मुंबई में गणेशोत्सव की परंपराओं को डिजिटल रूप से सहेजने के लिए BMC का Bappa.org अभियान, जानें फोटो-कहानी कैसे भेजें और क्या मिलेगा।
मुंबई: गणेशोत्सव के दौरान मुंबई के घरों और सार्वजनिक मंडलों में निभाई जाने वाली परंपराओं, यादों और सांस्कृतिक गतिविधियों को अब डिजिटल रूप से सुरक्षित करने की पहल तेज हो गई है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने मुंबईकरों से Bappa.org पर अपने गणेशोत्सव की कहानी, तस्वीरें, वीडियो, पारंपरिक प्रथाएं और सामाजिक व पर्यावरणीय गतिविधियों की जानकारी दर्ज करने की अपील की है। खास बात यह है कि इस डिजिटल संग्रह में सिर्फ बड़े गणेश मंडल ही नहीं, बल्कि घरों में स्थापित होने वाले गणपति भी शामिल किए जा रहे हैं।
Bappa.org क्या है?
Bappa.org को महाराष्ट्र के गणेशोत्सव का डिजिटल राज्य संग्रह बताया गया है। इसका उद्देश्य महाराष्ट्र में पीढ़ियों से चली आ रही गणेशोत्सव की परंपराओं, परिवारों की यादों, सार्वजनिक मंडलों की गतिविधियों और मूर्ति व सजावट से जुड़ी कला को डिजिटल रिकॉर्ड के रूप में सुरक्षित करना है। पोर्टल के अनुसार यह महाराष्ट्र शासन के सांस्कृतिक कार्य विभाग का उपक्रम है।
Bappa.org पर गणेशोत्सव से जुड़ी कई तरह की जानकारी साझा की जा सकती है। इसमें घर या मंडल की गणेश प्रतिमा की तस्वीर, सजावट, पारंपरिक आरती, परिवार की वर्षों पुरानी परंपरा, गणेशोत्सव से जुड़ी व्यक्तिगत यादें, सामाजिक कार्य, पर्यावरण संरक्षण के प्रयास और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियां शामिल हैं।
इसका मतलब है कि किसी परिवार के घर में हर साल एक ही तरीके से होने वाला गणेशोत्सव भी इस डिजिटल संग्रह का हिस्सा बन सकता है। इसी तरह सार्वजनिक गणेश मंडल, गृहनिर्माण संस्था और गणेश प्रतिमा से जुड़ा काम करने वाले कारीगर भी अपनी कहानी साझा कर सकते हैं।
मुंबई के घरों की परंपराएं भी बनेंगी डिजिटल रिकॉर्ड
मुंबई में गणेशोत्सव का बड़ा हिस्सा केवल प्रसिद्ध सार्वजनिक मंडलों तक सीमित नहीं है। 15 सितंबर को डेढ़ दिन के गणपति विसर्जन के दौरान मुंबई में 24,631 गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन हुआ था, जिनमें 24,521 घरेलू और 110 सार्वजनिक मंडलों की प्रतिमाएं शामिल थीं। ऐसे में घर-घर मनाए जाने वाले गणेशोत्सव की परंपराओं को दर्ज करने का यह प्रयास शहर की व्यापक सांस्कृतिक तस्वीर को सामने ला सकता है।
Bappa.org के मौजूदा संग्रह में मुंबई सिटी से Parel cha Raja, Saibaba Nagar Colony और Girgaon cha Raja जैसी प्रविष्टियां दिखाई दे रही हैं। इसका मतलब है कि मुंबई से नागरिकों और मंडलों की भागीदारी शुरू हो चुकी है।
Bappa.org पर कहानी कैसे दर्ज करें?
पोर्टल के अनुसार इसके लिए किसी विशेष ऐप को डाउनलोड करने या अलग अकाउंट बनाने की जरूरत नहीं है। एक फोटो और अपनी गणेशोत्सव परंपरा के बारे में कुछ पंक्तियों से शुरुआत की जा सकती है। जानकारी भेजने के बाद टीम उसकी जांच करती है और स्वीकार की गई कहानी को डिजिटल संग्रह में दर्ज किया जाता है।
इसके अलावा ‘घरोघरी बाप्पा’ अभियान के तहत WhatsApp के जरिए भी गणेशोत्सव की कहानी भेजने की सुविधा दी गई है। इसके लिए +91 91361 72681 नंबर जारी किया गया है। इस अभियान में भाग लेना नि:शुल्क बताया गया है।
कहानी भेजने के बाद क्या होगा?
Bappa.org पर स्वीकार की गई प्रविष्टियों को एक अलग रिकॉर्ड नंबर दिया जाता है। उदाहरण के तौर पर 2026-00290 और 2026-00297 जैसी प्रविष्टियां संग्रह में दर्ज हैं। इन रिकॉर्ड में जमा करने और स्वीकार किए जाने की तारीख के साथ डिजिटल evidence भी दिखाई देता है।
पोर्टल की जानकारी के अनुसार प्रत्येक योगदान को सत्यापन के बाद महाराष्ट्र के राज्य सांस्कृतिक संग्रह का हिस्सा बनाया जाता है। सफलतापूर्वक कहानी दर्ज कराने वाले परिवारों को सांस्कृतिक कार्य विभाग की ओर से आधिकारिक प्रमाणपत्र दिए जाने की जानकारी भी दी गई है।
सिर्फ मुंबई नहीं, महाराष्ट्र और विदेशों की कहानियां भी
Bappa.org पर फिलहाल महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों के साथ दूसरे स्थानों से भी गणेशोत्सव की कहानियां दिखाई दे रही हैं। पोर्टल पर मुंबई, सातारा, रायगढ़, पुणे और अन्य क्षेत्रों की प्रविष्टियों के साथ महाराष्ट्र के बाहर से भी योगदान दर्ज हैं।
हाल की चयनित कहानियों में नए घर में पहला गणेशोत्सव, पारंपरिक गौरी-गणपति उत्सव, घर पर बनाई गई मिट्टी की गणेश प्रतिमा, वियतनाम में भारतीय विद्यार्थियों का गणेशोत्सव और विसर्जन के बाद बची मिट्टी के इस्तेमाल से जुड़ी पर्यावरणीय पहल जैसी अलग-अलग कहानियां शामिल रही हैं।
इससे साफ है कि इस डिजिटल संग्रह का दायरा केवल गणेश प्रतिमा या पंडाल की तस्वीर तक सीमित नहीं है। परिवार, परंपरा, कला, पर्यावरण और विदेशों में रहने वाले भारतीयों का गणेशोत्सव भी इसका हिस्सा बन सकता है।
महाराष्ट्र सरकार ने अगस्त 2025 में गणेशोत्सव को राज्य महोत्सव के रूप में मनाने को मंजूरी दी थी। इसके बाद गणेशोत्सव से जुड़ी कला, परंपरा, संस्कृति और सामाजिक गतिविधियों को व्यापक स्तर पर सामने लाने के प्रयास बढ़े हैं।
इसी व्यापक संदर्भ में Bappa.org पर गणेशोत्सव की परंपराओं का डिजिटल दस्तावेजीकरण किया जा रहा है। गणेशोत्सव की सांस्कृतिक परंपराओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने और UNESCO की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत से जुड़े प्रयासों के संदर्भ में भी इस दस्तावेजीकरण को जोड़ा जा रहा है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि गणेशोत्सव को UNESCO की मान्यता मिल चुकी है।
मुंबई में हर साल लाखों लोग घरों और सार्वजनिक मंडलों के जरिए गणेशोत्सव मनाते हैं। अलग-अलग इलाकों, परिवारों और समुदायों की अपनी अलग परंपराएं हैं। कई परंपराएं केवल परिवार के बुजुर्गों की यादों तक सीमित रह जाती हैं और उनका कोई डिजिटल रिकॉर्ड नहीं होता।
Bappa.org इसी अंतर को भरने की कोशिश करता है। किसी परिवार की कई दशक पुरानी पूजा पद्धति हो, किसी मंडल का सामाजिक काम हो, पर्यावरण-अनुकूल मूर्ति हो या किसी इलाके की अलग गणेशोत्सव परंपरा—इन अनुभवों को तस्वीर और कहानी के साथ दर्ज किया जा सकता है।
मुंबईकरों के लिए आसान भाषा में कहें तो Bappa.org पर सिर्फ यह बताना जरूरी नहीं है कि आपके घर में गणपति की मूर्ति कैसी है। यह भी बताया जा सकता है कि आपके परिवार में बाप्पा की परंपरा कब से है, सजावट कैसे होती है, कौन-सी आरती या प्रथा निभाई जाती है और गणेशोत्सव के दौरान परिवार या मंडल क्या खास करता है।
यानी इस साल का गणेशोत्सव खत्म होने के बाद भी उसकी कहानी डिजिटल संग्रह में दर्ज रह सकती है। मुंबईकर अपने घर या मंडल की परंपरा को Bappa.org के माध्यम से इस राज्यव्यापी सांस्कृतिक रिकॉर्ड का हिस्सा बना सकते हैं।
मुंबई में 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर तक BMC की विशेष कार्रवाई, 14 फीट या उससे ऊंची 39,111 झोपड़ियां जांच के दायरे में, जानिए किस पर होगा असर।
मुंबई: मुंबई के झोपड़पट्टी क्षेत्रों में बने अनधिकृत निर्माणों के खिलाफ बृहन्मुंबई महानगरपालिका 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक विशेष अभियान चलाएगी। इस अभियान के तहत 14 फीट और उससे अधिक ऊंचाई वाली झोपड़ियों तथा उनसे जुड़े अनधिकृत निर्माणों पर कार्रवाई की जाएगी। BMC के आंकड़ों के अनुसार मुंबई में कुल 2 लाख 23 हजार 150 झोपड़ियां हैं, जिनमें 39 हजार 111 संरचनाएं 14 फीट या उससे अधिक ऊंचाई की पाई गई हैं। हालांकि, इन सभी 39,111 संरचनाओं को इस अवधि में अनिवार्य रूप से तोड़ा जाएगा, ऐसा BMC की घोषणा में नहीं कहा गया है।
BMC आयुक्त अश्विनी भिडे के निर्देश पर अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त (शहर) प्राजक्ता वर्मा-लवंगारे के मार्गदर्शन में और सह आयुक्त (दक्षता) देवेंदर सिंह के नेतृत्व में यह कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन ने संबंधित रहवासियों से अनधिकृत निर्माण स्वयं हटाने की अपील की है और ऐसा नहीं करने पर नियमानुसार कार्रवाई की चेतावनी दी है।
39,111 संरचनाओं में सबसे बड़ा हिस्सा पूर्वी उपनगरों का है। यहां 31,227 झोपड़ियां 14 फीट या उससे अधिक ऊंचाई की पाई गई हैं। मुंबई शहर में ऐसी 3,348 और पश्चिमी उपनगरों में 4,536 संरचनाएं हैं। यानी इस पूरी सूची में करीब 80 प्रतिशत संरचनाएं पूर्वी उपनगरों में स्थित हैं।
कार्रवाई का पूरा आंकड़ा क्या है?
