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  • महाराष्ट्र हाउसिंग सोसायटी के नए नियम लागू, मेंटेनेंस से पुनर्विकास तक बड़ा बदलाव

    महाराष्ट्र हाउसिंग सोसायटी के नए नियम लागू, मेंटेनेंस से पुनर्विकास तक बड़ा बदलाव

    महाराष्ट्र की हाउसिंग सोसायटियों के लिए नए नियम लागू हैं। मेंटेनेंस, बकाया, पुनर्विकास, निधि, बैठक और नामांकन से जुड़े अहम बदलाव जानिए।

    मुंबई: महाराष्ट्र की सहकारी हाउसिंग सोसायटियों के कामकाज में बड़ा बदलाव हुआ है। राज्य सरकार ने जून 2026 में सहकारी गृहनिर्माण संस्थाओं के लिए अलग नियमों वाला नया अध्याय लागू किया है। इसके तहत मेंटेनेंस वसूली, बकाया पर ब्याज, अलग-अलग निधियों में योगदान, सामान्य सभा, पुनर्विकास और बकाया राशि की वसूली जैसी प्रक्रियाओं को अधिक स्पष्ट किया गया है। सहकार आयुक्त एवं निबंधक की आधिकारिक वेबसाइट पर 22 जून 2026 को गृहनिर्माण नियम 106-सी की अधिसूचना दर्ज है।

    लेकिन फ्लैट मालिकों के लिए एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। नए नियम लागू हो चुके हैं, जबकि संशोधित आदर्श उपविधियों का अलग मसौदा अभी अंतिम रूप की प्रक्रिया में है। सहकार आयुक्त की वेबसाइट पर 13 और 18 अगस्त 2026 के संशोधित आदर्श उपविधियों के मसौदे उपलब्ध हैं।

    मेंटेनेंस से जुड़े खर्च का हिसाब बदलेगा

    नए नियमों में सोसायटी के अलग-अलग खर्चों को बांटने का आधार स्पष्ट किया गया है। सेवा शुल्क सदस्यों के बीच समान रूप से बांटा जा सकता है, जबकि संपत्ति कर, पानी, बीमा, मरम्मत और कुछ अन्य खर्चों के लिए अलग-अलग आधार निर्धारित हैं। मरम्मत एवं रखरखाव निधि के लिए सामान्य सभा द्वारा तय राशि कम से कम निर्माण लागत के सालाना 0.75 प्रतिशत के बराबर होनी चाहिए। डूबत निधि के लिए न्यूनतम 0.25 प्रतिशत का प्रावधान है।

    इसका मतलब यह नहीं है कि हर सोसायटी अगले महीने से मनमाने तरीके से मेंटेनेंस बढ़ा सकती है। शुल्क किस मद में है और उसके लिए नियमों में कौन सा आधार तय है, यह देखना जरूरी होगा।

    फ्लैट खाली रहने पर कितना शुल्क लगेगा?

    फ्लैट का मालिक खुद वहां नहीं रहता और उसे किसी अन्य उपयोग में देता है तो गैर-निवास शुल्क को लेकर भी सीमा तय की गई है। यह शुल्क सेवा शुल्क के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता। इसे पूरे मेंटेनेंस बिल का 10 प्रतिशत समझना सही नहीं होगा।

    यानी यदि किसी सोसायटी में सेवा शुल्क और अन्य मदों को अलग-अलग दिखाया गया है तो गैर-निवास शुल्क की गणना पूरे बिल पर 10 प्रतिशत लगाकर नहीं की जानी चाहिए।

    मेंटेनेंस नहीं देने पर 12 प्रतिशत तक ब्याज

    सोसायटी के बकाये पर ब्याज की अधिकतम सीमा 12 प्रतिशत साधारण ब्याज प्रति वर्ष रखी गई है। इसका अर्थ यह नहीं है कि हर सोसायटी स्वतः 12 प्रतिशत ब्याज लगाएगी। लागू दर सामान्य सभा द्वारा तय की जानी है और वह निर्धारित अधिकतम सीमा से अधिक नहीं हो सकती।

    बकाया वसूली की प्रक्रिया भी अधिक औपचारिक की गई है। नियम 106-सी के तहत निर्धारित प्रपत्र और दस्तावेजों के आधार पर वसूली प्रमाणपत्र की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। इससे सोसायटी के बकाये की वसूली के लिए स्पष्ट प्रशासनिक रास्ता मिलता है।

    समिति कितनी राशि तक खर्च कर सकती है?

    मरम्मत और रखरखाव के खर्च के लिए प्रबंध समिति की वित्तीय सीमा भी सदस्यों की संख्या के अनुसार निर्धारित की गई है। 25 तक सदस्यों वाली सोसायटी के लिए यह सीमा 1 लाख रुपये, 26 से 50 सदस्यों के लिए 2 लाख रुपये, 51 से 100 सदस्यों के लिए 3 लाख रुपये, 101 से 1,000 सदस्यों के लिए 4 लाख रुपये और 1,000 से अधिक सदस्यों वाली सोसायटी के लिए 5 लाख रुपये है। इससे अधिक के बड़े खर्च में सामान्य सभा की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।

    पुनर्विकास के लिए भी प्रक्रिया तय

    पुनर्विकास अब केवल समिति और विकासक के बीच की बातचीत तक सीमित नहीं रहेगा। नए नियमों में पुनर्विकास से जुड़ी सामान्य सभा की प्रक्रिया, सूचना और उपस्थिति से संबंधित प्रावधान रखे गए हैं।

    पुनर्विकास की बैठक के लिए 14 स्पष्ट दिनों की सूचना और कुल सदस्य संख्या के दो-तिहाई के बराबर गणपूर्ति का प्रावधान है। विकासक या ठेकेदार के चयन के लिए कुल सदस्यों के 51 प्रतिशत समर्थन की आवश्यकता बताई गई है। दोनों आंकड़ों को एक ही चीज समझना गलत होगा—दो-तिहाई गणपूर्ति और 51 प्रतिशत समर्थन अलग-अलग प्रक्रियाओं से जुड़े हैं।

    स्व-पुनर्विकास के मामले में भी उधारी की सीमा को लेकर विशेष प्रावधान है। नियमों के अनुसार निर्धारित परिस्थितियों में सरकारी मान्यता प्राप्त मूल्यांकनकर्ता द्वारा तय भूमि मूल्य के 10 गुना तक उधारी की सीमा का प्रावधान है। यह बैंक से स्वतः 10 गुना कर्ज मिलने की गारंटी नहीं है।

    मृत सदस्य के बाद फ्लैट का क्या होगा?

    नामांकन को लेकर भी फ्लैट मालिकों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव हैं। किसी सदस्य की मृत्यु के बाद नामांकित व्यक्ति को प्रक्रिया के अनुसार अस्थायी सदस्यता मिल सकती है, लेकिन केवल नामांकित व्यक्ति होने से संपत्ति का अंतिम स्वामित्व स्वतः उसके नाम नहीं हो जाता।

    जहां उत्तराधिकार को लेकर विवाद हो, वहां संबंधित कानूनी दस्तावेज और उत्तराधिकार की प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो सकती है। नए प्रावधानों में पंजीकृत पारिवारिक व्यवस्था के माध्यम से कुछ परिस्थितियों में हस्तांतरण की प्रक्रिया को भी जगह दी गई है।

    सामान्य सभा में ऑनलाइन भागीदारी का रास्ता

    नए नियमों में सामान्य सभा की बैठकों में वीडियो सम्मेलन या ऐसे दृश्य-श्रव्य माध्यम से भागीदारी की व्यवस्था को मान्यता दी गई है, जिसमें सदस्य की पहचान और बैठक का समयबद्ध रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जा सके। इससे दूसरे शहर या विदेश में रहने वाले सदस्यों के लिए भागीदारी आसान हो सकती है।

    अब संशोधित आदर्श उपविधियों की बारी

    नए नियम लागू होने के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण अगला चरण संशोधित आदर्श उपविधियों का अंतिम रूप है। राज्य सरकार ने 2026 में इनका विस्तृत मसौदा जारी कर सुझाव और आपत्तियां मांगी थीं। आधिकारिक पोर्टल पर इसका मसौदा 13 और 18 अगस्त को सूचीबद्ध है।

    सुझाव और आपत्तियां देने की अंतिम तारीख 27 अगस्त 2026 थी। 10 सितंबर की ताजा कानूनी जानकारी के अनुसार मसौदा अब अंतिम मंजूरी और राजपत्र में प्रकाशन की प्रक्रिया की ओर बढ़ रहा है तथा अक्टूबर 2026 में लागू होने की संभावना बताई गई है। हालांकि अक्टूबर की तारीख को अभी अंतिम सरकारी अधिसूचना के रूप में नहीं माना जा सकता।

    एक बार संशोधित आदर्श उपविधियां औपचारिक रूप से जारी होने के बाद सोसायटियों को उन्हें अपनाने की प्रक्रिया से गुजरना होगा। मौजूदा नियमों में आदर्श उपविधियां प्रकाशित होने के तीन महीने के भीतर उन्हें अपनाने का प्रावधान है।

    इसलिए महाराष्ट्र के फ्लैट मालिकों और सोसायटी समितियों के लिए अभी सबसे जरूरी बात यह है कि जून 2026 में लागू हुए नए वैधानिक नियमों और अभी अंतिम रूप की प्रतीक्षा कर रहे संशोधित आदर्श उपविधियों को एक ही चीज न समझें। आने वाले महीनों में उपविधियों की अंतिम अधिसूचना के बाद पार्किंग, शिकायत निवारण, विद्युत वाहन चार्जिंग, पुनर्विकास और सोसायटी के दैनिक संचालन से जुड़े कई प्रावधानों का व्यावहारिक असर और स्पष्ट होगा।

