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  • BMC ने लगाया ₹50 लाख जुर्माना, Goregaon-Mulund Flyover में देरी पर सख्ती

    BMC ने लगाया ₹50 लाख जुर्माना, Goregaon-Mulund Flyover में देरी पर सख्ती

    मुंबई के Goregaon-Mulund Link Road (GMLR) प्रोजेक्ट में देरी पर BMC ने ठेकेदार पर ₹50 लाख का जुर्माना लगाया। 31 मई 2026 तक फ्लाईओवर खोलने का लक्ष्य, जानिए पूरी अपडेट।

    मुंबई: शहर को ट्रैफिक जाम से राहत दिलाने वाले अहम Goregaon-Mulund Link Road (GMLR) प्रोजेक्ट पर अब बीएमसी ने सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) ने फ्लाईओवर निर्माण में देरी करने पर ठेकेदार पर ₹50 लाख का जुर्माना लगाया है। यह फ्लाईओवर दिंडोशी कोर्ट से Dadasaheb Phalke Film City तक बनाया जा रहा है।

    🔎 निरीक्षण के बाद एक्शन मोड में BMC

    BMC के अतिरिक्त नगर आयुक्त (प्रोजेक्ट्स) Abhijit Bangar ने साइट का दौरा कर काम की समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान उन्होंने साफ निर्देश दिए कि हर हाल में फ्लाईओवर को 31 मई 2026 तक, यानी मॉनसून से पहले, ट्रैफिक के लिए खोल दिया जाए।

    उन्होंने ठेकेदार को अतिरिक्त मजदूर और मशीनरी लगाने का आदेश दिया ताकि बाकी बचा काम समय पर पूरा हो सके।

    🏗️ GMLR प्रोजेक्ट का फेज 3(a) क्या है?

    GMLR प्रोजेक्ट को चार चरणों में बनाया जा रहा है।
    Phase 3(a) में शामिल हैं:

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    • 1.26 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड फ्लाईओवर
    • रोटरी जंक्शन
    • एक्सेस रैंप

    अब तक:

    • 31 पिलर पूरे
    • 30 में से 20 स्पैन पूरे
    • करीब 75% काम पूरा

    अब डेक स्लैब कास्टिंग और एक्सेस रैंप का काम तेजी से किया जाएगा।

    🚰 अड़चन बन रहे पाइपलाइन और ट्रांसफॉर्मर

    फ्लाईओवर की लाइनिंग में कई यूटिलिटी बाधाएं सामने आई हैं। इनमें शामिल हैं:

    • पानी की पाइपलाइन
    • सीवेज लाइन
    • Adani Power के ट्रांसफॉर्मर

    BMC ने संबंधित विभागों को तुरंत इन्हें शिफ्ट करने के निर्देश दिए हैं ताकि काम में और देरी न हो।

    🚇 डबल टनल प्रोजेक्ट की भी तैयारी तेज

    फ्लाईओवर के साथ-साथ ट्विन टनल का काम भी तेजी से चल रहा है।
    Abhijit Bangar ने फिल्म सिटी में टनल के ‘लॉन्चिंग शाफ्ट’ का भी निरीक्षण किया।

    • दो अत्याधुनिक Tunnel Boring Machines (TBM) तैनात होंगी
    • 10 मार्च से पहली TBM को शाफ्ट में उतारने की तैयारी

    यह टनल मुंबई के वेस्टर्न और ईस्टर्न सबर्ब्स के बीच कनेक्टिविटी को और बेहतर बनाएगी।

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    🚦 मुंबई ट्रैफिक के लिए क्यों अहम है GMLR?

    Goregaon-Mulund Link Road बनने के बाद:

    • वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे से ईस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे तक सीधा कनेक्शन
    • ट्रैफिक जाम में भारी कमी
    • सफर का समय कम
    • मॉनसून में सुरक्षित और तेज कनेक्टिविटी

    BMC अधिकारियों का कहना है कि यह प्रोजेक्ट मुंबई के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए गेम चेंजर साबित होगा।


    ❓ FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. BMC ने ठेकेदार पर कितना जुर्माना लगाया है?
    👉 ₹50 लाख का जुर्माना लगाया गया है।

    Q2. फ्लाईओवर कब तक चालू होने की उम्मीद है?
    👉 31 मई 2026 तक ट्रैफिक के लिए खोलने का लक्ष्य है।

    Q3. GMLR प्रोजेक्ट का फायदा क्या होगा?
    👉 वेस्टर्न और ईस्टर्न सबर्ब्स के बीच सफर तेज और आसान होगा।

    Q4. टनल प्रोजेक्ट कब शुरू होगा?
    👉 पहली TBM को 10 मार्च तक लॉन्चिंग शाफ्ट में उतारने की तैयारी है।

  • BMC मेयर चुनाव: ऋतु तावड़े और संजय घाडी ने भरा नामांकन

    BMC मेयर चुनाव: ऋतु तावड़े और संजय घाडी ने भरा नामांकन

    BMC Mayor Election 2026: मुंबई महानगरपालिका के मेयर पद के लिए ऋतु तावड़े और डिप्टी मेयर पद के लिए संजय घाडी ने नामांकन दाखिल किया। जानिए पूरी डिटेल।

    मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) में होने वाले महापौर और उप महापौर चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। 11 फरवरी 2026 को होने वाली इस अहम चुनाव प्रक्रिया के लिए बुधवार को महापौर पद के लिए नगरसेविका ऋतु तावड़े और उप महापौर पद के लिए नगरसेवक संजय घाडी ने अपना नामांकन दाखिल किया। यह नामांकन BMC सचिव मंजिरी देशपांडे के पास 7 फरवरी 2026 को जमा किया गया।

    BMC मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव 2026

    बृहन्मुंबई महानगरपालिका की विशेष बैठक बुधवार, 11 फरवरी 2026 को आयोजित की जाएगी, जिसमें महापौर और उप महापौर पद का चुनाव होगा। इस चुनाव को मुंबई की राजनीति में काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह महानगरपालिका के प्रशासनिक नियंत्रण से जुड़ा होता है।

    कौन हैं मेयर पद की उम्मीदवार ऋतु तावड़े

    महापौर पद के लिए नामांकन भरने वाली ऋतु तावड़े, वार्ड नंबर 132 की नगरसेविका हैं। वे लंबे समय से स्थानीय राजनीति में सक्रिय रही हैं और संगठनात्मक कामकाज का अच्छा अनुभव रखती हैं। पार्टी के भीतर उन्हें एक मजबूत और भरोसेमंद चेहरा माना जा रहा है।

