Kandivali West Ekta Nagar illegal furnace factories causing fire hazards and pollution. Despite BMC notice, illegal burning of lead and scrap continues, locals allege inaction.
मुंबई: कांदिवली पश्चिम के एकता नगर गली नंबर 10, प्रभाग क्रमांक 31 के झोपड़पट्टी इलाके में अवैध “आग की भट्टी” कारखानों ने स्थानीय लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। बार-बार शिकायतों के बावजूद BMC प्रशासन सिर्फ नोटिस देकर मामला ठंडा करता नजर आ रहा है, जबकि इलाके में कई बार आगजनी की घटनाएं हो चुकी हैं।
🚨 Illegal Furnace Factories से खतरे में जान
स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में खुलेआम अवैध भट्टियां चलाई जा रही हैं, जहां सीसा (Lead), कास्टिंग मेटल और कचरा जलाया जाता है। इससे जहरीला धुआं निकल रहा है, जो सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य पर असर डाल रहा है। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सांस लेने में तकलीफ, एलर्जी और अन्य गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है।
🔥 Fire Hazard: पहले भी हो चुकी हैं आग की घटनाएं
प्रशासनिक और फायर ब्रिगेड की रिपोर्ट के अनुसार, इन अवैध भट्टियों की वजह से इलाके में कई बार आग लग चुकी है। इसके बावजूद इन खतरनाक यूनिट्स को बंद कराने के लिए कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया है। यह स्थिति कभी भी बड़े हादसे में बदल सकती है।
👥 कौन चला रहा है ये अवैध कारोबार?
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक अजगर, जमाल, अज्जू, लड्डन, नसिबूल्ला और यादव नाम के लोग यहां बेखौफ होकर ये अवैध भट्टी का धंधा चला रहे हैं। इनके खिलाफ कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
एक गाला मालिक चौहान से जब इस बारे में शिकायत की गई तो उसने साफ शब्दों में कहा: 👉 “मुझे ये भट्टी वाले अच्छा खासा भाड़ा देते हैं, वो क्या करते हैं उससे मुझे कोई लेना-देना नहीं।”
इस बयान ने साफ कर दिया कि पैसों के लालच में लोगों की जान जोखिम में डाली जा रही है।
🏛️ BMC की कार्रवाई पर सवाल
कांदिवली BMC प्रशासन ने स्थल निरीक्षण के बाद नोटिस जरूर जारी किया, लेकिन उसके बाद कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई। स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि: 👉 क्या सिर्फ नोटिस देना ही BMC की जिम्मेदारी है? 👉 कब बंद होंगी ये खतरनाक अवैध भट्टियां?
😡 स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी
लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई ना होने से लोग हताश और गुस्से में हैं। लोगों का कहना है कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
Mumbai के Kandivali East में कचरे का अंबार, road block और traffic chaos। BMC की लापरवाही से लोगों को बदबू, गंदगी और accident risk का सामना।
मुंबई: कांदिवली ईस्ट (Kandivali East) में इन दिनों garbage crisis ने लोगों की जिंदगी मुश्किल कर दी है। लोखंडवाला (Lokhandwala) इलाके के क्रांति नगर रिक्शा स्टैंड के पास 60 फीट चौड़ी सड़क पर कचरे के बड़े-बड़े ढेर जमा हो गए हैं, जिससे पूरा रास्ता लगभग बंद हो गया है। इस वजह से यातायात बुरी तरह प्रभावित हो रहा है और लोगों को मजबूरी में रॉन्ग साइड से गुजरना पड़ रहा है।
60 फीट सड़क पर कचरे का कब्जा
यह सड़क दुर्गा नगर (Durga Nagar) और कुरार (Kurar) को जोड़ने वाला एक अहम मार्ग है, लेकिन पिछले कई दिनों से यहां रोजाना कचरे का अंबार लगा रहता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, कचरे के ढेर इतने बड़े हैं कि सड़क का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह ब्लॉक हो गया है, जिससे गाड़ियों की आवाजाही मुश्किल हो गई है।
रॉन्ग साइड चलने की मजबूरी, बढ़ा हादसों का खतरा
कचरे की वजह से वाहन चालकों को रॉन्ग साइड से आना-जाना पड़ रहा है, जिससे accident risk काफी बढ़ गया है।
लोगों का कहना है कि रोजाना यहां छोटे-मोटे हादसे होते रहते हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा।
सीवर लाइन की खुदाई से और बिगड़ी स्थिति
स्थिति और ज्यादा खराब इसलिए हो गई है क्योंकि इसी सड़क पर sewer line के काम के नाम पर खुदाई भी की गई है।
इससे सड़क और संकरी हो गई है और ट्रैफिक जाम की समस्या और बढ़ गई है।
बस स्टॉप पर खड़े यात्रियों की मुश्किलें
सबसे खराब हालात बस स्टॉप के पास देखने को मिलते हैं, जहां लोगों को कचरे के ढेर के बीच खड़े होकर बस का इंतजार करना पड़ रहा है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह समस्या पिछले कई दिनों से लगातार बनी हुई है।
इसके बावजूद Brihanmumbai Municipal Corporation (BMC) के किसी भी अधिकारी ने अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
स्थानीय नगरसेविका का बयान
स्थानीय नगरसेविका नीलम गुरौव ने कहा:
“यह कचरा ‘पी नॉर्थ’ यानी क्रांति नगर स्लम का है, लेकिन अधिकारी जिम्मेदारी टाल रहे हैं। मेरा मानना है कि कचरा कहीं का भी हो, पूरा इलाका साफ रहना चाहिए और इसमें BMC को मदद करनी चाहिए।”
रिक्शा चालक ने उठाए सवाल
एक स्थानीय रिक्शा चालक ने नाराजगी जताते हुए कहा:
“BMC को कचरा पेटी को कहीं और शिफ्ट करना चाहिए। जब घर-घर से कचरा उठाया जाता है, तो इतना कचरा सड़क पर कैसे आ जाता है? BMC का काम संदिग्ध लग रहा है।”
Kandivali East Lokhandwala Township में BMC ने abandoned vehicles यानी ‘खटारे’ के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू किया है। 48 घंटे का notice देने के बाद luxury bus, motorcycles और autorickshaw हटाए गए। Pay-and-Park सिस्टम लाने की भी तैयारी।
मुंबई:Kandivali East Lokhandwala Township में illegal hawkers पर बड़ी कार्रवाई के कुछ ही दिनों बाद अब Brihanmumbai Municipal Corporation (BMC) ने सड़कों पर महीनों से खड़े abandoned vehicles यानी स्थानीय भाषा में कहे जाने वाले ‘khataras’ के खिलाफ अभियान शुरू कर दिया है।
बुधवार को R-South ward की टीम ने traffic police के साथ मिलकर कई ऐसे वाहनों को हटाया जो लंबे समय से सड़क किनारे पड़े थे और residents के लिए परेशानी का कारण बन रहे थे। अधिकारियों के मुताबिक, इन वाहनों पर पहले 48 घंटे का notice चिपकाया गया था, लेकिन मालिकों के सामने न आने के बाद उन्हें जब्त कर लिया गया।
🚧 48 घंटे का नोटिस, फिर सीधी कार्रवाई
R-South ward के assistant engineer (maintenance) Hemant Pant ने बताया कि मुंबई में abandoned vehicles हटाने के लिए BMC ने तीन अलग-अलग contractors नियुक्त किए हैं —
एक Mumbai city के लिए
एक Eastern suburbs के लिए
और एक Western suburbs के लिए
Pant के मुताबिक, स्थानीय लोगों की मदद से ऐसे वाहनों की पहचान की गई। इसके बाद उन पर 48-hour warning notice लगाया गया था।
उन्होंने कहा, “अगर 48 घंटे में वाहन मालिक सामने नहीं आते हैं, तो BMC उन्हें seize कर लेती है। Lokhandwala Township में भी यही प्रक्रिया अपनाई गई। किसी ने वाहन claim नहीं किया, इसलिए उन्हें सड़क से हटा दिया गया।”
🔧 जब्त वाहनों को किया जाएगा dismantle
BMC अधिकारियों के मुताबिक, जब्त किए गए इन वाहनों को आगे dismantle किया जाएगा।
उनके spare parts को बेचकर इस ऑपरेशन में आने वाला खर्च recover किया जाएगा। यह प्रक्रिया मुंबई में abandoned vehicles हटाने के standard civic rules के तहत की जाती है।
स्थानीय corporator Neelam Gurav ने बताया कि बुधवार को शुरू हुए इस अभियान के पहले चरण में कई वाहनों पर कार्रवाई की गई।
इसमें शामिल थे:
1 Luxury Bus
6 से 7 Motorcycles
1 Autorickshaw
उन्होंने कहा कि आने वाले चरण में heavy vehicles पर भी कार्रवाई होगी जो सड़क पर जगह घेरकर nuisance पैदा कर रहे हैं।
⚠️ abandoned bus बन गया था असामाजिक गतिविधियों का अड्डा
Neelam Gurav ने बताया कि Lokhandwala में खड़ी एक बड़ी बस लंबे समय से abandoned थी।
उन्होंने कहा, “उस बस का इस्तेमाल कुछ anti-social elements पेशाब करने और गंदगी फैलाने के लिए कर रहे थे, जिससे आसपास के लोगों को बहुत बदबू और परेशानी हो रही थी। ऐसे abandoned vehicles इलाके की safety के लिए भी खतरा बन जाते हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि इन वाहनों के हटने के बाद अब BMC sweepers को सड़क साफ करने में भी आसानी होगी।
🧹 Residents ने कहा – अब सड़कें होंगी साफ और सुरक्षित
Lokhandwala Township के निवासी Manish Bhatnagar ने बताया कि उनके building के पीछे वाली सड़क अक्सर abandoned vehicles की वजह से blocked रहती थी।
उन्होंने कहा, “सुबह walk करते समय कई बार सड़क पर शराब की बोतलें, needles और यहां तक कि condoms भी पड़े दिखते थे। यह जगह धीरे-धीरे unsafe बन रही थी। अच्छा है कि अब BMC ने कार्रवाई शुरू कर दी है।”
⚡ Hawkers drive के बाद अब vehicles पर BMC की कार्रवाई
गौरतलब है कि हाल ही में Lokhandwala Township में illegal hawkers और shop extensions के खिलाफ बड़ा anti-encroachment drive चलाया गया था।
उस दौरान कुछ hawkers ने civic team पर हमला भी कर दिया था और उनके equipment को नुकसान पहुंचाया था।
इस मामले में गिरफ्तार किए गए 5 आरोपियों को अदालत ने 20 मार्च तक judicial custody में भेज दिया है।
🚗 Street Parking बनी बड़ी समस्या
Samata Nagar traffic division के Senior Police Inspector Jagdish Bhopale ने बताया कि Kandivali East में abandoned vehicles हटाना आसान नहीं है।
उन्होंने कहा कि इलाके में street parking बहुत बड़ी समस्या बन चुकी है।
“कई residents के पास एक से ज्यादा cars हैं, लेकिन society parking में जगह नहीं होने के कारण वे उन्हें सड़क पर पार्क कर देते हैं।”
💰 Kandivali East में Pay-and-Park योजना की तैयारी
Traffic police अब Pay-and-Park system लागू करने की सिफारिश कर रही है।
यह योजना इन इलाकों में लागू हो सकती है:
Lokhandwala Township
Thakur Complex
Thakur Village
Ashok Nagar
अधिकारियों के मुताबिक, इससे
सड़क पर parking व्यवस्थित होगी
traffic congestion कम होगा
और सरकार को revenue generation में भी मदद मिलेगी।
📌 FAQ
1. BMC ने Kandivali East में क्या कार्रवाई शुरू की है?
BMC ने Lokhandwala Township में abandoned vehicles (khataras) हटाने का अभियान शुरू किया है।
2. वाहन हटाने से पहले क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है?