  • Mumbai Local: दिवा-मुंब्रा के बीच महिला लोकल से गिरी, VIDEO ने फिर उठाए सुरक्षा पर सवाल

    Mumbai Local: दिवा-मुंब्रा के बीच महिला लोकल से गिरी, VIDEO ने फिर उठाए सुरक्षा पर सवाल

    दिवा-मुंब्रा के बीच भीड़भरी लोकल से महिला नीचे गिर गई। सिग्नल पर ट्रेन रुकी होने से जान बची। वायरल VIDEO ने लोकल सुरक्षा पर सवाल उठाए।

    मुंबई: Mumbai local train में सुबह की भीड़ किस तरह जानलेवा स्थिति पैदा कर सकती है, इसका ताजा मामला गुरुवार सुबह दिवा-मुंब्रा के बीच सामने आया। CSMT की ओर जा रही भीड़भाड़ वाली लोकल से एक महिला यात्री नीचे गिर गई। गनीमत रही कि उस समय ट्रेन सिग्नल के कारण रुकी हुई थी, जिससे बड़ा हादसा टल गया। महिला रेलवे ट्रैक के किनारे बने नाले में गिरकर फंस गई और उसे मामूली चोटें आने की जानकारी सामने आई है। घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

    सिग्नल पर रुकी थी ट्रेन, तभी हुआ हादसा

    प्राथमिक जानकारी के मुताबिक, सुबह मुंबई की ओर जाने वाली लोकल में काफी भीड़ थी। दिवा और मुंब्रा के बीच ट्रेन सिग्नल पर रुकी हुई थी। इसी दौरान दरवाजे के पास मौजूद महिला यात्री भीड़ के दबाव में अपना संतुलन खो बैठी और ट्रेन से नीचे जा गिरी।

    महिला रेलवे ट्रैक के किनारे मौजूद नाले में जा गिरी। इसी वजह से वह सीधे ट्रेन के पहियों की चपेट में आने से बच गई। घटना के दौरान एक यात्री मोबाइल फोन से वीडियो बना रहा था, जिसके कैमरे में महिला के नीचे गिरने का पूरा घटनाक्रम रिकॉर्ड हो गया।

    घटना के बाद यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। उपलब्ध शुरुआती जानकारी के अनुसार महिला को मामूली चोटें आई हैं। उसकी पहचान और अस्पताल में इलाज से जुड़ी विस्तृत जानकारी की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।

    दिवा-मुंब्रा का यह रेल मार्ग फिर सवालों के घेरे में

    महिला के लोकल से गिरने की यह घटना इसलिए भी गंभीर है क्योंकि दिवा-मुंब्रा रेल मार्ग पहले भी इसी तरह की दुर्घटनाओं को लेकर चर्चा में रहा है।

    9 जून 2025 को इसी इलाके में दो लोकल ट्रेनों के बीच से गुजरते समय दरवाजे पर खड़े यात्रियों के गिरने की भीषण दुर्घटना हुई थी। हादसे में पांच यात्रियों की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे। उस घटना के बाद ट्रेन की भीड़, दरवाजे पर खड़े होकर यात्रा करने और इस हिस्से के तीखे मोड़ को लेकर सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठे थे।

    उस हादसे की जांच के दौरान दुर्घटना के कारण को लेकर अलग-अलग बातें सामने आई थीं। रेलवे की जांच में यात्रियों के सामान और आपस में टकराने जैसे पहलुओं पर ध्यान दिया गया, जबकि पुलिस जांच में ट्रैक और इंजीनियरिंग विभाग से जुड़े संभावित लापरवाही के पहलुओं की भी जांच की गई।

    एक साल बाद भी भीड़ से राहत क्यों नहीं?

    2025 की दुर्घटना के बाद रेलवे की ओर से मुंबई उपनगरीय नेटवर्क पर सेवाएं बढ़ाने और यात्री सुरक्षा के लिए कई कदम उठाए गए। सरकारी रिकॉर्ड में दिवा के लिए 14 और मुंब्रा के लिए 16 नई उपनगरीय सेवाओं का उल्लेख किया गया था।

    इसके बावजूद 2026 में भी दिवा-मुंब्रा और आसपास के मार्गों पर सुबह के व्यस्त समय में अत्यधिक भीड़ की शिकायतें सामने आती रही हैं। डोंबिवली से मुंबई की ओर जाने वाली लोकल में भीड़ का एक कारण दिवा-मुंब्रा क्षेत्र से आने वाले यात्रियों की संख्या को भी बताया गया है।

    यही वजह है कि आज की घटना के बाद सिर्फ यह सवाल नहीं है कि महिला लोकल से कैसे गिरी, बल्कि यह भी सवाल है कि अतिरिक्त सेवाओं और सुरक्षा उपायों के बावजूद peak hours में यात्रियों को दरवाजे तक पहुंचने वाली स्थिति क्यों बन रही है।

    Automatic Door वाली लोकल से क्या बदलेगा?

    2025 की दुर्घटना के बाद मुंबई में automatic door वाली non-AC लोकल का विकल्प भी तेजी से आगे बढ़ा। ऐसी लोकल में दरवाजे अपने आप बंद होने की व्यवस्था होगी, जिससे ट्रेन चलने के दौरान यात्रियों के दरवाजे पर खड़े रहने या बाहर लटकने की संभावना कम करने का प्रयास किया जा सकेगा।

    रेलवे की ओर से नए non-AC automatic-door rake को आगे बढ़ाया गया है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में यात्रियों की रोजाना जरूरत को देखते हुए ऐसी ट्रेनों की नियमित उपलब्धता और peak-hour capacity अहम मुद्दे बने हुए हैं।

    सिर्फ चेतावनी से नहीं रुकेगा खतरनाक सफर

    मुंबई की उपनगरीय रेलवे में यात्रियों को footboard पर यात्रा नहीं करने की लगातार चेतावनी दी जाती है। स्टेशनों पर घोषणाएं, जागरूकता अभियान और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा बलों की तैनाती जैसे उपाय भी किए जाते हैं।

    लेकिन दिवा-मुंब्रा के बीच हुई आज की घटना एक अलग चुनौती सामने रखती है। जब ट्रेन में क्षमता से ज्यादा भीड़ हो और यात्रियों का दबाव दरवाजे तक पहुंच जाए, तब सिर्फ चेतावनी के बजाय भीड़ प्रबंधन, पर्याप्त लोकल सेवाएं और सुरक्षित कोच व्यवस्था भी जरूरी हो जाती है।

    आज महिला की जान इसलिए बच गई क्योंकि ट्रेन उस समय सिग्नल पर रुकी हुई थी। वायरल वीडियो ने इस घटना को सामने ला दिया है, लेकिन असली सवाल अब भी वही है—दिवा-मुंब्रा जैसे संवेदनशील रेल मार्ग पर यात्रियों को सुरक्षित यात्रा देने के लिए रेलवे अगला ठोस कदम कब उठाएगा?

  • 36 की उम्र में 35 अपराध, एक तमंचा और 3 जिंदा कारतूस के साथ गोरेगांव में गिरफ्तार

    36 की उम्र में 35 अपराध, एक तमंचा और 3 जिंदा कारतूस के साथ गोरेगांव में गिरफ्तार

    गोरेगांव में वनराई पुलिस ने 36 वर्षीय रोहित सावंत को तमंचा और 3 जिंदा कारतूस के साथ गिरफ्तार किया। आरोपी पर 35 मामले दर्ज हैं।

    मुंबई: गोरेगांव पूर्व में आगामी उत्सव से पहले वनराई पुलिस ने अवैध हथियार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 36 वर्षीय रोहित अविनाश सावंत को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार उसके पास से एक तमंचा और तीन जिंदा कारतूस बरामद हुए हैं। खास बात यह है कि आरोपी के खिलाफ पहले से 35 मामले दर्ज होने की जानकारी पुलिस ने दी है।

    यह कार्रवाई 9 सितंबर को पुलिस उपनिरीक्षक प्रदीप शिंदे और एटीसी पथक को मिली गुप्त सूचना के आधार पर की गई। सूचना मिली थी कि रोहित सावंत शिवधाम हिंदू श्मशानभूमि के बाहर, पश्चिम द्रुतगति महामार्ग की दक्षिण दिशा में गोरेगांव पूर्व में मौजूद है। सूचना की पुष्टि के बाद वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में दो पुलिस टीमें तैयार की गईं और मौके पर जाल बिछाया गया।

    कमर के पास मिला तमंचा

    पुलिस के मुताबिक आरोपी मौके पर दिखाई देने के बाद टीम ने उसे हिरासत में लिया। पूछताछ में उसकी पहचान रोहित अविनाश सावंत, उम्र 36 वर्ष, निवासी मलपा डोंगरी नंबर-1, चकाला, अंधेरी पूर्व के रूप में हुई।

    तलाशी के दौरान उसकी कमर के पास लोहे की नली और काली मुठ वाला एक तमंचा मिला। पुलिस ने इसकी अनुमानित कीमत 55 हजार रुपये बताई है। वहीं दाहिनी जेब से तीन जिंदा कारतूस बरामद हुए। पुलिस के अनुसार हथियार और कारतूस की कुल अनुमानित कीमत 58 हजार रुपये है।

    पुलिस के अनुसार आरोपी के पास हथियार रखने का कोई वैध लाइसेंस नहीं था। इसके बाद वनराई पुलिस थाने में अपराध क्रमांक 675/2026 के तहत मामला दर्ज किया गया।

    आरोपी पर पहले से 35 मामले

    पुलिस के अनुसार रोहित सावंत के खिलाफ पहले से 35 मामले दर्ज हैं। हालांकि पुलिस की ओर से जारी जानकारी में इन मामलों की धाराओं और उनकी वर्तमान स्थिति का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।

    मौजूदा मामले में पुलिस उसके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड के साथ हथियार बरामदगी के संबंध की भी जांच कर रही है। हथियार उसे कहां से मिला और इसके पीछे किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका है या नहीं, यह भी जांच का अहम हिस्सा हो सकता है।

    आगामी उत्सव के दौरान किस काम के लिए लाया था हथियार?

