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  • Mumbai Voter: SIR की लिस्ट हुई जारी, कल Draft Roll; नाम नहीं मिला तो 30 सितंबर तक ऐसे करें Claim

    Mumbai Voter: SIR की लिस्ट हुई जारी, कल Draft Roll; नाम नहीं मिला तो 30 सितंबर तक ऐसे करें Claim

    Mumbai में SIR की ASDD लिस्ट जारी हो गई है। 31 अगस्त को Draft Roll आएगी। नाम नहीं मिला तो 30 सितंबर तक Claim कैसे करें, जानें जरूरी तरीका और तारीखें।

    मुंबई: मुंबई के voters के लिए कल का दिन बेहद important हैं। SIR यानी Special Intensive Revision के तहत Mumbai City और Mumbai Suburban की ASDD voter lists official तौर पर उपलब्ध करा दी गई हैं। अब कल, 31 अगस्त को Maharashtra की Draft Electoral Roll जारी होगी।

    यानी अगर आपको लग रहा है कि SIR के दौरान आपका form collect नहीं हुआ, आपका नाम किसी वजह से ASDD list में आ सकता है या कल draft roll में आपका नाम नहीं दिखता, तो अभी से अपनी entry check करना जरूरी है।

    सबसे राहत की बात यह है कि draft में नाम नहीं मिलने पर मामला वहीं खत्म नहीं होगा। 31 अगस्त से 30 सितंबर तक claims और objections दाखिल करने का मौका रहेगा। Final Electoral Roll 4 नवंबर को जारी होगी।

    जारी SIR की लिस्ट में Mumbai के voters अपना नाम check कर सकते हैं

    BMC ने Mumbai के लिए Assembly Constituency और Part Number-wise ASDD voter lists उपलब्ध कराई हैं। इनमें Mumbai City के AC 178 से 187 और Mumbai Suburban के AC 152 से 177 तक की lists शामिल हैं।

    ASDD का मतलब Absent, Shifted, Dead और Duplicate categories से है। लेकिन ASDD list में नाम आने का मतलब यह नहीं है कि आपका नाम हमेशा के लिए voter list से हट गया है। Draft Roll और उसके बाद claims-objections की प्रक्रिया में eligible voters को अपनी entry को लेकर दावा करने का मौका मिलेगा।

    Mumbai City की SIR list

    Mumbai City के AC 178 से AC 187 तक Part Number-wise ASDD Voter List यहां check करें:

    Mumbai City — ASDD Voter List देखें

    Mumbai Suburban की SIR list

    Mumbai Suburban के AC 152 से AC 177 तक Part Number-wise ASDD Voter List यहां check करें:

    Mumbai Suburban — ASDD Voter List देखें

    पूरी Assembly Constituency Voter List

    अगर आपको अपनी regular constituency-wise voter list check करनी है, तो BMC का यह official page इस्तेमाल कर सकते हैं:

    BMC Assembly Constituency Voter List देखें

    Claim और Objection कहां करें?

    BMC ने claims और objections के लिए अलग official section भी दिया है:

    BMC Claims & Objections page देखें

    कल 31 अगस्त को Draft Voter Roll आएगी

    आज जारी हुई ASDD list और कल आने वाली Draft Electoral Roll को एक ही चीज नहीं समझना चाहिए।

    ASDD list में वे records दिख सकते हैं जिनके enumeration forms verification के दौरान collect नहीं हो पाए या जिन्हें संबंधित categories में रखा गया है। वहीं 31 अगस्त को पूरी SIR Draft Electoral Roll सामने आएगी।

    यही draft देखकर voter को सबसे पहले यह check करना होगा कि उसका नाम electoral roll में मौजूद है या नहीं।

    Election Commission ने Maharashtra के लिए revised schedule जारी करते हुए Draft Roll की तारीख 31 अगस्त तय की है। Claims और objections 31 अगस्त से 30 सितंबर तक लिए जाएंगे और notice/disposal की प्रक्रिया 29 अक्टूबर तक चलेगी। Final roll 4 नवंबर को आएगी।

    36 लाख से ज्यादा Mumbai records पर क्यों है नजर?

    SIR के दौरान Maharashtra में करीब 2.07 करोड़ enumeration forms uncollectable category में बताए गए हैं। इनमें Mumbai Suburban के करीब 26.63 लाख और Mumbai City के करीब 9.52 लाख forms शामिल हैं। दोनों को मिलाकर आंकड़ा करीब 36.15 लाख बैठता है।

    लेकिन इसे सीधे “36 लाख voters के नाम कट गए” समझना सही नहीं होगा। यह uncollectable forms का आंकड़ा है। Draft Roll के बाद eligible voters को claim और objection का मौका दिया गया है।

    अगर कल Draft Roll में नाम नहीं मिला तो क्या करें?

    सबसे पहले घबराएं नहीं और 30 सितंबर की deadline याद रखें।

    अगर आपका नाम Draft Electoral Roll में नहीं है, तो inclusion के लिए Form 6 के जरिए आवेदन किया जा सकता है। अगर voter list में नाम, address या दूसरी details में correction चाहिए तो Form 8 इस्तेमाल होता है। किसी गलत inclusion पर objection के लिए Form 7 का इस्तेमाल किया जाता है।

    समस्याक्या करें
    Draft Roll में नाम नहीं हैForm 6
    पहली बार voter बनना हैForm 6
    नाम/पता/details में correctionForm 8
    किसी गलत नाम पर objectionForm 7

    Claims और objections की पूरी प्रक्रिया के दौरान संबंधित ERO/BLO से भी मदद ली जा सकती है।

    Mumbai में redevelopment वालों को खास ध्यान देना होगा

    Mumbai में redevelopment की वजह से बड़ी संख्या में families temporary तौर पर दूसरे address पर रहती हैं। ऐसे voters को अपने voter record की स्थिति जरूर check करनी चाहिए।

    अगर आपका original घर redevelopment में है और आप फिलहाल दूसरे address पर रह रहे हैं, तो अपने BLO या ERO से यह verify करें कि voter record में आपका नाम, address और polling part सही दर्ज है या नहीं।

    सिर्फ temporary तौर पर घर बदलने का मतलब यह नहीं है कि voter का अधिकार खत्म हो गया।

    नाम check करने के साथ polling booth भी देखें

    इस बार सिर्फ voter list में नाम देखना ही काफी नहीं होगा। Polling stations का rationalisation भी किया गया है।

    Maharashtra में polling stations की संख्या 1,00,253 से घटकर 1,00,216 हुई है। यानी net 37 polling stations कम हुए हैं। यह बदलाव draft electoral roll तैयार करने की प्रक्रिया का हिस्सा है।

    इसलिए 31 अगस्त को नाम check करने के बाद अपना polling station और part details भी दोबारा verify करना बेहतर रहेगा।

    18 साल के होने वाले युवाओं के लिए भी मौका

    SIR की claims और objections window सिर्फ पुराने voters के लिए नहीं है। Eligible first-time voters भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत Form 6 के जरिए voter registration के लिए आवेदन कर सकते हैं। Maharashtra के revised SIR schedule में 31 अगस्त से 30 सितंबर तक claims और objections की window रखी गई है।

    SIR के नाम पर आने वाले fraud से भी बचें

    Voter list update करने के नाम पर अगर कोई unknown WhatsApp message, SMS, link या APK भेजता है तो सावधान रहें।

    SIR के नाम पर किसी से OTP, UPI PIN, bank details या दूसरी sensitive information share न करें। किसी unknown app को install करने से भी बचें।

    Voter-related जानकारी और application के लिए official Election Commission और Maharashtra election authorities के channels का इस्तेमाल करना सबसे सुरक्षित तरीका है।

    30 सितंबर की deadline सबसे जरूरी

    अब Mumbai voters के लिए sequence बिल्कुल साफ है:

    जारी SIR की ASDD list में अपना नाम check करें। कल 31 अगस्त को Draft Electoral Roll में अपनी entry verify करें। अगर नाम नहीं है या details में गलती है, तो 30 सितंबर तक claim, inclusion या correction की प्रक्रिया पूरी करें।

    इसके बाद claims और objections पर notice और disposal की प्रक्रिया 29 अक्टूबर तक चलेगी। Final Electoral Roll 4 नवंबर 2026 को जारी होगी।

    यानी SIR list सिर्फ जानकारी देखने के लिए नहीं है। यह आपके लिए अपनी voter entry को समय रहते check करने का पहला मौका है। कल Draft Roll आने के बाद अगर कोई गड़बड़ी दिखती है, तो 30 सितंबर तक उसे ठीक कराने का मौका आपके पास रहेगा।

  • नेपाल बाढ़ की खौफनाक कहानी: Mumbai लौटे 37 यात्रियों ने सुनाई आपबीती, 60 महाराष्ट्रवासी अब भी लापता

    नेपाल बाढ़ की खौफनाक कहानी: Mumbai लौटे 37 यात्रियों ने सुनाई आपबीती, 60 महाराष्ट्रवासी अब भी लापता

    नेपाल बाढ़ से Mumbai लौटे 37 यात्रियों ने खौफनाक आपबीती सुनाई। महाराष्ट्र के 404 लोगों में 338 सुरक्षित, लेकिन 60 अब भी लापता हैं। जानिए पूरा अपडेट।

    मुंबई: नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ के बाद फंसे महाराष्ट्र के यात्रियों की घर वापसी शुरू हो गई है, लेकिन इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा सवाल अभी भी बना हुआ है। Mumbai के 37 यात्री शनिवार शाम सुरक्षित लौट आए और एयरपोर्ट पर परिवार से मिलते ही कई लोगों की आंखों से आंसू निकल पड़े। यात्रियों ने कहा कि उन्हें लगा जैसे भगवान ने उनकी जान बचा ली।

    लेकिन दूसरी तरफ महाराष्ट्र के 60 यात्री और तीर्थयात्री अब भी trace नहीं हो पाए हैं।

    महाराष्ट्र सरकार के मुताबिक Nepal-Tibet इलाके में फंसे राज्य के 404 लोगों में से 338 से संपर्क हो चुका है और उनकी safety confirm की गई है। 60 लोगों से अभी संपर्क नहीं हो पाया है। ऐसे में 37 यात्रियों की वापसी के साथ राहत जरूर मिली है, लेकिन परिवारों की चिंता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।

    Mumbai लौटे 37 यात्रियों ने सुनाई खौफनाक आपबीती

    nepal-floods-mumbai-news

    शनिवार शाम Mumbai एयरपोर्ट पहुंचे यात्रियों ने बताया कि Nepal-Tibet इलाके में हालात कितनी तेजी से बदले थे। इनमें कई लोग Kailash Mansarovar यात्रा पर गए थे।

    एक यात्री ने बताया कि उनका group 26 अगस्त को Saga इलाके में था। इसी दौरान उन्हें flash flood से हुई तबाही का अंदाजा हुआ। लौटने में तय schedule से करीब एक दिन की देरी हुई, लेकिन मुश्किल हालात के बावजूद China और Nepal के बीच coordination से उनकी वापसी का रास्ता आगे बढ़ा।

    यात्रियों ने कहा कि वे सुरक्षित Mumbai पहुंच पाए, यह उनके लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था। परिवार से मिलने के बाद कई यात्री भावुक हो गए।

    एक दिन और रुकते तो हालात और बिगड़ सकते थे

    लौटे यात्रियों की बातों में सबसे ज्यादा डर उस समय का था, जब उन्हें flood की असली तबाही का पता चला।

    कुछ यात्रियों के मुताबिक अगर उनका group एक दिन और उस इलाके में रुक जाता तो वे भी बेहद खतरनाक स्थिति में फंस सकते थे। यही वजह है कि Mumbai पहुंचने के बाद यात्रियों ने अपनी सुरक्षित वापसी को भगवान की कृपा बताया।

    यात्रा का रास्ता आसान नहीं था। खराब मौसम, damaged roads और border इलाके की मुश्किल स्थिति के बीच यात्रियों को अलग-अलग चरणों में आगे बढ़ना पड़ा।

    Nagpur के 102 यात्रियों की भी घर वापसी

    Mumbai के 37 यात्रियों के साथ महाराष्ट्र के दूसरे groups की भी वापसी हुई है। करीब 102 Nagpur pilgrims Kathmandu में फंसने के बाद वापस लौटे। चार अन्य लोग इससे पहले Nagpur पहुंच चुके थे। इस तरह 143 से ज्यादा stranded Maharashtra residents के सुरक्षित भारत पहुंचने की जानकारी सामने आई है।

    इन यात्रियों की वापसी से परिवारों को बड़ी राहत मिली है, लेकिन इससे 60 untraceable लोगों को लेकर सवाल और ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है।

    आखिर ये 60 महाराष्ट्रवासी कहां हैं?

