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मुंबई में गणेशोत्सव की परंपराओं को डिजिटल रूप से सहेजने के लिए BMC का Bappa.org अभियान, जानें फोटो-कहानी कैसे भेजें और क्या मिलेगा।
मुंबई: गणेशोत्सव के दौरान मुंबई के घरों और सार्वजनिक मंडलों में निभाई जाने वाली परंपराओं, यादों और सांस्कृतिक गतिविधियों को अब डिजिटल रूप से सुरक्षित करने की पहल तेज हो गई है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने मुंबईकरों से Bappa.org पर अपने गणेशोत्सव की कहानी, तस्वीरें, वीडियो, पारंपरिक प्रथाएं और सामाजिक व पर्यावरणीय गतिविधियों की जानकारी दर्ज करने की अपील की है। खास बात यह है कि इस डिजिटल संग्रह में सिर्फ बड़े गणेश मंडल ही नहीं, बल्कि घरों में स्थापित होने वाले गणपति भी शामिल किए जा रहे हैं।
Bappa.org क्या है?
Bappa.org को महाराष्ट्र के गणेशोत्सव का डिजिटल राज्य संग्रह बताया गया है। इसका उद्देश्य महाराष्ट्र में पीढ़ियों से चली आ रही गणेशोत्सव की परंपराओं, परिवारों की यादों, सार्वजनिक मंडलों की गतिविधियों और मूर्ति व सजावट से जुड़ी कला को डिजिटल रिकॉर्ड के रूप में सुरक्षित करना है। पोर्टल के अनुसार यह महाराष्ट्र शासन के सांस्कृतिक कार्य विभाग का उपक्रम है।
Bappa.org पर गणेशोत्सव से जुड़ी कई तरह की जानकारी साझा की जा सकती है। इसमें घर या मंडल की गणेश प्रतिमा की तस्वीर, सजावट, पारंपरिक आरती, परिवार की वर्षों पुरानी परंपरा, गणेशोत्सव से जुड़ी व्यक्तिगत यादें, सामाजिक कार्य, पर्यावरण संरक्षण के प्रयास और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियां शामिल हैं।
इसका मतलब है कि किसी परिवार के घर में हर साल एक ही तरीके से होने वाला गणेशोत्सव भी इस डिजिटल संग्रह का हिस्सा बन सकता है। इसी तरह सार्वजनिक गणेश मंडल, गृहनिर्माण संस्था और गणेश प्रतिमा से जुड़ा काम करने वाले कारीगर भी अपनी कहानी साझा कर सकते हैं।
मुंबई के घरों की परंपराएं भी बनेंगी डिजिटल रिकॉर्ड
मुंबई में गणेशोत्सव का बड़ा हिस्सा केवल प्रसिद्ध सार्वजनिक मंडलों तक सीमित नहीं है। 15 सितंबर को डेढ़ दिन के गणपति विसर्जन के दौरान मुंबई में 24,631 गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन हुआ था, जिनमें 24,521 घरेलू और 110 सार्वजनिक मंडलों की प्रतिमाएं शामिल थीं। ऐसे में घर-घर मनाए जाने वाले गणेशोत्सव की परंपराओं को दर्ज करने का यह प्रयास शहर की व्यापक सांस्कृतिक तस्वीर को सामने ला सकता है।
Bappa.org के मौजूदा संग्रह में मुंबई सिटी से Parel cha Raja, Saibaba Nagar Colony और Girgaon cha Raja जैसी प्रविष्टियां दिखाई दे रही हैं। इसका मतलब है कि मुंबई से नागरिकों और मंडलों की भागीदारी शुरू हो चुकी है।
Bappa.org पर कहानी कैसे दर्ज करें?
पोर्टल के अनुसार इसके लिए किसी विशेष ऐप को डाउनलोड करने या अलग अकाउंट बनाने की जरूरत नहीं है। एक फोटो और अपनी गणेशोत्सव परंपरा के बारे में कुछ पंक्तियों से शुरुआत की जा सकती है। जानकारी भेजने के बाद टीम उसकी जांच करती है और स्वीकार की गई कहानी को डिजिटल संग्रह में दर्ज किया जाता है।
इसके अलावा ‘घरोघरी बाप्पा’ अभियान के तहत WhatsApp के जरिए भी गणेशोत्सव की कहानी भेजने की सुविधा दी गई है। इसके लिए +91 91361 72681 नंबर जारी किया गया है। इस अभियान में भाग लेना नि:शुल्क बताया गया है।
कहानी भेजने के बाद क्या होगा?
Bappa.org पर स्वीकार की गई प्रविष्टियों को एक अलग रिकॉर्ड नंबर दिया जाता है। उदाहरण के तौर पर 2026-00290 और 2026-00297 जैसी प्रविष्टियां संग्रह में दर्ज हैं। इन रिकॉर्ड में जमा करने और स्वीकार किए जाने की तारीख के साथ डिजिटल evidence भी दिखाई देता है।
पोर्टल की जानकारी के अनुसार प्रत्येक योगदान को सत्यापन के बाद महाराष्ट्र के राज्य सांस्कृतिक संग्रह का हिस्सा बनाया जाता है। सफलतापूर्वक कहानी दर्ज कराने वाले परिवारों को सांस्कृतिक कार्य विभाग की ओर से आधिकारिक प्रमाणपत्र दिए जाने की जानकारी भी दी गई है।
सिर्फ मुंबई नहीं, महाराष्ट्र और विदेशों की कहानियां भी
Bappa.org पर फिलहाल महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों के साथ दूसरे स्थानों से भी गणेशोत्सव की कहानियां दिखाई दे रही हैं। पोर्टल पर मुंबई, सातारा, रायगढ़, पुणे और अन्य क्षेत्रों की प्रविष्टियों के साथ महाराष्ट्र के बाहर से भी योगदान दर्ज हैं।
हाल की चयनित कहानियों में नए घर में पहला गणेशोत्सव, पारंपरिक गौरी-गणपति उत्सव, घर पर बनाई गई मिट्टी की गणेश प्रतिमा, वियतनाम में भारतीय विद्यार्थियों का गणेशोत्सव और विसर्जन के बाद बची मिट्टी के इस्तेमाल से जुड़ी पर्यावरणीय पहल जैसी अलग-अलग कहानियां शामिल रही हैं।
इससे साफ है कि इस डिजिटल संग्रह का दायरा केवल गणेश प्रतिमा या पंडाल की तस्वीर तक सीमित नहीं है। परिवार, परंपरा, कला, पर्यावरण और विदेशों में रहने वाले भारतीयों का गणेशोत्सव भी इसका हिस्सा बन सकता है।
महाराष्ट्र सरकार ने अगस्त 2025 में गणेशोत्सव को राज्य महोत्सव के रूप में मनाने को मंजूरी दी थी। इसके बाद गणेशोत्सव से जुड़ी कला, परंपरा, संस्कृति और सामाजिक गतिविधियों को व्यापक स्तर पर सामने लाने के प्रयास बढ़े हैं।
इसी व्यापक संदर्भ में Bappa.org पर गणेशोत्सव की परंपराओं का डिजिटल दस्तावेजीकरण किया जा रहा है। गणेशोत्सव की सांस्कृतिक परंपराओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने और UNESCO की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत से जुड़े प्रयासों के संदर्भ में भी इस दस्तावेजीकरण को जोड़ा जा रहा है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि गणेशोत्सव को UNESCO की मान्यता मिल चुकी है।
मुंबई में हर साल लाखों लोग घरों और सार्वजनिक मंडलों के जरिए गणेशोत्सव मनाते हैं। अलग-अलग इलाकों, परिवारों और समुदायों की अपनी अलग परंपराएं हैं। कई परंपराएं केवल परिवार के बुजुर्गों की यादों तक सीमित रह जाती हैं और उनका कोई डिजिटल रिकॉर्ड नहीं होता।
Bappa.org इसी अंतर को भरने की कोशिश करता है। किसी परिवार की कई दशक पुरानी पूजा पद्धति हो, किसी मंडल का सामाजिक काम हो, पर्यावरण-अनुकूल मूर्ति हो या किसी इलाके की अलग गणेशोत्सव परंपरा—इन अनुभवों को तस्वीर और कहानी के साथ दर्ज किया जा सकता है।
मुंबईकरों के लिए आसान भाषा में कहें तो Bappa.org पर सिर्फ यह बताना जरूरी नहीं है कि आपके घर में गणपति की मूर्ति कैसी है। यह भी बताया जा सकता है कि आपके परिवार में बाप्पा की परंपरा कब से है, सजावट कैसे होती है, कौन-सी आरती या प्रथा निभाई जाती है और गणेशोत्सव के दौरान परिवार या मंडल क्या खास करता है।
यानी इस साल का गणेशोत्सव खत्म होने के बाद भी उसकी कहानी डिजिटल संग्रह में दर्ज रह सकती है। मुंबईकर अपने घर या मंडल की परंपरा को Bappa.org के माध्यम से इस राज्यव्यापी सांस्कृतिक रिकॉर्ड का हिस्सा बना सकते हैं।
महाराष्ट्र में Vertical Property Card को Land Titling Act से जोड़ने की तैयारी है। जानें फ्लैट मालिकों की जमीन हिस्सेदारी, Property Card और इसके असर की पूरी जानकारी।
मुंबई: महाराष्ट्र में जमीन और संपत्ति के मालिकाना हक को लेकर सरकार बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे ने सितंबर 2026 में कहा है कि राज्य सरकार दिसंबर 2026 तक Land Titling Act लाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य संपत्तियों के मालिकाना हक का अधिक स्पष्ट और निश्चित रिकॉर्ड तैयार करना तथा जमीन से जुड़े विवादों को कम करना है।
इस व्यापक व्यवस्था में Vertical Property Card भी महत्वपूर्ण हो सकता है, जिसके जरिए बहुमंजिला इमारतों में अलग-अलग फ्लैट मालिकों के अधिकार और जमीन में उनके हिस्से को सरकारी रिकॉर्ड में अधिक स्पष्ट तरीके से दर्ज करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
महाराष्ट्र में Property Card पहले से जमीन और संपत्ति के अधिकारों का सरकारी रिकॉर्ड है। भूमि अभिलेख विभाग की मौजूदा डिजिटल व्यवस्था में Property Card को ऑनलाइन देखा और डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित प्रति के रूप में डाउनलोड किया जा सकता है। सरकार का आधिकारिक पोर्टल डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित Property Card को सरकारी और कानूनी कार्यों के लिए इस्तेमाल करने की सुविधा भी बताता है।
Vertical Property Card की अवधारणा का मकसद बहुमंजिला इमारत में individual flat ownership और उससे जुड़े proportionate land interest को अधिक स्पष्ट रूप से रिकॉर्ड करने की दिशा में है।
यानी बात केवल इस बात की नहीं है कि किस व्यक्ति के नाम कौन सा फ्लैट है, बल्कि यह भी है कि उस फ्लैट के मालिक का इमारत के नीचे की जमीन में संबंधित हिस्सा किस तरह रिकॉर्ड में दिखाई देगा।
क्या फ्लैट मालिक जमीन के एक अलग हिस्से का मालिक बन जाएगा?
