की संभावना दर्ज थी। 30 सितंबर के लिए भी एक-दो दौर की बारिश या गरज-चमक का पूर्वानुमान दिया गया था।

    हवाई परिचालन पर मौसम का सीधा असर पड़ा। तेज हवाओं, बिजली चमकने और गरज-चमक जैसी परिस्थितियों में मुंबई में विमानों की लैंडिंग प्रभावित होने पर एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आने वाली उड़ानों को वैकल्पिक एयरपोर्ट की ओर भेजा। सभी डायवर्ट विमान सुरक्षित उतरे।

    सूरत और वडोदरा में यात्रियों के लिए क्या इंतजाम?

    डायवर्ट किए गए विमानों के यात्रियों को वैकल्पिक एयरपोर्ट पर जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई। सूरत और वडोदरा में यात्रियों के लिए पीने के पानी और रिफ्रेशमेंट की व्यवस्था की गई। वडोदरा में पहुंचे कुछ विमानों के यात्रियों को तत्काल विमान से बाहर नहीं उतारा गया था और आगे की उड़ान के लिए मौसम तथा परिचालन की स्थिति का इंतजार किया जा रहा था।

    अब यात्रियों को मुंबई कब पहुंचाया जाएगा?

    डायवर्ट किए गए विमानों की मुंबई वापसी वहां के मौसम और एयर ट्रैफिक कंट्रोल से मिलने वाली अनुमति पर निर्भर रही। मौसम सामान्य होने और मुंबई एयरपोर्ट पर लैंडिंग के लिए परिस्थितियां अनुकूल होने के बाद विमानों को मुंबई भेजने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी थी। इसलिए जिन यात्रियों की उड़ान प्रभावित हुई है, उनके लिए वास्तविक यात्रा समय एयरलाइन और फ्लाइट स्टेटस के अनुसार बदल सकता है।

    30 सितंबर को भी मौसम पर नजर

    मुंबई में 30 सितंबर को भी बारिश और गरज-चमक की संभावना बनी हुई है। ऐसे में मुंबई से उड़ान भरने या मुंबई पहुंचने वाले यात्रियों के लिए एयरपोर्ट रवाना होने से पहले अपनी फ्लाइट का ताजा स्टेटस जांचना महत्वपूर्ण है। मौसम की स्थिति के अनुसार देरी, रूट में बदलाव या डायवर्जन जैसी स्थिति दोबारा बन सकती है।

    मंगलवार की घटना में राहत की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि डायवर्ट की गई उड़ानों की लैंडिंग सुरक्षित रही और किसी यात्री के हताहत होने की जानकारी सामने नहीं आई। अब यात्रियों की आगे की यात्रा और उड़ानों के सामान्य संचालन की स्थिति मुंबई के मौसम तथा एयर ट्रैफिक की स्थिति पर निर्भर करेगी।