    डिप्टी मेयर पद के लिए संजय घाडी का नामांकन

    उप महापौर पद के लिए संजय घाडी, वार्ड नंबर 5 से नगरसेवक हैं। वे जमीनी स्तर पर सक्रिय नेता माने जाते हैं और महानगरपालिका के कामकाज में उनकी पकड़ मजबूत बताई जाती है।

    नामांकन के दौरान मौजूद रहे बड़े नेता

    नामांकन दाखिल करने के दौरान कई दिग्गज नेता और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
    इस मौके पर—

    • कौशल, रोजगार, उद्योजकता व नवाचार मंत्री एवं मुंबई उपनगर सहपालक मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा
    • विधायक अमित साटम
    • बीजेपी गटनेते गणेश खणकर
    • पूर्व सांसद राहुल शेवाळे
    • पूर्व सांसद मनोज कोटक
    • नगरसेवक प्रभाकर शिंदे

    सहित बड़ी संख्या में नगरसेवक और नगरसेविकाएं उपस्थित रहीं।

    राजनीतिक संकेत और आगे की रणनीति

    इस नामांकन के बाद यह साफ माना जा रहा है कि आगामी चुनाव में मुकाबला दिलचस्प होने वाला है। राजनीतिक गलियारों में इसे मुंबई महानगरपालिका की सत्ता दिशा तय करने वाला कदम माना जा रहा है।


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. BMC मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव कब होगा?
    👉 11 फरवरी 2026 को BMC की विशेष बैठक में चुनाव होगा।

    Q2. महापौर पद के लिए किसने नामांकन भरा है?
    👉 वार्ड नंबर 132 की नगरसेविका ऋतु तावड़े ने।

    Q3. उप महापौर पद के उम्मीदवार कौन हैं?
    👉 वार्ड नंबर 5 के नगरसेवक संजय घाडी।

    Q4. नामांकन कब और कहां दाखिल किया गया?
    👉 7 फरवरी 2026 को BMC सचिव मंजिरी देशपांडे के पास।

  • बांद्रा वेस्ट में 14 घंटे पानी बंद, 10 फरवरी को जलापूर्ति प्रभावित

    बांद्रा वेस्ट में 14 घंटे पानी बंद, 10 फरवरी को जलापूर्ति प्रभावित

    बांद्रा पश्चिम में 900 मिमी पानी की पाइपलाइन की मरम्मत के चलते 10 फरवरी 2026 को 14 घंटे जलापूर्ति बंद रहेगी। BMC ने पानी का स्टॉक रखने की अपील की है।

    मुंबई: बांद्रा (पश्चिम) इलाके में रहने वाले नागरिकों के लिए जरूरी सूचना है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) द्वारा पाली हिल जलाशय से जुड़ी 900 मिमी व्यास की इनलेट जलवाहिनी में गड़बड़ी की मरम्मत का काम किया जा रहा है। यह काम मंगलवार, 10 फरवरी 2026 को सुबह 10 बजे से रात 12 बजे तक चलेगा। इस दौरान एच वेस्ट वार्ड के कई इलाकों में पानी पूरी तरह बंद रहेगा, जबकि कुछ इलाकों में कम दबाव से पानी सप्लाई की जाएगी।

    🔧 क्यों किया जा रहा है यह काम?

    BMC के मुताबिक:

    • पाली हिल जलाशय की 900 मिमी इनलेट पाइपलाइन में लीकेज पाया गया है
    • यह पाइपलाइन कुरैशी नगर झोपड़पट्टी (बांद्रा वेस्ट) के पास
    • MHADA के खुले भूखंड और
    • वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे के पास से गुजरती है

    भविष्य में बड़ी समस्या से बचने के लिए तत्काल मरम्मत जरूरी थी।

    मरम्मत का समय और अवधि

    • 📅 दिनांक: मंगलवार, 10 फरवरी 2026
    • ⏱️ समय: सुबह 10 बजे से रात 12 बजे तक
    • कुल अवधि: लगभग 14 घंटे

    इन इलाकों में पानी पूरी तरह बंद रहेगा

    बांद्रा (पश्चिम) और खार (पश्चिम) के कई हिस्सों में जलापूर्ति पूरी तरह ठप रहेगी:

    1. हिल रोड, पेरी रोड, मैन्युअल गोन्साल्विस रोड, सेंट एंड्रूज रोड, सेंट पॉल रोड, कार्टर रोड, पाली गांव, चिंबई गांव, शर्ली गांव, कांत्वाड़ी इलाका
    2. खार दांडा, कोळीवाड़ा, दांडा पाडा, चुईम गांवठाण, गझदरबंद झोपड़पट्टी, खार पश्चिम का कुछ हिस्सा
    3. हनुमान नगर झोपड़पट्टी, लक्ष्मी नगर, कार्टर रोड, यूनियन पार्क रोड नंबर 1 से 4, पाली हिल
    4. डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर रोड, पाली पठार झोपड़पट्टी, खार के 15वें से 20वें रोड तक का इलाका
    5. चैपल रोड, वेरोनिका रोड, डॉ. पीटर डायस रोड, सेंट जॉन बैप्टिस्ट रोड का कुछ हिस्सा
    6. माउंट मेरी चर्च और आसपास का इलाका
    7. के. सी. रोड, एल. के. मेहता रोड, बाजार रोड का कुछ हिस्सा, ए. के. वैद्य रोड
    8. झिगझैग रोड, कोलडोंगरी, नरगिस दत्त रोड, पाली माला रोड

    ⚠️ इन इलाकों में कम दबाव से पानी मिलेगा

    • हिल रोड के आखिरी सिरे से
    • ताज लैंड्स एंड
    • बी. जे. रोड
    • एच. के. भाभा रोड
    • काणे रोड
    • गणेश झोपड़पट्टी

    ➡️ इन इलाकों में रात 1 बजे से सुबह 4:30 बजे तक कम दबाव में पानी दिया जाएगा।

    🧴 BMC की नागरिकों से अपील

    महानगरपालिका ने नागरिकों से अपील की है कि:

    • पहले से जरूरी पानी का स्टॉक करके रखें
    • मरम्मत के दौरान पानी का किफायती इस्तेमाल करें
    • एहतियातन अगले कुछ दिनों तक
      👉 पानी उबालकर या छानकर पिएं

