Category: Maharashtra Schemes

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  • मुंबई में ‘स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार’ अभियान की शुरुआत, महिलाओं की सेहत और सशक्तिकरण को मिलेगा बढ़ावा

    मुंबई में ‘स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार’ अभियान की शुरुआत, महिलाओं की सेहत और सशक्तिकरण को मिलेगा बढ़ावा

    पीएम मोदी के 75वें जन्मदिन पर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने मुंबई के दहिसर में ‘स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार’ अभियान की शुरुआत की। जानिए कैसे यह योजना महिलाओं को सेहतमंद और परिवारों को सशक्त बनाएगी।

    मुंबई: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 75वें जन्मदिन के खास मौके पर केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मुंबई के दहिसर ईस्ट स्थित रावलपाड़ा पॉलिक्लिनिक में ‘स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार’ अभियान का उद्घाटन किया। इस अवसर पर मुंबई में महिला स्वास्थ्य और पोषण पर जोर देते हुए एक नई दिशा में कदम बढ़ाया गया।

    मुख्य उद्देश्य: महिला स्वास्थ्य और परिवार का सशक्तिकरण

    इस अभियान का मुख्य फोकस महिलाओं की सेहत सुधारने और परिवार को मजबूत बनाने पर है। इस मौके पर पीएम मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मध्यप्रदेश के धार जिले से इस राष्ट्रव्यापी पहल का उद्घाटन किया और महिलाओं से अपील की कि वो स्वास्थ्य जांच शिविरों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें।

    मुंबई में खास आयोजन और सेवाएं

    इस खास अवसर पर मुंबई में बीजेपी विधायक मनीषा चौधरी, बीएमसी कमिश्नर भूषण गगरानी, और कई वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में कार्यक्रम का आयोजन हुआ। बड़ी संख्या में महिला लाभार्थियों ने हिस्सा लिया।

    मेडिकल कैंप और पोषण किट वितरण:

    • गर्भवती महिलाओं को लगभग 20 किलो की पोषण किट दी गई।
    • खास ध्यान कुपोषित गर्भवती महिलाओं पर दिया गया।
    • स्लम इलाकों में निःशुल्क मेडिकल कैंप्स लगाए गए।

    सैनिटरी पैड वितरण:

    • मनपा स्कूलों की छात्राओं को सैनिटरी पैड दिए गए।
    • यह योजना पूरे मुंबई नगर निगम स्कूलों में चलाई जा रही है।

    क्या बोले पीयूष गोयल?

    “प्रधानमंत्री जी ने पिछले 50 सालों से देश की सेवा की है। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि उन्हें लंबी उम्र और अच्छा स्वास्थ्य मिले। इस अवसर पर पूरे उत्तर मुंबई में 100 से ज्यादा सेवा कार्य चल रहे हैं – सफाई, हेल्थ कैंप्स, शिक्षा से जुड़े कार्यक्रम और बहुत कुछ।“

    उन्होंने यह भी बताया कि स्कूलों और कॉलेजों में ‘स्टैंडर्ड क्लब’ शुरू किया जा रहा है जिससे गुणवत्ता और सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलेगी।

    विधायक मनीषा चौधरी का बयान:

    “यह सिर्फ हेल्थ कैंप नहीं है, बल्कि महिलाओं को सशक्त करने की दिशा में एक ठोस कदम है। जो महिलाएं गर्भावस्था में कुपोषित हैं, उन्हें विशेष पोषण किट दी जा रही है।“

  • महाराष्ट्र में अब 12 घंटे काम, मिलेगा दोगुना ओवरटाइम

    महाराष्ट्र में अब 12 घंटे काम, मिलेगा दोगुना ओवरटाइम

    महाराष्ट्र सरकार ने फैक्ट्री और दुकानों में कामकाजी घंटों को 12 तक बढ़ाने की मंजूरी दी। कर्मचारियों को अब दोगुना ओवरटाइम और बेहतर सुरक्षा मिलेगी।

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    मुंबई: महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला। महाराष्ट्र कैबिनेट ने एक अहम श्रम सुधार (Labour Reform) को मंजूरी दी है। अब फैक्ट्रियों और दुकानों में कर्मचारियों की दैनिक कामकाजी समय सीमा 9 घंटे से बढ़ाकर 12 घंटे कर दी गई है। इसके साथ ही कामगारों को ओवरटाइम के बदले दोगुना वेतन मिलेगा।

    फैक्ट्री कर्मचारियों के लिए नए नियम

    • पहले फैक्ट्रियों में काम का समय 9 घंटे प्रतिदिन था, जिसे अब बढ़ाकर 12 घंटे किया गया है।
    • 6 घंटे काम करने के बाद अनिवार्य ब्रेक मिलेगा (पहले 5 घंटे बाद ब्रेक था)।
    • क्वार्टर में ओवरटाइम सीमा 115 घंटे से बढ़ाकर 144 घंटे कर दी गई है।
    • हर कर्मचारी की लिखित सहमति के बाद ही ओवरटाइम करवाया जा सकेगा।

    दुकानों और प्रतिष्ठानों पर असर

    • दुकानों और प्रतिष्ठानों में काम करने वालों का समय 9 से बढ़ाकर 10 घंटे प्रतिदिन कर दिया गया है।
    • जिन दुकानों में 20 से अधिक कर्मचारी हैं, वहां भी ओवरटाइम की सीमा अब 144 घंटे प्रति क्वार्टर होगी।
    • छोटे व्यापार (20 से कम कर्मचारी) को अब रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं होगी, सिर्फ साधारण सूचना देनी होगी।

