Nepal Flash Floods: गोरखा में अचानक बाढ़ से घर, पुल और हाइड्रोपावर निर्माण स्थल प्रभावित हुए। पांच लोग लापता, जानें बचाव अभियान और भारत पर असर।
नेपाल: गोरखा जिले में 11 अक्टूबर को बुढी गंडकी नदी में अचानक आई फ्लैश फ्लड से कई घर बह गए, पुल क्षतिग्रस्त हुए और जलविद्युत परियोजना का निर्माण स्थल प्रभावित हुआ। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, पांच लोग लापता हैं और बचाव अभियान में नेपाल सेना, पुलिस तथा सशस्त्र पुलिस बल के सैकड़ों जवानों को लगाया गया। इस घटना के बाद भारत के सीमावर्ती इलाकों में भी नदी के जलस्तर पर नजर रखी गई, हालांकि बिहार के जल संसाधन विभाग ने बड़े खतरे की संभावना कम बताई।
गोरखा जिले के चुमनुब्री और धार्चे ग्रामीण नगरपालिका क्षेत्रों में बाढ़ का सबसे ज्यादा असर सामने आया। स्थानीय बस्तियों में घर बहने, पैदल आवाजाही वाले पुल टूटने और सड़क संपर्क प्रभावित होने की जानकारी मिली है। शुरुआती आकलन में लगभग 35 से 40 घर बहने की आशंका जताई गई, लेकिन नुकसान का अंतिम आंकड़ा अभी स्पष्ट नहीं है।

भूस्खलन से नदी का रास्ता रुकने की आशंका
बाढ़ की वजह को लेकर शुरुआती वैज्ञानिक आकलन में भूस्खलन की भूमिका सामने आई है। चुमचेत के आसपास पहाड़ी मलबे के कारण नदी का बहाव बाधित होने और पानी जमा होने के बाद अचानक अवरोध टूटने की आशंका जताई गई। इसके चलते पानी और मलबा तेजी से नीचे की ओर बढ़ा।
इस घटना को लेकर एक अहम सवाल यह है कि आसपास के इलाकों में भारी बारिश दर्ज नहीं होने के बावजूद नदी में अचानक इतना तेज बहाव कैसे आया। शुरुआती जानकारी में उपग्रह तस्वीरों के जरिए भूस्खलन के संकेत मिलने की बात सामने आई है। हालांकि, बाढ़ के सटीक कारण की अंतिम पुष्टि अभी बाकी है। इसे बादल फटने या ग्लेशियर टूटने का निश्चित नतीजा बताने के लिए पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।

बचाव अभियान में 437 सुरक्षाकर्मी तैनात
बाढ़ के बाद नेपाल सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के कुल 437 कर्मियों को राहत एवं बचाव अभियान में लगाया गया। अभियान के लिए चार सैन्य हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया गया। शुरुआती जानकारी के अनुसार, 47 लोगों को हेलीकॉप्टर के जरिए सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया।
बाढ़ की सूचना मिलने के बाद अधिकारियों ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को SMS अलर्ट भेजे और सुरक्षित जगहों पर जाने की सलाह दी। सुबह करीब 6:20 बजे बाढ़ की सूचना मिलने के बाद लगभग 20 मिनट के भीतर चेतावनी जारी किए जाने की जानकारी सामने आई। समय पर अलर्ट मिलने से लोगों को ऊंचे स्थानों पर जाने का मौका मिला।
हालांकि, बाढ़ में लापता लोगों की तलाश और नुकसान का आकलन चुनौती बना हुआ है। दुर्गम पहाड़ी इलाकों में सड़क और पुल क्षतिग्रस्त होने से राहत टीमों की आवाजाही भी मुश्किल हो सकती है।
घर, पुल और जलविद्युत निर्माण स्थल प्रभावित
चुमनुब्री और धार्चे के कई इलाकों में घर बहने या उनमें पानी घुसने की जानकारी मिली। सल्लीरी, पायुन और जगत बगर जैसे स्थानों में नुकसान की खबरें सामने आईं। न्याकचेत-सिरदिबास और माछीखोला-केरौजा के बीच पैदल आवाजाही वाले पुल भी बाढ़ में बह गए। गोरखा और धादिंग जिलों के बीच संपर्क के लिए इस्तेमाल होने वाले एक मोटर योग्य पुल को भी नुकसान पहुंचा।
बाढ़ का असर जलविद्युत परियोजना के निर्माण स्थल पर भी पड़ा। लगभग 341 मेगावाट की परियोजना के निर्माण शिविर और कुछ उपकरण बहने की जानकारी मिली है। चूंकि परियोजना निर्माणाधीन थी, इसलिए फिलहाल इसे बिजली उत्पादन बंद होने की घटना कहना सही नहीं होगा। वास्तविक आर्थिक नुकसान और निर्माण कार्य दोबारा शुरू होने की समयसीमा का आकलन अभी बाकी है।