    BMC ने इस दौरान नागरिकों से पूरा सहयोग करने की अपील की है।


    FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

    Q1. बांद्रा में पानी कब बंद रहेगा?
    ➡️ 10 फरवरी 2026 को सुबह 10 बजे से रात 12 बजे तक।

    Q2. पानी बंद होने की वजह क्या है?
    ➡️ 900 मिमी इनलेट पाइपलाइन में लीकेज की मरम्मत।

    Q3. किन इलाकों में पानी पूरी तरह बंद रहेगा?
    ➡️ बांद्रा वेस्ट और खार वेस्ट के कई रिहायशी इलाके।

    Q4. क्या कहीं पानी मिलेगा भी?
    ➡️ कुछ इलाकों में रात 1 से सुबह 4:30 बजे तक कम दबाव में पानी मिलेगा।

    Q5. BMC ने क्या सलाह दी है?
    ➡️ पानी जमा करने, किफायत से उपयोग करने और उबालकर पीने की सलाह।

  • Versova–Dahisar Coastal Road को मिली हरी झंडी, CRZ अड़चन खत्म, काम तेज

    Versova–Dahisar Coastal Road को मिली हरी झंडी, CRZ अड़चन खत्म, काम तेज

    Mumbai News: वर्सोवा से दहिसर तक 22 किमी लंबे सागरी किनारा मार्ग को CRZ और वन विभाग की मंजूरी मिल गई है। जानिए लागत, रूट, फायदे और लेटेस्ट अपडेट।

    मुंबई: शहर के पश्चिमी उपनगरों के लिए गेमचेंजर माने जा रहे वर्सोवा से दहिसर Coastal Road को लेकर बड़ी राहत की खबर है। लंबे समय से CRZ (कोस्टल रेगुलेशन ज़ोन) की वजह से अटका हुआ प्रोजेक्ट अब तेज़ी से आगे बढ़ेगा। वन विभाग की ज़रूरी मंजूरी मिलते ही इस रूट के CRZ इलाकों में रुका काम दोबारा शुरू होने जा रहा है। करीब 22 किलोमीटर लंबे इस सागरी मार्ग के पूरा होने से पश्चिमी उपनगरों में ट्रैफिक का दबाव काफी हद तक कम होने की उम्मीद है।

    CRZ की वजह से क्यों रुका था काम?

    वर्सोवा–दहिसर Coastal Road के कुछ हिस्से ऐसे इलाकों से गुजरते हैं, जहां कांदळवन (मैंग्रोव) और घने पेड़ मौजूद हैं। इन क्षेत्रों में निर्माण के लिए CRZ के तहत अलग-अलग मंजूरियां जरूरी थीं।
    हालांकि ज़्यादातर अनुमति पहले ही मिल चुकी थीं, लेकिन वन विभाग की अंतिम मंजूरी न मिलने से इन हिस्सों का काम ठप पड़ा था।
    अब मुंबई महानगरपालिका (BMC) को यह मंजूरी मिल गई है, जिससे लंबे समय से रुका काम दोबारा रफ्तार पकड़ेगा।

    BMC का बयान: अब तेज़ी से आगे बढ़ेगा प्रोजेक्ट

    BMC के अतिरिक्त आयुक्त (प्रोजेक्ट) अभिजीत बांगर के मुताबिक,

    “वन विभाग से जरूरी अनुमति मिल चुकी है। CRZ क्षेत्र में भी जल्द काम शुरू किया जाएगा। बाकी हिस्सों में निर्माण पहले से जारी है।”

    इस मंजूरी के बाद प्रोजेक्ट की टाइमलाइन पर पड़े असर को कम करने की कोशिश की जाएगी।

    छह चरणों में बनेगा 22 KM लंबा Coastal Road

    वर्सोवा से दहिसर तक बनने वाला यह सागरी किनारा मार्ग कुल छह चरणों (Phases) में विकसित किया जाएगा।

    मुख्य डिटेल्स:

    • 📏 कुल लंबाई: लगभग 22 किलोमीटर
    • 💰 कुल लागत: करीब ₹16,621 करोड़
    • 🛣️ डिज़ाइन:
    • कुछ हिस्सों में डबल डेकर एलिवेटेड रोड
    • कुछ जगहों पर खाड़ी के नीचे टनल (Tunnel)

    यह प्रोजेक्ट टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर दोनों के लिहाज से मुंबई के सबसे बड़े प्रोजेक्ट्स में से एक माना जा रहा है।

    पश्चिम–पूर्व एक्सप्रेस हाईवे को मिलेगी सीधी कनेक्टिविटी

    इस सागरी मार्ग को गोरेगांव–मुलुंड लिंक रोड (GMLR) से जोड़ा जाएगा। इससे:

    • पश्चिमी उपनगरों से ईस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे तक पहुंच आसान होगी
    • रोज़ाना सफर करने वाले हजारों वाहन चालकों को राहत मिलेगी

    इसके अलावा, इस रोड को भविष्य में दहिसर–भाईंदर एलिवेटेड रोड से जोड़ने का भी प्रस्ताव है, जिससे मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन की कनेक्टिविटी और मजबूत होगी।

    ट्रैफिक में बड़ा बदलाव, सफर होगा फास्ट

    मरिन ड्राइव–वरळी सागरी मार्ग के बाद अब वर्सोवा–दहिसर सागरी रोड से मुंबई की ट्रैफिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है।

    • लिंक रोड और SV रोड पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा
    • पीक आवर्स में सफर का समय घटेगा
    • पश्चिमी उपनगरों का कोस्टल एरिया सीधे हाई-स्पीड रोड से जुड़ेगा

    FAQ | अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

    Q1. वर्सोवा–दहिसर सागरी मार्ग की कुल लंबाई कितनी है?
    👉 लगभग 22 किलोमीटर।

    Q2. यह प्रोजेक्ट क्यों अटका हुआ था?
    👉 CRZ क्षेत्र में वन विभाग की मंजूरी न मिलने के कारण।

    Q3. इस प्रोजेक्ट की कुल लागत कितनी है?
    👉 करीब ₹16,621 करोड़।

    Q4. इससे आम लोगों को क्या फायदा होगा?
    👉 ट्रैफिक कम होगा, सफर तेज़ और आरामदायक बनेगा।

    Q5. क्या यह रोड पूर्वी मुंबई से भी जुड़ेगा?
    👉 हां, गोरेगांव–मुलुंड लिंक रोड के ज़रिए।