यहां सबसे महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। Vertical Property Card का मतलब यह नहीं है कि किसी फ्लैट मालिक को इमारत के नीचे जमीन का कोई अलग और भौतिक रूप से चिन्हित टुकड़ा मिल जाएगा।
Apartment ownership के कानूनी ढांचे में जमीन और common areas में मालिक का undivided interest जुड़ा होता है। इसलिए Vertical Property Card को जमीन के अलग-अलग भौतिक टुकड़ों का बंटवारा समझना सही नहीं होगा।
यही कारण है कि इस व्यवस्था का महत्व सरकारी रिकॉर्ड में ownership और संबंधित land interest को ज्यादा स्पष्ट करने में है।
7/12, Property Card और Vertical Property Card में क्या अंतर है?
सामान्य जमीन रिकॉर्ड और बहुमंजिला इमारत के फ्लैट ownership record को एक ही चीज समझना सही नहीं है।
महाराष्ट्र भूमि अभिलेख विभाग वर्तमान में 7/12, 8A, Property Card और mutation records के लिए अलग-अलग डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराता है।
फ्लैट मालिक के लिए Sale Deed, Society Share Certificate, Property Card और प्रस्तावित Vertical Property Card की अपनी-अपनी भूमिका हो सकती है। इसलिए Vertical Property Card को Sale Deed या अन्य title documents का सीधा replacement मानना जल्दबाजी होगी।
प्रस्तावित Land Titling framework का बड़ा उद्देश्य property ownership को ज्यादा definitive और digitally verifiable बनाना है। सितंबर में सामने आई जानकारी के अनुसार नए सिस्टम में property ownership, measurement और valuation जैसी जानकारियों को डिजिटल रिकॉर्ड में शामिल करने तथा QR code के जरिए रिकॉर्ड तक पहुंच उपलब्ध कराने की योजना है।
सरकार का दावा है कि इससे जमीन के मालिकाना हक को लेकर विवाद, फर्जी लेनदेन और रिकॉर्ड से जुड़ी अस्पष्टता कम करने में मदद मिलेगी।
लेकिन अभी महत्वपूर्ण बात यह है कि Land Titling Act को दिसंबर 2026 में लाने की घोषणा हुई है; इसका अंतिम कानून, नियम और विस्तृत implementation mechanism आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि अलग-अलग श्रेणी की संपत्तियों पर व्यवस्था किस तरह लागू होगी।
स्पष्ट सरकारी ownership records से भविष्य में property verification की प्रक्रिया आसान होने की संभावना है। बैंक किसी संपत्ति पर loan देने से पहले title और अन्य संबंधित दस्तावेजों की जांच करते हैं। अगर सरकारी रिकॉर्ड में ownership और property details ज्यादा व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध हों तो यह प्रक्रिया अधिक efficient हो सकती है।
हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि Vertical Property Card मिलते ही हर बैंक बिना किसी अतिरिक्त जांच के home loan मंजूर कर देगा। Sale deed, title chain, encumbrance, approvals और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जांच फिर भी परिस्थितियों के अनुसार जरूरी हो सकती है।
Redevelopment में क्यों महत्वपूर्ण हो सकता है?
मुंबई और महाराष्ट्र में redevelopment के मामलों में जमीन का title और society का अधिकार बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में individual apartment ownership और underlying land interest का सरकारी रिकॉर्ड भविष्य में documentation को अधिक स्पष्ट करने में मदद कर सकता है।
लेकिन केवल Vertical Property Card के आधार पर redevelopment rights तय होंगे, ऐसा कहना सही नहीं होगा। Conveyance, title documents, society records, development agreements और संबंधित planning तथा housing नियम भी महत्वपूर्ण रहेंगे।
क्या इससे पुराने property disputes खत्म हो जाएंगे?
ऐसा मानना जल्दबाजी होगी।
Land Titling Act का उद्देश्य ownership disputes को कम करना है, लेकिन पुराना विवाद केवल नया digital record बनने से अपने आप समाप्त नहीं हो जाता। किसी संपत्ति पर पहले से litigation, conflicting documents, mortgage या title dispute मौजूद है तो उसकी कानूनी स्थिति अलग से तय हो सकती है।
इसी तरह Vertical Property Card को पुराने title documents या court proceedings का automatic replacement नहीं माना जाना चाहिए।
पुराने फ्लैट मालिकों के लिए सबसे बड़ा सवाल
जिन लोगों ने कई साल पहले फ्लैट खरीदा है, उनके लिए मुख्य सवाल यह होगा कि नई व्यवस्था उनके existing ownership documents के साथ कैसे जुड़ेगी।
क्या उन्हें अलग से आवेदन करना होगा? कौन सा विभाग Vertical Property Card जारी करेगा? कौन से documents चाहिए होंगे? क्या existing buildings पर भी यही प्रक्रिया लागू होगी? कितनी फीस होगी? और पुराने records में गलती होने पर correction कैसे होगा?
इन सवालों का अंतिम जवाब Land Titling framework और उससे जुड़े नियम/सरकारी अधिसूचनाओं के बाद ज्यादा स्पष्ट होगा। फिलहाल महाराष्ट्र के भूमि अभिलेख विभाग की मौजूदा सेवाओं में Property Card और उससे जुड़े digital तथा mutation services उपलब्ध हैं।
सरकार की मौजूदा डिजिटल व्यवस्था कितनी आगे बढ़ी है?
महाराष्ट्र का भूमि अभिलेख विभाग पहले से 7/12, 8A, Property Card, e-Ferfar, document verification और digital land-record services चला रहा है। विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर digitally signed Property Card डाउनलोड करने की सुविधा भी उपलब्ध है।
इसलिए प्रस्तावित Land Titling system को पूरी तरह नई शुरुआत के बजाय मौजूदा digital land-record infrastructure को एक अधिक व्यापक ownership framework में ले जाने की दिशा में भी देखा जा सकता है।
अब आगे क्या होगा?
सबसे महत्वपूर्ण अगला पड़ाव दिसंबर 2026 का Winter Session है, जहां सरकार Land Titling Act को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है। इसके बाद कानून के अंतिम प्रावधानों और implementation rules से यह ज्यादा स्पष्ट होगा कि Vertical Property Card किन संपत्तियों पर, किस प्रक्रिया से और किस authority के माध्यम से लागू होगा।
फ्लैट मालिकों के लिए फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि Vertical Property Card को केवल एक नए दस्तावेज के रूप में नहीं, बल्कि महाराष्ट्र में property ownership records को अधिक स्पष्ट और digitally verifiable बनाने वाले बड़े land-record reform के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।
महाराष्ट्र की हाउसिंग सोसायटियों के लिए नए नियम लागू हैं। मेंटेनेंस, बकाया, पुनर्विकास, निधि, बैठक और नामांकन से जुड़े अहम बदलाव जानिए।
मुंबई: महाराष्ट्र की सहकारी हाउसिंग सोसायटियों के कामकाज में बड़ा बदलाव हुआ है। राज्य सरकार ने जून 2026 में सहकारी गृहनिर्माण संस्थाओं के लिए अलग नियमों वाला नया अध्याय लागू किया है। इसके तहत मेंटेनेंस वसूली, बकाया पर ब्याज, अलग-अलग निधियों में योगदान, सामान्य सभा, पुनर्विकास और बकाया राशि की वसूली जैसी प्रक्रियाओं को अधिक स्पष्ट किया गया है। सहकार आयुक्त एवं निबंधक की आधिकारिक वेबसाइट पर 22 जून 2026 को गृहनिर्माण नियम 106-सी की अधिसूचना दर्ज है।
लेकिन फ्लैट मालिकों के लिए एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। नए नियम लागू हो चुके हैं, जबकि संशोधित आदर्श उपविधियों का अलग मसौदा अभी अंतिम रूप की प्रक्रिया में है। सहकार आयुक्त की वेबसाइट पर 13 और 18 अगस्त 2026 के संशोधित आदर्श उपविधियों के मसौदे उपलब्ध हैं।
मेंटेनेंस से जुड़े खर्च का हिसाब बदलेगा
नए नियमों में सोसायटी के अलग-अलग खर्चों को बांटने का आधार स्पष्ट किया गया है। सेवा शुल्क सदस्यों के बीच समान रूप से बांटा जा सकता है, जबकि संपत्ति कर, पानी, बीमा, मरम्मत और कुछ अन्य खर्चों के लिए अलग-अलग आधार निर्धारित हैं। मरम्मत एवं रखरखाव निधि के लिए सामान्य सभा द्वारा तय राशि कम से कम निर्माण लागत के सालाना 0.75 प्रतिशत के बराबर होनी चाहिए। डूबत निधि के लिए न्यूनतम 0.25 प्रतिशत का प्रावधान है।
इसका मतलब यह नहीं है कि हर सोसायटी अगले महीने से मनमाने तरीके से मेंटेनेंस बढ़ा सकती है। शुल्क किस मद में है और उसके लिए नियमों में कौन सा आधार तय है, यह देखना जरूरी होगा।
फ्लैट खाली रहने पर कितना शुल्क लगेगा?