    State government के latest आंकड़े के मुताबिक 404 Maharashtra residents में से 338 लोगों से संपर्क हो चुका है, जबकि 60 अभी untraceable हैं। इनमें Mumbai-based Richa Tours के जरिए Nepal जाने वाला group भी शामिल है।

    शुरुआती reports में 66 लोगों के contact से बाहर होने की बात सामने आई थी। बाद के verification में संख्या 60 बताई गई। इसलिए फिलहाल latest state-level figure 60 है।

    यहां एक बात साफ समझना जरूरी है—60 लोगों को अभी “लापता” कहा जा रहा है, लेकिन उनकी मौत की कोई पुष्टि नहीं हुई है। Official स्थिति यही है कि authorities अभी उनकी location या safety confirm नहीं कर पाई हैं।

    नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर उस दिन आखिर हुआ क्या था?

    26 अगस्त को Rasuwa इलाके में अचानक तेज flood और debris flow आया। Bhote Koshi नदी के आसपास पानी और मलबे का सैलाब इतनी तेजी से बढ़ा कि सड़कें, bridges और border infrastructure बुरी तरह प्रभावित हो गए।

    Rasuwagadhi और Timure जैसे इलाके इस disaster की चपेट में आए। यही corridor Nepal को Tibet से जोड़ता है और Kailash Mansarovar जाने वाले भारतीय यात्रियों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।

    बाढ़ का असर इतना बड़ा था कि सामान्य road connectivity टूट गई और कई tourist तथा pilgrimage groups रास्ते में फंस गए।

    Tibet side पर भी बड़ा संकट

    nepal-floods-mumbai-return

    यह disaster सिर्फ Nepal तक सीमित नहीं रहा। China के Tibet क्षेत्र में भी भारी नुकसान हुआ है।

    30 अगस्त तक China की तरफ 16 मौतों और 546 लोगों के missing होने की जानकारी सामने आई है। इनमें 261 foreign nationals भी शामिल हैं। इसलिए Nepal में लौटे कुछ यात्रियों की राहत भरी कहानी के बावजूद Tibet side पर rescue operation अभी भी जारी है।

    Nepal में मौत का आंकड़ा 734 पार

    नेपाल में तबाही का scale भी लगातार बढ़ रहा है। 30 अगस्त के latest आंकड़ों के मुताबिक Nepal में 734 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और 2,498 लोग अब भी missing हैं।

    Nepal और Tibet के आंकड़े मिलाने पर मौतों का आंकड़ा 750 से ज्यादा और missing लोगों की संख्या 3,000 से ज्यादा हो चुकी है। आंकड़े लगातार update हो रहे हैं क्योंकि कई प्रभावित इलाकों तक rescue teams को पहुंचने में अभी भी मुश्किल आ रही है।

    Rescue operation अभी खत्म नहीं हुआ

    बाढ़ के बाद search और rescue operation लगातार चल रहा है। हालात इतने मुश्किल हैं कि India, China और दूसरे देशों की specialised teams भी मदद के लिए पहुंची हैं।

    India ने tunnel rescue के लिए 11-member specialised reconnaissance team भेजी है। Nepal में hydropower projects के tunnels में भी workers के फंसे होने की आशंका के चलते rescue operation चल रहा है।

    यानी यह सिर्फ tourists को वापस लाने की कोशिश नहीं है। कई प्रभावित इलाकों में लोगों, workers और infrastructure को बचाने का बड़ा operation चल रहा है।

    खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है

    सबसे बड़ी चिंता यह है कि flood के कई दिन बाद भी खतरा खत्म नहीं हुआ है।

    Bhotekoshi नदी में पानी का level फिर बढ़ने की warning जारी की गई है। प्रभावित इलाकों में पहले से damaged roads और bridges के बीच नए flood और landslide का खतरा बना हुआ है। इसी वजह से rescue teams को भी बेहद सावधानी के साथ काम करना पड़ रहा है।

    Kailash Mansarovar Yatra पर क्या असर पड़ेगा?

    इस disaster का सीधा असर Kailash Mansarovar यात्रा पर पड़ सकता है।

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    Rasuwagadhi-Kerung corridor इस यात्रा के लिए महत्वपूर्ण रास्ता है और flood में इस इलाके का infrastructure बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इसलिए इस route से यात्रा करने वालों के लिए पुराने schedule को final मानना सही नहीं होगा।

    जिन यात्रियों ने Nepal के रास्ते Kailash Mansarovar की booking कर रखी है, उन्हें यात्रा से पहले अपने operator से current route status, border crossing और road connectivity की पुष्टि करनी चाहिए।

    क्या अभी Nepal जाना safe है?

    पूरे Nepal को unsafe कहना सही नहीं होगा। लेकिन Rasuwa, Rasuwagadhi, Timure और Tibet border की तरफ के flood-affected इलाकों को सामान्य tourist route मानकर यात्रा करना फिलहाल जोखिम भरा हो सकता है।

    Road damage, landslide, अचानक बढ़ता पानी और कमजोर infrastructure की वजह से ground situation तेजी से बदल सकती है।

    इसलिए अगर किसी की Nepal या Kailash यात्रा आने वाले दिनों में है, तो booking के पुराने itinerary के बजाय latest official clearance और route status देखकर ही आगे बढ़ना बेहतर होगा।

    अगर आपका अपना Nepal में फंसा है तो ये नंबर रखें

    अगर परिवार का कोई सदस्य Nepal-Tibet क्षेत्र में है और उससे संपर्क नहीं हो रहा है, तो Indian Embassy Kathmandu की emergency helplines पर संपर्क किया जा सकता है।

    Indian Embassy के नंबर:

    +977 985 131 6807
    +977 970 910 7500
    +977 981 032 6117

    Embassy ने flood-related assistance के लिए email भी जारी किया है: eoikathmandufloodsupport@gmail.com

    Embassy Nepal authorities के साथ मिलकर Indian nationals की safety और identification को लेकर coordination कर रही है।

    अब नजर 60 लोगों और बाकी safe यात्रियों पर

    Mumbai के 37 यात्रियों का घर लौटना बड़ी राहत है। Nagpur के यात्रियों की वापसी से भी Maharashtra के कई परिवारों की चिंता कम हुई है।

    लेकिन इस disaster की कहानी अभी खत्म नहीं हुई है।

    अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि Maharashtra के बाकी 60 untraceable लोगों की location कब confirm होती है, Tibet side में safe बताए गए भारतीयों की वापसी कब पूरी होती है और Nepal-Tibet का damaged route कब सामान्य होता है।

    जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिलते, Mumbai एयरपोर्ट पर लौटे यात्रियों की राहत भरी तस्वीर के पीछे कई परिवारों की चिंता बनी रहेगी।

  • दहिसर में बाइक चोरी गैंग का पर्दाफाश: 4 गिरफ्तार, 8 बाइक बरामद; 24 बाइक के पार्ट्स मिले, एक रेडियम स्टिकर से खुला पूरा राज

    दहिसर में बाइक चोरी गैंग का पर्दाफाश: 4 गिरफ्तार, 8 बाइक बरामद; 24 बाइक के पार्ट्स मिले, एक रेडियम स्टिकर से खुला पूरा राज

    दहिसर पुलिस ने बाइक चोरी गैंग के 4 आरोपियों को पकड़ा। 8 चोरी की बाइक मिलीं, 24 बाइक के नंबर प्लेट-इंजन-पार्ट्स जब्त हुए। जानिए CCTV से कैसे खुला राज। अब क्या?

    मुंबई: दहिसर में बाइक चोरी के एक केस की जांच करते-करते पुलिस ऐसे नेटवर्क तक पहुंच गई, जहां सिर्फ एक चोरी की बाइक का सुराग नहीं मिला, बल्कि उत्तर मुंबई में दर्ज 8 मोटरसाइकिल चोरी के मामले भी खुल गए। दहिसर पुलिस ने इस कार्रवाई में 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। तलाशी के दौरान 8 चोरी की मोटरसाइकिलें मिलीं, जबकि 24 मोटरसाइकिलों से जुड़े नंबर प्लेट, चेसिस, इंजन और दूसरे पार्ट्स भी जब्त किए गए हैं।

    लेकिन इस पूरे केस में सबसे दिलचस्प बात यह है कि पुलिस को आरोपियों तक पहुंचाने वाला सुराग कोई बड़ा CCTV चेहरा या नंबर प्लेट नहीं था। एक खास रेडियम स्टिकर ने पूरी कहानी की दिशा बदल दी।

    एक बाइक चोरी हुई और CCTV में दिखा पूरा खेल

    मामला दहिसर ईस्ट के अशोकवन इलाके का है। शिकायतकर्ता ने अपनी Hero Honda Super Splendor मोटरसाइकिल नंबर MH 02 AZ 4549 को 20 अगस्त 2026 की सुबह करीब 10 बजे शिववल्लभ रोड पर पार्क किया था। 21 अगस्त की रात करीब 9 बजे के आसपास जब वह वापस आए तो बाइक वहां नहीं थी।

    शिकायत के बाद दहिसर पुलिस स्टेशन में गु.र.क्र. 1244/2026 के तहत BNS की धारा 303(2) में केस दर्ज किया गया। इसके बाद सहायक पुलिस निरीक्षक हेमंत गिते और उनकी क्राइम डिटेक्शन टीम ने आसपास के CCTV फुटेज खंगालने शुरू किए।

    फुटेज में तीन लोग एक बाइक पर सवार होकर चोरी की बाइक को धक्का मारते हुए ले जाते दिखाई दिए। यहीं से जांच में एक ऐसा clue मिला, जिसने पुलिस को आगे का रास्ता दिखाया।

    रेडियम स्टिकर बना गैंग तक पहुंचने का सबसे बड़ा सुराग

    CCTV में आरोपियों के साथ चल रही बाइक पर एक खास रेडियम स्टिकर दिखाई दिया। पुलिस ने इसी पहचान के आधार पर उस बाइक को ट्रेस करना शुरू किया।

    जांच आगे बढ़ी तो वही बाइक दहिसर ईस्ट के साईबाबा मंदिर रोड इलाके में मिली। इसके बाद पुलिस को आरोपियों के आनंद नगर परिसर में होने की जानकारी मिली और जांच धीरे-धीरे बाइक चोरी करने वाले लोगों तक पहुंच गई।

    यानी एक चोरी हुई बाइक से शुरू हुई जांच में CCTV, एक रेडियम स्टिकर और दूसरी बाइक की पहचान ने पूरा नेटवर्क खोलने में अहम भूमिका निभाई।