राहत के लिए ड्रोन और सैटेलाइट की मदद
दुर्गम इलाकों में नुकसान का पता लगाने के लिए LiDAR ड्रोन और सैटेलाइट इमेजरी की मदद ली गई। संयुक्त राष्ट्र की नेपाल टीम ने प्रभावित क्षेत्रों के आकलन के लिए UNOSAT के साथ समन्वय किया। विश्व खाद्य कार्यक्रम ने राहत सामग्री पहुंचाने के लिए तीन ट्रक उपलब्ध कराए और प्रभावित परिवारों के लिए हाई-एनर्जी बिस्कुट भेजने की व्यवस्था की।
आगे की चुनौती सिर्फ लोगों को सुरक्षित निकालने की नहीं है। प्रभावित परिवारों को पीने का पानी, भोजन, स्वास्थ्य सेवाएं और रहने की जगह उपलब्ध कराना भी जरूरी होगा। गांवों में सड़क संपर्क बहाल होने तक राहत सामग्री पहुंचाने में परेशानी आ सकती है।
बिहार और उत्तर प्रदेश पर कितना खतरा?
नेपाल में बाढ़ के बाद भारत में गंडक नदी के जलस्तर को लेकर निगरानी बढ़ाई गई। केंद्रीय जल आयोग की ओर से गंडक बेसिन में संभावित जलस्तर वृद्धि को देखते हुए सतर्कता बरतने की जरूरत बताई गई थी।
हालांकि, 11 अक्टूबर को बिहार के जल संसाधन विभाग ने कहा कि इस बाढ़ से राज्य में बड़े खतरे की संभावना कम है। विभाग के आकलन के मुताबिक, वाल्मीकिनगर बैराज तक पहुंचने के दौरान बाढ़ की लहर का असर कम हो सकता है। बैराज से लगभग 50,000 क्यूसेक से बढ़कर 75,000 क्यूसेक तक पानी छोड़े जाने का अनुमान बताया गया था, जिसे सामान्य सीमा में माना गया।
इसका मतलब यह नहीं है कि बिहार और उत्तर प्रदेश की सभी नदियों में बाढ़ का खतरा खत्म हो गया है। अलग-अलग नदी बेसिनों में जलस्तर की स्थिति अलग हो सकती है। इसलिए किसी जिले को सुरक्षित या खतरे में बताने से पहले संबंधित प्रशासन की ताजा चेतावनी देखना जरूरी है।
अगस्त की विनाशकारी बाढ़ से अलग है अक्टूबर की घटना
नेपाल में 26 अगस्त को आई बड़ी बाढ़ और अक्टूबर की बुढी गंडकी फ्लैश फ्लड को अलग-अलग घटनाओं के रूप में समझना जरूरी है। अगस्त की आपदा के बाद 5 अक्टूबर को सक्रिय खोज एवं बचाव अभियान समाप्त करने और पुनर्वास पर ध्यान देने की घोषणा की गई थी।
उस आपदा में कम-से-कम 1,455 लोगों की मौत और 5,285 लोगों के लापता होने की जानकारी दी गई थी। करीब 13,795 लोगों को बचाया गया था। नेपाल ने शुरुआती पुनर्बहाली और पुनर्वास के लिए लगभग 5 अरब डॉलर की जरूरत बताई थी।
अगस्त की बाढ़ का असर सड़क, परिवहन, पर्यटन, कृषि और जलविद्युत क्षेत्र पर पड़ा था। विश्व बैंक के आकलन में 12 जलविद्युत परियोजनाओं के प्रभावित होने का उल्लेख किया गया था। इन आंकड़ों का संबंध अगस्त की आपदा से है, अक्टूबर में आई नई बाढ़ से नहीं।
फिलहाल क्या है स्थिति?
11 अक्टूबर की बाढ़ के बाद गोरखा के प्रभावित इलाकों में लापता लोगों की तलाश, नुकसान का आकलन और राहत पहुंचाने का काम प्राथमिकता में है। पांच लोगों के लापता होने और लगभग 35 से 40 घर बहने के आंकड़े शुरुआती जानकारी पर आधारित हैं। अलग-अलग आकलनों में घरों की संख्या का अंतर होने के कारण अंतिम नुकसान का आंकड़ा स्पष्ट होना बाकी है।
आने वाले समय में सबसे अहम जानकारी यह होगी कि लापता लोगों का पता चला या नहीं, प्रभावित गांवों में सड़क और पुल संपर्क कब बहाल होता है, जलविद्युत निर्माण स्थल को कितना नुकसान हुआ और निचले नदी क्षेत्रों में जलस्तर की स्थिति कैसी रहती है। भारत में भी गंडक नदी और संबंधित जलग्रहण क्षेत्रों की निगरानी महत्वपूर्ण बनी हुई है।
