मुंबई के मलजल पंपिंग केंद्रों में एआई से पहले मिलेगी खराबी की चेतावनी

mumbai-bmc-ai-sewerage-pumping-stations

बीएमसी बांद्रा से मलजल पंपिंग व्यवस्था में एआई और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल बढ़ाएगी। जानिए इससे पंपिंग, मानसून और मुंबईकरों पर क्या असर होगा।

मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका अब शहर की मलजल निकासी व्यवस्था को ज्यादा प्रभावी बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल बढ़ाने जा रही है। बांद्रा स्थित मलजल पंपिंग केंद्र में चल रहे सूचना और विश्लेषण केंद्र के निरीक्षण के बाद अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त (पश्चिमी उपनगर) डॉ. विपिन शर्मा ने अधिकारियों, ठेकेदारों और तकनीकी सहयोगियों को इस तकनीक का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करने के निर्देश दिए हैं। इसका मकसद पंप और उससे जुड़ी व्यवस्था में आने वाली संभावित दिक्कतों का पहले पता लगाकर समय रहते कार्रवाई करना है।

डॉ. शर्मा ने 7 अक्टूबर को बांद्रा के अंतर्गामी मलजल पंपिंग केंद्र में चल रहे कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग आधारित सूचना एवं विश्लेषण केंद्र का निरीक्षण किया। इस दौरान प्रमुख अभियंता (मलजल संचालन विभाग) प्रचिती देसाई और संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

मलजल पंपिंग में क्या बदलेगा

नई व्यवस्था में पंपिंग केंद्र से मिलने वाले आंकड़ों का लगातार विश्लेषण किया जा सकता है। मशीनों के संचालन, उनके प्रदर्शन और दूसरी परिचालन जानकारी में होने वाले बदलावों को देखकर संभावित परेशानी की पहले पहचान करने की कोशिश की जाएगी।

इसका सीधा फायदा यह हो सकता है कि किसी पंप में गंभीर खराबी आने के बाद मरम्मत शुरू करने के बजाय उसके व्यवहार में असामान्य बदलाव दिखाई देने पर पहले ही जांच और रखरखाव किया जा सके। हालांकि बीएमसी ने अभी यह आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया है कि इस व्यवस्था से अब तक कितनी खराबियां पहले से पकड़ी गई हैं या कितनी बचत हुई है।

बांद्रा केंद्र क्यों महत्वपूर्ण है

बांद्रा का यह पंपिंग केंद्र मुंबई की बड़ी मलजल निकासी व्यवस्था का अहम हिस्सा है। बीएमसी के तकनीकी दस्तावेजों के अनुसार यहां 311 मिलियन लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले आठ पंप हैं और प्रत्येक पंप के साथ 1,500 किलोवाट की मोटर लगी है। यह व्यवस्था मुंबई शहर और उपनगरों के कुछ हिस्सों से आने वाले मलजल को आगे पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

मानसून के दौरान मलजल के प्रवाह में काफी बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे समय में बड़े पंपिंग केंद्रों की लगातार निगरानी और उनका बिना रुकावट संचालन ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है।

मुंबई में कितना बड़ा है मलजल नेटवर्क

बीएमसी की 2026 की नागरिक पुस्तिका के अनुसार मुंबई में करीब 2,098 किलोमीटर लंबा मलजल नेटवर्क, 48 उप-पंपिंग केंद्र, लगभग 79 हजार मैनहोल और 4,450 वेंट शाफ्ट हैं। शहर में आठ मलजल उपचार केंद्र भी हैं।

इस बड़े नेटवर्क में किसी महत्वपूर्ण पंपिंग केंद्र के संचालन में रुकावट आने पर उसका असर पूरी निकासी व्यवस्था पर पड़ सकता है। ऐसे में आंकड़ों के आधार पर निगरानी और पहले से संभावित खराबी का पता लगाने वाली व्यवस्था को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बारिश के पानी और मलजल की व्यवस्था अलग

mumbai-bmc-ai-sewerage-pumping-stations

एआई आधारित मलजल पंपिंग व्यवस्था को मुंबई में बारिश के पानी की निकासी के लिए इस्तेमाल होने वाले पंपों से अलग समझना जरूरी है। बारिश के दौरान जलभराव कम करने के लिए बीएमसी अलग पंप और निगरानी व्यवस्था का इस्तेमाल करती है।

इसलिए नई मलजल तकनीक को सीधे तौर पर मुंबई के जलभराव की समस्या का समाधान नहीं माना जा सकता। इसका मुख्य उद्देश्य मलजल पंपिंग केंद्रों के संचालन को बेहतर बनाना और मशीनों में संभावित खराबी की पहले पहचान करना है।

मुंबई में मलजल व्यवस्था पर एक साथ कई स्तरों पर काम

मुंबई की मलजल व्यवस्था को लेकर बीएमसी की योजना केवल पंपिंग केंद्रों तक सीमित नहीं है। शहर में निर्माणाधीन सात मलजल उपचार संयंत्रों को तय समय में पूरा करने पर भी जोर दिया जा रहा है। वहीं पवई झील में मलजल जाने से रोकने के लिए निकास मार्गों को बंद करने और उपचार व्यवस्था विकसित करने का काम भी किया जा रहा है।

इससे साफ है कि शहर की मलजल व्यवस्था में पंपिंग, निकासी और उपचार तीनों स्तरों को मजबूत करने पर काम चल रहा है।

बीएमसी पहले भी कर चुकी है एआई का इस्तेमाल

महानगरपालिका ने इससे पहले नागरिक सेवाओं से जुड़े दूसरे कामों में भी कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल किया है। नालों से गाद निकालने के काम की निगरानी में एआई आधारित व्यवस्था का इस्तेमाल किया गया था। तस्वीरों और वीडियो के विश्लेषण के जरिए काम में गड़बड़ी की पहचान करने की कोशिश की गई थी।

अब इसी तरह की तकनीकी सोच को मलजल पंपिंग केंद्रों के संचालन में इस्तेमाल करने पर जोर दिया जा रहा है।

पूरे मुंबई में विस्तार पर नजर

बांद्रा में शुरू की गई व्यवस्था को लेकर सबसे अहम सवाल यह है कि इसे मुंबई के बाकी मलजल पंपिंग केंद्रों तक कब और किस स्तर पर बढ़ाया जाएगा। 7 अक्टूबर को दिए गए निर्देशों में तकनीक के अधिकतम इस्तेमाल पर जोर दिया गया है, लेकिन सभी केंद्रों को इस व्यवस्था से जोड़ने की कोई स्पष्ट समयसीमा सार्वजनिक नहीं की गई है।

फिलहाल बांद्रा के सूचना और विश्लेषण केंद्र के जरिए मशीनों के संचालन और उपलब्ध आंकड़ों का बेहतर इस्तेमाल करने पर जोर है। डॉ. विपिन शर्मा ने निरीक्षण के दौरान केंद्र की कार्यप्रणाली पर संतोष जताया और मुंबई की मलजल व्यवस्था को ज्यादा सक्षम, भरोसेमंद और तेजी से संचालित करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग और पूर्वानुमान आधारित विश्लेषण का इस्तेमाल बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।

Ismail Shaikh Avatar
Discover more from  Indian fasttrack news

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Discover more from  Indian fasttrack news

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading