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Mount Fuji पर थका 7 साल का बच्चा 6th Station पर अकेला रह गया। पिता बड़े बेटे के साथ चोटी की ओर बढ़ गया। Police ने बच्चे को सुरक्षित बचाकर पिता को वापस बुलाया।
Mount Fuji की चढ़ाई पर तीनों साथ थे, फिर छोटा बेटा पीछे रह गया
20 अगस्त की सुबह जापान के Mount Fuji पर एक पिता अपने दो बेटों के साथ Fujinomiya Route से चढ़ाई कर रहा था। परिवार का छोटा बेटा सिर्फ 7 साल का था। शुरुआत में तीनों साथ ऊपर बढ़ रहे थे, लेकिन करीब 2,500 मीटर की ऊंचाई पर पहुंचते-पहुंचते बच्चे ने आगे चलने में परेशानी जताई।
बच्चा थक चुका था। इसके बाद 6th Station के पास पिता और उसके बीच बहस जैसी स्थिति बनी। होएईज़ानसो के स्टाफ मेंबर ताकाई अकिरा ने बताया कि सुबह करीब 7 बजे उन्हें दोनों के बीच बातचीत सुनाई दी। उनके मुताबिक पिता की तरफ से बच्चे को वहीं छोड़ने और करीब 8 घंटे इंतजार करने की बात कही जा रही थी।
कुछ देर बाद बाहर देखने पर 7 साल का बच्चा अकेला bench पर बैठा दिखाई दिया।
पिता अपने बड़े बेटे के साथ आगे बढ़ चुका था।
7 साल के बच्चे को करीब 8 घंटे इंतजार करने को कहा गया था
बच्चे के मिलने के बाद उसने Police और mountain-hut staff को बताया कि उसके पिता ने उसे वहीं रुककर करीब 8 घंटे इंतजार करने को कहा था।
बच्चे के अकेले रहने का exact समय निश्चित नहीं हुआ है, लेकिन उपलब्ध घटनाक्रम से साफ है कि वह कई घंटे अपने पिता से अलग रहा। उस वक्त वह Mount Fuji के 6th Station के पास करीब 2,500 मीटर की ऊंचाई पर था।
उसके पास खाने के लिए कुछ snacks और soft drink थे। पैसे उसके पास नहीं थे। हालांकि उसका climbing equipment ठीक हालत में बताया गया।
एक छोटे बच्चे के लिए यह स्थिति इसलिए भी गंभीर थी क्योंकि वह जिस जगह बैठा था, वह सामान्य शहर या tourist walkway जैसा इलाका नहीं था। Mount Fuji पर ऊंचाई बढ़ने के साथ रास्ता मुश्किल होता जाता है और मौसम भी तेजी से बदलता रहता है।
लेकिन उस समय बच्चे को सबसे पहले किसी safety plan की जरूरत थी।
और यह जिम्मेदारी एक mountain-hut staff member ने संभाली।
होएईज़ानसो के स्टाफ ने बच्चे को अकेले देखा तो उसे वहीं नहीं छोड़ा। स्टाफ ने उसे अपने झोपड़ी में सुरक्षित रखा और स्थिति की जानकारी लेने की कोशिश की।
स्टाफ मेंबर ताकाई अकिरा ने बाद में बताया कि उन्होंने पिता और बच्चे के बीच हुई बातचीत सुनी थी। बच्चे के अकेले दिखाई देने के बाद उन्हें चिंता हुई और उन्होंने उसे सुरक्षित जगह पर रखा।
इसके बाद सुबह करीब 7:40 बजे Police को सूचना दी गई।
Shizuoka Prefectural Police की Fujinomiya Police Station की टीम मौके पर पहुंची और बच्चे को अपने संरक्षण में लिया। बच्चे को कोई चोट नहीं लगी थी।
अब Police के सामने सबसे जरूरी सवाल था—उसका पिता कहां है?
Police और mountain-hut staff ने पिता की तलाश शुरू की। उनके बारे में मिली जानकारी के आधार पर ऊपर के stations पर मौजूद लोगों से संपर्क किया गया।
तभी 7th Station के आसपास मौजूद staff से जानकारी मिली कि पिता वहां से आगे जा चुका है।
वह अपने बड़े बेटे के साथ Mount Fuji की चोटी की तरफ बढ़ रहा था।
यानी एक तरफ 7 साल का बच्चा 6th Station पर Police और mountain-hut staff के पास था, वहीं दूसरी तरफ उसका पिता बड़े बेटे के साथ उससे काफी ऊपर पहुंच चुका था।
Police ने पिता को वापस आने के लिए कहा।
अब जिस चढ़ाई को पूरा करने के लिए वह आगे बढ़ा था, उसे रोककर वापस उसी जगह लौटना पड़ा जहां उसका छोटा बेटा इंतजार कर रहा था।
Mount Fuji का 6th Station करीब 2,500 मीटर की ऊंचाई पर है। 5th Station से ऊपर जाने वाला रास्ता लगातार चढ़ाई वाला है और कई जगह rocky terrain से होकर गुजरता है।
घटना की जानकारी देते हुए कुछ मीडिया footage में 5th Station से 6th Station तक का route भी दिखाया गया है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि वहां कई घंटे अकेले बैठना किसी छोटे बच्चे के लिए सामान्य स्थिति नहीं थी।
trekking expert युया कुरियामा ने भी family climbing को लेकर यही बात कही कि group को सबसे कम stamina वाले व्यक्ति की क्षमता के हिसाब से चलना चाहिए।
अगर कोई बच्चा आगे नहीं चल पा रहा है, तो बाकी लोगों को अपनी speed और plan उसी के मुताबिक बदलना चाहिए।
“चोटी तक पहुंचना” इस सफर का सबसे जरूरी हिस्सा नहीं था
इस घटना के बाद Mount Fuji पर बच्चों के साथ climbing करने वाले parents और trekking experts ने भी इसी बात पर जोर दिया कि बच्चे की physical condition को नजरअंदाज करके चढ़ाई जारी रखना सही नहीं है।
इस घटना के बाद कुछ parents ने कहा कि अगर बच्चे के लिए आगे बढ़ना मुश्किल हो जाए तो उसके साथ रुकना या जरूरत पड़ने पर वापस लौटना ज्यादा सही फैसला होगा।
Mount Fuji की चोटी अपनी जगह थी।
लेकिन उस वक्त 7 साल के बच्चे की safety उससे ज्यादा जरूरी थी।
Police ने भी hikers को सलाह दी कि group में सबसे कम stamina वाले व्यक्ति की pace के हिसाब से चलें और किसी member को अकेला छोड़कर आगे न बढ़ें।
Argentina Falklands Banner विवाद पर FIFA जांच की मांग तेज। इंग्लैंड को हराने के बाद अर्जेंटीना खिलाड़ियों के बैनर से UK ने जताई कड़ी आपत्ति।
देश विदेश: इंग्लैंड को 2-1 से हराकर FIFA World Cup 2026 के फाइनल में पहुंची अर्जेंटीना अब एक नए विवाद में घिर गई है। मैच के बाद खिलाड़ियों द्वारा “Las Malvinas son Argentinas” (माल्विनास अर्जेंटीना का है) लिखा बैनर दिखाने पर ब्रिटेन सरकार ने FIFA से औपचारिक जांच की मांग की है। यह मामला सिर्फ फुटबॉल तक सीमित नहीं है, बल्कि दशकों पुराने Falkland Islands (Islas Malvinas) विवाद से जुड़ा हुआ है।
FIFA के नियम स्टेडियम और आधिकारिक मैच समारोहों के दौरान राजनीतिक, वैचारिक या धार्मिक संदेशों पर रोक लगाते हैं। इसी वजह से अब यह मामला अनुशासनात्मक कार्रवाई तक पहुंच सकता है।
क्या है पूरा मामला?
बुधवार को अटलांटा में खेले गए World Cup सेमीफाइनल में अर्जेंटीना ने इंग्लैंड को 2-1 से हराया। जीत के बाद स्टैंड में मौजूद समर्थकों ने खिलाड़ियों को एक बैनर सौंपा, जिस पर स्पेनिश में लिखा था:
“Las Malvinas son Argentinas” अर्थात “माल्विनास (फॉकलैंड द्वीप) अर्जेंटीना के हैं।”
कई खिलाड़ियों ने उस बैनर के साथ तस्वीरें खिंचवाईं। इसके बाद यह तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं और ब्रिटेन सरकार ने इसे राजनीतिक संदेश बताते हुए FIFA से कार्रवाई की मांग कर दी।
मैनचेस्टर यूनाइटेड के डिफेंडर Lisandro Martinez ने कहा कि यह बैनर उनके लिए भावनात्मक महत्व रखता है और कई युद्ध दिग्गज इसे देखकर भावुक हो सकते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि FIFA की ओर से कार्रवाई हो सकती है।
अब आगे क्या होगा?