    निवेश और रोजगार पर असर

    सरकार का कहना है कि इन सुधारों से Ease of Doing Business को बढ़ावा मिलेगा। इससे महाराष्ट्र में निवेश आकर्षित होगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
    यह फैसला कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और त्रिपुरा जैसे राज्यों की तरह है, जिन्होंने पहले ही ऐसे बदलाव किए हैं।

    महिला कर्मचारियों को फायदा

    श्रम विभाग का कहना है कि इन सुधारों से महिला कर्मचारियों को भी लाभ होगा। क्योंकि अब उनके लिए स्पष्ट कानूनी ढांचा मौजूद होगा और ओवरटाइम का भुगतान सुरक्षित रूप से मिलेगा।

    सुरक्षा और अधिकार सुरक्षित

    सरकार ने साफ किया है कि इन बदलावों से सुरक्षा मानकों में कोई कमी नहीं की जाएगी। बल्कि अब जब भी कर्मचारी अतिरिक्त समय तक काम करेंगे, तो उन्हें लिखित सहमति + दोगुना वेतन मिलना अनिवार्य होगा।

    सरकार का बयान

    “महाराष्ट्र की निवेश क्षमता और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए बदलाव ज़रूरी है। यह सुधार उद्योगों और कामगारों दोनों के लिए फायदेमंद साबित होंगे,” – महाराष्ट्र सरकार के प्रवक्ता।

  • मराठा आरक्षण पर राजनीति: ओबीसी संग्राम और फडणवीस का जवाब

    मराठा आरक्षण पर राजनीति: ओबीसी संग्राम और फडणवीस का जवाब

    मराठा आरक्षण को लेकर महाराष्ट्र में नया विवाद। छगन भुजबल की नाराजगी, ओबीसी नेताओं का रुख और देवेंद्र फडणवीस की सफाई जानें विस्तार से।

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति इन दिनों आरक्षण को लेकर एक बार फिर गरमा गई है। मराठा आरक्षण को लेकर सरकार के नए जीआर (Government Resolution) ने माहौल को गर्म कर दिया है। मराठा समुदाय को मनाने में सफल रहे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस अब ओबीसी नेताओं की नाराजगी का सामना कर रहे हैं। सबसे बड़ा नाम है एनसीपी नेता और मंत्री छगन भुजबल का, जिन्होंने कैबिनेट बैठक का बहिष्कार कर दिया।

    मराठा आंदोलन और सरकार का फैसला

    मराठा आंदोलन पिछले कई महीनों से चल रहा था। कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने अनशन किया और सरकार से 8 मांगें रखीं। इनमें से 6 मांगों को सरकार ने मान लिया। सबसे अहम मांग थी मराठा-कुनबी प्रमाणपत्र को लेकर, जिस पर सरकार ने सबकमेटी के जरिए अहम फैसला लिया।

    इसके बाद आज़ाद मैदान और अन्य जगहों पर मराठा समाज ने जश्न मनाया। लेकिन इसी फैसले से ओबीसी नेताओं में नाराजगी देखने को मिली।

    छगन भुजबल क्यों नाराज?

    बुधवार को महाराष्ट्र कैबिनेट की बैठक थी। उससे पहले छगन भुजबल प्री-कैबिनेट मीटिंग में शामिल हुए, लेकिन मुख्य बैठक में नहीं गए। उनका कहना है कि सरकार का यह जीआर ओबीसी के अधिकारों पर असर डाल सकता है।

    भुजबल ने यहां तक कह दिया कि वे इस मामले को अदालत में ले जाएंगे। इसके बाद अटकलें तेज हो गईं कि वे मंत्री पद भी छोड़ सकते हैं। हालांकि अभी तक उन्होंने इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया।

    देवेंद्र फडणवीस का जवाब

    जब मीडिया ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से इस विवाद पर सवाल किया तो उन्होंने साफ कहा:

    • “कोई कैबिनेट छोड़कर नहीं गया है। मैंने छगन भुजबल से फोन पर बात की है।”
    • “हमारा जीआर ओबीसी पर असर नहीं डालता। राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ ने भी इसे देखकर यही कहा है।”
    • “हम मराठों का आरक्षण मराठों को देंगे और ओबीसी का आरक्षण ओबीसी को। किसी का अधिकार छीना नहीं जाएगा।”

    ओबीसी पर असर होगा या नहीं?

    फडणवीस ने स्पष्ट किया कि यह जीआर सामान्य आरक्षण का आदेश नहीं है, बल्कि यह सिर्फ “प्रूफ का जीआर” है।

    • उन्होंने कहा कि मराठवाड़ा के सबूत हैदराबाद गजट में मौजूद हैं, इसलिए इन्हें शामिल किया गया है।
    • जिनके पास सबूत होंगे, उन्हें ही आरक्षण का हक मिलेगा।
    • ओबीसी संगठनों ने भी इस पर सहमति जताई है।

    महाराष्ट्र में आगे की राजनीति

    महाराष्ट्र की राजनीति में आरक्षण हमेशा से संवेदनशील मुद्दा रहा है।

    • मराठा समाज की बड़ी आबादी है, जो लंबे समय से आरक्षण की मांग करता आया है।
    • वहीं ओबीसी समाज भी यह मानता है कि उनके अधिकार किसी और को न दिए जाएं।
    • ऐसे में सरकार को दोनों समुदायों को साथ लेकर चलना आसान नहीं होगा।

    फिलहाल फडणवीस यह दावा कर रहे हैं कि ओबीसी का हक किसी भी हाल में नहीं छीना जाएगा। लेकिन छगन भुजबल की नाराजगी यह संकेत देती है कि यह मुद्दा आने वाले समय में और बड़ा राजनीतिक संकट बन सकता है।

    सोशल मीडिया पर माहौल

    मराठा आंदोलन के खत्म होते ही ट्विटर (X), फेसबुक और इंस्टाग्राम पर मराठा समर्थकों ने खुशी जताई। वहीं ओबीसी समर्थक इस फैसले को लेकर चिंता जता रहे हैं। #MarathaReservation, #OBCReservation और #ChhaganBhujbal जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। Politics on Maratha reservation: OBC struggle and Fadnavis’s answer

    महाराष्ट्र सरकार ने मराठा आंदोलन को शांत करने के लिए जो कदम उठाया है, उसने ओबीसी समाज में नए सवाल खड़े कर दिए हैं। छगन भुजबल जैसे बड़े नेता की नाराजगी इस मुद्दे को और तूल दे सकती है। हालांकि, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस लगातार यह भरोसा दिला रहे हैं कि किसी भी समाज के साथ अन्याय नहीं होगा।

    मराठा आरक्षण विवाद से जुड़े आम सवाल (FAQ)

    Q1. मराठा आरक्षण विवाद क्यों उठा?

    मराठा आरक्षण विवाद इसलिए उठा क्योंकि सरकार ने मराठा समाज को आरक्षण देने के लिए नया जीआर (सरकारी आदेश) निकाला। इस फैसले से ओबीसी नेताओं को लग रहा है कि उनके आरक्षण पर असर पड़ सकता है।

    Q2. छगन भुजबल क्यों नाराज हैं?

    एनसीपी नेता और मंत्री छगन भुजबल का कहना है कि सरकार का यह कदम ओबीसी समाज के हक पर असर डाल सकता है। इसी वजह से उन्होंने कैबिनेट बैठक का बहिष्कार किया और कहा कि वे अदालत जाएंगे।

    Q3. क्या छगन भुजबल ने मंत्री पद छोड़ा है?

    नहीं, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने साफ किया है कि कोई भी मंत्री कैबिनेट से बाहर नहीं गया है। भुजबल अब भी सरकार का हिस्सा हैं।

    Q4. देवेंद्र फडणवीस ने इस विवाद पर क्या कहा?

    फडणवीस ने कहा कि सरकार का जीआर ओबीसी पर कोई असर नहीं डालता। मराठा और ओबीसी दोनों को उनका हक मिलेगा और किसी का आरक्षण किसी और को नहीं दिया जाएगा।

    Q5. क्या ओबीसी का आरक्षण खतरे में है?

    सरकार का कहना है कि ओबीसी का आरक्षण बिल्कुल सुरक्षित है। यह जीआर सिर्फ सबूत और प्रमाण से जुड़ा है। जिनके पास योग्य प्रमाण होंगे, उन्हें ही आरक्षण मिलेगा।

  • विरार-अलीबाग मल्टीमॉडल कॉरिडोर को मिली मंजूरी, 2026 से शुरू होगा काम

    विरार-अलीबाग मल्टीमॉडल कॉरिडोर को मिली मंजूरी, 2026 से शुरू होगा काम

    महाराष्ट्र सरकार ने विरार-अलीबाग मल्टीमॉडल कॉरिडोर को BOT मॉडल पर मंजूरी दी। 2026 से काम शुरू, 126 किमी लंबा कॉरिडोर जोड़ेगा JNPT, NMIA और MTHL से।

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने लंबे समय से अटके विरार-अलीबाग मल्टीमॉडल कॉरिडोर प्रोजेक्ट को आखिरकार हरी झंडी दे दी है। इस फैसले के साथ राज्य की परिवहन और आर्थिक विकास की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। यह कॉरिडोर मुंबई महानगर क्षेत्र के लिए नया लाइफलाइन साबित हो सकता है, क्योंकि यह प्रोजेक्ट मुंबई, नवी मुंबई, पालघर और रायगढ़ को सीधे जोड़ देगा। Virar-Alibaug Multimodal Corridor gets approval, work to start from 2026

    प्रोजेक्ट का महत्व

    यह 126.3 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर मुंबई के कई बड़े आर्थिक और परिवहन केंद्रों को जोड़ेगा। इसमें शामिल हैं:

    • जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (JNPT)
    • नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट (NMIA)
    • मुंबई ट्रांस हार्बर सी लिंक (MTHL)

    साथ ही यह प्रोजेक्ट कई नेशनल हाइवे और एक्सप्रेसवे से भी जुड़ने वाला है, जिनमें शामिल हैं:

    • मुंबई-अहमदाबाद हाईवे (NH-48)
    • मुंबई-आगरा हाईवे (NH-848)
    • कल्याण-मुर्बड हाईवे (NH-61)
    • मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे
    • मुंबई-बेंगलुरु हाईवे (NH-48)
    • मुंबई-गोवा हाईवे (NH-66)

    BOT मॉडल पर होगा निर्माण

    Virar-Alibaug-Multimodal-Corridor-gets-approval

    पहले इस प्रोजेक्ट को EPC (Engineering Procurement Construction) मॉडल पर लाने की तैयारी थी, लेकिन लागत अनुमान से अधिक बोली आने के बाद सरकार ने इसे रद्द कर दिया। अब इसे BOT (Build, Operate and Transfer) मॉडल पर बनाया जाएगा। Virar-Alibaug Multimodal Corridor gets approval, work to start from 2026

