Category: Maharashtra Schemes

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  • Dharavi Redevelopment: मलाड में 118 एकड़ जमीन SRA को, 10 लाख लोगों के पुनर्वास की तैयारी

    Dharavi Redevelopment: मलाड में 118 एकड़ जमीन SRA को, 10 लाख लोगों के पुनर्वास की तैयारी

    धारावी रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत महाराष्ट्र सरकार ने मलाड-मालवणी के मुक्तेश्वर में 118 एकड़ जमीन SRA को सौंपी। 10 लाख लोगों के पुनर्वास, 1.5 लाख नए घर और अडानी ग्रुप की भूमिका पर पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

    मुंबई: शहर के सबसे बड़े और चर्चित धारावी रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट को लेकर बड़ी अपडेट सामने आई है। महाराष्ट्र सरकार ने मलाड-मालवणी के मुक्तेश्वर इलाके में स्थित 118 एकड़ जमीन का कब्जा आधिकारिक तौर पर Slum Rehabilitation Authority (SRA) को सौंप दिया है। यह जमीन खास तौर पर उन धारावी निवासियों के पुनर्वास के लिए इस्तेमाल की जाएगी, जो धारावी के भीतर “इन-सीटू” पुनर्वास के पात्र नहीं हैं।

    📍 मलाड की जमीन पर क्यों हुआ फैसला?

    सूत्रों के मुताबिक, मुक्तेश्वर (मलाड-मालवणी) में कुल 140 एकड़ जमीन चिन्हित की गई थी। इनमें से 118 एकड़ जमीन SRA को ट्रांसफर कर दी गई है, जबकि 22 एकड़ जमीन अब भी कानूनी विवाद में है।

    इस जमीन की कुल अनुमानित कीमत करीब ₹540 करोड़ बताई जा रही है। विकास अधिकार (Development Rights) के बदले प्रोजेक्ट की SPV ने ₹135 करोड़ प्रीमियम भी जमा कर दिया है।

    🏢 किसे मिलेगा यहां घर?

    सरकारी प्लान के मुताबिक:

    • जो लोग 1 जनवरी 2011 के बाद और 15 नवंबर 2022 से पहले धारावी में बसे हैं
    • जो ऊपरी मंजिलों पर रहते हैं और इन-सीटू रिहैब के पात्र नहीं हैं

    उन्हें मलाड साइट पर शिफ्ट किया जाएगा।

    महाराष्ट्र के स्लम रिहैबिलिटेशन एक्ट के अनुसार, हर पात्र निवासी को 350 वर्गफुट का घर मिलेगा, जो पहले के 300 वर्गफुट से बड़ा अपग्रेड है।

    🤝 अडानी ग्रुप की क्या भूमिका है?

    यह मेगा प्रोजेक्ट Adani Group की कंपनी Navbharat Mega Developers Pvt Ltd (NMDPL) द्वारा किया जा रहा है, जो महाराष्ट्र सरकार के साथ जॉइंट वेंचर है।

    Dharavi-redevelopment-118-acres-of-land-in-Malad-given-to-SRA-preparing-to-rehabilitate-1-million-people-news

    जमीन का मालिकाना हक SRA के पास रहेगा, लेकिन डेवलपमेंट राइट्स NMDPL के पास होंगे।

    जानकारी के मुताबिक, मलाड की जमीन के एक हिस्से पर ओपन मार्केट में बेचने के लिए सेल कंपोनेंट के फ्लैट भी बनाए जाएंगे।

    🌆 540 एकड़ जमीन और 1.5 लाख नए घर

    धारावी प्रोजेक्ट के तहत सरकार ने मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) में करीब 540 एकड़ जमीन चिन्हित की है। इसमें शामिल हैं:

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    • कुर्ला की जमीन
    • कांजूर, भांडुप और मुलुंड के सॉल्ट पैन
    • देवनार डंपिंग ग्राउंड के हिस्से

    अधिकारियों के अनुसार, करीब 1.25 से 1.5 लाख नए घर बनाए जाएंगे, जिससे लगभग 10 लाख लोगों का पुनर्वास होगा।

    ⏳ टाइमलाइन क्या है?

    Systematica-Dharavi-Redevelopment-Road-Network-and-Proposed
    • NMDPL को रिहैब के घर बनाने के लिए 7 साल की डेडलाइन
    • पूरे धारावी रिडेवलपमेंट को पूरा करने के लिए 17 साल का मास्टर प्लान

    यह प्रोजेक्ट दुनिया का सबसे बड़ा अर्बन रीजुवेनेशन प्रोजेक्ट माना जा रहा है और इसे “मुंबई को स्लम-फ्री बनाने की दिशा में बड़ा कदम” कहा जा रहा है।


    ❓ FAQ Section

    Q1: मलाड की 118 एकड़ जमीन किसके लिए है?
    यह जमीन धारावी के उन निवासियों के पुनर्वास के लिए है जो इन-सीटू रिहैब के पात्र नहीं हैं।

    Q2: हर पात्र परिवार को कितना बड़ा घर मिलेगा?
    प्रत्येक पात्र निवासी को 350 वर्गफुट का फ्लैट मिलेगा।

    Q3: क्या इस जमीन पर कमर्शियल प्रोजेक्ट भी होगा?
    हां, एक हिस्सा सेल कंपोनेंट के तहत ओपन मार्केट के लिए इस्तेमाल होगा।

    Q4: प्रोजेक्ट कब तक पूरा होगा?
    रिहैब हाउसिंग 7 साल में और पूरा प्रोजेक्ट 17 साल में पूरा करने का लक्ष्य है।

  • मुंबई में MHADA के 120 फ्लैट बिक्री के लिए उपलब्ध, पहले आओ-पहले पाओ योजना

    मुंबई में MHADA के 120 फ्लैट बिक्री के लिए उपलब्ध, पहले आओ-पहले पाओ योजना

    मुंबई में MHADA 120 फ्लैट First Come First Served आधार पर बेच रही है। मलाड, कांदिवली, अंधेरी समेत कई इलाकों में ₹38 लाख से ₹8 करोड़ तक के घर।

    मुंबई: घर खरीदने का सपना देख रहे मुंबईकरों के लिए बड़ी खबर है। महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (MHADA) ने शहर के अलग-अलग इलाकों में स्थित 120 फ्लैट First Come First Served (पहले आओ-पहले पाओ) आधार पर बेचने का ऐलान किया है। ये वे फ्लैट हैं जो पहले लॉटरी में आए थे लेकिन नहीं बिके थे। अब इन्हें सीधे ऑनलाइन बुकिंग के जरिए खरीदा जा सकेगा।

    🏙️ किन इलाकों में मिलेंगे MHADA फ्लैट

    MHADA के अनुसार ये फ्लैट मुंबई के कई प्रमुख और रिहायशी इलाकों में स्थित हैं, जिनमें शामिल हैं:

    • मलाड
    • कांदिवली
    • अंधेरी
    • चारकोप
    • शिंपोली
    • अंटोप हिल
    • वडाला
    • पवई
    • मानखुर्द
    • घाटकोपर
    • विक्रोली
    • बायकुला
    • टारदेव
    • लोअर परेल
    • सायन
    • जुहू

    इन इलाकों में फ्लैट की कीमत ₹38 लाख से लेकर ₹8 करोड़ तक रखी गई है।

    💰 पहले लॉटरी में आए थे ये घर

    MHADA ने साफ किया है कि ये सभी फ्लैट पहले लॉटरी स्कीम के तहत उपलब्ध कराए गए थे, लेकिन आवेदन न मिलने या अन्य कारणों से अनसोल्ड रह गए थे। अब इन्हें डायरेक्ट सेल के लिए खोला गया है।

    🖥️ आवेदन कब और कैसे करें

    MHADA फ्लैट के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी।

    📅 जरूरी तारीखें

    • 5 फरवरी 2026: रजिस्ट्रेशन शुरू
    • 12 फरवरी 2026:
    • ऑनलाइन आवेदन
    • सिक्योरिटी डिपॉजिट
    • आवेदन शुल्क
    • फ्लैट सिलेक्शन की प्रक्रिया शुरू

    👉 आधिकारिक वेबसाइट: bookmyhome.mhada.gov.in

    🧾 फ्लैट बुक करने की प्रक्रिया

    1. पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन
    2. सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा करना
    3. “Book My Home” विकल्प से
    • बिल्डिंग / विंग
    • फ्लोर
    • फ्लैट नंबर चुनना
    1. फ्लैट फाइनल होने के 48 घंटे के भीतर 10% राशि जमा करना अनिवार्य

    अगर 48 घंटे में भुगतान नहीं किया गया तो:
    ❌ फ्लैट की बुकिंग रद्द
    ❌ पूरी सिक्योरिटी डिपॉजिट जब्त

    📄 पात्रता और जरूरी दस्तावेज

    MHADA के अनुसार:

    ✅ पात्रता

    • आवेदक की उम्र कम से कम 18 साल
    • भारतीय नागरिक होना जरूरी

    📑 दस्तावेज

    • अविवाहित आवेदक:
    • आधार कार्ड
    • पैन कार्ड
    • विवाहित आवेदक:
    • पति-पत्नी दोनों का आधार और पैन
    • डिक्री सर्टिफिकेट:
    • फ्लैट अलॉटमेंट के लिए अनिवार्य

    🏦 होम लोन लेने वालों के लिए नियम

    जो आवेदक होम लोन लेना चाहते हैं, उन्हें:

    • बैंक/वित्तीय संस्था का Pre-Sanction Letter अपलोड करना होगा
    • सत्यापन के बाद MHADA की ओर से NOC (No Objection Certificate) जारी की जाएगी

    🏡 कब्जा कब मिलेगा

    • पूरी रकम और स्टांप ड्यूटी भुगतान के बाद
    • MHADA की ओर से
    • अलॉटमेंट लेटर
    • पजेशन लेटर जारी किया जाएगा

    ❓ FAQ

    Q1. MHADA के फ्लैट कितने हैं?
    👉 कुल 120 फ्लैट।

    Q2. फ्लैट की कीमत कितनी है?
    👉 ₹38 लाख से ₹8 करोड़ तक।

    Q3. आवेदन कहां करना है?
    👉 bookmyhome.mhada.gov.in पर।

    Q4. क्या लॉटरी होगी?
    👉 नहीं, यह First Come First Serve आधार पर है।

  • कांदिवली में मुंबई का सबसे बड़ा क्लस्टर रिडेवलपमेंट, 53 सोसाइटी होंगी शामिल

    कांदिवली में मुंबई का सबसे बड़ा क्लस्टर रिडेवलपमेंट, 53 सोसाइटी होंगी शामिल

    कांदिवली पश्चिम के एकतानगर में 12 एकड़ में फैले छत्रपती शिवाजी राजे संकुल का समूह पुनर्विकास प्रस्तावित है। 53 हाउसिंग सोसाइटी, 3,488 परिवारों को नए घर और बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।

    मुंबई: कांदिवली इलाके में शहर का अब तक का सबसे बड़ा क्लस्टर रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट आकार ले रहा है। एकतानगर के छत्रपती शिवाजी राजे संकुल में मौजूद 53 गृहनिर्माण संस्थाओं का एक साथ पुनर्विकास प्रस्तावित है। करीब 12 एकड़ में फैले इस संकुल में 3,488 परिवार रहते हैं, जिन्हें इस परियोजना के जरिए बड़े, सुरक्षित और आधुनिक घर मिलने का रास्ता साफ हो गया है।

    🏙️ क्या है कांदिवली का यह मेगा क्लस्टर रिडेवलपमेंट?

    क्लस्टर रिडेवलपमेंट यानी कई हाउसिंग सोसाइटी एक साथ मिलकर पुनर्विकास करना। इससे:

    • बेहतर प्लानिंग
    • ज्यादा खुली जगह
    • चौड़ी सड़कें
    • आधुनिक सुविधाएं
    • और मजबूत इमारतें

    उपलब्ध कराई जा सकती हैं। कांदिवली में प्रस्तावित यह प्रोजेक्ट इसी मॉडल पर आधारित है।

    📍 छत्रपती शिवाजी राजे संकुल: 12 एकड़ में बसा बड़ा आवासीय परिसर

    यह संकुल साल 2000 में MHADA के भूखंड पर बसाया गया था। इसमें:

    • कुल 53 हाउसिंग सोसाइटी
    • लगभग 3,488 छोटे फ्लैट (करीब 220 स्क्वायर फीट)
    • करीब 26 साल पुरानी इमारतें

    मौजूद हैं, जो अब काफी हद तक जर्जर हालत में पहुंच चुकी हैं।

    🚧 जर्जर इमारतें और संकरी सड़कें बनीं बड़ी समस्या

    स्थानीय निवासियों के मुताबिक:

    • इमारतों की उम्र 25 साल से ज्यादा हो चुकी है
    • कई जगह सीपेज और स्ट्रक्चरल दिक्कतें हैं
    • आंतरिक सड़कें बेहद संकरी हैं
    • पैदल चलना तक मुश्किल हो जाता है

    इन्हीं कारणों से लंबे समय से पुनर्विकास की मांग की जा रही थी।

    🤝 53 में से 34 सोसाइटी ने दी सहमति

    अब तक:

    • 34 गृहनिर्माण संस्थाओं ने पुनर्विकास को मंजूरी दे दी है
    • 19 सोसाइटी अभी विचार-विमर्श की स्थिति में हैं

    जैसे-जैसे सहमति का आंकड़ा बढ़ेगा, प्रोजेक्ट को और रफ्तार मिलने की उम्मीद है।

    🏠 हर परिवार को मिलेगा 610 स्क्वायर फीट का नया घर

    प्रस्तावित योजना के मुताबिक:

    • हर सदस्य को 610 स्क्वायर फीट का फ्लैट
    • आधुनिक लेआउट और सुविधाएं
    • लिफ्ट, पार्किंग, गार्डन और कॉमन एरिया

    उपलब्ध होंगे, जो मौजूदा घरों से लगभग तीन गुना बड़े होंगे।

    💰 भाड़ा और कॉर्पस फंड का पूरा गणित

    पुनर्विकास की अवधि में:

    • पहले साल: ₹25,000 प्रति माह भाड़ा
    • दूसरे साल: ₹27,000 प्रति माह
    • तीसरे साल: ₹30,000 प्रति माह

    इसके अलावा:

    • ₹2.25 लाख कॉर्पस फंड
    • हर एक फ्लैट मालिक को दिया जाएगा

    🏗️ डेवलपर को भी मिलेगा बिक्री का अधिकार

    इस प्रोजेक्ट में:

    • जितनी सदनिका निवासियों को मिलेंगी
    • उतनी ही यानी 3,488 फ्लैट्स
    • डेवलपर को ओपन मार्केट में बिक्री के लिए उपलब्ध होंगी

    जिससे प्रोजेक्ट की आर्थिक व्यवहार्यता सुनिश्चित होगी।

    🏢 मुंबई में क्लस्टर रिडेवलपमेंट का बढ़ता चलन

    MHADA और निजी डेवलपर्स द्वारा:

    • मोतीलाल नगर
    • अभ्युदयनगर
    • आदर्शनगर
    • बांद्रा रिक्लेमेशन
    • GTB नगर
    • कामाठीपुरा

    जैसे इलाकों में भी क्लस्टर रिडेवलपमेंट पर काम चल रहा है।


    FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

    Q1. यह क्लस्टर रिडेवलपमेंट कहां हो रहा है?
    ➡️ कांदिवली स्थित छत्रपती शिवाजी राजे संकुल में।

    Q2. कुल कितनी सोसाइटी शामिल हैं?
    ➡️ 53 गृहनिर्माण संस्थाएं।

    Q3. हर परिवार को कितना बड़ा फ्लैट मिलेगा?
    ➡️ 610 स्क्वायर फीट का नया फ्लैट।

    Q4. पुनर्विकास के दौरान रहने का क्या इंतजाम होगा?
    ➡️ डेवलपर द्वारा मासिक भाड़ा दिया जाएगा।

    Q5. कॉर्पस फंड कितना मिलेगा?
    ➡️ ₹2.25 लाख प्रति सदनिका।

  • BMC का हेल्थ चॅटबॉट लॉन्च, मुंबईकरों को मिलेगी डिजिटल स्वास्थ्य सुविधा

    BMC का हेल्थ चॅटबॉट लॉन्च, मुंबईकरों को मिलेगी डिजिटल स्वास्थ्य सुविधा

    BMC ने नागरिकों की सुविधा के लिए हेल्थ चॅटबॉट सेवा शुरू की। पालकमंत्री आशिष शेलार के हाथों लोकार्पण। अब मुंबईकरों को स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी मिलेगी एक ही नंबर पर।

    मुंबई: स्वास्थ्य सेवाओं को और आसान व डिजिटल बनाने की दिशा में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने बड़ा कदम उठाया है। बीएमसी ने नागरिकों के लिए हेल्थ चॅटबॉट सेवा शुरू की है, जिसका लोकार्पण राज्य के सूचना प्रौद्योगिकी व सांस्कृतिक कार्य मंत्री तथा मुंबई उपनगर जिले के पालकमंत्री आशिष शेलार के हाथों किया गया। इस चॅटबॉट के जरिए अब नागरिक घर बैठे स्वास्थ्य से जुड़ी अहम जानकारी और सेवाओं का लाभ ले सकेंगे।

    डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं की ओर बीएमसी का कदम

    BMC लगातार अपने कामकाज में तकनीक का अधिक से अधिक उपयोग कर रही है। इसी डिजिटल पहल के तहत हेल्थ चॅटबॉट सेवा शुरू की गई है, ताकि सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता बढ़े और नागरिकों तक सुविधाएं तेजी से पहुंच सकें।
    बीएमसी आयुक्त एवं प्रशासक भूषण गगराणी के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने यह डिजिटल सुविधा तैयार की है।

    क्या है BMC हेल्थ चॅटबॉट?

    बीएमसी हेल्थ चॅटबॉट नागरिकों को स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी देने वाला एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है।
    इसके लिए 9892993368 नंबर उपलब्ध कराया गया है, जिस पर व्हाट्सऐप या चैट के माध्यम से जानकारी ली जा सकती है।

    इन सुविधाओं की मिलेगी जानकारी

    हेल्थ चॅटबॉट के माध्यम से नागरिकों को कई महत्वपूर्ण सेवाओं की जानकारी मिलेगी, जैसे—

    • बीमारियों से बचाव और स्वास्थ्य जागरूकता
    • बीएमसी की स्वास्थ्य योजनाएं और अभियान
    • नजदीकी अस्पताल व स्वास्थ्य केंद्र
    • स्वास्थ्य केंद्र में ऑनलाइन अपॉइंटमेंट
    • स्वास्थ्य प्रमाणपत्र और लाइसेंस की प्रक्रिया
    • जन्म व मृत्यु प्रमाणपत्र
    • विवाह पंजीकरण
    • दिव्यांग प्रमाणपत्र
    • प्रसूतिगृह और स्वास्थ्य परवाने से जुड़ी जानकारी

    ऑनलाइन पंजीकरण से बचेगा समय

    इस चॅटबॉट के जरिए नागरिक स्वास्थ्य केंद्रों में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे। इससे लंबी कतारों से राहत मिलेगी और समय की बचत होगी। आपातकालीन स्थिति में यह सुविधा निर्णय लेने में भी मददगार साबित होगी।

    राज्य और केंद्र की योजनाओं की जानकारी भी मिलेगी

    आने वाले समय में इस चॅटबॉट के जरिए राज्य और केंद्र सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं से जुड़ी जानकारी भी उपलब्ध कराई जाएगी।
    इसके साथ ही बीएमसी जल्द ही स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अलग वेबसाइट और OPD व बेड उपलब्धता डैशबोर्ड भी शुरू करने जा रही है।


    FAQ सेक्शन

    Q1. बीएमसी हेल्थ चॅटबॉट का नंबर क्या है?
    9892993368

    Q2. इस चॅटबॉट से क्या जानकारी मिलेगी?
    स्वास्थ्य सेवाएं, अस्पताल जानकारी, प्रमाणपत्र, ऑनलाइन अपॉइंटमेंट और योजनाओं की जानकारी।

    Q3. क्या यह सेवा मुफ्त है?
    हां, यह सेवा नागरिकों के लिए पूरी तरह निःशुल्क है।

    Q4. इसका फायदा किसे होगा?
    मुंबई के सभी नागरिकों को।

  • मुंबई में 4 नए पुलिस स्टेशन और 2 नए ज़ोन को मिली मंज़ूरी

    मुंबई में 4 नए पुलिस स्टेशन और 2 नए ज़ोन को मिली मंज़ूरी

    मुंबई की बढ़ती आबादी और अपराध को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने 4 नए पुलिस स्टेशन, 2 नए डीसीपी ज़ोन और 3 एसीपी डिविज़न को मंजूरी दी है। 1,448 नए पद और ₹130 करोड़ से ज्यादा का बजट स्वीकृत।

    मुंबई: शहर में कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। 12 दिसंबर 2025 को गृह विभाग द्वारा जारी शासन निर्णय के तहत मुंबई पुलिस कमिश्नरेट में 4 नए पुलिस स्टेशन, 2 नए डीसीपी ज़ोन और 3 नए एसीपी डिविज़न बनाए जाएंगे। इस फैसले से न सिर्फ पुलिस की पहुंच बढ़ेगी, बल्कि बढ़ती आबादी, ट्रैफिक और अपराध पर नियंत्रण भी आसान होगा।

    मुंबई में अभी कितने पुलिस स्टेशन हैं?