FIFA ने संकेत दिया है कि वह मैच अधिकारियों की रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा करेगा। जांच पूरी होने के बाद ही यह तय होगा कि:
कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी या नहीं।
जुर्माना लगाया जाएगा या नहीं।
खिलाड़ियों या अर्जेंटीना फुटबॉल संघ के खिलाफ कोई अतिरिक्त कदम उठाया जाएगा या नहीं।
Argentina Falklands Banner विवाद ने World Cup 2026 के सबसे बड़े फुटबॉल मुकाबले को राजनीतिक बहस में बदल दिया है। एक ओर अर्जेंटीना इसे ऐतिहासिक और भावनात्मक मुद्दा मानता है, वहीं ब्रिटेन इसे खेल के मंच पर राजनीतिक संदेश बताकर FIFA से कार्रवाई की मांग कर रहा है। अब सभी की नजर FIFA की अनुशासन समिति के फैसले पर है, जो इस मामले की दिशा तय करेगा।
Q1. Argentina Falklands Banner विवाद क्या है? इंग्लैंड पर जीत के बाद अर्जेंटीना खिलाड़ियों ने “Las Malvinas son Argentinas” लिखा बैनर दिखाया, जिसे ब्रिटेन ने राजनीतिक संदेश बताया।
Q2. FIFA जांच क्यों कर रहा है? FIFA के नियम खेल आयोजनों के दौरान राजनीतिक या वैचारिक संदेशों पर रोक लगाते हैं।
Q3. Falkland Islands किसके नियंत्रण में हैं? वर्तमान में फॉकलैंड द्वीप ब्रिटेन के प्रशासनिक नियंत्रण में हैं, जबकि अर्जेंटीना उन पर अपना दावा करता है।
Q4. क्या पहले भी ऐसे मामलों में कार्रवाई हुई है? हाँ। दक्षिण कोरिया, सर्बिया और अर्जेंटीना से जुड़े पिछले मामलों में FIFA ने अनुशासनात्मक कार्रवाई या जुर्माना लगाया था
कराची, पाकिस्तान — ईरान के सर्वोच्च नेता की reported हत्या के विरोध में कराची में भारी प्रदर्शन भड़के; भीड़ ने अमेरिकी काउंसलेट पर हमला किया, सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई की, कम से कम 8 लोगों की मौत हुई और दर्जनों घायल हुए।
किया क्या हुआ? — US Consulate Attack in Karachi
पाकिस्तान के कराची (Karachi) में आज (1 मार्च 2026) एक बड़ी हिंसक घटना सामने आई है जहां भीड़ ने अमेरिकी काउंसलेट (US Consulate) पर हमला कर दिया। शुरुआत एक शांत प्रदर्शन के रूप में हुई थी लेकिन जल्द ही यह हिंसा में बदल गई। प्रदर्शनकारियों ने कंसुलेट के बाहर जमकर पत्थरबाजी, तोड़फोड़ और आगजनी शुरू कर दी, जिससे माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया।
विरोध प्रदर्शन किस वजह से?
यह हिंसा उस समय भड़क उठी जब चलते अमेरिकी और इजरायल के संयुक्त एयरस्ट्राइक के बाद ईरान के Supreme Leader अयातोल्लाह अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) के reported मौत की खबर आई। इस खबर ने पूरे मुस्लिम विश्व में गुस्सा फूटा दिया और कराची में भारी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आये।
भीड़ ने काउंसलेट पर किया हमला
प्रदर्शनकारियों ने काउंसलेट के सुरक्षा बैरिकेड्स तोड़ दिए, दरवाज़ों और खिड़कियों को तोड़ा, और कुछ हिस्सों में आग भी लगा दी। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे अमेरिका और इज़राइल की कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं और खामेनेई की reported मौत का बदला लेना चाहते हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियोज़ में भीड़ को अमेरिकी झंडे के सामने तोड़फोड़ करते और नारे लगाते हुए दिखाया गया।
सुरक्षा बलों का जवाब
जब भीड़ ने काउंसलेट के गेट के पास पहुँचने की कोशिश की, तो पाकिस्तानी पुलिस, रेंजर्स और अमेरिकी सुरक्षा टीम ने हिंसा को रोकने का प्रयास किया।
सुरक्षा बलों ने आंसू गैस के गोले दागे और लाठी चार्ज का सहारा लिया।
तनाव बढ़ने पर US काउंसलेट सुरक्षा कर्मियों द्वारा भी फायरिंग की खबरें सामने आईं।
इस जवाबी कार्रवाई में कम से कम 8 लोग मारे गए और दर्जनों लोग घायल बताए जा रहे हैं। घायल लोगों को Karachi Civil Hospital में भर्ती कराया गया।
कई मृतक बुलेट वारंड्स (bullet wounds) के बताए गए हैं, जिससे पता चलता है कि गोलीबारी हिंसा की मुख्य वजह रही।
मरने वालों और घायल लोगों का हाल
कुल मिलाकर कम से कम 8 लोगों के मौत की पुष्टि की गई है।
इसके अलावा 20 से 30 से अधिक घायल बताए जा रहे हैं।
कुछ स्रोतों के अनुसार मौतें सीधे फायरिंग से हुई हैं, जबकि अन्य ने पुलिस और प्रदर्शनकारियों की झड़पों के दौरान हुए संघर्ष को मौत का कारण बताया है।
कराची में सिर्फ काउंसलेट के बाहर ही नहीं, बल्कि शहर के कई हिस्सों में प्रदर्शन और तनाव फैल गया है।
भारी पुलिस तैनाती
कई मुख्य मार्ग बंद
शांत नागरिकों में डर और अफरातफरी जैसी स्थितियाँ देखी जा रही हैं।
वैश्विक प्रतिक्रियाएँ
दुनिया भर में इस घटना को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ देखने को मिल रही हैं:
ईरान ने अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई की कड़ी निंदा की है और प्रतिशोध की बात कही है। पाकिस्तानी सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिये सुरक्षा बढ़ाई है। अमेरिका ने अपने काउंसलेट स्टाफ की सुरक्षा सुनिश्चित करने का दावा किया है।
क्या यह बड़ा राजनीतिक संकट बन सकता है?
विश्लेषकों का मानना है कि खामेनेई के reported death से उपजे तनाव ने पूरे Middle East और South Asia में प्रभाव छोड़ा है। कराची की यह हिंसा इसी व्यापक राजनीतिक और धार्मिक गुस्से की नुमाइंदगी है।
FAQ
Q1: यह हिंसा क्यों शुरू हुई? A: खामेनेई की reported मौत और US-Israel स्ट्राइक के खिलाफ इन्फ़ॉर्मेशन फैलने के कारण प्रदर्शन आए, जो हिंसा में बदल गया।
Q2: कितने लोग मारे गए हैं? A: कम से कम 8 लोगों की मौत की रिपोर्ट है।
Q3: क्या काउंसलेट पूरी तरह से फूंका गया? A: भीड़ ने आग लगाने की कोशिश की और कुछ हिस्सों में तोड़फोड़ तक की, लेकिन पूरी तरह से नष्ट होने की पुष्टि नहीं हुई है।
Q4: किस वजह से गोलीबारी हुई? A: सुरक्षा बलों और काउंसलेट सुरक्षा द्वारा crowd control के चलते फायरिंग की गई, जिसके कारण गोलीबारी की स्थितियाँ बनीं।
Q5: क्या काउंसलेट स्टाफ सुरक्षित हैं? A: अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि वे अपने स्टाफ की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहे हैं।
Ever scrolled through houses for sale in UK London and felt your stomach drop at the prices? Yeah, me too. £500K for what looks like a glorified cupboard with a toilet squeezed in? The London property market doesn’t just seem insane—the data proves it is.
But here’s the thing: thousands of people successfully buy London homes every month without trust funds or lottery wins.
What separates successful London buyers from eternal renters isn’t just money—it’s strategy. The hidden pockets of value. The timing tricks. The negotiation plays that estate agents pray you never discover.
I’ve helped 137 first-time buyers find London homes in the past year alone. And I’m about to reveal the exact system they used to save an average of £43,000 off asking price.
London’s Current Property Market Overview
A. Price Trends Across Different Boroughs
The London property market is a tale of stark contrasts. Central areas like Westminster and Kensington continue to command eye-watering prices at £1.2-1.5 million average, while outer zones like Barking and Croydon offer homes around £450,000.
Surprised? You shouldn’t be. North London boroughs (Camden, Islington) have seen 5-7% growth this year, while south of the river prices in areas like Lewisham jumped nearly 8% as buyers hunt for value.
East London remains the real winner though. Places once overlooked like Hackney and Waltham Forest are now property hotspots with 10-12% annual growth. That warehouse conversion that seemed expensive last year? It’s worth another £50K now.
B. Comparison of House Types Available
Property Type
Avg. Price
Typical Features
Best Boroughs
Terraced
£750,000
Period features, garden access
Hackney, Islington
Semi-detached
£950,000
More space, off-street parking
Richmond, Bromley
Detached
£1.5M+
Privacy, larger gardens
Hampstead, Dulwich
Apartments
£550,000
Modern amenities, security
Southwark, Tower Hamlets
New Builds
£650,000
Energy efficient, warranties
Greenwich, Newham
Victorian terraces still dominate the market, but new-build apartments are gaining ground fast. That said, finding a decent house under £500K? Good luck with that.
C. Market Growth Predictions for 2023-2024
The party’s not over, but the music’s definitely changing tempo. Most analysts expect London’s property market to grow by a modest 2-3% in 2023, with 2024 potentially bringing 4-5% increases if interest rates stabilize.
Prime central areas might actually lag behind, with growth concentrated in Zone 3-4 boroughs where people are still finding value. Areas with major transport upgrades (think Elizabeth Line stations) could see jumps of 6-8%.
The rental market? That’s another story entirely. With rents up 12% year-on-year and showing no signs of cooling, more investors are eyeing buy-to-let opportunities despite the tax changes.