    सिर्फ बाइक चोरी नहीं, उसके बाद भी चलता था पूरा खेल

    पूछताछ में पुलिस के सामने कथित तौर पर एक और अहम pattern आया। आरोपी ऐसी मोटरसाइकिलों पर नजर रखते थे जो लंबे समय से एक ही जगह पार्क रहती थीं। मौका मिलने पर बाइक चोरी की जाती और बाद में उसे एक स्क्रैप डीलर को बेच दिया जाता था।

    पुलिस के मुताबिक, स्क्रैप डीलर चोरी की बाइक को खोलकर उसके अलग-अलग पार्ट्स करता और उन्हें भंगार में बेचता था। इसी कड़ी में पुलिस ने स्क्रैप गोदाम पर कार्रवाई की, जहां से 8 चोरी की मोटरसाइकिलों के साथ 24 मोटरसाइकिलों से जुड़े नंबर प्लेट, इंजन, चेसिस और दूसरे पार्ट्स जब्त किए गए।

    एक नजर में पूरी कार्रवाई

    पुलिस कार्रवाईसंख्या
    गिरफ्तार आरोपी4
    सामने आए मोटरसाइकिल चोरी के केस8
    बरामद चोरी की मोटरसाइकिलें8
    जिन मोटरसाइकिलों से जुड़े पार्ट्स मिले24
    संबंधित पुलिस स्टेशन4

    यहां एक बात साफ समझना जरूरी है: पुलिस ने 24 पूरी मोटरसाइकिलें बरामद नहीं की हैं। 8 चोरी की बाइक मिली हैं, जबकि 24 मोटरसाइकिलों से जुड़े नंबर प्लेट, चेसिस, इंजन और दूसरे पार्ट्स जब्त किए गए हैं।

    dahisar-bike-theft-gang-busted-8-bikes-24-parts
    दहिसर पुलिस की इनवेस्टिगेशन टीम के साथ गिरफ्तार आरोपियों की तस्वीर

    8 चोरी के मामले किन इलाकों से जुड़े?

    जांच में उत्तर मुंबई के अलग-अलग पुलिस स्टेशनों में दर्ज कुल 8 मोटरसाइकिल चोरी के मामले detect हुए हैं।

    पुलिस स्टेशनसामने आए केस
    दहिसर4
    MHB2
    कस्तूरबा1
    मालवणी1
    कुल8

    इससे साफ है कि जांच का दायरा सिर्फ उस एक बाइक चोरी तक सीमित नहीं रहा, जिससे केस की शुरुआत हुई थी।

    कौन-कौन गिरफ्तार हुआ?

    पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रोनीत भास्कर शेट्टी, उम्र 23 वर्ष, दहिसर पूर्व; पंकज मंगलप्रसाद गुप्ता, उम्र 20 वर्ष, केतकीपाड़ा, दहिसर पूर्व; आशुतोष संतोष दुबे, उम्र 20 वर्ष, धारखाड़ी रोड, दहिसर पूर्व; और पिंटू छोटेलाल गुप्ता, उम्र 29 वर्ष, केतकीपाड़ा, दहिसर पूर्व के रूप में हुई है। पिंटू छोटेलाल गुप्ता पर स्क्रैप गोदाम से जुड़ी भूमिका होने की बात सामने आई है।

    इसके अलावा 17 साल 8 महीने के एक नाबालिग बालक को भी इस मामले में पकड़ा गया था, जिसे बाद में उसके माता-पिता की देखरेख में सौंप दिया गया। उसकी पहचान सार्वजनिक नहीं की जा रही है।

    अब इस कार्रवाई का असर क्या होगा?

    इस कार्रवाई का सबसे बड़ा असर यह है कि एक ही जांच में उत्तर मुंबई के 8 बाइक चोरी के मामलों की कड़ी सामने आई है। साथ ही 24 मोटरसाइकिलों से जुड़े नंबर प्लेट, इंजन, चेसिस और दूसरे पार्ट्स मिलने से पुलिस के पास आगे की जांच के लिए अहम material आया है।

    Borivali में ‘भूत’ चला रहे थे ऑटो? RTO ने किया ज़ब्त

    पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि आरोपियों का इससे ज्यादा चोरी की गाड़ियों या दूसरे लोगों से कोई connection है या नहीं। यानी मामला 4 गिरफ्तारियों पर खत्म नहीं हुआ है और आगे कुछ और वारदातों का खुलासा होने की संभावना की जांच जारी है।

    अगर आपकी बाइक भी चोरी हुई है तो क्या करें?

    अगर आपकी मोटरसाइकिल पहले चोरी हुई है, खासकर दहिसर, MHB, कस्तूरबा या मालवणी इलाके से, तो अपने वाहन का registration number, chassis number और engine number संभालकर रखें। Mumbai Police की official “Stolen & Unclaimed Vehicles” सुविधा में registration, chassis और engine number से वाहन की जानकारी check करने का option उपलब्ध है।

    Mumbai Police – Stolen & Unclaimed Vehicles

    अगर आपकी बाइक इस केस से जुड़ी हो सकती है, तो खुद किसी बरामद वाहन या पार्ट को claim करने की कोशिश करने के बजाय संबंधित पुलिस स्टेशन से संपर्क करना ज्यादा सही रहेगा।

    बाइक मालिकों के लिए इस केस से क्या सीख?

    इस केस में पुलिस के सामने आया pattern यह है कि लंबे समय से एक ही जगह खड़ी रहने वाली बाइकें आरोपियों की नजर में थीं। इसलिए बाइक को संभव हो तो secure parking या अच्छी रोशनी वाली जगह पर पार्क करना, steering lock के साथ अतिरिक्त anti-theft lock इस्तेमाल करना और वाहन की पहचान से जुड़ी जानकारी सुरक्षित रखना जरूरी है।

    Mumbai Police भी secure parking, अच्छी रोशनी वाली जगह और steering/clutch/brake lock जैसे सुरक्षा उपायों की सलाह देती है। वाहन का नंबर कांच पर etch कराने जैसी पहचान संबंधी सावधानी भी पुलिस की safety guidance में शामिल है।

    कार्रवाई के पीछे पूरी पुलिस टीम

    यह कार्रवाई अपर पुलिस आयुक्त, उत्तर प्रादेशिक विभाग शशिकुमार मीना, पुलिस उपायुक्त उत्तर परिमंडल-03 गजानन राजमाने, सहायक पुलिस आयुक्त दहिसर विभाग जयराज रणवरे, वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक दहिसर पुलिस स्टेशन सर्जेराव पाटील और पुलिस निरीक्षक (गुन्हे) मारुती सांगळे के मार्गदर्शन में हुई।

    गुन्हे प्रकटीकरण अधिकारी सहायक पुलिस निरीक्षक हेमंत गिते के साथ पुलिस हवालदार अमोल जाधव, पुलिस हवालदार अमित पाटील, पुलिस हवालदार शाहनवाज सय्यद, पुलिस सिपाही सुशांत जाधव, कपिल चौधरी, महेंद्र महाले, ओमकार राणे और तकनीकी मदद देने वाले पुलिस हवलदार सागर पवार ने भी कार्रवाई में अहम भूमिका निभाई।

    फिलहाल दहिसर पुलिस की जांच जारी है। अब नजर इस बात पर है कि जब्त किए गए पार्ट्स और दूसरे सुरागों से क्या चोरी की और वारदातें या इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोग सामने आते हैं।

  • Navi Mumbai में 3,404 SIR फॉर्म मिलने से हड़कंप, 5 BLO सस्पेंड; BJP युवा नेता पर FIR

    Navi Mumbai में 3,404 SIR फॉर्म मिलने से हड़कंप, 5 BLO सस्पेंड; BJP युवा नेता पर FIR

    Navi Mumbai के Kharghar में 3,404 original SIR voter forms private photocopy shop से मिले। 5 BLO सस्पेंड और BJP youth leader पर FIR दर्ज हुई।

    मुंबई: Navi Mumbai के Kharghar में SIR यानी Special Intensive Revision को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। Sector 19 की एक private photocopy shop से 3,404 original भरे हुए SIR forms मिलने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया। जांच के बाद पांच Booth Level Officers (BLOs) को suspend कर दिया गया है, जबकि Suraj Patil के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।

    मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि बरामद forms blank नहीं थे। अधिकारियों के मुताबिक इनमें voters की photographs, personal details और BLOs के official signatures जैसी जानकारी थी। ये forms 188-Panvel Assembly Constituency के 11 polling stations से जुड़े थे। इनमें पांच polling stations से 100 से ज्यादा forms मिले, जबकि बाकी छह से एक-एक form मिलने की जानकारी है।

    Kharghar की photocopy shop में कैसे खुला मामला?

    27 अगस्त को SIR forms की photocopy किए जाने की शिकायत के बाद Election Department के अधिकारी Kharghar Sector 19 पहुंचे। वहां Suraj Patil के पास बड़ी संख्या में completed SIR forms मिले। अधिकारियों ने documents verify किए तो वे genuine और original पाए गए।

    बरामद forms को Election Commission के logo वाले bags में रखा गया था। इन्हें पांच bags में pack कर seal किया गया और police के हवाले किया गया। बड़ी संख्या में forms होने के कारण उनकी गिनती electoral-roll part numbers के हिसाब से record की गई।

    यहीं से इस मामले की जांच का सबसे अहम हिस्सा शुरू होता है—official custody में रहने वाले हजारों original voter forms private photocopy centre तक पहुंचे कैसे?

    पांच BLO सस्पेंड, जांच शुरू

    Raigad Collector Kishan Jawale के मुताबिक forms की verification के बाद पाया गया कि ये संबंधित BLOs की जिम्मेदारी में थे। इसी आधार पर पांच BLOs को suspend किया गया है और departmental inquiry शुरू की गई है।

    मिली जानकारी के मुताबिक suspended BLOs में Sulochana Mane, Prashant Mhatre और Rahul Bhagat नाम के तीन private-company data-entry operators भी शामिल हैं। इनके अलावा दो अन्य BLOs पर भी action हुआ है।

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    खबर से संबंधित फाइल फोटो

    इस मामले की जांच के लिए Panvel Deputy Municipal Commissioner Nanasaheb Kamathe और Assistant Electoral Registration Officer वाली two-member committee भी बनाई गई है।

    Suraj Patil पर FIR, BJP ने किया किनारा

    Suraj Patil को Shiv Sena (UBT) नेताओं ने BJP youth wing/BJYM से जुड़ा office-bearer बताया है। उनके पास forms मिलने के बाद उनके खिलाफ FIR दर्ज की गई। BJP ने इस मामले में अपने workers के involvement से इनकार किया है।

    Police ने Patil को पूछताछ के लिए detain किया, notice दिया और legal procedure के तहत release किया। उनके खिलाफ BNS Section 314 और Representation of the People Act Section 128 के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले की जांच API Pradip Dwarka Navnath Avhad कर रहे हैं।

    UBT का आरोप, BJP का इनकार

    घटना के बाद Shiv Sena (UBT) ने SIR forms के private लोगों तक पहुंचने पर सवाल उठाए। UBT नेताओं ने आरोप लगाया कि BJP से जुड़े व्यक्ति के पास इतने forms मिलना गंभीर मामला है।

    वहीं BJP नेता Nitin Patil ने party workers का इस मामले से कोई संबंध नहीं होने की बात कही। NCP (SP) MLA Rohit Pawar ने भी सिर्फ BLO suspension को पर्याप्त नहीं बताते हुए पूरे मामले की जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर action की मांग की है।

    असली चिंता: voter के data का क्या होगा?