    फिलहाल मुंबई में कुल 100 पुलिस स्टेशन कार्यरत हैं, जिनमें शामिल हैं—

    • 93 स्थानीय पुलिस स्टेशन
    • 2 तटीय पुलिस स्टेशन (गोराई और माहिम)
    • 5 साइबर पुलिस स्टेशन

    अब सरकार ने इस नेटवर्क में 4 नए पुलिस स्टेशन जोड़ने की मंजूरी दे दी है।

    कहां-कहां बनेंगे नए पुलिस स्टेशन

    सरकार द्वारा स्वीकृत नए पुलिस स्टेशन और उनका क्षेत्राधिकार इस प्रकार है:

    1. महाराष्ट्र नगर पुलिस स्टेशन

    • क्षेत्र: भांडुप और पार्कसाइट पुलिस स्टेशन से अलग किया गया इलाका

    2. गोलिबार पुलिस स्टेशन

    • क्षेत्र: वाकोला और निर्मल नगर पुलिस स्टेशन से विभाजित इलाका

    3. मड-मार्वे पुलिस स्टेशन

    • क्षेत्र: मालवनी पुलिस स्टेशन के कुछ हिस्से

    4. आसलफा पुलिस स्टेशन

    • क्षेत्र: घाटकोपर और साकीनाका पुलिस स्टेशन से पुनर्गठन

    इन नए थानों से स्थानीय नागरिकों को नजदीक पुलिस सहायता मिलेगी और शिकायतों के निपटारे में तेजी आएगी।

    1,448 नए पद और ₹130 करोड़ से ज्यादा का बजट

    चारों नए पुलिस स्टेशनों के लिए सरकार ने—

    • 1,448 नए पद स्वीकृत किए हैं
    • ₹124.13 करोड़ का वार्षिक (रिकरिंग) खर्च
    • ₹7.39 करोड़ का एकमुश्त (नॉन-रिकरिंग) खर्च मंजूर किया है

    यह खर्च संबंधित वित्तीय वर्ष के बजट से पूरा किया जाएगा।

    2 नए डीसीपी ज़ोन और 3 एसीपी डिविज़न

    पुलिस प्रशासन को और बेहतर बनाने के लिए सरकार ने—

    • 2 नए डीसीपी ज़ोन
    • 3 नए एसीपी डिविज़न

    को भी मंजूरी दी है।
    इसके तहत—

    • डीसीपी ज़ोन के लिए 34 नए पद
    • एसीपी डिविज़न के लिए 30 नए पद

    स्वीकृत किए गए हैं।
    इस पर ₹6.24 करोड़ का वार्षिक और ₹83.95 लाख का एकमुश्त खर्च आएगा।

    क्यों लिया गया यह फैसला?

    सरकार के मुताबिक—

    • मुंबई की तेज़ी से बढ़ती आबादी
    • शहर का लगातार हो रहा विस्तार
    • ट्रैफिक दबाव और अपराध के बढ़ते मामले

    इन सभी को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है। नए पुलिस स्टेशन और ज़ोन बनने से पेट्रोलिंग बेहतर होगी और अपराध नियंत्रण मजबूत होगा।

    प्रस्ताव कैसे हुआ मंजूर?

    यह प्रस्ताव मुंबई पुलिस आयुक्त द्वारा भेजा गया था।

    • 11 नवंबर 2025 को हुई उच्चस्तरीय सचिव समिति की बैठक में इस पर चर्चा हुई
    • इसके बाद गृह विभाग ने 12 दिसंबर 2025 को शासन निर्णय जारी कर मंजूरी दी

    FAQ सेक्शन

    Q1: मुंबई में कितने नए पुलिस स्टेशन बनाए जाएंगे?
    मुंबई में 4 नए पुलिस स्टेशन बनाए जाएंगे।

    Q2: किन इलाकों को फायदा मिलेगा?
    भांडुप, पार्कसाइट, वाकोला, निर्मल नगर, मालवणी, मड-मार्वे, घाटकोपर और साकीनाका क्षेत्र।

    Q3: कुल कितने नए पद स्वीकृत हुए हैं?
    कुल 1,448 नए पद पुलिस स्टेशनों के लिए और 64 पद डीसीपी-एसीपी संरचना के लिए।

    Q4: इस पर कितना खर्च आएगा?
    करीब ₹130 करोड़ से ज्यादा का खर्च आएगा।

    Q5: इससे आम नागरिकों को क्या फायदा होगा?
    तेज़ पुलिस रिस्पॉन्स, बेहतर पेट्रोलिंग और अपराध नियंत्रण।

  • मुंबई को मिलेगी ‘पगड़ी सिस्टम’ से आज़ादी? राज्य सरकार ने बनाया नया रेग्युलेटरी फ्रेमवर्क

    मुंबई को मिलेगी ‘पगड़ी सिस्टम’ से आज़ादी? राज्य सरकार ने बनाया नया रेग्युलेटरी फ्रेमवर्क

    महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई को पुराने ‘पगड़ी सिस्टम’ से मुक्त करने के लिए नया रेग्युलेटरी फ्रेमवर्क बनाने का बड़ा फैसला किया। इससे 19,000 से ज्यादा पुरानी इमारतों के पुनर्विकास का रास्ता साफ होगा।

    मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई को दशकों पुराने ‘पगड़ी सिस्टम’ से बाहर निकालने की बड़ी पहल की है। डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने विधानसभा में घोषणा की कि शहर के पुराने पगड़ी मॉडल पर चलने वाले मकानों के लिए एक अलग रेग्युलेटरी फ्रेमवर्क तैयार किया जाएगा, जिससे किरायेदारों और मकान मालिकों — दोनों के हक सुरक्षित रहेंगे और 19,000 से ज्यादा जर्जर इमारतों का पुनर्विकास तेज होगा। यह निर्णय मुंबई की रियल एस्टेट मार्केट को मजबूत करने और सालों से लंबित हजारों विवादों को खत्म करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

    क्या है पगड़ी सिस्टम और क्यों जरूरी पड़ा बदलाव?