वाहनों पर पहले 48 घंटे का notice लगाया जाता है। अगर मालिक नहीं आते तो वाहन जब्त कर लिए जाते हैं।
3. जब्त किए गए वाहनों का क्या होता है?
उन्हें dismantle करके उनके spare parts बेच दिए जाते हैं।
4. पहले चरण में कितने वाहन हटाए गए?
पहले चरण में 1 luxury bus, 6-7 motorcycles और 1 autorickshaw हटाए गए।
5. Kandivali East में parking समस्या का समाधान क्या हो सकता है?
Traffic police ने Pay-and-Park system लागू करने का सुझाव दिया है।
Mumbai में Dahisar और Borivali को पानी सप्लाई करने वाला Borivali Hill Reservoir 30 साल पुराना हो चुका है। BMC ने Structural Audit के बाद 37 करोड़ रुपये की लागत से तुरंत RepairWork शुरू करने का फैसला लिया है।
मुंबई:Dahisar और Borivali इलाके में रहने वाले लाखों लोगों के लिए बड़ी खबर है। Brihanmumbai Municipal Corporation (BMC) ने साफ किया है कि Borivali Tekdi पर बना पुराना जलाशय अब जर्जर हालत में हो चुका है और उसमें से Water Leakage हो रहा है। यही वजह है कि अब नगर निगम ने Immediate Structural Repair Work शुरू करने का फैसला लिया है।
🏗️ 30 साल पुराने Reservoir का Structural Audit
BMC के मुताबिक, मध्य क्षेत्र में स्थित Borivali Hill Reservoir No. 2 और No. 3 से Borivali और Dahisar के कई इलाकों में Drinking Water Supply की जाती है।
Reservoir No. 2 का निर्माण वर्ष 1992 में हुआ था। 👉 Storage Capacity: 36.2 Million Litres
Reservoir No. 3 का निर्माण वर्ष 1996 में हुआ था। 👉 Storage Capacity: 36.4 Million Litres
दोनों Reservoir अब 30 साल से ज्यादा पुराने हो चुके हैं। इसी वजह से BMC के Technical Advisors ने इनका Structural Audit किया।
📉 Water Leakage और Low Pressure Supply की बड़ी वजह
Structural Audit रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि दोनों जलाशयों को Immediate Comprehensive Structural Repair की जरूरत है।
अधिकारियों के अनुसार:
Reservoir से Water Seepage हो रहा है
Expected Level तक Water Storage Capacity नहीं बढ़ाई जा सकती
Dahisar और Borivali में Low Water Pressure की समस्या सामने आ रही है
इसी वजह से इन दोनों Reservoir की मरम्मत को अनिवार्य माना गया है।
Reservoir की छत पर लगी Waterproofing Layer हटाई जाएगी
Cement Concrete Structure को Iron Rods (Reinforcement) तक खोला जाएगा
जंग लगी लोहे की छड़ों की सफाई और Anti-Rust Treatment
आवश्यक जगहों पर Valve Installation
Structural Strengthening Measures
इस पूरे Project पर लगभग ₹37 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
🏢 किस कंपनी को मिला ठेका?
Reservoir Repair Project के लिए API Civilcon Private Limited को चुना गया है।
BMC Water Engineering Department के अधिकारियों के अनुसार, यह काम प्राथमिकता पर शुरू किया जाएगा ताकि Dahisar–Borivali Water Supply System को स्थिर और सुरक्षित बनाया जा सके।
❓ FAQ Section
1. Borivali Reservoir कितने साल पुराना है?
Reservoir No. 2 (1992) और Reservoir No. 3 (1996) में बने थे, यानी 30 साल से ज्यादा पुराने हैं।
2. Water Supply में दिक्कत क्यों आ रही थी?
Water Leakage और कम Storage Capacity की वजह से Low Pressure Supply हो रही थी।
3. Repair Work पर कितनी लागत आएगी?
करीब 37 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
4. किस कंपनी को ठेका मिला है?
API Civilcon Private Limited को Repair Contract दिया गया है।
Bandra (W) की St Andrew’s Road एक बार फिर खुदाई की वजह से चर्चा में। Bandra Gymkhana के बाहर carriageway का हिस्सा excavate, traffic single lane पर। BMC ने Chimbai pumping stationupgradation और micro-tunnelling बताया कारण।
मुंबई: शहर के पॉश इलाकों में गिने जाने वाले Bandra (West) में एक बार फिर सड़क खुदाई को लेकर residents में गुस्सा देखने को मिल रहा है। Bandra Gymkhana के बाहर स्थित StAndrew’s Road का एक हिस्सा दोबारा खोद दिया गया है, जिससे traffic single lane तक सिमट गया है और रोजाना आने-जाने वाले motorists को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सड़क पहले भी कई बार मरम्मत और निर्माण के नाम पर खोदी जा चुकी है, और अब फिर से excavation शुरू होने से “never-ending road work” जैसा हाल बन गया है।
📍 St Andrew’s Road पर क्या हुआ?
ताजा घटनाक्रम में St Andrew’s Road के एक हिस्से, खासकर Bandra Gymkhana के बाहर के stretch को दोबारा excavate किया गया। carriageway का बड़ा हिस्सा खोद दिए जाने के कारण गाड़ियों की आवाजाही सिर्फ एक लेन तक सीमित हो गई है।
इस वजह से peak hours में लंबा traffic jam लग रहा है और local commuters को देरी का सामना करना पड़ रहा है। Residents का कहना है कि बिना proper advance notice और clear signage के खुदाई शुरू कर दी गई।
😡 Residents का गुस्सा: “कब खत्म होगा ये road work?”