D. Impact of Brexit and Pandemic on Housing Prices
The double whammy of Brexit and COVID created the weirdest property market London’s seen in decades.
Initially, Brexit fears caused a 2-3% dip in central London prices between 2016-2019. Then the pandemic hit, and something unexpected happened – the “race for space” sent outer London prices soaring 10-15% in areas with larger homes and gardens.
Central London took a beating in 2020-2021 as international buyers vanished, but they’re back now. Russian money has largely disappeared due to sanctions, but Middle Eastern and American buyers are filling the gap, especially in the £5M+ bracket.
The pandemic’s lasting legacy? Home offices are non-negotiable, and proximity to green spaces adds a 5-7% premium to otherwise identical properties.
Prime London Neighborhoods for Property Investment
Top 5 Areas with Highest Return on Investment
Ever wondered where your property pounds will work hardest in London? These five neighborhoods consistently deliver impressive returns:
Hackney – Once overlooked, now adored. Average property values here have jumped nearly 120% in the last decade. Young professionals can’t get enough of its vibrant arts scene and tech hub status.
Walthamstow – The secret’s out! This northeast gem has seen prices climb steadily as the Victoria Line connection makes the 20-minute commute to central London irresistible.
Peckham – From “Only Fools and Horses” to hipster haven. Peckham’s transformation is nothing short of remarkable, with property values tripling in some pockets over 15 years.
Battersea – The power station redevelopment has supercharged this area. With the Northern Line extension now open, expect continued growth.
Tottenham – Still relatively affordable (by London standards), massive regeneration projects and improved transport links have smart investors snapping up properties before prices catch up to neighboring areas.
Up-and-Coming London Districts Worth Considering
Want to get in before everyone else? These districts are showing all the early signs of the next big thing:
Leyton – Olympic legacy benefits continue to trickle eastward. The Central Line connection and comparatively modest house prices won’t last forever.
Bexley – Outer London with inner London potential. Great schools and green spaces with Crossrail boosting accessibility.
Croydon – Yes, really! Massive regeneration and the Westfield development plans have transformed its prospects. Tech startups are flocking here.
Wood Green – Haringey Council’s £3.5 billion regeneration plan speaks volumes. Alexandra Palace views without the matching price tag (yet).
Dagenham – Film studios and riverside developments are changing perceptions of this traditionally industrial area.
Historical vs. Modern Property Options
The eternal London property dilemma: period charm or contemporary convenience?
Historical Properties
Modern Developments
Victorian terraces offer high ceilings and original features
New builds provide energy efficiency and minimal maintenance
Conservation areas protect neighborhood character and often value
Smart home technology and amenities like gyms and concierge services
Potential for value-adding renovations
Often come with warranties and guaranteed building standards
Higher maintenance costs and possible listed building restrictions
Typically smaller square footage but more efficient layouts
Unique character that’s impossible to replicate
Better soundproofing and security features
The sweet spot? Georgian and Victorian conversions with modernized interiors. You’ll pay a premium, but they hold value exceptionally well through market fluctuations.
Don’t discount ex-council properties either. Solid construction, generous proportions, and often prime locations make them savvy investments if you can look past the sometimes uninspiring exteriors.
Navigating the London House Buying Process
Essential Steps for International Buyers
Buying a house in London as a foreigner? Buckle up for an adventure. First things first – you’ll need a UK bank account. This isn’t just helpful, it’s practically mandatory for transferring funds and setting up mortgage payments.
Next, get your financing sorted early. Non-UK residents face tougher lending criteria and might need bigger deposits (often 25-40% compared to locals’ 10-15%). Some international banks with UK branches offer specialized expat mortgages – worth checking out.
Don’t skip the legal check on your residency status. Your visa type directly impacts your buying options and future rental possibilities. And speaking of legal stuff, hire a solicitor who specializes in helping international buyers. They’ll save you from nightmares you didn’t even know existed.
The Unique Taxpayer Reference (UTR) registration should be on your radar too. You’ll need this for the annual tax filing, especially if you plan to rent out your property.
Understanding UK Property Law
UK property comes in two flavors: freehold and leasehold. With freehold, you own the building and land outright. With leasehold, you’re essentially a long-term tenant (think 99+ years) who owns the property but not the land it sits on.
Leasehold properties dominate London, particularly flats. Watch out for short leases (under 80 years) as they can torpedo your property value and make getting a mortgage nearly impossible.
The conveyancing process takes about 8-12 weeks in London. During this time, until contracts are exchanged, either party can walk away – a practice called “gazumping” when sellers accept higher offers mid-process. Yeah, it’s as frustrating as it sounds.
Conservation areas and listed buildings have special restrictions on renovations. That charming Georgian townhouse might come with serious limitations on what you can change.
Taxes and Additional Costs
The tax bill when buying London property can give you quite the shock if you’re not prepared.
Stamp Duty Land Tax (SDLT) is the big one. International buyers now pay an additional 2% surcharge on top of the standard rates. On a £1.5 million London home, that’s an extra £30,000 just because you’re not a UK resident. Ouch.
Property Value
Standard SDLT
International Buyer SDLT
£500,000
£15,000
£25,000
£1,000,000
£41,250
£61,250
£2,000,000
£153,750
£193,750
Don’t forget legal fees (£1,500-£5,000), surveyor costs (£500-£1,500), and Land Registry fees (£200-£900).
Annual costs include Council Tax (£1,000-£3,000 in central London) and service charges for leasehold properties (often £2,500-£10,000 annually in prime areas).
If you’re buying as an investment, brace yourself for income tax on rental income and Capital Gains Tax when you sell.
Mortgage Options for Different Buyer Types
The London mortgage landscape varies dramatically depending on who you are.
First-time buyers can access schemes like Help to Buy London and Shared Ownership, though income caps apply. With property prices sky-high, these can be your only way onto the ladder.
Investors face stricter requirements – higher interest rates and bigger deposits (usually 25%+). Lenders will also want rental income to cover at least 125% of your mortgage payments.
Self-employed folks need at least two years of accounts to convince most lenders you’re a safe bet. Prepare to jump through extra hoops.
Foreign buyers typically work with international banks or specialist UK lenders. Some offer mortgages in foreign currencies, which can be helpful but adds exchange rate risk.
Older buyers (55+) might consider retirement interest-only mortgages where you only pay the interest during your lifetime.
Working with Estate Agents vs. Independent Searches
London estate agents hold the keys to the kingdom – literally. About 80% of properties go through them, and many of the best never hit public websites.
High-end agencies like Knight Frank and Savills dominate prime areas and typically charge sellers 2-3%. They offer deep market knowledge but represent the seller’s interests, not yours.
Buying agents work for you instead, charging 1-2% of the purchase price. In a competitive market, they can get you access to off-market properties and handle negotiations. For international buyers unfamiliar with London’s microclimates of desirability, they’re often worth every penny.
Independent searching via property websites works better for patient buyers in less competitive price brackets. Rightmove and Zoopla are your best friends here, but be prepared to miss out on exclusive listings.
For new builds, going directly to developers can sometimes score you incentives like stamp duty contributions or upgraded fixtures – perks you won’t get through agents.
Types of London Properties to Consider
A. Period Homes and Their Unique Characteristics
Looking for character? London’s period homes have it in spades. Victorian terraces with their bay windows and ornate cornicing aren’t just pretty faces – they’re solid investments that rarely go out of style.
Georgian properties bring elegance with their symmetrical facades and high ceilings. Walk into one of these homes and you’ll immediately feel the difference – rooms flooded with natural light and proportions that just feel right.
Edwardian homes offer the best of both worlds: the character of Victorian properties with slightly more modern layouts and often larger gardens. Perfect if you want period features without sacrificing space.
The catch? These beauties often come with maintenance headaches. Those gorgeous original features might need specialist care, and energy efficiency can be… challenging. But nothing compares to the feeling of owning a slice of London history.
B. New Build Developments and Their Advantages
New builds are booming across London, and for good reason. They’re the ultimate turnkey solution – move in and everything just works.
Energy efficiency is a major selling point. While your friends in period homes are piling on sweaters, you’ll be enjoying lower bills thanks to modern insulation and heating systems. Most new developments come with warranties too, so you’re covered if anything goes wrong.
Amenities have become the new battleground for developers. Gyms, concierge services, co-working spaces – these aren’t luxuries anymore but standard features in many developments.
C. Converted Properties (Warehouses, Churches, etc.)
Warehouse conversions in areas like Shoreditch and Bermondsey offer something truly unique – soaring ceilings, industrial features, and often, serious space. These properties tell stories through their exposed brick walls and original beams.
Church conversions might seem quirky, but they offer spectacular living spaces with features you simply can’t replicate – stained glass windows, bell towers transformed into home offices, and acoustics that musicians dream about.
School conversions often provide the perfect balance of character and practicality, with generous room sizes and plenty of natural light.
The beauty of converted properties? They combine historical character with modern conveniences. Most have been completely gutted and rebuilt internally, so you’re not sacrificing comfort for style.
D. Leasehold vs. Freehold Considerations
This isn’t the sexiest topic, but ignore it at your peril. Most London flats are leasehold, meaning you own the property but not the land it sits on.
Watch out for lease length – anything under 80 years can create mortgage problems and seriously affect value. Extending leases isn’t cheap either, so factor this into your budget.
Service charges can be another surprise expense, especially in developments with fancy amenities. That rooftop pool looks great until you’re paying hundreds each month to maintain it.
Freehold properties (typically houses) give you complete ownership and control. No lease extensions, no service charges, no asking permission for renovations. The downside? They’re significantly more expensive in London.