फ्लैट का मालिक खुद वहां नहीं रहता और उसे किसी अन्य उपयोग में देता है तो गैर-निवास शुल्क को लेकर भी सीमा तय की गई है। यह शुल्क सेवा शुल्क के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता। इसे पूरे मेंटेनेंस बिल का 10 प्रतिशत समझना सही नहीं होगा।
यानी यदि किसी सोसायटी में सेवा शुल्क और अन्य मदों को अलग-अलग दिखाया गया है तो गैर-निवास शुल्क की गणना पूरे बिल पर 10 प्रतिशत लगाकर नहीं की जानी चाहिए।
सोसायटी के बकाये पर ब्याज की अधिकतम सीमा 12 प्रतिशत साधारण ब्याज प्रति वर्ष रखी गई है। इसका अर्थ यह नहीं है कि हर सोसायटी स्वतः 12 प्रतिशत ब्याज लगाएगी। लागू दर सामान्य सभा द्वारा तय की जानी है और वह निर्धारित अधिकतम सीमा से अधिक नहीं हो सकती।
बकाया वसूली की प्रक्रिया भी अधिक औपचारिक की गई है। नियम 106-सी के तहत निर्धारित प्रपत्र और दस्तावेजों के आधार पर वसूली प्रमाणपत्र की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। इससे सोसायटी के बकाये की वसूली के लिए स्पष्ट प्रशासनिक रास्ता मिलता है।
मरम्मत और रखरखाव के खर्च के लिए प्रबंध समिति की वित्तीय सीमा भी सदस्यों की संख्या के अनुसार निर्धारित की गई है। 25 तक सदस्यों वाली सोसायटी के लिए यह सीमा 1 लाख रुपये, 26 से 50 सदस्यों के लिए 2 लाख रुपये, 51 से 100 सदस्यों के लिए 3 लाख रुपये, 101 से 1,000 सदस्यों के लिए 4 लाख रुपये और 1,000 से अधिक सदस्यों वाली सोसायटी के लिए 5 लाख रुपये है। इससे अधिक के बड़े खर्च में सामान्य सभा की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
पुनर्विकास के लिए भी प्रक्रिया तय
पुनर्विकास अब केवल समिति और विकासक के बीच की बातचीत तक सीमित नहीं रहेगा। नए नियमों में पुनर्विकास से जुड़ी सामान्य सभा की प्रक्रिया, सूचना और उपस्थिति से संबंधित प्रावधान रखे गए हैं।
पुनर्विकास की बैठक के लिए 14 स्पष्ट दिनों की सूचना और कुल सदस्य संख्या के दो-तिहाई के बराबर गणपूर्ति का प्रावधान है। विकासक या ठेकेदार के चयन के लिए कुल सदस्यों के 51 प्रतिशत समर्थन की आवश्यकता बताई गई है। दोनों आंकड़ों को एक ही चीज समझना गलत होगा—दो-तिहाई गणपूर्ति और 51 प्रतिशत समर्थन अलग-अलग प्रक्रियाओं से जुड़े हैं।
स्व-पुनर्विकास के मामले में भी उधारी की सीमा को लेकर विशेष प्रावधान है। नियमों के अनुसार निर्धारित परिस्थितियों में सरकारी मान्यता प्राप्त मूल्यांकनकर्ता द्वारा तय भूमि मूल्य के 10 गुना तक उधारी की सीमा का प्रावधान है। यह बैंक से स्वतः 10 गुना कर्ज मिलने की गारंटी नहीं है।
मृत सदस्य के बाद फ्लैट का क्या होगा?
नामांकन को लेकर भी फ्लैट मालिकों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव हैं। किसी सदस्य की मृत्यु के बाद नामांकित व्यक्ति को प्रक्रिया के अनुसार अस्थायी सदस्यता मिल सकती है, लेकिन केवल नामांकित व्यक्ति होने से संपत्ति का अंतिम स्वामित्व स्वतः उसके नाम नहीं हो जाता।
जहां उत्तराधिकार को लेकर विवाद हो, वहां संबंधित कानूनी दस्तावेज और उत्तराधिकार की प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो सकती है। नए प्रावधानों में पंजीकृत पारिवारिक व्यवस्था के माध्यम से कुछ परिस्थितियों में हस्तांतरण की प्रक्रिया को भी जगह दी गई है।
सामान्य सभा में ऑनलाइन भागीदारी का रास्ता
नए नियमों में सामान्य सभा की बैठकों में वीडियो सम्मेलन या ऐसे दृश्य-श्रव्य माध्यम से भागीदारी की व्यवस्था को मान्यता दी गई है, जिसमें सदस्य की पहचान और बैठक का समयबद्ध रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जा सके। इससे दूसरे शहर या विदेश में रहने वाले सदस्यों के लिए भागीदारी आसान हो सकती है।
नए नियम लागू होने के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण अगला चरण संशोधित आदर्श उपविधियों का अंतिम रूप है। राज्य सरकार ने 2026 में इनका विस्तृत मसौदा जारी कर सुझाव और आपत्तियां मांगी थीं। आधिकारिक पोर्टल पर इसका मसौदा 13 और 18 अगस्त को सूचीबद्ध है।
सुझाव और आपत्तियां देने की अंतिम तारीख 27 अगस्त 2026 थी। 10 सितंबर की ताजा कानूनी जानकारी के अनुसार मसौदा अब अंतिम मंजूरी और राजपत्र में प्रकाशन की प्रक्रिया की ओर बढ़ रहा है तथा अक्टूबर 2026 में लागू होने की संभावना बताई गई है। हालांकि अक्टूबर की तारीख को अभी अंतिम सरकारी अधिसूचना के रूप में नहीं माना जा सकता।
एक बार संशोधित आदर्श उपविधियां औपचारिक रूप से जारी होने के बाद सोसायटियों को उन्हें अपनाने की प्रक्रिया से गुजरना होगा। मौजूदा नियमों में आदर्श उपविधियां प्रकाशित होने के तीन महीने के भीतर उन्हें अपनाने का प्रावधान है।
इसलिए महाराष्ट्र के फ्लैट मालिकों और सोसायटी समितियों के लिए अभी सबसे जरूरी बात यह है कि जून 2026 में लागू हुए नए वैधानिक नियमों और अभी अंतिम रूप की प्रतीक्षा कर रहे संशोधित आदर्श उपविधियों को एक ही चीज न समझें। आने वाले महीनों में उपविधियों की अंतिम अधिसूचना के बाद पार्किंग, शिकायत निवारण, विद्युत वाहन चार्जिंग, पुनर्विकास और सोसायटी के दैनिक संचालन से जुड़े कई प्रावधानों का व्यावहारिक असर और स्पष्ट होगा।
महाराष्ट्र में खिलाड़ियों के 5% नौकरी आरक्षण की नई नीति मंजूर, पुराने प्रमाणपत्रों का 3 महीने में सत्यापन जरूरी; जानिए किसे मिलेगा लाभ।
मुंबई: महाराष्ट्र में सरकारी नौकरी का इंतजार कर रहे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के लिए बड़ा फैसला हुआ है। राज्य मंत्रिमंडल ने सरकारी, अर्ध-सरकारी और अन्य पात्र संस्थाओं में खिलाड़ियों के लिए लागू 5% नौकरी आरक्षण की संशोधित नीति को मंजूरी दे दी है। नई व्यवस्था में सबसे अहम बदलाव यह है कि आरक्षण का लाभ लेने वाले खिलाड़ियों को अपने Sports Certificate की वैधता का सत्यापन तीन महीने के भीतर कराना होगा।
यह तीन महीने की समयसीमा नए संशोधित शासन निर्णय (GR) के जारी होने की तारीख से लागू होगी। सरकार ने Sports Quota से जुड़े पहले के सभी शासन निर्णयों को रद्द कर एक एकीकृत नीति लागू करने का फैसला किया है। नया GR जल्द जारी किया जाएगा।
5% Sports Quota किन नौकरियों में लागू होगा?
संशोधित नीति के तहत यह आरक्षण मंत्रालयीन विभागों और उनके अधीन सरकारी कार्यालयों के साथ जिला परिषद, पंचायत समिति, ग्राम पंचायत, महानगरपालिका, सरकारी उपक्रम, मंडल, महामंडल, विश्वविद्यालय, सरकारी अनुदान प्राप्त शैक्षणिक संस्थान, आश्रमशाला, सहकारी संस्थाओं और सरकारी निधि अथवा अनुदान प्राप्त अन्य पात्र संस्थाओं में सीधी भर्ती के पदों पर लागू रहेगा।
इसमें समूह-अ, समूह-ब, समूह-क और समूह-ड के पद शामिल होंगे।
महाराष्ट्र में 5% Sports Quota की व्यवस्था 30 अप्रैल 2005 से लागू है। क्रीड़ा विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार अब तक 4,949 खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी में इसका लाभ मिल चुका है।
किस खिलाड़ी को किस पद के लिए पात्रता मिलेगी?
नई नीति में खेल उपलब्धि और प्रतियोगिता के स्तर के आधार पर अलग-अलग समूहों के लिए पात्रता तय की गई है।
समूह-अ: ओलंपिक, एशियन गेम्स, वरिष्ठ विश्व एवं एशियन चैंपियनशिप/कप, कॉमनवेल्थ गेम्स, टेनिस ग्रैंड स्लैम, ग्रैंडमास्टर स्तर की शतरंज प्रतियोगिताओं और पैरालंपिक सहित अधिकृत अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त खिलाड़ी।
समूह-ब राजपत्रित: युवा/कनिष्ठ विश्व एवं एशियन चैंपियनशिप, कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप, यूथ ओलंपिक तथा संबंधित अंतरराष्ट्रीय स्कूल, विश्वविद्यालय और पैरा प्रतियोगिताओं के पदक विजेता।
समूह-ब अराजपत्रित: नेशनल गेम्स, राष्ट्रीय चैंपियनशिप, राष्ट्रीय फेडरेशन कप, पैरा नेशनल गेम्स और राष्ट्रीय स्कूल खेल प्रतियोगिताओं के पदक विजेता।
समूह-क: खेलो इंडिया, अखिल भारतीय अंतर-विश्वविद्यालय, राज्य स्तरीय वरिष्ठ/युवा/कनिष्ठ, स्कूल, अंतर-विश्वविद्यालय और पैरा खेल प्रतियोगिताओं के पदक विजेता।
समूह-ड: निर्धारित खेल योग्यता रखने वाले खिलाड़ी अथवा वरिष्ठ वर्ग की राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता, राष्ट्रीय चैंपियनशिप और वरिष्ठ पैरा राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेने वाले खिलाड़ी।
क्रिकेट, कबड्डी, खो-खो और शतरंज भी पात्र खेलों में
नई नीति में खेलों की पात्रता का दायरा बढ़ाया गया है। 2005 के बाद लगातार तीन ओलंपिक में शामिल खेलों के साथ क्रिकेट, कबड्डी, खो-खो, शतरंज और मल्लखंब को भी शामिल किया गया है।
ओलंपिक, पैरालंपिक, एशियन गेम्स, पैरा एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स में तीन ओलंपिक वाली शर्त लागू नहीं होगी।
पात्र खेलों में एथलेटिक्स, बैडमिंटन, बॉक्सिंग, फुटबॉल, हॉकी, जूडो, रोइंग, शूटिंग, तैराकी, टेबल टेनिस, वेटलिफ्टिंग, कुश्ती, टेनिस, गोल्फ, घुड़सवारी, सेलिंग, स्पोर्ट्स क्लाइम्बिंग और अन्य निर्धारित खेल भी शामिल हैं।
पुराने Sports Certificate वालों के लिए क्या बदलेगा?