Bandra (W) के कई स्थानीय निवासियों ने नाराज़गी जताते हुए कहा कि यह सड़क पिछले कुछ सालों से बार-बार खोदी जा रही है। एक resident ने कहा,
“हर कुछ साल में यही सड़क खोद दी जाती है। पहले repair, फिर concretisation, अब pumping station का काम। आखिर planning है या नहीं?”
लोगों का कहना है कि यह इलाका पहले से ही narrow roads और heavy traffic के लिए जाना जाता है। ऐसे में एक लेन कम हो जाने से हालात और बिगड़ जाते हैं।
अगर पीछे की कहानी देखें तो May 2018 में Brihanmumbai Municipal Corporation (BMC) ने St Andrew’s Road पर paver blocks हटाकर asphalt बिछाने का काम शुरू किया था।
लेकिन यह काम पूरा नहीं हो पाया। Residents की शिकायतों के बाद contractor की services terminate कर दी गई थीं। आरोप था कि काम की quality shoddy थी और execution में कई खामियां थीं।
यानी 2018 में शुरू हुआ road repair project अधूरा ही छूट गया, जिससे लोगों में पहले से ही नाराज़गी थी।
🛣️ 2021 में Concretisation का प्लान
इसके बाद 2021 में civic body ने इस सड़क को concretise करने की योजना बनाई थी। यानी asphalt की जगह पूरी concrete road बनाने की बात कही गई थी ताकि लंबे समय तक durability बनी रहे।
हालांकि, अब जो खुदाई हो रही है, वह उस concretisation plan से जुड़ी नहीं बताई जा रही है।
🏭 BMC का स्पष्टीकरण: Road Repair नहीं, Pumping Station Upgrade
Civic officials का कहना है कि वर्तमान excavation का road repair या resurfacing से कोई संबंध नहीं है।
BMC अधिकारियों के अनुसार, यह काम Chimbai pumping station upgradation project का हिस्सा है। इसमें micro-tunnelling तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है और जो हिस्सा खोदा गया है, वह एक chamber बनाने के लिए है।
यानी, सड़क को पूरी तरह से तोड़ने के बजाय एक specific section में chamber construction के लिए excavation किया गया है।
🔧 Micro-Tunnelling क्या है और क्यों जरूरी?
Micro-tunnelling एक modern underground construction technique है, जिसमें बिना पूरी सड़क तोड़े जमीन के नीचे pipeline या drainage system बिछाया जाता है।
Chimbai pumping station upgrade का मकसद reportedly drainage और stormwater management system को बेहतर बनाना है। Bandra जैसे coastal और low-lying areas में monsoon के दौरान waterlogging बड़ी समस्या रहती है।
Officials का दावा है कि यह project long-term flood mitigation के लिए जरूरी है।
🚗 Traffic Impact और Daily Commuters की परेशानी
हालांकि BMC का तर्क है कि काम जरूरी है, लेकिन ground reality यह है कि traffic single lane पर आ जाने से रोजाना सैकड़ों motorists प्रभावित हो रहे हैं।
School buses को देरी
Office commuters को लंबा जाम
Local deliveries पर असर
Residents का कहना है कि अगर यह project unavoidable है, तो proper traffic management plan और clear timeline दी जानी चाहिए।
📣 Transparency और Coordination पर सवाल
Local नागरिकों का सवाल है कि जब 2018 में asphalt work अधूरा रह गया और contractor terminate हुआ, और 2021 में concretisation plan आया, तो क्या इन projects के बीच proper coordination हुआ था?
Experts का मानना है कि Mumbai में multiple infrastructure projects अक्सर अलग-अलग departments के बीच coordination की कमी के कारण overlapping हो जाते हैं।
Residents की मांग है कि future planning में integrated approach अपनाई जाए ताकि एक ही सड़क बार-बार न खोदी जाए।
🌧️ Monsoon से पहले काम पूरा होगा?
Bandra (W) के लोग इस बात को लेकर भी चिंतित हैं कि अगर excavation लंबा चला तो monsoon के दौरान हालात और खराब हो सकते हैं।
Waterlogging और potholes का खतरा बढ़ सकता है। फिलहाल BMC ने work completion timeline को लेकर कोई सार्वजनिक विस्तृत बयान जारी नहीं किया है।
🏙️ Bigger Urban Issue: Mumbai Road Digging Cycle
St Andrew’s Road का मामला सिर्फ एक isolated incident नहीं है। Mumbai के कई इलाकों में residents अक्सर “dig, repair, re-dig” cycle की शिकायत करते रहे हैं।
Urban infrastructure experts का कहना है कि long-term planning, utility mapping और centralized approval system से इस समस्या को काफी हद तक रोका जा सकता है।
❓ FAQ Section
Q1. St Andrew’s Road को फिर से क्यों खोदा गया है? BMC के अनुसार यह road repair नहीं, बल्कि Chimbai pumping station upgradation project का हिस्सा है, जिसमें micro-tunnelling और chamber construction शामिल है।
Q2. 2018 में क्या हुआ था? BMC ने paver blocks हटाकर asphalt बिछाने का काम शुरू किया था, लेकिन quality issues की शिकायत के बाद contractor की services terminate कर दी गईं और काम अधूरा रह गया।
Q3. 2021 में क्या योजना थी? Civic body ने सड़क को concretise करने की योजना बनाई थी।
Q4. अभी traffic पर क्या असर है? Carriageway का हिस्सा खोद दिए जाने से traffic single lane तक सीमित है, जिससे जाम और देरी हो रही है।
Q5. Residents की मुख्य मांग क्या है? Proper planning, transparency, timeline और बेहतर traffic management।
Chembur Subhash Nagar में under construction building से 6 मजदूर गिरने का बड़ा हादसा। 1 की मौत, 5 घायल। Mayor Ritu Tawde ने सख्त कार्रवाई और culpablehomicide का केस दर्ज करने के निर्देश दिए। Rajawadi Hospital में इलाज जारी।
मुंबई:Chembur इलाके के Subhash Nagar में शनिवार दोपहर बड़ा construction site accident सामने आया। Under construction building की 7वीं मंज़िल पर काम करते वक्त 6 मजदूर नीचे गिर गए। इस दर्दनाक हादसे में 1 मजदूर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 5 मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। घायलों का इलाज घाटकोपर स्थित Rajawadi Hospitalमें चल रहा है।
Mayor Ritu Tawde ने किया मौके का दौरा
हादसे की जानकारी मिलते ही मुंबई की महापौर Ritu Tawde तुरंत घटनास्थल पहुंचीं। उन्होंने पूरे मामले की primaryinvestigation की जानकारी ली। बाद में वह सीधे Rajawadi Hospital पहुंचीं और घायल मजदूरों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना।
उनके साथ उपमहापौर Sanjay Ghadi और विरोधी पक्षनेता Kishori Pednekar भी मौजूद थे।
Building Project ‘Aditya Raj’ पर उठे सवाल
महापौर ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि यह इमारत ‘Aditya Raj’ नामक developer के माध्यम से बनाई जा रही है। प्रारंभिक जांच में safety negligence और भारी लापरवाही सामने आई है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब हादसा हुआ, तब साइट पर supervising engineer कहां था? क्या मजदूरों को proper safety gear दिया गया था? क्या scaffolding और सुरक्षा इंतज़ाम standard guidelines के मुताबिक थे?