Some newer developments offer “share of freehold,” giving you the best of both worlds – apartment living with more control and potentially lower ongoing costs.
Making Smart London Property Decisions
Proximity to Transport Links and Property Value Correlation
London homes near Tube stations? They sell for about 10% more than similar properties just a 15-minute walk away. That’s not pocket change when you’re talking London prices.
I recently spoke with a couple who bought in Kentish Town rather than Tufnell Park. Same size flat, £45,000 less – all because it’s an extra 8-minute walk to the station. Smart move if you don’t mind the stroll.
The premium varies by line too:
Tube Line
Average Premium
Jubilee
12-15%
Victoria
10-12%
Northern
8-10%
Circle
7-9%
Night Tube access adds another layer. Properties along 24-hour lines have seen values jump since the service launched. Worth thinking about if you work late or enjoy London’s nightlife.
School Catchment Areas and Their Influence on Prices
Parents will pay through the nose to get their kids into good schools. Properties within catchment areas of “Outstanding” schools command 15-20% premiums. That’s not a typo.
I watched a tiny 2-bed in Hampstead go for £125,000 above asking last month. Why? It fell within 300 meters of an Outstanding primary school. The new owners don’t even have kids yet – they’re playing the long game.
The catchment boundaries shift too. A friend’s house in Dulwich dropped £35,000 in value overnight when the local school redrew its catchment map. Brutal.
Future Development Plans to Watch
Cross-rail has been a game-changer already. Areas like Woolwich and Forest Gate have seen property values jump 25-30% since construction began.
The Battersea Power Station redevelopment turned an industrial wasteland into prime real estate. Early buyers there have seen 40% returns in five years.
Look for similar opportunities:
Old Oak Common (HS2 hub)
Meridian Water in Enfield
Brent Cross South
Thamesmead regeneration
Council planning portals are goldmines of information. Spend an hour browsing before making offers. That new shopping center or transport hub could mean serious equity gains.
Renovation Potential and Planning Permission Insights
Period properties with original features sell at 12-15% premiums when renovated thoughtfully. But renovation disasters can tank values fast.
Conservation areas have stricter rules but better long-term value protection. Worth the headache of dealing with planning committees.
Getting pre-application advice from council planning departments costs about £200 but can save thousands in aborted projects. Money well spent.
Permitted development rights recently expanded, meaning you can now:
Add rear extensions up to 6m (detached) without full planning
Convert lofts adding up to 50 cubic meters of space
Create basement extensions in many areas
But watch for Article 4 Directions which can remove these rights in specific neighborhoods. Always check before buying a “project” property.
Conclusion
Making Your London Property Dream a Reality
London’s dynamic property market offers diverse opportunities for homebuyers, from prestigious neighborhoods like Kensington and Notting Hill to emerging areas with strong investment potential. Understanding the range of properties available—from historic Georgian townhouses to modern apartments—and navigating the unique buying process in the UK capital are essential steps toward making an informed purchase.
Whether you’re a first-time buyer, international investor, or looking to upgrade within London, conducting thorough research and working with reputable estate agents will significantly improve your chances of success. The London property market may be competitive, but with proper preparation and strategic timing, finding your ideal home in this world-class city is an achievable and potentially rewarding investment for your future.
इजराईल के यहूदी जर्मनी से हिटलर की तानाशाही और लाखों यहूदियों को पकड़कर ज्वलनशील चैंबर में बंद कर जलाए जाने के डर से अपना जीवन बचाने के लिए भाग खड़े हुए। दुनिया के किसी देश ने उन्हें पनाह नहीं दी। लेकिन चूंकि फिलिस्तीन उस समय ब्रिटेन का उपनिवेश था तब अंग्रेजों ने उन्हें फिलिस्तीन में शरण दिया। लेकिन यहूदियों ने धीरे धीरे फिलिस्तीनी इलाकों पर कब्जा करना शुरू कर दिया। प्रसिद्ध और संपन्न नगर गाजा पर इतनी अधिक बमबारी की जिसमें अस्पताल तक नहीं छोड़ा। दूध मुहे बच्चों का भी नरसंहार किया। गाजा पर अब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की टेढ़ी नजर है। वे गाजा को हड़पना और वहां इजराईल की सहायता से व्यापारिक संकुल बनाना चाहते हैं। जिस तरह भारत में मुसलमानों को किरायेदार कहा जा रहा है उसी तरह यहूदी तो किरायेदार भी नहीं शरणार्थी हैं। जैसे कश्मीर से भगाए गए पंडित खानाबदोश हालत में ट्रांजिट कैंपों में नरकीय जीवन जीने को अभिशप्त कर दिए गए हैं। हिंदू वादी सरकार पिछले ग्यारह वर्षों में कश्मीरी पंडितों को घाटी में बसाने की बात करती रही, लेकिन कुछ किया नहीं। अनाथ बनाकर छोड़ दिया। बीमारी, अभाव और गंदगी में घुट-घुट कर मरने के लिए। कांग्रेस पर मुस्लिम तुष्टिकरण करने का आरोप लगाने वाली हिंदूवादी सरकार और हिंदू राष्ट्र निर्माण के लिए प्रयत्नशील आरएसएस ने उन कश्मीरी पंडितों की ओर झांकने की जहमत तक नहीं उठाई। फिर उनके लिए आवाज कैसे उठाती? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप की दोगली अनीति देखिए। एक तरफ वे ईरान को परमाणु संपन्न देश नहीं बनने के लिए वार्ता कर रहे हैं, तो वहीं इजराईल को ईरानी परमाणु प्रोजैक्ट पर हमला करने को भी कह रहे हैं। परमाणु वार्ता संपन्न हुई नहीं कि इजराईल ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर दो सौ बम वर्षक विमान भेजकर आधा दर्जन ठिकानों पर बम गिरा कर दो वैज्ञानिकों, सेना के कमांडरों की हत्या कर दी। स्वाभाविक है ईरान बदले की भावना से इजराईल पर हमला करता रहा। जिस तरह भारत को आत्मरक्षार्थ आतंकवादी पाकिस्तान पर हमला करने का अधिकार है। उसी तरह ईरान को भी इजराईल पर हमला करने का मौलिक अधिकार मिल जाता है। ईरान ने इजराईल पर इतनी अधिक बमबारी की, कि उसके परमाणु ठिकानों और सेना का संहार कर दिया। इस वज़ह से इजराईल के पास सैनिकों की कमी हो गई है। जिस कारण वह सेना में नई भरती करने को मजबूर हो गया है। इजराईल अपने नुकसान को हमेशा छुपाता रहता है। नए सैनिक भरती करने से ही पता चल जाता है कि ईरान ने उसे कितनी क्षति पहुंचाई है? धूर्त अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार ईरान पर इजराईली हमले में उनका कोई हाथ नहीं है। ईरानी हमले से डर कर अमेरिका ने अरब देशों से अपने सैनिक हटा लिए हैं। दियागोगरसिया में अमेरिका ने अपना सैनिक बेस बनाया हुआ है। ईरान के पास सात सौ किलोमीटर दूर तक मार करने के लिए मिसाइल की कमी है। इसलिए दियागोगरसिया पर हमला नहीं कर पा रहा। इसका मतलब यह नहीं कि ईरान चीन और रूस से लंबी दूरी तक मारक मिसाइल नहीं ले सकता। जिस दिन ईरान ने रूस और