    इस मॉडल में निजी कंपनियां निवेश कर प्रोजेक्ट बनाएंगी और कुछ वर्षों तक उसका संचालन करने के बाद सरकार को सौंप देंगी। इससे सरकार के ऊपर वित्तीय बोझ कम होगा। Virar-Alibaug Multimodal Corridor gets approval, work to start from 2026

    पहला चरण: 96.41 किलोमीटर का निर्माण

    पहले चरण में 96.41 किलोमीटर का कॉरिडोर बनाया जाएगा। यह हिस्सा पालघर जिले के नावघर से लेकर रायगढ़ जिले के पेन तालुका के बालवली तक फैला होगा। Virar-Alibaug Multimodal Corridor gets approval, work to start from 2026

    इस हिस्से में प्राथमिकता से उन इलाकों पर काम होगा जहां कॉरिडोर का हिस्सा NHAI के वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे स्पर (Morbe से Karanjade तक) से जुड़ता है। Virar-Alibaug Multimodal Corridor gets approval, work to start from 2026

    जमीन अधिग्रहण और लागत

    सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने का आदेश दिया है।

    • जमीन अधिग्रहण लागत: ₹22,250 करोड़
    • प्रशासनिक मंजूरी: ₹37,013 करोड़
    • इसमें अनुमानित ब्याज: ₹14,763 करोड़ भी शामिल है।

    इसके अलावा, HUDCO को “कम्फर्ट क्लॉज” दिया गया है, जिसके तहत अगर MSRDC से पर्याप्त राजस्व नहीं आता है तो लोन की अदायगी सुनिश्चित होगी। Virar-Alibaug Multimodal Corridor gets approval, work to start from 2026

    आर्थिक विकास की नई राह

    यह कॉरिडोर मुंबई और उसके आसपास के शहरों के लिए नई संभावनाएं लेकर आएगा।

    • रोज़गार के अवसर: प्रोजेक्ट से निर्माण और संचालन दोनों चरणों में हजारों नौकरियां पैदा होंगी।
    • यातायात पर असर: भारी ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी और लॉजिस्टिक्स का समय कम होगा।
    • औद्योगिक विकास: नवी मुंबई और रायगढ़ जिले के औद्योगिक क्षेत्रों को नया बूस्ट मिलेगा।

    चुनौतियां भी कम नहीं

    हालांकि यह प्रोजेक्ट बड़ा बदलाव लाने वाला है, लेकिन चुनौतियां भी सामने हैं।

    • जमीन अधिग्रहण से जुड़ी कानूनी बाधाएं
    • प्रोजेक्ट लागत में और बढ़ोतरी की आशंका
    • BOT मॉडल पर निवेशकों को आकर्षित करने की चुनौती
    • स्थानीय लोगों का विरोध और पुनर्वास का मुद्दा

    विरार-अलीबाग मल्टीमॉडल कॉरिडोर मुंबई और महाराष्ट्र के लिए एक ऐतिहासिक प्रोजेक्ट है। अगर यह योजना तय समय पर पूरी हुई, तो मुंबई महानगर क्षेत्र को ट्रैफिक जाम, यात्रा समय और लॉजिस्टिक्स लागत से बड़ी राहत मिलेगी। साथ ही यह JNPT, नवी मुंबई एयरपोर्ट और MTHL जैसे प्रोजेक्ट्स से सीधे जुड़कर मुंबई को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नया पहचान देगा। Virar-Alibaug Multimodal Corridor gets approval, work to start from 2026

  • मराठा आरक्षण: मर भी जाऊंगा तो नहीं हटूंगा- मनोज जरांगे

    मराठा आरक्षण: मर भी जाऊंगा तो नहीं हटूंगा- मनोज जरांगे

    मराठा आरक्षण आंदोलन: मनोज जरांगे पाटिल का ऐलान, “मर भी जाऊं तो भी नहीं हटूंगा”। पांच दिन से भूख हड़ताल, सरकार पर दबाव।

    मुंबई: मराठा आरक्षण की माँग को लेकर आज़ाद मैदान में बैठे मनोज जरांगे पाटिल ने आंदोलन को और सख्त करते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि चाहे उनकी जान भी क्यों न चली जाए, वे धरना स्थल से नहीं हटेंगे। पाटिल पिछले पांच दिनों से भूख हड़ताल पर हैं और उनकी तबीयत लगातार बिगड़ रही है।

    जरांगे का सख्त ऐलान

    मनोज जरांगे ने मुख्यमंत्री और सरकार को चेतावनी दी है। उनका कहना है कि सरकार उनकी आवाज़ दबाने की कोशिश कर रही है, लेकिन वे पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा, “अगर मैं मर भी जाऊं, तो भी इस ज़मीन से नहीं उठूंगा। सोमवार को होने वाले जनआक्रोश का सामना करना सरकार के लिए आसान नहीं होगा।”

    हाईकोर्ट और पुलिस की सख्ती

    मुंबई पुलिस ने आंदोलन को जारी रखने की अनुमति नहीं दी और प्रदर्शनकारियों को आज़ाद मैदान खाली करने का आदेश दिया है।
    बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी सोमवार को सुनवाई के दौरान कहा कि आंदोलनकारियों ने अपने वादे पूरे नहीं किए और इसके चलते शहर ठप पड़ा, जिससे आम जनता को परेशानी हुई।

    कोर्ट ने साफ आदेश दिया कि:

    • आंदोलनकारियों को आज़ाद मैदान से हटाया जाए।
    • मुंबई की सड़कों से ट्रैफ़िक जाम हटाया जाए।
    • नए प्रदर्शनकारियों को शहर में एंट्री न दी जाए।
    • जरांगे पाटिल और समर्थकों को मेडिकल सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

