मुंबई में मलबे पर 25 हजार रुपये के जुर्माने की तैयारी, मीठी नदी और 7 मलजल केंद्रों की समीक्षा

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मुंबई में मलबा प्रबंधन पर सख्ती, 255 संस्थानों का पंजीकरण और 231 कचरा स्थलों को हटाने की योजना। 2028 तक सात मलजल शोधन केंद्र शुरू करने का लक्ष्य।

मुंबई: शहर में निर्माण मलबे के अवैध निपटान पर नियंत्रण के लिए 25 हजार रुपये तक के जुर्माने की व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पर जोर दिया जा रहा है। वहीं, मीठी नदी के पुनर्जीवन और सात मलजल शोधन केंद्रों की प्रगति को लेकर पर्यावरण मंत्री पंकजा मुंडे ने सोमवार, 12 अक्टूबर को बृहन्मुंबई महानगरपालिका मुख्यालय में समीक्षा बैठक की। बैठक में मलबा प्रबंधन प्रणाली के तहत 255 संस्थानों के पंजीकरण और कचरा फेंके जाने वाले 231 संवेदनशील स्थानों को हटाने के प्रयासों की जानकारी दी गई।

राज्य की पर्यावरण एवं वातावरणीय बदलाव तथा पशुसंवर्धन मंत्री पंकजा मुंडे ने महानगरपालिका की ओर से किए जा रहे कार्यों पर संतोष जताया। उन्होंने कहा कि मुंबई में घनकचरा प्रबंधन चुनौतीपूर्ण काम है। इसे बेहतर बनाने के लिए प्रशासन के साथ नागरिकों की भागीदारी भी जरूरी है।

बैठक में मुंबई की महापौर रितु तावड़े, उपमहापौर संजय घाड़ी, महानगरपालिका आयुक्त अश्विनी भिड़े, अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त विपिन शर्मा, अभिजीत बांगर और अविनाश ढाकणे सहित संबंधित अधिकारी मौजूद थे। महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अधिकारियों ने भी बैठक में हिस्सा लिया।

मलबा ढोने वाले वाहनों पर निगरानी

मुंबई में निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाले मलबे के संग्रह, परिवहन, प्रक्रिया और निपटान पर नियंत्रण रखने के लिए महानगरपालिका ने मुंबई मलबा नियंत्रण एवं निगरानी प्रणाली शुरू की है। इस व्यवस्था का उद्देश्य मलबे को अनधिकृत स्थानों पर फेंकने से रोकना और उसके परिवहन की निगरानी करना है।

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12 अक्टूबर से बिना सक्रिय वाहन निगरानी उपकरण वाले मलबा ढोने वाले वाहनों और पंजीकरण नहीं कराने वाले निर्माण स्थलों के खिलाफ प्रति उल्लंघन 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाने की व्यवस्था लागू होने की जानकारी सामने आई थी। हालांकि, इस तारीख को वास्तव में कितने चालान काटे गए और कितने वाहनों की जांच हुई, इसका आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।

बैठक में बताया गया कि निगरानी प्रणाली के तहत अब तक 255 संस्थानों ने पंजीकरण कराया है। इससे पहले 9 अक्टूबर तक 220 पंजीकरण दर्ज होने की जानकारी सामने आई थी। दोनों आंकड़े अलग-अलग तारीखों के हैं।

मुंबई में प्रतिदिन आठ हजार टन से अधिक निर्माण और तोड़फोड़ का मलबा निकलने का अनुमान है, जबकि उपलब्ध उपचार क्षमता लगभग 1,200 टन प्रतिदिन बताई गई है। इस अंतर के कारण मलबे के संग्रह, अधिकृत निपटान और उपचार क्षमता को बढ़ाना महत्वपूर्ण हो जाता है। हालांकि, इस अंतर को सीधे अवैध रूप से फेंके जाने वाले मलबे की मात्रा नहीं माना जा सकता।

231 कचरा स्थलों को हटाने की योजना

महानगरपालिका मुंबई में कचरा जमा होने वाले 231 संवेदनशील स्थानों को समाप्त करने के लिए प्रयास कर रही है। इसके साथ ही कचरे से ऊर्जा तैयार करने वाली परियोजनाओं पर भी काम किया जा रहा है।

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इन योजनाओं का उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों पर कचरे का जमाव कम करना और कचरे के बेहतर निपटान की व्यवस्था तैयार करना है। लेकिन इन प्रयासों का वास्तविक असर जानने के लिए यह देखना जरूरी होगा कि कितने संवेदनशील स्थान साफ किए गए और उनमें दोबारा कचरा जमा होने से रोकने के लिए क्या व्यवस्था की गई है।

पंकजा मुंडे ने कहा कि कचरे को अलग-अलग करना जरूरी है। नागरिकों को गीला और सूखा कचरा अलग करके देना चाहिए तथा अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग करना चाहिए।