    इस मामले का सबसे अहम पहलू आगामी उत्सव को लेकर पुलिस की जांच है। गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को है और यह कार्रवाई उत्सव शुरू होने से कुछ दिन पहले हुई है। पुलिस के मुताबिक अब यह पता लगाया जा रहा है कि रोहित सावंत यह अवैध हथियार आगामी उत्सव की अवधि में किस उद्देश्य से लेकर आया था।

    फिलहाल पुलिस ने आरोपी द्वारा किसी विशेष वारदात की तैयारी या किसी व्यक्ति को निशाना बनाने की पुष्टि नहीं की है। इसलिए जांच पूरी होने से पहले हथियार बरामदगी को किसी संभावित हमले या साजिश से जोड़ना उचित नहीं होगा।

    वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में कार्रवाई

    इस कार्रवाई में पुलिस आयुक्त, संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था), अतिरिक्त पुलिस आयुक्त उत्तर प्रादेशिक विभाग, पुलिस उपायुक्त उत्तर प्रादेशिक विभाग-3 और सहायक पुलिस आयुक्त दिंडोशी के मार्गदर्शन में कार्रवाई की गई।

    वनराई पुलिस के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक अब्दुल रऊफ शेख, पुलिस निरीक्षक सुभाषचंद्र पोस्टुरे, पुलिस निरीक्षक संदीप वाघमारे तथा पुलिस उपनिरीक्षक प्रदीप शिंदे की टीम ने कार्रवाई में भूमिका निभाई। पुलिसकर्मी 01920/सालुंखे, 041277/तेली और पुलिस सिपाही 140073/शिंदे भी कार्रवाई में शामिल रहे।

    मामले में वनराई पुलिस ने अपराध क्रमांक 675/26 दर्ज किया है। आरोपी के खिलाफ आर्म्स एक्ट की धारा 3 और 25 तथा महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम की धारा 37(1)(अ) और 135 के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस अब हथियार की आपूर्ति, आरोपी के पुराने मामलों और हथियार रखने के वास्तविक उद्देश्य से जुड़ी जानकारी जुटा रही है।

  • गणपति आगमन में मुंबई में 2 मौतें, 7 घायल; उल्हासनगर में बिना अनुमति यात्रा पर केस

    गणपति आगमन में मुंबई में 2 मौतें, 7 घायल; उल्हासनगर में बिना अनुमति यात्रा पर केस

    मुंबई में गणपति आगमन के दौरान भुलेश्वर में 2 मौत और 5 घायल हुए, कुर्ला में 2 घायल हुए। उल्हासनगर में बिना अनुमति आगमन यात्रा पर केस दर्ज।

    मुंबई: मुंबई और आसपास के इलाकों में गणपति आगमन के दौरान हादसों और नियमों के उल्लंघन की घटनाओं ने उत्सव की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भुलेश्वर में 22 फुट ऊंची गणेश प्रतिमा गिरने से दो लोगों की मौत और पांच घायल हुए थे। इसके बाद कुर्ला में 15 फुट की प्रतिमा गिरने से दो लोग घायल हुए। इसी बीच उल्हासनगर में ठाणे पुलिस आयुक्त की निषेधाज्ञा के बावजूद बिना अनुमति गणेश आगमन यात्रा निकालने पर मंडल के अध्यक्ष सहित पदाधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

    भुलेश्वर में प्रतिमा गिरने से दो मौतें

    22 अगस्त की रात दक्षिण मुंबई के भुलेश्वर इलाके में ‘भुलेश्वरचा राजा’ की करीब 22 फुट ऊंची गणेश प्रतिमा आगमन यात्रा के दौरान हादसे का शिकार हो गई। प्रतिमा को भायखला से भुलेश्वर ले जाया जा रहा था। जय अंबे चौक के पास प्रतिमा का एक हिस्सा टूटकर नीचे आ गिरा।

    हादसे में संकेत नेवशे और ब्रिजेश हेमंत जोशी की मौत हुई, जबकि पांच लोग घायल हुए। घायलों में पांच और सात वर्ष की दो बच्चियां भी शामिल थीं। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया था।

    प्रतिमा के ढांचे और उसके सहारे से जुड़े तकनीकी पहलुओं की जांच की गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार नट-बोल्ट और संरचनात्मक मजबूती से जुड़े पहलुओं की भी जांच के दायरे में रखा गया। लेकिन हादसे का अंतिम कारण जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

    कुर्ला में 15 फुट की प्रतिमा गिरी

    8 सितंबर को कुर्ला में धारावी के प्रेम नगर स्थित मंडल के लिए लाई जा रही करीब 15 फुट की गणेश प्रतिमा शीटळ तलाव के पास ट्रॉली से गिर गई। जानकारी के अनुसार ट्रॉली के गतिरोधक से गुजरते समय प्रतिमा का संतुलन बिगड़ा।

    हादसे में दो लोग घायल हो गए। क्षतिग्रस्त प्रतिमा का बाद में विसर्जन कर दिया गया।

    भुलेश्वर और कुर्ला की घटनाओं को मिलाकर मुंबई में गणपति आगमन के दौरान सामने आए इन दो प्रमुख प्रतिमा हादसों में दो लोगों की मौत और सात लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई।

    उल्हासनगर में बिना अनुमति गणेश आगमन यात्रा पर केस

    इसी बीच उल्हासनगर में गणेश आगमन यात्रा के दौरान अनुमति और निषेधाज्ञा के उल्लंघन का मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार ठाणे पुलिस आयुक्त की ओर से लागू निषेधाज्ञा के बावजूद प्रसिद्ध गणेश मित्र मंडल, उल्हासनगर-1 ने बिना अनुमति आगमन यात्रा निकाली।

    पुलिस सिपाही बाबासाहेब पोटे की शिकायत पर मंडल के अध्यक्ष महेश धुंडलोदिया (49) सहित पदाधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 287 तथा मुंबई पुलिस अधिनियम की धारा 37(3) और 135 के तहत कार्रवाई की है।

    पुलिस के अनुसार 8 सितंबर को शाम करीब 5 बजे से रात 10 बजे के बीच सी क्लॉक टॉवर चौक से साधु वासवानी चौक, बालाजी मेडिकल होते हुए सोनारा हॉल तक गणेश आगमन यात्रा निकाली गई। यात्रा में डीजे, ढोल-ताशा और लाउडस्पीकर का इस्तेमाल किया गया।

    16 सितंबर तक निषेधाज्ञा लागू

    पुलिस के मुताबिक ठाणे पुलिस आयुक्त की निषेधाज्ञा 16 सितंबर तक लागू है। इसके बावजूद बिना अनुमति यात्रा निकालने को लेकर कार्रवाई की गई है। मामले की जांच एपीआई विनोद पाटील कर रहे हैं।

    पुलिस के अनुसार संबंधित मंडल के खिलाफ पहले भी इस तरह के मामले दर्ज हो चुके हैं।

    अब सुरक्षा के साथ अनुमति व्यवस्था भी सवालों में

    गणपति आगमन से जुड़ी इन घटनाओं में एक तरफ बड़ी प्रतिमाओं के सुरक्षित परिवहन का सवाल सामने आया है, तो दूसरी ओर जुलूस के लिए निर्धारित अनुमति और पुलिस के आदेशों के पालन का मुद्दा भी सामने आया है।

    बड़ी प्रतिमा को सड़क से ले जाते समय उसके ढांचे की मजबूती, परिवहन के लिए इस्तेमाल होने वाली ट्रॉली, सड़क की स्थिति, गतिरोधक, बिजली के तार और भीड़ से सुरक्षित दूरी जैसे पहलुओं की अनदेखी हादसे का जोखिम बढ़ा सकती है। दूसरी ओर आगमन यात्रा के लिए आवश्यक अनुमति नहीं लेने पर यातायात, ध्वनि और भीड़ नियंत्रण से जुड़े नियमों के उल्लंघन की स्थिति पैदा हो सकती है।

    यही वजह है कि गणपति आगमन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को केवल प्रतिमा तक सीमित रखने के बजाय प्रतिमा की संरचना, परिवहन, मार्ग, भीड़ नियंत्रण, ध्वनि व्यवस्था और पुलिस अनुमति को एक साथ देखने की जरूरत सामने आ रही है।

    फिलहाल भुलेश्वर और कुर्ला के हादसों की परिस्थितियां अलग हैं, जबकि उल्हासनगर का मामला अनुमति और निषेधाज्ञा के उल्लंघन से संबंधित है। तीनों घटनाएं अलग-अलग प्रकृति की होने के बावजूद गणपति आगमन के दौरान सुरक्षा और नियमों के पालन की अहमियत को सामने लाती हैं।

  • नितेश राणे के करीबी दाऊद शेख ने छोड़ी भाजपा, सैकड़ों कार्यकर्ताओं संग मनसे में शामिल

    नितेश राणे के करीबी दाऊद शेख ने छोड़ी भाजपा, सैकड़ों कार्यकर्ताओं संग मनसे में शामिल

    मुंबई में भाजपा को झटका, नितेश राणे के करीबी दाऊद शेख सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ मनसे में शामिल हुए। जानिए उनकी राजनीतिक यात्रा और असर।

