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  • जमुई कांड में बड़ा एक्शन: नंदन यादव को पैर में गोली, हरेराम भी गिरफ्तार; 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल पर FIR

    जमुई कांड में बड़ा एक्शन: नंदन यादव को पैर में गोली, हरेराम भी गिरफ्तार; 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल पर FIR

    बिहार के जमुई में नाबालिगों से बदसलूकी मामले में नंदन यादव पुलिस मुठभेड़ में घायल हुआ। हरेराम गिरफ्तार और 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल पर FIR हुई।

    बिहार: जमुई में नाबालिग छात्र-छात्रा के साथ बदसलूकी और अश्लील हरकत के वायरल वीडियो मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। मामले के प्रमुख आरोपी नंदन यादव को पुलिस कार्रवाई के दौरान पैर में गोली लगी, जबकि दूसरे आरोपी हरेराम यादव को भी पकड़ लिया गया है। दोनों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। इसी मामले में नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने वाले वीडियो को सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के आरोप में करीब 120 प्रोफाइल संचालकों के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की गई है।

    पुलिस के मुताबिक, घटना 19 सितंबर की शाम जमुई-लखीसराय मार्ग के पास मड़वा पहाड़ क्षेत्र में हुई थी। नाबालिग छात्रा अपने एक नाबालिग दोस्त के साथ कोचिंग से लौट रही थी। दोनों इलाके में गए थे, जहां कुछ युवकों ने उन्हें रोक लिया। इसके बाद दोनों के साथ कथित तौर पर मारपीट और अभद्र व्यवहार किया गया। छात्रा के साथ अश्लील हरकत किए जाने का वीडियो भी बनाया गया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

    वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की। पुलिस ने वीडियो फुटेज और अन्य सुरागों के आधार पर आरोपियों की पहचान की। वाहन के नंबर की मदद से पुलिस पीड़ितों तक पहुंची और इसके बाद प्राथमिकी दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई गई।

    नंदन यादव के पैर में लगी गोली

    मामले में फरार चल रहे प्रमुख आरोपी नंदन यादव की तलाश के दौरान पुलिस की उसके साथ मुठभेड़ हुई। पुलिस के अनुसार, कार्रवाई के दौरान नंदन यादव के पैर में गोली लगी। इसके बाद उसे हिरासत में लेकर जमुई सदर अस्पताल पहुंचाया गया। नंदन यादव जमुई सदर थाना क्षेत्र के प्रतापपुर गांव का रहने वाला बताया जा रहा है और ट्रैक्टर चलाकर बालू ढोने का काम करता था।

    दूसरे आरोपी हरेराम यादव को भी पुलिस ने पकड़ लिया है। हरेराम यादव भी प्रतापपुर गांव का रहने वाला बताया गया है और उसके ट्रैक्टर चालक होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस कार्रवाई के दौरान उसके पैर में चोट लगने की भी जानकारी है। मामले में दोनों की भूमिका की जांच की जा रही है।

    रामआशीष चौधरी समेत अन्य आरोपियों पर भी कार्रवाई

    मामले की जांच में रामआशीष चौधरी नाम के आरोपी की गिरफ्तारी की जानकारी भी सामने आई है। इसके अलावा कुछ नाबालिगों को भी पुलिस ने हिरासत में लिया है। पुलिस वीडियो में दिखाई दे रहे अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है और उनकी गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई जारी है।

    पुलिस ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम यानी SIT का गठन किया है। जांच में वीडियो बनाने वाले लोगों, घटना में सीधे शामिल आरोपियों और वीडियो को सोशल मीडिया पर फैलाने वालों की भूमिका अलग-अलग स्तर पर देखी जा रही है।

    120 सोशल मीडिया प्रोफाइल पर FIR

    जमुई मामले में पुलिस की कार्रवाई केवल घटना में शामिल आरोपियों तक सीमित नहीं रही। नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने वाले वीडियो को सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के आरोप में करीब 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल संचालकों के खिलाफ साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है।

    पुलिस ने लोगों से अपील की है कि नाबालिग पीड़िता से जुड़ा वीडियो डाउनलोड, शेयर या दोबारा पोस्ट न करें। पुलिस का कहना है कि नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करना गंभीर अपराध है और वीडियो को आगे प्रसारित करने वालों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

    FIR में POCSO और BNS की धाराएं

    मामले में BNS की धारा 74, 76 और 3(5) के साथ POCSO Act की धारा 8 और 12 के तहत कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई है। प्राथमिकी जमुई थाना कांड संख्या 428/26 के तहत दर्ज किए जाने की जानकारी उपलब्ध है। अंतिम कानूनी स्थिति जांच और आगे की कार्रवाई के साथ स्पष्ट होगी।

    पुलिस पेट्रोलिंग भी जांच के दायरे में

    घटना के बाद सिर्फ आरोपियों की गिरफ्तारी ही जांच का विषय नहीं है। घटना जिस इलाके में हुई और जिस समय नाबालिग छात्र-छात्रा वहां मौजूद थे, उस दौरान पुलिस पेट्रोलिंग की स्थिति की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों की ओर से पेट्रोलिंग व्यवस्था को लेकर भी जांच की बात सामने आई है।

    महिला आयोग ने भी लिया संज्ञान

    घटना के बाद महिला सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठे हैं। बिहार महिला आयोग और राष्ट्रीय महिला आयोग की ओर से मामले का संज्ञान लिए जाने और प्रशासन से रिपोर्ट मांगे जाने की जानकारी सामने आई है। इस कार्रवाई का उद्देश्य घटना की स्थिति और प्रशासनिक कार्रवाई की जानकारी लेना है।

    अब जांच में किन सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे?

    जांच में यह पता लगाया जाएगा कि घटना में कुल कितने लोग सीधे तौर पर शामिल थे, वीडियो किसने बनाया, इसे सोशल मीडिया पर किसने सबसे पहले प्रसारित किया और किन लोगों ने इसे आगे फैलाया। साथ ही पुलिस यह भी जांच रही है कि घटना के समय वहां मौजूद अन्य लोगों की क्या भूमिका थी।

    फिलहाल नंदन यादव और हरेराम यादव पुलिस की गिरफ्त में हैं। नंदन यादव का अस्पताल में उपचार कराया जा रहा है। मामले में SIT की जांच और अन्य आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई जारी है। वहीं, नाबालिग पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करने वाले सोशल मीडिया अकाउंट्स पर दर्ज मामलों की साइबर जांच भी आगे बढ़ रही है।

  • जमुई में नाबालिग छात्र-छात्रा से बदसलूकी, 7 पर FIR; 3 गिरफ्तार, राहुल गांधी ने उठाए सवाल

    जमुई में नाबालिग छात्र-छात्रा से बदसलूकी, 7 पर FIR; 3 गिरफ्तार, राहुल गांधी ने उठाए सवाल

    बिहार के जमुई में 19 सितंबर को 10वीं के नाबालिग छात्र-छात्रा को रोककर बदसलूकी का वीडियो वायरल हुआ। POCSO में FIR, 3 गिरफ्तार।

    बिहार: जमुई में 10वीं कक्षा के नाबालिग छात्र और छात्रा को रास्ते में रोककर कथित तौर पर बदसलूकी करने का मामला सामने आया है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। अब तक 7 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज होने और 3 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। मामले में POCSO Act और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है।

    घटना 19 सितंबर की शाम करीब 6 से 7 बजे के बीच की बताई जा रही है। दोनों नाबालिग जमुई शहर के रहने वाले और 10वीं कक्षा के छात्र हैं। जानकारी के अनुसार, दोनों कोचिंग से लौटने के दौरान स्कूटी से मड़वा पहाड़ की तरफ गए थे। वापस लौटते समय जमुई सदर थाना क्षेत्र में युवकों के एक समूह ने उन्हें रास्ते में रोक लिया।

    वायरल वीडियो में क्या दिखा ?

