मुंबई में 10 फीसदी पानी कटौती जारी है। सात जलाशयों के भंडार पर दबाव, रोज 56.4 करोड़ लीटर की कमी और पानी की बर्बादी रोकने के लिए बीएमसी ने जारी किए निर्देश।
मुंबई: मुंबई में पानी की आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने 12 अक्टूबर को नागरिकों से पानी बचाने की अपील करते हुए साफ किया कि महानगर में 10 फीसदी पानी कटौती जारी है। शहर और उपनगरों में रोजाना पानी की जरूरत और उपलब्ध आपूर्ति के बीच करीब 56.4 करोड़ लीटर का अंतर है। ऐसे में प्रशासन का जोर जलाशयों में मौजूद पानी को अगले मानसून तक सुरक्षित रखने और पानी की बर्बादी रोकने पर है।
महानगरपालिका के अनुसार, इस साल कम बारिश और अल नीनो जैसी मौसमी परिस्थितियों के कारण मुंबई को पानी देने वाले सात जलाशयों के भंडार पर असर पड़ा है। बढ़ती गर्मी और पानी की मांग को देखते हुए नागरिकों, आवासीय सोसायटियों, कारोबारियों और विभिन्न संस्थाओं से पानी का इस्तेमाल सावधानी से करने की अपील की गई है।
मुंबई में रोज कितने पानी की कमी?
मुंबई शहर और उपनगरों को प्रतिदिन करीब 4,664 मिलियन लीटर पानी की जरूरत होती है, जबकि उपलब्ध जलस्रोतों से औसतन 4,100 मिलियन लीटर पानी की आपूर्ति की जाती है। इस तरह रोजाना करीब 564 मिलियन लीटर यानी 56.4 करोड़ लीटर का अंतर है।
इसी स्थिति को देखते हुए 15 मई 2026 से लागू 10 फीसदी पानी कटौती जारी रखी गई है। हालांकि, महानगरपालिका की 12 अक्टूबर की अपील में कटौती समाप्त करने की कोई निश्चित तारीख नहीं बताई गई है।
सितंबर के अंत में जलाशयों का उपलब्ध भंडार लगभग 96.64 फीसदी बताया गया था। सात अक्टूबर की एक अन्य जानकारी में यह आंकड़ा 94.57 फीसदी था।
प्रशासन के सामने चुनौती सिर्फ मौजूदा पानी की जरूरत पूरी करने की नहीं, बल्कि आने वाले गर्मी के मौसम और अगले मानसून तक आपूर्ति बनाए रखने की भी है।
अगले मानसून तक पानी बचाने की तैयारी
महाराष्ट्र सरकार के जल संसाधन विभाग के निर्देशों के अनुसार, महानगरपालिका ने 31 अगस्त 2027 तक की पेयजल जरूरतों को ध्यान में रखकर नियोजन करने पर जोर दिया है।
30 सितंबर को सामने आए प्रशासनिक अनुमान के मुताबिक, सात जलाशयों में उपलब्ध पानी 17 मई 2027 तक चल सकता है। यह उस समय का अनुमान है, पानी उपलब्ध रहने की निश्चित गारंटी नहीं। बारिश, खपत और मौसम की परिस्थितियों के अनुसार जल भंडार की स्थिति बदल सकती है।
वहीं, मुंबई में भविष्य में पानी की मांग बढ़ने की आशंका भी चिंता का विषय है। ऐसे में केवल पानी कटौती के भरोसे नहीं रहा जा सकता। जलस्रोतों का संरक्षण, वितरण में होने वाली बर्बादी कम करना और गैर-पेय कार्यों में वैकल्पिक पानी का इस्तेमाल भी जरूरी होगा।
आठ महीने में पानी की लीकेज की 17,906 शिकायतें
मुंबई में पानी बचाने की अपील के बीच पाइपलाइनों से होने वाली लीकेज और अनधिकृत कनेक्शन की समस्या भी महत्वपूर्ण है। जनवरी से अगस्त 2026 के दौरान पानी की लीकेज से जुड़ी 17,906 शिकायतें दर्ज की गईं। इसी अवधि में 4,090 अनधिकृत नल कनेक्शन के मामले सामने आए और 3,802 कनेक्शन काटे जाने की जानकारी दी गई।