    मुंबई: मुंबई की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत भाजपा युवा मोर्चा के उत्तर-पश्चिम मुंबई उपनगर के पूर्व उपाध्यक्ष दाऊद शेख ने भाजपा छोड़कर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का दामन थाम लिया है। दाऊद शेख के साथ सैकड़ों पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं के मनसे में शामिल होने की जानकारी सामने आई है। यह प्रवेश अमित ठाकरे की मौजूदगी में हुआ।

    इस घटनाक्रम को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि दाऊद शेख की राजनीतिक यात्रा लंबे समय तक राणे परिवार की राजनीतिक धारा से जुड़ी रही है। उनकी राजनीति की शुरुआत स्वाभिमान संगठन से हुई थी और वे शुरू से इस संगठन से जुड़े रहे।

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    कार्यक्रम के दौरान बाहर जमा कार्यकर्ताओं की तस्वीर

    स्वाभिमान संगठन से शुरू हुई दाऊद शेख की राजनीतिक यात्रा

    दाऊद शेख का राजनीतिक सफर सीधे भाजपा से शुरू नहीं हुआ था। वे पहले स्वाभिमान संगठन से जुड़े थे, जिसका नेतृत्व राणे परिवार की राजनीतिक धारा से जुड़ा रहा। बाद में जब स्वाभिमान संगठन का भाजपा में विलय हुआ, तब दाऊद शेख भी भाजपा में शामिल हुए।

    इसी राजनीतिक यात्रा के दौरान वे नारायण राणे और नितेश राणे के सान्निध्य में सक्रिय रहे। बाद में भाजपा संगठन में उनकी सक्रियता बढ़ी और उन्होंने भाजपा युवा मोर्चा में उत्तर-पश्चिम मुंबई उपनगर के स्तर पर जिम्मेदारी संभाली।

    यही कारण है कि दाऊद शेख का भाजपा छोड़कर मनसे में जाना केवल एक सामान्य दल-बदल की घटना नहीं माना जा रहा है। उनके लंबे राजनीतिक सफर और राणे परिवार से पुराने जुड़ाव के कारण इस फैसले ने मुंबई के राजनीतिक हलकों का ध्यान खींचा है।

    भाजपा-मनसे के बढ़ते टकराव के बीच लिया फैसला

    दाऊद शेख का मनसे में प्रवेश ऐसे समय हुआ है जब भाजपा और मनसे के बीच राजनीतिक टकराव पहले से तेज है। पुणे के एक सरकारी कॉलेज में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर हटाने के विवाद के बाद दोनों दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच बयानबाजी तथा विरोध प्रदर्शन बढ़े थे।

    अमित ठाकरे के खिलाफ भाजपा युवा मोर्चा के आंदोलन को लेकर भी विवाद हुआ था। इस दौरान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने युवा मोर्चा की आंदोलन शैली पर नाराजगी जताते हुए कार्यकर्ताओं को संयमित और सकारात्मक तरीके से काम करने की सलाह दी थी।

    इसके बाद मुंबई में भाजपा और मनसे के कार्यकर्ताओं के बीच तनावपूर्ण स्थिति भी सामने आई। ऐसे राजनीतिक माहौल के बीच दाऊद शेख का भाजपा से निकलकर अमित ठाकरे की मौजूदगी में मनसे में शामिल होना इस घटनाक्रम को और महत्वपूर्ण बनाता है।

    भाजपा छोड़ने की वजह पर अभी स्पष्ट बयान नहीं

    दाऊद शेख के मनसे में शामिल होने की खबर सामने आ चुकी है, लेकिन उन्होंने भाजपा छोड़ने का विस्तृत कारण क्या बताया है, इस बारे में उपलब्ध जानकारी में कोई स्पष्ट सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है।

    इसी तरह उनके साथ मनसे में शामिल हुए पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की सटीक संख्या भी स्पष्ट नहीं की गई है। फिलहाल जानकारी सैकड़ों कार्यकर्ताओं के प्रवेश की है।

    भाजपा की ओर से दाऊद शेख के जाने और उनके साथ कार्यकर्ताओं के मनसे में शामिल होने पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। नितेश राणे की ओर से इस घटनाक्रम पर कोई स्पष्ट सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने आती है तो यह इस राजनीतिक घटनाक्रम को और महत्वपूर्ण बना सकती है।

    उत्तर-पश्चिम मुंबई में क्या पड़ सकता है असर?

    दाऊद शेख लंबे समय से उत्तर-पश्चिम मुंबई के राजनीतिक और संगठनात्मक क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। ऐसे में उनके साथ स्थानीय स्तर के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का मनसे में जाना संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    हालांकि, केवल इस प्रवेश के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि भाजपा के चुनावी आधार पर कोई बड़ा असर पड़ गया है। इसका वास्तविक राजनीतिक प्रभाव इस बात से तय होगा कि दाऊद शेख के साथ गए कार्यकर्ता मनसे के संगठन में कितनी सक्रिय भूमिका निभाते हैं और उन्हें पार्टी में आगे क्या जिम्मेदारी दी जाती है।

    फिलहाल सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल यही है कि स्वाभिमान संगठन से शुरू होकर राणे परिवार की राजनीतिक धारा और फिर भाजपा तक पहुंचे दाऊद शेख ने अब मनसे का रास्ता क्यों चुना। आने वाले दिनों में दाऊद शेख, भाजपा और मनसे की ओर से आने वाले बयानों से इस फैसले के पीछे की राजनीतिक तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

  • कुरार के वाघेश्वरी मंदिर को संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के पर्यटन मानचित्र में शामिल करने की मांग, वन मंत्री की बैठक

    कुरार के वाघेश्वरी मंदिर को संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के पर्यटन मानचित्र में शामिल करने की मांग, वन मंत्री की बैठक

    कुरार के प्राचीन वाघेश्वरी मंदिर को संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के पर्यटन स्थलों में शामिल करने की मांग पर वन मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए।

    मुंबई: मलाड (पूर्व) कुरार गांव स्थित प्राचीन वाघेश्वरी मंदिर को संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के आधिकारिक पर्यटन स्थलों में शामिल करने की मांग को लेकर बुधवार को मंत्रालय में महत्वपूर्ण बैठक हुई। शिवसेना विधायक सुनील प्रभु की मांग पर हुई इस बैठक में वन मंत्री गणेश नाईक ने अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए। मंदिर तक पहुंचने वाले रास्ते में सुधार और श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी चर्चा हुई।

    विधायक सुनील प्रभु ने इस संबंध में 26 जून 2026 को वन मंत्री को लिखित पत्र दिया था। उनका कहना है कि कुरार गांव की ग्रामदेवता के रूप में प्रसिद्ध वाघेश्वरी मंदिर को संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के अन्य पर्यटन स्थलों की तरह आधिकारिक पर्यटन मानचित्र में स्थान मिलना चाहिए। मंदिर ट्रस्ट की ओर से सामाजिक कार्यकर्ता बाबूभाई भवानजी ने भी वन मंत्री को निवेदन दिया था।

    मंदिर तक पहुंच और श्रद्धालुओं की सुविधा पर जोर

    बैठक में मंदिर तक जाने वाले रास्ते को बेहतर और सुगम बनाने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। नवरात्रि सहित वर्षभर यहां श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। स्थानीय महिलाओं के बीच मंदिर में ओटी भरने की परंपरा भी लंबे समय से चली आ रही है।

    वन मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि श्रद्धालुओं की संख्या और भीड़ को ध्यान में रखते हुए उचित व्यवस्था की जाए। इसमें मंदिर तक पहुंच की सुविधा और भीड़ के समय आने वाली संभावित परेशानियों को दूर करने पर ध्यान देने की बात कही गई।

    हालांकि, बैठक के बाद वाघेश्वरी मंदिर को संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान का आधिकारिक पर्यटन स्थल घोषित किए जाने की जानकारी सामने नहीं आई है। फिलहाल मामला मांग, बैठक और अधिकारियों को दिए गए निर्देशों के स्तर पर है।

    एसजीएनपी में पहले से बढ़ रहा है पर्यटन ढांचा

    वाघेश्वरी मंदिर को पर्यटन मानचित्र में शामिल करने की मांग ऐसे समय में सामने आई है, जब संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान में पर्यटन सुविधाओं को बढ़ाने की व्यापक योजना पर काम चल रहा है। मार्च 2026 में वन मंत्री गणेश नाईक ने उद्यान के लिए करीब 775 करोड़ रुपये के प्रस्तावित विकास खाके की जानकारी दी थी। इसमें तेंदुआ सफारी, नौकायन सुविधाओं में सुधार, पदयात्रा मार्ग और पर्यटकों के लिए नई व्यवस्थाएं शामिल हैं।

    महाराष्ट्र सरकार ने इसी वर्ष संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र के लिए क्षेत्रीय मास्टर प्लान को भी मंजूरी दी है। इसमें नियंत्रित और टिकाऊ पर्यटन के साथ पर्यटक सुविधाओं, प्रकृति मार्गों, जानकारी केंद्रों तथा सांस्कृतिक विरासत स्थलों के संरक्षण पर जोर दिया गया है।

    वर्तमान में महाराष्ट्र पर्यटन विभाग की संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान संबंधी जानकारी में कान्हेरी गुफाएं, वन्यजीव और प्रकृति आधारित पर्यटन प्रमुख आकर्षणों में शामिल हैं। मुंबई उपनगर जिला प्रशासन की पर्यटन सूची में भी संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान और कान्हेरी गुफाओं सहित कई प्रमुख स्थल दर्ज हैं, जबकि वाघेश्वरी मंदिर अलग आधिकारिक पर्यटन स्थल के रूप में सूचीबद्ध नहीं है।

