मुंबई के सात जलाशयों में 94.24% पानी होने के बावजूद 10% कटौती जारी है। मेयर रितू तावडे ने जलाशयों और 455 MLD पिसे परियोजना का निरीक्षण किया।
मुंबई: इस समय शहर के सातों जलाशयों में 94.24 फीसदी पानी उपलब्ध है, लेकिन इसके बावजूद 10 फीसदी पानी कटौती जारी है। इसी बीच मुंबई की मेयर रितू तावडे ने गुरुवार को महानगरपालिका के पदाधिकारियों, स्थायी समिति के सदस्यों और अधिकारियों के साथ शहर को पानी पहुंचाने वाले प्रमुख जलस्रोतों और परियोजनाओं का मौके पर जाकर निरीक्षण किया। इस दौरान पानी के भंडार, आपूर्ति व्यवस्था, पुरानी व्यवस्था की स्थिति और आने वाले वर्षों की जरूरतों को लेकर विस्तृत जानकारी ली गई।
इस दौरे का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि मुंबई में इस साल जून के दौरान पानी की स्थिति बेहद गंभीर हो गई थी। उस समय सातों जलाशयों में पानी का भंडार 7 फीसदी से भी नीचे पहुंच गया था। मानसून के बाद स्थिति तेजी से बदली और सितंबर के अंत तक जलाशयों में पानी 96 फीसदी से ज्यादा हो गया। इसके बावजूद महानगरपालिका ने 10 फीसदी कटौती अभी तक वापस नहीं ली है।
जलाशय भरे हैं तो पानी कटौती क्यों जारी है?
मुंबईकरों के लिए इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब जलाशयों में 94 फीसदी से ज्यादा पानी है, तो फिर पानी की कटौती क्यों जारी है?
इसका जवाब केवल जलाशयों में मौजूद पानी की मात्रा से नहीं मिलता। महानगरपालिका को पूरे साल की जरूरत, अगले मानसून तक पानी की उपलब्धता, शहर में पानी के वितरण, पुराने पाइप और पंपिंग सिस्टम तथा पानी की बर्बादी को भी ध्यान में रखना पड़ता है।
यानी जलाशय भरने का मतलब यह नहीं है कि मुंबई में अगले ही दिन सामान्य आपूर्ति बहाल की जा सकती है। पानी को जलाशय से निकालकर पंप करना, उसका शुद्धिकरण करना और फिर शहर के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
पिसे में 455 MLD की नई पंपिंग व्यवस्था
मेयर रितू तावडे के निरीक्षण में पिसे की 455 MLD क्षमता वाली नई पंपिंग परियोजना महत्वपूर्ण रही। इसके साथ भातसा नदी पर नए पिकअप वियर और गेट की व्यवस्था भी बनाई जा रही है। परियोजना का करीब 60 फीसदी काम पूरा बताया गया है।
यह समझना जरूरी है कि 455 MLD का मतलब मुंबई की मौजूदा पानी आपूर्ति में सीधे 455 MLD की बढ़ोतरी नहीं है। इस परियोजना का एक प्रमुख उद्देश्य मौजूदा पंपिंग व्यवस्था को बैकअप देना है।
पिसे की मौजूदा व्यवस्था का कुछ हिस्सा कई दशक पुराना है। ऐसे में किसी पंप की मरम्मत, रखरखाव या तकनीकी खराबी के दौरान वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध होना बेहद जरूरी है। नई पंपिंग सुविधा इसी तरह मुंबई की पानी आपूर्ति को अधिक भरोसेमंद बनाने में मदद कर सकती है।
पिसे-पांजरापूर के बीच बनेगी करीब 8 किलोमीटर की भूमिगत सुरंग
मुंबई की पानी आपूर्ति व्यवस्था से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण विकास पिसे और पांजरापूर के बीच करीब 8 किलोमीटर लंबी भूमिगत पानी की सुरंग है। महाराष्ट्र सरकार ने सितंबर में महानगरपालिका की इस योजना को मंजूरी दी थी।
फिलहाल पिसे से पांजरापूर के बीच चार बड़ी पाइपलाइनों के जरिए करीब 2,020 MLD पानी आगे भेजा जाता है। इनमें सबसे पुरानी पाइपलाइन 1979 में शुरू हुई थी। इसके बाद 1986, 1996 और 2007 में अन्य पाइपलाइनें शुरू की गईं। यानी सबसे पुरानी पाइपलाइन अब करीब 47 साल पुरानी हो चुकी है।
पुरानी पाइपलाइनों पर बढ़ता दबाव, मौजूदा व्यवस्था की सीमाएं और भविष्य में मुंबई की बढ़ने वाली पानी की जरूरत को देखते हुए भूमिगत सुरंग की योजना तैयार की गई है।
हालांकि यह सुरंग अभी तैयार नहीं हुई है। इसके लिए आगे भूगर्भीय जांच और जरूरी पर्यावरण तथा अन्य मंजूरियों की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
पांजरापूर में पानी साफ करने की क्षमता भी बढ़ेगी
पिसे से पहुंचने वाले पानी की पूरी व्यवस्था में पांजरापूर की अहम भूमिका है। यहां करीब 1,450 MLD पानी का शुद्धिकरण यवई क्षेत्र में किया जाता है। इसके बाद पानी मुंबई के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचता है।

