गोरेगांव के Motilal Nagar redevelopment में 1,600 वर्गफुट घर का प्रस्ताव है, लेकिन निवासी 2,400 वर्गफुट मांग रहे हैं। जानें पूरा विवाद और आगे की स्थिति।
मुंबई: गोरेगांव के मोतीलाल नगर 1, 2 और 3 का पुनर्विकास अब सिर्फ पुरानी इमारतों को नए टावरों में बदलने की योजना नहीं रह गई है। करीब 143 एकड़ में फैले इस बड़े पुनर्विकास में एक तरफ MHADA आधुनिक आवास, सड़क, जल निकासी, सीवरेज, हरित क्षेत्र और सामुदायिक सुविधाओं वाला नया इलाका तैयार करने की योजना पर आगे बढ़ रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ पात्र निवासियों की 2,400 वर्गफुट के घर की मांग जोर पकड़ रहा है। अगस्त में MHADA ने सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण कराने की मांग स्वीकार की थी, लेकिन 2,400 वर्गफुट की मांग पर अंतिम फैसला अभी बाकी है।
इस परियोजना को Construction and Development Agency मॉडल के तहत Estatevue Developers Private Limited के जरिए लागू किया जा रहा है, जो अदाणी समूह की कंपनी है। MHADA के साथ जुलाई 2025 में समझौता हो चुका है। जमीन का स्वामित्व और परियोजना पर संस्थागत नियंत्रण MHADA के पास ही रहेगा।
1,600 वर्गफुट घर पर सहमति, फिर 2,400 की मांग क्यों?
मोतीलाल नगर पुनर्विकास का सबसे बड़ा सवाल घर के आकार को लेकर है। मौजूदा मास्टर प्लान में करीब 3,702 पात्र आवासीय लाभार्थियों को 1,600 वर्गफुट के पुनर्वास घर देने की योजना बताई गई है। लेकिन निवासियों की मांग 2,400 वर्गफुट कारपेट एरिया की है। अगस्त 2026 में इस मांग को लेकर MHADA मुख्यालय पर प्रदर्शन भी हुआ था। इसके बाद MHADA के उपाध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजीव जयस्वाल ने सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण कराने की मांग स्वीकार की, जबकि 2,400 वर्गफुट के मुद्दे को राज्य सरकार के निर्णय के लिए भेजा गया।
2025 के न्यायिक रिकॉर्ड में परियोजना के मूल Construction and Development Agreement के तहत लगभग 3,372 MHADA पात्र आवासीय इकाइयों को 1,600 वर्गफुट built-up area देने का प्रावधान दर्ज है। वहीं 2026 के मास्टर प्लान में पात्र आवासीय लाभार्थियों की संख्या करीब 3,702 बताई गई है। यानी दोनों दस्तावेजों में 330 इकाइयों का अंतर दिखाई देता है। यह अंतर किस वजह से आया, इसे MHADA की ओर से स्पष्ट किया जाना बाकी है।
निवासियों की 2,400 वर्गफुट की मांग का एक आधार यह भी है कि कुछ निवासियों ने अपने मूल आवंटित क्षेत्र के अलावा MHADA से अतिरिक्त जमीन खरीदी थी। करीब 45 वर्गमीटर अतिरिक्त जमीन के अधिकार को पुनर्वास क्षेत्र की गणना में किस तरह शामिल किया जाएगा, यह विवाद का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है।

143 एकड़ में सिर्फ इमारतें नहीं, पूरा इलाका बदलेगा
MHADA का मौजूदा मास्टर प्लान मोतीलाल नगर को एक एकीकृत शहरी क्षेत्र के रूप में विकसित करने की योजना रखता है। प्रस्ताव में चौड़ी आंतरिक सड़कें, नई जल निकासी व्यवस्था, सीवरेज नेटवर्क, जलापूर्ति में सुधार, वर्षा जल संचयन, सौर प्रकाश व्यवस्था और हरित क्षेत्र शामिल हैं। लगभग 12 मीटर और 18 मीटर चौड़ी आंतरिक सड़कों का प्रस्ताव है तथा करीब 17.5 एकड़ क्षेत्र को मनोरंजन और खुले स्थानों के लिए रखने की बात सामने आई है।
मास्टर प्लान में आवासीय और व्यावसायिक पुनर्वास के साथ बाजार, शॉपिंग सेंटर, कार्यालय, मिश्रित उपयोग वाली इमारतें, स्वास्थ्य सुविधाएं, स्कूल, सामुदायिक केंद्र, सांस्कृतिक सुविधाएं और मनोरंजन से जुड़े स्थान विकसित करने की योजना है। इसका उद्देश्य केवल नई इमारतें बनाना नहीं बल्कि पूरे इलाके की आधारभूत सुविधाओं को एक साथ बदलना है।
220 पेड़ों और मौजूदा मैदानों का क्या होगा?