नई नीति का यह हिस्सा हजारों खिलाड़ियों के लिए महत्वपूर्ण है। पुराने शासन निर्णयों के तहत Sports Quota के पात्र खिलाड़ियों को भी नए GR की तारीख से तीन महीने के भीतर अपने Sports Certificate का verification कराना होगा।
यानी केवल पहले से जारी प्रमाणपत्र होना पर्याप्त नहीं होगा। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उसकी वैधता की पुष्टि कराना जरूरी होगा।
‘क्रीड़ा ई-प्रमाण’ से होगी डिजिटल जांच
सरकार Sports Certificate verification के लिए ‘क्रीड़ा ई-प्रमाण’ की डिजिटल व्यवस्था लागू कर रही है। प्रतियोगिता समाप्त होने के सात दिनों के भीतर परिणामों को डिजिटल हस्ताक्षर के साथ upload करना अनिवार्य होगा।
Blockchain technology के जरिए रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने और automated cryptographic hash के माध्यम से उसकी authenticity जांचने की व्यवस्था की जाएगी। इसका उद्देश्य फर्जी और छेड़छाड़ किए गए खेल प्रमाणपत्रों पर रोक लगाना है।
5% आरक्षण का उद्देश्य क्या है?
सरकार के मुताबिक इस नीति का उद्देश्य राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सरकारी रोजगार में अवसर देना और उनकी सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा मजबूत करना है।
Sports Quota को Mission Lakshyavedh जैसी खेल प्रोत्साहन पहलों के साथ देखने पर इसका व्यापक उद्देश्य खिलाड़ियों को बेहतर training और competition के साथ भविष्य की employment security उपलब्ध कराना भी है।
महाराष्ट्र कैबिनेट के अन्य फैसले
PRAGATI Health Project
सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत करने के लिए 2026 से 2031 तक PRAGATI Project लागू करने को मंजूरी दी गई है। परियोजना की अनुमानित लागत ₹4,250 करोड़ है, जिसमें ₹2,975 करोड़ Asian Development Bank loan और ₹1,275 करोड़ राज्य का हिस्सा होगा।
इसके तहत कोल्हापुर और नांदेड में 500-500 बेड, नागपुर और लातूर में 300-300 बेड तथा पुणे में 200 बेड का विशेष रेफरल अस्पताल प्रस्तावित है। कुल 2,430 पद भी बनाए जाएंगे।
छत्रपति संभाजीनगर के Auric City, Shendra में Hyosung India के Spandex/Elastomeric Yarn manufacturing project को Integrated and Sustainable Textile Policy 2023-28 के तहत विशेष मामले में capital grant देने को मंजूरी मिली है। सरकार ने इसे मराठवाड़ा और विदर्भ में निवेश तथा रोजगार की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया है।
Madha में District and Additional Sessions Court
सोलापुर के Madha में नया District and Additional Sessions Court स्थापित होगा। अभी यहां के मामले Barshi court में चलते हैं। नए न्यायालय के लिए 20 नियमित और 6 outsourced पद मंजूर किए गए हैं।
मुंबई के Bhuleshwar स्थित Kaivalyadham Yogic Centre के भूमि पट्टे का अगले 30 वर्षों के लिए ₹12 सालाना की रियायती दर पर नवीनीकरण मंजूर किया गया है।
वहीं Chembur की Bhikkhu Sangh United Buddhist Mission संस्था को उसके कब्जे में रही 1,735 वर्ग मीटर सरकारी जमीन नाममात्र दर पर lease पर देने को मंजूरी दी गई है।
Koradi में Mahalakshmi Jagdamba Sansthan को जमीन
नागपुर के Koradi में तीर्थक्षेत्र विकास योजना के तहत विकसित सरकारी जमीन को Shri Mahalakshmi Jagdamba Sansthan को 30 वर्ष के लिए lease पर देने की मंजूरी दी गई है। इसका उद्देश्य तीर्थक्षेत्र में सुविधाओं और रखरखाव का बेहतर प्रबंधन करना है।
Sports Quota के मामले में अब संशोधित एकीकृत Government Resolution जारी होना सबसे महत्वपूर्ण अगला कदम है। इसी के बाद verification की औपचारिक प्रक्रिया और तीन महीने की समयसीमा प्रभावी होगी।
खिलाड़ियों के लिए नई नीति का सबसे बड़ा बदलाव केवल 5% आरक्षण जारी रखना नहीं, बल्कि eligibility, certificate verification और digital authentication को एकीकृत व्यवस्था में लाना है।
मुंबई और एमएमआर में 2047 तक 30 लाख किफायती घर बनाने का प्लान सामने आया है। SRA-MHADA से लेकर कीमत, पुनर्विकास और परिवहन तक जानिए असर।
मुंबई: मुंबई महानगर क्षेत्र यानी एमएमआर में आने वाले वर्षों में घरों की तस्वीर बड़े स्तर पर बदलने की तैयारी है। महाराष्ट्र सरकार ने 2047 तक मुंबई और पूरे एमएमआर में 30 लाख किफायती घर तैयार करने का बड़ा लक्ष्य रखा है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बताया कि इसमें अकेले मुंबई के लिए 10 लाख और एमएमआर के बाकी हिस्सों के लिए 20 लाख घरों का लक्ष्य रखा गया है।
सरकार की योजना सिर्फ नए फ्लैट बनाने तक सीमित नहीं है। इसके साथ झोपड़पट्टी पुनर्वास, पुराने भवनों का पुनर्विकास, क्लस्टर विकास, किराये के आवास, परिवहन और एमएमआर के नए विकास क्षेत्रों को भी जोड़ा गया है। इसका असर मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई, भिवंडी, कल्याण-डोंबिवली और आसपास के तेजी से बढ़ते इलाकों की आवास व्यवस्था और आबादी के फैलाव पर पड़ सकता है।
मुंबई में 10 लाख और एमएमआर में 20 लाख घर
सरकार के मुताबिक मुंबई में करीब 10 लाख घरों की जरूरत को पूरा करने के लिए 6 लाख घर एसआरए के माध्यम से और 4 लाख घर म्हाडा तथा दूसरी आवासीय परियोजनाओं के जरिए तैयार करने की योजना है।
वहीं मुंबई के बाहर एमएमआर के अलग-अलग हिस्सों में 20 लाख अतिरिक्त घर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें ठाणे, मीरा-भायंदर, कल्याण-डोंबिवली, नवी मुंबई, उल्हासनगर और भिवंडी जैसे इलाके शामिल हैं।
2047 तक 30 लाख घर तैयार करने के आंकड़े को मौजूदा समयसीमा के हिसाब से देखें तो औसतन हर साल करीब 1.5 लाख घर तैयार करने पड़ेंगे। यह सरकार का घोषित सालाना लक्ष्य नहीं है, बल्कि कुल लक्ष्य और समयसीमा से निकला सामान्य गणित है। इससे योजना के पैमाने का अंदाजा लगाया जा सकता है।
एसआरए के 6 लाख घरों का मतलब आम खरीदारों के लिए 6 लाख फ्लैट नहीं
मुंबई के 10 लाख घरों में सबसे बड़ा हिस्सा एसआरए के जरिए आने वाला है। हालांकि एसआरए के इन घरों को आम खरीदारों के लिए उपलब्ध 6 लाख सस्ते फ्लैट समझना सही नहीं होगा।
एसआरए यानी झोपड़पट्टी पुनर्वसन प्राधिकरण का मुख्य काम पात्र झोपड़पट्टी निवासियों का पुनर्वास करना है। इसलिए 6 लाख का यह हिस्सा मुख्य रूप से पुनर्विकास और पुनर्वास से जुड़ा होगा।
इसके मुकाबले म्हाडा अलग-अलग आय वर्गों के लिए आवास योजनाएं चलाता है। इसलिए आने वाले समय में 30 लाख घरों की पूरी योजना में किस एजेंसी से कितने घर आएंगे और उनमें कितने घर बिक्री के लिए उपलब्ध होंगे, यह तस्वीर महत्वपूर्ण होगी।
सरकार ने घरों की संख्या और एजेंसियों की भूमिका का बड़ा खाका सामने रखा है, लेकिन 30 लाख घरों की अंतिम कीमत, कारपेट एरिया, आय वर्ग के हिसाब से पात्रता और खरीद की शर्तों का पूरा विवरण अभी सामने नहीं आया है।
मुंबई जैसे शहर में किफायती घर का मतलब सिर्फ बाजार कीमत से तय नहीं होता। परिवार की आय, होम लोन की किस्त, डाउन पेमेंट और रोज के यात्रा खर्च को जोड़कर ही किसी घर की वास्तविक affordability समझ आती है।
2026 के Knight Frank affordability आंकड़ों के मुताबिक एमएमआर देश के प्रमुख आवास बाजारों में सबसे कम किफायती बाजार बना हुआ है। यहां सामान्य परिवार की आय का करीब 69 प्रतिशत हिस्सा होम लोन की मासिक किस्त में जा सकता है, जबकि 50 प्रतिशत को affordability की सीमा माना जाता है।
ऐसे में 30 लाख घरों की योजना का असली असर उनकी संख्या के साथ-साथ कीमत तय होने पर भी निर्भर करेगा।
मुंबई में सरकारी घरों की मांग का दबाव पहले से दिखाई देता है। 2026 की म्हाडा मुंबई बोर्ड लॉटरी में 2,640 घरों के लिए करीब 78,976 आवेदन आए थे। इनमें 55,244 आवेदकों ने ईएमडी भी जमा की थी।
इससे साफ है कि सीमित संख्या में उपलब्ध घरों के लिए भी बड़ी संख्या में परिवार आवेदन करते हैं।
ऐसे माहौल में 30 लाख घरों की योजना अगर चरणबद्ध तरीके से जमीन पर आती है तो आवास की कमी को कम करने का बड़ा मौका बन सकता है। लेकिन घरों की कीमत और पात्रता तय करते समय उन परिवारों को केंद्र में रखना होगा जिनके लिए यह योजना बनाई जा रही है।
2030 के पुराने 30 लाख लक्ष्य के बाद अब 2047 का लक्ष्य
नई घोषणा के साथ आवास नीति का एक पुराना अध्याय भी फिर चर्चा में आ गया है।
2024 में एमएमआर के विकास से जुड़े रोडमैप में 2030 तक 30 लाख किफायती घरों की जरूरत और लक्ष्य सामने आया था। उस समय म्हाडा की तरफ से मुंबई में 2.5 लाख समेत करीब 8 लाख घरों की भूमिका की बात सामने आई थी।
अब 2047 तक 30 लाख घरों का नया लक्ष्य सामने आया है।
इसलिए दोनों योजनाओं के बीच स्पष्ट अंतर समझना जरूरी होगा। अभी उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह मानना सही नहीं होगा कि 2047 तक पुराने 30 लाख के ऊपर 30 लाख अतिरिक्त घर बनाए जाएंगे। सरकार की ओर से दोनों लक्ष्यों का स्पष्ट संबंध सामने आने के बाद ही पूरी तस्वीर साफ होगी।
पुराने और जर्जर भवनों के पुनर्विकास को भी मिलेगा जोर