    SIR form में voter की पहचान और electoral-roll verification से जुड़ी जानकारी होती है। Kharghar में मिले forms original और completed थे, इसलिए उनकी private photocopying ने voter information की handling और security को लेकर चिंता बढ़ाई है।

    हालांकि अभी तक किसी voter के data के misuse होने की पुष्टि नहीं हुई है। जांच में यह पता चलना बाकी है कि कुल कितनी photocopies बनीं, क्या forms की digital copies भी तैयार हुईं और material private shop तक किसके जरिए पहुंचा।

    Maharashtra SIR के बीच सामने आया मामला

    Kharghar की घटना ऐसे समय सामने आई है जब Maharashtra में SIR की बड़ी exercise चल रही है। राज्य में करोड़ों voters के forms की verification और electoral-roll revision किया जा रहा है। इसी दौरान forms की custody और transparency को लेकर यह मामला अब चुनावी प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर रहा है।

    Maharashtra CEO की official website पर SIR 2026 से जुड़ी voter services, FAQs, ASDD list और BLO-related information उपलब्ध है। Voter अपना electoral record official ECI portal पर भी verify कर सकते हैं। (ceoelection.maharashtra.gov.in)

    Voters के लिए जरूरी बात

    अगर आपने SIR form भरा है तो अपना नाम और electoral details official voter services पर जरूर check करें। किसी अनजान व्यक्ति को SIR के नाम पर OTP, banking details या अन्य sensitive information न दें। SIR के नाम पर cyber-fraud को लेकर Mumbai में भी लोगों को target किए जाने की reports सामने आ चुकी हैं।

    फिलहाल Kharghar मामले में पांच BLO suspend हैं, एक व्यक्ति के खिलाफ FIR दर्ज है और departmental तथा police investigation जारी है। जांच अब यह साफ करेगी कि 3,404 original SIR forms private photocopy shop तक कैसे पहुंचे और उनकी photocopying के पीछे असल में क्या उद्देश्य था।

  • Bombay HC की FDA को फटकार, MCA के 5 रेस्टोरेंट फिर खुलेंगे; 88% compliance के बाद भी क्यों अटका था मामला?

    Bombay HC की FDA को फटकार, MCA के 5 रेस्टोरेंट फिर खुलेंगे; 88% compliance के बाद भी क्यों अटका था मामला?

    Bombay HC की फटकार के बाद MCA के 5 रेस्टोरेंट फिर खुलेंगे। नई जांच में 88% food safety compliance मिला, लेकिन Shirke मुद्दे पर आगे की कार्रवाई अभी भी बाकी है।

    मुंबई: बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र के Food and Drug Administration (FDA) के काम करने के तरीके पर शनिवार को कड़ी नाराजगी जताई। मामला मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) के BKC स्थित पांच रेस्टोरेंट के food licences suspend किए जाने का है। ताजा inspection में इन रेस्टोरेंट को food safety rules के 88% मानकों के अनुरूप पाया गया, इसके बावजूद FDA suspension हटाने को तैयार नहीं था।

    हाईकोर्ट की सख्ती के बाद FDA ने पांचों रेस्टोरेंट के licences का suspension वापस लेने की बात कही। कोर्ट ने अधिकारियों को यह भी चेतावनी दी कि अगर उसके निर्देशों की अनदेखी जारी रही तो contempt action किया जा सकता है।

    कौन-कौन से 5 रेस्टोरेंट फिर खुलेंगे?

    मामला MCA के Sharad Pawar Indoor Cricket Academy परिसर में चल रहे इन पांच outlets का है:

    रेस्टोरेंटजगह
    Permit RoomMCA परिसर, BKC
    PavilionMCA परिसर, BKC
    MediterraneanMCA परिसर, BKC
    Oriental SwingMCA परिसर, BKC
    Clubway & Pastry CounterMCA परिसर, BKC

    इन सभी outlets के licences MCA के नाम पर थे, जबकि FDA के मुताबिक इनका operation M/s Shirke Infrastructure कर रहा था।

    आखिर FDA ने 21 अगस्त को licence क्यों suspend किया था?

    इस कहानी की शुरुआत 20 अगस्त की FDA inspection से हुई थी। जांच के दौरान food storage और kitchen hygiene से जुड़े कई violations सामने आए थे।

    रिपोर्ट में refrigerator में ice buildup, गंदे refrigerator door gaskets, temperature calibration से जुड़ी दिक्कत, kitchen area में गंदा और slippery floor, dirty equipment और containers जैसी कमियां बताई गई थीं।

    इसके अलावा कुछ food material के खराब होने, raw material की proper checking नहीं होने, frozen food को unhygienic तरीके से thaw करने और edible oil की नियमित जांच नहीं करने जैसी बातें भी सामने आई थीं।

    कुछ outlets में food-contact packaging से जुड़े जरूरी certificates नहीं मिले। Oriental Swing में ceiling plaster और lighting से जुड़ी समस्याएं भी बताई गई थीं। पिछली सुनवाई में kitchen में cockroaches और flies मिलने का मुद्दा भी कोर्ट के सामने आया था।

    इसी inspection के अगले दिन, यानी 21 अगस्त को पांचों food licences suspend कर दिए गए।

    फिर मामला सिर्फ hygiene का नहीं रहा

    MCA ने FDA की कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान एक दूसरा बड़ा सवाल सामने आया।

    FDA का कहना था कि food licences MCA के नाम पर हैं, लेकिन restaurants को M/s Shirke Infrastructure operate कर रहा था। FDA ने इसी arrangement को भी licence से जुड़ा अहम मुद्दा माना।

    यहीं से मामला सिर्फ kitchen hygiene से निकलकर इस सवाल तक पहुंच गया कि जिस परिसर का food licence एक संस्था के नाम पर है, वहां food business किसी दूसरी entity के जरिए चलाया जा सकता है या नहीं।

    25 अगस्त की सुनवाई में हाईकोर्ट ने FDA को इस contractual arrangement और दोनों पक्षों के बीच संबंध को ज्यादा practical तरीके से देखने और fresh inspection कराने का रास्ता दिया था।

    Fresh inspection में 88% compliance ने बदली कहानी

    हाईकोर्ट के निर्देश के बाद 27 अगस्त को fresh inspection की गई। इस बार पांचों eateries को food safety rules के 88% मानकों का पालन करते हुए पाया गया।

    यहीं से FDA के सामने बड़ा सवाल खड़ा हुआ।

    अगर fresh inspection में establishments ने compliance में काफी सुधार कर लिया है, तो क्या पुराने suspension को उसी तरह जारी रखा जा सकता है?

    FDA ने शुरुआत में suspension बनाए रखने का रुख लिया। उसका कहना था कि MCA और Shirke Infrastructure के बीच contractual arrangement को लेकर भी सवाल बाकी हैं।

    लेकिन हाईकोर्ट ने इस approach को स्वीकार नहीं किया।

    HC ने FDA से पूछा- इतनी जल्दबाजी क्यों?

    शनिवार की सुनवाई में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने FDA के रवैये पर बेहद कड़ी टिप्पणी की।

    Acting Chief Justice Ravindra Ghuge और Justice Gautam Ankhad की बेंच ने कहा कि विभाग ने court के पहले के निर्देश को समझने और उस पर properly apply करने के बजाय “pedantic” यानी बहुत rigid approach अपनाई, जबकि स्थिति में “pragmatic” यानी practical तरीके की जरूरत थी।

    कोर्ट ने FDA की “undue haste” पर भी सवाल उठाया और कहा कि कानून का पूरा analysis किए बिना आदेश क्यों जारी किए जा रहे हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अधिकारियों के खिलाफ contempt action की चेतावनी तक दी।

    कोर्ट की एक टिप्पणी ने इस पूरे मामले को और चर्चा में ला दिया। बेंच ने FDA के रवैये पर सवाल करते हुए पूछा कि क्या अधिकारी खुद को ऐसा समझते हैं कि वे “lord” हैं और कुछ भी कर सकते हैं।

    हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि कोर्ट ने शुरुआती FDA inspection में मिले hygiene violations को गलत बताया। कोर्ट का सवाल मुख्य रूप से बाद की compliance, legal reasoning और suspension जारी रखने के तरीके को लेकर था।

    88% compliance के बाद क्या फैसला हुआ?

    सुनवाई के दौरान FDA ने कहा कि वह MCA को नया notice जारी करेगा। MCA को Shirke Infrastructure के साथ उसके contractual arrangement पर अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा।

    इसके बाद FDA इस पूरे मामले पर कारणों के साथ नया order जारी करेगा।

    हाईकोर्ट ने माना कि जब fresh inspection में restaurants अब food safety requirements के अनुरूप पाए गए हैं, तो पुराने suspension को जारी रखने का आधार नहीं बचता। इसके बाद पांचों food licences का suspension हटाने और restaurants को फिर से खोलने का रास्ता साफ हो गया।

    लेकिन एक बात अभी बाकी है

    Restaurants के reopen होने का मतलब यह नहीं है कि MCA और FDA के बीच पूरा विवाद हमेशा के लिए खत्म हो गया।

    MCA और Shirke Infrastructure के बीच contract और food business operation को लेकर FDA fresh notice जारी करेगा। इस पर दोनों पक्षों को सुनने के बाद आगे reasoned order लिया जाएगा। यानी restaurants खुल रहे हैं, लेकिन licensing और operational arrangement वाला सवाल अभी पूरी तरह बंद नहीं हुआ है।

    HC ने restaurants की website को लेकर भी दिया सुझाव

    सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने बड़े restaurants के लिए एक अलग तरह का सुझाव भी दिया।

    कोर्ट ने कहा कि बड़े restaurants की अपनी website या social media presence होनी चाहिए, जहां customers hygiene, food quality और taste को लेकर अपना feedback दे सकें।

    यह अभी कोई नया लागू FDA rule नहीं है, बल्कि हाईकोर्ट का policy suggestion है। इसका मकसद food safety को सिर्फ सरकारी inspection तक सीमित रखने के बजाय customer feedback और public accountability से भी जोड़ना है।

    25 अगस्त की सुनवाई में क्या हुआ था?

    इस मामले की पिछली hearing भी काफी चर्चा में रही थी।

    उस समय FDA की inspection findings में kitchen में cockroaches और flies मिलने, food hygiene और cleaning से जुड़ी कमियों का मुद्दा सामने आया था। कोर्ट ने fresh inspection का आदेश दिया था और इस बीच कुछ basic facilities के इस्तेमाल की अनुमति भी दी थी।

    उसी hearing के दौरान food में insects मिलने के संदर्भ में कोर्ट की “non-vegetarian tea” वाली टिप्पणी भी सामने आई थी।

    यानी 25 अगस्त से 29 अगस्त के बीच इस मामले में बड़ा बदलाव यह हुआ कि पहले जहां गंभीर hygiene violations सामने आए थे, वहीं fresh inspection में 88% compliance सामने आ गई।

    तुकाराम मुंढे के आने के बाद FDA क्यों चर्चा में है?

    MCA का यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब महाराष्ट्र FDA commissioner Tukaram Mundhe के नेतृत्व में statewide food safety action काफी तेज हुआ है।

    25 मई से 31 जुलाई के बीच FDA ने राज्यभर में 3,137 hotels, restaurants, eateries और दूसरे food establishments की inspection की। इनमें 2,373 establishments यानी करीब 75.6% को किसी corrective action की जरूरत नहीं पड़ी।

    764 establishments को improvement notices दिए गए, जबकि 165 licences suspend किए गए। इस drive में करीब 28.66 लाख किलो unsafe food, जिसकी value लगभग ₹55.72 करोड़ बताई गई, seize या destroy किया गया।

    FDA के मुताबिक 165 suspension cases में 103 appeals भी दाखिल हुईं और eligible मामलों में interim relief दिया गया। इसका मतलब licence suspension हर मामले में permanent closure नहीं होता; violations सुधारने और hearing के बाद suspension हटाया भी जा सकता है।

    MCA case से बड़ा सवाल क्या निकलता है?