पुनर्विकास के साथ पर्यावरण और खुले स्थानों का सवाल भी सामने आया है। बाद की Tree Authority approval reporting के अनुसार 220 पेड़ों पर असर पड़ने की स्थिति में 89 पेड़ों को काटने और 131 पेड़ों को स्थानांतरित करने की अनुमति दी गई थी। इससे पहले सामने आए प्रस्तावों में दोनों प्रमुख मैदानों के आसपास पेड़ों की कटाई और स्थानांतरण की अलग-अलग संख्या बताई गई थी।
मोतीलाल नगर के Ambedkar Maidan और Annabhau Sathe Maidan स्थानीय निवासियों के लिए खेल और सामुदायिक गतिविधियों के महत्वपूर्ण खुले स्थान हैं। दूसरी ओर, पुनर्विकास योजना में करीब 15 एकड़ का नया हरित क्षेत्र, खेल सुविधाएं, उद्यान, जॉगिंग और साइकिल ट्रैक, वरिष्ठ नागरिकों के लिए स्थान तथा अन्य सार्वजनिक सुविधाओं की योजना है।
अब असली सवाल यह है कि मौजूदा मैदानों और पेड़ों की जगह बनने वाला नया हरित नेटवर्क स्थानीय लोगों के लिए उसी स्तर का सार्वजनिक उपयोग और पहुंच सुनिश्चित कर पाएगा या नहीं।
बारिश में जलभराव से लेकर नई आबादी तक बड़ी चुनौती
मोतीलाल नगर का पुनर्विकास ऐसे इलाके में हो रहा है जहां मानसून के दौरान जलभराव की समस्या का उल्लेख न्यायिक और परियोजना संबंधी रिकॉर्ड में भी हुआ है। इसी वजह से नई stormwater drainage व्यवस्था को परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है। सीवरेज नेटवर्क को बढ़ती आबादी के अनुरूप तैयार करने और परिसर में sewage treatment plant बनाने की योजना भी है।
यानी परियोजना की सफलता केवल नई ऊंची इमारतों से नहीं मापी जाएगी। अगर हजारों नए और पुनर्वासित परिवारों के आने के बाद सड़क, पानी और drainage व्यवस्था दबाव में आती है, तो redevelopment का मूल उद्देश्य अधूरा रह सकता है।
3,702 परिवारों के अलावा दुकानदार और झुग्गी बस्तियां भी योजना में
मोतीलाल नगर पुनर्विकास में केवल मौजूदा आवासीय लाभार्थी ही नहीं हैं। न्यायिक रिकॉर्ड में करीब 328 पात्र व्यावसायिक इकाइयों को 987 वर्गफुट built-up area के पुनर्वास का प्रावधान दर्ज है। इसके अलावा करीब 1,600 झुग्गी निवासियों के पुनर्वास और सुविधाओं का प्रावधान लागू SRA नियमों और DCPR के अनुसार रखा गया है।
इसका मतलब यह है कि पुनर्विकास के दौरान सिर्फ परिवारों के घर बदलने का सवाल नहीं है। स्थानीय दुकानदारों और छोटे कारोबारों की आजीविका, अस्थायी स्थानांतरण और दोबारा कारोबार शुरू करने की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होगी।
Transit accommodation की जिम्मेदारी किसकी?
Construction and Development Agreement के अनुसार आवासीय और व्यावसायिक इकाइयों के लिए आवश्यक transit accommodation की व्यवस्था C&DA की जिम्मेदारी में शामिल है। परियोजना चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़नी है, इसलिए सभी लोगों को एक साथ हटाने के बजाय अलग-अलग चरणों में स्थानांतरण की व्यवस्था की जा सकती है।
हालांकि, निवासियों के लिए अभी सबसे महत्वपूर्ण व्यावहारिक सवाल transit rent की राशि, भुगतान की शुरुआत, किराये में बढ़ोतरी, shifting charges और निर्माण में देरी होने की स्थिति में अतिरिक्त भुगतान को लेकर हैं। इन बिंदुओं पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी में अभी उतनी स्पष्टता नहीं है जितनी हजारों परिवारों के लिए जरूरी है।
अदाणी को जमीन नहीं, विकास की जिम्मेदारी
मोतीलाल नगर परियोजना को लेकर एक आम भ्रम यह हो सकता है कि 143 एकड़ जमीन अदाणी समूह को सौंप दी गई है। उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड इसके बजाय अलग व्यवस्था दिखाता है।
MHADA जमीन का नियंत्रण अपने पास रखते हुए Construction and Development Agency के जरिए परियोजना लागू कर रहा है। अदालत के रिकॉर्ड में यह भी दर्ज है कि C&DA को MHADA की ओर से पुनर्वास भवन, आरक्षित सुविधाएं, MHADA के हिस्से की इमारतें और आधारभूत ढांचा विकसित करना है। परियोजना पर नियंत्रण MHADA के पास रहने की बात भी स्पष्ट रूप से दर्ज है।
अदाणी समूह की कंपनी को इस मॉडल में परियोजना के विकास और निर्माण की जिम्मेदारी मिलती है। जुलाई 2025 के समझौते के तहत MHADA को करीब 3,97,100 वर्गमीटर निर्मित क्षेत्र मिलने की बात आधिकारिक दस्तावेज में दर्ज है।
1 लाख करोड़ और 36 हजार करोड़ में फर्क समझना जरूरी
मोतीलाल नगर परियोजना की लागत को लेकर दो बड़े आंकड़े सामने आते हैं। करीब 36,000 करोड़ रुपये का आंकड़ा पुनर्वास, MHADA हिस्से और संबंधित बुनियादी ढांचे के बड़े खर्च से जुड़ा है। वहीं करीब 1 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पूरे दीर्घकालिक विकास और बिक्री योग्य हिस्से समेत संभावित निवेश से संबंधित है।
परियोजना के आर्थिक मॉडल में अदाणी समूह को विकास योग्य और बिक्री योग्य क्षेत्र मिलता है, जबकि वह पुनर्वास और अन्य निर्धारित निर्माण कार्यों का खर्च उठाता है। 2025 के न्यायिक रिकॉर्ड में C&DA के लिए free-sale development rights और rehabilitation component की प्रगति के बीच संबंध भी दर्ज है।
परियोजना में देरी हुई तो क्या होगा?