मुंबई और ठाणे में पुराने और जर्जर भवनों का पुनर्विकास लंबे समय से बड़ा मुद्दा रहा है। सरकार का कहना है कि यूडीसीपीआर लागू होने से पुराने भवनों के पुनर्विकास का रास्ता आसान हुआ है।
इसका महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि मुंबई के कई घने इलाकों में पुरानी इमारतों की जगह नई इमारतें बनाना सिर्फ आवास बढ़ाने का मामला नहीं है, बल्कि सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है।
सरकार ने पागड़ी सिस्टम वाली इमारतों और कपड़ा मिलों की जमीन पर बनी चालों के पुनर्विकास को भी गति देने की बात कही है। ओसी से जुड़े मामलों के लिए अभय योजना का भी उल्लेख किया गया है।
क्लस्टर विकास में सिर्फ नई बिल्डिंग नहीं
अनधिकृत और पुराने इलाकों के पुनर्विकास के लिए क्लस्टर विकास योजना को भी इस बड़े आवास अभियान से जोड़ा गया है।
सरकार के मुताबिक क्लस्टर विकास में सिर्फ ऊंची इमारतें खड़ी करने के बजाय पूरे इलाके को बेहतर सुविधाओं के साथ विकसित करने का लक्ष्य है। इसमें डिजिटल लाइब्रेरी, खुले स्थान, कम्युनिटी हॉल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और महिला सशक्तिकरण केंद्र समेत 23 तरह की नागरिक सुविधाओं का प्रावधान बताया गया है।
अगर ये सुविधाएं घरों के साथ जमीन पर उतरती हैं तो पुनर्विकास का असर सिर्फ मकान बदलने तक सीमित नहीं रहेगा।
घर के साथ किराये का विकल्प भी जरूरी
मुंबई में हर परिवार घर खरीदने की स्थिति में नहीं है। बड़ी संख्या में लोग नौकरी, पढ़ाई या दूसरे कामों के लिए किराये पर रहते हैं।
एमएमआरडीए की Rental Housing योजना में 51 प्रस्तावों के जरिए करीब 97,574 किराये के आवास बनने की संभावना बताई गई है। ऐसे में आने वाले वर्षों में किफायती आवास के साथ किराये के आवास की भूमिका भी अहम हो सकती है।
30 लाख घरों के बड़े लक्ष्य में खरीद के लिए घरों के साथ कम आय वाले परिवारों के लिए सस्ते किराये के आवास कितने होंगे, यह भी आवास नीति की सफलता तय करने वाला महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।
सिर्फ घर सस्ता होने से जिंदगी सस्ती नहीं होगी
मुंबई की आवास समस्या को परिवहन से अलग करके देखना मुश्किल है।
अगर एमएमआर में नए घर शहर के बाहरी हिस्सों में बड़ी संख्या में बनते हैं और लोगों का रोजगार मुंबई या किसी दूसरे दूर के इलाके में रहता है, तो रोज का लंबा सफर परिवार की कुल लागत बढ़ा सकता है।
मुंबई के निम्न आय वर्ग की परिवहन सुविधा पर हुए एक अध्ययन में सार्वजनिक परिवहन की पहुंच और लागत को बड़ी चुनौती बताया गया है। इसलिए नया घर तभी वास्तविक राहत देगा जब उसके साथ बेहतर सार्वजनिक परिवहन और रोजगार तक आसान पहुंच भी हो।
यही कारण है कि सरकार ने आवास विस्तार के साथ ठाणे आंतरिक रिंग मेट्रो जैसी परियोजनाओं पर भी जोर दिया है।
ठाणे रिंग मेट्रो से बढ़ेगी कनेक्टिविटी
ठाणे आंतरिक रिंग मेट्रो का उद्देश्य ठाणे में रेलवे स्टेशनों पर दबाव कम करना, यात्रा का समय घटाना और अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी बेहतर करना बताया गया है।
एमएमआर में लाखों नए घर तैयार होने के साथ अगर सार्वजनिक परिवहन का नेटवर्क भी बढ़ता है तो नए आवासीय क्षेत्रों और रोजगार केंद्रों के बीच दूरी कम करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि इस परियोजना को लेकर कुछ नागरिकों ने मार्ग, यातायात, पर्यावरण और स्थानीय परामर्श से जुड़े सवाल भी उठाए हैं। ऐसे में परियोजना की रफ्तार के साथ उसका स्थानीय प्रभाव भी महत्वपूर्ण रहेगा।
एसआरए और बड़े पुनर्विकास प्रोजेक्ट्स का असर केवल घर मिलने तक नहीं रहता।
नया घर अगर पुराने इलाके से काफी दूर चला जाता है तो परिवार की रोजमर्रा की जिंदगी बदल सकती है। नौकरी तक पहुंचने का समय और खर्च बढ़ सकता है, बच्चों को स्कूल बदलना पड़ सकता है और छोटे कारोबार या स्थानीय ग्राहकों पर निर्भर लोगों की आय प्रभावित हो सकती है।
इसीलिए पुनर्वास की सफलता सिर्फ इस आधार पर नहीं मापी जा सकती कि कितने फ्लैट तैयार हुए। घर के साथ रोजगार, स्कूल, अस्पताल, बाजार और सार्वजनिक परिवहन की दूरी भी महत्वपूर्ण होगी।
पुनर्विकास के दौरान ट्रांजिट रेंट भी अहम
पुराने घर से नए घर में जाने के बीच परिवारों को अस्थायी रूप से कहीं और रहना पड़ता है। ऐसे में ट्रांजिट आवास और ट्रांजिट रेंट की व्यवस्था महत्वपूर्ण हो जाती है।
एसआरए से जुड़े न्यायिक मामलों में भी ट्रांजिट आवास और किराये के भुगतान को लेकर विवाद सामने आए हैं।
भविष्य के बड़े पुनर्विकास मॉडल में निर्माण पूरा होने तक परिवारों के रहने और किराये की व्यवस्था को स्पष्ट करना भी उतना ही जरूरी होगा जितना नया घर बनाना।
सरकार ने भविष्य के विकास को मौजूदा मुंबई और उसके उपनगरों तक सीमित नहीं रखा है। नवी मुंबई एयरपोर्ट, अटल सेतु और जेएनपीए के आसपास ‘तीसरी मुंबई’ विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना भी सामने रखी गई है।
इस क्षेत्र में Aerocity, Medicity, Sports City, Educity और IT-Fintech Hub जैसे आधुनिक विकास क्षेत्र तैयार करने की योजना बताई गई है।
अगर इन इलाकों में घरों के साथ रोजगार भी विकसित होते हैं तो एमएमआर में लोगों को रोज मुंबई शहर तक आने की जरूरत कम हो सकती है। इससे आने वाले वर्षों में आवास और रोजगार का केंद्र धीरे-धीरे और ज्यादा अलग-अलग इलाकों में फैल सकता है।
30 लाख घरों के साथ 1 करोड़ से ज्यादा लोगों की क्षमता
30 लाख घरों को सिर्फ इमारतों की संख्या के रूप में देखना इस योजना के पैमाने को छोटा करके देखने जैसा होगा।
अगर औसतन एक घर में 3.5 से 4 लोग रहते हैं तो 30 लाख घर लगभग 1.05 से 1.20 करोड़ लोगों की आवास क्षमता के बराबर हो सकते हैं। यह केवल समझाने के लिए किया गया अनुमान है, सरकार की घोषित आबादी का आंकड़ा नहीं।
इतनी बड़ी आबादी के लिए पानी, सीवेज, बिजली, सड़क, स्कूल, अस्पताल, बस, मेट्रो, पार्क, बाजार, कचरा प्रबंधन, अग्निशमन और सुरक्षा व्यवस्था भी साथ में बढ़ानी होगी।
यानी 30 लाख घरों का लक्ष्य असल में एमएमआर के अगले दो दशकों के शहरी ढांचे की भी बड़ी परीक्षा होगा।
पर्यावरण पर भी रहेगा दबाव
एमएमआर में जमीन सीमित है और शहर लगातार बाहरी इलाकों की तरफ फैल रहा है। इसलिए इतने बड़े स्तर पर आवास निर्माण के दौरान पर्यावरणीय संतुलन भी महत्वपूर्ण रहेगा।
नई आवासीय परियोजनाओं के लिए जमीन चुनते समय तटीय क्षेत्र, पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील इलाके, हरित क्षेत्र और प्राकृतिक जल निकासी जैसे मुद्दों को नजरअंदाज करना मुश्किल होगा।
आने वाले समय में सरकार के सामने सिर्फ घरों की संख्या बढ़ाने की चुनौती नहीं होगी, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना होगा कि नए शहर और नए आवासीय क्षेत्र टिकाऊ तरीके से विकसित हों।
आइकॉनिक बिल्डिंग से लेकर नई आवास नीति तक
सरकार ने मुंबई में Iconic Buildings के निर्माण के लिए नई नीति तैयार करने की भी बात कही है।
इसके साथ पागड़ी सिस्टम वाली इमारतों, चालों, पुराने भवनों और क्लस्टर पुनर्विकास को गति देने की योजनाएं मिलकर मुंबई के पुराने शहरी ढांचे को बदल सकती हैं।
इस बदलाव में सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि पुनर्विकास के दौरान पुराने निवासियों के अधिकार, पुनर्वास और रहने की लागत को किस तरह सुरक्षित रखा जाता है।
सरकार का फोकस आवास से आगे
उपमुख्यमंत्री ने मुंबई को Global Fintech Hub के रूप में विकसित करने, Startup और FDI को बढ़ावा देने तथा महाराष्ट्र को GDP और औद्योगिक विकास में देश में आगे रखने का लक्ष्य भी सामने रखा है।
समृद्धि महामार्ग, Coastal Road और Atal Setu जैसी परियोजनाओं का उदाहरण देते हुए सरकार का कहना है कि बड़े प्रोजेक्ट्स के दौरान विरोध और आशंकाएं सामने आती हैं, लेकिन लोगों से बातचीत और उनकी समस्याओं के समाधान के बाद परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जा सकता है।
इसी सोच को आवास और पुनर्विकास पर भी लागू करने की कोशिश दिखाई दे रही है।
2047 तक 30 लाख घर, अब जमीन पर अमल की बारी
मुंबई और एमएमआर में 30 लाख किफायती घरों का लक्ष्य आने वाले वर्षों के लिए बड़ा आवास रोडमैप तैयार करता है। इसमें एसआरए के जरिए पुनर्वास, म्हाडा के जरिए आवास, क्लस्टर विकास, पुराने भवनों का पुनर्विकास, किराये के आवास और एमएमआर के नए विकास केंद्र एक साथ जुड़े हुए हैं।
अगर योजना समय पर लागू होती है, घर वास्तव में लक्षित आय वर्ग की पहुंच में रहते हैं और उनके साथ परिवहन, स्कूल, अस्पताल, पानी और रोजगार जैसी सुविधाएं भी विकसित होती हैं तो इसका असर मुंबई की आवास समस्या से कहीं आगे जा सकता है।
लेकिन 30 लाख का आंकड़ा तभी मायने रखेगा जब वह जमीन पर बनने वाले घरों, वहां रहने वाले परिवारों और उनकी रोजमर्रा की जिंदगी में दिखाई दे।
2047 की समयसीमा लंबी है, लेकिन इसकी असली परीक्षा अब से ही शुरू होगी। मुंबई को सिर्फ ज्यादा घर नहीं, बल्कि ऐसे घर चाहिए जो लोगों की पहुंच में हों और जहां घर मिलने के बाद जिंदगी और महंगी या मुश्किल न हो।