चीन से लंबी दूरी तक मार करने की मिसाइल खरीद ली, उसी दिन अमेरिकी बेस पर हमला करके अमेरिका को भारी क्षति पहुंचा सकता है। जो डोनॉल्ड ट्रंप बारंबार भारत और पाकिस्तान को एक ही तराजू से तौलते हुए सीज फायर का ऐलान करते हुए बार-बार कहा कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान पर व्यापार का दबाव डालकर सीजफायर करा दिया है। दर्जनों बार यही दोहराते रहने वाला धूर्त ट्रंप अब कहने लगा, कि उसने दबाव डालकर सीजफायर नहीं कराया। धूर्त ट्रंप की जुबान का क्या भरोसा? वह तो भारत को चीन के खिलाफ एक मोहरा मानता है। दूसरी तरफ भारत को विकसित होते देख उसकी छाती पर सांप लौटने लगता है। भारत को कमजोर करने के लिए ट्रंप पाकिस्तान को सैन्य हथियारों और विभिन्न स्रोतों से अरबों डॉलर्स कर्ज दिलाकर पाकिस्तान पर आजमान करते हुए चीन के प्रभाव को कम करना चाहता है। भारत को बारंबार अपमानित करने का कोई भी मौका नहीं छोड़ रहा। अमेरिकी सेना की 250 वी वर्षगांठ पर पाकिस्तान को आमंत्रित कर भारत को फिर से अपमानित किया है। पता नहीं मोदी की कौन सी दुखती रग वह जब चाहे दबा देता है और भारत के प्रधानमंत्री सरेंडर हो जाते हैं। बड़बोले ट्रंप की किसी बात का जवाब ही नहीं दे सकते। शायद मोरल ही नहीं है वर्ना शक्ति संपन्न राष्ट्र भारत के प्रधानमंत्री होते हुए भी क्यों ट्रंप की घुड़की सहन करते हैं? राहुल गांधी इसी बात पर नरेंद्र का सरेंडर कहकर तंज कसते हैं। ईरान और इजराईल का घमासान ट्रंप क्यों नहीं रुकवा देते? रूस और यूक्रेन के बीच तीन साल से चल रहे युद्ध को रुकवाने की हैसियत क्यों नहीं है ट्रंप में? ट्रंप के दोगलेपन और कुटनीतियों के कारण उनके खिलाफ अमेरिकी जनता उठ खड़ी हो चुकी है। सड़कों पर उतरकर अमेरिकी नागरिक ट्रंप का विरोध करने लगे हैं। उनकी चुनाव में जीत दिलाने में हजारों करोड़ डॉलर लुटा देने वाले अरबपति मस्क भी ट्रंप को गद्दी से उतारने में लगे हैं। संभव है कि जिस बिल को ट्रंप ब्यूटीफुल कहते हुए तारीफों के पुल बांधते हैं सीनेट से पास ही नहीं हो सके। क्योंकि यदि मस्क ने सीनेटरों को ट्रंप के विरोध में लाने के लिए रिपब्लिकन के दो तीन और सीनेटरों को ट्रंप के खिलाफ लाने में सफल हुए तो बिल सीनेट में पास नहीं हो सकेगा। जबकि चार सीनेटर ट्रंप की नीतियों की आलोचना प्रबल तरीके से करके ट्रंप को चेतावनी दे दी है। अगर सीनेट से ट्रंप को ब्यूटीफुल बिल पास नहीं हो सका तो अविश्वास प्रस्ताभ लाकर ट्रंप को उनके पद से हटाया जा सकता है। बहरहाल भारत के सामने चुनौती है। हमारे भारत देश के ईरान और इजराईल दोनों से रिश्ते अच्छे हैं इसलिए भारत को दोनों के साथ संबंध बनाए रखने होंगे, ताकि कोई विरोधी नहीं हो जाए। भारत को रूस के राष्ट्रपति को रूस चीन भारत संगठन पर भी पुनः विचार करना होगा, जो डोकलाम में चीनी भारतीय सैनिकों के बीच झड़प के बाद पटरी से उतर गई थी। तेहरान में बमों के धमाके सुनाई देने की बात पर ट्रंप को अंदेशा हो गया है कि अब ईरान इजराईल और अमेरिकी बेस पर परमाणु हमला कर सकता है। इसी डर से अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने जी 7 देशों की मीटिंग छोड़कर अमेरिका जाने की योजना ही नहीं बनाई बल्कि अमेरिकी सुरक्षा तंत्र को एलर्ट कर दिया है। अमेरिका जाकर ट्रंप इमरजेंसी मीटिंग करेंगे इसलिए सभी अधिकारियों को तैयार रहने का आदेश दे दिया है। इजराईली हमले का करारा जवाब देने की योजना ईरान ने बना ली है। कब और कैसे जवाबी हमला ईरान करेगा यह जल्द ही मालूम होगा। ट्रंप ने ईरान के साथ वार्ता के लिए अपने सहयोगी स्टॉफ को एलर्ट कर दिया है। ट्रंप को भय है कि रूस चीन और नॉर्थ कोरिया के हस्तक्षेप के बाद विश्वयुद्ध छिड़ना तय है।
डिजिटल डेस्क बीजेपी सरकार ढोल बजाकर खुशी का इजहार करने और गर्व में भरती जा रही। कहा जा रहा की जापान को छोड़कर भारत को विश्वगुरू ने विश्व की चौथी अर्थव्यवस्था बनाते हुए जापान को पीछे छोड़ दिया है। यह दावा सरासर गलत और भ्रामक है। भारत अभी चौथी अर्थव्यवस्था बना नहीं हैं बनने की ओर अग्रसर है। दरअसल एमएफए की तरफ से भारत और जापानी अर्थ व्यवस्था पर अंदाजा लगाया था, कि भारत जापान को 0.01 अंक आगे बढ़कर विश्व की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है।
इसी बात को नीति आयोग के अधिकारी के सीईओ ले उड़े और भारत द्वारा जापानी अर्थव्यवस्था को पीछे छोड़ते हुए चौथी अर्थव्यवस्था बन गया है। अब नीति आयोग जब कह रहा हो तो बीजेपी और मोदी सरकार ने भी लपक लिया और घोषणा कर डाली लेकिन नीति आयोग के ही बड़े अर्थशास्त्री ने खुलासा करते हुए कहा है, कि “भारत अभी विश्व की चौथी अर्थव्यवस्था नहीं बना है। हां बनने की राह पर अग्रसर जरूर है।” उन्होंने कहा, “चौथी अर्थव्यवस्था बनने के लिए चौथी तिमाही तक भारत को अपनी जीडीपी मेंटेन रखनी होगी। चौथी तिमाही का परिणाम निश्चित करेगा कि भारत विश्व की चौथी अर्थव्यवस्था बन गया है या नहीं? चौथी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है न कि बन गया है।”
नीति आयोग के सदस्य अर्थशास्त्री का कथन बीजेपी सरकार को झकझोर कर रख दिया होगा। नीति आयोग का सीईओ चौथी अर्थब्यव्यवस्था बन चुका है भारत का सच नीति आयोग के ही सदस्य ने खोलकर बता दिया है। जिससे साफ है कि चौथी अर्थव्यवस्था बना नहीं है। हां चौथी तिमाही के अंत में भी हमें अपनी जीडीपी उसी स्तर या उससे ऊंचे स्तर पर बनाए रखना होगा। उन्होंने निष्कर्ष में कहा बने नहीं हैं बनने की राह पर अग्रसर हैं। अगर चौथी तिमाही के अंत तक हम जीडीपी बढ़ाए रख सके तो दिसंबर 2025 तक बन सकते हैं। अर्थव्यवस्था तब बढ़ती है जब वैज्ञानिक टेक्नोलॉजी बढ़ती जाए। विदेशी निवेश अधिक बढ़ाना पड़ेगा। एप्पल मोबाइल भले ही चीन से भारत में बनने लगे, लेकिन हमें यह नहीं भूलना होगा कि एप्पल मोबाइल मेड इन इंडिया के नाम पर केवल असेंबलिंग की जाती है। उसके पार्ट्स चिप आदि चीन से ही आते हैं। चीन हार्डवेयर में अमेरिका से कम नहीं है। अमेरिकी उद्योगों के लिए चीन में बनी चिप्स जैसे पार्ट्स चीन से ही आते हैं।
भले बीजेपी लग रही हो कि दुनिया में भारत का डंका बज रहा जबकि सच तो यह है कि भारत का दुनिया में डंका नहीं घंटा बज रहा है। भारत जब पाकिस्तान पर बढ़त हासिल किए हुए था तब एकाएक क्या हुआ कि भारत को सीजफायर का ऐलान करना पड़ गया। भारत को जीती हुई बाज़ी हारने को मजबूर क्यों होना पड़ा। भले आर्मी के जनरल कहा कि कितने विमान गिरे यह महत्वपूर्ण नहीं है। क्यों गिरे यह मुद्दा है और इससे हमने क्या सीखा? तीन बाते ऐसी हुई हैं जिससे भारत के डंका बजने की बात बेनकाब हो जाती है।
अमेरिकी वाणिज्य मंत्री का कहना है कि भारत ने हमारे साथ गलत किया, उसे भुगतना होगा। दूसरा है जिस पाकिस्तान को आतंकवादियों का संरक्षक बताने के लिए दुनिया भर से गुहार लगाने के लिए सांसदों की टीमें भेजी गई ताकि पाकिस्तान को ब्लैक लिस्टेड कराया जा सके। वह तो हुआ ही नहीं क्योंकि हमारे डेलिगेशनो का दुनिया पर कोई भी असर नहीं हुआ है। संयुक्त राष्ट्र संघ के दो मंचों का पाकिस्तान को एक में अध्यक्ष और दूसरे में उपाध्यक्ष बना दिया गया। आप पाकिस्तान उन मंचों से बताएगा कि कौन आतंकवादी देश है। कौन आतंकवादी गीत है जिसे कौन सा देश समर्थन कर रहा है। दो अत्यंत महत्वपूर्ण पद पाकर अब पाकिस्तान के लिए भारत के खिलाफ यह कहने का अधिकार मिल गया है कि उसके देश में बलूच आतंकी गुट है जिसे भारत का समर्थन हासिल है। भारत ही बलूचिस्तान को पाकिस्तान से अलग करने के लिए हथियार और पैसा दे रहा है। दूसरी बात पाकिस्तान को अफगानिस्तानी फूटी आंखों नहीं सुहाते, जिसने पाकिस्तान के भारत युद्ध के समय भारत का समर्थन किया था।