    वायरल वीडियो में दोनों नाबालिगों को कई लोगों से घिरा हुआ देखा जा सकता है। छात्र और छात्रा लोगों से उन्हें जाने देने की गुहार लगाते दिखाई देते हैं। वीडियो में छात्र के साथ खींचतान और मारपीट तथा छात्रा के साथ कथित तौर पर अनुचित शारीरिक व्यवहार दिखाई देता है। एक अन्य दृश्य में एक व्यक्ति छात्रा को पकड़कर कुछ दूरी तक ले जाने की कोशिश करता दिखाई देता है।

    वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया। जमुई के पुलिस अधीक्षक विश्वजीत दयाल के नेतृत्व में जांच आगे बढ़ी और दोनों नाबालिगों की पहचान कर उनके बयान लिए गए। पुलिस ने वीडियो में दिखाई देने वाले लोगों की पहचान की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई। जांच में 6 से 7 युवकों के शामिल होने की बात सामने आई है।

    प्रशासन ने क्या कहा ?

    जमुई के जिलाधिकारी नवीन ने कहा है कि घटना 19 सितंबर की शाम जमुई सदर थाना क्षेत्र की है। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने स्वतः संज्ञान लिया, दोनों नाबालिगों से जानकारी ली गई और प्राथमिकी दर्ज की गई। प्रशासन ने नाबालिगों की निजता बनाए रखते हुए दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का भरोसा दिया है।

    पॉक्सो कानून के तहत मामला दर्ज

    मामले में सात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है और अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी है। पुलिस बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई कर रही है। जांच में POCSO Act के साथ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराएं भी लगाई गई हैं। पुलिस ने पीड़ितों के बयान भी दर्ज किए हैं।

    इस मामले की जांच में जमुई के एसपी विश्वजीत दयाल के साथ DIG राकेश कुमार भी निगरानी कर रहे हैं। पुलिस का फोकस वीडियो में दिखाई देने वाले सभी लोगों की भूमिका तय करने और बाकी आरोपियों तक पहुंचने पर है।

    राहुल गांधी ने उठाए सवाल

    मामले को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी बिहार सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि जमुई का वीडियो बेहद परेशान करने वाला है। राहुल गांधी ने घटना में शामिल लोगों की पहचान कर POCSO के तहत कार्रवाई और जल्द सजा की मांग की। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि घटना 19 सितंबर की है तो आरोपी अब तक सलाखों के पीछे क्यों नहीं हैं और शाम के समय बिहार की सड़कों पर लड़कियों की सुरक्षा को लेकर सरकार जवाब दे।

    हालांकि अब तक सामने आए पुलिस अपडेट के अनुसार कार्रवाई शुरू हो चुकी है और तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी और उनकी भूमिका की जांच जारी है।

    नाबालिग पीड़ितों की पहचान कानूनन संरक्षित है। इसलिए उनकी पहचान, चेहरा, स्कूल, पता या ऐसी कोई जानकारी प्रकाशित नहीं की जानी चाहिए जिससे उनकी पहचान सार्वजनिक हो सके। मामले में आगे की कार्रवाई पुलिस जांच और अदालत की प्रक्रिया के आधार पर तय होगी।

  • SIR में नाम हटने के बाद Sahida Fakir को Bangladesh भेजने का आरोप, Supreme Court ने Centre से जवाब मांगा

    SIR में नाम हटने के बाद Sahida Fakir को Bangladesh भेजने का आरोप, Supreme Court ने Centre से जवाब मांगा

    SIR में वोटर लिस्ट से नाम हटने के बाद Sahida Fakir को Mumbai से Bangladesh भेजने के आरोप पर Supreme Court ने Centre से जवाब मांगा। जानिए पूरा मामला।

    नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की Sahida Fakir को मुंबई से Bangladesh भेजे जाने के मामले में Supreme Court ने गुरुवार, 17 सितंबर 2026 को केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। Sahida के बेटे Sahin Fakir ने अदालत में याचिका दाखिल कर अपनी मां को भारत वापस लाने और उनके खिलाफ किसी भी प्रतिकूल कार्रवाई से सुरक्षा की मांग की है।

    Chief Justice of India Surya Kant, Justice Joymalya Bagchi और Justice V. Mohana की तीन सदस्यीय पीठ ने मामले की सुनवाई की। याचिकाकर्ता की ओर से Senior Advocate S. Muralidhar पेश हुए। मामला Sahin Fakir v. Union of India & Ors., WP(Crl) No. 372/2026 के रूप में सामने आया है।

    याचिका में Sahida Fakir को भारतीय नागरिक बताया गया है। उनके बेटे के अनुसार उनका स्थायी संबंध उत्तर 24 परगना, पश्चिम बंगाल के Gobindapur से है। परिवार का कहना है कि उनके दादा Badshah Gazi का नाम 1952 की मतदाता सूची में और माता-पिता के नाम 2002 की मतदाता सूची में दर्ज रहे हैं।

    Sahida करीब 20 साल पहले अपने पति के साथ काम की तलाश में मुंबई आई थीं और यहां घरेलू कामगार के रूप में काम कर रही थीं। याचिका के अनुसार 19 जुलाई 2026 को कुछ लोग, जिन्होंने खुद को पुलिसकर्मी बताया, उन्हें मुंबई में अपने साथ ले गए। उन्हें Chembur के एक holding centre में रखा गया और उनका Aadhaar कार्ड तथा मोबाइल फोन भी कथित तौर पर ले लिया गया।

    परिवार का आरोप है कि Sahida को 100 घंटे से अधिक समय तक हिरासत में रखा गया और इस दौरान उन्हें किसी Judicial Magistrate के सामने पेश नहीं किया गया। याचिका में यह भी कहा गया है कि उन्हें हिरासत के आधार की जानकारी और परिवार से संपर्क का प्रभावी अवसर नहीं मिला।

    इसके बाद Sahida को Border Security Force (BSF) को सौंपे जाने और करीब 20 अन्य लोगों के साथ उत्तर-पूर्वी क्षेत्र की ओर ले जाकर Bangladesh सीमा के पार भेजे जाने का आरोप लगाया गया है। याचिका में कहा गया है कि इसके बाद Sahida ने Bangladesh में अपनी मौजूदगी की जानकारी परिवार तक पहुंचाई और फिलहाल अस्थायी मानवीय आश्रय में रह रही हैं।

    SIR में नाम हटने का मामला क्या है?

    Sahida के मामले में सबसे महत्वपूर्ण कानूनी सवाल उनकी मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर है। याचिका के अनुसार Special Intensive Revision यानी SIR के दौरान उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया और इस फैसले के खिलाफ उनकी अपील लंबित है।

    परिवार का कहना है कि मतदाता सूची से नाम हटना अपने आप किसी व्यक्ति की भारतीय नागरिकता समाप्त होने का फैसला नहीं है। Supreme Court ने भी 17 जुलाई 2026 को West Bengal SIR से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया था कि electoral roll से नाम हटने का मतलब अपने आप नागरिकता खत्म होना नहीं है। अदालत ने यह भी कहा था कि नागरिकता तय करने का अंतिम अधिकार Election Commission के पास नहीं है।

    यही बिंदु Sahida Fakir की याचिका में भी महत्वपूर्ण है। याचिका में कहा गया है कि उनकी नागरिकता पर अंतिम निर्णय हुए बिना और SIR से नाम हटाने के खिलाफ उनकी अपील लंबित रहते हुए उन्हें Bangladesh भेज दिया गया।

    परिवार ने कौन से दस्तावेज बताए?

    याचिका में Sahida की भारतीय पहचान और पारिवारिक पृष्ठभूमि के समर्थन में कई दस्तावेजों का उल्लेख किया गया है। इनमें पुराने electoral records के अलावा पहचान और नागरिक दस्तावेज शामिल हैं।

    पहले सामने आए दस्तावेजों में 2008 का voter identity card, 1988 का birth certificate, school certificate और Gobindapur में जमीन से जुड़े दस्तावेज शामिल बताए गए हैं। परिवार का कहना है कि इन दस्तावेजों को अधिकारियों के सामने रखा गया था।

    हालांकि, इन दस्तावेजों का उल्लेख याचिका और परिवार के दावों के संदर्भ में है। Supreme Court ने अभी Sahida की नागरिकता पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है।

    याचिका में deportation प्रक्रिया पर भी सवाल

    Sahida के बेटे की याचिका केवल उनकी मां को वापस लाने तक सीमित नहीं है। इसमें 2 मई 2025 को जारी उस Standard Operating Procedure (SOP) को भी चुनौती दी गई है, जो कथित अवैध Bangladeshi nationals और Rohingya के deportation की प्रक्रिया से संबंधित है।

    याचिका में Immigration and Foreigners Order, 2025 के कुछ प्रावधानों को भी चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि किसी व्यक्ति को विदेशी या अवैध प्रवासी मानकर देश से बाहर भेजने से पहले उसकी nationality की उचित verification और कानूनी प्रक्रिया जरूरी है।

    याचिका में विशेष रूप से SOP के Para 9(iv) और Immigration and Foreigners Order, 2025 के Para 12(4)(C) के बीच प्रक्रिया संबंधी अंतर का मुद्दा उठाया गया है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि Sahida के मामले में nationality verification और उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया।

    Supreme Court ने अभी क्या आदेश दिया है?

    इस स्तर पर Supreme Court ने केवल केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने अभी यह घोषित नहीं किया है कि Sahida भारतीय नागरिक हैं, उनका Bangladesh भेजा जाना अवैध था या उन्हें तत्काल भारत वापस लाने का अंतिम आदेश दिया गया है।

    अदालत के सामने फिलहाल याचिकाकर्ता के आरोप, Sahida की कथित हिरासत और सीमा पार भेजे जाने की परिस्थितियां तथा nationality verification से जुड़े कानूनी सवाल हैं। केंद्र सरकार का जवाब इस मामले में महत्वपूर्ण होगा।

    SIR से जुड़े मामलों में पहले भी Supreme Court ने उठाए सवाल

    Sahida Fakir का मामला ऐसे समय Supreme Court पहुंचा है जब West Bengal में SIR के बाद मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर बड़ी संख्या में अपीलें लंबित हैं। 25 अगस्त 2026 को अदालत को बताया गया था कि SIR से संबंधित करीब 38.1 लाख अपीलें दाखिल हुई हैं। इनमें लगभग 7 लाख अपीलें उन लोगों की थीं जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे और जिन्होंने नाम बहाल करने की मांग की थी।

    Supreme Court पहले ही यह अंतर स्पष्ट कर चुका है कि electoral roll में नाम होना या हटना और किसी व्यक्ति की citizenship का अंतिम निर्धारण दो अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं। Sahida Fakir मामले में अब यही सवाल और गंभीर रूप से सामने आया है कि किसी व्यक्ति की nationality पर विवाद होने की स्थिति में उसे देश से बाहर भेजने से पहले कौन-सी verification और procedural safeguards लागू होंगे।

    अब केंद्र के जवाब पर नजर

    Supreme Court के नोटिस के बाद केंद्र सरकार को Sahida Fakir की हिरासत, nationality verification, Bangladesh भेजे जाने की प्रक्रिया और संबंधित कानूनी प्रावधानों पर अपना पक्ष रखना होगा। इसके बाद अदालत यह तय करेगी कि याचिका में उठाए गए सवालों पर आगे किस तरह की सुनवाई और राहत पर विचार किया जाना है।

    फिलहाल Sahida Fakir की वापसी की मांग Supreme Court के सामने लंबित है और मामले में अंतिम न्यायिक निष्कर्ष आना बाकी है।

  • पूजा से पहले 100 से ज्यादा महिलाओं की जमा पूंजी पर संकट, ज्यादा ब्याज के नाम पर लाखों की ठगी का आरोप

    पूजा से पहले 100 से ज्यादा महिलाओं की जमा पूंजी पर संकट, ज्यादा ब्याज के नाम पर लाखों की ठगी का आरोप

    पूजा से पहले 100 से ज्यादा महिलाओं की जमा पूंजी फंसने का आरोप है। ज्यादा ब्याज का भरोसा देकर पैसे जमा कराने वाली महिला के लापता होने की शिकायत पुलिस से की गई।

    पश्चिम बंगाल: पूजा का त्योहार करीब है, लेकिन 100 से ज्यादा महिलाओं के सामने अपनी वर्षों की जमा पूंजी को लेकर चिंता खड़ी हो गई है। आरोप है कि अधिक ब्याज देने का भरोसा देकर मासिक फंड के नाम पर महिलाओं से लाखों रुपये जमा कराए गए, लेकिन रकम वापस मांगने पर भुगतान नहीं किया गया। जिस महिला पर पैसे जमा कराने का आरोप है, उसके कथित तौर पर लापता होने के बाद पीड़ित महिलाएं पुलिस के पास पहुंचीं।

    ज्यादा ब्याज का भरोसा देकर जमा कराए पैसे

    मामला पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्धमान जिले का बताया जा रहा है। महिलाओं का आरोप है कि चंपा बाउरी नाम की महिला पिछले कई वर्षों से मासिक फंड के जरिए उनसे पैसे जमा करवा रही थी। उन्हें जमा रकम पर अधिक ब्याज के साथ पैसा वापस करने का भरोसा दिया गया था।

    स्थानीय जानकारी के मुताबिक, 100 से अधिक महिलाएं इस फंड में नियमित रूप से पैसे जमा करती थीं। महिलाओं का कहना है कि उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई और वर्षों की बचत इस व्यवस्था में लगाई थी।

    रकम वापस मांगने पर बढ़ी परेशानी

    कुछ समय पहले जब महिलाओं ने अपनी जमा रकम वापस मांगनी शुरू की तो कथित तौर पर परेशानी बढ़ गई। महिलाओं ने चंपा बाउरी से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन आरोप है कि इसके बाद वह उपलब्ध नहीं हुई।

    महिलाओं ने उसके परिवार से भी संपर्क कर उसके बारे में जानकारी लेने की कोशिश की। बताया जा रहा है कि वे उसके पति और मां के घर भी पहुंचीं, लेकिन वहां से भी चंपा के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी।

    100 से ज्यादा महिलाएं थाने पहुंचीं

    इसके बाद शनिवार रात बड़ी संख्या में महिलाएं एकजुट होकर कोकओवन थाने पहुंचीं। महिलाओं ने चंपा बाउरी के खिलाफ लिखित शिकायत देकर मामले की जांच और उनकी जमा रकम वापस दिलाने की मांग की।

    पीड़ित महिलाओं का आरोप है कि उन्होंने कई वर्षों तक नियमित रूप से पैसे जमा किए थे और अब रकम वापस नहीं मिलने से उनके सामने आर्थिक परेशानी खड़ी हो गई है।

    पूजा से पहले पैसों की चिंता

    त्योहार नजदीक होने के कारण महिलाओं की चिंता और बढ़ गई है। उनका कहना है कि पूजा के समय घरेलू जरूरतों और अन्य खर्चों के लिए उन्हें अपनी बचत की जरूरत है, लेकिन जमा रकम वापस नहीं मिलने से परिवारों के सामने मुश्किल पैदा हो गई है।

    फिलहाल शिकायत के आधार पर पुलिस से पूरे मामले की जांच और जमा रकम से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल की मांग की गई है। मामले में आरोपों की वास्तविकता, कुल जमा राशि और कितनी महिलाओं की रकम प्रभावित हुई है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

  • ‘मुझे जल्दी लखपति बनना था’, शराब तस्करी में पकड़ी गई महिला ने पुलिस के सामने उगले राज

    ‘मुझे जल्दी लखपति बनना था’, शराब तस्करी में पकड़ी गई महिला ने पुलिस के सामने उगले राज

    शराब तस्करी में पकड़ी गई सीतामढ़ी की महिला से पूछताछ में कई अहम बातें सामने आईं। 68 लीटर शराब गुप्त तहखाने से बरामद हुई थी।

    बिहार: बगहा में शराब तस्करी के मामले में गिरफ्तार सीतामढ़ी की एक महिला से पूछताछ के दौरान तस्करी के तरीके को लेकर कई अहम जानकारी सामने आई है। महिला समेत तीन लोगों को उस समय गिरफ्तार किया गया था, जब चारपहिया वाहन से करीब 68 लीटर अंग्रेजी शराब बरामद हुई। शराब वाहन के अंदर बनाए गए गुप्त तहखाने में छिपाकर रखी गई थी।

    पूछताछ में महिला ने कथित तौर पर बताया कि वह शराब लदी गाड़ियों में साथ चलने के बदले पैसे लेती थी। उसे उम्मीद थी कि परिवार की महिला के साथ होने पर वाहन पुलिस की जांच से बच सकता है। महिला के अनुसार, इसी लालच में वह इस काम से जुड़ी थी।

    रोजाना 10 हजार रुपये मिलने का दावा

    उत्पाद विभाग से जुड़ी जानकारी के अनुसार, महिला ने पूछताछ में बताया कि शराब लदी गाड़ी में सफर करने के लिए उसे प्रतिदिन 10 हजार रुपये दिए जाते थे। वह उत्तर प्रदेश की ओर से आने वाली शराब की गाड़ियों में घरेलू महिला की तरह बैठती थी।

    तस्करों की कथित रणनीति यह थी कि वाहन में महिला या परिवार का सदस्य दिखाई देने पर पुलिस का शक कम हो सकता है। हालांकि इस बयान से जुड़े सभी विवरणों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं है, इसलिए इन्हें पूछताछ में सामने आई जानकारी के तौर पर ही देखा जा रहा है।

    गाड़ी में बना था शराब छिपाने का गुप्त तहखाना

    उत्पाद विभाग की टीम धनहा पुल चेकपोस्ट पर वाहनों की जांच कर रही थी। इसी दौरान एक चारपहिया वाहन को रोककर उसकी जांच की गई। चालक ने महिला को अपनी रिश्तेदार बताते हुए वाहन से बेतिया जाने की बात बताई।

    जांच के दौरान वाहन की स्क्रीनिंग की गई तो सीट और गेट के अंदर बनाए गए गुप्त हिस्से का पता चला। सघन तलाशी लेने पर वहां से करीब 68 लीटर अंग्रेजी शराब बरामद हुई। इसके बाद वाहन चालक समेत तीन आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया।

    गिरफ्तार आरोपितों में उत्तर प्रदेश के तरबगंज क्षेत्र का अवध किशोर पांडेय, सीतामढ़ी के बथनाहा क्षेत्र का संजीव कुमार और सीतामढ़ी जिले की महिला शामिल है। शराब और वाहन को भी जब्त किया गया है।

    तस्करी के नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश

    उत्पाद विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि शराब की खेप कहां से लाई गई थी और इसे किस स्थान पर पहुंचाया जाना था। गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ के आधार पर तस्करी में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। मामले में मद्यनिषेध कानून के तहत कार्रवाई शुरू की गई है।

    इस घटना के बाद भी इलाके में शराब तस्करी के खिलाफ कार्रवाई जारी है। 8 सितंबर को धनहा थाना पुलिस ने एक कार से 624 बोतल अंग्रेजी शराब बरामद की। पुलिस के अनुसार वाहन जांच के दौरान चालक कार छोड़कर फरार हो गया। कार के अंदर 13 कार्टन में शराब मिली, जिसके बाद वाहन नंबर के आधार पर उसके मालिक और शराब कारोबारी की पहचान की जा रही है।

    लगातार सामने आ रही ऐसी कार्रवाइयों के बीच अब जांच एजेंसियों की नजर केवल शराब की बरामदगी तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बात पर भी है कि सीमा क्षेत्र में शराब पहुंचाने और आगे सप्लाई करने वाले नेटवर्क के पीछे कौन लोग हैं। महिला से हुई पूछताछ इसी कड़ी में अहम मानी जा रही है। मामले में आगे की जांच जारी है।

  • गोपालगंज में चोरी के डर से छत पर चढ़ाई Scorpio, क्रेन से पहुंची 2.5 टन की SUV; VIDEO वायरल

    गोपालगंज में चोरी के डर से छत पर चढ़ाई Scorpio, क्रेन से पहुंची 2.5 टन की SUV; VIDEO वायरल

    गोपालगंज में चोरी के डर से Scorpio को क्रेन की मदद से दो मंजिला मकान की छत पर पहुंचाने का वीडियो वायरल है। जानिए पूरा मामला और सुरक्षा सवाल।

    बिहार: गोपालगंज में एक नई Scorpio को चोरी से बचाने के लिए दो मंजिला मकान की छत पर चढ़ाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। स्थानीय जानकारी के मुताबिक, मांझागढ़ थाना क्षेत्र के मीरा टोला गांव में मनोज यादव ने कार को घर के बाहर छोड़ने के बजाय क्रेन की मदद से छत पर पहुंचवाया। इस असामान्य तरीके ने जहां लोगों को हैरान कर दिया है, वहीं अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि करीब ढाई टन वजन वाली SUV को आवासीय मकान की छत पर रखना कितना सुरक्षित है।

    विदेश में नौकरी, घर पर कार की सुरक्षा की चिंता

    स्थानीय जानकारी के अनुसार, मनोज यादव इजराइल में नौकरी करते हैं। बताया गया है कि घर में पुरुष सदस्य की मौजूदगी कम रहने वाली थी और कार चलाने वाला ड्राइवर भी विदेश चला गया था। ऐसे में नई Scorpio को घर के बाहर खड़ा छोड़ने पर चोरी या नुकसान का डर था। इसी वजह से कार को सुरक्षित रखने के लिए क्रेन बुलाकर उसे मकान की दूसरी मंजिल की छत तक पहुंचाया गया।

    क्रेन से छत तक कैसे पहुंची Scorpio?