    MCA के पांच restaurants का मामला सिर्फ पांच licences के suspend और restore होने की कहानी नहीं है।

    इससे महाराष्ट्र में food safety enforcement को लेकर एक बड़ा सवाल सामने आया है।

    एक तरफ FDA के पास unsafe food और serious hygiene violations मिलने पर तुरंत action लेने की जिम्मेदारी है। दूसरी तरफ, अगर establishment बाद की inspection में deficiencies सुधार लेता है, तो administrative action भी proportionate, reasoned और कानून के मुताबिक होना चाहिए।

    MCA case में हाईकोर्ट ने इसी balance पर जोर दिया है।

    फिलहाल पांचों restaurants के लिए रास्ता साफ है। वे फिर से खुल सकते हैं। लेकिन MCA और Shirke Infrastructure के बीच food business arrangement पर FDA की अगली कार्रवाई अब इस कहानी का अगला chapter होगी।

  • मुंबई के सरकारी अस्पताल में लापरवाही का आरोप, गर्भ में बच्चे की मौत

    मुंबई के सरकारी अस्पताल में लापरवाही का आरोप, गर्भ में बच्चे की मौत

    मुंबई के राजावाड़ी सरकारी अस्पताल में गर्भ में बच्चे की मौत के बाद महिला ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया। पुलिस ने जांच शुरू कर दस्तावेज मांगे हैं।

    मुंबई: घाटकोपर पूर्व स्थित राजावाड़ी अस्पताल में गर्भ में बच्चे की मौत का मामला सामने आने के बाद अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। गोवंडी की 33 वर्षीय हीरा भंडारी ने डॉक्टरों और अस्पताल के स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाया है।

    हीरा का दावा है कि 19 अगस्त को डॉक्टरों ने उन्हें C-Section की लिखित सलाह दी थी। इसके बावजूद उनकी डिलीवरी नहीं कराई गई और उन्हें सोनोग्राफी के लिए बुलाया जाता रहा। करीब एक हफ्ते बाद 26 अगस्त को डॉक्टरों ने उनके बच्चे को गर्भ में मृत बताया।

    19 अगस्त को दी गई थी C-Section की सलाह

    हीरा के मुताबिक, 19 अगस्त को डॉक्टरों ने C-Section कराने की लिखित सलाह दी थी। परिवार को उम्मीद थी कि अब जल्द डिलीवरी होगी, लेकिन उनका आरोप है कि अस्पताल में ऐसा नहीं हुआ।

    परिवार का कहना है कि इसके बाद उन्हें लगातार सोनोग्राफी कराने के लिए कहा गया और डिलीवरी आगे टलती रही।

    24 अगस्त की रात बच्चे की movement महसूस नहीं हुई

    24 अगस्त की आधी रात को हीरा को बच्चे की movement महसूस नहीं हुई। वह तुरंत राजावाड़ी अस्पताल पहुंचीं।

    उनके मुताबिक, अस्पताल में सोनोग्राफी की गई और उन्हें बताया गया कि बच्चा ठीक है। स्टाफ ने कथित तौर पर कहा कि गर्भ में बच्चा बड़ा होने के बाद उसकी movement कम हो सकती है।

    इसके बाद उन्हें 26 अगस्त को दोबारा अस्पताल आने के लिए कहा गया।

    26 अगस्त को एक घंटे में बदल गई स्थिति

    26 अगस्त की सुबह करीब 7 बजे हीरा अस्पताल पहुंचीं। उनके मुताबिक, करीब 10 बजे सोनोग्राफी की गई और डॉक्टरों ने बताया कि बच्चा ठीक है।

    लेकिन करीब 11 बजे पेट में दर्द होने के बाद फिर सोनोग्राफी की गई। इस बार डॉक्टरों ने बताया कि बच्चे की गर्भ में ही मौत हो चुकी है।

    इस जानकारी के बाद परिवार सदमे में आ गया।

    परिवार ने डॉक्टरों से मांगा जवाब

    हीरा की बहन सोनी पाटिल का आरोप है कि परिवार ने डॉक्टरों से बच्चे की मौत की वजह पूछी तो अलग-अलग कारण बताए गए।

    परिवार के मुताबिक, गर्भ में पानी के असंतुलन से लेकर पीलिया तक की बातें कही गईं। परिवार का कहना है कि उन्हें यह साफ जवाब नहीं मिला कि बच्चे की हालत कब बिगड़ी और 19 अगस्त को C-Section की सलाह के बाद डिलीवरी क्यों नहीं हुई।

    अस्पताल में विरोध के बाद पुलिस पहुंची

    बच्चे की मौत के बाद परिवार ने अस्पताल में विरोध किया। परिवार का दावा है कि इस दौरान कुछ अन्य गर्भवती महिलाओं के रिश्तेदार भी उनके साथ आए और उन्होंने अस्पताल को लेकर अपने अनुभव बताए।

    इसके बाद परिवार तिलक नगर पुलिस स्टेशन पहुंचा।

    परिवार ने आरोप लगाया कि उनकी लिखित शिकायत नहीं ली गई और हीरा की सास को पुलिस स्टेशन से बाहर कर दिया गया।

    पुलिस ने आरोप से अलग बताई घटना

    ड्यूटी पर मौजूद API सरिता मनवर ने परिवार के इस आरोप से इनकार किया।

    उनके मुताबिक, परिवार उस दिन पुलिस स्टेशन शिकायत करने नहीं आया था। पुलिस को राजावाड़ी अस्पताल से फोन मिला था कि बच्चे की मौत के बाद कुछ रिश्तेदारों ने अस्पताल में हंगामा किया है।

    पुलिस टीम अस्पताल पहुंची और हीरा के पति गणेश भंडारी के साथ बातचीत की। मनवर के मुताबिक, परिवार को सलाह दी गई कि बच्चे का शव तुरंत न लिया जाए, ताकि आगे की जांच में परेशानी न हो।

    उन्होंने कहा कि किसी रिश्तेदार को पुलिस स्टेशन से बाहर नहीं निकाला गया था। केवल महिला वार्ड और OT परिसर से बाहर जाने को कहा गया था, क्योंकि वहां दूसरी गर्भवती महिलाएं मौजूद थीं।

    पुलिस ने मांगे अस्पताल के दस्तावेज

    Senior PI संतोष धेमरे के मुताबिक, पुलिस ने अस्पताल से मेडिकल दस्तावेज और रिपोर्ट मांगी है। पुलिस ने संबंधित लोगों के बयान भी दर्ज किए हैं।

    अब मामले से जुड़े सभी दस्तावेज जेजे अस्पताल की लापरवाही जांच समिति को भेजे जाएंगे। समिति की सिफारिश के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

    राजावाड़ी अस्पताल ने लापरवाही के आरोप से किया इनकार

    राजावाड़ी अस्पताल प्रशासन ने परिवार के आरोपों को खारिज किया है।

    अस्पताल का कहना है कि OT में maintenance होना सामान्य प्रक्रिया है। अगर एक OT में काम चल रहा हो तो दूसरा OT उपलब्ध रहता है।

    अस्पताल के मुताबिक, 26 अगस्त को कम से कम 5 से 6 C-Section किए गए थे। इसलिए OT उपलब्ध नहीं होने के कारण डिलीवरी में देरी हुई, यह कहना सही नहीं है।

    अस्पताल ने बताया कि हीरा के बच्चे की heartbeat जांच के दौरान सुनाई नहीं दी। इसके बाद सोनोग्राफी की गई, जिसमें बच्चे की मौत की पुष्टि हुई।

    अब जांच में सामने आएगा सच

    इस मामले में फिलहाल परिवार और अस्पताल के दावे अलग-अलग हैं। परिवार का कहना है कि 19 अगस्त को C-Section की सलाह के बाद भी डिलीवरी नहीं हुई और 24 अगस्त की रात बच्चे की movement नहीं होने के बाद भी उन्हें 26 अगस्त तक इंतजार करना पड़ा।

    वहीं अस्पताल ने OT की कमी और लापरवाही के आरोपों से इनकार किया है।

    अब 19 अगस्त की C-Section सलाह, सोनोग्राफी रिपोर्ट, मेडिकल रिकॉर्ड और इलाज से जुड़े बाकी दस्तावेज जांच में अहम होंगे। जेजे अस्पताल की जांच समिति की रिपोर्ट के बाद ही साफ होगा कि बच्चे की मौत की मेडिकल वजह क्या थी और क्या इलाज में किसी तरह की लापरवाही हुई थी।

  • मुंबई में ₹17.67 लाख की Chemical ठगी का खुलासा, फर्जी कंपनी-SIM से खेल; राजस्थान से 2 आरोपी गिरफ्तार

    मुंबई में ₹17.67 लाख की Chemical ठगी का खुलासा, फर्जी कंपनी-SIM से खेल; राजस्थान से 2 आरोपी गिरफ्तार

    मुंबई में ₹17.67 लाख की केमिकल ठगी का खुलासा, MHB कॉलोनी पुलिस ने राजस्थान से दो आरोपियों को पकड़ा। फर्जी कंपनी, SIM, Aadhaar-PAN और नकली UTR से ठगी का प्लान।

    मुंबई: बोरीवली पश्चिम के MHB कॉलोनी पुलिस ने Chemical कारोबार से जुड़ी ₹17.67 लाख की ठगी के मामले में राजस्थान से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में फर्जी Aadhaar-PAN, SIM, कंपनी के कागजात और नकली Payment Screenshot/UTR के जरिए कारोबारियों को भरोसे में लेने का मामला सामने आया है। खास बात यह है कि आरोपी सिर्फ एक कंपनी के संपर्क में नहीं थे, बल्कि करीब 38 Chemical कंपनियों से इसी तरह संपर्क किए जाने की जानकारी पुलिस को मिली है।

    WhatsApp पर Chemical का ऑर्डर, फिर शुरू हुआ पूरा खेल

    मामला MHB कॉलोनी पुलिस स्टेशन में दर्ज शिकायत से सामने आया। शिकायतकर्ता निर्मित संजय अजमेरा, उम्र 32 वर्ष, Chemical कारोबार से जुड़े हैं। उनके मोबाइल नंबर पर WhatsApp के जरिए “प्रीमियर सॉल्व्हेंट्स” कंपनी के नाम से Chemical का ऑर्डर दिया गया।

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    बोरीवली एम एच बी कॉलोनी पुलिस टीम के साथ गिरफ्तार आरोपियों की तस्वीर

    शुरुआत में सब कुछ एक सामान्य कारोबारी डील जैसा दिखाई दिया, लेकिन आगे की जांच में पता चला कि ऑर्डर देने वाले लोगों ने अपनी असली पहचान छिपाकर पूरा फर्जी सेटअप तैयार किया था।

    Shyam Industries के नाम से बनाई फर्जी कंपनी

    आरोपियों ने “Shyam Industries” नाम से फर्जी कंपनी तैयार की। इसके लिए फर्जी Aadhaar Card और PAN Card का इस्तेमाल किया गया। इतना ही नहीं, कंपनी को असली दिखाने के लिए विजिटिंग कार्ड और लेटरहेड भी तैयार किए गए।

    इसके बाद Chemical कारोबारियों से संपर्क कर ऑर्डर देने और पेमेंट करने का भरोसा दिलाया गया।

    मामला तब संदिग्ध हुआ जब आरोपियों ने पेमेंट किए जाने का दावा करते हुए WhatsApp पर Payment Screenshot और UTR नंबर भेजा। स्क्रीनशॉट से ऐसा दिखाने की कोशिश की गई कि रकम ट्रांसफर हो चुकी है, जबकि वास्तव में ₹17,67,375 का भुगतान नहीं हुआ था।