Mayor ने साफ कहा कि इस तरह की construction negligence बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
Culpable Homicide का केस दर्ज करने के निर्देश
महापौर Ritu Tawde ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) और संबंधित विभागों को सख्त निर्देश दिए हैं कि लापरवाही बरतने वाले developer और contractor के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
उन्होंने साफ तौर पर कहा कि दोषियों पर culpable homicide यानी मनुष्यवध का मामला दर्ज किया जाए। साथ ही भविष्य में ऐसे हादसे न हों, इसके लिए BMC और MHADA प्राधिकरण को सख्त monitoring और safety audit करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
प्राथमिक जानकारी के मुताबिक, इमारत की 7वीं मंज़िल पर काम चल रहा था। इसी दौरान परांची (scaffolding) अचानक टूट गई और 6 मजदूर नीचे गिर पड़े।
हादसे में एक मजदूर की मौत हो गई, जबकि 5 घायल मजदूरों को तुरंत Rajawadi Hospital में भर्ती कराया गया।
एक मजदूर ICU में भर्ती
राजावाड़ी अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, 5 घायलों में से एक की हालत बेहद गंभीर है और उसे ICU में रखा गया है। बाकी मजदूरों का इलाज जारी है।
महापौर ने अस्पताल प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि सभी घायलों को best medical treatment दिया जाए और किसी भी तरह की लापरवाही न हो।
Mumbai Construction Safety पर बड़ा सवाल
यह हादसा एक बार फिर मुंबई में construction site safety, labour safety laws, और BMC action पर सवाल खड़े कर रहा है। लगातार हो रहे building accidents से मजदूरों की सुरक्षा पर गंभीर चिंता जताई जा रही है।
FAQ
Q1. Chembur में हादसा कब हुआ?
यह हादसा 28 फरवरी 2026 को दोपहर में हुआ।
Q2. कितने मजदूर गिरे और कितनों की मौत हुई?
कुल 6 मजदूर गिरे, जिनमें 1 की मौत हुई और 5 घायल हैं।
Q3. घायलों का इलाज कहां चल रहा है?
घायलों का इलाज घाटकोपर के Rajawadi Hospital में जारी है।
Q4. हादसे की वजह क्या बताई जा रही है?
प्राथमिक जांच में scaffolding टूटने और safety negligence की बात सामने आई है।
Q5. महापौर ने क्या कार्रवाई के निर्देश दिए?
Developer और contractor पर सख्त कार्रवाई और culpable homicide का केस दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।
मालाड पूर्व के रहेजा कॉम्प्लेक्स के पास स्थित विजय साळसकर उद्यान का नवीनीकरण पूरा, शिवसेना विधायक सुनील प्रभू के प्रयास से आम जनता के लिए खोला गया। बच्चों के लिए रॉक क्लाइंबिंग, वॉकिंग ट्रैक और वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष व्यवस्था।
मुंबई: मालाड पूर्व के दिंडोशी क्षेत्र में रहेजा कॉम्प्लेक्स के पास स्थित स्वर्गीय विजय साळसकर उद्यान को अब आम नागरिकों के लिए खोल दिया गया है। दिंडोशी से शिवसेना विधायक सुनील प्रभू के लगातार प्रयासों के बाद Brihanmumbai Municipal Corporation (BMC) ने इस उद्यान का नवीनीकरण कर इसे लोकाग्रह के चलते जनता को समर्पित किया।
📍 दिंडोशी वॉर्ड 36 में था जर्जर हाल
दिंडोशी विभाग के वॉर्ड क्रमांक 36, मालाड ईस्ट स्थित रहेजा कॉम्प्लेक्स इलाके के नागरिक लंबे समय से इस उद्यान की खराब स्थिति से परेशान थे। मॉर्निंग वॉक के लिए समुचित जगह नहीं थी और बच्चों के खेलने की भी कोई खास व्यवस्था नहीं थी। इससे स्थानीय रहवासियों को रोजाना दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।
🏗️ विधायक सुनील प्रभू का लगातार फॉलोअप
स्थानीय लोगों की मांग को देखते हुए विधायक सुनील प्रभू ने BMC के समक्ष लगातार पाठपुरावा किया। उन्होंने मुंबई महानगरपालिका के बजट में इस उद्यान के नवीनीकरण के लिए विशेष निधि उपलब्ध कराने की मांग की। इसके बाद 29 अप्रैल 2025 को इस प्रोजेक्ट का काम आधिकारिक रूप से शुरू हुआ।
🌳 4600 वर्गमीटर में तैयार हुआ आधुनिक गार्डन
करीब 4600 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैले इस मैदान को अब आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है। उद्यान को बच्चों, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।
इन सुविधाओं से अब यह गार्डन स्थानीय परिवारों के लिए एक प्रमुख पिकनिक और फिटनेस स्पॉट बन गया है।
👥 उद्घाटन के दौरान मौजूद रहे कई गणमान्य
उद्यान के उद्घाटन अवसर पर पूर्व नगरसेवक प्रमुख सुधीर गुजर, शिवसेना की पूर्व नगरसेविका रीना सुर्वे, उपविधान संघटिका रुचिता आरोस्कर, उपशाखा प्रमुख अल्पेश चव्हाण, उपविभाग समन्वयक कृष्णकांत सुर्वे सहित रहेजा परिसर के अनेक नागरिक उपस्थित थे।
स्थानीय लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए विधायक सुनील प्रभू का आभार व्यक्त किया।
🌆 मालाड ईस्ट के लिए क्यों अहम है यह उद्यान?
