मुंबई महानगरपालिका ने 1,700 से अधिक स्वास्थ्यकर्मियों की मांगों पर कदम उठाए। महिला कर्मचारियों की 180 दिन की प्रसूति छुट्टी मंजूर, वेतन में देरी पर ठेकेदार पर कार्रवाई।
मुंबई: मुंबई में राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य अभियान के तहत काम करने वाले 1,700 से अधिक बाहरी एजेंसी के स्वास्थ्यकर्मियों की मांगों पर महानगरपालिका ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। महिला कर्मचारियों को 180 दिन की सवेतन प्रसूति छुट्टी देने के प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। वहीं, वेतन में देरी के मामले में संबंधित ठेकेदार डी. एस. एंटरप्राइजेज पर दंडात्मक कार्रवाई की गई है। कर्मचारियों की शिकायतों के निवारण के लिए समिति गठित करने और संशोधित न्यूनतम वेतन लागू करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।
मुंबई की महापौर रितू तावड़े ने अपने निवास पर आंदोलनकारी कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर प्रशासन की ओर से उठाए गए कदमों की जानकारी दी। कर्मचारियों की इन मांगों को लेकर पिछले कई दिनों से आजाद मैदान में आंदोलन जारी है।
महिला कर्मचारियों को 180 दिन की सवेतन प्रसूति छुट्टी
बाहरी एजेंसी के माध्यम से नियुक्त महिला स्वास्थ्यकर्मियों को प्रसूति के दौरान आर्थिक राहत देने के लिए 180 दिन की सवेतन छुट्टी के प्रस्ताव को महानगरपालिका आयुक्त की मंजूरी मिल गई है। इसे लागू करने के लिए संबंधित एजेंसी को आधिकारिक परिपत्र जारी करने की प्रशासनिक प्रक्रिया चल रही है।

इस फैसले से महिला कर्मचारियों को मातृत्व के दौरान छुट्टी के साथ वेतन मिलने का लाभ मिल सकेगा। हालांकि, इसे लागू करने के लिए परिपत्र जारी होना अभी बाकी है।
न्यूनतम वेतन पर भी चल रही प्रक्रिया
स्वास्थ्यकर्मियों की दूसरी प्रमुख मांग संशोधित न्यूनतम वेतन लागू करने की है। इस संबंध में प्रस्ताव प्रमुख श्रम अधिकारी की राय के साथ वित्त विभाग को भेजा जा रहा है। वित्त विभाग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इस पर आगे का निर्णय लिया जाएगा।
फिलहाल संशोधित न्यूनतम वेतन लागू करने की अंतिम तारीख घोषित नहीं की गई है। ऐसे में कर्मचारियों की नजर इस मांग पर होने वाली अगली कार्रवाई पर रहेगी।
वेतन में देरी पर डी. एस. एंटरप्राइजेज के खिलाफ कार्रवाई
कर्मचारियों के वेतन में देरी के मामले में संबंधित ठेकेदार संस्था डी. एस. एंटरप्राइजेज के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की गई है। महानगरपालिका प्रशासन ने एजेंसी को वेतन भुगतान में अनियमितता नहीं होने देने के लिए कड़े निर्देश भी दिए हैं।
आगे कर्मचारियों की वेतन संबंधी समस्याओं और अन्य शिकायतों के समाधान के लिए उप आयुक्त (सार्वजनिक स्वास्थ्य) की अध्यक्षता में समिति गठित की जाएगी। इसके माध्यम से शिकायतों पर नजर रखी जाएगी और जरूरत पड़ने पर संबंधित ठेकेदार के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
5 अक्टूबर को आंदोलन स्थल पर पहुंची थीं महापौर
स्वास्थ्यकर्मी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर मुंबई के आजाद मैदान में कई दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। महापौर रितू तावड़े ने 5 अक्टूबर 2026 को आंदोलन स्थल पर पहुंचकर कर्मचारियों से सीधे बातचीत की थी और उनकी समस्याएं सुनी थीं।
इसके बाद उन्होंने प्रशासन को पत्र लिखकर मांगों पर ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए। कोविड-19 महामारी के दौरान मुंबईकरों की स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान देने वाले इन कर्मचारियों की समस्याओं का जल्द समाधान करने पर जोर दिया गया। इसके बाद सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने महापौर को विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट सौंपी। कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई बैठक में महापौर ने प्रशासन के फैसलों और आगे की प्रक्रिया की जानकारी दी।
बाकी मांगों पर भी फैसले का इंतजार
महापौर रितू तावड़े ने कर्मचारियों से बातचीत के दौरान कहा कि कोविड काल में मुंबईकरों के स्वास्थ्य की देखभाल करने वाले बाहरी एजेंसी के स्वास्थ्यकर्मियों के साथ महानगरपालिका मजबूती से खड़ी है। उन्होंने 180 दिन की सवेतन प्रसूति छुट्टी को महिला कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत बताया और कहा कि बाकी मांगों पर भी प्रशासन तथा सरकार सकारात्मक हैं।
अब कर्मचारियों की नजर प्रसूति छुट्टी का परिपत्र जारी होने, संशोधित न्यूनतम वेतन पर अंतिम निर्णय और शिकायत निवारण समिति के गठन पर रहेगी। इन कदमों के लागू होने से ही कर्मचारियों को मिलने वाली राहत की पूरी तस्वीर साफ होगी।