    वायरल वीडियो में भारी-भरकम Scorpio को क्रेन की मदद से ऊपर उठाते हुए देखा जा सकता है। वाहन को पहले lifting equipment के जरिए ऊपर ले जाया गया और फिर मकान की छत पर उतारा गया। वीडियो में यह पूरा दृश्य इतना असामान्य है कि सोशल मीडिया यूजर्स के बीच यह चर्चा का विषय बन गया।

    लेकिन ऐसी lifting प्रक्रिया में सिर्फ क्रेन की क्षमता ही नहीं, बल्कि load balance, lifting arrangement और नीचे मौजूद लोगों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण होती है। इसलिए किसी वायरल वीडियो को देखकर आम लोगों के लिए इसी तरह भारी वाहन को छत पर रखने की कोशिश करना उचित नहीं माना जा सकता।

    क्या मकान की छत Scorpio का वजन सह सकती है?

    यही इस वायरल घटना से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण सवाल है।

    Mahindra Scorpio Classic के आधिकारिक owner manual में 2WD मॉडल का अधिकतम gross vehicle weight 2,510 किलोग्राम तक दिया गया है। यानी वाहन का कुल अनुमत भार लगभग 2.5 टन है।

    लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि इस खास मकान की छत असुरक्षित है। किसी भवन की वास्तविक क्षमता केवल कार के वजन से तय नहीं होती। स्लैब की मोटाई, reinforcement, beams और columns की व्यवस्था, निर्माण की गुणवत्ता तथा भवन का structural design जैसे कई factors महत्वपूर्ण होते हैं।

    इसी वजह से किसी सामान्य residential roof को देखकर यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि वह SUV का वजन आसानी से सह लेगी। भारी वाहन को छत पर खड़ा करने से पहले structural engineer से भवन की क्षमता की जांच कराना जरूरी हो सकता है।

    कार को वापस नीचे कैसे उतारा जाएगा?

    वायरल वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर लोगों का एक स्वाभाविक सवाल यह भी है कि जिस Scorpio को क्रेन से छत पर चढ़ाया गया है, उसे वापस जमीन पर कैसे लाया जाएगा।

    अगर मकान में वाहन के लिए विशेष ramp या दूसरी व्यवस्था नहीं है, तो कार को नीचे लाने के लिए दोबारा lifting equipment की जरूरत पड़ सकती है। उपलब्ध जानकारी में फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि वाहन को छत पर कितने समय के लिए रखा गया है और उसे वापस नीचे लाने की क्या योजना है।

    यही इस मामले का एक अहम अनुत्तरित पहलू है।

    गोपालगंज में वाहन चोरी का सवाल कितना प्रासंगिक है?

    कार को छत पर रखने की वजह स्थानीय जानकारी में चोरी का डर बताई गई है। वहीं गोपालगंज से हाल के महीनों में वाहन चोरी से जुड़े मामले भी सामने आए हैं। जुलाई 2026 में पुलिस ने गोपालगंज से चोरी हुई एक Scorpio बरामद करने और मामले में आरोपियों को पकड़ने की कार्रवाई की थी। हालांकि उस घटना का इस वायरल वीडियो से कोई सीधा संबंध नहीं है।

    इसलिए इस घटना को इलाके में बढ़ती वाहन चोरी का परिणाम बताना अभी सही नहीं होगा। फिलहाल चोरी का डर ही कार को छत पर रखने की बताई गई वजह है।

    पुलिस ने क्या कहा?

    उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस वायरल वीडियो को लेकर पुलिस की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। फिलहाल कार मालिक के फैसले को लेकर किसी कानूनी उल्लंघन या पुलिस कार्रवाई का दावा अभी तक नहीं किया गया है।

    सोशल मीडिया पर क्यों वायरल हुआ वीडियो?

    एक SUV को क्रेन से दो मंजिला मकान की छत पर पहुंचाने का दृश्य सामान्य पार्किंग से बिल्कुल अलग है। इसी वजह से वीडियो तेजी से लोगों का ध्यान खींच रहा है। शुरुआती वायरल पोस्ट 3 सितंबर 2026 को X पर सामने आई थी, जिसके बाद अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इसका प्रसार हुआ।

    लोगों की दिलचस्पी सिर्फ इस बात में नहीं है कि कार छत पर क्यों रखी गई, बल्कि इस सवाल में भी है कि इतनी भारी SUV को छत पर रखना तकनीकी रूप से कितना सुरक्षित है और बाद में उसे नीचे कैसे उतारा जाएगा।

    क्या दूसरे लोग भी ऐसा कर सकते हैं?

    सिर्फ वायरल वीडियो देखकर इस तरीके की नकल करना सुरक्षित नहीं माना जा सकता। किसी भवन की छत पर कार रखने का फैसला उस भवन की वास्तविक structural capacity जाने बिना नहीं किया जाना चाहिए।

    इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि क्रेन से कार ऊपर उठाना संभव होना और किसी residential roof का उस वाहन का भार सुरक्षित रूप से सह पाना—दो अलग-अलग बातें हैं।

    फिलहाल गोपालगंज की यह Scorpio सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। लेकिन वायरल वीडियो से आगे असली सवाल भवन की structural safety, वाहन को लंबे समय तक छत पर रखने की क्षमता और उसे भविष्य में सुरक्षित तरीके से नीचे उतारने का है। इन पहलुओं पर किसी अधिकृत structural assessment या प्रशासनिक जानकारी के सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

  • बोरीवली में ₹12.92 लाख की चोरी, caretaker समेत 2 गिरफ्तार; बिहार-राजस्थान तक भागे आरोपी

    बोरीवली में ₹12.92 लाख की चोरी, caretaker समेत 2 गिरफ्तार; बिहार-राजस्थान तक भागे आरोपी

    बोरीवली में घर से ₹12.92 लाख के गहने और डॉलर चोरी मामले में caretaker समेत 2 आरोपी गिरफ्तार, बिहार-राजस्थान तक फरारी के बाद पुलिस ने पकड़ा!

    मुंबई: बोरीवली में घर के अंदर से करीब ₹12.92 लाख के सोने-चांदी के गहने और अमेरिकी डॉलर चोरी होने के मामले में पुलिस ने caretaker समेत दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, घर में काम करने वाले Manoj Rajdev Mandal ने कथित तौर पर घर से valuables चोरी की और बाद में अपने साथी Sanjeev Hira Mandal के साथ मुंबई से बाहर निकलकर फरार हो गया। दोनों को बिहार और राजस्थान में तलाश के बाद पुलिस ने गिरफ्तार किया है।

    घर में काम करने वाले caretaker पर ही चोरी का आरोप

    बोरीवली पुलिस के मुताबिक, मामला Crime No. 528/2026 से जुड़ा है। इस मामले में BNS की धारा 306 और 317(2)(5) के तहत केस दर्ज किया गया है।

    पुलिस के अनुसार शिकायत में बताया गया कि 12 अगस्त 2024 की सुबह करीब 10 बजे से 19 मई 2025 की रात करीब 8 बजे के बीच घर के bedroom में रखी cupboard से सोने-चांदी के आभूषण और अमेरिकी डॉलर गायब हुए। इनकी कुल कीमत करीब ₹12.92 लाख बताई गई है।

    जांच में पुलिस का आरोप है कि घर में caretaker के तौर पर काम करने वाले Manoj Rajdev Mandal ने चोरी की। पुलिस के मुताबिक बाद में चोरी के माल से जुड़े मामले में Sanjeev Hira Mandal की भूमिका भी सामने आई।

    चोरी के बाद मुंबई से बाहर निकल गए थे आरोपी

    पुलिस के अनुसार मामला सामने आने के बाद आरोपियों की तलाश शुरू की गई। जांच के दौरान पता चला कि दोनों मुंबई से बाहर निकल चुके हैं और बिहार तथा राजस्थान की तरफ चले गए हैं।

    पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने अपना मोबाइल बंद कर दिया था और फरार हो गए थे। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी जांच और अन्य जांच माध्यमों से आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश जारी रखी।

    लगातार जांच के बाद Manoj Rajdev Mandal को पकड़ा गया। उससे मिली जानकारी के आधार पर Sanjeev Hira Mandal को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया।

    पुलिस ने कैसे आगे बढ़ाई जांच?