    विकास के साथ पर्यावरणीय नियम भी महत्वपूर्ण

    संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान संरक्षित वन क्षेत्र होने के कारण यहां किसी भी नए निर्माण या विकास कार्य को सामान्य शहरी परियोजना की तरह नहीं देखा जा सकता। उद्यान के आसपास का क्षेत्र पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र के अंतर्गत आता है और विकास गतिविधियों पर पर्यावरणीय नियंत्रण लागू हैं।

    इसके अलावा उद्यान से जुड़े अतिक्रमण और संरक्षण के मामलों में न्यायालय के निर्देश भी महत्वपूर्ण हैं। सितंबर 2026 में वन विभाग ने उद्यान के अतिक्रमण, पात्र परिवारों के पुनर्वास और सीमा सुरक्षा को लेकर समीक्षा की है।

    ऐसे में वाघेश्वरी मंदिर तक रास्ता सुधारने या पर्यटन सुविधाएं बढ़ाने की कोई भी योजना पर्यावरणीय नियमों और न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप ही आगे बढ़ानी होगी। यही वजह है कि वन मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट रूप से न्यायालय के आदेशों के अधीन आवश्यक कार्यवाही करने को कहा है।

    बढ़ते पर्यटन के साथ भीड़ और पर्यावरण का सवाल

    यदि भविष्य में वाघेश्वरी मंदिर को आधिकारिक पर्यटन मानचित्र में शामिल किया जाता है, तो श्रद्धालुओं के साथ अन्य पर्यटकों की संख्या बढ़ने की संभावना होगी। इसके लिए रास्ते, पैदल आवागमन, स्वच्छता, पेयजल, सुरक्षा, आपातकालीन पहुंच और भीड़ नियंत्रण जैसी व्यवस्थाओं की जरूरत बढ़ सकती है।

    दूसरी ओर, संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान में मानवीय गतिविधियों के विस्तार का असर वन क्षेत्र और वन्यजीवों पर न पड़े, यह भी महत्वपूर्ण होगा। सितंबर 2026 में उद्यान में धार्मिक आयोजनों और पर्यावरणीय नियमों को लेकर भी सवाल उठे हैं।

    इसलिए वाघेश्वरी मंदिर के विकास का अगला चरण केवल सुशोभीकरण तक सीमित नहीं रहेगा। मंदिर को पर्यटन स्थल का दर्जा देने का निर्णय होता है तो उसके साथ श्रद्धालुओं की सुविधा और उद्यान के पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना भी बड़ी चुनौती होगी।

    फिलहाल वन विभाग की बैठक के बाद अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए गए हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वाघेश्वरी मंदिर को आधिकारिक पर्यटन मानचित्र में शामिल करने की मांग पर सरकार आगे क्या निर्णय लेती है और मंदिर तक पहुंच तथा श्रद्धालुओं की सुविधाओं में सुधार के लिए कौन से कार्य मंजूर किए जाते हैं।

  • महाराष्ट्र SIR: 38 सीटों में 37.51 लाख मतदाता ड्राफ्ट सूची से बाहर, मुंबई में भी बड़ा असर

    महाराष्ट्र SIR: 38 सीटों में 37.51 लाख मतदाता ड्राफ्ट सूची से बाहर, मुंबई में भी बड़ा असर

    महाराष्ट्र SIR में 38 मुस्लिम आबादी वाली सीटों पर 37.51 लाख मतदाता ड्राफ्ट सूची में आगे नहीं बढ़े। जानिए कारण, आंकड़े और अब क्या करें।

    मुंबई: महाराष्ट्र में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के बाद जारी प्रारूप मतदाता सूची ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर नई बहस छेड़ दी है। मुस्लिम आबादी 20 प्रतिशत से अधिक वाली 38 विधानसभा सीटों में करीब 37.51 लाख मतदाता यानी 29.77 प्रतिशत पिछले मतदाता आंकड़े से प्रारूप सूची में आगे नहीं बढ़े हैं। पूरे महाराष्ट्र में यह अनुपात 21.14 प्रतिशत है।

    हालांकि, इन आंकड़ों को सीधे मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाए जाने के तौर पर देखना सही नहीं होगा। उपलब्ध आंकड़ों में मतदाताओं को धर्म के आधार पर अलग नहीं किया गया है। नाम आगे नहीं बढ़ने के पीछे स्थानांतरण, अनुपस्थिति, मृत्यु, दोहरी प्रविष्टि और अन्य कारण शामिल हैं।

    महाराष्ट्र और 38 विधानसभा सीटों में कितना अंतर?

    क्षेत्रपिछली मतदाता संख्या के मुकाबले आगे नहीं बढ़े मतदाता
    महाराष्ट्र21.14%
    मुस्लिम आबादी 20% से अधिक वाली 38 सीटें29.77%
    इन 38 सीटों में मतदाताकरीब 37.51 लाख
    पूरे महाराष्ट्र में ऐसे मतदाता2.06 करोड़ से अधिक

    इन 38 सीटों का अनुपात राज्य के औसत से करीब 8.63 प्रतिशत अंक ज्यादा है।

    भिवंडी पूर्व में करीब आधे मतदाता आगे नहीं बढ़े

    विधानसभा क्षेत्रवार आंकड़ों में भिवंडी पूर्व में सबसे ज्यादा 49.10 प्रतिशत मतदाता प्रारूप सूची में आगे नहीं बढ़े। इसके बाद भिवंडी पश्चिम में 44.72 प्रतिशत और मुंब्रा-कलवा में 42.91 प्रतिशत का आंकड़ा रहा।

    विधानसभा क्षेत्रमुस्लिम आबादीप्रारूप सूची में आगे नहीं बढ़े
    भिवंडी पूर्व51.0%49.10%
    भिवंडी पश्चिम49.5%44.72%
    मुंब्रा-कलवा43.7%42.91%
    मानखुर्द शिवाजी नगर53.0%42.31%
    चांदिवली27.6%41.44%
    सायन-कोलीवाड़ा21.1%40.73%
    पुणे कैंटोनमेंट20.7%40.36%
    मालाड पश्चिम27.7%38.57%
    मुंबादेवी50.9%38.52%
    वर्सोवा33.5%38.46%
    नागपुर मध्य22.1%38.01%
    कुर्ला30.7%36.37%
    अंधेरी पश्चिम27.1%36.37%
    भायखला41.5%34.88%
    धारावी33.4%34.55%
    बांद्रा पूर्व33.1%34.44%

    इन आंकड़ों से यह जरूर पता चलता है कि कई मुस्लिम आबादी वाले शहरी क्षेत्रों में प्रारूप सूची से आगे नहीं बढ़े मतदाताओं का अनुपात राज्य के औसत से काफी अधिक है। लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि ये सभी मतदाता मुस्लिम थे या धर्म के आधार पर हटाए गए।

    37.51 लाख मतदाताओं के नाम आगे क्यों नहीं बढ़े?

    यहां SIR की प्रक्रिया को समझना जरूरी है। प्रारूप सूची में नाम का आगे नहीं बढ़ना अपने आप में स्थायी रूप से मतदाता सूची से नाम हट जाना नहीं है।

    38 विधानसभा क्षेत्रों के उपलब्ध आंकड़ों में सबसे बड़ी श्रेणी स्थायी रूप से स्थानांतरित मतदाताओं की है। इसके बाद अनुपस्थित या पता नहीं चल पाने वाले मतदाता हैं।

    कारणहिस्सेदारी
    स्थायी रूप से स्थानांतरित42.05%
    अनुपस्थित/पता नहीं चला35.59%
    मृत12.76%
    दोहरी प्रविष्टि8.33%
    अन्यशेष

    इससे यह भी स्पष्ट होता है कि 29.77 प्रतिशत का पूरा आंकड़ा फर्जी मतदाताओं की संख्या नहीं है। इसमें ऐसे लोग भी शामिल हैं जो दूसरे स्थान पर चले गए या पुनरीक्षण के दौरान उपलब्ध नहीं मिले।

    क्या मुस्लिम आबादी ज्यादा होने पर नाम भी ज्यादा हटे?

    इस सवाल का सीधा जवाब अभी नहीं है।

    इसका सबसे बड़ा उदाहरण मालेगांव मध्य है। यहां मुस्लिम आबादी करीब 78.4 प्रतिशत है, जो इन 38 सीटों में सबसे ज्यादा है, लेकिन प्रारूप सूची में आगे नहीं बढ़े मतदाताओं का अनुपात 23.46 प्रतिशत रहा।

    विधानसभा क्षेत्रमुस्लिम आबादीआगे नहीं बढ़े मतदाता
    मालेगांव मध्य78.4%23.46%
    भिवंडी पूर्व51.0%49.10%
    मानखुर्द शिवाजी नगर53.0%42.31%
    मुंबादेवी50.9%38.52%

    इसलिए उपलब्ध आंकड़े मुस्लिम मतदाताओं की धर्म आधारित व्यापक कटौती का निष्कर्ष निकालने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए धर्मवार मतदाता आंकड़े और व्यक्तिगत प्रविष्टियों की जांच जरूरी होगी।

    क्या सिर्फ मुस्लिम आबादी वाले इलाकों में ही ज्यादा नाम बाहर हुए?