BMC के अनुसार 39,111 ऊंची संरचनाओं में से 4,584 पर पहले ही निष्कासन की कार्रवाई की जा चुकी है, जबकि 611 संरचनाओं को नोटिस जारी किए गए हैं। हालांकि, BMC के सार्वजनिक आंकड़ों से यह स्पष्ट नहीं है कि 611 नोटिस वाली संरचनाएं 4,584 पर की गई कार्रवाई के आंकड़े में शामिल हैं या अलग श्रेणी में हैं। इसलिए केवल इन दोनों आंकड़ों को घटाकर अक्टूबर से कार्रवाई के लिए बची संरचनाओं की सटीक संख्या बताना अभी सही नहीं होगा।
यह अंतर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 39,111 का आंकड़ा identified structures का है, न कि 39,111 परिवारों का। BMC की घोषणा में यह जानकारी नहीं दी गई है कि इन संरचनाओं में कुल कितने परिवार या लोग रहते हैं। इसलिए इस अभियान से 39 हजार परिवार सीधे प्रभावित होंगे, ऐसा कहना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा।
14 फीट से ज्यादा ऊंचाई का मतलब क्या पूरा घर टूटेगा?
इस अभियान का सबसे अहम सवाल यही है। BMC ने 14 फीट और उससे अधिक ऊंचाई वाली झोपड़ियों को कार्रवाई के दायरे में रखा है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं निकाला जा सकता कि हर मामले में पूरी संरचना को ही जमीन पर गिराया जाएगा।
जून 2026 के एक Bombay High Court मामले में 14 फीट से ऊपर बने अनधिकृत vertical extension को हटाने का मामला सामने आया था। अदालत के रिकॉर्ड में संबंधित व्यक्ति के पास 14 फीट से ऊपर vertical extension की अनुमति नहीं होने का उल्लेख है। अदालत ने लागू नियमों के तहत अनुमति के लिए आवेदन करने की संभावना का भी उल्लेख किया था। इससे स्पष्ट होता है कि मूल संरचना और बाद में किए गए अनधिकृत ऊर्ध्वाधर विस्तार की स्थिति अलग-अलग हो सकती है।
यानी किसी झोपड़ी की ऊंचाई 14 फीट से अधिक पाए जाने पर कार्रवाई किस हिस्से पर होगी, यह संबंधित निर्माण की प्रकृति, उपलब्ध अनुमति और रिकॉर्ड पर निर्भर कर सकता है। BMC की मौजूदा घोषणा में प्रत्येक संरचना के लिए कार्रवाई का अलग प्रारूप सार्वजनिक नहीं किया गया है।
इस अभियान को केवल ऊंचाई के आधार पर समझना सही नहीं होगा। झोपड़ी की ऊंचाई और उसमें रहने वाले व्यक्ति की पात्रता दो अलग-अलग मुद्दे हैं।
महाराष्ट्र सरकार की उपलब्ध पात्रता संबंधी जानकारी में 1 जनवरी 2000 या उससे पहले के आवासीय ground-floor structures के लिए निर्धारित पात्रता प्रक्रिया का उल्लेख है। पात्रता के लिए पुराने मतदाता रिकॉर्ड, अधिकृत बिजली रिकॉर्ड, सर्वेक्षण संबंधी दस्तावेज, संपत्ति कर रिकॉर्ड और अन्य स्वीकार्य दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जा सकता है, हालांकि अंतिम पात्रता संबंधित रिकॉर्ड की जांच के बाद तय होती है।
मार्च 2026 के Bombay High Court के एक मामले में भी झोपड़ीधारक की पात्रता तय करते समय प्रस्तुत दस्तावेजों की उचित जांच और प्रत्येक संबंधित दस्तावेज पर स्पष्ट निष्कर्ष की आवश्यकता पर जोर दिया गया था।
इसलिए किसी पुराने झोपड़ीधारक के पास photo-pass या अन्य पुराने दस्तावेज मौजूद होने की स्थिति और बाद में किए गए अनधिकृत निर्माण की स्थिति को एक ही आधार पर नहीं देखा जा सकता।
मुंबई में पहले भी तेज हुई है अनधिकृत निर्माणों पर कार्रवाई
BMC के अनुसार 24 अगस्त से 15 सितंबर 2026 के बीच मुंबई के अलग-अलग प्रशासनिक विभागों में 128 अनधिकृत निर्माणों पर निष्कासन की कार्रवाई की गई, जबकि 140 अन्य निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई नियोजित थी। अक्टूबर से शुरू होने वाला अभियान इसी enforcement को झोपड़पट्टी क्षेत्रों में विशेष रूप से 14 फीट और उससे अधिक ऊंचाई वाली संरचनाओं पर केंद्रित करता है।
मुंबई के पूर्वी उपनगरों में इस समय अनधिकृत कब्जों और निर्माणों के खिलाफ अलग-अलग स्तर पर भी कार्रवाई जारी है। सितंबर 2026 में Mankhurd में सरकारी जमीन से करीब 57 अनधिकृत व्यावसायिक इकाइयों को हटाया गया और लगभग छह एकड़ जमीन को अतिक्रमणमुक्त करने की कार्रवाई की गई। अप्रैल 2026 में Ghatkopar-Mankhurd Link Road के आसपास भी 1,200 से अधिक अनधिकृत झोपड़ी संरचनाओं पर कार्रवाई की गई थी। ये कार्रवाई वर्तमान 14 फीट वाली BMC विशेष मुहिम से अलग हैं, लेकिन मुंबई में अनधिकृत निर्माण के खिलाफ बढ़ी enforcement का व्यापक संदर्भ देती हैं।
अनधिकृत vertical extensions और कमजोर संरचनाओं का मुद्दा केवल जमीन या निर्माण नियमों तक सीमित नहीं है। 2026 में Mankhurd में मकान गिरने की घटना में छह लोगों की मौत हुई थी, जिनमें पांच नाबालिग थे। इसके बाद अनधिकृत और असुरक्षित संरचनाओं को लेकर मुंबई में सुरक्षा संबंधी सवाल और गंभीर हुए।
मुंबई में landslide-prone क्षेत्रों को लेकर भी चिंता बनी हुई है। उपलब्ध BMC Climate Action Plan से जुड़े आंकड़ों के अनुसार मुंबई में 287 landslide-prone locations चिन्हित किए गए हैं, जिनमें 209 informal settlements के भीतर हैं। 2026 में Kurla में landslide की घटना में भी आठ लोगों की मौत हुई थी। हालांकि इन घटनाओं को 39,111 संरचनाओं के अभियान का प्रत्यक्ष कारण बताने के लिए अलग आधिकारिक पुष्टि जरूरी होगी।
अक्टूबर से दिसंबर तक चलने वाली इस विशेष मुहिम में BMC का लक्ष्य 14 फीट या उससे अधिक ऊंचाई वाली identified structures पर कार्रवाई करना है। लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि 39,111 संरचनाओं में से कितनी पर इस तीन महीने की अवधि में वास्तविक निष्कासन कार्रवाई की जाएगी, कार्रवाई किस क्रम में होगी और 611 नोटिस जारी की गई संरचनाओं तथा पहले से कार्रवाई झेल चुकी 4,584 संरचनाओं के आंकड़ों में कितना overlap है।
यही वजह है कि इस अभियान का वास्तविक असर आने वाले दिनों में ward-wise कार्रवाई, जारी होने वाले notices और प्रत्येक संरचना के रिकॉर्ड की जांच के बाद ज्यादा स्पष्ट होगा।
फिलहाल BMC ने झोपड़पट्टी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से अनधिकृत निर्माण स्वयं हटाने की अपील की है। 1 अक्टूबर से शुरू होने वाली कार्रवाई में 14 फीट या उससे अधिक ऊंचाई वाली संरचनाएं मुख्य फोकस में रहेंगी, जबकि किसी विशेष घर या उसके हिस्से पर कार्रवाई का स्वरूप संबंधित निर्माण और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर तय होना महत्वपूर्ण होगा।
Mumbai में C&D Waste पर BMC सख्त, MDCTS registration की deadline 23 सितंबर 2026। बिना VTMS वाले वाहनों पर ₹25,000 जुर्माने की कार्रवाई होगी।
मुंबई: शहर में निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाले मलबे (C&D Waste) पर BMC ने अब डिजिटल निगरानी सख्त कर दी है।** 9 सितंबर 2026 की सार्वजनिक सूचना के मुताबिक C&D Waste से जुड़े projects, waste generators, transporters और processing/recycling से जुड़े stakeholders को Mumbai Debris Control & Tracking System (MDCTS) पर registration करना होगा। इसकी deadline 23 सितंबर 2026 है।
इसके साथ C&D Waste ले जाने वाले वाहनों में BMC द्वारा अधिकृत Vehicle Tracking and Monitoring System (VTMS) लगाना अनिवार्य किया गया है। बिना registration या authorised और functioning VTMS के transport करने वाले वाहन पर प्रति वाहन, प्रति उल्लंघन ₹25,000 का दंड लगाया जा सकता है।
किन लोगों को MDCTS Registration करना होगा?