यह सवाल भी हजारों परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है। न्यायिक रिकॉर्ड के अनुसार परियोजना को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की व्यवस्था है और C&DA पर निर्धारित निर्माण तथा पुनर्वास की जिम्मेदारी है। समझौते में performance bank guarantee और देरी की स्थिति में निर्धारित नुकसान की भरपाई का प्रावधान भी दर्ज है। डिफॉल्ट की स्थिति में MHADA के पास C&DA को बदलने की शक्ति भी रखी गई है।
इससे यह स्पष्ट होता है कि पुनर्विकास केवल developer की इच्छा पर निर्भर परियोजना नहीं है। MHADA ने contractual safeguards के साथ अपनी भूमिका बनाए रखी है।
कोर्ट से भी मिली पुनर्विकास को आगे बढ़ाने की मंजूरी
मोतीलाल नगर का integrated redevelopment लंबे समय से कानूनी विवाद का हिस्सा रहा है। 2 जुलाई 2026 के Bombay High Court के फैसले में अदालत ने MHADA के integrated cluster redevelopment मॉडल और C&DA के जरिए परियोजना लागू करने की व्यवस्था को चुनौती से जुड़े मामलों पर विचार किया। अदालत ने यह माना कि MHADA अपने संसाधनों और तकनीकी क्षमता को देखते हुए redevelopment के लिए बाहरी agency नियुक्त कर सकता है और परियोजना का नियंत्रण MHADA के पास रह सकता है।
अदालत के रिकॉर्ड में यह भी दर्ज है कि 6 अक्टूबर 2021 के सरकारी निर्णय के तहत Motilal Nagar I, II और III के संयुक्त पुनर्विकास को विशेष परियोजना का दर्जा दिया गया था। इस मॉडल का उद्देश्य पुराने और जर्जर ढांचे को हटाकर एक साथ infrastructure और amenities विकसित करना है।
जमीन पर परियोजना कितनी आगे बढ़ी?
यह परियोजना अभी केवल कागज पर मौजूद योजना नहीं है। MHADA ने 25 मार्च 2026 को Motilal Nagar-1 के Plot MN1 P2 के प्रस्तावित पुनर्विकास के लिए Intimation of Approval जारी किया था। हालांकि IOA को पूरे 143 एकड़ में निर्माण पूरा शुरू होने का प्रमाण नहीं माना जा सकता; अलग-अलग हिस्सों की मंजूरियों और निर्माण की स्थिति को चरणवार देखना होगा।
अब सबसे अहम मुद्दा यही है कि master plan से जमीन पर निर्माण तक की प्रक्रिया कितनी तेजी से आगे बढ़ती है और पहले पुनर्वास भवनों का निर्माण कब पूरा होता है।
मोतीलाल नगर का यह पुनर्विकास इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां केवल इमारतों का भविष्य तय नहीं हो रहा। 143 एकड़ के इस क्षेत्र में MHADA यह साबित करने की कोशिश कर रहा है कि cluster redevelopment के जरिए घर, सड़क, drainage, पानी, खुले स्थान और सामुदायिक सुविधाओं को एक साथ बदला जा सकता है। वहीं 2,400 वर्गफुट की मांग, पात्र लाभार्थियों के आंकड़ों में अंतर, transit व्यवस्था, पेड़ों और मैदानों का भविष्य तथा परियोजना की जमीन पर प्रगति ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब आने वाले चरण में इस परियोजना की वास्तविक सफलता तय करेंगे।