    इसके बाद Chemical को Transporter के जरिए मंगाने की कोशिश की गई। पुलिस की जांच में यही पूरा तरीका ठगी के मुख्य पैटर्न के तौर पर सामने आया।

    पुलिस को 38 और Chemical कंपनियों से संपर्क का पता चला

    जांच आगे बढ़ी तो मामला एक कारोबारी तक सीमित नहीं रहा। पुलिस को जानकारी मिली कि आरोपियों ने इसी तरह करीब 38 अलग-अलग Chemical कंपनियों से संपर्क किया था और Chemical मंगाने के लिए बातचीत की थी।

    इससे पुलिस को शक हुआ कि फर्जी कंपनी और पहचान तैयार करने के पीछे एक बड़ा ठगी का प्लान था और दूसरे कारोबारियों को भी इसी तरीके से निशाना बनाया जा सकता था।

    Fake SIM से लेकर Fake Identity तक

    पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने आपस में मिलीभगत कर एक और फर्जी SIM हासिल की थी। इस दौरान सोनूकुमार प्रजापत के नाम का इस्तेमाल करते हुए फर्जी पहचान तैयार की गई।

    इसी पहचान के आधार पर Aadhaar और PAN तैयार किए गए और फिर Shyam Industries के नाम से कारोबार करने का दिखावा किया गया।

    यानी इस पूरे मामले में सिर्फ नकली पेमेंट स्क्रीनशॉट ही नहीं, बल्कि पहचान से लेकर कंपनी के दस्तावेज तक कई स्तर पर फर्जीवाड़ा किया गया।

    आरोपी बार-बार बदल रहा था Location

    मामला दर्ज होने के बाद MHB कॉलोनी पुलिस की Crime Detection टीम ने मोबाइल नंबर और दूसरी तकनीकी जानकारी के आधार पर आरोपियों की तलाश शुरू की।

    जांच के दौरान आरोपी लगातार अपनी Location बदल रहा था। पुलिस ने उसके इस्तेमाल किए जा रहे मोबाइल नंबरों की जानकारी निकाली और तकनीकी जांच के जरिए उसकी गतिविधियों को ट्रैक किया।

    जांच में आरोपी का संपर्क राजस्थान से सामने आया। इसके बाद पुलिस टीम राजस्थान पहुंची और स्थानीय पुलिस की मदद से आरोपी को ट्रेस किया।

    राजस्थान के Jodhpur से मुख्य आरोपी गिरफ्तार

    तकनीकी जांच के आधार पर मुख्य आरोपी ललितकुमार भगवानराम बिश्नोई, उम्र 36 वर्ष, को राजस्थान के Jodhpur क्षेत्र से पकड़ा गया। पूछताछ के दौरान उसके खिलाफ सामने आए आरोपों और मामले में उसकी भूमिका की जांच की गई।

    पुलिस के अनुसार पूछताछ में अपराध से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत गिरफ्तार किया गया।

    मामले में उसके साथी विकास बिश्नोई, उम्र 19 वर्ष, को भी सहभागी पाए जाने पर गिरफ्तार किया गया है।

    दोनों की भूमिका सामने आने के बाद केस में भारतीय न्याय संहिता की धारा 3(5) भी जोड़ी गई है।

    कौन-कौन सी धाराओं में मामला दर्ज है?

    MHB कॉलोनी पुलिस स्टेशन में CR No. 960/2026 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

    मामले में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 316(2), 336(2), 318(4), 340(2) और 3(5) के तहत कार्रवाई की गई है।

    पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि 38 अन्य Chemical कंपनियों से संपर्क करने के पीछे आरोपियों का मकसद क्या था और इस नेटवर्क से कितने कारोबारियों को नुकसान पहुंचा सकता था।

    वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में हुई कार्रवाई

    इस कार्रवाई में मुंबई पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का मार्गदर्शन रहा। पुलिस आयुक्त देवेन भारती, पुलिस सह आयुक्त मनोजकुमार शर्मा, अपर पुलिस आयुक्त डॉ. अभिनव देशमुख और पुलिस उपायुक्त संदीप घुगे के मार्गदर्शन में जांच आगे बढ़ाई गई।

    गोराई विभाग के सहायक पुलिस आयुक्त सुधाकर हूंबे की निगरानी में MHB कॉलोनी पुलिस की टीम ने कार्रवाई की।

    MHB कॉलोनी पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक विवेक सोनवणे और पुलिस निरीक्षक (गुन्हे) मिलिंद नागपुरे के मार्गदर्शन में सहायक पुलिस निरीक्षक तथा अपराध प्रकटीकरण अधिकारी श्रीकांत मगर और उनकी टीम ने तकनीकी जांच के जरिए आरोपियों तक पहुंच बनाई।

    कार्रवाई में पुलिस हवलदार संदीप पाटील, सतीश देवकर, अर्जुन आहेर, पुलिस नाईक सचिन मंजुळे और सिद्धेश पाटील भी शामिल रहे।

    अब 38 कंपनियों वाले कनेक्शन की जांच

    दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस के सामने अगला बड़ा सवाल यह है कि Shyam Industries नाम की फर्जी कंपनी बनाकर कितने कारोबारियों को इसी तरीके से संपर्क किया गया था और कितनी जगह Chemical मंगाने की कोशिश की गई।

    ₹17.67 लाख की शिकायत से शुरू हुई जांच में करीब 38 Chemical कंपनियों से संपर्क का खुलासा होने के बाद पुलिस इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।

    खबर का सार

    मामलाजानकारी
    पुलिस स्टेशनMHB कॉलोनी पुलिस स्टेशन, मुंबई
    शिकायतकर्तानिर्मित संजय अजमेरा, 32 वर्ष
    ठगी की रकम₹17,67,375
    मुख्य आरोपीललितकुमार भगवानराम बिश्नोई, 36 वर्ष
    दूसरा आरोपीविकास बिश्नोई, 19 वर्ष
    फर्जी कंपनीShyam Industries
    इस्तेमाल की गई पहचानफर्जी Aadhaar-PAN और SIM
    ठगी का तरीकाWhatsApp ऑर्डर, नकली Payment Screenshot/UTR
    अन्य कंपनियों से संपर्ककरीब 38 Chemical कंपनियां
    गिरफ्तारीराजस्थान, Jodhpur क्षेत्र
    केस नंबरCR No. 960/2026
    धाराएंBNS 316(2), 336(2), 318(4), 340(2), 3(5)
  • BMC Mayor पर BJP-शिंदे सेना में नया टकराव! सवा साल के फॉर्मूले ने बढ़ाया मुंबई का सियासी सस्पेंस

    BMC Mayor पर BJP-शिंदे सेना में नया टकराव! सवा साल के फॉर्मूले ने बढ़ाया मुंबई का सियासी सस्पेंस

    मुंबई BMC Mayor को लेकर BJP और शिंदे सेना आमने-सामने हैं। शिंदे ने सवा साल के power-sharing फॉर्मूले का दावा किया, BJP ने अनभिज्ञता जताई। जानें पूरा नंबर गेम।

    मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका यानी BMC में सत्ता संभाल रही BJP और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के बीच Mayor पद को लेकर नया सियासी ट्विस्ट सामने आया है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने दावा किया है कि BJP और शिवसेना के बीच Mayor पद को लेकर power-sharing का फॉर्मूला पहले ही तय हो चुका है। इसके मुताबिक मौजूदा BJP Mayor ऋतु तावड़े अपने ढाई साल का कार्यकाल पूरा करेंगी। इसके बाद अगले ढाई साल में पहले सवा साल शिवसेना का Mayor और आखिरी सवा साल फिर BJP का Mayor रहेगा।

    लेकिन शिंदे के इस दावे के बाद कहानी और दिलचस्प हो गई। BJP के वरिष्ठ नेता और मंत्री आशीष शेलार ने कहा कि उन्हें ऐसी किसी सहमति की जानकारी नहीं है। Mayor ऋतु तावड़े और BMC में BJP के गुटनेता गणेश खणकर ने भी कहा कि ऐसे बड़े फैसले senior leadership के स्तर पर ही लिए जाएंगे। यानी एक तरफ शिंदे इस फॉर्मूले को तय हुआ बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ BJP के कई बड़े चेहरे इससे अनजान नजर आ रहे हैं।

    आखिर सवा साल का ये Mayor Formula है क्या?

    BMC में अभी BJP की रितु तावड़े Mayor हैं। मौजूदा व्यवस्था के मुताबिक उनका शुरुआती ढाई साल का कार्यकाल BJP के हिस्से में है। शिंदे के दावे के अनुसार इसके बाद अगले ढाई साल को दो हिस्सों में बांटा जाएगा।

    अवधिMayor का दावा किया गया फॉर्मूला
    पहला ढाई सालBJP
    अगला सवा सालशिंदे सेना
    आखिरी सवा सालBJP

    यानी पांच साल के पूरे कार्यकाल में BJP को कुल साढ़े तीन साल और शिंदे सेना को सवा साल Mayor पद मिलने की बात सामने आई है। यह वही फॉर्मूला है जिसकी चर्चा BMC चुनाव के बाद से राजनीतिक गलियारों में चलती रही है और फरवरी में भी शिंदे सेना ने कम से कम सवा साल के Mayor पद की मांग रखी थी।

    लेकिन क्या सवा साल का Mayor कानून में लिखा है?

    यहां सबसे जरूरी बात समझना जरूरी है। सवा साल का power-sharing फॉर्मूला BMC Act में लिखा हुआ कोई अलग कानूनी प्रावधान नहीं है। यह BJP और शिंदे सेना के बीच कथित political understanding है।

    Mayor का चुनाव BMC के councillors में से होता है और Mayor का सामान्य कार्यकाल ढाई साल का होता है। इसलिए अगर राजनीतिक तौर पर सवा साल के rotation पर सहमति है, तो उस समय की कानूनी प्रक्रिया और लागू reservation व्यवस्था के मुताबिक नया Mayor चुनना होगा।

    यानी आज शिंदे सेना का दावा सामने आने का मतलब यह नहीं है कि 2028 में उसका Mayor अपने आप बन जाएगा। उस समय चुनाव की प्रक्रिया, House का समीकरण और लागू reservation rules भी अहम होंगे।

    BJP ने फॉर्मूले से किनारा किया तो मामला क्यों गंभीर है?

    क्योंकि BMC में BJP सबसे बड़ी पार्टी है। जनवरी 2026 के चुनाव में BJP को 89 और शिंदे सेना को 29 सीटें मिली थीं। दोनों मिलकर 118 पर पहुंचते हैं, जबकि 227 सदस्यीय सदन में सामान्य बहुमत का आंकड़ा 114 है।

    यानी चुनावी नतीजों के हिसाब से Mahayuti के पास बहुमत से चार सीट ज्यादा थीं। हालांकि पांच पार्षदों के OBC certificate से जुड़े मामलों में अयोग्यता के बाद House की effective strength बदलने की प्रक्रिया भी चल रही है। नए पार्षद आने के बाद Mahayuti की संख्या बढ़ने की संभावना बताई गई है।

    इस नंबर गेम का सीधा मतलब है कि BJP सबसे बड़ी पार्टी जरूर है, लेकिन BMC में Mahayuti की सत्ता के लिए शिंदे सेना का 29 पार्षदों वाला bloc राजनीतिक तौर पर काफी अहम है।

    शिंदे सेना को Mayor पद की जरूरत क्यों?