MHADA Lottery News: मुंबई बोर्ड की अगली लॉटरी जनवरी-फरवरी 2027 में आने की तैयारी है। क्लस्टर योजना से 30 हजार घर मिलने की उम्मीद है। मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने MHADA के घर नहीं सौंपने वाले बिल्डरों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी।
(मंत्रालय प्रतिनिधि) मुंबई: मुंबई में अपना घर खरीदने का सपना देख रहे लाखों लोगों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। महाराष्ट्र आवास एवं क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MHADA) की मुंबई बोर्ड की अगली लॉटरी को लेकर अपडेट सामने आया है। अधिकारियों के अनुसार मुंबई बोर्ड की नई लॉटरी जनवरी या फरवरी 2027 में लाई जा सकती है।
इस बार की सबसे बड़ी बात सिर्फ नई लॉटरी नहीं है, बल्कि क्लस्टर पुनर्विकास योजना के जरिए आने वाले वर्षों में 30 हजार से अधिक नए घर मिलने की योजना है। इन घरों को चरणबद्ध तरीके से MHADA Lottery के माध्यम से आम नागरिकों को उपलब्ध कराया जाएगा।
वहीं, मुंबई में आयोजित MHADA लॉटरी कार्यक्रम के दौरान कैबिनेट मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने उन बिल्डरों को सख्त चेतावनी दी, जिन्होंने अतिरिक्त एफएसआई (FSI) का लाभ लेने के बावजूद MHADA के हिस्से के घर अब तक नहीं सौंपे हैं। उन्होंने कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वाले बिल्डरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी और जरूरत पड़ी तो उन्हें जेल जाना पड़ेगा।
मुंबई बोर्ड की हालिया लॉटरी में कुल 2,640 घरों को शामिल किया गया था। इन घरों के लिए लोगों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला और 75 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए।
इस आंकड़े से अंदाजा लगाया जा सकता है कि मुंबई में किफायती घरों की मांग कितनी ज्यादा है। लगभग हर एक फ्लैट के लिए 28 से 29 लोगों के बीच मुकाबला रहा।
MHADA अधिकारियों ने उन आवेदकों को निराश नहीं होने की सलाह दी, जिनका नाम इस बार विजेता सूची में शामिल नहीं हो सका। अधिकारियों के अनुसार आने वाले समय में नई योजनाओं और लॉटरी के जरिए अधिक संख्या में घर उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है।
MHADA Lottery 2027 में क्या खास होगा?
अगली MHADA Lottery को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि इसमें कितने घर शामिल होंगे और लोगों को क्या फायदा मिलेगा।
अधिकारियों के अनुसार मुंबई बोर्ड की अगली लॉटरी में नए घर शामिल किए जाएंगे। हालांकि 30 हजार घर एक साथ जनवरी 2027 की लॉटरी में उपलब्ध नहीं होंगे।
मुंबई देश के सबसे महंगे रियल एस्टेट बाजारों में शामिल है। निजी बाजार में घरों की बढ़ती कीमतों के कारण MHADA Lottery आम मध्यम वर्ग के लोगों के लिए बड़ा विकल्प बन गई है।
2,640 घरों के लिए 75 हजार से ज्यादा आवेदन इस बात का प्रमाण हैं कि सरकारी आवास योजनाओं की मांग लगातार बढ़ रही है।
यही कारण है कि सरकार और MHADA आने वाले वर्षों में बड़ी संख्या में नए घर तैयार करने पर जोर दे रहे हैं।
MHADA की 7.5 लाख घरों की बड़ी योजना
MHADA सिर्फ मुंबई बोर्ड की लॉटरी तक सीमित नहीं है। प्राधिकरण आने वाले वर्षों में बड़े स्तर पर आवास निर्माण की योजना पर काम कर रहा है।
MHADA की भविष्य की योजना में:
किफायती आवास
किराये के मकान
छात्र आवास
वरिष्ठ नागरिकों के लिए आवास
जैसी योजनाएं शामिल हैं।
प्राधिकरण लंबे समय में लाखों घरों की उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है।
लोढ़ा ने बिल्डरों को क्यों दी चेतावनी?
MHADA के अनुसार कुछ बिल्डरों ने अतिरिक्त एफएसआई का लाभ लेने के बाद भी प्राधिकरण को मिलने वाले घर नहीं सौंपे हैं।
इसी मुद्दे पर मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने नाराजगी जताई।
उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में कार्रवाई की जाएगी और नियमों का पालन नहीं करने वाले बिल्डरों को छोड़ा नहीं जाएगा।
लोढ़ा की चेतावनी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि MHADA को मिलने वाले घर समय पर उपलब्ध हों और उनका लाभ आम लोगों तक पहुंच सके।
MHADA Lottery 2027 के लिए लोगों को क्या करना चाहिए?
जो लोग अगली MHADA Lottery में आवेदन करना चाहते हैं, उन्हें अभी से अपने दस्तावेज तैयार रखने चाहिए।
जरूरी दस्तावेजों में आमतौर पर शामिल होते हैं:
आधार कार्ड
पैन कार्ड
आय प्रमाण पत्र
बैंक खाता विवरण
निवास प्रमाण पत्र
अन्य आवश्यक दस्तावेज
आवेदन प्रक्रिया शुरू होने के बाद उम्मीदवारों को केवल MHADA की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ही आवेदन करना चाहिए।
MHADA Lottery 2027 के लिए आवेदन कहां करें?
MHADA मुंबई बोर्ड की अगली लॉटरी का आवेदन शुरू होने के बाद उम्मीदवार केवल MHADA के आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से ही आवेदन कर सकेंगे। आवेदन की तारीख, योजना की जानकारी, पात्रता और फ्लैट की कीमत से जुड़ी जानकारी आधिकारिक विज्ञापन में जारी की जाएगी।
मुंबई में घर खरीदना लगातार महंगा होता जा रहा है। ऐसे में MHADA की आने वाली लॉटरी लाखों परिवारों के लिए उम्मीद बन सकती है।
अगर क्लस्टर पुनर्विकास योजनाएं तय समय पर पूरी होती हैं तो आने वाले वर्षों में मुंबई में किफायती घरों की संख्या बढ़ सकती है।
जनवरी-फरवरी 2027 की प्रस्तावित MHADA Lottery इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यह सिर्फ कुछ हजार घरों की लॉटरी नहीं होगी, बल्कि मुंबई के भविष्य के आवास मॉडल में बड़े बदलाव का संकेत भी है।
FAQ
MHADA की अगली लॉटरी कब आएगी?
मुंबई बोर्ड की अगली MHADA Lottery जनवरी या फरवरी 2027 में आने की संभावना जताई गई है।
MHADA की पिछली लॉटरी में कितने घर थे?
मुंबई बोर्ड की पिछली लॉटरी में 2,640 घर शामिल थे।
30 हजार MHADA घर कब मिलेंगे?
क्लस्टर पुनर्विकास परियोजनाओं के पूरा होने के बाद ये घर चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध होंगे।
MHADA Lottery के लिए आवेदन कैसे करें?
आवेदन MHADA की आधिकारिक ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से किया जाता है।
क्या पिछली लॉटरी का आवेदन अगली लॉटरी में चलेगा?
नहीं, प्रत्येक नई लॉटरी के लिए अलग आवेदन करना होता है।
क्या अभी MHADA Lottery 2027 का फॉर्म भर सकते हैं?
नहीं, अभी आवेदन प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। MHADA द्वारा आधिकारिक विज्ञापन जारी होने के बाद ही ऑनलाइन आवेदन स्वीकार किए जाएंगे।
महाराष्ट्र सरकार ने ‘शक्ति ऑन व्हील्स’ पहल शुरू की है। इसके तहत महिला स्वयं सहायता समूहों के उत्पाद मोबाइल वैन के जरिए सीधे ग्राहकों तक पहुंचाए जाएंगे। इस योजना से महिलाओं को नया बाजार और रोजगार के अवसर मिलने की उम्मीद है।
(मंत्रालय प्रतिनिधि) मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और उनके उत्पादों को नया बाजार उपलब्ध कराने के लिए ‘शक्ति ऑन व्हील्स‘ पहल शुरू की है। महिला एवं बाल विकास मंत्री आदिती तटकरे ने मुंबई के सचिवालय जिमखाना में इस अभियान की शुरुआत की। इस पहल के तहत महिलाओं द्वारा तैयार किए गए खाद्य पदार्थ, घरेलू सामान और जैविक उत्पाद अब मोबाइल बिक्री वैन के जरिए सीधे ग्राहकों तक पहुंचाए जाएंगे।
सरकार का मानना है कि यह पहल महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति देगी।
क्या है ‘शक्ति ऑन व्हील्स’ पहल?
‘शक्ति ऑन व्हील्स’ एक मोबाइल मार्केटिंग और बिक्री मॉडल है, जिसके तहत महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाए गए उत्पादों को विशेष वैन के माध्यम से शहरों और कस्बों तक पहुंचाया जाएगा। इन वैन को सरकारी कार्यालयों, मेट्रो स्टेशनों, रेलवे स्टेशनों, हॉस्टलों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर तैनात किया जाएगा।
इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को बिचौलियों पर निर्भर रहने से बचाना और उन्हें सीधे ग्राहकों से जोड़ना है।
किन उत्पादों की होगी बिक्री?
मोबाइल वैन के जरिए कई तरह के घरेलू और खाद्य उत्पाद बेचे जाएंगे, जिनमें शामिल हैं—
पापड़ और अचार
देसी घी और मसाले
मिलेट (श्री अन्न) उत्पाद
विभिन्न प्रकार के आटे
रेडी-टू-ईट खाद्य पदार्थ
घरेलू उपयोग की वस्तुएं
हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पाद
सरकार का दावा है कि इन उत्पादों को प्राकृतिक और पारंपरिक तरीके से तैयार किया गया है।
महिला एवं बाल विकास मंत्री आदिती तटकरे के अनुसार, अगर ऐसी बिक्री वैन सरकारी कार्यालयों, तहसील कार्यालयों और मेट्रो स्टेशनों के बाहर उपलब्ध होंगी, तो कामकाजी महिलाओं को रेडी-टू-ईट भोजन, घरेलू सामान और अन्य जरूरी चीजें एक ही जगह पर आसानी से मिल सकेंगी।
इससे न केवल समय बचेगा, बल्कि स्थानीय महिला उद्यमियों की आय भी बढ़ेगी।
महाराष्ट्र में महिलाओं के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह योजना?