    पाटिल का पलटवार

    मनोज जरांगे पाटिल ने कोर्ट और पुलिस की कार्रवाई पर प्रतिक्रिया दी। उनका कहना है कि उन्होंने कानून का उल्लंघन नहीं किया है और वे शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन चला रहे हैं।

    उन्होंने दावा किया कि जैसे ही अदालत का आदेश मिला, प्रदर्शनकारियों ने अपनी गाड़ियाँ सड़कों से हटा दीं ताकि ट्रैफ़िक में कोई दिक्कत न हो। पाटिल का कहना है कि वे पिछले दो सालों से शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे हैं और अब जब तक मांगे पूरी नहीं होतीं, वे मुंबई नहीं छोड़ेंगे।

    मराठा आरक्षण की मुख्य मांग

    पाटिल और उनके समर्थकों की मुख्य मांग है कि मराठा समाज को सरकारी नौकरी और शिक्षा में ओबीसी कोटे के तहत 10% आरक्षण मिले।
    उनका कहना है कि जब तक “हैदराबाद राजपत्र” लागू नहीं होता और लिखित आदेश नहीं आता, तब तक वे धरना खत्म नहीं करेंगे।

    सरकार पर बढ़ा दबाव

    इस आंदोलन के चलते महाराष्ट्र की महायुति सरकार पर दबाव काफी बढ़ गया है। सरकार ने बातचीत के लिए राधाकृष्ण विखे पाटिल की अगुवाई में 10 मंत्रियों की समिति बनाई है। समिति आंदोलनकारियों से बातचीत करने और समाधान निकालने की कोशिश कर रही है।

    आज़ाद मैदान में भीड़ और माहौल

    मुंबई के आज़ाद मैदान में हजारों की संख्या में मराठा समाज के लोग जुटे हुए हैं। आंदोलन के शुरुआती दिनों में शहर के कई हिस्सों में ट्रैफिक जाम हुआ था, लेकिन अब स्थिति सामान्य हो रही है।

    हालांकि, मनोज जरांगे पाटिल की सेहत लगातार गिर रही है। मेडिकल टीम समय-समय पर उनकी जांच कर रही है। इसके बावजूद उन्होंने भूख हड़ताल तोड़ने से साफ इनकार कर दिया है।

    निर्णायक मोड़ पर आंदोलन

    मराठा आरक्षण का यह संघर्ष अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। एक तरफ सरकार और अदालत कानून व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मनोज जरांगे पाटिल साफ कह रहे हैं कि वे “न्याय मिलने तक पीछे नहीं हटेंगे, चाहे जान भी क्यों न चली जाए।”

    यह आंदोलन अब महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन चुका है और आने वाले दिनों में इसका असर राज्य की स्थिरता पर भी पड़ सकता है।

  • MHADA Mumbai Lottery 2025: जानें आवेदन और डाक्यूमेंट्स से जुड़ी अन्य डिटेल्स

    MHADA Mumbai Lottery 2025: जानें आवेदन और डाक्यूमेंट्स से जुड़ी अन्य डिटेल्स

    मुंबई में घर और दुकान खरीदने का सपना देखने वाले नागरिकों के लिए महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (MHADA) प्रशासन ने एक बेहतरीन अवसर लेकर आया है।

    मुंबई: घर और दुकान खरीदने का सपना देखने वाले नागरिकों को मुंबई में महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (MHADA) प्रशासन ने एक बेहतरीन अवसर लेकर आया है। MHADA ने एक नई योजना की शुरुआत की है, जिसके तहत अब न केवल घर, बल्कि सस्ते दुकानों और व्यावसायिक गाले भी लोग खरीद सकेंगे। म्हाडा नीलामी करने जा रही है। इस नीलामी में मकानों के साथ दुकानें भी खरीदने का मौका मिलेगा, जिसका आवेदन 19 अगस्त 2025 से शुरू होने जा रहा है। MHADA Mumbai Lottery 2025: Know other details related to application and documents

    कब से शुरू होगा आवेदन प्रकृया?

    MHADA प्रशासन मुंबई में 149 दुकानों की ई-नीलामी करने जा रहा है। इस नीलामी के लिए आवेदन और पंजीकरण प्रक्रिया मंगलवार, 19 अगस्त, 2025 से शुरू हो जाएगी। म्हाडा की जानकारी में कहा गया है, कि आवेदन 25 अगस्त, 2025 तक किए जा सकते हैं। इच्छुक उम्मीदवारों को अपने सभी दस्तावेज़ पहले से तैयार रखने की सलाह दी गई है, ताकि आवेदन की प्रक्रिया में कोई रुकावट न आए। आवेदन प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवारों को MHADA की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। MHADA Mumbai Lottery 2025: Know other details related to application and documents

    29 अगस्त को होगी घोषणा

    इन दुकानों के लिए ऑनलाइन बोली 28 अगस्त, 2025 को सुबह 11 बजे से शुरू होगी, और नीलामी का परिणाम अगले दिन यानी 29 अगस्त, 2025 को घोषित किया जाएगा। इस ई-नीलामी में मुंबई के 17 प्रमुख स्थानों पर स्थित 149 दुकानें शामिल हैं, जिनमें से 124 दुकानें पिछली नीलामी में बिक्री न होने के कारण दोबारा शामिल किया गया हैं। इन दुकानों की बोली की कीमत 23 लाख रुपये से लेकर 12 करोड़ रुपये तक निर्धारित की गई है। MHADA Mumbai Lottery 2025: Know other details related to application and documents