    पुलिस के मुताबिक, आरोपी के पकड़े जाने के बाद उससे पूछताछ की गई और उसके आधार पर दूसरे आरोपी तक पहुंच बनाई गई। चोरी के मामले में दोनों आरोपियों से जुड़े सुरागों की जांच की जा रही है।

    इस मामले में चोरी गई पूरी संपत्ति में से कितनी रकम या valuables बरामद हुई हैं, इसकी पूरी जानकारी पुलिस की ओर से सामने आना बाकी है। पुलिस आगे यह भी जांच कर रही है कि चोरी की गई संपत्ति कहां-कहां ले जाई गई और उसमें किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।

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    बोरीवली पुलिस के साथ गिरफ्तार आरोपियों की तस्वीर

    BNS की धाराओं में क्या मामला है?

    इस केस में BNS की धारा 306 के तहत नौकर या कर्मचारी द्वारा मालिक के कब्जे वाली संपत्ति की चोरी से जुड़ा प्रावधान लागू होता है। वहीं BNS की धारा 317(2) चोरी की संपत्ति को जानते हुए रखने या हासिल करने से संबंधित है, जबकि धारा 317(5) चोरी की संपत्ति को छिपाने या उसे ठिकाने लगाने में मदद करने से जुड़ी है।

    यानी इस मामले में पुलिस सिर्फ चोरी की घटना ही नहीं, बल्कि चोरी के बाद संपत्ति से जुड़े कथित लेन-देन और उसे रखने या छिपाने में किसी अन्य की भूमिका की भी जांच कर सकती है।

    इस केस में कई सवालों के जवाब अभी बाकी

    पुलिस की जांच के दौरान यह साफ होना बाकी है कि घर से valuables एक ही बार में चोरी किए गए थे या अलग-अलग मौकों पर। यह भी जांच का हिस्सा है कि परिवार को चोरी का पता कब चला और cupboard में रखे गहने और डॉलर गायब होने की जानकारी किस तरह सामने आई।

    इसके अलावा ₹12.92 लाख की कुल कीमत में सोने और चांदी के आभूषणों तथा अमेरिकी डॉलर का अलग-अलग valuation कितना है, यह भी पुलिस जांच से स्पष्ट होगा।

    दूसरे आरोपी Sanjeev Hira Mandal की कथित भूमिका क्या थी, चोरी का सामान उसके पास पहुंचा था या नहीं और चोरी की संपत्ति में से कितना माल recover हुआ है, इन पहलुओं पर भी आगे की जांच जारी है।

    घर में domestic help रखने वालों के लिए जरूरी बात

    इस घटना के बाद घर में काम करने वाले staff की identity और background verification को लेकर सवाल फिर सामने आते हैं। मुंबई पुलिस की ओर से domestic servant की जानकारी देने के लिए online facility उपलब्ध है, जिसमें घरेलू कर्मचारी का नाम, संपर्क, पता, पहचान से जुड़ी जानकारी और employment से संबंधित details दर्ज की जा सकती हैं।

    इस तरह की verification का मकसद किसी पूरे वर्ग पर शक करना नहीं, बल्कि employer और domestic worker दोनों की security को बेहतर बनाना है। खासकर उन परिवारों के लिए यह जरूरी है जहां घर में senior citizens रहते हैं या घरेलू staff को घर के अंदर लंबे समय तक access मिलता है।

    घर में काम करने वाले किसी भी व्यक्ति को रखने से पहले उसकी पहचान, वर्तमान और स्थायी पता, पुराने employment details और उपलब्ध references की जानकारी रखना परिवार की सुरक्षा के लिहाज से मददगार हो सकता है।

    पुलिस अधिकारियों की निगरानी में हुई कार्रवाई

    बोरीवली पुलिस की इस कार्रवाई का नेतृत्व पुलिस उप आयुक्त, उत्तर परिमंडल-2 संदीप घुगे और सहायक पुलिस आयुक्त संतोष धनवडे के मार्गदर्शन में किया गया। वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक श्रीमती पुष्पलता मंडले और पुलिस निरीक्षक अपराध दिग्विजय पाटील की निगरानी में मामले की जांच आगे बढ़ाई गई।

    क्राइम डिटेक्शन अधिकारी राजू कोरडे के साथ पुलिस हवालदार देसाई, शेलार, सिपाही कदम, पुलिस सिपाही लहांगे और झिरवा ने कार्रवाई में हिस्सा लिया।

    पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और अब चोरी की संपत्ति की recovery समेत मामले से जुड़े बाकी पहलुओं की जांच जारी है। दोनों पर लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत की प्रक्रिया के बाद ही होगी।

  • कांदिवली के इमिटेशन ज्वेलरी कारखाने में 13 नाबालिग मिले, 9-10 घंटे काम कराने का आरोप

    कांदिवली के इमिटेशन ज्वेलरी कारखाने में 13 नाबालिग मिले, 9-10 घंटे काम कराने का आरोप

    मुंबई के कांदिवली में इमिटेशन ज्वेलरी कारखाने से 13 नाबालिग मुक्त कराए गए। पुलिस के मुताबिक बच्चे 9-10 घंटे काम करते और वहीं रहते थे। जांच जारी है।

    मुंबई: कांदिवली पश्चिम में चारकोप पुलिस ने बाल श्रम के खिलाफ कार्रवाई करते हुए इमिटेशन ज्वेलरी बनाने वाले एक कारखाने से 13 नाबालिगों को मुक्त कराया है। बच्चों की उम्र 13 से 17 वर्ष के बीच बताई जा रही है। पुलिस के अनुसार, इन बच्चों से कथित तौर पर रोजाना 9 से 10 घंटे तक काम कराया जाता था और उन्हें उचित मजदूरी भी नहीं दी जाती थी।

    कार्रवाई चारकोप इंडस्ट्रियल एरिया के ‘जहारा फैशन एरा’ नमक इमिटेशन ज्वेलरी कारखाने में की गई। पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, इस कार्रवाई से जुड़ी जानकारी उत्तर परिमंडल-2 के पुलिस उपायुक्त संदीप घुगे और चारकोप पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक महेश बळवंतराव की ओर से दी गई।

    कारखाने में काम के साथ रह भी रहे थे बच्चे

    पुलिस के मुताबिक, कारखाने में नाबालिगों से इमिटेशन ज्वेलरी और चूड़ियां बनाने का काम कराया जा रहा था। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि बच्चे जिस जगह काम करते थे, वहीं पर रह रहे थे।

    मुक्त कराए गए सभी 13 बच्चे पश्चिम बंगाल के अलग-अलग जिलों के रहने वाले बताए जा रहे हैं। पुलिस के अनुसार, कारखाने के मालिक और संचालक बच्चों की उम्र साबित करने वाले जरूरी दस्तावेज भी पेश नहीं कर सके।

    मालिक और संचालक हिरासत में

    पुलिस ने कारखाने के मालिक अंकित कुमार महेंद्र रावल और संचालक समीनुर मोतियार रहमान शेख को हिरासत में लिया है। दोनों के खिलाफ बाल एवं किशोर श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम तथा किशोर न्याय अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

    पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि नाबालिगों को कारखाने में काम पर रखने की प्रक्रिया क्या थी और इसमें अन्य किसी व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।

    पश्चिम बंगाल से मुंबई कौन लेकर आया?