    नहीं। यही इस मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू है।

    महाराष्ट्र में 53 विधानसभा सीटों पर आगे नहीं बढ़े मतदाताओं का अनुपात 29.77 प्रतिशत से भी ज्यादा रहा। इनमें कोलाबा, खड़कवासला, कोथरूड और कल्याण ग्रामीण जैसे क्षेत्र भी शामिल हैं।

    इससे संकेत मिलता है कि SIR का असर केवल मुस्लिम आबादी वाले क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। बड़े शहरों और तेजी से बदलती आबादी वाले इलाकों में पता बदलने, स्थानांतरण और मतदाताओं की उपलब्धता का सवाल भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

    मुंबई और ठाणे में भी बड़ा असर

    मुंबई में प्रारूप मतदाता सूची से आगे नहीं बढ़े मतदाताओं का अनुपात करीब 34.75 प्रतिशत बताया गया है। ठाणे में यह आंकड़ा करीब 38.37 प्रतिशत रहा।

    मुंबई महानगर क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग नौकरी, किराये के मकान और अन्य कारणों से एक इलाके से दूसरे इलाके में स्थानांतरित होते हैं। ऐसे में SIR के दौरान किसी पुराने पते पर मतदाता नहीं मिलने की स्थिति कई प्रविष्टियों को प्रभावित कर सकती है।

    हालांकि, किसी खास मतदाता का नाम किस कारण से आगे नहीं बढ़ा, इसका सही जवाब उसकी व्यक्तिगत प्रविष्टि और दर्ज कारण की जांच के बाद ही मिल सकता है।

    विपक्ष ने उठाए सवाल, चुनाव आयोग का जवाब भी अहम

    मतदाता सूची में इतने बड़े बदलाव को लेकर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं। विपक्षी नेताओं का दावा है कि मुंबई, मुंबई महानगर क्षेत्र और कुछ अल्पसंख्यक आबादी वाले क्षेत्रों में ज्यादा नाम प्रभावित हुए हैं। राहुल गांधी ने भी महाराष्ट्र में अलग-अलग चुनावों के दौरान मतदाताओं की संख्या में हुए बदलाव पर सवाल उठाया है।

    दूसरी ओर, चुनाव अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा सूची प्रारूप सूची है। जिन पात्र मतदाताओं के नाम नहीं हैं, उन्हें दावा दाखिल करने का अवसर दिया गया है। इसलिए प्रारूप सूची के आंकड़े को अंतिम मतदाता सूची का आंकड़ा मानना अभी जल्दबाजी होगी।

    ड्राफ्ट सूची में नाम नहीं है तो क्या करें?

    सबसे पहले मतदाता को महाराष्ट्र की आधिकारिक चुनाव संबंधी वेबसाइट पर अपना नाम खोजकर यह देखना चाहिए कि उसका नाम प्रारूप सूची में है या नहीं और यदि नहीं है तो संबंधित कारण क्या दर्ज किया गया है।

    पात्र मतदाता का नाम शामिल नहीं है तो फॉर्म 6 के माध्यम से दावा किया जा सकता है। गलत नाम हटाने पर आपत्ति के लिए फॉर्म 7 और मतदाता सूची में नाम, पता या अन्य विवरण में सुधार के लिए फॉर्म 8 का इस्तेमाल किया जाता है।

    इसलिए अगर किसी व्यक्ति का नाम प्रारूप सूची में नहीं दिखाई दे रहा है, तो उसे इसे अंतिम रूप से नाम कटने की स्थिति मानकर चुप नहीं बैठना चाहिए।

    30 सितंबर तक मिलेगा दावा करने का मौका

    SIR की प्रारूप सूची जारी होने के बाद दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया 30 सितंबर 2026 तक चलेगी। इसके बाद दावों की जांच और निपटारे की प्रक्रिया होगी।

    अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर 2026 को प्रकाशित होने वाली है।

    यानी अभी सामने आया 29.77 प्रतिशत का आंकड़ा अंतिम स्थिति नहीं है। असली तस्वीर तब स्पष्ट होगी जब दावों और आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम सूची जारी होगी।

    अब सबसे बड़ा सवाल क्या है?

    महाराष्ट्र SIR के आंकड़े निश्चित तौर पर एक बड़े बदलाव की ओर इशारा करते हैं। मुस्लिम आबादी 20 प्रतिशत से अधिक वाली 38 सीटों में प्रारूप सूची से आगे नहीं बढ़े मतदाताओं का अनुपात राज्य के औसत से करीब 8.63 प्रतिशत अंक ज्यादा है।

    लेकिन इस अंतर को केवल धार्मिक आधार पर मतदाता हटाए जाने का प्रमाण मानना उपलब्ध आंकड़ों से संभव नहीं है। अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह देखना होगी कि 30 सितंबर तक कितने पात्र मतदाता दावा दाखिल करते हैं और 4 नवंबर की अंतिम सूची में कितने नाम वापस जुड़ते हैं।

    यही अंतिम आंकड़ा बताएगा कि SIR के दौरान सामने आया बड़ा अंतर वास्तविक मतदाता बदलाव कितना था और प्रारूप स्तर पर हुई अनुपलब्धता या अन्य प्रविष्टियों का हिस्सा कितना।

  • मुंबई में BOCW सम्मेलन से पहले महाराष्ट्र की बड़ी तस्वीर, CAG ने उठाए थे ये सवाल**

    मुंबई में BOCW सम्मेलन से पहले महाराष्ट्र की बड़ी तस्वीर, CAG ने उठाए थे ये सवाल**

    मुंबई में 11-12 सितंबर को BOCW सम्मेलन होगा। महाराष्ट्र में श्रमिक पंजीकरण, कल्याण निधि और योजनाओं पर CAG की आपत्तियों के बीच नई पहल पर नजर।

    मुंबई: 11 और 12 सितंबर 2026 को मुंबई में इमारत एवं अन्य निर्माण श्रमिकों यानी बीओसीडब्ल्यू के कल्याण पर राष्ट्रीय सम्मेलन होने जा रहा है। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के श्रम मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी तथा बीओसीडब्ल्यू कल्याण बोर्डों के पदाधिकारी शामिल होंगे। सम्मेलन में श्रमिकों के पंजीकरण, कल्याणकारी योजनाओं, उपकर से मिलने वाली राशि, डिजिटल सेवाओं, कौशल और रोजगार के साथ अंतरराष्ट्रीय रोजगार के अवसरों पर चर्चा होगी।

    लेकिन मुंबई में होने वाला यह सम्मेलन सिर्फ नई योजनाओं और डिजिटल व्यवस्था की समीक्षा तक सीमित नहीं है। महाराष्ट्र के संदर्भ में इसकी अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि राज्य की निर्माण श्रमिक कल्याण व्यवस्था पर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी कैग की एक विस्तृत रिपोर्ट पहले ही कई कमियां सामने ला चुकी है।

    सम्मेलन में किन मुद्दों पर होगा मंथन?

    केंद्र सरकार के अनुसार सम्मेलन में राज्यों की अच्छी कार्यप्रणालियों और सफल उपायों को साझा किया जाएगा। इसके साथ ही श्रमिकों के पंजीकरण, कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, कल्याण निधि के प्रबंधन और तकनीक के जरिए सेवाओं को आसान बनाने पर चर्चा होगी।

    नवंबर 2025 में राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन के दौरान शुरू किए गए तीन प्रमुख प्रयासों की प्रगति की भी समीक्षा होगी। इनमें राज्य बीओसीडब्ल्यू डिजिटल लेबर चौक, लेबर चौक-सह-सुविधा केंद्र और ऑनलाइन बीओसीडब्ल्यू उपकर संग्रह पोर्टल शामिल हैं।

    इसका सीधा मतलब है कि अब चर्चा केवल योजना बनाने की नहीं, बल्कि यह देखने की भी है कि इन व्यवस्थाओं का जमीन पर कितना असर पड़ा है।

    महाराष्ट्र में कैग ने क्या तस्वीर दिखाई थी?

    महाराष्ट्र के बीओसीडब्ल्यू कल्याण की कार्यप्रणाली पर कैग की रिपोर्ट संख्या 4, 2025 में 2017-18 से 2021-22 की अवधि का प्रदर्शन ऑडिट किया गया था। इसमें श्रमिकों और निर्माण प्रतिष्ठानों के पंजीकरण, उपकर की वसूली, स्वास्थ्य और सुरक्षा, कल्याण योजनाओं तथा निधि के इस्तेमाल की जांच की गई थी।

    रिपोर्ट के मुताबिक, 60 निर्माण कार्यों की जांच में 44 यानी करीब 73 प्रतिशत प्रतिष्ठान पंजीकृत नहीं पाए गए। छह जिलों में जांचे गए 24 पंजीकृत और 24 अपंजीकृत प्रतिष्ठानों में काम कर रहे 1,391 श्रमिकों में से 894 यानी 64 प्रतिशत श्रमिक बोर्ड के साथ पंजीकृत नहीं थे। कैग ने कहा कि इससे पात्र श्रमिक विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से बाहर रह सकते हैं।

    रिपोर्ट में पंजीकरण की प्रक्रिया में देरी भी सामने आई। अप्रैल 2021 से मार्च 2022 के दौरान पंजीकृत किए गए 10.81 लाख श्रमिकों में करीब 48.18 प्रतिशत के पंजीकरण में 100 दिन से अधिक का समय लगा था। कुछ मामलों में यह अवधि 833 दिन तक पहुंची।

    कल्याण निधि के इस्तेमाल पर भी सवाल

    कैग के अनुसार 2017-18 से 2021-22 के दौरान महाराष्ट्र बोर्ड के पास कुल 16,151.82 करोड़ रुपये की उपलब्ध राशि थी। इसमें से कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर 4,253.77 करोड़ रुपये यानी केवल 26.34 प्रतिशत राशि खर्च की गई। इसी अवधि में उपकर संग्रह 7,689.73 करोड़ रुपये था।

    कैग ने यह भी दर्ज किया कि मार्च 2022 तक बोर्ड ने 11,350 करोड़ रुपये राष्ट्रीयकृत बैंकों में सावधि जमा में निवेश किए थे। रिपोर्ट में योजनाओं के क्रियान्वयन और श्रमिकों तक लाभ पहुंचाने की व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत बताई गई।

    यह आंकड़े पुराने ऑडिट काल से जुड़े हैं। इसलिए इन्हें 2026 की मौजूदा स्थिति का आंकड़ा नहीं माना जा सकता। लेकिन 11-12 सितंबर के राष्ट्रीय सम्मेलन के संदर्भ में ये आंकड़े यह सवाल जरूर खड़ा करते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में पंजीकरण, निधि के इस्तेमाल और लाभ पहुंचाने की व्यवस्था में कितना सुधार हुआ है।

    2026 में महाराष्ट्र ने क्या बदला?