    नीलामी में शामिल दुकानें निम्नलिखित स्थानों पर हैं:

    • मुलुंड गव्हाणपाडा: 6 दुकानें
    • कुर्ला-स्वदेशी मिल: 5 दुकानें
    • तुंगा पवई: 2 दुकानें
    • कोपरी पवई: 23 दुकानें
    • चारकोप: 23 दुकानें
    • पुराना मागाठाणे, बोरीवली पूर्व: 6 दुकानें
    • महावीर नगर, कांदिवली पश्चिम: 6 दुकानें
    • प्रतीक्षा नगर, सायन: 9 दुकानें
    • अँटॉप हिल, वडाला: 3 दुकानें
    • मालवणी, मालाड: 46 दुकानें
    • बिंबिसार नगर, गोरेगांव पूर्व: 17 दुकानें

    शास्त्री नगर (गोरेगांव), सिद्धार्थ नगर, और मजासवाडी (जोगेश्वरी पूर्व): प्रत्येक में 1 दुकान..MHADA Mumbai Lottery 2025: Know other details related to application and documents

  • Ladki Bahin Yojana: देर से ही सही, पर लाडकी बहन योजना धारकों के लिए खुशखबरी!

    Ladki Bahin Yojana: देर से ही सही, पर लाडकी बहन योजना धारकों के लिए खुशखबरी!

    महाराष्ट्र सरकार की “लाडकी बहन योजना” के तहत राज्य की लाखों महिलाओं के लिए रक्षाबंधन से पहले बड़ी खुशखबरी है। जुलाई महीने की 13वीं किस्त यानी 1500 रुपये बैंक खातों में 9 अगस्त 2025 से पहले जमा किए जाएंगे। हालांकि की देरी हुई है लेकिन योजना को फिर एकबार जारी रखा गया है।

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    मुंबई:
    महाराष्ट्र सरकार की “लाडकी बहन योजना” के तहत राज्य की लाखों महिलाओं के लिए रक्षाबंधन से पहले बड़ी खुशी की खबर है। जुलाई महीने की 13वीं किस्त 1500 रुपये की पात्र महिलाओं के बैंक खातों में 9 अगस्त 2025 से पहले जमा कर दिए जाएंगे। महिला एवं बाल विकास मंत्री आदिती तटकरे ने हाल ही में इसको लेकर जानकारी साझा करते हुए बताया कि रक्षाबंधन की पूर्व संध्या पर महिलाओं के खातों में पैसे जमा कर दिए जाएंगे। एक जानकारी के मुताबिक किस्तों के पैसे जारी करने में देरी हुई है। यह देरी इसलिए हुई क्यों कि योजना का लाभ उठाने के लिए लाखों लोगों ने फर्जी तरीके से लाभ उठा लिया था। उसकी जांच मे देरी के कारण पात्र महिलाओं को इंतजार करना पड़ा। Ladki Bahin Yojana: Though late, but good news for Ladki Bahin Yojana holders!

    योजना में पात्रता और लाभ

    महाराष्ट्र सरकार की ओर से “माझी लाडकी बहन योजना” 21 से 65 वर्षीय महिलाओं के लिए चलाई जा रही है। योजना की शुरुआत से अब तक पात्र महिलाओं को 1500 रुपये प्रति माह की दर से अबतक 12 किस्तें दी जा चुकी हैं। सरकारी घोषणा के मुताबिक, अब 13वीं किस्त की राशि जारी किए जायेगी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है, ताकि वे अपने जरूरतों के खर्चों को आत्मनिर्भरता से पूरा कर सकें।

    Ladki Bahin Yojana में मिले फर्जी खाते

    हालांकि, इस बार सभी महिलाओं को किस्त नहीं मिलेगी। सरकार की जांच में सामने आया है कि 26.34 लाख लोगों ने फर्जी तरीके से योजना का लाभ उठाया है। जिनमें से करीब 14,000 पुरुष भी शामिल थे। ऐसे सभी फर्जी लाभार्थियों को लाभार्थी सूची से हटा दिया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया, कि आगे से केवल योग्य और सत्यापित महिलाओं को ही योजना का लाभ मिलेगा। यदि कोई व्यक्ति गलत जानकारी देकर इस योजना का लाभ लेता है, तो उस पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। Ladki Bahin Yojana: Though late, but good news for Ladki Bahin Yojana holders!

    कैसे करें बैलेंस चेक?

    जिन महिलाओं को किस्त मिलने वाली है, वे अपना खाता बैलेंस निम्नलिखित तरीकों से जांच सकते हैं:

    • ATM मशीन के जरिए पता कर सकते हैं।
    • बैंक शाखा कार्यालय जाकर पूछताछ की जा सकती है।
    • मोबाइल बैंकिंग ऐप से बेलेंस चेक कर सकते हैं।
    • कस्टमर केयर नंबर पर कॉल करके भी पता कर सकते हैं।

    आपको जानकारी देते हुए बता दें, कि लाडकी बहन योजना की राशि DBT के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती है।

    करोड़ों महिलाओं को मिल रहा है योजना का लाभ

    महाराष्ट्र सरकार की ओर से जारी “माझी लाडकी बहन योजना” के तहत पहले करीब 2.5 करोड़ महिलाओं को लाभ मिल रहा था, लेकिन जांच में गड़बड़ियां सामने आने के बाद आंकड़ा करीब सवा दो करोड़ हो गया। लेकिन इसके बाद एक बार फिर 26.34 लाख फर्जी नामों को हटाया गया, जिससे यह आंकड़ा अब घटकर करीब 2 करोड़ होने की जानकारी मिल रही है। हालांकि सरकार का लक्ष्य है कि हर पात्र महिला तक यह सहायता समय पर पहुंचे, ताकि कोई भी जरूरतमंद महिला इस योजना से वंचित न रह जाए। Ladki Bahin Yojana: Though late, but good news for Ladki Bahin Yojana holders!