यह नियम सिर्फ बड़े builders तक सीमित नहीं है। C&D Waste पैदा करने वाले projects, developers, contractors, सरकारी व अन्य agencies, transporters तथा processing, recycling, unloading और authorised backfilling से जुड़े stakeholders इसके दायरे में हैं।
संबंधित पक्षों को निर्धारित format में C&D Waste Management Plan भी देना होगा। Excavation से निकलने वाली मिट्टी या अन्य सामग्री को C&D Waste से अलग रखना और अलग transport करना जरूरी होगा।
VTMS से मलबे वाले वाहनों पर कैसे नजर रखी जाएगी?
VTMS के जरिए वाहन की movement को source से authorised destination तक track करने की व्यवस्था होगी। इससे route और disposal location की निगरानी के साथ unauthorised dumping की पहचान आसान हो सकती है।
BMC ने यह भी अनिवार्य किया है कि transport के दौरान वाहनों को ठीक से cover रखा जाए, ताकि मलबा सड़क पर न गिरे और धूल से प्रदूषण न फैले।
घर में Renovation कराने वालों पर क्या असर होगा?
घर, दुकान या अन्य property में repair, renovation या demolition से निकलने वाला मलबा भी C&D Waste management व्यवस्था के दायरे में आ सकता है।
इसलिए renovation कराने वालों को मलबा सड़क, खाली प्लॉट या किसी अनधिकृत जगह पर नहीं डलवाना चाहिए। इसे authorised collection, transportation और disposal/processing व्यवस्था के जरिए भेजना होगा।
छोटे स्तर के debris के लिए BMC की मौजूदा व्यवस्था में authorised collection सुविधा का प्रावधान है। लागू मात्रा और प्रक्रिया के लिए MDCTS/BMC की वर्तमान guidelines देखना जरूरी होगा।
नियम तोड़ने पर ₹25,000 के अलावा क्या होगा?
MDCTS registration या authorised VTMS के बिना C&D Waste transport करने वाले वाहन पर ₹25,000 प्रति vehicle, प्रति violation का दंड लगाया जा सकता है।
Unauthorised dumping, बिना अनुमति transportation या disposal तथा अन्य नियमों के उल्लंघन पर काम रोकने, permissions cancel करने, bank guarantee जब्त करने और अन्य कानूनी कार्रवाई का भी प्रावधान है।
BMC ने पहले ही कितनी कार्रवाई की?
C&D Waste dumping पर BMC की कार्रवाई पहले से जारी है। 1 अप्रैल से 31 अगस्त 2026 के बीच 419 C&D Waste-related violations में ₹31.64 लाख का जुर्माना लगाया गया। इनमें 349 unauthorised dumping और 70 approved plan के बिना transportation के मामले थे।
अगस्त में ही 65 C&D Waste violations पर ₹8.54 लाख की कार्रवाई हुई।
मुंबई में रोज 8,000 टन मलबा, Processing Capacity कितनी?
MDCTS की जरूरत के पीछे मुंबई में पैदा होने वाला भारी C&D Waste भी बड़ी वजह है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार मुंबई में रोज करीब 8,000 टन C&D Waste निकलता है, जबकि Dahisar और Diaghar की मौजूदा processing facilities की combined capacity करीब 1,200 टन प्रतिदिन है। इससे waste generation और processing capacity के बीच बड़ा gap सामने आता है।
यह gap illegal dumping, road dust, drainage blockage और खुले स्थानों पर debris जमा होने जैसी समस्याओं को बढ़ा सकता है।
BMC 2,000 TPD नई Processing Capacity जोड़ने की तैयारी में
BMC City, Eastern Suburbs और Western Suburbs में integrated C&D Waste processing facilities विकसित करने की प्रक्रिया पर काम कर रही है। इसके जरिए कुल 2,000 TPD तक additional processing capacity विकसित करने का प्रस्ताव है।
BMC tender records के अनुसार संबंधित प्रक्रिया में bid submission की deadline 10 सितंबर 2026 और bid opening 11 सितंबर 2026 निर्धारित थी।
इससे स्पष्ट है कि महानगरपालिका illegal dumping पर enforcement के साथ processing infrastructure बढ़ाने पर भी काम कर रही है।
MDCTS से क्या बदलेगा?
MDCTS और VTMS का उद्देश्य C&D Waste की movement को अधिक traceable बनाना है। यानी waste generator से transporter और फिर authorised processing/disposal location तक की chain पर digital monitoring बढ़ेगी।
इससे unauthorised dumping करने वाले वाहनों की पहचान और transporter तथा waste generator की accountability मजबूत हो सकती है। हालांकि इसकी सफलता authorised processing capacity, collection network और field-level enforcement पर भी निर्भर करेगी।
C&D Waste से जुड़े stakeholders को deadline से पहले:
MDCTS registration पूरा करना होगा।
जरूरी C&D Waste Management Plan जमा करना होगा।
authorised transporter का इस्तेमाल करना होगा।
वाहनों में authorised, functioning VTMS रखना होगा।
excavation material को C&D Waste से अलग रखना होगा।
मलबा केवल authorised destination पर भेजना होगा।
transport के दौरान vehicle को ठीक से cover रखना होगा।
BMC ने MDCTS portal पर जारी होने वाली आगे की instructions पर नजर रखने की सलाह दी है।
23 सितंबर 2026 के बाद compliance को लेकर BMC की enforcement और सख्त हो सकती है। मुंबई में C&D Waste की बड़ी मात्रा को देखते हुए अब चुनौती सिर्फ illegal dumping रोकने की नहीं, बल्कि waste की पूरी chain—generation, collection, transportation, tracking और processing—को प्रभावी बनाने की है।
Andheri के Chitrakoot Ground पर BMC ने 34,000 वर्ग फुट में बने अवैध ढांचे हटाए। 1991 से लंबित Fire Station का रास्ता साफ, अब निर्माण की बारी।
मुंबई: Andheri West के Link Road स्थित Chitrakoot Ground पर BMC ने सोमवार को बड़ी demolition कार्रवाई करते हुए Fire Station के लिए आरक्षित जमीन पर बने अनधिकृत ढांचों को हटा दिया है। करीब 34,000 वर्ग फुट क्षेत्र में फैली संरचनाओं पर हुई इस कार्रवाई में garage, banquet/marriage hall और अन्य निर्माण शामिल थे। Bombay High Court में इसी विवाद से जुड़े मामले में नौ संरचनाओं का उल्लेख है। अदालत ने 25 अगस्त 2026 को दोनों याचिकाएं खारिज करते हुए कुल ₹10 लाख की लागत भी लगाई थी।
यह कार्रवाई इसलिए अहम है क्योंकि Chitrakoot Ground का यह हिस्सा 1991 से Fire Station के लिए आरक्षित बताया जाता रहा है। करीब 34 साल से अटकी इस परियोजना के लिए अब जमीन खाली कराने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। हालांकि, जमीन खाली होने के बाद अगला सवाल अब यही है कि Ambivali Fire Station का वास्तविक निर्माण कब शुरू होगा।
BMC के K-West Ward ने Chitrakoot Ground पर करीब 34,000 वर्ग फुट में फैले अनधिकृत निर्माण हटाए। इनमें DRM Motors, DRM Apparels और Chitrakoot Banquet Hall के अवैध ढांचे बनाए गए थे। कार्रवाई के दौरान BMC के Building and Factory विभाग ने भारी मशीनरी का इस्तेमाल किया और Amboli Police Station की पुलिस टीम personnel सुरक्षा के लिए मौजूद रहे।
Bombay High Court में दाखिल मामले में संबंधित निर्माणों के रूप में porta cabins, temporary office structures, car workshop और तीन banquet halls समेत नौ संरचनाओं का विवाद सामने आया था।
मामला Bombay High Court तक कैसे पहुंचा?
BMC की कार्रवाई से पहले संबंधित निजी निर्माण कंपनी ने civic body’s demolition notices और orders को Bombay High Court में चुनौती दी थी। अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक BMC ने 13 मई 2026 को notices जारी किए और बाद में 1 जुलाई 2026 को removal orders जारी किए।
मामला Shah Constructions Co. Ltd. बनाम Municipal Corporation of Greater Mumbai के रूप में हाई कोर्ट पहुंचा। 25 अगस्त 2026 को जस्टिस A.S. Gadkari और जस्टिस Kamal Khata की पीठ ने दोनों writ petitions खारिज कर दीं। अदालत ने प्रत्येक याचिका पर ₹5 लाख यानी कुल ₹10 लाख की लागत लगाई।
हाई कोर्ट ने अवैध निर्माण को लेकर क्या कहा?