शहर में गैर-राजस्व जल का हिस्सा लगभग 34 फीसदी बताया गया है। इस श्रेणी में लीकेज, अनधिकृत इस्तेमाल, चोरी और मीटर संबंधी कमियां शामिल हो सकती हैं।
पानी की लीकेज रोकने के लिए महानगरपालिका के जल अभियंता विभाग ने विशेष दल गठित किए हैं। इन दलों को शिकायतों का समयबद्ध निपटारा करने और पानी की बर्बादी रोकने को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।
जलतरण तालाबों और कारोबारियों के लिए भी निर्देश
महानगरपालिका ने जलतरण तालाबों में पीने के पानी का इस्तेमाल नहीं करने को कहा है। औद्योगिक और व्यापारिक प्रतिष्ठानों तथा खेल क्लबों को होने वाली पानी की आपूर्ति में 20 फीसदी कटौती जारी रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।
सार्वजनिक जलतरण तालाबों को पानी की आपूर्ति दोबारा रोकने की संभावना पर भी विचार किया गया है।
प्रशासन ने सड़कों की धुलाई, निर्माण कार्यों, वाहन धोने और उद्यानों में पौधों को पानी देने जैसे कामों में पीने के पानी का गैरजरूरी इस्तेमाल रोकने पर जोर दिया है।
सड़कों की धुलाई के लिए अपशिष्ट जल शोधन केंद्रों से उपचारित पानी या बोरवेल के पानी का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। निर्माण स्थलों पर भी पीने के अलावा अन्य कामों के लिए उपचारित पानी या वैकल्पिक जलस्रोतों का इस्तेमाल करने को कहा गया है।
पानी की बर्बादी करने पर होगी कार्रवाई
महानगरपालिका ने स्पष्ट किया है कि मनपा द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले पीने के पानी का किसी भी जगह गलत इस्तेमाल पाए जाने पर संबंधित लोगों या प्रतिष्ठानों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।

घरों में नल खुला छोड़ने से बचना, पानी की टंकी और पाइपलाइन की लीकेज तुरंत ठीक कराना तथा सफाई के दौरान जरूरत से ज्यादा पानी खर्च नहीं करना कुछ ऐसे कदम हैं, जिनसे पानी बचाया जा सकता है।
आवासीय सोसायटियों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और सार्वजनिक संस्थाओं से भी पानी बचाने के उपायों को प्राथमिकता देने की अपील की गई है।
कम दबाव और अतिरिक्त खर्च की आशंका
पानी की आपूर्ति में अंतर और कुछ इलाकों में कम दबाव की शिकायतों के कारण उन इमारतों को परेशानी हो सकती है, जहां महानगरपालिका का पानी पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंचता। ऐसी स्थिति में कुछ आवासीय सोसायटियों को वैकल्पिक जलस्रोतों या पानी के टैंकर पर निर्भर रहना पड़ सकता है।
मुंबई की बढ़ती आबादी और भविष्य में पानी की बढ़ती मांग को देखते हुए जल प्रबंधन को मजबूत करना भी जरूरी है। इसके लिए लीकेज रोकने, जलस्रोतों का संरक्षण करने और गैर-पेय कार्यों में उपचारित पानी का अधिक इस्तेमाल करने जैसे उपाय महत्वपूर्ण होंगे।
महानगरपालिका ने नागरिकों से पानी का सीमित और जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने की अपील की है। फिलहाल 10 फीसदी पानी कटौती जारी है और इसे हटाने की कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की गई है। ऐसे में उपलब्ध जल भंडार को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए प्रशासनिक उपायों के साथ नागरिकों का सहयोग भी जरूरी होगा।