  • अब सरकारी कर्मचारियों की होगी बल्ले-बल्ले, आधे घंटे का मिला तोहफा

    अब सरकारी कर्मचारियों की होगी बल्ले-बल्ले, आधे घंटे का मिला तोहफा

    महाराष्ट्र की सरकार ने अपने सरकारी कर्मचारियों को सुबह आधा घंटा देर से अपने कार्यालय में उपस्थित दर्ज कराने की अनुमति दे दी है, ताकि मुंबई की लोकल ट्रेनों में भीड़ को कम किया जा सके। कर्मचारियों को इस अतिरिक्त समय को कार्य दिवस के अंत में जोड़ना होगा।

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    मुंबई:
    महाराष्ट्र सरकार ने अपने कर्मचारियों के लिए एक नई नीति की घोषणा की है, जिसके तहत उन्हें सुबह आधा घंटा देर से ऑफिस आने की अनुमति दी जाएगी। यह निर्णय मुंबई की लोकल ट्रेनों में बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करने के उद्देश्य से लिया गया है। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने विधानसभा में बताया कि इस लचीले समय से कर्मचारी सुबह और शाम के पीक आवर्स से बच सकेंगे, जिससे ट्रेनों में यात्रियों का दबाव कम होगा। हालांकि, कर्मचारियों को यह आधा घंटा कार्य दिवस के अंत में जोड़कर पूरा करना होगा, ताकि कुल कामकाजी समय पर कोई असर न पड़े।

    मुंबई लोकल ट्रेन में घटेगी भीड़

    मुंबई की लोकल ट्रेनें प्रतिदिन लगभग 70 लाख यात्रियों का बोझा ढोती हैं, और पीक आवर्स में ट्रेनों में यात्रा करना बेहद कठिन हो जाता है। सरकारी कर्मचारी बड़ी संख्या में इन ट्रेनों का उपयोग करते हैं, और नई नीति के तहत उन्हें सुबह 10 बजे के बजाय 10:30 बजे उपस्थिति दर्ज करने की अनुमति होगी। इस बदलाव से न केवल यात्रियों को राहत मिलेगी, बल्कि ट्रेनों में असुविधा और दुर्घटनाओं का जोखिम भी कम होगा।

    विशेषज्ञों का क्या है कहना?

    हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इसका प्रभाव सीमित हो सकता है, क्योंकि निजी क्षेत्र के कर्मचारी और अन्य यात्री अभी भी पीक आवर्स में यात्रा करते हैं। परिवहन विशेषज्ञों के अनुसार, यह योजना तभी पूरी तरह सफल होगी जब निजी कंपनियां भी अपने कर्मचारियों के लिए लचीले समय को अपनाएं।

  • Ladki Bahin Yojana: लाडकी बहनों को अब बैंक से मिलेगा जीरो इंट्रेस्ट पर कर्ज

    Ladki Bahin Yojana: लाडकी बहनों को अब बैंक से मिलेगा जीरो इंट्रेस्ट पर कर्ज

    महाराष्ट्र की लाडकी बहनों को अब आर्थिक निर्भर बनाने के लिए उन्हें मुंबई जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक की तरफ से जीरो इंट्रेस्ट पर कर्ज देने की योजना बनाई गई है। बैंक अब उन लाभार्थी महिलाओं को खुद का व्यवसाय करने के लिए लोन देने जा रही है।

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    Ladki Bahin Yojana:
    राज्य सरकार की लोकप्रिय ‘लाड़की बहन योजना‘ के तहत अब महिलाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर कर्ज मिलने जा रहा है। यह योजना मुंबई जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक द्वारा लागू की जा रही है, जिसे राज्य सरकार की ब्याज सब्सिडी योजना के साथ जोड़ा गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस योजना को मंजूरी दी गई। इस बैठक में राज्य सरकार के चार महत्वपूर्ण महामंडलों के निदेशक और संबंधित विभागों के सचिव मौजूद थे। बैठक के बाद बैंक के अध्यक्ष प्रवीण दरेकर ने योजना की जानकारी साझा की।

    बैठक में हुआ फैसला

    मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में वर्षा निवास पर हुई बैठक में इस योजना को मंजूरी दी गई है। बैठक में चार सरकारी महामंडलों के अधिकारी, संबंधित विभागों के सचिव और मुंबई जिला बैंक के अध्यक्ष प्रवीण दरेकर भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने निर्देश देते हुए कहा, कि “महिलाओं को बिना ब्याज के कर्ज उपलब्ध कराया जाना चाहिए।”

    मिलेगा ब्याज पर सब्सिडी

    आई योजना (पर्यटन महामंडल), अण्णासाहेब आर्थिक विकास महामंडल, भटक्या विमुक्त महामंडल, ओबीसी महामंडल इन सभी चार महत्वपूर्ण महामंडलों को इस योजना में ब्याज सब्सिडी के लिए शामिल किया गया है। इन योजनाओं से महिलाओं को 12% तक ब्याज की भरपाई की जाएगी। फायदा यह होगा कि इससे महिलाओं को ज़ीरो इंटरेस्ट पर लोन मिलेगा। Ladki Bahin Yojana: Now girl sisters will get loan from bank at zero interest