    मुंबई में दशकों से चल रहा पगड़ी सिस्टम एक ऐसा मॉडल है जिसमें किरायेदार मकान में रहने के लिए एकमुश्त रकम देकर आंशिक मालिकाना हक जैसा अधिकार पा लेता है।

    • किराया बेहद कम
    • सबलेट करने की अनुमति
    • मकान मालिक को वास्तविक मूल्य का लाभ नहीं

    इस सिस्टम के कारण मकान मालिकों और किरायेदारों के बीच अक्सर विवाद खड़े होते रहे हैं। कई केस तो दशकों से अदालत में लंबित हैं।

    मुंबई में 19,000 से ज्यादा इमारतें पगड़ी सिस्टम में

    डिप्टी सीएम शिंदे ने बताया कि मुंबई में करीब 19,000 पुरानी, प्री-1960 सीज्ड इमारतें पगड़ी सिस्टम पर चल रही हैं।
    इनमें से—

    • कई इमारतें पहले ही जर्जर हो चुकी हैं
    • कुछ ढह चुकी हैं
    • और 13,000 से ज्यादा अभी भी पुनर्विकास का इंतज़ार कर रही हैं

    यह सारी इमारतें महाराष्ट्र रेंट कंट्रोल एक्ट के दायरे में आती हैं, जिससे किरायेदार सुरक्षित रहते हैं, लेकिन मकान मालिक अपने अधिकारों की उचित भरपाई न मिलने की शिकायत करते हैं।

    Deputy chief minister eknath shinde

    क्यों आया रेग्युलेटरी फ्रेमवर्क का विचार?

    शिंदे ने विधानसभा में बताया—

    • 28,000 से ज्यादा किरायेदार–मकान मालिक विवाद अदालतों में अटके हैं
    • पुराने कानून जमीन पर असरदार साबित नहीं हो रहे
    • पुनर्विकास बाधित होने से इमारतें खतरे में हैं

    सरकार अब हाईकोर्ट की मंजूरी से फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाएगी, ताकि सभी मामले तीन साल के भीतर निपट जाएं।

    कमजोर वर्ग के लिए मुफ्त पुनर्निर्माण की सुविधा

    FSI (Floor Space Index) बढ़ाना काफी नहीं है—यह बात भी शिंदे ने साफ कही।
    EWS और LIG वर्ग के पगड़ी धारकों के लिए—

    • मुफ्त पुनर्निर्माण
    • टेनेंट हिस्से के बराबर FSI
    • लैंड ओनर को मूल FSI
    • इंसेंटिव FSI

    अगर जमीन की ऊंचाई सीमा या अन्य रुकावटों के कारण FSI का पूरा उपयोग नहीं हो पाया, तो बचा हुआ FSI TDR (Transfer of Development Rights) के रूप में दिया जाएगा।

    पुरानी इमारतों के लिए खुला रास्ता

    सरकार का कहना है कि यह नया फ्रेमवर्क—

    • जर्जर इमारतों के गिरने के खतरे को रोकेगा
    • जीवन और संपत्ति दोनों की सुरक्षा करेगा
    • लंबे समय से अटकी पुनर्विकास परियोजनाओं में नई जान डालेगा

    साथ ही मौजूदा पुनर्विकास विकल्प 33(7) और 33(9) भी उपलब्ध रहेंगे।

    मकान मालिक और किरायेदार—दोनों के लिए फायदे

    सरकार के अनुसार—

    • किरायेदारों का पुनर्विकास और घर की सुरक्षा
    • मकान मालिकों को उचित हिस्सा और कानूनी राहत
    • लंबे विवादों का निपटारा
    • शहर में रियल एस्टेट मार्केट को बल

    यह सिस्टम दोनों पक्षों के लिए न्यायसंगत समाधान प्रदान करेगा।


    FAQ सेक्शन

    1. पगड़ी सिस्टम क्या होता है?

    एक पुराना किरायेदारी मॉडल जिसमें किरायेदार एकमुश्त रकम देकर कम किराए पर आंशिक मालिकाना अधिकार जैसा लाभ पाता है।

    2. मुंबई में कितनी पगड़ी इमारतें हैं?

    करीब 19,000 से ज्यादा इमारतें पगड़ी सिस्टम में आती हैं।

    3. नया फ्रेमवर्क कब लागू होगा?

    सरकार ने प्रक्रिया शुरू कर दी है, विस्तृत नियम जल्द सामने आएंगे।

    4. क्या किरायेदारों के अधिकार सुरक्षित रहेंगे?

    हाँ, सरकार ने साफ कहा है कि किरायेदार और मकान मालिक दोनों के हित सुरक्षित रखे जाएंगे।

    5. क्या सभी केस जल्द निपटेंगे?

    फास्ट-ट्रैक कोर्ट के जरिए सभी 28,000 केस अगले तीन साल में निपटाने की योजना है।

  • BMC की अफोर्डेबल हाउसिंग लॉटरी को ठंडी प्रतिक्रिया, सिर्फ 855 ने किया डिपॉज़िट पेमेंट

    BMC की अफोर्डेबल हाउसिंग लॉटरी को ठंडी प्रतिक्रिया, सिर्फ 855 ने किया डिपॉज़िट पेमेंट

    मुंबई में BMC की अफोर्डेबल हाउसिंग लॉटरी को उम्मीद के मुताबिक रिस्पॉन्स नहीं मिला। 23,704 लोगों ने रजिस्ट्रेशन किया, लेकिन सिर्फ 855 ने ही डिपॉज़िट जमा किया। जानिए क्यों नहीं बिक रहे 55 लाख से 1 करोड़ तक के ये फ्लैट्स।

    मुंबई: बॉम्बे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) की अफोर्डेबल हाउसिंग लॉटरी 2024 को इस बार कमजोर रिस्पॉन्स मिला है। कुल 23,704 नागरिकों ने रजिस्ट्रेशन किया, लेकिन सिर्फ 855 लोगों ने ही ₹11,000 का डिपॉज़िट पेमेंट किया है। जबकि आवेदन की अंतिम तारीख में अब केवल चार दिन बाकी हैं।
    यह फ्लैट्स डेवलपमेंट कंट्रोल एंड प्रमोशन रेगुलेशन (DCPR), 2034 के तहत विकसित किए गए हैं। कुल 426 फ्लैट्स में से 381 EWS (Economically Weaker Section) और 45 LIG (Low Income Group) के लिए रखे गए हैं।

    🏠 महंगे दामों से खरीदार पीछे हटे

    BMC ने 16 अक्टूबर को इन 426 फ्लैट्स की बिक्री की घोषणा की थी, जिनकी कीमतें ₹55 लाख से ₹1.07 करोड़ के बीच रखी गई हैं।
    इन फ्लैट्स से BMC को करीब ₹308 करोड़ की आमदनी की उम्मीद थी, लेकिन उच्च दामों के कारण खरीदारों की रुचि कम देखी जा रही है।
    BMC के मुताबिक, कीमतें स्थानीय रेडी रेकनर रेट से लगभग 10% ज़्यादा हैं, जो मिडल क्लास और लो-इनकम परिवारों के लिए भारी पड़ रही हैं।