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मीठी नदी के प्रदूषण और पुनर्जीवन पर नजर

मीठी नदी के पुनर्जीवन के लिए महानगरपालिका की ओर से चरणबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है। बैठक में इस परियोजना की प्रगति की जानकारी भी दी गई।

मीठी नदी के मामले में केवल सफाई और गाद निकालना ही पर्याप्त नहीं है। नदी में जाने वाले मलजल को नियंत्रित करना, पानी की गुणवत्ता सुधारना और बाढ़ नियंत्रण से जुड़े कार्यों को प्रभावी बनाना भी जरूरी है।

नदी का लगभग छह किलोमीटर हिस्सा मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण और शेष लगभग 11 किलोमीटर हिस्सा महानगरपालिका के अधिकार क्षेत्र में आता है। इसलिए नदी के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे कार्यों और दोनों एजेंसियों की जिम्मेदारी को समझना भी महत्वपूर्ण है।

जनवरी 2026 में सामने आए विवरण में नदी के प्रदूषण, मलजल के प्रवाह और बाढ़ नियंत्रण से जुड़े कार्यों में देरी के सवाल उठे थे। ऐसे में अब यह जानना जरूरी है कि अक्टूबर तक किन कार्यों में प्रगति हुई है, कितना खर्च हुआ है और बाकी काम कब तक पूरे किए जाएंगे।

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नदी के पुनर्जीवन से प्रदूषण कम करने और बाढ़ के जोखिम को घटाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसका वास्तविक असर पानी की गुणवत्ता, जलनिकासी और परियोजना की प्रगति के आंकड़ों से ही स्पष्ट होगा।

2028 तक सात मलजल शोधन केंद्र शुरू करने का लक्ष्य

मुंबई में मलजल के उपचार के लिए सात शोधन केंद्रों को वर्ष 2028 तक चालू करने की योजना है। इन केंद्रों का उद्देश्य गंदे पानी का उपचार करना और जल निकायों में प्रदूषण का दबाव कम करना है।

इन परियोजनाओं के लिए वरली, बांद्रा, धारावी, वर्सोवा, घाटकोपर, भांडुप और मालाड में केंद्र प्रस्तावित हैं। इनकी कुल प्रस्तावित उपचार क्षमता 2,464 मिलियन लीटर प्रतिदिन बताई गई है। जुलाई 2025 में उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उस समय सातों केंद्रों के निर्माण की औसत प्रगति लगभग 36 प्रतिशत थी और परियोजनाओं की कुल लागत करीब 30 हजार करोड़ रुपये बताई गई थी।

ये पुराने आंकड़े हैं। अक्टूबर 2026 में प्रत्येक केंद्र का निर्माण कितना पूरा हुआ है, कितने केंद्र चालू होने के करीब हैं और उनकी संशोधित समयसीमा क्या है, इसकी ताजा जानकारी जरूरी है।

मलजल शोधन केंद्रों के निर्माण से ही प्रदूषण में कमी सुनिश्चित नहीं होती। इसके लिए केंद्रों का समय पर चालू होना, निर्धारित क्षमता के अनुसार संचालन और उपचारित पानी की गुणवत्ता बनाए रखना भी आवश्यक है।

सफाई व्यवस्था पर जवाबदेही भी जरूरी

मुंबई में कचरा प्रबंधन की स्थिति को लेकर बंबई उच्च न्यायालय ने 8 अक्टूबर को सफाई और कचरे के निपटान से जुड़े सवाल उठाए थे। सुनवाई के दौरान सड़कों, समुद्र तटों और कांजुरमार्ग कचरा स्थल से जुड़े मुद्दे सामने आए थे। न्यायालय ने वार्ड स्तर पर उठाए गए कदमों का विवरण मांगा था और अगली सुनवाई 22 अक्टूबर के लिए निर्धारित बताई गई थी।

इस संदर्भ में महानगरपालिका की ओर से घोषित योजनाओं के साथ उनके जमीनी नतीजों पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा। कचरे के संवेदनशील स्थानों को हटाने, मलबे के परिवहन पर निगरानी और मलजल शोधन केंद्रों के निर्माण की प्रगति की नियमित जानकारी मिलने से प्रशासन की जवाबदेही तय करने में मदद मिल सकती है।

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फिलहाल, बैठक में महानगरपालिका ने कचरा प्रबंधन, मीठी नदी के पुनर्जीवन और मलजल शोधन केंद्रों से जुड़े कार्यों की जानकारी दी है। आगे इन योजनाओं का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि निर्धारित समयसीमा के भीतर काम कितना पूरा होता है और नागरिकों को स्वच्छता तथा प्रदूषण नियंत्रण के स्तर पर कितना वास्तविक बदलाव दिखाई देता है।

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