महाराष्ट्र में हजारों महिला स्वयं सहायता समूह छोटे उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, हस्तशिल्प और कृषि आधारित व्यवसायों से जुड़े हुए हैं। इनमें से कई समूहों को अपने उत्पाद बेचने के लिए उचित बाजार नहीं मिल पाता था।
‘शक्ति ऑन व्हील्स’ के जरिए सरकार इन समस्याओं को दूर करना चाहती है।
इस पहल से महिलाओं को मिलने वाले संभावित फायदे—
उत्पादों के लिए नया बाजार
आय में वृद्धि
स्वरोजगार को बढ़ावा
बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी
स्थानीय उत्पादों को पहचान मिलेगी
‘उमेद’ और ‘लखपति दीदी’ अभियान से क्या है संबंध?
पिछले कुछ वर्षों में महाराष्ट्र सरकार ने महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए कई पहल शुरू की हैं। राज्य सरकार ने 13 जिलों में ‘उमेद मॉल’ स्थापित करने की घोषणा की थी, जहां स्वयं सहायता समूह अपने उत्पाद बेच सकें।
इसके अलावा, केंद्र और राज्य सरकार ‘लखपति दीदी’ अभियान के तहत महिलाओं की आय बढ़ाने और उन्हें उद्यमिता से जोड़ने पर काम कर रही हैं। ‘शक्ति ऑन व्हील्स’ को इसी रणनीति का अगला कदम माना जा रहा है।
फिलहाल इस पहल की शुरुआत मुंबई से की गई है, लेकिन सरकार इसे पूरे महाराष्ट्र में विस्तार देने की योजना बना रही है। आने वाले समय में राज्यभर में कम से कम 100 मोबाइल बिक्री वैन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
यदि यह मॉडल सफल होता है, तो इसे देश के अन्य राज्यों में भी लागू किया जा सकता है।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर महिला स्वयं सहायता समूहों को स्थायी बाजार मिल जाता है, तो इससे न केवल उनकी आय बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय उद्योगों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला उद्यमिता को भी नई ताकत मिलेगी।
‘शक्ति ऑन व्हील्स’ केवल एक मोबाइल वैन योजना नहीं है, बल्कि महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महाराष्ट्र सरकार का बड़ा कदम है। अगर यह पहल सफल रहती है, तो लाखों महिलाओं को अपने उत्पादों के लिए नया बाजार मिलेगा और राज्य में महिला उद्यमिता को नई पहचान मिल सकती है।
म्हाडा की लॉटरी में प्लॉट मिलने के बावजूद मालवणी के 300 परिवार 32 साल से अपने घर का इंतजार कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब क्या बदलेगा?
मुंबई: मालाड-मालवणी के करीब 300 परिवारों का अपने सपनों के घर का इंतजार अब 32 साल लंबा हो चुका है। 1994 में म्हाडा की लॉटरी में भूखंड मिलने और पूरी रकम जमा करने के बावजूद हजारों लोग आज भी अपने प्लॉट पर घर नहीं बना सके हैं। अब 25 फरवरी 2025 को आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले और म्हाडा की नई कार्रवाई के बाद इन परिवारों में एक बार फिर उम्मीद जगी है कि शायद उनका तीन दशक पुराना संघर्ष अब खत्म हो सके।
यह मामला मालवणी स्थित मुंबई नागरी विकास प्रकल्प क्रमांक-1 (BUDP) से जुड़ा है, जिसे विश्व बैंक की सहायता से शुरू किया गया था। लेकिन सीआरजेड नियमों, प्रशासनिक देरी और कानूनी लड़ाई ने सैकड़ों परिवारों का सपना अधूरा छोड़ दिया।
एक नजर में पूरा मामला
वर्ष 1994 में म्हाडा ने मालवणी में भूखंड आवंटित किए।
करीब 300 परिवारों ने लॉटरी में प्लॉट जीते।
लाभार्थियों ने तय रकम भी जमा की।
सीआरजेड नियमों के कारण निर्माण रुक गया।
मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।
25 फरवरी 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया।
अब म्हाडा ने सात सहकारी गृहनिर्माण संस्थाओं के संबंध में कार्रवाई शुरू करने की बात कही है।
करीब 32 साल पहले मालवणी में मुंबई नागरी विकास प्रकल्प क्रमांक-1 के तहत आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न आय वर्ग के लोगों को भूखंड आवंटित किए गए थे। लोगों ने लॉटरी जीतने के बाद निर्धारित राशि जमा कर दी थी और उन्हें उम्मीद थी कि कुछ वर्षों में उनका अपना घर बन जाएगा।
लेकिन हालात ऐसे बने कि हजारों लोगों का सपना अधूरा रह गया।
आखिर क्यों रुक गई पूरी योजना?
इस परियोजना के सामने सबसे बड़ी बाधा कोस्टल रेगुलेशन जोन (CRZ) के नियम बने।
समुद्र तट से 60 मीटर के दायरे में आने वाले क्षेत्रों में निर्माण पर प्रतिबंध लगने के बाद मालवणी के कई भूखंड प्रभावित हो गए। इसके कारण जिन लोगों को प्लॉट आवंटित किए गए थे, वे अपने ही भूखंड पर निर्माण नहीं कर सके।
यहीं से शुरू हुई 32 साल लंबी कानूनी और प्रशासनिक लड़ाई।
मालवणी के भूखंडधारकों ने अपने अधिकारों के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया।
25 फरवरी 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाया। इसके बाद म्हाडा ने कहा कि वह सात सहकारी गृहनिर्माण संस्थाओं के संबंध में कानूनी सलाह लेकर आगे की कार्रवाई करेगा।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पूरी प्रति और उसकी सभी शर्तें अभी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं।
म्हाडा ने क्या कहा?
म्हाडा के अनुसार—
योजना 30 से 32 साल पुरानी है।
पुराने आवेदन और रिकॉर्ड बिखरे हुए हैं।
फाइलों को कोड नंबर के आधार पर दोबारा व्यवस्थित किया जा रहा है।
सात सहकारी गृहनिर्माण संस्थाओं के मामलों की जांच चल रही है।
सदस्य सूची में समय-समय पर बदलाव किए गए हैं।
पुराने रिकॉर्ड की सत्यता की जांच की जा रही है।
कई मूल लाभार्थियों की मृत्यु हो चुकी हो सकती है।
वारिसों को अधिकार देने के लिए वारिस प्रमाणपत्र जरूरी होगा।
इस मामले को लेकर कई बार अलग-अलग दावे किए जा चुके हैं।
हालांकि इस समय करीब 300 परिवारों का जिक्र हो रहा है, जबकि पुराने आंकड़ों में प्रभावित लोगों की संख्या इससे कहीं अधिक बताई गई है। फिलहाल अब सिर्फ 300 परिवार रह गए है, जिन्होंने वर्षों तक कानूनी लड़ाई लड़ी और आज भी अपने घर का इंतजार कर रहे हैं।
32 साल में क्या-क्या हुआ? समझिए पूरी टाइमलाइन
1994
म्हाडा ने मालवणी में भूखंडों की लॉटरी निकाली। करीब 300 परिवारों को प्लॉट आवंटित हुए।
1994–1995
लाभार्थियों ने तय रकम जमा की।
1990 के दशक के आखिर में
सीआरजेड नियमों के कारण निर्माण कार्य प्रभावित होने लगा।
2000–2010
मामला कानूनी विवाद में फंस गया और कई परिवार अदालत पहुंचे।
2010–2024
भूखंडधारकों ने विभिन्न स्तरों पर लड़ाई जारी रखी।
25 फरवरी 2025
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में फैसला सुनाया।
जून 2026
म्हाडा ने कहा कि सात सहकारी गृहनिर्माण संस्थाओं के संबंध में कानूनी सलाह लेकर कार्रवाई की जाएगी।
अब सबकी नजर म्हाडा की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।
यदि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार प्रक्रिया पूरी होती है, रिकॉर्ड का सत्यापन हो जाता है और वारिसों की पहचान पूरी हो जाती है, तो संभव है कि 32 साल से इंतजार कर रहे सैकड़ों परिवारों को आखिरकार उनका हक मिल सके।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी वही है—
क्या 300 परिवारों का 32 साल पुराना इंतजार सचमुच खत्म होने वाला है, या उन्हें अभी और इंतजार करना पड़ेगा?
FAQ
1. मालवणी म्हाडा भूखंड मामला क्या है?
यह मामला मालाड-मालवणी स्थित मुंबई नागरी विकास प्रकल्प क्रमांक-1 (BUDP) से जुड़ा है। वर्ष 1994 में म्हाडा ने करीब 300 परिवारों को भूखंड आवंटित किए थे, लेकिन सीआरजेड नियमों और कानूनी विवादों के कारण आज तक कई परिवार अपने प्लॉट पर घर नहीं बना सके हैं।
2. यह योजना कितनी पुरानी है?
म्हाडा के अनुसार यह योजना करीब 30 से 32 साल पुरानी है।
3. इस मामले में कितने परिवार प्रभावित हैं?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस मामले में करीब 300 परिवार सीधे तौर पर प्रभावित हैं।
4. सुप्रीम कोर्ट ने फैसला कब सुनाया था?
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में 25 फरवरी 2025 को फैसला सुनाया था।
5. निर्माण क्यों रुक गया था?
समुद्र तट के पास लागू सीआरजेड (Coastal Regulation Zone) नियमों के कारण निर्माण कार्य प्रभावित हुआ था।
6. क्या म्हाडा ने कार्रवाई शुरू कर दी है?
म्हाडा ने कहा है कि सात सहकारी गृहनिर्माण संस्थाओं के संबंध में कानूनी राय लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
7. सातों हाउसिंग सोसायटियों के नाम सार्वजनिक हुए हैं?
नहीं। अभी तक सातों सहकारी गृहनिर्माण संस्थाओं के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
8. जिन लाभार्थियों का निधन हो चुका है, उनके वारिसों का क्या होगा?