    यही इस पूरे विवाद का असली राजनीतिक angle है।

    BMC लंबे समय तक मुंबई की Shiv Sena politics का सबसे बड़ा गढ़ रहा है। अब BJP सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई है और शिंदे सेना भी सत्ता में साझेदार है। ऐसे में अगर शिंदे सेना को पांच साल के कार्यकाल में सवा साल Mayor मिलता है, तो उसे Mumbai politics में अपनी स्वतंत्र political identity मजबूत करने का बड़ा मौका मिलेगा।

    यह सिर्फ Mayor की कुर्सी का सवाल नहीं है। यह संदेश भी होगा कि BMC में BJP सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद Shinde Sena alliance में एक महत्वपूर्ण stakeholder है।

    असली ताकत सिर्फ Mayor की कुर्सी में नहीं है

    BMC की सत्ता को समझने के लिए Mayor के साथ committees का खेल भी समझना जरूरी है।

    BMC में Standing, Improvement, Education और BEST जैसी चार बड़ी statutory committees हैं। इनमें Standing Committee को सबसे अहम माना जाता है क्योंकि बड़े financial और civic infrastructure decisions में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। फरवरी में BJP के पास Standing और Education committees की chairmanship गई, जबकि शिंदे सेना को Improvement और BEST committees मिलीं।

    यानी BJP और शिंदे सेना के बीच power-sharing की तस्वीर पहले से सिर्फ Mayor तक सीमित नहीं रही है।

    इसीलिए अमेय घोले का यह दावा भी महत्वपूर्ण है कि committees का बंटवारा पहले से तय योजना के मुताबिक हुआ था। हालांकि BJP की तरफ से इस कथित overall formula पर सहमति की पुष्टि नहीं हुई है।

    BMC में एक और दिलचस्प power equation

    फरवरी में शिंदे सेना के 29 पार्षदों और NCP के दोनों गुटों के कुल चार पार्षदों ने BMC में एक bloc के तौर पर registration किया था। इससे committee-level arithmetic में भी उनकी bargaining position मजबूत हुई।

    इससे साफ है कि BMC में political parties सिर्फ Mayor पद पर निर्भर नहीं हैं। Committee positions, financial decisions और local civic work में influence भी सत्ता का बड़ा हिस्सा हैं।

    BJP और शिंदे सेना के बीच तनाव के संकेत पहले भी मिले

    Mayor Formula पर विवाद अचानक सामने नहीं आया है। BMC में Deputy Mayor संजय घाड़ी को लेकर BJP और शिंदे सेना के बीच पहले भी मतभेद सामने आ चुके हैं।

    Mumbai Clean League के एक कार्यक्रम में घाड़ी ने protocol को लेकर आपत्ति जताई थी। Mayor की गैरमौजूदगी में उन्हें मंच पर चौथे स्थान पर रखे जाने पर सवाल उठे और अमेय घोले ने BMC से apology की मांग की थी।

    इसके बाद नालों की सफाई के inspection को लेकर भी घाड़ी ने कहा था कि उन्हें साथ नहीं लिया गया। यानी मामला सिर्फ एक पद या एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा है।

    घाड़ी ने BMC के ‘Nisarg’ bungalow की मांग भी की थी। BJP और Mayor ने इस मांग का समर्थन किया था, लेकिन बाद में bungalow Additional Municipal Commissioner अविनाश धाकने को allot हो गया।

    अब कहानी में आया Operation Tiger

    BMC की राजनीति में एक और factor शिंदे सेना के लिए अहम हो सकता है—Operation Tiger।

    इस अभियान के जरिए शिवसेना UBT के करीब 45 पार्षदों को अपने साथ लाने की चर्चा पहले से चल रही है। 45 का आंकड़ा political target या reported claim के तौर पर सामने आया है, इसे अभी 45 पार्षदों के पाला बदलने की confirmed खबर नहीं माना जा सकता।

    अगर आने वाले समय में UBT के कुछ पार्षद शिंदे सेना के साथ जाते हैं, तो BMC में शिंदे सेना की numerical और political bargaining power बढ़ सकती है।

    यही वजह है कि Mayor Formula और Operation Tiger को अलग-अलग घटनाओं की तरह देखना मुश्किल है। एक तरफ शिंदे सेना Mayor पद में अपना हिस्सा मांग रही है, दूसरी तरफ उसका संगठनात्मक प्रभाव बढ़ाने की कोशिशों की चर्चा है।

    BJP के सामने भी बड़ा political dilemma

    यहां BJP के सामने एक दिलचस्प स्थिति बनती है।

    अगर BJP UBT को कमजोर करने के लिए Operation Tiger को राजनीतिक तौर पर बढ़ावा देती है, तो उसका फायदा शिंदे सेना को भी मिल सकता है। शिंदे सेना की संख्या और influence बढ़ा तो आगे Mayor, committees और BMC के दूसरे फैसलों में उसकी bargaining power भी बढ़ सकती है।

    दूसरी तरफ अगर BJP Mayor पद पूरी तरह अपने पास रखने पर जोर देती है, तो alliance के अंदर power-sharing को लेकर असहजता बढ़ सकती है।

    यानी BJP के लिए सवाल सिर्फ यह नहीं है कि Mayor किस पार्टी का होगा। सवाल यह भी है कि Mumbai BMC में alliance का power balance कितना BJP-centric और कितना shared रहेगा।

    UBT के लिए भी बड़ा खतरा

    BMC में BJP के बाद UBT शिवसेना सबसे बड़ी opposition force है। ऐसे में अगर Operation Tiger के जरिए UBT के पार्षद टूटते हैं, तो उसका असर सिर्फ BMC की संख्या पर नहीं बल्कि ठाकरे परिवार की Mumbai political base पर भी पड़ सकता है।

    BMC लंबे समय से Thackeray-led Shiv Sena की Mumbai politics का सबसे बड़ा political symbol रहा है। अब BJP के सत्ता में आने के बाद Shinde Sena अगर UBT के पार्षदों को अपने साथ जोड़ती है, तो आने वाले समय में यह सवाल और बड़ा होगा कि Mumbai में Shiv Sena की political legacy का असली वारिस कौन है।

    Mayor की कुर्सी से आगे क्या बदलेगा?

    अगर शिंदे सेना का सवा साल वाला दावा आगे चलकर औपचारिक political agreement के रूप में सामने आता है, तो Mumbai की politics में तीन बड़े असर दिख सकते हैं।

    पहला, शिंदे सेना को BMC में अपनी अलग पहचान मजबूत करने का मौका मिलेगा।

    दूसरा, BJP और शिंदे सेना के बीच alliance के भीतर power-sharing का नया balance बनेगा।

    तीसरा, UBT के पार्षदों को अपने साथ लाने की कोशिशें तेज हुईं तो BMC का पूरा number game बदल सकता है।

    लेकिन अभी इन तीनों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस agreement का दावा शिंदे कर रहे हैं, क्या BJP leadership भी उसे उसी रूप में स्वीकार करती है?

    असली सवाल अब यही है

    BMC में BJP के पास सबसे ज्यादा पार्षद हैं। शिंदे सेना के पास संख्या कम है, लेकिन alliance arithmetic में उसकी भूमिका अहम है। Mayor पद का कथित सवा साल का फॉर्मूला इसी bargaining power का संकेत माना जा रहा है।

    और इसी वजह से आने वाले समय में सिर्फ यह देखना काफी नहीं होगा कि अगला Mayor कौन बनेगा।

    नजर इस बात पर भी रहेगी कि BJP और शिंदे सेना के बीच BMC की बाकी committees, civic projects और political influence का बंटवारा किस तरह होता है।

    फिलहाल एक बात साफ है—मुंबई की सबसे बड़ी civic body में Mahayuti की सत्ता कायम है, लेकिन Mayor की कुर्सी ने alliance के अंदर power-sharing का सवाल फिर से सामने ला दिया है। शिंदे का दावा सामने आ चुका है, BJP के कई बड़े नेता इससे अनजान हैं और अब निगाहें senior leadership के अगले फैसले पर टिक गई हैं।

  • मुंबई में खुलेगा ऑस्ट्रेलिया की बड़ी यूनिवर्सिटी का कैंपस, UGC से मिली मंजूरी; सितंबर से शुरू होगी पढ़ाई

    मुंबई में खुलेगा ऑस्ट्रेलिया की बड़ी यूनिवर्सिटी का कैंपस, UGC से मिली मंजूरी; सितंबर से शुरू होगी पढ़ाई

    मुंबई में ऑस्ट्रेलिया की बड़ी यूनिवर्सिटी UWA का कैंपस खुलेगा। UGC से मंजूरी मिल गई है। जानें सितंबर 2026 admission, courses, fees और scholarship की जानकारी।

    मुंबई: मुंबई में अब ऑस्ट्रेलिया की एक बड़ी यूनिवर्सिटी का campus शुरू होने जा रहा है। University of Western Australia (UWA) को मुंबई में अपना international campus शुरू करने के लिए University Grants Commission (UGC) से Letter of Approval मिल गया है। इसके साथ ही सितंबर 2026 में Mumbai campus में students के पहले batch की पढ़ाई शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है।

    UWA के मुताबिक, students के campus आने से पहले orientation programme आयोजित किया जाएगा। इसमें उन्हें campus, पढ़ाई के तरीके और academic environment की जानकारी दी जाएगी।

    लेकिन इस खबर के साथ Mumbai के students के लिए कई बड़े सवाल भी सामने आए हैं—कौन से courses होंगे, fees कितनी होगी, admission कैसे मिलेगा, scholarship मिलेगी या नहीं और Mumbai से पढ़ने के बाद Australia में आगे पढ़ाई का रास्ता क्या होगा?

    मुंबई में UWA का कैंपस कहां होगा?

    UWA का Mumbai campus Andheri East में है। यह Marol Naka Metro Station के पास है और Mumbai Airport तथा Western Express Highway से भी अच्छी तरह connected है।

    UWA के अनुसार campus Marol Naka Metro से करीब 1 मिनट, airport से करीब 5 मिनट और Western Express Highway से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर है।

    इस location की वजह से Mumbai और आसपास के students के लिए daily travel comparatively आसान हो सकता है।

    UWA Mumbai में कौन से Courses होंगे?

    UWA ने India campuses के लिए Technology, Business और Management से जुड़े कई programmes रखे हैं।

    इनमें Computer Science, Cyber Security, Data Science, Artificial Intelligence, Business Management, Global Business, Enterprise and Innovation और Economics जैसे courses शामिल हैं।

    Postgraduate level पर MBA और Master of Information Technology भी portfolio में शामिल हैं।

    हालांकि हर course हर intake में उपलब्ध हो, यह जरूरी नहीं है। इसलिए September 2026 admission के लिए चुने गए programme की current availability UWA से confirm करना जरूरी है।

    UWA Mumbai की Fees कितनी होगी?

    Students के लिए सबसे बड़ा सवाल fees का है।

    UWA की 2026 indicative fee information के मुताबिक Computer Science और Business Management जैसे कुछ undergraduate programmes की first-year tuition fee करीब ₹14.52 लाख है।

    Master of Information Technology की indicative first-year tuition fee करीब ₹19.25 लाख बताई गई है।

    ये tuition fees indicative हैं। दूसरे charges अलग हो सकते हैं और future में fee revise भी हो सकती है।

    Course2026 Indicative First-Year Fee
    Computer Scienceकरीब ₹14.52 लाख
    Business Managementकरीब ₹14.52 लाख
    Master of Information Technologyकरीब ₹19.25 लाख

    September 2026 Admission की Last Date क्या है?