तेजी से विकसित हो रहे मालाड ईस्ट और दिंडोशी इलाके में ओपन स्पेस की कमी एक बड़ी समस्या रही है। ऐसे में विजय साळसकर उद्यान का पुनर्विकास स्थानीय निवासियों के लिए राहत की खबर है। यह उद्यान अब फिटनेस, बच्चों के मनोरंजन और सामुदायिक मेलजोल का प्रमुख केंद्र बनेगा।
❓ FAQ Section
Q1: विजय साळसकर उद्यान कहाँ स्थित है?
मालाड पूर्व के दिंडोशी वॉर्ड 36 में रहेजा कॉम्प्लेक्स के पास।
Q2: उद्यान का नवीनीकरण कब शुरू हुआ?
29 अप्रैल 2025 को काम शुरू हुआ।
Q3: उद्यान में कौन-कौन सी सुविधाएं हैं?
रॉक क्लाइंबिंग, व्यायाम उपकरण, वॉकिंग ट्रैक, वरिष्ठ नागरिकों के लिए बैठने की व्यवस्था, व्यूइंग गैलरी और हरा-भरा लॉन।
Q4: इस परियोजना के पीछे किसका प्रयास रहा?
शिवसेना विधायक सुनील प्रभू के लगातार फॉलोअप से यह काम संभव हुआ।
मुंबई में BMC का बड़ा क्लाइमेट एक्शन प्लान – 2050 तक सभी म्युनिसिपल बिल्डिंग होंगी Net-Zero Energy और Net-Zero Carbon. Nair Hospital और R/Central Ward Office में पायलट प्रोजेक्ट शुरू, जानें पूरी डिटेल।
मुंबई: Brihanmumbai Municipal Corporation (BMC) की इमारतों में बिजली खपत को लेकर चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। ‘Net Zero Action Plan for Municipal Buildings of Mumbai and Panvel’ स्टडी के मुताबिक, मुंबई के म्युनिसिपल स्कूल, ऑफिस, अस्पताल और ऑडिटोरियम मिलकर BMC की कुल बिजली खपत का 14.7 प्रतिशत हिस्सा लेते हैं। वहीं C40 की आकलन रिपोर्ट के अनुसार, नगर निगम के अधिकार क्षेत्र वाली इमारतें कुल नगरपालिका बिजली खपत का 19 प्रतिशत उपयोग करती हैं।
🔎 मुंबई क्लाइमेट वीक में हुआ ऐलान
यह एक्शन प्लान राज्य सरकार ने Mumbai Climate Week के दौरान घोषित किया। इस योजना का मकसद 2050 तक सभी मौजूदा नगर निगम भवनों को Net-Zero Energy और नए भवनों को Net-Zero Carbon में बदलना है।
इस रिपोर्ट को ग्लोबल क्लाइमेट नेटवर्क C40 ने तैयार किया है।
⚡ सबसे ज्यादा बिजली खाते हैं BMC अस्पताल
रिपोर्ट के मुताबिक BMC की बिजली खपत का बंटवारा इस तरह है:
🏥 म्युनिसिपल अस्पताल – 9.8%
🏢 म्युनिसिपल ऑफिस – 3.8%
🏫 म्युनिसिपल स्कूल – 1.2%
🎭 ऑडिटोरियम – 1%
यानी अस्पताल और ऑफिस सबसे ज्यादा बिजली खर्च कर रहे हैं, इसलिए पहले इन्हीं पर फोकस किया जाएगा।
🏫 किन-किन इमारतों का हुआ एनर्जी ऑडिट?