मामले में याचिकाकर्ता की ओर से पुराने municipal records, tax assessments, licences और repair permissions जैसे दस्तावेजों पर भरोसा किया गया था। अदालत ने माना कि ऐसे दस्तावेज अपने आप किसी निर्माण को कानूनी नहीं बना देते। किसी संरचना को वैध साबित करने के लिए sanctioned plan और उसके मूल निर्माण की विश्वसनीय जानकारी जरूरी थी।
मामले में लगभग 34,000 वर्ग फुट constructed area में से करीब 18,000 वर्ग फुट हिस्सा हटाने की पेशकश भी की गई थी, लेकिन अदालत ने बाकी निर्माण को बचाने का आधार स्वीकार नहीं किया। अदालत के अनुसार यह साबित करने के लिए पर्याप्त प्रमाण नहीं था कि पुराने और बाद में किए गए निर्माण को स्पष्ट रूप से अलग किया जा सकता है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि property-tax assessment, licences या repair permissions किसी अनधिकृत निर्माण को स्वतः regularise नहीं करते। इसी आधार पर BMC के notices और demolition orders को बरकरार रखा गया।
1991 से Fire Station के लिए आरक्षित है जमीन
Chitrakoot Ground का यह हिस्सा Development Plan में Fire Station के लिए आरक्षित किए जाने के बाद भी दशकों तक अपने उद्देश्य के अनुसार विकसित नहीं हो सका। स्थानीय नागरिक संगठनों और पुरानी रिपोर्टों के अनुसार reservation का इतिहास 1991 तक जाता है।
इस परियोजना को लेकर 2009 में एक और महत्वपूर्ण कदम सामने आया था। जानकारी के अनुसार BMC के Building Proposal Department ने Ambivali Fire Station के निर्माण के लिए Commencement Certificate जारी किया था। लेकिन निर्माण आगे नहीं बढ़ा और बाद में वह अनुमति रद्द हो गई।
यानी जमीन आरक्षित होने, construction permission मिलने और वर्षों तक प्रशासनिक follow-up के बावजूद Fire Station जमीन पर आकार नहीं ले सका।
2016 से 2024 तक चलता रहा प्रशासनिक Follow-Up
यह मामला केवल हाल की demolition drive से शुरू नहीं हुआ। उपलब्ध जानकारी में Mumbai Fire Brigade की 2016 से 2024 तक की correspondence और administrative follow-up का उल्लेख है।
इस दौरान जमीन के acquisition, handover, development proposal और संबंधित कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न स्तरों पर पत्राचार और बैठकें हुईं। 2022 में Suburban Collector के साथ बैठक हुई थी। 2023 में Ambivali Fire Station development proposal से संबंधित प्रक्रिया आगे बढ़ने की बात सामने आई थी।
2025 में भी Fire Brigade ने जमीन को Fire Station के लिए उपलब्ध कराने को लेकर Collector स्तर पर मामला उठाया था। उस समय करीब 5,500 वर्ग मीटर के plot का उल्लेख किया गया था।
2026 में जमीन खाली कराने की प्रक्रिया तेज हुई
मार्च 2026 में BMC ने संबंधित पक्ष को Fire Station के लिए आरक्षित जमीन hand over करने के लिए सात दिन का अंतिम समय दिए जाने की जानकारी सामने आई थी। इससे पहले notice और reminder communication के जरिए जमीन सौंपने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई थी।
इसके बाद project से जुड़ी ₹1.33 करोड़ की bank guarantee भी सामने आई। जानकारी के मुताबिक 31 मार्च 2026 को Municipal Commissioner के पक्ष में यह guarantee जमा की गई थी। अप्रैल में अधिकारियों की ओर से आने वाले महीनों में काम शुरू होने की उम्मीद जताई गई थी।
लेकिन सितंबर तक उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी में Fire Station का actual construction शुरू होने की स्पष्ट पुष्टि नहीं हुई थी। यही वजह है कि मौजूदा demolition के बाद परियोजना की अगली समयसीमा सबसे अहम सवाल बन गई है।
Chitrakoot Ground पर पहले भी हो चुकी है आग की घटना
Fire Station की जरूरत केवल कागजों में दर्ज reservation का मामला नहीं है। जुलाई 2022 में इसी Chitrakoot Ground पर एक फिल्म सेट में आग लगने से 32 वर्षीय मजदूर की मौत हुई थी। उस घटना के बाद भी इलाके में Fire Station की जरूरत और emergency response को लेकर सवाल उठे थे।
Lokhandwala-Oshiwara और Link Road का इलाका पिछले वर्षों में तेजी से विकसित हुआ है। यहां residential towers, commercial establishments और high-rise buildings बढ़े हैं। ऐसे इलाके में Fire Brigade के लिए response time बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।
एक वरिष्ठ Fire official के अनुसार वर्तमान में Andheri West के लिए fire brigades को Vile Parle, Goregaon और Bandra जैसे स्थानों से dispatch करना पड़ सकता है, जबकि peak traffic के दौरान दूरी और congestion response time को प्रभावित कर सकते हैं।
पुरानी रिपोर्टों में traffic और दूरी के कारण emergency response में 30 से 45 मिनट तक की देरी की चिंता भी दर्ज की गई हैं।
स्थानीय नागरिक वर्षों से उठा रहे हैं मांग
Lokhandwala-Oshiwara Citizens Association सहित स्थानीय नागरिक समूह लंबे समय से इस जमीन पर Fire Station विकसित करने की मांग करते रहे हैं।
नागरिकों का कहना है कि केवल demolition करके मामला खत्म नहीं होना चाहिए। पूरी आरक्षित जमीन को दोबारा encroachment से सुरक्षित करना और construction process को आगे बढ़ाना जरूरी है।
स्थानीय BJP corporator Rupesh Sawarkar ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए कहा है कि उन्होंने चुनाव के बाद से Fire Station की जमीन से encroachment हटाने के लिए प्रशासन के साथ follow-up किया। उनका दावा है कि आरक्षित जमीन का इस्तेमाल wedding functions, film shoots और turf cricket जैसी गतिविधियों के लिए किया जा रहा था और lease arrangements में financial irregularities की आशंका थी।
अब जमीन खाली होने के बाद सबसे बड़ा सवाल क्या?
BMC की कार्रवाई ने Fire Station के लिए लंबे समय से अटकी जमीन से अनधिकृत निर्माण हटाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। लेकिन demolition का मतलब Fire Station का निर्माण शुरू होना नहीं है।
अब प्रशासन के सामने अगली जिम्मेदारियां हैं—क्या पूरा आरक्षित भूखंड सुरक्षित और उपलब्ध हो चुका है, Fire Department को possession कब मिलेगा, final building plan की स्थिति क्या है, project की लागत कितनी है, tender जारी हुआ है या नहीं, निर्माण एजेंसी कौन होगी और Fire Station कब तक operational होगा।
फरवरी 2026 में करीब 18 महीने के संभावित construction timeline की चर्चा हुई थी, जबकि अप्रैल में आने वाले महीनों में काम शुरू होने की उम्मीद जताई गई थी। अब सितंबर की demolition कार्रवाई के बाद इस timeline की स्थिति स्पष्ट करना BMC के लिए जरूरी होगा।
34 साल पुराने Ambivali Fire Station के लिए रास्ते का एक बड़ा अवरोध जरूर हटा है, लेकिन Andheri West के लोगों को अब बुलडोजर कार्रवाई के बाद निर्माण शुरू होने और Fire Station operational होने की तारीख का इंतजार है।
मुंबई के अंधेरी में BMC के जूनियर इंजीनियर और कर्मचारी पर ₹60 हजार रिश्वत लेने का आरोप। ACB ट्रैप में गिरफ्तारी, ₹2.78 लाख कैश बरामद।
मुंबई: अंधेरी पश्चिम के BMC K/West Ward कार्यालय में Anti-Corruption Bureau (ACB) ने रिश्वत के मामले में BMC के एक जूनियर इंजीनियर और कर्मचारी को गिरफ्तार किया है। ACB के मुताबिक, एक बेकरी संचालक से कथित तौर पर ₹70 हजार की रिश्वत मांगी गई थी। बातचीत के बाद ₹60 हजार में सौदा तय हुआ, जिसके बाद ACB ने ट्रैप लगाकर कर्मचारी को रकम लेते हुए पकड़ लिया।
मामले में जूनियर इंजीनियर नीरवकुमार चुनीलाल जैसूर (43) और BMC कर्मचारी विजय रमेश पाटील (46) को आरोपी बनाया गया है।
बेकरी पर कार्रवाई रोकने के बदले रिश्वत का आरोप
ACB के मुताबिक, शिकायतकर्ता 50 वर्षीय बेकरी संचालक है। आरोप है कि पाटील ने उससे ₹70 हजार मांगे थे। कथित तौर पर यह रकम बेकरी को चलाने देने और उसके खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई नहीं करने के बदले मांगी गई थी।
शिकायत मिलने के बाद ACB ने रिश्वत की मांग की पुष्टि की। इसी दौरान पाटील ने शिकायतकर्ता की मुलाकात जूनियर इंजीनियर जैसूर से कराई। इसके बाद कथित तौर पर रिश्वत की रकम ₹70 हजार से घटकर ₹60 हजार तय हुई।
रकम तय होने के बाद ACB ने K/West Ward कार्यालय में ट्रैप लगाया।
ACB के अनुसार, विजय पाटील को ₹60 हजार स्वीकार करते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया। इसके बाद जांच टीम ने BMC के छठी मंजिल स्थित कार्यालय से जूनियर इंजीनियर जैसूर को भी हिरासत में लिया।
दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
कर्मचारी के पास ₹2.78 लाख कैश मिला
ट्रैप के बाद ACB ने पाटील की तलाशी ली। उसके पास से ₹40,820 नकद और बैग से ₹2,37,600 नकद बरामद हुआ।
ACB ने मामले में मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं। जूनियर इंजीनियर जैसूर के दो मोबाइल फोन और पाटील का एक मोबाइल फोन जांच के लिए लिया गया है।
अब जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि कथित रिश्वत की मांग और लेन-देन में दोनों आरोपियों की क्या भूमिका थी और क्या इस मामले में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल है।
अब आगे क्या होगा?