    स्थान:
    इन फ्लैट्स के लोकेशन में मरोल (अंधेरी), मजास गांव (जोगेश्वरी ईस्ट), गोरेगांव वेस्ट, कांदिवली वेस्ट, भांडुप वेस्ट, भायखला, दहिसर और कांजुरमार्ग शामिल हैं।

    📉 BMC कर सकती है फ्लैट के रेट्स में कमी

    एक वरिष्ठ BMC अधिकारी के अनुसार —

    “अगर खरीदार नहीं मिलते हैं, तो हम कीमतों में कमी पर विचार कर सकते हैं। लेकिन उससे पहले हम मार्केट की स्थिति और अन्य सरकारी हाउसिंग इन्वेंटरी का रिव्यू करेंगे।”

    यह फ्लैट्स DCPR 2034 की रेग्युलेशन 15 और 33(20)(b) के तहत डेवेलपर्स से लिए गए हैं, जिसमें उन्हें 4000 वर्ग मीटर से बड़े प्लॉट पर बने प्रोजेक्ट का कुछ हिस्सा अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए देना होता है।

    पहले ऐसे फ्लैट्स MHADA लॉटरी के जरिए अलॉट किए जाते थे, लेकिन इस बार BMC ने खुद यह प्रक्रिया संभाली है।

    🗓️ ऑनलाइन आवेदन और लॉटरी का शेड्यूल

    • अंतिम तारीख: 14 नवंबर 2025 (रात 11:59 बजे तक)
    • योग्य आवेदकों की सूची: 18 नवंबर (शाम 5 बजे)
    • लॉटरी ड्रॉ: 20 नवंबर (शाम 5 बजे)
    • सफल आवेदकों की घोषणा: 21 नवंबर (शाम 5 बजे)
    • आधिकारिक वेबसाइट: https://housing.mcgm.gov.in

    📊 BMC आवेदन डेटा (16 अक्टूबर – 10 नवंबर तक)

    विवरणसंख्या
    कुल रजिस्टर्ड आवेदक23,704
    रजिस्ट्रेशन फीस (₹1,180) भरने वाले1,644
    डिपॉज़िट (₹11,000) जमा करने वाले855

    🧩 क्यों नहीं मिल रही है जनता की रुचि?

    • फ्लैट्स की कीमतें आमदनी के मुकाबले ज्यादा
    • 269 से 489 वर्गफुट के छोटे आकार
    • EMI और ब्याज दरों में बढ़ोतरी
    • निजी बिल्डर्स के सस्ते ऑफर्स से मुकाबला
    • जगहों की सीमित कनेक्टिविटी

    🏡 EWS और LIG के लिए उम्मीदें अभी बाकी

    हालांकि शुरुआत धीमी रही है, लेकिन BMC को उम्मीद है कि जैसे-जैसे अंतिम तिथि करीब आएगी, आवेदकों की संख्या बढ़ेगी।
    इसके अलावा, अगर कीमतों में कमी की घोषणा होती है, तो यह मिडल क्लास खरीदारों के लिए बड़ा मौका बन सकता है।


    FAQ सेक्शन

    Q1. BMC की अफोर्डेबल हाउसिंग लॉटरी क्या है?
    यह एक सरकारी योजना है जिसमें मुंबई के अलग-अलग इलाकों में बने सस्ते घरों को लॉटरी सिस्टम के जरिए पात्र नागरिकों को आवंटित किया जाता है।
    Q2. आवेदन की आखिरी तारीख क्या है?
    14 नवंबर 2025 रात 11:59 बजे तक ऑनलाइन आवेदन और डिपॉज़िट किया जा सकता है।
    Q3. किन इलाकों में फ्लैट्स उपलब्ध हैं?
    मरोल, जोगेश्वरी, गोरेगांव, कांदिवली, भांडुप, बायकुला, दहिसर और कांजुरमार्ग में।
    Q4. फ्लैट्स की कीमतें कितनी हैं?
    ₹55 लाख से ₹1.07 करोड़ के बीच, क्षेत्र और साइज के अनुसार।
    Q5. क्या BMC दरें घटा सकती है?
    हां, BMC ने संकेत दिए हैं कि अगर खरीदार नहीं मिलते हैं तो दरों में कमी पर विचार किया जाएगा।

  • BMC चुनाव से पहले महाराष्ट्र सरकार ने फिर शुरू की ‘शिव भोजन थाली’, गरीबों को सस्ते में मिलेगा खाना

    BMC चुनाव से पहले महाराष्ट्र सरकार ने फिर शुरू की ‘शिव भोजन थाली’, गरीबों को सस्ते में मिलेगा खाना

    महाराष्ट्र में महायुती सरकार ने BMC चुनाव से पहले शिव भोजन थाली योजना को फिर शुरू किया है। गरीबों को ₹10 में ₹50 की थाली मिलेगी। जानिए कैसे मिला ₹70 करोड़ का बजट, किन जिलों में खुले रहेंगे केंद्र, और क्या हैं सरकार के नए नियम।

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    मुंबई: महाराष्ट्र और मुंबई के गरीब नागरिकों के लिए राहत भरी खबर है। महा यूती सरकार ने फिर से ‘शिव भोजन थाली योजना’ को शुरू करने का ऐलान किया है, जो पहले उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास आघाडी (MVA) सरकार ने शुरू की थी।
    यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को ₹10 में ₹50 की पौष्टिक थाली मुहैया कराती है। चुनावी मौसम में इस फैसले को गरीब वर्ग तक पहुंचने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

    🔹 योजना का बजट और फंड रिलीज़

    • सरकार ने इस योजना के लिए ₹70 करोड़ का बजट तय किया है।
    • इसमें से ₹28 करोड़ की राशि जारी की जा चुकी है, जबकि सितंबर में ₹21 करोड़ पहले ही वितरित किए गए थे।
    • वित्त विभाग की अनुमति के बाद 10 दिनों के भीतर फंड खर्च करने के निर्देश दिए गए हैं, नहीं तो राशि वापस ली जाएगी।
    • योजना को लागू करने की ज़िम्मेदारी अन्न व नागरी पुरवठा विभाग को दी गई है।

    🔹 क्या है ‘शिव भोजन थाली’ योजना?