  • P North Ward में CRZ-1 पर खुलेआम अवैध निर्माण, BMC की चुप्पी पर गंभीर सवाल

    P North Ward में CRZ-1 पर खुलेआम अवैध निर्माण, BMC की चुप्पी पर गंभीर सवाल

    मालाड़ के P North Ward में CRZ-1 क्षेत्र में धड़ल्ले से चल रहे अवैध निर्माण पर BMC प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है। यह न सिर्फ कोस्टल नियमों का उल्लंघन है बल्कि IPC और नए BNS कानून के तहत दंडनीय अपराध भी है।

    मुंबई: मालाड़ स्थित P North Ward में हालात बेहद चिंताजनक हैं। CRZ-1 (Coastal Regulation Zone-1) जैसे अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र में खुलेआम अवैध और अनधिकृत निर्माण चल रहे हैं, लेकिन BMC प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। आरोप है कि आधुनिक “कुंभकर्ण” बने अधिकारी जानबूझकर आंखें मूंदे हुए हैं, जबकि यह निर्माण न केवल कोस्टल रेगुलेटरी नियमों का उल्लंघन है, बल्कि IPC और नए BNS Act के तहत गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।

    CRZ-1 क्या है और यह इलाका इतना संवेदनशील क्यों?

    CRZ-1 वह क्षेत्र होता है जहां

    • मैंग्रोव
    • समुद्री तट
    • इको-सेंसिटिव ज़ोन
      शामिल होते हैं।

    यहां किसी भी प्रकार का निर्माण कलेक्टर, MSD और राज्य सरकार की सख़्त अनुमति के बिना पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद मालाड़ इलाके में बिना अनुमति इमारतें, शेड, स्लैब और स्ट्रक्चर खड़े किए जा रहे हैं।

    अवैध निर्माण जारी, कार्रवाई नदारद

    स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं का आरोप है कि

    • निर्माण दिन-दहाड़े चल रहा है
    • भारी मशीनरी का इस्तेमाल हो रहा है
    • शिकायतों के बावजूद कोई तोड़क कार्रवाई नहीं

    सवाल यह है कि अगर यह सब गैरकानूनी है, तो BMC की नजर क्यों नहीं पड़ती?

    “नेल्सन की आंख” और आधुनिक कुंभकर्ण

    स्थानीय लोग P North Ward कार्यालय पर तंज कसते हुए कहते हैं कि

    “यहां बैठे अधिकारी आधुनिक कुंभकर्ण हैं, जिन्हें सब दिखता है लेकिन दिखाना नहीं चाहते।”

    आरोप है कि

    • फाइलें दबा दी जाती हैं
    • निरीक्षण रिपोर्ट तैयार नहीं होती
    • शिकायतों को जानबूझकर लंबित रखा जाता है

    कानून साफ, फिर भी डर किस बात का?

    CRZ-1 में अवैध निर्माण

    • IPC के तहत अपराध
    • और नए संशोधित BNS Act के तहत कठोर दंड को आमंत्रित करता है

    इसके अलावा यह

    • राज्य सरकार के आदेशों की अवहेलना
    • कलेक्टर MSD के निर्देशों की अनदेखी
    • और पर्यावरण कानूनों का सीधा उल्लंघन है

    इसके बावजूद कार्रवाई न होना भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।

    भ्रष्टाचार का शक और संरक्षण का खेल

    स्थानीय सूत्रों का दावा है कि

    • कुछ निर्माणकर्ताओं को अंदरूनी संरक्षण मिला हुआ है
    • “मैनेजमेंट” के नाम पर कार्रवाई रोकी जाती है
    • छोटे अवैध कामों पर तुरंत हथौड़ा, बड़े पर खामोशी

    यह दोहरा मापदंड BMC की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

    पर्यावरण को अपूरणीय नुकसान

    CRZ-1 क्षेत्र में अवैध निर्माण से

    • समुद्री जैव विविधता नष्ट होती है
    • बाढ़ और समुद्र जलस्तर का खतरा बढ़ता है
    • आने वाली पीढ़ियों का भविष्य खतरे में पड़ता है

    यह सिर्फ कानून का नहीं, मानवता और पर्यावरण का अपराध है।

    नागरिकों की मांग

    स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों की मांग है कि

    • तत्काल अवैध निर्माण रोके जाएं
    • जिम्मेदार अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई हो
    • BNS Act के तहत केस दर्ज किए जाएं
    • CRZ-1 क्षेत्र की स्वतंत्र जांच कराई जाए

    FAQ

    Q1. CRZ-1 क्षेत्र में निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित है क्या?
    हाँ, बिना विशेष अनुमति के किसी भी प्रकार का निर्माण पूरी तरह अवैध है।

    Q2. इस मामले में कौन-कौन से कानून लागू होते हैं?
    IPC, पर्यावरण कानून और नया संशोधित BNS Act लागू होता है।

    Q3. BMC की भूमिका पर सवाल क्यों उठ रहे हैं?
    क्योंकि शिकायतों और स्पष्ट उल्लंघन के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही।

    Q4. नागरिक क्या कर सकते हैं?
    शिकायत, RTI, पर्यावरण प्राधिकरण और न्यायालय का सहारा लिया जा सकता है।

  • गरीब फेरीवाले भी नागरिक हैं: मुंबई में नो-फेरीवाला जोन की तैयारी पर सवाल

    गरीब फेरीवाले भी नागरिक हैं: मुंबई में नो-फेरीवाला जोन की तैयारी पर सवाल

    मुंबई में फेरीवालों के खिलाफ एक बार फिर सख्त कार्रवाई की तैयारी है। नो-फेरीवाला जोन बनाने की योजना, बुलडोजर कार्रवाई और लाइसेंस के सवाल पर गरीब फेरीवालों का भविष्य फिर संकट में है।

    मुंबई: एक बार फिर गरीब फेरीवालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की सुगबुगाहट तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, पूरी मुंबई को नो-फेरीवाला जोन बनाने की तैयारी चल रही है। रेलवे स्टेशन इलाकों से अभियान की शुरुआत होगी। सवाल यह है कि जब प्रधानमंत्री से लेकर सरकारें फेरीवालों को सुरक्षा देने की बात करती हैं, तो ज़मीन पर बुलडोजर ही क्यों गरजता है?