    UWA India की मौजूदा जानकारी के अनुसार September 2026 Mumbai intake के लिए applications 31 August 2026 तक open हैं।

    यानी admission लेने की तैयारी कर रहे students के पास आवेदन पूरा करने के लिए बहुत कम समय बचा है।

    Application से पहले course eligibility, academic requirements, English language requirement और जरूरी documents की जानकारी जरूर check करनी चाहिए।

    क्या UWA Mumbai में Scholarship मिलेगी?

    UWA ने Indian students के लिए scholarship options भी रखे हैं।

    Academic Merit Award के तहत eligible students को 25% tuition fee waiver मिल सकता है। इसके लिए academic criteria में कम से कम 80% aggregate जैसी शर्तें शामिल हैं।

    इसके अलावा Premier Academic Award के तहत Maharashtra और Tamil Nadu के selected students के लिए 100% tuition fee waiver का provision रखा गया था। Maharashtra से 3 और Tamil Nadu से 3 students तक इसका फायदा पा सकते थे।

    हालांकि September 2026 intake की scholarship application window अब बंद हो चुकी है।

    क्या Mumbai से मिलने वाली Degree Australia वाली UWA की होगी?

    यह सवाल भी students और parents के लिए काफी important है।

    UGC के Foreign Higher Educational Institutions framework के तहत India में approved foreign university campus को academic quality और qualification से जुड़े निर्धारित नियमों का पालन करना होता है।

    UWA Mumbai University of Western Australia का international campus model है, इसलिए इसे सामान्य private coaching या franchise centre की तरह नहीं देखा जाना चाहिए।

    हालांकि किसी specific course की degree, recognition और आगे higher studies या employment के लिए equivalence जैसी जरूरतों को admission से पहले course level पर verify करना बेहतर रहेगा।

    क्या Mumbai से पढ़कर Australia जाने का मौका मिलेगा?

    UWA India campus को global learning और international opportunities से जोड़ने की योजना है। Students के लिए international exposure और आगे के pathways का scope रखा गया है।

    लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर student को automatic Australia transfer मिलेगा। यह चुने गए course, eligibility और programme rules पर depend करेगा।

    अगर किसी student का लक्ष्य आगे Australia में पढ़ाई करना है, तो admission से पहले अपने course के available pathway और transfer options की जानकारी लेना जरूरी होगा।

    Internship और Job के मामले में क्या फायदा होगा?

    UWA Mumbai का focus सिर्फ classroom education तक सीमित नहीं है। University industry exposure, applied learning और employability पर भी जोर दे रही है।

    Andheri East की location Mumbai के corporate और startup ecosystem के करीब है। इससे students को industry exposure और professional networking के opportunities मिल सकते हैं।

    हालांकि अभी UWA Mumbai के लिए ऐसा verified placement data उपलब्ध नहीं है जिसके आधार पर average salary, placement percentage या guaranteed job का दावा किया जा सके।

    Mumbai में Foreign Universities की Competition बढ़ेगी

    UWA की entry ऐसे समय हो रही है जब Mumbai में foreign universities का presence तेजी से बढ़ रहा है।

    University of York, University of Bristol, University of Aberdeen और Illinois Institute of Technology जैसे institutions को भी Mumbai region में academic operations शुरू करने की मंजूरी मिल चुकी है।

    इससे Mumbai के students के सामने आने वाले समय में UK, US और Australia की universities के नए options खुल सकते हैं।

    Mumbai के Education Sector पर क्या असर पड़ेगा?

    UWA Mumbai का campus शुरू होना सिर्फ एक नई university की entry नहीं है। यह Mumbai में international higher education के बढ़ते trend का हिस्सा है।

    NEP 2020 में higher education के internationalisation पर जोर दिया गया है। Foreign universities के India campuses इसी दिशा में एक बड़ा कदम माने जा रहे हैं।

    इसका फायदा उन students को हो सकता है जो international university से पढ़ना चाहते हैं लेकिन पूरी degree के लिए विदेश नहीं जाना चाहते।

    भारत से हर साल बड़ी संख्या में students higher education के लिए विदेश जाते हैं। ऐसे में India में foreign university campuses बढ़ने से students को देश में रहकर international education लेने का नया option मिल रहा है।

    हालांकि इससे विदेश जाने वाले students की संख्या कितनी बदलेगी, यह अभी कहना जल्दबाजी होगी। इसका असली असर fees, course quality, scholarship, degree recognition और career outcomes सामने आने के बाद ही पता चलेगा।

    UWA Mumbai Campus: जरूरी जानकारी एक नजर में

    जानकारीDetails
    UniversityUniversity of Western Australia (UWA)
    CampusMumbai
    LocationAndheri East
    Nearby MetroMarol Naka
    पहला BatchSeptember 2026
    UGC StatusLetter of Approval
    प्रमुख CoursesComputer Science, AI, Data Science, Cyber Security, Business आदि
    Indicative UG Feeकरीब ₹14.52 लाख प्रति वर्ष
    MIT Feeकरीब ₹19.25 लाख first year
    September Application Deadline31 August 2026
    Scholarship25% merit award; selected Maharashtra students के लिए 100% award framework

    अब Mumbai के Students के लिए क्या बदला?

    UWA Mumbai campus शुरू होने के बाद students के पास Mumbai में रहते हुए Australia की एक established university के academic system से जुड़े programmes पढ़ने का नया option होगा।

    लेकिन फैसला सिर्फ university के नाम पर नहीं होना चाहिए। Course, total fees, scholarship, degree recognition, career opportunities और future Australia pathway को देखकर ही students और parents को decision लेना चाहिए।

    सितंबर 2026 में पहला batch शुरू होने के साथ अब यह देखना दिलचस्प होगा कि UWA Mumbai students के लिए international education को Mumbai में कितना practical और valuable बना पाता है।

  • Mumbai Auto-Taxi Fare Hike: 1 सितंबर से ऑटो ₹27 और टैक्सी ₹33, MMR में लागू होंगे नए किराए

    Mumbai Auto-Taxi Fare Hike: 1 सितंबर से ऑटो ₹27 और टैक्सी ₹33, MMR में लागू होंगे नए किराए

    1 सितंबर से मुंबई में ऑटो-टैक्सी का किराया बढ़ेगा। ऑटो ₹27 और टैक्सी ₹33 होगी। MMR के नए रेट, प्रति KM किराया और meter नियम जानें।

    मुंबई: ऑटो और काली-पीली टैक्सी से सफर करने वाले मुंबईकरों के लिए बड़ा अपडेट है। 1 सितंबर 2026 से ऑटो-रिक्शा और टैक्सी का किराया बढ़ जाएगा। Mumbai Metropolitan Region (MMR) में ऑटो का न्यूनतम किराया ₹26 से बढ़कर ₹27 और काली-पीली टैक्सी का शुरुआती किराया ₹31 से बढ़कर ₹33 हो जाएगा।

    किराए में बढ़ोतरी सिर्फ minimum fare तक सीमित नहीं है। इसके बाद तय प्रति किलोमीटर दर भी बढ़ाई गई है।

    ऑटो और टैक्सी का नया किराया क्या होगा?

    1 सितंबर से पहले 1.5 किलोमीटर के लिए ऑटो का किराया ₹27 होगा। इसके बाद हर किलोमीटर के लिए ₹18.22 देना होगा।

    काली-पीली टैक्सी में पहले 1.5 किलोमीटर का किराया ₹33 होगा और उसके बाद ₹21.90 प्रति किलोमीटर की दर लागू होगी।

    वाहनमौजूदा किराया1 सितंबर से नया किराया
    ऑटो, पहले 1.5 KM₹26₹27
    ऑटो, इसके बाद प्रति KM₹17.14₹18.22
    काली-पीली टैक्सी, पहले 1.5 KM₹31₹33
    टैक्सी, इसके बाद प्रति KM₹20.66₹21.90

    लंबी दूरी के सफर पर बढ़ेगा खर्च

    नए प्रति किलोमीटर रेट का असर दूरी बढ़ने के साथ दिखाई देगा।

    पुराने और नए रेट की तुलना करें तो करीब 5 KM के सफर में ऑटो का किराया लगभग ₹4.30 और टैक्सी का करीब ₹6.96 ज्यादा बैठता है। 10 KM के सफर में यह अंतर ऑटो में करीब ₹9.70 और टैक्सी में करीब ₹13.16 हो जाता है।

    15 KM के सफर में पुराने रेट के मुकाबले ऑटो पर करीब ₹15.10 और टैक्सी पर करीब ₹19.36 ज्यादा हो सकते हैं।

    यह सामान्य किराया तुलना है। Actual meter calculation लागू fare rules के मुताबिक हो सकता है।

    रोज सफर करने वालों के खर्च में भी बढ़ोतरी

    Minimum fare में बढ़ोतरी को देखें तो रोज दो बार ऑटो लेने वाले यात्री का 22 working days में करीब ₹44 अतिरिक्त खर्च हो सकता है। टैक्सी में यही हिसाब करीब ₹88 बैठता है।

    लंबी दूरी तय करने वाले यात्रियों के लिए प्रति किलोमीटर किराए में बढ़ोतरी के कारण अतिरिक्त खर्च इससे ज्यादा होगा।

    नए किराए कहां लागू होंगे?

    नए fare Mumbai Metropolitan Region यानी MMR में लागू होंगे। इसमें मुंबई के साथ Thane, Navi Mumbai, Kalyan, Vasai-Virar और आसपास के MMR इलाके शामिल हैं।

    इसलिए सिर्फ मुंबई शहर ही नहीं, MMR में ऑटो और काली-पीली टैक्सी से सफर करने वाले यात्रियों को 1 सितंबर से नए किराए के हिसाब से भुगतान करना होगा।

    Meter में पुराना किराया दिखा तो क्या होगा?

    नए किराए 1 सितंबर से लागू हो जाएंगे, लेकिन सभी ऑटो और टैक्सी के electronic meters उसी दिन तक recalibrate होना जरूरी नहीं है।

    RTO ने meters को नए fare के हिसाब से reset कराने के लिए 30 नवंबर 2026 तक का समय दिया है। तब तक revised fare लेने के लिए approved tariff card का इस्तेमाल किया जाएगा।

    इसका मतलब है कि meter में पुराना किराया दिखाई देने पर भी लागू revised fare tariff card के हिसाब से लिया जा सकता है। Driver अपनी तरफ से कोई अलग या मनमाना किराया नहीं मांग सकता।

    ज्यादा किराया मांगा तो क्या करें?

    अगर कोई driver तय fare से ज्यादा रकम मांगता है तो passenger को किराया check करना चाहिए। ऐसी स्थिति में वाहन का number, यात्रा का समय और fare की जानकारी संभालकर रखना शिकायत के लिए उपयोगी रहेगा।

    क्यों बढ़ाया गया ऑटो-टैक्सी का किराया?

    MMRTA ने Khatua Committee की recommendations के आधार पर revised fares को मंजूरी दी है। Fare revision में fuel और vehicle operating costs के साथ दूसरे आर्थिक factors को भी ध्यान में रखा गया है।

    मुंबई में इससे पहले फरवरी 2025 में ऑटो का minimum fare ₹23 से बढ़ाकर ₹26 और काली-पीली टैक्सी का ₹28 से बढ़ाकर ₹31 किया गया था। करीब 18 महीने बाद अब फिर किराए में बदलाव किया गया है।

    1 सितंबर से याद रखें ये नए रेट

    ऑटो: पहले 1.5 KM के लिए ₹27
    ऑटो: उसके बाद ₹18.22 प्रति KM
    काली-पीली टैक्सी: पहले 1.5 KM के लिए ₹33
    टैक्सी: उसके बाद ₹21.90 प्रति KM
    नए रेट: 1 सितंबर 2026 से
    Meter recalibration की deadline: 30 नवंबर 2026
    लागू क्षेत्र: Mumbai Metropolitan Region