    मामले में पुलिस की जांच अब इस सवाल पर भी केंद्रित है कि पश्चिम बंगाल के अलग-अलग जिलों से ये बच्चे मुंबई के कांदिवली तक कैसे पहुंचे।

    पुलिस यह पता कर रही है कि क्या बच्चों को काम दिलाने के नाम पर मुंबई लाया गया था, क्या किसी बिचौलिए की भूमिका थी और उन्हें कारखाने तक पहुंचाने में किसकी मदद ली गई।

    जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या इस मामले के पीछे बाल श्रम से जुड़ा कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है। फिलहाल इस संबंध में जांच जारी है और पुलिस की ओर से कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

    13 नाबालिगों को संबंधित विभाग को सौंपा गया

    कार्रवाई के बाद सभी 13 नाबालिगों को आगे की देखभाल और जरूरी कार्रवाई के लिए संबंधित विभाग को सौंप दिया गया है।

    अब बच्चों की उम्र, पहचान और परिवार से जुड़ी जानकारी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। उनके परिजनों से संपर्क और बच्चों को सुरक्षित तरीके से परिवार तक पहुंचाने को लेकर भी आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    बच्चों की पढ़ाई और भविष्य को लेकर भी संबंधित विभाग की ओर से आगे की प्रक्रिया की जाएगी।

    बाल श्रम कानून में क्या प्रावधान है?

    बाल श्रम कानून के तहत 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को काम पर रखना प्रतिबंधित है। वहीं 14 से 18 वर्ष की उम्र के किशोरों को खतरनाक काम या प्रक्रिया में लगाने पर रोक है।

    इस मामले में बच्चों की उम्र 13 से 17 वर्ष के बीच बताई गई है। इसलिए उनकी सही उम्र और कारखाने में उनसे कराए जा रहे काम की प्रकृति भी जांच का हिस्सा है।

    9 से 10 घंटे काम कराने की जांच

    पुलिस के अनुसार, नाबालिगों से कथित तौर पर रोज 9 से 10 घंटे तक काम कराया जाता था। उन्हें उचित मजदूरी नहीं मिलने की बात भी सामने आई है।

    जांच में अब यह पता लगाया जा रहा है कि बच्चों से कितने समय तक काम कराया गया, मजदूरी कितनी तय थी और भुगतान किस तरीके से किया जाता था।

    चारकोप पुलिस बच्चों के पश्चिम बंगाल से मुंबई पहुंचने से लेकर कारखाने में काम करने तक की पूरी कड़ी की जांच कर रही है।

  • गिरफ्तार महिला को छुड़ाने थाने में घुसी भीड़, पुलिस से मारपीट; 9 गिरफ्तार

    गिरफ्तार महिला को छुड़ाने थाने में घुसी भीड़, पुलिस से मारपीट; 9 गिरफ्तार

    बिहार के पश्चिम चंपारण में गिरफ्तार महिला को छुड़ाने 15-20 लोग नवलपुर थाने में घुसे और पुलिस से मारपीट की। 9 आरोपी गिरफ्तार, बाकी की तलाश जारी। जानिए घटना अब।

    बिहार: पश्चिम चंपारण जिले में गिरफ्तार एक महिला को पुलिस हिरासत से छुड़ाने की कोशिश ने नवलपुर थाने में हंगामा खड़ा कर दिया। मंगलवार रात करीब 9:40 बजे 15 से 20 लोग अचानक थाना परिसर में पहुंचे और जबरन OD यानी Officer on Duty कक्ष में घुस गए। पुलिस के मुताबिक, इस दौरान ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की, गाली-गलौज और मारपीट की गई। मौके से पुलिस ने 9 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि कई अन्य आरोपी फरार बताए जा रहे हैं।

    आखिर गिरफ्तार महिला कौन है?

    पूरी घटना की शुरुआत करीब 8:30 बजे हुई, जब नवलपुर थाना पुलिस ने चनपटिया थाना क्षेत्र के कैथवलिया गांव निवासी हरेंद्र साह की पत्नी किरण देवी को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, किरण देवी किशोरी के अपहरण से जुड़े एक मामले में पिछले करीब सात महीने से फरार चल रही थी।

    नवलपुर पुलिस ने चनपटिया पुलिस की मदद से उसे पकड़ा और फिर नवलपुर थाना लेकर आई। महिला को थाने में महिला पुलिसकर्मी की निगरानी में रखा गया था।

    इसके करीब कुछ देर बाद दो लोग थाना पहुंचे और गिरफ्तार महिला के बारे में पुलिस से उग्र तरीके से पूछताछ करने लगे। पुलिसकर्मियों ने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन आरोप है कि दोनों शांत नहीं हुए।

    फोन कर जुटाई भीड़

    पुलिस के अनुसार, दोनों लोगों ने मोबाइल फोन से संपर्क कर कुछ और लोगों को थाने पर बुला लिया। करीब आधे घंटे के अंदर 15 से 20 लोग मोटरसाइकिल से थाना परिसर के गेट पर पहुंच गए।

    इसके बाद भीड़ जबरन OD कक्ष में घुस गई।

    आरोप है कि वहां ड्यूटी पर तैनात सहायक अवर निरीक्षक मितेंद्र कुमार राम और महिला सिपाही रितु कुमारी के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट शुरू कर दी।

    बीच-बचाव करने पहुंचे दूसरे पुलिसकर्मियों के साथ भी हाथापाई किए जाने का आरोप है।

    पुलिस अधिकारी भी पहुंचे, फिर बढ़ गया विवाद

    थाने में हंगामे की सूचना मिलने के बाद अपर थानाध्यक्ष मुकेश कुमार पाल, सअनि आसिफ अली खान और अन्य पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे।

    पुलिस के मुताबिक, स्थिति संभालने और बीच-बचाव करने की कोशिश के दौरान उपद्रवियों ने उनके साथ भी मारपीट शुरू कर दी।

    इसके बाद पुलिस बल ने आत्मरक्षा और सरकारी काम जारी रखने के लिए आवश्यक बल का इस्तेमाल किया। कार्रवाई के दौरान मौके से 9 लोगों को पकड़ लिया गया।

    नवलपुर थाने से पकड़े गए 9 आरोपी कौन हैं?

    पुलिस ने जिन 9 लोगों को गिरफ्तार किया है, उनकी पहचान:

    • राजू कुमार
    • राम नारायण कुमार
    • प्रकाश कुमार
    • जितेश कुमार
    • मनीष कुमार
    • अनुपम कुमार
    • बलिराम कुमार
    • रवि कुमार
    • नवनीत कुमार

    के रूप में हुई है।

    पुलिस के मुताबिक, इनमें ज्यादातर आरोपी चनपटिया थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं। कुछ आरोपी मुफस्सिल और नवलपुर थाना क्षेत्र से भी बताए गए हैं।

    कितने लोग अभी फरार हैं?