स्टडी के तहत कई प्रमुख भवनों में एनर्जी ऑडिट वॉकथ्रू किया गया:
स्कूल
LK Waghji Mumbai Public School
Chhatrapati Shivaji Maharaj Nag. School No.1
Sodawala Municipal School
अस्पताल
KEM Hospital
Nair Hospital
वार्ड ऑफिस
R/Central Ward Office
H/West Ward Office
ऑडिटोरियम
Kalidas Natyagriha
Prabodhankar Natyagriha
🏗️ नए BMC भवनों के लिए 5 बड़ा फॉर्मूला
नई म्युनिसिपल बिल्डिंग को Net-Zero Carbon बनाने के लिए रिपोर्ट में पांच अहम सुझाव दिए गए हैं:
Passive Design (प्राकृतिक रोशनी और हवा का इस्तेमाल)
Active Energy Efficient सिस्टम
Low-Carbon Construction Material
Renewable Energy Integration (Rooftop Solar)
Clean Energy Procurement
💡 पुराने भवनों में कम खर्च वाले उपाय
BMC के बजट दबाव को देखते हुए रिपोर्ट ने लो-कॉस्ट एनर्जी सेविंग उपाय सुझाए हैं:
पारंपरिक लाइट की जगह LED
सामान्य पंखों की जगह BLDC Fans (30-40% कम बिजली खपत)
रिपोर्ट बताती है कि BMC के कुल कैपिटल बजट का 32.18% हिस्सा क्लाइमेट संबंधित गतिविधियों में जाता है। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि सिर्फ 0.1% (करीब 32.5 करोड़ रुपये) ही Rooftop Solar और LED रेट्रोफिट के लिए रखा गया है।
🎯 2030 और 2040 के टारगेट
2050 के अंतिम लक्ष्य से पहले चरणबद्ध योजना बनाई गई है:
2030 तक: बेसलाइन ऑडिट और लो-कॉस्ट उपाय पूरे करना
2040 तक: 50% भवनों को Rooftop Solar और एनर्जी एफिशिएंसी से Net-Zero की ओर लाना
2050 तक: सभी पुराने भवन Net-Zero Energy, नए भवन Net-Zero Carbon
🏥 Nair Hospital और BMC R/Central Ward में पायलट प्रोजेक्ट
ऊर्जा खपत ज्यादा होने के कारण पायलट प्रोजेक्ट इन दो जगहों पर शुरू होगा:
Nair Hospital
R/Central Ward BMC Office
प्रस्तावित बदलाव:
AC का तापमान नियंत्रण
पुराने पंखों की बदली
AC अपग्रेड
Rooftop Solar Installation
⏳ Payback Period
Nair Hospital: 2.5 से 5 साल
R/Central Ward Office: 6 से 10 साल
📊 क्यों अहम है यह योजना?
मुंबई जैसे महानगर में बढ़ते बिजली बिल, कार्बन उत्सर्जन और क्लाइमेट चेंज के खतरे को देखते हुए यह योजना शहर को ग्रीन और सस्टेनेबल बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।
अगर यह मॉडल सफल रहा तो इसे BMC की सभी इमारतों में लागू किया जाएगा।
❓ FAQ Section
Q1: BMC की कितनी बिजली खपत म्युनिसिपल भवनों में होती है?
करीब 14.7% बिजली खपत स्कूल, अस्पताल, ऑफिस और ऑडिटोरियम में होती है।
Q2: सबसे ज्यादा बिजली कौन-सा विभाग खर्च करता है?
म्युनिसिपल अस्पताल 9.8% बिजली खर्च करते हैं।
Q3: Net-Zero Energy और Net-Zero Carbon में क्या फर्क है?
Net-Zero Energy में जितनी ऊर्जा खपत होती है, उतनी ही रिन्यूएबल ऊर्जा से बनाई जाती है। Net-Zero Carbon में निर्माण से लेकर संचालन तक कार्बन उत्सर्जन शून्य के करीब लाया जाता है।
Q4: पायलट प्रोजेक्ट कहाँ शुरू होगा?
Nair Hospital और R/Central Ward Office में।
Q5: क्या इससे बिजली बिल कम होगा?
हाँ, LED, BLDC Fan और Solar Rooftop से बिजली बिल में भारी कमी संभव है।
मुंबई में Mogra Pumping Station प्रोजेक्ट Versova-Dahisar Link Road से टकराव के कारण रुका। BMC नई साइट फाइनल कर रही है, पर्यावरण मंजूरी में लगेंगे 7-8 महीने।
मुंबई: मुंबई में बाढ़ नियंत्रण के लिए बेहद अहम माने जा रहे Mogra Pumping Station प्रोजेक्ट पर फिलहाल ब्रेक लग गया है। बृहनमुंबई महानगरपालिका (BMC) को इस प्रोजेक्ट की साइट बदलनी पड़ रही है, क्योंकि प्रस्तावित जमीन का हिस्सा Versova-Dahisar Link Road (VDLR) के एलाइनमेंट से टकरा गया है। अब नई जगह फाइनल की जा रही है और ताजा पर्यावरण मंजूरी की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
BRIMSTOWAD योजना के तहत था अहम प्रोजेक्ट
Mogra और Mahul Pumping Station , जुलाई 2005 की भीषण बारिश के बाद बनाई गई BRIMSTOWAD (Brihanmumbai Stormwater Disposal System) योजना के तहत प्रस्तावित आठ पंपिंग स्टेशनों में शामिल हैं।
Mogra Nullah पर बनने वाला यह स्टेशन वर्सोवा, अंधेरी और जोगेश्वरी जैसे इलाकों में हर साल होने वाले जलभराव को कम करने के लिए बेहद जरूरी माना जाता है।
393 करोड़ मंजूर, फिर भी काम शुरू नहीं
साल 2021 में इस प्रोजेक्ट के लिए 393 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे और 24 महीने की कॉन्ट्रैक्ट अवधि तय की गई थी, जिसमें मानसून भी शामिल था। लेकिन जमीन अधिग्रहण और कानूनी अड़चनों के कारण अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया।
हाईकोर्ट केस और 33 करोड़ की जमा राशि
जमीन अधिग्रहण के दौरान एक निजी मालिक ने मामला बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी। दिसंबर 2024 में कोर्ट ने 33 करोड़ रुपये जमा करने की शर्त पर काम शुरू करने की अनुमति दी।
BMC ने मार्च 2025 में राशि जमा कर प्रारंभिक काम शुरू किया, लेकिन बाद में पता चला कि साइट का हिस्सा VDLR (मुंबई कोस्टल रोड नॉर्थ फेज 2) से ओवरलैप हो रहा है।
नई साइट तय होने के बाद BMC को Coastal Zone Management Authority के साथ राज्य और केंद्र सरकार से ताजा पर्यावरण मंजूरी लेनी होगी। अधिकारियों के मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया में 7 से 8 महीने का समय लग सकता है।
पहले वाली साइट को पर्यावरण मंजूरी मिल चुकी थी, लेकिन लोकेशन बदलने के कारण प्रक्रिया दोबारा शुरू करनी होगी। इससे प्रोजेक्ट की टाइमलाइन और पीछे खिसक गई है।
हाई टाइड के समय पंपिंग स्टेशन की अहम भूमिका
मुंबई में हाई टाइड के दौरान फ्लडगेट बंद कर दिए जाते हैं, ताकि समुद्र का पानी शहर में न घुसे। ऐसे समय में पंपिंग स्टेशन नालों का पानी समुद्र में पंप करके शहर को डूबने से बचाते हैं।
प्रतिक्रियात्मक फ़ाइल तस्वीर
अब तक इरला (जुहू), हाजी अली, क्लीवलैंड, लवग्रोव (वर्ली), रे रोड-ब्रिटानिया और गजधरबांध (खार दांडा) जैसे पंपिंग स्टेशन चालू हैं। Mogra स्टेशन शुरू होने से पश्चिमी उपनगरों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद थी।
क्या फिर मानसून में डूबेगा वेस्टर्न सबर्ब?