    मुंबई में फेरीवालों की समस्या: पुरानी, लेकिन अनसुलझी

    मुंबई में फेरीवालों की समस्या कोई नई नहीं है। दशकों से लाखों लोग फल, सब्ज़ी, कपड़े और रोजमर्रा का सामान बेचकर अपना और अपने परिवार का पेट पालते हैं।
    हकीकत यह है कि फेरीवाले शहर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, लेकिन सबसे ज़्यादा मार भी इन्हीं पर पड़ती है।

    BMC-takes-strict-action-on-Andheri-Irla-Road-removes-200-illegal-hawkers
    अंधेरी पश्चिम बीएमसी तोडफोड की ताजा तस्वीर

    बुलडोजर, तोड़-फोड़ और डर का माहौल

    जहां देखो वहीं BMC के तोड़क दस्ते, ट्रॉली तोड़ना, रेहड़ी जब्त करना और सामान फेंक देना—ये सब अब आम बात हो चुकी है।
    चुनाव से पहले कार्रवाई रोक दी जाती है और चुनाव खत्म होते ही फिर से अभियान शुरू हो जाता है। गरीब फेरीवालों के लिए यह सिलसिला कभी खत्म नहीं होता।

    चुनाव से पहले राहत, बाद में कार्रवाई

    महानगरपालिका चुनाव से पहले फेरीवालों को हटाने के लिए विशेष दस्ते तैनात किए गए थे, लेकिन राजनीतिक दबाव के चलते कार्रवाई रोक दी गई।
    अब चुनाव खत्म होते ही फिर से फेरीवालों को शहर से हटाने की योजना पर काम शुरू हो गया है।

    रेलवे स्टेशन पहले निशाने पर

    सूत्रों के अनुसार, अभियान के पहले चरण में

    • रेलवे स्टेशन परिसर
    • स्टेशन रोड
    • प्रमुख जंक्शन

    से फेरीवालों को हटाया जाएगा। इसके लिए मनपा की अलग-अलग टीमों को जिम्मेदारी दी जा रही है।

    गुप्त आदेश, गुप्त कार्रवाई

    बताया जा रहा है कि

    • कार्रवाई की योजना सहायक आयुक्त स्तर तक ही सीमित रहेगी
    • किस इलाके में कब कार्रवाई होगी, इसकी जानकारी बाहर नहीं जाएगी
    • हर विभाग को अपने स्तर पर प्लान बनाने के निर्देश दिए गए हैं

    इसका मकसद यह बताया जा रहा है कि फेरीवालों को पहले से भनक न लगे

    हफ्ता, राजनीति और दोहरा मापदंड

    हकीकत यह भी है कि

    • कुछ राजनीतिक दलों से जुड़े लोग फेरीवालों से हफ्ता वसूलते हैं
    • कई जगह मनपा कर्मी अपने वरिष्ठ अधिकारियों के नाम पर मुफ्त फल-सब्ज़ी लेते हैं
    • प्रांतीयता और भाषा के आधार पर भी भेदभाव होता है

    इस सिस्टम में सबसे आसान शिकार हमेशा गरीब फेरीवाले ही बनते हैं।

    लाइसेंस क्यों नहीं?

    सबसे बड़ा सवाल यही है—
    अगर सरकार और मनपा चाहें तो फेरीवालों को लाइसेंस देकर “अवैध” शब्द खत्म किया जा सकता है।
    लेकिन ऐसा नहीं किया जाता, क्योंकि अवैध रहेंगे तो

    • हफ्ता वसूली चलेगी
    • दबाव बनाना आसान रहेगा
    • तोड़क कार्रवाई का डर बना रहेगा

    अवैध इमारतें सुरक्षित, गरीब असुरक्षित

    मुंबई में हजारों इमारतें ऐसी हैं

    • जिनका नक्शा पास नहीं
    • जिनके पास NOC नहीं
    • जो सरकारी ज़मीन पर बनी हैं

    लेकिन उन पर बुलडोजर चलाने की हिम्मत कोई नहीं करता।
    वहीं गरीब फेरीवाले पर कार्रवाई सबसे आसान मानी जाती है।

    झोपड़ी मुक्त आदेश की खुलेआम अवहेलना

    आरोप यह भी है कि

    • झोपड़ी मुक्त आदेश के बावजूद
    • लाखों रुपये के लेन-देन से
    • झोपड़ियां और कमर्शियल गाले बनवाए जाते हैं
    • और उन्हें संरक्षण दिया जाता है

    यह दोहरा रवैया गरीबों के खिलाफ व्यवस्था की सोच को उजागर करता है।

    नागरिक अधिकारों का सवाल

    गरीब फेरीवाले भी भारत के नागरिक हैं।
    राज्य का दायित्व लोगों को रुलाना नहीं, बल्कि रोजगार और आय के साधन देना है।
    संविधान में दिए गए मौलिक अधिकार सिर्फ कागज़ पर नहीं, ज़मीन पर भी दिखने चाहिए।


    FAQ

    Q1. क्या पूरी मुंबई को नो-फेरीवाला जोन बनाया जाएगा?
    सूत्रों के अनुसार, ऐसी योजना पर काम चल रहा है, हालांकि आधिकारिक घोषणा बाकी है।

    Q2. कार्रवाई की शुरुआत कहां से होगी?
    पहले चरण में रेलवे स्टेशन और आसपास के इलाकों से फेरीवालों को हटाया जाएगा।

    Q3. फेरीवालों को लाइसेंस क्यों नहीं दिया जाता?
    आरोप है कि सिस्टम में अवैध स्थिति बनाए रखना कुछ लोगों के लिए फायदेमंद है।

    Q4. क्या यह कार्रवाई सभी अवैध निर्माणों पर होगी?
    जमीनी हकीकत में कार्रवाई ज़्यादातर गरीब फेरीवालों तक ही सीमित रहती है।

  • अंधेरी इर्ला रोड पर BMC की सख्त कार्रवाई, 200 अवैध फेरीवाले हटाए

    अंधेरी इर्ला रोड पर BMC की सख्त कार्रवाई, 200 अवैध फेरीवाले हटाए

    मुंबई के अंधेरी पश्चिम स्थित राम गणेश गडकरी मार्ग पर BMC ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 200 अवैध फेरीवालों और फुटपाथों पर बने अनधिकृत निर्माण हटाए। कूपर अस्पताल जाने वाले रास्ते को किया गया साफ।