    महाराष्ट्र सरकार ने जुलाई 2026 में निर्माण श्रमिकों के लिए कई नई सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को लागू करने संबंधी फैसले जारी किए हैं। महाराष्ट्र इमारत एवं अन्य निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड की आधिकारिक सूची के अनुसार 13 जुलाई 2026 को सेवानिवृत्ति पेंशन योजना, मृत्यु सहायता एवं जीवन बीमा योजना, प्रसूति सहायता योजना और पंजीकृत सक्रिय श्रमिकों के बच्चों के लिए शैक्षणिक सहायता योजना से संबंधित फैसले जारी किए गए।

    यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कैग की रिपोर्ट में 60 वर्ष से अधिक उम्र के लाभार्थियों के लिए पेंशन और समूह बीमा जैसी योजनाएं तैयार नहीं किए जाने की बात सामने आई थी। अब महाराष्ट्र में पेंशन और बीमा से संबंधित नई व्यवस्था के फैसले सामने आ चुके हैं।

    अब असली सवाल पंजीकरण और लाभ पहुंचने का है

    निर्माण श्रमिकों के लिए सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में पंजीकरण सबसे महत्वपूर्ण चरणों में से एक है। कैग की रिपोर्ट में दर्ज व्यवस्था के अनुसार 18 से 60 वर्ष की आयु का ऐसा निर्माण श्रमिक, जिसने पिछले 12 महीनों में कम से कम 90 दिन निर्माण कार्य किया हो, पात्रता की शर्तें पूरी करने पर बीओसीडब्ल्यू लाभार्थी के रूप में पंजीकरण करा सकता था।

    महाराष्ट्र बोर्ड ने ऑनलाइन व्यवस्था के जरिए पंजीकरण, नवीनीकरण और विभिन्न योजनाओं के लिए दावे जमा करने की सुविधा भी विकसित की थी। इसके बावजूद ऑडिट अवधि में पंजीकरण और नवीनीकरण में देरी जैसी समस्याएं सामने आईं।

    यही वजह है कि मुंबई सम्मेलन में डिजिटल व्यवस्था की प्रगति की समीक्षा केवल तकनीकी मुद्दा नहीं होगी। अगर डिजिटल माध्यम से पंजीकरण, रोजगार के अवसर और कल्याणकारी योजनाओं तक पहुंच आसान होती है, तो इसका सीधा असर उन श्रमिकों पर पड़ सकता है जो अब तक व्यवस्था से बाहर रहे हैं।

    डिजिटल लेबर चौक से क्या बदलेगा?

    केंद्र सरकार ने डिजिटल लेबर चौक की अवधारणा के जरिए निर्माण श्रमिकों को रोजगार के अवसरों से जोड़ने और कल्याणकारी सेवाओं तक पहुंच आसान बनाने की दिशा में पहल की है। लेबर चौक-सह-सुविधा केंद्रों का उद्देश्य श्रमिकों के लिए अधिक व्यवस्थित और सम्मानजनक सेवा उपलब्ध कराना है।

    वहीं ऑनलाइन बीओसीडब्ल्यू उपकर संग्रह पोर्टल का उद्देश्य उपकर के संग्रह और उसकी निगरानी को अधिक पारदर्शी तथा प्रभावी बनाना है। सम्मेलन में इन तीनों पहलों की प्रगति की समीक्षा होने वाली है।

    उपकर से जुटने वाली राशि और श्रमिकों का सवाल

    बीओसीडब्ल्यू व्यवस्था में निर्माण कार्यों से मिलने वाला उपकर कल्याणकारी योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय आधार है। इसलिए सम्मेलन में उपकर संग्रह की निगरानी और उसके उपयोग पर चर्चा का सीधा संबंध श्रमिकों को मिलने वाले लाभ से है।

    महाराष्ट्र में पहले भी बड़ा उपकर संग्रह और उपलब्ध निधि होने के बावजूद कैग ने उस अवधि में योजनाओं पर कम उपयोग और लाभ पहुंचाने में कमियों की ओर ध्यान दिलाया था। अब नई डिजिटल व्यवस्था के सामने सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि क्या पैसा जमा होने से लेकर पात्र श्रमिक तक लाभ पहुंचने की पूरी प्रक्रिया समयबद्ध और पारदर्शी बन पाती है?

    कौशल और रोजगार पर भी रहेगा जोर

    दो दिवसीय सम्मेलन में केवल कल्याणकारी योजनाओं पर चर्चा नहीं होगी। कौशल विकास, रोजगार के अवसर, श्रमिकों से संबंधित आंकड़े और अंतरराष्ट्रीय श्रम गतिशीलता के रास्तों पर भी विचार किया जाएगा।

    इसका महत्व इसलिए है क्योंकि निर्माण क्षेत्र बड़ी संख्या में श्रमिकों को रोजगार देता है और इस क्षेत्र में कौशल के आधार पर बेहतर रोजगार उपलब्ध कराने की संभावना भी है। अगर राज्यों की डिजिटल और कौशल आधारित व्यवस्थाओं को एक-दूसरे से जोड़ा जाता है, तो श्रमिकों के लिए रोजगार खोजने और सही अवसर तक पहुंचने की प्रक्रिया आसान हो सकती है।

    अब नजर 11-12 सितंबर के फैसलों पर

    मुंबई में होने वाली राष्ट्रीय परिषद के सामने सबसे महत्वपूर्ण चुनौती यह होगी कि अलग-अलग राज्यों में चल रही अच्छी व्यवस्थाओं को किस तरह बड़े स्तर पर लागू किया जाए और पुरानी कमियों को कैसे दूर किया जाए।

    महाराष्ट्र के मामले में खास तौर पर तीन सवाल महत्वपूर्ण रहेंगे—पात्र निर्माण श्रमिकों का पंजीकरण कितना बढ़ा, कल्याण निधि का उपयोग कितना प्रभावी हुआ और नई सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक कितनी तेजी से पहुंच रहा है।

    सम्मेलन में इन मुद्दों पर होने वाली चर्चा से यह स्पष्ट हो सकता है कि बीओसीडब्ल्यू व्यवस्था अब केवल निधि और योजनाओं के संचालन तक सीमित रहती है या फिर रोजगार, सामाजिक सुरक्षा, डिजिटल सेवाओं और श्रमिकों के अधिकारों को एक साथ जोड़ने वाली नई व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ती है।

  • Mumbai C&D Waste: BMC ने 23 सितंबर तक MDCTS Registration किया अनिवार्य

    Mumbai C&D Waste: BMC ने 23 सितंबर तक MDCTS Registration किया अनिवार्य

    Mumbai में C&D Waste पर BMC सख्त, MDCTS registration की deadline 23 सितंबर 2026। बिना VTMS वाले वाहनों पर ₹25,000 जुर्माने की कार्रवाई होगी।

    मुंबई: शहर में निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाले मलबे (C&D Waste) पर BMC ने अब डिजिटल निगरानी सख्त कर दी है।** 9 सितंबर 2026 की सार्वजनिक सूचना के मुताबिक C&D Waste से जुड़े projects, waste generators, transporters और processing/recycling से जुड़े stakeholders को Mumbai Debris Control & Tracking System (MDCTS) पर registration करना होगा। इसकी deadline 23 सितंबर 2026 है।

    इसके साथ C&D Waste ले जाने वाले वाहनों में BMC द्वारा अधिकृत Vehicle Tracking and Monitoring System (VTMS) लगाना अनिवार्य किया गया है। बिना registration या authorised और functioning VTMS के transport करने वाले वाहन पर प्रति वाहन, प्रति उल्लंघन ₹25,000 का दंड लगाया जा सकता है।

    किन लोगों को MDCTS Registration करना होगा?

    यह नियम सिर्फ बड़े builders तक सीमित नहीं है। C&D Waste पैदा करने वाले projects, developers, contractors, सरकारी व अन्य agencies, transporters तथा processing, recycling, unloading और authorised backfilling से जुड़े stakeholders इसके दायरे में हैं।

    संबंधित पक्षों को निर्धारित format में C&D Waste Management Plan भी देना होगा। Excavation से निकलने वाली मिट्टी या अन्य सामग्री को C&D Waste से अलग रखना और अलग transport करना जरूरी होगा।

    VTMS से मलबे वाले वाहनों पर कैसे नजर रखी जाएगी?

    VTMS के जरिए वाहन की movement को source से authorised destination तक track करने की व्यवस्था होगी। इससे route और disposal location की निगरानी के साथ unauthorised dumping की पहचान आसान हो सकती है।

    BMC ने यह भी अनिवार्य किया है कि transport के दौरान वाहनों को ठीक से cover रखा जाए, ताकि मलबा सड़क पर न गिरे और धूल से प्रदूषण न फैले।

    घर में Renovation कराने वालों पर क्या असर होगा?

    घर, दुकान या अन्य property में repair, renovation या demolition से निकलने वाला मलबा भी C&D Waste management व्यवस्था के दायरे में आ सकता है।

    इसलिए renovation कराने वालों को मलबा सड़क, खाली प्लॉट या किसी अनधिकृत जगह पर नहीं डलवाना चाहिए। इसे authorised collection, transportation और disposal/processing व्यवस्था के जरिए भेजना होगा।

    छोटे स्तर के debris के लिए BMC की मौजूदा व्यवस्था में authorised collection सुविधा का प्रावधान है। लागू मात्रा और प्रक्रिया के लिए MDCTS/BMC की वर्तमान guidelines देखना जरूरी होगा।

    नियम तोड़ने पर ₹25,000 के अलावा क्या होगा?