स्थानीय निवासियों का कहना है कि हर साल भारी बारिश में वर्सोवा, अंधेरी और जोगेश्वरी में पानी भर जाता है। अगर Mogra Pumping Station में और देरी हुई तो आने वाले मानसून में भी लोगों को जलभराव की समस्या झेलनी पड़ सकती है।
FAQ Section
Q1. Mogra Pumping Station क्यों रुका है?
प्रस्तावित साइट Versova-Dahisar Link Road के एलाइनमेंट से टकरा गई है, इसलिए नई जगह तलाश की जा रही है।
Q2. प्रोजेक्ट की लागत कितनी है?
करीब 393 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे।
Q3. पर्यावरण मंजूरी में कितना समय लगेगा?
अधिकारियों के अनुसार 7 से 8 महीने का समय लग सकता है।
Q4. यह प्रोजेक्ट किन इलाकों के लिए अहम है?
वर्सोवा, अंधेरी और जोगेश्वरी जैसे पश्चिमी उपनगरों के लिए।
मुंबई के कांदिवली इलाके में BMC ने पुलिस की मदद से एंटी-एन्क्रोचमेंट ड्राइव चलाकर अवैध निर्माण हटाए। महावीर नगर में भारी पुलिस तैनाती के बीच कार्रवाई, जानें पूरा अपडेट।
मुंबई: मुंबई के पश्चिमी उपनगर कांदिवली में शुक्रवार को अवैध कब्जों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया गया। Brihanmumbai Municipal Corporation (BMC) ने पुलिस की मदद से महावीर नगर इलाके में एंटी-एन्क्रोचमेंट ड्राइव चलाकर कई अवैध ढांचों को हटाया। कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बंदोबस्त रखा गया ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।
📍 कहां और कैसे चला BMC का अभियान?
यह अभियान बीएमसी के आर साउथ और आर सेंट्रल वार्ड के अधिकारियों ने मिलकर चलाया। स्थानीय Mumbai Police के कांदिवली पुलिस स्टेशन की टीम भी मौके पर मौजूद रही।
अधिकारियों के मुताबिक, महावीर नगर में फुटपाथों और सार्वजनिक सड़कों पर अवैध रूप से बनाए गए शेड, टीन शेड, बढ़ाए गए प्लेटफॉर्म और अनधिकृत दुकानों को हटाया गया।
अधिकारियों ने बताया कि ड्राइव के दौरान बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। इलाके में पहले से ही लाउडस्पीकर के जरिए सूचना दी गई थी।
“कार्रवाई शांतिपूर्वक पूरी हुई, किसी तरह की अप्रिय घटना की सूचना नहीं है,” एक अधिकारी ने कहा।
🏗️ क्यों जरूरी है एन्क्रोचमेंट हटाना?
मुंबई जैसे घनी आबादी वाले शहर में फुटपाथ और सड़कें पहले ही ट्रैफिक और भीड़ के दबाव में हैं।
अवैध दुकानें और ढांचे ट्रैफिक जाम बढ़ाते हैं
पैदल चलने वालों के लिए खतरा बनते हैं
फायर ब्रिगेड और एम्बुलेंस के रास्ते में बाधा डालते हैं
बीएमसी समय-समय पर ऐसे ड्राइव चलाकर सार्वजनिक जगहों को खाली कराने की कोशिश करती है।
📊 पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
सूत्रों के मुताबिक, कांदिवली और आसपास के इलाकों में हाल के महीनों में कई बार एंटी-एन्क्रोचमेंट ड्राइव चल चुकी है।
जनवरी और फरवरी में भी अवैध पान स्टॉल्स और अस्थायी ढांचों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। बीएमसी का कहना है कि शिकायतों के आधार पर प्राथमिकता तय की जाती है।
🗣️ स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
कुछ स्थानीय निवासियों ने कार्रवाई का स्वागत किया और कहा कि फुटपाथ खाली होने से पैदल चलना आसान होगा।
हालांकि, जिन दुकानदारों के ढांचे हटाए गए, उनका कहना है कि उन्हें पर्याप्त समय नहीं दिया गया। उनका दावा है कि रोज़ी-रोटी पर असर पड़ेगा।
⚖️ कानूनी प्रक्रिया क्या है?
बीएमसी नियमों के अनुसार:
पहले नोटिस जारी किया जाता है
तय समय में अवैध निर्माण हटाने को कहा जाता है
अनुपालन न होने पर बलपूर्वक कार्रवाई की जाती है
अधिकारियों का कहना है कि इस ड्राइव में भी तय प्रक्रिया का पालन किया गया।
🔎 आगे क्या?
बीएमसी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि शहर के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी। खासकर उन इलाकों में जहां बार-बार शिकायतें मिल रही हैं।