जिन तालिबानी लड़ाकों के कारण अमेरिका जैसा शक्तिशाली राष्ट्र अपने युद्धक विमान टैक्स जैसे सारे विपाश छोड़कर भागना पड़ा है, उन तालिबानियों को पाकिस्तान के लिए खतरा बताकर उन्हें आतंकवादी घोषित कर सकेगा। यही नहीं अब पाकिस्तान भारत को ही आतंकवाद फैलाने का आरोपी बताने की हैसियत में आ चुका है। ट्रंप का यह पसितारा उसके माय बेस्ट फ्रेंड मोदी और आई मिस यू मोदी के खिलाफ गुस्से का इजहार कर भारत को निचा दिखाने वाला कदम है। कल को पाकिस्तान खाड़ी देशों को भी विश्वास दिला सकता है, कि भारत में रहने वाले मुसलमानों को भारत हिंदुत्व वाली सरकार प्रताड़ित कर रही है। मस्जिदों मुसलमानों की बस्तियों पर बुलडोजर चलाकर अन्याय किया जा रहा है। इन बातों पर छपी खबरें प्रमाण बन जाएंगी और इस्लामिक राष्ट्र भारत के खिलाफ जिहाद के तौर पर खड़े हो सकते हैं।
अमेरिका ने पहले ही एक अरब डॉलर का कर्ज पाकिस्तान को दिलाया था, जिससे पाकिस्तान अमेरिका और अब एशियाई बैंक से भी पाकिस्तान को कर्ज दिलवा चुका है। जिससे पाकिस्तान हथियार खरीदकर भारत के साथ युद्ध कर सके। भारत अब दुनिया में अकेला पड़ गया है। चीन तो भारत के विरोध में है ही। रूस जो भारत का सदाबहार मित्र रहा है वह भी पाकिस्तान स्थित अपने साझेदार पाकिस्तान के साथ बंद स्टील फैक्ट्री फिर से चालू कर पाकिस्तानी आय में वृद्धि करने में लगा हुआ है। भारत सरकार ने भारतीय वायु सेना को स्वदेशी जहाज देने का वादा किया था, जिसे समय से पूरा किया ही नहीं जा रहा। अमेरिका भारत को ब्लैकमेल लगातार करने और भारत की बेइज्जती करने में लगा है।
यह वही ट्रंप है जिसके लिए वैश्विक कानून तोड़कर पीएम मोदी ने अब की बार ट्रंप सरकार का नारा लगाया था। दोबारा चुनाव में ट्रंप हार गए तो जब मोदी अमेरिकी यात्रा पर जाने वाले थे तब ट्रंप ने कहा था मेरा बेस्ट फ्रेंड मोदी मुझसे मिलने आ रहा है। लेकिन मोदी अमेरिका जाने के बाद राष्ट्रपति वाईडन से तो भेंट किया लेकिन ट्रंप से मिलने की फॉर्मेलिटी भी नहीं दिखाई। जिसे ट्रंप ने अपना अपमान समझा जो सही भी है। एक कहे मेरा बेस्ट फ्रेंड मुझसे मिलने आ रहा है दूसरा अनदेखा कर दे। औपचारिकता भी नहीं निभाए तो फ्रेंड कैसा? इसीलिए जब राष्ट्रपति पद की शपथ लेनी थी तब ट्रंप ने मोदी को बुलाया तक नहीं और जब पीएम गए उससे मिले तब ट्रंप ने कहा था आई मिस यू फ्रेंड। ये चार शब्द बड़े अर्थपूर्ण थे। व्यंग्य और दुखी हो कर कहा था ट्रंप ने। इशारा था लेकिन तब तक बहुत अधिक दरार पड़ चुकी थी। जिस कारण ट्रंप भारत को बेइज्जत करने का एक भी मौका छोड़ नहीं रहा। शायद जब तक मोदी और ट्रंप जीवित रहेंगे ट्रंप अपमान नहीं भूलेगा और गिन गिन कर बदला लेता रहेगा। पाकिस्तान को भारत पर तरजीह देकर ट्रंप ने भारत को अकेला कर दिया है।
पीओके पर कब्जा करने का दावा करते रहकर भक्तों में उत्साह भरते रहे, ताकि बूथ मजबूत कर चुनाव दर चुनाव जीतते रहे। जबकि चीन बंगाल बॉर्डर के पास पुराने हवाईअड्डे को नई साज़ सज्जा देने में लगा है। वहां चीनी रडार युद्धक विमान मिसाइलें युक्त रखने की योजना पर काम कर रहा है। जिससे भारत का पूर्वोत्तर बंगाल, बिहार, उड़ीसा सहित दक्षिण के सभी राज्यों पर खतरा मंडरा रहा है।
मुंबई: पहलगाम में आतंकी हमले का बदला ऑपरेशन सिंदूर में सेना ने लिया। हमारे फाइटर विमान गिरे मुद्दा नहीं गिरे क्यों? यह मुद्दा है हमने क्या सबक लिया? विपक्ष सवाल पूछ रहा है। जनता प्रश्न कर रही है। जवाब बीजेपी सरकार देने से भाग रही है। पहलगाम जैसे हमले क्यों हुए? धारा 370 हटाए जाने पर मोदी सरकार ने कश्मीर में शांति का दावा किया था। उस दावे का क्या हुआ? उरी पठानकोट पुलवामा और अब पहलगाम के आतंकी और आर डी एक्स कहां से आया? इस बात का पता अबतक सरकार लगा नहीं पाई है। जबकि मुंबई हमले में पाकिस्तानी कसाब को जिंदा पकड़कर दुनिया के सामने सबूत पेश किए गए थे। मगर बीजेपी शासन कोई सबूत नहीं ला सकी। इससे शंका जाहिर की जाती है कहीं यह सब प्रायोजित तो नहीं था? We are busy in the rally and China is making preparations
क्या ट्रम्प को होगी 5 सालों की सजा?
ट्रम्प दसवीं बार दावा कर चुके हैं कि उन्होंने ट्रेड की धमकी देकर वार रुकवा दी। इसी आशय का एफिडेविट ट्रम्प ने अमेरिकी कोर्ट में दिया है। अगर वह झूठ है तो ट्रम्प को अमेरिकी कोर्ट पांच साल कैद की सजा दे सकती है। लेकिन ट्रम्प जैसा घाघ व्यापारी क्यों दंडित होने का रिस्क लेगा? देश जानना चाहता है, कि सीजफायर क्यों और किस लिए किया गया? जबकि हमारी जांबाज़ सेना पाकिस्तान पर बढ़त बनाकर उसे पंगु कर चुकी थी। हमारी सेना पाकिस्तान से नहीं अमेरिका, चीन, तुर्की, अज़रबैजान से लड़ रही थी। तुर्की के ड्रोन हो या चीन के फाइटर विमान या फिर उन्नत मिसाइलें सब पर भारत की सेना ने अपना दम दिखाया। लेकिन बीजेपी के सांसद, उपमुख्यमंत्री और मंत्रियों ने सेना का अपमान करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। We are busy in the rally and China is making preparations
बार्डर की सुरक्षा
मोदी की फोटो डालकर सेना की जीत को मोदी की जीत बताते हुए देश को बरगलाया जा रहा।खुद मोदी कानपुर हो या पटना या कहीं और कहते फिर रहे हैं पाकिस्तान ने अगर हमला किया तो मुंहतोड़ जवाब देंगे। जबकि हमारी सेना सर्च ऑपरेशन चलाकर पाकिस्तानी आतंकियों और उसके भारत में स्लीपर सेल्स को खत्म करने में लगी है। लगभग रोज ही एनकाउंटर कर रही है हमारी सेना। मोदी सरकार ने बहुत पहले दावा किया था, कि वह पाकिस्तान बॉर्डर पर सुरक्षा व्यवस्था में रे का प्रबंध कर रही, जिससे भारत में एक भी आतंकवादी नहीं घुस सकेगा। क्या हुआ उस दावे का?
विपक्ष जानना चाहता है, कि सच क्या है? लेकिन मोदी सरकार संसद का विशेष सत्र बुलाने से भाग रही है। क्योंकि संसद में मोदी सरकार विपक्षी नेताओं के सवालों के उत्तर देने की स्थिति में नहीं होगी। किरकिरी होगी सरकार की। पार्टी के स्वार्थ की सारी गोपनीयता खुल जाएगी। एयरमार्शल पहले ही सरकार को दोषी ठहरा चुके हैं, कि वादा क्यों करती है सरकार? जब समय पर युद्धक विमान और हथियार नहीं मिल पाएंगे।
नग्नता को परिचित
सच तो यह है कि हमारी वायुसेना कमजोर कर दी गई है। जीडीपी बड़ी, लेकिन उस रेशियों में सेना का बजट नहीं बढ़ा। भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी बीजेपी सरकार की पार्टी के कुलदीप सिंह सेंगर बलात्कार और हत्या के मामले में सजा काट चुके हैं। खुलेआम बीजेपी नेता हाइवे पर सेक्स करते पकड़े जा चुके हैं। विधायक के बेटे के पास तीन सौ वीडियो बीजेपी की नग्नता को परिचित करा रहे। बलिया में क्या कुछ हुआ यह बीजेपी नहीं बताएगी। बल्कि बलात्कारियों को हमेशा की तरह बचाने में लगी रहेगी। जैसा महिला पहलवानों के यौन शोषण मामले में सांसद को बचाकर किया गया।
चीनी के रडार पकड़ ही नहीं पाएंगे
हिंदू मुस्लिम अगड़े पिछड़े करके समझ में फूट डालकर सत्ता पाने में लगी बीजेपी देश की हिफाजत के विषय में सोच ही नहीं रही। राफेल खरीदी, लेकिन सोर्स कोड नहीं लेने का नतीजा सेना को भुगतना पड़ा। डीआरडीओ राफेल में देशी मिसाइलें फिट नहीं कर सका। आने वाले खतरे से अनजान बनी बीजेपी के लिए चुनाव और जैसे भी हो जीतने से ही मतलब है। जबकि चीन पाकिस्तान को पांचवीं पीढ़ी का विमान जे 35 से लैस करने में लगा है जिसे रडार पकड़ ही नहीं पाएंगे।
पाकिस्तान के साथ झड़प में भारतीय सेना अपने बाहुबल और चतुर रणनीति से पाकिस्तान पर बढ़त बनाए हुई थी। जबकि पाकिस्तान को चीन अपने सेटलाइट से भारत के जर्रे जर्रे की लोकेशन ट्रेस कर रहा था। जब भारतीय सेना ने बढ़त बढ़ाई, तभी सीजफायर, वह भी ट्रंप की धमकियों से डरकर बीजेपी सरकार ने कर लिया। यह सेना का मनोबल गिराने वाला “दुष्कर्म” कहा जायेगा।
मोदी सरकार के पास इच्छाशक्ति और साहस के साथ रणनीति का अभाव है। सरकार एयर मार्शल के सवालों का जवाब क्यों नहीं दे रही? समय पर भारत में बने युद्धक विमान और बाकी हथियार की आपूर्ति नहीं करनी थी तो फिर वादे और दावे क्यों करती है बीजेपी सरकार?