पांजरापूर में 910 MLD क्षमता का नया जल शुद्धिकरण संयंत्र भी विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना के लिए करीब 3,145 करोड़ रुपये का ठेका दिया जा चुका है।
दूसरी तरफ भांडुप में 2,000 MLD क्षमता वाला नया जल शुद्धिकरण संयंत्र भी मुंबई की भविष्य की पानी जरूरतों को पूरा करने की योजना का हिस्सा है। इसका लक्ष्य 2028 तक पूरा करने का रखा गया है।
मुंबई की पानी की जरूरत लगातार बढ़ रही है
मुंबई की मौजूदा पानी की जरूरत करीब 4,665 MLD मानी जाती है, जबकि आपूर्ति लगभग 4,100 MLD के आसपास है। यानी मांग और उपलब्ध आपूर्ति के बीच करीब 565 MLD का अंतर है।
आने वाले वर्षों में यह दबाव और बढ़ने वाला है। 2041 तक मुंबई की पानी की जरूरत करीब 6,424 MLD तक पहुंचने का अनुमान है। ऐसे में केवल मौजूदा सात जलाशयों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा।
इसी वजह से मुंबई के लिए नए जलस्रोत और नई आपूर्ति व्यवस्था विकसित करने पर भी काम चल रहा है। गारगई परियोजना से करीब 440 MLD अतिरिक्त पानी मिलने की योजना है। वहीं मनोरी में 200 MLD क्षमता वाला समुद्री पानी को पीने योग्य बनाने का संयंत्र प्रस्तावित है। मनोरी से मुंबई के पश्चिमी हिस्से तक पानी पहुंचाने के लिए करीब 7.2 किलोमीटर लंबी भूमिगत सुरंग की योजना भी आगे बढ़ रही है।
इस साल पानी की स्थिति में आया बड़ा बदलाव
मुंबई में इस साल पानी की स्थिति काफी तेजी से बदली है। जून में मानसून कमजोर रहने के कारण सात जलाशयों में पानी का भंडार 7 फीसदी से भी नीचे चला गया था। उस समय पानी की कमी को देखते हुए शहर में कटौती और पानी बचाने पर जोर दिया गया।

इसके बाद मानसून में अच्छी बारिश होने से जलाशयों का स्तर तेजी से बढ़ा। सितंबर के अंत तक सातों जलाशयों में पानी 96.54 फीसदी तक पहुंच गया था। 8 अक्टूबर को उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार यह स्तर करीब 94.24 फीसदी है।
इसके बावजूद महानगरपालिका ने अभी 10 फीसदी कटौती समाप्त नहीं की है। इसका कारण यह है कि केवल मौजूदा पानी देखकर फैसला लेने के बजाय पूरे साल की जरूरत और अगले मानसून तक उपलब्धता को ध्यान में रखना पड़ता है।
निरीक्षण में कौन-कौन मौजूद रहे?
मेयर रितू तावडे के साथ सभागृह नेता गणेश खणकर, विपक्ष की नेता किशोरी पेडणेकर, स्थायी समिति अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे, शिक्षा समिति अध्यक्ष राजेश्री शिरवडकर, कांग्रेस के गुटनेता अशरफ आजमी, एआईएमआईएम के गुटनेता विजय उबाले, समाजवादी पार्टी की गुटनेता अमरीन अब्रहानी, सार्वजनिक स्वास्थ्य समिति अध्यक्ष हरिष भांदिर्गे मौजूद रहे।
इसके अलावा स्थायी समिति सदस्य श्रद्धा जाधव, जमीर कुरैशी, डॉ. सईदा खान, प्रीती सातम, शिवकुमार झा, तेजिंदर तिवाना, प्रकाश दरेकर, मीनाक्षी पाटणकर, दीपमाला बढ़े, लक्ष्मी भाटिया, ट्यूलिप मिरांडा और अजंता यादव भी निरीक्षण में शामिल रहे।
महानगरपालिका की ओर से उप आयुक्त (विशेष इंजीनियरिंग) पुरुषोत्तम मालवदे, जल अभियंता मंगेश शेवाले और प्रमुख अभियंता (पानी आपूर्ति परियोजना) दिलीप पाटील सहित संबंधित अधिकारी और इंजीनियर मौजूद थे।
अब मुंबईकरों को किस बात का इंतजार?
फिलहाल मुंबई के सामने दो अलग-अलग तस्वीरें हैं। एक तरफ जलाशयों में 94 फीसदी से ज्यादा पानी है, जबकि दूसरी तरफ 10 फीसदी पानी कटौती जारी है। इसका मतलब साफ है कि महानगरपालिका की चुनौती केवल पानी जमा करने की नहीं, बल्कि उसे सुरक्षित तरीके से शहर तक पहुंचाने की भी है।
पिसे की नई 455 MLD पंपिंग व्यवस्था, पिसे-पांजरापूर की प्रस्तावित भूमिगत सुरंग, पांजरापूर और भांडुप की नई शुद्धिकरण क्षमता तथा गारगई और मनोरी जैसी भविष्य की परियोजनाएं मुंबई की लंबी अवधि की पानी सुरक्षा से जुड़ी हैं।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि जलाशयों में मौजूदा स्तर को देखते हुए महानगरपालिका 10 फीसदी पानी कटौती पर कब फैसला करती है और पिसे-पांजरापूर सहित दूसरी परियोजनाएं कब तक जमीन पर पूरी क्षमता के साथ काम करना शुरू करती हैं।