ACB की कार्रवाई के बाद मामले की जांच जारी है। इस केस में सबसे अहम सवाल अब यह है कि ₹2.78 लाख की अतिरिक्त नकदी का स्रोत क्या था और क्या उसका कथित रिश्वत प्रकरण से कोई संबंध सामने आता है।
मुंबई के ₹248 करोड़ के Mrinaltai Gore Flyover पर बाइकर्स के फिसलने के बाद BMC ने rumble strips लगाए। 2021 की Vigilance रिपोर्ट भी सवाल उठा चुकी थी।
मुंबई: गोरेगांव में करीब ₹248 करोड़ की लागत से बने Mrinaltai Gore Flyover Extension पर बाइकर्स के फिसलने की शिकायतों के बाद BMC ने अब कार्रवाई शुरू की है। Relief Road की तरफ जाने वाले हिस्से के sharp turns पर BMC ने रफ्तार कम करने वाले rumble strips लगाए हैं। 29 अगस्त को इसी फ्लाईओवर की दीवार से एक ट्रक टकरा गया था, जिसके बाद sound barrier का एक हिस्सा नीचे SV Road पर गिर गया था। गनीमत रही कि इस घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है।
नया फ्लाईओवर 6 जून 2026 को आम लोगों के लिए खोला गया था। इसके बाद से Relief Road की तरफ जाने वाले arm की सड़क को लेकर लगातार शिकायतें सामने आईं। खासकर बारिश या सड़क गीली होने पर दोपहिया वाहन फिसलने और बाइकर्स के गिरने के वीडियो सामने आए। यह हिस्सा नीचे उतरने के बाद एक turn पर आता है, जहां बाइक को सड़क की पर्याप्त grip मिलना ज्यादा जरूरी है।
BMC ने पहले बताया था कि flyover की 40 mm मोटी mastic asphalt surface पर stone aggregates डाले गए हैं ताकि tyre को friction मिले और वाहन फिसलें नहीं। लेकिन मौजूदा शिकायतों के बाद अब चार ऐसे spots चिन्हित किए गए हैं जहां turn और slope है। BMC अधिकारी के मुताबिक दो जगह 15 mm thick rumblers लगाए जा चुके हैं और दो अन्य जगहों पर भी इन्हें लगाया जाना है। साथ ही cautionary और speed-limit boards लगाने तथा sound barriers की मरम्मत की बात कही गई है।
यहां Speed Breaker शब्द आम लोगों के लिए समझने में आसान है, लेकिन तकनीकी तौर पर लगाए गए rumble strips सामान्य ऊंचे speed breaker जैसे नहीं हैं। इनका मकसद सड़क पर vibration और अतिरिक्त grip देकर वाहन चालकों को turn और slope पर सावधान करना तथा रफ्तार कम कराना है।
सवाल सिर्फ फिसलन का नहीं, ₹248 करोड़ के पूरे प्रोजेक्ट का है
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस 750 मीटर लंबे, चार लेन वाले flyover पर करीब ₹248 करोड़ खर्च हुए, उसे शुरू हुए अभी तीन महीने भी पूरे नहीं हुए और उसके एक हिस्से पर दोपहिया वाहनों की safety को लेकर corrective treatment करना पड़ा। यह वही project है जिसकी construction timeline करीब आठ साल तक खिंची और जिसकी लागत भी बार बार बढ़ाई गई।
BMC ने नवंबर 2018 में इसका work order जारी किया था और शुरुआती completion target 24 महीने का था। लेकिन project 2026 में जाकर पूरा हुआ। अंतिम लागत ₹247.97 करोड़ तक पहुंची, जबकि मिली जानकारी के मुताबिक शुरुआती estimate ₹170.82 करोड़ था—यानी करीब 45 फीसदी की बढ़ोतरी।
काम के दौरान contractor पर penalties भी लगाई गईं। BMC के मुताबिक आठ साल में कुल करीब ₹27 लाख की penalty लागू की गई, जो ₹248 करोड़ के project cost का एक फीसदी भी नहीं है। इनमें construction delay और site safety से जुड़े मामलों की penalties शामिल थीं।
लेकिन असली सवाल 2026 में नहीं, 2021 में उठ चुका था
इस flyover की कहानी में सबसे गंभीर कड़ी BMC की अपनी Vigilance रिपोर्ट है। जून 2021 की internal vigilance inspection में construction quality, structural elements और monitoring से जुड़े कई सवाल उठाए गए थे—यानी flyover के public use में आने से करीब पांच साल पहले।
रिपोर्ट में flyover के कई joints और piers में cracks तथा honeycombing मिलने की बात कही गई थी। पांच pillars में cracks और honeycombing का उल्लेख था। Honeycombing concrete में बनने वाली खाली जगहों को कहा जाता है, जो खराब compaction से जुड़ी हो सकती हैं और concrete की strength पर असर डाल सकती हैं।
Vigilance team ने यह भी सवाल उठाया था कि flyover के piers के पास मौजूद road panels के उठने या damage होने की संभावना को design में पर्याप्त तरीके से address किया गया था या नहीं। अगर ऐसी स्थिति में सड़क unsafe होती है तो उसकी repair contractor की जिम्मेदारी होने की बात रिपोर्ट में दर्ज थी।
रिपोर्ट में quality records को लेकर भी सवाल थे। Steel और ready-mix concrete यानी RMC से जुड़े जरूरी records उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई थी। इसके अलावा मई 2019 और नवंबर 2020 में concrete strength के tests fail होने के बावजूद कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठे थे।
और यहां monitoring का सवाल भी सामने आता है। नियुक्त consulting engineer को महीने में कम से कम दो site inspections करनी थीं, लेकिन Vigilance रिपोर्ट में ऐसे visits के records उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई। Contractors और supervising municipal engineers पर effective quality control और monitoring सुनिश्चित नहीं करने को लेकर भी सवाल उठाए गए थे।
सबसे चौंकाने वाली बात penalties को लेकर थी। फरवरी से मई 2019 के बीच चार अलग-अलग मामलों में contractor पर ₹500 की penalty लगाई गई, जबकि contract conditions में minimum penalty ₹5,000 बताई गई थी। रिपोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि cracks, honeycombing और rough concrete surfaces के लिए penalty क्यों नहीं लगाई गई।
हालांकि, 1 जून 2021 की compliance report में Bridges Department ने बताया था कि contractor को penalty और warning letter दिया गया, corrective measures और rectification work किए गए तथा records update किए गए। Supervisory staff को भी ज्यादा सतर्क रहने के निर्देश दिए गए थे।
यानी आज का सवाल सिर्फ यह नहीं है कि सड़क पर rumble strips क्यों लगाने पड़े। बड़ा सवाल यह भी है कि 2021 में Vigilance ने जो कमियां बताई थीं, उनके बाद rectification वास्तव में कितनी प्रभावी रही और बाद के वर्षों में किस स्तर पर उसकी जांच हुई।
आठ साल का project, बढ़ी लागत और फिर safety correction
Mrinaltai Gore Flyover Extension का मकसद Goregaon में east-west connectivity को बेहतर करना था। 750 मीटर का यह four-lane arm existing flyover network को Ram Mandir Road और Relief Road से जोड़ता है। लेकिन project को पूरा होने में शुरुआती 24 महीने के target के मुकाबले करीब आठ साल लग गए।
मार्च 2026 में भी project करीब 80 फीसदी complete बताया गया था और cost escalation को लेकर BMC Standing Committee में सवाल उठ चुके थे। इसी दौरान corporators ने project delay और बढ़ती लागत पर भी आपत्ति जताई थी।
फिर जून में flyover खुला तो शुरुआती दिनों में uneven surface, loose grit और patchy stretches को लेकर शिकायतें सामने आईं। BMC ने उस समय road condition को structural deficiency नहीं माना और mastic asphalt तथा stone chips को technical construction process का हिस्सा बताया था। Experts ने भी यह कहा था कि mastic asphalt और stone aggregates का इस्तेमाल friction देने के लिए किया जाता है, हालांकि curved हिस्सों पर पर्याप्त grip बेहद जरूरी है।
अब सितंबर में situation यह है कि उसी नए flyover के कुछ turns और slopes पर BMC को rumble treatment करना पड़ रहा है। एक न्यूज एजेंसी से बात करते हुए transport planner Vivek Pai ने इस तरह की slick surface के संभावित कारणों में mastic surface के बहुत smooth होने और bitumen bleeding जैसे technical factors की चर्चा की है। इसे flyover की खराबी का अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता, लेकिन surface grip का सवाल जरूर गंभीर बन गया है।
BMC का मौजूदा safety action जरूरी है और अगर rumble strips, warning boards और sound barrier repairs से दुर्घटनाओं का risk कम होता है तो यह स्वागत योग्य कदम है।
लेकिन ₹248 करोड़ के इस project में accountability का सवाल इससे खत्म नहीं होता।
अब यह साफ होना चाहिए कि 2021 की Vigilance रिपोर्ट में उठाए गए सवालों पर किस अधिकारी ने compliance verify किया, rectification की final inspection किसने की, consultant ने कितनी site inspections कीं, quality records किस स्तर पर verify हुए, concrete और road surface की final quality किसने certify की और public opening से पहले safety assessment किस आधार पर किया गया।
BMC ने जुलाई 2026 में bridge, flyover और tunnel projects के लिए पांच साल के लिए 29 technical consultants का panel बनाने का प्रस्ताव भी रखा था। प्रस्ताव में consultant की design-related गलती से project cost या design variation बढ़ने पर penalty का प्रावधान रखने की बात कही गई थी।
अब Mrinaltai Gore Flyover का मामला एक सीधा सवाल छोड़ता है—अगर ₹248 करोड़ खर्च करके बना नया flyover तीन महीने के भीतर ही ऐसे turns पर safety correction मांगने लगे जहां बाइकर्स फिसल रहे हैं, तो गलती सिर्फ सड़क पर rumble strips लगाने से खत्म मानी जाए या फिर पूरे project की planning, quality monitoring और accountability की भी दोबारा जांच होनी चाहिए?