    • शुरुआत: 26 जनवरी 2020 को उद्धव ठाकरे सरकार ने की थी।
    • उद्देश्य: गरीब और ज़रूरतमंद लोगों को सस्ता भोजन उपलब्ध कराना।
    • लागत: शुरू में थाली ₹5 में मिलती थी, बाद में ₹10 कर दी गई।
    • कोविड-19 के दौरान: थाली फ्री में दी जाती थी।
    • वर्तमान स्थिति: ₹50 की थाली अब ₹10 में दी जाएगी, बाकी ₹40 का भुगतान सरकार करेगी।
    • राज्यभर में पहले 1,904 केंद्रों से रोज़ाना 2 लाख थालियाँ वितरित होती थीं।

    🔹 ऑपरेटर्स की दिक्कतें और सरकार का नया कदम

    पिछले कई महीनों से योजना ठप होने के कारण शिव भोजन केंद्र चालकों के भुगतान रुके हुए थे, जिससे उनकी आजीविका पर असर पड़ा।
    इस मुद्दे को NCP नेता और मंत्री छगन भुजबल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के समक्ष उठाया।
    इसके बाद सरकार ने योजना को फिर से शुरू करने का निर्णय लिया और ₹21 करोड़ का तत्काल अनुदान जारी किया।

    साथ ही, भ्रष्टाचार रोकने के लिए सभी शिव भोजन केंद्रों पर CCTV कैमरे लगाना अनिवार्य किया गया है, ताकि भोजन वितरण में गड़बड़ी न हो।

    🔹 राजनीतिक पृष्ठभूमि: BMC चुनाव से पहले बड़ा दांव

    राज्य सरकार का यह फैसला BMC और अन्य स्थानीय निकाय चुनावों से पहले लिया गया है।
    राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह कदम गरीब और मध्यम वर्ग के मतदाताओं को जोड़ने की रणनीति का हिस्सा है।
    MVA के दौरान शुरू की गई इस योजना को महा यूती सरकार द्वारा बंद करने पर पहले काफी आलोचना हुई थी।


    🔹 FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

    Q1. शिव भोजन थाली योजना क्या है?
    यह महाराष्ट्र सरकार की सामाजिक योजना है, जिसके तहत गरीबों को मात्र ₹10 में ₹50 की पौष्टिक थाली दी जाती है।
    Q2. इस योजना को कब शुरू किया गया था?
    26 जनवरी 2020 को उद्धव ठाकरे सरकार ने इसे लॉन्च किया था।
    Q3. क्या यह योजना बंद कर दी गई थी?
    हाँ, मार्च 2025 में महायुती सरकार ने वित्तीय कारणों से इसे बंद कर दिया था, लेकिन अब इसे फिर से शुरू किया गया है।
    Q4. वर्तमान में थाली की लागत और सब्सिडी क्या है?
    थाली की कुल लागत ₹50 है। लाभार्थी ₹10 देते हैं, जबकि ₹40 सरकार वहन करती है।
    Q5. कितने केंद्रों पर यह योजना चल रही है?
    राज्यभर में लगभग 1,904 शिव भोजन केंद्र सक्रिय हैं, जहाँ रोज़ाना लाखों गरीब भोजन करते हैं।

  • बॉम्बे हाईकोर्ट में महाराष्ट्र सरकार का बयान: दिव्यांगों को दिए गए “खराब ई-रिक्शा” की होगी जांच

    बॉम्बे हाईकोर्ट में महाराष्ट्र सरकार का बयान: दिव्यांगों को दिए गए “खराब ई-रिक्शा” की होगी जांच

    महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट को आश्वासन दिया है कि वह दिव्यांग व्यक्तियों को दिए गए ई-रिक्शों की तकनीकी जांच करवाएगी। कई लाभार्थियों ने आरोप लगाया था कि सरकार की योजना के तहत मिले वाहन “खराब” और “असुरक्षित” हैं।

    मुंबई: महाराष्ट्र सरकार के समाज कल्याण विभाग की एक योजना के तहत दिव्यांग लोगों को ई-रिक्शा (e-rickshaw) दिए गए थे ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।
    लेकिन अब इन वाहनों की गुणवत्ता और सुरक्षा पर सवाल उठ गए हैं।

    लगभग 115 दिव्यांग लाभार्थियों ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि उन्हें जो ई-रिक्शे मिले हैं, वो “खराब हालत में” हैं और चलाने के लायक नहीं हैं।
    इन शिकायतों के बाद कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा — और अब सरकार ने कहा है कि वह तकनीकी जांच कराएगी और रिपोर्ट पेश करेगी।

    ⚙️ योजना की शुरुआत और खर्च

    इस योजना की शुरुआत 10 जून 2019 को समाज न्याय विभाग (Social Justice Department) के एक सरकारी निर्णय (GR) से हुई थी।
    इस योजना के तहत लगभग 800 ई-रिक्शे दिव्यांग व्यक्तियों को 20 करोड़ रुपये की लागत से बांटे गए थे।
    योजना का नाम था —
    “Green Energy Powered Environment-Friendly Mobile Shop for Disabled Persons to Become Self-Reliant”

    लेकिन याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कई वाहन तकनीकी रूप से दोषपूर्ण हैं और इनमें सुरक्षा संबंधी खामियां हैं।

    🧑‍⚖️ कोर्ट में क्या हुआ?

    15 अक्टूबर को जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस संदीश डी. पाटिल की डिवीजन बेंच ने इस मामले की सुनवाई की।
    याचिकाकर्ताओं की तरफ से वकील असीम सरोदे और श्रिय आळवे ने कहा कि सरकार ने उन्हें “डिफेक्टिव” यानी खराब वाहन देकर उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया है।

    उन्होंने यह भी मांग की कि

    • एक स्वतंत्र जांच एजेंसी नियुक्त की जाए,
    • और सरकारी खरीद प्रक्रिया (procurement process) की जांच की जाए ताकि यह पता चल सके कि क्या ई-रिक्शा की खरीद में गड़बड़ी हुई थी।

    🏛️ सरकार और कंपनी का जवाब

    सरकार की ओर से एडिशनल गवर्नमेंट प्लीडर भूपेश सामंत ने कोर्ट को बताया कि
    Maharashtra State Handicapped Finance and Development Corporation (MSHFDC) हर जिले में एक तकनीकी अधिकारी नियुक्त करेगी जो इन ई-रिक्शों की जांच करेगा।

    वहीं, सप्लायर कंपनी Mac Auto India ने भी कहा कि वह सिर्फ इन 115 याचिकाकर्ताओं के नहीं, बल्कि सभी लाभार्थियों के वाहनों की मरम्मत या जांच करेगी।

    कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया कि वह तकनीकी रिपोर्ट नवंबर 19, 2025 तक पेश करे और इस पूरी जांच में सोशल जस्टिस डिपार्टमेंट पूरा सहयोग करे।

    🔍 आरोप क्या हैं?