    MDCTS registration या authorised VTMS के बिना C&D Waste transport करने वाले वाहन पर ₹25,000 प्रति vehicle, प्रति violation का दंड लगाया जा सकता है।

    Unauthorised dumping, बिना अनुमति transportation या disposal तथा अन्य नियमों के उल्लंघन पर काम रोकने, permissions cancel करने, bank guarantee जब्त करने और अन्य कानूनी कार्रवाई का भी प्रावधान है।

    BMC ने पहले ही कितनी कार्रवाई की?

    C&D Waste dumping पर BMC की कार्रवाई पहले से जारी है। 1 अप्रैल से 31 अगस्त 2026 के बीच 419 C&D Waste-related violations में ₹31.64 लाख का जुर्माना लगाया गया। इनमें 349 unauthorised dumping और 70 approved plan के बिना transportation के मामले थे।

    अगस्त में ही 65 C&D Waste violations पर ₹8.54 लाख की कार्रवाई हुई।

    मुंबई में रोज 8,000 टन मलबा, Processing Capacity कितनी?

    MDCTS की जरूरत के पीछे मुंबई में पैदा होने वाला भारी C&D Waste भी बड़ी वजह है।

    उपलब्ध जानकारी के अनुसार मुंबई में रोज करीब 8,000 टन C&D Waste निकलता है, जबकि Dahisar और Diaghar की मौजूदा processing facilities की combined capacity करीब 1,200 टन प्रतिदिन है। इससे waste generation और processing capacity के बीच बड़ा gap सामने आता है।

    यह gap illegal dumping, road dust, drainage blockage और खुले स्थानों पर debris जमा होने जैसी समस्याओं को बढ़ा सकता है।

    BMC 2,000 TPD नई Processing Capacity जोड़ने की तैयारी में

    BMC City, Eastern Suburbs और Western Suburbs में integrated C&D Waste processing facilities विकसित करने की प्रक्रिया पर काम कर रही है। इसके जरिए कुल 2,000 TPD तक additional processing capacity विकसित करने का प्रस्ताव है।

    BMC tender records के अनुसार संबंधित प्रक्रिया में bid submission की deadline 10 सितंबर 2026 और bid opening 11 सितंबर 2026 निर्धारित थी।

    इससे स्पष्ट है कि महानगरपालिका illegal dumping पर enforcement के साथ processing infrastructure बढ़ाने पर भी काम कर रही है।

    MDCTS से क्या बदलेगा?

    MDCTS और VTMS का उद्देश्य C&D Waste की movement को अधिक traceable बनाना है। यानी waste generator से transporter और फिर authorised processing/disposal location तक की chain पर digital monitoring बढ़ेगी।

    इससे unauthorised dumping करने वाले वाहनों की पहचान और transporter तथा waste generator की accountability मजबूत हो सकती है। हालांकि इसकी सफलता authorised processing capacity, collection network और field-level enforcement पर भी निर्भर करेगी।

    23 सितंबर से पहले क्या करना जरूरी है?

    C&D Waste से जुड़े stakeholders को deadline से पहले:

    • MDCTS registration पूरा करना होगा।
    • जरूरी C&D Waste Management Plan जमा करना होगा।
    • authorised transporter का इस्तेमाल करना होगा।
    • वाहनों में authorised, functioning VTMS रखना होगा।
    • excavation material को C&D Waste से अलग रखना होगा।
    • मलबा केवल authorised destination पर भेजना होगा।
    • transport के दौरान vehicle को ठीक से cover रखना होगा।

    BMC ने MDCTS portal पर जारी होने वाली आगे की instructions पर नजर रखने की सलाह दी है।

    23 सितंबर 2026 के बाद compliance को लेकर BMC की enforcement और सख्त हो सकती है। मुंबई में C&D Waste की बड़ी मात्रा को देखते हुए अब चुनौती सिर्फ illegal dumping रोकने की नहीं, बल्कि waste की पूरी chain—generation, collection, transportation, tracking और processing—को प्रभावी बनाने की है।

  • संजय दत्त को मराठी सीखने का न्योता, अभिजीत राणे बोले- हमारी कक्षा में आइए

    संजय दत्त को मराठी सीखने का न्योता, अभिजीत राणे बोले- हमारी कक्षा में आइए

    संजय दत्त के मराठी बयान पर विवाद के बीच अभिजीत राणे ने उन्हें मराठी प्रशिक्षण कक्षा में आने का न्योता दिया। जानिए पूरा मामला और सरकार का नियम।

    मुंबई: संजय दत्त के मराठी भाषा को लेकर दिए गए बयान पर चर्चा के बीच भाजपा कामगार आघाड़ी के अध्यक्ष अभिजीत राणे ने अभिनेता को मराठी सीखने के लिए अपनी प्रशिक्षण कक्षा में आने का न्योता दिया है। यह निमंत्रण गोरेगांव पश्चिम के बांगुर नगर स्थित अय्यप्पा मंदिर परिसर में आयोजित मराठी प्रशिक्षण कक्षा के प्रमाणपत्र वितरण समारोह में दिया गया।

    महाराष्ट्र शासन के परिवहन विभाग, राज्य मराठी विकास संस्था, कोकण मराठी साहित्य परिषद तथा धड़क कामगार यूनियन महासंघ की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में गैर-मराठी भाषी रिक्शा चालकों को प्रशिक्षण दिया गया। आयोजकों के अनुसार, करीब 5,000 चालकों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए।

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    कार्यक्रम की तस्वीर

    दहीहंडी में संजय दत्त ने क्या कहा था?

    हाल ही में दहीहंडी कार्यक्रम में परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक की मौजूदगी में संजय दत्त से मराठी में बोलने का आग्रह किया गया था। इसके जवाब में अभिनेता ने मजाकिया अंदाज में कहा था कि वह छह साल येरवडा जेल में रहे, लेकिन फिर भी मराठी नहीं सीख पाए। उनका यह वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर तेजी से प्रसारित हुआ।

    इसी घटनाक्रम के बाद राणे ने संजय दत्त को अपनी मराठी प्रशिक्षण कक्षा में प्रवेश लेने का निमंत्रण दिया है।

    मंत्री ने वायरल वीडियो पर क्या सफाई दी?

    विवाद बढ़ने के बाद परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा कि संजय दत्त ने कार्यक्रम में मराठी बोली थी और प्रसारित किया जा रहा वीडियो काटकर संदर्भ से अलग पेश किया गया है।

    इस बीच संजय दत्त का एक पुराना वीडियो भी सामने आया, जिसमें वह मराठी में बातचीत करते दिखाई दे रहे हैं। इससे अभिनेता के मराठी ज्ञान को लेकर चर्चा और तेज हुई। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है कि उन्होंने जानबूझकर मराठी बोलने से इनकार किया था।

    महाराष्ट्र में चालकों को मराठी क्यों सिखाई जा रही है?

    राणे का निमंत्रण महाराष्ट्र में चल रहे मराठी प्रशिक्षण अभियान से जुड़ा है। सरकार की पहल के तहत रिक्शा, टैक्सी और अन्य व्यावसायिक यात्री वाहन चालकों को रोजमर्रा के कामकाज में इस्तेमाल होने वाली मराठी सिखाई जा रही है।

    प्रशिक्षण में साहित्यिक या कठिन भाषा के बजाय यात्रियों से बातचीत, गंतव्य पूछने, किराया बताने, मीटर और यात्रा से जुड़ी सामान्य बातचीत जैसे व्यावहारिक विषयों पर जोर दिया जा रहा है।

    अगस्त के अंत तक सामने आए आंकड़ों के अनुसार, राज्य में करीब 1.65 लाख व्यावसायिक वाहन चालकों को इस तरह का प्रशिक्षण दिया जा चुका था।

    क्या मराठी सीखना चालकों के लिए जरूरी है?

    महाराष्ट्र में रिक्शा, टैक्सी और अन्य व्यावसायिक यात्री वाहन चालकों के लिए मराठी के व्यावहारिक ज्ञान से जुड़े नियम लागू किए गए हैं। अगस्त 2026 में नियमों में बदलाव के बाद इसका दायरा ऐप आधारित कैब चालकों और संबंधित परमिट धारकों तक भी बढ़ाया गया।

    हालांकि, नियमों के पालन के लिए चालकों को अतिरिक्त समय दिया गया है। ऐप आधारित कैब चालकों की ओर से नियम को अदालत में चुनौती दिए जाने के बाद राज्य सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट को बताया था कि उन्हें मराठी सीखने के लिए एक साल का अतिरिक्त समय दिया जाएगा।

    इससे साफ है कि प्रशिक्षण की नीति खत्म नहीं हुई है, बल्कि नियमों का पालन करने के लिए चालकों को समय दिया गया है।

    कार्यक्रम में कौन-कौन मौजूद रहा?

    प्रमाणपत्र वितरण समारोह में भाजपा मुंबई के महासचिव आचार्य पवन त्रिपाठी, भाजपा मुंबई के महासचिव विनोद शेलार, सूचना के अधिकार कार्यकर्ता अनिल गलगली तथा धड़क कामगार यूनियन और भाजपा कामगार आघाड़ी के पदाधिकारी मौजूद रहे।

    संजय दत्त को मराठी कक्षा में शामिल होने का अभिजीत राणे का निमंत्रण अब इस पूरे घटनाक्रम में नया मोड़ है। अभिनेता की ओर से इस निमंत्रण पर कोई प्रतिक्रिया सामने आती है या वह प्रशिक्षण कक्षा में शामिल होते हैं, इस पर आगे नजर रहेगी।