मुंबईकरों के टैक्स के पैसे से बने इस flyover पर अब असली जरूरत सिर्फ रफ्तार कम करने की नहीं, बल्कि यह पता लगाने की है कि शुरुआत से आखिर कहां-कहां निगरानी कमजोर पड़ी।
मालाड में आनंद रोड और साईनाथ रोड के चौड़ीकरण के साथ चिंचोली बंदर खेल मैदान के विकास की मांग उठी। RPI (आ) ने मनपा पी-उत्तर के सहायक आयुक्त को ज्ञापन सौंपा।
मुंबई: मालाड (पश्चिम) में आनंद रोड और साईनाथ रोड के चौड़ीकरण सहित चिंचोली बंदर रोड स्थित खेल मैदान के संरक्षण और विकास की मांग को लेकर रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले गुट) के पदाधिकारियों ने मनपा पी-उत्तर विभाग के सहायक आयुक्त कुंदन वलवी से मुलाकात की। शिष्टमंडल ने इलाके की नागरिक समस्याओं पर चर्चा करते हुए सहायक आयुक्त को अपनी मांग पत्र सौंपा।
बैठक में आनंद रोड और साईनाथ रोड के विस्तारीकरण का लंबे समय से लंबित मामला प्रमुखता से उठाया गया। RPI (आ) के पदाधिकारियों ने मांग की कि इन दोनों सड़कों के चौड़ीकरण का काम जल्द से जल्द पूरा किया जाए, ताकि इलाके के नागरिकों को इसका फायदा मिल सके।
इसके अलावा चिंचोली बंदर रोड स्थित खेल मैदान के संरक्षण और विकास का मुद्दा भी उठाया गया। शिष्टमंडल ने कहा कि खेल मैदान के साथ-साथ इलाके में पड़ी अन्य सरकारी खाली जमीन का भी सही तरीके से इस्तेमाल होना चाहिए। इसके लिए मनपा प्रशासन को तत्काल जरूरी कदम उठाने की मांग की गई।
पहले भी हो चुका है पत्राचार
RPI (आ) के उत्तर मुंबई जिला सचिव विनोद घोलप की ओर से इस मामले को लेकर पहले भी मनपा प्रशासन के साथ पत्राचार किया गया था। इतना ही नहीं, समाचार पत्रों के माध्यम से भी इस मुद्दे को सामने लाया गया था। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने पर शिष्टमंडल ने एक बार फिर मनपा प्रशासन का ध्यान इस ओर दिलाया।
शिष्टमंडल ने सहायक आयुक्त कुंदन वलवी से कहा कि सड़क चौड़ीकरण और खेल मैदान से जुड़े मामलों को सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सीमित न रखा जाए, बल्कि जमीन पर भी जल्द काम दिखाई देना चाहिए।
सहायक आयुक्त ने दिया कार्रवाई का भरोसा
मांगों पर चर्चा के बाद सहायक आयुक्त कुंदन वलवी ने सकारात्मक विचार करने और आवश्यक कार्रवाई किए जाने का आश्वासन दिया। खेल मैदान के मामले में संबंधित विभागों के माध्यम से उचित कार्रवाई करने की बात भी कही गई।
अब स्थानीय नागरिकों की नजर इस बात पर है कि लंबे समय से लंबित आनंद रोड और साईनाथ रोड के चौड़ीकरण तथा चिंचोली बंदर खेल मैदान के विकास को लेकर मनपा प्रशासन आगे क्या कदम उठाता है।
इस दौरान RPI (आ) के जिला कोषाध्यक्ष ओम यादव, मुंबई सचिव आशीष सिंह, जिला उपाध्यक्ष सुदन कांबले, वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र राजभर, दैनिक पब्लिक भारत के संपादक शिवकुमार सोनी, पत्रकार एवं समाजसेवक नंदू अहिरे और सुनील जोंधले सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
कुछ महीने पहले करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद BMC ने मुंबई महापौर के आधिकारिक हेरिटेज बंगले के लिए फिर करीब ₹3 करोड़ का नया टेंडर जारी किया है। आखिर इसकी जरूरत क्यों पड़ी? जानिए पूरा मामला।
मुंबई: मुंबई में सार्वजनिक धन के इस्तेमाल को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने मुंबई महापौर के आधिकारिक हेरिटेज बंगले के लिए करीब ₹2.9 करोड़ (लगभग ₹3 करोड़) का नया टेंडर जारी किया है। हैरानी की बात यह है कि इसी बंगले पर कुछ महीने पहले ही करोड़ों रुपये खर्च कर व्यापक मरम्मत और नवीनीकरण का काम कराया गया था। ऐसे में नया टेंडर सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों से लेकर आम मुंबईकरों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर इतने कम समय में दोबारा करोड़ों रुपये खर्च करने की जरूरत क्यों पड़ गई।
BMC का कहना है कि यह कोई साधारण सरकारी आवास नहीं, बल्कि एक संरक्षित हेरिटेज इमारत है। इसलिए इसके संरक्षण, संरचनात्मक मजबूती और लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए अतिरिक्त तकनीकी कार्य जरूरी हैं। दूसरी ओर विपक्षी दल, RTI कार्यकर्ता और कई नागरिक इस पूरे खर्च की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि हाल ही में बड़े पैमाने पर रेनोवेशन किया गया था, तो अब नए टेंडर की आवश्यकता और उसके दायरे को स्पष्ट किया जाना चाहिए।
इस खबर को लेकर सोशल मीडिया पर एक भ्रम भी देखने को मिला। कई लोग इसे दादर के शिवाजी पार्क स्थित पुराने महापौर बंगले से जोड़ रहे हैं, जबकि नया टेंडर भायखला स्थित वीरमाता जीजाबाई भोसले उद्यान (रानी बाग) परिसर में मौजूद BMC के आधिकारिक हेरिटेज बंगले से संबंधित है।
भायखला स्थित वीरमाता जीजाबाई भोसले उद्यान (रानी बाग) परिसर में मौजूद हेरिटेज बंगले की तस्वीर
यह इमारत ब्रिटिश काल की विरासत संरचनाओं में गिनी जाती है और वर्षों तक खाली पड़ी रही। हाल ही में इसे मुंबई महापौर के आधिकारिक निवास के रूप में तैयार करने का निर्णय लिया गया। चूंकि यह हेरिटेज भवन है, इसलिए यहां किसी भी निर्माण या मरम्मत का कार्य सामान्य सरकारी इमारतों की तुलना में अधिक तकनीकी प्रक्रिया और संरक्षण मानकों के तहत किया जाता है।
यही कारण है कि BMC इस पूरे रेनोवेशन को “हेरिटेज कंजर्वेशन” का हिस्सा बता रही है। हालांकि इसी दलील के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि कुछ महीने पहले किए गए कार्य और अब प्रस्तावित नए कार्यों में वास्तविक अंतर क्या है।
कैसे बढ़ती गई लागत? पूरी टाइमलाइन समझिए
इस पूरे मामले को समझने के लिए पिछले कुछ महीनों की घटनाओं पर नजर डालना जरूरी है।
मार्च 2026
महापौर के आधिकारिक बंगले के व्यापक नवीनीकरण का पहला प्रस्ताव सामने आया। शुरुआती अनुमान करीब ₹1.5 करोड़ का था। उस समय कहा गया कि लंबे समय से खाली पड़े हेरिटेज भवन को रहने योग्य बनाने और उसकी मूल संरचना को सुरक्षित रखने के लिए विशेष मरम्मत आवश्यक है।
अप्रैल 2026
रेनोवेशन का दायरा बढ़ा और प्रस्तावित लागत में भी वृद्धि हुई। इसके बाद व्यापक मरम्मत, इंटीरियर अपग्रेड और हेरिटेज संरक्षण के कार्यों को मंजूरी मिली। प्राप्त जानकारी के अनुसार इसी चरण में करोड़ों रुपये के कार्य स्वीकृत किए गए।
करीब ₹2.4 करोड़ की लागत से पहले चरण का कार्य पूरा होने की जानकारी सामने आई। इस दौरान भवन की संरचना मजबूत करने, इंटीरियर सुधारने और आधुनिक सुविधाएं विकसित करने का काम किया गया।
अगस्त 2026
काम पूरा होने के कुछ ही महीने बाद BMC ने करीब ₹2.9 करोड़ का नया टेंडर जारी कर दिया। यहीं से विवाद की शुरुआत हुई। विपक्ष और RTI कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाया कि आखिर पहले चरण में कौन-कौन से काम पूरे हुए थे और अब किन नए कार्यों के लिए दोबारा इतनी बड़ी राशि खर्च की जा रही है।
पहले चरण में क्या-क्या काम किए गए थे?