    • याचिकाकर्ताओं ने कहा कि ई-रिक्शे कमज़ोर बॉडी और घटिया पार्ट्स से बने हैं।
    • कई वाहनों की बैटरी और मोटर कुछ ही महीनों में फेल हो गई।
    • सरकार ने बाजार मूल्य से अधिक दरों पर खरीदारी की है।
    • कोई बाद की सर्विस या मेंटेनेंस सपोर्ट नहीं दिया गया।

    📉 अदालत की टिप्पणी

    कोर्ट ने पहले ही 3 अक्टूबर को कहा था कि याचिकाकर्ताओं की शिकायतें गंभीर और सटीक लगती हैं।
    अब अदालत इस बात पर नज़र रखेगी कि सरकार और कंपनी जांच में पारदर्शिता बरतती है या नहीं।

    🪫 दिव्यांगों की पीड़ा

    दिव्यांग लोगों का कहना है कि ये ई-रिक्शे आजीविका का एकमात्र साधन हैं।
    “खराब वाहन” मिलने की वजह से उनकी रोज़मर्रा की कमाई ठप पड़ गई है।
    कई लोगों को कर्ज चुकाने में मुश्किल हो रही है क्योंकि उन्होंने वाहन पर लोन लिया था।


    🧾 FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. मामला किस बारे में है?
    ➡️ दिव्यांग लाभार्थियों को सरकार की योजना के तहत दिए गए ई-रिक्शे खराब निकले, जिस पर बॉम्बे हाईकोर्ट में मामला चल रहा है।

    Q2. कितने लोगों ने याचिका दायर की है?
    ➡️ लगभग 115 दिव्यांग व्यक्तियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।

    Q3. योजना कब शुरू हुई थी?
    ➡️ यह योजना 10 जून 2019 को समाज न्याय विभाग के आदेश से शुरू की गई थी।

    Q4. क्या सरकार ने जांच के लिए हामी भरी है?
    ➡️ हां, महाराष्ट्र सरकार ने कहा है कि वह सभी ई-रिक्शों की तकनीकी जांच करवाएगी।

    Q5. अगली सुनवाई कब होगी?
    ➡️ अगली सुनवाई 19 नवंबर 2025 को निर्धारित की गई है।

  • एकनाथ शिंदे का बड़ा फैसला: अब बिल्डरों को देना होगा 3 साल का किराया पहले ही, पुनर्विकास प्रोजेक्ट में रहिवासियों की सुरक्षा के लिए नई नीति तैयार

    एकनाथ शिंदे का बड़ा फैसला: अब बिल्डरों को देना होगा 3 साल का किराया पहले ही, पुनर्विकास प्रोजेक्ट में रहिवासियों की सुरक्षा के लिए नई नीति तैयार

    महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने पुनर्विकास परियोजनाओं में रहिवासियों की सुरक्षा के लिए नई नीति का ऐलान किया। अब किसी भी प्रोजेक्ट की शुरुआत से पहले बिल्डरों को तीन साल का किराया अग्रिम जमा कराना होगा। यह कदम अधूरे प्रोजेक्ट्स और किराए में देरी जैसी समस्याओं को रोकने के लिए उठाया गया है।

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने पुनर्विकास प्रोजेक्ट्स में रहिवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक नई नीति पर काम शुरू किया है।
    उपमुख्यमंत्री और गृहनिर्माण मंत्री एकनाथ शिंदे ने शनिवार को कहा कि अब डेवलपर्स को प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले तीन साल का किराया अग्रिम जमा करना अनिवार्य होगा।

    उन्होंने कहा कि कई बार बिल्डर सोसाइटी के रहिवासियों को बाहर निकालकर प्रोजेक्ट शुरू करते हैं, लेकिन किराया नहीं देते या निर्माण अधूरा छोड़ देते हैं। इससे रहिवासी महीनों, कभी-कभी सालों तक किराए के लिए भटकते रहते हैं।

    💬 शिंदे बोले — “अब कोई बिल्डर रहिवासियों को धोखा नहीं दे पाएगा”

    ठाणे में कोंकण विभाग के 5,000 से ज्यादा म्हाडा फ्लैट्स के लॉटरी वितरण कार्यक्रम के दौरान शिंदे ने कहा,

    “कई बिल्डर पुनर्विकास के नाम पर रहिवासियों को बाहर निकालते हैं, लेकिन न तो किराया देते हैं, न ही प्रोजेक्ट पूरा करते हैं। अब यह बंद होगा। बिल्डर को तीन साल का किराया पहले जमा करना होगा और उसकी प्रोजेक्ट पूरा करने की क्षमता की जांच भी की जाएगी।”

    उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार रुके हुए पुनर्विकास प्रोजेक्ट्स को फिर से शुरू करने के लिए प्रतिबद्ध है।

    🏘️ सरकार का लक्ष्य — 35 लाख नए घर, ₹50 लाख करोड़ का निवेश

    शिंदे ने बताया कि राज्य सरकार आने वाले पांच वर्षों में ₹50 लाख करोड़ निवेश जुटाकर 35 लाख घरों का निर्माण करने की योजना पर काम कर रही है।
    इसके लिए सरकार ने सरकारी एजेंसियों और निजी बिल्डरों के बीच संयुक्त निवेश मॉडल (PPP) अपनाने का फैसला किया है, ताकि प्रोजेक्ट समय पर पूरे हों।

    👵 वरिष्ठ नागरिकों और महिलाओं के लिए विशेष आवास नीति

    एकनाथ शिंदे ने बताया कि म्हाडा अब वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष हाउसिंग पॉलिसी पर काम कर रहा है — यह देश में अपनी तरह की पहली नीति होगी।
    साथ ही सरकार कार्यरत महिलाओं, मिल मजदूरों और प्रवासी मजदूरों के लिए सस्ती दरों पर किराये के घर उपलब्ध कराने पर जोर दे रही है।

    💰 क्यों जरूरी है 3 साल के किराए का प्रावधान

    राज्य में कई सोसायटियों के रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट अधूरे या अटके हुए हैं, जिससे रहिवासियों को भारी नुकसान झेलना पड़ता है।
    नई नीति के तहत तीन साल का किराया जमा कराने से —

    • रहिवासियों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी,
    • प्रोजेक्ट के बीच में फंसने का खतरा कम होगा,
    • और डेवलपर पर जवाबदेही तय होगी।

    ❓FAQ सेक्शन

    Q1. नई पुनर्विकास नीति के तहत क्या बदलाव किए गए हैं?
    👉 अब किसी भी बिल्डर को प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले तीन साल का किराया अग्रिम जमा कराना होगा।

    Q2. यह नीति क्यों लाई जा रही है?
    👉 ताकि प्रोजेक्ट अधूरे न रहें और रहिवासियों को किराए की देरी या ठगी से बचाया जा सके।

    Q3. इस नीति की घोषणा किसने की?
    👉 महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और गृहनिर्माण मंत्री एकनाथ शिंदे ने ठाणे में एक कार्यक्रम में यह घोषणा की।

    Q4. सरकार का अगला हाउसिंग लक्ष्य क्या है?
    👉 राज्यभर में 35 लाख नए घर बनाना और ₹50 लाख करोड़ का निवेश जुटाना।

    Q5. क्या इस नीति से म्हाडा प्रोजेक्ट्स पर असर पड़ेगा?
    👉 हाँ, म्हाडा अब वरिष्ठ नागरिकों और महिलाओं के लिए विशेष हाउसिंग योजनाएं लाने जा रहा है।