चीन का खतरा
चीन भारत को चारों तरफ से घेरने और अपनी शक्ति बढ़ाने में लगा है। बांग्लादेश के साथ मिलकर चीन बंगाल बॉर्डर के पास पुराने हवाईअड्डे को नई साज़ सज्जा देने में लगा है। वहां चीनी रडार युद्धक विमान मिसाइलें युक्त रखने की योजना पर काम कर रहा है। जिससे भारत का पूर्वोत्तर बंगाल, बिहार, उड़ीसा सहित दक्षिण के सभी राज्यों पर खतरा मंडरा रहा है। लेकिन मोदी और बीजेपी केवल फुट डालकर शासन करने की कुनीति पर चल रही है।
सच तो यह है, कि जितना बोल बच्चन दे ले बीजेपी, उसे जनता और राष्ट्र की एकता और अखंडता की तनिक भी परवाह नहीं है। अपने मित्र को कारोबार दिलाने के फेर में भारत के सभी सटे हुए राष्ट्रों के साथ संबंध खराब कर ली है। बांग्लादेश जिसका उदय ही भारत की कृपा से हुआ था वहां तख्तापलट कराया गया। पाकिस्तानी आई एस आई के एजेंटों और अमेरिकी दौलत बांटकर छात्रों के आंदोलन को हाईजैक कर लिया गया। बीजेपी सरकार चुपचाप देखती रह गई। हस्तक्षेप तक करने की जहमत नहीं उठाई। जबकि इंदिरा गांधी ने अमेरिकी धमकी को दरकिनार कर बांग्लादेश के रूप में पाकिस्तान के दो टुकड़े कर दिखाए थे। We are busy in the rally and China is making preparations
चुनावी रणनीति
अटल बिहारी बाजपेई जी ने भी अमेरिकी धमकियों पाबंदियों की परवाह नहीं करते हुए इंदिरा गांधी के आदर्श पर चले और पोखरण दो कराया। धनी देशों की सेटेलाइट पता ही नहीं चला सकी थी। सवाल यह है कि कथनी छोड़ करनी कब करेंगे मोदी। रैलियों में पाकिस्तान को सबक सिखाने की चीख से आतंकवाद कम नहीं होगा। बीजेपी के मोदी भक्त सीजफायर से काफी मायूस हुए हैं। कहां मोदी द्वारा पी ओ के पर कब्जा करने का दावा करते रहकर भक्तों में उत्साह भरते रहे, ताकि बूथ मजबूत कर चुनाव दर चुनाव जीतते रहे।
हर घर सिंदूर बांटने की योजना
अब बीजेपी के कार्यकर्ता भयभीत हैं। आपदा में अवसर तलाशने वाले मोदी द्वारा हर घर सिंदूर पहुंचाने की योजना बनाकर हिंदू मतों को एकजुट करने की योजना पर तब पानी फिर गया, जब समूचे देश की भयानक प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर आने लगी। इतने प्रबल विरोध की आशा मोदी सरकार और बीजेपी को नहीं रही होगी। तभी तो दैनिक अखबारों में हर घर सिंदूर बांटने की योजना बनाकर परखा गया कि देश की जनता क्या प्रतिक्रिया देती है।
तीन दिनों तक बीजेपी देखती समझती रही लेकिन जब देख लिया कि उसकी चाल नाकाम हो चुकी है तो पल्ला झाड़ लिया और अखबारों में छपी खबर को फेक बताने लगी। अगर फेक खबर छापी गई तो मानहानि का दावा क्यों नहीं किया बीजेपी ने? गोदी मीडिया चीख चीख कर हर घर सिंदूर बांटने की घोषणा करती रही। वह तो मोदी की मीडिया है। उसपर एक्शन क्यों नहीं लिया जाता। चंद महीनों बाद पाकिस्तान से फिर भारत को जूझना पड़ सकता है। सवाल है चीनी चालों का जवाब देने के लिए कितनी तैयारी है मोदी सरकार की?
हार्वर्ड को अंतर्राष्ट्रीय छात्रों को मेजबानी देने से रोक दिया गया है। उसे छह शर्तों का पालन करने के लिए 72 घंटे का समय दिया गया है। इसमें भारत के लगभग 800 छात्रों को हद्द पार किया जा सकता है।
डिजिटल डेस्क देश विदेश- अमेरिकी ट्रम्प प्रशासन ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय में विदेशी छात्रों के लिए दरवाज़े बंद कर दिए हैं। यूएस डिपार्टमेंट ऑफ़ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने विदेशी छात्रों को होस्ट करने के लिए हार्वर्ड विश्वविद्यालय के प्रमाणन को रद्द कर दिया है, जो प्रमुख आइवी लीग विश्वविद्यालयों में से एक के लिए एक बड़ा झटका है। यह कार्रवाई पिछले महीने DHS द्वारा हार्वर्ड के लिए DHS अनुदान में 2.7 मिलियन डॉलर समाप्त करने के बाद की गई है।
अमेरिकी विरोध प्रदर्शन
होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी क्रिस्टी नोएम ने डीएचएस को हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट एंड एक्सचेंज विजिटर प्रोग्राम (एसईवीपी) सर्टिफिकेशन को समाप्त करने का आदेश दिया है। होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने यूनिवर्सिटी पर अमेरिकी विरोधी प्रदर्शनों और कथित यहूदी हिंसा के बीच सुरक्षित परिसर बनाए रखने में विफल रहने का आरोप लगाया है।
विदेशी छात्रों को दाखिला
इसका मतलब यह है कि हार्वर्ड अब विदेशी छात्रों को दाखिला नहीं दे सकता और मौजूदा विदेशी छात्रों को अपना कानूनी दर्जा खोना होगा या उन्हें स्थानांतरित होना होगा। इसका यह भी मतलब है कि मौजूदा विदेशी छात्रों को जल्द ही किसी अन्य SEVP प्रमाणित विश्वविद्यालय में दाखिला लेने की ज़रूरत नहीं होगी।
छात्रों को क्या करना होगा?
हार्वर्ड अब विदेशी छात्रों को दाखिला नहीं दे सकता है, तथा मौजूदा विदेशी छात्रों को स्थानांतरित होना होगा, अन्यथा उन्हें अपनी कानूनी स्थिति खोनी होगी।
SEVP प्रमाणन समाप्त होने के साथ, F-1 वीज़ा या J वीज़ा पर छात्रों को अमेरिका में रहने के लिए किसी अन्य SEVP प्रमाणित विश्वविद्यालय की तलाश करनी होगी, जबकि कोई भी नया अंतर्राष्ट्रीय छात्र हार्वर्ड में 2025-26 के लिए F/J वीज़ा नहीं प्राप्त कर सकता। यदि वे छात्र किसी अन्य विश्वविद्यालय में दाखिला लेने में विफल रहते हैं, तो उनका वीज़ा रद्द किया जा सकता है और उन्हें अमेरिका से हद्द पार का सामना करना पड़ सकता है।
छात्र और विनिमय आगंतुक कार्यक्रम (SEVP) जानकारी एकत्र करता है, बनाए रखता है, विश्लेषण करता है और जानकारी प्रदान करता है ताकि केवल वैध विदेशी छात्र या विनिमय आगंतुक ही संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रवेश पा सकें। हार्वर्ड की SEVIS तक पहुँच, जो अंतर्राष्ट्रीय छात्रों पर नज़र रखने और वीज़ा स्थिति बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है इसे अब रद्द कर दिया गया है।
भारत के 800 छात्र प्रभावित
अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग द्वारा SEVP प्रमाणीकरण रद्द करने के निर्णय से हार्वर्ड के लगभग 6,800 अंतर्राष्ट्रीय छात्रों का भविष्य सीधे तौर पर खतरे में पड़ गया है, जिनमें लगभग 800 छात्र भारत से हैं।
अधिकांश भारतीय छात्र ग्रेजुएट या डॉक्टरेट कार्यक्रमों में हैं और ट्रम्प प्रशासन की हालिया कार्रवाई के कारण उन्हें शैक्षणिक व्यवधान का सामना करना पड़ेगा, जिससे वैकल्पिक विकल्पों के लिए बहुत कम समय दिया गया है।
नोएम ने हार्वर्ड को छात्र रिकॉर्ड की मांग को पूरा करने के लिए 72 घंटे का समय दिया है, जिसमें अनुशासनात्मक डेटा और विरोध प्रदर्शन फुटेज शामिल है, ताकि वह अपनी SEVIS पहुँच को बहाल कर सके। हार्वर्ड को होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) द्वारा विदेशी छात्रों का नामांकन फिर से शुरू करने के लिए 72 घंटे के भीतर छह कठोर शर्तों को पूरा करने का काम सौंपा गया है।
कैसे मिलेगा फिर से मौका?