म्हाडा के अनुसार, ऐसे मामलों में वारिसों को अधिकार देने के लिए वारिस प्रमाणपत्र जमा करना होगा।
Salman Khan Visits SRA Office: सलमान खान ने मुंबई SRA कार्यालय में IT Server Room का उद्घाटन किया और 50 से अधिक पात्र लाभार्थियों को नए घरों की चाबियां सौंपीं।
Salman Khan Visits SRA Office: मुंबई के SRA कार्यालय पहुंचे बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान
मुंबई: बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान ने शुक्रवार को मुंबई स्थित स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी (SRA) कार्यालय का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने झुग्गी पुनर्वास से जुड़ी परियोजनाओं और प्राधिकरण की कार्यप्रणाली की जानकारी ली। कार्यक्रम के दौरान सलमान खान ने SRA के आधुनिक IT Server Room का उद्घाटन किया, SRA Coffee Table Book का विमोचन किया और 50 से अधिक पात्र लाभार्थियों को उनके नए घरों की चाबियां सौंपीं।
आधुनिक IT Server Room का उद्घाटन
कार्यक्रम के दौरान सलमान खान ने SRA के अत्याधुनिक IT Server Room का उद्घाटन किया। डिजिटल तकनीक के माध्यम से प्राधिकरण की सेवाओं को अधिक व्यवस्थित, सुरक्षित और प्रभावी बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
SRA की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, प्राधिकरण नागरिक सेवाओं को डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराने, आवेदन से जुड़ी जानकारी और अन्य सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने की दिशा में काम कर रहा है। SRA की डिजिटल सेवाओं का उद्देश्य नागरिकों को बेहतर सुविधा और अधिक पारदर्शी प्रक्रिया उपलब्ध कराना है।
सलमान खान ने कार्यक्रम के दौरान SRA Coffee Table Book का भी अनावरण किया। इस पुस्तक में झुग्गी पुनर्वास से जुड़ी प्रमुख परियोजनाओं, उपलब्धियों और पुनर्वास की सफलता की कहानियों को प्रस्तुत किया गया है।
इसका उद्देश्य SRA के कामकाज और पुनर्वास परियोजनाओं से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को नागरिकों और अन्य हितधारकों तक पहुंचाना है।
50 से अधिक पात्र लाभार्थियों को मिली नए घरों की चाबियां
कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा 50 से अधिक पात्र लाभार्थियों को उनके नए घरों की चाबियां सौंपना रहा। सलमान खान ने SRA के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. महेंद्र कल्याणकर की मौजूदगी में लाभार्थियों को घरों की चाबियां प्रदान कीं।
नया घर मिलने के बाद लाभार्थियों ने खुशी व्यक्त की और पुनर्वास प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों के प्रति आभार जताया। उनके लिए यह पल लंबे समय से देखे जा रहे अपने पक्के और सुरक्षित घर के सपने के पूरा होने जैसा रहा।
सलमान खान ने SRA की विभिन्न गतिविधियों और झुग्गी पुनर्वास परियोजनाओं के बारे में जानकारी ली। SRA मुंबई में झुग्गी पुनर्वास से जुड़ी योजनाओं और परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए जिम्मेदार प्रमुख प्राधिकरण है।
प्राधिकरण की आधिकारिक वेबसाइट पर डॉ. महेंद्र कल्याणकर को SRA, Brihanmumbai का Chief Executive Officer बताया गया है। वेबसाइट पर नागरिक सेवाओं, डिजिटल सुविधाओं और पुनर्वास से जुड़े विभिन्न अपडेट भी उपलब्ध कराए जाते हैं।
पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित व्यवस्था पर जोर
कार्यक्रम के दौरान आधुनिक तकनीक और डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से SRA की सेवाओं को मजबूत करने पर जोर दिखाई दिया। IT infrastructure को मजबूत करने से भविष्य में रिकॉर्ड प्रबंधन, डिजिटल सेवाओं और नागरिकों से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है।
SRA की वेबसाइट के अनुसार, प्राधिकरण नागरिकों को ऑनलाइन सेवाएं, आवेदन से जुड़े अपडेट और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहा है। साथ ही, पुनर्वास प्रक्रिया में सही दस्तावेजों और पारदर्शी प्रक्रियाओं के महत्व पर भी जोर दिया गया है।
सलमान खान की मौजूदगी के कारण SRA कार्यालय में आयोजित यह कार्यक्रम खास बन गया। उनके पहुंचने की खबर के बाद प्रशंसकों में भी उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम में अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ-साथ आम लोगों की भी रुचि दिखाई दी।
सलमान खान का SRA कार्यालय दौरा केवल एक औपचारिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा। IT Server Room का उद्घाटन, SRA Coffee Table Book का विमोचन और 50 से अधिक पात्र लाभार्थियों को नए घरों की चाबियां सौंपना कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षण रहे। इस अवसर ने झुग्गी पुनर्वास और डिजिटल प्रशासन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को भी सामने रखा।
सलमान खान SRA कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे, जहां उन्होंने IT Server Room का उद्घाटन किया और पुनर्वास से जुड़ी गतिविधियों में भाग लिया।
सलमान खान ने कितने लाभार्थियों को घरों की चाबियां सौंपीं?
कार्यक्रम के दौरान 50 से अधिक पात्र लाभार्थियों को उनके नए घरों की चाबियां सौंपी गईं।
SRA का पूरा नाम क्या है?
SRA का पूरा नाम Slum Rehabilitation Authority यानी झुग्गी पुनर्वास प्राधिकरण है।
SRA के CEO कौन हैं?
डॉ. महेंद्र कल्याणकर (IAS) Brihanmumbai SRA के Chief Executive Officer हैं।
SIR Verification के दौरान अगर आपने कभी वोट नहीं दिया और नाम वोटर लिस्ट में नहीं है, तो क्या होगा? जानिए Form 6, दस्तावेज और पूरी प्रक्रिया।
मुंबई: महाराष्ट्र और मुंबई में चल रहे Special Intensive Revision (SIR) Verification अभियान के बीच हजारों लोगों के मन में एक ही सवाल है—अगर किसी व्यक्ति ने आज तक कभी वोट नहीं दिया, वोटर आईडी नहीं बनवाई और उसका नाम कभी मतदाता सूची में शामिल नहीं हुआ, तो क्या अब उसका नाम वोटर लिस्ट में जुड़ पाएगा?
सोशल मीडिया, व्हाट्सऐप ग्रुप और स्थानीय स्तर पर चल रही चर्चाओं के कारण कई लोगों में भ्रम और चिंता की स्थिति बनी हुई है। कुछ लोगों को लग रहा है कि SIR प्रक्रिया केवल पुराने मतदाताओं के लिए है, जबकि कुछ लोग यह समझ रहे हैं कि बिना पुराने रिकॉर्ड के अब नाम जोड़ना मुश्किल हो जाएगा।
हालांकि चुनाव आयोग के मौजूदा नियमों के अनुसार ऐसी स्थिति में घबराने की जरूरत नहीं है। यदि कोई पात्र भारतीय नागरिक आज तक मतदाता सूची में शामिल नहीं हुआ है, तो उसके लिए नए मतदाता के रूप में आवेदन करने की व्यवस्था मौजूद है।
Special Intensive Revision (SIR) चुनाव आयोग द्वारा चलाया जाने वाला विशेष अभियान है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट और सत्यापित करना है।
इस अभियान के दौरान—
घर-घर जाकर सत्यापन किया जाता है।
मतदाताओं की जानकारी अपडेट की जाती है।
मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के रिकॉर्ड की जांच होती है।
डुप्लीकेट प्रविष्टियों की पहचान की जाती है।
नए पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करने की प्रक्रिया भी जारी रहती है।
मुंबई सहित पूरे महाराष्ट्र में BLO (Booth Level Officer) इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
अगर कभी वोट नहीं दिया तो क्या आपका नाम जुड़ सकता है?
हाँ, बिल्कुल जुड़ सकता है।
यदि—
आपकी उम्र 18 वर्ष या उससे अधिक है,
आप भारतीय नागरिक हैं,
आपका नाम आज तक किसी भी मतदाता सूची में नहीं रहा,
आपने कभी वोट नहीं दिया,
तो आप पहली बार मतदाता बनने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
कई लोगों को लगता है कि 25, 30 या 40 साल की उम्र होने के बाद नया नाम नहीं जुड़ सकता, जबकि ऐसा नहीं है। चुनाव आयोग की व्यवस्था पात्र नागरिकों को किसी भी उम्र में पहली बार मतदाता बनने की अनुमति देती है, बशर्ते वे पहले से पंजीकृत न हों।
महाराष्ट्र में SIR Verification के दौरान लोगों की सबसे बड़ी चिंता क्या है?
पिछले कुछ दिनों में सोशल मीडिया पर कई तरह की अधूरी और भ्रामक जानकारियां वायरल हुई हैं। इसके कारण कई लोगों को लग रहा है कि यदि उनके पास पुराना वोटर रिकॉर्ड नहीं है तो उनका नाम नहीं जुड़ पाएगा।
लेकिन चुनाव आयोग की प्रक्रिया में नए पात्र मतदाताओं को जोड़ने का प्रावधान मौजूद है। इसलिए किसी अफवाह पर भरोसा करने के बजाय केवल आधिकारिक सूचना पर ही भरोसा करना चाहिए।
महाराष्ट्र और मुंबई में चल रहे SIR Verification अभियान के बीच सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अगर आपने आज तक कभी वोट नहीं दिया और आपका नाम कभी मतदाता सूची में शामिल नहीं हुआ, तब भी आपके लिए मतदाता बनने का रास्ता खुला है। SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को सही और अद्यतन बनाना है, न कि पात्र नागरिकों को बाहर करना। इसलिए घबराने के बजाय अपने रिकॉर्ड की जांच करें, सही जानकारी दें और जरूरत पड़ने पर नए मतदाता के रूप में आवेदन करें।
FAQ
क्या कभी वोट नहीं देने वाले व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट में जुड़ सकता है?
हाँ। यदि वह पात्र भारतीय नागरिक है और उसका नाम पहले कभी मतदाता सूची में दर्ज नहीं हुआ है।
क्या 30 या 40 साल की उम्र में पहली बार वोटर बन सकते हैं?
हाँ। यदि पहले कभी मतदाता पंजीकरण नहीं कराया गया है।
SIR Verification और Form 6 में क्या अंतर है?
SIR Verification मतदाता सूची के सत्यापन की प्रक्रिया है, जबकि Form 6 नए मतदाता पंजीकरण के लिए उपयोग किया जाता है।
अगर BLO घर नहीं आया तो क्या करें?
आप BLO, ERO कार्यालय या आधिकारिक मतदाता सेवा पोर्टल के माध्यम से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
क्या ऑनलाइन आवेदन की सुविधा उपलब्ध है?
हाँ, चुनाव आयोग की आधिकारिक सेवाओं के माध्यम से कई प्रक्रियाएं ऑनलाइन भी उपलब्ध हैं।