    पुलिस के अनुसार, घटना के दौरान करीब 15 से 20 लोग थाना परिसर में पहुंचे थे। कार्रवाई के दौरान 9 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि करीब 5 से 10 अन्य लोग मौके से भाग निकले।

    नवलपुर थानाध्यक्ष देवेंद्र कुमार के मुताबिक, मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। फरार आरोपियों की पहचान की जा रही है और उनकी गिरफ्तारी के लिए आगे कार्रवाई की जाएगी।

    सात महीने से फरार महिला की गिरफ्तारी के बाद ही क्यों हुआ हंगामा?

    यह इस पूरे मामले का सबसे अहम हिस्सा है। पुलिस ने जिस महिला को गिरफ्तार किया था, वह किशोरी के अपहरण से जुड़े मामले में करीब सात महीने से फरार बताई जा रही है।

    ऐसे में पुलिस की कार्रवाई के बाद उसके बारे में जानकारी लेने के लिए पहले दो लोग थाने पहुंचे और फिर कुछ ही देर में बड़ी संख्या में लोग वहां जुट गए।

    हालांकि, इन लोगों ने किस वजह से महिला को छुड़ाने की कोशिश की और उन्हें गिरफ्तारी के बारे में क्या जानकारी दी गई थी, इसकी पूरी तस्वीर पुलिस जांच के बाद ही साफ होगी।

    नवलपुर में पुलिस पर हमले का यह पहला मामला नहीं

    नवलपुर थाना क्षेत्र में इससे पहले भी पुलिस टीम पर हमले की घटना सामने आ चुकी है। जून 2025 में एक आरोपी को पकड़ने गई पुलिस टीम पर उसके परिजनों और अन्य लोगों द्वारा हमला किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। उस घटना में नवलपुर थानाध्यक्ष देवेंद्र कुमार समेत कई पुलिसकर्मियों के घायल होने की बात सामने आई थी और पुलिस ने नामजद आरोपियों पर कार्रवाई की थी।

    ऐसे में मौजूदा घटना के बाद नवलपुर थाना क्षेत्र में पुलिस टीम की सुरक्षा और किसी आरोपी की गिरफ्तारी के बाद संभावित भीड़ को लेकर पुलिस की आगे की कार्रवाई भी महत्वपूर्ण होगी।

    अब आगे क्या होगा?

    फिलहाल पुलिस की कार्रवाई तीन स्तर पर आगे बढ़ेगी। एक तरफ गिरफ्तार किए गए 9 लोगों के खिलाफ दर्ज मामले में कानूनी प्रक्रिया चलेगी, दूसरी तरफ फरार लोगों की पहचान और गिरफ्तारी की कोशिश होगी।

    इसके साथ ही जिस किशोरी के अपहरण मामले में किरण देवी को गिरफ्तार किया गया है, उसकी जांच भी आगे बढ़ेगी।

    मामले में FIR की वास्तविक धाराएं, गिरफ्तार आरोपियों की कोर्ट में पेशी और फरार लोगों की गिरफ्तारी के बाद ही यह साफ होगा कि इस पूरे प्रकरण में आगे कितनी बड़ी कार्रवाई होती है।

    थाने में घुसकर पुलिस की कार्रवाई रोकने और हिरासत में रखे गए व्यक्ति को जबरन छुड़ाने की कोशिश ने इस मामले को सामान्य गिरफ्तारी से आगे बढ़ाकर law and order का मुद्दा बना दिया है। अब निगाह इस बात पर है कि पुलिस फरार आरोपियों तक कब पहुंचती है और मामले में आगे क्या कानूनी कार्रवाई होती है।

  • मुंबई से गिरफ्तार हुआ रेप का आरोपी पुलिसकर्मी, कोलकाता के गेस्ट हाउस में महिला से दुष्कर्म का आरोप

    मुंबई से गिरफ्तार हुआ रेप का आरोपी पुलिसकर्मी, कोलकाता के गेस्ट हाउस में महिला से दुष्कर्म का आरोप

    मुंबई से रेप के आरोपी सब-इंस्पेक्टर अजमल हक गिरफ्तार। सॉल्ट लेक गेस्ट हाउस केस में बिधाननगर पुलिस ने ट्रांजिट रिमांड पर कोलकाता लाया।

    मुंबई: पश्चिम बंगाल के सॉल्ट लेक में महिला से रेप के आरोप में फरार चल रहे सब-इंस्पेक्टर अजमल हक को बिधाननगर ईस्ट पुलिस ने मुंबई से गिरफ्तार किया है। आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर कोलकाता ले जाया गया है और अब उसे बिधाननगर कोर्ट में पेश किया जाएगा।

    पश्चिम बंगाल के सॉल्ट लेक इलाके में एक महिला से रेप के आरोप में फरार चल रहे पुलिस अधिकारी को बिधाननगर ईस्ट पुलिस ने मुंबई से गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान अजमल हक के रूप में हुई है, जो बीरभूम जिले के नलहाटी थाने में सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात था।

    पुलिस ने आरोपी को मुंबई से गिरफ्तार करने के बाद स्थानीय अदालत में पेश किया। वहां से ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद उसे कोलकाता ले गई है। अब आरोपी सब-इंस्पेक्टर को बिधाननगर कोर्ट में पेश किया जाएगा, जहां पुलिस उसकी कस्टडी की मांग कर सकती है।

    सॉल्ट लेक के गेस्ट हाउस में रेप का आरोप

    पुलिस के मुताबिक, मामला पिछले साल का बताया जा रहा है। महिला ने जुलाई में बिधाननगर ईस्ट थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि सब-इंस्पेक्टर अजमल हक महिला को सॉल्ट लेक के सीएल ब्लॉक स्थित एक गेस्ट हाउस में लेकर गया था, जहां उसके साथ रेप किया गया।

    शिकायत मिलने के बाद बिधाननगर ईस्ट पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और आरोपी पुलिस अधिकारी की तलाश की।

    जमानत मिलने के बाद हो गया था फरार

    पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में आरोपी सब-इंस्पेक्टर को पहले जमानत मिल गई थी। इसके बाद जब बिधाननगर ईस्ट पुलिस ने बीरभूम जिला पुलिस से आरोपी अधिकारी के संबंध में संपर्क किया, तो उसके गायब होने की जानकारी सामने आई।

    इसके बाद पुलिस ने आरोपी की तलाश तेज कर दी।

    जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि आरोपी मुंबई में मौजूद है। सूचना के आधार पर बिधाननगर ईस्ट पुलिस की टीम ने कार्रवाई की और उसे मुंबई से गिरफ्तार कर लिया।

    मुंबई कोर्ट से ट्रांजिट रिमांड

    गिरफ्तारी के बाद आरोपी को मुंबई की स्थानीय अदालत में पेश किया गया। अदालत से ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद बिधाननगर ईस्ट पुलिस उसे कोलकाता लेकर पहुंची।

    अब पुलिस आरोपी से पूछताछ कर मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच करना चाहती है।

    आज बिधाननगर कोर्ट में पेशी

    अजमल हक को अब बिधाननगर कोर्ट में पेश किया जाएगा। पुलिस उसकी कस्टडी मांग सकती है, ताकि मामले की आगे जांच की जा सके।

    पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की परिस्थितियां क्या थीं और मामले से जुड़े कौन-कौन से सबूत उपलब्ध हैं। जांच के दौरान पुलिस आरोपी से पूछताछ के साथ-साथ मामले से जुड़े अन्य लोगों और उपलब्ध साक्ष्यों की भी जांच करेगी।

    फिलहाल आरोपी पर लगाए गए रेप के आरोप जांच का विषय हैं। मामले में अंतिम निष्कर्ष अदालत में पेश किए जाने वाले सबूतों और आगे की न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही सामने आएगा।