    मिलेगा 1 लाख तक का लोन

    एक महिला को 1 लाख रुपये तक का कर्ज दिया जाएगा। इस योजना का लाभ उठाने के लिए 5 से 10 महिलाओं का समूह बनाकर भी व्यवसाय शुरू किया जा सकता है। बैंक व्यवसाय की जांच-पड़ताल करने के बाद लोन को पास करेगी। इस योजना का लाभ लेने के लिए महिलाओं को मुंबई जिला बैंक में आवेदन करना होगा। Ladki Bahin Yojana: Now girl sisters will get loan from bank at zero interest

    12 लाख से अधिक महिलाओं को मिलेगा फायदा

    वर्तमान में 12 से 13 लाख महिलाएं ‘लाड़की बहन’ योजना की लाभार्थी हैं। इनमें से लगभग 1 लाख महिलाएं मुंबई जिला बैंक की सदस्य भी हैं। यह योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। Ladki Bahin Yojana: Now girl sisters will get loan from bank at zero interest

  • मुख्यमंत्री ने SRA परियोजना के लिए मोबाइल एप लॉन्च किया।

    मुख्यमंत्री ने SRA परियोजना के लिए मोबाइल एप लॉन्च किया।

    महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुंबई झोपड़पट्टी पुनर्वसन प्राधिकरण के लिए गुरुवार को “SRA Brihanmumbai” मोबाइल ऐप्लिकेशन को लॉन्च किया। इसके तहत नागरिकों को बिल्डर, आर्किटेक्ट और परियोजनों से प्रभावित व्यक्तियों को योजना की जानकारी मिल सकेगी।

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    Mumbai SRA News:
    गुरुवार को राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य अतिथिगृह “सह्याद्री” में झोपड़पट्टी पुनर्वसन प्राधिकरण (SRA) की समीक्षा बैठक ली। इस दौरान मुख्यमंत्री ने मुंबई झोपड़पट्टी पुनर्वसन प्राधिकरण (SRA) के लिए “SRA Brihanmumbai” नामक मोबाइल ऐप्लिकेशन लॉच किया। इस ऐप से नागरिकों को बिल्डरों को, आर्किटेक्ट वर्ग को और परियोजनाओं से प्रभावित व्यक्तियों को योजना की जानकारी मिल सकेगी। मुख्यमंत्री ने एसआरए के अधिकारियों को वेबसाइट पर नागरिकों के लिए आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। आप इस ऐप्लिकेशन को यहां से भी डायरेक्ट Download कर सकते हैं। Chief Minister launched mobile app for SRA project

    पहाडों पर बने झोपडों का पुनर्वसन

    इसी बैठक के दौरान मुंबई समेत राज्य के दूसरे शहरों में पहाड़ों पर बनी झोपड़पट्टियों के पुनर्वसन के लिए भी स्वतंत्र नीति बनाने को लेकर राज्य के मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पात्र झोपड़ा धारकों को उनके मौजूदा निवास के पास ही पुनर्वसन किया जाना चाहिए। बैठक में उपमुख्यमंत्री तथा गृहनिर्माण मंत्री एकनाथ शिंदे, प्रदेश गृहनिर्माण राज्यमंत्री पंकज भोयर, राज्य की मुख्य सचिव सुजाता सौनिक, गृहनिर्माण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव असीम गुप्ता, झोपड़पट्टी पुनर्वसन प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी महेंद्र कल्याणकर आदि उपस्थित थे। Chief Minister launched mobile app for SRA project

    एसआरए खरीदेगी जमीन

    बैठक में एसआरए की इमारतों के लिए जमीन खरीदने का फैसला लिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुंबई समेत बड़े शहरों में पहाड़ों पर काफी झोपड़े बने हुए हैं। ऐसी झोपड़पट्टियां बारिश के दिनों में भूस्खलन और पत्थर गिरने से धोकादायक हो जाते हैं। इसलिए पहाड़ों पर बनी झोपड़पट्टियों के पुनर्वसन के लिए अलग से नीति बनाएं और जरूरत पड़ने पर जमीन भी खरीदें। Chief Minister launched mobile app for SRA project

    दिसंबर तक पूरा होगा बायोमेट्रिक सर्वेक्षण

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि बायोमेट्रिक पद्धति पर आधारित घर-घर सर्वेक्षण का काम दिसंबर तक पूरा हो जाना चाहिए। झोपड़पट्टी के जो घर बंद हैं, ऐसे घरों का रिकॉर्ड तैयार किए जाने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि मुंबई महानगर पालिका के सेवानिवृत्त अधिकारियों का सेल तैयार करें। इसके माध्यम से समूह विकास (क्लस्टर) योजना को गति मिल सकेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि घाटकोपर के रमाबाई आंबेडकर नगर झोपड़पट्टी पुनर्वसन के काम को गति से पूरा किया जाना अतिआवश्यक है। उन्होंने आदेश देते हुए यह भी कहा, कि “समुद्र के पास की जगह का पुनर्वसन के लिए उपयोग करें।” Chief Minister launched mobile app for SRA project

    पुणे के नागरिकों को पुनर्वसन का आदेश

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि पुणे शहर के परियोजना से प्रभावित नागरिकों को स्थायी रूप से पुनर्वसन करें। उन्हें किराया अथवा अन्य विकल्प खोजकर घर देने की व्यवस्था करें। उन्होंने कहा कि पुणे शहर के नदी किनारे बसे झोपड़ा धारकों को बाढ़ का सामना करना पड़ता है। ऐसे झोपड़ों का गृहनिर्माण विभाग की योजना के जरिए पुनर्वसन करें। Chief Minister launched mobile app for SRA project