    मुंबई: फुटपाथ, अतिक्रमण और अवैध फेरीवालों के खिलाफ बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने सख्त रुख अपनाया है। अंधेरी (पश्चिम) के राम गणेश गडकरी मार्ग (इर्ला रोड) इलाके में बीएमसी के के पश्चिम वार्ड ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 200 अवैध फेरीवालों और फुटपाथों पर बने अनधिकृत निर्माणों को हटाया है। यह कार्रवाई 29 जनवरी 2026 को की गई।

    कूपर अस्पताल जाने वाले रास्ते पर अतिक्रमण बना था मुसीबत

    राम गणेश गडकरी मार्ग, जो स्वामी विवेकानंद रोड और गुलमोहर रोड को जोड़ता है, साथ ही डॉ. आर. एन. कूपर अस्पताल के प्रवेश मार्ग से जुड़ा हुआ है।
    इस सड़क और फुटपाथों पर लंबे समय से अवैध फेरीवालों और बढ़े हुए निर्माणों के कारण:

    • एम्बुलेंस की आवाजाही में दिक्कत
    • मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में देरी
    • पैदल चलने वालों को भारी परेशानी

    जैसी गंभीर समस्याएं सामने आ रही थीं।

    आयुक्त के निर्देश पर हुई कार्रवाई

    यह पूरी कार्रवाई महानगरपालिका आयुक्त एवं प्रशासक भूषण गगराणी के निर्देश पर की गई।
    उप आयुक्त (परिमंडल-4) भाग्यश्री कापसे के मार्गदर्शन में और
    सहायक आयुक्त (के पश्चिम) चक्रपाणी अल्ले के नेतृत्व में निष्कासन अभियान चलाया गया।

    200 से ज्यादा अवैध फेरीवाले हटाए गए

    अभियान के दौरान:

    • करीब 200 अनधिकृत फेरीवालों को हटाया गया
    • फुटपाथों पर बने अवैध बढ़ी हुई दुकानों और ढांचों को तोड़ा गया
    • सड़क और फुटपाथों को पैदल चलने लायक बनाया गया

    इससे पूरे इलाके में यातायात और पैदल आवाजाही काफी हद तक सुचारु हो गई है।

    BMC-takes-strict-action-on-Andheri-Irla-Road-removes-200-illegal-hawkers-news

    भारी मशीनरी और पुलिस बंदोबस्त तैनात

    कार्रवाई को सफल बनाने के लिए बीएमसी ने:

    • 4 अतिक्रमण हटाने वाले वाहन
    • 3 जेसीबी मशीनें
    • अन्य आवश्यक उपकरण

    तैनात किए थे।
    इसके अलावा करीब 100 बीएमसी अधिकारी-कर्मचारी और पर्याप्त पुलिस बल मौके पर मौजूद था, ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।

    स्थानीय नागरिकों ने जताया संतोष

    इस कार्रवाई के बाद स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने राहत की सांस ली है। लोगों का कहना है कि लंबे समय से इस इलाके में अव्यवस्था थी, जिससे रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही थी।

    बीएमसी प्रशासन ने साफ किया है कि भविष्य में भी अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ ऐसी कार्रवाई लगातार जारी रहेगी


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. कार्रवाई कहां हुई?
    अंधेरी पश्चिम के राम गणेश गडकरी मार्ग (इर्ला रोड) पर।

    Q2. कितने फेरीवाले हटाए गए?
    करीब 200 अवैध फेरीवाले।

    Q3. कार्रवाई क्यों की गई?
    एम्बुलेंस और पैदल यात्रियों को हो रही परेशानी के कारण।

    Q4. कौन सा विभाग शामिल था?
    बीएमसी का के पश्चिम वार्ड।

    Q5. क्या आगे भी ऐसी कार्रवाई होगी?
    हां, बीएमसी ने नियमित कार्रवाई जारी रखने की बात कही है।

  • मालाड में अवैध निर्माण का खेल, BMC की नाक के नीचे चल रहा धंधा

    मालाड में अवैध निर्माण का खेल, BMC की नाक के नीचे चल रहा धंधा

    मालाड पश्चिम के मास्टरजी कंपाउंड और मार्वे रोड इलाके में BMC की अनुमति बिना अवैध निर्माण धड़ल्ले से जारी है। ठेकेदारों की मनमानी और अधिकारियों की चुप्पी ने भ्रष्टाचार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    मुंबई के मालाड (पश्चिम) इलाके में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की नाक के नीचे खुलेआम अवैध निर्माण चल रहा है। मास्टरजी कंपाउंड, मार्वे रोड और आसपास के इलाकों में बिना किसी मंजूरी, नक्शा या अनुमति के G+1 निर्माण और कमर्शियल गाला बनाए जा रहे हैं। स्थानीय नागरिकों की शिकायतों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होना, बीएमसी के कामकाज और संभावित भ्रष्टाचार पर बड़े सवाल खड़े करता है।

    कहां-कहां हो रहा है अवैध निर्माण

    प्राप्त जानकारी के अनुसार,

    • वार्ड नंबर 32, CTS नंबर 2108
    • अनिश्का बंगले के पास, मास्टरजी कंपाउंड रोड नंबर 3
    • मालवणी चर्च के नजदीक, मार्वे रोड, मालाड (पश्चिम)

    इन इलाकों में खुले प्लॉट पर बिना किसी वैध अनुमति के निर्माण कार्य तेज़ी से जारी है।

    2000 स्क्वायर फीट का G+1 निर्माण

    स्थानीय सूत्रों के मुताबिक,
    ठेकेदार मुरुगन द्वारा करीब 2000 वर्ग फीट में G+1 अवैध निर्माण किया जा रहा है। इस निर्माण के लिए MCGM से कोई स्वीकृत प्लान या अनुमति नहीं ली गई है। इसके बावजूद काम बेरोकटोक जारी है।

    5 कमर्शियल गालों का अवैध निर्माण

    इतना ही नहीं,
    ठेकेदार अलगु तिवारी द्वारा उसी इलाके में करीब 500-500 वर्ग फीट के 5 कमर्शियल गाले बनाए जा रहे हैं। यह निर्माण सीधे तौर पर मुंबई महानगरपालिका अधिनियम और निर्माण नियमों का उल्लंघन है।

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    BMC अधिकारियों की चुप्पी पर सवाल

    सबसे गंभीर सवाल यह है कि

    • अवैध निर्माण इतने बड़े पैमाने पर हो रहा है
    • मशीनें, मजदूर, मटेरियल खुलेआम मौजूद हैं
    • फिर भी P/North Ward के संबंधित अधिकारी अब तक मूकदर्शक बने हुए हैं