उपलब्ध जानकारी और प्रस्तावों के अनुसार पहले रेनोवेशन में केवल पेंटिंग या सामान्य मरम्मत नहीं हुई थी, बल्कि कई बड़े कार्य शामिल थे। इनमें—
भवन की संरचनात्मक मजबूती
लकड़ी के हिस्सों की मरम्मत
आधुनिक किचन का निर्माण
अतिरिक्त बेडरूम और बाथरूम
मीटिंग रूम का विकास
इटालियन मार्बल फ्लोरिंग
एंटीक झूमर (Chandeliers)
वेनेशियन ब्लाइंड्स
इलेक्ट्रिकल सिस्टम का अपग्रेड
हेरिटेज इंटीरियर का संरक्षण
जैसे काम शामिल बताए गए थे।
इन कार्यों को देखते हुए अब सबसे बड़ा सवाल यही बनता है कि यदि इतने व्यापक स्तर पर रेनोवेशन हो चुका था, तो नए टेंडर में ऐसा कौन-सा अतिरिक्त काम शामिल है, जिसकी वजह से फिर करीब ₹3 करोड़ खर्च करने की आवश्यकता पड़ रही है।
BMC के ताजा टेंडर के अनुसार इस चरण में मुख्य रूप से—
संरचनात्मक मरम्मत (Structural Repairs)
हेरिटेज बहाली (Heritage Restoration)
आंतरिक सुधार (Interior Improvements)
रखरखाव से जुड़े अतिरिक्त कार्य
सिविल और संरचनात्मक अपग्रेड
जैसे कार्य प्रस्तावित हैं।
हालांकि अभी तक BMC ने सार्वजनिक रूप से दोनों चरणों के कार्यों की विस्तृत तुलना जारी नहीं की है। इसी वजह से यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि पहले किए गए कार्यों से अलग इस बार कौन-कौन से नए काम प्रस्तावित हैं और कितनी लागत किस मद में खर्च की जाएगी।
सार्वजनिक धन से होने वाले किसी भी बड़े सरकारी खर्च में पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण होती है। यही वजह है कि इस पूरे मामले में नागरिकों का ध्यान अब केवल ₹3 करोड़ के नए टेंडर पर नहीं, बल्कि पहले और दूसरे चरण के बीच अंतर पर है।
यदि पहले चरण में भवन की संरचनात्मक मरम्मत, इंटीरियर विकास और हेरिटेज संरक्षण का बड़ा हिस्सा पूरा हो चुका था, तो क्या नए टेंडर में वास्तव में ऐसे अतिरिक्त कार्य शामिल हैं जो पहले नहीं किए गए थे? या फिर यह पहले से स्वीकृत कार्यों का ही विस्तार है?
इन सवालों के जवाब अभी स्पष्ट रूप से सार्वजनिक नहीं हुए हैं। यही कारण है कि अब इस पूरे मामले की चर्चा केवल एक सरकारी टेंडर तक सीमित नहीं रह गई, बल्कि सार्वजनिक धन के उपयोग और प्रशासनिक पारदर्शिता से जुड़े बड़े मुद्दे के रूप में देखी जा रही है।
BMC का पक्ष: “हेरिटेज भवन है, इसलिए अतिरिक्त काम जरूरी”
नए टेंडर पर उठ रहे सवालों के बीच BMC अधिकारियों का कहना है कि महापौर का यह बंगला एक संरक्षित हेरिटेज भवन है। ऐसे भवनों की मरम्मत सामान्य सरकारी इमारतों की तरह नहीं की जा सकती। हर चरण में विशेषज्ञों की सलाह, संरचनात्मक जांच और हेरिटेज संरक्षण के नियमों का पालन करना पड़ता है।
अधिकारियों के अनुसार, नए टेंडर का उद्देश्य भवन की मूल पहचान को सुरक्षित रखते हुए उसकी संरचनात्मक मजबूती बढ़ाना, संरक्षण संबंधी अतिरिक्त कार्य करना और लंबे समय तक भवन को सुरक्षित रखना है।
हालांकि अब तक BMC ने यह विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है कि पहले चरण में पूरा हुआ काम और नए टेंडर में प्रस्तावित कार्य एक-दूसरे से किस प्रकार अलग हैं। यही वजह है कि पारदर्शिता को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं।
विपक्षी दलों का कहना है कि यदि कुछ महीने पहले ही करोड़ों रुपये खर्च कर रेनोवेशन पूरा हो चुका था, तो अब नए टेंडर की आवश्यकता का विस्तृत तकनीकी आधार सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने आरोप लगाया कि बंगला वर्षों तक खाली पड़ा रहा और समय पर रखरखाव नहीं होने के कारण अब एक साथ करोड़ों रुपये खर्च करने की नौबत आई है।
वहीं सत्तापक्ष का कहना है कि हेरिटेज भवनों के संरक्षण में कई बार चरणबद्ध तरीके से काम करना पड़ता है और अतिरिक्त तकनीकी आवश्यकताओं के कारण लागत बढ़ सकती है।
यानी इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों की राय अलग-अलग है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच बहस का केंद्र सरकारी खर्च और उसकी आवश्यकता ही बनी हुई है।
इस खबर के सामने आने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी बहस तेज हो गई।
कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि—
“क्या कुछ महीने पहले किया गया काम पर्याप्त नहीं था?”
“क्या सार्वजनिक धन का बेहतर उपयोग हो सकता था?”
“क्या BMC दोनों टेंडरों का पूरा विवरण सार्वजनिक करेगी?”
हालांकि सोशल मीडिया पर व्यक्त की गई राय व्यक्तिगत विचार हैं। इन्हें आधिकारिक तथ्य नहीं माना जा सकता, लेकिन यह जरूर दिखाता है कि इस मुद्दे को लेकर लोगों में जिज्ञासा और सवाल दोनों मौजूद हैं।
पहली नजर में यह केवल महापौर के सरकारी आवास का मामला लग सकता है, लेकिन वास्तव में यह सार्वजनिक धन के उपयोग से जुड़ा विषय है।
मुंबई जैसे शहर में हर साल हजारों करोड़ रुपये नागरिक सुविधाओं पर खर्च किए जाते हैं।
ऐसे में जब किसी सरकारी भवन पर कम समय में दो बार करोड़ों रुपये खर्च होने की खबर सामने आती है, तो स्वाभाविक रूप से नागरिक यह जानना चाहते हैं कि—
यदि ये दस्तावेज़ सार्वजनिक होते हैं, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि नया टेंडर पहले किए गए कार्यों का विस्तार है या पूरी तरह अलग कार्यों के लिए जारी किया गया है।
यही दस्तावेज़ आगे किसी भी राजनीतिक या प्रशासनिक बहस का आधार बन सकते हैं।
Indian Fasttrack Analysis
इस पूरे मामले में फिलहाल दो बातें एक साथ सच हैं।
पहली—BMC का कहना है कि यह एक हेरिटेज भवन है और उसके संरक्षण के लिए अतिरिक्त कार्य आवश्यक हैं।
दूसरी—कुछ महीने पहले करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद फिर नया टेंडर जारी होने से नागरिकों के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है।
इन दोनों बातों के बीच अंतिम निष्कर्ष तभी निकलेगा, जब BMC दोनों चरणों के कार्यों का विस्तृत तकनीकी विवरण सार्वजनिक करेगी।
फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक जानकारी यही बताती है कि नया टेंडर जारी हो चुका है, लेकिन यह स्पष्ट होना अभी बाकी है कि पहले हुए कार्यों की तुलना में इस बार क्या नया किया जाएगा।
FAQ
Q1. BMC ने महापौर बंगले के लिए नया टेंडर कितने रुपये का जारी किया है?
BMC ने महापौर के आधिकारिक हेरिटेज बंगले के लिए करीब ₹2.9 करोड़ (लगभग ₹3 करोड़) का नया टेंडर जारी किया है।
Q2. यह महापौर बंगला कहाँ स्थित है?
यह बंगला भायखला स्थित वीरमाता जीजाबाई भोसले उद्यान (रानी बाग) परिसर में स्थित BMC की एक हेरिटेज इमारत है, जिसे आधिकारिक महापौर निवास के रूप में विकसित किया जा रहा है।
Q3. विवाद की वजह क्या है?
कुछ महीने पहले ही इसी बंगले पर करोड़ों रुपये खर्च कर रेनोवेशन कराया गया था। अब दोबारा करीब ₹3 करोड़ का नया टेंडर जारी होने से सार्वजनिक धन के इस्तेमाल और खर्च की आवश्यकता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
Q4. BMC इस खर्च को कैसे सही ठहरा रही है?
BMC का कहना है कि यह एक संरक्षित हेरिटेज भवन है। इसकी संरचनात्मक मजबूती, संरक्षण और रखरखाव के लिए विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार अतिरिक्त कार्य आवश्यक हैं।
Q5. क्या यह साबित हो गया है कि पहले वाला काम दोबारा कराया जा रहा है?
