मुंबई के फोर्ट और क्रॉस मैदान में 8-9 अक्टूबर को सायरन का परीक्षण होगा। बीएमसी ने कहा, यह नियमित जांच है, किसी खतरे का संकेत नहीं।
मुंबई: दक्षिण मुंबई के फोर्ट और क्रॉस मैदान इलाके में 8 और 9 अक्टूबर को सायरन की आवाज सुनाई दे सकती है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका की ओर से इन दोनों दिनों में नए प्रोटोटाइप सायरन उपकरणों का परीक्षण किया जाएगा। प्रशासन ने साफ किया है कि यह पहले से तय परीक्षण है और इसका किसी वास्तविक आपात स्थिति या खतरे से कोई संबंध नहीं है।
यह परीक्षण फोर्ट स्थित पुराने सचिवालय की जुड़ी इमारत और क्रॉस मैदान स्थित नागरी सुरक्षा महाविद्यालय की इमारत पर लगाए गए सायरन उपकरणों का किया जाएगा। ऐसे में इन इलाकों के आसपास रहने वाले लोगों, दुकानदारों, कार्यालय कर्मचारियों और आने-जाने वाले लोगों को सायरन की आवाज सुनाई दे सकती है।
सायरन सुनाई दे तो घबराने की जरूरत नहीं
बीएमसी ने नागरिकों से अपील की है कि 8 और 9 अक्टूबर को सायरन की आवाज सुनकर किसी तरह की घबराहट न फैलाएं। इसे किसी हमले, आपदा या तत्काल खतरे की चेतावनी न समझें।
प्रशासन ने यह भी कहा है कि नागरिक किसी अनधिकृत जानकारी या अफवाह पर भरोसा न करें और परीक्षण के दौरान प्रशासन का सहयोग करें।
आधिकारिक जानकारी में सायरन परीक्षण का सटीक समय, कितनी बार सायरन बजाया जाएगा और प्रत्येक परीक्षण कितनी देर चलेगा, इसकी जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए इनको लेकर किसी तरह का अनुमान लगाना सही नहीं होगा।
सी-डॉट ने तैयार किया है प्रोटोटाइप
इन प्रोटोटाइप सायरन उपकरणों को नागरी सुरक्षा महानिदेशक, नई दिल्ली के मार्गदर्शन में सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स की टीम ने तैयार किया है।
सी-डॉट की सार्वजनिक चेतावनी प्रणाली की तकनीकी व्यवस्था में केंद्रीय नियंत्रण के जरिए अलग-अलग स्थानों पर लगाए गए सायरन को सक्रिय करने की क्षमता का प्रावधान है। ऐसी व्यवस्था में सायरन के अलावा रिकॉर्ड किए गए संदेश और सार्वजनिक उद्घोषणा के जरिए चेतावनी पहुंचाने जैसी सुविधाओं का भी प्रावधान बताया गया है।
हालांकि, फोर्ट और क्रॉस मैदान में लगाए गए इन प्रोटोटाइप उपकरणों की वास्तविक आवाज की सीमा या भविष्य में मुंबई में इनके इस्तेमाल का विस्तृत खाका बीएमसी ने अभी सार्वजनिक नहीं किया है।
मुंबई में सायरन व्यवस्था को मजबूत करने पर पहले से काम
मुंबई में नागरिक सुरक्षा सायरन व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत पहले भी सामने आ चुकी है। पुराने सायरन तंत्र में कई उपकरणों के खराब होने और तकनीकी समस्याओं की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद नए सायरनों की स्थापना और पुरानी व्यवस्था को मजबूत करने की प्रक्रिया पर काम किया गया।
2025 में मुंबई के लिए नए सायरनों की व्यवस्था की गई थी। इसके बाद 2026 में बीएमसी ने नागरिक सुरक्षा विभाग की ओर से उपलब्ध कराए गए सायरनों की अलग-अलग जगहों पर स्थापना और संचालन से जुड़े काम के लिए निविदाएं भी जारी की थीं।
इससे साफ है कि मुंबई में नागरिक सुरक्षा चेतावनी व्यवस्था को मजबूत करने की प्रक्रिया पहले से चल रही है। हालांकि, 8 और 9 अक्टूबर को फोर्ट तथा क्रॉस मैदान में जिन सी-डॉट प्रोटोटाइप सायरनों का परीक्षण किया जा रहा है, उन्हें पहले उपलब्ध कराए गए सायरनों की उसी खेप का हिस्सा बताने की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
क्रॉस मैदान का नागरिक सुरक्षा से पुराना संबंध
क्रॉस मैदान में इससे पहले भी नागरिक सुरक्षा और आपात स्थिति से जुड़े अभ्यास हो चुके हैं। मई 2025 में मुंबई में बड़े स्तर पर आपात तैयारी अभ्यास के दौरान भी यहां सायरन और बचाव व्यवस्था से संबंधित गतिविधियां हुई थीं। उस अभ्यास में पुलिस, दमकल, नागरिक सुरक्षा, आपदा प्रतिक्रिया और अन्य संबंधित विभागों ने हिस्सा लिया था।
इस पृष्ठभूमि में क्रॉस मैदान में नए प्रोटोटाइप सायरन का परीक्षण मुंबई की नागरिक सुरक्षा व्यवस्था के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। हालांकि, मौजूदा परीक्षण को 2025 के अभ्यास की अगली कड़ी के रूप में आधिकारिक तौर पर घोषित नहीं किया गया है।
क्या पूरे मुंबई में बजेगा सायरन?
फिलहाल ऐसी कोई जानकारी नहीं है। बीएमसी की मौजूदा सूचना में परीक्षण के लिए फोर्ट स्थित पुराने सचिवालय की जुड़ी इमारत और क्रॉस मैदान स्थित नागरी सुरक्षा महाविद्यालय की इमारतों का ही उल्लेख है।
इन दोनों स्थानों पर लगाए गए उपकरणों के परीक्षण के दौरान आसपास के इलाकों में इसकी आवाज सुनाई देने की संभावना है।
आगे क्या होगा?
8 और 9 अक्टूबर का परीक्षण इन प्रोटोटाइप सायरन उपकरणों की कार्यप्रणाली जांचने के लिहाज से महत्वपूर्ण है। फिलहाल बीएमसी ने इनके परीक्षण के बाद की विस्तृत योजना, पूरे मुंबई में संभावित विस्तार, सायरन की अंतिम संख्या या इनके स्थायी इस्तेमाल को लेकर कोई विस्तृत जानकारी जारी नहीं की है।
फिलहाल नागरिकों के लिए स्पष्ट संदेश यही है कि 8 और 9 अक्टूबर को सायरन सुनाई देने पर घबराने की जरूरत नहीं है। यह पहले से निर्धारित परीक्षण है, किसी वास्तविक आपात स्थिति की सूचना नहीं।