    स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि जब तक “सेटिंग” रहती है, तब तक कार्रवाई नहीं होती

    नागरिकों की मांग – तुरंत कार्रवाई हो

    इलाके के रहवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि

    • तत्काल साइट इंस्पेक्शन हो
    • अवैध निर्माण पर स्टॉप वर्क नोटिस जारी किया जाए
    • संबंधित ठेकेदारों और जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो
    • अवैध निर्माण को तुरंत ध्वस्त किया जाए

    क्यों खतरनाक है यह अवैध निर्माण

    • भविष्य में इमारत गिरने का खतरा
    • फायर सेफ्टी और ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह नजरअंदाज
    • ट्रैफिक, पानी और बिजली पर अतिरिक्त दबाव
    • कानून मानने वाले नागरिकों के साथ अन्याय

    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. अवैध निर्माण कहां हो रहा है?
    ➡️ मालाड (पश्चिम) के मास्टरजी कंपाउंड, मार्वे रोड और आसपास के इलाकों में।

    Q2. कौन-कौन से निर्माण अवैध हैं?
    ➡️ 2000 स्क्वायर फीट का G+1 निर्माण और 5 कमर्शियल गाले।

    Q3. क्या BMC ने कोई कार्रवाई की है?
    ➡️ अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।

    Q4. नागरिक क्या कर सकते हैं?
    ➡️ लिखित शिकायत, RTI, मीडिया और उच्च अधिकारियों से शिकायत।

  • BMC: मानखुर्द चीताकैंप में गंदगी का कहर, सड़क किनारे पड़ा गीला कचरा बना मुसीबत

    BMC: मानखुर्द चीताकैंप में गंदगी का कहर, सड़क किनारे पड़ा गीला कचरा बना मुसीबत

    BMC की लापरवाही के कारण मानखुर्द के चीताकैंप इलाके में नाले से निकाला गया गीला कचरा हफ्तों से सड़क किनारे पड़ा है। बारिश के कारण बदबू, मच्छर और बीमारी का खतरा बढ़ गया है, जबकि बीएमसी की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं।

    मुंबई: मानखुर्द स्थित चीताकैंप इलाके में सड़क किनारे पड़े गीले कचरे के ढेर ने स्थानीय लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) द्वारा नाले की सफाई के दौरान निकाला गया कचरा तीन हफ्ते से ज्यादा समय बीतने के बावजूद नहीं हटाया गया, जिससे बदबू, मच्छरों और बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने बीएमसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

    नाले की सफाई हुई, लेकिन कचरा वहीं पड़ा

    बीएमसी ने मानखुर्द के चीताकैंप इलाके में 28 जून से 2 जुलाई के बीच नाले की सफाई करवाई थी। इस दौरान पुल के नीचे और आसपास से बड़ी मात्रा में गाद और कचरा निकाला गया।
    हालांकि, सफाई के बाद यह कचरा नाले के किनारे ही छोड़ दिया गया। अधिकारियों ने स्थानीय लोगों को भरोसा दिलाया था कि एक हफ्ते के भीतर कचरा हटा दिया जाएगा, लेकिन तीन हफ्ते बीतने के बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं।

    बारिश ने बढ़ाई परेशानी, बदबू से सांस लेना मुश्किल

    स्थानीय लोगों का कहना है कि हाल की बारिश के चलते पानी कचरे में घुस गया है, जिससे इलाके में तेज गंध फैल गई है
    एक स्थानीय निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा,
    “यहां से गुजरते वक्त सांस रोकनी पड़ती है। बदबू इतनी तेज है कि बच्चों और बुजुर्गों को परेशानी हो रही है।”

    मच्छरों और बीमारियों का बढ़ता खतरा

    स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता आसिफ सैयद, जो एनवायरनमेंट लाइफ फाउंडेशन के धर्मेश बारई के साथ सफाई अभियानों से जुड़े हैं, ने कहा,
    “यह कचरे का ढेर मच्छरों और बीमारियों की फैक्ट्री बन चुका है। हम लगातार बीएमसी से संपर्क कर रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। आखिर लोग ऐसे हालात में कैसे रहें?”

    कचरा बढ़ता ही जा रहा है

    स्थानीय लोगों के मुताबिक, पिछले कुछ हफ्तों से नाले की सफाई के दौरान निकाला गया कचरा उसी जगह पर बार-बार डाला जा रहा है, जिससे कचरे का ढेर और बड़ा होता जा रहा है।
    जब पिछले हफ्ते तेज बारिश हुई, तो पुल के नीचे जमा कचरा बहने लगा। लोगों को डर है कि अगर बारिश इसी तरह जारी रही, तो यह गंदगी सीधे समुद्र में जाकर प्रदूषण फैलाएगी

    जिम्मेदारी से बचते विभाग, आरोपों की राजनीति

    धर्मेश बारई का आरोप है कि जब उन्होंने बीएमसी से कचरा हटाने की मांग की, तो अलग-अलग विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहे।
    उन्होंने कहा,
    “कोई भी विभाग यह मानने को तैयार नहीं कि कचरा हटाना उसकी जिम्मेदारी है। बस फाइलें इधर-उधर घूम रही हैं।”

    BMC का पक्ष: नोटिस जारी, जल्द सफाई का दावा

    बीएमसी के कनिष्ठ अभियंता योगेश मोगल ने बताया कि संबंधित ठेकेदार को शो-कॉज नोटिस जारी किया गया है।
    उनके अनुसार,

    • कुछ कचरा नाले से नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों द्वारा फेंका गया है
    • नाले से निकली गाद को शहर के बाहर डंप करना पड़ता है
    • मंगलवार तक गाद हटाई जाएगी, और बाकी ठोस कचरा अगले दो दिनों में साफ किया जाएगा

    उन्होंने बारिश को भी देरी की एक बड़ी वजह बताया।

    अपर आयुक्त ने लिया संज्ञान

    स्टॉर्म वॉटर ड्रेन्स के प्रभारी अतिरिक्त नगर आयुक्त अभिजीत बांगर ने कहा,
    “आमतौर पर एक महीने तक कचरा पड़े रहने की शिकायत नहीं आती। मैं खुद मामले की जांच करूंगा और लापरवाह ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।”


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1: चीताह कैंप में कचरा कब से पड़ा है?
    👉 करीब तीन हफ्तों से ज्यादा समय से।