नहीं। फिलहाल ऐसा कोई आधिकारिक दस्तावेज़ सार्वजनिक नहीं है जिससे यह साबित हो कि पहले किए गए कार्यों को ही दोबारा कराया जा रहा है। दोनों टेंडरों के विस्तृत BOQ और तकनीकी दस्तावेज़ सामने आने के बाद ही इसकी स्पष्ट तस्वीर मिलेगी।4
Indian Fasttrack Exclusive | दस्तावेज़ों से खुलेगा पूरा सच
हमारी टीम BMC से निम्न दस्तावेज़ हासिल करने का प्रयास कर रही है:
अप्रैल 2026 का Work Order
पहले रेनोवेशन का BOQ
Completion Certificate
Final Bill
नए टेंडर का BOQ
Heritage Committee की मंजूरी
तकनीकी निरीक्षण रिपोर्ट
इन दस्तावेज़ों के सार्वजनिक होने के बाद ही यह पूरी तरह स्पष्ट होगा कि नया टेंडर पहले हुए कार्यों का विस्तार है या पूरी तरह अलग कार्यों के लिए जारी किया गया है। Indian Fasttrack इस मामले से जुड़े हर आधिकारिक अपडेट पर नजर बनाए हुए है।
मुंबई में महज 8 दिनों में 4290 करोड़ लीटर मीठा पानी समंदर में बहा दिया गया। आखिर बीएमसी को ऐसा क्यों करना पड़ा और क्या इस पानी को बचाया जा सकता था? जानिए पूरी कहानी।
मुंबई: मुंबई में कुछ हफ्ते पहले तक पानी बचाने की अपील की जा रही थी, लेकिन अब एक ऐसा आंकड़ा सामने आया है जिसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। 30 जून से 7 जुलाई के बीच हुई भारी बारिश के दौरान बीएमसी के 19 पंपिंग स्टेशनों ने 4,290.5 करोड़ लीटर मीठा पानी समंदर में बहा दिया। यह मात्रा इतनी है कि इससे मुंबई के करीब 1.25 करोड़ लोगों की लगभग 10 दिनों की जरूरत पूरी हो सकती थी।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब शहर पहले से पानी की कमी से जूझ रहा था, तो आखिर इतना पानी समंदर में क्यों बहाना पड़ा?
आखिर मुंबई में पानी समंदर में क्यों बहाया गया?
बीएमसी अधिकारियों के मुताबिक, मुंबई एक द्वीप (Island City) है और समुद्र तल के बेहद करीब बसी हुई है। लगातार भारी बारिश होने पर अगर पंपिंग स्टेशनों के जरिए पानी को तुरंत बाहर नहीं निकाला जाए, तो शहर के कई इलाके गंभीर जलभराव की चपेट में आ सकते हैं।
30 जून से 7 जुलाई के बीच मुंबई में करीब 898 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इसके बाद जलभराव रोकने के लिए पंपिंग स्टेशनों को लगातार चलाना पड़ा।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह पानी बर्बादी नहीं, बल्कि मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर की मजबूरी है। हालांकि, बेहतर जल-संग्रह प्रणाली बनाकर इस नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
कितनी बड़ी है यह मात्रा?
4,290.5 करोड़ लीटर पानी को समझना आसान नहीं है।
यह पानी मुंबई की लगभग 10 दिनों की जरूरत के बराबर है।
यह करीब 8 पवई झीलों के कुल जल भंडार के बराबर माना जा रहा है।
मुंबई की रोजाना पानी की जरूरत लगभग 4,300 MLD (मिलियन लीटर प्रतिदिन) है।
दिलचस्प बात यह है कि बीएमसी रोजाना केवल 3,900 MLD पानी ही सप्लाई कर पाती है। यानी शहर में हर दिन करीब 400 MLD पानी की कमी बनी रहती है।
30 जून से 7 जुलाई के बीच तीन बड़े पंपिंग स्टेशनों ने सबसे ज्यादा पानी समुद्र में छोड़ा।
इर्ला पंपिंग स्टेशन (विले पार्ले): 783.14 करोड़ लीटर
हाजी अली पंपिंग स्टेशन: 595.43 करोड़ लीटर
लव ग्रोव पंपिंग स्टेशन (वर्ली): 535.69 करोड़ लीटर
इन तीन स्टेशनों ने अकेले 1,914.26 करोड़ लीटर पानी बाहर निकाला, जो मुंबई की लगभग साढ़े चार दिनों की जरूरत के बराबर है।
क्या इस पानी को बचाया जा सकता था?
जल विशेषज्ञों का मानना है कि पूरी बारिश को रोककर स्टोर करना फिलहाल संभव नहीं है, लेकिन शहर के भीतर गिरने वाले पानी का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है।
इसके लिए कुछ उपाय सुझाए गए हैं—
बड़े स्तर पर रेनवॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम।
भूमिगत जल भंडारण टैंक।
पुराने तालाबों और झीलों का पुनर्जीवन।
नई जल-संग्रह परियोजनाएं।
भूजल रिचार्ज सिस्टम।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मुंबई की इमारतों और सार्वजनिक स्थानों पर बड़े पैमाने पर वर्षा जल संचयन लागू किया जाए, तो भविष्य में पानी की कमी को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
बीएमसी ने विहार झील परियोजना पर काम शुरू किया है। इस परियोजना के तहत हर साल ओवरफ्लो होने वाले पानी को पंप करके भांडुप फिल्ट्रेशन प्लांट तक पहुंचाया जाएगा।
करीब 98 करोड़ रुपये की इस परियोजना से भविष्य में मुंबई को अतिरिक्त 200 MLD पानी मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा दादर, माटुंगा, अंधेरी और सांताक्रूज जैसे इलाकों में 800 बायोस्वेल (स्पंज पॉकेट) बनाए जा रहे हैं, ताकि बारिश का पानी जमीन के भीतर जाकर भूजल स्तर बढ़ा सके।
मुंबई के लिए सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
मुंबई की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि एक तरफ हर साल मानसून के दौरान करोड़ों लीटर मीठा पानी समुद्र में चला जाता है, जबकि दूसरी तरफ गर्मियों में शहर को पानी की कटौती का सामना करना पड़ता है
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में सिर्फ नई झीलें बनाना ही समाधान नहीं होगा, बल्कि शहर के भीतर जल संरक्षण की नई तकनीकों पर तेजी से काम करना होगा।
चेंबूर में स्कूल बस पर पेड़ गिरने से 11 वर्षीय विहान श्रीवास्तव की मौत के एक महीने बाद बीएमसी ने थर्ड-पार्टी जांच का फैसला लिया है। आंतरिक रिपोर्ट पर सवाल उठने के बाद अब जवाबदेही की मांग तेज हो गई है।
मुंबई: चेंबूर में 30 जून को स्कूल बस पर पेड़ गिरने से 11 वर्षीय विहान श्रीवास्तव की मौत हो गई थी। घटना के एक महीने बाद भी कई सवालों के जवाब नहीं मिल पा रहे हैं। अब बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने मामले में स्वतंत्र (थर्ड-पार्टी) जांच कराने का फैसला लिया है, क्योंकि उसकी आंतरिक रिपोर्ट पर राजनीतिक दलों, स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने गंभीर सवाल उठा रहे हैं।
एक झटके में उजड़ गया परिवार
30 जून की दोपहर चेंबूर के डायमंड गार्डन इलाके में बच्चे स्कूल से घर लौट रहे थे। इसी दौरान करीब 70 साल पुराना पीपल का पेड़ अचानक स्कूल बस पर गिर गया। हादसे में 11 वर्षीय विहान श्रीवास्तव की मौत हो गई, जबकि कई अन्य बच्चे घायल हो गए।
इस हादसे ने पूरे मुंबई को झकझोर दिया। विहान के परिवार का कहना है कि सिर्फ मुआवजा देने से उनका बेटा वापस नहीं आएगा, बल्कि जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
BMC की रिपोर्ट पर क्यों मचा बवाल?
हादसे के बाद बीएमसी ने तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट में सड़क और उद्यान विभाग को पहली नजर में जिम्मेदार नहीं माना, लेकिन नाले के निर्माण का काम करने वाले ठेकेदार और सुपरवाइजिंग कंसल्टेंट पर कुल 7 लाख रुपये का जुर्माना लगाने की सिफारिश की।
रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी नेताओं और स्थानीय लोगों ने सवाल उठाए कि जब पेड़ सार्वजनिक सड़क पर गिरा और एक बच्चे की जान चली गई, तो किसी अधिकारी की जवाबदेही क्यों तय नहीं की गई।
अब होगी थर्ड-पार्टी जांच
विवाद बढ़ने के बाद बीएमसी ने अब पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने का फैसला लिया है। यह जांच किसी बाहरी एजेंसी से कराई जाएगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि हादसे के लिए आखिर कौन जिम्मेदार था।
मुंबई की मेयर ऋतु तावड़े ने भी आंतरिक रिपोर्ट पर आपत्ति जताई थी और कहा था कि केवल ठेकेदार पर जुर्माना लगाना पर्याप्त नहीं है।
क्या पहले से था खतरे का अंदेशा?
कुछ स्थानीय लोगों का दावा है कि पेड़ की जड़ों को लेकर पहले भी चिंता जताई गई थी। मिली जानकारी के मुताबिक, इलाके में चल रहे निर्माण कार्य के दौरान पेड़ की जड़ों पर असर पड़ने की आशंका व्यक्त की गई थी।
हालांकि, बीएमसी की शुरुआती रिपोर्ट में कहा गया कि पेड़ के अंदर सड़न और जड़ों के कमजोर होने की वजह से यह हादसा हुआ।
बीएमसी की जांच रिपोर्ट के अनुसार, 28 जून से 5 जुलाई के बीच मुंबई में पेड़ और शाखाएं गिरने की 1,158 घटनाएं दर्ज की गई थीं। इसके बाद शहर में पेड़ों की सुरक्षा और मॉनसून से पहले होने वाली जांच पर नए सवाल खड़े हो गए हैं।
विहान की मौत के बाद क्या बदलेगा?
थर्ड-पार्टी जांच से अब इन सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है—
क्या निर्माण कार्य ने पेड़ की जड़ों को नुकसान पहुंचाया था?
क्या अधिकारियों को पहले से खतरे की जानकारी थी?
क्या भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए नई नीति बनेगी?
क्या किसी अधिकारी या ठेकेदार पर आपराधिक कार्रवाई होगी?
फिलहाल, विहान का परिवार और स्थानीय लोग इसी इंतजार में हैं कि इस हादसे की जिम्मेदारी आखिर किसकी तय होगी।