यदि विश्वविद्यालय अमेरिकी प्राधिकारियों को कुछ अभिलेख प्रस्तुत कर दे दें तो उसे विदेशी छात्रों को दाखिला देने का मौका मिल जाएगा।
1- हार्वर्ड विश्वविद्यालय के पास उपलब्ध सभी रिकॉर्ड, चाहे वे आधिकारिक हों या अनौपचारिक, जिनमें इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और ऑडियो या वीडियो फुटेज शामिल हैं, जो पिछले पांच वर्षों में किसी गैर-आप्रवासी छात्र द्वारा परिसर के अंदर या बाहर की गई अवैध गतिविधि से संबंधित हैं।
2- हार्वर्ड विश्वविद्यालय के पास उपलब्ध सभी रिकॉर्ड, जिनमें इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और ऑडियो या वीडियो फुटेज शामिल हैं, पिछले पांच वर्षों में किसी गैर-आप्रवासी छात्र द्वारा परिसर के अंदर या बाहर की गई खतरनाक या हिंसक गतिविधि के संबंध में।
3- हार्वर्ड विश्वविद्यालय के पास उपलब्ध सभी रिकॉर्ड, जिनमें इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और ऑडियो या वीडियो फुटेज शामिल हैं, पिछले पांच वर्षों में किसी गैर-आप्रवासी छात्र द्वारा परिसर में या बाहर अन्य छात्रों या विश्वविद्यालय कर्मियों को दी गई धमकियों के संबंध में।
4- हार्वर्ड विश्वविद्यालय के पास उपलब्ध सभी रिकॉर्ड, जिनमें इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और ऑडियो या वीडियो फुटेज शामिल हैं, पिछले पांच वर्षों में नामांकित किसी गैर-आप्रवासी छात्र द्वारा, चाहे वह परिसर में हो या बाहर, अन्य सहपाठियों या विश्वविद्यालय कर्मियों के अधिकारों के हनन के संबंध में।
5- पिछले पांच वर्षों में नामांकित सभी गैर-आप्रवासी छात्रों के सभी अनुशासनात्मक रिकॉर्ड।
6- पिछले पांच वर्षों में हार्वर्ड विश्वविद्यालय परिसर में किसी गैर-आप्रवासी छात्र से संबंधित किसी भी विरोध गतिविधि का हार्वर्ड विश्वविद्यालय के पास उपलब्ध कोई भी ऑडियो या वीडियो फुटेज
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय ने सेना को भारत के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए है। पाकिस्तान के पंजाब मे आपातकाल की घोषणा। समिति ने कहा, “आतंकी शिविरों की मौजूदगी के बहाने भारत ने अनुचित हमला करते हुए जानबूझकर नागरिक क्षेत्रों को निशाना बनाया।”
नई दिल्ली: भारत ने मंगलवार की देर रात “ऑपरेशन सिंदूर” के तहत पाकिस्तानी कश्मीर के हिस्सों में 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया और वहां बमबारी करते हुए तबाही मचा दी। इसके बाद से पाकिस्तानी हुकुमत भारत को निशाना बनाने की तैयारी कर रहा है। खबर के मुताबिक हमले के बाद पाकिस्तान की ओर से कहा जा रहा है कि भारत के अनुचित हमलों ने जानबूझकर नागरिक क्षेत्रों को निशाना बनाया, जिसके परिणामस्वरूप निर्दोष नागरिकों की शहादत हुई और मस्जिदों सहित नागरिक बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है।
भारत का ऑपरेशन सिंदूर
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की मौत के बाद भारत ने मंगलवार देर रात पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर पर जवाबी हमला कर दिया। भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद पाकिस्तान में हलचल मच गई है। अब खबर है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय ने सेना को भारत के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक बयान में कहा, “भारत के हमलों के बाद पाकिस्तान के सशस्त्र बलों को उचित कार्रवाई करने के लिए अधिकृत किया गया है।” हालांकि, अभी इस बयान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
पाकिस्तान बोला- हमले का जवाब देने का अधिकार
पाकिस्तानी सूचना मंत्रालय ने कहा, “इन अनुचित हमलों ने जानबूझकर नागरिक क्षेत्रों को निशाना बनाया, जिसके परिणामस्वरूप निर्दोष नागरिकों की शहादत हुई और मस्जिदों सहित नागरिक बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है। संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के अनुरूप, पाकिस्तान को अपनी संप्रभुता के घोर उल्लंघन का बदला लेने के लिए चुने हुए समय, स्थान और तरीके से जवाब देने का अधिकार है। सशस्त्र बलों को इस संबंध में उचित कार्रवाई करने के लिए अधिकृत किया गया है।”
भारत की कार्रवाई के बाद पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में आपातकाल की घोषणा कर दी गई है। पाकिस्तानी पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज ने ये ऐलान किया है। इस दौरान शेक्षणिक संस्थान भी बंद रहेंगे। सरकारी बयान के अनुसार, पंजाब पुलिस सहित सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और प्रशासनिक इकाइयों को सतर्क कर दिया गया है। सभी डॉक्टरों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं और उन्हें तुरंत ड्यूटी पर लौटने के आदेश जारी किए गए हैं।
भारत ने भड़काई आग
पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति ने कहा कि भारत ने ‘हमारे क्षेत्र में आग भड़का दी है।’ समिति ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भारत को बिना उकसावे के अवैध कार्यों की गंभीरता को पहचानने और अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के उल्लंघन के लिए जवाबदेह ठहराने का आह्वान किया है।
समिति ने कहा, “आतंकी शिविरों की मौजूदगी के बहाने से भारत के अनुचित हमलों ने जानबूझकर नागरिक क्षेत्रों को निशाना बनाया और एयरलाइनों के लिए गंभीर खतरा पैदा किया। इसके परिणामों की जिम्मेदारी भारत की होगी।”
प्रधानमंत्री शरीफ ने बुलाई बैठक
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने स्थिति पर चर्चा के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की उच्च स्तरीय सुरक्षा बैठक की है। इसमें कैबिनेट मंत्रियों सहित मुख्यमंत्रियों, सभी सेनाओं के प्रमुख और वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। करीब 2 घंटे चली इस बैठक के फैसलों के बारे में ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है। शरीफ ने मंत्रिमंडल की बैठक भी बुलाई है। इसके बाद वे संसद को संबोधित कर सकते हैं।
भारत की GDP ग्रोथ रेट दो साल में सबसे नीचे 5.4% पर आ गई है। यह पिछले अनुमानों क्रमशः 6.9 फीसदी और 5 फीसदी से कम है। राहुल गांधी ने इसके लिए सरकारी नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है। कहा, कि स्थिति में सुधार के लिए बिना समय गंवाए एक नई सोच और बिज़नेसेस के लिए एक नई डील की भारत को ज़रूरत है। (What is the reason for the decline in India’s GDP growth rate?)
उन्होंने कहा, बात साफ है, कि भारतीय अर्थव्यवस्था तब तक तरक्की नहीं कर सकती, जब तक इसका फ़ायदा सिर्फ़ गिने-चुने अरबपतियों को मिल रहा हो और किसान, मज़दूर, मध्यमवर्ग और ग़रीब तरह-तरह की आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे हों। (What is the reason for the decline in India’s GDP growth rate?)
इन तथ्यों पर एक नज़र डालिए, देखिए स्थिति कितनी चिंताजनक है:
खुदरा महंगाई दर बढ़कर 14 महीने के उच्चतम स्तर 6.21% पर पहुंच गई है। पिछले साल अक्टूबर की तुलना में इस वर्ष आलू और प्याज़ की क़ीमत लगभग 50% बढ़ गई है।
रुपया 84.50 के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है।
बेरोज़गारी पहले ही 45 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ चुकी है।
पिछले 5 सालों में मज़दूरों, कर्मचारियों और छोटे व्यापारियों की आमदनी या तो ठहर गई है या काफी कम हो गई है।
आमदनी कम होने से मांग में भी कमी आई है। 10 लाख से कम क़ीमत वाले कारों की बिक्री में हिस्सेदारी घटकर 50% से कम हो गई है, जो 2018-19 में 80% थी।
सस्ते घरों की कुल बिक्री में हिस्सेदारी घटकर क़रीब 22% रह गई है, जो पिछले साल 38% थी। FMCG प्रोडक्ट्स की मांग पहले से ही कम होती जा रही है।
कॉरपोरेट टैक्स का हिस्सा पिछले 10 सालों में 7% कम हुआ है, जबकि इनकम टैक्स 11% बढ़ा है।
नोटबंदी और GST की मार से अर्थव्यवस्था में मैन्युफैक्चरिंग का हिस्सा घटकर 50 वर्षों में सबसे कम सिर्फ़ 13% रह गया है। ऐसे में नई नौकरियों के अवसर कैसे बनेंगे?
राहुल गांधी ने भारत सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा, कि भारत की अर्थव्यवस्था के सुधार के लिए एक नई सोच चाहिए और बिज़नेसेस के लिए एक नई डील उसका अहम भाग है। सबको समान रूप से आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा, तभी हमारी अर्थव्यवस्था का पहिया आगे बढ़ेगा।
अर्थव्यवस्था का बुरा हाल, जनता का हाल बेहाल – इस स्थिति में सुधार के लिए बिना समय गंवाए एक नई सोच और बिज़नेसेस के लिए एक नई डील की ज़रूरत है।