    Q2: कचरा कहां से आया है?
    👉 नाले की सफाई के दौरान निकाला गया कचरा और कुछ स्थानीय कचरा।

    Q3: लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी किस बात से है?
    👉 बदबू, मच्छर और बीमारी के खतरे से।

    Q4: बीएमसी ने क्या आश्वासन दिया है?
    👉 गाद मंगलवार तक और बाकी कचरा अगले दो दिनों में हटाने का दावा।

    Q5: क्या ठेकेदार पर कार्रवाई होगी?
    👉 बीएमसी के अनुसार, लापरवाह ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

  • फरवरी के आखिर में पेश हो सकता है BMC बजट 2026

    फरवरी के आखिर में पेश हो सकता है BMC बजट 2026

    चार साल बाद BMC बजट 2026 चुने हुए नगरसेवकों की मौजूदगी में पेश होने की संभावना है। बजट फरवरी के दूसरे हिस्से में आ सकता है, जिसमें बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के साथ स्थानीय मुद्दों पर भी फोकस रहने की उम्मीद है।

    मुंबई: करीब चार साल के लंबे अंतराल के बाद बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) अपना वार्षिक बजट 2026 चुने हुए नगरसेवकों की मौजूदगी में पेश करने की तैयारी में है। यह बजट फरवरी के दूसरे पखवाड़े में पेश होने की संभावना है, जबकि अब तक हर साल 4 फरवरी को बजट पेश करने की परंपरा रही है। 2017 में चुनी गई बीएमसी हाउस का कार्यकाल मार्च 2022 में खत्म होने के बाद से अब तक तीन बजट प्रशासक के जरिए पेश किए गए थे।

    चार साल बाद चुने हुए प्रतिनिधियों के सामने बजट

    बीएमसी का पांच साल का कार्यकाल, जो 2017 में चुना गया था, 7 मार्च 2022 की आधी रात को समाप्त हो गया था। इसके बाद से मुंबई की सबसे अमीर नगर निगम बिना चुने हुए प्रतिनिधियों के ही कामकाज चला रही थी।
    इस दौरान 2023, 2024 और 2025 के बजट महाराष्ट्र सरकार द्वारा नियुक्त प्रशासक और नगर आयुक्त भूषण गगराणी के माध्यम से पेश किए गए।

    अब लंबे इंतजार के बाद हुए नगर निगम चुनावों के बाद, पहली बार चार साल में बजट चुने हुए नगरसेवकों के सामने रखा जाएगा, जिससे स्थानीय मुद्दों और जनप्रतिनिधियों की राय को जगह मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    4 फरवरी की परंपरा टूटने के आसार

    बीएमसी का बजट हर साल परंपरागत रूप से 4 फरवरी को पेश किया जाता रहा है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा।
    वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, बजट फरवरी के दूसरे हिस्से यानी लेट फरवरी में पेश किया जा सकता है। इसकी वजह नई हाउस के गठन के बाद की प्रशासनिक प्रक्रियाएं और प्रतिनिधियों को तैयारियों का समय देना बताया जा रहा है।

    पिछले बजटों में बड़े प्रोजेक्ट्स पर रहा जोर

    प्रशासक के दौर में पेश किए गए बजटों में खासतौर पर मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर भारी खर्च देखने को मिला। इनमें शामिल हैं:

    • सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP): करीब ₹27,000 करोड़
    • मुंबई कोस्टल रोड प्रोजेक्ट
    • वर्सोवा से दहिसर तक कोस्टल रोड का अंतिम चरण
    • देवनार डंपिंग ग्राउंड पर वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट
    • रोड कंक्रीटीकरण प्रोजेक्ट: करीब ₹17,000 करोड़
    • गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड (GMLR)
    • शहर में विभिन्न फ्लाईओवर और पुलों का निर्माण

    स्थानीय मुद्दों पर फीडबैक की कमी महसूस की गई

    एक वरिष्ठ बीएमसी अधिकारी के मुताबिक,

    “हर साल बजट लंबी अवधि के नियोजित प्रोजेक्ट्स पर केंद्रित रहा। ऐसा नहीं है कि अस्पतालों या स्कूलों जैसे स्थानीय इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान नहीं दिया गया, लेकिन चुने हुए प्रतिनिधियों से मिलने वाला फीडबैक नहीं मिल पाया, जो रोजमर्रा की स्थानीय जरूरतों को सामने लाता है।”

    अब नगरसेवकों की मौजूदगी में पेश होने वाले बजट से स्थानीय सड़कों, नालों, स्कूलों, अस्पतालों और वार्ड स्तर की समस्याओं को प्राथमिकता मिलने की उम्मीद है।

    कैपिटल एक्सपेंडिचर और बजट साइज में बड़ा इजाफा

    बीएमसी के आंकड़ों के अनुसार,

    • 2022 में कैपिटल एक्सपेंडिचर: 36%
    • 2025 में कैपिटल एक्सपेंडिचर: 58%

    वहीं बजट का कुल आकार भी तेजी से बढ़ा है:

    • 2022: ₹38,515 करोड़
    • 2025: ₹74,366 करोड़

    इससे साफ है कि बीएमसी का फोकस बीते कुछ सालों में भारी भरकम पूंजीगत खर्च और दीर्घकालिक परियोजनाओं पर रहा है।

    BMC Budget 2026 से क्या उम्मीदें?

    • स्थानीय वार्ड स्तर के कामों को प्राथमिकता
    • सड़क, पानी, नाला सफाई जैसे रोजमर्रा के मुद्दों पर ज्यादा फंड
    • अस्पताल और स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार
    • बड़े प्रोजेक्ट्स के साथ बैलेंस्ड विकास

    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1: BMC बजट 2026 कब पेश हो सकता है?
    👉 फरवरी 2026 के दूसरे पखवाड़े में।

    Q2: क्या यह बजट चुने हुए नगरसेवकों के सामने पेश होगा?
    👉 हां, चार साल बाद पहली बार।

    Q3: पिछला बजट किसने पेश किया था?
    👉 प्रशासक और नगर आयुक्त के माध्यम से।

    Q4: पिछले बजटों में किस पर ज्यादा खर्च हुआ?
    👉 बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर।

    Q5: इस बार बजट से क्या उम्मीद है?
    👉 स्थानीय मुद्दों और वार्ड स्तर की जरूरतों पर ज्यादा ध्यान।